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Detailed Chapter 08 चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग GSEB Solutions for Class 12 Hindi
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Class 12 Hindi Chapter 08 चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग GSEB Solutions PDF
स्वाध्याय
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए :
Question 1. सिकरम किससे चलती थी?
(क) बैलों से
(ख) घोड़ों से
(ग) ऊँटों से
(घ) गुलामों से
Answer: (ख) घोड़ों से
In simple words: सिकरम एक प्रकार की गाड़ी थी जो घोड़ों की मदद से चलती थी।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में वाहन के प्रकार और उसे चलाने वाले जानवर का सही ज्ञान महत्वपूर्ण है।
Question 2. गांधीजी को सिकरम में कहाँ बैठाया गया?
(क) यात्रियों के पास
(ख) गोरे के पैरों में
(ग) कोचवान की बगल में
(घ) सबके पीछे
Answer: (ग) कोचवान की बगल में
In simple words: गांधीजी को सिकरम में कोचवान के बगल में बिठाया गया, जो उनकी सीट नहीं थी।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर अध्याय में वर्णित गांधीजी के साथ हुए दुर्व्यवहार को दर्शाता है।
Question 3. गोरा मुखिया बाहर निकल कर क्या करना चाहता था?
(क) पानी पीना चाहता था।
(ख) कोफी पीना चाहता।
(ग) गांधीजी से झगड़ना चाहता था।
(घ) सिगरेट पीना चाहता था।
Answer: (घ) सिगरेट पीना चाहता था।
In simple words: गोरा मुखिया सिकरम से बाहर आकर सिगरेट पीना चाहता था।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न गोरे मुखिया के व्यवहार और उसकी इच्छा को दर्शाता है।
Question 4. गाँधीजी भगवान से क्या प्रार्थना करते रहे ?
(क) रक्षा के लिए
(ख) देशवासियों के हक के लिए
(ग) जोहनिसबर्ग पहुँचने के लिए
(घ) स्वतंत्रता के लिए
Answer: (क) रक्षा के लिए
In simple words: गांधीजी ने भगवान से अपनी सुरक्षा के लिए प्रार्थना की क्योंकि उन्हें खतरा महसूस हो रहा था।
🎯 Exam Tip: गांधीजी की प्रार्थना उनकी उस समय की चिंता और असुरक्षा की भावना को उजागर करती है।
Question 5. दूसरे दिन गांधीजी को सिकरम में कहाँ जगह मिली?
(क) गाड़ीवान के पास
(ख) यात्रियों के पास
(ग) गोरे मुखिया के पास
(घ) एजेण्ट के पास
Answer: (ख) यात्रियों के पास
In simple words: अगले दिन गांधीजी को सिकरम में दूसरे यात्रियों के साथ बैठने की जगह मिली।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दर्शाता है कि अगले दिन गांधीजी के साथ बेहतर व्यवहार किया गया था।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
Question 1. जोहनिसबर्ग पहुँचने के लिए एक रात कहाँ रुकना पड़ता था?
Answer: जोहनिसबर्ग पहुँचने के लिए यात्रियों को एक रात स्टैण्डरटन में रुकना पड़ता था।
In simple words: जोहनिसबर्ग जाने के लिए एक रात स्टैण्डरटन में रुकना आवश्यक था।
🎯 Exam Tip: यात्रा के पड़ाव का नाम याद रखना इस प्रकार के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. अब्दुल्ला सेठ ने किसे तार किया था?
Answer: अब्दुल्ला सेठ ने चार्ल्सटाउन के पते पर सिकरमवाले को तार किया था।
In simple words: अब्दुल्ला सेठ ने सिकरम के मालिक को चार्ल्सटाउन में तार भेजा था।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न कहानी के प्रमुख पात्रों के बीच के संबंध को दर्शाता है।
Question 3. गांधीजी ने किसे अन्याय माना?
Answer: जब सिकरम कंपनी के गोरे मुखिया ने गांधीजी की सीट पर बैठकर उन्हें कोचवान की बगल में बैठा दिया, तो गांधीजी ने इसे अन्यायपूर्ण माना।
In simple words: जब गोरे मुखिया ने गांधीजी की सीट पर कब्जा कर लिया और उन्हें नीची जगह पर बिठाया, तो गांधीजी को यह गलत लगा।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के लिए अन्याय की परिभाषा और उनके आत्म-सम्मान को समझना इस उत्तर में सहायक है।
Question 4. गोरा अंगुली दिखाकर क्या बड़बड़ाता था?
