ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 4.1 Netaji Ka Chashma Solutions

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 04.1 Netaji Ka Chashma

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Question क-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इसी नगरपालिका के उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने एक बार 'शहर' के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी यह कहानी उसी प्रतिमा के बारे में है, बल्कि उसके भी एक छोटे-से हिस्से के बारे में। हालदार साहब कब और कहाँ-से क्यों गुजरते थे?
Answer: हालदार साहब हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में एक कस्बे से गुजरते थे। जहाँ बाज़ार के मुख्य चौराहे पर नेताजी की मूर्ति लगी थी।
In simple words: हालदार साहब अपनी कंपनी के काम से हर 15वें दिन एक कस्बे से गुजरते थे, जहाँ बाज़ार के मुख्य चौराहे पर नेताजी की मूर्ति स्थापित थी।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में हालदार साहब के यात्रा कार्यक्रम और मूर्ति के स्थान का सटीक वर्णन महत्वपूर्ण है।

 

Question क-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इसी नगरपालिका के उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने एक बार 'शहर' के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी यह कहानी उसी प्रतिमा के बारे में है, बल्कि उसके भी एक छोटे-से हिस्से के बारे में। कस्बे का वर्णन कीजिए।
Answer: कस्बा बहुत बड़ा नहीं था। जिसे पक्का मकान कहा जा सके वैसे कुछ ही मकान और जिसे बाज़ार कहा जा सके वैसा एक ही बाज़ार था। कस्बे में एक लड़कों का स्कूल, एक लड़कियों का स्कूल, एक सीमेंट का कारखाना, दो ओपन एयर सिनेमाघर और एक नगरपालिका थी।
In simple words: कस्बा छोटा था जिसमें कुछ पक्के मकान, एक बाज़ार, लड़कों और लड़कियों के स्कूल, एक सीमेंट का कारखाना, दो सिनेमाघर और एक नगरपालिका थी।

🎯 Exam Tip: कस्बे के वर्णन में प्रमुख इमारतों और उसकी सामान्य संरचना का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question क-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इसी नगरपालिका के उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने एक बार 'शहर' के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी यह कहानी उसी प्रतिमा के बारे में है, बल्कि उसके भी एक छोटे-से हिस्से के बारे में। नगरपालिका के कार्यों के बारे में बताइए।
Answer: उस कस्बे नगरपालिका थी तो कुछ-न कुछ करती भी रहती थी। कभी कोई सड़क पक्की करवा दी, कभी कुछ पेशाबघर बनवा दिए, कभी कबूतरों की छतरी बनवा दी तो कभी कवि सम्मलेन करवा दिया।
In simple words: नगरपालिका सक्रिय थी और उसने सड़क निर्माण, पेशाबघरों का निर्माण, कबूतरों के लिए छतरी बनवाने और कवि सम्मेलनों का आयोजन जैसे कार्य करती थी।

🎯 Exam Tip: नगरपालिका के कार्यों का वर्णन करते समय उसके विविध सामाजिक और नागरिक विकास के प्रयासों को दर्शाना चाहिए।

 

Question क-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इसी नगरपालिका के उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने एक बार 'शहर' के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी यह कहानी उसी प्रतिमा के बारे में है, बल्कि उसके भी एक छोटे-से हिस्से के बारे में। शहर के मुख्य बाज़ार में प्रतिमा किसने लगवाईं थी और उस प्रतिमा की क्या विशेषता थी?
Answer: शहर के मुख्य बाज़ार के मुख्य चौराहे पर नगरपालिका के किसी उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी थी। उस मूर्ति की विशेषता यह थी कि मूर्ति संगमरमर की थी। टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक कोई दो फुट ऊँची और सुंदर थी। नेताजी फौजी वर्दी में सुंदर लगते थे। मूर्ति को देखते ही 'दिल्ली चलो' और तुम मुझे खून दो... आदि याद आने लगते थे। केवल एक चीज की कसर थी जो देखते ही खटकती थी नेताजी की आँख पर संगमरमर चश्मा नहीं था बल्कि उसके स्थान पर सचमुच के चश्मे का चौड़ा काला फ्रेम मूर्ति को पहना दिया गया था।
In simple words: यह प्रतिमा नगरपालिका के उत्साही बोर्ड ने लगवाई थी। यह संगमरमर की दो फुट ऊंची और सुंदर मूर्ति थी, जिसमें नेताजी फौजी वर्दी में थे, लेकिन उस पर संगमरमर का चश्मा नहीं था, बल्कि एक असली, काले फ्रेम का चश्मा पहनाया गया था।

