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Detailed Chapter 10 सरकार के अंग GSEB Solutions for Class 9 Social Science
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Class 9 Social Science Chapter 10 सरकार के अंग GSEB Solutions PDF
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
Question 1. सत्ता विश्लेषण का सिद्धान्त अर्थात् क्या ? समझाओं ।
Answer: राज्य सरकारें जो कार्य करती हैं, वे एक-दूसरे से अलग-अलग होते हैं। सरकार के तीनों अंगों के कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं। प्रत्येक काम में एक विशेष प्रकार की योग्यता की आवश्यकता होती है। इसलिए, अलग-अलग अंगों द्वारा, अलग-अलग व्यक्तियों को कार्य करना चाहिए, ताकि सरकार का काम सरल और सुविधाजनक हो सके, इसके लिए शक्ति का बँटवारा आवश्यक है। विधायिका के पास कानून बनाने की शक्ति है। वह इसका गलत उपयोग न कर सके, इसके लिए कार्यपालिका और न्यायपालिका को कई ऐसी शक्तियाँ दी गई हैं, जो विधायिका पर नियंत्रण रखने का कार्य करती हैं। इसी प्रकार कार्यपालिका पर विधायिका और न्यायपालिका का नियंत्रण रखा जाता है, तथा न्यायपालिका और कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने की कई शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।
In simple words: सरकार के तीन हिस्से होते हैं - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। ये तीनों अलग-अलग काम करते हैं ताकि कोई एक हिस्सा बहुत ताकतवर न हो जाए और सब पर नियंत्रण बना रहे।
Exam Tip: सत्ता विश्लेषण के सिद्धांत को समझाते समय, सरकार के तीनों अंगों के कार्यों और उनके बीच नियंत्रण व संतुलन के महत्व पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. लोकसभा के सदस्य के चुनाव के लिए क्या योग्यताएँ अनिवार्य है ?
Answer: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार में ये योग्यताएँ अनिवार्य हैं:
• व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए।
• उसकी उम्र कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए।
• व्यक्ति को पागल, दिवालिया या मानसिक रूप से अस्थिर घोषित नहीं किया गया होना चाहिए।
• उसे केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।
In simple words: लोकसभा सदस्य बनने के लिए व्यक्ति भारत का नागरिक हो, 25 साल से अधिक उम्र का हो, मानसिक रूप से ठीक हो और सरकारी नौकरी में न हो।
Exam Tip: लोकसभा सदस्यों की योग्यताओं को सूचीबद्ध करते समय, मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें जैसे नागरिकता, आयु, मानसिक स्थिति और लाभ का पद।
Question 3. लोकसभा और राज्यसभा की कार्यसाधक संख्या कितनी है ?
Answer: लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 545 का 1/10 भाग, अर्थात् 55 सदस्य, कार्यसाधक संख्या है। इसी प्रकार, राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 250 का 1/10 भाग, अर्थात् 25 सदस्य, कार्यसाधक संख्या है। यह न्यूनतम सदस्यों की संख्या होती है जो सदन की कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक है।
In simple words: लोकसभा को काम शुरू करने के लिए 55 सदस्य और राज्यसभा को 25 सदस्य चाहिए होते हैं।
Exam Tip: कार्यसाधक संख्या (कोरम) को स्पष्ट करते समय, लोकसभा और राज्यसभा दोनों के लिए आवश्यक 1/10 भाग के नियम का उल्लेख करें।
Question 4. राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव किस प्रकार होता है ?
Answer: राज्यसभा में कुल 250 सदस्यों में से 238 सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि 12 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। 238 सदस्यों का चुनाव राज्यों की तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के आधार पर अप्रत्यक्ष रूप से होता है। कला, साहित्य, विज्ञान, संस्कृति, खेलकूद और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि प्राप्त 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।
In simple words: राज्यसभा के सदस्य विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं, और कुछ सदस्यों को राष्ट्रपति विभिन्न क्षेत्रों में उनकी खास उपलब्धियों के लिए चुनते हैं।
Exam Tip: राज्यसभा के चुनाव प्रक्रिया में अप्रत्यक्ष चुनाव और राष्ट्रपति द्वारा मनोनयन दोनों पहलुओं को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 5. लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सदन की मर्यादा का रक्षक है । समझाइए ।।
Answer: लोकसभा का अध्यक्ष सदन के कामकाज को व्यवस्थित रूप से और निर्धारित नियमों के अनुसार चलाने पर नजर रखता है। वह सदन में शिष्टता, व्यवस्था और सदन की गरिमा बनाए रखने का कार्य करता है। अध्यक्ष लोकसभा की बैठकों के दौरान कार्यवाही का संचालन और नियमन करता है। वह सदन के सदस्यों से शिष्टाचार की अपेक्षा रखता है, और उसका निर्णय सदन में अंतिम माना जाता है। इस प्रकार, वह सदन की मर्यादा का रक्षक होता है, और एक बार चुने जाने पर वह सदन की कार्यवाही का संचालन तटस्थ और निष्पक्ष होकर करता है।
In simple words: लोकसभा अध्यक्ष सदन के सभी काम को ठीक से चलाता है, नियम बनाए रखता है और सदस्यों से अच्छा व्यवहार करने की उम्मीद करता है। उसका निर्णय अंतिम होता है।
Exam Tip: लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका को समझाते हुए, उसके मुख्य कर्तव्यों जैसे सदन की व्यवस्था बनाए रखना, कार्यवाही का संचालन करना और निष्पक्षता पर जोर दें।
Question 6. राष्ट्रपति की आपातकालीन सत्ताएँ बताइए ।
Answer: यदि राष्ट्रपति को ऐसा लगता है कि भारत या उसके किसी भी हिस्से (क्षेत्र) में वित्तीय संकट उत्पन्न हो गया है, या युद्ध, बाहरी आक्रमण, या सशस्त्र सेनाओं द्वारा विद्रोह से भारत या उसके किसी भी भाग की सुरक्षा को खतरा है, या किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था विफल हो गई है, तो वह इन तीनों परिस्थितियों में पूरे भारत या उसके किसी भाग में आपातकालीन स्थिति की घोषणा कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति सभी शक्तियाँ अपने हाथों में ले सकते हैं। इन शक्तियों में राज्यों की सरकारों को बर्खास्त करना या केंद्र सरकार के अधीन लाना शामिल है।
In simple words: राष्ट्रपति देश में वित्तीय संकट, युद्ध या राज्यों में संवैधानिक समस्या होने पर आपातकाल घोषित कर सकते हैं और सारी ताकत अपने हाथ में ले सकते हैं।
Exam Tip: राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों को सूचीबद्ध करते समय, तीनों प्रकार की आपातकालीन स्थितियों (राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय) और उनके मूल कारणों का उल्लेख करें।
Question 7. महाभियोग की कार्यवाही क्या है ?
