ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2016 with Solutions

Official ICSE Exam Papers for Class 10 Hindi

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Solved Previous Year Papers for Hindi

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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions

 

SECTION - A (40 Marks)

 

Q.1 Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : [15]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए :
(i) पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से फैशन एवं प्रदर्शन की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जिसके कारण अनेक प्रकार की समस्याओं का जन्म हो रहा है तथा नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। अपने विचार स्पष्ट कीजिए।
(ii) "सादगी भी लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ सकती है" कथन को ध्यान में रखते हुए अपने देश के किसी ऐसे व्यक्तित्व के विषय में लिखिए जिन्होंने ‘सादा जीवन उच्च विचार’ को आधार मानकर अपना जीवन बिताया,आपके ऊपर उस व्यक्तित्व का प्रभाव किस प्रकार का रहा यह भी स्पष्ट कीजिए।
(iii) योग के माध्यम से हम शरीर तथा मन दोनों को स्वस्थ कर सकते हैं, जीवन में योग की अनिवार्यता तथा उससे मिलने वाले लाभों का वर्णन करते हुए अपने विचार लिखिए।
(iv) एक कहानी लिखिए जिसका आधार निम्नलिखित उक्ति हो :
“मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना”
(v) नीचे दिये गये चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर उसका परिचय देते हुए कहानी अथवा लेख लिखिए, जिसका सीधा संबंध चित्र से होना चाहिए।

Answer:
(i) फैशन और नैतिक मूल्यों का ह्रास
नیت नए-नए परिधानों से अपने को सँवारना और अपने आपको अति आकर्षक दिखाना ही फैशन है। फैशन के पीछे मूलभुत कारण आकर्षण और प्रभावशीलता की होड़ है। फैशन किया ही इसलिए जाता है लोग उसे देखें और आश्चर्यचकित हों। वैसे तो प्रत्येक युग में फैशन का बोलबाला रहा है। पर आधुनिक युग में तो यह अपने चरम पर है। आज समय और परिस्थितियाँ इतनी परिवर्तित हुई हैं कि इस बदलाव का सीधा और साफ असर युवाओं पर नजर आ रहा है। अतिश्योक्ति नहीं होगी अगर यह कहा जाये कि न सिर्फ युवा बल्कि बच्चे भी इस फैशन से अछूते नहीं हैं। आज हम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में फैशन के प्रति सजता देख सकते हैं। जिस तीव्रता से फैशन के प्रति लोगों में आकर्षण बढ़ा है और हर बात को फैशन के नाम पर सहजता से लेने का प्रयास होता वह निश्चित रूप से शुभ संकेत तो कतई नहीं है। फैशन को बढ़ावा देने के अनेकों कारण हो सकते हैं। परंतु हमारे देश में पश्चिमी सभ्यता के कुछ ज्यादा ही प्रभाव है। हम पश्चिम की देखा देखी में अपने वास्तविक परिधानों और वेशभूषा को भूलते जा रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर एक देश की जलवायु, भौगोलिक परिस्थिति आदि पर उस देश का पहनावा निर्भर करता है। फैशन एक प्रकार का मीठा विष है जिसकी चपेट में हमारी युवा पीढ़ी अंधकार की गर्त में डूबी जा रही है। फैशन अवश्य करो परंतु उसके शिकार मत बनो। आज हमारी खासकर युवा पीढ़ी फैशन की इस अंथी होड़ में अपने संस्कार, सभ्यता और संस्कृति को शने-शने भूलती जा रही है। शालीनता और सादगी से उन्हें परहेज होता जा रहा है। अब तो हद यह हो गई है कि परिधानों से आप लड़का और लड़की में अंतर भी नहीं कर पाते आज तो लड़के भी कान छिदवाने और लंबे बाल रखने लगे हैं। लड़कियाँ भी लड़कों के समान ही वेशभूषा धारण करने लगी है। भारतीय परिधानों को आउट डेटेट कहकर नकार देते हैं। फैशन की इस प्रवृत्ति के कारण कई तरह के अपराध भी होते है और हमारे नैतिक मूल्यों का भी ह्रास होता है। अतः हमें चाहिए कि हम गलत और सही की पहचान कर ऐसे फैशन को अपनाए जिससे हमारी सभ्यता, संस्कृति और संस्कार न छूटे।

Teacher's Note:
a) ऐसे निबंधों में विषय के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों का संतुलित वर्णन करना आवश्यक होता है।
b) छात्रों को शब्दों की सीमा (लगभग 250 शब्द) का ध्यान रखते हुए व्याकरण संबंधी अशुद्धियों से बचना चाहिए।

 

Q.2 Write a letter in Hindi in approximately 120 Words on any one of the topics given below : [7]
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए :
(i) आज टेलीविजन द्वारा विभिन्न चैनलों पर अंधविश्वास तथा तंत्र-मंत्र से संबंधित कार्यक्रम दिखाकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री को इसकी जानकारी देते हुए ऐसे कार्यक्रमों पर रोक लगाने का अनुरोध कीजिए।
(ii) आपकी चचery बहन जो गाँव मे रहती है, उसकी दसवीं के बाद शिक्षा रोक दी गई है अत: उसकी आगे की पढ़ाई जारी रखने का निवेदन करते हुए अपने चाचाजी को पत्र लिखिए जिसमें नारी शिक्षा की आवश्यकता और लाभों की भी चर्चा कीजिए।

Answer:
(i)
सेवा में,
सूचना एवं प्रसारण मंत्री
21, मदर टेरसा क्रिसेन्ट
नई दिल्ली
विषय : अंधविश्वास तथा तंत्र-मंत्र से संबंधित कार्यक्रमों पर रोक लगाने हेतु पत्र।
महोदय,
इस पत्र द्वारा मैं आपका ध्यान आज टेलीविजन द्वारा विभिन्न चैनलों पर अंधविश्वास तथा तंत्र-मंत्र से संबंधित कार्यक्रमों की ओर दिलाना चाहता हूँ। आए दिन जिस चैनल पर आप नजर डाले कोई न कोई विज्ञापन तंत्र-मंत्र से ही संबंधित होता है कहीं कोई धागा, अँगूथी, तावीज बेच रहा है तो कहीं कोई धन लाभ से संबंधित यंत्र। इस तरह के विज्ञापनों और कार्यक्रमों ने किसी भी चैनल को अछूता नहीं छोड़ा है यहाँ तक की समाचार चैनल भी इस तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहे हैं। आज जहाँ हमारा देश सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहा है वहाँ इस प्रकार के कार्यक्रम लोगों को शंकित और भ्रमित करते हैं। दुर्भाग्य से आज टेलीविजन के अनेक चैनलों पर अंधविश्वास तथा तंत्र-मंत्र से संबंधित कार्यक्रमों की ऐसी भरमार हो गई है जिससे न केवल लोग प्रभावित बल्कि भ्रमित भी हो रहे हैं।
अतः आपसे मेरा अनुरोध है कि समस्या की ओर तुरंत संज्ञान लेते हुए इस तरह कार्यक्रमों को रोक लगाने का उचित प्रबंध करें।
सधन्यवाद।
भवदीय
कमल शर्मा
2/42, सरला निवास
आजाद चौक
माणिकपुर
चंडीगढ़
दिनाँक - 27 फरवरी 2015

Teacher's Note:
a) औपचारिक पत्र में विषय, संबोधन, और प्रेषक का विवरण सही प्रारूप में होना चाहिए।
b) भाषा औपचारिक, स्पष्ट और शालीन होनी चाहिए।

 

Q.3 Read the passage given below and answer in Hindi the questions that follow, using your own words as far as possible :- [10]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए :
[Passage printed on pages 3-4 of the question paper detailing the story of Harihar and his pilgrimage to Udupi]

1. हरियर क्या काम करता था? उसकी एक मात्र इच्छा क्या थी? [2]

Answer:
बहुत समय पहले एक गाँव में हरियर नाम का एक दयालु और सीधा-सच्चा किसान रहता था। वह खेती-बाड़ी का काम करता था। वह पूरा दिन खेत में जी तोड़-तोड़ मेहनत करता था और शाम का समय ईश्वर की प्रार्थना में बिताता था। जीवन में उसकी मात्र एक इच्छा थी। वह उडुपि के मंदिर में भगवान श्रीकृष्णा के दर्शन करना चाहता था।

Teacher's Note:
a) उत्तर गद्यांश के आरंभिक अंश से सीधे लिखा गया है।
b) छात्रों को प्रश्न में पूछे गए दोनों भागों का स्पष्ट उत्तर देना चाहिए।

 

2. हरियर को तीर्थयात्रा के मार्ग में कौन मिला? उसकी क्या स्थिति थी? [2]

