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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
SECTION-A (40 Marks)
(Attempt all questions from this Section)
Question 1: Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics: [15 Marks]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर हिंदी में लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त लेख लिखिए -
(i) आज सारा संसार फ़ैशन का दीवाना है। हमारा अधिकांश व्यवहार फ़ैशन पर ही आधारित है। आपकी दृष्टि में फ़ैशन क्या है और यह आज के मनुष्य को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है?
(ii) दुनिया में अच्छे - बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं। एक अच्छा पड़ोसी जहाँ आपका उत्तम मित्र साबित होता है, वहीं स्वभाव से बुरा पड़ोसी आपका सुख चैन छीन लेता है। अपने पड़ोसी के स्वभाव की चर्चा कीजिए और बताइए कि उसकी कौन सी बात आज जीवन भर नहीं भूल पाएँगे।
(iii) आपकी प्रिय ऋतु कौन - सी है और क्यों? इस ऋतु में मनाए जाने वाले किसी त्योहार का महत्व बताइए।
(iv) एक मौलिक कहानी लिखिए जिसका आधार निम्नलिखित उक्ति हो -
'खोदा पहाड़ निकली चुहिया'
(v) नीचे दिये चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर वर्णन कीजिए अथवा कहानी लिखिए, जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए।
[Figure: A black and white photograph showing a young person wearing a cap working near a stove with vessels, with other children looking on in the background.]
Answer:
(v) चित्र आधारित रचना
चित्र को ध्यान से देखने पर यह स्पष्ट होता है कि यह बाल-श्रम और गरीबी की विडंबना को दर्शाता हुआ एक मार्मिक दृश्य है। तस्वीर में एक कम उम्र का बच्चा चूल्हे के पास खड़ा होकर खाना बनाने या चाय बेचने जैसा कार्य कर रहा है। उसके सिर पर एक बड़ी टोपी है और उसके चेहरे पर उम्र से पहले आई जि़म्मेदारी की थकान साफ झलक रही है। पृष्ठभूमि में कुछ अन्य बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं, जो शायद उसके सहकर्मी या आस-पास के लोग हैं। यह चित्र हमारे समाज की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है जहाँ आर्थिक तंगी के कारण बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने की बजाय काम करने के औजार थमा दिए जाते हैं। शिक्षा के अधिकार से वंचित ये नौनिहाल अपने परिवार का पेट पालने के लिए बचपन में ही बड़ों जैसी भयंकर जिम्मेदारियों का बोझ उठाने को विवश हो जाते हैं। यह दृश्य हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब हमारे देश से इस बाल-श्रम के अभिशाप का पूरी तरह से अंत होगा और हर बच्चे को उसका सुनहरा बचपन नसीब हो सकेगा।
Teacher's Note:
a) निबंध या चित्र वर्णन लिखते समय शब्द-सीमा (लगभग 250 शब्द) का विशेष ध्यान रखना चाहिए और भाषा प्रवाहमयी तथा व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध होनी चाहिए।
b) चित्र वर्णन में केवल कल्पना के आधार पर लिखने के बजाय चित्र में दिए गए मुख्य दृश्य और उसके केंद्रीय भाव (जैसे बाल-श्रम या गरीबी) से सीधे जुड़ना आवश्यक है।
Question 2: Write a letter in Hindi in approximately 120 words on any one of topics given below: [7 Marks]
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिंदी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए -
(i) आपका मित्र किसी खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए विदेश-यात्रा पर जा रहा है। मंगलकामना करते हुए उसे पत्र लिखिए।
(ii) आपके मौहल्ले में जल-आपूर्ति (Water Supply) नियमित रूप से नहीं हो रही है, जल-संस्थान के अधिकारी को शिकायत पत्र लिखिए और अपनी समस्याओं के विषय में बताकर, उनसे अनुरोध कीजिए कि वे तत्काल जल-आपूर्ति नियमित कराने की व्यवस्था करें।
Answer:
(i) मित्र को विदेश-यात्रा की शुभकामना हेतु पत्र
G-42, कमला नगर
आगरा - 4
दिनांक : 04-04-09
प्रिय मित्र विनायक
अत्र कुशल तत्रास्तु
तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ यह पढ़कर अति प्रसन्नता हुई कि तुम खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए विदेश यात्रा आस्ट्रेलिया जा रहे हो।
मैं यह जानता हूँ कि तुमने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और प्रथम भी आते रहे हो। तुमने अपने कालेज का कई बार प्रतिनिधित्व भी किया है।
मुझे विश्वास है कि उन्हें अवश्य ही सफलता प्राप्त होगी। यह तुम्हारे परिश्रम और अभ्यास का ही फल है। मेरी शुभकामनाएँ तुम्हारे साथ हैं। तुम्हारी विदेश यात्रा मंगलमय हो। अपने मम्मी पापा को मेरा चरण स्पर्श!
