Official ICSE Exam Papers for Class 10 Hindi
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Solved Previous Year Papers for Hindi
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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
SECTION - A (40 Marks)
Attempt all questions
Q.1 Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : [15]
1. ज्ञान प्राप्त करने के बहुत-से साधन हैं। यात्रा पर जाना भी किसी पाठशाला में जाकर शिक्षा प्राप्त करने से कम नहीं है। ऐसी किसी यात्रा का वर्णन कीजिए। बताइए कि उस यात्रा से आपने क्या-क्या सीखा?
2. कल्पना कीजिए कि आपको किसी प्रसिद्ध व्यक्ति का साक्षात्कार (Interview) लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताइए कि वे प्रसिद्ध व्यक्ति कौन हैं और उनसे कौन-से तीन प्रश्न पूछेंगे व क्यों?
3. 'ऊँचे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए माता-पिता तथा अध्यापकों द्वारा बच्चों पर डाला जाने वाला दबाव अनुचित है।' - विषय के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार दीजिए।
4. एक मौलिक कहानी लिखिए, जिसका आधार निम्नलिखित उक्ति हो: जान बची तो लाखों पाये।
5. नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिये और चित्र को आधार बनाकर वर्णन कीजिए अथवा कहानी लिखिए, जिसका सीधा व स्पष्ट संबंध चित्र से होना चाहिए।
[Figure: A sketch showing a person sitting under a tree or hut environment, possibly engaged in reading or writing, with a lantern or pot nearby.]
Answer:
(विकल्प 1 पर आधारित निबंध)
शीर्षक: मेरी ऐतिहासिक स्थल की यात्रा और उससे सीख
सच्ची शिक्षा केवल चार दीवारों वाले कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि खुली दुनिया में घूमकर अनुभव प्राप्त करना शिक्षा का सबसे जीवंत रूप है। पिछले वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में मुझे अपने परिवार के साथ आगरा और फतेहपुर सीकरी की ऐतिहासिक यात्रा पर जाने का अवसर मिला। यह यात्रा मेरे लिए किसी पाठशाला से कम नहीं थी। जब मैंने किताबों में पढ़े मुगलों के इतिहास को अपनी आँखों से संगमरमर की इमारतों और लाल बलुआ पत्थर की दीवारों पर उकेरा हुआ देखा, तो इतिहास जीवंत हो उठा।
ताजमहल की सुंदरता, उसकी नक्काशी और उसकी वास्तुकला ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। गाइड से यह जानने को मिला कि कैसे हजारों कारीगरों ने वर्षों की मेहनत से इस अद्भुत कलाकृति को गढ़ा था। इसके पश्चात, जब हम फतेहपुर सीकरी पहुँचे, तो अकबर की धार्मिक सहिष्णुता और उनके द्वारा बनवाए गए इबादतखाने को देखकर मुझे भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का वास्तविक अर्थ समझ आया।
इस यात्रा से मैंने कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। सबसे पहले, मुझे धैर्य और समर्पण का पाठ मिला, जो उन कारीगरों की कला में झलकता था। दूसरा, इतिहास को केवल रटने की वस्तु नहीं, बल्कि सहेजने और समझने की धरोहर माना जाना चाहिए। इस प्रकार, यह यात्रा मेरे लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान, इतिहास और संस्कृति का एक अनमोल पाठ साबित हुई।
Teacher's Note:
a) ऐसे निबंधात्मक प्रश्नों में निर्धारित शब्द-सीमा (लगभग 250 शब्द) का ध्यान रखना और विचारों का क्रमबद्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
b) छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे वर्तनी की अशुद्धियों से बचें और विषय के अनुकूल प्रासंगिक उदाहरणों का प्रयोग करें।
Q.2 Write a letter in Hindi in approximately 120 Words on any one of the topics given below: [7]
1. छात्रावास में रहने वाली अपनी छोटी बहन को फैशन की ओर अधिक रुझान न रख, ध्यानपूर्वक पढ़ाई करने की सीख देते हुए पत्र लिखिए।
2. आपके नगर में एक 'विज्ञान-कार्यशाला' का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला के संयोजक को पत्र लिखकर बताइए कि आप भी इसमें सम्मिलित होना चाहते हैं।
Answer:
(विकल्प 1 के आधार पर पत्र)
परीक्षा भवन,
क ख ग नगर।
दिनांक: 15 मार्च 2012
प्रिय बहन अलका,
शुभाशीर्वाद।
कल ही तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ। यह जानकर मुझे बहुत चिंता हुई कि तुम्हारा ध्यान इन दिनों अपनी पढ़ाई से हटकर फैशन और आधुनिक कपड़ों की ओर अधिक जा रहा है। छात्रावास में तुम्हें स्वतंत्रता अवश्य मिली है, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि तुम अपने मुख्य उद्देश्य यानी शिक्षा से भटक जाओ।
तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें पढ़ाने-लिखाने के लिए ही हॉस्टल भेजा है ताकि तुम भविष्य में एक आत्मनिर्भर और योग्य नागरिक बन सको। फैशन और बाहरी दिखावे की उम्र पूरी जिंदगी पड़ी है, परंतु विद्यार्थी जीवन में समय का एक-एक पल अनमोल है। यदि इस समय पढ़ाई में लापरवाही बरती गई, तो बाद में केवल पछताना पड़ेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि तुम मेरी बात को समझोगी और अपनी बुरी आदतों को छोड़कर पूरा ध्यान केवल अपनी पढ़ाई पर लगाओगी।
घर में माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारी बड़ी बहन,
अदिती
Teacher's Note:
a) अनौपचारिक पत्र लिखते समय प्रेषक का पता, दिनांक, उचित संबोधन (प्रिय बहन) और आत्मीय शिष्टाचार (शुभाशीर्वाद, तुम्हारा/तुम्हारी) का पालन करना अनिवार्य है।
b) पत्र की भाषा सरल, स्पष्ट और संवादात्मक होनी चाहिए तथा निर्धारित शब्द-सीमा के भीतर ही अपनी बात समाप्त करनी चाहिए।
Q.3 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: [10]
एक चोर किसी मंदिर का घंटा चुराकर ले गया था। वन में जाते हुए उसका सामना बाघ से हो गया और चोर बाघ के द्वारा मारा गया। उसी वन में वह घंटा बंदरों के हाथ में पड़ गया। वन बहुत घना था। बंदर झाड़ियों के अंदर रहते थे। जब उनकी मौज होती, वे घंटा बजाते।
घंटे की आवाज सुनकर समीप के नगर में यह अफवाह फैल गयी के जंगल में भूत रहता है और उसका नाम घंटाकरण है। उसके कान घंटे के समान हैं, जब वह हिलता है, तो कानों से घंटे की आवाज आती है। इस अफवाह से लोग ऐसे भयभीत हुए कि जंगल की ओर भूलकर भी कोई न जाता था। सब जंगल से दूर-दूर ही रहते थे। जंगल से लकड़हारे लकड़ियाँ न लाते थे, चरवाहे जंगल में पशुओं को चराने न ले जाते थे। किसी में इतनाौ हौसला न था कि जंगल में जाने का प्रयत्न कर पाता।
इस प्रकार सारे का सारा जंगल किसी भी काम में न आकर कल्पित घंटाकरण भूत की राजधानी बन गया। अब तो राजा को भी बडी चिंता हुई। उसने सयानों और जादूगरों को इकट्ठा किया और कहा कि भाई इस भूत को जंगल से निकालो, वरना सारा जंगल और हजारों रुपये की सालाना आमदनी बेकार हाथ से जा रही है।
