ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2018 with Solutions

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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2018 with Solutions

 

SECTION - A (40 Marks)

Attempt all questions

 

Q.1 Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : [15]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए:

 

1. 'परोपकार की भावना लोक-कल्याण से पूर्ण होती है।' हमें भी परोपकार से भरा जीवन ही जीना चाहिए। विषय को स्पष्ट करते हुए अपने विचार लिखिए। [15]

Answer:
परोपकार एक सर्वश्रेष्ठ भावना है। परोपकार से तात्पर्य दूसरों की सहायता करने से है। हमें प्रकृति से परोपकार का संदेश लेना चाहिए। सूर्य, चंद्रमा, तारे, आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, पेड़ आदि दिन-रात मनुष्य के कल्याण में लगे हुए हैं। ये सभी दूसरों के उपकार के लिए कुछ न कुछ देते हैं।
जीवमात्र पर दया भाव रखकर उसके दुःख को समझना चाहिए। प्राणी मात्र की सेवा ही जीवन का लक्ष्य है, समस्त जीवों की सेवा तब तक करनी चाहिए जब तक शरीर में प्राण हैं और यही मानव धर्म भी है।
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छोड़िए जब तक घट में प्राण।।
अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था - 'यह हरेक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि वह संसार को उतना तो अवश्य लौटा दे, जितना ने इसने इससे लिया है। दूसरों के लिए जीया गया जीवन ही उचित जीवन है। इसलिए जो कुछ हमारे पास है, उसमें से कुछ परोपकार में अवश्य लगाएँ।'
चाणक्य ने कहा था - "परोपकार ही जीवन है। जिस शरीर से धर्म नहीं हुआ, यज्ञ न हुआ और परोपकार न हो सका, उस शरीर का क्या लाभ? जो मनुष्य अपने लिए जीता है, वह पृथ्वी पर पशु के समान है। क्योंकि पशु के जीवन का उद्देश्य खाना और सोना होता है। भगवान ने मनुष्य को सामर्थ्यवान बनाया है। मनुष्य दूसरों की सेवा करने के स्थान पर पूरा जीवन स्वयं का भरण-पोषण करने में व्यर्थ करता है, वह मनुष्य कहलाने लायक नहीं है।
सेवा या परोपकार की भावना चाहे देश के प्रति हो या किसी व्यक्ति के प्रति, वह मानवता है। परोपकार से ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग खुलता है। व्यक्ति जितना परोपकारी बनता है, उतना ही ईश्वर की समीपता प्राप्त करता है। परोपकार से मनुष्य जीवन की शोभा प्राप्त करता है। परोपकार से मनुष्य जीवन की शोभा और महिमा बढ़ती है। सच्चा परोपकारी सदा प्रसन्न रहता है। वह दूसरे का कार्य करके हर्ष की अनुभूत करता है।"
दुनिया में शांति, अहिंसा, सहनशीलता, भाई चारे का संदेश फैलाना चाहिए। पेड़-पौधों, हरियाली, पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। सभी पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं के प्रति करुणा की भावना रखनी चाहिए। परोपकार की भावना से ही हम एक उत्तम राष्ट्र और विश्व का निर्माण कर सकते हैं।

Teacher's Note:
a) ऐसे निबंध लिखते समय प्रस्तावना, विषय का विस्तार और उपसंहार का उचित क्रम रखना चाहिए।
b) छात्रों को अपने विचारों को स्पष्ट और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हिंदी में प्रस्तुत करना चाहिए।

 

2. "आजकल देश में आवासीय विद्यालयों (Boarding Schools) की बाढ़ सी आ गई है। आवासीय विद्यालयों की छात्रों के जीवन में क्या उपयोगिता हो सकती है?" - इस प्रकार के विद्यालयों की अच्छाइयों एवं बुराइयों के बारे में बताते हुए वर्तमान में इनकी आवश्यकता पर अपने विचार लिखिए। [15]

Answer:
आजकल देशभर में आवासीय विद्यालयों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। पहले इन आवासीय विद्यालयों को बच्चों की सजा के रूप में देखा जाता था या केवल ऐसे विद्यालय केवल अमीरों के लिए ही होते हैं यह माना जाता था परंतु समय के साथ आवासीय विद्यालयों में काफी सारे बदलाव आए हैं। आज के वर्तमान युग में आवासीय विद्यालय समय की माँग हैं।
आवासीय विद्यालय छात्रों के जीवन में अनुशासन लाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। प्रातः जल्दी उठने से रात्रि दस बजे तक आदर्श दिनचर्या का पालन करते हुए ए शिक्षण और सद्संस्कारों के वातावरण में उनका विकास होता है। आवासीय विद्यालय में सभी बच्चों को एक समान स्तर मिलता है आवासीय विद्यालय में बच्चे अधिक अनुशासित होकर रहते हैं और इस वजह से वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। दूसरा, आवासीय विद्यालय के बच्चों में हर काम को खुद से करने की आदत डाली जाती है, इसलिए वे अधिक जिम्मेदार बनते हैं। आगे चलकर इसके सार्थक परिणाम नजर आते हैं। प्रोफेशनल लाइफ और घर में आसानी से जिम्मेदारियों को निभा पाते हैं। आवासीय विद्यालय में रहने के क्रम में बच्चों को घर से अलग माहौल मिलता है। यहाँ बच्चे ग्रुप में दूसरे बच्चों के साथ रहते हैं। इसलिए वे कम समय में अधिक चीजें सीख पाते हैं। यहाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाता है। इस दौरान यह कोशिश रहती है कि उन्हें तनाव से दूर रखा जाए। इसके साथ-साथ उनकी पढ़ाई पर खास ध्यान दिया जाता है। आवासीय विद्यालय पढ़ाई के साथ ही बच्चों के खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी काम करते हैं। यहाँ पर बच्चों को अलग से पढ़ाई के अलावा अन्य उनकी रुचि अनुसार कई चीजें सीखने के लिए मिलती हैं। इसके अलावा यहाँ नेतृत्व और दूसरे कौशलों को भी बचपन से ही निखारा जाता है ताकि वे भविष्य में किसी भी स्थितियों का सामना अच्छे से कर सकें। अतः हम कह सकते हैं कि आवासीय विद्यालय एक सर्वांगीण नागरिक का निर्माण करते हैं।
आवासीय विद्यालयों की अच्छाइयों के साथ कुछ बुराियाँ भी हैं यहाँ पर सभी को एक स्तर पर देखने के कारण कभी-कभी बच्चों की भावनात्मक भावनाओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। बच्चे अपने माता-पिता के स्नेहिल व्यवहार से अपरिचित रह जाते हैं। केवल माता-पिता ही नहीं परिवार के अपने ही भाई-बहनों से भी वे दूर हो जाते हैं। आवासीय विद्यालयों में रहने के कारण बच्चे माता-पिता से अपनी निजी बातें या परेशानियाँ कभी-कभी बता नहीं पाते हैं एक प्रकार से संबंधों में दूरियों का निर्माण हो जाता है।
इन सब के बावजूद वर्तमान समय में आवासीय विद्यालय की आवश्यकता दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसके कई कारण है जैसे कि महानगरों के जीवन ने मनुष्य को मशीन बना दिया है। लोगों के पास समय का अभाव है। माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। संयुक्त परिवारों के स्थान पर एकल परिवार बढ़ने लगे हैं अतः बच्चों को घर में अकेला छोड़ने के बजाय अभिभावक आवासीय विद्यालयों को सुरक्षित समझने लगे हैं। तथा सभी अपने बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा देना चाहते हैं। इसके अलावा कई दूर दराज के क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। इसलिए आवासीय विद्यालय की आज के समय में बहुत आवश्यकता है।

Teacher's Note:
a) इस प्रकार के समसामयिक विषयों पर निबंध लिखते समय सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों का संतुलित वर्णन आवश्यक है।
b) छात्र अपने विचारों को तार्किक रूप से प्रस्तुत करें तथा शब्दों की सीमा का ध्यान रखें।

 

3. संयुक्त परिवार के किसी ऐसे उत्सव के आनन्द का विस्तार से वर्णन कीजिए, जहाँ आपके परिवार के बच्चे-बुजुर्ग सभी उपस्थित थे। [15]

Answer:
हमारा देश पर्वों का देश है। त्यौहार ऊर्जा का संचार करते हैं, उदास मनो में आशा जागृत करते हैं, अकेलेपन को दूर करते हैं।
मेरा प्रिय पर्व दीपावली है। रोशनी का उत्सव 'दीपावली' जिसका वास्तविक अर्थ है, दीपों की पंक्ति। वैसे तो दीपावली मनाने के पीछे कई सारी पौराणिक कथाएँ कही जाती हैं लेकिन जो मुख्य रूप से प्रचलित मान्यता है वह है असुर राजा रावण पर विजय और भगवान राम का चौदह साल का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या लौटना। इस दिन को हम बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये भी जानते हैं।
मैं दीपावली की छुट्टियों में अपने ननिहाल गया था वहाँ सब के साथ दीपावली मनाई मुझे बड़ा ही आनंद आया। दीपावली के कुछ दिन पहले ही बड़ों ने घर की सफाई शुरू कर दी थी जिसमें हम बच्चों ने भी हाथ बटायाँ। फिर मामा-मामी हम बच्चों को खरीदारी करने ले गए और नए कपड़े और फटाके दिलाए। हम सब बहुत खुश हो गए। शाम को हम सब मिलकर फटाके जलाते थे। नानी, माँ और मामी मिलकर नए-नए व्यंजन पकाते थे और हम सब बड़ी चाव से खाते थे। रात में दादा-दादी कहानी सुनते थे।
दीपावली के दिन सुबह जल्दी उठकर हमने नए कपड़े पहने और तैयार होकर बड़ों का आशीर्वाद लिया फिर सभी मंदिर गए। उसके बाद अभी रिश्तेदार दीपावली की बधाइयाँ देने आने लगे। हम सबका आदर सत्कार करते रहे। घर पर स्वादिष्ट पकवान बनाए गए थे उसका आनंद लिया। इस प्रकार पूरे परिवार के साथ खुशिया-खुशी दीपावली का उत्सव मनाया।

