Official GSEB Solutions for Class 9 Social Science: Chapter 06 1945 के बाद का विश्व
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Chapter-wise Solutions for Social Science: Chapter 06 1945 के बाद का विश्व
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1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
Question 1. संयुक्त राष्ट्रसंघ के उद्देश्य बताइए ।
Answer: 24 अक्टूबर, 1945 के दिन संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना हुई, जिसके मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाना। इसके लिए शांति में बाधा डालने वाले तत्वों को दूर करना, आक्रमण या शांति भंग करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए सामूहिक और प्रभावी कदम उठाना।
- हर अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना।
- आत्मनिर्भरता और समान अधिकार के आधार पर देशों के बीच अच्छे संबंध विकसित करना, तथा विश्व शांति बनाए रखने के लिए सही कदम उठाना।
- अंतरराष्ट्रीय सामाजिक, सांस्कृतिक या मानवतावादी समस्याओं को हल करने में वैश्विक सहयोग प्राप्त करना।
- जाति, भाषा, लिंग या धार्मिक भेदभाव के बिना सभी व्यक्तियों के लिए मौलिक स्वतंत्रताओं और मानव अधिकारों का सम्मान करना।
- इन सामान्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करने वाले अलग-अलग देशों के बीच समन्वय लाने वाली केंद्रीय संस्था के तौर पर कार्य करना।
In simple words: संयुक्त राष्ट्रसंघ 24 अक्टूबर 1945 को बना था। इसका मुख्य काम दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखना, झगड़ों को शांति से सुलझाना, देशों के बीच अच्छे रिश्ते बनाना, और लोगों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना है। यह सभी देशों को एक साथ मिलकर काम करने में मदद करता है।
Exam Tip: संयुक्त राष्ट्रसंघ के उद्देश्यों को याद करते समय, शांति, सुरक्षा, मैत्रीपूर्ण संबंध, सहयोग और मानवाधिकार जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें। इन्हें एक क्रम में लिखें ताकि उत्तर व्यवस्थित लगे।
Question 2. गुटनिर्पेक्ष की नीति का अर्थ समझाइए ।
Answer: दोनों शक्तिशाली गुटों में शामिल न होकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति चलाने को गुटनिर्पेक्ष नीति कहा जाता है।
In simple words: गुटनिर्पेक्ष नीति का मतलब है कि किसी भी बड़े सैन्य समूह में शामिल हुए बिना, देश अपनी अलग और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाए।
Exam Tip: गुटनिर्पेक्षता की नीति की परिभाषा देते समय, 'दो गुटों में शामिल न होना' और 'स्वतंत्र विदेश नीति' जैसे मुख्य शब्द अवश्य शामिल करें।
Question 3. 'शीत युद्ध' के परिणामों की संक्षेप में चर्चा कीजिए ।
Answer: शीतयुद्ध के कई परिणाम हुए, जिन्हें नकारात्मक और सकारात्मक प्रभावों में बांटा जा सकता है:
शीतयुद्ध के नकारात्मक परिणाम:
- शीतयुद्ध ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भय और संदेह का माहौल बनाए रखा।
- अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सैन्य प्रवृत्ति को स्थायी बना दिया।
- दोनों विरोधी गुटों में शामिल होने वाले देशों ने अपनी स्वतंत्रता खो दी।
- लोगों और देशों के बीच एक मनोवैज्ञानिक बाधा खड़ी हो गई।
- यह बड़ी शक्तियाँ UNO में आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगीं, जिससे उसका काम रुकने लगा।
- सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था असफल रही।
- विश्व के देशों के बीच हथियारों की होड़ लग गई और सैन्य संगठन स्थापित हुए।
शीतयुद्ध के सकारात्मक प्रभाव:
- गुटनिर्पेक्ष आंदोलन सामने आया।
- तीसरी दुनिया के देशों को आजादी मिली।