सब लोगों ने अपने-अपने उपाय करने प्रारंभ किए। पंडितों ने चंडी का जाप किया, हनुमान चालीसा का पाठ किया। मुल्लाओं ने कुरान का पाठ आरंभ किया। किसी ने भैरव को याद किया, किसी ने काली माता की मनन्नत की, किसी ने पीर-पैगंबर को मनाया, किसी ने जादू-टोना किया। इस पर भी घंटाकरण किसी के काबू में न आया। घंटे का शब्द सदा की भाँति सुनाई देता रहा और लोग समझते रहे घंटाकरण घंटा बजा रहा है।
तभी एक चतुर मनुष्य उधर कहीं से आ निकला। वह भूत-प्रेत, चंडी-मुंडी, पीर-पैगंबर, जादू-टोने आदि कपोल-कल्पित मिथ्या बातों पर विश्वास नहीं करता था। उसने विचारा कि वन में हो न हो कोई विशेष बात होगी। संभव है कि वन में डाकू रहते हों और उन्होंने वन को अपने रहने के लिए सुरक्षित बनाने को यह पाखंड रचा हो या कहीं बंदरों के हाथ में घंटा न पड़ गया हो। ऐसा दृढ़ निश्चय कर वह चतुर मनुष्य साधु का वेश धर कर जंगल में घुसा। अंदर जाकर देखा, तो उसने अपने अनुमान को सही पाया। लौटकर उसने नगर निवासियो से कहा, “भाइयो! मैंने भूत को पकड़ने का उपाय विचार लिया है। आप लोग मुझे एक गाड़ी भुने चने दें, तो मैं कल ही भूत को पकड़ लेता हूँ।”
नगर के निवासी और राजा भूत के नाश के लिए सब कुछ करने को तैयार थे, झटपट सब सामान इकट्ठा कर दिया। चतुर मनुष्य ने जंगल में जाकर चने बंदरों के आगे डाल दिए। इधर सब बंदर चने खाने में लगे, उधर उसने घंटा उठा कर नगर की राह ली। अब क्या था, सारे नगर में और राजसभा में उस चतुर मनुष्य को बड़ा आदर मिला, फिर उसने सब भेद खोलकर लोगों के मिथ्या विश्वास को तोड़ा। उन्हें भ्रम के भूत से मुक्ति दिलाई।
इस कहानी के समान अनेक बातों के भ्रम में पड़कर मनुष्य ने भूत-प्रेत, जादू-टोना आदि अनेक प्रकार की कल्पनाएँ कर ली हैं। लोग भय और मिथ्या विश्वास के कारण वास्तविकता का पता नहीं लगाते हैं और झूठे उपाय कर-करके थकते हैं। वास्तव में भूत-प्रेत आदि यह सब ठग-लीला है। जादू-टोने सब लूटने-खसूटने के बहाने हैं। इनसे सदा बचने में ही मानव की भलाई है। मिथ्या विश्वास से ही मनुष्य तरह-तरह के कष्टों में पड़ जाता है। अत: यथासंभव मिथ्या विश्वास दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।
1. नगर में क्या अफवाह फैल गई थी और इस अफवाह का क्या कारण था? [2]
Answer:
नगर में यह अफवाह फैल गई थी कि जंगल में 'घंटाकरण' नामक भूत रहता है जिसके कान घंटे के समान हैं और हिलने पर उसके कानों से घंटे की आवाज आती है। इस अफवाह का कारण यह था कि मंदिर का घंटा चुराने वाला चोर बाघ द्वारा मारा गया था और वह घंटा बंदरों के हाथ लग गया था, जो झाड़ियों में छिपकर जब-तब उसे बजाया करते थे।
Teacher's Note:
a) छात्र गद्यांश के आरंभिक भाग से घटना का सटीक संदर्भ लें।
b) उत्तर में चोर, बाघ और बंदरों का उल्लेख करना आवश्यक है।
2. जंगल किसकी राजधानी बन गया था? इससे नगर निवासियों पर क्या प्रभाव पड़ा? [2]
Answer:
जंगल कल्पित घंटाकरण भूत की राजधानी बन गया था। इसके प्रभाव के कारण डर के मारे कोई भी नगर निवासी जंगल की ओर भूलकर भी नहीं जाता था, लकड़हारे लकड़ियाँ लाने और चरवाहे पशुओं को चराने वहाँ जाने का साहस नहीं करते थे।
Teacher's Note:
a) भूत के भय से लोगों का जंगल में आना-जाना पूरी तरह बंद हो गया था।
b) इस बिंदु को स्पष्ट करना उत्तर को पूर्ण बनाता है।
3. राजा की चिंता का क्या कारण था? भूत को जंगल से निकालने के क्या-क्या उपाय किए गए? [2]
Answer:
राजा की चिंता का कारण यह था कि भूत के भय से पूरा जंगल बेकार हो गया था और उससे मिलने वाली हजारों रुपये की सालाना आमदनी हाथ से जा रही थी। भूत को निकालने के लिए पंडितों ने चंडी और हनुमान चालीसा का पाठ किया, मुल्लाओं ने कुरान पढ़ी, तथा लोगों ने भैरव, काली माता, पीर-पैगंबर और जादू-टोने जैसे तमाम उपाय किए।
Teacher's Note:
a) आर्थिक नुकसान और धार्मिक अनुष्ठानों के प्रयासों दोनों का उल्लेख होना चाहिए।
b) उत्तर संक्षिप्त और तथ्यात्मक होना चाहिए।
4. चतुर मनुष्य का क्या अनुमान था? उसने नगर नागरिकों को भूत से किस प्रकार मुक्ति दिलाई? [2]
Answer:
चतुर मनुष्य का अनुमान था कि या तो वन में डाकुओं ने पाखंड रचा होगा या बंदरों के हाथ घंटा पड़ गया होगा। उसने साधु का वेश धरकर जंगल में जाकर बंदरों के आगे भुने हुए चने डाल दिए, जिससे बंदर चने खाने में व्यस्त हो गए और उसने घंटा उठाकर नगरवासियों को अंधविश्वास और भ्रम के भूत से मुक्त कर दिया।
Teacher's Note:
a) चतुर व्यक्ति की बुद्धि और उसके व्यावहारिक उपाय की सराहना की जानी चाहिए।
b) बंदरों और चनों का प्रसंग मुख्य रूप से लिखना आवश्यक है।
5. प्रस्तुत गद्यांश से आपको क्या शिक्षा मिली? [2]
Answer:
प्रस्तुत गद्यांश से यह शिक्षा मिलती है कि हमें भूत-प्रेत, जादू-टोना और अन्य मिथ्या विश्वासों या अंधविश्वासों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। भय के कारण वास्तविकता की पड़ताल किए बिना झूठे उपायों में पड़ना मूर्खता है, अतः यथासंभव अंधविश्वासों को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।
Teacher's Note:
a) गद्यांश का केंद्रीय संदेश अंधविश्वास का विरोध और विवेक का प्रयोग है।
b) इसे अपने शब्दों में स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए।
Q.4 Answer the following according to the instructions given: [8]
1. निम्नलिखित शब्दों से विशेषण बनाइए: [1]
• अनुभव -
• पूजा -
Answer:
• अनुभव - अनुभवी
• पूजा - पूज्य / पूजनीय
Teacher's Note:
a) संज्ञा शब्दों से विशेषण रूप बनाते समय उचित प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
b) वर्तनी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
2. निम्नलिखित शब्दों में से किसी दो शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए: [1]
• पुत्री -
• घमंड -
Answer:
• पुत्री - बेटी, सुता, आत्मजा
• घमंड - गर्व, अहंकार, अभिमान
Teacher's Note:
a) छात्रों को कम से कम दो पर्यायवाची शब्द लिखने चाहिए।
b) शब्दों के सही अर्थ और मानक वर्तनी का प्रयोग करें।
3. निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए: [1]
• अपमान -
• अमावस्या -
• उत्थान -
• निंदा -
Answer:
• अपमान - सम्मान
• अमावस्या - पूर्णिमा
• उत्थान - पतन
• निंदा - स्तुति / प्रशंसा
Teacher's Note:
a) विलोम शब्द लिखते समय तत्सम शब्द का उत्तर तत्सम रूप में ही देना उचित होता है।
b) किन्हीं दो शब्दों के उत्तर लिखने निर्देश में कहे गए हैं, अतः सही दो का चयन करें।
4. निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए: [1]
• मुँह में पानी भर आना -
• टाँग अड़ाना -
भाववाचक संज्ञा बनाइए। [1]
• सेवक -
• बच्चा -
Answer:
मुहावरा वाक्य:
• मुँह में पानी भर आना: हलवाई की दुकान पर गरमा-गरम रसगुल्ले देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया।
भाववाचक संज्ञा:
• सेवक - सेवा
• बच्चा - बचपन
Teacher's Note:
a) मुहावरे का प्रयोग वाक्य के अर्थ को स्पष्ट करने वाला होना चाहिए।
b) भाववाचक संज्ञा बनाते समय उचित प्रत्यय (जैसे -पन, -ा) का ज्ञान होना आवश्यक है।
5. कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार वाक्यों में परिवर्तन कीजिए: [1]
(a) वह दुश्मन की सेना पर टूट पड़ा।
(‘टूट पड़ा’ के स्थान पर हमला किया का प्रयोग कीजिए।)
Answer:
वह दुश्मन की सेना पर हमला किया। (या: उसने दुश्मन की सेना पर हमला किया।)
Teacher's Note:
a) वाक्य में क्रिया बदलते समय कारक चिह्नों का उचित समायोजन किया जाता है।
b) अर्थ में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
(b) विद्यार्थी पुस्तक पढ़ रहा है। [1]
(बहुवचन में बदलिए)
Answer:
विद्यार्थी पुस्तकें पढ़ रहे हैं।
Teacher's Note:
a) एकवचन को बहुवचन में बदलते समय संज्ञा और क्रिया दोनों के वचन बदलते हैं।
b) 'विद्यार्थी' शब्द का बहुवचन 'विद्यार्थीगण' या 'विद्यार्थी' ही रहता है, अतः क्रिया और कर्म बहुवचन में होंगे।
(c) अन्ना हजारे ने सरकार का लोकपाल बिल मानने से इंकार कर दिया। [1]
(रेखांकित शब्द का विपरीतार्थक शब्द लिखिए। ध्यान रहे वाक्य का अर्थ न बदले।)
Answer:
अन्ना हजारे ने सरकार का लोकपाल बिल स्वीकार करने से असहमति जताई / मना कर दिया। (या: अन्ना हजारे ने सरकार का लोकपाल बिल मानने से स्वीकार नहीं किया - अर्थ परिवर्तन के बिना: अन्ना हजारे ने सरकार का लोकपाल बिल मानने की स्वीकृति नहीं दी / अस्वीकार कर दिया।)
Teacher's Note:
a) 'इंकार' का विलोम 'स्वीकार' होता है, वाक्य का अर्थ समान रखने के लिए उचित संरचना बनानी पड़ती है।
b) बोर्ड परीक्षा में ऐसे प्रश्नों का अभ्यास छात्रों को पूर्ण अंक दिलाता है। -
SECTION - B (40 Marks)
Attempt four questions from this section.
You must answer at least one question from each of two books you have studied and any two other questions.
गद्य संकलन
Q.5 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
“जिस दिन तुम्हें यह पत्र मिलेगा उसके ठीक सवेरे मैं, बाल अरुण के किरण रथ पर चढ़कर, उस ओर चला जाऊँगा। मैं चाहता तो अंत समय तुमसे मिल सकता था, मगर इससे क्या फायदा ? मुझे विश्वास है, तुम मेरी जन्म-जन्मांतर की जननी हो, रहोगी! मैं तुमसे दूर कहाँ जा सकता हूँ? माँ, जब तक पवन साँस लेता है, सूर्य चमकता है, समुद्र लहराता है, तब तक कौन मुझे तुम्हारी करुणाマイी गोद से दूर खींच सकता है।”
‘उसकी माँ’
लेखक - पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’
1. यह पत्र किसने, किस अवसर पर लिखा था ? [2]
Answer:
यह पत्र क्रांतिकारी क्रांतिकारी युवक ने अपनी माँ को उस अवसर पर लिखा था जब उसे अंग्रेजी सरकार द्वारा देश की स्वतंत्रता के लिए फाँसी की सजा दी जाने वाली थी और वह फांसी के ठीक पहले अपनी माँ को सांत्वना देने के लिए यह पत्र लिख रहा था।
Teacher's Note:
a) पाठ के मुख्य पात्र और उसकी देशभक्ति की पृष्ठभूमि का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) फाँसी या मृत्यु से पूर्व लिखे गए पत्र के संदर्भ को समझें।
2. ‘‘मैं, बाल अरुण के किरण रथ पर चढ़कर, उस ओर चला जाऊँगा।’’ - प्रस्तुत पंक्ति की व्याख्या कीजिए। बताइए कि वह ऐसा क्यों कह रहा है? [2]
Answer:
इस पंक्ति का आशय है कि वह सुबह होते ही हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूलकर अपने प्राण देश के लिए न्यौछावर कर देगा। वह ऐसा इसलिए कह रहा है क्योंकि वह अपनी माँ को मृत्यु से भयभीत या दुःखी नहीं देखना चाहता, बल्कि उसे यह विश्वास दिलाना चाहता है कि उसका बलिदान अमर रहेगा।
Teacher's Note:
a) 'बाल अरुण के किरण रथ' का अर्थ प्रातःकाल की सूर्य की पहली किरण और नया सवेरा है।
b) क्रांतिकारी की वीरता और मातृप्रेम को रेखांकित करें।
3. पत्र में लिखे गए शब्दों का वहाँ उपस्थित लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा? [3]
Answer:
पत्र में लिखे गए ओसपूर्ण और देशभक्ति से परिपूर्ण शब्दों को पढ़कर वहाँ उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम हो गईं। जेल के अधिकारी और सिपाही भी उस वीर युवक के अदम्य साहस, उसकी निर्भीकता और उसकी माता के प्रति अगाध प्रेम को देखकर स्तब्ध और भावविभोर हो गए।
Teacher's Note:
a) देशभक्त की वीरता का प्रभाव शत्रुओं और जेलकर्मियों पर भी पड़ा था।
b) उत्तर में सभी के भावुक होने का वर्णन मुख्य बिंदु है।
4. प्रस्तुत पाठ के नायक के जीवन-चरित्र से आपने क्या प्रेरणा प्राप्त की है ? क्या आज हमारे देश को ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए। [3]
Answer:
प्रस्तुत पाठ के नायक के जीवन-चरित्र से हमने देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा, निर्भीकता और मातृभूमि के प्रति सर्वस्व त्याग करने की प्रेरणा प्राप्त की है। हाँ, आज भी हमारे देश को ऐसे ही निस्वार्थ और देशभक्त व्यक्तियों की आवश्यकता है, क्योंकि आज देश भ्रष्टाचार, स्वार्थ और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनके समाधान के लिए उच्च आदर्शों की जरूरत है।
Teacher's Note:
a) प्रेरणा और वर्तमान संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता दोनों का उत्तर में संतुलन होना चाहिए।
b) तर्कसंगत ढंग से अपने विचार प्रस्तुत करें।
Q.6 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
एक भेड़ चराने वाली और सतोगुण में डूबी हुई युवती कन्या के दिल में जोश आते ही कुल फ्रांस एक भारी शिकस्त से बच गया। अपने आपको हर घड़ी और हर पल महान बनाने का नाम वीरता है। वीरता के कारनामे तो एक गौण बात है। असल वीर तो इन कारنامों को अपनी दिनचर्या में लिखते भी नहीं। दरख्त तो जमीन से रस ग्रहण करने में लगा रहता है।
‘सच्ची वीरता’
लेखक - सरदार पूर्णसिंह
1. सच्चे वीरों और दरख्त में क्या समानता होती है? [2]
Answer:
सच्चे वीर और दरख्त (पेड़) दोनों में यह समानता होती है कि वे दिखावे से दूर रहकर चुपचाप अपना काम करते हैं। जिस प्रकार पेड़ बिना किसी शोर-शराबे के जमीन से रस ग्रहण कर फल-फूल देता है, उसी प्रकार सच्चे वीर अपने महान कार्यों का बखान स्वयं नहीं करते, उनका जीवन ही परोपकार में लगा रहता है।
Teacher's Note:
a) लेखक ने सच्चे वीर की तुलना मूक भाव से कार्य करने वाले वृक्ष से की है।
b) मौन और सच्चे कर्म की महत्ता को दर्शाएं।
2. सतोगुण से आप क्या समझते हैं? इस गुण से युक्त व्यक्तियों की क्या विशेषता होती है? [2]
Answer:
सतोगुण का अर्थ पवित्रता, शांति, और सात्विक प्रवृत्ति से है। इस गुण से युक्त व्यक्तियों की विशेषता यह होती है कि वे शांत, परोपकारी, सत्यवादी और उच्च विचारों वाले होते हैं, जो अहंकार से दूर रहकर मानवता की भलाई में लीन रहते हैं।
Teacher's Note:
a) सतोगुण भारतीय दर्शन के तीन गुणों (सत, रज, तम) में से सर्वोच्च सात्विक गुण है।
b) ऐसे व्यक्ति का आचरण संयमित होता है।
3. भेड़ चराने वाली युवती कौन थी ? उसने वीरता का क्या कार्य किया था? [3]
Answer:
भेड़ चराने वाली युवती फ्रांस की प्रसिद्ध वीर सेनानी जोन ऑफ आर्क (Joan of Arc) थी। उसने अपनी वीरता का परिचय देते हुए निराश और पराजय की कगार पर खड़ी फ्रांसीसी सेना में नया जोश भरा और कुल फ्रांस को एक भारी शिकस्त (पराजय) से बचा लिया था।
Teacher's Note:
a) जोआन ऑफ आर्क का ऐतिहासिक प्रसंग 'सच्ची वीरता' पाठ में वीरता के साक्षात उदाहरण के रूप में आया है।
b) देश और सेना के प्रति उसका समर्पण अतुलनीय था।
4. प्रस्तुत पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए। [3]
Answer:
प्रस्तुत पाठ 'सच्ची वीरता' का मुख्य उद्देश्य पाठकों के मन में वीरता के वास्तविक स्वरूप को उजागर करना है। लेखक यह समझाना चाहता है कि सच्ची वीरता केवल युद्ध के मैदान में दिखाए गए शारीरिक कारनामे या हिंसा नहीं है, बल्कि अंतःकरण की पवित्रता, त्याग, परोपकार, सच्चाई और निरंतर महान बनने की आंतरिक प्रेरणा है।
Teacher's Note:
a) पाठ का संदेश बाहरी दिखावे से दूर आंतरिक गुणों को विकसित करना है।
b) सरदार पूर्णसिंह की निबंध शैली के मूल भाव को स्पष्ट करें।
Q.7 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
"सबको देंगे भैया! लेकिन जरा रुको, ठहरो, एक-एक को देने दो। अभी इतनी जल्दी हम कहीं लौट थोडे ही जाएँगे। बेचने तो आए ही हैं, और हैं भी इस समय मेरे पास एक-दो नहीं, पूरी सत्तावन।... हाँ, बाबूजी, क्या पूछा था आपने कितने में दीं!... दी तो वैसे तीन-तीन पैसे के हिसाब से है, पर आपको दो-दो पैसे में ही दे दूँगा।"
‘मिठाईवाला’
लेखक - भगवती प्रसाद वाजपेयी
1. यहाँ कौन-सी वस्तु बेची जा रही है? इस समय बेचने वाले के मनोभाव कैसे हैं? [2]
Answer:
यहाँ रंग-बिरंगी और स्वादिष्ट मिठाइयाँ बेची जा रही हैं। इस समय बेचने वाले (मिठाईवाले) के मनोभाव अत्यंत प्रसन्न, उदार और स्नेहमयी हैं, क्योंकि बच्चों के प्रति उसके मन में अपार स्नेह है और वह उन्हें सस्ते दामों पर मिठाइयाँ देकर संतुष्टि पा रहा है।
Teacher's Note:
a) मिठाईवाले का बच्चों के प्रति प्रेम उसकी आर्थिक हानि की परवाह न करने की प्रेरणा देता है।
b) उसके संवाद में उसकी आत्मीयता झलकती है।
2. दाम सुनकर बाबूजी ने क्या सोचा और क्या कहा ? [2]
Answer:
दाम सुनकर बाबूजी ने मन ही मन सोचा कि इतनी सस्ती मिठाई क्यों बेच रहा है, कहीं इसका कोई रहस्य या घटिया माल तो नहीं है। उन्होंने कहा कि इतनी सस्ती क्यों दे रहे हो, कहीं लागत भी पूरी निकलती है या नहीं?
Teacher's Note:
a) सामान्य व्यापारी मुनाफे की सोचता है जबकि मिठाईवाले का उद्देश्य बच्चों की खुशी था।
b) बाबूजी की व्यावसायिक सोच को दर्शाया गया है।
3. बाबूजी का परिचय दीजिए। बताइए कि उनका कथन किन लोगों के, किस व्यवहार की ओर संकेत कर रहा है ? [3]
Answer:
बाबूजी (विजय बाबू) नगर के एक प्रतिष्ठित और संभ्रांत व्यक्ति हैं। उनका कथन समाज के उन आम लोगों और दुकानदारों के व्यवहार की ओर संकेत कर रहा है जो हर बात में केवल अपना मुनाफा देखते हैं और ग्राहकों को ठगने का प्रयास करते हैं।
Teacher's Note:
a) विजय बाबू कहानी के एक महत्वपूर्ण पात्र हैं जो बच्चों के प्रति स्नेह और जिज्ञासा रखते हैं।
b) समाज की व्यावसायिक मानसिकता पर प्रकाश डाला गया है।
4. ‘व्यक्ति विधाता की लीला के समक्ष विवश होता है, तथापि दुख की घड़ी में विलाप करने के स्थान पर अन्य माध्यमों से स्वयं को खुश करने के प्रयत्न का नाम ही सच्ची मनुष्यता है।’ - मुरली वाले के चरित्र को ध्यान में रखकर इन पंक्तियों पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए। [3]
Answer:
यह कथन मुरलीवाले (अजय बाबू) के जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठता है। अपने बच्चों और पत्नी की मृत्यु के असीम दुःख से टूटने के बाद भी उसने हार नहीं मानी, बल्कि नगर के बच्चों में ही अपने बच्चों की झलक पाकर उन्हें खिलौने, मिठाइयाँ और मुरलियाँ बेचकर खुद को खुश रखने और बच्चों को आनंदित करने का मार्ग चुना। यही सच्ची मनुष्यता है।
Teacher's Note:
a) मिठाईवाले का आंतरिक दुख और उसका परोपकारी स्वरूप कहानी का केंद्रीय भाव है।
b) दुःख को भुलाकर दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही मानवता है।
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
लेखक - प्रकाश नगायच
Q.8 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
“जो आज्ञा, देव!” कहकर वीरसेन ने सम्राट को प्रणाम किया और कक्ष से निकालकर सैनिक शिविर की ओर चल पड़ा।
थोड़ी देर बाद ही पाटलिपुत्र का दुर्ग और नगर रणवादयों से गूँज उठा। गंगा और सोन नदियों की शांत लहरों में ज्वार आ गया।
1. कितने वर्षों के संघर्ष के बाद चन्द्रगुप्त को मगध का राज्य प्राप्त हुआ था ? वह किस उपाधि को धारण कर गुप्त साम्राज्य के राजसिंहासन पर बैठा था ? [2]
Answer:
चन्द्रगुप्त को लंबे संघर्ष के बाद मगध का राज्य प्राप्त हुआ था। वह 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण कर गुप्त साम्राज्य के राजसिंहासन पर बैठा था।
Teacher's Note:
a) चन्द्रगुप्त के ऐतिहासिक राज्यारोहण का संदर्भ यहाँ दिया गया है।
b) 'विक्रमादित्य' उपाधि का उल्लेख करना अनिवार्य है।
2. चन्द्रगुप्त के राजसिंहासन पर बैठने की प्रजा पर क्या प्रतिक्रिया हुई थी व क्यों ? [2]
Answer:
चन्द्रगुप्त के राजसिंहासन पर बैठने से प्रजा में अपार हर्ष और उत्साह की लहर दौड़ गई, पाटलिपुत्र का दुर्ग रणवादयों से गूँज उठा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि प्रजा विदेशी शत्रुओं के अत्याचारों और कमजोर शासन से त्रस्त थी और चन्द्रगुप्त से न्याय तथा सुशासन की पूरी उम्मीद थी।
Teacher's Note:
a) प्रजा का उत्साह उनके नए राजा के प्रति विश्वास को दर्शाता है।
b) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
3. भारतवर्ष की तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियाँ कैसी थी ? सम्राट ने वीरसेन को क्या आज्ञा दी थी और क्यों ? [3]
Answer:
भारतवर्ष की तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियाँ अत्यंत अशांत, अस्थिर और विकट थीं। विदेशी शक्तियाँ और क्षत्रप साम्राज्य को हड़पने की ताक में थे। सम्राट चन्द्रगुप्त ने वीरसेन को सेना को युद्ध के लिए तैयार करने और शत्रुओं का मुकाबला करने की आज्ञा दी थी ताकि देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की जा सके।
