Official GSEB Solutions for Class 9 Hindi: Chapter 17 तुलसी के पद
Explore reliable textbook solutions for Chapter 17 तुलसी के पद tailored for Class 9 learners. Utilizing these Hindi answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final GSEB evaluations.
Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 17 तुलसी के पद
Navigate directly to the solved Hindi textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
स्वाध्याय
1. एक वाक्य में उत्तर लिखिए :
Question 1. तुलसीदास के मत से कौन पतितपावन हैं.?
Answer: तुलसीदासजी के अनुसार उनके स्वामी श्रीराम ही पतितों को पवित्र करने वाले हैं।
In simple words: तुलसीदासजी मानते हैं कि भगवान श्रीराम ही सबसे पावन हैं।
Exam Tip: जब किसी की महत्ता या गुण पूछा जाए, तो सीधे नाम और गुण का उल्लेख करें।
Question 2. भगवान को अति दीन कैसे लगते हैं?
Answer: भगवान को बहुत गरीब और असहाय लोग प्यारे लगते हैं।
In simple words: भगवान को गरीब लोग बहुत पसंद आते हैं।
Exam Tip: भगवान के स्वभाव और गुणों को याद रखें, जैसे वे दीन-बंधु हैं।
Question 3. भगवान ने हठ करके किनका उद्धार किया?
Answer: भगवान ने अपनी दृढ़ता से पक्षियों, हिरणों, शिकारियों, पत्थरों, वृक्षों और यवनों का कल्याण किया।
In simple words: भगवान ने पक्षियों, हिरणों, शिकारियों और कई अन्य का भला किया।
Exam Tip: भगवान के कार्यों के उदाहरणों को सूचीबद्ध करें, खासकर अगर वे अलग-अलग प्रकार के प्राणियों के हों।
Question 4. माया के प्रति विवश होकर कौन-कौन सोचते हैं?
Answer: देवता, राक्षस, मुनि, नाग (हाथी) और मनुष्य – ये सभी माया के प्रभाव में आकर सोचते हैं।
In simple words: देवता, राक्षस, ऋषि, नाग और इंसान, सब माया के प्रभाव में रहते हैं।
Exam Tip: माया के अधीन प्राणियों की सूची बनाते समय, विभिन्न प्रकार के जीवों को शामिल करें।
Question 5. प्रभु दानी है, तो कवि क्या है?
Answer: यदि भगवान दान करने वाले हैं, तो कवि एक भिखारी है जो उनसे कुछ मांग रहा है।
In simple words: अगर भगवान दाता हैं, तो कवि स्वयं को याचक मानता है।
Exam Tip: कवि के विनम्र भाव को व्यक्त करते हुए स्वयं को भगवान के सामने कैसे प्रस्तुत करते हैं, यह स्पष्ट करें।
Question 6. कवि पाप पुंजहारी किसे कहते हैं?
Answer: कवि भगवान श्रीराम को ही 'पापपुंजहारी' कहते हैं, जिसका अर्थ है पापों के ढेर को नष्ट करने वाले।
In simple words: कवि भगवान श्रीराम को पापों को खत्म करने वाला कहते हैं।
Exam Tip: जब कोई विशेषण पूछा जाए, तो वह विशेषण किसके लिए इस्तेमाल किया गया है, यह बताएं।
2. विस्तार सहित उत्तर लिखिए :
Question 1. तुलसीदासजी प्रभु के चरणों को छोड़कर कहीं और क्यों नहीं जाना चाहते हैं?
Answer: तुलसीदासजी के अनुसार, भगवान श्रीराम ही सबसे पवित्र करने वाले हैं। वे गरीब और दुखी लोगों से बहुत प्रेम करते हैं। उन्होंने कई बुरे लोगों को अपनी दृढ़ इच्छा से मुक्ति दिलाई है। पक्षियों, हिरणों, शिकारियों, पत्थरों, पेड़ों और यवनों जैसे अनेक का उद्धार उन्होंने तुरंत किया। बाकी सभी देवता, मुनि और मनुष्य आदि माया के प्रभाव में हैं। उनसे कोई संबंध बनाना बेकार है। भगवान श्रीराम जैसी दया और शक्ति किसी और में नहीं मिलती। इसलिए, तुलसीदासजी अपने प्रभु के चरणों को छोड़ना नहीं चाहते और कहीं और जाना पसंद नहीं करते।
In simple words: तुलसीदासजी मानते हैं कि भगवान श्रीराम ही पतितपावन हैं और दीन-दुखियों से प्रेम करते हैं। उन्होंने बहुतों का उद्धार किया है। अन्य सब माया में फंसे हैं, इसलिए वे भगवान राम के चरणों को छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते।
Exam Tip: इस तरह के विस्तृत उत्तरों में, मुख्य कारण (राम का पतितपावन होना) और सहायक कारणों (अन्य देवताओं का मायाधीन होना, राम की दया) को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 2. तुलसीदास ने अपने और भगवान के बीच कौन-कौन से संबंध जोड़े हैं? क्यों?
