ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2013 with Solutions

Class 10 Hindi Solved Question Papers: ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2013 with Solutions

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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions

 

SECTION - A (40 Marks)

Attempt all questions

 

Q.1 Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics: [15]

Answer:
(iii) वर्तमान युग में इंटरनेट अपनी उपयोगिता के कारण एक आवश्यकता बनता जा रहा है। इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए और बताइए कि इंटरनेट जीवन में सुविधा के साथ-साथ मुसीबत किस प्रकार बन जाता है।
वर्तमान युग विज्ञान और प्रौद्योगिकी का युग है। इस आधुनिक दौर में इंटरनेट हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सुबह की शुरुआत से लेकर रात की नींद तक, हर कार्य के लिए हम किसी-न-کسی रूप में इंटरनेट पर निर्भर हो गए हैं। शिक्षा, व्यवसाय, बैंकिंग, मनोरंजन और संचार - सभी क्षेत्रों में इसने क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं।

इंटरनेट के लाभ अनंत हैं। इसने पूरी दुनिया को एक छोटे से ग्लोबल विलेज में बदल दिया है। घर बैठे एक क्लिक पर दुनिया के किसी भी कोने की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन क्लासेज, ई-पुस्तकों और शोध सामग्री ने अध्ययन को अत्यंत सुगम बना दिया है। व्यापारियों के लिए ई-कॉमर्स ने वैश्विक बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं। दूर बैठे परिजनों से वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ना अब बेहद आसान हो गया है।

परंतु, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जहाँ एक ओर इंटरनेट वरदान है, वहीं दूसरी ओर इसका अति प्रयोग या दुरुपयोग हमारे लिए एक गंभीर मुसीबत भी बन जाता है। इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग से युवाओं और बच्चों में शारीरिक सक्रियता कम हो रही है, जिससे ओबेसिटी और नेत्र ज्योति की समस्याएं बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया की लत के कारण लोगों में सामाजिक मेल-जोल कम हो गया है और मानसिक तनाव, डिप्रेशन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, साइबर अपराध जैसे फिशिंग, डेटा चोरी, और ऑनलाइन ठगी ने लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

निष्कर्षतः, इंटरनेट एक उत्तम सेवक है किंतु एक बुरा स्वामी। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग अपने जीवन को संवारने के लिए करते हैं या इसके गुलाम बनकर अपना सर्वनाश करते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम इंटरनेट का विवेकपूर्ण और सीमित उपयोग करें ताकि यह हमारे लिए मुसीबत न बनकर सदैव एक उपयोगी साधन बना रहे।

Teacher's Note:
a) निबंध लेखन में प्रस्तावना, विषय का विस्तार (लाभ और हानियाँ) तथा उपसंहार का स्पष्ट क्रम होना चाहिए।
b) वर्तनी की अशुद्धियों से बचें और शब्द सीमा (लगभग 250 शब्द) का ध्यान रखें।

 

Q.2 Write a letter in Hindi in approximately 120 Words on any one of the topics given below: [7]

Answer:
परीक्षा भवन,
क ख ग।
दिनांक: 15 मार्च 2013

श्रीमान् स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,
नगर निगम,
नई दिल्ली।

विषय: क्षेत्र में जलभराव और टूटी सड़कों के संबंध में शिकायत पत्र।

महोदय,
मैं आपके माध्यम से अपने क्षेत्र (मयूर विहार, फेज-1) के निवासियों की एक गंभीर समस्या की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। हमारे क्षेत्र में इन दिनों सड़कों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। अधिकांश सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं और उनमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।

हाल ही में हुई बारिश के कारण इन गड्ढों में बहुत अधिक पानी जमा हो गया है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और संक्रामक रोगों का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके अतिरिक्त, जगह-जगह बनाए गए अवैध 'स्पीड ब्रेकर' मानक के विपरीत होने के कारण चालकों के लिए सहायक न होकर घातक सिद्ध हो रहे हैं और आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस समस्या का त्वरित संज्ञान लेते हुए सड़कों की मरम्मत कराने और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की कृपा करें।

धन्यवाद।

भवदीय,
क ख ग

Teacher's Note:
a) औपचारिक पत्र में प्रेषक का पता, दिनांक, पद और पता, विषय, महोदय, मुख्य विषय-वस्तु और अंत में भवदीय का सही प्रारूप लिखना अनिवार्य है।
b) पत्र की भाषा औपचारिक, स्पष्ट और शालीन होनी चाहिए।

 

Q.3 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

नामू की माँ ने अपने बेटे से कहा, "जा कुल्हाड़ी लेकर पलाश के पेड़ से कुछ छाल उतार ला।"
"अभी लाया माँ!" कहकर नामू ने कुल्हाड़ी उठाई और जंगल की ओर चल निकला। वहाँ उसने पलाश के पेड़ की छाल उतारी और फिर घर की ओर चल पड़ा। रास्ते में विचार करने लगा कि जब मैं कुल्हाड़ी से पेड़ पर प्रहार करता था, तो एक आवाज पेड़ से निकलती थी, कहीं वह आवाज पेड़ से निकलती थी कहीं वह आवाज पेड़ की कराह तो नहीं थी? जब मैं कुल्हाड़ी से पेड़ पर प्रहार करता रहूँगा, तो पेड़ को पीड़ा भी होती होगी ।
नामू ने घर आकर पलाश की छाल माँ को सौंप दी और स्वयं घर से दूर कुल्हाड़ी लेकर जा बैठा। वहाँ बैठकर कुल्हाड़ी से उसने अपना पैर रगड़ना शुरू किया। रगड़ के साथ पाँव में पीड़ा भी होती थी, खून बहता था और नामू के मुँह से हल्की-हल्की चीखें भी निकलती थीं। यह सब उसने पेड़ की उस पीड़ा का अनुभव करने के लिए किया था।
... (तथा आगे का गद्यांश)

 

1. नामू को माँ ने क्या आदेश दिया था? माँ के आदेश का पालन करते समय उसने क्या विचार किया? [2]

Answer:
माँ ने नामू को आदेश दिया था कि वह कुल्हाड़ी लेकर जंगल से पलाश के पेड़ की कुछ छाल उतार लाए। माँ के आदेश का पालन करते हुए रास्ते में नामू यह विचार करने लगा कि जब वह कुल्हाड़ी से पेड़ पर प्रहार कर रहा था, तब पेड़ से जो आवाज निकल रही थी, वह वास्तव में उस पेड़ की कराह और उसकी पीड़ा थी।

Teacher's Note:
a) उत्तर गद्यांश के आरंभिक अंश पर आधारित है जिसमें नामू की संवेदनशीलता का परिचय मिलता है।
b) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रूप से दो वाक्यों में लिखें।

 

2. घर आकर नामू ने क्या किया और क्यों? [2]

Answer:
घर आकर नामू ने पलाश की छाल माँ को सौंप दी और स्वयं घर से दूर कुल्हाड़ी लेकर बैठ गया। उसने कुल्हाड़ी से अपना पैर रगड़ना शुरू किया क्योंकि वह यह महसूस करना चाहता था कि जब वह पेड़ पर कुल्हाड़ी से प्रहार करता है, तो पेड़ को कितनी पीड़ा होती है।