🎯 Exam Tip: प्रतिमा की स्थापना, सामग्री, माप और सबसे महत्वपूर्ण, चश्मे की विशेषता को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question ख-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वाह भाई! क्या आइडिया है। मूर्ति कपड़े नहीं बदल सकती, लेकिन चश्मा हर बार बदल कैसे जाता है? प्रस्तुत कथन के वक्ता का परिचय दें।
Answer: प्रस्तुत कथन के वक्ता हालदार साहब हैं। वे अत्यंत भावुक और संवेदनशील होने के साथ एक देशभक्त भी हैं। उन्हें देशभक्तों का मज़ाक उड़ाया जाना पसंद नहीं है। वे कैप्टन की देशभावना के प्रति सम्मान और सहानुभूति रखते हैं।
In simple words: हालदार साहब एक देशभक्त, भावुक और संवेदनशील व्यक्ति हैं जो देशप्रेमियों का सम्मान करते हैं और कैप्टन की देशभक्ति की भावना की सराहना करते हैं।

🎯 Exam Tip: वक्ता के चरित्र की मुख्य विशेषताओं - देशभक्ति, संवेदनशीलता और सहानुभूति - पर ध्यान दें।

 

Question ख-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वाह भाई! क्या आइडिया है। मूर्ति कपड़े नहीं बदल सकती, लेकिन चश्मा हर बार बदल कैसे जाता है? प्रस्तुत कथन के श्रोता का परिचय दें।
Answer: प्रस्तुत कथन का श्रोता पानवाला है। पानवाला पूरी की पूरी पान की दुकान है, सड़क के चौराहे के किनारे उसकी पान की दुकान है। वह काला तथा मोटा है, उसकी तोंद भी निकली हुई है, उसके सिर पर गिने-चुने बाल ही बचे हैं। वह एक तरफ़ ग्राहक के लिए पान बना रहा है, वहीं दूसरी ओर उसका मुँह पान से भरा है। पान खाने के कारण उसके होंठ लाल तथा कहीं-कहीं काले पड़ गए हैं। स्वभाव से वह मजाकिया है। वह बातें बनाने में माहिर है।
In simple words: इस कथन का श्रोता पानवाला है, जो एक मोटी तोंद वाला, पान से भरा मुँह रखने वाला, काला और मजाकिया स्वभाव का व्यक्ति है, जिसकी दुकान चौराहे पर है।

🎯 Exam Tip: श्रोता के भौतिक वर्णन और उसके स्वभाव की मुख्य विशेषताओं को रेखांकित करें।

 

Question ख-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वाह भाई! क्या आइडिया है। मूर्ति कपड़े नहीं बदल सकती, लेकिन चश्मा हर बार बदल कैसे जाता है? कस्बे से गुजरते समय हालदार साहब को क्या आदत पड़ गई थी?
Answer: कस्बे से गुजरते समय हालदार साहब को उस कस्बे के मुख्य बाज़ार के चौराहे पर रुकना, पान खाना और मूर्ति को ध्यान से देखने की आदत पड़ गई थी।
In simple words: हालदार साहब को कस्बे से गुजरते समय चौराहे पर रुककर पान खाने और नेताजी की मूर्ति को गौर से देखने की आदत पड़ गई थी।

🎯 Exam Tip: हालदार साहब की आदत में तीनों मुख्य क्रियाओं- रुकना, पान खाना और मूर्ति देखना- का उल्लेख करें।

 

Question ख-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वाह भाई! क्या आइडिया है। मूर्ति कपड़े नहीं बदल सकती, लेकिन चश्मा हर बार बदल कैसे जाता है? मूर्ति का चश्मा हर-बार कौन और क्यों बदल देता था?
Answer: मूर्ति का चश्मा हर-बार कैप्टन बदल देता था। कैप्टन असलियत में एक गरीब चश्मेवाला था। उसकी कोई दुकान नहीं थी। फेरी लगाकर वह अपने चश्मे बेचता था। जब उसका कोई ग्राहक नेताजी की मूर्ति पर लगे फ्रेम की माँग करता तो कैप्टन मूर्ति पर अन्य फ्रेम लगाकर वह फ्रेम अपने ग्राहक को बेच देता। इसी कारणवश मूर्ति पर कोई स्थाई फ्रेम नहीं रहता था।
In simple words: कैप्टन, जो एक गरीब चश्मेवाला था और फेरी लगाकर चश्मे बेचता था, वह मूर्ति पर लगे चश्मे को ग्राहक की माँग पर बदलकर दूसरा लगा देता था, इसलिए मूर्ति पर कोई स्थाई चश्मा नहीं रहता था।

🎯 Exam Tip: कैप्टन की पहचान (गरीब चश्मेवाला) और उसके चश्मा बदलने का कारण (ग्राहक की माँग) दोनों बिंदुओं को स्पष्ट करें।

 