Answer: संविधान को भंग करने के आरोप में राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश को उनके पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया को महाभियोग कहते हैं। संसद का एक सदन राष्ट्रपति के खिलाफ अभियोग पत्र पेश करता है और दूसरा सदन उसके खिलाफ कार्यवाही करता है। यदि संसद के 2/3 सदस्यों द्वारा राष्ट्रपति को दोषी पाया जाता है, तो उन्हें अपने पद से अनिवार्य रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है। जब तक राष्ट्रपति अपने पद पर कार्यरत हैं, तब तक उनके खिलाफ कोई फौजदारी मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और उन्हें गिरफ्तार या कैद की सजा नहीं हो सकती है।
In simple words: महाभियोग वह तरीका है जिससे राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश को पद से हटाया जाता है, यदि वे संविधान का पालन नहीं करते। संसद के दोनों सदन इसकी प्रक्रिया पूरी करते हैं।
Exam Tip: महाभियोग की प्रक्रिया में संसद के दोनों सदनों की भूमिका और 2/3 बहुमत की आवश्यकता को स्पष्ट करें।
Question 8. संसद की सत्ताओं और कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।
Answer: संसद की शक्तियाँ और कार्य इस प्रकार हैं: संसद की विधायी शक्तियाँ बहुत विशाल और महत्वपूर्ण हैं। संसद सामान्य और वित्तीय दोनों प्रकार के विधेयक पारित करती है। राष्ट्रपति द्वारा लागू की गई आपातकालीन घोषणा को संसद द्वारा स्वीकृत करना आवश्यक है। संसद राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग पत्र प्रस्तुत करके उन्हें उनके पद से हटा सकती है। राज्यसभा द्वारा पारित प्रस्ताव को, लोकसभा का समर्थन मिलने पर, उपराष्ट्रपति को भी अपना पद छोड़ना पड़ता है। इसके अलावा, संसद कार्यपालिका पर भी नियंत्रण रखती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण अविश्वास प्रस्ताव है। यदि विरोधी पक्ष या विरोधी दलों द्वारा रखा गया अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा द्वारा अस्वीकृत हो जाता है, तो मंत्रिमंडल को त्यागपत्र देना पड़ता है। अन्य कुछ प्रस्ताव जैसे ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव आदि के द्वारा भी सदन के सदस्य सरकार पर नियंत्रण रख सकते हैं। सरकार को संसद में अपने कामकाज और नीतियों का हिसाब देना पड़ता है। इस प्रकार संसद वह सर्वोच्च जगह है जहाँ सरकारी नीतियों की चर्चा होती है।
In simple words: संसद के पास बहुत सारी शक्तियाँ हैं। यह कानून बनाती है, पैसे से जुड़े बिल पास करती है, राष्ट्रपति के आपातकाल को मंजूरी देती है और महाभियोग लगा सकती है। यह सरकार पर भी नजर रखती है और नीतियों पर चर्चा करती है।
Exam Tip: संसद की शक्तियों का वर्णन करते समय, विधायी, वित्तीय, कार्यपालिका पर नियंत्रण और संवैधानिक भूमिका जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल करें।
Question 9. स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं की जानकारी दीजिए ।
Answer: भारत में सत्ता का विकेन्द्रीकरण ठीक ग्राम स्तर पर किया गया है। गाँव, नगर या महानगरों का प्रशासन स्वयं चुने हुए अपने प्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय स्तर की संस्थाओं में होता है, जिसे स्थानीय स्वराज्य की संस्थाएँ कहते हैं। पूरे देश में सन् 1992 में एकसमान 'पंचायती राज' तथा 'शहरी स्वशासन की संस्थाएँ' अस्तित्व में आईं।
(1) ग्राम्य स्तर पर स्वशासन की संस्थाएँ – इसमें ग्राम पंचायत, तालुका पंचायत और जिला पंचायत का स्तरीय ढाँचा है। पंचायती राज के सभी स्तरों पर स्थानीय विकास कार्यों, योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों को आर्थिक रूप से पूरा करने के लिए इन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता और साधन-सामग्री के रूप में मदद दी जाती है। जिला पंचायत का कार्यालय जिला मुख्यालय में होता है। प्रशासनिक प्रमुख 'जिला विकास अधिकारी' (DDO) होता है। तालुका पंचायत का राजनीतिक नेता तालुका प्रमुख तथा प्रशासनिक प्रधान तालुका विकास अधिकारी (TDO) होता है। ग्राम पंचायत का निर्वाचित नेता सरपंच तथा प्रशासनिक प्रमुख 'तलाटी कम मंत्री' होता है।
(2) शहरी स्तर पर स्वायत्त संस्थाएँ – इसमें नगरपालिका, महानगरपालिका और नगर निगम शामिल होते हैं। शहरों को विभिन्न वॉर्डों में बाँटकर इनका गठन होता है। वॉर्ड के अनुसार कोर्पोरेटरों की संख्या में महिलाओं को आरक्षण दिया गया है। तीनों स्तर पर बहुमत प्राप्त पक्ष का नेता मेयर बनता है। महानगरपालिका के प्रशासनिक प्रमुख को 'म्युनिसिपल कमिश्नर' कहते हैं। नगर नियोजन, जमीन अधिग्रहण, रास्ते, पुल, पानी-आपूर्ति, सफाई, गटर व्यवस्था का प्रबंधन, मकानों का निर्माण, पर्यावरण सुधार, अग्निशामक सेवाएँ, शिक्षण, स्वास्थ्य आदि कार्य करते हैं। ये कार्य लोगों से अनुदान, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर लोगों से वसूले गए कर और सरकारी अनुदान से होते हैं।