Answer: तुलसीदास भगवान से किसी भी तरह से जुड़े रहना चाहते हैं। इसलिए वे कहते हैं कि भगवान दयालु हैं तो वे दोनों दया के पात्र हैं। यदि प्रभु दाता हैं, तो तुलसीदास स्वयं को भिखारी मानते हैं। प्रभु यदि पापों का नाश करते हैं, तो तुलसीदास जैसा कोई पापी नहीं। प्रभु अनाथों के संरक्षक हैं, तो तुलसीदास जैसा कोई अनाथ नहीं। यदि प्रभु दुख दूर करते हैं, तो तुलसीदास जैसा कोई दुखी नहीं है। प्रभु ब्रह्म हैं, तो तुलसीदास जीव हैं। प्रभु स्वामी हैं, तो तुलसीदास स्वयं को सेवक मानते हैं। भगवान ही तुलसीदास के लिए माता, पिता, गुरु, सखा और सबकुछ हैं। इस प्रकार, तुलसीदास ने भगवान के साथ कई संबंध जोड़े हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि वे किसी भी संबंध के बहाने भगवान की शरण में आना चाहते हैं।
In simple words: तुलसीदास भगवान के साथ कई रिश्ते जोड़ते हैं जैसे दयालु-दयापात्र, दाता-भिखारी, पापपुंजहारी-पापी, अनाथों के नाथ-अनाथ, दुखहर-दुखी, ब्रह्म-जीव, स्वामी-सेवक, माता-पिता-गुरु-सखा आदि। वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि किसी भी बहाने भगवान की शरण पा सकें।
Exam Tip: विभिन्न संबंधों की एक सूची बनाएं और प्रत्येक संबंध के पीछे कवि के तर्क को स्पष्ट रूप से बताएं। कारण के साथ संबंध को जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 3. 'तोहि-मोहि नाते अनेक, मानिए जो भावे' का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: तुलसीदास ने भगवान से अपने कई रिश्ते बताए हैं। वे भगवान से निवेदन करते हैं कि इनमें से जो रिश्ता आपको स्वीकार हो, उसी रिश्ते से वे उनसे जुड़े रहें। तुलसी जानते हैं कि जब तक भगवान के साथ एक निश्चित संबंध स्थापित नहीं होता, तब तक भक्ति करने में सच्चा आनंद नहीं आता। एक रिश्ता जुड़ जाने से ही भक्ति में गहराई बढ़ती है। इससे भगवान को एक विशेष नाम से पुकारना आसान हो जाता है और अपनापन बढ़ाने में सहायता मिलती है। इसलिए, तुलसीदास भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वे उनसे कोई एक पक्का रिश्ता बनाकर उन्हें स्वीकार करें।
In simple words: तुलसीदास भगवान से कहते हैं कि उनके और भगवान के बीच कई रिश्ते हैं, भगवान जो चाहें वह रिश्ता मान लें। ऐसा करने से भक्ति में आनंद और गहराई आती है, जिससे भगवान को पुकारना और उनके करीब महसूस करना आसान हो जाता है।
Exam Tip: भावार्थ समझाते समय, कविता की पंक्तियों का सीधा अर्थ बताने के साथ-साथ उसके पीछे छिपे गहरे अर्थ और कवि के उद्देश्य को भी स्पष्ट करें।
3. भावार्थ स्पष्ट कीजिए :
Question 1. देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज, सब मायाबिबस बिचारे। तिनके हाथ दासतुलसी प्रभु, कहा अपनपौ हारे ॥
Answer: हे भगवान राम! देवता, राक्षस, मुनि, हाथी, वृक्ष और यवन आदि सभी माया के वशीभूत हैं। मुझ जैसे लोगों के प्रति उनसे कोई अपनापन नहीं हो सकता। इसलिए, इनसे किसी भी तरह की मदद की उम्मीद करना बेकार है। हे प्रभु, माया से मुक्त केवल आप ही हैं। मुझ जैसे भक्तों का ध्यान केवल आप ही रख सकते हैं। इसलिए, आपके अतिरिक्त मैं और किसी की शरण में जाने के बारे में नहीं सोच सकता।
In simple words: कवि कहते हैं कि देवता, दानव, ऋषि, हाथी, पेड़ और यवन - ये सब माया के प्रभाव में हैं। वे मेरी मदद नहीं कर सकते। केवल भगवान राम ही माया से मुक्त हैं और मेरे जैसे भक्तों का ध्यान रख सकते हैं। इसलिए मैं सिर्फ भगवान राम की शरण में जाना चाहता हूँ।
Exam Tip: कविता की पंक्तियों का अर्थ समझाते समय, पहले प्रत्येक शब्द का अर्थ बताएं और फिर पूरी पंक्ति का गहरा भाव स्पष्ट करें।
Question 2. नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोंसो? मो समान आरत नहि, आरतिहर तोसो ॥
Answer: तुलसी भगवान से कहते हैं कि संसार में जिनका कोई रक्षक नहीं है, उनकी सुरक्षा आप ही करते हैं। मेरे जैसा और कोई अनाथ नहीं है। इसलिए, आपको ही मेरी सुरक्षा करनी होगी। मेरे समान कोई दुखी व्यक्ति नहीं है। अपने दुख दूर करने के लिए मैं आपको ही पुकारूंगा, क्योंकि आपके समान दुखियों के दुख दूर करने वाला दूसरा कोई भी नहीं है।
In simple words: तुलसीदास भगवान से कहते हैं कि वे ही अनाथों के रक्षक हैं, और उनसे बढ़कर कोई अनाथ नहीं। वे ही सबसे दुखी हैं, और भगवान जैसा दुख दूर करने वाला कोई नहीं। इसलिए, वे केवल भगवान से ही अपनी रक्षा और दुख दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
