GSEB Class 9 Hindi Vyakaran पद-भेद (1st Language) Solutions

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Detailed पद भेद (1st Language) GSEB Solutions for Class 9 Hindi

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Class 9 Hindi पद भेद (1st Language) GSEB Solutions PDF

व्याकरणिक दृष्टि से हिन्दी पदों को पाँच प्रकारों में बाँटते हैं:

  • संज्ञा,
  • सर्वनाम,
  • विशेषण,
  • क्रिया और
  • अव्यय

इनका परिचय पिछली कक्षाओं में कराया जा चुका है। संक्षेप में यहाँ उसका पुनरावर्तन करेंगे।

संज्ञा संज्ञा की परिभाषा:

किसी वस्तु, स्थान, जाति, समूह या भाव के नाम का बोध करानेवाले शब्दों को संज्ञा कहते हैं। जैसे: अहमदाबाद, शहर, वीरता, दूध, कक्षा आदि।

संज्ञा के भेद:

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा: जिन शब्दों से किसी एक ही स्थान, व्यक्ति या प्राणी का बोध हो उन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – बैजू, आगरा, हिमालय, गंगा, रामायण आदि।
2. जातिवाचक संज्ञा: जिन शब्दों से किसी एक ही जाति के संपूर्ण प्राणियों, वस्तुओं और स्थानों आदि का बोध हो उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – समुद्र, वन, नगर, आदमी, गाय, लड़का, लड़की, नदी।
3. भाववाचक संज्ञा: जिन शब्दों से प्राणियों या वस्तुओं के भाव गुण-दोष, अवस्था, धर्म, दशा आदि का बोध होता हो तो उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे: मिठास, लालिमा, शिष्टता, क्रोध, सत्य, बुढ़ापा।
4. समुदायवाचक (समूहवाचक) संज्ञा: जिन शब्दों से अनेक व्यक्तियों के या वस्तुओं के समूह का बोध हो उन्हें समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे: सेना, कक्षा, परिवार, गुच्छा, बाली।
5. द्रव्यवाचक संज्ञा: जिन शब्दों से किसी धातु, द्रव्य आदि पदार्थ का बोध हो उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे: पानी, लोहा, सोना, तेल आदि।

संज्ञा शब्दों को वाक्य में प्रयोग करते समय उन्हें वाक्य के लिए 'योग्य' बनाते समय लिंग, वचन तथा कारक के अनुरूप उनमें परिवर्तन करना पड़ता है।

(i) संज्ञा लिंग

लिंग की परिभाषा: शब्द की जाति को लिंग कहते हैं। संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की नर या मादा जाति का बोध हो, उसे व्याकरण में 'लिंग' कहते हैं। व्याकरणिक लिंग प्राकृतिक लिंगों से मेल खाये यह अनिवार्य नहीं है।

हिन्दी में लिंग के दो प्रकार होते हैं:

1. पुल्लिंग: पुरुष जाति का बोध करानेवाले शब्द पुल्लिंग कहलाते हैं। जैसे – राजा, लड़का, शेर, बैल, भाई आदि।
2. स्त्रीलिंग: स्त्री जाति का बोध करानेवाले शब्द स्त्रीलिंग कहलाते हैं।

कुछ बहुप्रचलित पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग शब्द:

नित्य पुल्लिंग शब्द: अखबार, अभिमान, आकाश, खिलौना, जल, चावल, दूध, दाँत, पहाड़, पेड़, जंगल, सागर पादि।

नित्य स्त्रीलिंग शब्द: आत्मा, इज्जत, खबर, घास, थकान, पुस्तक, परीक्षा, शाम, कुर्सी, सुई, लता, कलम, डाला आदि।

वचन का पारभाषा: शब्द का जिस रूप से उसके एक या अनेक होने का बोध हो, उसे वचन कहते हैं।

वचन दो प्रकार के होते हैं:

1. एकवचन: शब्द के जिस रूप से एक प्राणी या वस्तु का बोध हो उसे एकवचन कहते हैं। जैसे – लड़का, नंदी, किताब, गाँव आदि।
2. बहुवचन: शब्द के जिस रूप से अनेक प्राणियों या वस्तुओं का बोध हो उसे बहुवचन कहते हैं। जैसे – लड़के, नदियाँ, किताबें, गावें आदि।

वचन का वाक्य रचना पर प्रभाव:

लिंग की तरह ही वचन का भी विशेषण, संबंधकारक, क्रिया विशेषण और क्रिया शब्दों पर प्रभाव पड़ता है और वचन परिवर्तन होने पर इनके रूप में भी परिवर्तन हो जाता है। जैसे:

  • बैजू नया खिलौना लाया।
  • बैजू नए खिलौने लाया।

संबंध-कारक में परिवर्तन:

  • एकवचन: जग्गू का दोस्त अच्छा है।
  • बहुवचन: जग्गू के दोस्त अच्छे है।

क्रिया विशेषण में परिवर्तन:

  • एकवचन: वह पढ़ता-पढ़ता सो गया।
  • बहुवचन: वे पढ़ते-पढ़ते सो गए।

क्रिया में परिवर्तन:

  • एकवचन: नेता ने भाषण दिया।
  • बहुवचन: नेताओं ने भाषण दिये।

एकवचन शब्दों के बहुवचन रूप:

एकवचनबहुवचन
लड़कालड़के
मुर्गामुर्गे
बेटीबेटियाँ
नदीनदियाँ
वस्तुवस्तुएँ
धेनुधेनुएँ
वधूवधूएँ
चुहियाचुहियाँ
बुढ़ियाबुढ़ियाँ
आपआपलोग
प्रजाप्रजाजन
कर्मचारीकर्मचारीगण
टोपीटोपियाँ
सेविकासेविकाएँ
रानीरानियाँ
चादरचादरें
मूर्तिमूर्तियाँ
गधागधे
तिथितिथियाँ
लिपिलिपियाँ
पुस्तकपुस्तके
रातरातें
चिड़ियाचिड़ियाँ
कुटियाकुटियाँ
लतालताएँ
शाखाशाखाएँ
वस्तुवस्तुएँ
ऋतुऋतुएँ
पाठशालापाठशालाएँ
गाड़ीगाड़ियाँ
बहूबहुएँ
खिलौनाखिलौने
पुत्रीपुत्रियाँ
बातबातें
नारीनारियाँ
बछियाबछियों
उपवनउपवनों
युवतीयुवतियों

(iii) कारक

कारक की परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों को उनका सम्बन्ध सूचित हो उस रूप को कारक कहते हैं। अर्थात् संज्ञा या सर्वनाम के आगे जब ने, को, से, में आदि विभक्तियाँ लगती हैं उन्हें कारक कहते हैं।

विभक्ति से बने शब्द रूप को 'पद' कहा जाता है। हिन्दी कारक-

कारक और चिह्न:

कारकचिह्न
कर्ता-ने
कर्म-को
करणसे, द्वारा
सम्प्रदानको, के, लिए
अपादानसे
सम्बन्धका, की, के, रा, री, रे, ना, नी, ने
अधिकरणमें, पर, पै
सम्बोधनहे, अहो, अरे, अबे आदि ।

कर्ताकारक: वाक्य में जो शब्द काम करनेवाले के अर्थ में आता है उसे कर्ता कहते हैं।
कर्मकारक: वाक्य में क्रिया का फल जिस शब्द पर पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं।

करणकारक: वाक्य में जिस शब्द के द्वारा क्रिया के सम्बन्ध का बोध होता है, उसे करण कहते हैं।

सम्प्रदानकारक: जिसके लिए कुछ किया जाता है या जिसको कुछ दिया जाता है, इसका बोध करानेवाले शब्द को सम्प्रदानकारक कहते हैं।

अपादानकारक: संज्ञा के जिस रूप में किसी वस्तु के अलगाव का बोध होता है उसे अपादाकारक कहते हैं।

सम्बन्धकारक: सर्वनाम या संज्ञा के जिस रूप से अन्य किसी शब्द के साथ सम्बन्ध प्रकट होता है, उसे सम्बन्धकारक कहते हैं।

अधिकरणकारक: जिस शब्द से कार्य करने की सूचना हो अर्थात् जो शब्द क्रिया का आधार सूचित करता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं।

सम्बोधनकारक: जिस संकेत के द्वारा संबोधन करना, पुकारना, दुःख, हर्ष या आश्चर्य का मान प्रकट किया जाता है, उसे सम्बोधनकारक कहते हैं।

कारकों के उदाहरण:

वाक्यकारक
(1) राम ने पुस्तक पढ़ी।(कर्ताकारक)
(2) बच्चे पढ़ते हैं।(कर्ताकारक)
(3) मोहन गाँव जाता है।(कर्ताकारक)
(4) मोहन गाँव जाता है।(कर्ताकारक)
(5) तुमने नहीं पहचाना।(कर्ताकारक)
(6) मोहन ने राम को कलम दी।(कर्मकारक)
(7) मोहन कलम से लिखता है।(करणकारक)
(8) हम आँखों से देखते हैं।(करणकारक)
(9) मोहन कलम से पत्र लिखता है।(करणकारक)
(10) पिताजी राम के लिए किताब लाए।(सम्प्रदानकारक)
(11) ब्राह्मण को दान दिया।(सम्प्रदानकारक)
(12) बालक छत से गिर पड़ा।(अपादानकारक)
(13) मैं घर से जा रहा हूँ।(अपादानकारक)
(14) राम का भाई(संबंधकारक)
(15) राम के पिता(संबंधकारक)
(16) राम की बहन(संबंधकारक)
(17) अपना घर(संबंधकारक)
(18) अपने लोग(संबंधकारक)
(19) अपनी माँ(संबंधकारक)
(20) मेरा घर(संबंधकारक)
(21) मेरे लोग(संबंधकारक)
(22) मेरी पुस्तक(संबंधकारक)
(23) राम पेड़ पर चढ़ा।(अधिकरणकारक)
(24) राम पेड़ पर चढ़ा।(अधिकरणकारक)
(25) हे राम(संबोधनकारक)
(26) ओ भगवान(संबोधनकारक)
(27) अरे ! मत करो(संबोधनकारक)

 

शब्दों की रूप (पद) रचना

भाववाचक संज्ञा बनाना

आप जानते ही हैं कि जिस शब्द से किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण, दशा, अवस्था, स्वभाव, भाव, व्यापार (कार्य) अथवा धर्म का बोध होता हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे – दया, ममता, बचपना, दरिद्रता, क्रोध, चढ़ाई, घबराहट, मिठास आदि। लक्षण: भाववाचक संज्ञा की पहचान के लिए कुछ चिह्न हैं जो शब्द के अंत में प्रत्यय के रूप में जुड़े होते हैं। ये प्रत्यय हैं – ई, त्व, ता, पन, पा, हट, वट, स, क तथा व। इन प्रत्ययों के जुड़ने से बने एक-एक उदाहरण इस प्रकार हैं –

  • भला – भलाई
  • शिव – शिवत्व
  • सज्जन – सज्जनता
  • बच्चा – बचपन
  • बूढ़ा – बुढ़ापा
  • चिकना – चिकनाहट
  • सजाना – सजावट
  • मीठा – मिठास
  • वैद्य – वैद्यक
  • लघु – लाघव

भाववाचक संज्ञाएँ संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया से बनती हैं। कुछ उदाहरण नीचे दिए जा रहे हैं –

संज्ञा शब्दों से भाववाचक संज्ञा –

शब्दभाववाचक संज्ञा
शूरशौर्य
धीरजधैर्य
ब्राह्मणब्राह्मणत्व
ठगठगी
सखासख्य
चोरचोरी
ठाकुरठकुराई
बंधुबंधुत्व
नारीनारीत्व
नरनरत्व
भाईभाईचार
विद्वानविद्वत्ता
शत्रुशत्रुता
देवदेवत्व
शिशुशैशव, शिशुता
मित्रमित्रता, मैत्री
दासदासता, दासत्व
गुरुगुरुता, गुरुत्व, गौरव
पुरुषपौरुष, पुरुषत्व
किशोरकैशौर्य, किशोरपन
पशुपशुता, पशुत्व
डाकूडाका, डकैती
साधुसाधुता, साधुत्व
प्रभुप्रभुता, प्रभुत्व
मनुष्यमनुष्यता, मनुष्यत्व
भ्राताभ्रातृत्व
भारभारीपन
ईश्वरऐश्वर्य

सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा

शब्दभाववाचक संज्ञा
निजनिजत्व
स्वस्वत्व
सर्वसर्वस्व
अपनाअपनापन
परायापरायापन
ममममता, ममत्व

विशेषण से भाववाचक संज्ञा

विशेषणभाववाचक संज्ञा
ऊँचाऊँचाई
निम्ननिम्नता
उच्चउच्चता
मोटामोटापा, मोटाई
लघुलघुता, लघुत्व, लाघव
शीतलशीतलता
तीखातीखापन
मधुरमाधुर्य, मधुरता
वृद्धवृद्धत्व, वार्द्धक्य
कंजूसकंजूसी
गंभीरगांभीर्य
चतुरचतुराई
चालाकचालाकी
मजदूरमजदूरी
कायरकायरता
अच्छाअच्छाई
बुराबुराई
कालाकालिमा
चिकनाचिकनाहट
मूढ़मूढ़ता, मूढ़त्व
क्रूरक्रूरता
वाँकावाँकपन

क्रिया से भाववाचक संज्ञा

क्रियाभाववाचक संज्ञा
पहचाननापहचान
कहनाकहानी, कहावत
रोनारुलाई
बोनाबुवाई
कमानाकमाई
दिखानादिखावट
पीनापान
चलनाचाल
पढ़नापढ़ाई
लिखनालिखाई, लिखावट
बुलानाबुलावा, बुलाहट
हँसनाहँसी
थिरकनाथिरकन
काटनाकटाई
मारनामार
जलनाजलन

अव्यय से भाववाचक संज्ञा

अव्ययभाववाचक संज्ञा
निकटनिकटता, नैकट्य
दूरदूरत्व, दूरी

 

Question. (क) भाववाचक संज्ञा बनाइए:

1. दो बैलों की कथा

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
बेवकूफबेवकूफीकामचोरकामचोरी
चाकरचाकरीसहिष्णुसहिष्णुता
बंधुबंधुत्वचपलचपलता
आत्मीयआत्मीयताकुशलकुशलता
गर्वगौरवउजड्डउजड्डपन
घनिष्ठघनिष्ठता  

2. ल्हासा की ओर

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
निर्जननिर्जनतायजमानयजमानी
बेगारबेगारीसर्वोच्चसर्वोच्चता

3. उपभोक्तावाद की संस्कृति

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
विलासविलासितानिरंतरनिरंतरता
दासदासतागिरफ्तगिरफ्तारी
मान्यमान्यताबुनियादबुनियादी
व्यक्ति-केंद्रकव्यक्ति-केंद्रकता  

4. साँवले सपनों की याद

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
शोखशोखीचंचलचंचलता
जटिलजटिलतावकीलवकालत
यायावरयायावरी  

5. नाना साहब की पुत्री देवी मैना ...

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
विद्रोहविद्रोहीक्रूरक्रूरता
जड़जड़तावृद्धवृद्धावस्था
जूते   

6. प्रेमचंद के फटे जूते

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
घृणाघृणासलामसलामी

7. मेरे बचपन के दिन

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
आकर्षकआकर्षणप्रभातप्रभाती
संप्रदायसांप्रदायिकतासंस्कृतिसंस्कार

8. एक कुत्ता और एक मैना

शब्दभाववाचक संज्ञाशब्दभाववाचक संज्ञा
प्रगल्भप्रगल्भतापरितृप्तपरितृप्ति
धृष्टधृष्टताबाध्यबाध्यता
स्तब्धस्तब्धता  

 

Question. निम्नलिखित शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए:

Answer:

शब्दभाववाचक संज्ञा
स्वामीस्वामित्व
कुमारकुमारत्व
नृपनृपत्व
कारीगरकारीगरी
इनसानइनसानियत
शत्रुशत्रुता
वकीलवकालत
युवायौवन
क्षत्रियक्षत्रियत्व
रंगरंगीनता
लड़कालड़कपन
भाईभाईचारा
अमरअमरत्व
आलसीआलस्य
देवदेवत्व
नीचनीचता
लम्बालम्बाई
बहुतबहुतायत
विधवाविधवापन
खट्टाखटास
महानमहानता
बाँझबाँझपन
उचितऔचित्य
जंगलीजंगलापन
लाललालिमा
गंदागंदगी
वीरवीरता
वक्रवक्रता
छोटाछुटपन
ठीठठीठई

In simple words: आपको दिए गए शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनानी है। भाववाचक संज्ञाएं वे शब्द हैं जो किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण, दशा, अवस्था, स्वभाव, या कार्य का बोध कराते हैं।

Exam Tip: भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए अक्सर प्रत्ययों जैसे -त्व, -ता, -पन, -ई, -हट, आदि का प्रयोग होता है। शब्दों के मूल अर्थ को समझते हुए सही प्रत्यय का चुनाव करें।

 

कर्तृवाचक संज्ञा

Question. कर्तृवाचक संज्ञा बनाइए:

Answer:

प्रत्ययकर्तृवाचक संज्ञा
-चर्+अनभचर, जलचर, निशाचर, गुप्तचर
-अकगायक, ग्राहक, कृषक, दीपक, पाठक, रक्षक, साधक, वाचक, निवेशक, चालक
-अनमोहन, दमन, साधन, पावन
-इन् (ई)योगी, रोगी, भोगी, द्वेषी, दोषी, लोभी, गुणी, सुखी, दुखी
-ताअध्येता, अभिनेता, ज्ञाता, दाता, नेता, श्रोता, भोक्ता, विक्रेता, प्रणेता, रचयिता, हंता
विद्-वेत्ताइतिहासविद्, इतिहासवेत्ता, शास्त्रविद्, कलाविद्, तत्त्ववेत्ता, प्राच्यवेत्ता, भाषाविद्, विधिवेत्ता
-अक्कड़घुमक्कड़, पियक्कड़, भुलक्कड़, बुझक्कड़, फक्कड़, भुक्खड़
-आकाउड़ाका, लड़ाका, भड़ाका
-इयडाकिया, धुनिया, जड़िया, नचनिया, रसिया, रसोइया
इड़ीगँजेड़ी, भँगेड़ी, नशेड़ी
एरालुटेरा, चितेरा
ऐतलठैत, डकैत, भलैत
ओरा (ओड़ा)चटोरा, भगोड़ा, कठफोड़ा
औता/औतीसमझौता, चुकौता, चुनौती, कसौटी, छुड़ौती, बपौती, बुढ़ौती, मनौती, फिरौती
औना/औनीखिलौना, पहरौनी, बिछौना, मिचौनी
वालाकरनेवाला, कहनेवाला, नाचनेवाला, ढोनेवाला, सुननेवाला, गानेवाला (इनके लिए संस्कृत शब्द क्रमशः कर्ता, कथक, नर्तक, वाहक, श्रोता, गायक का प्रयोग भी हिंदी में होता है ।)
कारकथाकार, ग्रंथकार, टीकाकार, पत्रकार, स्वर्णकार, वार्ताकार, संगीतकार, नाटककार, चाटुकार, चित्रकार, कुंभकार, चर्मकार, साहित्यकार, मूर्तिकार, गीतकार
कारीआक्रमणकारी, क्रांतिकारी, दमनकारी, षड्यंत्रकारी
मारपाकेटमार, छापामार, मक्खीमार, लट्ठमार
खोरब्याजखोर, सूदखोर, गोताखोर
हारकुम्हार, चमार, लुहार, सुनार
धरगदाधर, मुरलीधर, गंगाधर, गिरिधर, चक्रधर
अर्थीविद्यार्थी, शोधार्थी, सम्मानार्थी
आगममेधागम, वर्षागम, विधागम, धनागम
जीवीबुद्धिजीवी, मसिजीवी, कृषिजीवी, परजीवी, क्षणजीवी

In simple words: आपको प्रत्ययों का उपयोग करके कर्तृवाचक संज्ञाएं बनानी हैं। कर्तृवाचक संज्ञाएं उन शब्दों को कहते हैं जो किसी काम को करने वाले व्यक्ति का बोध कराते हैं।

Exam Tip: कर्तृवाचक संज्ञा बनाते समय, ध्यान दें कि प्रत्यय का सही रूप और शब्द के साथ उसका मेल व्याकरणिक रूप से सही हो। कई बार मूल शब्द में भी परिवर्तन करना पड़ता है।

 

(ख) कर्तृवाचक संज्ञा बनाइए:

1. दो बैलों की कथा

शब्दकर्तृवाचक संज्ञाशब्दकर्तृवाचक संज्ञा
गुप्तगुप्तचरप्रचारप्रचारक
जनमजन्मदाता/जन्मदात्रीनेगनेगदाता/नेगदात्री
बधबधिकस्नेहस्नेहदाता
विग्रहविग्राहक/विग्रहकारीप्रवासप्रवासी
संगठितसंगठक/संगठनकर्ता  
रिपोर्ट (रपट)रिपोर्टर  

2. ल्हासा की ओर

शब्दकर्तृवाचक संज्ञाशब्दकर्तृवाचक संज्ञा
व्यापारव्यापारीचौकीचौकीदार
राहराहीभिक्षाभिक्षु/भिक्षुक

3. उपभोक्तावाद की संस्कृति

शब्दकर्तृवाचक संज्ञाशब्दकर्तृवाचक संज्ञा
उपभोगउपभोक्ताउत्पादनउत्पादक
जादूजादूगर / जादूगरनीनियंत्रणनियंत्रक

4. साँवले सपनों की याद

शब्दकर्तृवाचक संज्ञा
वकालतवकील

5. नाना साहब की पुत्री देवी मैना को ...

शब्दकर्तृवाचक संज्ञाशब्दकर्तृवाचक संज्ञा
विध्वंसविध्वंसकसंहारसंहारक

6. प्रेमचंद के फटे जूते

शब्दकर्तृवाचक संज्ञाशब्दकर्तृवाचक संज्ञा
आग्रहआग्रहीट्रेजेडीट्रेजेडीकार
गंधगंधीप्रवर्तनप्रवर्तक

7. मेरे बचपन के दिन

शब्दकर्तृवाचक संज्ञाशब्दकर्तृवाचक संज्ञा
सेवासेवकप्रसारप्रसारक

8. एक कुत्ता और एक मैना

शब्दकर्तृवाचक संज्ञा
दर्शनदर्शक
सृष्टिसृष्टिकर्ता

In simple words: आपको दिए गए शब्दों से कर्तृवाचक संज्ञाएं बनानी हैं, जो यह बताती हैं कि किसी कार्य को किसने किया या कौन कर सकता है।

Exam Tip: कर्तृवाचक संज्ञाएं अक्सर शब्दों के अंत में प्रत्यय जोड़कर बनाई जाती हैं, जैसे -कर, -वाला, -दार, आदि। उचित प्रत्यय का चयन करने के लिए शब्द के अर्थ और सन्दर्भ पर ध्यान दें।

उचित प्रत्यय लगाकर कर्तृवाचक संज्ञा बनाइए :

धातुकर्तृवाचक संज्ञाधातुकर्तृवाचक संज्ञाधातुकर्तृवाचक संज्ञा
लेनालेनदारमेघमेघदूतकिरायाकिराएदार
टीकाटीकाकारपढ़नापढ़नेवालाविप्लवविप्लवी
पूजापूजारीबुद्धिबुद्धिमानलिखनालेखक
भ्रमभ्रमिकउड़नाउड़नेवालालूटनालुटेरा
क्रांतिक्रांतिकारीगदागदाधरसंन्याससंन्यासी
नाचनाचनेवालाकहानीकहानीकारकविताकवि
द्वेषद्वेषीभागनभागनेवालाइतिहासइतिहासकार
चामचमड़ासंग्रहसंग्रहकर्ताअर्थशास्त्रअर्थशास्त्री
शिक्षाशिक्षकघूमनाघूमनेवालामछलीमछुआरा
लट्ठलठैतपत्रपत्रकारशास्त्रशास्त्री
सोनासुनारयज्ञयज्ञकर्ताविधिविधिज्ञ
भूखभूखामसिमसिजीवीभाष्यभाष्याकार
लोहालोहारयशयशस्वीभूलनाभुलक्कड़

सर्वनाम

सर्वनाम की परिभाषा :

संज्ञा के स्थान पर प्रयोग होनेवाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। जैसे – मैं, तू, वह, आप, यह, वे, कोई, कुछ, क्या, कौन, जो आदि।

Exam Tip: Always remember that pronouns simplify language by avoiding repetition of nouns, making sentences flow better.

सर्वनाम के भेद : हिन्दी में सर्वनाम के 6 भेद हैं :

1. पुरुषवाचक सर्वनाम : बोलनेवाले, सुननेवाले या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग होनेवाले सर्वनामों को पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं :
• उत्तम पुरुष : बोलनेवाला या लिखनेवाला व्यक्ति अपने नाम की जगह जिस शब्द का उपयोग करता है, उसे उत्तम पुरुष-वाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे : मैं, हम।
• मध्यम पुरुष : बोलनेवाला या लिखनेवाला व्यक्ति सुननेवाले या पढ़नेवाले व्यक्ति के लिए जिस शब्द का प्रयोग करता है, उसे मध्यम पुरुष-वाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – तू, तुम, तेरा, तुम्हारा, आपका आदि।
• अन्य पुरुष : जो सर्वनाम बोलनेवाले या लिखनेवाले व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है, उसे अन्य पुरुष वाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – वह, वे, उसे, उनका आदि।
2. निजवाचक सर्वनाम : जिन शब्दों से अपनापन (स्वयं) का पता चलता है, उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – स्वयं, खुद, अपना, अपने आप आदि।
3. निश्चयवाचक सर्वनाम : जो सर्वनाम पास या दूर की किसी वस्तु की ओर संकेत करते हैं उन्हें निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – यह, वह, ये, वे आदि।
4. अनिश्चयवाचक सर्वनाम : जिन सर्वनाम शब्दों से किसी प्राणी या पदार्थ का निश्चित ज्ञान नहीं होता उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – कई, कुछ, किसी, कोई आदि।
5. संबंधवाचक सर्वनाम : जिन सर्वनाम शब्दों से एक बात का दूसरी बात से संबंध सूचित होता हो, वे संबंधवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे – जो, सो, वह आदि।
6. प्रश्नवाचक सर्वनाम : जिन सर्वनाम शब्दों से प्रश्न का पता चलता हो, उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे – क्या, कौन, किसे, किसको इत्यादि।

Exam Tip: Understanding the specific role of each pronoun type helps in correctly identifying and using them in sentences.