Answer: गोरा अंगुली दिखाकर बड़बड़ाता था-“याद रख, स्टैण्डरटन पहुंचने दे, फिर तुझे मज़ा चखाऊँगा।”
In simple words: गोरे व्यक्ति ने उंगली दिखाते हुए गांधीजी को धमकी दी कि स्टैण्डरटन पहुँचने पर वह उन्हें सबक सिखाएगा।
🎯 Exam Tip: इस वाक्य से गोरे मुखिया के क्रोध और धमकी भरे स्वभाव का पता चलता है।
Question 5. गांधीजी को क्या देखकर तसल्ली हुई?
Answer: गांधीजी को सिकरम से स्टैण्डरटन पहुँचने पर कई हिन्दुस्तानी चेहरे दिखाई दिए, जिससे उन्हें सुकून मिला।
In simple words: स्टैण्डरटन में भारतीय लोगों को देखकर गांधीजी को बहुत आराम महसूस हुआ।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न गांधीजी की यात्रा के दौरान मानसिक स्थिति और सुरक्षा की भावना को दर्शाता है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में लिखिए :
Question 1. चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग कैसे पहँचा जाता था?
Answer: चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग जाने के लिए घोड़ों की सिकरम पकड़नी पड़ती थी। बीच में एक रात स्टैण्डरटन में रुकना पड़ता था। इस तरह सिकरम से चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग पहुंचा जाता था।
In simple words: चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग तक जाने के लिए घोड़ों से चलने वाली सिकरम का इस्तेमाल होता था। इस यात्रा में एक रात स्टैण्डरटन में रुकना पड़ता था।
🎯 Exam Tip: यात्रा के साधन और बीच में पड़ने वाले महत्वपूर्ण पड़ाव का उल्लेख करना आवश्यक है।
Question 2. गोरा मुखिया कहाँ बैठता था?
Answer: सिकरम में यात्रा करने वाले लोग अंदर बैठते थे। सिकरम के बाहर कोचवान की बगल में दाएं-बाएं दो सीटें थीं। गोरा मुखिया इन सीटों में से एक पर बैठता था।
In simple words: गोरा मुखिया सिकरम के बाहर, कोचवान के पास वाली सीट पर बैठता था।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न सिकरम में सीटों की व्यवस्था और गोरे मुखिया की स्थिति को स्पष्ट करता है।
Question 3. सिकरम पारडीकोप पहुँची तो गोरे मुखिया ने गांधीजी से क्या कहा?
Answer: चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग की यात्रा के दौरान गोरे मुखिया ने गांधीजी को कोचवान के बगल वाली सीट पर बिठाया था। जब सिकरम पारडीकोप पहुँची, तो उसने पैर रखने की जगह पर एक मैला बोरा बिछाकर गांधीजी से कहा, "साहब, तुम यहाँ बैठो। मुझे कोचवान के पास बैठना है।"
In simple words: जब सिकरम पारडीकोप पहुंची, तो गोरे मुखिया ने गांधीजी से कहा कि वे गंदे बोरे पर बैठें ताकि मुखिया कोचवान के पास बैठ सके।
🎯 Exam Tip: गोरे मुखिया के दुर्व्यवहार का वर्णन करते समय उसके शब्दों को सही ढंग से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. सहयात्रियों ने गांधीजी का पक्ष लेते हुए क्या कहा?
Answer: गोरे मुखिया ने गांधीजी को अपने पैरों के पास बैठाने का प्रयास किया, लेकिन गांधीजी ने मना कर दिया। इस पर गोरा मुखिया गांधीजी को मारने और गाली देने लगा। यह देखकर अन्य यात्रियों ने गांधीजी का पक्ष लिया और कहा, "अरे भाई, उस बेचारे को वहीं रहने दो। उसे बेवजह मत मारो। अगर वहाँ नहीं तो, उसे हमारे पास अंदर बैठने दो।"
In simple words: जब गोरा मुखिया गांधीजी को पीट रहा था, तो दूसरे यात्रियों ने बीच-बचाव करते हुए कहा कि उसे परेशान न करें और उसे उनके पास अंदर बैठने दें।
🎯 Exam Tip: सहयात्रियों की दयालुता और गांधीजी के प्रति समर्थन को उजागर करना इस उत्तर में महत्वपूर्ण है।
Question 5. हिन्दुस्तानी भाइयों ने गांधीजी से क्या कहा?
