ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2008 with Solutions

Class 10 Hindi Solved Question Papers: ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2008 with Solutions

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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2008 with Solutions

 

SECTION - A (40 Marks)

 

Question 1

Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any ONE of the following topics : [15]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए -
(i) मनुष्य अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखता है। अपने बचपन के दिनों की किसी ऐसी सुखद घटना का वर्णन कीजिए, जिसने आपको जीवन की नयी सीख दी हो, यह सीख आपके जीवन में कैसे उपयोगी हो सकती है, इसका विवरण दीजिए।
(ii) काम को कल पर डालने से मन का भारीपन बढ़ता है, जबकि कल करने वाले काम को आज ही पूरा कर लेने से हमारी कार्यक्षमता बढ़ती है और मानसिक संतोष भी प्राप्त होता है।' बताइए कि एक विद्यार्थी के लिए समय का क्या महत्व है ?
(iii) प्रेम से सामाजिक तथा राष्ट्रीय सम्बन्ध बढ़ते हैं - प्रस्तुत पंक्ति के आधार पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(iv) एक मौलिक कहानी लिखिए जिसका आधार निम्नलिखित उक्ति हो -
" आगे कुआँ पीछे खाई "
(v) नीचे दिये गये चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर वर्णन कीजिए अथवा कहानी लिखिए, जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए।

[Figure: A group of children with school bags and adults walking together on a path amidst trees and hills, showing an excursion or a school trip.]

Answer:

(i) सुखद घटना जिसने मेरे जीवन को नवीन अनुभव दिया

मानव जीवन घटनाओं का प्रतिफल है। जन्म से अन्तिम श्वास तक निरन्तर उसे घटनाओं से दो - चार होना पड़ता है। प्रत्येक घटना से उसे कोई न कोई शिक्षा या अनुभव प्राप्त होता है। प्रत्येक घटना के व्यक्तित्व एवं जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। सूर्योदय से पूर्व उषाकाल से लेकर रात के अन्तिम प्रहर तक वह कदम-कदम पर कुछ न कुछ सीखता है। यही कारण है कि समाज के समक्ष उपस्थित व्यक्ति ऐसी ही अनेक घटनाओं और अनुभवों का प्रतिफळ होता है। ये घटनाएँ - सुखद एवं दुःखद दोनों ही रूप में घटित होती हैं। सुखद घटना जहाँ हमारे जीवन में उत्साह एवं उल्लास का संचार करती है वहीं दुःखद घटना उसे निरत्साहित एवं आत्म - विश्वास से हीन बनाती है। यहाँ मैं जीवन की उस सुखद घटना का वर्णन कर रहा हूँ, जिसने मेरे जीवन में एक नवीन उल्लास एवं उत्साह का संचार किया तथा आत्म - विश्वास में दृढ़ता की वृद्धि की।

घटना उन दिनों की है जब मैं छठवीं कक्षा का छात्र था। उन दिनों मेरे मन और मस्तिष्क पर गणित विषय का कुछ ऐसा आतंक था कि उस विषय का नाम ही मुझे पसीने-पसीने कर देता था। कक्षा में गणित के चक्र (घण्टे) में मैं सबसे पीछे ही स्थान ग्रहण करता था। इसका एक कारण था - विषय के अध्यापक का शुष्क एवं कठोर स्वभाव। वह अक्सर कक्षा में प्रवेश के साथ ही हाथ तथा श्याम-पट (ब्लैक बोर्ड) का आधार लेकर शिक्षण-कार्य आरम्भ कर देते थे। अगर कोई छात्र किसी भी कारण कक्षा में विलम्ब से प्रवेश करता अथवा विषय के अध्ययन में असावधान दृष्टिगत् होता तो वह बहुत क्रोधित होते थे। सामान्यतः वह छात्र की विषयगत दुर्बलता का कारण ज्ञात करने के स्थान पर उसका उपहास करते थे। इतना ही नहीं विषय के मध्य प्रश्न या शंका समाधान की प्रार्थना को वे ठुकरा दिया करते थे। इस प्रकार मेरे सामान्य छात्र के मन में उनके प्रति दूरी बढ़ती ही गई। किन्तु एक दिन .........|