Teacher's Note:
a) संस्मरण या वर्णात्मक लेख में व्यक्तिगत अनुभूतियों और सजीव दृश्यों का वर्णन होना चाहिए।
b) भाषा सहज, प्रवाहमयी तथा भावपूर्ण होनी चाहिए।

 

4. एक ऐसी मौलिक कहानी लिखिए जिसके अन्त में यह वाक्य लिखा हो - 'अन्ततः मैं अपनी योजना में सफल हो सका/हो सकी।' [15]

Answer:
सोहन परीक्षा में असफल होने के कारण बहुत उदास था। न वह खाना खा रहा था ना ही घर में किसी से बात कर रहा था तभी उसकी माँ वहाँ आई उन्हें देखकर वह रोने लगा तब उसकी माँ ने उसे समझाया कि उदास होकर बैठने से क्या होगा। तुम्हें और मेहनत करनी होगी। तुमने यह कहावत तो सुनी ही होगी।
करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात के, सिल पर परत निशान।।
इसका यह अर्थ है कि जिस प्रकार बार-बार रस्सी के आने जाने से कठोर पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं, उसी प्रकार बार-बार अभ्यास करने पर मूर्ख व्यक्ति भी एक दिन कुशलता प्राप्त कर लेता है।
सारांश यह है कि निरन्तर अभ्यास कम कुशल और कुशल व्यक्ति को पूर्णतया पारंगत बना देता है। अभ्यास सफलता की कुंजी हैं। परन्तु अभ्यास के कुछ नियम हैं। अभ्यास निरन्तर नियमपूर्वक होना चाहिए। तुम पढ़ने के लिए समय-साररणी बनाओ और अपनी बहन की, मित्रों की आदि मदद लो।
सोहन ने तभी अपनी माँ के साथ बैठकर समय-साररणी बनाई और फिर उसके अनुरूप पढ़ाई करने लगा। आवश्यकता होने पर अवकाश के समय शिक्षकों की एवं मित्रों की सहायता लेने लगा। अंत में वह अपनी योजना में सफल हो सका और परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ अंक प्राप्त लिए।

Teacher's Note:
a) मौलिक कहानी लेखन में दी गई सूक्ति या अंतिम वाक्य का स्वाभाविक रूप से समावेश होना आवश्यक है।
b) कहानी का संदेश स्पष्ट और शीर्षक प्रासंगिक होना चाहिए।

 

5. नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर उसका परिचय देते हुए कोई लेख, कहानी अथवा घटना लिखिए जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए। [15]
[Figure: एक ग्रामीण परिवेश का दृश्य जहाँ बच्चे स्कूल जा रहे हैं, सबके हाथ में टैबलेट हैं और कुछ बच्चे टैबलेट में कुछ देख रहे हैं।]

Answer:
उपर्युक्त चित्र गाँव का प्रतीत हो रहा है। जहाँ बच्चें स्कूल जा रहे हैं। सबके हाथ में टैबलेट है। इनमें से दो बच्चें टैबलेट में कुछ देख रहे हैं। इस चित्र से पता चलता है कि आज देश में हर जगह शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन आया है। चाहे गाँव हो या शहर सब जगह शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसके चलते ही हम इस चित्र में गाँव के बच्चों के हाथ में टैबलेट देख रहे हैं। बच्चें अब टैबलेट्स पर अपनी पढ़ाई करते हैं। वो उस पर गेम्स भी खेलते हैं। इस नये तकनीक से बच्चों में शिक्षा के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है। पहले हम देखते थे कि बच्चें स्कूल जाना पसंद नहीं करते थे क्योंकि उन्हें पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं होती थी। पर बच्चें डिजिटल स्कूल में पढ़ाई के लिये जाने लगे। टैबलेट के इस्तेमाल से स्कूली बच्चों को बस्ते के बोझ से छुटकारा मिला है। टैबलेट के इस्तेमाल से आप ई-बुक का इस्तेमाल कर ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ई-बुक से पढ़ाई कर के आप पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दे सकते हैं, और पुस्तक छपाई में होने वाले कागज की बचत कर सकते हैं। टैबलेट के इस्तेमाल से विषय से संबंधित वीडियो देखकर बच्चें उसे और अच्छे से समझ सकते हैं।
इस प्रकार टैबलेट के इस्तेमाल से बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाकर हम उनके उज्जवल भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

Teacher's Note:
a) चित्र आधारित लेखन में छात्र को चित्र के सूक्ष्म विवरणों को पहचानकर उसी पर केंद्रित रचना लिखनी चाहिए।
b) चित्र के मुख्य भाव से भटकना नहीं चाहिए और कल्पनाशीलता का उचित प्रयोग करना चाहिए।

 

Q.2 Write a letter in Hindi in approximately 120 Words on any one of the topics given below : [7]
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए :

 

(i) आप अपने विद्यालय के 'सफाई अभियान दल' के नेता है। एक योजना के अंतर्गत आप छात्रों के एक दल को किसी इलाके में सफाई के प्रति जागरूक करने हेतु ले जाना चाहते हैं। अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य/प्रधानाचार्या जी को इसके लिए स्वीकृति हेतु पत्र लिखिए। [7]

Answer:
सेवा में,
प्रधानाचार्य
आदर्श शिशु विहार
जयपुर
दिनाँक : 14 मार्च 2018
विषय : दसवीं के बच्चों को सफाई अभियान के अंतर्गत 'पवन विहार' ले जाने की अनुमति प्राप्त करने हेतु。
महोदय
मैं विद्यालय का सफाई अभियान दल का नेता हूँ। हमारे विद्यालय के पासवाला इलाका 'पवन विहार' बहुत ही गंदा होता है। जहाँ से हमारे स्कूल के विद्यार्थी आते-जाती है, मैं विद्यालय के दसवीं कक्षा के छात्रों को 17 मार्च शनिवार के दिन वहाँ सफाई के प्रति जागरूकता लाने ले जाना चाहता हूँ। हम सफ़ाई अभियान का महत्त्व बताते हुए लोगों को समझाएँगेकि सफाई सामाजिक दायित्व है।
अतः आपसे निवेदन है कि आप हमें इसकी अनुमति प्रदान करें。
आपका आज्ञाकारी छात्र
सौरभ गुप्ता
नेता - सफाई अभियान दल
कक्षा - दसवीं 'अ'

Teacher's Note:
a) औपचारिक पत्र में प्रारूप (दिनांक, संबोधन, विषय, हस्ताक्षर आदि) का सही पालन करना अनिवार्य है।
b) भाषा औपचारिक, स्पष्ट और शालीन होनी चाहिए।

 

(ii) पिछले महीने कुछ प्रयासों द्वारा आपके विद्यालय के छात्रों ने कुछ धनराशि एकत्रित करके मूक-बधिर (deaf and dumb) विद्यालय के विद्यार्थियों की सहायता की थी। इसका वर्णन करते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखिये और बताइये कि हमें समाज के विकलांग लोगों के प्रति जैसा व्यवहार रखना चाहिए व उनकी सहायता के लिए किस प्रकार के प्रयास करने चाहिए। [7]

 

Answer:
नेहरू छात्रावास
दिल्ली पब्लिक स्कूल
नई दिल्ली
दिनाँक : 30 मार्च 2016
प्रिय तेजस
मधुर स्नेह
पत्र देर से लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ। तुम तो जानते ही हो कि मेरी वार्षिक परीक्षा चल रही थी। जिसके कारण मैं तुम्हें पत्र नहीं लिख पा रहा। मैं तुम्हें एक मत्व्त पूर्ण बात बताना चाहता था। पिछले महीने हमारे विद्यालय ने हम सभी छात्रों को एक कार्य सौंपा था, हमें एक फॉर्म दिया था और हमें अपने आस-पड़ोस से मूक-बधिर (deaf and dumb) विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए चंदा जमा करना था। सभी विद्यार्थियों के सहयोग से कुल 30 हजार रूपयें जमा हो गए। इससे मूक-बधिर विद्यार्थियों के अभ्यास के लिए आवश्यक चीजें ख़रीदी जाएंगी। मुझे बहुत ही प्रसन्नता हो रही है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम समाज में विकलांग लोगों की सहायता करें और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
आशा करता हूँ तुम भी अपने विद्यालय में अपने शिक्षकों की सहायता से समाज के विकलांग लोगों की मदद करोगे और मुझे बताओगे। जल्द ही मैं आपसे मिलने आऊँगा और सारे दोस्त मिलकर दावत का आयोजन करेंगे।
शेष मिलने पर।
तुम्हारा मित्र
वेदांत