Exam Tip: इस तरह की भावनात्मक पंक्तियों का अर्थ बताते समय, कवि की विनम्रता और भगवान के प्रति उसकी पूर्ण निष्ठा को उजागर करें।
4. समानार्थी शब्द लिखिए।
Question 1. समानार्थी शब्द लिखिए:
1. अधम
2. दनुज
3. मनुज
4. पातकी
5. आरत
6. चेरो
7. विधि
8. खग
9. बिटप
10. व्याध
11. दीन
12. तात
13. सखा
14. नाता
15. शरण
Answer:
1. नीच
2. राक्षस
3. मनुष्य
4. पापी
5. दुःखी
6. दास
7. प्रकार
8. पक्षी
9. वृक्ष
10. शिकारी
11. दरिद्र
12. पिता
13. मित्र
14. रिश्ता
15. आश्रय
In simple words: प्रत्येक शब्द का समान अर्थ वाला दूसरा शब्द लिखें।
Exam Tip: समानार्थी शब्द लिखते समय, दिए गए शब्द के सटीक अर्थ को दर्शाने वाला शब्द चुनें।
5. शब्दसमूह के लिए एक शब्द दीजिए।
Question 1. शब्दसमूह के लिए एक शब्द दीजिए:
1. पापियों का उद्धार करनेवाला ईश्वर
2. जिसकी रक्षा करनेवाला कोई न हो
Answer:
1. पापोद्धारक
2. अनाथ
In simple words: वाक्यांश के लिए एक ही शब्द लिखें।
Exam Tip: वाक्यांश को ध्यान से पढ़ें और उसका मूल भाव समझकर उपयुक्त एक शब्द चुनें।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पांच-छ: वाक्यों में लिखिए :
Question 1. 'तू दयालु, दीन हों!' नामक पद के द्वारा भक्त कवि तुलसीदास ने भगवान श्रीराम की महत्ता के बारे क्या कहा है?
Answer: 'तू दयालु, दीन हों!' पद में तुलसीदासजी भगवान श्रीराम को अत्यंत समर्थ और भक्तवत्सल बताते हैं। भगवान श्रीराम बहुत दयालु और महान दान करने वाले हैं। वे अपने भक्तों के पापों के समूह को नष्ट करने वाले हैं। वे अनाथों के संरक्षक और भक्तों के दुख दूर करने वाले हैं। भगवान राम परब्रह्म हैं। वे सबके स्वामी हैं। उनसे संबंध जुड़ जाने पर भक्त को माता, पिता, गुरु, मित्र और हितैषी की कमी महसूस नहीं होती। श्रीराम के रूप में उसे एक शक्तिशाली रक्षक मिल जाता है। इस प्रकार, इस पद में तुलसीदास अपने पूज्य भगवान राम की असीम महिमा पर प्रकाश डालते हैं।
In simple words: 'तू दयालु, दीन हों!' पद में तुलसीदास भगवान श्रीराम को बहुत शक्तिशाली और भक्त प्रिय बताते हैं। वे कहते हैं कि राम दयालु, दानी, पापों को नाश करने वाले, अनाथों के संरक्षक और दुख दूर करने वाले हैं। उनसे जुड़ने पर भक्त को सब कुछ मिल जाता है, और राम की असीम महिमा का बखान करते हैं।
Exam Tip: भगवान श्रीराम की सभी प्रमुख विशेषताओं को सूचीबद्ध करें और बताएं कि वे कैसे भक्त के जीवन को प्रभावित करती हैं।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
Question 1. तुलसीदास ने भगवान के कौन-कौन से गुण बताए है?
Answer: तुलसीदासजी कहते हैं कि भगवान बहुत दयालु, दानी और पापों को हरने वाले हैं। वे अनाथों के संरक्षक, दुखियों के दुख दूर करने वाले और हर तरह से शुभचिंतक हैं।
In simple words: तुलसीदासजी बताते हैं कि भगवान दयालु, दानी, पापहारी, अनाथों के नाथ, दुखियों के सहायक और सभी के हितैषी हैं।
Exam Tip: भगवान के गुणों को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें, जैसे दयालुता, दानशीलता और पापों का नाश करना।
Question 2. भगवान से तुलसीदास के कौन-कौन से नाते हैं?
Answer: तुलसीदास किसी-न-किसी तरह भगवान की शरण में रहना चाहते हैं। इसलिए वे उनसे दयालु और दयापात्र, दाता और भिक्षुक, पतितपावन और पापी, अनाथों के नाथ और अनाथ का संबंध बताते हैं। इसके अतिरिक्त, वे उन्हें अपने माता, पिता, गुरु और मित्र के रूप में भी देखते हैं। इस प्रकार, तुलसीदास के भगवान से कई रिश्ते हैं।
In simple words: तुलसीदास भगवान के साथ कई रिश्ते जोड़ते हैं जैसे दयालु, दानी, पतितपावन, अनाथों के नाथ, और उन्हें माता-पिता-गुरु-मित्र भी मानते हैं, ताकि वे भगवान की शरण में रह सकें।
Exam Tip: विभिन्न रिश्तों की एक संक्षिप्त सूची बनाएं और उनके पीछे के उद्देश्य (शरण पाना) को स्पष्ट करें।
निम्रलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
Question 1. तुलसीदासजी किसके चरण नहीं छोड़ना चाहते?
Answer: तुलसीदासजी अपने स्वामी श्रीराम के चरण नहीं छोड़ना चाहते हैं।
In simple words: तुलसीदासजी भगवान श्रीराम के चरणों को कभी छोड़ना नहीं चाहते।
Exam Tip: सीधे उत्तर दें और प्रश्न में पूछे गए व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 2. दयालु और दानी भगवान के सामने तुलसीदास अपने आपको क्या मानते है?