वार्षिक परीक्षा आरम्भ होने में एक माह का समय शेष था। मेधावी एवं परिश्रमी छात्र आत्म - विश्वास से पूर्ण सतत परिश्रम में व्यस्त थे। मुझ जैसे छात्र निराशा के गहन उद्दधि में निमग्न हो रहे थे। एक दिन दैवी - प्रेरणा से मैं कक्षा के बाद उनसे, अध्यापक-कक्ष में मिला। मैंने विषय-सम्बन्धी परेशानी निवेदन की। उन्होंने मुझे उसी दिन से अपने घर आने का सुझाव दिया। मैं प्रतिदिन नियम से उनके घर गया। कुछ दिन उन्होंने मुझसे सूत्र रटने को कहा। इसके पश्चात् उससे सम्बन्धित प्रश्न हल करने में मेरा मार्ग-दर्शन किया। एक महीने की लगन और कठोर परिश्रम ने मेरे आत्म-विश्वास को फिर से जाग्रत किया। उस दिन के बाद से जैसे मेरा जीवन ही बदल गया। मेरे मन में गणित विषय के प्रति आतंक का भाव तथा विचार कि मैं इस विषय में कभी सफल नहीं हो सकता, सदैव के लिए खत्म हो गया।

आज मैं कक्षा दशम का छात्र हूँ। आज गणित के कारण ही मैं जीवन में कुछ कर दिखाने में सफल होने के आत्म - विश्वास से पूर्ण हूँ। इतना ही नहीं अब तो विज्ञान एवं कम्प्यूटर वर्ग में भी मुझे किसी प्रकार का भय अनुभव नहीं होता है। यह सब आदरणीय उन गणित अध्यापक जी की अनुकम्पा and आशीर्वाद का परिणाम है। उस दिन से साहस कर अपने गणित के उन शिक्षक से न मिला होता तो शायद मैं इस स्थिति में न होता। अन्त में मैं गर्व से कह सकता हूँ कि उस एक घटना ने मेरे जीवन में असीमित सुख, शान्ति एवं आत्म-विश्वास भर दिया। इसके लिए आज भी मेरा मन श्रद्धेय उन गणित अध्यापक जी के चरणों में नत है।

Teacher's Note:
a) Ensure the composition follows a logical chronological flow with an introduction, body, and conclusion as per ICSE standards.
b) Maintain originality and check for proper spelling, grammatical correctness, and appropriate vocabulary.

 

Question 2

Write a letter in Hindi in approximately 120 words on any ONE of topics given below : [7]
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए -
(i) आपके बड़े ने आपको किसी शर्त पर एक खास भेंट देने की बात कही थी। आप वह शर्त जीत गये हैं, उन्हें नम्रतापूर्वक शर्त की याद दिलाते हुए पत्र लिखिए।
(ii) अपने नगर के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए जिसमें आपके क्षेत्र में फैली गन्दगी तथा उसके दुष्परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित कीजिए।

Answer:

(ii) स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र

सेवा में
नगर स्वास्थ्य अधिकारी,
आगरा।

विषय - क्षेत्र में गन्दगी तथा उसके दुष्परिणामों की ओर ध्यान आकर्षण हेतु।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि विगत दो माह से हमारे क्षेत्र में काफी गन्दगी फैली हुई है। नगर निगम के कर्मचारी यहाँ पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सफाई कर्मचारी यहाँ कभी-कभी आते हैं। आने पर गन्दगी एक स्थान से दूसरे स्थान पर डाल देते हैं। स्थान - स्थान पर गन्दगी एवं कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इस कारण यहाँ मक्खी - मच्छर पनप रहे हैं। अनेकों प्रकार के कीटाणुओं के उत्पन्न होने से बीमारी फैलने की सम्भावना है। सारा वातावरण इसी समस्या से ग्रस्त है।