- शीतयुद्ध की भयानक स्थिति के कारण शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिला।
- तकनीकी और वैज्ञानिक विकास को प्रोत्साहन मिला।
- UNO की महासभा का महत्व बढ़ गया।
- अंतरराष्ट्रीय जगत में शांति का संतुलन स्थापित हुआ।
In simple words: शीतयुद्ध ने दुनिया में डर और हथियारों की दौड़ पैदा की, जिससे देशों ने अपनी आजादी खो दी और UNO का काम रुक गया। लेकिन इसके कारण गुटनिर्पेक्ष आंदोलन भी शुरू हुआ, तीसरी दुनिया को आजादी मिली, शांतिपूर्ण रहने को बढ़ावा मिला, और तकनीकी विकास में तेजी आई।
Exam Tip: शीतयुद्ध के परिणामों को बताते समय, नकारात्मक और सकारात्मक दोनों पक्षों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग उल्लेख करें। हर प्रभाव के लिए एक छोटा और सटीक बिंदु दें।
Question 4. जर्मनी का विभाजन और एकीकरण के विषय में संक्षेप में जानकारी दीजिए ।
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध का मुख्य कारण जर्मनी था, और वह फिर से एक बड़ी शक्ति बनकर विश्व शांति के लिए खतरा बन सकता था।
- इसलिए जर्मनी को चार भागों में बांटा गया और उसकी राजधानी बर्लिन को भी चार हिस्सों में बांटा गया।
- रूस की 'रेड आर्मी' ने जो पूर्वी हिस्सा जीता था, वह उसे दे दिया गया।
- जर्मनी के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से का संचालन अमेरिका को, फ्रांस के पास के हिस्से फ्रांस को, और बेल्जियम से सटे हिस्सों का संचालन इंग्लैंड को दे दिया गया।
- अमेरिका, फ्रांस और इंग्लैंड के द्वारा संचालित जर्मन हिस्सों को मिलाकर 'फेडरल रिपब्लिक' और 'ईस्ट जर्मनी' बनाया गया।
- इसके खिलाफ रूस ने अप्रैल, 1948 में बर्लिन की नाकाबंदी की।
- पूर्वी बर्लिन और पश्चिमी बर्लिन को अलग करने वाली 42 km लंबी दीवार बनाई गई।
- साढ़े चार दशकों में पश्चिमी जर्मनी ने आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में इतनी प्रगति की, जिसे 'जर्मन चमत्कार' के रूप में जाना जाता है।
- 1990 तक शीतयुद्ध समाप्त हो गया और रूस का विभाजन हुआ। अब एकमात्र बड़ी शक्ति अमेरिका रह गया।
- पश्चिमी और पूर्वी देशों के बीच समझौता हुआ, और 3 अक्टूबर, 1990 को बर्लिन की दीवार को गिरा दिया गया और जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ।
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद, जर्मनी को चार हिस्सों में बांट दिया गया था क्योंकि यह दोबारा से खतरा न बन जाए। बर्लिन को भी बांटा गया था। अमेरिका, फ्रांस और इंग्लैंड ने अपने हिस्से मिलाकर एक देश बनाया, जबकि रूस ने अपना हिस्सा रखा। 1990 में, बर्लिन की दीवार गिरा दी गई और जर्मनी फिर से एक हो गया, क्योंकि तब तक शीतयुद्ध खत्म हो चुका था।
Exam Tip: जर्मनी के विभाजन और एकीकरण को समझाते समय, चार भागों में बंटवारे, बर्लिन की नाकाबंदी, जर्मन चमत्कार और बर्लिन की दीवार के गिरने जैसी मुख्य घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से बताएं।
Question 5. रूस और भारत के बीच प्रगाढ संबंध रहें है ।
Answer: रूस ने भारत के उद्योगों की स्थापना करने और आर्थिक तथा तकनीकी क्षेत्रों में मदद की है।
- कश्मीर के मुद्दे पर रूस ने हमेशा भारत का पक्ष लिया है।
- UNO की सुरक्षा समिति में कश्मीर के मामले में भारत के खिलाफ प्रस्तावों को रोकने के लिए कई बार 'वीटो' शक्ति का उपयोग किया है।
- कश्मीर समस्या पर वैश्विक स्तर पर भारत का समर्थन किया है।
- इस तरह से भारत और रूस के बीच गहरे संबंध बने रहे हैं।
In simple words: रूस ने भारत को उद्योग और तकनीक में सहायता दी है। उसने कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है और संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ प्रस्तावों को रोकने के लिए 'वीटो' का इस्तेमाल किया है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते मजबूत बने हैं।
