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Detailed अभ्यास 04 कृदन्तपदानि GSEB Solutions for Class 9 Sanskrit
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Class 9 Sanskrit अभ्यास 04 कृदन्तपदानि GSEB Solutions PDF
GSEB Class 9 Sanskrit कुदन्तपदानि Textbook Questions and Answers
Question 1. अधोलिखित कृदन्तपदानां प्रकार लिखत।
1. गत्वा
2. पातुम्
3. रक्षितुम्
4. समागत्य
Answer:
1. गत्वा – सम्बन्धक भूतकृदन्त-त्वान्त।
2. पातुम् – हेत्वर्थ कृदन्त – तुमन्त अव्यय।
3. रक्षितुम् – हेत्वर्थ कृदन्त – तुमन्त अव्यय।
4. समागत्य – सम्बन्धक भूतकृदन्त – ल्यबन्त अव्यय।
In simple words: यहाँ दिए गए शब्दों के प्रकार बताए गए हैं। 'गत्वा' और 'समागत्य' जैसे शब्द सम्बन्धक भूतकृदन्त होते हैं, जबकि 'पातुम्' और 'रक्षितुम्' जैसे शब्द हेत्वर्थ कृदन्त होते हैं।
Exam Tip: कृदन्तपदों के प्रकार को उनके प्रत्यय (जैसे त्वान्त, तुमन्त, ल्यबन्त) के आधार पर पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 2. अधोलिखितेषु पदेषु संबंधक भूतकृदन्तपदानां चयनं कुरुत।
1. अवलोक्य
2. ज्ञातुम्
3. भूत्वा
4. विहस्य
5. पराजेतुम्
Answer:
1. अवलोक्य – सम्बन्धक भूतकृदन्त. – ल्यबन्त।
2. ज्ञातुम् – यह सम्बन्धक भूतकृदन्त नहीं है।
3. भूत्वा – सम्बन्धक भूतकृदन्त – त्वान्त अव्यय।
4. विहस्य – सम्बन्धक भूतकृदन्त – ल्यबन्त अव्यय।
5. पराजेतुम् – यह सम्बन्धक भूतकृदन्त नहीं है।
In simple words: आपको दिए गए शब्दों में से वे शब्द चुनने थे जो 'सम्बन्धक भूतकृदन्त' हैं। 'अवलोक्य', 'भूत्वा', और 'विहस्य' ऐसे शब्द हैं, जबकि 'ज्ञातुम्' और 'पराजेतुम्' नहीं हैं।
Exam Tip: 'सम्बन्धक भूतकृदन्त' शब्द आमतौर पर 'त्वान्त' या 'ल्यबन्त' प्रत्यय के साथ समाप्त होते हैं, जो एक क्रिया के बाद दूसरी क्रिया के होने का संकेत देते हैं।
Question 3. निम्नलिखितानां कृदन्तानां प्रत्ययनिर्देशपूर्वकं प्रकार लिखत।
1. क्षन्तुम्
2. विहाय
3. परित्यज्य
4. गन्तुम्
5. उपसृत्य
6. गृहीत्वा
Answer:
1. क्षन्तुम् – तुमन्त अव्ययम्।
2. विहाय – ल्यबन्त अव्ययम्।
3. परित्याज्य – ल्यबन्त अव्ययम्।
4. गन्तुम – तुमन्त अव्ययम्।
5. उपसृत्य – ल्यबन्त अव्ययम्।
6. गृहीत्वा – त्वान्त अव्ययम्।
In simple words: यहाँ हर शब्द के अंत में लगने वाले प्रत्यय और उसके प्रकार को बताया गया है। जैसे 'क्षन्तुम्' में 'तुमन्त' और 'विहाय' में 'ल्यबन्त' प्रत्यय लगा है।
Exam Tip: प्रत्येक कृदन्त पद का सही प्रत्यय और उसका प्रकार याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. कोष्ठकात् योग्य पदं चित्वा रेखांकित पदं परिवर्त्य वाक्य पुनः लिखत।
(प्रविश्य, पानाय, आगन्तुम्, अनुभूय, पठितुम्, भूत्वा)
1. सिद्धार्थः दुःखम् अनुभवति। संसारं परित्यजति।
2. मृगः जलं पातुम् इतः ततः धावति।
3. त्रीशा पठनाय विद्यालय गच्छति।
4. शिशवः गृहम् आगमनाय यतन्ते।
5. शृगालः गुहां प्रविशति। शयनं करोति।
Answer:
1. सिद्धार्थ दुःखम् अनुभूय संसारः परित्यजति।
2. मृगः जलस्य पानाय इतः ततः धावति।
3. त्रीशा पठितुम् विद्यालयं गच्छति।