Answer: दयालु और दानी भगवान के सामने तुलसीदास अपने आपको गरीब और भिखारी मानते हैं।
In simple words: तुलसीदास खुद को गरीब और भिखारी समझते हैं जब भगवान दयालु और दानी होते हैं।
Exam Tip: कवि की विनम्रता को दर्शाने वाले शब्दों का उपयोग करें, जैसे 'दीन' और 'भिखारी'।
Question 3. अगर तुलसीदास प्रसिद्ध पातकी हैं, तो श्रीराम कौन हैं?
Answer: अगर तुलसीदास प्रसिद्ध पापी हैं, तो श्रीराम पापों के समूह का नाश करने वाले हैं।
In simple words: यदि तुलसीदास पापी हैं, तो श्रीराम पापों को खत्म करने वाले हैं।
Exam Tip: प्रश्न में दी गई तुलना का उपयोग करके उत्तर दें और श्रीराम के विपरीत गुण का उल्लेख करें।
Question 4. यदि राम ब्रह्म हैं, तो तुलसीदास कौन हैं?
Answer: यदि राम ब्रह्म हैं, तो तुलसीदास संसार के बंधन में पड़े हुए जीव हैं।
In simple words: यदि राम भगवान हैं, तो तुलसीदास एक सामान्य प्राणी हैं जो संसार में बंधा हुआ है।
Exam Tip: ब्रह्म और जीव के बीच के संबंध को स्पष्ट करें, जहाँ एक सर्वशक्तिमान है और दूसरा सीमित।
Question 5. तुलसीदास भगवान श्रीराम की शरण क्यों चाहते हैं?
Answer: तुलसीदास भगवान श्रीराम की शरण चाहते हैं क्योंकि राम के समान दुखों को दूर करने वाला दूसरा कोई नहीं है।
In simple words: तुलसीदास भगवान श्रीराम की शरण चाहते हैं क्योंकि केवल राम ही दुख दूर कर सकते हैं।
Exam Tip: सीधे और संक्षेप में कारण बताएं कि क्यों तुलसीदास श्रीराम की शरण चाहते हैं।
Question 6. तुलसीदास भगवान को अपना क्या-क्या मानते हैं?
Answer: तुलसीदास भगवान को अपने माता, पिता, गुरु और मित्र मानते हैं।
In simple words: तुलसीदास भगवान को अपने माता, पिता, गुरु और दोस्त मानते हैं।
Exam Tip: तुलसीदास द्वारा भगवान को माने गए सभी रिश्तों को सूचीबद्ध करें।
Question 7. वास्तव में तुलसीदास क्या चाहते हैं?
Answer: वास्तव में तुलसीदास किसी भी तरह भगवान के चरणों की शरण पाना चाहते हैं।
In simple words: तुलसीदास वास्तव में किसी भी तरह भगवान की शरण चाहते हैं।
Exam Tip: कवि की अंतिम इच्छा या लक्ष्य को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 8. तुलसीदास भगवान से कोई भी नाता जोड़ने को क्यों तैयार है?
Answer: तुलसीदास भगवान से कोई भी नाता जोड़ने को तैयार हैं, क्योंकि वे भगवान की शरण पाना चाहते हैं।
In simple words: तुलसीदास भगवान से कोई भी रिश्ता जोड़ने को तैयार हैं क्योंकि वे उनकी शरण में जाना चाहते हैं।
Exam Tip: कवि के लचीलेपन और भगवान के प्रति उनकी निष्ठा को उजागर करें।
Question 9. तुलसीदास किसके परम भक्त थे?
Answer: तुलसीदास भगवान श्रीराम के परम भक्त थे।
In simple words: तुलसीदास भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्त थे।
Exam Tip: भक्ति के विषय में सीधे और संक्षिप्त उत्तर दें।
सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
Question 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. हिंदी के शीर्ष कवि के रूप में .......... का नाम आता है। (सूरदासजी, तुलसीदासजी)
2. बाबा......... ने तुलसीदासजी को अपने पास रखा। (हरिदास, भारती)
3. जटायु सूर्य के सारथी का .......... था। (पुत्र, अनुज)
4. गोस्वामी तुलसीदासजी का श्रेष्ठ ग्रंथ .......... है। (रामायण, रामचरितमानस)
5. संसार राम को .......... नाम से जानता है। (पतितपावन, पालनकर्ता)
Answer:
1. तुलसीदासजी
2. हरिदास
3. पुत्र
4. रामचरितमानस
5. पतितपावन
In simple words: दिए गए विकल्पों में से सही शब्द चुनकर खाली स्थान भरें।
Exam Tip: विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और प्रत्येक रिक्त स्थान के लिए सबसे उपयुक्त शब्द चुनें, संदर्भ पर विचार करें।
निम्नलिखित विधान 'सही' हैं या 'गलत' यह बताइए :
Question 1. बताइए कि निम्नलिखित कथन सही हैं या गलत:
1. भगवान को अत्यंत दीन लोग ही प्रिय हैं।
2. तुलसीदासजी राम को अपना परिचय अत्यंत पापी के रूप में कराते हैं।
3. श्रीराम परम-ब्रह्म है।
4. तुलसीदासजी राम से किसी भी तरह से नाता जोड़ना नहीं चाहते।
Answer:
1. सही
2. सही
3. सही
4. गलत
In simple words: प्रत्येक कथन को पढ़कर बताएं कि वह सही है या गलत।
Exam Tip: प्रत्येक कथन को पाठ के आधार पर सत्यापित करें और उसके अनुसार 'सही' या 'गलत' चिह्नित करें।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :
Question 1. एक-एक शब्द में उत्तर लिखिए:
1. राम ने सुवर्णमृग के रूप में किसका उद्धार किया?