Teacher's Note:
a) नामू के बाल-मन की परोपकारिता और जीवों के प्रति करुणा को इस प्रसंग में दर्शाया गया है।
b) यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि उसने स्वयं को चोट क्यों पहुँचाई।

 

3. माँ क्या देखकर चिंतित हुई? उसका हृदय क्यों भर आया? [2]

Answer:
माँ की दृष्टि जब नामू के कपड़ों पर पड़ी जो खून से लाल हो चुके थे, तब वह बहुत चिंतित हुई। जब नामू ने बताया कि उसने पराये (पेड़) के दुःख को महसूस करने के लिए अपने पैर पर कुल्हाड़ी रगड़ी थी, तो बेटे की ऐसी असीम करुणा और महान सोच को देखकर माँ का हृदय भर आया और उसकी आँखों से आँसू बह निकले।

Teacher's Note:
a) माँ की ममता और बेटे के प्रति उसके गर्व भाव को रेखांकित करें।
b) कपड़ों के खून से रंगे होने और नामू की बात ने माँ को भावुक कर दिया था।

 

4. संत के स्वभाव की क्या विशेषता होती है? आगे चलकर नामू किस रूप में प्रसिद्ध हुआ? [2]

Answer:
संतों का स्वभाव दया और धर्म का भाव रखना तथा दूसरों के दुःख को महसूस करना होता है। आगे चलकर यही नामू महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत 'नामदेव' के रूप में प्रसिद्ध हुए।

Teacher's Note:
a) संतों की मूल प्रवृत्ति परोपकार और जीव-दया होती है।
b) ऐतिहासिक रूप से संत नामदेव का यह प्रसंग उनकी महानता को दर्शाता है।

 

5. आपको इस गद्यांश से क्या शिक्षा मिलती है? पेड़-पौधों की सुरक्षा क्यों आवश्यक है। [2]

Answer:
इस गद्यांश से यह शिक्षा मिलती है कि हमें केवल मनुष्यों के प्रति ही नहीं, बल्कि प्रकृति, पेड़-पौधों और सभी जीवों के प्रति दया और प्रेम का भाव रखना चाहिए। पेड़-पौधों की सुरक्षा इसलिए आवश्यक है क्योंकि वे हमारे पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखते हैं, हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं तथा उनके बिना धरती पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

Teacher's Note:
a) पर्यावरण संरक्षण और जीव-दया इस गद्यांश का मुख्य संदेश है।
b) उत्तर में नैतिक शिक्षा और पर्यावरणीय महत्व दोनों को शामिल करें।

 

Q. 4 Answer the following according to the instructions given: [8]

 

1. निम्नलिखित शब्दों से विशेषण बनाइए: नीति, साहित्य। [1]

Answer:
नीति - नैतिक
साहित्य - साहित्यिक

Teacher's Note:
a) संज्ञा शब्दों से विशेषण बनाने के लिए उचित प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
b) वर्तनी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें (जैसे - नैतिक, साहित्यिक)।

 

2. निम्नलिखित शब्दों में से किसी दो शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए: मार्ग, माता। [1]

Answer:
मार्ग - रास्ता, पथ
माता - जननी, माँ

Teacher's Note:
a) निर्देशानुसार किन्हीं दो शब्दों के दो-दो पर्यायवाची लिखने थे।
b) सभी संभावित विकल्पों को सही माना जाता है यदि वे अर्थपूर्ण हों।

 

3. निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए: निर्दोष, शांत, पतन, अंत। [1]

Answer:
निर्दोष - दोषी (या सदोष)
शांत - अशांत (या उद्विग्न)
पतन - उत्थान
अंत - आदि (या आरंभ)

Teacher's Note:
a) किन्हीं दो शब्दों के विलोम शब्द लिखने थे।
b) विलोम शब्द लिखते समय मूल शब्द की व्याकरणिक कोटि का ध्यान रखना चाहिए।

 

4. निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए: आँखों पर पर्दा पड़ना, घुटने टेकना। [1]

Answer:
आँखों पर पर्दा पड़ना: रिश्वत लेते समय अधिकारी की आँखों पर ऐसा पर्दा पड़ा कि उसे कानून का भी डर नहीं रहा।
(अथवा)
घुटने टेकना: भारतीय सैनिकों के पराक्रम के आगे अंततः शत्रु सेना को घुटने टेकने ही पड़े।

Teacher's Note:
a) मुहावरे का अर्थ स्पष्ट होते हुए वाक्य का निर्माण करना चाहिए।
b) वाक्य ऐसा हो जिससे मुहावरे का प्रयोग स्वाभाविक लगे।

 

5. भाववाचक संज्ञा बनाइए: ईश्वर, उत्तम। [1]

Answer:
ईश्वर - ऐश्वर्य (या ईश्वरत्व)
उत्तम - उत्तमता (या उत्तमाई)

Teacher's Note:
a) जातिवाचक संज्ञा या विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा का निर्माण किया जाता है।
b) 'ईश्वर' का भाववाचक 'ऐश्वर्य' या 'ईश्वरत्व' होता है।

 

6. कोष्ठक में दिए गए निर्देशोंानुसार वाक्यों में परिवर्तन कीजिए: [3]

(a) असफल हो जाने परश् उसे भारी दुःखा हुआ। (वाक्य शुद्ध कीजिए) [1]

Answer:
असफल हो जाने पर उसे भारी दुःख हुआ। (या: असफल हो जाने पर उसे भारी दु:ख हुआ।)

Teacher's Note:
a) अशुद्ध शब्द 'परश्' को सुधारकर 'पर' किया गया है।
b) वाक्य की वर्तनी और व्याकरणिक शुद्धि पर विशेष ध्यान दें।

 

(b) परिश्रमी व्यक्ति विपत्तियों से नहीं घबराता है। (वचन बदलिए) [1]

Answer:
परिश्रमी व्यक्ति विपत्तियों से नहीं घबराते हैं। (या: परिश्रमी व्यक्ति विपत्तियों से नहीं घबराते।)

Teacher's Note:
a) एकवचन वाक्य को बहुवचन में बदलते समय कर्ता और क्रिया दोनों के वचन में परिवर्तन किया जाता है।
b) 'व्यक्ति' शब्द का बहुवचन 'व्यक्ति' ही रहता है, अतः क्रिया 'घबराते हैं' होगी।

 

(c) जीवन-भर मैं इसी आचरण का पालन करता आया हूँ। (रेखांकित शब्दों के लिए एक शब्द लिखकर वाक्य को पुनः लिखिए) [1]

Answer:
आजीवन मैं इसी आचरण का पालन करता आया हूँ।

Teacher's Note:
a) वाक्यांश के लिए एक शब्द (अनेक शब्दों के लिए एक शब्द) का प्रयोग किया गया है।
b) 'जीवन-भर' के लिए 'आजीवन' शब्द का प्रयोग होता है।

 

SECTION - B (40 Marks)

गद्य संकलन

 