Exam Tip: भारत और रूस के संबंधों पर प्रकाश डालते समय, आर्थिक और तकनीकी सहायता के साथ-साथ कश्मीर मुद्दे पर रूस के समर्थन और UNO में वीटो के उपयोग को प्रमुख बिंदुओं के रूप में शामिल करें।
Question 6. 'सैनिक गुटों', नाटो, सियाटो और वार्सा संधि के बारे में जानकारी दीजिए ।
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दोनों बड़ी शक्तियों के बीच अविश्वास का माहौल बना, जिससे सैन्य गुटों का निर्माण हुआ।
- नाटो (NATO): अमेरिका की प्रेरणा और नेतृत्व में 'उत्तर अटलांटिक महासागर के किनारे स्थित पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों का एक सैन्य संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी।
- सीआटो (SEATO): दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों की साम्यवादी विचारधारा से रक्षा करने के लिए इंग्लैंड और अमेरिका ने 1954 में एक सैन्य संगठन बनाया था, जिसे सीआटो के नाम से जाना जाता है।
- वार्सा संधि: अमेरिका की प्रेरणा और नेतृत्व में बनाए गए सैन्य संगठनों के खिलाफ सोवियत संघ के नेतृत्व में साम्यवादी देशों ने जिस सैन्य संगठन को बनाया था, उसे वार्सा संधि के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना 1955 में की गई।
- सेन्टो (CENTO): मध्यपूर्व के देशों ने इंग्लैंड की प्रेरणा और अमेरिका के नेतृत्व में सैन्य संगठन स्थापित किया था, जिसे सेन्टो कहा गया।
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद, बड़ी शक्तियों के बीच भरोसे की कमी के कारण कई सैन्य गुट बने। नाटो अमेरिका ने पश्चिमी देशों के लिए, सीआटो अमेरिका और इंग्लैंड ने दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए, और सेन्टो मध्यपूर्व के लिए बनाया। वहीं, सोवियत संघ ने अपने सहयोगी देशों के लिए वार्सा संधि बनाई थी।
Exam Tip: सैन्य गुटों का वर्णन करते समय, प्रत्येक संगठन (नाटो, सीआटो, वार्सा संधि, सेन्टो) के नाम के साथ उसकी स्थापना का वर्ष, प्रमुख देश और मुख्य उद्देश्य बताएं।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर लिखिए:
Question 1. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद महासत्ताओं के बीच संबंध तनावपूर्ण क्यों बने ?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और रूस में पूरे विश्व पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की जोरदार प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई।
- दोनों ही बड़ी शक्तियों के पास अपार विनाशकारी क्षमता थी।
- अपनी ताकत के आधार पर दोनों महाशक्तियाँ कहीं भी दखल देने की क्षमता रखती थीं।
- दोनों महाशक्तियों ने विश्व राजनीति को अपने अधीन कर लिया था।
- दोनों ही महाशक्तियों ने अन्य देशों में अपने सैनिक ठिकाने स्थापित किए।
- आपसी इरादों के लिए भारी संदेह और अविश्वास के कारण महाशक्तियों के बीच हथियारों की होड़ बढ़ गई।
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद, अमेरिका और रूस पूरी दुनिया पर राज करना चाहते थे। दोनों के पास बहुत खतरनाक हथियार थे और वे कहीं भी दखल दे सकते थे। उन्होंने दूसरे देशों में अपने सैन्य अड्डे बनाए, जिससे एक-दूसरे पर अविश्वास बढ़ा और हथियारों की दौड़ तेज हो गई।
Exam Tip: महाशक्तियों के बीच तनाव के कारणों को बताते समय, प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा, विनाशकारी क्षमता, विश्व राजनीति पर नियंत्रण, सैन्य अड्डे और अविश्वास जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।
Question 2. पंडित जवाहरलाल नेहरु गुटनिर्पेक्ष की नीति के विषय में क्या विचार रखते थे ?
