Previous Year Question Papers for Class 10 Hindi
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Practice Class 10 Hindi Exam Papers
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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
SECTION - A (40 Marks)
Attempt all questions
Q.1 Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : [15]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिंदी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए:
(i) 'विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषध है।' कथन के आधार पर बताइए कि मानव जीवन में मित्रों का क्या महत्त्व है? वे किस प्रकार व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं? आप अपने मित्र का चुनाव करते समय उसमें किन गुणों का होना आवश्यक समझेंगे? अपने विचार स्पष्टतः लिखिए।
(ii) भारतीय संस्कृति में 'अतिथि को देवता के समान माना जाता है।' वर्तमान परिस्थितियों में यह मान्यता कहाँ तक सत्य के रूप में दिखाई दे रही है? अतिथि कब बोझ बन जाता है और किस प्रकार? विचारों द्वारा समझाइए।
(iii) स्वच्छता हम सभी के लिए लाभदायक है, यदि आपको स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग देने के लिए कोई तीन कार्य करने के लिए कहा जाए तो आप किन कार्यों को करना पसन्द करेंगे तथा क्यों? अपने विचारों द्वारा स्पष्ट कीजिए।
(iv) एक कहानी लिखिए जिसका आधार निम्नलिखित उक्ति हो : -
'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।'
(v) नीचे दिये गये चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर वर्णन कीजिए अथवा कहानी लिखिए, जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए।
[Figure: A street scene where people and a scooter rider are navigating through waterlogged streets due to heavy rain or water stagnation, depicting urban waterlogging.]
Answer:
(चयनित विषय - (i) 'विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषध है')
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते हुए उसे विभिन्न प्रकार के सम्बन्धों की आवश्यकता होती है। इनमें मित्रता का सम्बन्ध सबसे अनमोल और पवित्र माना जाता है। महान विचारक आर्चय रामचंद्र शुक्ल ने भी कहा है कि 'विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषध है।' जिस प्रकार एक अच्छी औषधि हमारे शारीरिक रोगों को दूर कर हमें स्वस्थ बनाती है, उसी प्रकार एक सच्चा और विश्वासपात्र मित्र हमारे जीवन के मानसिक और नैतिक दुखों को दूर कर हमें सही मार्ग दिखाता है।
मानव जीवन में मित्रों का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। सुख में तो सभी साथी बन जाते हैं, परंतु वास्तविक मित्र वही है जो संकट के समय हमारे साथ चट्टान की तरह खड़ा रहे। वे हमारे जीवन को अत्यधिक प्रभावित करते हैं। एक अच्छा मित्र हमें बुरी संगति से बचाता है, हमारी कमियों को आईना दिखाता है और हमारे भीतर छिपी हुई योग्यताओं को उभारने में सहायता करता है। इसके विपरीत, बुरी संगति वाला मित्र दीमक की तरह हमारे जीवन को अंदर से खोखला कर देता है।
यही कारण है कि अपने मित्र का चुनाव करते समय हमें अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। मैं अपने मित्र में कुछ विशेष गुणों का होना आवश्यक समझता हूँ - जैसे कि उसकी निष्ठा, सच्चाई, परोपकार की भावना और अच्छे चरित्र का होना। वह लोभी या स्वार्थी न होकर संकट के समय साथ देने वाला होना चाहिए। यदि हमारा मित्र गुणवान और चरित्रवान है, तो हमारा पूरा जीवन संवर जाता है और हम निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हैं।
Teacher's Note:
a) लघु निबंध लिखते समय शब्द-सीमा (लगभग 250 शब्द) का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा विषय के सभी बिंदुओं को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) भाषा की शुद्धता, व्याकरण और वाक्य-विन्यास पर अंक निर्भर करते हैं, अतः वर्तनी की अशुद्धियों से बचें।
Q.2 Write a letter in Hindi in approximately 120 Words on any one of the topics given below : [7]
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिंदी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए :
(i) आपकी कॉलोनी में कुछ असामाजिक तत्त्व (Antisocial elements) आकर बस गए हैं। उनकी गुंडागर्दी बढ़ने के कारण नागरिकों का जीवन कठिन हो गया है। अपने शहर के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर उनकी शिकायत कीजिए तथा सुव्यवस्था के लिए शीघ्र कदम उठाए जाने की प्रार्थना कीजिए।
(ii) आपका छोटा भाई किसी दूसरे शहर में पढ़ने गया है, जहाँ वह खेलने के लिए समय नहीं निकाल पा रहा. है। खेलों का महत्त्व समझाते हुए उसे पत्र लिखिए।
Answer:
(चयनित विषय - (i) पुलिस कमिश्नर को पत्र)
परीक्षा भवन,
क ख ग।
दिनांक: 15 मार्च 2015
सेवा में,
पुलिस कमिश्नर महोदय,
पुलिस मुख्यालय, नगर।
विषय: कॉलोनी में असामाजिक तत्त्वों की बढ़ती गुंडागर्दी के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आदर्श नगर कॉलोनी का निवासी हूँ। पिछले कुछ दिनों से हमारी कॉलोनी में कुछ असामाजिक तत्त्व आकर बस गए हैं, जिनकी हरकतों और गुंडागर्दी के कारण संपूर्ण क्षेत्र के नागरिकों का जीवन अत्यंत कठिन और भययुक्त हो गया है। ये लोग आए दिन शाम के समय नुक्कड़ पर फब्तियाँ कसते हैं, शराब पीकर हुड़दंग मचाते हैं और आने-जाने वाली महिलाओं व छात्राओं पर छींटाकशी करते हैं। इनके डर से लोग रात को बाहर निकलने से भी कतराने लगे हैं।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए हमारी कॉलोनी में नियमित पुलिस गश्त की व्यवस्था की जाए और इन असामाजिक तत्त्वों के विरुद्ध शीघ्र अति शीघ्र कठोर कानूनी कदम उठाए जाएं, ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का वातावरण स्थापित हो सके।
सधन्यवाद,
भवदीय,
क ख ग
Teacher's Note:
a) औपचारिक पत्र का प्रारूप (प्रेषक का पता, दिनांक, सेवा में, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, और हस्ताक्षर) पूरी तरह से मानक नियमों के अनुसार होना चाहिए।
b) पत्र की भाषा शिष्ट, स्पष्ट और गंभीर होनी चाहिए तथा अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए।
Q.3 Read the passage given below and answer in Hindi the questions that follow, using your own words as far as possible :- [10]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए :-
कौशल देश के वृद्ध राजा के चार पुत्र थे। उन्हें यह चिन्ता सताने लगी थी कि राज्य का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाए? सोच-विचार के बाद अपने चारों पुत्रों को बुलाकर राजा ने कहा - "तुम चारों में से जो सबसे बड़े धर्मात्मा को मेरे पास लेकर आएगा वही राज्य का स्वामी बनेगा।" तत्पश्चात चारों राजकुमार अपने-अपने घोड़ों पर सवार होकर चल पड़े।
कुछ दिनों बाद बड़ा पुत्र अपने साथ महाजन को लेकर आया और राजा से बोला - "ये महाजन लाखों रुपयों का दान कर चुके हैं, अनेक मन्दिर व धर्मशालाएँ बनवा चुके हैं तथा साधु-सन्तों और ब्राह्मणों को भोजन कराने के उपरान्त ही ये भोजन करते हैं। इनसे बड़ा धर्मात्मा कौन होगा?"