2. पत्थर के स्पर्श से राम ने किस नारी को शापमुक्त किया?
Answer:
1. मारीच का
2. अहल्या को
In simple words: इन प्रश्नों का उत्तर एक शब्द में दें।
Exam Tip: सीधे और सटीक एक शब्द का उत्तर दें, अनावश्यक विवरण से बचें।
निम्नलिखित प्रश्नों के साथ दिए गए विकल्पों से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :
Question 1. संसार राम को किस नाम से जानता है?
(a) मनभावन
(b) चित्तचोर
(c) गोपीवल्लभ
(d) पतितपावन
Answer: (d) पतितपावन
In simple words: दुनिया भगवान राम को 'पतितों को पवित्र करने वाले' के नाम से पहचानती है।
Exam Tip: प्रश्न के संदर्भ में राम के सबसे प्रसिद्ध और उपयुक्त विशेषण को चुनें।
Question 2. तुलसीदास अपने आपको क्या मानते हैं?
(a) प्रसिद्ध पातकी
(b) प्रसिद्ध भक्त
(c) महाकवि
(d) श्रेष्ठ कथाकार
Answer: (a) प्रसिद्ध पातकी
In simple words: तुलसीदास स्वयं को एक प्रसिद्ध पापी मानते हैं।
Exam Tip: तुलसीदास की विनम्रता और स्वयं को दीन-हीन मानने के भाव को दर्शाता विकल्प चुनें।
Question 3. भगवान के साथ तुलसीदास के कितने नाते हैं?
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) अनेक
Answer: (d) अनेक
In simple words: तुलसीदास के भगवान के साथ कई रिश्ते हैं।
Exam Tip: तुलसीदास द्वारा भगवान से जोड़े गए विभिन्न संबंधों की संख्या पर ध्यान दें, जो कि अनेक हैं।
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
Question 1. पर्यायवाची शब्द लिखिए:
1. विधि
2. खग
3. बिटप
4. व्याध
5. दीन
6. तात
7. सखा
8. नाता
9. शरण
Answer:
1. प्रकार
2. पक्षी
3. वृक्ष
4. शिकारी
5. दरिद्र
6. पिता
7. मित्र
8. रिश्ता
9. आश्रय
In simple words: प्रत्येक शब्द का समान अर्थ वाला दूसरा शब्द लिखें।
Exam Tip: प्रत्येक शब्द के लिए एक ऐसा पर्याय चुनें जो उसका सबसे करीबी अर्थ दर्शाता हो।
निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :
Question 1. विरोधी शब्द लिखिए:
1. विनय
2. पापी
3. मानव
4. दानी
5. कृपा
6. उद्धार
7. समान
Answer:
1. उदंडता
2. पुण्यशाली
3. दानव
4. भिखारी
5. अवकृपा
6. पतन
7. असमान
In simple words: प्रत्येक शब्द का विपरीत अर्थ वाला शब्द लिखें।
Exam Tip: विरोधी शब्द लिखते समय, दिए गए शब्द के ठीक विपरीत अर्थ को दर्शाने वाला शब्द चुनें।
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से भाववाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए :
Question 1. प्रत्येक वाक्य में से भाववाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए:
1. मनुष्य-जीवन में उत्पन्न होनेवाली समस्याओं का कारण घमंड ही होता है।
2. हमारी प्रगति का मूल विनयपूर्वक व्यवहार करना है।
3. सांसारिक दुःखो के लिए हमारे कर्म ही जिम्मेदार हैं।
4. मनुष्य के पाप ही एक दिन उसे खा जाते हैं।
Answer:
1. घमंड
2. व्यवहार
3. दुःख
4. पाप
In simple words: प्रत्येक वाक्य में से भाववाचक संज्ञा, यानि ऐसे शब्द जो भाव, गुण या अवस्था का बोध कराते हैं, उन्हें पहचानें।
Exam Tip: भाववाचक संज्ञाएं अक्सर भावनाओं, गुणों या अवस्थाओं को दर्शाती हैं और उन्हें अनुभव किया जा सकता है, देखा नहीं जा सकता।
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से विशेषण पहचानकर लिखिए :
Question 1. प्रत्येक वाक्य में से विशेषण पहचानकर लिखिए:
1. मैं बड़ा पापी हूँ और तू पापों को दूर करनेवाला है।
2. हे प्रभु! तू ही मेरा हितैषी है, और कोई नहीं।
3. तुलसीदास भगवान से कोई निश्चित नाता बनाकर उनके हो जाना चाहते है।
4. प्रभु राम दानी हैं और तुलसीदास भीख मांगनेवाले हैं।
Answer:
1. पापी
2. हितैषी
3. निश्चित
4. दानी
In simple words: प्रत्येक वाक्य में से विशेषण, यानि ऐसे शब्द जो किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं, उन्हें पहचानें।
Exam Tip: विशेषण वे शब्द होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, जैसे 'कैसा', 'कितना' जैसे प्रश्नों का उत्तर देते हैं।
निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए :
Question 1. शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए:
1. किसी दूसरे स्थान पर