Answer:
मार्ग में हरियर को एक स्थान पर एक बूढ़ा मिला। उसकी दशा बहुत ही दयनीय थी। वह कई दिनों से भूखा-प्यासा था और पीड़ा से कराह रहा था।

Teacher's Note:
a) घटना के क्रमानुसार बूढ़े व्यक्ति की स्थिति का वर्णन किया गया है।
b) मुख्य बिंदुओं जैसे 'भूखा-प्यासा' और 'पीड़ा से कराहना' को अवश्य शामिल करें।

 

3. हरियर ने बूढ़े व्यक्ति की सहायता कैसे की? [2]

Answer:
हरियर बूढ़े के घर पहुँचा। उसने सबसे पहले घर के सभी व्यक्तियों को भरपेट भोजन कराया। फिर बीमार बच्चे के लिए दवा ले आया। उसने बूढ़े को खेत में बोने के लिए बीज भी ला दिया। वह कुछ दिन वहाँ रुका। उसने बूढ़े आदमी की सेवा की, जिससे वह कुछ दिनों में स्वस्थ हो गया।

Teacher's Note:
a) हरियर द्वारा दी गई सहायता के सभी पहलुओं (भोजन, दवा, बीज और सेवा) को संक्षेप में लिखा गया है।
b) उत्तर को सटीक और गद्यांश के अनुकूल रखें।

 

4. हरियर ने घर लौटने का निश्चय क्यों किया? वहाँ लौटने पर हरियर ने क्या स्वप्न देखा? [2]

Answer:
बूढ़े की सहायता में हरियर के सारे पैसे खर्च हो गए अतः हरियर ने अपनी तीर्थयात्रा बीच में ही छोड़कर वापस घर लौटने का निश्चय किया।
उस रात हरियर ने सपने में भगवान श्रीकृष्ण को देखा, जो उससे कह रहे थे कि हरियर ही उनका सच्चा भक्त है। हरियर ने उस बूढ़े आदमी की सहायता की और अपनी इच्छा का बलिदान कर दिया। वह बूढ़ा आदमी कोई और नहीं स्वयं श्रीकृष्ण ही थे। हरियर की परीक्षा के लिए ही श्रीकृष्ण ने बूढ़े आदमी का वेश धारण किया था। श्रीकृष्ण ने यह भी कहा कि हरियर ही उनका सच्चा सेवक है।

Teacher's Note:
a) प्रश्न के दोनों भागों (लौटने का कारण और स्वप्न का विवरण) को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
b) स्वप्न के मुख्य संदेश को लिखना न भूलें।

 

5. इस गद्यांश से क्या शिक्षा मिलती है? [2]

Answer:
इस गद्यांश से सच्ची भक्ति की शिक्षा मिलती है। सच्ची भक्ति तीर्थयात्रा करने, दान-पुण्य करने या जप-तप करने में नहीं होता है। सच्ची भक्ति तो निस्वार्थ भाव से दीन-दुखियों की सेवा और परोपकार में होता है।

Teacher's Note:
a) गद्यांश का नैतिक निष्कर्ष स्पष्ट किया गया है।
b) परोपकार और निस्वार्थ सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति है, इस मूल भाव को रेखांकित किया गया है।

 

Q.4 Answer the following according to the instructions given: [6]
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए :

1. निम्नलिखित शब्दों से विशेषण बनाइए : [1]
- लोभ
- इतिहास

Answer:
- लोभ - लोभी
- इतिहास - ऐतिहासिक

Teacher's Note:
a) संज्ञा शब्दों से विशेषण शब्दों का निर्माण सही वर्तनी के साथ किया जाना चाहिए।
b) 'इतिहास' का विशेषण 'ऐतिहासिक' होता है, इसमें वर्तनी की अशुद्धि से बचें।

 

2. निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए : [1]
- बादल
- स्वतंत्र

Answer:
- बादल - मेघ, घन (अन्य: जलधर, जलद)
- स्वतंत्र - आजाद, मुक्त

Teacher's Note:
a) छात्रों को परीक्षा में पूछे गए निर्देशों के अनुसार केवल एक या दोनों शब्दों के पर्यायवाची लिखने होते हैं।
b) पर्यायवाची लिखते समय वर्तनी का विशेष ध्यान रखें।

 

3. निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए : [1]
- उपकार
- कोमल
- नूतन
- स्वामी

Answer:
- उपकार - अपकार
- कोमल - कठोर
- नूतन - पुरातन
- स्वामी - सेवक

Teacher's Note:
a) किन्हीं दो शब्दों के विलोम लिखने का निर्देश था, यहाँ सभी के उत्तर दिए गए हैं।
b) विलोम शब्द मूल शब्द के विपरीत सटीक अर्थ वाले होने चाहिए।

 

4. भाववाचक संज्ञा बनाइए : [1]
- अधिक
- भक्त

Answer:
- अधिक - अधिकता, आधिक्य
- भक्त - भक्ति

Teacher's Note:
a) विशेषण या जातिवाचक शब्दों से भाववाचक संज्ञा का निर्माण अभ्यास से ही संभव है।
b) सही प्रत्यय का प्रयोग करके ही भाववाचक संज्ञा बनाई जाती है।

 

5. निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए : [1]
- अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना
- बाल-बाल बचना

Answer:
- अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना - सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर रमेश ने मानो अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है।
- बाल-बाल बचना - इतनी बड़ी दुर्घटना में सोमेश मौत के मुँह से बाल-बाल बच गया।

Teacher's Note:
a) मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ऐसा होना चाहिए जिससे उसका अर्थ स्पष्ट हो जाए।
b) वाक्य रचना व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध होनी चाहिए।

 

6. कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार वाक्यों में परिवर्तन कीजिए : [3]
(a) महाराणा प्रताप के साहस की तुलना नहीं की जा सकती है। [1]
(रेखांकित शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कीजिए)
(b) मेरे घर में जो नौकर काम करता है वह भाग गया। [1]
(सरल वाक्य बनाइए)
(c) राजा का सेवक बहुत बुद्धिमान था। [1]
(लिंग बदलकर वाक्य दोबारा बनाइये )

Answer:
(a) महाराणा प्रताप का साहस अतुलनीय है।
(b) मेरे घर में काम करने वाला नौकर भाग गया।
(c) रानी की सेविका बहुत बुद्धिमती थी।

Teacher's Note:
a) वाक्य रूपांतरण करते समय मूल अर्थ में परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
b) लिंग परिवर्तन और वाक्य को सरल बनाने के नियमों का पालन करें।

 

SECTION - B (40 Marks)

 

(गद्य संकलन)

 

Q.5 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
"ऐसा मत कहो, महाराज। उम्र तो बहुत थी। पचास साठ रूपया महीना पेंशन मिलती तो कुछ और काम कहीं करके गुज़ारा हो जाता। पर क्या करें? पाँच साल नौकरी से बैठे हो गए और अभी तक एक कौड़ी नहीं मिली।"
भोलााराम
लेखक - हरिशंकर परसाई

1.उपर्युक्त कथन किसने, किससे और कब कहा? [2]

Answer:
उपर्युक्त कथन भोलााराम की पत्नी ने नारद से कहा। उपर्युक्त कथन तब कहा गया था, जब नारद मुनि भोलााराम के जीव को खोजने के लिए धरती पर आते हैं और उनकी पत्नी से इस विषय में बातचीत करते हैं।

Teacher's Note:
a) संदर्भ सहित वक्ता और श्रोता की स्पष्ट पहचान दी गई है।
b) पाठ का नाम 'भोलााराम का जीव' और लेखक का नाम याद रखना आवश्यक है।

 

2. श्रोता का संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
श्रोता एक पौराणिक पात्र हैं, उनका नाम नारद मुनि है। उन्हें देवताओं का ऋषि माना जाता है। उनमें यह सामर्थ्य है कि वे तीनों लोकों में कहीं भी घूम सकते हैं। देवता संकट के अवसर पर उनकी सहायता लेते रहते हैं। यमराज भी भोलााराम के जीव को खोज न पाने के कारण संकट में थे, इसलिए उन्होंने नारद मुनि से प्रार्थना की कि वो उनकी सहायता करें। नारद मुनि को इसी वजह से धरती पर आना पड़ा था।

Teacher's Note:
a) नारद मुनि के चरित्र और उनकी भूमिका का संक्षेप में सटीक वर्णन किया गया है।
b) पौराणिक संदर्भ को कहानी के प्रसंग से जोड़कर लिखा गया है।

 

3. श्रोता को भोलााराम के विषय में वक्ता से क्या पता चलता है? समझाकर लिखिए। [3]