Teacher's Note:
a) अनौपचारिक पत्र में आत्मीयता और स्नेहपूर्ण भाषा का प्रयोग किया जाता है।
b) पत्र में दिए गए संकेत बिंदुओं (मूक-बधिर विद्यालय की सहायता) का समावेश होना आवश्यक है।

 

Q.3 Read the passage given below and answer in Hindi the questions that follow, using your own words as far as possible : [10]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए :

सूर्य अस्त हो रहा था। पक्षी चहचहाते हुए अपने नीड़ की ओर जा रहे थे। गाँव की कुछ स्त्रियाँ अपने घड़े लेकर कुएँ पर जा पहुँची। पानी भरकर कुछ स्त्रियाँ तो अपने घरों को लौट गई, परंत चार स्त्रियाँ कुएँ की पक्की जगत पर ही बैठकर आपस में बातचीत करने लगी। तरह-तरह की बातचीत करते-करते बात बेटों पर जा पहुँची। उनमें से एक की उम्र सबसे बड़ी लग रही थी। वह कहने लगी - 'भगवन सबको मेरे जैसा ही बेटा दे। वह लाखों में एक है। उसका कंठ बहुत मधुर है। उसके गीत को सुनकर कोयल और मैना भी चुप हो जाती है। सच में मेरा बेटा तो अनमोल हीरा है।"
उसकी बात सुनकर दूसरी अपने बेटे की प्रशंसा करते हुए बोली - "बहन मैं तो समझती हूँ कि मेरे बेटे की बराबरी कोई नहीं कर सकता। वह बहुत ही शक्तिशाली और बहादुर है। वह बड़े-बड़े पहलवानों को भी पछाड़ देता है। वह आधुनिक युग का भीम है। मैं तो भगवान से कहती हूँ कि वह मेरे जैसा बेटा सबको दे।"
दोनों स्त्रियों की बात सुनकर तीसरी भला क्यों चुप रहती? वह भी अपने को रोक न सकी। वह बोल उठ - "मेरा बेटा साक्षात् बृहस्पति का अवतार है। वह जो कुछ पढ़ता है, एकदम याद कर लेता है। ऐसा लगता है बहन, मानों उसके कंठ में सरस्वती का वास हो।"
तीनों की बात सुनकर चौथी स्त्री चुपचाप बैठी रही। उसका भी एक बेटा था। परंतु उसने अपने बेटे के बारे में कुछ नहीं कहा।
जब पहली स्त्री ने उसे टोकेत हुए पूछा की उसके बेटे में क्या गुण है, तब चौथी स्त्री ने सहज भाव से कहा - "मेरा बेटा न गंधर्व-सा गायक है, न भीम-सा बलवान और न ही बृहस्पति।" यह कह कर वह शांत बैठ गई। कुछ देर बाद जब वे घड़े सिर पर रखकर लौटने लगीं, तभी किसी के गीत का मधुर स्वर सुनाई पड़ा,गीत सुनकर सभी स्त्रियाँ ठठक गई। पहली स्त्री शीघ्र ही बोल उठी - "मेरा हीरा आ रहा है। तुम लोगों ने सुना, उसका कंठ कितना मधुर है।" तीनों स्त्रियाँ बड़े ध्यान से उसे देखने लगी। वह गीत गाता हुआ उसी रास्ते से निकल गया। उसने अपनी माँ की तरफ़ ध्यान नहीं दिया।
थोड़ी देर बाद दूसरा बेटा दिखाई दिया। दूसरी स्त्री ने बड़े गर्व से कहा, "देखो मेरा बलवान बेटा आ रहा है। वह बातें कर ही थी कि उसका बेटा भी उसकी ओर ध्यान दिए बगैर निकल गया।"
तभी तीसरी स्त्री का बेटा उधर से संस्कृत के श्लोकों का पाठ करता हुआ निकला। तीसरी ने बड़े गद्गद् स्वर में कहा "देखो, मेरे बेटे के कंठ में सरस्वती का नाम है। वह भी माँ की ओर देखे बिना आगे बढ़ गया।
वह अभी थोड़ी दूर गया होगा की चौथी स्त्री का बेटा भी अचानक उधर से जा निकला। वह देखने में बहुत सीधा-साधा और सरल प्रकृत का लग रहा था। उसे देखकर चौथी स्त्री ने कहा, "बहन, यही मेरा बेटा है।" तभी उसका बेटा पास आ पहुँचा। अपनी माँ को देखकर रुक गया और बोला, "माँ लाओ मैं तुम्हारा घड़ा पहुँचा दूँ। माँ ने मना किया, फिर भी उसने माँ के सिर से पानी का घड़ा उतारकर अपने सिर पर रख लिया और घर की ओर चल पड़ा।
तीनों स्त्रियाँ बड़े ही आश्चर्य से देखती रही। एक वृद्ध महिला बहुत देर से उनकी बातें सुन रही थी। वह उनके पास आकर बोली, "देखती क्या हो? वही सच्चा हीरा है।"

 

1. पहली तथा दूसरी स्त्री ने अपने-अपने बेटे के विषय में क्या कहा? [2]

Answer:
पहली स्त्री ने अपने बेटे के विषय में कहा कि भगवान सबको उसके जैसा ही बेटा दे। वह लाखों में एक है। उसका कंठ बहुत मधुर है। उसके गीत को सुनकर कोयल और मैना भी चुप हो जाती है। उसका बेटा तो अनमोल हीरा है।
दूसरी स्त्री ने कहा कि उसके बेटे की बराबरी कोई नहीं कर सकता। वह बहुत ही शक्तिशाली और बहादुर है। वह बड़े-बड़े पहलवानों को भी पछाड़ देता है। वह आधुनिक युग का भीम है। वह तो भगवान से कहती है कि वह उसके जैसा बेटा सबको दे।

Teacher's Note:
a) गद्यांश आधारित प्रश्नों के उत्तर गद्यांश के संदर्भ में सटीक होने चाहिए।
b) दोनों पात्रों के कथनों का संक्षेप में सही उल्लेख करें।

 

2. तीसरी स्त्री ने अपने बेटे को ‘बृहस्पति का अवतार’ क्यों कहा? [2]

Answer:
तीसरी स्त्री ने अपने बेटे को ‘बृहस्पति का अवतार’ कहा क्योंकि वह जो कुछ पढ़ता है, एकदम याद कर लेता है। और ऐसा लगता मानो उसके कंठ में सरस्वती का वास हो।

Teacher's Note:
a) छात्र गद्यांश से कारण खोजकर स्पष्ट शब्दों में लिखें।
b) उत्तर संक्षिप्त और सीधा होना चाहिए।

 

3. पहली स्त्री द्वारा पूछे जाने पर चौथी स्त्री ने क्या कहा? [2]

Answer:
पहला स्त्री द्वारा पूछे जाने पर चौथी स्त्री ने कहा कि उसका बेटा न गंधर्व-सा गायक है, न भीम-सा बलवान और न ही बृहस्पति।

Teacher's Note:
a) इस उत्तर में चौथी स्त्री की विनम्रता और वास्तविकता का बोध होता है।
b) गद्यांश के अनुसार सटीक वाक्य लिखें।

 

4. चौथी स्त्री के बेटे ने अपनी माँ के साथ कैसा व्यवहार किया, यह देखकर तीनों स्त्रियों को कैसा लगा? [2]

Answer:
जब चारों स्त्रियाँ घड़े सिर पर रखकर लौटने लगीं तब चौथी स्त्री के बेटे ने माँ के मना करने पर भी उनके सिर से पानी का घड़ा उतारकर अपने सिर पर रख दिया और घर की ओर चल पड़ा। यह देखकर तीनों स्त्रियाँ बड़े ही आश्चर्य से उसे देखती रही। क्योंकि वह अपने बेटे को हीरा मानती थी जो उन्हें अनदेखा कर आगे बढ़ गए।

Teacher's Note:
a) घटना का क्रमिक वर्णन करें।
b) दूसरों के बेटों के अहंकारी व्यवहार और चौथी स्त्री के बेटे के संस्कारी व्यवहार के अंतर को स्पष्ट करें।

 

5. बच्चों को अपने माता-पिता के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? समझाइए। [2]

Answer:
बच्चों का यह परम दायित्व बनता है कि वे माता-पिता को पूर्ण सम्मान प्रदान करें और जहाँ तक संभव हो सके खुशियाँ प्रदान करने की चेष्टा करें। माता-पिता का सपना होता है कि पुत्र/पुत्री बड़े होकर उनके नाम को गौरवान्वित करे। अतः बच्चों को कड़ी लगन, मेहनत और परिश्रम के द्वारा उनका यह सपना पूर्ण कर माता-पिता का नाम गौरवान्वित करना चाहिए। माता-पिता की सेवा ही सच्ची सेवा है।

Teacher's Note:
a) यह प्रश्न गद्यांश के नैतिक मूल्य पर आधारित है।
b) उचित और नैतिक दृष्टिकोण का वर्णन करें।

 

Q. 4 Answer the following according to the instructions given :
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए :

 

1. निम्नलिखित शब्दों में से दो शब्द के विलोम लिखिए : [1]
* कीर्ति - अपकीर्ति
* निर्मल - मलिन
* विजय - पराजय
* निर्दोष - दोषी

Answer:
कीर्ति - अपकीर्ति, निर्मल - मलिन (या विजय - पराजय / निर्दोष - दोषी)