In simple words: स्थानीय स्वराज्य संस्थाएँ गाँवों और शहरों में होती हैं, जहाँ लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। गाँवों में पंचायतें और शहरों में नगर पालिकाएँ व नगर निगम होते हैं, जो अपने क्षेत्र का विकास करते हैं और लोगों की समस्याओं को हल करते हैं।
Exam Tip: स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं का वर्णन करते समय, ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों की संरचना, उनके प्रमुखों और मुख्य कार्यों को अलग-अलग समझाएँ।
Question 10. अधिकारीतंत्र (अफसरशाही) के अनिष्टों (दोष) की जानकारी दीजिए ।
Answer: सरकार की शक्ति और प्रभाव अधिकारीतंत्र में अधिक केंद्रित होने लगे हैं। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, अप्रमाणिकता, अक्षमता, गैररीति, जवाबदेही से दूर भागना जैसी प्रवृत्तियाँ अधिकारी तंत्र के लिए हानिकारक हैं। इसलिए, इन्हें रोकने के लिए प्रशासन में सतर्कता आयोग, लोकपाल और लोकायुक्त की आवश्यकता अब अधिक बढ़ गई है। ये संस्थाएँ प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं। इसके अलावा, लालफीताशाही, अत्यधिक नियम और प्रक्रियाओं के कारण निर्णय लेने में देरी भी अफसरशाही के कुछ दोष हैं।
In simple words: अफसरशाही में भ्रष्टाचार, पक्षपात और काम में देरी जैसी बुराइयाँ होती हैं। इन्हें रोकने के लिए अब सतर्कता आयोग और लोकपाल जैसी संस्थाओं की जरूरत महसूस हुई है।
Exam Tip: अधिकारीतंत्र के दोषों पर चर्चा करते समय, भ्रष्टाचार, अक्षमता, लालफीताशाही और जवाबदेही की कमी जैसे प्रमुख नकारात्मक पहलुओं को रेखांकित करें।
2. निम्नलिखित विधानों के कारण देकर समझाइए:
Question 1. भारतीय संसद द्विसदनात्मक है ।
Answer: जहाँ विधायिका दो सदनों से बनी हो, उसे द्विसदनात्मक विधायिका कहते हैं। भारतीय संसद इसी प्रकार द्विसदनात्मक है क्योंकि इसमें दो अंग हैं: ऊपरी सदन को राज्यसभा कहते हैं, और निचले सदन को लोकसभा कहते हैं। द्विसदनात्मक व्यवस्था इसलिए अपनाई गई है ताकि कानून बनाने की प्रक्रिया में गहन विचार-विमर्श हो सके और सभी राज्यों व वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। इससे विधायिका की शक्ति पर भी एक नियंत्रण बना रहता है।
In simple words: भारतीय संसद में दो सदन होते हैं - लोकसभा और राज्यसभा। इसलिए इसे द्विसदनात्मक कहते हैं ताकि कानून बनने से पहले अच्छे से विचार किया जा सके और सभी क्षेत्रों की आवाज सुनी जा सके।
Exam Tip: भारतीय संसद के द्विसदनात्मक होने का कारण बताते समय, लोकसभा और राज्यसभा दोनों के अस्तित्व और उनके महत्व को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 2. राज्यसभा स्थायी सदन है ।
Answer: भारतीय संसद का ऊपरी सदन, राज्यसभा, एक स्थायी सदन है। इसमें कुल 250 सदस्य होते हैं, जिनमें से 238 का चुनाव होता है और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। हर दूसरे वर्ष राज्यसभा के एक तिहाई (1/3) सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उतने ही नए सदस्यों का चुनाव होता है। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता। राज्यसभा का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता है, लेकिन इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। यह व्यवस्था राज्यों के हितों की रक्षा और विधायी प्रक्रिया में निरंतरता बनाए रखने में मदद करती है।
In simple words: राज्यसभा कभी भंग नहीं होती, इसलिए इसे स्थायी सदन कहते हैं। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में बदलते रहते हैं, जिससे इसकी निरंतरता बनी रहती है।
Exam Tip: राज्यसभा के स्थायी सदन होने के कारण में, इसके कभी भंग न होने और सदस्यों के कार्यकाल तथा हर दो साल में एक-तिहाई सदस्यों के सेवानिवृत्त होने की प्रक्रिया को समझाएँ।
Question 3. भारत में संसद सर्वोपरी नहीं, बल्कि संविधान सर्वोपरि है ।
Answer: भारतीय संसदीय लोकतंत्रवाला एक लोकतांत्रिक राज्य है। संघ में संसद जनता का प्रतिनिधित्व करती है। इस प्रकार, यह देश की सबसे महत्वपूर्ण और सर्वोच्च संस्था संसद है। लेकिन संसद की कार्यवाही संवैधानिक प्रक्रिया द्वारा होती है। सरकार के तीनों ही अंग संविधान की व्यवस्था के अनुसार कार्य करते हैं। इसलिए, भारत में संसद सर्वोपरी नहीं है, बल्कि संविधान सर्वोपरी है। संविधान देश का सर्वोच्च कानून है जो सभी संस्थाओं और व्यक्तियों पर लागू होता है। कोई भी कानून या कार्रवाई संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकती।
In simple words: भारत में संसद से भी ऊपर संविधान है। संसद को संविधान के नियमों के अनुसार काम करना होता है, इसलिए संविधान सबसे महत्वपूर्ण है।
Exam Tip: यह स्पष्ट करें कि भारत में संसद संविधान के दायरे में रहकर काम करती है, और संविधान सर्वोच्च होने के कारण, कोई भी संस्था इससे ऊपर नहीं है।