Answer: नेहरूजी का मानना था कि किसी भी गुट या शक्ति समूह में शामिल होने के बजाय तटस्थ रहने से ही राष्ट्रीय हितों की अच्छी तरह से सुरक्षा हो सकेगी। उनका विचार था कि विश्व का दो शक्ति गुटों में बंटवारा विश्व शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए हानिकारक है। यदि कोई देश किसी गुट में शामिल होता है, तो उसे अपनी स्वतंत्रता खोनी पड़ेगी और शीतयुद्ध का शिकार होना पड़ेगा।
In simple words: नेहरूजी का मानना था कि भारत को किसी भी बड़े समूह में शामिल नहीं होना चाहिए, बल्कि तटस्थ रहना चाहिए। इससे ही देश की भलाई होगी और विश्व शांति बनी रहेगी। उनका कहना था कि गुटों में शामिल होने से देश अपनी आजादी खो देते हैं और शीतयुद्ध में फंस जाते हैं।
Exam Tip: नेहरूजी के गुटनिर्पेक्षता पर विचारों को लिखते समय, 'तटस्थता', 'राष्ट्रीय हित की सुरक्षा', 'विश्व शांति' और 'स्वतंत्रता की रक्षा' जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें।
Question 3. परमाणु अप्रसार संधि किसे कहते हैं ? भारत ने उस पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किया ?
Answer: सन् 1968 में UNO की महासभा ने परमाणु हथियारों के प्रसार और निर्माण पर नियंत्रण संधि को मंजूरी दी थी। यह परमाणु अप्रसार संधि के नाम से जानी जाती है।
- इस संधि में परमाणु हथियार और प्रक्षेपास्त्र वाले देशों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। वे अपने हथियार बढ़ाते रहे, लेकिन अन्य देशों पर कठोर दबाव डालते रहे।
- इस प्रकार भारत इस संधि को पक्षपातपूर्ण संधि मानता है, इसी कारण भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए।
In simple words: परमाणु अप्रसार संधि 1968 में बनी थी, जो परमाणु हथियार बनने और फैलने से रोकने के लिए थी। लेकिन इस संधि ने उन देशों को नहीं रोका जिनके पास पहले से हथियार थे, जबकि दूसरे देशों पर दबाव बनाया। भारत ने इसे भेदभावपूर्ण माना और इस पर दस्तखत नहीं किए।
Exam Tip: परमाणु अप्रसार संधि की परिभाषा देते समय, इसके उद्देश्य (प्रसार और निर्माण पर नियंत्रण) और भारत के हस्ताक्षर न करने के कारण (पक्षपातपूर्ण स्वभाव) को स्पष्ट रूप से बताएं।
3. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
Question 1. शस्त्रीकरण और निःशस्त्रीकरण:
Answer:
शस्त्रीकरण:
- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और रूस में हथियारों की होड़ लग गई थी। सन् 1949 में रूस ने परमाणु परीक्षण किया था।
- हर देश खुद को दूसरे देशों से असुरक्षित महसूस करता था। इसलिए देशों ने हथियार बनाने पर अधिक ध्यान दिया।
- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद नाटो, सीआटो, सेन्टो और वार्सा संधि जैसे सैन्य संगठनों की स्थापना हुई थी।
- देशों की प्रतिस्पर्धा ने परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों तथा मिसाइलों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निःशस्त्रीकरण:
- सन् 1962 में क्यूबा संकट के दौरान पहली बार रूस और अमेरिका के राष्ट्राध्यक्षों के बीच हॉटलाइन वार्ता हुई।
- दोनों बड़ी शक्तियों ने परमाणु हथियारों का उपयोग न करके मानव कल्याण का काम किया।
- अमेरिका, ब्रिटेन, रूस परमाणु हथियारों के निःशस्त्रीकरण और परमाणु शक्ति के परीक्षण, उत्पादन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए सहमत हुए।
In simple words: शस्त्रीकरण का मतलब है हथियार बढ़ाना, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और रूस में हुआ था, जिससे सैन्य गुट बने। निःशस्त्रीकरण का मतलब है हथियार कम करना या हटाना। क्यूबा संकट के बाद, देशों ने महसूस किया कि शांति के लिए हथियार कम करना जरूरी है।