Teacher's Note:
a) विलोम शब्दों का चयन सटीक होना चाहिए।
b) वर्तनी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।

 

2. निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए : [1]
• धनवान
• किनारा
• दूध

Answer:
धनवान - अमीर, श्रीमान
(अन्य विकल्पों में से - किनारा : तट, तीर; दूध : दुग्ध, क्षीर)

Teacher's Note:
a) किसी एक शब्द के दो पर्यायवाची लिखने का निर्देश था।
b) सभी सही विकल्पों की जानकारी होनी चाहिए।

 

3. निम्नलिखित शब्दों से विशेषण बनाइए : [1]
• अपेक्षा
• गुण

Answer:
अपेक्षा - अपेक्षित
गुण - गुणी

Teacher's Note:
a) संज्ञा या भाववाचक शब्दों से विशेषण बनाने के नियमों का पालन करें।
b) वर्तनी शुद्ध लिखें।

 

4. निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के शुद्ध रूप लिखिए : [1]
• प्रदर्षी
• लच्छमी
• अपरीचीत

Answer:
प्रदर्शनी, लक्ष्मी (या अपरिचित)

Teacher's Note:
a) वर्तनी शुद्धि से संबंधित प्रश्नों में वर्णों की सही बनावट का ध्यान रखें।
b) किन्हीं दो शब्दों के ही शुद्ध रूप लिखने थे।

 

5. निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए : [1]
• आसमान से बातें करना
• उड़ती चिड़िया पहचानना

Answer:
आसमान से बातें करना - कुछ ही क्षण में उसकी गाड़ी जैसे आसमान से बातें करने लगी।
(या उड़ती चिड़िया पहचानना - मास्टरजी को चालीस वर्षों का अनुभव है तभी तो वह उड़ती चिड़िया पहचान लेते हैं।)

Teacher's Note:
a) मुहावरे का प्रयोग वाक्य के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया जाना चाहिए।
b) वाक्य रचना मौलिक और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध होनी चाहिए।

 

6. कोष्ठक में दिए गए वाक्यों में निर्देशानुसार परिवर्तन कीजिए :

 

(a) मोहन और रमेश सच्चे मित्र थे। [1]
(‘मित्रता’ शब्द का प्रयोग कीजिए।)

Answer:
मोहन और रमेश में सच्ची मित्रता थी।

Teacher's Note:
a) वाक्य रूपांतरण करते समय मूल अर्थ नहीं बदलना चाहिए।
b) दिए गए शब्द का उचित रूप में प्रयोग करें।

 

(b) मुझसे कोई भी बात कहने में संकोच न करें। [1]
(रेखांकित के लिए एक शब्द का प्रयोग करते हुए वाक्य को पुनः लिखिए।)

Answer:
मुझसे निस्संकोच कोई भी बात करें।

Teacher's Note:
a) वाक्यांश के लिए एक शब्द का सही प्रयोग किया गया है।
b) वाक्य की संरचना व्याकरण सम्मत होनी चाहिए।

 

(c) शिक्षक ने अपने शिष्य को आदेश दिया। (वचन बदलिए) [1]

Answer:
शिक्षक ने अपने शिष्यों को आदेश दिया।

Teacher's Note:
a) वचन बदलते समय कारक चिन्हों और क्रिया का उचित ध्यान रखना चाहिए।
b) 'शिष्य' का बहुवचन 'शिष्यों' होता है।

 

(d) अन्याय का सब विरोध करते हैं। [1]
(रेखांकित का विशेषण लिखते हुए वाक्य पुनः लिखिए)

Answer:
अन्यायी का सब विरोध करते हैं।

Teacher's Note:
a) 'अन्याय' भाववाचक संज्ञा का विशेषण रूप 'अन्यायी' होगा।
b) वाक्य का अर्थ स्पष्ट रखते हुए विशेषण का प्रयोग करें।

 

SECTION - B (40 Marks)

Attempt four questions from this section.

You must answer at least one question from each of two books you have studied and any two other questions.

(साहित्य सागर - संक्षक्षप्त कहानियाँ)
(Sahitya Sagar - Short Stories)

 

Q.5 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
आनंदी की त्यौरी चढ़ गई। झँझलाइट के मारे बदन में ज्वाला-सी दहक उठी। बोली, "जिसने तुमसे यह आग लगाई है, उसे पाऊँ तो मुँह झुलस दूँ।
[‘बड़े घर की बेटी’ - प्रेमचंद]
[Bade Ghar Ki Beti - Premchand]

 

1.आनंदी की त्यौरी क्यों चढ़ी हुई थी? वह किसका इंतजार कर रही थी? [2]

Answer:
आनंदी का दाल में घी न होने पर अपने देवर से कहा सुनी हो गई थी। देवर ने इतनी-सी बात पर आनंदी पर कड़ाऊँ फेंक मारा था। इसी बात को लेकर आनंदी की त्योरियाँ चढ़ी हुई थी और अब वह अपने पति के आने का इंतज़ार कर रही थी।

Teacher's Note:
a) गद्यांश के प्रसंग के अनुसार घटना का कारण स्पष्ट करें।
b) पात्र की मनोदशा को सटीक शब्दों में लिखें।

 

2.श्रीकंठ सिंह ने आनंदी से क्या जानना चाहा? [2]

Answer:
श्रीकंठ ने आनंदी से घर में मचे उपद्रव के बारे में जानना चाहा।

Teacher's Note:
a) प्रश्न का उत्तर सीधे और स्पष्ट रूप में दें।
b) कहानी की कथावस्तु से मिलान करें।

 

3.इससे पहले लालबिहारी और बेनीमाधव सिंह श्री कंठ सिंह से क्या कह चुके थे? [3]

Answer:
आनंदी से मिलने से पहले श्रीकंठ अपने भाई और पिता से मिल चुके थे और भाई ने श्रीकंठ को बताया कि आनंदी से कहे कि वे मुँह सँभालकर बात करें वर्ना एक दिन अनर्थ हो जाएगा। पिता ने भी श्रीकंठ से कहा कि बहू को कहे कि मर्दों के मुँह नहीं लगना चाहिए।

Teacher's Note:
a) दोनों पक्षों के बयानों का संक्षिप्त उल्लेख आवश्यक है।
b) कहानी के संवादों को ध्यान में रखकर उत्तर लिखें।

 

4.आनंदी से घटना का हाल जानकर श्रीकंठ सिंह को जैसा लगा? उन्होंने अपने पिता से क्या कहा? [3]

Answer:
आनंदी से जब श्रीकंठ ने झगड़े का सारा हाल जाना तो क्रोध से श्रीकंठ की आँखें लाल हो उठी। अपने भाई द्वारा किया गया यह दुर्व्यवहार उन्हें अच्छा नहीं लगा और इस सब के कारण उन्होंने घर से अलग हो जाने का निर्णय लिया और अपने पिता को यह निर्णय सुना दिया कि अब इस घर में उनका निर्वाह नहीं हो सकता।

Teacher's Note:
a) श्रीकंठ की प्रतिक्रिया और उनके निर्णय को स्पष्ट करें।
b) उत्तर में कथा के मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Q.6 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“रात को बड़े जोर का झक्कड़ चला। सेक्रेटेरियत के लॉन में जामुन का पेड़ गिरा। सुबह को जब माली ने देखा, तो उसे पता चला कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है।”
[ ‘जामुन का पेड़ - कृष्ण चंदर ]
[Jamun Ka Ped - Krishna Chander]

 

1.माली ने यह देखकर क्या किया और क्यों? [2]

Answer:
रात को बड़े जोर का झक्कड़ चलने के कारण सेक्रेटेरियत के लॉन में जामुन का पेड़ गिर पड़ा। सुबह माली ने जब उस पेड़ के नीचे एक आदमी को दबे हुए देखा तो वह भागता हुआ चपरासी के पास इस बात की सूचना देने के लिए पहुँचा।

Teacher's Note:
a) घटना के आरंभिक भाग का सटीक वर्णन करें।
b) माली की त्वरित प्रतिक्रिया को दर्शाएँ।

 

2.पहले दूसरे और तीसरे क्लर्क ने क्या कहा? [2]

Answer:
पहले क्लर्क ने जामुन के पेड़ को फलदार कहा तो दूसरे ने उसके रसीले जामुन की तारीफ की। तीसरे क्लर्क को उस दबे हुए व्यक्ति से कोई सहानुभूति नहीं थी उसे तो जामुन के उन रसीले फलों की याद सता रही थी जिन्हें वह मौसम में झोली भरकर अपने बच्चों तक ले जाता था।

Teacher's Note:
a) कार्यालयीन संवेदनहीनता को दर्शाने वाले इन तीनों क्लर्कों के कथनों को लिखें।
b) व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण को उत्तर में स्पष्ट करें।

 

3.माली ने क्या सुझाव दिया? मोटे चपरासी की बात सुनकर माली क्या बोला? [3]

Answer:
जामुन के पेड़ के नीचे दबे हुए व्यक्ति को निकालने के लिए माली ने पेड़ को हटाने का सुझाव दिया। पर इस सुझाव पर सुस्त, आलसी कामचोर और मोटा चपरासी बोला कि पेड़ का तना बहुत मोटा और वजनी है।

Teacher's Note:
a) माली के व्यावहारिक सुझाव और चपरासी की बहानेबाजी का वर्णन करें।
b) कहानी के व्यंग्य को स्पष्ट करें।

 