Answer:
श्रोता को पता चलता है कि भोलााराम की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। पाँच वर्ष पहले वो अपने काम से रिटायर हो चुके थे पर अब तक उन्हें पेंशन मिलनी शुरू नहीं हुई थी। उन्होंने पेंशन पाने के लिए बहुत दरखास्त दिए पर रिश्वत न देने के कारण कोई फायदा नहीं हुआ। पाँच वर्षों में उसकी बीबी के सारे गहने बिक गए, घर के बर्तन बिक गए। अंत में चिंता और भूख के कारण भोलााराम की मृत्यु हो गई।

Teacher's Note:
a) भोलााराम की दयनीय स्थिति और सरकारी दफ्तरों की लाचारी का वर्णन किया गया है।
b) भ्रष्टाचार और पेंशन न मिलने की समस्या इस पाठ का केंद्रीय विषय है।

 

4. वक्ता श्रोता को कौनसा कार्य सिद्ध करने के लिए कहाँ भेजता है और उसका क्या परिणाम निकलता है? [3]

Answer:
भोलााराम की पत्नी उन्हें बताती है कि भोलााराम की मृत्यु गरीबी के कारण हुई है। पाँच वर्ष हो गए किन्तु भोलााराम की पेंशन नहीं मिल पायी है। परिवार के सारे सदस्य भुखमरी से मर रहे हैं। भोलााराम की पत्नी नारद मुनि से प्रार्थना करती है कि वो सिद्ध पुरुष है। कुछ ऐसा करें कि भोलााराम की रुकी हुई पेंशन मिल जाए।उसके बच्चों को भोजन मिल सके। इसका यह परिणाम निकलता है कि नारदमुनि स्वयं सरकारी दफ़्तर जाते हैं और भोलााराम की रुकी हुई पेंशन का ऑर्डर निकलवाने का प्रयास करते हैं।

Teacher's Note:
a) गद्यांश के आधार पर नारद मुनि द्वारा की गई सहायता के परिणाम को स्पष्ट किया गया है।
b) प्रशासनिक व्यवस्था पर व्यंग्य इस कहानी की मुख्य विशेषता है।

 

Q.6 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
मैं खिड़की के पास जा खड़ा हो गया। बाहर लू चल रही थी। नीचे धरातल पर कुछ लोग आ जा रहे थे .... वे ऊपर से बहुत लाचार और बेचारे लग रहे थे और मेरे मन से सबके लिए सद्भावना की नदियाँ फूट रही थीं ...
चप्पल
लेखक - कमलेश्वर

1. कथन का वक्ता कौन है? वह अस्पताल क्यों गया था? [2]

Answer:
उक्त कथन का वक्ता लेखक कमलेश्वर है। उनकी एक परिचित डॉक्टर मित्र की पत्नी जिसका नाम संध्या है। उसका गंभीर ऑपरेशन हुआ है। वो फिलहाल आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट के आई. सी. यू. में भर्ती हैं तथा मृत्यु से संघर्ष कर रही हैं। लेखक उसी को देखने की औपचारिकता निभाने के लिए अस्पताल गया था।

Teacher's Note:
a) वक्ता की पहचान और अस्पताल जाने का कारण स्पष्ट किया गया है।
b) लेखक और पत्र के संदर्भ को सही रूप में प्रस्तुत करें।

 

2. वक्ता अस्पताल में जाते समय क्या सोचता है? [2]

Answer:
लेखक अस्पताल में सोचता है कि इस संसार में कितना दुःख और कष्ट है। इस दुनिया में इंसान की मौत से एक लगातार लड़ाई चल रही है। इस दुःख, कष्ट और लड़ाई को सहने वाले सब एक जैसे ही हैं। दर्द और यातना सहने वाले इंसान-इنسان में भेद नहीं किया जा सकता क्योंकि पूरे संसार में दूध, आँसू और खून का रंग एक जैसा ही होता है। इसी तरह से हम दुःख, कष्ट और यातना के रंगों का भी बँटवारा नहीं कर सकते हैं। इस प्रकार लेखक अस्पताल में लोगों को देखकर दार्शनिक हो उठते हैं।

Teacher's Note:
a) लेखक की दार्शनिक सोच और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाया गया है।
b) 'दूध, आँसू और खून' के रंग की समानता वाले तर्क को मुख्य रूप से लिखें।

 

3. वक्ता को अस्पताल की किस मंजिल पर जाना था? लिफ्ट में जाते समय उसने किसे और किस दशा में देखा बताइए कि उसके साथ क्या घटना घटी थी? [3]

Answer:
वक्ता को आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट की सातवीं मंजिल पर जाना था। उन्हें वहाँ अपने डॉक्टर मित्र की पत्नी संध्या से मिलने जाना था। लिफ्ट में जाते समय उसने एक छोटे बच्चे को देखा जो अस्पताल द्वारा दी हुई बहुत बड़ी-सी धारीदार कमीज़ पहने हुए अपने पिता की गोद में था। बच्चा सड़क पार करते समय एक मोटर गाड़ी से टकरा गया था जिसके कारण उसकी जांघ की हड्डी टूट गयी थी। इसलिए उसका ऑपरेशन जाने वाला था।

Teacher's Note:
a) लिफ्ट के प्रसंग और घायल बच्चे की स्थिति का सविस्तार वर्णन किया गया है।
b) कहानी की मूल संवेदना बाल-सुलभ चप्पल के मोह और करुणा से जुड़ी है।

 

4. प्रस्तुत कहानी का उद्देश्य लिखिए। [3]

Answer:
‘चप्पल’ कहानी लेखक कमलेश्वर द्वारा लिखी हुई कहानियों में से एक है। इस कहानी का मुख्य उद्देश्य सामान्य-जन में करुणा, संवेदना, तथा परदुःख:कारता के भावों को जगाना है। लेखक ने यहाँ अस्पताल के दृश्यों तथा एक छोटे से बच्चे के अपने नीली हवाई चप्पलों के मोह के जरिए उपयुक्त भावों को बड़ी सफलतापूर्वक जगाने में सफलता पाई है।

Teacher's Note:
a) कहानी के उद्देश्य और केंद्रीय संदेश को स्पष्ट किया गया है।
b) मानवीय संवेदना और परोपकारिता इस कहानी का मुख्य संदेश है।

 

Q.7 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“जब कभी हम वीरो का हाल सुनते हैं तब हमारे अंदर भी वीरता की लहरें उठती हैं और वीरता का रंग चढ़ जाता है। परन्तु वह चिर-स्थायी नहीं होता, इसका कारण सिर्फ यही है कि हममें भीतर दृढ़ता का मलबा तो होता नहीं। सिर्फ खाली महल उसके दिखलाने के लिए बनाना चाहते हैं।”
सच्ची वीरता
लेखक - सरदार पूर्णसिंह

1. सच्ची वीरता के संबंध में लेखक ने क्या बताया है? [2]

Answer:
सच्ची वीरता शारीरिक बल का नहीं अपितु दृढ़ संकल्प, मानसिक क्षमता एवं निर्भयता का नाम है। वीरता का भाव युद्ध क्षेत्र में ही नहीं अपितु व्यक्तिगत जीवन, धार्मिक क्षेत्र, राजनीति, अर्थ व्यवस्था आदि क्षेत्रों में भी देखी जा सकती है। सच्चा वीर वही है जो निडरता के साथ अपने कर्तव्य का पालन करता है और जीवन में आने वाली बाधाओं का डटकर मुकाबला करता है। उनके प्रत्येक कार्य में नवीनता होती है और वह बाहरी दिखावे में विश्वास नहीं करता है। उनमें प्रेम, धैर्य, गंभीरता, सद्गुण और लोक-कल्याण की भावना विद्यमान होती है।

Teacher's Note:
a) सरदार पूर्णसिंह के निबंध 'सच्ची वीरता' के मूल तत्वों को स्पष्ट किया गया है।
b) सच्ची वीरता के आंतरिक गुणों पर विशेष बल दिया गया है।

 

2. वीरता का विकास किस प्रकार किया जा सकता है? तथा बताइए कि वीरता निराली और नई कैसे होती है? [2]

Answer:
लेखक स्पष्ट करना चाहता है कि मूलतः वीरता एक भाव है जिसे किसी कारखाने में बनाया नहीं जा सकता। असली वीर दुनिया की बनावट और दिखावट के मखौलैं के लिए नहीं जीते। वीर तो देवदार के दरख्तों की तरह जीवन के अरण्य में खुद-ब-खुद पैदा होते हैं और बिना किसी के पानी दिए, बिना किसी के दूध पिलाए, बिना किसी के हाथ लगाए तैयार होते हैं। दुनिया के मैदान में अचानक ही सामने आकर खड़े हो जाते हैं। वीरता हमेशा निराली और नई होती है। नयापन वीरता का खास अंग होता है। वीरता की नकल नहीं हो सकती वह हमेशा मौलिक और निराली होती है।