Question 4. स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायतंत्र लोकतंत्र की आधारशिला है ।
Answer: देश का संविधान इस देश का मूलभूत कानून है। यदि कोई कानून संविधान के साथ संगत नहीं होता है, तो न्यायपालिका उसे असंवैधानिक घोषित करके रद्द करने की शक्ति रखती है। राज्य और केंद्र सरकारें अपने-अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में रहकर ही काम करें और दूसरे के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप न करें, यह देखना न्यायपालिका का कार्य है। प्रत्येक घटक केंद्र और राज्य अपने-अपने दायरे में रहकर काम करते हैं। न्यायपालिका, कार्यपालिका और व्यवस्थापिका से स्वतंत्र है, और उसकी दृष्टि से सभी समान होते हैं। समान अपराध के लिए समान दंड की व्यवस्था की गई है। इस दृष्टि से न्यायपालिका निष्पक्ष है, जो लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
In simple words: स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह सुनिश्चित करती है कि कानून का पालन हो, सरकारें अपनी सीमा में रहें, और सभी को निष्पक्ष न्याय मिले।
Exam Tip: स्वतंत्र न्यायतंत्र के महत्व को समझाते समय, संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने, सरकारों पर नियंत्रण और सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने की भूमिका पर प्रकाश डालें।
Question 5. स्थानीय स्वराज की संस्थाएँ लोकतंत्र की प्रशिक्षण शाला तथा संविधान की प्रयोगशाला है
Answer: स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं का प्रशासन, जिसमें ग्रामीण स्तर से चुनाव, मतदान, कर्तव्य, अधिकार, जवाबदेही, प्रशासन तथा सत्ता पक्ष या विरोध पक्ष की भूमिका के बारे में प्रशिक्षण मिलता है। इन संस्थाओं में योजनाओं को लागू करने में कानून की विसंगतियों के कारण निचले स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं को समझकर ऊपरी स्तर पर उन्हें लागू करने से पहले योजनाओं के संदर्भ में पूरी सावधानी, निरीक्षण और आवश्यक सुरक्षा के लिए पर्याप्त अवसर मिलते हैं। इसलिए स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं को लोकतंत्र की प्रशिक्षण शाला और प्रशासनिक सुरक्षा की प्रयोगशाला कहा जाता है, जहाँ नागरिक प्रत्यक्ष रूप से शासन में भागीदारी करते हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया सीखते हैं।
In simple words: स्थानीय स्वराज्य संस्थाएँ लोगों को चुनाव, कर्तव्य और प्रशासन के बारे में सीखने का मौका देती हैं। ये संस्थाएँ लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती हैं और संविधान के सिद्धांतों को व्यवहार में लाती हैं।
Exam Tip: स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को 'लोकतंत्र की प्रशिक्षण शाला' कहने का कारण बताते समय, नागरिकों की भागीदारी, जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुभव पर जोर दें।
Question 6. राज्य की विधानसभा राज्य के लोगों की इच्छा का प्रतिबिम्ब दर्शाती है ।
Answer: भारत के प्रत्येक राज्य के विधानमंडल में विधानसभा के सदस्यों का चुनाव वयस्क मताधिकार द्वारा 5 वर्षों के लिए होता है। विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के परामर्श से मंत्रिमंडल का गठन होता है। विधानसभा जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। यदि सरकार जनता की इच्छानुसार कार्य नहीं करती है, उसकी आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरती है, तो अगले चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार, विधानसभा सीधे तौर पर राज्य के लोगों की इच्छाओं और जरूरतों को दर्शाती है, क्योंकि इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
In simple words: विधानसभा में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि होते हैं। अगर सरकार जनता के हिसाब से काम नहीं करती, तो उसे अगले चुनाव में हार मिलती है। इसलिए यह जनता की इच्छा को दिखाती है।
Exam Tip: विधानसभा को जनता की इच्छा का प्रतिबिंब दर्शाने वाला बताते हुए, सीधे चुनाव, बहुमत दल की सरकार और जनता के प्रति जवाबदेही जैसे बिंदुओं पर जोर दें।
Question 7. राज्यपाल राज्य और केन्द्र के बीच एक कड़ी की भूमिका निभाता हैं ।
Answer: राज्य के सर्वोच्च पद के रूप में राज्यपाल की नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक और औपचारिक प्रधान होता है। राज्यपाल राज्य में केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। वह मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के कार्यों से केंद्र को सूचित करता रहता है। इस प्रकार, राज्यपाल राज्य और केंद्र के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं, जो दोनों स्तरों के बीच समन्वय बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: राज्यपाल को केंद्र सरकार राष्ट्रपति के जरिए चुनती है। वह राज्य का मुखिया होता है और केंद्र सरकार को राज्य के कामों की जानकारी देता है, जिससे केंद्र और राज्य के बीच संबंध बना रहता है।