4.कहानी के अन्त में क्या हुआ था? देर से मिलने वाला न्याय महत्वहीन होता है कैसे? [3]

Answer:
कहानी के अंत में पेड़ के नीचे दबे हुए व्यक्ति की मौत हो जाती है। यह कहानी बताती है कि किस प्रकार देरी होने से न्याय भी महत्वहीन हो जाता है। कहानी में सरकारी विभाग के अधिकारी जामुन के पेड़ को हटाने तथा उस व्यक्ति को बचाने की बजाए फाइलें बनाने तथा उन फाइलों को अलग-अलग विभागों में पहुँचाने में लगे हुए थे और अंत में जब तक फैसला आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी।

Teacher's Note:
a) कहानी के अंत और उसके केंद्रीय संदेश को समझाएँ।
b) लाल फीताशाही पर लेखक के व्यंग्य को रेखांकित करें।

 

Q.7 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“पर, ‘सब दिन होत न एक समान’ अकस्मात् दिन फिरे और सेठ को गरीबी का मुँह देखना पड़ा। सभी-साथियों ने भी मुँह फेर लिया और नौबत यहाँ तक आ गई कि सेठ व सेठाानी भूखे मरने लगे।”
[महाยज्ञ का पुरस्कार - यशपाल]
[Mahayagya Ka Puraskar - Yashpal]

 

1.अकस्मात् बुरा समय किसका आ गया तथा बुरा समय आने से पहले उसकी दशा कैसी थी? [2]

Answer:
अकस्मात्सेठजी की दिन फिरे। इसके पहले सेठ बड़े ही धर्मपरायण होने के कारण उनके द्वार से कोई साधु-संत निराश नहीं लौटा था। उनका भंडार हमेशा खुला ही रहता था। उनके द्वारा कई यज्ञ किए गए थे और दान में न जाने कितना धन दीन-दुखियों में बाँट दिया था।

Teacher's Note:
a) सेठ की पूर्व स्थिति और धर्मपरायणता का उल्लेख करें।
b) भाग्य परिवर्तन की स्थिति को स्पष्ट करें।

 

2.अपना बुरा समय दूर करने के लिए सेठ ने क्या उपाय सोचा? इसके लिए उन्हें किसके पास जाना पड़ा? [2]

Answer:
उस समय यज्ञ का क्रय-विक्रय का चलन होने के कारण सेठ ने अपना बुरा समय दूर करने के लिए अपना एक यज्ञ बेचने का निर्णय लिया। सेठ के यहाँ से दस-बारह कोस दूरी पर कुंदनपुर नाम का नगर था जहाँ पर एक अमीर धन्ना सेठ रहते थे उन्हीं के पास सेठ में अपना यज्ञ बेचने का निश्चय किया।

Teacher's Note:
a) तात्कालिक सामाजिक प्रथा (यज्ञ बेचना) का वर्णन करें।
b) धन्ना सेठ के पास जाने की योजना को स्पष्ट करें।

 

3.सेठ ने मार्ग में कौन-सा महायज्ञ किया था? क्या वह वास्तव में महायज्ञ था? समझाकर लिखिए। [3]

Answer:
सेठ ने रास्ते में भूखे रहकर एक कुत्ते को अपना सारा भोजन खिलाने का महायज्ञ किया था। सेठ द्वारा किया गया यह कृत्य सही मायनों में महायज्ञ था। यज्ञ कमाने की इच्छा से धन-दौलत लुटाकर किया गया यज्ञ, सच्चा यज्ञ नहीं है, निःस्वार्थभाव से किया गया कर्म ही सच्चा महायज्ञ है।

Teacher's Note:
a) सच्ची मानवता और निःस्वार्थ सेवा के भाव को समझाएँ।
b) महायज्ञ की मूल परिभाषा को उत्तर में शामिल करें।

 

4.कहानी का उद्देश्य लिखिए। [3]

Answer:
प्रस्तुत कहानी हमें निःस्वार्थ भाव से कार्य करने की प्रेरणा देती है। साथ ही यह कहानी हमें प्राणी मात्र को भी उदारता से देखने का संदेश देती है। इस कहानी का सेठ बिना किसी फायदे और नुकसान के एक भूखे कुत्ते को अपना सारा भोजन खिला देता है। सेठ को इस निःस्वार्थ कृत्य के लिए ईश्वर उसका फल देते हैं।

Teacher's Note:
a) कहानी के नैतिक संदेश और उद्देश्य को स्पष्ट शब्दों में लिखें।
b) परोपकार के महत्व को रेखांकित करें।

 

(साहित्य सागर पद्य भाग)

Q.8 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग।
गहरि नदी, नाली जहाँ, वहाँ बचावै अंग।।
वहाँ बचावै अंग, झपट्ट कुत्ता कहँ मारे।
दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै।।
कह गिरधर कविराय, सुनो हे दूर के बाठी।
सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी।।
[कुंडलिियाँ - गिरधर कविराय]
[Kundaliya - Giridhar Kavi Rai]

 

1. इस कुंडली में किसकी उपयोगिता बताई गई गई है? कवि ने किस समय मनुष्य को लाठी रखने का परामर्श दिया है? [2]

Answer:
इस कुंडली में लाठी की उपयोगिता बताई गई है। कवि ने हर समय लाठी रखने का परामर्श दिया है।

Teacher's Note:
a) कविता के केंद्रीय विषय (लाठी की उपयोगिता) को स्पष्ट करें।
b) कवि के निर्देश को संक्षिप्त रूप में लिखें।

 

2. लाठी हमारे शरीर की सुरक्षा किस प्रकार करती है? [2]

Answer:
यदि कोई कुत्ता हमारे ऊपर झपटे तो लाठी से हम अपना बचाव कर सकते हैं। अगर हमें दुश्मन धमकाने की कोशिश करे तो लाठी के द्वारा हम अपना बचाव कर सकते हैं।

Teacher's Note:
a) पद्यांश में दिए गए तर्कों का उल्लेख करें।
b) आत्मरक्षा के संदर्भ में लाठी के उपयोग को स्पष्ट करें।

 

3. लाठी किन तीनों से निपटने में सहायक होती है और किस प्रकार? [3]

Answer:
लाठी नदी-नाले, कुत्ता और दुश्मनों से हमारा बचाव करती है। लाठी संकट के समय वह हमारी सहायता करती है। गहरी नदी और नाले को पार करते समय मददगार साबित होती है। यदि कोई कुत्ता हमारे ऊपर झपटे तो लाठी से हम अपना बचाव कर सकते हैं। अगर हमें दुश्मन धमकाने की कोशिश करे तो लाठी के द्वारा हम अपना बचाव कर सकते हैं। लाठी गहराई मापने के काम आती है।

Teacher's Note:
a) तीनों संदर्भों (प्राकृतिक बाधा, जीव और शत्रु) का विस्तार से वर्णन करें।
b) लाठी के बहुउपयोगी स्वरूप को समझाएँ।

 

4. कवि सब हथियार छोड़कर लाठी लेने की बात क्यों कर रहे हैं? अपने विचार व्यक्त करते हुए कुंडलियाँ लेखन का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए। [3]

Answer:
लाठी सब हथियारों में सबसे सस्ता और सुलभ हथियार होने के कारण कवि इसे अपने साथ रखने की सलाह देते हैं। लाठी केवल आत्मरक्षा ही नहीं बल्कि कई अन्य कामों के लिए भी काम आती है इसलिए उन्होंने सब हथियार छोड़कर लाठी लेने की बात कही है।
कवि ने अपनी इस कुंडली द्वारा लाठी जैसे सामान्य से दिखने वाली वस्तु की उपयोगिता से लाठी का दर्जा बढ़ा बढ़ा दिया है। कवि अपनी कुंडलियों के द्वारा जनमानस पर बड़ा प्रभाव छोड़ते हैं जैसे ऐसी जगह नहीं जाना चाहिए जहाँ आपका मान नहीं होता या परोपकार का जीवन में कितना महत्त्व है आदि बातें उनकी इन कुंडलियों से बखूबी पता चलती है।

Teacher's Note:
a) कवि के व्यावहारिक दृष्टिकोण और लोक-साहित्य के उद्देश्य को स्पष्ट करें।
b) गिरधर कविराय की नीतिपरक शिक्षाओं का उल्लेख करें।

 

Q.9 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
चाट रहे जूठी पत्तल वे कभी सड़क पर खड़े हुए,
और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अड़े हुए।
ठहरो, अहो मेरे हृदय में है अमृत, मैं सींच दूंगा।
अभिमैन्यु जैसे हो सकोगे तुम,
तुम्हारे दुःख मैं अपने हृदय में खींच लूँगा।
[भिक्षुक - सूर्यकांत त्रिपाठी - 'निराला']
[Bhikashuk - Suryakanth Tripathi - 'Nirala']

 

1. पहली दो पंक्तियों में कवि ने क्या दृश्य प्रस्तुत किया है? [2]

Answer:
पहली दो पंक्तियों में कवि ने भिक्षुक की अपनी क्षुधा मिटाने के लिए जूठी पत्तलें चाटने का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया है। भिक्षुक को जब कुछ नहीं मिलता तो वे जूठी पत्तलें चाटने के लिए विवश हो जाते हैं। जूठी पत्तलों में जो कुछ थोड़ा बहुत अन्न बचा था वे उसी को खाकर अपनी भूख शांत करने का प्रयास करते हैं।