1. लिंग के आधार पर सर्वनामों में कोई परिवर्तन नहीं होता। केवल संबंधकारक में लिंग के कारण मेरा-मेरी, तेरा-तेरी, तुम्हारा-तुम्हारी, उसका-उसकी, उनका-उनकी आदि रूप बनते हैं।
2. वचन तथा कारक के आधार पर सर्वनाम में परिवर्तन होता है। जैसे – मैं, तुम, यह, वह विभक्तिरहित बहुवचनकर्ता के रूप में क्रमशः हम, तुम और वे हो जाते हैं।
3. मैं, तुम, यह, वह के रूपों में कारक की विभक्तियाँ जोड़कर लिखी जाती हैं; जैसे – मैंने, तुमने, इसने, उसने, इसका, उसका इत्यादि। विभक्ति दुहरी होगी तो पहली जोड़ी जायगी, दूसरी नहीं। जैसे – इसके लिए, तुम्हारे द्वारा, मेरे लिए, उसके लिए आदि।

Exam Tip: Remember that pronouns usually change form based on number and case, but not gender, simplifying their usage.

विशेषण

विशेषण की परिभाषा :

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतानेवाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। जैसे – सुंदर, छोटा, ईमानदार, लाल आदि।

Exam Tip: A quick way to find an adjective is to see if it describes a noun or pronoun, telling us more about it.

विशेष्य :

जिन संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताई जाती है, उन्हें विशेष्य कहते हैं। जैसे : वृक्ष पर मीठे फल लगे हैं। विशेषण के भेद : विशेषण के मुख्य पाँच भेद हैं :

Exam Tip: Identifying the noun that the adjective describes helps you locate the 'विशेष्य' in any sentence.

1. गुणवाचक विशेषण :

जिस शब्द से संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, आकार, दशा, स्थान, समय, दिशा आदि का ज्ञान हो उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं :
जैसे :
• आलसी, अच्छा, कंजूस,
• अच्छे लड़के पढ़ने में ध्यान देते हैं।
• सफेद गाय खेत में चर रही है।

Exam Tip: Gunavachak Visheshan always adds detail about the quality or characteristic of a noun or pronoun.

2. परिमाणवाचक विशेषण :

वे शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की मापतौल संबंधी विशेषता प्रकट करें वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं। जैसे : थोड़ा, अधिक, सारा, किलो। मैंने ज्यादा खाना खा लिया।

Exam Tip: Look for words that answer "how much?" or "how many?" when identifying adjectives of quantity.

परिमाणवाचक विशेषण के दो भेद हैं –

1. निश्चित परिमाणवाचक विशेषण : जिन विशेषणों द्वारा किसी वस्तु के निश्चित परिमाण (माप-तौल) का पता चले वे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण होते हैं। जैसे – पाँच लीटर, दो किलो। आज घर में पाँच लीटर दूध आया।
2. अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण : जिन शब्दों से किसी वस्तु के निश्चित परिमाण का बोध न हो, वे होते हैं। जैसे – कुछ, थोड़ा, ज्यादा, कम आदि। कुछ पैसे दे दो।

Exam Tip: The key difference is whether the quantity is exact (like "two apples") or vague (like "some apples").

3. संख्यावाचक विशेषण :

जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध हो, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे – आधा लाख, पाँच हजार।

Exam Tip: Remember to distinguish between adjectives of quantity (how much) and adjectives of number (how many), as their applications differ.

आधी रोटी से पेट नहीं भरता।

संख्यावाचक विशेषण के दो भेद हैं –

1. निश्चित संख्यावाचक : जिन विशेषणों से निश्चित संख्या का बोध होता है, उन्हें निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे – मैंने पाँच केले खाए।
2. अनिश्चित संख्यावाचक : जिन विशेषणों से किसी निश्चित संख्या का बोध न हो उन्हें अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे : अनेक लोग भाषण सुनने गए।

Exam Tip: Focus on whether the exact count is given or if the number is vague to classify these adjectives.

4. सार्वनामिक विशेषण :

जो सर्वनाम शब्द विशेषण के रूप में प्रयोग हों, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।

Exam Tip: Identify pronouns that function as adjectives, pointing to nouns instead of replacing them.

जैसे : उस लड़के को बुलाओ। किसी काम में लग जाओ। विशेषण की अवस्थाएँ : विशेषण की अधिकता या कमी की दृष्टि से तीन होती हैं :

1. मूलावस्था : जब विशेष्य किसी की विशेषता को सामान्य रूप से ही बताए, किसी अन्य से तुलना न हो उसे मूलावस्था कहते हैं। जैसे : श्वेता चतुर विद्यार्थिनी है।
2. उत्तरावस्था : जिसके द्वारा किसी एक की विशेषता की किसी दूसरे की उसी विशेषता से तुलना की जाए, उसे उत्तरावस्था कहते हैं। जैसे : सुहेल जग्गू से अधिक चतुर है।
3. उत्तमावस्था : जिसके द्वारा व्यक्ति या वस्तु की विशेषता सबसे बढ़-चढ़ कर बताई जाए, उसे उत्तमावस्था कहते हैं। जैसे – श्रेयस सभी विद्यार्थियों में चतुरतम है।

Exam Tip: Think of these as positive, comparative, and superlative degrees for adjectives, just like in English.

विशेषण की अवस्थाओं के कुछ शब्द रूप इस प्रकार हैं :

मूलावस्थाउत्तरावस्थाउत्तमावस्था
सुन्दरसुन्दरतरसुन्दरतम
प्राचीनप्राचीनतरप्राचीनतम
निम्ननिम्नतरनिम्नतम
महानमहानतरमहानतम
योग्ययोग्यतरयोग्यतम

Exam Tip: Practice forming all three degrees for common adjectives to master their usage.

विशेषण बनाना

हिन्दी में कुछ शब्द मूल रूप से ही विशेषण होते हैं; जैसे – मोटा, पतला, ऊँचा, नीचा, काला, लाल, चालाक, योग्य, अयोग्य, धूर्त, प्रवीण, निपुण आदि। संस्कृत से आये कुछ प्रत्यय युक्त विशेषण शब्द हिन्दी में मूल शब्द की तरह प्रयोग होते हैं, जैसे – सहिष्णु, आप्त, गुप्त, दीप्त, तृप्त, ध्यात, मृत, लिप्त, व्यस्त, युक्त, दत्त, कष्ट, नष्ट, भ्रष्ट, शिष्ट, कृष्ण, पूर्ण, रूग्ण, नग्न, भिन्न, यत्न, रुद्ध, लब्ध, बुद्ध, वृद्ध, सूर, पार्थिव, कुटिल, जटिल इत्यादि।

Exam Tip: Understanding native Hindi adjectives and Sanskrit-derived ones helps in recognizing their origins and usage.

विशेषण बनानेवाले प्रमुख हिन्दी प्रत्यय हैं – इक, इत, इन, ई, ईय, इल, ईन, ईला, निष्ठ, अनीय, मान, मती, मय। इन प्रत्ययों से बने कुछ विशेषण शब्दों की सूची नीचे दी गई है –

Exam Tip: Learning common suffixes for adjective formation can greatly expand your vocabulary and sentence construction skills.

प्रत्यय – इक

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
कर्मकार्मिकअधुनाआधुनिकज्ञानवैज्ञानिक
अलंकारआलंकारिकविधानवैधानिकभूगोलभौगोलिक
समाजसामाजिकयंत्रयांत्रिकप्रयोगप्रायोगिक
संकेतसांकेतिकहृदयहार्दिकतत्कालतात्कालिक
परिवारपारिवारिकदेवदैविकबुद्धिबौद्धिक
लोकलौकिकव्यवहारव्यावहारिकइच्छाऐच्छिक
संसारसांसारिकधर्मधार्मिकदेहदैहिक
उद्योगऔद्योगिकसंस्कृतिसांस्कृतिकवेदवैदिक
सप्ताहसाप्ताहिकसाहित्यसाहित्यिकसेनासैनिक
इतिहासऐतिहासिककल्पनाकाल्पनिकनीतिनैतिक
दिनदैनिकसंप्रदायसांप्रदायिकभूतभौतिक
मासमासिकपरलोकपारलौकिकमुखमौखिक
अध्यात्मआध्यात्मिकव्यक्तिवैयक्तिकचरित्रचारित्रिक
योगयौगिकविज्ञानवैज्ञानिक

Exam Tip: Pay attention to how the root word transforms when adding the '-इक' suffix, especially with initial vowels.