4. शिशवः गृहम् आगन्तुम् यतन्ते।
5. शृगालः गुहां प्रविश्य शयनं करोति।
In simple words: आपको कोष्ठक में दिए गए सही शब्द का चयन करके रेखांकित पद को बदलना था और वाक्य को फिर से लिखना था। सही शब्दों का उपयोग करके वाक्य अब पूरी तरह से नए रूप में लिखे गए हैं।
Exam Tip: कोष्ठक से सही पद का चयन करते समय वाक्य के अर्थ और व्याकरणिक संरचना का ध्यान रखें।
Question 5. अधोलिखितानां पदानां स्थाने योग्य कदन्तपद लिखत।
1. पानाय
2. गमनाय
3. दर्शनाय
4. पठनाय
5. लेखनाय
Answer:
1. पानाय – पातुम् (पीने के लिए)
2. गमनाय – गन्तुम् (जाने के लिए)
3. दर्शनाय – द्रष्टुम् (देखने के लिए)
4. पठनाय – पठितुम् (पढ़ने के लिए)
5. लेखनाय – लेखितम (लिखने के लिए)
In simple words: आपको प्रत्येक शब्द के स्थान पर एक उचित कृदन्त पद लिखना था। उदाहरण के लिए, 'पानाय' का कृदन्त पद 'पातुम्' है, जिसका अर्थ 'पीने के लिए' होता है।
Exam Tip: चतुर्थी विभक्ति के स्थान पर 'तुमुन्' प्रत्ययान्त अव्यय का प्रयोग किया जाता है, जिसका अर्थ 'के लिए' होता है।
GSEB Class 9 Sanskrit कृदन्तपदानि Additional Important Questions and Answers
Question 1. अधोलिखतेषु पदं विचित्व रिक्तस्थानानि पूर्यन्ताम्।
1. छात्राः जन्तुशाला .................... पंक्तिबद्धाः तिष्ठन्ति।
2. दानशीलाः वस्त्राणि .................... आगच्छन्ति।
3. सभायां शान्तिव्यवस्था .................... आरक्षकां सन्ति।
4. पुस्तकप्रदर्शन्यां जनाः पुस्तकानि .................... अगच्छन्ति।
5. मेलापके परिवारसदस्याः मिष्ठान्नं .................... उपविशन्ति।
Answer:
1. गन्तुम्
2. दातुम्
3. कर्तुम्
4. क्रेतुम्
5. खादितुम्
In simple words: आपको दिए गए रिक्त स्थानों को सही शब्दों से भरना था। सही शब्द हैं 'गन्तुम्', 'दातुम्', 'कर्तुम्', 'क्रेतुम्', और 'खादितुम्'।
Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय वाक्य के संदर्भ और व्याकरणिक रूप पर ध्यान दें।
Question 2. पर्वक्रिया पदेन 'तमन' इति संयोज्य वाक्यमेकं लिखत।
1. सुलेखा आपणं गच्छति। सा यानम् आरोहति।
2. माता आनं कृन्तति। सा छुरिकाम् आनयति।
3. पंकजः गुरुं प्रदर्शयति। सः लेख लिखति।
4. कन्या दीप प्रज्वालयति। सा दीपशालकां आनयति।
5. जनकः धनं प्रेषयति। सः धनादेशं कारयति।
Answer:
1. सुलेखा आपणं गन्तुम् यानम् आरोहति।
2. माता आनं कृर्तितुम् छुरिकाम् आनयति।
3. पंकजः गुरुं प्रदर्शयितुं लेख लिखति।
4. कन्या दीप प्रज्वालयितुम् दीपशालकां आनयति।
5. जनकः धनं प्रेषयितुं धनादेशं कारयति।
In simple words: आपको प्रत्येक जोड़े के वाक्यों को 'तुमुन्' प्रत्यय का उपयोग करके एक वाक्य में बदलना था। यह पिछले वाक्य की क्रिया को उद्देश्य में बदलकर किया जाता है।
Exam Tip: 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग तब होता है जब एक क्रिया का उद्देश्य दूसरी क्रिया को दर्शाना हो।
Question 3. अत्र वाक्यद्वयं लिखितम्। प्रथमवाक्यस्य क्रियास्थाने क्त्वा प्रत्ययान्तं प्रयुज्य एकं वाक्यं विरच्यताम्।
1. सुरेशः गच्छति। सा फलानि आनयति।
2. कमला धावति। कन्दुकं गृहणाति।
3. उषा खादति। सा भ्रमति।