"हाँ, वास्तव में ये धर्मात्मा हैं।" राजा ने कहा तथा सत्कारपूर्वक विदा किया।
इसके बाद दूसरा पुत्र एक कृशकाय ब्राह्मण को लेकर आया और राजा से बोला - "ये ब्राह्मण देवता चारों धामों की यात्रा कर आए हैं, कोई तामसी वृत्ति इन्हें छू नहीं गई है। इनसे बढ़कर कोई धर्मात्मा नहीं हैं।"
राजा ब्राह्मण के समक्ष नतमस्तक हुए और दान-दक्षिणा देकर बोले - "इसमें कोई सन्देह नहीं कि ये एक श्रेष्ठ धर्मात्मा हैं।"
तभी तीसरा पुत्र एक साधु को लेकर पहुँचा और बोला - "ये साधु महाराज सप्ताह में केवल एक बार दूध पीकर रहते हैं। भयंकर सर्दी में जल में खड़े रहते हैं और गर्मी में पंचाग्नि तापते हैं। ये सबसे बड़े धर्मात्मा हैं।"
राजा ने साधु को प्रणाम किया और कहा - "निश्चय ही ये एक उत्तम साधु हैं।" साधु महाराज राजा को आशीर्वाद देकर विदा हुए।
अन्त में सबसे छोटा पुत्र एक निर्धन किसान के साथ आया। किसान दूर से ही भय के मारे हाथ जोड़ता चला आ रहा था। तीनों भाई छोटे भाई की मूर्खता पर ठहाका लगाकर हँस पड़े। छोटा पुत्र बोला - "एक कुत्ते के शरीर पर लगे घाव को यह आदमी धो रहा था। पता नहीं कि यह धर्मात्मा है या नहीं। अब आप ही इससे पूछ लीजिए।"
राजा ने पूछा - "तुम क्या धर्म-कर्म करते हो?" किसान डरते-डरते बोला - "मैं अनपढ़ हूँ, धर्म किसे कहते हैं, यह मैं नहीं जानता। कोई बीमार होता है तो सेवा कर देता हूँ। कोई माँगता है तो मुट्ठी भर अन्न अवश्य दे देता हूँ।"
राजा ने कहा - "यह किसान ही सबसे बड़ा धर्मात्मा है।" राजा की बात सुनकर तीनों बड़े लड़के एक दूसरे का मुँह ताकने लगे। राजा ने पुनः कहा - "तीर्थयात्रा करना, भगवत आराधना में लीन रहना, दान-पुण्य करना और जप-तप करना भी धर्म है किन्तु बिना किसी स्वार्थ के किसी दीन-दुःखी और कष्ट में पड़े हुए प्राणी की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। जो परोपकार करता है, वही सबसे बड़ा धर्मात्मा है।"
1. राजा को क्या चिन्ता थी? उसने अपने पुत्रों को बुलाकर क्या कहा? [2]
Answer:
राजा को यह चिंता सता रही थी कि उसके बाद राज्य का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाए। उसने अपने पुत्रों को बुलाकर कहा कि तुम चारों में से जो सबसे बड़े धर्मात्मा को ढूँढकर मेरे पास लेकर आएगा, वही इस राज्य का स्वामी बनेगा।
Teacher's Note:
a) उत्तर गद्यांश के आरंभिक भाग से संक्षिप्त और सटीक रूप में लिखा जाना चाहिए।
b) प्रश्न के दोनों भागों (चिंता क्या थी और क्या कहा) का उत्तर स्पष्ट होना आवश्यक है।
2. बड़े पुत्र की दृष्टि में सबसे बड़ा धर्मात्मा कौन था और उसका क्या कारण था? [2]
Answer:
बड़े पुत्र की दृष्टि में उनके साथ आया महाजन सबसे बड़ा धर्मात्मा था। इसका कारण यह था कि वह महाजन लाखों रुपयों का दान कर चुका था, अनेक मंदिर व धर्मशालाएँ बनवा चुका था तथा साधु-संतों व ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद ही भोजन करता था।
Teacher's Note:
a) बड़े पुत्र के तर्क और महाजन के धार्मिक कार्यों का उल्लेख उत्तर में होना अनिवार्य है।
b) तथ्यों को गद्यांश के अनुसार ही प्रस्तुत करें।
3. साधु किसके साथ आया था? उसका परिचय किस प्रकार दिया गया? [2]
Answer:
तीसरा पुत्र एक साधु को लेकर पहुँचा था। उसका परिचय देते हुए तीसरे पुत्र ने बताया था कि वह साधु महाराज सप्ताह में केवल एक बार दूध पीकर रहते हैं, भयंकर सर्दी में जल में खड़े रहते हैं और गर्मी में पंचाग्नि तापते हैं।
Teacher's Note:
a) साधु की कठोर तपस्या और नियमों का वर्णन गद्यांश के आधार पर सटीक रूप में दें।
b) यह ध्यान रखें कि साधु तीसरे पुत्र के साथ आया था, न कि अकेले।
4. किसान को राजा के सामने कौन लाया था और क्यों? राजा ने किसान को ही सबसे बड़ा धर्मात्मा क्यों कहा? [2]
Answer:
किसान को राजा के सामने सबसे छोटा राजकुमार लाया था क्योंकि वह एक घायल कुत्ते के शरीर पर लगे घाव को धो रहा था और राजकुमार को समझ नहीं आ रहा था कि वह धर्मात्मा है या नहीं। राजा ने उसे सबसे बड़ा धर्मात्मा इसलिए कहा क्योंकि वह बिना किसी स्वार्थ के दीन-दुखियों की सेवा करता था और जरूरतमंद को मुट्ठी भर अन्न दे देता था, जो कि सबसे बड़ा परोपकार और धर्म है।
Teacher's Note:
a) उत्तर में छोटे राजकुमार द्वारा किसान को लाने की घटना तथा राजा के परोपकार संबंधी निर्णय दोनों का समावेश होना चाहिए।
b) निस्वार्थ भाव से की गई सेवा को ही सर्वोच्च धर्म माना गया है।
5. प्रस्तुत गद्यांश से क्या शिक्षा मिलती है? [2]
Answer:
प्रस्तुत गद्यांश से यह शिक्षा मिलती है कि तीर्थयात्रा, जप-तप, दान-पुण्य और धार्मिक कर्म-कांडों से भी बड़ा धर्म निस्वार्थ भाव से किसी दीन-दुःखी, पीड़ित और जरूरतमंद प्राणी की सेवा करना है। जो व्यक्ति परोपकार करता है, वही सबसे बड़ा धर्मात्मा होता है।
Teacher's Note:
a) गद्यांश के केंद्रीय संदेश या मूल भाव को स्पष्ट शब्दों में लिखना चाहिए।
b) परोपकार और मानवता की सेवा ही सर्वोपरि धर्म है, इस बात पर बल दें।
Q.4 Answer the following according to the instructions given:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए : -
1. निम्नलिखित शब्दों से विशेषण बनाइए : - [1]
* पूजा -
* धर्म -
Answer:
* पूजा - पूज्य / पूजनीय
* धर्म - धार्मिक
Teacher's Note:
a) संज्ञा शब्दों से विशेषण बनाने के नियमों का अभ्यास होना आवश्यक है।
b) वर्तनी बिल्कुल शुद्ध होनी चाहिए।
2. निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए : [1]
* राजा -
* जलाशय -
Answer:
* राजा - नृप, भूप (अथवा नरेश, नृपति)
* जलाशय - तालाब, सरोवर (अथवा पोखर, ताल)
Teacher's Note:
a) परीक्षा में किसी एक शब्द के दो पर्यायवाची लिखने को कहा गया है, विद्यार्थियों को दोनों में से किसी एक को हल करना है।
b) पर्यायवाची शब्दों के सही और प्रचलित रूपों का ही प्रयोग करें।
3. निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए : [1]
* निर्माण -
* क्रोध -
* देहाती -
* मूर्खता -
Answer:
* निर्माण - विध्वंस / विनाश
* क्रोध - क्षमा / शांति
* देहाती - शहरी
* मूर्खता - बुद्धिमत्ता / समझदारी
*(किन्हीं दो शब्दों के विलोम लिखने हैं)*
Teacher's Note:
a) निर्देशानुसार केवल दो ही शब्दों के विलोम लिखने पर अंक प्राप्त होते हैं।
b) विलोम शब्द मूल शब्द के व्याकरणिक रूप के अनुकूल होने चाहिए।
4. भाववाचक संज्ञा बनाइए : - [1]
* साधु -
* तपस्वी -
Answer:
* साधु - साधुता / साधुपपन
* तपस्वी - तपस्या / तपस्विता
Teacher's Note:
a) जातिवाचक संज्ञा या विशेषण से भाववाचक संज्ञा निर्माण के प्रत्यय नियमों को समझें।
b) सही प्रत्यय लगाकर सटीक भाववाचक रूप बनाएँ।
5. निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए : [1]
* कान का कच्चा -
* श्रीगणेश करना -
Answer:
* कान का कच्चा: सोहन बहुत कान का कच्चा है, वह बिना सोचे-समझे किसी की भी बात पर विश्वास कर लेता है।
*(अथवा)*
* श्रीगणेश करना: नया व्यापार आरंभ करने से पहले गणेश जी की पूजा करके कार्य का श्रीगणेश किया जाता है।
Teacher's Note:
a) मुहावरे का वाक्य में ऐसा प्रयोग होना चाहिए जिससे उसका अर्थ स्पष्ट रूप से झलके।
b) केवल एक ही मुहावरे का वाक्य बनाना अपेक्षित है।
6. कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार वाक्यों में परिवर्तन कीजिए : - [1]
(a) कश्मीर में अनेक दर्शनीय पर्यटक स्थल देखने योग्य हैं।
(वाक्य को शुद्ध कीजिए।)
Answer:
कश्मीर में अनेक दर्शनीय स्थल हैं। (अथवा: कश्मीर में अनेक पर्यटक स्थल देखने योग्य हैं।)
Teacher's Note:
a) 'दर्शनीय' और 'देखने योग्य' दोनों शब्दों का एक साथ प्रयोग वाक्य में पुनरुक्ति (redundancy) दोष उत्पन्न करता है, अतः एक को हटाना होगा।
b) वाक्य की व्याकरणिक शुद्धि का ध्यान रखें।
(b) मैं कलम से लिखूँगा। [1]
(वाक्य को भूतकाल में बदलिए)
Answer:
मैंने कलम से लिखा था। (अथवा: मैं कलम से लिखता था / मैंने कलम से लिखा)
Teacher's Note:
a) भविष्यकाल या सामान्य भविष्य के वाक्य को उचित भूतकाल के रूप में परिवर्तित करें।
b) क्रिया का रूप काल के अनुसार पूर्णतः परिवर्तित होना चाहिए।
(c) आप परिवार के साथ हमारे घर आइएगा। [1]
(रेखांकित के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कीजिए)
Answer:
आप सपरिवार हमारे घर आइएगा।
Teacher's Note:
a) 'परिवार के साथ' वाक्यांश के लिए एक उपयुक्त शब्द 'सपरिवार' है।
b) वाक्यांश के लिए एक शब्द का यह प्रश्न भाषा के संक्षिप्त और सटीक प्रयोग का परीक्षण करता है।
SECTION - B (40 Marks)
Attempt four questions from this section.