Exam Tip: राज्यपाल की भूमिका को केंद्र और राज्य के बीच की कड़ी के रूप में स्पष्ट करते हुए, उनकी नियुक्ति प्रक्रिया और राज्य में केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में उनके कार्यों का उल्लेख करें।
Question 8. लोकसभा देश की चाबीरूप प्रजाकीय संस्था है ।
Answer: संसद के निचले सदन को लोकसभा कहा जाता है, जो लोगों द्वारा प्रत्यक्ष पद्धति से निर्वाचित सदस्यों से बनती है। लोकसभा जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। इसलिए लोकसभा द्वारा जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं के अनुसार कानून बनाए जाते हैं। लोकसभा सरकार पर नियंत्रण रखती है; सरकार लोकसभा के प्रति जवाबदार होती है। लोकसभा में सभी प्रकार के आर्थिक (वित्तीय) बिल पेश और मंजूर किए जाते हैं। लोकसभा का गठन जनता के प्रतिनिधियों से होता है और सरकार का गठन लोकसभा में बहुमत के आधार पर होता है। इस प्रकार, लोकसभा प्रजा की चाबीरूप संस्था है, क्योंकि यह सीधे जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है।
In simple words: लोकसभा सीधे जनता के चुने हुए सदस्यों से बनती है, इसलिए यह जनता की आवाज को दिखाती है। यह कानून बनाती है, सरकार पर नजर रखती है और वित्तीय बिल पास करती है, जिससे यह जनता की सबसे महत्वपूर्ण संस्था बन जाती है।
Exam Tip: लोकसभा को 'प्रजाकीय संस्था' कहने का कारण बताते समय, प्रत्यक्ष चुनाव, जनता के प्रति जवाबदेही और नीतियों तथा वित्त पर नियंत्रण जैसी उसकी मुख्य भूमिकाओं पर जोर दें।
Question 9. राजकीय कार्यपालिका तथा प्रशासनिक कार्यपालिका के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध राज्य के सुशासन की पूर्व शर्त है ।
Answer: भारतीय संघीय कार्यपालिका में राजनीतिक कार्यपालिका प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल तथा प्रशासनिक कार्यपालिका राष्ट्रपति होते हैं। इसी प्रकार, सत्ता के सभी स्तरों पर दोहरी कार्यपालिका होती है। राजनीतिक कार्यपालिका जनता का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए वह वास्तविक शक्तियों का उपयोग करती है। प्रशासनिक कार्यपालिका संवैधानिक कार्यपालिका होती है। दोनों ही कार्यपालिकाएँ जनहित में कार्य करती हैं। इसलिए, दोनों में मैत्रीपूर्ण संबंध होगा, तभी राज्य में सुशासन स्थापित हो पाएगा। राजनीतिक कार्यपालिका नीतिगत निर्णय लेती है, जबकि प्रशासनिक कार्यपालिका उन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करती है। इन दोनों के बीच अच्छा तालमेल और सहयोग राज्य के सफल शासन के लिए आवश्यक है।
In simple words: सरकार के अच्छे कामों के लिए राजनीतिक (मंत्री) और प्रशासनिक (अफसर) कार्यपालिका के बीच दोस्ती और सहयोग होना जरूरी है। मंत्री नीतियाँ बनाते हैं और अफसर उन्हें लागू करते हैं, इसलिए उनका मिलकर काम करना राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Exam Tip: राजकीय और प्रशासनिक कार्यपालिका के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध के महत्व को समझाते समय, उनकी अलग-अलग भूमिकाओं (नीति निर्माण और कार्यान्वयन) और सुशासन के लिए उनके समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
Question 10. सक्षम तथा सक्रिय सनदी अधिकारी सरकार की रीढ़ के समान है ।
Answer: राजनीतिक कार्यपालिका को नीति निर्माण में और उनके कार्यान्वयन में प्रशासनिक कार्यपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नीतियों के निर्माण और नीतियों का पालन करवाने की सतत चलने वाली प्रक्रिया में कार्यपालिका को प्रशासनिक तंत्र महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। विदेशी संबंधों, सुरक्षा, संरक्षण, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वाणिज्य, परमाणु शक्ति, ऊर्जा, उत्पादन, वितरण, बैंकिंग, बीमा, विदेशी मुद्रा आदि क्षेत्रों में कुशल, व्यावसायिक योग्यता वाले और अनुभवी लोग (विशेषज्ञ सनदी अधिकारी) सरकार की रीढ़ के समान हैं। ये अधिकारी सरकार की नीतियों को स्थिरता और निरंतरता प्रदान करते हैं, भले ही राजनीतिक नेतृत्व बदल जाए।
In simple words: अनुभवी और सक्रिय सरकारी अधिकारी सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। वे नीतियाँ बनाने और लागू करने में मदद करते हैं, और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता से सरकार को मजबूत बनाते हैं।
Exam Tip: सनदी अधिकारियों को सरकार की रीढ़ की हड्डी कहने का कारण बताते समय, नीति कार्यान्वयन में उनकी भूमिका, विशेषज्ञता और प्रशासन में निरंतरता प्रदान करने की उनकी क्षमता पर जोर दें।
3. संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
Question 1.