4. मयूरः नृत्यति। सः वृक्षे विश्राम्यति।
5. महिला हास्यकथां शृणोति। सा उच्चैः हसति।
Answer:
1. सुरेशः गत्वा फलानि आनयति।
2. कमला धावित्वा कन्दुकं गृहणाति।
3. उषा खादित्वा भ्रमति।
4. मयूरः निर्तित्वा वृक्षे विश्राम्यति।
5. महिला हास्यकथां श्रुत्वा । उच्चैः हसति।
In simple words: आपको दिए गए दो वाक्यों को 'क्त्वा' प्रत्यय का उपयोग करके एक वाक्य में बदलना था। इसमें पहली क्रिया 'क्त्वा' रूप में बदलकर मुख्य क्रिया से पहले आती है।
Exam Tip: 'क्त्वा' प्रत्यय का प्रयोग तब होता है जब एक क्रिया समाप्त होने के तुरंत बाद दूसरी क्रिया होती है और दोनों क्रियाओं का कर्ता एक ही होता है।
Question 4. प्रथमवाक्यस्य वृत्तान्तर्गतेन क्रियापदेन सह 'ल्यप् प्रत्ययं प्रयुज्य वाक्यमेकं रचयत।
1. शिष्यः विद्यालयं प्रविशति सः गुरुं प्रणमति।
2. छात्रा खटिकाम् आनयति सा श्यामपट्टे लिखति।
3. वानरः वृक्षम् आशेहति सः जम्बुफलानि पातयति ।
4. आरक्षकाः सीमाप्रदेशं प्रप्नुवन्ति ते देशं रक्षन्ति ।
5. देशभक्तः मातृभूमि प्राणयन्ति ते सुखं लभन्ते।
Answer:
1. शिष्यः विद्यालयं प्रविश्य गुरुं प्रणमति।
2. छात्रा खटिकाम् आनीय श्यामपट्टे लिखति।
3. वानरः वृक्षम् अरूह्य जम्बुपलानि पातयति।
4. आरक्षकाः सीमाप्रदेशं प्राप्य देशं रक्षन्ति।
5. देशभक्तः मातृभूमि प्रणम्य सुखं लभन्ते।
In simple words: आपको प्रथम वाक्य में दी गई क्रिया के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय का उपयोग करके एक नया वाक्य बनाना था। यह क्रिया में उपसर्ग जोड़कर किया गया, जैसे 'प्रविशति' से 'प्रविश्य'।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय का प्रयोग तब होता है जब क्रिया से पहले उपसर्ग हो और क्रिया के बाद कोई दूसरी क्रिया होती है, जिसका कर्ता एक ही हो।
Question 5. निम्नलिखितान् स्थूलपदेषु प्रत्यान् विभज्य शुद्धं पदं चिनुत।
1. कार्यं समाप्य पठ।
(क) सम् + आप् + ल्यप्
(ख) सं + आप् + ल्यप्
(ग) सम् + आप + ल्यप्
(घ) सम + आप + ल्यप्
Answer: (क) सम् + आप् + ल्यप्
In simple words: 'समाप्य' शब्द 'सम्' उपसर्ग, 'आप्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय का प्रयोग होने पर धातु से पहले उपसर्ग होता है और 'य' शेष बचता है।
Question 2. सर्वं विज्ञाय रामः अवदत्।
(क) विज्ञा + य
(ख) वि + ज्ञा + ल्यप्
(ग) विज्ञा + ल्यप्
(घ) विज्ञा + ल्यप
Answer: (ख) वि + ज्ञा + ल्यप्
In simple words: 'विज्ञाय' शब्द 'वि' उपसर्ग, 'ज्ञा' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय के लिए हमेशा धातु से पहले एक उपसर्ग होता है और अंत में 'य' ध्वनि आती है।
Question 3. गृहम् आगत्य तस्य सेवायां तत्परा अभवत्।।
(क) आ + गम् + ल्यप्
(ख) आ + गम + ल्यप्
(ग) आगत् + य
(घ) आग्म् + त्यप्
Answer: (क) आ + गम् + ल्यप्
In simple words: 'आगत्य' शब्द 'आ' उपसर्ग, 'गम्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: धातुओं के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय लगाते समय, उपसर्ग और मूल धातु का सही संयोजन याद रखें।
Question 4. किम् नत्वा तत्र गमिष्यति?