विशेष – 'इक' प्रत्यय जुड़ने पर आरंभ के स्वर में प्राय: वृद्धि होती है। यहाँ अ का आ, इ का ई, ए का ऐ, उ का ऊ तथा ओ का औ हो जाता है।
जब शब्द दो शब्दों से बना हो तो दोनों में भी वृद्धि होती है; जैसे – परलोक से पारलौकिक, अधिदेव से आधिदैविक आदि। कहीं-कहीं वृद्धि नहीं भी होती है; जैसे – क्रम से क्रमिक तथा श्रम से श्रमिक।

Exam Tip: Remember these vowel changes are crucial for correct spelling and pronunciation when applying the '-इक' suffix.

प्रत्यय – इत

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
पुलकपुलकितसंचयसंचितद्रवद्रवित
पुष्पपुष्पितआनंदआनंदितगर्वगर्वित
कलंककलंकितफलफलितमर्यादामर्यादित
कुसुमकुसुमिततरंगतरंगितकंटककंटकित
पल्लवपल्लवितसुरभिसुरभितहर्षहर्षित
विलंबविलंबितमोहमोहितयोजनायोजित
अपेक्षाअपेक्षितसम्मानसम्मानितअपमानअपमानित
संकोचसंकुचितनिंदानिंदितक्षुधाक्षुधित
लक्ष्यलक्षितउपेक्षाउपेक्षितअंकअंकित
घृणाघृणित

Exam Tip: The suffix '-इत' often indicates a past participle or an adjective meaning 'possessing' or 'full of' the base noun's quality.

विशेष : इन विशेषणों में कुछ भूतकालिक कृदंत भी हो सकते हैं; जैसे – रक्षित, मुदित, लांछित, स्थापित,

Exam Tip: Recognize that some adjectives formed with '-इत' act like verbs describing a completed state or action.

प्रत्यय – ई (संज्ञा के अलावा अव्ययों में भी लगकर विशेषण की रचना करता है।)

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
दुःखदुःखीज्ञानज्ञानीदेहातदेहाती
विनयविनयीतामस्तामसीरूसरूसी
भीतरभीतरीअपकारअपकारीअनुभवअनुभवी
धनधनीऋणऋणीराजस्राजसी
उद्यमउद्यमीविजयविजयीमौनमौनी
बलबलीप्रेमप्रेमीभोगभोगी
जापानजापानीदानदानीसुखसुखी
बनारसबनारसीद्वेषद्वेषीसंयमसंयमी
पाकिस्तानपाकिस्तानीयोगयोगीबाहरबाहरी
क्रोधक्रोधीहिन्दुस्तानहिन्दुस्तानीनामनामी
ध्यानध्यानीविरोधविरोधीअहमदाबादअहमदाबादी
शहरशहरीचीनचीनीराक्षसराक्षसी
उपकारउपकारीरोगरोगीयोगयोगी

Exam Tip: The '-ई' suffix is versatile, forming adjectives of various meanings including belonging, state, or origin. Learn to identify its context.

प्रत्यय - इम

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
आदिआदिमअंतअंतिम

Exam Tip: The '-इम' suffix generally transforms nouns into adjectives indicating the essence or primary form of something.

प्रत्यय - इर

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
मदमदिररुचिरुचिररक्तरक्तिम

Exam Tip: The '-इर' suffix often indicates a characteristic or property associated with the base noun.

प्रत्यय - ईय

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
भारतभारतीयस्वर्गस्वर्गीयआत्माआत्मीय
नरकनारकीयपर्वतपर्वतीयमानवमानवीय
ईश्वरईश्वरीयप्रांतप्रांतीयचुंबकचुंबकीय
दर्शनदर्शनीयशासकशासकीयविभागविभागीय
शरदशारदीयराष्ट्रराष्ट्रीयविचारविचारणीय

Exam Tip: The '-ईय' suffix typically forms adjectives indicating belonging, relation, or 'suitable for' the base noun.

प्रत्यय - ईन

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
रंगरंगीनकुलकुलीनप्रातः कालप्रातः कालीन
युगयुगीननवनवीनग्रामग्रामीण
शालाशालीनविश्वजनविश्वजनीनसर्वजनसर्वजनीन
नमकनमकीनसंगसंगीन

Exam Tip: The '-ईन' suffix often forms adjectives indicating a quality, characteristic, or belonging.

प्रत्यय - आ

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
ठंडठंडी/ठंडानीलनीलामैलमैला
भूखभूखाप्यासप्यासाझूठझूठा

Exam Tip: The '-आ' suffix often forms simple descriptive adjectives, sometimes indicating a state or color.

प्रत्यय - इल (वाला)

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
फेनफेनिलजटाजटिलरोमरोमिल
उर्मिउर्मिलपंकपंकिलस्वप्नस्वप्निल

Exam Tip: The '-इल' suffix is less common but usually implies 'full of' or 'characterized by' the noun's quality.

प्रत्यय - ईला

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
खर्चखर्चीलाहठहठीलाचमकचमकीला
रंगरंगीलारसरसीलानोकनुकीला
जोशजोशीलाविषविषैलानशानशीला

Exam Tip: The '-ईला' suffix usually creates adjectives meaning 'having the quality of' or 'full of' the base noun.

प्रत्यय - इतर

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
आर्यआर्येतरहिन्दीहिंदीतरइतरइतर
सहजसहजेतरशिक्षाशिक्षेतरपाठ्यपाठ्येतर

Exam Tip: The '-इतर' suffix means 'other than' or 'different from' the base word, creating distinct adjectives.

प्रत्यय - उक्

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
इच्छाइच्छुकभावभावुकभिक्षुकभिक्षुक
कामकामुक

Exam Tip: The '-उक्' suffix often forms adjectives indicating a strong desire or tendency towards the base word's meaning.

प्रत्यय - कीय

संज्ञाविशेषणसं संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
स्वस्वकीयदेवदेवकीयपरपरकीय
राजराजकीय

Exam Tip: The '-कीय' suffix helps form adjectives denoting belonging or association, often used for formal or specific contexts.

प्रत्यय - तन

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
अधुनाअद्यतननवनूतनअद्यअद्यतन
पुरापुरातनप्राक्प्राक्तन

Exam Tip: The '-तन' suffix usually forms adjectives indicating a time reference, such as 'present' or 'old'.

प्रत्यय - तम

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
अंतरअंतरतमनिकटनिकटतमअधिकअधिकतम
महत्महत्तमन्यूनन्यूनतमश्रेष्ठश्रेष्ठतम
निम्ननिम्नतमनवीननवीनतमलघुलघुतम
आधुनिकआधुनिकतमप्रियप्रियतमसरलसरलतम

Exam Tip: The '-तम' suffix creates superlative adjectives, indicating 'most' or 'highest degree' of a quality.

प्रत्यय - दायक/दायी

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
आनंदआनंददायक/आनंददायीफलफलदायी/फलदायक
पीड़ापीड़ादायक/पीड़ादायीवरवरदायक/वरदायी
लाभलाभदायक/लाभदायीभयभयदायक/भयदायी
जीवनजीवनदायक/जीवनदायीशांतिशांतिदायक/शांतिदायी

Exam Tip: These suffixes '-दायक' and '-दायी' are used to form adjectives meaning 'giving' or 'providing' the base noun's quality.

प्रत्यय - निष्ठ

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
कर्तव्यकर्तव्यनिष्ठधर्मधर्मनिष्ठ
कर्मकर्मनिष्ठ

Exam Tip: The '-निष्ठ' suffix forms adjectives indicating dedication, devotion, or adherence to the base noun.

प्रत्यय - अनीय

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
सम्मानसम्माननीयपूज्यपूजनीयदयादयनीय
विश्वासविश्वसनीयआदरआदरणीयनिंदानिंदनीय

Exam Tip: The suffix '-अनीय' forms adjectives meaning 'worthy of', 'suitable for', or 'that which should be' the action or quality of the base noun.

प्रत्यय - मय

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
आनंदआनंदमयदुःखदुःखमयगौरवगौरवमय
सुखसुखमयकंटककंटकमयअन्नअन्नमय
शांतिशांतिमयअनुरागअनुरागमयप्राणप्राणमय

Exam Tip: The '-मय' suffix means 'full of' or 'made of' the base noun, creating adjectives that describe composition or pervasive quality.

प्रत्यय - मान/मती

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
बुद्धिबुद्धिमान/बुद्धिमतीशक्तिशक्तिमानश्रीश्रीमान/श्रीमती
धी (बुद्धि)धीमानकीर्तिकीर्तिमान्वृद्धिवृद्धिमान

Exam Tip: The suffixes '-मान' and '-मती' are used to form adjectives indicating 'possessing' or 'endowed with' the quality of the base noun, with '-मती' for feminine forms.

प्रत्यय - य

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
मानमान्यमुखमुख्यचिंताचिंत्य
पूजापूज्यसभासभ्यसेवासेव्य
उपासनाउपास्यमृत्युमर्त्यबाहरबाह्य
नासिकानासिक्यअंतअन्त्यदंतदंत्य
कथाकथ्यसंध्यासांध्यजनजन्य
न्यायन्याय्यआदिआद्यनिदानिंद्य

Exam Tip: The '-य' suffix forms adjectives indicating fitness, suitability, or connection to the base noun.