Exam Tip: शस्त्रीकरण और निःशस्त्रीकरण को अलग-अलग शीर्षकों के तहत समझाएं। शस्त्रीकरण के लिए हथियारों की होड़, सैन्य गुटों का निर्माण जैसे बिंदु और निःशस्त्रीकरण के लिए क्यूबा संकट, हॉटलाइन वार्ता और हथियार नियंत्रण समझौतों का उल्लेख करें।
Question 2. क्यूबा संकट:
Answer: सन् 1960 के दशक में अमेरिका ने साम्यवादी शासन वाले क्यूबा की नाकाबंदी की घोषणा की।
- इसके विरोध में सोवियत संघ ने परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों वाला जहाज कैरेबियन सागर में भेजा।
- दोनों देशों ने एक-दूसरे को परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी दी, जिससे विश्व परमाणु युद्ध के करीब आ गया।
- दोनों बड़ी शक्तियाँ इस युद्ध के विनाश को जानती थीं, इसलिए पहली बार दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच हॉटलाइन वार्ता हुई।
- सोवियत संघ ने अपने परमाणु हथियारों से लैस जहाज वापस बुलाने का फैसला किया।
- अमेरिका ने भी अपने परमाणु हथियारों की मिसाइलों को हटा लिया।
- इस घटना को क्यूबा संकट के नाम से जाना जाता है। जानकार क्यूबा संकट को शीत युद्ध की शुरुआत का अंत मानते हैं।
In simple words: 1960 के दशक में, अमेरिका ने क्यूबा की नाकाबंदी कर दी। सोवियत संघ ने परमाणु मिसाइलों वाले जहाज क्यूबा भेजे, जिससे परमाणु युद्ध का बड़ा खतरा पैदा हो गया। हालांकि, बातचीत से दोनों देशों ने अपने हथियार वापस ले लिए, जिससे यह संकट खत्म हुआ। यह घटना शीत युद्ध के अंत की शुरुआत मानी जाती है।
Exam Tip: क्यूबा संकट का वर्णन करते समय, नाकाबंदी, मिसाइल तैनाती, परमाणु युद्ध का खतरा, हॉटलाइन वार्ता और समाधान को क्रमबद्ध रूप से बताएं। इस घटना को शीत युद्ध के संदर्भ में इसकी महत्ता के साथ जोड़ें।
Question 3. सोवियत युनियन का विघटन:
Answer: सन् 1989 में सोवियत युनियन के राष्ट्राध्यक्ष गोर्बाचोव की उदारवादी नीति के कारण सोवियत युनियन का विघटन हुआ।
- गोर्बाचोव की ग्लासनोस्त (खुलापन) और पेरेस्त्रोइका (आर्थिक और सामाजिक सुधार) नीतियों के कारण सोवियत समाजवादी प्रजातांत्रिक संघ के घटक राज्यों में स्वतंत्रता पाने की इच्छा जगी, जिससे उन्होंने एक-एक करके स्वतंत्रता की घोषणा करना शुरू कर दिया।
- धीरे-धीरे सोवियत युनियन के प्रशासनिक तंत्र पर साम्यवादी दल के अधिकारियों और लालसेना की पकड़ कमजोर पड़ने लगी।
- 1990 में सोवियत युनियन के विभाजन की प्रक्रिया शुरू हुई। अंत में कुल 15 राज्यों में से 14 राज्य स्वतंत्र हो गए, जो दिसंबर, 1991 में पूरा हुआ।
In simple words: 1989 में गोर्बाचोव की खुली और सुधारवादी नीतियों के कारण सोवियत संघ में विघटन शुरू हुआ। घटक राज्यों ने आजादी की मांग की, और साम्यवादी पार्टी की पकड़ कमजोर पड़ गई। 1990 तक यह प्रक्रिया पूरी हुई, और 15 में से 14 राज्य स्वतंत्र हो गए, जिससे सोवियत संघ टूट गया।
Exam Tip: सोवियत युनियन के विघटन के कारणों में गोर्बाचोव की नीतियों (ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका), घटक राज्यों की स्वतंत्रता की इच्छा और साम्यवादी दल की कमजोर पड़ती पकड़ को मुख्य बिंदुओं के रूप में शामिल करें।
Question 4. बर्लिन की नाकाबंदी:
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी की राजधानी बर्लिन के भी चार हिस्से किए गए थे। कुछ समय बाद फ्रांस, इंग्लैंड और अमेरिका ने अपने नियंत्रण के तीन प्रशासनिक हिस्सों को एक किया।
- इसके खिलाफ अप्रैल, 1948 में सोवियत संघ ने बर्लिन की नाकाबंदी की घोषणा की। इसके परिणामस्वरूप पश्चिमी देशों और सोवियत संघ के बीच भारी तनाव पैदा हुआ।
- बर्लिन की नाकाबंदी को जानकार शीतयुद्ध का आरंभ मानते हैं। बाद में पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी की राजधानी बर्लिन को अलग करने वाली लंबी दीवार खींची गई।
- बर्लिन की यह दीवार शक्ति समूहों के बीच चलने वाले शीतयुद्ध और तनाव का प्रतीक बनी।