Q.5 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

श्रीमती जी कुछ रुआँसे स्वर में बोलीं- "इसी विश्वास को तो सब चौपट कर रखा है। ऐसे ही विश्वास पर सब बैठ जाएँ, तो काम कैसे चले? सब विश्वास पर ही बैठे रहें, तो आदमी काहे को किसी बात के लिए चेष्टा करे?"
लेखक - विशंबरनाथ शर्मा 'कौशिक'

 

1. श्रीमती जी कौन हैं? उनका परिचय दीजिए। [2]

Answer:
श्रीमती जी कहानी के लेखक विशंबरनाथ शर्मा 'कौशिक' की धर्मपत्नी (पत्नी) हैं। वे एक व्यावहारिक और समझदार महिला हैं जो घर-गृहस्थी के मामलों में भाग्य या अंधविश्वास के भरोसे बैठने की बजाय कर्म और पुरुषार्थ पर विश्वास रखती हैं।

Teacher's Note:
a) यह 'ताई' कहानी का प्रसिद्ध संवाद है।
b) श्रीमती जी का चरित्र कर्मवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।

 

2. उपर्युक्त वाक्य किससे कहा गया है तथा उस व्यक्ति का विश्वास क्या है? [2]

Answer:
उपर्युक्त वाक्य लेखक (उनके पति) से कहा गया है। उस व्यक्ति (लेखक) का यह विश्वास था कि सब कुछ भगवान की इच्छा और भाग्य पर निर्भर करता है, जो होना होगा वही होगा, इसलिए अधिक भागदौड़ या चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

Teacher's Note:
a) लेखक की भाग्यवादी सोच के विपरीत उनकी पत्नी का कर्मवादी दृष्टिकोण यहाँ उभर कर आता है।
b) उत्तर प्रसंग के अनुसार स्पष्ट होना चाहिए।

 

3. वक्ता के दुःख का कारण क्या है? अपने इस दुःख का कारण वह किसे मानती है तथा क्यों? [3]

Answer:
वक्ता (श्रीमती जी) के दुःख का मुख्य कारण अलोपीदीन और रामेश्वरी की संतानहीनता तथा पारिवारिक कलह एवं व्यवस्था का अभाव था। वह इस दुःख का कारण लोगों की उस भाग्यवादी और आस्तिक प्रवृत्ति को मानती है जिसके तहत लोग बिना किसी कर्म या चेष्टा के सब कुछ भगवान के भरोसे छोड़कर बैठ जाते हैं और कोई प्रयास नहीं करते।

Teacher's Note:
a) वक्ता का मानना है कि केवल भाग्य के भरोसे बैठने से जीवन में कुछ प्राप्त नहीं होता।
b) कर्मशीलता के अभाव को ही सभी समस्याओं की जड़ माना गया है।

 

4. प्रस्तुत कहानी का उद्देश्य स्पष्ट करें। [3]

Answer:
'ताई' कहानी का मुख्य उद्देश्य पारिवारिक संवेदनशीलता, मानवीय करुणा और अनाथ बच्चों के प्रति कर्तव्यबोध को जागृत करना है। यह कहानी यह भी संदेश देती है कि केवल भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और अनाथों की सहायता करनी चाहिए। ममता और प्रेम से कठोर से कठोर हृदय को भी पिघलाया जा सकता है।

Teacher's Note:
a) कहानी सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित है।
b) रामेश्वरी के चरित्र परिवर्तन के माध्यम से मातृत्व की महिमा को दर्शाया गया है।

 

Q. 6 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"हमारे विद्वावान पाठकों में से कोई होता, तो उन मूर्खों को समझाता - "यह संसार क्षण-भंगुर है। इसमें दुःख क्या ? जो जिससे बनता है, वह उसी में लय जाता है - इसमें शोक और उद्वेग की क्या बात है?"
'खेल'
लेखक - जैनेंद्र

 

1. पानी से कौन खेल रहा था? वह जब पानी का खेल छोड़कर मुड़ा, तो उसने क्या देखा? [2]

Answer:
पानी से नन्हे बालक खेल रहे थे। जब वह पानी का खेल छोड़कर मुड़ा, तो उसने देखा कि सुरबाला अचेत अवस्था में पड़ी है और उसके चारों ओर लोगों की भीड़ जमा है।

Teacher's Note:
a) जैनेंद्र कुमार की कहानी 'खेल' से यह अंश लिया गया है।
b) बच्चों के खेल और अचानक हुई दुर्घटना के बीच के विरोधाभास को स्पष्ट करें।

 

2. सुरबाला कौन है? उसके दुःख का कारण क्या था? [2]

Answer:
सुरबाला कहानी की एक मुख्य पात्र (बालिका) है। उसके दुःख का कारण उसकी उपेक्षित स्थिति और बाल-मन की वह पीड़ा थी जिसे वह अपनों के बीच रहकर भी महसूस करती थी, तथा अंततः उसकी जल में डूबने से हुई मृत्यु ने सबको शोकाकुल कर दिया।

Teacher's Note:
a) सुरबाला एक संवेदनशील और अभागिन बच्ची के रूप में चित्रित की गई है।
b) उसके जीवन और अंत दोनों ही पाठकों को झकझोर देते हैं।

 

3. संसार को क्षण-भंगुर क्यों कहा जाता है? सुरबाला क्या देखकर मौन हो गयी थी? उसे किस चीज ने पिघला दिया? [3]

Answer:
संसार को क्षण-भंगुर इसलिए कहा जाता है क्योंकि जीवन नश्वर है और हर वस्तु या प्राणी को एक न एक दिन नष्ट होना ही है। सुरबाला बाल-सुलभ उपेक्षा और रुखा व्यवहार देखकर मौन हो गई थी। बालक मृणाल के सहज स्नेह, आत्मीयता और उसके द्वारा लाए गए खिलौने ने उसके कठोर और उदास मन को पिघला दिया था।

Teacher's Note:
a) दार्शनिक सत्य के साथ-साथ बालकों के कोमल मन के मनोवैज्ञानिक पक्षों को दर्शाया गया है।
b) प्रेम और अपनापन ही हर दीवार को गिरा सकता है।

 

4. सिद्ध कीजिए कि खेल कहानी में बालपन की सरलता का चित्रण किया गया है। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने किस सत्य को उजागर किया है? [3]

Answer:
'खेल' कहानी में बच्चों के आपसी प्रेम, बिना किसी भेदभाव के साथ खेलना, उनकी जिद और उनकी मासूमियत के माध्यम से बालपन की सरलता का सुंदर चित्रण किया गया है। लेखक ने इस सत्य को उजागर किया है कि वयस्कों की दुनिया जहाँ स्वार्थ, वर्ग-भेद और औपचारिकता से भरी होती है, वहीं बच्चों का संसार निष््टल, पवित्र और प्रेम से परिपूर्ण होता है। बच्चे दिल के सच्चे होते हैं।

Teacher's Note:
a) जैनेंद्र की कहानियाँ मनोवैज्ञानिक और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत होती हैं।
b) बच्चों और बड़ों की मानसिकता के अंतर को भली-भांति स्पष्ट करें।

 

Q. 7 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"मतलब साफ है, एकदम साफ कि जहाँ एक युवक ने अपने काम से अपने देश का सिर ऊँचा किया था, वहीं एक युवक ने अपने काम से अपने देश के मस्तक पर कलंक का ऐसा टीका लगाया, जो जाने कितने वर्षों तक संसार की आँखों में उसे लांछित करता रहा।"
'मैं और मेरा देश'
लेखक - कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'