(क) नम् + कत्वा
(ख) नम् + त्वा
(ग) नम + कत्वा
(घ) नम् + क्त्वा
Answer: (घ) नम् + क्त्वा
In simple words: 'नत्वा' शब्द 'नम्' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: कुछ धातुओं में 'क्त्वा' प्रत्यय लगाने पर 'क्' का लोप हो जाता है और 'त्वा' शेष रहता है।
Question 5. सर्वे मिलित्वा प्रयत्नं कुर्वन्ति।।
(क) मिल् + क्त्वा
(ख) मिल् + त्वा
(ग) मिलि + त्वा
(घ) मिलि + कत्वा
Answer: (क) मिल् + क्त्वा
In simple words: 'मिलित्वा' शब्द 'मिल्' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'इ' कारांत धातुओं में 'क्त्वा' प्रत्यय जुड़ने पर 'इत्वा' रूप बनता है।
Question 6. रामं दृष्ट्वा सीता अवदत्।
(क) दृश् + कत्वा
(ख) दृश् + क्त्वा
(ग) दृश् + क्तवा
(घ) दृश + कत्वा
Answer: (ख) दृश् + क्त्वा
In simple words: 'दृष्ट्वा' शब्द 'दृश्' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'श' अंत वाली धातुओं में 'क्त्वा' प्रत्यय जुड़ने पर 'ष्ट्वा' रूप बनता है।
Question 7. निपुणम् निरीक्ष्य पठति।
(क) निरी + क्ष्य
(ख) निरी + ईक्ष्य
(ग) निर् + ईक्ष् + ल्यप्
(घ) निरी + क्ष्यप्
Answer: (ग) निर् + ईक्ष् + ल्यप्
In simple words: 'निरीक्ष्य' शब्द 'निर्' उपसर्ग, 'ईक्ष्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय के निर्माण में उपसर्ग, धातु और प्रत्यय के सही संयोजन का ध्यान रखें।
Question 8. रामः प्रत्यागत्य तत्र गमिष्यति।
(क) प्रति + आ + गम् + ल्यप्
(ख) प्रत्या + गम् + ल्यप्
(ग) प्रत्या + गत्य
(घ) प्रति + आ + गत् + ल्यप्
Answer: (क) प्रति + आ + गम् + ल्यप्
In simple words: 'प्रत्यागत्य' शब्द 'प्रति' उपसर्ग, 'आ' उपसर्ग, 'गम्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: एक से अधिक उपसर्गों के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय का उपयोग करते समय, सभी घटकों को सही क्रम में रखें।
Question 9. स्वदेशम् परित्यज्य कुत्र प्रस्थितः?
(क) परि + त्यज + ल्यप्
(ख) परि + त्यज् + ल्यप्
(ग) परि + त्यज + ल्यप
(घ) परित्यज + य्
Answer: (ख) परि + त्यज् + ल्यप्
In simple words: 'परित्यज्य' शब्द 'परि' उपसर्ग, 'त्यज्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय में धातु के अंतिम वर्ण का परिवर्तन नियम के अनुसार होता है।
Question 10. बालं विलोक्य कुक्कुरः अभाषत्।
(क) वि + लोक् + ल्यप्
(ख) वि + लोग् + ल्यप्
(ग) विलोक् + य
(घ) विलोक + ल्यप्
Answer: (क) वि + लोक् + ल्यप्
In simple words: 'विलोक्य' शब्द 'वि' उपसर्ग, 'लोक्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय के साथ अक्सर धातु के मूल रूप में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है, केवल 'य' जुड़ता है।
Question 11. सा अभिवाद्य अगच्छत्।
(क) अभि + वद् + ल्यप्
(ख) अभि + वाद् + ल्यप्
(ग) अभि + वद् + णिच् + ल्यप्
(घ) अभि + वद् + लयप्
Answer: (ग) अभि + वद् + णिच् + ल्यप्
In simple words: 'अभिवाद्य' शब्द 'अभि' उपसर्ग, 'वद्' धातु, 'णिच्' प्रत्यय और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: कुछ स्थितियों में, 'णिच्' प्रत्यय के बाद भी 'ल्यप्' प्रत्यय का उपयोग हो सकता है, जिससे प्रेरणादायक अर्थ बनता है।
Question 12. जीवम् अन्वेष्टुम् आगच्छत्।
(क) अन + वेष्ट + तुम्
(ख) अनु + इष् + तुमुन्
(ग) अनू + ईष् + तुमुन्
(घ) अन्विषु + तुम्
Answer: (ख) अनु + इष् + तुमुन्
In simple words: 'अन्वेष्टुम्' शब्द 'अनु' उपसर्ग, 'इष्' धातु और 'तुमुन्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग 'के लिए' अर्थ में होता है और इसमें 'इ' का आगम हो सकता है।
Question 13. एवं विचार्य प्रतापः अवदत्।