Teacher's Note:
a) वीरता की मौलिकता और उसके स्वाभाविक विकास का वर्णन किया गया है।
b) देवदार के वृक्षों का उदाहरण इस पाठ में वीरता की सहजता को समझाने के लिए दिया गया है।

 

3. वीर पुरुषों की क्या-क्या विशेषताएँ होती हैं? समझाकर लिखिये। [3]

Answer:
वीर पुरुष दयालु,परोपकारी और दृढ़ संकल्प वाला होता है। उसका मन उदार होता है तथा वह किसी परिस्थिति के समक्ष झुकता नहीं है। वीर पुरुष का दिल सबका दिल हो जाता है। उसका मन सबका मन हो जाता है। उसके ख्याल सबके ख्याल हो जाते हैं। सबके संकल्प उसके संकल्प हो जाते हैं। उसका बल सबका बल हो जाता है। वह सबका और सब उसके हो जाते हैं।

Teacher's Note:
a) वीर पुरुषों के उदात्त स्वभाव और सर्वव्यापकता का सुंदर वर्णन किया गया है।
b) लेखक की शैली और भाषा के अनुसार वीर के गुणों को संक्षेप में लिखें।

 

4. मीराबाई तथा महाराज रणजीत सिंह के उदाहरणों द्वारा लेखक ने क्या समझाया है? स्पष्ट कीजिये। [3]

Answer:
राजाजी ने ज़हर के प्याले से मीराबाई को डराना चाहा। मगर मीरा ने ज़हर को अमृत मानकर पी लिया। फिर भूखे शेर और मस्त हाथी के सामने रख दी गई मगर वह जानवर भी उस देवी के चरणों की धूल को अपने मस्तक पर मल के चल दिए। मीरा के उदाहरण द्वारा लेखक समझाना चाहते हैं कि सच्चे वीर दुनिया के बादशाहों से नहीं डरते क्योंकि उन्हें अपने बादशाह और अपनी भक्ति पर भरोसा होता है। उसी प्रकार रणजीत सिंह ने चढ़ी हुई अटक को पार करने के लिए स्वयं अपने घोड़े को पानी में डाल दिया। कहते हैं नदी ने खुद उन्हें आगे बढ़ने के लिए रास्ता दे दिया। उनके उदाहरण से यह सिद्ध होता है कि प्रकृति भी वीरों का साथ देती है।

Teacher's Note:
a) मीराबाई और रणजीत सिंह के ऐतिहासिक/सांस्कृतिक उदाहरणों के माध्यम से वीरता की पराकाष्ठा को समझाया गया है।
b) प्रकृति और ईश्वर भी साहसी व सच्चे वीरों का साथ देते हैं, यह मुख्य संदेश है।

 

चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
लेखक - प्रकाश नगायच

Q.8 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“हमें युवराज न कहिए, गुरुदेव! आज चन्द्रगुप्त की स्थिति वही है जो मगध के एक साधारण नागरिक की है।” चन्द्रगुप्त ने दुःखी स्वर में कहा-” फिर भी आप विश्वास रखिए, मगध चन्द्रगुप्त का है और रहेगा। और केवल मगध हो क्यों, सारा भारतवर्ष उसका है। वह सारे भारत का है। जब तक शरीर में प्राण हैं, वह विदेशियों को भारत की पवित्र भूमि पर पाँव न रखने देगा।”

1. गुरु कौन हैं? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
यहाँ पर गुरु राजपुरोहित विष्णु शर्मा हैं। वे चन्द्रगुप्त, वीरसेन और देववर्मा के गुरु हैं।

Teacher's Note:
a) नाटक/उपन्यास के पात्र विष्णु शर्मा का परिचय दिया गया है।
b) वे चन्द्रगुप्त के मार्गदर्शक और गुरु हैं।

 

2. मगध की दशा में क्या परिवर्तन हुआ था तथा क्यों? [2]

Answer:
सम्राट समुद्रगुप्त की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे रामगुप्त ने छलपूर्वक राजगाद्दी हथिया ली थी। रामगुप्त एक अच्छा शासक नहीं था वह कायर और धूर्त था। उसके शासन में प्रजा सुखी नहीं थी। उसके शासनकाल में शकों के आक्रमण शुरू हो गए थे। पूर्व से नागराजाओं का आक्रमण तथा दक्षिण से रुद्र देव की शक्ति बढ़ने लगी थी। इस प्रकार चारों ओर से मगध पर संकट मंडरा रहा था।

Teacher's Note:
a) मगध की राजनीतिक स्थिति और रामगुप्त की अयोग्यता के कारण उत्पन्न संकट को दर्शाया गया है।
b) बाह्य आक्रमणों और आंतरिक कमियों का उल्लेख आवश्यक है।

 

3. चन्द्रगुप्त सामर्थ्यवान होते हुए भी मगध की दशा सुधारने के लिए विद्रोह क्यों नहीं करना चाहता था? समझाकर लिखिये। [3]

Answer:
चन्द्रगुप्त सामर्थ्यवान होते हुए भी मगध की दशा सुधारने के लिए विद्रोह नहीं करना चाहता था क्योंकि इसके लिए चन्द्रगुप्त को अपने ही भाई रामगुप्त को गद्दी से हटाना होगा इससे राज्य में गृह युद्ध की संभावना बढ़ जाती थी जिसका परिणाम मगध का विनाश भी हो सकता था अतः चन्द्रगुप्त ने ऐसा नहीं किया।

Teacher's Note:
a) चन्द्रगुप्त की राष्ट्रभक्ति और पारिवारिक मर्यादा के प्रति निष्ठा को स्पष्ट किया गया है।
b) गृह युद्ध के खतरे से मगध को बचाने की उसकी सोच मुख्य बिंदु है।

 

4. गृह युद्ध से आप क्या समझते हैं? गृह युद्ध से देश पर क्या प्रभाव पड़ता है? उपन्यास के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [3]

Answer:
गृह युद्ध का अर्थ है अपने ही घर में सत्ता के लिए लड़ा गया युद्ध। यहाँ रामगुप्त ने सम्राट समुद्रगुप्त की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे रामगुप्त ने छलपूर्वक राजगाद्दी हथिया ली थी। रामगुप्त एक अच्छा शासक नहीं था वह कायर और धूर्त था। अब ऐसे में चन्द्रगुप्त की अपने भाई रामगुप्त को गद्दी से हटाने के लिए उसका वध करना होगा जिसके परिणामस्वरूप राज्य में गृह युद्ध भड़क सकता था और इसका अनुचित फायदा दुश्मन राजा उठाकर मगध पर अपना अधिकार जमा सकते थे।

Teacher's Note:
a) गृह युद्ध की परिभाषा और राष्ट्र पर पड़ने वाले उसके दुष्प्रभावों को स्पष्ट किया गया है।
b) बाहरी शत्रुओं द्वारा इसका लाभ उठाने की संभावना का विशेष उल्लेख करें।

 

Q.9 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“और फिर महादेवी को इसकी चिंता क्यों? आप मगध के विशाल साम्राज्य की महादेवी हैं। आपके एक संकेत पर मगध की सेना ही नहीं, प्रजा भी हँसते-हँसते प्राण न्यौछावर कर सकती है।”

1. महादेवी किसे कहा गया है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
महादेवी सम्राट रामगुप्त की पत्नी है। वह पंजाब के शासक की पुत्री थी, जिसे चन्द्रगुप्त ने युद्ध में पराजित कर प्राप्त किया था। चन्द्रगुप्त की इस वीरता पर प्रसन्न होकर सम्राट समुद्रगुप्त ने महादेवी का विवाह चन्द्रगुप्त के साथ तय कर दिया था। परंतु सम्राट समुद्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात रामगुप्त जबरन महादेवी से विवाह कर लेता है।

Teacher's Note:
a) महादेवी (ध्रुवस्वामिनी) के परिचय और पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया गया है।
b) रामगुप्त द्वारा जबरन विवाह किए जाने के तथ्य को रेखांकित करें।

 

2. उक्त कथन की वक्ता कौन है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
उक्त कथन की वक्ता देवसेना है। देवसेना महादेवी की दासी है।

Teacher's Note:
a) देवसेना के पात्र और महादेवी के साथ उसके संबंध का परिचय दिया गया है।
b) वह महादेवी की विश्वासपात्र और हितैषी है।

 

3. महादेवी चिंतित क्यों है? देवसेना उसे क्या समझाती है? स्पष्ट कीजिए। [3]