Teacher's Note:
a) गुप्त काल की राजनीतिक चुनौतियों का वर्णन करें।
b) वीरसेन को दी गई आज्ञा देश की सुरक्षा से जुड़ी थी।
4. जननी, जन्मभूमि के प्रति मनुष्य का क्या कर्तव्य होता है ? प्रस्तुत संदर्भ को ध्यान में रखकर एक अनुच्छेद में उत्तर लिखिए। [3]
Answer:
जननी और जन्मभूमि दोनों का स्थान मनुष्य के जीवन में सर्वोपरि होता है। जन्मभूमि वह पवित्र पावन धरती है जिस पर हम जन्म लेते हैं, खेलते हैं और सांस लेते हैं। इसके प्रति हमारा यह परम कर्तव्य है कि हम इसकी रक्षा, सम्मान और उत्थान के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने से भी पीछे न हटें। जिस प्रकार चन्द्रगुप्त ने अपनी मातृभूमि को विदेशी आक्रांताओं से मुक्त कराने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया, उसी प्रकार हर नागरिक का धर्म है कि वह अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता और गरिमा को अक्षुण्ण रखे।
Teacher's Note:
a) अनुच्छेद लेखन में देशप्रेम और कर्तव्यभाव मुख्य बिंदु होने चाहिए।
b) भाषा ओजपूर्ण और प्रभावशाली होनी चाहिए।
Q.9 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
“हमने वचन दिया था..........? कब...........? हमें तो याद नहीं। रामगुप्त ने लापरवाही से कहा- पुरोहित जी जो मंत्र पढ़ते गए, हम तो उन्हीं को दोहरा रहे थे। पता नहीं उन मंत्रों का अर्थ क्या था ?”
1. रामगुप्त का परिचय दीजिए और बताइए कि उसे कौन-से वचन याद नहीं हैं ? [2]
Answer:
रामगुप्त मगध का अयोग्य, कायर और विलासी सम्राट है। उसे वे वचन याद नहीं हैं जो उसने विवाह के समय या संकट काल में अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी की रक्षा करने और उसे शरण देने के लिए दिए थे।
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Teacher's Note:
a) रामगुप्त के चरित्र की कायरता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को स्पष्ट करें।
b) वचनों से मुकरने की उसकी प्रवृत्ति पर बल दें।
2. रामगुप्त के इस कथन का किसने, क्या उत्तर दिया ? [2]
Answer:
रामगुप्त के इस कथन का उत्तर चन्द्रगुप्त या अन्य पात्र ने कड़े शब्दों में दिया कि वचन केवल शब्दों का खेल नहीं होते, बल्कि कुल की मर्यादा और आन-बान होते हैं, जिन्हें भूलना एक सम्राट के लिए कायरता है।
Teacher's Note:
a) नाटक के संवाद के अनुसार वचनों की पवित्रता को समझाया गया है।
b) रामगुप्त के गैर-जिम्मेदार बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।
3. रामगुप्त और चंद्रगुप्त के चरित्र में क्या-क्या भिन्नताएँ थी ? [3]
Answer:
रामगुप्त और चंद्रगुप्त के चरित्र में जमीन-आसमान का अंतर था। रामगुप्त एक कायर, स्वार्थी, शराबी, विलासी और कर्तव्यविमुख शासक था जो अपनी रक्षा के लिए अपनों का सौदा कर सकता था; इसके विपरीत, चंद्रगुप्त एक साहसी, पराक्रमी, न्यायप्रिय, कर्तव्यनिष्ठ और राष्ट्रभक्त युवक था जो देश और कुल की मर्यादा के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर करने को तत्पर रहता था।
Teacher's Note:
a) दोनों पात्रों की तुलनात्मक विशेषताएँ स्पष्ट रूप से लिखें।
b) कायरता बनाम वीरता का यह उत्कृष्ट उदाहरण है।
4. ‘कुल की रक्षा के लिए व्यक्ति का, नगर की रक्षा के लिए कुल का और राष्ट्र की रक्षा के लिए नगर का त्याग कर देना चाहिए।’ आप इस विचार से कहाँ तक सहमत हैं? तर्कसहित उत्तर दीजिए। [3]
Answer:
हम इस विचार से पूर्णतः सहमत हैं। यह नीतिगत और देशभक्ति की भावना पर आधारित महान सिद्धांत है। यदि किसी एक व्यक्ति, कुल या छोटे हिस्से के स्वार्थ से पूरे राष्ट्र या समाज की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, तो व्यापक हित और राष्ट्र की संप्रभुता को सर्वोपरि मानते हुए छोटे त्याग करने में ही भलाई है। राष्ट्र सर्वोपरी है।
Teacher's Note:
a) सामूहिक हित और राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखने के सिद्धांत को समझाएं।
b) तर्क संगत और स्पष्ट उत्तर लिखें।
Q.10 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
रुद्रसिंह सम्राट चंद्रगुप्त के इन शब्दों का मर्म न समझ पाए और प्रसन्न होकर बोले - “मगध सम्राट की इस उदारता और महानता ने शत्रु होते हुए भी मगध-सम्राट की प्रशंसा करने पर विवश कर दिया है। नीतिकारों ने ठीक ही कहा है बुद्धिमान शत्रु भी सौभाग्य से ही मिलते हैं।”
1. रुद्रसिंह कौन थे ? वे चंद्रगुप्त के किन शब्दों का मर्म नहीं समझ सके ? [2]
Answer:
रुद्रसिंह शक राज या विरोधी सेनापति/शासक थे। वे चंद्रगुप्त के उन कूटनीतिक और व्यंग्यात्मक शब्दों का मर्म नहीं समझ सके जिसमें उनकी हार और चंद्रगुप्त की दूरदर्शिता छिपी थी।
Teacher's Note:
a) रुद्रसिंह चंद्रगुप्त की कूटनीति को समझने में भूल कर बैठे थे।
b) प्रसंग के अनुसार शत्रु राजा की मनःस्थिति का वर्णन करें।
2. सम्राट चंद्रगुप्त के इन शब्दों के पीछे क्या गहरा रहस्य छिपा था? [2]
Answer:
सम्राट चंद्रगुप्त के उन शब्दों के पीछे यह गहरा रहस्य छिपा था कि वे अपनी राजनीतिक चाल और अद्भुत कूटनीति से शत्रु को बिना युद्ध के ही परास्त करने और उसकी सेना को चित करने की योजना बना रहे थे, जिसे रुद्रसिंह प्रशंसा समझ बैठे थे।
Teacher's Note:
a) चंद्रगुप्त की कूटनीति और बुद्धिमत्ता यहाँ उजागर होती है।
b) रहस्य का संबंध गुप्त रणनीति से था।
3. इस युद्ध में रुद्रसिंह की हार का प्रमुख कारण आप किसे समझते हैं और क्यों ? [3]
Answer:
इस युद्ध में रुद्रसिंह की हार का प्रमुख कारण उनकी अदूरदर्शिता और सम्राट चंद्रगुप्त की अजेय कूटनीति को मानते हैं। रुद्रसिंह चंद्रगुप्त की उदारता को उसकी कमजोरी समझ बैठे और उनकी वास्तविक रणनीति को भांप नहीं पाए, जिसके कारण वे आसानी से मात खा गए।
Teacher's Note:
a) शत्रु पक्ष की ओवर-कॉन्फिडेंस (अति-आत्मविश्वास) और चंद्रगुप्त की बुद्धिमत्ता हार का कारण बनी।
b) तर्कों के साथ उत्तर की पुष्टि करें।
4. यहाँ बुद्धिमान शत्रु कहकर कौन, किसे संबोधित कर रहा है और क्यों ? [3]
Answer:
यहाँ 'बुद्धिमान शत्रु' कहकर रुद्रसिंह मगध के सम्राट चंद्रगुप्त को संबोधित कर रहा है। वह ऐसा इसलिए कह रहा है क्योंकि वह चंद्रगुप्त की उदारता, बड़प्पन और राजनीतिक कौशल से इतना प्रभावित हो गया था कि वह उन्हें अपना शत्रु होते हुए भी सबसे श्रेष्ठ और बुद्धिमान मान बैठा था।
Teacher's Note:
a) शत्रु द्वारा की गई प्रशंसा का यह अनूठा प्रसंग है।
b) चंद्रगुप्त के व्यक्तित्व का प्रभाव रेखांकित करें।
एकांकी सुमन
Q.11 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
“क्या कहता है, रोशन ?”