प्रत्यय - र

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
कुंजकुंजरमुखमधुर

Exam Tip: The '-र' suffix is often used to form adjectives or nouns denoting 'one who carries' or 'is connected with'.

प्रत्यय - ल

संज्ञाविशेषण
वत्सवत्सल

Exam Tip: The '-ल' suffix in Hindi often denotes affection, producing adjectives like 'vatsal' (affectionate).

प्रत्यय - वादी

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
भाग्यभाग्यवादीसमाजसमाजवादीबुद्धिबुद्धिवादी
यथार्थयथार्थवादीआशाआशावादीपूँजीपूँजीवादी

Exam Tip: The suffix '-वादी' means 'advocating' or 'believing in' the base noun, creating adjectives related to ideology or proponents.

प्रत्यय - विद्

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
कानूनकानूनविद्न्यायन्यायविद्इतिहासइतिहासविद्
ज्योतिषज्योतिषविद्हस्तरेखाहस्तरेखाविद्शास्त्रशास्त्रविद्

Exam Tip: The suffix '-विद्' means 'knower' or 'expert' in the field indicated by the base noun, forming adjectives of expertise.

प्रत्यय - वान/वती

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
गुणगुणवान/गुणवतीरूपरूपवान/रूपवती
बलबलवान/बलवतीविद्याविद्यावान/विद्यावती

Exam Tip: The suffixes '-वान' (masculine) and '-वती' (feminine) are used to form adjectives indicating 'possessing' or 'endowed with' the base noun's quality.

प्रत्यय - वी

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
ओजओजस्वीयशस्यशस्वीमनस्मनस्वी
तपसतपस्वीतेजस्तेजस्वीमेदमेदस्वी
ऊर्जाऊर्जस्वीमायामायावीमेधामेधावी

Exam Tip: The '-वी' suffix forms adjectives indicating possession of a quality or state, often related to power or energy.

प्रत्यय - शाली

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
प्रतिभाप्रतिभाशालीगौरवगौरवशालीबलबलशाली
भाग्यभाग्यशालीसम्पत्तिसम्पत्तिशालीप्रभावप्रभावशाली

Exam Tip: The suffix '-शाली' creates adjectives indicating 'possessing' or 'being full of' a particular quality, often related to power or talent.

प्रत्यय - एरा

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
मामाममेराचाचाचचेराफूफाफुफेरा
मौसामौसेरालूटलुटेराकाँसाकसेरा

Exam Tip: The '-एरा' suffix often forms adjectives or nouns indicating relation, profession, or characteristic derived from the base word.

प्रत्यय - वाला

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
दूधदूधवालापैसापैसेवालागाड़ीगाड़ीवाला
चायचायवालारिक्शारिक्शेवालापपीड़ीपपीड़ीवाला
बर्फबर्फवालाठेलाठेलेवालापुड़ापुड़ावाला

Exam Tip: The suffix '-वाला' is very common, forming adjectives meaning 'owner', 'seller', 'doer', or 'associated with' the base noun.

प्रत्यय - आलु/आलू

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
दयादयालुझगड़ाझगड़ालुकृपाकृपालु
ईर्ष्याईर्ष्यालुढालढालु

Exam Tip: The suffixes '-आलु' or '-आलू' create adjectives indicating a tendency, nature, or quality of the base noun.

क्रिया शब्दों से विशेषण

प्रत्यय - आऊ

क्रियाविशेषणक्रियाविशेषणक्रियाविशेषण
कमानाकमाऊउड़ानाउड़ाऊउपजानाउपजाऊ
जलानाजलाऊबेचनाबिकाऊभड़कानाभड़काऊ
पंडितानापंडिताऊटिकनाटिकाऊदिखानादिखाऊ

Exam Tip: The '-आऊ' suffix forms adjectives from verbs, often meaning 'suitable for' or 'tending to' the action of the verb.

प्रत्यय - आ

धातुविशेषणधातुविशेषणधातुविशेषण
कटाकटातैरनातैराकभीगभीगा
छुटछुटाचलानाचालक
फटफटाउड़नाउड़ाका
लड़नालड़ाका

Exam Tip: The suffix '-आ' when added to verbs can form adjectives, often indicating a state or characteristic resulting from the action.

प्रत्यय - आड़ी

क्रियाविशेषण
खेलनाखिलाड़ी

Exam Tip: The '-आड़ी' suffix forms adjectives or nouns indicating a person who habitually performs the action of the verb.

प्रत्यय - इया

क्रियाविशेषण
घटनाघटिया
बढ़नाबढ़िया

Exam Tip: The '-इया' suffix is used to form diminutive or qualitative adjectives from verbs, often implying a characteristic quality.

प्रत्यय - एरा

क्रियाविशेषण
लूटनालुटेरा
कमानाकमेरा

Exam Tip: The '-एरा' suffix, when added to verbs, often forms adjectives indicating 'one who does' or 'is associated with' the action.

कतिपय अन्य प्रत्यय

प्रत्ययधातुविशेषणधातुविशेषण
पालनापालकलिखनालिखित
अक्कड़भूलनाभुलक्कड़घूमनाघुमक्कड़
ओड़/ओड़ाहँसनाहँसोड़भागनाभगोड़ा
वालाजानाजानेवालाखानाखानेवाला
पीनापीनेवालाउड़नाउड़नेवाला
हुआडरनाडरा हुआजागनाजागा हुआ
पढ़नापढ़ा हुआजाननाजाना हुआ

Exam Tip: Many suffixes can create adjectives from verbs, often indicating a state, ability, or characteristic.

सर्वनाम से विशेषण की रचना

प्रत्ययसर्वनामविशेषणसर्वनामविशेषण
रामैंमेरातुमतुम्हारा
हमहमारातूतेरा
कावहउसकावेउनका
यहइसका
रूप बदलकरयहऐसावहवैसा

Exam Tip: Pronouns often change form to function as possessive adjectives, indicating ownership or relation.

कुछ अरबी-फारसी उपसर्गों से विशेषण की रचना

उपसर्गविशेषण
लालापरवाह, लापता, लावारिस
बेबेईमान, बेहोश, बेकसूर, बेकाबू, बेवकूफ, बेकरार, बेचारा
कमकमजोर, कम कीमत (सस्ता), कमबख्त (अथागा)
खुशखुशकिस्मत, खुशदिल, खुशबू, खुशामद (चापलूस)
गैरगैर कानूनी, गैर मामूली (असाधारण), गैर मुनासिब (अनुचित)
बदबदइंतजामी, बदचलन, बदकिस्मत, बदज़बान, बदनाम, बदबू, बदतमीज़, बदमिज़ाज, बदसलूकी, बदहाल
उर्दू-नानाखुश, नापसंद, नाबालिग, नालायक, नामुमकिन, नाकाबिल, नाजायज

Exam Tip: Understanding these prefixes helps in forming adjectives that convey negation, lack, or specific qualities in Hindi, often from Urdu/Persian origins.

प्रत्ययों के अतिरिक्त अनेक अर्धप्रत्ययों को जोड़कर भी विशेषण बनाया जाता है।

विशेषण बनाइए :

1. दो बैलों की कथा

शब्दविशेषणशब्दविशेषणशब्दविशेषण
पदवीपदवीधारीसहिष्णुतासहिष्णुबेवकूफीबेवकूफ
समयकुसमयअड़नाअड़ियलगुप्ततागुप्त
घनिष्ठताघनिष्ठकामचोरकामचोरकुशलताकुशल
जख्मजख्मीउजड्डपनउजड्डतृप्तितृप्त

Exam Tip: Practice identifying the root word and the suffix to correctly form adjectives that describe characteristics or states.

2. ल्हासा की ओर

शब्दविशेषणशब्दविशेषणशब्दविशेषण
व्यापारव्यापारिकखूनखूनीसर्वोच्चतासर्वोच्च
चीरनाचिरी/चिरी हुईहस्तलेखहस्तलिखित

Exam Tip: Be mindful of how different suffixes change the form and meaning of adjectives derived from verbs or nouns.

3. उपभोक्तावाद की संस्कृति

शब्दविशेषणशब्दविशेषणशब्दविशेषण
मान्यतामान्यविलासिताविलासीनिखारनानिखार
धनधनीप्रतिष्ठाप्रतिष्ठितविशेषविशेष
सामंतसामंतसंस्कृतिसंस्कृत

Exam Tip: Pay attention to the subtle differences in meaning when transforming nouns into adjectives, especially those related to concepts.

4. साँवले सपनों की याद

शब्दविशेषणशब्दविशेषणशब्दविशेषण
शोखीशोखसमर्पणसमर्पितकायाकायिक
निसर्गनैसर्गिक

Exam Tip: Some adjectives are formed by simple conversion or slight modification of the noun, without adding common suffixes.

5. नाना साहब की पुत्री देवी मैना...