शेष मिलने पर।
पड़ोत्तर की प्रतीक्षा में
तुम्हारा मित्र
अर्पित
Teacher's Note:
a) अनौपचारिक पत्र में ऊपर बाईं या दाईं ओर प्रेषक का पता और दिनांक तथा उचित संबोधन (जैसे 'प्रिय मित्र') का प्रयोग करना अनिवार्य है।
b) पत्र की भाषा सरल, स्नेहपूर्ण और निर्धारित शब्द-सीमा के भीतर होनी चाहिए ताकि मुख्य भाव स्पष्ट रूप से व्यक्त हो सके।
Question 3: Read the passage given below and answer in Hindi the questions that follow, using your own words as far as possible: [10 Marks]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए। उत्तर यथासभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए -
किसी नगर में एक जुलाहा रहता था। स्वभाव का वह बड़ा अच्छा था। सभी से मीठा बोलता था और कभी किसी से नाराज नहीं होता था। लोग उसे सन्त कहा करते थे।
एक दिन कुछ शरارتی लड़के उसके यहाँ पहुंचे। वे उसकी परीक्षा lekar देखना चाहते थे कि उसे कैसे गुस्सा नहीं आता। उनमें से एक बहुत धनी व्यक्ति का लड़का था। उसे अपने पैसे का घमंड था। उन लड़कों को देखते ही जुलाحه ने बड़े प्यार से कहा, "आओ बेटा, तुम लोगों को क्या चाहिए?"
सामने साड़ियों में से एक की ओर इशारा करके एक लड़के ने कहा, "मुझे यह साड़ी चाहिए। उसका क्या लोगे?"
जुलाहे ने कहा, "दो रुपये।"
उस लड़के ने वह साड़ी हाथ में ले ली और उसके दो टुकड़े कर डाले। बोला, "मुझे पूरी नहीं, आधी चाहिए। इसका क्या लोगे?"
जुलाहे ने बड़ी शान्ति से कहा, "एक रुपया।"
नीचवान ने उस आधी साड़ी के भी दो टुकड़े करके पूछा, "इसका क्या दाम होगा?"
"आठ आना।" जुलाहे ने बिना किसी प्रकार की नाराजगी के कहा।
लड़का तो उसको चिढ़ाना चाहता था। वह साड़ी के टुकड़े पर टुकड़े करता गया, पर जुलाहे ने न उसको रोका, न डाँटा, न अपने माथे पर शिकन तक आने दी।
जब साड़ी के बहुत से टुकड़े हो गये तो लड़का हँस कर बोला, "ये टुकड़े मेरे किस काम के! मैं इन्हें नहीं खरीदूँगा।"
जुलाहे ने शान्त भाव से कहा, "तुम ठीक कहते हो बेटा, ये टुकड़े अब तुम्हारे काम, किसी के भी काम नहीं आ सकते।" लड़के को इस बात पर कुछ शर्म आयी। उसे कहा, "बह लो, मैं तुम्हें पूरी साड़ी के दाम दिये देता हूँ।"
जुलाहे ने रुपये नहीं लिये। बोला, "मैं इन टुकड़ों को जोड़ कर काम में ले आऊँगा। पर ये तुम्हारे काम नहीं आ सकते तो मैं इनका दाम कैसे ले सकता हूँ।" लड़के के ऊपर तो अपने धन का नशा चढ़ा था। उसने कहा, "मेरे पास बहुत रुपये हैं, तुम गरीब हो। मैंने तुम्हारी चीज खराब कर दी। इसका घाटा मुझे पूरा करना चाहिए।"
जुलाहे ने धीमी आवाज में कहा, "क्या तुम इसका घाटा पूरा कर सकते हो? क्या तुम समझते हो कि रुपये से यह घाटा पूरा हो जायेगा? देखो किसानों की मेहनत से कपास पैदा हुई। उसकी रुई से मेरी स्त्री ने सूत काता। मैंने उस सूत को रंगा, फिर उससे साड़ी बुनी। हमारी मेहनत तब कारगर होती, जब कोई उस साड़ी को पहनता। तुमने तो उसके टुकड़े-टुकड़े कर डाले! इतने लोगों की मेहनत बेकार गई। रुपये इस घाटे को कैसे पूरा कर सकते हैं? जुलाहे ने साड़ी के दाम इसलिए नहीं लिये क्योंकि वे टुकड़े बालक के काम नहीं आ सकते थे।
जुलाहे की आवाज में तनिक भी आवेश नहीं था। वह तो उसे ऐसे समझा रहा था, जैसे बाप बेटे को समझाता है।