अतः आपसे निवेदन है कि अपने विभाग के अधिकारियों को यहाँ निरीक्षण करने हेतु आदेश दें जिससे वे नगरपालिका के कर्मचारियों को सजग कर सकें व आपके विभाग के कर्मचारी यहाँ दवाओं के छिड़काव कर सकें जिससे कीटाणु, मक्खी-मच्छर की समस्या से मुक्त हुआ जा सके। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप हमारे निवेदन पर अवश्य ध्यान देंगे व उचित कार्यवाही करेंगे। हम इस कार्य के लिए आपके आभारी होंगे।

सधन्यवाद

दिनांक : 03-05-08

प्रार्थी
क्षेत्र के सभी निवासी
कमला नगर, आगरा

Teacher's Note:
a) Formal letter formats require precise formal headings, addresses, subject lines, and respectful salutations.
b) Avoid informal phrasing and ensure the body clearly states the problem and expected action.

 

Question 3

Read the passage given below and answer in Hindi the questions that follow, using your own words as far as possible : [10]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए। उत्तर यथासभव अपने शब्दों में होने चाहिए -

काशीनरेश ने कोसल पर आक्रमण कर दिया था। कोसल के राजा की चारों और फैली कीर्ति उन्हें असह्य हो गयी थी। युद्ध में उनकी विजय हुई। पराजित नरेश वन में भाग गये थे; किन्तु प्रजा उनके वियोग में व्याकुल थी और विजयी को अप्रना सहयोग नहीं दे रही थी। विजय के गर्व से मत काशीनरेश प्रजा के असहयोग से क्रुद्ध हुए। शत्रु को सर्वथा समाप्त करने के लिए उन्होंने घोषणा करा दी - " जो कोसलराज को ढूँढ लायेगा, उसे सौ स्वर्ण-मुद्राएँ पुरस्कार में मिलेंगी।"
इस घोषणा का कोई प्रभाव नहीं हुआ। धन के लोभ में धार्मिक राजा को शत्रु के हाथ में देने वाला अधम वहाँ कोई नहीं था।
कोसलराज वन में भटकते घूमने लगे। जटाएँ बढ़ गयीं। शरीर क्रुश हो गया। वे एक वनवासी के समान दिखने लगे। एक दिन उन्हें देखकर एक पथिक ने पूछा - " यह वन कितना बड़ा है ? वन से निकलने तथा कोसल पहुँचने का मार्ग कौन-सा है ?"
नरेश चौंके ! उन्होंने पूछा - " आप कोसल क्यों जा रहे हैं ? "
पथिक ने कहा - " विपत्ति में पड़ा व्यापारी हूँ। माल से लदी नौका नदी में डूब चुकी है। अब द्वार-द्वार कहाँ भीख माँगता भटकता डोलूँ। सुना है कि कोसल के राजा बहुत उदार हैं, अतः उनके पास जा रहा हूँ।"
"तुम दूर से आये हो, वन का मार्ग बीहड़ है। चलो, तुम्हें वहाँ तक पहुँचा आऊँ।" कुछ देर सोचकर राजा ने पथिक से कहा।
पथिक के साथ वे काशीनरेश की सभा में आये। अब उन जटाधारी को कोई पहचानता न था। काशीनरेश ने पूछा - " आप दोनों कैसे पधारे ?" तब उस महात्मा ने कहा - " मैं कोसल का राजा हूँ मुझे पकड़े के लिए तुमने पुरस्कार घोषित किया है। अब पुरस्कार की वे सौ स्वर्ण-मुद्राएँ इस पथिक को दे दी।'
सभा में सन्नाटा छा the गया। सब बातें सुनकर काशीनरेश अपने सिंहासन से उठे और बोले - 'महाराज ! आप जैसे धर्मत्मा, परोपकार-निष्ठ को पराजित करने की अपेक्षा उसका चरणाश्रित होने का गौरव कहीं अधिक है। यह सिंहासन अब आपका है। मुझे अपना अनुचर स्वीकार करने की कृपा कीजिए।'
व्यापारी को मुँहमाँगा धन प्राप्त हुआ। कोसल और काशी उस दिन से मित्र राज्य बन गये।
मानव जीवन की सार्थकता परहित के लिए बलिदान करने की भावना में निहित है। मनुष्य के चरित्र की परीक्षा उसके परोपकारी कामों के आधार पर होती है, न कि व्यक्तिगत वैभवअर्चन पर। जो मनुष्य सबके दुःख दूर करने में जितना प्रयत्नशील होता है, वह उतना ही सभ्य, सुसंस्कृत एवं उच्च विचारों वाला माना जाता है; क्योंकि परोपकार का विशद भाव ही मानव की अन्तरआत्मा की महानता की कसौटी है।