Answer: (सरकार के अंग) सरकार के तीन मुख्य अंग होते हैं: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। विधायिका का मुख्य कार्य कानून बनाना है, जैसे कि संसद या राज्य विधानसभाएँ। कार्यपालिका का काम इन कानूनों को लागू करना है, जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल शामिल होते हैं। न्यायपालिका का कार्य कानूनों की व्याख्या करना और न्याय सुनिश्चित करना है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और अन्य अधीनस्थ न्यायालय शामिल हैं। इन तीनों अंगों का स्वतंत्र रूप से कार्य करना और एक-दूसरे पर नियंत्रण रखना लोकतंत्र के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे शक्ति का संतुलन बना रहता है।
In simple words: सरकार के तीन मुख्य हिस्से होते हैं - कानून बनाने वाली (विधायिका), उन्हें लागू करने वाली (कार्यपालिका) और न्याय देने वाली (न्यायपालिका)। ये तीनों मिलकर देश का शासन चलाते हैं और एक-दूसरे पर नजर रखते हैं।
Exam Tip: संक्षिप्त टिप्पणी में सरकार के अंगों पर लिखते समय, प्रत्येक अंग के मुख्य कार्य और उनके बीच के शक्ति संतुलन को संक्षेप में समझाएँ।
Question 2.
Answer: (भारतीय न्यायपालिका) भारतीय न्यायपालिका एक स्वतंत्र और एकीकृत प्रणाली है जो देश में न्याय प्रदान करती है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और जिला तथा अधीनस्थ न्यायालय शामिल हैं। न्यायपालिका का मुख्य कार्य संविधान की रक्षा करना, कानूनों की व्याख्या करना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। यह सुनिश्चित करती है कि विधायिका द्वारा बनाए गए कानून संविधान के अनुसार हों और कार्यपालिका द्वारा उनका सही ढंग से पालन हो। इसकी स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह सरकारों की मनमानी पर अंकुश लगाती है और नागरिकों को निष्पक्ष न्याय का अधिकार देती है। न्यायधीशों की नियुक्ति और पद से हटाने की प्रक्रिया भी उनकी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए बनाई गई है।
In simple words: भारत की न्यायपालिका स्वतंत्र है और सभी को न्याय देती है। यह संविधान और लोगों के अधिकारों की रक्षा करती है और सुनिश्चित करती है कि कानून सही ढंग से लागू हों।
Exam Tip: संक्षिप्त टिप्पणी में भारतीय न्यायपालिका पर लिखते समय, इसकी संरचना (सर्वोच्च, उच्च, अधीनस्थ न्यायालय), स्वतंत्रता और मुख्य कार्यों (संविधान की रक्षा, न्याय प्रदान करना) पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. प्रधानमंत्रीः स्थान, कार्य और सत्ताएँ।
Answer: प्रधानमंत्री संघ सरकार में कार्यपालिका का वास्तविक अध्यक्ष होता है। वास्तव में, राष्ट्रपति की शक्तियों का उपयोग व्यवहार में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद ही करती है। प्रधानमंत्री मंत्रियों के विभागों का विभाजन करता है और मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है। वे सरकार के नीतिगत निर्णय लेते हैं; भिन्न-भिन्न विभागों के कामकाज का समन्वय करते हैं। पद के आधार पर वे योजना आयोग के अध्यक्ष भी होते हैं। प्रधानमंत्री का स्थान सबसे महत्वपूर्ण होने के कारण प्रधानमंत्री के नाम से ही सरकार की पहचान होती है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के नेता होते हैं। मंत्रिपरिषद अपने सामूहिक दायित्व के सिद्धांत के अनुसार कार्य करती है और संयुक्त रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
In simple words: प्रधानमंत्री सरकार का असली मुखिया होता है। वह मंत्रियों को काम बाँटता है, मीटिंग बुलाता है, बड़े फैसले लेता है और सभी विभागों को साथ मिलकर काम करवाता है।
Exam Tip: प्रधानमंत्री की भूमिका पर टिप्पणी करते समय, उन्हें कार्यपालिका का वास्तविक अध्यक्ष, मंत्रिपरिषद के नेता और नीति-निर्धारण में उनकी केंद्रीय भूमिका पर जोर दें।
Question 4. राज्य विधानसभा की कार्यपालिका विषयक सत्ताएँ:
Answer: राज्य की विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल की सरकार बनती है। कार्यपालिका विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। विधानसभा राज्य के लिए नए कानून बनाने तथा पुराने कानूनों में संशोधन करने का कार्य करती है। कोई भी सामान्य और वित्तीय विधेयक विधानसभा में पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा, विधानसभा बजट को मंजूरी देती है और राज्य के वित्त पर नियंत्रण रखती है। यह कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) के कार्यों की निगरानी करती है और मंत्रियों से प्रश्न पूछकर जवाबदेही सुनिश्चित करती है। अविश्वास प्रस्ताव पारित करके यह मंत्रिपरिषद को हटा भी सकती है, जिससे कार्यपालिका पर विधायिका का मजबूत नियंत्रण बना रहता है।
In simple words: राज्य विधानसभा राज्य के लिए कानून बनाती है, बजट पास करती है, सरकार के कामों पर नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर सरकार को हटा भी सकती है।
