Download ICSE Class 10 Hindi Question Papers
Review targeted exam resources with the ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions. Built according to official ICSE standards for the 2026-27 academic year, these downloadable Class 10 Hindi question papers support effective revision and performance tracking.
Access ICSE Question Papers and Solutions
View or download the dedicated ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions resource below. Engaging with these previous year papers under timed conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026-27 exam format.
ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
SECTION A (40 Marks)
Question 1
Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : -
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए : - [15]
(i) भारतीय तथा पाश्चात्य संस्कृति का वर्णन करते हुए पाश्चात्य संस्कृति की कुछ अपनाने योग्य बातों पर प्रकाश डालिए।
Answer:
भारतीय तथा पाश्चात्य संस्कृति
संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है, जो उसके रीति-रिवाजों, जीवन मूल्यों और आचार-विचार में झलकैति है। भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से ही अपनी आध्यात्मिकता, वसुधैव कुटुंबकम् की भावना, आदर-सत्कार और संयुक्त परिवार प्रणाली के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध रही है। इसके विपरीत, पाश्चात्य (पश्चिमी) संस्कृति आधुनिकता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति दृष्टिकोण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समय के सदुपयोग पर अधिक बल देती है।
यद्यपि हमारी प्राचीन संस्कृति हमारी पहचान है, किंतु समय के साथ पाश्चात्य संस्कृति की कुछ अच्छी बातों को अपनाना आज की आवश्यकता बन गया है। सबसे पहले, पाश्चात्य संस्कृति में समय की पाबंदी (Punctuality) और अनुशासन को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। हर कार्य को तय समय पर पूरा करना उनकी कार्यसंस्कृति का हिस्सा है, जिसे हमें अपने जीवन में उतारना चाहिए। दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष श्रम की प्रतिष्ठा है। पश्चिम में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं माना जाता; लोग अपने छोटे-छोटे काम स्वयं करने में संकोच नहीं करते, जो आत्मनिर्भरता की सीख देता है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता के प्रति उनकी जागरूकता और सार्वजनिक स्थलों पर नियमों का कड़ाई से पालन करने की प्रवृत्ति भी अनुकरणीय है।
निष्कर्षतः, हमें अपनी संस्कृति की मूल जड़ों से जुड़े रहते हुए पाश्चात्य संस्कृति के सकारात्मक और प्रगतिशील पहलुओं को अपनाना चाहिए, जिससे हमारा व्यक्तिगत और राष्ट्रीय विकास संभल सके।
Teacher's Note:
a) निबंध में विषय का परिचय, मध्य भाग में मुख्य बिंदु और अंत में सुंदर निष्कर्ष होना आवश्यक है।
b) शब्द सीमा (लगभग 250 शब्द) का ध्यान रखें और व्याकरण संबंधी अशुद्धियों से बचें।
(ii) आज खेलों में फैला भ्रष्टाचार एक नया रूप ले रहा है, विषय को स्पष्ट करते हुए, अपने प्रिय खेल का वर्णन कीजिए तथा जीवन में खेलों की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
Answer:
खेलों में भ्रष्टाचार और जीवन में उनका महत्व
खेल जो कभी निष्पक्षता, भाईचारे और मनोरंजन के प्रतीक माने जाते थे, आज दुर्भाग्यवश भ्रष्टाचार की चपेट में आ गए हैं। मैच फिक्सिंग, स्पाट फिक्सिंग, डोपिंग और चयन में भाई-भतीजावाद जैसे दूषित तत्व खेलों को खोखला कर रहे हैं। धन कमाने की अंधी दौड़ ने खेल की सच्ची भावना को पीछे छोड़ दिया है, जो खेल प्रेमियों के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है।
इन तमाम विसंगतियों के बावजूद खेलों का महत्व हमारे जीवन में कम नहीं हुआ है। क्रिकेट मेरा सबसे प्रिय खेल है। इसका रोमांच, इसमें रणनीति का प्रयोग और अनिश्चितता का रोमांच मुझे आकर्षित करता है। सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों का संघर्ष और समर्पण मुझे प्रेरित करता है।
मानव जीवन में खेलों की अनिवार्यता सर्वसिद्ध है। खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारे शारीरिक और मानसिक विकास की रीढ़ हैं। खेल हमें अनुशासन, टीम भावना, हार को स्वीकार करने का साहस और जीत की ललक सिखाते हैं। व्यस्त जीवनशैली में खेल तनाव को दूर करने और स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने का सबसे बेहतरीन माध्यम हैं। अतः खेलों को उनकी मूल पवित्रता के साथ बचाए रखना हम सबका दायित्व है।
Teacher's Note:
a) छात्र ने विषय के तीनों अंगों (भ्रष्टाचार, प्रिय खेल, खेलों की आवश्यकता) को संतुलित रूप से प्रस्तुत किया है।
b) भाषा को प्रवाहमयी और प्रभावशाली बनाए रखना अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।
(iii) अपने जीवन में घटी उस घटना का वर्णन कीजिए जिसे याद करके, आप आज भी हंसे बिना नहीं रहते और इससे आपको क्या लाभ मिलता है?