शब्दविशेषणशब्दविशेषण
विद्रोहविद्रोहीक्रूरक्रूर
मोहमोहितविनयविनयी
लहूलहूलुहान

Exam Tip: Observe how adjectives related to human emotions or conditions are formed, sometimes with the addition of suffixes.

6. प्रेमचंद के फटे जूते

शब्दविशेषण
आग्रहआग्रही
घृणाघृणित

Exam Tip: Some adjectives describing a state (like 'घृणित') are formed from abstract nouns (like 'घृणा').

7. मेरे बचपन के दिन

शब्दविशेषणशब्दविशेषण
आकर्षणआकर्षकसंस्कारसंस्कारी
विवादविवादितझगड़ाझगड़ालू

Exam Tip: Notice how suffixes '-क', '-इत', '-ई' and '-आलू' can be used to convert nouns/verbs into adjectives.

8. एक कुत्ता और एक मैना

शब्दविशेषणशब्दविशेषण
दर्शनदर्शनीयस्तब्धतास्तब्ध
बाध्यताबाध्यधृष्टताधृष्ट
मुखमौखिक

Exam Tip: Understanding the relationship between abstract nouns and their corresponding adjectives is essential for precise language use.

स्वयं करें

उचित प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाइए :

संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
अंशआंशिकचलानाचालकअनुरागअनुरागी
दैवदैविकप्रांतप्रांतीयतैरनातैराक
खूबखूबसूरतभूतभौतिककेन्द्रकेन्द्रीय
विनयविनयीपल्लवपल्लवितनीचेनिचला
न्यायन्याय्यराष्ट्रराष्ट्रीयदुकानदुकानी
सुरभिसुरभितभागनाभागनेवालादेहदैहिक
धूमधूमिलतपस्तपस्वीअपेक्षाअपेक्षित
डरनाडरावनाबुद्धिबौद्धिकफेनफेनिल
ऐश्वर्यऐश्वर्यपूर्णतरंगतरंगितहँसनाहँसोड़
पक्षपाक्षिकरंगरंगीलासम्पत्तिसम्पन्न
संकोचसंकोचीपढ़नापढ़ाकूसेनासैनिक
कुलकुलीनविश्वासविश्वसनीयपियासाप्यास
पालनापालकतत्त्वतात्त्विकरसरसीला
कर्तव्यकर्तव्यनिष्ठविधानवैधानिकचलनाचालक
अंकअंकितबर्फबर्फीलानमकनमकीन
संसारसांसारिकबढ़नाबढ़ाऊक्षुधाक्षुधित
मानमान्यआकाशआकाशीयकरुणाकरुणामय
टिकनाटिकाऊधृणाघृणितश्री.श्रीमान
चिंतनचिंतनीयसंस्कृतिसांस्कृतिकघटनाघटित
द्रवद्रवितनिन्दानिंदनीयस्वदेशस्वदेशी
इतिहासऐतिहासिकआनाआगतपुष्पपुष्पित
जलजलीयशासकशासकीयडरनाडरावना
यहऐसाफलफलितपापपापी
यूरोपयूरोपीयआपआपसीदिनदैनिक
वनवन्यआदरआदरणीयअभिभूतअभिभूत
हमहमारामुखमौखिकओष्ठऔष्ठ्य
परलोकपारलौकिकतुमतुम्हारासत्वसात्विक
मूलमौलिकगुणगुणीउपयोगउपयोगी
अधिकारआधिकारिकआगेअगलाधर्मधार्मिक
पराक्रमपराक्रमीपाकिस्तानपाकिस्तानीपीछेपिछला
तेजतेजस्वीरक्तरक्तिमअनुभवअनुभवी
उपकारउपकारीरोगरोगीभाग्यभाग्यशाली
शांतिशांतिपूर्णअनुकरणअनुकरणीययहऐसा
अंतअंतिमयत्नयत्नशीलस्थलस्थलीय
संपादकसंपादकीयवहवैसाअग्रअगला
ठंडठंडीदंतदंतीयअवकाशअवकाशप्राप्त
तूतुमज्ञानज्ञानीप्यासप्यासा
चिंताचिंतितप्रातःकालप्रातःकालीनमैंमेरा
ऋणऋणीईर्ष्याईर्ष्यालुकथाकथित
चमकचमकीलापूतपुत्रवतनामनामिक
श्रद्धाश्रद्धालुकर्मकार्मिकवर्णनवर्णनात्मक
कसूरकसूरीक्रोधक्रोधीघड़ीघड़ीवाला
पुण्यपुण्यवानकमानाकमाऊपतापतला
रूपरूपवानभगभगोड़ाधनधनी
भीतरभीतरीहोशहोशियार  

Exam Tip: To create an adjective from a noun, verb, or adverb, correctly identify the base word and then add the appropriate suffix. Pay attention to how the base word changes when the suffix is added.

 

क्रिया

जिस शब्द से किसी काम के होने या करने का पता चलता है, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे – हँसना, पढ़ना, खाना, पीना, देना, लेना, खेलना आदि। जैसे :

  • चिड़िया उड़ती है।
  • राम प्रतिदिन व्यायाम करता है।

इन वाक्यों में 'उड़ती' और 'करता' शब्द क्रिया के रूप हैं, क्योंकि इनके द्वारा किसी कार्य के होने का बोध होता है। धातु : क्रिया के मूल रूप को धातु कहा जाता है। उपर्युक्त वाक्यों में 'उड़' और 'कर' मूल धातु हैं। धातु के दो प्रकार होते हैं :

  1. मूल धातु : जो धातु किसी दूसरे शब्द के आधार पर न बनी हो, वह मूल धातु है। जैसे – चल, उठ, उड़, खेल आदि।
  2. यौगिक धातु : जो धातु किसी अन्य शब्दों के योग से बने, उसे यौगिक धातु कहते हैं। जैसे : लिखवाना, बोलना, छुड़ाना, बजाना आदि।

क्रिया के भेद :

कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद हैं –

  1. अकर्मक क्रिया : जिन क्रियाओं का सीधा कर्ता से सम्बन्ध होता है और उनकी क्रियाओं से कर्म सूचित नहीं होता है ऐसे कर्म न रखनेवाली क्रियाओं को अकर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे :

  • राम पढ़ता है।
  • सीता खेलती है।

(2) सकर्मक क्रिया : जिस वाक्य में कर्म हो उससे सम्बन्धित क्रिया को सकर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे :

  • राम पुस्तक पढ़ता है।
  • सीता फल खाती है।

मुख्य क्रिया : जब वाक्य में एक से अधिक क्रियाएँ साथ हों तो उनमें जो क्रिया कर्ता या कर्म के मुख्य कार्य व्यापार के बारे में सूचना देती है, वह मुख्य क्रिया कहलाती है।

जैसे :

 

सहायक क्रिया : मुख्य क्रिया के बाद बची हुई क्रिया को सहायक क्रिया के रूप में पहचानते हैं।

जैसे :

  • स्वेता गाती है।

वाक्य में रेखांकित अंश में 'गाती' और 'है' दो क्रियाएँ हैं। 'गाती' मुख्य क्रिया है और 'है' सहायक क्रिया है। सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के काल (वर्तमान-भूत-भविष्य) को सूचित करती है। और मुख्य क्रिया की निरन्तरता, पूर्णता – अपूर्णता की सूचना देती है तथा वह कर्मवाच्य, भाववाच्य की मुख्य क्रिया की सहायता करती है। कालसूचक वह पढ़ता है (वर्तमान) वह पढ़ता था (भूतकाल) वह पढ़ता होगा (भविष्य) निरन्तरता सूचक वह जा रहा है। वह लिख रहा था। वह खा रहा होगा। वाक्य सूचक वह लिखा जाता है। अब मुझसे और चला नहीं जाता।

काल की सूचना में 'हो' निरन्तरता में 'रह' और वाच्य में 'जा' सहायक क्रिया काम में आती है। हिन्दी में 'हो' (कालसूचक) सहायक क्रिया का सर्वाधिक उपयोग होता है।

पुरुषवर्तमानकालभूतकालभविष्यकाल
 एकवचनबहुवचनएकवचनबहुवचनएकवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषहैहैंथाथेहोऊंगाहोंगे
मध्यम पुरुषहोहोथाथेहोगाहोंगे
अन्य पुरुषहैहैंथाथेहोगाहोंगे

क्रिया के रूप में परिवर्तन लिंग, वचन, कारक के साथ ही काल पर भी निर्भर करता है। साथ ही क्रिया से संज्ञा या विशेषण पद भी बनते हैं। क्रिया के प्रेरणार्थक क्रिया रूप भी बनते हैं। प्रेरणार्थक क्रिया बनाना प्रेरणार्थक क्रिया – प्रेरणार्थक क्रिया मूल रूप से सकर्मक क्रिया होती है। इसमें क्रिया से कर्ता के स्वयं काम करने का बोध नहीं होता बल्कि किसी अन्य व्यक्ति से कराए जाने का बोध होता है; जैसे – अध्यापक विद्यार्थियों से काम कराता है। यहाँ अध्यापक स्वयं काम नहीं कर रहा है बल्कि विद्यार्थियों से करा रहा है।