Answer:
महादेवी के पिता को युद्ध में पराजित कर चन्द्रगुप्त ने महादेवी को प्राप्त किया था। चन्द्रगुप्त ने उसके पिता को वचन भी दिया था कि वह उसके मान-सम्मान की रक्षा करेगा। पाटิล पुत्र पहुँचने के बाद महादेवी का चन्द्रगुप्त के प्रति प्रेम और बढ़ गया था जब सम्राट समुद्रगुप्त ने उसका विवाह चन्द्रगुप्त से करना तय कर दिया था। परंतु भाग्य ने साथ न दिया और उसका विवाह जबरन रामगुप्त से हो गया जो महादेवी को अस्वीकार्य था। इस पर देवसेना उन्हें समझाते हुए कहती है कि नारी कोई वस्तु नहीं है। वह पुरुष की सेवा करने के बाद भी सम्मान पाने की अधिकारी है। वह किसी की दासी नहीं है। देवसेना कहती है कि वे अब मगध साम्राज्य की रानी है और सभी के मन में उनके लिए अपार स्नेह और सम्मान है तो वे व्यर्थ में चिंतित न रहें।

Teacher's Note:
a) महादेवी की मानसिक पीड़ा और देवसेना द्वारा दी गई सांत्वना को स्पष्ट किया गया है।
b) नारी के आत्मसम्मान और अधिकारों की बात इस प्रसंग में प्रमुखता से आती है।

 

4. नारी के जीवन के बारे में महादेवी के क्या विचार हैं? समझाकर लिखिए। [3]

Answer:
नारी जीवन के बारे में महादेवी के वैसे तो उच्च विचार हैं। परंतु उसे इस बात का दुःख सालता रहता है कि नारी का सम्मान करने की बजाय बार-बार उसे दाँव पर लगाकर अपमान किया जाता है। नारी को इतनी पराधीन बना दिया गया है कि उसका अपना कोई अस्तित्व ही नहीं है। उसके शासकों की शर्तों को पूरा करने का माध्यम भर बना दिया गया है।

Teacher's Note:
a) नाटक में नारी की विडंबनापूर्ण स्थिति और महादेवी की पीड़ा को व्यक्त किया गया है।
b) समाज में नारी की परतंत्रता और उसकी वेदना को मुख्य बिंदु बनाएं।

 

Q.10 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“उसके लिए चंद्रगुप्त को बुलाने का अर्थ था चंद्रगुप्त से सहायता की भीख माँगना अर्थात चंद्रगुप्त के आगे झुकना और वह उसे अपना अपमान समझता था। साथ ही उसे सबसे अधिक भय और चिंता ध्रुवस्वामिनी की ओर से रही।”

1. चंद्रगुप्त को बुलाना क्यों आवश्यक हो गया था? उसे कौन बुलाना नहीं चाहता था? [2]

Answer:
मगध सम्राट रामगुप्त तथा उसकी सेना को चारों ओर से घिरी घाटी में शकराज की सेना द्वारा घेरा जा चुका था। अब सम्राट रामगुप्त के पास इस सब से निकलने का कोई मार्ग शेष रह 1नहीं गया था। वह स्वभाव से ही कायर था अतः ऐसे में उसे सलाह दी गई कि वे अपने भाई चंद्रगुप्त को सहायता के लिए बुलवा लें।

Teacher's Note:
a) रामगुप्त की सेना के घिर जाने और संकट की स्थिति को स्पष्ट किया गया है।
b) रामगुप्त स्वयं चन्द्रगुप्त को बुलाना नहीं चाहता था।

 

2. मंत्रियों तथा सेनाध्यक्षों ने क्या प्रस्ताव रखा और क्यों? [2]

Answer:
मंत्रियों तथा सेनाध्यक्षों ने सम्राट रामगुप्त के सामने चंद्रगुप्त को बुलाने का प्रस्ताव रखा क्योंकि उन सब की राय यह थी कि ऐसी विकट परिस्थिति से यदि उन्हें कोई बचा सकता है तो वह केवल चंद्रगुप्त है। चंद्रगुप्त वीर, साहसी और विवेकशील था और वह अपने साम्राज्य को बचाने भी जरूर आएगा इसलिए सभी चाहते थे कि राज्य पर आए संकट से बचाने के लिए चंद्रगुप्त को बुलाना ही एकमात्र उपाय था।

Teacher's Note:
a) मंत्रियों के व्यावहारिक निर्णय और चन्द्रगुप्त की वीरता पर उनके विश्वास को दर्शाया गया है।
b) राज्य रक्षा सर्वोपरि है, इस भावना को मंत्रियों ने प्रदर्शित किया।

 

3. चंद्रगुप्त से सहायता माँगना अपमान क्यों समझा जा रहा था? समझाकर लिखिए । [3]

Answer:
सम्राट रामगुप्त ने अपने पिता के देहांत की खबर तक चंद्रगुप्त तक नहीं पहुँचाई थी और राजसिंहासन पर कब्जा कर दिया था जबकि उसके पिता ने पहले ही चंद्रगुप्त को युवराज घोषित कर दिया था। इतना ही नहीं रामगुप्त ने चंद्रगुप्त की होनेवाली पत्नी से जबरन विवाह भी कर लेता है। गत पाँच वर्षों से रामगुप्त का चंद्रगुप्त से कोई संबंध भी नहीं रहा था इसलिए चंद्रगुप्त से सहायता माँगना अपमान समझा जा रहा था।

Teacher's Note:
a) रामगुप्त द्वारा किए गए अन्यायों और धोखाधड़ी के इतिहास को स्पष्ट किया गया है।
b) सिंहासन की छीना-झapti और ध्रुवस्वामिनी का अपहरण मुख्य कारण थे।

 

4. रामगुप्त के मन में ध्रुवस्वामिनी की ओर से भय के क्या कारण थे? समझाकर लिखिए। [3]

Answer:
रामगुप्त ने ध्रुवस्वामिनी और उसकी दासी के बीच हुए वार्तालाप को सुन लिया था कि अब भी ध्रुवस्वामिनी चंद्रगुप्त से ही प्यार करती है। जबरन विवाह करने के बाद भी वह ध्रुवस्वामिनी का प्रेम अब तक प्राप्त नहीं कर पाया था। ऐसे समय में यदि चंद्रगुप्त को यहाँ बुलाया जाता है और ध्रुवस्वामिनी और चंद्रगुप्त का आमना-सामना हो जाता है तो वे दोनों फिर से एक हो सकते हैं और यही रामगुप्त के मन में ध्रुवस्वामिनी की ओर से भय का कारण था।

Teacher's Note:
a) रामगुप्त के मन की असुरक्षा और अपराध बोध को उजागर किया गया है।
b) ध्रुवस्वामिनी के सच्चे प्रेम और चन्द्रगुप्त की वापसी से उसकी सत्ता और पत्नी दोनों के छिनने का डर था।

 

एकांकी सुमन

Q.11 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
तुम तो बिना बात ही बिगड़ उठते हो! देखो बिरादरी का मामला है। आज तुम न जाओगे उसके यहाँ, तो कल वे भी आपके यहाँ नहीं आएँगे। आखिर तुम्हें भी तो बेटे-बेटियों की शादी करनी है।
मेल-मिलाप
लेखक - देवराज 'दिनेश'

1. वक्ता कौन है और उसने यह किस संदर्भ में कहा है? [2]

Answer:
यहाँ पर वक्ता मंगलसिंह की पत्नी राधा है। वह वक्ता को अपने भाई की बेटी के विवाह में जाने के लिए समझाती है कि भाई-भाई के संबंध इस प्रकार से तोड़े नहीं जाते हैं। बेटियाँ तो सभी की साझी होती है। यदि वे इस विवाह में नहीं जाते हैं तो उनके ही परिवार की बदनामी होगी। अतः अपनी जिद्द को छोड़कर, समझदारी दिखाते हुए समाज और बिरादरी का सम्मान करते हुए वक्ता को इस विवाह में शामिल होना ही चाहिए।

Teacher's Note:
a) राधा के व्यावहारिक दृष्टिकोण और पारिवारिक रिश्तों के महत्व को समझाया गया है।
b) समाज और बिरादरी के साथ मेल-मिलाप बनाए रखने की बात कही गई है।

 

2. वक्ता को बिरादरी की चिंता क्यों है? वह अपने पति को क्या समझाना चाहती है? [2]