Question ग-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “लेकिन भाई! एक बात समझ नहीं आई।” हालदार साहब ने पानवाले से फिर पूछा, “नेताजी का ओरिजिनल चश्मा कहाँ गया?" प्रस्तुत कथन में नेताजी का ओरिजिनल चश्मा से क्या तात्पर्य है?
Answer: प्रस्तुत कथन में नेताजी का ओरिजिनल चश्मा से तात्पर्य नेताजी के बार-बार बदलने वाले फ्रेम से है। मूर्तिकार ने नेताजी की मूर्ति बनाते समय चश्मा नहीं बनाया था। नेताजी बिना चश्मे के यह बात एक गरीब देशभक्त चश्मेवाले कैप्टन को पसंद नहीं आती थी इसलिए वह नेताजी की मूर्ति पर उसके पास उपलब्ध फ्रेमों से एक फ्रेम लगा देता था।
In simple words: "ओरिजिनल चश्मा" का अर्थ मूर्ति पर लगने वाला वह चश्मा है जो कैप्टन द्वारा बार-बार बदला जाता था क्योंकि मूर्तिकार ने असल में चश्मा बनाया ही नहीं था।

🎯 Exam Tip: "ओरिजिनल चश्मा" का संदर्भ स्पष्ट करें कि यह मूर्ति पर बने चश्मे से नहीं, बल्कि कैप्टन द्वारा लगाए गए चश्मे से है।

 

Question ग-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “लेकिन भाई! एक बात समझ नहीं आई।” हालदार साहब ने पानवाले से फिर पूछा, “नेताजी का ओरिजिनल चश्मा कहाँ गया?" मूर्तिकार कौन था और उसने मूर्ति का चश्मा क्यों नहीं बनाया था?
Answer: मूर्तिकार उसी कस्बे के स्थानीय विद्यालय का मास्टर मोतीलाल था। मूर्ति बनाने के बाद शायद वह यह तय नहीं कर पाया होगा कि पत्थर से पारदर्शी चश्मा कैसे बनाया जाये या फिर उसने पारदर्शी चश्मा बनाने की कोशिश की होगी मगर उसमें असफल रहा होगा।
In simple words: मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल थे, जो शायद पत्थर से पारदर्शी चश्मा बनाने में असमर्थ रहे होंगे या उन्होंने तय नहीं कर पाया होगा कि उसे कैसे बनाया जाए।

🎯 Exam Tip: मूर्तिकार की पहचान और चश्मा न बनाने के संभावित कारणों (तकनीकी कठिनाई) को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question ग-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “लेकिन भाई! एक बात समझ नहीं आई।” हालदार साहब ने पानवाले से फिर पूछा, “नेताजी का ओरिजिनल चश्मा कहाँ गया?" “वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!” कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
Answer: पानवाले ने कैप्टन को लँगड़ा तथा पागल कहा है। जो कि अति गैर जिम्मेदाराना और दुर्भाग्यपूर्ण वक्तव्य है। कैप्टन में एक सच्चे देशभक्त के वे सभी गुण मौजूद हैं जो कि पानवाले में या समाज के अन्य किसी वर्ग में नहीं है। वह भले ही लँगड़ा है पर उसमें इतनी शक्ति है कि वह कभी भी नेताजी को बगैर चश्मे के नहीं रहने देता है। अतः कैप्टन पानवाले से अधिक सक्रिय तथा विवेकशील तथा देशभक्त है।
In simple words: पानवाले की टिप्पणी गैर-जिम्मेदाराना है क्योंकि कैप्टन में सच्ची देशभक्ति थी, भले ही वह शारीरिक रूप से अक्षम था, जबकि पानवाला में देशभक्ति की यह भावना अनुपस्थित थी।

🎯 Exam Tip: पानवाले की टिप्पणी की आलोचना करें और कैप्टन की देशभक्ति को उजागर करते हुए उसकी तुलना पानवाले से करें।

 

Question ग-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : “लेकिन भाई! एक बात समझ नहीं आई।” हालदार साहब ने पानवाले से फिर पूछा, “नेताजी का ओरिजिनल चश्मा कहाँ गया?" सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
Answer: चश्मेवाला कभी सेनानी नहीं रहा परन्तु चश्मेवाला एक देशभक्त नागरिक था। उसके हृदय में देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान था। वह अपनी ओर से एक चश्मा नेताजी की मूर्ति पर अवश्य लगाता था उसकी इसी भावना को देखकर लोग उसे कैप्टन कहते थे।
In simple words: लोग चश्मेवाले को कैप्टन कहते थे क्योंकि वह भले ही सेनानी न हो, पर उसमें गहरी देशभक्ति थी और वह नेताजी की मूर्ति पर हमेशा चश्मा लगाकर अपना सम्मान व्यक्त करता था।