प्रेरणार्थक क्रिया दो प्रकार की होती है –

(क) प्रथम प्रेरणार्थक और
(ख) द्वितीय प्रेरणार्थक

 

1. अकर्मक मूल धातु के अंत में 'आना' जोड़ने से प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया बनती है और 'वाना' जोड़ने से द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया; जैसे -

 प्रथम प्रेरणार्थक क्रियाद्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया
डरनाडरानाडरवाना
दौड़नादौड़ानादौड़वाना
गिरनागिरानागिरवाना
हँसनाहँसानाहँसवाना
रोनारूलानारूलवाना
जगनाजगानाजगवाना
सोनासुलानासुलवाना
जुड़नाजोड़नाजुड़वाना
टूटनातोड़नातुड़वाना
भरनाभरानाभरवाना
खेलनाखिलानाखिलवाना
भीगनाभिगोनाभिगवाना

2. सकर्मक मूल धातु के अंत में 'आ' जोडने से प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया तथा 'वा' जोड़ने से द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया बनती है; जैसे -

 प्रथम प्रेरणार्थक क्रियाद्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया
पढ़नापढ़ातापढ़वाता
लिखनालिखानालिखवाना
सुननासुनानासुनवाना
करनाकरानाकरवाना

3. प्रेरणार्थक क्रिया बनाते समय दो अक्षरवाली धातु का पहला स्वर यदि दीर्घ हो, तो वह ह्रस्व हो जाता है। यदि 'ए' या 'ओ' हो तो वह भी 'इ', 'उ' हो जाता है;

 

जैसे -

 प्रथम प्रेरणार्थक क्रियाद्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया
काटनाकटानाकटवाना
छोड़नाछुड़ानाछुड़वाना
बोलनाबुलानाबुलवाना
सीखनासिखानासिखवाना
खेलनाखिलानाखिलवाना
जीतनाजितानाजितवाना

4. एक अक्षरवाली धातु के अंत में पहली प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के लिए 'ला' और दूसरी प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के लिए 'लवा' जोड़कर दीर्घ स्वर को ह्रस्व कर देते हैं; जैसे -

 प्रथम प्रेरणार्थक क्रियाद्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया
पीनापिलानापिलवाना
देनादिलानादिलवाना
धोनाधुलानाधुलवाना
नाचनानचानानचवाना

 

अभ्यास – स्वयं हल कीजिए।

 

Question 1. निम्नलिखित वाक्यों में प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया तथा द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया का प्रयोग करके पुन: लिखिए :
(1) बच्चा दूध पीता है।
(2) लड़के फुटबाल खेलते हैं।
(3) मीना कपड़े सिलती है।
(4) रेखा कहानी लिखती है।
(5) रेणुका दौड़ती है।
Answer:
(1) बच्चा दूध पीता है।
 प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया: माँ बच्चे को दूध पिलाती है।
 द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया: माँ दाई से बच्चे को दूध पिलवाती है।
(2) लड़के फुटबाल खेलते हैं।
 प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया: गुरुजी लड़कों को फुटबाल खिलाते हैं।
 द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया: गुरुजी कोच से लड़कों को फुटबाल खिलवाते हैं।
(3) मीना कपड़े सिलती है।
 प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया: माँ मीना को कपड़े सिलाती है।
 द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया: माँ दर्जी से कपड़े सिलवाती है।
(4) रेखा कहानी लिखती है।
 प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया: अध्यापक रेखा को कहानी लिखाते हैं।
 द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया: अध्यापक लेखक से कहानी लिखवाते हैं।
(5) रेणुका दौड़ती है।
 प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया: माँ रेणुका को दौड़ाती है।
 द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया: माँ कोच से रेणुका को दौड़वाती है।
In simple words: For each sentence, we show three versions: the original, one where someone makes the subject do the action (first causative), and one where someone gets another person to make the subject do the action (second causative).

Exam Tip: Remember to identify the root verb and apply the correct 'आना' or 'वाना' ending, or 'ला'/'लवा' for single-syllable verbs, making sure the initial vowel changes if necessary.

 

Question 2. निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम प्रेरणार्थक तथा द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया रूप लिखिए : गिरना, चमकना, बढ़ना, बिगड़ना, फूटना, रखना, लूटना, सीना
Answer:

मूल क्रियाप्रथम प्रेरणार्थक क्रियाद्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया
गिरनागिरानागिरवाना
चमकनाचमकानाचमकवाना
बढ़नाबढ़ानाबढ़वाना
बिगड़नाबिगाड़नाबिगड़वाना
फूटनाफुटानाफुटवाना
रखनारखानारखवाना
लूटनालुटानालुटवाना
सीनासिलानासिलवाना

In simple words: This table shows how basic action words change when you make someone else do that action, or when you get someone else to make a third person do it.

Exam Tip: Memorize the common patterns for forming first and second causative verbs, especially how vowel lengths change in the stem.

 

अव्यय

अव्यय की परिभाषा : अव्यय अविकारी पद हैं। ऐसे शब्द जिन पर लिंग, वचन, कारक आदि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता अव्यय कहलाते है। जैसे जब, तब, अभी, किंतु, चूंकि आदि।

• मैं समझती हूँ कि रूठा है, तब मेरी गोद में लेकर प्यार करती हूँ।
• बालक में बुद्धिमानी अच्छी नहीं लगती।
• वह अपने साथियों में जाता है और खेलकर देर से लौटता है।

अव्यय के मुख्य पाँच भेद हैं :

1. क्रियाविशेषण अव्यय :

जो शब्द क्रिया विशेषण की विशेष जानकारी का बोध कराते हैं वे क्रियाविशेषण अव्यय कहलाते हैं। जैसे : उधर, दिनभर, जल्दी, तेज आदि।

  • आप वहाँ क्या कर रहे हैं ?
  • वह धीरे-धीरे साइकिल चला रहा है।

क्रियाविशेषण के मुख्य चार भेद हैं –

  • रीतिवाचक क्रियाविशेषण : जैसे – धीरे-धीरे, ध्यानपूर्वक तेज आदि
  • स्थानवाचक क्रियाविशेषण : जैसे – यहाँ, वहाँ, जहाँ, सर्वत्र, कहाँ, यहीं आदि
  • कालवाचक क्रियाविशेषण : जैसे – आज, कल, अभी, कब, सदैव, परसों आदि
  • परिमाणवाचक क्रियाविशेषण : जैसे – कम, अधिक, ज्यादा, थोड़ा, कितना, जितना आदि।

2. संबंधसूचक अव्यय :

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध वाक्य के दूसरे शब्दों के साथ कराते हैं, उन्हें सम्बन्धसूचक अव्यय कहते हैं। जैसे-

  • खातिर, द्वारा, सिवा आदि।
  • वह घर से दूर चला गया।
  • मेरी पाठशाला के आगे बस स्टैण्ड है।

(3) समुच्चयबोधक अव्यय :

जो शब्द एक वाक्य का सम्बन्ध दूसरे वाक्य या वाक्यांशों से जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते जैसे

  • लेकिन, क्योंकि, और, तब, बल्कि आदि।
  • यदि मेहनत करोगे तो अवश्य सफल होगे।

समुच्चयबोधक अव्यय के दो भेद हैं –

  • समानाधिकरण समुच्चयबोधक : जैसे – और, या, तथा, लेकिन, इसलिए
  • व्यधिकरण समुच्चयबोधक : जैसे – क्योंकि, कि, ताकि, आदि।

विस्मयादिबोधक अव्यय : हर्ष, शोक, भय, आश्चर्य आदि विविध भावों को सूचित करनेवाले शब्द जिनका सम्बन्ध वाक्य या विशेष पद से नहीं होता हैं विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे :

  • अहा ! हाय ! अरे ! आदि।
  • आह ! वह गिर गया।
  • अरे ! वह कहाँ गया।

निपात

निपात : 'निपात' नये भाव प्रकट करने के लिए प्रयुक्त होते हैं। निपात का कोई लिंग, वचन नहीं होता अतः इन्हें अवयवों में रखा जाता है। मूलतः इसका प्रयोग अव्ययों के लिए होता है फिर भी अव्यय और निपात में किंचित भेद है। इनका प्रयोग वाक्य में अर्थ के अनुसार भिन्न-भिन्न स्थान पर हो सकता है। निपातों का प्रयोग निश्चित शब्द, शब्द-समुदाय या पूरे वाक्य को अन्य भावार्थ प्रदान करने के लिए होता है। जैसे : ही, भी, तो, तक

पायल ने ही उसे मारा था।
पायल ने उसे ही मारा था।

अव्यय की भाँति ये भी अविकारी होते हैं, अतः इन पर लिंग, वचन, कारक या काल का प्रभाव नहीं पड़ता। इनका रूप सदैव एक ही बना रहता है।

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