You must answer at least one question from each of two books you have studied and any two other questions.
(गद्य संकलन)
Q.5 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए:
“यों तो मैं कहीं जाऊँ-जाऊँ सो ही इन्हें नहीं सुहाता, और फिर कल किशोरी के यहाँ बुलावा नहीं आया. अरे मैं तो कहूँ की घरवालों का कैसा बुलावा? वे लोग तो मुझे अपनी माँ से कम नहीं समझते, नहीं तो कौन भला यों भट्टी और भण्डार घर सौंप दे?”
- अकेली -
लेखिका - मन्नू भंडारी
1. किसे, किसका कहीं भी आना-जाना पसंद नहीं है तथा क्यों? [2]
Answer:
सोमा बुआ का कहीं भी आना-जाना उनके परिवार वालों को पसंद नहीं है। इसका कारण यह था कि घर के लोग उन्हें बोझ समझते थे और चाहते थे कि वह घर पर रहकर घर के सारे कामकाज संभालती रहें।
Teacher's Note:
a) कहानी 'अकेली' की मुख्य पात्र सोमा बुआ की उपेक्षित स्थिति को स्पष्ट करें।
b) परिवार के सदस्यों की संकीर्ण मानसिकता का उत्तर में उल्लेख होना चाहिए।
2. सोमा बुआ किशोरीलाल के घर किस आयोजन पर बिना निमंत्रण के ही चली गयी थीं? वहाँ उन्होंने किस प्रकार की व्यवस्था देखी? [2]
Answer:
सोमा बुआ किशोरीलाल के घर बेटी के जन्म के छठे दिन मनाए जाने वाले 'छठी' के उत्सव पर बिना निमंत्रण के चली गई थीं। वहाँ उन्होंने देखा कि अत्यधिक व्यस्तता और प्रचुर मात्रा में सामान होने के बावजूद व्यवस्था बहुत अव्यवस्थित थी, जहाँ काम करने वालों में तालमेल की कमी थी।
Teacher's Note:
a) आयोजन का नाम (छठी का उत्सव) और वहाँ की अव्यवस्था का सटीक विवरण दें।
b) सोमा बुआ का उद्देश्य वहाँ जाकर लोगों की सहायता करना था।
3. बुलावा न आने पर भी सोमा बुआ ने किशोरीलाल के यहाँ क्या किया तथा वहाँ जाने का क्या तर्क दिया? आप इस तर्क से कहाँ तक सहमत हैं? अपने विचार दीजिए। [3]
Answer:
बुलावा न आने पर भी सोमा बुआ किशोरीलाल के घर चली गईं और वहाँ पहुँचकर रसोईघर तथा भंडारघर की कमान संभालते हुए तुरंत काम में जुट गईं। उन्होंने तर्क दिया कि घरवाले उन्हें अपनी माँ जैसा मानते हैं और इसीलिए उन्होंने बिना बुलावे के भी रसोई और भंडारघर उन्हें सौंप दिया। हम इस तर्क से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, क्योंकि भले ही वे स्नेहवश वहाँ गई थीं, किंतु बिना निमंत्रण के किसी के घर जाकर काम में दखਲ देना कई बार उपेक्षा या अपमान का कारण बन जाता है, जैसा कि अंत में सोमा बुआ के साथ हुआ।
Teacher's Note:
a) सोमा बुआ के कार्य और उनके द्वारा दिए गए आत्मीय तर्क को स्पष्ट करें।
b) विद्यार्थी अपने विवेक के अनुसार अपनी सहमति या असहमति का तार्किक समर्थन दे सकते हैं।
4. 'अकेलापन जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है।' इस कहानी की घटनाओं के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [3]
Answer:
मन्नू भंडारी द्वारा रचित कहानी 'अकेली' में सोमा बुआ का चरित्र अकेलेपन के संताप को पूरी तरह उजागर करता है। पति और बच्चों की मृत्यु के बाद सोमा बुआ का कोई अपना नहीं बचा था। वे अपने परिवार के बीच रहते हुए भी उपेक्षित थीं। परिवार के लोग उन्हें केवल एक काम करने वाली बाई या बोझ समझते थे, स्नेह नहीं देते थे। इसी अकेलेपन के खालीपन को भरने के लिए वे हर छोटे-बड़े समारोह में बिना बुलाए चली जाती थीं, जहाँ अंततः उन्हें दुत्कार और उपेक्षा ही मिलती थी। इस प्रकार यह कहानी सिद्ध करती है कि अकेलापन मनुष्य के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है।
Teacher's Note:
a) सोमा बुआ की व्यथा और कहानी के केंद्रीय संदेश को जोड़कर उत्तर लिखें।
b) वृद्धों की मनोवैज्ञानिक स्थिति और समाज के दायित्वों पर प्रकाश डालें।
Q.6 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :-
“आज देहाती लोग भी कहते हैं कि हमारे बच्चों को तालीम मिलनी चाहिए। तालीम किसलिए मिलनी चाहिए? इसलिए नहीं कि लड़का ज्ञानी बनेगा, धर्म-ग्रन्थ पढ़ सकेगा और जीवन में हर काम विचारपूर्वक करेगा। पर इसलिए कि लड़के को नौकरी मिलेगी और हम जैसे दिन भर खटते हैं, वैसे उसे खटना न पड़ेगा।”
- श्रम की प्रतिष्ठा -
आचार्य विनोबा भावे
1. काम के प्रति देहाती लोगों की मनोवृत्ति कैसी हो गई और क्यों? [2]
Answer:
काम के प्रति देहाती लोगों की मनोवृत्ति ऐसी हो गई है कि वे शारीरिक श्रम से बचना चाहते हैं और अपने बच्चों को केवल बाबू या नौकरीपेशा बनाना चाहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे जीवनभर कड़ा शारीरिक श्रम (खटना) करने के कष्टों को भली-भांति भोग चुके हैं और नहीं चाहते कि उनके बच्चों को भी वैसा ही संघर्षपूर्ण जीवन जीना पड़े।
Teacher's Note:
a) देहाती लोगों की बदलती सोच और श्रम के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।
b) शारीरिक श्रम से मुक्ति पाने की उनकी चाहत ही इसका मुख्य कारण है।
2. दिमागी काम करने वाले लोग मजदूरों के प्रति क्या विचार रखते हैं? [2]
Answer:
दिमागी काम करने वाले लोग मजदूरों के प्रति उपेक्षा का भाव रखते हैं और उन्हें अपने से हीन या नीचा समझते हैं। वे शारीरिक श्रम करने वालों को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखते और उन्हें समाज में कमतर आंकते हैं।
Teacher's Note:
a) समाज में बौद्धिक श्रम और शारीरिक श्रम के बीच की खाई को दर्शाएँ।
b) पाठ के वैचारिक आधार पर मजदूरों की उपेक्षा का उल्लेख करें।
3. लेखक ने मजदूरों की तुलना किससे की है तथा क्यों? समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
लेखक आचार्य विनोबा भावे ने मजदूरों की तुलना समाज के अन्नदाताओं और रीढ़ की हड्डी से की है क्योंकि वे अपने खून-पसीने की कमाई से पूरे समाज का पेट भरते हैं और राष्ट्र के निर्माण में प्रत्यक्ष योगदान देते हैं। लेखक का मानना है कि वास्तविक श्रम ही सच्ची पूजा है, इसलिए मजदूर समाज के सबसे महत्त्वपूर्ण और आदरणीय अंग होने चाहिए, किंतु विडंबना यह है कि उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे अधिकारी हैं।
Teacher's Note:
a) श्रम की महत्ता और मजदूरों की समाज में स्थिति को स्पष्ट करें।
b) लेखक के दृष्टिकोण को तार्किक ढंग से प्रस्तुत करें।
4. प्रस्तुत निबन्ध का उद्देश्य कीजिए। [3]
Answer:
'श्रम की प्रतिष्ठा' निबंध का मुख्य उद्देश्य समाज में शारीरिक श्रम और मजदूरों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव लाना है। लेखक यह समझाना चाहते हैं कि कोई भी श्रम छोटा या बड़ा नहीं होता। बौद्धिक कार्य जितना महत्त्वपूर्ण है, उतना ही महत्त्वपूर्ण शारीरिक श्रम भी है। निबंध हमें सिखाता है कि हमें हर प्रकार के श्रम का सम्मान करना चाहिए और श्रमजीबी वर्ग को समाज में उचित आदर व प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए।
Teacher's Note:
a) निबंध के मूल उद्देश्य और वैचारिक संदेश पर प्रकाश डालें।
b) श्रम के प्रति सम्मान की भावना ही इस पाठ का मुख्य सार है।
Q.7 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :-
‘‘मैं नहीं जानती कि वह शहंशाह था या साधारण मुगल, पर एक दिन इसी झोपड़ी के नीचे वह रहा था। मैंने सुना था, कि वह मेरा घर बनाने की आज्ञा दे गया था। मैं आजीवन अपनी झोपड़ी खुदवाने के डर से भयभीत रही थी।”
- ममता -
जयशंकर प्रसाद
1. वक्ता का संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]
Answer:
वक्ता ममता है, जो रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की अकेली पुत्री थी। वह एक उच्च कुल की ब्राह्मण युवती थी जो अपने जीवन में अत्यधिक त्याग, आत्मसम्मान और धर्मपरायणता का पालन करने वाली थी।
Teacher's Note:
a) कहानी की मुख्य पात्र ममता के चरित्र और पृष्ठभूमि का संक्षेप में परिचय दें।
b) उसके जीवन की विडंबनाओं का उल्लेख करें।
2. कौन, किसका घर बनवाने की आज्ञा दे गया था तथा क्यों? [2]
Answer:
मुगल सम्राट हुमायूं, ममता का घर (झोपड़ी) बनवाने की आज्ञा दे गया था। जब वह शेरशाह सूरी से हारकर भटक रहा था, तब ममता ने आंधी-तूफान के समय अपनी झोपड़ी में उसे आश्रय और भोजन दिया था। उसी उपकार के बदले में हुमायूं ने अपने सिपहसालार मिर्जा को ममता के लिए भव्य घर बनवाने का आदेश दिया था।
Teacher's Note:
a) हुमायूं और ममता की भेंट की घटना का उल्लेख करें।
b) घर बनवाने के पीछे हुमायूं की कृतज्ञता की भावना थी।
3. झोपड़ी के स्थान पर वहाँ क्या बनाया गया और उस पर क्या लिखा गया? अपने शब्दों में लिखिए।बताइए कि वास्तव में वह स्थान किसके नाम का महत्त्व रखता है? [3]
Answer:
झोपड़ी के स्थान पर सम्राट अकबर ने एक अष्टकोणीय विशाल भव्य मंदिर बनवाया, जिस पर यह उत्कीर्ण था कि हुमायूं जब देश से निकला था, तब इसी झोपड़ी में उसे आश्रय मिला था और उसके पुत्र अकबर ने उस स्थान पर यह भव्य मंदिर बनवाया। वास्तव में वह स्थान हुमायूं या अकबर के नाम से नहीं, बल्कि ममता के निस्वार्थ त्याग, आतिथ्य और उसके आत्मसम्मान के नाम का महत्त्व रखता है।
Teacher's Note:
a) मंदिर के निर्माण और उस पर लिखे शिलालेख का वर्णन करें।
b) ममता का त्याग ही उस स्थान को ऐतिहासिक महत्त्व प्रदान करता है।
4. इस कहानी के माध्यम से लेखक ने हमें क्या संदेश देना चाहा है? [3]
Answer:
जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी 'ममता' के माध्यम से लेखक ने यह संदेश दिया है कि सच्चा सुख और संतोष धन-दौलत या महलों में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, आतिथ्य सत्कार और परोपकार में निहित है। ममता ने हुमायूं द्वारा दी गई स्वर्ण-मुद्राओं और महल जैसी विलासिता को अस्वीकार कर अपने उच्च मानवीय मूल्यों और आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखा, जो आज भी प्रेरणादायक है।
Teacher's Note:
a) कहानी के नैतिक संदेश और ममता के दृढ़ चरित्र को रेखांकित करें।
b) धन पर मानवीय मूल्यों की विजय ही इस कहानी का मूल स्वर है।
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
लेखक - प्रकाश नगआयच
Q.8 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :
“मैं ही नहीं, मगध की सारी प्रजा जानती है कि जो कुछ भी रामगुप्त और उसके मंत्रियों ने किया है, गुप्त वंश की परम्परा और स्वर्गीय सम्राट समुद्रगुप्त की इच्छा और आज्ञाओं के विरुद्ध ही नहीं धर्म के विरुद्ध भी है।”
1. उक्त कथन का वक्ता और श्रोता कौन है? इससे पूर्व वक्ता श्रोता की किससे तुलना कर रहे थे और क्यों? [2]
Answer:
उक्त कथन के वक्ता चंद्रगुप्त और श्रोता रामगुप्त हैं। इससे पूर्व वक्ता (चंद्रगुप्त) श्रोता (रामगुप्त) की तुलना शकराज से कर रहे थे, क्योंकि जिस प्रकार शकराज ने अपनी शक्ति के अहंकार में आकर अपमानजनक शर्तें थोपी थीं और प्रजा के सम्मान को दांव पर लगाया था, उसी प्रकार रामगुप्त ने भी कायरता और स्वार्थवश शकराज की शर्तें मानकर गुप्त वंश के गौरव को कलंकित किया था।
Teacher's Note:
a) नाटक/उपन्यास के संदर्भ में वक्ता (चंद्रगुप्त) और श्रोता (रामगुप्त) की पहचान स्पष्ट करें।
b) रामगुप्त की कायरता की तुलना शकराज के आक्रमणकारी रवैये से की गई है।
2. धर्म किसे कहते हैं? रामगुप्त के द्वारा किए गए कार्य को धर्म के विरुद्ध क्यों कहा गया है? [2]
Answer:
अपने देश, कुल, प्रजा और नारी के सम्मान की रक्षा करना तथा सत्य और न्याय के मार्ग पर चलना ही धर्म है। रामगुप्त के कार्य को धर्म के विरुद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि उसने अपनी कायरता और स्वार्थ के कारण अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी को शत्रु शकराज को सौंपने का नीच और अनैतिक निर्णय लिया था, जो क्षत्रिय कुल और राजा के धर्म के पूर्णतः विपरीत था।
Teacher's Note:
a) राजधर्म और व्यक्तिगत कर्तव्य के संदर्भ में धर्म की परिभाषा दें।
b) रामगुप्त का कृत्य घोर अनैतिक और कायरतापूर्ण था।
3. समुद्रगुप्त का परिचय देते हुए बताइए कि यहाँ उनकी चर्चा क्यों की जा रही है? [3]
Answer:
सम्राट समुद्रगुप्त गुप्त वंश के एक अत्यंत पराक्रमी, प्रतापी, न्यायप्रिय और महान सम्राट थे, जिन्हें उनकी वीरता के कारण 'भारत का नेपोलियन' भी कहा जाता है। यहाँ उनकी चर्चा इसलिए की जा रही है क्योंकि रामगुप्त और उसके मंत्री समुद्रगुप्त की महान परंपरा, उनकी नीतियों और उनकी आज्ञाओं के विपरीत आचरण कर रहे थे, जिससे गुप्त साम्राज्य का गौरव धूल में मिल रहा था।
Teacher's Note:
a) समुद्रगुप्त के प्रतापी व्यक्तित्व का संक्षेप में परिचय दें।
b) उनके आदर्शों और रामगुप्त के कृत्यों के बीच की तुलना को स्पष्ट करें।
4. उपन्यास 'चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य' युद्ध प्रधान उपन्यास है। उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए। [3]
Answer:
'चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य' उपन्यास में राजनीतिक षड्यंत्रों, बाहरी आक्रमणों और साम्राज्य की रक्षा के लिए लड़े जाने वाले संघर्षों का सजीव चित्रण है। शकराज का आक्रमण, ध्रुवस्वामिनी की रक्षा का प्रसंग, चंद्रगुप्त द्वारा वेश बदलकर शक शिविर में जाना और अंततः वीरतापूर्वक शत्रुओं का संहार कर विजय प्राप्त करना - ये सभी घटनाएँ इस बात को सिद्ध करती हैं कि यह उपन्यास वीरता, पराक्रम और युद्ध प्रधान कथा पर आधारित है।
Teacher's Note:
a) उपन्यास की कथावस्तु के संघर्षपूर्ण और वीरतापूर्ण पक्षों को उजागर करें।
b) चंद्रगुप्त के पराक्रम और युद्ध दृश्यों का संदर्भ दें।
Q.9 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए:
“अगर हमने शकराज की माँगे पूरी न की तो सवेरा होते ही शकों की सेना हमें असहाय भेड़-बकरियों की तरह काट डालेगी।”
1. प्रस्तुत संवाद के वक्ता और श्रोता कौन हैं? संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]
Answer:
प्रस्तुत संवाद के वक्ता रामगुप्त और श्रोता मंत्रिपरिषद के सदस्य या दरबारी (अथवा ध्रुवस्वामिनी/चंद्रगुप्त के संदर्भ में चर्चा करने वाले लोग) हैं। रामगुप्त मगध का अयोग्य, कायर और विलासी सम्राट है, जो अपनी जान बचाने के लिए देश के सम्मान को बेचने को तैयार रहता है।
Teacher's Note:
a) वक्ता (रामगुप्त) और श्रोता के आपसी संवाद की स्थिति को स्पष्ट करें।
b) रामगुप्त की कायरता इस कथन से स्पष्ट होती है।
2. शकराज की शर्ते क्या थी? वे शर्ते अपमानजनक क्यों थी? [2]
Answer:
शकराज की शर्त यह थी कि मगध का सम्राट रामगुप्त अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी को अन्य सामंतों की पत्नियों के साथ उपहारस्वरूप उसके शिविर में भेज दे। ये शर्तें इसलिए अपमानजनक थीं क्योंकि वे केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संपूर्ण मगध साम्राज्य, उसके कुल और नारी जाति के स्वाभिमान व सम्मान पर सीधा प्रहार थीं।
Teacher's Note:
a) शकराज की लज्जाजनक और साम्राज्यविरोधी शर्त का उल्लेख करें।
b) इससे मगध की गरिमा को जो ठेस पहुँची, उसे स्पष्ट करें।
3. शकराज की शर्तों को पूरा करने में क्या कठिनाइयाँ हैं? समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
शकराज की शर्तों को पूरा करने में सबसे बड़ी कठिनाई यह थी कि यह कदम गुप्त वंश के क्षत्रिय धर्म, कुल की मर्यादा और आत्मसम्मान के सर्वथा विरुद्ध था। यदि इसे स्वीकार किया जाता तो संपूर्ण मगध की प्रजा और इतिहास की नजरों में यह घोर कायरता और कलंक होता, जिससे साम्राज्य का नैतिक पतन निश्चित था और चंद्रगुप्त जैसे वीर इसका तीव्र विरोध कर रहे थे।
Teacher's Note:
a) नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक कठिनाइयों को बिंदुवार स्पष्ट करें।
b) आत्मसम्मान का प्रश्न इस समस्या का केंद्र था।
4. उपर्युक्त संवाद की प्रतिक्रिया में श्रोता ने क्या विचार प्रस्तुत किए? आप इस विचार से कहाँ तक सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए। [3]
Answer:
इस संवाद की प्रतिक्रिया में चंद्रगुप्त ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह प्रस्ताव गुप्त वंश की परंपरा और धर्म के विरुद्ध है तथा कायरतापूर्ण है। हम चंद्रगुप्त के इस विचार से पूर्णतः सहमत हैं, क्योंकि किसी भी राष्ट्र और शासक के लिए अपने आत्मसम्मान और नारी के शील की रक्षा से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। कायरतापूर्ण समर्पण से शत्रु का हौसला और बढ़ता है, न कि संकट टलता है।
Teacher's Note:
a) चंद्रगुप्त के राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान से परिपूर्ण दृष्टिकोण को प्रस्तुत करें।
b) विद्यार्थी अपने तर्कों से इस बात की पुष्टि करें कि आत्मसमर्पण कायरता है।
Q.10 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :-
‘‘लेकिन यह विजय अधूरी है, सम्राट! युवराज चंद्रगुप्त और ध्रुवस्वामिनी का सबसे बड़ा बैरी अभी भी जीवित है।’’
1. उपर्युक्त कथन किसने, किससे, कब और कहाँ कहा है? [2]
Answer:
उपर्युक्त कथन शिखरस्वामी (या एक पात्र) ने सम्राट (चंद्रगुप्त) से, शकों पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् राजदरबार में कहा है।
Teacher's Note:
a) प्रसंग के अनुसार वक्ता और श्रोता की स्थिति को स्पष्ट करें।
b) यह संवाद विजय के उपरांत की परिस्थिति को दर्शाता है।
2. वक्ता किस विजय की बात कर रहा है? यह विजय कैसे पाई गई थी? संक्षेप में लिखिए। [2]
Answer:
वक्ता शकों पर प्राप्त की गई विजय की बात कर रहा है। यह विजय चंद्रगुप्त द्वारा ध्रुवस्वामिनी के वेश में शकराज के शिविर में जाकर और अपनी अंदुनी वीरता व रणकौशल से शकराज का वध करके प्राप्त की गई थी।
Teacher's Note:
a) शकराज पर चंद्रगुप्त की विजय के रोमांचक प्रसंग का संक्षेप में उल्लेख करें।
b) चंद्रगुप्त की बुद्धिमत्ता और साहस इस विजय का आधार थे।
3. 'सबसे बड़ा बैरी' कौन है? वह सबसे बड़ा बैरी क्यों है? कारण सहित उत्तर दीजिए। [3]
Answer:
'सबसे बड़ा बैरी' रामगुप्त है। वह सबसे बड़ा बैरी इसलिए है क्योंकि उसने व्यक्तिगत स्वार्थ, विलासिता और कायरता के कारण अपने ही साम्राज्य, अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी और गुप्त वंश के गौरव के साथ विश्वासघात किया था तथा शत्रुओं के साथ मिलकर देश को संकट में डाला था।
Teacher's Note:
a) रामगुप्त के गद्दार और कायर चरित्र को उजागर करें।
b) बाहरी शत्रुओं से भी खतरनाक आंतरिक शत्रुओं की भूमिका को स्पष्ट करें।
4. 'सबसे बड़ा बैरी' कब और किस तरह मारा जाता है? समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
जब रामगुप्त अपनी कायरता और कुचक्रों से बाज नहीं आता तथा चंद्रगुप्त और ध्रुवस्वामिनी के विरुद्ध षड्यंत्र रचता है, तब नाटक के अंत में प्रज्वलित परिस्थितियों और जनता के आक्रोश के बीच रामगुप्त का अंत हो जाता है, जिससे मगध को एक कलंक से मुक्ति मिलती है और न्याय की स्थापना होती है।
Teacher's Note:
a) नाटक के क्लाइमैक्स और रामगुप्त के अंत की घटना का वर्णन करें।
b) सत्य और न्याय की अंतिम विजय को दर्शाएँ।
एकांकी सुमन
Q.11 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :-
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :-
‘‘महाराज राम के बल से कौन निर्भीक और निडर नहीं है? उनके प्रताप के सामने तुम्हारा प्रताप क्या है? क्या जुगनुओं का प्रकाश कभी सूर्य के प्रकाश की समानता कर सकता है? और उस प्रकाश से क्या कभी कमलिनी खिल सकती है? ऐसे व्यक्ति का प्रताप .......”