लड़का पानी-पानी हो गया। उसकी आँखें भर आईं। वह जुलाहे के पैरों पर गिर गया। जुलाहे ने उसे उठाकर अपनी छाती से लगाते हुए कहा, "बेट, अगर मैं लालच करके दो रुपये ले लेता, तो तुम्हारी जिन्दगी का वही हाल होता जो इस साड़ी का हुआ। वह किसी के काम न आती। अब तुम समझ गये। आगे ऐसी गलती कभी नहीं करोगे। एक साड़ी खराब हुई, दूसरी तैयार हो सकती है, लेकिन जिन्दगी बिगड़ गई तो कैसे सुधारोगे?" लड़का और उसके साथी बहुत शर्मिंदा हुए और सिर नीचा करके अपने-अपने घर चले गये।
यह जुलाहे के दक्षिण के महान सन्त तिरुवल्लुवर, जिनका लिखा 'कुरल' आज दो हजार वर्ष बाद भी बड़ी श्रद्धा से पढ़ा जाता है।
(i) जुलाहा कौन था? उसका स्वभाव कैसा था? [2 Marks]
(ii) लड़के जुलाहे की परीक्षा क्यों लेना चाहते थे? वे साड़ी के टुकड़े पर टुकड़े क्यों कर रहे थे? [2 Marks]
(iii) लड़के द्वारा चिढ़ाये जाने पर जुलाhe ने क्या कहा? जुलाहे ने साड़ी के दाम क्यों नहीं लिए? [2 Marks]
(iv) लड़के पर जुलाहे की बात का क्या प्रभाव पड़ा? [2 Marks]
(v) प्रस्तुत गद्यांश से आपको क्या शिक्षा मिलती है? [2 Marks]
Answer:
(i) जुलाहा दक्षिण के महान सन्त तिरुवल्लुवर थे। उनका स्वभाव बहुत अच्छा था, वे सभी से मीठा बोलते थे, मृदुभाषी थे तथा कभी किसी से नाराज नहीं होते थे।
(ii) लड़के जुलाहे की परीक्षा यह देखने के लिए लेना चाहते थे कि उसे गुस्सा क्यों नहीं आता। वे साड़ी के टुकड़े-टुकड़े इसलिए कर रहे थे ताकि वे जुलाहे को चिढ़ा सकें और उसे गुस्से में ला सकें।
(iii) जुलाहे ने शान्त भाव से कहा कि वे टुकड़े अब किसी के काम नहीं आ सकते और लड़के को शर्मिंदा देखकर जब उसने पैसे देने चाहे तो जुलाहे ने रुपये लेने से मना कर दिया क्योंकि वे टुकड़े बालक के काम नहीं आ सकते थे और वह दूसरों की मेहनत का बेकार हुआ नुकसान का धन नहीं लेना चाहता था।
(iv) जुलाहे की बात सुनकर लड़का पानी-पानी हो गया, उसकी आँखें भर आईं, वह जुलाहे के पैरों पर गिर पड़ा और बहुत शर्मिंदा हुआ।
(v) इस गद्यांश से यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी अपने धन का घमंड नहीं करना चाहिए और क्रोध पर नियंत्रण रखकर सदा संयम और क्षमा का परिचय देना चाहिए।
Teacher's Note:
a) गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर हमेशा गद्यांश में दी गई जानकारी के आधार पर ही अपने शब्दों में संक्षिप्त और स्पष्ट लिखने चाहिए।
b) सभी पाँचों उप-प्रश्नों के अंक (2-2 अंक) अलग-अलग निर्धारित हैं, अतः प्रत्येक प्रश्न का उत्तर बिंदुवार और सटीक देना चाहिए।
Question 4: Answer the following according to the instructions given:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए -
(i) निम्न शब्दों से विशेषसं बनाइए -
रोग, परिवार। [1 Mark]
(ii) निम्न शब्दों में से किसी एक शब्द के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए -
आकाश, घमंड। [1 Mark]
(iii) निम्न शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए -
प्रशंस्रा, सेवक, संधि, गुप्त। [1 Mark]
(iv) निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक की सहायता से वाक्य बनाइए -
मुट्ठी गर्म करना, हाथ-पैर मारना। [1 Mark]
(v) भाववाचक संज्ञा बनाइए -
सेवक, राष्ट्र। [1 Mark]
(vi) कोष्ठक में दिये गये निर्देशानुसार वाक्यों में परिवर्तन कीजिए -