Teacher's Note:
a) कविता के यथार्थवादी और करुण दृश्य को स्पष्ट करें।
b) गरीब और असहाय व्यक्ति की दयनीय स्थिति का वर्णन करें।

 

2. इस भावुक दृश्य से हमारे हृदय में क्या भाव उत्पन्न होते हैं? [2]

Answer:
इस भावुक दृश्य को देखकर हमारे मन में दया और करुणा के भाव उपजते हैं। भूख के क्या मायने होते हैं यह हमें समझ में आता है।

Teacher's Note:
a) पाठक के मन में उत्पन्न होने वाली संवेदनाओं को लिखें।
b) मानवीय संवेदना को रेखांकित करें।

 

3. क्या भिक्षुकॊं की मदद करना मानवीय धर्म नहीं है? वहाँ अभिमन्यु का उदहरण कवि ने क्यों दिया है? [3]

Answer:
भिक्षुकॊं की मदद करना मानवीय धर्म है। इस कविता में कवि ने अभिमन्यु का उदहरण भिक्षुक के संघर्ष को दिया है। भिक्षुक को जब कुछ नहीं मिलता तो वे जूठी पत्तलें चाटने के लिए विवश हो जाते हैं। जूठी पत्तलों में जो कुछ थोड़ा बहुत अन्न बचा था वे उसी को खाकर अपनी भूख शांत करने का प्रयास कर रहे होते है कि राह के कुत्ते भी उनसे वह अन्न छीन लेना चाहते हैं। यहाँ पर कवि यही बताने का प्रयास कर रहे हैं कि अपने अधिकारों के लिए आपको लड़ना पड़ता है।

Teacher's Note:
a) अभिमन्यु के प्रतीक के माध्यम से संघर्ष और असमर्थता के द्वंद्व को समझाएँ।
b) कवि के सामाजिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।

 

4. प्रस्तुत कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए। [3]

Answer:
प्रस्तुत कविता का केन्द्रीय भाव एक भिक्षुक और उसके बच्चों की दयनीय अवस्था के चित्रण से पाठकों में ऐसे उपेक्षित लोगों के प्रति सहानुभूति जगाना है। कवि का उद्देश्य है कि समाज में उपेक्षित वर्ग के लिए लोगों के मन में न केवल सहानुभूति उपजे वर्ण समाज उनकी स्थिति सुधारने का प्रयत्न भी करें।

Teacher's Note:
a) कविता के मूल उद्देश्य और सामाजिक संदेश को लिखें।
b) शोषित वर्ग के प्रति मानवीय संवेदना जगाने के भाव को स्पष्ट करें।

 

Q.10 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
"मैं पूर्णता की खोज में
दर-दर भटकता ही रहा
प्रत्येक पग पर कुछ न कुछ
रोड़ा अटकता ही रहा
पर हो निराशा क्यों मुझे?
जीवन इसी का नाम है।
चलना हमारा काम है।"
[चलना हमारा काम है - शिवमंगल सिंह 'सुमन']
[Chalna Hamara Kaam Hai - Shiv, Mangal Singh 'Suman']

 

1. कवि ने मनुष्य के जीवन के बारे में क्या कहा है तथा क्यों? [2]

Answer:
कवि का मनुष्य जीवन के बारे में कहना है कि मनुष्य चुनौतियों का सामना करने के लिए पैदा हुआ है क्योंकि जीवन में सफलता के साथ असफलता, सुख के साथ दुःख और सहजता के साथ बाधाएँ आती रहती है, यही जीवन है।

Teacher's Note:
a) जीवन की वास्तविकता और चुनौतियों का सामना करने के भाव को स्पष्ट करें।
b) कवि के प्रेरणादायी संदेश को लिखें।

 

2. कवि के अनुसार जीवन का महत्त्व किसमें है? स्पष्ट कीजिए। [2]

Answer:
कवि के अनुसार जीवन का महत्त्व कर्मपथ पर चलते रहना और अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहने में हैं। राह में मिलने वाले सभी को साथ लेकर सुख-दुःख को गले लगाकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

Teacher's Note:
a) कर्मशीलता के सिद्धांत को स्पष्ट करें।
b) निरंतर आगे बढ़ने के संदेश को रेखांकित करें।

 

3. जीवन में सुख-दुख और आशा-निराशा के प्रति हमारा क्या दृष्टिकोण होना चाहिए? अपने दुखों और निराशा के लिए हमें किसको दोष देना उचित नहीं है तथा क्यों? समझाकर लिखिए। [3]

Answer:
जीवन में आनेवाले सुख-दुख और आशा-निराशा के प्रति हमारा दृष्टिकोण आशावादी होना चाहिए क्योंकि इसी का नाम जीवन है। हमें अपने दुखों और निराशा के लिए किसी व्यक्ति या भगवान को दोष नहीं देना चाहिए क्योंकि हम हमारे कर्मों द्वारा अपना भविष्य निर्धारित करते हैं।

Teacher's Note:
a) आशावादी दृष्टिकोण और कर्म प्रधानता के सिद्धांत को समझाइए।
b) दूसरों पर दोष मढ़ने के बजाय स्वयं को जिम्मेदार मानने के भाव को स्पष्ट करें।

 

4. प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि ने पाठकों को क्या संदेश दिया है? [3]

Answer:
‘चलना हमारा काम है’, नामक कविता ‘शिवमंगल सिंह’ 'सुमन जी' द्वारा लिखित प्रसिद्ध कविता है। कवि का मानना है कि मनुष्य को सदा कर्म पथ पर चलते रहना चाहिए। उसे कभी रुकना नहीं चाहिए। राह में मिलने वाले सभी को साथ लेकर सुख-दुःख को गले लगाकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। मनुष्य चुनौतियों का सामना करने के लिए पैदा हुआ है क्योंकि जीवन में सफलता के साथ असफलता,सुख के साथ दुःख और सहजता के साथ बाधाएँ आती रहती है, यही जीवन है। हमें मार्ग में आने वाली बाधाओं का डटकर सामना करना चाहिए। कर्मशील मनुष्य ही जीवन में आगे बढ़ते है। कवि ने यही संदेश दिया है।

Teacher's Note:
a) कविता के केंद्रीय संदेश (कर्मशीलता और निरंतरता) का सार लिखें।
b) जीवन की बाधाओं से न घबराने की प्रेरणा को स्पष्ट करें।

 

नया रास्ता (सुषमा अग्रवाल)
(Naya Rasata - Sushma Agarwal)

 

Q.11 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
अमित मेज पर बैठा खाना खाने लगा। माँ भी उसके पास बैठ गई। बैठे-बैठे वह न जाने किन विचारों में खो गई और एकटक अमित की ओर ही देखती रही।

 

1. माँ अमित की तरफ देखते हुए क्या सोच रही थी? [2]

Answer:
अमित की माँ यह सोच रही थी उनके भाई का बेटा दीपक अमित से बहुत छोटा होने के बावजूद उसकी शादी हो रही है। और यहाँ अमित बड़ा होने के बावजूद भी अभी तक कुँवारा ही है।

Teacher's Note:
a) उपन्यास के प्रसंग के अनुसार माँ की चिंता को स्पष्ट करें।
b) अमित की आयु और उसके विवाह न होने की पारिवारिक चिंता का वर्णन करें।

 

2. दीपक कौन है? उन्हें किस बात का कार्ड मिला? [2]

Answer:
दीपक अमित का ममेरा भाई है। उसी की शादी का कार्ड आया है।

Teacher's Note:
a) पात्रों के आपसी संबंधों को स्पष्ट करें।
b) गद्यांश के संदर्भ में सटीक उत्तर दें।

 

3. मधु के बारे में माँ ने अमित से क्या कहा? [3]

Answer:
माँ ने अमित से मधु के बारे में यह कहा कि मधु भी अब विवाह लायक हो गई है परंतु वे चाहती हैं कि पहले अमित की शादी की जाय क्योंकि वह मधु से सात वर्ष बड़ा है। मधु के जाने के बाद वे अकेली हो जाएगी उसके पहले वह घर में बहू लाना चाहती है।

Teacher's Note:
a) माँ की मनोकामना और पारिवारिक स्थिति का वर्णन करें।
b) अमित और मधु के बीच की आयु के अंतर को स्पष्ट करें।

 

4. माँ को घर में बहू की कमी क्यों अखरती थी? [3]

Answer:
उसके पति और बेटा अमित तो फैक्ट्री चले जाते थे और बेटी अपने कॉलेज में व्यस्त रहती थी। और इसी अकेलेपन में उन्हें बहू की कमी कुछ ज्यादा ही अखरती रहती थी।

Teacher's Note:
a) घर के अकेलेपन और माँ की स्थिति को समझाएँ।
b) पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर उत्तर दें।

 

Q.12 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
"दूसरे ही क्षण मीनू उसके सामने आ गई और खुशी से उसके हाथ चूम लिये। अरे मीनू, आज तो बहुत प्रसन्न दिखाई दे रही हो। क्या बात है? नीलिमा ने पूछा"

 

1. मीनू कौन है? उसकी प्रसन्नता का कारण क्या है? [2]

Answer:
मीनू दयाराम की बेटी है। मीनू साधारण नक्श वाली साँवली युवती है। मीनू पढ़ी-लिखी सुलझे हुए विचारों की युवती है। मीनू प्रसन्न इसलिए थी क्योंकि बहुत कोशिशों के बाद मेरठ में रहने वाले लड़के को उसका फोटो पसंद आ गया था।