🎯 Exam Tip: कैप्टन कहलाने के पीछे का कारण उसकी देशभक्ति और नेताजी के प्रति उसके सम्मान को स्पष्ट करना है।

 

Question घ-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : हालदार साहब भावुक हैं। इतनी सी बात पर उनकी आँखें भर आईं। हालदार साहब ने अपने ड्राईवर को चौराहे पर रुकने के लिए मना क्यों किया?
Answer: करीब दो सालों तक हालदार साहब उस कस्बे से गुजरते रहे और नेताजी की मूर्ति में बदलते चश्मे को देखते रहे फिर एक बार ऐसा हुआ कि नेताजी के चेहरे पर कोई चश्मा नहीं था। पता लगाने पर हालदार साहब को पता चला कि मूर्ति पर चश्मा लगाने वाला कैप्टन मर गया और अब ऐसा उस कस्बे में कोई नहीं था जो नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाता इसलिए हालदार साहब ने अपने ड्राईवर को चौराहे पर न रुकने का निर्देश दिया।
In simple words: कैप्टन की मृत्यु के बाद नेताजी की मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं था, जिससे हालदार साहब निराश हो गए और उन्होंने ड्राईवर को चौराहे पर रुकने से मना कर दिया।

🎯 Exam Tip: हालदार साहब के फैसले का सीधा संबंध कैप्टन की मृत्यु और मूर्ति पर चश्मे की अनुपस्थिति से जोड़ें।

 

Question घ-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : हालदार साहब भावुक हैं। इतनी सी बात पर उनकी आँखें भर आईं। हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?
Answer: कैप्टन की मृत्यु के बाद हालदार साहब को लगा कि क्योंकि कैप्टन के समान अब ऐसा कोई अन्य देश प्रेमी बचा न था जो नेताजी के चश्मे के बारे में सोचता। हालदार साहब स्वयं देशभक्त थे और नेताजी जैसे देशभक्त के लिए उसके मन में सम्मान की भावना थी। यही सब सोचकर हालदार साहब पहले मायूस हो गए थे।
In simple words: कैप्टन की मृत्यु के बाद, हालदार साहब को लगा कि अब कोई देशभक्त नहीं बचा जो नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाता, जिससे उनकी देशभक्ति की भावना आहत हुई और वे मायूस हो गए।

🎯 Exam Tip: मायूसी का कारण कैप्टन की अनुपस्थिति और देशभक्ति की भावना के लुप्त होने का डर बताएं।

 

Question घ-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : हालदार साहब भावुक हैं। इतनी सी बात पर उनकी आँखें भर आईं। मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
Answer: मूर्ति पर लगे सरकंडे का चश्मा इस बात का प्रतीक है कि आज भी देश की आने वाली पीढ़ी के मन में देशभक्तों के लिए सम्मान की भावना है। भले ही उनके पास साधन न हो परन्तु फिर भी सच्चे हृदय से बना वह सरकंडे का चश्मा भी भावनात्मक दृष्टि से मूल्यवान है। अतः उम्मीद है कि बच्चे गरीबी और साधनों के बिना भी देश के लिए कार्य करते रहेंगे।
In simple words: सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि साधनहीन बच्चे भी देशभक्ति की भावना रखते हैं और देश के प्रति अपना योगदान देने को तत्पर हैं, जिससे भविष्य में भी देशप्रेम बना रहेगा।

🎯 Exam Tip: सरकंडे के चश्मे को युवा पीढ़ी की देशभक्ति और संसाधनों की कमी के बावजूद योगदान देने की उम्मीद का प्रतीक बताएं।

 

Question घ-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : हालदार साहब भावुक हैं। इतनी सी बात पर उनकी आँखें भर आईं। हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
Answer: उचित साधन न होते हुए भी किसी बच्चे ने अपनी क्षमता के अनुसार नेताजी को सरकंडे का चश्मा पहनाया। यह बात उनके मन में आशा जगाती है कि आज भी देश में देश-भक्ति जीवित है भले ही बड़े लोगों के मन में देशभक्ति का अभाव हो परंतु वही देशभक्ति सरकंडे के चश्मे के माध्यम से एक बच्चे के मन में देखकर हालदार साहब भावुक हो गए।
In simple words: हालदार साहब इसलिए भावुक हो गए क्योंकि एक बच्चे ने अपने सीमित साधनों से सरकंडे का चश्मा नेताजी को पहनाया, जिससे उन्हें लगा कि देश में देशभक्ति की भावना अभी भी जीवित है।

🎯 Exam Tip: हालदार साहब की भावुकता का कारण बच्चों में देशभक्ति की भावना की जीवित उपस्थिति को स्पष्ट करें।

Free ICSE Textbook Explanations: Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 04.1 Netaji Ka Chashma

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