 

1. देश का सिर ऊँचा करने वाला युवक किस देश का नागरिक था? उसने किस प्रकार अपने देश का सिर ऊँचा किया? [2]

Answer:
देश का सिर ऊँचा करने वाला युवक फ्रांस का नागरिक था (वैज्ञानिक ली पाश्चर)। उसने अपने महान वैज्ञानिक अनुसंधान और खोजों के माध्यम से पूरी मानवता की सेवा की और अपने देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया।

Teacher's Note:
a) यह पाठ देशभक्ति और व्यक्तिगत आचरण के महत्व को सिखाता है।
b) फ्रांसीसी वैज्ञानिक पाश्चर का उदाहरण इसमें दिया गया है।

 

2. देश के मस्तक पर कलंक का टीका लगाने वाला युवक कौन था? उसने क्या किया था? [2]

Answer:
देश के मस्तक पर कलंक का टीका लगाने वाला युवक एक भारतीय था (वह युवक जो इंग्लैंड में रहता था और अतिथि के रूप में एक प्रोफेसर के घर गया था)। उसने अपने मेजबान प्रोफेसर की बहुमूल्य और प्राचीन घड़ी चुपचाप चुरा ली थी, जिससे पूरे देश की नैतिकता पर सवालिया निशान लग गया था।

Teacher's Note:
a) एक व्यक्ति का दुराचरण पूरे राष्ट्र की छवि को धूमिल कर सकता है।
b) घटना को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

3. उक्त दोनों घटनाओं से क्या स्पष्ट होता है? आप अपने देश का गौरव बढ़ाने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं? [3]

Answer:
उक्त दोनों घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि देश की प्रतिष्ठा केवल बड़े नेताओं या सेना से नहीं, बल्कि देश के साधारण नागरिकों के व्यक्तिगत आचरण, ईमानदारी और अच्छे कर्मों से बनती और बिगड़ती है। हम अपने देश का गौरव बढ़ाने के लिए सदाचार का पालन कर सकते हैं, अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वाह कर सकते हैं, और ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे हमारे देश की गरिमा को ठेस पहुँचे।

Teacher's Note:
a) नागरिक कर्तव्यों और राष्ट्रप्रेम का गहरा संदेश इस पाठ में निहित है।
b) छात्र अपनी ओर से भी अच्छे आचरण के बिंदु लिख सकते हैं।

 

4. महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं होता, उस कार्य को करने की भावना में होता है - प्रस्तुत पाठ के आधार पर इस पंक्ति की समीक्षा कीजिए। [3]

Answer:
लेखक कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का यह कथन इस सत्य को उजागर करता है कि कोई भी कार्य अपने आप में छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसके पीछे छिपी नीयत और भावना महत्वपूर्ण होती है। पाठ में उस भारतीय युवक ने चोरी जैसी छोटी और घृणित मानसिकता का परिचय दिया जिससे देश बदनाम हुआ, जबकि महान वैज्ञानिक ने सेवा भाव से देश का मान बढ़ाया। राष्ट्र के प्रति निष्ठा और पवित्र भावना ही किसी कार्य को महान बनाती है।

Teacher's Note:
a) पाठ के मूल भाव को स्पष्ट करते हुए उत्तर लिखें।
b) चरित्र की शुद्धता और राष्ट्रभक्ति के महत्व को रेखांकित करें।

 

चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
लेखक - प्रकाश नगयाच

 

Q. 8 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"उसे विश्वास हो गया था कि यदि रामगुप्त को मगध के राज-सिंहासन से न हटाया गया, तो गुप्त साम्राज्य के साथ-साथ गुप्त वंश का गौरव, मान-मर्यादा सभी कुछ नष्ट हो जाएंगे।"

 

1. यहाँ उसे शब्द का संबंध किस व्यक्ति के लिए किया गया है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
यहाँ 'उसे' शब्द का संबंध महामण्डलिक चंद्रगुप्त के लिए किया गया है। चंद्रगुप्त सम्राट समुद्रगुप्त के सुयोग्य पुत्र, पराक्रमी, साहसी, न्यायप्रिय और गुप्त साम्राज्य के सच्चे रक्षक थे जो देश और राजकुल की मान-मर्यादा के लिए समर्पित थे।

Teacher's Note:
a) एकांकी/पाठ के संदर्भ में चंद्रगुप्त के चरित्र की महत्ता को बताएं।
b) वे रामगुप्त की कायरता से अत्यंत चिंतित थे।

 

2. रामगुप्त को मगध के राज-सिंहासन से हटाये जाने की आवश्यकता क्यों अनुभव की जा रही थी? [2]

Answer:
रामगुप्त को मगध के राज-सिंहासन से हटाए जाने की आवश्यकता इसलिए अनुभव की जा रही थी क्योंकि वह अत्यधिक कायर, विलासी, अदूरदर्शी और अयोग्य शासक था। उसकी कायरता और गलत संधियों के कारण मगध साम्राज्य की गरिमा और राष्ट्र का सम्मान खतरे में पड़ गया था।

Teacher's Note:
a) अयोग्य शासक राष्ट्र के लिए संकट बन जाते हैं।
b) रामगुप्त के व्यक्तिगत दोषों और उसकी राजनीतिक असफलता का उल्लेख करें।

 

3. रामगुप्त का क्या निर्णय था? यह व्यक्ति इस समय रामगुप्त का विरोध क्यों नहीं कर पा रहा था? [3]

Answer:
रामगुप्त का निर्णय ध्रुवस्वामिनी को शकराज के पास भेजने का अपमानजनक और कायरतापूर्ण था ताकि वह अपनी जान बचा सके। चंद्रगुप्त इस समय रामगुप्त का खुलकर विरोध इसलिए नहीं कर पा रहा था क्योंकि वह राज्य के नियमों, बड़ों के प्रति आदर और तत्कालीन परिस्थितियों से बंधा हुआ था तथा उचित अवसर की प्रतीक्षा कर रहा था।

Teacher's Note:
a) रामगुप्त की संधि प्रस्ताव उसकी नीचता को दर्शाती है।
b) चंद्रगुप्त का संयम और उसकी राजनीतिक दूरदर्शिता इसमें दिखाई देती है।

 

4. मगध साम्राज्य की तत्कालीन परिस्थिति कैसी थी? सिद्ध कीजिए कि कायर व अयोग्य शासक देश के मान-सम्मान व गौरव को सुरक्षित रखने में असमर्थ होता है। [3]

Answer:
मगध साम्राज्य की तत्कालीन स्थिति अत्यंत दयनीय, संकटग्रस्त और अराजकतापूर्ण थी। शक राज ने आक्रमण कर दिया था और कमजोर राजा रामगुप्त ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इस प्रसंग से यह सिद्ध होता है कि जब देश की बागडोर किसी कायर और अयोग्य शासक के हाथ में होती है, तो वह निजी स्वार्थ और भय के कारण राष्ट्र के मान-सम्मान, स्वाभिमान और गौरव की रक्षा करने में पूरी तरह असमर्थ रहता है।