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद बर्लिन को चार हिस्सों में बांटा गया था। फ्रांस, इंग्लैंड और अमेरिका ने अपने हिस्से मिलाकर एक कर दिए, लेकिन सोवियत संघ ने अप्रैल 1948 में बर्लिन की नाकाबंदी कर दी, जिससे तनाव बढ़ गया। यह घटना शीत युद्ध की शुरुआत मानी जाती है और इसके बाद बर्लिन को एक लंबी दीवार से अलग कर दिया गया था।
Exam Tip: बर्लिन की नाकाबंदी की व्याख्या करते समय, जर्मनी और बर्लिन का विभाजन, सोवियत संघ की नाकाबंदी की घोषणा, परिणामी तनाव और बर्लिन की दीवार के निर्माण को क्रमबद्ध रूप से बताएं।
4. निम्नलिखित विधानों के कारण दीजिए:
Question 1. संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना ने नये विश्व की नींव रखी ।
Answer: विश्व दो महायुद्धों के भयानक विनाश को देख चुका था, और दूसरे विश्वयुद्ध में विनाशकारी परमाणु हथियारों का उपयोग हुआ था।
- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भी विश्व शांति पर खतरा बना हुआ था। ऐसे में विश्व के महान नेताओं ने एक ऐसी संस्था की आवश्यकता महसूस की, जो विश्व शांति और सहयोग का प्रतीक बन सके।
- 24 अक्टूबर, 1945 को UNO की स्थापना ऐसी स्थिति में हुई, जब विश्व शांति की तलाश थी। एक ऐसा माहौल बनाना था, जिसमें युद्ध न हों।
- देश अपने मतभेदों को शांतिपूर्ण बातचीत और आपसी सहयोग से हल करने का प्रयास करें। यह UNO की स्थापना से ही संभव हुआ।
- इस प्रकार UNO ने एक नए विश्व की नींव रखी।
In simple words: दो बड़े विश्व युद्धों के बाद, दुनिया को बहुत नुकसान हुआ था, खासकर परमाणु हथियारों से। इसलिए, 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्रसंघ (UNO) बनाया गया, ताकि दुनिया में शांति बनी रहे, देश आपस में सहयोग करें, और युद्ध न हों। इस तरह UNO ने एक नई और शांत दुनिया की शुरुआत की।
Exam Tip: UNO की स्थापना को नए विश्व की नींव क्यों माना जाता है, यह समझाते समय, दो विश्व युद्धों के परिणामों, शांति की आवश्यकता, सहयोग की भावना और UNO के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से जोड़ें।
Question 2. क्यूबा संकट को 'शीत युद्ध' के अंत के आरंभ के रूप में माना जाता है ?
Answer: सन् 1962 के क्यूबा संकट के समय अमेरिका और सोवियत संघ दोनों बड़ी शक्तियों ने चरमपंथी स्थिति के खतरे को महसूस किया।
- अमेरिका और सोवियत संघ के नेताओं के बीच पहली बार हॉटलाइन वार्ता हुई।
- सोवियत युनियन ने परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों वाले जहाज को अरबियन सागर से वापस बुलाने का निर्णय लिया।
- अमेरिका ने क्यूबा की ओर मुड़े हुए अपने परमाणु हथियारों वाले मिसाइलों को हटा लिया।
- 1962 के क्यूबा प्रक्षेपास्त्र संकट के भयानक अनुभव के बाद दोनों बड़ी शक्तियों के तनाव में कमी आई, जिसे तनाव शैथिल्य कहा गया।
- इसके बाद 1963 से 1978 की अवधि में तनाव कम करने के कई समझौते हुए। दोनों शक्तियों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान शुरू हुआ।
- इसलिए क्यूबा संकट को शीतयुद्ध के अंत की शुरुआत के रूप में माना जाता है।
In simple words: 1962 के क्यूबा संकट के दौरान, अमेरिका और सोवियत संघ ने परमाणु युद्ध के बड़े खतरे को समझा। इससे पहली बार हॉटलाइन पर बातचीत हुई, और दोनों देशों ने अपने हथियार पीछे हटा लिए। इस घटना के बाद तनाव कम होने लगा और कई समझौते हुए, जिससे शीत युद्ध के खत्म होने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
Exam Tip: क्यूबा संकट को शीत युद्ध के अंत की शुरुआत मानने के कारणों को स्पष्ट करते समय, दोनों शक्तियों द्वारा खतरे की गंभीरता का एहसास, हॉटलाइन वार्ता, हथियारों की वापसी और तनाव में कमी के बाद के समझौतों पर जोर दें।
5. नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए:
Question 1. संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज का आरंभ किससे होता है ?