2. दुःखों को दूर करनेवाला
Answer:
1. अन्यत्र
2. आरतिहर
In simple words: दिए गए वाक्यांश के लिए एक ही शब्द में उत्तर दें।
Exam Tip: वाक्यांश का अर्थ समझकर उसका सबसे सटीक और संक्षिप्त एक शब्द वाला रूप लिखें।
निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :
Question 1. उपसर्ग पहचानकर लिखिए:
1. समर्पण
2. अटूट
3. अनेक
4. सुवर्ण
5. अनुचर
6. अनाथ
7. उद्धार
8. अनर्थ
9. समर्थ
10. अत्यंत
11. अवकृपा
12. असमान
Answer:
1. समर्पण – सम् + अर्पण
2. अटूट – अ + टूट
3. अनेक – अन् + एक
4. सुवर्ण – सु + वर्ण
5. अनुचर – अनु + चर
6. अनाथ – अ + नाथ
7. उद्धार – उत् + धार
8. अनर्थ – अन् + अर्थ
9. समर्थ – सम् + अर्थ
10. अत्यंत – अति + अंत
11. अवकृपा – अब + कृपा
12. असमान – अ + समान
In simple words: प्रत्येक शब्द में से उपसर्ग को अलग करें और बताएं कि वह किस मूल शब्द के साथ जुड़ा है।
Exam Tip: उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं। उन्हें पहचानते समय मूल शब्द को अलग करने का प्रयास करें।
निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :
Question 1. प्रत्यय पहचानकर लिखिए:
1. पापी
2. त्यागी
3. बड़ाई
4. बड़प्पन
5. शिकारी
6. बुराई
7. यशोदा
8. दयालु
9. सामार्थ्य
10. अपनत्व
11. दनुज
12. मनुज
13. मायारहित
14. रक्षक
15. सहायता
16. आरतहर
17. उद्धारक
18. पातकी
Answer:
1. पापी – पाप + ई
2. त्यागी – त्याग + ई
3. बड़ाई – बड़ा + ई
4. बड़प्पन – बड़ा + पन
5. शिकारी – शिकार + ई
6. बुराई – बुरा + ई
7. यशोदा – यश + दा
8. दयालु – दया + लु
9. सामार्थ्य – समर्थ + य
10. अपनत्व – अपना + त्व
11. दनुज – दनु + ज
12. मनुज – मनु + ज
13. मायारहित – माया + रहित
14. रक्षक – रक्ष + क
15. सहायता – सहाय + ता
16. आरतहर – आरत + हर
17. उद्धारक – उद्धार + क
18. पातकी – पातक + ई
In simple words: प्रत्येक शब्द में से प्रत्यय को अलग करें और बताएं कि वह किस मूल शब्द के बाद जुड़ा है।
Exam Tip: प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ या रूप में परिवर्तन लाते हैं। उन्हें पहचानते समय मूल शब्द को अलग करने का प्रयास करें।
तुलसी के पद Summary in Gujarati
ભક્ત તુલસીદાસ ભગવાન રામ ને કહે છે કે હે પ્રભુ, હું તમારા ચરણો છોડીને ક્યાં જાઉં? સંસારમાં એક માત્ર તમે જ પાપીઓને પવિત્ર કરનાર છો. ગરીબ લોકો તમને પ્રિય છે. ક્યા ભગવાને પાપીઓનો ઉદ્ધાર કર્યો છે અને પ્રતિષ્ઠા મેળવી છે? ક્યા ભગવાને પક્ષી, હરણ, શિકારી, પથ્થર, વૃક્ષ અને યવનનો ઉદ્ધાર કર્યો છે?
શિકારી, વગેરે? દેવતા, રાક્ષસ, મુનિ, હાથી, મનુષ્ય, બધા સંપત્તિથી મોહિત છે અને સંપત્તિમાં જીવે છે. હે ભગવાન, તેમની સાથે સંબંધ રાખવાથી કોઈ લાભ નથી.
હે ભગવાન! તમે દયાળુ છો, હું ગરીબ છું એટલે દયાને લાયક છું. તમે દાતા છો. હું ભિખારી છું. હું એક પ્રખ્યાત પાપી અને દુષ્ટ છું. તમારા સિવાય પાપોના ઢગલાનો નાશ કરનાર બીજું કોઈ નથી. તમે અનાથોના નાથ છો.
મારા જેવો કોઈ અનાથ નથી. મારા જેવો કોઈ દુઃખી નથી અને તમારા જેવો કોઈ દુઃખ હરનાર નથી. હે પ્રભુ! તમે સર્વોચ્ચ છો. હું એક પ્રાણી છું. તમે માલિક છો. હું તમારો સેવક છું. તમે મારા માતા-પિતા, ગુરુ, મિત્ર અને દરેક રીતે શુભચિંતક છો.
तुलसी के पद Summary in English
The devoted Tulsidas addresses Lord Ram, saying, "O God! Where can I go, leaving your sanctuary (feet)? Who is the saviour of the sinful (patitpavan) in this world except you? To whom are the poor dear, other than you? Which God has uplifted the sinful people and gained such renown? Which God has saved a bird, a deer, a hunter, a stone, a tree?
A barbarian, etc.? The deity, the monster, the sage, the elephant, the man—all are captivated by wealth and live immersed in it. O God, there is no benefit in maintaining a relationship with them."
"O God! You are kind; I am poor, hence worthy of kindness. You are a donor; I am a beggar. I am a famously sinful and wicked person. There is no one like you to eradicate a heap of sins. You are the guardian of the orphans.