- राजरानी सीता -
लेखक - डॉ. रामकुमार वर्मा
1. प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? उसने ये वाक्य किससे और कब कहा? [2]
Answer:
प्रस्तुत कथन की वक्ता राजरानी सीता हैं। उन्होंने ये वाक्य लंकापति रावण से तब कहे थे जब रावण अपनी शक्ति और अहंकार का प्रदर्शन कर श्रीराम के पराक्रम को कम आंक रहा था और सीता को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा था।
Teacher's Note:
a) एकांकी 'राजरानी सीता' के प्रसंग के अनुसार वक्ता और श्रोता को पहचानें।
b) सीता जी के निर्भीक और ओपजस्वी स्वर को स्पष्ट करें।
2. वक्ता ने 'जुगनुओं का प्रकाश' एवं सूर्य के प्रकाश की तुलना किससे और क्यों की है? संक्षेप में लिखिए। [2]
Answer:
वक्ता (सीता जी) ने 'जुगनुओं का प्रकाश' रावण की अहंकारी और सीमित शक्ति के लिए तथा 'सूर्य का प्रकाश' भगवान श्रीराम के असीम और अलौकिक तेज व प्रताप के लिए प्रयोग किया है। उन्होंने तुलना करके यह स्पष्ट किया है कि रावण की शक्ति सूर्य के सामने जुगनू के समान तुच्छ है, जो भगवान श्रीराम के प्रताप के आगे टिक नहीं सकती।
Teacher's Note:
a) प्रतीक रूप में जुगनू (रावण) और सूर्य (श्रीराम) के अंतर को समझाएँ।
b) श्रीराम के पराक्रम की महानता को रेखांकित करें।
3. वक्ता, श्रोता के किस अपमानजनक कार्य के लिए उसे लज्जित करता है? अपमानजनक कार्य में श्रोता की मुख्य रूप से किसने और प्रकार सहायता की थी? समझाकर लिखिए। [3]
1Answer:
वक्ता (सीता) रावण द्वारा किए गए छल-कपटपूर्ण अपहरण के अपमानजनक कार्य के लिए उसे लज्जित करती है। इस अपमानजनक और कायरतापूर्ण कार्य में रावण की सहायता मारीच नामक राक्षस ने स्वर्ण मृग का छल रूप धरकर की थी, जिसने श्रीराम और लक्ष्मण को कुटी से दूर भटका दिया था।
Teacher's Note:
a) रावण के छलपूर्वक किए गए अपहरण के कृत्य को स्पष्ट करें।
b) मारीच की भूमिका का उल्लेख करना आवश्यक है।
4. वक्ता का परिचय देते हुए उनके चरित्र की मुख्य दो विशेषताएँ लिखिए। [3]
Answer:
वक्ता राजरानी सीता हैं, जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की अर्धांगिनी और आदर्श भारतीय नारी की प्रतीक हैं। उनके चरित्र की मुख्य दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. पतिव्रता और अटूट निष्ठा: वे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी श्रीराम के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित और निष्ठावान रहती हैं।
2. निर्भीकता और आत्मसम्मान: लंका की अशोक वाटिका में बंदी होने के बावजूद वे अहंकारी रावण के सामने पूरी तरह निर्भीक रहकर उसकी अवहेलना करती हैं और अपने आत्मसम्मान को बनाए रखती हैं।
Teacher's Note:
a) सीता जी के चरित्र की महानता और उनकी विशेषताओं को बिंदुवार लिखें।
b) उनके त्याग, साहस और पातिव्रत्य धर्म को विशेष रूप से दर्शाएँ।
Q.12 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :
‘‘नहीं, वह ठोकर इसलिए खाता है क्योंकि आँखों वाला पास खड़ा व्यक्ति उसे सहारा नहीं देता, उसे सहारा देने से कतराता है। हम भी जब अंधे हो जाते हैं तो चाहते हैं आस-पास से रस की दो बूँदें हमें मिल जायँ। सच नीरू, ये रस की बूँदें प्यार की बूँदें हैं जो जीवन के सारे अँधेरे को अंदर तक पोंछ डालती हैं और हमारी जिंदगी तब उजालों में नहा सकती है।''
-भटकाव-
लेखिका - शैल रस्तोगी
1. प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? तथा श्रोता का संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]
Answer:
प्रस्तुत कथन की वक्ता (संभवतः सुधा या नाटक की मुख्य पात्र) हैं और श्रोता नीरू है। नीरू एक समझदार और संवेदनशील पात्र है जो वक्ता की बातों को सुनती है और जीवन के यथार्थ पर चर्चा करती है।
Teacher's Note:
a) एकांकी के पात्रों और उनके आपसी संवाद के संदर्भ को स्पष्ट करें।
b) वक्ता और श्रोता के संबंधों की पृष्ठभूमि दें।
2. अंधा ठोकर क्यों खाता है? इस वाक्य के माध्यम से वक्ता क्या कहना चाहता है? [2]
Answer:
अंधा इसलिए ठोकर खाता है क्योंकि समाज के संपन्न और समर्थ लोग उसकी सहायता करने से कतराते हैं। इस वाक्य के माध्यम से वक्ता यह कहना चाहता है कि समाज की उदासीनता और स्वार्थपरता ही असहायों के दुखों का मुख्य कारण है, क्योंकि यदि समाज मदद का हाथ बढ़ाए तो कोई भी व्यक्ति मार्ग में विचलित नहीं होगा।
Teacher's Note:
a) 'अंधा' शब्द के प्रतीकार्थ और सामाजिक संवेदनहीनता को स्पष्ट करें।
b) वक्ता के मूल सामाजिक व्यंग्य को उजागर करें।
3. रस की बूँदों का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए। वक्ता बूँदें क्यों चाहता है? समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
'रस की बूँदों' से तात्पर्य स्नेह, प्रेम, सहानुभूति और करुणा से है। वक्ता ये बूँदें इसलिए चाहता है क्योंकि जीवन के अकेलेपन, संघर्षों और निराशा के अंधकार से उबरने के लिए प्रत्येक मनुष्य को मानसिक संबल, प्यार और अपनेपन की आवश्यकता होती है, जो उसके जीवन को प्रकाशमय बना सके।
Teacher's Note:
a) प्रेम और संवेदना के प्रतीक 'रस की बूँदों' के अर्थ को समझाएँ।
b) मानवीय संबंधों की आवश्यकता पर बल दें।
4. ‘हमारी जिंदगी तब उजालों में नहा सकती है।’ कथन के आधार पर वक्ता के भाव स्पष्ट कीजिए। [3]
Answer:
इस कथन के माध्यम से वक्ता यह भाव व्यक्त करना चाहता है कि जब समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा, करुणा और एक-दूसरे की सहायता करने की भावना जागृत हो जाती है, तभी मनुष्य के जीवन के सभी दुख और अंधकार दूर हो सकते हैं। स्नेह और अपनापन ही जीवन को सच्ची सार्थकता और आनंद प्रदान कर सकता है।
Teacher's Note:
a) वक्ता के सकारात्मक और मानवतावादी दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।
b) जीवन में प्रेम और प्रकाश के महत्त्व को समझाएँ।
Q.13 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :-
“हाँ, पूछते थे, मैंने कह दिया कि बच्चा है, पर माँ की मौत के बाद उसकी हालत ठीक नहीं रहती, परमात्मा ही मालिक है।”
- लक्ष्मी का स्वागत -
लेखक - उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’
1. उक्त वार्तालाप किनके बीच कब हो रहा है? संक्षेप में लिखिए। [2]