Answer:
एक हास्यप्रद घटना और उसका जीवन में महत्व
मानव जीवन में सुख-दुःख दोनों का आना-जाना लगा रहता है, किंतु कुछ यादें ऐसी होती हैं जो चेहरे पर अनायास ही मुस्कान ले आती हैं। ऐसी ही एक घटना मेरे साथ पिछले वर्ष घटी जब हमारे विद्यालय में वार्षिक उत्सव की तैयारी चल रही थी।
मैं नाटक में एक राजा की भूमिका निभा रहा था। मंच पर प्रवेश करते ही मेरा मुकुट बहुत ढीला होने के कारण मेरी आँखों पर आ गिरा। घबराहट में मैंने मुकुट को ठीक करना चाहा तो वह हाथ से छूटकर मंच पर ही लुढ़क गया और दर्शक दीर्घा में बैठे सभी अध्यापक और छात्र जोर-जोर से हंसने लगे। उस समय तो मुझे बहुत संकोच हुआ, लेकिन जब मैंने खुद उस परिस्थिति को याद किया तो मैं भी अपनी मूर्खता पर हंसे बिना नहीं रह सका।
इस प्रकार की छोटी-मोटी घटनाएं हमें यह सिखाती हैं कि जीवन को बहुत अधिक गंभीरता से लेने के बजाय सहजता से जीना चाहिए। ये हास्यप्रद यादें हमारे मानसिक तनाव को छूमंतर कर देती हैं और जब भी जीवन में निराशा के बादल मंडराते हैं, ये पुरानी स्मृतियां हमें मुस्कुराने की वजह दे जाती हैं।
Teacher's Note:
a) आत्मकथात्मक शैली में लिखे गए लेख में घटना का सजीव चित्रण होना चाहिए।
b) हास्य के साथ-साथ उससे मिलने वाले सकारात्मक संदेश को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए।
(iv) एक मौलिक कहानी लिखिए जिसका आधार हो : -
'जाको राखे साइयां मार सके न कोय।'
Answer:
जाको राखे साइयां मार सके न कोय
एक शांत और सुंदर गाँव में सोहन नाम का एक नन्हा बालक अपने माता-पिता के साथ रहता था। सोहन प्रकृति प्रेमी और बहुत दयालु था। एक दिन गाँव के पास के घने जंगल में मवेशी चराते-चराते शाम हो गई और अचानक आसमान में काले बादल छा गए। मूसलाधार बारिश शुरू हो गई और तेज आंधी के कारण जंगल का एक बहुत पुराना और विशाल बरगद का पेड़ जड़ से उखड़ने लगा।
उसी पेड़ के नीचे सोहन एक बड़ी चट्टान की आड़ में खड़ा था। जैसे ही पेड़ उसकी तरफ गिरा, उसकी चीख निकल गई। गाँव वाले जब तक टॉर्च लेकर खोजबीन करते हुए वहां पहुंचे, तब तक रात के बारह बज चुके थे। सबने यही सोचा कि अबोध बालक का बचना असंभव है। किंतु जब लोगों ने पेड़ के तने को उठाया, तो वे चकित रह गए। पेड़ की एक बड़ी शाखा बीच में ही एक मजबूत चट्टान पर अटक गई थी, जिससे एक छोटी सी गुफा जैसी जगह बन गई थी और सोहन उसके भीतर सुरक्षित बैठा था। उसे खरोंच तक नहीं आई थी।
गाँव के बुजुर्ग ने आसमान की ओर हाथ जोड़कर कहा - सच ही कहा गया है कि 'जाको राखे साइयां मार सके न कोय।' जिसकी रक्षा ईश्वर करता है, उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता।
Teacher's Note:
a) कहानी में शीर्षक, रोचक कथानक और अंत में दी गई लोकोक्ति का सार्थक मेल होना चाहिए।
b) पात्रों का सजीव वर्णन और सरल भाषा कहानी को अधिक प्रभावी बनाती है।
(v) नीचे दिये गये चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर वर्णन कीजिए अथवा कहानी लिखिए जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए।