(क) वि + चार् + ल्यप्
(ख) विचर + ल्यप्
(ग) वि + चर् + ल्यम्
(घ) वि + चर् + णिच् + ल्यप्
Answer: (घ) वि + चर् + णिच् + ल्यप्
In simple words: 'विचार्य' शब्द 'वि' उपसर्ग, 'चर्' धातु, 'णिच्' प्रत्यय और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'णिच्' प्रत्यय से युक्त धातुओं में 'ल्यप्' प्रत्यय के प्रयोग से 'आय' या 'य' शेष रहता है।
Question 14. कूपात् जलं पीत्वा आगच्छति।
(क) पी + क्त्वा
(ख) पा + क्त्वा
(ग) पी + त्वा
(घ) पा + त्वा
Answer: (ख) पा + क्त्वा
In simple words: 'पीत्वा' शब्द 'पा' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'पा' धातु में 'क्त्वा' प्रत्यय जुड़ने पर 'पीत्वा' रूप बनता है।
Question 15. स: जीवनम् धर्मरक्षायै समर्पितवान्।
(क) सम् + अर्प + क्तवतु
(ख) सम् + अप् + क्तवतु
(ग) समर्प + वान्
(घ) समर्प + तवान्
Answer: (ख) सम् + अप् + क्तवतु
In simple words: 'समर्पितवान्' शब्द 'सम्' उपसर्ग, 'अप्' धातु और 'क्तवतु' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'क्तवतु' प्रत्यय भूतकाल की क्रिया को दर्शाता है और इसमें 'वान्', 'वती', 'वत्' जैसे रूप होते हैं।
Question 16. पुष्पम् समाघ्राय प्रसन्नः अस्ति।
(क) सम् + आ + घ्रा + ल्यप्
(ख) समा + घ्रा + या
(ग) समाघ्रा + य
(घ) समा + घ्रा + ल्यप्
Answer: (क) सम् + आ + घ्रा + ल्यप्
In simple words: 'समाघ्राय' शब्द 'सम्' उपसर्ग, 'आ' उपसर्ग, 'घ्रा' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय में धातु के अंतिम स्वर का लोप हो सकता है, और उपसर्गों का सही क्रम महत्वपूर्ण है।
Question 17. सः जलम् पातुम् कूपम् गच्छति।
(क) पा + तुम्
(ख) पा + तुमुन्
(ग) पी + तुम्
(घ) पी + तुमुन्
Answer: (ख) पा + तुमुन्
In simple words: 'पातुम्' शब्द 'पा' धातु और 'तुमुन्' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग 'के लिए' अर्थ में किया जाता है और यह धातु के अर्थ को उद्देश्य में बदल देता है।
Question 18. शब्दम् श्रुत्वा गजः अधावत्।
(क) श्रू + कत्वा
(ख) श्रू + कतवा
(ग) श्रु + क्त्वा
(घ) श्री + क्त्वा
Answer: (ग) श्रु + क्त्वा
In simple words: 'श्रुत्वा' शब्द 'श्रु' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'क्त्वा' प्रत्यय में धातु के अंतिम स्वर में कभी-कभी परिवर्तन होता है, जैसे 'श्रु' से 'श्रुत्वा'।
Question 19. सः चरणयोः पतित्वा क्षमाम् अयाचत्।
(क) पत् + क्त्वा
(ख) पत + त्वा
(ग) पत् + कतवा
(घ) पत् + कत्वा
Answer: (क) पत् + क्त्वा
In simple words: 'पतित्वा' शब्द 'पत्' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'क्त्वा' प्रत्यय का प्रयोग एक क्रिया के तुरंत बाद होने वाली दूसरी क्रिया के लिए होता है।
Question 20. कुशलवार्ता पृष्ट्वा उपविशति।
(क) प्रच्छ् + त्वा
(ख) प्रच्छ् + क्त्वा
(ग) पृष् + कत्वा
(घ) पृष् + क्तवा
Answer: (ख) प्रच्छ् + क्त्वा
In simple words: 'पृष्ट्वा' शब्द 'प्रच्छ्' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'क्त्वा' प्रत्यय के साथ कुछ धातुओं में विशिष्ट ध्वनि परिवर्तन होते हैं, जैसे 'प्रच्छ्' से 'पृष्ट्वा'।
Question 21. निश्चयम् कृत्वा तम् अकथयत्।
(क) कृ + क्त्वा
(ख) कृ + त्वा
(ग) कृ + कत्वा
(घ) कृ + कतवा
Answer: (क) कृ + क्त्वा
In simple words: 'कृत्वा' शब्द 'कृ' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के मेल से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'कृ' धातु में 'क्त्वा' प्रत्यय जुड़ने पर 'कृत्वा' रूप बनता है, जो बहुत सामान्य है।
Question 6. निम्नलिखितान प्रकृतिप्रत्ययान् योजयित्वा शुद्धं पदं चिनुत।