Answer:
उक्त वार्तालाप बेला और उसके ससुर (या संबंधी) के बीच उस समय हो रहा है जब घर में बच्चे की बीमारी और पारिवारिक असमंजस की स्थिति पर चर्चा चल रही है।
Teacher's Note:
a) एकांकी 'लक्ष्मी का स्वागत' के संदर्भ में वार्तालाप की स्थिति स्पष्ट करें।
b) घर के भीतर की विचलित करने वाली परिस्थितियों का संकेत दें।
2. श्रोता कौन है? उसके अनुसार बीमार बच्चे की माँ की मृत्यु किस प्रकार हुई? [2]
Answer:
श्रोता परिवार का एक सदस्य (अथवा चिकित्सक/संबंधी) है। उसके अनुसार बीमार बच्चे की माँ की मृत्यु अत्यधिक गरीबी, अभाव, समय पर इलाज न मिलने और प्रसवोत्तर कमजोरियों के कारण हुई थी।
Teacher's Note:
a) बच्चे की माँ की मृत्यु के कारणों (गरीबी और अभाव) को स्पष्ट करें।
b) एकांकी की करुण पृष्ठभूमि को दर्शाएँ।
3. ऐसी विषम परिस्थितियों में वक्ता द्वारा अपने पुत्र रोशन का शगुन लेना कहाँ तक उचित है? अपने विचार व्यक्त कीजिए। [3]
Answer:
ऐसी विषम और हृदयविदारक परिस्थितियों में वक्ता (या घर के वरिष्ठ सदस्यों) द्वारा पुत्र रोशन के विवाह का शगुन लेना बिल्कुल भी उचित नहीं है, क्योंकि एक तरफ घर में एक मासूम बच्चा अपनी बीमार माँ के बिना तड़प रहा है और दूसरी तरफ उत्सव मनाने की तैयारी हो रही है। यह उनकी संवेदनहीनता और स्वार्थ को दर्शाता है, जहाँ मानवीय संवेदनाओं से ऊपर स्वार्थ को रखा गया है।
Teacher's Note:
a) पारिवारिक संवेदनहीनता और रूढ़िवादिता के इस प्रसंग का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
b) विद्यार्थी अपने तर्कों से इस अनैतिकता का विरोध कर सकते हैं।
4. एकांकी का उदाहरण देते हुए उद्देश्य लिखिए। [3]
Answer:
'लक्ष्मी का स्वागत' एकांकी का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली रूढ़िवादिता, स्वार्थपरता और संवेदनहीनता पर तीखा प्रहार करना है। लेखक ने यह दर्शाया है कि कैसे समाज में दिखावे और उत्सवों के नाम पर गरीबों और असहायों की उपेक्षा की जाती है। एकांकी हमें यह संदेश देती है कि घर में आने वाली बहुओं या बच्चों को लक्ष्मी का रूप मानकर उनके प्रति मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए, न कि उनका शोषण।
Teacher's Note:
a) एकांकी के शीर्षक की सार्थकता और उसके मूल संदेश को स्पष्ट करें।
b) सामाजिक चेतना जगाना ही इसका प्रमुख उद्देश्य है।
काव्य - चन्द्रिका
Q.14 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :-
बगिया हरी-हरी, वसुंधरा भरी-भरी
फिर क्यों रहे मनुष्य की दशा मरी-मरी
फैले कुटी-कुटी महल-महल, तरी-तरी
घर में बिरादरी, समाज में बराबरी
ऐसा न हो कि कोटि-कोटि ही दुखी रहें-
तुम वेदना करो, उदार वेदना करो,
तुम वेदना करो।
बढ़ती चले कतार देश की पुकार पर
धुन छेड़ दो नई, समष्टि के सितार पर
पीछे किया करो सिंगार द्वार-द्वार पर
पहले जले दीपक शिज के मजार पर
वे देश पर चढ़ा गए शरीर फूल सा-
तुम वन्दना करो, कृतज्ञ वन्दना करो,
तुम वन्दना करो।
- नवीन कल्पना करो -
कवि- गोपाल सिंह नेपाली
1. बगिया हरी-हरी तथा वसुंधरा भरी-भरी का मनुष्य की दशा से क्या सम्बन्ध है? [2]
Answer:
'बगिया हरी-हरी' तथा 'वसुंधरा भरी-भरी' प्रकृति की प्रचुरता, संपन्नता और सुंदरता को दर्शाती हैं, जहाँ किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है। इसके विपरीत मनुष्य की दशा मरी-मरी (दीन और हीन) है, जो इस बात को रेखांकित करती है कि प्रकृति के सब कुछ देने के बावजूद मनुष्य आपसी भेदभाव, विषमता और अकर्मण्यता के कारण दुखी और विपन्न जीवन जी रहा है।
Teacher's Note:
a) प्रकृति की संपन्नता और मानव की विडंबनापूर्ण स्थिति के अंतर को स्पष्ट करें।
b) कवि के व्यंग्य को समझें।
2. कवि को किस दुख की चिन्ता है? कवि अपने इस दुख को दूर करने के लिए किससे क्या कह रहा है? [2]
Answer:
कवि को इस बात की चिंता है कि देश के करोड़ों लोग आज भी गरीबी, असमानता और दुखों के साये में जी रहे हैं। कवि इस दुख को दूर करने के लिए देशवासियों से आह्वान कर रहा है कि वे अपनी संकीर्णताओं को छोड़कर समष्टि (समग्र समाज) के कल्याण के लिए आगे आएँ, देश के शहीदों को नमन करें और नई चेतना के साथ समाज की दशा सुधारने का प्रयास करें।
Teacher's Note:
a) जनसाधारण के दुखों के प्रति कवि की संवेदनशीलता को दर्शाएँ।
b) सामूहिक प्रयास (समष्टि) पर बल दें।
3. अपने द्वार को सजाने से पहले कवि क्या करने को कह रहा है? हमें किन लोगों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए तथा क्यों? समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
अपने द्वार को सजाने से पहले कवि देश के शहीदों की मजार पर दीपक जलाने और उनके बलिदान को याद करने को कह रहा है। हमें देश के उन वीर शहीदों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया, क्योंकि उन्हीं के त्याग के कारण आज हम स्वतंत्र हवा में सांस ले रहे हैं।
Teacher's Note:
a) व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से पहले राष्ट्र और शहीदों के प्रति कर्तव्य को समझें।
b) कृतज्ञता की भावना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
4. प्रस्तुत कविता का मूलभाव लिखिए। [3]
Answer:
गोपाल सिंह नेपाली द्वारा रचित कविता 'नवीन कल्पना करो' का मूलभाव राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समता और शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। कवि संदेश देता है कि व्यक्तिगत स्वार्थों और श्रृंगार में लीन रहने के बजाय हमें देश के शोषितों, दुखी जनों की पीड़ा को समझना चाहिए तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को नमन कर एक नए, सुखी और समतावादी समाज की रचना करनी चाहिए।
Teacher's Note:
a) कविता के केंद्रीय संदेश, देशभक्ति और मानवतावादी दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।
b) नई कल्पना और सामूहिक उत्थान के स्वर को रेखांकित करें।
Q.15 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :
आगे चले बहुरि रघुराया। रिष्यमूक पर्बत निअराया।।
तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा। आवत देखि अतुल बल सींवा।।
अति सभीत कह सुनि हनुमाना। पुरुष जुगल बल रूप निधाना।।