Teacher's Note:
a) राजनीतिक संकट और नेतृत्व के अभाव के परिणामों को स्पष्ट करें।
b) योग्य नेतृत्व ही राष्ट्र को बचा सकता है।

 

Q. 9 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"लेकिन देवसेना, मैं अपने इस वचन का पालन न कर सका। रामगुप्त को संसार कायर है, लेकिन रामगुप्त कायर नहीं, कायर है चंद्रगुप्त जिसने अपने वचन का पालन न कर चुपचाप इतने बड़ेअन्याय को सह लिया।"

 

1. प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? उसके एवं उसके पिता के विचारों में क्या समानता थी? [2]

Answer:
प्रस्तुत कथन का वक्ता शिखरस्वामी है। उसके और उसके पिता (या तत्कालीन चाटुकार दरबारी सोच) के विचारों में यह समानता थी कि वे दोनों स्वार्थी, अवसरवादी और सत्ता के लोभी थे जो न्याय और नैतिकता को ताक पर रखकर केवल अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते थे।

Teacher's Note:
a) शिखरस्वामी का चरित्र अवसरवादी दरबारियों का प्रतिनिधित्व करता है।
b) उसका यह कथन उसकी कुटिलता को दर्शाता है।

 

2. वक्ता किस वचन की ओर संकेत कर रहा है? उस वचन का पालन क्यों नहीं किया जा सका? [2]

Answer:
वक्ता उस वचन की ओर संकेत कर रहा है जो उसने या राज्यव्यवस्था ने ध्रुवस्वामिनी की रक्षा या न्याय के संबंध में दिया था। उस वचन का पालन इसलिए नहीं किया जा सका क्योंकि रामगुप्त की कायरता और स्वार्थ ने राज्य के स्वाभिमान को कुचल दिया था और दरबारी षड्यंत्रों ने न्याय का गला घोंट दिया था।

Teacher's Note:
a) प्रसंग के अनुसार वक्ता की विवशता और कुटिलता स्पष्ट होती है।
b) वचनों के टूटने के पीछे राजनीतिक स्वार्थ थे।

 

3. रामगुप्त कौन है? संसार उसे कायर क्यों कहता है? [3]

Answer:
रामगुप्त मगध साम्राज्य का सम्राट और समुद्रगुप्त का बड़ा पुत्र था। संसार उसे कायर इसलिए कहता है क्योंकि वह बाहरी आक्रमणकारी शकराज के सामने घुटने टेक देता है, अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी को शत्रु शिविर में भेजने का घृणित और लज्जास्पद प्रस्ताव स्वीकार कर लेता है, और युद्ध करने के बजाय अपनी जान बचाने का कायरतापूर्ण मार्ग चुनता है।

Teacher's Note:
a) रामगुप्त का चरित्र भारतीय इतिहास और नाटक मेंन केवल कायर बल्कि पतित चरित्र के रूप में चित्रित है।
b) उसकी निर्णय लेने की क्षमता पूरी तरह शून्य थी।

 

4. परिस्थितियाँ वीर पुरुष को भी लाचार बना देती हैं - प्रस्तुत पंक्ति को आधार बनाकर एक अनुच्छेद में अपने विचार दीजिए। [3]

Answer:
यह सत्य है कि कई बार अत्यंत प्रतिकूल और विषम परिस्थितियाँ वीर तथा पराक्रमी पुरुषों को भी कुछ समय के लिए लाचार या विवश कर देती हैं। परंतु सच्चे वीर व्यक्ति उन परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकते, बल्कि उचित समय की प्रतीक्षा करते हैं और अपनी वीरता तथा बुद्धि से उन बाधाओं को पार करके पुनः विजयी होते हैं। चंद्रगुप्त का चरित्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जो पारिवारिक मर्यादा और व्यवस्था के कारण कुछ समय बंधे रहे, किंतु अंत में उन्होंने न्याय और राष्ट्र के गौरव की रक्षा कर ही ली।

Teacher's Note:
a) अनुच्छेद लेखन में तार्किकता और विषय से जुड़ाव आवश्यक है।
b) वीर पुरुष की परिभाषा केवल बाहुबल नहीं, बल्कि उसकी धैर्यशीलता भी है।

 

Q. 10 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"आज हमने अपने पिता आर्य समुद्रगुप्त के ऋण को ही नहीं चुका दिया, बल्कि जननी जन्मभूमि के उस ऋण को भी चुका दिया है, जिसका बोझ जन्म से हमारे सिर पर था।"

 

1. उपर्युक्त पंक्तियों का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। [2]

Answer:
उपर्युक्त पंक्तियाँ चंद्रगुप्त द्वारा कही गई हैं जब वह शकराज का वध करके और मगध साम्राज्य के मान-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा करके विजयी होता है। इस अवसर पर उसने अपने पिता और मातृभूमि दोनों का कर्ज चुकाने की बात कही है।

Teacher's Note:
a) नाटक के समापन या निर्णायक युद्ध के बाद का यह प्रसंग है।
b) मातृभूमि के प्रति समर्पण इसमें मुख्य भाव है।

 

2. आर्य समुद्रगुप्त कौन थे? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
आर्य समुद्रगुप्त गुप्त वंश के महान, पराक्रमी और प्रतापी सम्राट थे जिन्हें उनके असीम सैन्य कौशल और विजयों के कारण 'भारत का नेपोलियन' भी कहा जाता है। वे चंद्रगुप्त और रामगुप्त के पिता थे।

Teacher's Note:
a) ऐतिहासिक और नाटक के संदर्भ में समुद्रगुप्त का यश बहुत फैला हुआ था।
b) उनका प्रभाव गुप्त साम्राज्य की नींव मजबूत करता है।

 

3. समुद्रगुप्त का ऋण किसने, किस प्रकार चुकाया? [3]

Answer:
समुद्रगुप्त का ऋण उनके सुयोग्य पुत्र चंद्रगुप्त ने अपनी वीरता, पराक्रम और न्यायप्रियता से चुकाया। जब रामगुप्त की कायरता के कारण गुप्त वंश की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही थी, तब चंद्रगुप्त ने शकराज का वध करके, कुल की मर्यादा बचाई और पिता के यश को कलंकित नहीं होने दिया।

Teacher's Note:
a) योग्य संतान ही पिता के यश को आगे बढ़ाती है।
b) चंद्रगुप्त ने अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन किया।

 

4. 'जन्मभूमि' का व्यक्ति पर किस प्रकार का ऋण होता है? जन्मभूमि के ऋण को किस प्रकार चुकाया जा सकता है? एक अनुच्छेद में उत्तर दीजिए। [3]

Answer:
प्रत्येक मनुष्य पर जन्मभूमि का सबसे बड़ा ऋण होता है क्योंकि हम इसी धरती का अन्न खाते हैं, इसका जल पीते हैं और इसकी आबोहवा में पल-बढ़कर बड़े होते हैं। जन्मभूमि के इस कर्ज को चुकाने का अर्थ है कि हम अपने राष्ट्र के प्रति वफादार रहें, इसकी एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें, तथा समाज और देश के कल्याण में अपना योगदान दें। जब आवश्यकता पड़े, तो देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने से भी पीछे न हटें।