Answer:
वक्ता राधा अर्थात् मंगलसिंह की पत्नी है। उसे इस बात की चिंता है कि अभी कुछ ही दिनों बाद स्वयं उसकी बेटी का विवाह होने वाला है यदि इस समय अपने देवर की बेटी के विवाह में शामिल नहीं होंगे तो उनकी बिरादरी क्या कहेगी क्योंकि गाँव में तो ऐसी बातों को कुछ ज्यादा ही तूल दिया जाता है। इससे उनके परिवार की केवल बदनामी ही होगी इसलिए वह अपने पति को समझाती है कि घरेलू दुश्मनी और पारिवारिक व्यवहारों को अलग-अलग रखना चाहिए। वैसे भी बेटियाँ तो सभी की साझी होती है। यदि वे इस विवाह में नहीं जाते हैं तो उनके ही परिवार की बदनामी होगी। अतः अपनी जिद्द को छोड़कर,समझदारी दिखाते हुए समाज और बिरादरी का सम्मान करते हुए वक्ता को इस विवाह में शामिल होना ही चाहिए।

Teacher's Note:
a) राधा की दूरदर्शिता और सामाजिक सरोकारों की चिंता को स्पष्ट किया गया है।
b) अपनी संतान के विवाह और सामाजिक मर्यादाओं का हवाला दिया गया है।

 

3. श्रोता को वक्ता की बातें अच्छी क्यों नहीं लगती? वह बिरादरी के विषय में क्या कहता है? [3]

Answer:
यहाँ पर श्रोता मंगलसिंह है उसे अपनी पत्नी की बात इसलिए अच्छी नहीं लगती क्योंकि वह भाइयों के बीच की दुश्मनी भुलाने को कहती है और मेल-मिलाप से रहने की सलाह देती है। वह बिरादरी के बारे में ख्याल रखता है कि वह उनके सहयोग के बिना भी सब-कुछ कर सकता है और इसका कारण यह है कि वह खाता-पीता किसान है और बड़े ही हठी स्वभाव का होने के कारण वह किसी की बात नहीं मानता है। किसी पर आश्रित न होने के कारण भी उसका किसी के साथ उसका कोई लेना-देना नहीं है। और इसलिए वह अपनी मर्जीनुसार चलता है यहाँ तक कि वह अपनी पत्नी के अच्छे सुझावों को भी नहीं मानता है।

Teacher's Note:
a) मंगलसिंह के हठी, अड़ियल और अहम्वादी स्वभाव को दर्शाया गया है।
b) आर्थिक संपन्नता के कारण उपजे अहंकार को लेखक ने रेखांकित किया है।

 

4. पास-पड़ोस में रहने के लिए मनुष्य का व्यवहार कैसा होना चाहिए? तथा इस एकांकी से क्या शिक्षा मिलती है? [3]

Answer:
पास-पड़ोस में रहने के लिए मनुष्य का व्यवहार मेल-मिलाप से परिपूर्ण होना चाहिए। यही इस कहानी से शिक्षा से भी मिलती है। मेल-मिलाप से ही गाँव, समाज और देश की प्रगति निहित है। आपसी वैमनस्य से केवल नुकसान ही होता है। मनुष्य को यदि प्रगति करनी है तो उसे सभी के साथ मेल-मिलाप से रहना चाहिए।

Teacher's Note:
a) एकांकी का मुख्य संदेश और सामाजिक सद्भाव के महत्व को स्पष्ट किया गया है।
b) आपसी बैर और अहंकार को छोड़कर मिलजुलकर रहने की सीख दी गई है।

 

Q.12 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
‘‘रोने से उन्हें दुःख होगा। उन्होंने प्राण दे दिए, पर शासन और जनता का संतुलन ठीक कर दिया। वे शहीद हो गए, पर दूसरों को बचा गए। नगर में अब बिल्कुल शांति है। सब मौन सगर्व इन बलिदानों की चर्चा कर रहे हैं। सब शोक संतप्त हैं।’’
सीमा-रेखा
लेखक - विष्णु प्रभाकर

1. वक्ता कौन है? उसके अनुसार कौन शहीद हो गया? [2]

Answer:
यहाँ वक्ता शरत चंद्र है। उनके अनुसार सुभाष चंद्र शहीद हो गया है।

Teacher's Note:
a) एकांकी के पात्र शरत चंद्र के कथन और प्रसंग को स्पष्ट किया गया है।
b) देश के लिए बलिदान देने वाले नायक का उल्लेख है।

 

2. बलिदान किसने दिया? बताये उनके बलिदान पर गर्व का अनुभव क्यों किया जा रहा था? [2]
Answer:
जननेता सुभाष चंद्र और कैप्टन विजय चंद्र ने बलिदान दिया और इन्हीं दोनों के बलिदान पर गर्व अनुभव किया जा रहा था।

Teacher's Note:
a) बलिदान देने वाले वीर नायकों के नाम बताए गए हैं।
b) उनके त्याग से समाज और देश में संतुलन स्थापित होने के गर्व को दर्शाया गया है।

 

3. शासन और जनता के बीच का संतुलन कब बिगड़ता है और उसे कैसे ठीक किया जा सकता है? अपने विचार व्यक्त कीजिये। [3]
Answer:
शासन और जनता के बीच असंतुलन तब बिगड़ता है जब दोनों ही अपने कर्तव्यों को तो भुला देते हैं परन्तु अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहते हैं। इस प्रकार के असंतुलन को दूर करने के लिए शासक और जनता दोनों को ही अपने-अपने दायित्वों को निभाना होगा। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने कार्यों को जिम्मेदारी और ईमानदारी से करें तो इस प्रकार की अव्यवस्था नहीं फैलेगी।

Teacher's Note:
a) शासन और जनता के परस्पर दायित्वों पर प्रकाश डाला गया है।
b) अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन ही संतुलन की कुंजी है।

 

4. किसी भी प्रजातांत्रिक व्यवस्था में हड़ताल या प्रदर्शन आदि करना कहाँ तक न्यायसंगत है? समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
किसी भी प्रजातांत्रिक व्यवस्था में हड़ताल या प्रदर्शन आदि करना न्यायसंगत बिल्कुल भी उचित नहीं है। देश और देशवासियों दोनों को अपने-अपने कर्तव्यों का ध्यान रहना चाहिए। हड़तालें, तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट, सांप्रदायिक दंगों से न जनता का भला होता है और न देश का। राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना किसी के भी हित में नहीं है।

Teacher's Note:
a) लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध के शांतिपूर्ण तरीकों और राष्ट्र संपत्ति की सुरक्षा के महत्व को समझाया गया है।
b) हिंसा और तोड़फोड़ राष्ट्र विरोधी कृत्य हैं।

 

Q.13 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : [10]
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“एक पखवारे से बराबर लड़ाई हो रही है - अतौरौलिया, आजमगढ़, मगहर - हर जगह कुंवरसिंह, हर जगह तूफ़ान, मगर गंगा भैया ने कैसी शक्ति उस बूढ़े कुंवरसिंह के बदन में फूँक दी है। बिजली की जोत है कि पल में चकाचौंध चमक कर दे। सावन की झड़ी है कि जो थमने का नाम ही न ले।”
विजय की वेला
लेखक - जगदीशचन्द्र माथुर

1. एक पखवारे का क्या तात्पर्य है? लड़ाई किससे और क्यों हो रही थी? [2]
Answer:
एक पखवारे का अर्थ 15 दिन है। सन् १८५७ में जब अंग्रेजी हुकुमत के विरुद्ध विद्रोह की आग भड़क उठी थी, तो बिहार में भी आजादी के उन दीवानों ने आरा के राजा कुँवर सिंह ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई का बिगुल बजा दिया था।

Teacher's Note:
a) 'पखवारे' शब्द का अर्थ और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ को स्पष्ट किया गया है।
b) अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता की लड़ाई का उल्लेख है।

 

2. सावन की झड़ी है कि जो थमने का नाम न ले - पंक्ति से एकांकीकार का क्या तात्पर्य है? स्पष्ट कीजिये। [2]
Answer:
उपर्युक्त पंक्ति एकांकीकार का तात्पर्य महाराज कुँवरसिंह की अद्भुत शक्ति व कर्मशीलता से है। कुँवरसिंह अस्सी वर्ष के होने के बावजूद अंग्रेजों को मात-पर-मात देते आ रहे हैं। जिस प्रकार सावन में एक बार वर्षा झड़ी का रूप धारण कर ले तो लगातार चलती है, उसी प्रकार महाराज कुँवरसिंह भी अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए थकते नहीं हैं। पंद्रह दिन से युद्ध चल रहा था और महाराज अतौरौलिया, आजमगढ़ तथा मगहर में अंग्रेजों का डटकर मुकाबला करते रहे।