1. सन्धिम् प्र + कल्य् + ल्यप् बहिः आगच्छ।
(क) प्रकल्प्य
(ख) प्रकप्य
(ग) प्रकल्पय
(घ) प्रकल्पाय
Answer: (क) प्रकल्प्य
In simple words: 'प्रकल्प्य' शब्द 'प्र' उपसर्ग, 'कल्य्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय धातु से पहले उपसर्ग होने पर लगता है, और धातु के अंत में 'य' जुड़ता है।
Question 2. धनं प्र + आप् + ल्यप् धनिकः प्रसीदति।
(क) प्रापय
(ख) प्रापाय
(ग) प्राप्य
(घ) प्राप्या
Answer: (ग) प्राप्य
In simple words: 'प्राप्य' शब्द 'प्र' उपसर्ग, 'आप्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'आप्' धातु के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय जुड़ने पर 'आप्य' रूप बनता है, जो उपसर्ग के साथ 'प्राप्य' हो जाता है।
Question 3. वयम् भोजनं खाद् + तुमुन् तत्पराः स्मः।
(क) खादितम्
(ख) खादितुम्
(ग) खादतुम्
(घ) खादिताम्
Answer: (ख) खादितुम्
In simple words: 'खादितुम्' शब्द 'खाद्' धातु और 'तुमुन्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग करने पर धातु के अंत में 'इतुम्' जुड़ता है यदि धातु 'इ' कारांत न हो।
Question 4. एवं निस् + चित् + ल्यप् रमा अगच्छत्।
(क) निश्चित्य
(ख) निः चित्य
(ग) निर्चित्य
(घ) निस्चित्य
Answer: (क) निश्चित्य
In simple words: 'निश्चित्य' शब्द 'निस्' उपसर्ग, 'चित्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय में उपसर्ग और धातु के बीच संधि नियमों का ध्यान रखें।
Question 5. सः दानं दा + तुमुन् हरिद्वारम् गच्छति।
(क) दातुम्
(ख) दतुम्
(ग) दातु
(घ) दातुः
Answer: (क) दातुम्
In simple words: 'दातुम्' शब्द 'दा' धातु और 'तुमुन्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'दा' धातु में 'तुमुन्' प्रत्यय जुड़ने पर 'दातुम्' रूप बनता है।
Question 6. मांसम् उत् + कृ + ल्यप् शयेनाय ददौ।
(क) उतकृत्य
(ख) उतकृतय
(ग) उत्कृत्य
(घ) उद्धृत्य
Answer: (ग) उत्कृत्य
In simple words: 'उत्कृत्य' शब्द 'उत्' उपसर्ग, 'कृ' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'कृ' धातु के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय जुड़ने पर 'कृत्य' रूप बनता है, जो उपसर्ग के साथ 'उत्कृत्य' हो जाता है।
Question 7. इति वच् + क्त्वा सः मौनम् अधारयत्।
(क) वक्त्वा
(ख) वदित्वम्
(ग) उचित्वा
(घ) उक्त्वा
Answer: (घ) उक्त्वा
In simple words: 'उक्त्वा' शब्द 'वच्' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'वच्' धातु में 'क्त्वा' प्रत्यय जुड़ने पर धातु के मूल रूप में परिवर्तन होकर 'उक्त्वा' बनता है।
Question 8. विद्वान् भू + क्त्वा सः प्रासीदत्।
(क) भूत्वा
(ख) भुत्वा
(ग) भूतवा
(घ) भुतवा
Answer: (क) भूत्वा
In simple words: 'भूत्वा' शब्द 'भू' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'भू' धातु में 'क्त्वा' प्रत्यय जुड़ने पर 'भूत्वा' रूप बनता है।
Question 9. आलस्यं वि + हि + ल्यप् उद्यमम् कुरु।
(क) वितीय
(ख) विहिय
(ग) विहाय
(घ) विहय
Answer: (ग) विहाय
In simple words: 'विहाय' शब्द 'वि' उपसर्ग, 'हि' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'हा' या 'हि' धातु के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय जुड़ने पर 'हाय' या 'हिय' जैसे रूप बनते हैं।
Question 10. आत्मा जीर्णं शरीरम् वि + हि + ल्यप् नवीनं देहं संयाति।
(क) विहिय
(ख) विहीय
(ग) विहय
(घ) विहाय
Answer: (घ) विहाय
In simple words: 'विहाय' शब्द 'वि' उपसर्ग, 'हि' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: समान शब्दों के लिए, प्रत्यय जोड़ने के नियम को सटीक रूप से लागू करें।
Question 11. देवम नम् + तुमुन् कुत्र गमिष्यसि ?