Teacher's Note:
a) मातृभूमि की वंदना और देशभक्ति का यह अत्यंत सुंदर संदेश है।
b) छात्र अपने विचारों को मौलिक रूप से लिख सकते हैं।

 

एकांकी सुमन

 

Q. 11 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"सरकार को गाली ही दी जाती है। गोली चली, तो गाली देते हैं। बैंक लूट जाता है, तब भी गाली ही देते हैं।"
'सीमा-रेखा'
लेखक - विष्णु प्रभाकर

 

1. प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? उसने ये वाक्य किससे और कब कहे? [2]

Answer:
प्रस्तुत कथन का वक्ता एक जिम्मेदार अधिकारी या पात्र (अशोक/अमित के संदर्भ में) है। उसने ये वाक्य समाज की व्यवस्था और सरकार के प्रति आम जनता के नकारात्मक रवैये को देखते हुए कहे जब चारों तरफ अव्यवस्था और विरोध का माहौल था।

Teacher's Note:
a) विष्णु प्रभाकर की एकांकी 'सीमा-रेखा' समाज की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है।
b) जनता और सरकार के बीच की दूरी को रेखांकित किया गया है।

 

2. 'सरकार को गाली ही दी जाती है' - कथन के आधार पर सरकार की मुश्किलों पर प्रकाश डालिए। [2]

Answer:
इस कथन के आधार पर सरकार की यह मुश्किल स्पष्ट होती है कि चाहे वह कितनी भी भलाई के कार्य करे या कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए, जनता हर स्थिति में सरकार को ही दोषी मानती है और उसकी आलोचना करती है। अपराध, महँगाई या संकट के समय जनता का सारा आक्रोश सरकार पर ही फूटता है।

Teacher's Note:
a) शासन चलाने वालों की विवशताओं और चुनौतियों को समझें।
b) जनता की असंतुष्ट प्रवृत्ति पर टिप्पणी की गई है।

 

3. श्रोता कौन है? श्रोता का चरित्र-चित्रण कीजिए। [3]

Answer:
श्रोता इस एकांकी में एक संवेदनशील और जागरूक पात्र है। उसका चरित्र समाज की विसंगतियों को समझने वाला, न्यायप्रिय और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत है। वह केवल आलोचना करने के बजाय समस्याओं की जड़ तक पहुँचने का प्रयास करता है और व्यवस्था में सुधार देखना चाहता है।

Teacher's Note:
a) एकांकी के पात्रों के माध्यम से लेखक ने वैचारिक द्वंद्व को उभारा है।
b) श्रोता का दृष्टिकोण सकारात्मक और सुधारवादी है।

 

4. 'जनतंत्र में सरकार और प्रजा एक-दूसरे के पूरक होते हैं।' एकांकी के आधार पर इस कथन के पक्ष में अपने विचार एक अनुच्छेद में लिखिए। [3]

Answer:
जनतंत्र (लोकतंत्र) में सरकार और प्रजा का संबंध परस्पर पूरक का होता है। जिस प्रकार बिना प्रजा के सरकार का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता, उसी प्रकार बिना सुदृढ़ और जिम्मेदार सरकार के प्रजा सुरक्षित नहीं रह सकती। यदि प्रजा केवल दोष निकालती रहे और सहयोग न करे, तो शासन चलाना असंभव हो जाता है। अतः दोनों को एक-दूसरे की सीमाओं को समझते हुए देश के विकास में सहयोग करना चाहिए।

Teacher's Note:
a) लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
b) दोनों पक्षों के कर्तव्यों का संतुलन ही सफल लोकतंत्र है।

 

Q. 12 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"नहीं मातुश्री, वे आपको कभी नहीं भूल सके, वे तो आपको सदैव स्मरण करते हैं। वे सब तरह से कुशल हैं, यदि उन्हें दुःख है, तो केवल आपका ही दुःख है। वीर लक्ष्मण भी सकुशल हैं। आप किसी प्रकार की चिंता न करें। आपके प्रति प्रभु राम के हृदय में जो प्रेम है, उसकी थाह नहीं ली जा सकती।"
'राजरानी सीता'
लेखक - डॉ. रामकुमार वर्मा

 

1. 'मातुश्री' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? हनुमान का संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]

Answer:
'मातुश्री' शब्द का प्रयोग अशोक वाटिका में बैठी माता सीता के लिए किया गया है। हनुमान भगवान श्रीराम के परम भक्त, केसरी नंदन, पवनसुत, अगाध बल के स्वामी, बुद्धिमान, और श्रीराम के संदेश वाहक के रूप में जाने जाते हैं जो माता सीता की खोज में लंका गए थे।

Teacher's Note:
a) डॉ. रामकुमार वर्मा की एकांकी 'राजरानी सीता' रामायण के प्रसंग पर आधारित है।
b) हनुमान की निष्ठा अद्वितीय है।

 

2. 'वे' शब्द का संबोधन किसके लिए गया है? उनके संबंध में श्रोता ने वक्ता से क्या-क्या कहा? संक्षेप में लिखिए। [2]

Answer:
'वे' शब्द का संबोधन भगवान श्रीराम के लिए किया गया है। उनके संबंध में श्रोता (माता सीता) ने वक्ता (हनुमान) से उनके वियोग में अपने दुखों, अपनी व्यथा और राम के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व प्रेम के विषय में बात की तथा राम की कुशलता के बारे में बार-बार पूछा।

Teacher's Note:
a) राम और सीता के परस्पर प्रेम और वियोग की पीड़ा को दर्शाया गया है।
b) सीता जी हनुमान से राम के बारे में जानने के लिए उत्सुक थीं।

 

3. इस समय श्रोता के हृदय में क्या संदेश था? वक्ता ने श्रोता के संदेह को कैसे दूर किया? [3]

Answer:
इस समय श्रोता (माता सीता) के हृदय में यह संदेह और संशय था कि क्या वास्तव में राम उन्हें भूल गए हैं या रावण के दूत उन्हें भ्रमित करने के लिए तो नहीं आए हैं। वक्ता (हनुमान) ने श्रीराम की अंगूठी (मुद्रिका) माता सीता को भेंट करके, राम के प्रेमपूर्ण संस्मरण सुनाकर और अपनी निष्ठा का परिचय देकर उनके सारे संदेह दूर कर दिए।

Teacher's Note:
a) हनुमान की वाग्मीता और प्रमाणिकता ने सीता का विश्वास जीता।
b) मुद्रिका पहचान का सबसे बड़ा साधन बनी।

 

4. श्रोता की मनोदशा का वर्णन कीजिए और बताइए कि वक्ता के किन वचनों से श्रोता के मनोभावों में क्या अंतर आया? [3]

Answer:
लंका की अशोक वाटिका में बैठी माता सीता की मनोदशा अत्यंत शोकाकुल, भयभीत, वियोग से संतप्त और निराशा से भरी हुई थी। जब हनुमान ने उन्हें भगवान राम का संदेश सुनाया, उनकी कुशलता बताई और यह आश्वासन दिया कि राम उनके बिना एक पल भी चैन से नहीं हैं, तो सीता के मन का सारा भय और दुःख दूर हो गया। उनके चेहरे पर आशा की किरण जग गई और उनका विषाद आनंद में बदल गया।