(i) कोसल पर आक्रमण किसने और क्यों किया ? [2]

Answer:
तत्कालीन काशीनरेश ने कोसल पर आक्रमण कर दिया क्योंकि कोसलनरेश की सभी दिशाओं में व्याप्त कीर्ति उनके लिए असहनीय हो गई थी। इससे काशीनरेश के अहं को चोट पहुँच रही थी।

Teacher's Note:
a) Answers should be precise, directly drawn from the passage.
b) Check for accurate spelling and punctuation while framing the response.

 

(ii) काशीनरेश ने क्या घोषणा, क्यों कराई थी ? [2]

Answer:
विजयी काशीनरेश ने यह घोषणा करा दी कि जो व्यक्ति पराजित कोसलनरेश को खोजकर लायेगा, उसे सौ स्वर्ण-मुद्राएँ पुरस्कार के रूप में प्राप्त होंगी। उन्होंने ऐसा किया क्योंकि प्रजा उनसे असहयोग कर रही थी तथा वे अपने शत्रु को सदैव के लिए समाप्त करना चाहते थे।

Teacher's Note:
a) Capture both parts of the question: what the announcement was and why it was made.
b) Keep sentences concise and clear.

 

(iii) पथिक ने कोसलराज से क्या कहा था ? उसके कथन को सुनकर कोसलराज ने क्या निर्णय लिया ? [2]

Answer:
पथिक ने कोसलनरेश से कहा कि वह विपत्ति में पड़ा व्यापारी है। माल से लदी उसकी नौका नदी में डूब चुकी है। अब वह द्वार-द्वार भीख माँगते हुए नहीं भटकना चाहता। उसने सुना है कि कोसल के महाराज बहुत उदार हैं। अतः सहायता प्राप्त करने के लिए वह उनके पास जा रहा है। व्यापारी के कथन को सुनकर कोसलनरेश ने स्वयं को काशीनरेश के सामने दरबार में प्रस्तुत कर व्यापारी को नरेश से पुरस्कार दिलाने का निश्चय किया।

Teacher's Note:
a) Ensure the statement of the traveller and the king's subsequent action are clearly separated.
b) Check for consistency with the narrative in the text.

 

(iv) कोसलराज को सभा में कोई क्यों न पहचान पाया ? सभा में सन्नाटा क्यों छा गया था ? [2]

Answer:
सभा में कोसलनरेश को कोई नहीं पहचान सका क्योंकि वन में भटकने से वे दुर्बल हो गये तथा उनकी जटाएँ बढ़ गईं। वे एक वनवासी के समान दिखाई देने लगे। कोसलराज की उदारता तथा परोपकार के लिए जीवन को संकट में डालने की भावना को समझकर सभा में सन्नाटा छा गया।

Teacher's Note:
a) Address both reasons clearly: the physical transformation and the noble act.
b) Maintain narrative flow.

 

(v) प्रस्तुत गद्यांश से आपको क्या शिक्षा मिलती है ? [2]

Answer:
उपरोक्त गद्यांश से हमें शिक्षा मिलती है कि परोपकार के लिए हमें सर्वस्व बलिदान करना चाहिए क्योंकि मानव के चरित्र की परीक्षा उसके परोपकारी कार्यों के आधार पर होती है, व्यक्तिगत वैभव से नहीं। इसी में मानव-जीवन की सार्थकता निहित है। जो मानव दुःखों के दुःखों को दूर करने के लिए जितना प्रयत्नशील होता है वह उतना ही सभ्य एवं उच्च-विचारों वाला माना जाता है क्योंकि यही मानव की महानता की कसौटी है।

Teacher's Note:
a) Emphasize the moral of altruism and selflessness.
b) Keep the summary faithful to the final paragraph of the text.