धरर बटु रूप देखु तैं जाई। कहेसु जानि जियँ सयि बुझाई।।
पिए बालि मोहिं मन मैला। भागौं तुरत तजौं यह सैला।।
बिप्र रूप धरि कपि तहँ गयऊ। माथ नाइ पूछत अस भयऊ।।
को तुम्ह स्यामि गौर सरीरा। छत्री रूप फिरहु बन बीरा।।
कठिन भूमि कोमल पद गामी। कवन हेतु बिचरहु बन स्वामी।।
मृदुल मनोहर सुंदर गाता। सहत दसह बन आतप बाता।।
की तुम्ह तीनि देव मँह कोऊ। नर नारायण की तुम्ह दोऊ।।
- राम-सुग्रीव मैत्री –
कवि- तुलसीदास
1. सुग्रीव किस पर्वत पर, किसके साथ तथा क्यों रहता था? [2]
Answer:
सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर अपने मंत्रियों (जैसे हनुमान आदि) के साथ रहता था। वह वहाँ अपने भाई बालि के भय से छिपकर रहता था क्योंकि बालि ने उसे मारकर अपने राज्य से निकाल दिया था और उस पर्वत पर बालि शाप के कारण आ नहीं सकता था।
Teacher's Note:
a) प्रसंग के अनुसार सुग्रीव की विवशता और ऋष्यमूक पर्वत पर निवास का कारण स्पष्ट करें।
b) बालि का भय इसका मुख्य कारण था।
2. सुग्रीव क्या देखकर भयभीत हो गए थे? उन्होंने हनुमान जी से क्या कहा? [2]
Answer:
सुग्रीव अपने दोनों भाइयों (श्रीराम और लक्ष्मण) को अतुलित बल और सुंदर रूप से संपन्न तथा उनकी ओर आते देख भयभीत हो गए थे। उन्होंने हनुमान जी से कहा कि वे ब्राह्मण का वेश धरकर उनके पास जाएँ और यह पता लगाएँ कि वे कौन हैं, कहीं वे बालि द्वारा भेजे गए गुप्तचर तो नहीं हैं।
Teacher's Note:
a) श्रीराम और लक्ष्मण के आगमन पर सुग्रीव की आशंका का वर्णन करें।
b) हनुमान जी को दूत बनाकर भेजने का निर्देश दिया गया था।
3. बालि कौन था? वह ऋष्यमूक पर्वत पर क्यों नहीं जाता था? उससे सुग्रीव क्यों भयभीत था? [3]
Answer:
बालि किष्किंधा का प्रतापी वानर राज और सुग्रीव का बड़ा भाई था। वह ऋष्यमूक पर्वत पर इसलिए नहीं जा सकता था क्योंकि वहाँ ऋषि मातंग का शाप था कि यदि बालि उस पर्वत पर आया तो उसके प्राण निकल जाएंगे। सुग्रीव उससे इसलिए भयभीत था क्योंकि बालि ने उसे अत्यंत अपमानित कर राज्य से निकाल दिया था और उसकी पत्नी को भी छीन लिया था तथा उसे जान से मारने की धमकी दे रखी थी।
Teacher's Note:
a) बालि के परिचय और मातंग ऋषि के शाप का उल्लेख करें।
b) सुग्रीव के मन में व्याप्त भय के कारणों को स्पष्ट करें।
4. सुग्रीव ने हनुमान से क्या कहा? हनुमान ने सुग्रीव की आज्ञा का पालन किस प्रकार किया तथा उन्होंने आगंतुक से क्या प्रश्न पूछे? [3]
Answer:
सुग्रीव ने हनुमान से कहा कि वे बटुक (ब्राह्मण) का रूप धारण कर श्रीराम और लक्ष्मण के पास जाएँ और उनके आने का उद्देश्य जानें। हनुमान जी ने तुरंत ब्राह्मण का रूप धारण किया, उनके पास जाकर मस्तक नवाया और उनसे पूछा कि हे श्यामल और गौर शरीर वाले वीरों! आप छत्री के रूप में इस कठिन वन में क्यों घूम रहे हैं? आपके कोमल चरण इस कठिन भूमि पर कैसे चल रहे हैं? क्या आप तीनों देवों में से कोई हैं अथवा नर-नारायण की जोड़ी हैं?.
Teacher's Note:
a) हनुमान जी द्वारा ब्राह्मण वेश धारण करने और संवाद की घटना का वर्णन करें।
b) हनुमान जी द्वारा पूछे गए प्रश्नों के मूल स्वरूप को उद्धृत करें।
Q.16 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए :-
मेरा मन तो हरा हो गया इन्हें निरख कर,
दोनों का यह रुचिर रूप नयनों से चखकर।
और अधिक के हेतु समुत्सुक हूँ मैं मन में
ये दोनों जड़ विटपी यहाँ इस विरल विजन में।
भेंट रहे हैं एक दूसरे को खिल-खिल कर
निज-निज सीमा लाँघ सहोदर-से हिल-मिलकर।
इसकी शाखा लिये कनक सुमों की डाली,
उसके कर में मधुर फलों की भेंट निराली ।
पुलकान्दोलित पत्र परस्पर की छाया में,
छाया भी अविभिन्न परस्पर की माया है।
- सम्मिलित -
कवि 'हरिऔध' अयोध्यासिंह उपाध्याय
1. 'मेरा मन तो हरा हो गया' से कवि का क्या तात्पर्य है? कवि का मन हरा क्यों हो गया था? [2]
Answer:
'मेरा मन तो हरा हो गया' से कवि का तात्पर्य मन में प्रसन्नता, ताजगी और आनंद का संचार होने से है। कवि का मन इसलिए हरा हो गया था क्योंकि उसने एकांत वन में दो पास-पास खड़े पेड़ों के आपसी प्रेम, आत्मीयता और मिलन के सुंदर दृश्य को अपनी आँखों से देख लिया था।
Teacher's Note:
a) काव्यात्मक अभिव्यक्ति 'मन हरा होना' (प्रसन्न होना) के अर्थ को स्पष्ट करें।
b) प्रकृति के सौंदर्य और पेड़ों के प्रेम का प्रभाव कवि पर पड़ा था।
2. कौन भेंट रहे हैं? कविता के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए। [2]
Answer:
कविता के संदर्भ में एकांत वन (विरल विजन) में पास-पास खड़े दो अलग-अलग पेड़ (विटपी) आपस में गले मिल रहे हैं। वे अपनी सीमा लाँघकर सगे भाइयों की तरह हिल-मिलकर एक-दूसरे से आलिंगनबद्ध हो रहे हैं।
Teacher's Note:
a) पेड़ों के मानवीकरण के माध्यम से उनके आलिंगन को स्पष्ट करें।
b) 'सहोदर-से' (सगे भाइयों की तरह) प्रेम को दर्शाएँ।
3. 'छाया भी अविभिन्न परस्पर की माया है।' पंक्ति का भावार्थ लिखिए। कवि ने उक्त पंक्ति के द्वारा क्या संकेत दिया है? [3]
Answer:
उक्त पंक्ति का भावार्थ यह है कि दोनों पेड़ों की परछाइयाँ (छाया) भी इस प्रकार आपस में घुल-मिल गई हैं कि उनमें अंतर करना असंभव है, दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह समाहित हो चुके हैं। कवि ने इस पंक्ति के द्वारा यह संकेत दिया है कि सच्चा प्रेम और आत्मीयता वह है जहाँ दो अलग-अलग अस्तित्व होते हुए भी भेद समाप्त हो जाए और दोनों एक रूप हो जाएँ।
Teacher's Note:
a) पेड़ों की छाया के माध्यम से अद्वैत और घनिष्ठ प्रेम के भाव को समझाएँ।
b) प्रकृति के प्रेम से मानवीय संबंधों की सीख दें।
4. निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए :- [3]
रुचिर, समुत्सुक, विटपि, सहोदर, पुलकान्दोलित, परस्पर।
Answer:
* रुचिर - सुंदर / मनमोहक
* समुत्सुक - अत्यधिक उत्सुक / जिज्ञासु
* विटपि - वृक्ष / पेड़
* सहोदर - सगा भाई / एक ही पेट से उत्पन्न
* पुलकान्दोलित - आनंद या पुलक से हिलने-डुलने वाला
* परस्पर - आपस में / एक-दूसरे
Teacher's Note:
a) कविता में आए कठिन शब्दों के सटीक और साहित्यिक अर्थ लिखें।
b) शब्दार्थ ज्ञान काव्य के मर्म को समझने में सहायक होता है।
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