“वह तो बात भी नहीं सुनता, जाने बच्चे की तबीयत बहुत खराब है।”
“एक दिन में ही इतनी क्या खराब हो गयी ! मैं जानता हूँ यह सब बहानेबाज़ी है।”
‘लक्ष्मी का स्वागत’
लेखक- उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’
1. यह वार्ता किन-किन व्यक्तियों के बीच को रही है ? वार्ता का संदर्भ स्पष्ट कीजिए । [2]
Answer:
यह वार्ता मुख्य पात्र और नौकर रोशन के बीच हो रही है। इसका संदर्भ यह है कि घर के छोटे बेटे की अचानक तबियत खराब हो गई है और पिता (अजाब लाल) इसे डॉक्टर को दिखाने या पैसे खर्च करने से बचने के लिए इसे मात्र बहानेबाजी करार दे रहा है।
Teacher's Note:
a) एकांकी 'लक्ष्मी का स्वागत' समाज की रूढ़िवादिता और कंजूसी पर आधारित है।
b) संवाद का संदर्भ स्पष्ट करें।
2. यहाँ किस बात को बहानेबाज़ी कहा गया है और क्यों ? [2]
Answer:
यहाँ बच्चे की गंभीर बीमारी और डॉक्टर की फीस तथा दवाइयों के खर्चे से बचने के लिए उसे अस्पताल ले जाने या दवाई लाने की बात को 'बहानेबाजी' कहा गया है। पिता अपनी कंजूसी और संवेदनहीनता के कारण बीमारी को झूठा साबित करना चाहता है।
Teacher's Note:
a) पिता की संवेदनहीनता इस बात में स्पष्ट झलकती है।
b) धन के लोभ में बच्चे के स्वास्थ्य की उपेक्षा की गई है।
3. बहानेबाजी का आरोप लगाने के पश्चात उस व्यक्ति ने क्या किया ? उसके चारित्रिक दोषों का वर्णन करते हुए बताइए कि ऐसे व्यक्ति समाज के लिए कलंक क्यों हैं ? ऐसे व्यक्ति समाज के लिए कलंक क्यों हैं ? [3]
Answer:
बहानेबाजी का आरोप लगाने के पश्चात उस व्यक्ति ने बच्चे के इलाज के लिए पैसे देने से साफ मना कर दिया और डॉक्टर को बुलाने से इंकार कर दिया। उसके चारित्रिक दोषों में अत्यधिक कंजूसी, हृदयहीनता, संवेदनहीनता और धनलोलुपता शामिल हैं। ऐसे व्यक्ति समाज के लिए कलंक इसलिए हैं क्योंकि वे अपनी स्वार्थी प्रवृत्ति और धन के लालच में अपनों की जान की भी परवाह नहीं करते और मानवता को शर्मसार करते हैं।
Teacher's Note:
a) पात्र के चारित्रिक पतन और सामाजिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालें।
b) संवेदनहीनता समाज के लिए अभिशाप है।
4. प्रस्तुत एकांकी के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए । [3]
Answer:
प्रस्तुत एकांकी का शीर्षक 'लक्ष्मी का स्वागत' अत्यंत सार्थक एवं व्यंग्यात्मक है। समाज में जब घर में बेटी (जिसे लक्ष्मी का रूप माना जाता है) का जन्म होता है, तो लोग उसे बोझ समझते हैं और उसका स्वागत करने के बजाय दुखी होते हैं। एकांकी में इसी कुप्रथा और रूढ़िवादी सोच पर करारा प्रहार किया गया है कि जिस घर में बेटी का जन्म अभिशाप माना जाता है, वहाँ वास्तविक लक्ष्मी का कभी स्वागत नहीं हो सकता।
Teacher's Note:
a) शीर्षक का प्रतीकात्मक अर्थ बेटी के जन्म और समाज की दोहरी मानसिकता से है।
b) सार्थकता सिद्ध करते समय रूढ़िवादी सोच का विरोध दर्शाएं।
Q.12 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
“हाँ, वह बात तो पूरी ही नहीं की तुमसे, भीमा ! शिवाधाट से फिरंगियों को टलाया कैसे ?”
राजा कुँवरसिंह की बुद्धि की क्या तारीफ करूँ सरदार, कटार की धार-सी पैनी है। हरकिशन को साधु बनाकर भेजा, जानते हो किसलिए ?”