Teacher's Note:
a) मनोदशा के परिवर्तन का मुख्य कारण श्रीराम का संदेश और हनुमान की आत्मीयता थी।
b) निराशा से आशा की ओर की यात्रा को स्पष्ट करें।

 

Q. 13 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

"आज का जमाना ऐसा नहीं रहा। अगर हम बच्चों के साथ बहुत सख्ती करेंगे, तो बच्चे, आज नहीं तो कल, हमारा सामना जरूर करने लगेंगे। हमें ही झुकना होगा। क्या फायदा बहस से?"
'भटकन'
लेखक - शैल रस्तोगी

 

1. प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? उसका परिचय दीजिए। [2]

Answer:
प्रस्तुत कथन की वक्ता एक माता (या घर की समझदार बुजुर्ग पात्र) है। वह आधुनिक परिवेश और बदलती युवा पीढ़ी की मानसिकता को समझने वाली एक ऐसी महिला है जो बच्चों के साथ तानाशाही रवैया अपनाने की बजाय सामंजस्य और प्यार से काम लेने में विश्वास रखती है।

Teacher's Note:
a) शैल रस्तोगी की एकांकी 'भटकन' पीढ़ी के अंतर (जेनरेशन गैप) पर आधारित है।
b) वक्ता का दृष्टिकोण आधुनिक और व्यावहारिक है।

 

2. वक्ता किसे समझा रहा है और क्यों? [2]

Answer:
वक्ता घर के अन्य सदस्य (पिता या अभिभावक) को समझा रहा है क्योंकि वह बच्चों पर अत्यधिक सख्ती और नियंत्रण थोपना चाहते थे, जिससे घर का माहौल तनावपूर्ण हो रहा था और बच्चे बगावत पर उतर रहे थे।

Teacher's Note:
a) बच्चों के साथ कठोरता के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया है।
b) संवाद का उद्देश्य पारिवारिक सौहार्द बनाए रखना है।

 

3. श्रोता पर वक्ता के इस कथन का क्या प्रभाव पड़ता है? वह क्या उत्तर देती है? [3]

Answer:
श्रोता पर वक्ता के इस कथन का यह प्रभाव पड़ता है कि उसका अहंकार और जिद्दीपन कुछ कम होता है तथा वह बच्चों की बदलती मनोदशा के प्रति थोड़ा संवेदनशील बनता है। वह उत्तर में अपनी विवशता और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त करता है, परंतु यह भी समझता है कि केवल सख्ती से काम नहीं चलेगा।

Teacher's Note:
a) संवाद के माध्यम से दोनों पक्षों की मानसिकता में बदलाव दिखाया गया है।
b) बच्चों को समझने के लिए संवाद जरूरी है।

 

4. बच्चों और माता-पिता के बीच कब और क्यों दूरी पैदा हो जाती है? इस दूरी का क्या परिणाम होता है? [3]

Answer:
बच्चों और माता-पिता के बीच दूरी तब पैदा होती है जब विचारों में मतभेद होता है, माता-पिता बच्चों पर अपने विचार थोपते हैं और उनकी भावनाओं तथा स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करते। इस दूरी के परिणामस्वरूप बच्चे घर से कट जाते हैं, वे गलत संगत या भटकन का शिकार हो जाते हैं, और परिवार में अविश्वास तथा कलह का वातावरण बन जाता है।

Teacher's Note:
a) पीढ़ी के अंतराल (जेनरेशन गैप) के कारणों और परिणामों का सुंदर विश्लेषण किया गया है।
b) आपसी संवाद की कमी ही इस दूरी की मुख्य जड़ है।

 

काव्य-चंद्रादिका

 

Q. 14 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

लघु सुरधनु-से पंख पसारे-शीतल मलय-समीर सहारे,
उड़ते खग जिस ओर मुँह किये-समझ नीड़ निज प्यारा॥
बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल,
लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा॥
अरुण यह मधुमय देश हमारा।
'अरुण, यह मधुमय देश हमारा'
कवि - जयशंकर प्रसाद

 

1. शीतल मलय-समीर के सहारे के सहारे कौन और क्यों भारत आते हैं? [2]

Answer:
शीतल मलय-समीर के सहारे विदेशी पक्षी (अथवा प्रवासी पक्षी और थके-हारे यात्री) भारत आते हैं क्योंकि भारत की भूमि ममता, शांति और आतिथ्य से परिपूर्ण है जहाँ उन्हें अपने नीड़ (घोंसले) जैसी शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है।

Teacher's Note:
a) जयशंकर प्रसाद की इस कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता और उदारता का गुणगान है।
b) पक्षियों का उदाहरण शरण और शांति के प्रतीक के रूप में दिया गया है।

 

2. कवि ने बादलों के विषय में क्या बताया है तथा उनकी तुलना किससे की है? समझाकर लिखिए। [2]

Answer:
कवि ने बादलों को 'बरसाती आँखों के बादल' कहा है जो करुणा और प्रेम के जल से भरे रहते हैं। इनकी तुलना करुणा से भरी उन मानवीय आँखों से की गई है जो दूसरों के दुःख को देखकर करुणा से भर जाती हैं और जिनकी आँखें सहानुभूति में बरस पड़ती हैं।

Teacher's Note:
a) प्रकृति का मानवीकरण इस कविता की प्रमुख विशेषता है।
b) बादल करुणा और परोपकार के प्रतीक हैं।

 

3. 'नीड़' और 'किनारा' शब्दों का प्रयोग किस संदर्भ में हुआ है? यहाँ कवि किसके विषय में, क्या सिद्ध करना चाहता है? [3]

Answer:
'नीड़' शब्द का प्रयोग सुरक्षित घोंਸले (घर) के संदर्भ में तथा 'किनारा' शब्द अनंत सागर में शांति पाने के स्थान के संदर्भ में हुआ है। यहाँ कवि भारत देश के विषय में यह सिद्ध करना चाहता है कि यह देश संसार भर के थके-हारे प्राणियों, शरणार्थियों और पक्षियों के लिए अंतिम आश्रय स्थल है जहाँ आकर सभी को शांति और अपनापन मिलता है।

Teacher's Note:
a) भारत की अतिथि-सत्कार की संस्कृति को इन प्रतीकों के माध्यम से दर्शाया गया है।
b) नीड़ और किनारा सुरक्षा और शांति के द्योतक हैं।

 

4. प्रस्तुत गीत कहाँ से लिया गया है तथा इस गीत का मूलभाव क्या है? [3]

Answer:
प्रस्तुत गीत महाकवि जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध नाटक 'चंद्रगुप्त' से लिया गया है। इस गीत का मूलभाव देशप्रेम (राष्ट्रप्रेम), भारत की प्राकृतिक महत्ता, उसकी संस्कृति की उदारता, करुणा और अतिथि-सत्कार की भावना का गुणगान करना है।

Teacher's Note:
a) राष्ट्रगीतों और देशभक्ति कविताओं में प्रसाद जी का स्थान अद्वितीय है।
b) भारत भूमि की विशेषताएँ इस गीत का प्राण हैं।

 