Teacher's Note:
a) सावन की झड़ी के प्रतीक के माध्यम से कुँवर सिंह की अनथक ऊर्जा को दर्शाया गया है।
b) उनकी अदम्य जिजीविषा और वीरता की प्रशंसा की गई है।

 

3. यहाँ किसकी और किस प्रकार प्रशंसा की जा रही है? समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
यहाँ महाराज कुँवरसिंह की प्रशंसा की जा रही है। सन् १८५७ में जब अंग्रेजी हुकुमत के विरुद्ध विद्रोह की आग भड़क उठी थी, तो बिहार में भी आजादी के उन दीवानों ने आरा के राजा कुँवर सिंह ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई का बिगुल बजा दिया था। कुँवरसिंह अस्सी वर्ष के होने के बावजूद अंग्रेजों को मात-पर-मात देते आ रहे हैं। जिस प्रकार सावन में एक बार वर्षा झड़ी का रूप धारण कर ले तो लगातार चलती उसी प्रकार महाराज कुँवरसिंह भी अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए थकते नहीं हैं। पंद्रह दिन से युद्ध चल रहा था और महाराज अतौरौलिया, आजमगढ़ तथा मगहर में अंग्रेजों का डटकर मुकाबला करते रहे।

Teacher's Note:
a) 1857 के नायक कुँवर सिंह के अद्वितीय साहस और युद्ध कौशल का वर्णन किया गया है।
b) वृद्धावस्था में भी उनके भीतर देशप्रेम की ज्वाला धधक रही थी।

 

4. प्रस्तुत एकांकी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिये। [3]
Answer:
प्रस्तुत एकांकी का शीर्षक अत्यंत उपयुक्त तथा सटीक है। विजय की बेला एकांकी के नायक महाराज कुँवरसिंह वीर, देशभक्त, साहसी और विवेकशील योद्धा के रूप में उभरते हैं। अस्सी वर्ष की अवस्था में भी वे जवानों को अपनी वीरता से लज्जित कर सकते हैं। उनकी तुलना लेखक ने बूढ़े शेर से की है। कुँवरसिंह अदम्य उत्साही और निर्भीक हैं। वे शरीर पर लगे जख्मों की भी परवाह नहीं करते हैं इसलिए जब उनकी घायल भुजा को कोई काटने के लिए तैयार न हुआ तो उन्होंने स्वयं ही उसे काट दिया। कुँवरसिंह प्रजा वत्सल राजा होने के कारण अपने अंतिम समय में अपने स्थान पर उचित उत्तराधिकारी का चयन करते हैं। अपने भाई अमरसिंह को अंग्रेजों को भगाने का निर्देश देते हैं। उन्हें पंद्रह दिन तक अंग्रेज से लड़ाई के बाद जो विजय प्राप्त हुई थी उसी आत्मिक संतुष्टि का सुख वे अपने अंतिम समय में ले रहे थे।

Teacher's Note:
a) एकांकी के शीर्षक 'विजय की वेला' की सार्थकता को कुँवर सिंह के अंतिम विजयी क्षणों के माध्यम से सिद्ध किया गया है।
b) उनका महान त्याग और देश की स्वतंत्रता के प्रति समर्पण शीर्षक को सार्थक बनाता है।

 

काव्य-चन्द्रिका

Q.14 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : [10]
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
“हर परिवर्तन से प्राण-शक्ति ले सकते हैं।
हर शक्ति स्नेह के चरणों पर चढ़ क्यों न जाए,
इसलिए उदय का क्षण जो आने वाला है,
पंछी उसमें उल्लास, गीत यदि नहीं गाये-
तो धरती से नभ तक की सारी सृष्टि व्यर्थ,
तो नभ से धरती तक का वातावरण लाज,
तुम उदय काल में मौन नहीं रह जाना मन,
कल के जैसा निकलेगा सूरज अभी आज।”
उदय का क्षण
कवि - भवानीप्रसाद मिश्र

1.परिवर्तन का क्या अर्थ है? परिवर्तन से हम प्राण-शक्ति कैसे प्राप्त कर सकते है? [2]
Answer:
संसार की प्रत्येक चीज अस्थाई है। चाहे प्रकृति हो या मनुष्य का जीवन, सब कुछ बदलता रहता है। दिन के बाद रात और रात के बाद दिन, यह चक्र चलता रहता है। वर्षा-ग्रीष्म-शीत ये तीनों ऋतुएँ भी क्रमशः आती-जाती रहती हैं। उसी तरह मनुष्य का जीवन भी है। परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख आता जाता रहता है। इसलिए कहा जाता है कि “परिवर्तन संसार का नियम है”। परिवर्तन प्रकृति का अटल नियम है। यह परिवर्तन मानव जीवन को प्राण-शक्ति देता है। इस परिवर्तन के फलस्वरूप दिन-रात होते हैं। दिनभर कर्म करने के बाद रात को कर्म की थकान को उतारने के लिए प्रकृति उचित वातावरण का निर्माण करती है। इससे मनुष्य स्फूर्ति, जोश और शक्ति प्राप्त करने में सफल होता है जिसकी सहायता से वह नए दिन की शुरुआत करता है।

Teacher's Note:
a) परिवर्तन के दार्शनिक और प्राकृतिक सत्य को समझाया गया है।
b) परिवर्तन से किस प्रकार नई ऊर्जा मिलती है, इसका वर्णन किया गया है।

 

2. उदय के क्षण में क्या-क्या होता है? कवि ने पक्षियों को क्या करने को कहा है? [2]
Answer:
कवि का मानना है कि उदय का क्षण मानव जीवन में नयी ताज़गी, उमंग और जोश भर देता है। सम्पूर्ण प्रकृति सूर्य की स्वर्णिम आभा में डूब जाती है। हर तरफ सौन्दर्य की अनुभूति होती है। प्रभात होते ही पूरी प्रकृति आनंदमग्न दिखाई देने लगती है। रात्रि का आलस्य दूर होने लगता है। विश्राम की वजह से पूरे संसार में एक नई स्फूर्ति आ गयी होती है। सूर्य का उदित होना, पक्षियों का चहचहाना, फूलों का खिलना यह सब मिलकर संकेत करने लगते हैं कि मनुष्य को दुबारा अपने काम पर लग जाना चाहिए। ऐसे उदयकाल में कवि पक्षियों को कलरव करने के लिए कहता है।

Teacher's Note:
a) भोर या उदयकाल के प्राकृतिक दृश्यों का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया गया है।
b) प्रकृति के साथ-साथ पक्षियों के उल्लास का वर्णन है।

 

3. उदय के क्षण में कवि ने हमें क्या करने के लिए प्रेरित किया है और क्यों? [3]
Answer:
कवि का मानना है कि मानव जीवन में उदय का क्षण अत्यंत महत्त्वपूर्ण और उल्लास से भरा होता है। इस क्षण में मनुष्य को नये उत्साह, जोश और स्फूर्ति के साथ अपने दिन के कार्य में लग जाना चाहिए। यह क्षण आशा की नयी किरण लेकर आता है। अतः मनुष्य को अपने कर्म-पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।

Teacher's Note:
a) कर्मशीलता और नए उत्साह के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है।
b) सुबह का समय आलस्य त्यागने और कार्य करने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

 

4. कल के जैसा निकलेगा सूरज अभी आज - पंक्ति के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं। [3]
Answer:
प्रस्तुत पद्य खंड “उदय का क्षण” नामक कविता से लिया गया है। इसके कवि श्री भवानीप्रसाद मिश्र जी हैं। भवानीप्रसादजी ने अपनी कविताओं में गाँधीवादी विचारधारा को नवीन शैली में अभिव्यक्ति दी। इन्होंने प्रकृति की विभिन्न छवियों को सीधी सरल भाषा में रूपांतरित किया। मनुष्य के जीवन में परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। कभी अच्छा समय तो कभी बुरा समय आता-जाता रहता है। ‘आज भी सूरज निकलेगा’ इन शब्दों द्वारा कवि परिस्थितियों के इस बदलाव की ओर संकेत कर रहे हैं। अभी भले रात है किंतु कुछ समय बाद सूरज निकलेगा और चारों ओर प्रकाश छा जाएगा। इसी तरह भले अभी संकटों के बादल छाए हुए हैं। कोई मार्ग नहीं दिख रहा है किंतु थोड़े समय बाद ही उम्मीदों की किरण इन संकटों के बादल को चीरते हुए आएगी और उनसे बाहर निकलने का मार्ग बताएगी।

Teacher's Note:
a) आशावाद और निराशा के बाद सुख के आगमन का संदेश दिया गया है।
b) प्रकृति के उदाहरण से मानव जीवन में संघर्ष के बाद सफलता की उम्मीद बंधाई गई है।

 