Exam Tip: राज्य विधानसभा की कार्यपालिका विषयक शक्तियों को समझाते समय, कानून बनाने, वित्त पर नियंत्रण और कार्यपालिका पर निगरानी रखने की उसकी मुख्य भूमिकाओं पर ध्यान दें।
Question 5. विधेयक कानून किस पद्धति से बनता है ? टिप्पणी लिखिए ।
Answer: सामान्य विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। एक सामान्य विधेयक मंत्री या किसी भी सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है। विधेयक को प्रस्तुत करने से पहले, जिस सदन में प्रस्तुत करना होता है उसके अध्यक्ष की अनुमति लेनी पड़ती है। एक सदन में विधेयक, तीन बार की वाचन प्रक्रिया को पूरा करने के बाद दूसरे सदन में जाता है। दूसरे सदन में, विधेयक तीन बार वाचनों से गुजरने के बाद यह माना जाता है कि उसे दोनों सदनों ने पारित कर लिया। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वह विधेयक कानून बन जाता है। यदि विधेयक के विषय में दोनों सदनों में सहमति नहीं होती है, तो राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आयोजित करते हैं, जिससे बहुमत से पारित किया जा सके। राष्ट्रपति दोनों सदनों द्वारा पारित किए गए विधेयक को स्वीकार कर सकते हैं, या पुनर्विचार के लिए संसद में वापस भेज सकते हैं। पुनर्विचार के लिए आए हुए विधेयक में संशोधन सहित या बिना किसी संशोधन के राष्ट्रपति को पुनः मंजूरी हेतु भेजा गया विधेयक स्वीकार करना पड़ता है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही विधेयक कानून का रूप ले लेता है।
In simple words: कोई भी नया कानून बनाने के लिए पहले एक विधेयक संसद के किसी सदन में पेश किया जाता है। फिर उस पर तीन बार चर्चा होती है, और दूसरे सदन में भी यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। दोनों सदनों से पास होने के बाद, राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही वह विधेयक कानून बन जाता है।
Exam Tip: विधेयक से कानून बनने की प्रक्रिया को समझाते समय, सदन में प्रस्तुति, तीन वाचन, दूसरे सदन की भूमिका, संयुक्त बैठक (यदि आवश्यक हो) और राष्ट्रपति की सहमति के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से बताएं।
Question 6.
Answer: (राष्ट्रपति की भूमिका) राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक प्रमुख होता है और देश का सर्वोच्च पद धारण करता है। वह तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति भी होता है। राष्ट्रपति की मुख्य भूमिकाओं में प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की नियुक्ति करना, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करना, राज्यों के राज्यपालों और विभिन्न आयोगों के अध्यक्षों की नियुक्ति करना शामिल है। सभी कानून राष्ट्रपति की सहमति के बाद ही प्रभावी होते हैं, और वह आपातकाल की घोषणा भी कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक कार्यकारी शक्तियाँ प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं, राष्ट्रपति एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक और संवैधानिक भूमिका निभाते हैं, जो देश की एकता और अखंडता का प्रतीक हैं।
In simple words: राष्ट्रपति भारत का सबसे बड़ा संवैधानिक अधिकारी होता है। वह प्रधानमंत्री, न्यायाधीशों और राज्यपालों की नियुक्ति करता है। सभी कानून उनकी मंजूरी के बाद ही लागू होते हैं, और वह आपातकाल भी लगा सकते हैं।
Exam Tip: राष्ट्रपति की भूमिका पर संक्षिप्त टिप्पणी करते समय, उनकी संवैधानिक प्रमुखता, प्रमुख नियुक्तियाँ, विधायी शक्तियाँ और आपातकालीन अधिकारों को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 7. राज्यसभा का महत्त्व और सीमाएँ:
Answer: राज्यसभा एक स्थायी सदन है, वह कभी भंग नहीं होता है। विधेयक को कानून बनाने में राज्यसभा की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकार के मंत्रिमंडल में राज्यसभा के सदस्य भी होते हैं। किसी भी विधेयक के तीनों वाचन राज्यसभा में भी होते हैं। हालांकि, वित्तीय विधेयकों के मामले में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित हैं; इसे वित्तीय विधेयक को पारित करके 14 दिनों के अंदर लोकसभा में वापस भेजना होता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो उसे पारित हुआ मान लिया जाता है। इस दृष्टि से राज्यसभा की स्थिति गौण है। लोकसभा किसी भी विधेयक के विषय में राज्यसभा की सिफारिशें मानने के लिए बाध्य नहीं है, विशेषकर वित्तीय मामलों में।
In simple words: राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कानून बनाने में महत्वपूर्ण है और कुछ मंत्री भी यहीं से होते हैं। लेकिन पैसों से जुड़े कानूनों में इसकी ताकत कम होती है, और लोकसभा इसकी सलाह मानने को मजबूर नहीं होती।
Exam Tip: राज्यसभा के महत्व और सीमाओं पर टिप्पणी करते समय, इसकी स्थायी प्रकृति और विधायी भूमिका को उजागर करें, साथ ही वित्तीय विधेयकों के संबंध में इसकी सीमित शक्तियों का भी उल्लेख करें।
4. निम्नलिखित में से योग्य विकल्प पसंद कीजिए:
Question 1. विधानसभा के सदस्यों के लिए आयुसीमा कितने वर्ष निश्चित की गई है ?