[Figure: A traditional Indian rural or semi-urban scene showing women in sarees performing a ritual or activity near water/vessels, with one woman pouring water from a traditional pot (lota/matka) and others participating in a cultural or religious ceremony.]
Answer:
चित्र वर्णन
प्रस्तुत चित्र भारतीय ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और सामूहिक जीवन का एक अत्यंत सुंदर और जीवंत दृश्य प्रस्तुत करता है। चित्र में कुछ भारतीय महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा (साड़ियों) में नजर आ रही हैं। वे किसी पवित्र अनुष्ठान, पूजा या सांस्कृतिक उत्सव में तल्लीन दिखाई देती हैं।
चित्र के केंद्र में एक महिला पारंपरिक धातु के पात्र (लोटे या कलश) से जल अर्पित कर रही है। आसपास खड़ी अन्य महिलाएं श्रद्धापूर्वक इस दृश्य को देख रही हैं और इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग ले रही हैं। उनके चेहरों पर एक शांत भाव और परंपरा के प्रति अटूट निष्ठा झलक रही है। यह चित्र हमारी उन प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों की याद दिलाता है जहाँ सामूहिक रूप से उत्सव मनाने और प्रकृति व ईश्वर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने की परंपरा रही है। पृष्ठभूमि में पुराने ग्रामीण परिवेश के घर और पेड़ इस दृश्य की प्रामाणिकता को और अधिक बढ़ा रहे हैं। यह चित्र हमारी समृद्ध भारतीय विरासत का प्रतीक है।
Teacher's Note:
a) चित्र आधारित वर्णन में चित्र में दिखाई दे रही मुख्य क्रियाओं और वातावरण का सटीक विवरण देना आवश्यक है।
b) छात्र चाहें तो इसी चित्र पर आधारित कोई काल्पनिक कहानी भी लिख सकते हैं, बशर्ते उसका संबंध सीधा चित्र से हो।
Question 2
Write a letter in Hindi in approximately 120 words on any one of the topics given below : -
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए : - [7]
(i) आप किसी स्थान विशेष की यात्रा करना चाहते हैं। उस स्थान की जानकारी प्राप्त करने के लिए, उस क्षेत्र के पर्यटन विभाग के अधिकारी को पत्र लिखकर पूछताछ कीजिए।
Answer:
परीक्षा भवन,
क ख ग।
दिनांक : 15 मार्च 2024
सेवा में,
पर्यटन अधिकारी,
पर्यटन विभाग, शिमला (हिमाचल प्रदेश)।
विषय : शिमला यात्रा से संबंधित जानकारी प्राप्त करने हेतु।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आगामी गर्मियों की छुट्टियों में अपने परिवार के साथ शिमला और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों की यात्रा करने की योजना बना रहा हूँ। शिमला की प्राकृतिक सुंदरता के बारे में बहुत सुना है और हम वहाँ कुछ दिन बिताना चाहते हैं।
यात्रा को सुगम बनाने के लिए मुझे निम्नलिखित जानकारियों की आवश्यकता है:
1. मई-जून के महीने में वहाँ के मौसम की स्थिति कैसी रहती है?