 

Question 4

Answer the following questions according to the instructions given :
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए -

(i) निम्न शब्दों से विशेषण बनाइए -
अहिंसा, दर्शन। [1 Mark]

Answer:
अहिंसा - अहिंसक
दर्शन - दार्शनिक

Teacher's Note:
a) Identify the correct adjectival forms for the given nouns.
b) Check for accurate spelling of derived adjectives.

 

(ii) निम्न शब्दों में से किसी एक शब्द के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए -
उन्नति, पुत्री। [1 Mark]

Answer:
उन्नति - विकास, प्रगति (या उत्थान)
पुत्री - आत्मजा, तनया (या सुता, दुहिता)

Teacher's Note:
a) Provide standard synonyms as accepted in standard Hindi grammar.
b) Writing at least two valid synonyms is required.

 

(iii) निम्न शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए -
सहयोगी, शीतल, त्यागी, एकता। [1 Mark]

Answer:
सहयोगी - विरोधी
शीतल - उष्ण
त्यागी - भोगी
एकता - अनेकता

Teacher's Note:
a) Provide exact antonyms for the requested terms.
b) Ensure correct spellings and vocabulary standards.

 

(iv) निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए -
सिर नीचा होना, कान खड़े होना। [1 Mark]

Answer:
सिर नीचा होना - बीजिंग में होने वाले ओलिम्पिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम के भाग न ले पाने के समाचार को सुनकर सभी भारतवासियों का सिर नीचा हो गया।
कान खड़े होना - उत्तर प्रदेश में आतंकी समूहों के प्रवेश की सूचना प्राप्त होते ही सभी के कान खड़े हो गए।

Teacher's Note:
a) The sentence must clearly bring out the meaning of the idiom.
b) Only one is required, but providing correct context is essential.

 

(v) भाववाचक संज्ञा बनाइए -
पूर्ण, प्रतिनिधि। [1 Mark]

Answer:
पूर्ण - पूर्णता (या पूर्णत्व)
प्रतिनिधि - प्रतिनिधित्व

Teacher's Note:
a) Derive the correct abstract noun forms.
b) Watch out for proper suffix usage like -ta or -tva.

 

(vi) कोष्ठक में दिये गये निर्देशानुसार वाक्यों में परिवर्तन कीजिए -
(a) कर्तव्य का पालन नहीं करने में दुःख है। ('नहीं' हटाइए, किन्तु वाक्य का अर्थ न बदले) [1 Mark]

Answer:
कर्तव्य का पालन करने में ही सुख है।

Teacher's Note:
a) Transform the sentence to affirmative while retaining the core meaning.
b) Check that the sentiment remains identical.

 

(b) गर्मियों की छुट्टियों में मैंने अपने मित्रों के साथ मसूरी घूमने जाने का निर्णय किया। (रेखांकित के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कीजिए।) [1 Mark]

Answer:
ग्रीष्माकाश में मैंने अपने मित्रों के साथ मसूरी घूमने जाने का निर्णय किया।

Teacher's Note:
a) Replace 'गर्मियों की छुट्टियों' with the single-word equivalent 'ग्रीष्माकाश'.
b) Ensure the rest of the sentence remains unaltered.

 

(c) मुसाफिर धर्मशाला में विश्राम करते हैं। (भूतकाल में बदलिए) [1 Mark]

Answer:
मुसाफिरों ने धर्मशाला में विश्राम किया।

Teacher's Note:
a) Change the tense from present/general to simple past tense.
b) Ensure correct subject-verb agreement in the past tense.

 

SECTION - B (40 Marks)

* गद्य संकलन : Out of Syllabus

* चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य : Out of Syllabus

* एकांकी सुमन : Out of Syllabus

* काव्य-चन्द्रिका : Out of Syllabus

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