Teacher's Note:
a) मीनू के व्यक्तित्व और उसकी प्रसन्नता के मुख्य कारण का वर्णन करें।
b) उपन्यास के कथानक के अनुसार उत्तर दें।

 

2. ‘उसके’ सर्वनाम का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिये। [2]

Answer:
‘उसके’ सर्वनाम का प्रयोग मीनू की अभिन्न सहेली नीलिमा के लिए किया गया है। नीलिमा केवल मीनू सहेली ही नहीं बल्कि वह उसकी हितैषी और सुख दुःख की साथी भी थी।

Teacher's Note:
a) सर्वनाम के संदर्भ को पात्र (नीलिमा) के साथ जोड़कर स्पष्ट करें।
b) नीलिमा के चरित्र की विशेषता बताएँ।

 

3. मीनू के चेहरे पर किस बात को सोचकर उदासी छा जाती है’? मीनू की उदासी कब और किस प्रकार दूर होती है? समझाकर लिखिए। [3]

Answer:
मीनू पहले यह सोचकर प्रसन्न थी कि उसकी फोटो को लड़के वालों ने पसंद कर लिया है लेकिन उसे कुछ पुरानी बातें याद आ जाती इससे पहले कई लड़कों ने उसे साँवली बताकर उसका रिश्ता ठुकराया है और यही सब सोचकर वह उदास हो जाती है।
मीनू अपने पुराने ठुकराए रिश्तों को याद कर जब दुखी हो जाती है तब नीलिमा उसे इस उदासी से दूर करने के लिए विभिन्न मुद्राओं में खिंची गई अपनी तस्वीरों को दिखाने लगी।

Teacher's Note:
a) मीनू के अतीत की पीड़ा और उसके निवारण के प्रसंग को समझाएँ।
b) सहेली की भूमिका के महत्व को स्पष्ट करें।

 

4. प्रस्तुत उपन्यास का उद्देश्य स्पष्ट कीजिये। [3]

Answer:
नया रास्ता उपन्यास द्वारा लेखिका सुषमा अग्रवाल ने सामाजिक रूढ़ियों का विरोध किया है। इसमें स्त्री जीवन के संघर्ष का वर्णन किया गया है। इसकी नायिका आत्म-निर्भर होकर अपना जीवन निर्वाह करना चाहती है परंतु पुरुष प्रधान समाज और लोगों की संकुचित सोच उसके रास्ते में व्यवधान उत्पन्न करते हैं। परंतु नायिका अपने लक्ष्य में सफल होती है। इस प्रकार ‘नया रास्ता’ उपन्यास के माध्यम से लेखिका युवतियों में नई चेतना और आत्म-निर्भरता की भावना भरना चाहती है।

Teacher's Note:
a) उपन्यास के मुख्य संदेश और नारी सशक्तिकरण के उद्देश्य को लिखें।
b) सामाजिक रूढ़ियों के विरोध की भावना को स्पष्ट करें।

 

Q.13 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
"परंतु तुम वे तो सोचों कि आजकल शादी के बाद ही दावत दी जाती है। यदि हम प्रतिभोज नहीं देंगे तो दुनिया वाले क्या कहेंगे और फिर बड़े घर की लड़की आ रही है। दावत नहीं देंगे तो सब लोग बात बनाएँगे।"

 

1. उपयुक्त कथन किसने, किस अवसर पर कहा था? [2]

Answer:
प्रस्तुत कथन अमित के पिता मायाराम ने अपनी पत्नी को अमित के विवाह के उपरांत दिए जाने वाले भोज के संदर्भ में कहा।

Teacher's Note:
a) वक्ता (मायाराम) और प्रसंग को स्पष्ट करें।
b) सामाजिक दिखावे की प्रवृत्ति को रेखांकित करें।

 

2. ‘बड़े घर की लड़की’ किसको कहा गया है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
बड़े घर की बेटी सेठ धनीमल की बेटी सरिता के लिए कहा गया है।
यहाँ पर ‘बड़े घर की बेटी’ धनीमल की बेटी सरिता को कहा गया है। सरिता बड़े घर की बेटी है। वह धनीमल की तीसरी बेटी है। उसका विवाह अमित के साथ तय किया गया है। वह घर के काम करने में जरा भी रूचि नहीं रखती। सरिता के अनुसार विवाह के बाद उसके पिता घर के काम करने के लिए उसके साथ नौकर भेज देंगे। उसे पेंटिंग और कार ड्राईविंंग में विशेष रुचि थी।

Teacher's Note:
a) सरिता के चरित्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि का परिचय दें।
b) उसकी रुचियों और जीवनशैली को स्पष्ट करें।

 

3. उपयुक्त कथन के विषय में अमित के क्या विचार हैं? वह इस शादी से सहमत क्यों नहीं हैं? धनीमल जी ने शादी के प्रस्ताव के साथ क्या लालच दिया था? [3]

Answer:
अमित के अपनी शादी के बारे में कुछ खास विचार नहीं थे। उसे वैसे भी सरिता पसंद नहीं थी। वह केवल अपने माता-पिता का मान रखने के लिए इस विवाह के लिए सहमत हुआ था। धनीमल ने शादी के पूरे खर्च के साथ एक फ्लैट का भी लालच दिया था।

Teacher's Note:
a) अमित की उदासीनता और उसके माता-पिता के प्रति समर्पण को समझाएँ।
b) धनीमल द्वारा दिए गए प्रलोभन का उल्लेख करें।

 

4. आजकल के मध्यमवर्गीय परिवारों में विवाह आदि रीति-रिवाजों के अवसर पर होने वाले फिजूलखर्च पर अपने विचार लिखिए। [3]

Answer:
आजकल मध्यमवर्गीय परिवारों में शादी को लेकर फिजूल खर्ची बढ़ गई है इसका कारण है दिखावा और दूसरों से स्पर्धा। इस दिखावे की होड़ में लोग सबकुछ भूल जाते हैं। यहाँ तक कि कर्ज लेकर भी बढ़िया से बढ़िया शादी का आयोजन करते हैं। जैसे संगीत के लिए अलग प्रोग्राम, मेहंदी के लिए अलग, हल्दी के लिए अलग-जिसमें कपड़ों से लेकर सजावट हर वस्तु पर खर्च किया जाता है। यह बहुत ही गलत है शादी सादगी से कहकर संसाधनों का व्यय करने से बचना चाहिए तथा वह पैसे बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए या समाज कल्याण के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

Teacher's Note:
a) सामाजिक कुप्रथाओं और दिखावे की संस्कृति पर आलोचनात्मक विचार प्रस्तुत करें।
b) सादगी पूर्ण विवाह के महत्व को समझाएँ।

 

एकांकी संचय
(Ekanki Sanchay)

 

Q.14. Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
"काश कि मैं निर्मम हो सकती, काश की मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो सकती। हो पाती तो कुल, धर्म और जाति का भूत मुझे तंग न करता और मैं अपने बेटे से न बिछड़ती।"
[संस्कार और भावना - विष्णु प्रभाकर]
[Sanskar Aur Bhavna - Vishnu Prabhakar]

 

1. वक्ता कौन है? यह वाक्य वह किसे कह रही है? [2]

Answer:
उपयुक्त कथन की वक्ता माँ है। यह वाक्य वक्ता द्वारा अपनी छोटी बहू उमा को कह रही है।

Teacher's Note:
a) वक्ता और श्रोता की पहचान स्पष्ट करें।
b) एकांकी के प्रसंग के अनुसार उत्तर दें।

 

2. ‘संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है’ यह कथन एकांकी में किसका है? उसने ऐसा क्यों कहा? [2]

Answer:
उपयुक्त कथन एकांकी में घर के बड़े बेटे अविनाश का है। अविनाश में उपयुक्त कथन अपनी माँ की रूढ़िवादि सोच के लिए कहा था।

Teacher's Note:
a) अविनाश के विचारों और पारिवारिक संघर्ष को स्पष्ट करें।
b) रूढ़िवादिता के विरोध के स्वर को रेखांकित करें।

 

3. संस्कारों की दासता के कारण वक्ता को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? [3]

Answer:
संस्कारों की इसी दासता के कारण वक्ता को निर्मम होना पड़ा। इसी के कारण उसके बहू-बेटे को घर छोड़ना पड़ा और उन्हें अपने बड़े बेटे अविनाश से भी बिछड़ना पड़ा। बेटे के बीमार होने की सूचना तक वह न पा सकी।

Teacher's Note:
a) माँ की ममता और रूढ़िवादी संस्कारों के बीच के संघर्ष का वर्णन करें।
b) वक्ता द्वारा उठाये गए कष्टों को क्रमिक रूप से लिखें।

 

4. प्रस्तुत एकांकी द्वारा एकांकीकार ने क्या संदेश दिया है? [3]

Answer:
प्रस्तुत एकांकी द्वारा एकांकीकार ने यह संदेश दिया है कि रूढ़ियाँ जब बंधन बनकर बोझ बनने लगे तो उन्हें छोड़ देना ही उचित होता है। एकांकीकार के अनुसार समयानुसार हमें अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए। किसी सही बात का इतना भी विरोध नहीं करना चाहिए कि अंत में हमें उस बात को मानने के लिए मजबूर होना पड़े।

Teacher's Note:
a) एकांकी के मूल संदेश (परिवर्तन और रूढ़ियों का त्याग) को स्पष्ट करें।
b) मानवीय मूल्यों को संस्कारों से ऊपर रखने की शिक्षा को समझाएँ।