2. पर्यटन विभाग द्वारा संचालित विश्राम गृहों या होटलों की बुकिंग की क्या प्रक्रिया है?
3. शिमला और उसके आसपास घूमने के मुख्य दर्शनीय स्थल कौन-से हैं और वहां तक पहुँचने के लिए परिवहन के क्या साधन उपलब्ध हैं?
अतः आपसे अनुरोध है कि यथाशीघ्र इन सभी जानकारियों का एक ब्रोशर या पत्र भेजने की कृपा करें ताकि हम अपनी यात्रा की योजना भली-भांति बना सकें।
धन्यवाद!
भवदीय,
क ख ग।
Teacher's Note:
a) औपचारिक पत्र के प्रारूप का कड़ाई से पालन करें, जिसमें प्रेषक का पता, दिनांक, सेवा में, विषय, संबोधन, मुख्य भाग और हस्ताक्षर शामिल हों।
b) भाषा शिष्ट और स्पष्ट होनी चाहिए तथा शब्द सीमा का ध्यान रखना चाहिए।
OR
(ii) आपका भाई अपना अधिकांश समय मोबाइल फोन के उपयोग में बिताता है। मोबाइल फोन के अधिक उपयोग करने से होने वाली हानियों का उल्लेख करते हुए, उसे पत्र लिखिए।
Answer:
परीक्षा भवन,
क ख ग।
दिनांक : 15 मार्च 2024
प्रिय अनुज अमन,
शुभाशीर्वाद।
कल ही माताजी से फोन पर बात हुई। उन्होंने बताया कि आजकल तुम अपना अधिकांश समय पढ़ाई छोड़कर केवल मोबाइल फोन पर गेम खेलने और सोशल मीडिया का उपयोग करने में बिता रहे हो। यह सुनकर मुझे बहुत चिंता हुई।
तुम जानते ही हो कि मोबाइल फोन केवल एक साधन है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग तुम्हारे भविष्य के लिए बहुत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। देर तक स्क्रीन देखने से तुम्हारी आँखों की रोशनी कमजोर हो सकती है और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, लगातार मोबाइल में लगे रहने से तुम्हारा कीमती समय बर्बाद हो रहा है, जिसका सीधा असर तुम्हारी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर पड़ेगा। खेलकूद और बाहरी गतिविधियों से दूर होने के कारण शारीरिक विकास भी रुक जाता है।
अतः मेरी तुम्हें सलाह है कि मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यकता के समय ही करो और अपना ध्यान अपनी पढ़ाई तथा खेलकूद पर केंद्रित करो। मुझे विश्वास है कि तुम मेरी बात को समझोगे और अपनी आदत में सुधार करोगे।
तुम्हारा अग्रज,
क ख ग।
Teacher's Note:
a) अनौपचारिक पत्र में स्नेहपूर्ण संबोधन (प्रिय भाई) और उचित अंत (तुम्हारा अग्रज) का प्रयोग किया जाना चाहिए।
b) पत्र में मोबाइल के दुष्प्रभावों को तार्किक रूप से समझाते हुए एक बड़े भाई का मार्गदर्शन स्पष्ट दिखना चाहिए।
Question 15
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -
ऋषियों ने रितिदेव ने दिया करस्थ थाल भी,
तथा दधीचि ने दिया परार्थ अस्थिजाल भी।
उशीनीर क्षितीश ने स्वमांस दान भी किया,
सहर्ष वीर कर्ण ने शरीर चर्म भी दिया।
अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।
-मानवता-
कवि - मैथिलीशरण गुप्त
(i) यह कविता कहाँ से ली गई है ? इसके माध्यम से कवि ने किन जीवन-मूल्यों का वर्णन किया है ? [2 Marks]
Answer:
यह कविता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता 'मानवता' से ली गई है। इसके माध्यम से कवि ने परोपकार, त्याग, बलिदान, उदारता और मानवता जैसे महान जीवन-मूल्यों का वर्णन किया है।
Teacher's Note:
a) उत्तर में कविता का शीर्षक (मानवता), कवि का नाम (मैथिलीशरण गुप्त) और मुख्य जीवन-मूल्यों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
b) दो अंकों के प्रश्न के लिए उत्तर संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए।
(ii) 'दधीचि' कौन थे ? उन्होंने मानवता का परिचय किस प्रकार दिया था ? [2 Marks]
Answer:
महर्षि दधीचि एक महान पौराणिक ऋषि और तपस्वी थे। उन्होंने देवताओं की रक्षा और असुरों के विनाश के लिए अपने शरीर का त्याग कर दिया था तथा अपनी हड्डियों (अस्थिजाल) का दान कर दिया था, जिससे वज्र का निर्माण हुआ था। इस प्रकार उन्होंने अपने प्राणों की परवाह न करके परोपकार की पराकाष्ठा का परिचय दिया था।
Teacher's Note:
a) पौराणिक प्रसंग के अनुसार महर्षि दधीचि के त्याग को संक्षेप में लिखना आवश्यक है।
b) उत्तर में 'अस्थियों के दान' का मुख्य बिंदु छूटना नहीं चाहिए।
(iii) "अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे" - पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। [3 Marks]
Answer:
इस पंक्ति का आशय यह है कि यह शरीर नश्वर (अनित्य) है, एक दिन इसका नष्ट होना निश्चित है। इसके विपरीत, आत्मा अमर और अनादि है। इसलिए मनुष्य को नश्वर शरीर के नष्ट होने या मृत्यु से कभी डरना नहीं चाहिए। जो व्यक्ति परोपकार और समाज कल्याण के मार्ग पर चलते हुए अपने प्राणों का बलिदान करने से नहीं डरता, वही सच्चा मनुष्य कहलाता है।
Teacher's Note:
a) पंक्ति के दार्शनिक अर्थ (शरीर की नश्वरता और आत्मा की अमरता) को स्पष्ट करना जरूरी है।
b) तीन अंकों के लिए उत्तर में भावार्थ और उसका निहित संदेश दोनों शामिल होने चाहिए।
(iv) 'मानवता' से आप क्या समझते हैं ? इस कविता से आपको क्या प्रेरणा मिली ? [3 Marks]
Answer:
मानवता से तात्पर्य केवल मनुष्य योनि में जन्म लेना नहीं है, बल्कि परोपकार, दया, करुणा, सहृदयता और दूसरों के दुखों को दूर करने की भावना रखना है। इस कविता से हमें यह प्रेरणा मिली है कि हमें स्वार्थी जीवन जीने के बजाय त्याग और बलिदान का मार्ग अपनाना चाहिए तथा संपूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
Teacher's Note:
a) मानवता शब्द की सही परिभाषा और कविता से मिलने वाली मुख्य सीख को लिखना चाहिए।
b) उत्तर संतुलित और प्रेरणादायक होना चाहिए।
Question 16
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -
तू तरुण देश से पूछ, अरे,
गूंजा यह कैसा ध्वंस-राग ?
अबुधि-अंतरस्त बीच छिपी
यह सुलग रही है कौन आग ?
प्राची के प्रांगण-बीच देख,
जल रहा स्वर्ण-युग-अग्नि-ज्वल !
तू सिंहनाद कर जाग, तपी !
मेरे नगपति ! मेरे विशाल !