(A) 25 वर्ष
(B) 30 वर्ष
(C) 35 वर्ष
(D) 18 वर्ष
Answer: (A) 25 वर्ष
In simple words: विधानसभा का सदस्य बनने के लिए कम से कम 25 साल की उम्र होनी चाहिए।
Exam Tip: विधानसभा सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है; यह अक्सर लोकसभा सदस्य की आयु के समान होती है।
Question 2. लोकसभा की सदस्य संख्या तथा राज्यसभा की सदस्य संख्या कितनी निश्चित की गयी है ?
(A) 545, 250
(B) 455, 350
(C) 182, 11
(D) 543, 238
Answer: (A) 545, 250
In simple words: लोकसभा में 545 और राज्यसभा में 250 सदस्य होते हैं।
Exam Tip: लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 हो सकती है, लेकिन वर्तमान में यह 545 है। राज्यसभा की अधिकतम संख्या 250 है।
Question 3. नीचे के किस राज्य में विधानमण्डल को दो सदन है ?
(A) कर्णाटक
(B) आंध्र प्रदेश
(C) गुजरात
(D) राजस्थान
Answer: (A) कर्णाटक
In simple words: कर्नाटक राज्य में विधानमण्डल के दो सदन हैं, जिन्हें विधानसभा और विधान परिषद कहते हैं।
Exam Tip: भारत के कुछ ही राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है। यह याद रखें कि आंध्र प्रदेश में पहले विधान परिषद थी, फिर हटाई गई और अब फिर से है, लेकिन प्रश्न के संदर्भ में कर्नाटक सही उत्तर है।
Question 4. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है ?
(A) प्रधानमंत्री
(B) राज्यपाल
(C) राष्ट्रपति
(D) उपराष्ट्रपति
Answer: (C) राष्ट्रपति
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को राष्ट्रपति चुनते हैं।
Exam Tip: राष्ट्रपति भारत में सभी महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्तियाँ करते हैं, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी शामिल हैं।
Question 5. लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है ?
(A) 4 वर्ष
(B) 6 वर्ष
(C) 2 वर्ष
(D) 5 वर्ष
Answer: (D) 5 वर्ष
In simple words: लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का होता है, जिसके बाद नए चुनाव होते हैं।
Exam Tip: लोकसभा का कार्यकाल आमतौर पर 5 वर्ष का होता है, जब तक कि इसे पहले भंग न किया जाए।
Question 6. राष्ट्रपति दो ऐंग्लो इण्डियन सदस्यों की नियुक्ति किस सदन में करता है ?
(A) राज्यसभा
(B) लोकसभा
(C) गोवा विधानसभा
(D) नीति आयोग
Answer: (B) लोकसभा
In simple words: राष्ट्रपति लोकसभा में दो एंग्लो-इंडियन सदस्यों को नियुक्त करते हैं, यदि उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व न हो।
Exam Tip: राष्ट्रपति लोकसभा में अधिकतम दो एंग्लो-इंडियन सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं यदि वे समझते हैं कि इस समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।
Question 7. राष्ट्रपति को पद और गोपनियता की शपथ कौन दिलाता है ?
(A) उपराष्ट्रपति
(B) लोकसभा अध्यक्ष
(C) प्रधानमंत्री
(D) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
Answer: (D) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
In simple words: राष्ट्रपति को पद और गोपनीयता की शपथ सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं।
Exam Tip: राष्ट्रपति को शपथ दिलाने का संवैधानिक कर्तव्य सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का होता है।
Question 8. जोड़े मिलाइए:
| प्रशासनिक संस्थाएँ | प्रशासनिक संस्थाओं के प्रमुख |
|---|---|
| 1. जिला सेवासदन | (A) मेयर |
| 2. महानगरपालिका | (B) DDO (डी.डी.ओ.) |
| 3. जिला पंचायत | (C) कलेक्टर |
(B) 1 – C, 2 – D, 3 – B
(C) 1 – B, 2 – C, 3 – D
(D) 1 – C, 2 – A, 3 – B
Answer: (B) 1 – C, 2 – D, 3 – B
In simple words: सही जोड़ी है: जिला सेवासदन को कलेक्टर, महानगरपालिका को DDO (डी.डी.ओ.) और जिला पंचायत को मेयर से।
Exam Tip: प्रशासनिक संस्थाओं और उनके प्रमुखों की सही पहचान करने के लिए प्रत्येक पद की जिम्मेदारी और क्षेत्राधिकार को समझें।
Question 9. राष्ट्रपति राज्यसभा के कितने सदस्यों की नियुक्ति करता है।
(A) 238
(B) 12
(C) 2
(D) 14
Answer: (B) 12
In simple words: राष्ट्रपति राज्यसभा में कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं।
Exam Tip: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्ति होते हैं।
Question 10. संसद में बजट कौन प्रस्तुत करता है ?
(A) प्रधानमंत्री
(B) गृहमंत्री
(C) वित्तमंत्री
(D) सांसद
Answer: (C) वित्तमंत्री
In simple words: भारत में वित्तमंत्री संसद में सरकार का वार्षिक बजट पेश करते हैं।
Exam Tip: केंद्रीय बजट हमेशा वित्तमंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है, जो सरकार की वित्तीय नीतियों और योजनाओं को दर्शाता है।
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