There is no orphan like me. No one is as distressed as I am, and no one is as mighty as you to snatch away misery. O God! You are the supreme. I am an animal. You are my master. I am your servant. You are my father-mother, guide, friend, and well-wisher in every possible way."
तुलसी के पद Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
संत तुलसीदास भगवान राम के महान भक्त थे। राम ही उनके लिए सब कुछ थे। राम के चरणों को छोड़कर वे किसी अन्य देवता की शरण में जाने को तैयार नहीं थे। यहां उनके दो पद दिए गए हैं।
पहले पद में वे राम के चरणों में अपनी समर्पण भावना और उनके प्रति अपनी अटूट निष्ठा प्रकट करते हैं। दूसरे पद में उन्होंने राम के प्रति अपने कई संबंध बताकर उनके चरणों की शरण पाने की विनती की है।
पदों का सार :
हे प्रभु, मैं आपके चरणों को छोड़कर और कहां जाऊं? संसार में एक आप ही पतितपावन हैं। आप ही दीनबंधु हैं। पापियों का उद्धार करने वाला आप जैसा और कोई नहीं है। देवता, राक्षस आदि सभी माया के वशीभूत हैं। उनसे अपनापन जोड़ने से कोई लाभ नहीं है।
हे प्रभु, आपके और मेरे बीच कई संबंध हैं। आप किसी भी संबंध से मुझसे जुड़े रह सकते हैं। आप मेरे माता, पिता, गुरु, मित्र आदि सब कुछ हैं। मैं तो किसी भी संबंध के द्वारा आपके चरणों की शरण पाना चाहता हूं।
टिप्पणियाँ
सुवर्ण-जटायु, रामायण का एक प्रसिद्ध गिद्ध। वह सूर्य के सारथी अरुण का बेटा था। सीताहरण के समय इसने रावण से युद्ध किया और वह घायल हुआ। राम को सीताहरण का समाचार देने के बाद उसने प्राण छोड़े।
मृग-मारीच, एक राक्षस जो ताड़का राक्षसी का बेटा तथा रावण का अनुयायी था। वह सुवर्णमृग के रूप में राम द्वारा मारा गया था।
व्याध-पहले वाल्मीकि हिंसावृत्ति से जीवन यापन करते थे, परंतु बाद में सनकादि ऋषियों के उपदेश से जीवाहिंसा छोड़कर तपस्या में लगे और महर्षि वाल्मीकि कहलाए। इन्होंने रामायण की रचना की।
पषाण-अहल्या, महर्षि गौतम की पत्नी। शापवश वह पत्थर बन गई थी। राम के चरणों के स्पर्श से इसका उद्धार हुआ।
बिटप-यमलाजुर्न, कुबेर के बेटे नलकुबेर और मणिग्रीवा नारद के शापवश गोकुल में दो अर्जुन वृक्षों के रूप में उत्पन्न हुए। किसी अपराध पर जब यशोदा ने कृष्ण को इन पेड़ों से बांधा तो वे गिर पड़े और उनका उद्धार हो गया।
यवन-एक यवन। कहा जाता है कि एक मुसलमान ने सूकर के आघात से मरते समय 'हराम' शब्द कहा था। अनजाने में ही 'राम' शब्द का उच्चारण करने से उसकी मुक्ति हो गई।
पदों के अर्थ
जाऊं कहां............अपनपौ हारे।
भक्त तुलसीदास भगवान राम से कहते हैं कि हे प्रभु, मैं आपके चरणों को छोड़कर और कहां जाऊं? संसार में पतितपावन नाम और किसका है? दीन-दुखी लोग आपके सिवाय और किसे प्रिय हैं? आपके सिवा अन्य किस देव ने हठ करके दुष्टों का उद्धार किया है और बड़प्पन पाया है? पक्षी, मृग, व्याध, पाषाण (पत्थर) जड़, वृक्ष, यवन को किस देवता ने तारा है? देवता, राक्षस, मुनि, नाग (हाथी), मनुष्य ये सब माया के वशीभूत हैं और उसके बारे में सोचते-विचारते हैं। तुलसीदास कहते हैं कि हे प्रभु, इनसे अपनापन जोड़ने से कोई लाभ नहीं।
तू दयालु............चरण-शरण पावे।
हे प्रभु, आप दयालु हैं तो मैं दीन अर्थात् दयापात्र हूं। आप दानी हैं तो मैं भिखारी हूं। यदि मैं प्रसिद्ध पापी हूं, तो आप जैसा पापों के समूह को नष्ट करनेवाला दूसरा कोई नहीं है। आप अनाथों के नाथ हैं, तो मुझ जैसा कोई अनाथ नहीं है। मेरे जैसा कोई दुखी नहीं है और आप जैसा कोई दुख दूर करनेवाला नहीं है। हे प्रभु, आप ब्रह्म हैं, तो मैं जीव हूं।
आप स्वामी हैं, तो मैं आपका सेवक (दास) हूं। आप मेरे माता, पिता, गुरु, मित्र और सब तरह से मेरे हितैषी हैं। आप और मेरे बीच अनेक रिश्ते हैं। इनमें से जो रिश्ता आपको पसंद हो, वह मुझसे आप जोड़ सकते हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि हे कृपालु, मैं तो किसी तरह आपके चरणों की शरण पाना चाहता हूं।
टिप्पणियाँ
मृग-मारीच, एक दानव था जो ताड़का नामक राक्षसी का बेटा और रावण का सेवक था। उसे सोने के हिरण के रूप में राम ने मार डाला।
व्याध - पहले वाल्मीकि हिंसक स्वभाव से जीवन बिताते थे, लेकिन बाद में सनकादि ऋषियों के सिखाने से जीव हत्या छोड़ दी, तपस्या करने लगे और महर्षि वाल्मीकि कहलाए। उन्होंने रामायण ग्रंथ की रचना की।