Q.15 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : [10]
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
मेरे नए खिलौने लेकर,
चले न जाएँ वे अपने घर।
चिंतित हो उठा, किन्तु फिर,
पूछा शिशु ने उसके बाद।'
फिर क्या होगा उसके बाद
कवि - बालकृष्ण राव

1. मेरे नए खिलौने लेकर .....पंक्तियों द्वारा कवि ने बालक के किस भाव को दर्शाया है, इससे बालक के स्वभाव का कौन-सा पक्ष हमारे सामने प्रस्तुत होता है? [2]
Answer:
मेरे नए खिलौने लेकर ..... पंक्तियों द्वारा कवि ने बालक के अपने चीजों के प्रति स्वाभाविक मोह के भाव को दर्शाया है। इससे बालक के स्वभाव का मोहपक्ष हमारे सामने प्रस्तुत होता है बालक को जब पता चलता है कि उसके घर अन्य बच्चे आएँगे तो वह चिंतित हो उठा। बालक को लगा कि उसके घर अन्य बच्चे आएँगे तो कहीं वे उसके खिलौने न उठा ले जाएँ। शिशु की इस चिंता का कारण खिलौने से उनका सहज मोह है, बच्चे किसी भी हालत में अपने खिलौने किसी को देना नहीं चाहते हैं।

Teacher's Note:
a) बाल-सुलभ स्वभाव और वस्तुओं के प्रति लगाव को दर्शाया गया है।
b) बच्चों की अपनी वस्तुओं के प्रति possessiveness (अधिकार भाव) को स्पष्ट किया गया है।

 

2. बच्चा अपनी माँ से प्रश्न क्यों पूछ रहा है पिता या किसी अन्य से क्यों नहीं? [2]
Answer:
बालक का अपनी माँ के प्रति प्रेम होना एक स्वाभाविक सी बात है बच्चा रात-दिन अपने पास अपनी माँ को ही देखता है माँ ही होती है जो उसके सारे प्रश्नों का उत्तर धैर्य से देती है घर के पिता या अन्य सदस्य माँ की तरह सहनशील नहीं होते जो बालक की जिज्ञासा को शांत कर सके इसलिए बालक अपनी माँ से प्रश्न पूछ रहा है।

Teacher's Note:
a) बच्चे का माँ के साथ आत्मीय और निकटतम संबंध को स्पष्ट किया गया है।
b) माँ ही बच्चों के सभी अटपटे और अनगिनत प्रश्नों का धैर्यपूर्वक उत्तर देती है।

 

3. बच्चे का बार-बार प्रश्न पूछना उसके किस स्वभाव का परिचय देता है? बाल मनोविज्ञान के आधार पर समझाइये? [3]
Answer:
बच्चे का बार-बार प्रश्न पूछना उसके बाल सुलभ जिज्ञासु स्वभाव का परिचय देता है। बालकों में जिज्ञासा बहुत अधिक होती है। उनके लिए पूरा संसार नया होता है। वो प्रत्येक चीज को समझना चाहते हैं। वो अपने आस-पास के लोगों से लगातार प्रश्न पूछते रहते हैं। उन प्रश्नों के उत्तर से वो नए प्रश्न बनाते हैं। उनकी जिज्ञासा का शांत होना लगभग असंभव है। उनके मन पर दुख-सुख का बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ता। वो पल भर में दुखी हो जाते हैं तो पल भर में खुश।

Teacher's Note:
a) बाल मनोविज्ञान के अनुसार बच्चों की जिज्ञासु प्रवृत्ति का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।
b) बच्चों का मन निर्मल और क्षणिक भावों वाला होता है।

 

4. इस कविता के माध्यम से कवि ने क्या समझाना चाह है? क्या यह सत्य है? [3]
Answer:
फिर क्या होगा उसके बाद कविता कवि बालकृष्णजी की प्रश्नोत्तर शैली में लिखी गई एक मनोवैज्ञानिक कविता है। इस कविता में एक शिशु के बाल-सुलभ प्रश्नों के द्वारा कवि ने मानव के मन की जिज्ञासा का वर्णन किया है। हर एक मनुष्य के मन में यह शाश्वत प्रश्न बना ही रहता है कि 'फिर क्या होगा उसके बाद? 'कवि इस कविता द्वारा समझाना चाहता है कि यह संसार क्षण-भंगुर है और इसमें सुख और दुःख भी क्षणिक है। जीवन और मृत्यु का चक्र चलता रहता है। परन्तु मृत्यु के बाद क्या होता है? इस प्रश्न का अभी तक कोई उत्तर नहीं जान पाया है। जीवन में सुख और दुःख को समभाव से लेने की प्रेरणा देना ही कवि का उद्देश्य है।

Teacher's Note:
a) कविता के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक संदेश को स्पष्ट किया गया है।
b) जीवन की नश्वरता और शाश्वत जिज्ञासाओं का सुंदर चित्रण है।

 

Q.16 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : [10]
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :
सच्चा प्रेम वही है जिसकी
तृप्ति आत्म-बलि पर हो निर्भर।
त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है,
करो प्रेम पर प्राण न्यौछावर।
देश-प्रेम वह पुण्य क्षेत्र है,
अमल असीम त्याग से विल्सित।
आत्मा के विकास से जिसमें,
मनुष्यता होती है विकसित।
स्वदेश प्रेम
कवि - रामनरेश त्रिपाठी

1. कवि ने सच्चे प्रेम के विषय में क्या बताया है तथा क्यों? [2]
Answer:
कवि के अनुसार सच्चा प्रेम आत्मबलिदान की भावना से ही परिपूर्ण होता है। कवि मानता है कि त्याग के बिना प्रेम उसी तरह है जिस तरह आत्मा के बिना शरीर अर्थात् त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है। कवि के कहने का तात्पर्य यह है कि देश के युवाओं को अपने अन्दर सदैव त्याग की भावना रखनी चाहिए तथा देश के लिए समय आने पर बलिदान हेतु तैयार रहना चाहिए।

Teacher's Note:
a) रामनरेश त्रिपाठी की कविता 'स्वदेश प्रेम' के माध्यम से प्रेम और त्याग के संबंध को स्पष्ट किया गया है।
b) त्याग के बिना प्रेम अधूरा और महत्वहीन होता है।

 

2. देश-प्रेम से किसका विकास होता है तथा किस प्रकार? समझाकर लिखिये। [2]
Answer:
कवि ने यहाँ पर स्पष्ट रूप से कहा है कि देश-प्रेम की भावना से ही मनुष्यता का विकास होता है। देश और देशवासी एक दूसरे के पूरक हैं। देश-प्रेम की भावना को अपने अंदर समाहित करने से मनुष्य में आत्मीय गुणों का विकास होता है। देश के प्रति प्रेम की भावना से ही मन में उदारता, सहिष्णुता, निस्वार्थता आदि भावनाएँ जागती हैं जो अंत में मनुष्यता का विकास करती है।

Teacher's Note:
a) देश-प्रेम और मानवता के विकास के गहरे अंतर्संबंध को दर्शाया गया है।
b) स्वदेश प्रेम से ही व्यक्ति में उत्तम मानवीय गुणों का सृजन होता है।

 

3. देश-प्रेम क्या है? कविता के संदर्भ में समझाकर लिखिये। [3]
Answer:
कविता के आधार पर सच्चा देश-प्रेमी संसार के किसी भी कोने में रहे या किसी भी प्रकार के विषम मौसम और परिस्थितियों में रहे उसे अपनी मातृभूमि से स्वाभाविक प्रेम होता है। अपने देश की रक्षा के लिए वह अपने प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं हटता है। सच्चा देश प्रेमी कभी किसी के सामने रोता गिड़गिड़ाता नहीं है बल्कि रक्त की अंतिम बूँद तक अपना तथा अपने देश के स्वाभिमान को बनाएँ रखता है।

Teacher's Note:
a) सच्चे देशभक्त के गुणों और उसके अडिग स्वाभिमान का वर्णन किया गया है।
b) मातृभूमि के प्रति समर्पण ही सच्चा देश-प्रेम है।

 

4. निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए : [3]
तृप्ति, आत्मबलि, निर्भर, पुण्यक्षेत्र, अमल, विल्सित।

Answer:
तृप्ति - संतोष
आत्मबलि - आत्मबलिदान
निर्भर - आश्रित
पुण्यक्षेत्र - पावन स्थल
अमल - स्वच्छ
विल्सित - चमकता हुआ

Teacher's Note:
a) कविता में आए कठिन तत्सम एवं साहित्यिक शब्दों के सटीक अर्थ दिए गए हैं।
b) शब्दार्थ ज्ञान से काव्य के भाव को समझने में आसानी होती है।

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