(A) घोषणापत्र से
(B) प्रस्तावना से
(C) मानवाधिकार से
(D) संविधान से
Answer: (B) प्रस्तावना से
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य दस्तावेज की शुरुआत उसकी प्रस्तावना से होती है, जिसमें उसके उद्देश्य और सिद्धांत बताए गए हैं।
Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज के आरंभ के बारे में प्रश्न अक्सर पूछा जाता है; याद रखें कि यह 'प्रस्तावना' (Preamble) से शुरू होता है।
Question 2. अनेक विद्वान किस घटना को शीत युद्ध की शुरूआत मानते हैं ?
(A) बर्लिन की नाकाबंदी
(B) जर्मनी का विभाजन
(C) जर्मनी का चमत्कार
(D) जर्मनी का एकीकरण
Answer: (A) बर्लिन की नाकाबंदी
In simple words: कई जानकार मानते हैं कि बर्लिन की नाकाबंदी, जो 1948 में सोवियत संघ ने की थी, शीत युद्ध की असली शुरुआत थी।
Exam Tip: शीत युद्ध की शुरुआत से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाओं में बर्लिन की नाकाबंदी को अक्सर एक प्रमुख मोड़ के रूप में देखा जाता है, इसे याद रखना चाहिए।
Question 3. सोवियत यूनियन के नेतृत्ववाले देशों ने कौन-सी विचारधारा को माना ?
(A) लोकतंत्र
(B) साम्राज्यवादी
(C) साम्यवादी
(D) उदारमतवादी
Answer: (C) साम्यवादी
In simple words: सोवियत यूनियन के नेतृत्व में रहने वाले देशों ने साम्यवादी विचारधारा को अपनाया था, जो केंद्रीय आर्थिक नियंत्रण और सामूहिक स्वामित्व पर आधारित थी।
Exam Tip: शीत युद्ध के दौरान, सोवियत संघ और उसके सहयोगी देशों की मुख्य विचारधारा 'साम्यवाद' थी, जबकि पश्चिमी देश 'लोकतंत्र' और 'पूंजीवाद' का समर्थन करते थे।
Question 4. भारत में गुट निर्पेक्ष की विदेश नीति का प्रवर्तक कौन था ?
(A) लालबहादुर शास्त्री
(B) डॉ. राधाकृष्णन
(C) पं. जवाहरलाल नेहरु
(D) श्रीमति इंदिरा गाँधी
Answer: (C) पं. जवाहरलाल नेहरु
In simple words: भारत की गुटनिर्पेक्ष विदेश नीति को शुरू करने का श्रेय पंडित जवाहरलाल नेहरू को जाता है, जिन्होंने इसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत की पहचान बनाई।
Exam Tip: पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम भारत की गुटनिर्पेक्ष नीति से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 5. अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में किस नीति ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई ?
(A) गुटनिर्पेक्ष नीति
(B) शीतयुद्ध की नीति
(C) निःशस्त्रीकरण की नीति
(D) उपनिवेशवाद की नीति
Answer: (A) गुटनिर्पेक्ष नीति
In simple words: गुटनिर्पेक्ष नीति ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहुत बड़ी भूमिका निभाई, खासकर उन नए स्वतंत्र हुए देशों के लिए जो बड़े शक्ति गुटों में शामिल नहीं होना चाहते थे।
Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गुटनिर्पेक्ष नीति की भूमिका को समझते समय, यह ध्यान रखें कि इसने शीत युद्ध के दौरान नव-स्वतंत्र देशों को एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान किया।
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FAQs
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Yes, we provide bilingual support for Class 9 Social Science. You can access GSEB Class 9 Social Science Solutions Chapter 6 1945 के बाद का विश्व in both English and Hindi medium.
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