(a) पंडित जी कथा सुना रहे हैं। ('द्वारा' शब्द का प्रयोग कीजिए) [1 Mark]
(b) हलवाई ने जलेबियाँ बनाई थीं। (भविष्यकाल में बदलिए) [1 Mark]
(c) साँझ होते ही पक्षी अपने-अपने नीर को लौट आते हैं। (रेखांकित के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कीजिए) [1 Mark]
Answer:
(i) रोग - रोगी, परिवार - पारिवारिक।
(ii) आकाश - आसमान, नभ (अथवा घमंड - अभिमान, दर्प)।
(iii) प्रशंसा - निंदा, सेवक - स्वामी (अथवा संधि - विग्रह, गुप्त - प्रकट)।
(iv) मुट्ठी गर्म करना (रिश्वत देना) - सरकारी कार्यालयों में अपना कोई भी कार्य करवाने के लिए पहले अफसरों की मुट्ठी गर्म करनी पड़ती है।
(v) सेवक - सेवा, राष्ट्र - राष्ट्रीयता।
(vi)
(a) पंडित जी द्वारा कथा सुनाई जा रही है।
(b) हलवाई जलेबियाँ बनाएगा।
(c) साँझ होते ही पक्षी अपने-अपने नीड़ को लौट आते हैं। (नीड़ के स्थान पर 'नीड़' ही रहेगा या रेखांकित पद के अनुसार उपयुक्त प्रतिस्थापन)।
Teacher's Note:
a) व्याकरण के प्रश्नों में निर्देश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सटीक एवं व्याकरण की दृष्टि से शत-प्रतिशत शुद्ध रूप लिखना आवश्यक है।
b) मुहावरों के वाक्य प्रयोग में अर्थ स्पष्ट झलकाना चाहिए तथा काल परिवर्तन एवं वाच्य परिवर्तन के नियमों का पूर्ण पालन होना चाहिए।
SECTION-B (40 Marks)
* गद्य संकलन : Out of Syllabus
* चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य : Out of Syllabus
* एकांकी सुमन : Out of Syllabus
* काव्य - चन्द्रिका : Out of Syllabus
Answer:
As noted in the official paper, all sections under Section-B (गद्य संकलन, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, एकांकी सुमन, काव्य - चन्द्रिका) are marked as "Out of Syllabus" for this specific exam session/set and no questions are to be answered from them.
Teacher's Note:
a) Section-B in this particular 2009 question paper scan shows all prescribed literature books as out of syllabus or unattempted in the provided source material.
b) Students must ensure they follow their current prescribed board syllabus for literature sections as applicable in their respective academic year.
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FAQs
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Yes, the solutions for ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2009 with Solutions are prepared by subject matter experts as per official marking scheme. Class 10 students will understand the structure of answers and 'step-marks' methodology Hindi.
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Yes, where applicable, ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2009 with Solutions is available in both English and Hindi mediums. All students from Class 10 can access Hindi study material in their preferred language.
No, all previous year question papers on StudiesToday, including ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2009 with Solutions, are provided free of charge in mobile-friendly PDF.