 

Q.15. Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
"जानता हूँ, युधिष्ठिर ! भली भाँति जानता हूँ। किन्तु सोच लो, में थक कर चूर हो गया हूँ, मेरी सभी सेना तितर-बितर हो गई है, मेरा कवच फट गया है, मेरे शास्त्रास्त्र चुक गए हैं। मुझे समय दो युधिष्ठिर ! क्या भूल गए मैंने तुम्हें तेरह वर्ष का समय दिया था?"
[महाभारत की एक साँझ - भारत भूषण अग्रवाल]
[mahabharat Ki Ek Sanjh - Bhushan Agarwal]

 

1. वक्ता कौन है? वह क्या जानता था? [2]

Answer:
वक्ता यहाँ पर दुर्योधन है। वह भलीभांति इस बात से परिचित है कि जिस ईर्ष्या की आग को वह वर्षों से घी पिला रहा था उसमें उसके सारे प्रियजन तो जलकर समाप्त हो गए हैं परंत जब तक उसका नाश नहीं हो जाता तब तक यह ईर्ष्या की ज्वाला शांत न होगी। ईर्ष्या की यह ज्वाला उसकी आहुति लिए बिना न मानेगी।

Teacher's Note:
a) वक्ता (दुर्योधन) की मानसिक स्थिति और उसकी भूल का परिचय दें।
b) ईर्ष्या के परिणाम को स्पष्ट करें।

 

2. वक्ता इस समय असहाय क्यों हो गया था? क्या वह वास्तव में असहाय था? [2]

Answer:
वक्ता दुर्योधन असहाय इसलिए हो गया है कि कौरव कुल से सभी समाप्त हो चुके हैं। युद्ध में सारे कौरव महारथी, और उनके सहयोगी मारे जा चुके हैं। वह केवल अकेला बचा है उसके पास कोई सेना या शस्त्रास्त्र नहीं बचे हैं। वह युद्ध करते-करते थक गया है यहाँ तक कि उसका कवच भी फट चुका है।

Teacher's Note:
a) दुर्योधन की दयनीय और अकेली स्थिति का वर्णन करें।
b) युद्ध के विनाशकारी परिणाम को स्पष्ट करें।

 

3. श्रोता कौन है? श्रोता को तेरह वर्ष का समय कैसे दिया था? इस कथित को आप कितना सही मानते है? [3]

Answer:
यहाँ पर श्रोता युधिष्ठिर है। यहाँ पर जुए में हारने पर कौरवों द्वारा पांडवों को तेरह वर्ष का वनवास दिया था। कौरवों ने यह वनवास इसलिए दिया था कि उन तेरह वर्षों में पांडव जंगल-जंगल भटककर थक जाएँगे। वे समाज से कट जाएँगे और इससे कौरवों का राज्य पर एकछत्र शासन का सपना निर्विघ्न पूरा हो जाएगा। मेरे अनुसार यह सर्वथा अनुचित था। केवल राज्य पाने की मंशा से अपने भाइयों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाना सर्वथा गलत था।

Teacher's Note:
a) पाण्डवों के वनवास के प्रसंग और दुर्योधन की कुटिलता का वर्णन करें।
b) घटना पर अपना तार्किक और नैतिक दृष्टिकोण रखें।

 

4. वक्ता ने जो समय दिया था उसका उद्देश्य क्या था? क्या वह अपने उद्देश्य में सफल हो सका? स्पष्ट कीजिए। [3]

Answer:
वक्ता का तेरह वर्ष के वनवास का उद्देश्य पांडवों को अपने रास्ते से हटाना था। वक्ता अति मत्वाकांक्षाी था वह राज्य पर अपना एकछत्र शासन चाहता था। वक्ता ने तेरह वर्ष का वनवास पांडवों को इसलिए दिया था कि उन तेरह वर्षों में पांडव जंगल-जंगल भटककर थक जाएँगे। वे प्रजा से कट जाएँगे और इन तेरह वर्ष के दौरान वह किसी न किसी तरह उन्हें मारकर कौरवों का राज्य पर एकछत्र शासन का सपना निर्विघ्न पूरा कर देगा.
वक्ता अपने इस प्रयास में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। पांडवों द्वारा वनवास की अवधि को सफलतापूर्वक पूरा कर दिया गया और जिसका कौरवों को डर था वह सच हो गया क्योंकि वनवास के पश्चात पांडव और अधिक शक्तिशाली बनकर उभरे और अपने राज्य की माँग करने लगे।

Teacher's Note:
a) दुर्योधन के कुत्सित उद्देश्यों और उसकी विफलता का वर्णन करें।
b) सत्य और न्याय की विजय के संदेश को स्पष्ट करें।

 

Q.16. Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
"आज कुसमय नाच-रंग की बात सुनकर मेरे मन में शंका हुई थी। इसलिए मैंने कुँवर को वहाँ जाने से रोक दिया था। संभव था कि कुँवर वहाँ जाते और बनवीर अपने सहायक कोई काण्ड रख देता।"
[दीपदान - डॉ. रामकुमार वर्मा]
[Deepdan - Dr. Ram Kumar Verma]

 

1. उपयुक्त कथन का वक्ता कौन है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
उपयुक्त कथन की वक्ता पन्ना धाय माँ है। वक्ता स्वर्गीय महाराणा साँगा का सबसे छोटे पुत्र उदयसिंह की धाय माँ है। उसकी माँ की मृत्यु के पश्चात से पन्ना धाय जो कि महाराज की सेविका थी उसने उसे माँ की तरह पाला।

Teacher's Note:
a) वक्ता (पन्ना धाय) का परिचय और उदयसिंह के साथ उनके संबंध को स्पष्ट करें।
b) उनकी कर्तव्यनिष्ठा का उल्लेख करें।

 

2. नाच-रंग का आयोजन किसने और किस उद्देश्य से किया था? [2]

Answer:
नाच रंग का आयोजन बनवीर द्वारा किया गया था। बनवीर महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र था जिसे महाराणा साँगा की मृत्यु के पश्चात राज्य की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया। बनवीर का इस नाच-गाने की आड़ में राज्य के असली उत्तराधिकारी कुंवर उदयसिंह को अपने रास्ते से हटाना उसका उद्देश्य था।

Teacher's Note:
a) बनवीर के षड्यंत्र और नाच-रंग के आयोजन के वास्तविक उद्देश्य को समझाएँ।
b) एकांकी की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करें।

 

3. बनवीर कौन है? उसका परिचय देते हुए उसका चरित्र-चित्रण कीजिए। [3]

Answer:
बनवीर महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज का दासी पुत्र था। महाराणा साँगा की मृत्यु के बाद उनका पुत्र राज सिंहासन का उत्तराधिकारी था परंतु उनकी आयु मात्र 14 वर्ष होने के कारण महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र बनवीर को राज्य की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया। धीरे-धीरे वह राज्य हड़पने की योजना बनाने लगा। बनवीर अति महत्वाकांक्षी था। जिस राज्य की देखभाल का जिम्मा उसे सौंपा गया था उसी पर अपनी सत्ता कायम करने के लिए कुटिल योजनाएँ बनाने लगा यहाँ तक कि वह रास्ते में आने वाले हर व्यक्ति को समाप्त करने लगा। उसने कुंवर उदयसिंह को मारने की योजना को पूरा करने के लिए राज्य के विश्वासपात्रों को भी अपनी ओर मिलाने का भरसक प्रयास किया। इन सब बातों से पता चलता है कि बनवीर अत्यंत क्रूर, निर्दयी, स्वार्थी और कपट से परिपूर्ण व्यक्ति था।

Teacher's Note:
a) बनवीर के चरित्र की मुख्य विशेषताओं (क्रूरता, महत्वाकांक्षा, कपट) का वर्णन करें।
b) उसके खलनायक रूप को स्पष्ट करें।

 

4. ‘दीपदान’ एकांकी के शीर्षक की सार्थकता बताइए तथा एकांकी के माध्यम से एकांकीकार ने क्या शिक्षा दी है? [3]

Answer:
इस कहानी की शुरुआत में दीपदान की बात आती है। राज्य में एक अनोखा दीपोत्सव मनाया जाता है जिसकी आड़ में कुँवर की हत्या करना था। स्वामिभक्त पन्ना धाय अपने बेटे का बलिदान कर एक दीपदान करती है। उसका यह दीपदान सर्वोच्च कोटि का होता है। जहाँ वह राज्य के उत्तराधिकारी को बचाने के लिए अपनी ममता को भी ताक पर रख देती है। पूरी कहानी बनवीर और पन्ना धाय के दीपदान पर केन्द्रित होने के कारण यह शीर्षक सर्वथा उचित है।
इस एकांकी के माध्यम से एकांकीकार देशप्रेम, त्याग, बलिदान और कर्तव्यपरायणता की शिक्षा दी है। स्वामिभक्ति के सामने अपने निजी स्वार्थों की भी बलि देनी पड़ती है यह पन्ना धाय के माध्यम से बताया गया है जो एकांकी की मूल शिक्षा है।

Teacher's Note:
a) शीर्षक 'दीपदान' की सार्थकता और पन्ना धाय के त्याग को स्पष्ट करें।
b) एकांकी से मिलने वाले नैतिक संदेश (देशप्रेम और बलिदान) को रेखांकित करें।

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