‘विजय की बेला’
लेखक - जगदीशचंद्र माथुर
1. प्रस्तुत पंक्तियों का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। [2]
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ नाटक 'विजय की बेला' से ली गई हैं। इनका संदर्भ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वीर कुँवरसिंह द्वारा अंग्रेजों को अपनी कुशल रणनीति और बुद्धिमत्ता से मात देने की घटना से है।
Teacher's Note:
a) 1857 के संग्राम और कुँवरसिंह की वीरता का प्रसंग है।
b) संदर्भ स्पष्ट और सटीक होना चाहिए।
2. हरकशन को कहाँ, किस उद्देश्य से भेजा गया था ? [2]
Answer:
हरकिशन को साधु का वेश बनाकर शिवाघाट भेजा गया था। उसे भेजने का मुख्य उद्देश्य अपनी कूटनीति चाल से फिरंगियों (अंग्रेजों) को भ्रमित करना और उन्हें वहाँ से खदेड़ना था।
Teacher's Note:
a) गुप्तचरी और कूटनीति का यह एक सफल प्रयास था।
b) हरकिशन की भूमिका का उल्लेख करें।
3. राजा कुँवर सिंह कौन थे ? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए । [3]
Answer:
राजा कुँवरसिंह 1857 के महान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक अमर सेनानी और बिहार के जगदीशपुर के प्रतापी जमींदार थे। उन्होंने ढलती उम्र में भी अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। वे अदम्य साहस, अद्भुत शौर्य, राष्ट्रप्रेम और रणकौशल के प्रतीक थे।
Teacher's Note:
a) कुँवरसिंह के ऐतिहासिक योगदान का संक्षेप में वर्णन करें।
b) उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता मुख्य बिंदु हैं।
4. ‘राष्ट्र विरोधी ताकतों का डटकर विरोध करना ही सच्ची देशक्ति है।’- एकांकी के आधार पर इस पंक्ति की समीक्षा कीजिए। [3]
Answer:
एकांकी 'विजय की बेला' के आधार पर यह पंक्ति शत-प्रतिशत सत्य है। राजा कुँवरसिंह और उनके सहयोगियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए ब्रिटिश साम्राज्य जैसी राष्ट्र विरोधी और दमनकारी ताकतों के खिलाफ डटकर संघर्ष किया। सच्ची देशभक्ति सिर्फ बातों में नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता और गरिमा के रक्षार्थ विदेशी ताकतों का पुरजोर विरोध करने में निहित है।
Teacher's Note:
a) राष्ट्रभक्ति के स्वरूप को एकांकी के पात्रों के माध्यम से समझाएं।
b) संघर्ष और दृढ़ता ही सच्ची देशभक्ति है।
Q.13 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
“दूसरे लोग पाँच-छ: महीने पहले से सारा सामान जुटा लेते हैं और यहाँ रह गए हैं गिनती के बीस दिन! तुमने तो अपनी घोलकर पी ली है। जाओ, अभी जाओ और शहर जाकर उससे रुपये लेकर आओ, नहीं तो मैं सिर पटक-पटक कर जान दे दूँगी।”
‘मेल-मिलाप’
लेखक- देवराज ‘दिनेश’
1. वक्ता कौन है ? वह किस कार्य के लिए बीस दिन बचे होने की बात कह रही है? [2]
Answer:
वक्ता घर की मालकिन/गृहिणी है। वह अपनी बेटी के विवाह या किसी बड़े मांगलिक उत्सव के आयोजन के लिए केवल बीस दिन शेष रहने और उसके लिए आवश्यक सामान व पैसों की व्यवस्था न होने पर व्यग्र होकर यह बात कह रही है।
Teacher's Note:
a) एकांकी 'मेल-मिलाप' पारिवारिक आयोजनों की तसवीर पेश करती है।
b) वक्ता की चिंता का कारण विवाह की नजदीक तिथि है।
2. श्रोता का चरित्र-चित्रण कीजिए । [2]
Answer:
श्रोता एक सीधा-साधा, शांत और व्यावहारिक व्यक्ति है जो पुरानी कड़वाहटों या दुश्मनी को भूलकर आपसी रिश्तों को जोड़ना चाहता है। वह घर की तंगी के बावजूद क्रोधित होने के बजाय स्थिति को शांति से संभालने का प्रयास करता है।
Teacher's Note:
a) श्रोता का शांत और समझदार स्वभाव वक्ता के गुस्से के विपरीत है।
b) चरित्र की सकारात्मकता को रेखांकित करें।
3. वक्ता को किस पर, क्या संदेश है? इस समय उसकी मनःस्थिति कैसी है ? [3]
Answer:
वक्ता को अपने पति/श्रोता पर इस बात का संदेह है कि वह पुरानी शत्रुता या अहंकार के कारण अपने पुराने संबंधी (जिससे पैसे या मदद लेनी है) के पास जाने में आनाकानी कर रहा है। इस समय उसकी मनःस्थिति अत्यधिक आशंकित, गुस्से से भरी हुई और विचलित है क्योंकि उसे सामाजिक प्रतिष्ठा और समय कम होने की चिंता सता रही है।
Teacher's Note:
a) वक्ता का क्रोध और पारिवारिक प्रतिष्ठा की चिंता उसकी मनःस्थिति को दर्शाती है।
b) संदेह और तनाव मुख्य भाव हैं।
4. 'स्वस्थ समाज के लिए आपसी मेल-मिलाप के साथ-साथ पुरानी शत्रुता को भुलाना भी आवश्यक होता है।' - इस कथन की व्याख्या एकांकी के संदर्भ में कीजिए। [3]
Answer:
यह कथन एकांकी के मूल संदेश को चरितार्थ करता है। जीवन में प्रगति और स्वस्थ समाज की स्थापना के लिए यह जरूरी है कि लोग पुरानी रंजिशों, द्वेष और अहंकार को त्यागकर आपस में मिलजुलकर रहें। 'मेल-मिलाप' एकांकी यही सिखाती है कि कटुता भुलाने से ही रिश्तों में मिठास और समाज में शांति आ सकती है।
Teacher's Note:
a) एकांकी का शीर्षक और उद्देश्य इसी संदेश पर आधारित है।
b) क्षमाशीलता और मेल-मिलाप के महत्व को स्पष्ट करें।
Q.14 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
बाधा के रोड़ों से लड़ता, वन के पेड़ों से टकराता,
बढ़ता चट्टानों पर चढ़ता, चलता यौवन से मदमाता।
लहरें उठती हैं, गिरती हैं; नाविक तट पर पछताता है।
तब यौवन बढ़ता है आगे, निर्झर बढ़ता ही जाता है।
‘जीवन का झरना’
कवि- आरसी प्रसाद सिंह
1. निर्झर के मार्ग में कौन-कौन-सी बाधाएँ आती हैं ? वह उनका किस प्रकार सामना करता है? [2]
Answer:
निर्झर (झरने) के मार्ग में रोड़े, वन के पेड़ और बड़ी-बड़ी चट्टानें जैसी अनेक बाधाएँ आती हैं। वह उनसे लड़ता हुआ, टकराता हुआ और उनपर चढ़ता हुआ पूरी युवा जोश और मस्ती के साथ बिना रुके आगे बढ़ता रहता है।
Teacher's Note:
a) निर्झर संघर्षशीलता और गतिशीलता का प्रतीक है।
b) बाधाओं से न डरने का संदेश दिया गया है।
2. नाविक कब पछताता है और क्यों? [2]
Answer:
नाविक तब पछताता है जब नदी में बड़ी-बड़ी लहरें उठती हैं और वह भयभीत होकर अपनी नाव को आगे बढ़ाने का साहस नहीं कर पाता, जिससे वह तट पर ही बैठा रह जाता है और अवसर चूक जाता है।
Teacher's Note:
a) नाविक का डर और निष्क्रियता उसके पछतावे का कारण बनती है।
b) कर्महीनता पर व्यंग्य किया गया है।
3. झरने को किस बात की लगन है? कवि ने निर्झर और नाविक में क्या अंतर बताया है? [3]
Answer:
झरने को निरंतर आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य (सागर) तक पहुँचने की तीव्र लगन है। कवि ने निर्झर और नाविक में यह अंतर बताया है कि निर्झर तमाम बाधाओं से लड़कर निरंतर गतिशील रहता है, जबकि नाविक लहरों को देखकर डर जाता है और तट पर बैठकर पछताता रहता है।
Teacher's Note:
a) कर्मवीर निर्झर की तरह निरंतर आगे बढ़ते हैं।
b) गतिशीलता और स्थिरता का अंतर स्पष्ट किया गया है।
4. ‘मानव जीवन की सार्थकता ठहरने के समान गतिशील बने रहने में और बाधाओं का डटकर मुकाबला करने में ही होती है।’ प्रस्तुत पंक्ति के आधार पर एक अनुच्छेद में अपने विचार दीजिए । [3]
Answer:
रुका हुआ पानी और ठहरा हुआ मनुष्य दोनों बेकार हो जाते हैं। मानव जीवन की असली सुंदरता उसकी निरंतर गतिशीलता में है। जीवन पथ पर पग-पग पर कठिनाइयां, बाधाएं और असफलताएं आएंगी, लेकिन एक सच्चे इंसान का धर्म है कि वह उनसे घबराए नहीं, बल्कि उनका डटकर मुकाबला करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता चले। निरंतर परिश्रम और संघर्ष ही जीवन का दूसरा नाम है और इसी में मानव जीवन की सार्थकता है।
Teacher's Note:
a) कर्मशीलता का संदेश इस कविता और अनुच्छेद का मूल आधार है।
b) प्रेरणादायक भाषा का प्रयोग करें।
Q.15 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
तजौ मन, हरि विमुखनि कौ संग।
जिनकै संग कुमति उपजति है, परत भजन में भंग।
कहा होत पय पान कराएं, बिस नह तजत भुजंग।
कागहि कहा कपूर चुगाएं, स्वान न्हाएं गंग।
खर कौ कहा अरगजा-लेपन, मरकट भूषन अंग।
गज कहूँ कहा सरित अन्हवाएं, बहुरि धरै वह ढंग।
पाहन पतित बान नहिं बेधत, रीतौ करत निषंग।
सूरदास कारी कमरि पै, चढ़त न दूजो रंग।
कवि- सूरदास
1. किस प्रकार के व्यक्तियों का साथ छोड़ देना चाहिए और क्यों? [2]
Answer:
हमें उन व्यक्तियों का साथ तुरंत छोड़ देना चाहिए जो भगवान (हरि) से विमुख हैं, क्योंकि उनके साथ से बुद्धि भ्रष्ट होती है (कुमति उपजती है) और ईश्वर भक्ति में बाधा (भंग) पड़ती है।
Teacher's Note:
a) सतसंगति के महत्व और कुसंगति के त्याग का उपदेश दिया गया है।
b) हरि-विमुख लोगों का संग हानिकारक होता है।
2. ‘पाहन-पतित बान नहिं बेधत, रीतौ करत निषंग’ -पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए और बताइए कि ऐसा कवि ने क्यों कहा है? [2]
Answer:
इस पंक्ति का भाव यह है कि जैसे पत्थर पर तीर चलाने से वह नहीं विधता (छेद नहीं होता) बल्कि शिकारी के तरकश के सारे तीर व्यर्थ ही खाली हो जाते हैं, वैसे ही मूर्ख और दुष्ट प्रकृति के लोगों को उपदेश देना या सुधारना व्यर्थ है, उनका स्वभाव नहीं बदलता।
Teacher's Note:
a) दुष्टों पर उपदेश का असर नहीं होता, यह दृष्टांत द्वारा समझाया गया है।
b) 'निषंग' का अर्थ तरकश और 'पाहन' का अर्थ पत्थर है।
3. कवि ने किन-किन उदाहरणों द्वारा, किस प्रकार यह स्पष्ट किया है कि प्रभु से विमुख लोगों का स्वभाव नहीं बदला जा सकता? [3]
Answer:
कवि सूरदास ने सांप को दूध पिलाने, कौए को कपूर चुगाने, कुत्ते को गंगा में नहलाने, गधे को अरगजा लगाने, बंदर को गहने पहनाने और हाथी को नहलाकर दोबारा धूल लोटने जैसे उदाहरणों द्वारा यह स्पष्ट किया है कि लाख कोशिश करने पर भी मूर्ख और दुष्ट लोगों का मूल स्वभाव कभी नहीं बदलता।
Teacher's Note:
a) सूरदास के पदों में प्रयुक्त दृष्टांत अलंकारों की प्रधानता है।
b) सभी उदाहरणों का संक्षिप्त उल्लेख करना आवश्यक है।
4. निम्न शब्दों के अर्थ लिखिए :
अरगजा, रीतौ, निषंग, कमरि, खर, श्वान।
शब्द अर्थ
• अरगजा
• रीतौ
• निषंग
• कामरि
• खर
• श्वान
Answer:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अरगजा | एक प्रकार का सुगंधित उबटन / लेप |
| रीतौ | खाली / रिक्त |
| निषंग | तीर रखने का बर्तन / तरकश |
| कामरि (कमरि) | कमर में ओढ़ने की काली कंबल |
| खर | गधा / मूर्ख |
| श्वान | कुत्ता |
Teacher's Note:
a) सूरदास के पदों में आए प्राचीन एवं ब्रजभाषा के शब्दों का सटीक अर्थ याद रखना आवश्यक है।
b) वर्तनी की शुद्धता का ध्यान रखें।
Q.16 Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow :
चिलचिलाती धूप को जो चांदनी देवें बना ।
काम पड़ने पर करे जो शेर का भी सामना ।।
जो कि हँस-हँस के चबा लेते हैं लोहे का चना ।
‘है कठिन कुछ भी नहीं’ जिनके है जी में यह ठना ।।
कोस कितने ही चलें, पर वे कभी थकते नहीं।
कौनसी है गाँठ जिसको खोल सकते नहीं।।
‘कर्मवीर’
कवि - अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
1. चिलचिलाती धूप को चाँदनी बना देने का क्या तात्पर्य है? किस प्रकार के व्यक्ति यह कर सकते में समर्थ होते हैं? [2]
Answer:
चिलचिलाती धूप को चाँदनी बना देने का तात्पर्य कठिन से कठिन परिस्थितियों, कष्टों और दुखों को अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से सुखद और अनुकूल बना लेना है। दृढ़ संकल्प और कर्मठ वीर पुरुष ही ऐसा करने में समर्थ होते हैं।
Teacher's Note:
a) कर्मवीरों की यह विशेषता होती है कि वे विपरीत परिस्थितियों से नहीं घबराते।
b) काव्यात्मक अर्थ को स्पष्ट करें।
2. ‘लोहे के चने चबाना’ और ‘गाँठ खोलना’ मुहावरों के अर्थ कविता के संदर्भ में बताइए। [2]
Answer:
कविता के संदर्भ में 'लोहे के चने चबाना' का अर्थ अत्यंत कठिन और असंभव लगने वाले कार्यों को सहजता से पूरा करना है, तथा 'गाँठ खोलना' का अर्थ किसी भी जटिल समस्या का समाधान ढूंढ निकालना या गुप्त रहस्यों को उजागर करना है।
Teacher's Note:
a) मुहावरों का सटीक साहित्यिक अर्थ कविता के भाव के अनुसार लिखना चाहिए।
b) कर्मवीरों की क्षमता को इससे बल मिलता है।
3. कविता के आधार पर बताइए कि कर्मवीरों की क्या विशेषताएँ होती हैं? [3]
Answer:
कविता के आधार पर कर्मवीरों की विशेषताएँ यह हैं कि वे कठिन परिस्थितियों को भी अनुकूल बना लेते हैं, शेरों जैसे खतरनाक शत्रुओं का सामना करने से नहीं डरते, असंभव कार्यों (लोहे के चने चबाना) को हंसते-हंसते कर दिखाते हैं, लंबी यात्रा और संघर्ष के बाद भी कभी थकते नहीं और हर जटिल समस्या का समाधान ढूंढ लेते हैं।
Teacher's Note:
a) 'कर्मवीर' कविता के प्रमुख गुणों का सारांश प्रस्तुत करें।
b) कर्मठता और उत्साह मुख्य विशेषताएँ हैं।
4. प्रस्तुत कविता किस सिद्धांत पर आधारित है? आपको इस कविता से क्या प्रेरणा मिली, समझाकर लिखिए। [3]
Answer:
प्रस्तुत कविता कर्म के सिद्धांत (कर्म प्रधान विश्व करि राखा) पर आधारित है। इस कविता से हमें यह प्रेरणा मिली है कि हमें जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों से कभी डरना नहीं चाहिए, बल्कि पूरी मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए हर असंभव कार्य को संभव कर दिखाना चाहिए।
Teacher's Note:
a) कविता का केंद्रीय संदेश कर्मशीलता और पुरुषार्थ है।
b) विद्यार्थी अपने जीवन में इस प्रेरणा को कैसे उतार सकते हैं, इसे स्पष्ट करें।
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