पाषाण - अहल्या, महर्षि गौतम की पत्नी थीं। श्राप के कारण वह पत्थर बन गईं थीं। राम के पैरों के छूने से उन्हें मुक्ति मिल गई।
बिटप - यमलाजुर्न, कुबेर के बेटे नलकूबर और मणिग्रीवा नारद के श्राप के कारण गोकुल में दो अर्जुन पेड़ों के रूप में पैदा हुए। एक बार जब यशोदा माँ ने कृष्ण को गलती करने पर इन पेड़ों से बाँध दिया, तो वे गिर गए और उन्हें मुक्ति मिल गई।
जवन - एक यवन (विदेशी)। यह कहा जाता है कि एक मुसलमान ने सूअर के हमले से मरते समय 'हराम' शब्द बोला था। गलती से 'राम' शब्द बोलने से उसे मुक्ति प्राप्त हो गई।
पदों के अर्थ
‘जानें कहाँ......... अपनपौ हारे।’ भक्त तुलसीदासजी भगवान राम से बोलते हैं कि हे भगवान, मैं आपके पैर छोड़कर और कहां जाऊं? दुनिया में पतितपावन (पापियों को पवित्र करनेवाला) नाम और किसका है? गरीब और दुःखी लोग आपके अलावा और किसे प्यारे हैं? आपके सिवा और किस देवता ने ज़िद करके दुखों से मुक्ति दिलाई और प्रसिद्धि पाई? पक्षी, हिरण, शिकारी, पत्थर (जो स्थिर हैं), पेड़ और यवन को किस देवता ने बचाया है? देवता, राक्षस, मुनि, हाथी, मनुष्य ये सब माया के वश में हैं और उनके बारे में ही सोचते रहते हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि हे प्रभु, इनसे कोई रिश्ता बनाने का कोई लाभ नहीं।
‘तु दयालु......... शरण-शरण पावे।’ हे ईश्वर, यदि आप दयालु हैं तो मैं एक बहुत गरीब और दया का पात्र हूँ। यदि आप दानी हैं तो मैं एक भिक्षुक हूँ। अगर मैं एक बड़ा पापी हूँ, तो आपके जैसा पापों के ढेर को खत्म करने वाला और कोई नहीं। आप अनाथों के स्वामी हैं, तो मुझ जैसा कोई बेसहारा नहीं है। मेरे जैसा कोई दुःखी नहीं है और आपके जैसा कोई दुख मिटाने वाला नहीं है। हे भगवान, यदि आप ईश्वर हैं, तो मैं एक साधारण जीव हूँ।
आपके और मेरे बीच कई संबंध हैं। इनमें से जो भी संबंध आपको अच्छा लगे, आप मुझे उस रिश्ते से जोड़ सकते हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि हे दयालु, मैं तो किसी भी तरीके से आपके चरणों की पनाह पाना चाहता हूँ।
तुलसी के पद शब्दार्थ
1. तजि - छोड़ देना।
2. काको - किसका।
3. केहि - किसको, किसे।
4. दीन - दुखी, गरीब।
5. कोने - किसने।
6. बराइ - महानता।
7. बिरद - पहचान, गौरव, कीर्ति।
8. अधम - पापी, बुरा, निम्न, नीच।
9. खग - चिड़िया।
10. व्याध - शिकारी।
11. बिटप - पेड़।
12. जवन - विदेशी, अनभिज्ञ।
13. दनुज - दैत्य, दानव।
14. मुनि - तपस्वी, संत।
15. नाग - साँप, गज।
16. मायाबिबस - माया के अधीन।
17. अपनपौ - अपनापन।
18. पातकी - पापी।
19. पापपुंजहारी - पापों के ढेर को खत्म करने वाला।
20. अनाथ - जिसका कोई रक्षक न हो, बेसहारा।
21. आरत - पीड़ा में।
22. चेरो - सेवक।
23. तात - दोस्त।
24. सखा - मित्र।
25. विधि - तरीका, ढंग।
26. हितु - कल्याण करने वाला।
27. नाते - संबंध, रिश्ते।
28. भावे - पसंद आए।
29. सरन - पनाह।
Free study material for Hindi
Free GSEB Textbook Explanations: Class 9 Hindi Chapter 17 तुलसी के पद
Accessing Chapter 17 तुलसी के पद Solutions
Explore reliable textbook solutions for Chapter 17 तुलसी के पद tailored for Class 9 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official GSEB standards for Hindi.
Concept-Driven Answers for Class 9 Hindi
Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 9 Hindi text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.
Maximizing Study Efficiency
Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 9 Hindi.
FAQs
The complete and updated GSEB Class 9 Hindi Solutions Chapter 17 तुलसी के पद is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Hindi are as per latest GSEB curriculum.
Yes, our experts have revised the GSEB Class 9 Hindi Solutions Chapter 17 तुलसी के पद as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using GSEB language because GSEB marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our GSEB Class 9 Hindi Solutions Chapter 17 तुलसी के पद will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 9 Hindi. You can access GSEB Class 9 Hindi Solutions Chapter 17 तुलसी के पद in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire GSEB Class 9 Hindi Solutions Chapter 17 तुलसी के पद in printable PDF format for offline study on any device.