(क) नमितुम्
(ख) नमतुम्
(ग) नम्तुम्
(घ) नन्तुम्
Answer: (घ) नन्तुम्
In simple words: 'नन्तुम्' शब्द 'नम्' धातु और 'तुमुन्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'नम्' धातु के साथ 'तुमुन्' प्रत्यय जुड़ने पर 'नन्तुम्' रूप बनता है।
Question 12. वि + भज् + ल्यप् एव अत्र आगच्छ।
(क) विभज्य
(ख) विभक्त्य
(ग) विभाज्य
(घ) विभजय
Answer: (क) विभज्य
In simple words: 'विभज्य' शब्द 'वि' उपसर्ग, 'भज्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय के साथ 'ज्' अंत वाली धातुएं 'ज्य' में बदल जाती हैं।
Question 13. शत्रुम् जि + क्त्वा प्रसन्नः भव।
(क) जित्वा
(ख) जीत्वा
(ग) जितवा
(घ) जीतवा
Answer: (क) जित्वा
In simple words: 'जित्वा' शब्द 'जि' धातु और 'क्त्वा' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'जि' धातु में 'क्त्वा' प्रत्यय जुड़ने पर 'जित्वा' रूप बनता है।
Question 14. पाठम् अधि + इ + ल्यप् शयनम् कुरु।
(क) अधित्य
(ख) अधीत्वा
(ग) अधीय
(घ) अधीत्य
Answer: (घ) अधीत्य
In simple words: 'अधीत्य' शब्द 'अधि' उपसर्ग, 'इ' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय में धातु के अंत में 'य' जुड़ता है, और 'इ' धातु के साथ 'य' जुड़ने पर 'ईत्य' हो जाता है।
Question 15. त्वं शुच् + तुमुन् न अर्हसि।
(क) शोचतुम्
(ख) शुचतुम्
(ग) शोचितुम्
(घ) शुचितम्
Answer: (ग) शोचितुम्
In simple words: 'शोचितुम्' शब्द 'शुच्' धातु और 'तुमुन्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'तुमुन्' प्रत्यय के साथ कुछ धातुओं में आंतरिक स्वर परिवर्तन (गुण वृद्धि) हो सकता है।
Question 16. सः प्र + विश् + ल्यप् अवदत् ।
(क) प्रविष्य
(ख) प्रविस्य
(ग) प्रविश्य
(घ) प्रविश्ट
Answer: (ग) प्रविश्य
In simple words: 'प्रविश्य' शब्द 'प्र' उपसर्ग, 'विश्' धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय के संयोजन से बना है। यह सही विकल्प है।
Exam Tip: 'ल्यप्' प्रत्यय में 'विश्' धातु के साथ 'य' जुड़ने पर 'विश्य' रूप बनता है।
Question 7. अधोलिखितेषु प्रकृतिं प्रत्ययं संयोज्य लिखत।
1. दृश् + क्त्वा =
2. क्षिप् + क्त्वा =
3. आ + गम् + ल्यप् =
4. सम् + पठ् + ल्यप् =
5. चि + तुमुन् =
6. युध् + तुमुन् =
7. गम् + क्त्वा =
8. त्यज् + क्त्वा =
9. प्र + दा + ल्यप् =
10. सम् + भू + ल्यप् =
11. स्त्रै + तुमुन् =
Answer:
1. दृष्ट्वा
2. क्षिप्त्वा
3. आगम्य
4. संपठ्य
5. चेतुम्
6. योद्धम्
7. गत्वा
8. त्यक्त्वा
9. प्रदाय
10. संभूय
11. स्नातुम्।
In simple words: यहाँ आपको दिए गए प्रकृति (धातु/उपसर्ग) और प्रत्यय को जोड़कर एक पूर्ण शब्द बनाना था। यह संस्कृत व्याकरण के नियमों का उपयोग करके किया गया है।
Exam Tip: प्रत्येक प्रत्यय के साथ धातु के रूप में होने वाले विशिष्ट परिवर्तनों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 8. अधोलिखितानां पदानां प्रकृतिं प्रत्ययं च पृथक्-पृथक् लिखत।
1. स्नातुम् =
2. क्रोद्धम् =
3. परित्यज्य = परि +
4. उपगम्य =
5. भूत्वा =
6. चलित्वा = चल् +
Answer:
1. स्नातुम् = स्नै + तुमुन्
2. क्रोद्धम् = क्रुध् + तुमुन्
3. परित्यज्य = परि + त्यज् + ल्यप्
4. उपगम्य = उप + गम् + ल्यप्
5. भूत्वा = भू + क्त्वा
6. चलित्वा = चल् + क्त्वा।
In simple words: आपको दिए गए शब्दों को उनके मूल प्रकृति (धातु या उपसर्ग) और प्रत्यय में अलग-अलग करना था। यह शब्दों की संरचना को समझने में सहायता करता है।
Exam Tip: शब्दों को उनके मूल प्रकृति और प्रत्यय में तोड़ने से उनकी व्युत्पत्ति और अर्थ को समझने में मदद मिलती है।
कृदन्तपदानि सम्बन्धक भूतकृदन्त and हेत्वर्थ कृदन्त -
1. सम्बन्धक भूतकृदन्त (Gerund)
Read the sentences given below:
1. विनीता भोजनं कृत्वा विद्यालयं गच्छति।
1. विनीता भोजनं करोति, ततः विद्यालयं गच्छति।
2. छात्राः सरस्वती स्मृत्वा पुराणं पठन्ति।
2. छात्राः सरस्वती स्मरन्ति तत्पश्चात् पुराणं पठन्ति।
3. भक्तः मन्दिरं गत्वा ईश्वरं भजति।
3. भक्तः मन्दिरं गच्छति, अनन्तरम् ईश्वर भजति।
Two kinds of sentences have been given together here. In all the sentences, the underlined words are verbs. You will see that in each sentence there are two verbs. Moreover, the meaning of the first sentence is being conveyed also in the second sentence. If the speaker so wishes, he can use the second sentence to convey exactly the same meaning as the first sentence has. In the context of such sentences, you have to remember these points. They are:
1. The first verb is उपक्रिया while the second verb is the main verb.
2. The doer of both the verbs is the same.
3. If the auxiliary indicates a time before the main verb, then that auxiliary will be in a past tense.
For such specific sentences, पूर्वक्रिया for the earlier verb in Sanskrit (on one or hand तिडन्तपद like करोति can be used) or on the other hand क्त्वा > त्वा can be joined to the root. For forms which are made using the affix for we use the term त्वा. Look below:
1. कृ + क्त्वा > त्वा = कृत्वा।
2. भू + क्त्वा > त्वा = भूत्वा।
3. पा + क्त्वा > त्वा = पोत्वा।
4. खाद् + क्त्वा > त्वा = खादित्वा।
5. गम् + क्त्वा > त्वा = गत्वा।
6. दा + क्त्वा > त्वा = दत्वा ।
When you look at the forms given above, you will see that :
(1) For many roots क्त्वा > त्वा is directly affixed. For example कृ + क्त्वा > त्वा = कृत्वा।
(2) For some roots, इ is added before the affix क्त्वा > त्वा example: खाद् + क्त्वा > त्वा = खादित्वा।
(3) Sometimes there is a slight change in the form of the root. example: दा + क्त्वा > त्वा = दत्वा etc.
In addition to this, for such forms you have to remember an important point. It is that whenever a root has an affix (उपसर्ग), then instead of क्त्वा, य is added. For example:
1. अनु + भू + क्त्वा > य = अनुभूय।
2. वि + कृ + क्त्वा > य = विकृत्य।
3. आ + गम् + क्त्वा > य = आगत्य।
Looking at the above examples, it is seen that (1) In roots which have an affix and क्त्वा > य is added the original form of the root is retained. (2) However in those roots where the last sound is a vowel and that is a short one there between the root (धनु) and क्त्वा the letter त् is added example: आ + गम् + क्त्वा > य, गम् त् य = आगत्य।
In the previous lessons find out where such words have been used and which rules apply there, and then learn more forms of this kind.
2. हेत्वर्थ कृदन्त (Infinitive)
Read the following sentences carefully:
1. छात्राः पठनाय विद्यालयं गच्छन्ति।
1. छात्राः पठितुं विद्यालयं गच्छन्ति।
2. अशोकः दानाय फलं नयति।
2. अशोकः दातुं फलं नयति।
3. प्रेक्षकः हसनाय नाटकं पश्यति।
3. प्रेक्षकः हसितुं नाटकं पश्यति।
Here two kinds of sentences have been given together. In each of them, the underlined words are verbs. As in the sentences earlier, here too each sentence has two verbs. Again, both sentences convey the same meaning. That is, if the speaker so wishes, he can use the second sentence instead of the first. In respect of such sentences, you have to remember the following points
1. The first verb is उपक्रिया while the second one is the main verb.
2. The उपक्रिया suggests the cause or purpose of the main verb.
3. The doer of both the verbs is the same.
In such sentences, there are two ways of expression. example: (1) पठन्, दान, हसन. For participles the fourth case is used. (2) With the root (example: पठन्, दान, हसन etc.) तुमुन् > तुम् affix has to be added. Words so formed are called तुमुन्. Look at some of the हैवर्य कृदन्तेड given below :
1. पा + तुमुन् > तुम् = पातुम्।
2. दा + तुमुन् > तुम् = दातुम्।
3. भू + तुमुन् > तुम् = भवितुम्।
4. खाद् + तुमुन् > तुम् = खादितुम्।
5. कृ + तुमुन् > तुम् = कर्तुम्।
6. गम् + तुमुन् > तुम् = गन्तुम्।
Looking at the words above, it is seen that (1) For some roots, तुमुन् > तुम् is directly added. Example : (1) पा + तुमुन् > तुम् + पातुम्।
(2) Sometimes इ before the affix तुमुन् > तुम् is added.
Example: खाद् + इ + तुमुन् > तुम् = खादितुम्
(3) Sometimes there is a change in the original form of the root.
Example : कृ + तुमुन्> तुम् = कर्तुम्। गम् + तुमुन् > तुम् = गन्तुम्।
When तुमुन् > तुम् is added to the root, then there is no change to the root, example:
(1) अनु + भू + तुमुन् > तुम् = अनुभवितुम्।
(2) वि + कृ + तुमुन् > तुम् = विकर्तुम्।
(3) आ + गम् + तुमुन् > तुम् = आगन्तुम्
In the earlier lessons, find such words that have been used, see which rule applies and learn more such forms.
Note : Both संबंधक भूतकृदन्त and हेत्वर्थ कृदन्त are indeclinables (adverbs). Hence, wherever they are used they have the same form.
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