-हि-लालय-
कवि - रामधारी सिंह दिनकर
(i) 'तरुण देश' का सन्दर्भ स्पष्ट करते हुए लिखिए कि यहाँ किस 'ध्वंस राग' की बात की जा रही है ? [2 Marks]
Answer:
यहाँ 'तरुण देश' से तात्पर्य भारत के उस युवा वर्ग और नव-जागृत राष्ट्र से है जो स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए संघर्षरत है। 'ध्वंस राग' से आशय पुरानी गुलाम मानसिकता, रूढ़ियों और विदेशी शासन के विनाश की हुंकार से है, जो देश को स्वतंत्र कराने के लिए गूंज रही है।
Teacher's Note:
a) तरुण देश और ध्वंस राग दोनों के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) संदर्भ सहित व्याख्या को संक्षिप्त रखें।
(ii) 'जल रहा स्वर्ण-युग-अग्नि-ज्वल' का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए। [2 Marks]
Answer:
इसका अभिप्राय यह है कि पूर्व दिशा (प्राची) रूपी प्रांगण में क्रांति की अग्नि प्रज्वलित हो चुकी है, जो देश के गौरवशाली स्वर्ण युग को पुनः स्थापित करने के लिए संघर्ष की आग में तप रही है। यह देश की स्वतंत्रता और नवनिर्माण का प्रतीक है।
Teacher's Note:
a) पंक्ति में निहित क्रांति और नवनिर्माण के भाव को स्पष्ट करें।
b) दो अंकों के अनुरूप उत्तर दो वाक्यों में प्रभावी हो।
(iii) हिमालय का भारत की सभ्यता और संस्कृति से क्या सम्बन्ध है ? हिमालय को सुरक्षित रखना आज के युग की प्राथमिकता क्यों है ? [3 Marks]
Answer:
हिमालय केवल एक पर्वत नहीं है, बल्कि यह भारत का प्रहरी, हमारी सभ्यता का उद्गम स्थल और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह देश की उत्तर सीमा की रक्षा करने के साथ-साथ नदियों के माध्यम से जीवन प्रदान करता है। आज के युग में बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और वनों की कटाई के कारण हिमालय खतरे में है, इसलिए जलवायु संतुलन और देश की भौगोलिक सुरक्षा के लिए हिमालय को सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
Teacher's Note:
a) हिमालय के सांस्कृतिक और भौगोलिक महत्व दोनों का उल्लेख करें।
b) आज के संदर्भ में उसकी सुरक्षा की अनिवार्यता को तर्कसंगत रूप से समझाएं।
(iv) शब्दार्थ दीजिए : -
सिंहनाद, अंबुधि, ध्वंस, प्राची, सुलगना, स्वर्ण। [3 Marks]
Answer:
1. सिंहनाद - शेर जैसी दहाड़ या हुंकार
2. अंबुधि - समुद्र या सागर
3. ध्वंस - विनाश या बर्बादी
4. प्राची - पूर्व दिशा
5. सुलगना - बिना ज्वाला के धीरे-धीरे जलना या भीतर ही भीतर क्रोध/वेदना होना
6. स्वर्ण - सोना या सुनहरा
Teacher's Note:
a) सभी छह शब्दों के सटीक और प्रामाणिक अर्थ लिखें।
b) वर्तनी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
Free study material for Hindi
Past Exam Papers & Solutions for Class 10 Hindi
Class 10 Hindi Past Exam Papers & Resources
Explore downloadable past papers for Class 10 Hindi. Utilizing the ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions ensures complete preparedness by offering clear insights into historical question styles and marking expectations.
Importance of Solving ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions
Regular simulation of exam environments using past question documents builds crucial pacing abilities and eliminates last-minute test anxiety during Class 10 Hindi assessments.
Complete Your Exam Preparation
Pair your past paper revision with our official Class 10 Hindi sample papers and online practice modules to achieve total curriculum mastery.
FAQs
The ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions is available for download on StudiesToday.com. It includes complete set with all sections so that Class 10 students can practice with the exact same paper that came in the ICSE exams.
Yes, the solutions for ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions are prepared by subject matter experts as per official marking scheme. Class 10 students will understand the structure of answers and 'step-marks' methodology Hindi.
Solving previous year papers like ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions is important to understand repeat themes and question difficulty levels of Hindi. It helps Class 10 students to test their time management skills too.
Yes, where applicable, ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions is available in both English and Hindi mediums. All students from Class 10 can access Hindi study material in their preferred language.
No, all previous year question papers on StudiesToday, including ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2014 with Solutions, are provided free of charge in mobile-friendly PDF.