Q. 15 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

वर्षा के प्रिय स्वर उर में बुनते सम्मोहन,
प्रणयातुर शत कीट-विहंग करते सुख-गायन!
मेघों का कोमल तम श्यामल तरुओं से छन!
मन में भू की अलस लालसा भरता गोपन!
रिमझिम-रिमझिम क्या कुछ कहते बूँदों के स्वर,
राम सिहर उठते, छूते वे भीतर अंतर!
धाराओं पर धाराएँ झरतीं धरती पर,
रज के कण-कण में तृण-तृण की पुलकावलि भर!
'सावन'
कवि-सुमित्रानंदन पंत

 

1. वर्षा के स्वर मन में क्या प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं? [2]

Answer:
वर्षा के स्वर (बूँदों की रिमझिम आवाज) मनुष्य के हृदय में एक गहरा सम्मोहन और रोमांच उत्पन्न करते हैं। इन्हें सुनकर रोम सिहर उठते हैं और वे बूँदें सीधे मनुष्य के भीतर अंतःकरण को छूकर आनंदित कर देती हैं।

Teacher's Note:
a) सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि माने जाते हैं।
b) वर्षा ऋतु का प्रभाव मानव मन पर जादुई होता है।

 

2. मेघों का कोमल तम श्यामल तरुओं से छन!
मन में भू की अलस लालसा भरता गोपन! - पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। [2]

Answer:
इन पंक्तियों का भावार्थ यह है कि आसमान में छाए बादलों का कोमल अंधकार जब हरे-भरे और सांवले वृक्षों से छनकर नीचे आता है, तो वह धरती के मन में एक अज्ञात, सुस्ती और तृप्ति से भरी हुई कामनीय लालसा (इच्छा) को जागृत कर देता है।

Teacher's Note:
a) प्रकृति के सौंदर्य और उसके सूक्ष्म प्रभावों का सुंदर वर्णन किया गया है।
b) शब्दों के मार्मिक अर्थ को स्पष्ट करें।

 

3. बूँदों के स्वरों से रोम क्यों सिहर उठते हैं? समझाकर लिखिए। [3]

Answer:
बूँदों के स्वरों से रोम इसलिए सिहर उठते हैं क्योंकि वर्षा की फुहारों में एक जादुई संगीत और शीतलता होती है जो प्रकृति के साथ-साथ मानव मन को भी आंदोलित कर देती है। जब वे बूँदें तन को छूती हैं, तो आत्मा तक एक अनूठा आनंद और सिहरन दौड़ जाती है।

Teacher's Note:
a) सावन की रुमझिम और संवेदनशीलता का सजीव चित्रण है।
b) शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर वर्षा का प्रभाव पड़ता है।

 

4. मनुष्य के लिए सावन की क्या उपयोगिता है? [3]

Answer:
मनुष्य के लिए सावन ऋतु अत्यंत उपयोगी और महत्वपूर्ण है। यह ग्रीष्म ऋतु की भीषण गर्मी और तपन से राहत दिलाती है, धरती की प्यास बुझाकर उसे हरा-भरा बनाती है, कृषि के लिए जल उपलब्ध कराती है, तथा मनुष्य के मन को संताप मुक्त करके उसमें उत्साह, उल्लास और प्रेम का संचार करती है।

Teacher's Note:
a) सावन केवल सौंदर्य की ऋतु नहीं, बल्कि जीवनदायिनी ऋतु है।
b) आर्थिक (कृषि) और मानसिक दोनों दृष्टियों से सावन का महत्व है।

 

Q. 16 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]

वह चले झोंके कि काँपे
भीम कायावान भूधर,
जड़-समंत उखड़-पुखड़कर
गिर पड़े, टूटे विटप-वर!
हाय! तिनकों से विनिर्मित
घोंसलों पर क्या न बीती,
डगमगाए जबकि कंकड़,
ईंट-पत्थर के महल-घर!
बोल आशा के विहंगम,
किस जगह पर तू छिपा था,
जो गगन पर चढ़ उठाता
गर्व से निज तान फिर-फिर
'निर्माण'
कवि-हरिवंश राय 'बच्चन'

 

1. प्रस्तुत कविता के आधार पर बताइए कि आँधी ने किस-किस पर कैसा प्रभाव डाला? [2]

Answer:
प्रस्तुत कविता के अनुसार भीषण आँधी ने विशाल पर्वतों (भूधर) को भी कंपा दिया, बड़े-बड़े और मजबूत वृक्षों (विटप) को जड़ से उखाड़कर गिरा दिया, तिनकों से बने छोटे-छोटे घोंसलों को तबाह कर दिया, और ईंट-पत्थरों से बने बड़े-बड़े महलों तथा घरों को भी डगमगा दिया।

Teacher's Note:
a) हरिवंश राय बच्चन की कविता 'निर्माण' विनाश के बाद भी नए निर्माण का संदेश देती है।
b) आँधी की विनाशलीला का व्यापक चित्रण किया गया है।

 

2. कवि ने घोंसलों की तुलना किससे और क्यों की है? [2]

Answer:
कवि ने तिनकों से बने घोंसलों की तुलना ईंट-पत्थर के बड़े-बड़े महलों और घरों से की है, और यह बताया है कि जब भयंकर तूफान में कंकड़ और पक्के महल तक डगमगा गए, तो उन अछूते और निरीह तिनकों के छोटे घोंसलों की क्या ही दशा हुई होगी।

Teacher's Note:
a) प्राकृतिक आपदा के आगे अमीर-गरीब या छोटे-बड़े सभी समान रूप से प्रभावित होते हैं।
b) तुलनात्मक दृष्टि से छोटे आश्रयों की दुर्बलता को दर्शाया गया है।

 

3. 'आशा के विहंगम' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। प्रस्तुत पंक्ति के द्वारा कवि ने मनुष्य को क्या संदेश दिया है? [3]

Answer:
'आशा के विहंगम' (पक्षी) पंक्ति का भाव यह है कि आशा एक ऐसे पक्षी के समान है जो संकटों और विनाश के बाद भी कभी मरती नहीं है। इस पंक्ति के द्वारा कवि ने मनुष्य को यह संदेश दिया है कि चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति या तबाही क्यों न आ जाए, मनुष्य को कभी भी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि हर असफलता के बाद पुनः नए उत्साह और उम्मीद के साथ अपने जीवन का पुनर्निर्माण करना चाहिए।

Teacher's Note:
a) यह कविता कर्मशीलता और कभी न हार मानने की प्रेरणा देती है।
b) आशा ही जीवन का आधार है।

 

4. निम्न शब्दों के अर्थ लिखिए: भीम, भूधर, विनिर्मित, विहंगम, गगन, विटप। [3]

Answer:

शब्दअर्थ
भीमविशाल / डरावना / भयानक
भूधरपर्वत / पहाड़
विनिर्मितबना हुआ / रचित
विहंगमपक्षी
गगनआकाश / आसमान
विटपवृक्ष / पेड़

Teacher's Note:
a) गद्यांश और पद्यांश में आए कठिन शब्दों के सटीक अर्थ लिखना आवश्यक है।
b) सभी शब्दार्थ कविता के संदर्भ के अनुकूल होने चाहिए।

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