Answer: गोरे मुखिया ने स्टैण्डरटन पहुँचने पर गांधीजी को परेशान करने की धमकी दी थी। रात को जब गांधीजी स्टैण्डरटन पहुँचे, तो उन्हें कई हिन्दुस्तानी मिले, जिन्हें देखकर उन्हें तसल्ली हुई। हिन्दुस्तानी भाइयों ने गांधीजी से कहा, "हम आपको ईसा सेठ की दुकान पर ले जाने के लिए ही खड़े हैं। हमें दादा अब्दुल्ला का तार मिला है।”
In simple words: स्टैण्डरटन में भारतीय लोगों ने गांधीजी को बताया कि वे उन्हें लेने आए हैं और उन्हें ईसा सेठ की दुकान पर ले जाएंगे क्योंकि उन्हें अब्दुल्ला सेठ का संदेश मिला था।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न गांधीजी की सुरक्षा और चिंता के अंत को दर्शाता है, जिसमें हिन्दुस्तानियों की मदद का उल्लेख जरूरी है।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए :
Question 1. सिकरम का टिकट रद्द होने का रहस्य क्या था?
Answer: गांधीजी के पास सिकरम का सही टिकट था, और अब्दुल्ला सेठ ने सिकरमवाले के नाम तार भी भेजा था। सिकरम में गोरा मुखिया ने गांधीजी से कहा कि उनका टिकट रद्द हो गया है, जबकि ऐसा नहीं था। गांधीजी ने उसे बताया कि उनका टिकट वैध है, लेकिन गोरे मुखिया का इरादा कुछ और ही था। वह गांधीजी को 'कुली' मानता था और नहीं चाहता था कि वे गोरे यात्रियों के साथ बैठें। इसी वजह से उसने जानबूझकर गांधीजी के टिकट को रद्द हुआ बताया। इस प्रकार, सिकरम का टिकट रद्द होने का रहस्य गोरों के बीच भारतीयों के प्रति असहिष्णुता थी।
In simple words: गांधीजी का सिकरम टिकट रद्द करने का कारण गोरे मुखिया की नस्लीय भेदभावपूर्ण सोच थी। वह भारतीयों को 'कुली' मानता था और नहीं चाहता था कि गांधीजी गोरे यात्रियों के साथ यात्रा करें, इसलिए उसने झूठा दावा किया कि उनका टिकट रद्द हो गया है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में गोरे मुखिया के असली इरादे और तत्कालीन नस्लीय भेदभाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. गोरे मुखिया और गांधीजी के बीच झगड़ा क्यों हुआ?
Answer: दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को 'कुली' समझा जाता था, और गांधीजी भी एक भारतीय थे। सिकरम में वे गोरे यात्रियों के साथ बैठे थे, जिसे गोरा मुखिया सहन नहीं कर सका। उसने गांधीजी की सीट पर बैठकर उन्हें कोचवान के बगल वाली सीट पर बिठा दिया, जहाँ उसे खुद बैठना चाहिए था। गांधीजी ने यह अपमान सह लिया। बाद में गोरे मुखिया ने अपनी इच्छा से गांधीजी की जगह पर बैठना चाहा। उसने पैर रखने के पटिए पर एक गंदा बोरा बिछाकर गांधीजी से कहा कि वे अपनी सीट से उठकर उस बोरे पर बैठें। गांधीजी यह अपमान बर्दाश्त नहीं कर सके, और इसी बात पर गोरे मुखिया से उनका झगड़ा हुआ।
In simple words: गांधीजी और गोरे मुखिया के बीच झगड़ा इसलिए हुआ क्योंकि गोरा मुखिया गांधीजी को एक भारतीय होने के कारण हीन समझता था। उसने गांधीजी को उनकी सीट से उठाकर अपमानित किया और बाद में उन्हें एक गंदे बोरे पर बैठने को कहा, जिसे गांधीजी ने सहन नहीं किया।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की स्थिति और गोरे मुखिया के नस्लीय भेदभावपूर्ण व्यवहार पर प्रकाश डालना चाहिए।
Question 3. गांधीजी ने सिकरम कम्पनी के एजेन्ट को चिट्ठी क्यों लिखी? उसका क्या उत्तर प्राप्त हुआ?
Answer: अपमान का सामना करने के बाद गांधीजी स्टैण्डरटन से जोहनिसबर्ग पहुँचे। उन्होंने सिकरम कंपनी के एजेंट को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने गोरे मुखिया के दुर्व्यवहार की शिकायत की। कंपनी वालों से गांधीजी ने अगली सुबह की यात्रा के लिए सिकरम में अंदर जगह देने का आग्रह किया। जवाब में एजेंट ने गांधीजी को आश्वस्त किया कि अगली यात्रा में वह गोरा नहीं रहेगा और एक बड़ी सिकरम आएगी, जिसमें उन्हें अन्य यात्रियों के साथ अंदर जगह मिलेगी। इस तरह, गांधीजी को एजेंट से संतोषजनक जवाब मिला।
In simple words: गांधीजी ने सिकरम कंपनी के एजेंट को पत्र लिखकर गोरे मुखिया के बुरे व्यवहार की शिकायत की और अगली यात्रा में सम्मानजनक सीट मांगी। एजेंट ने उन्हें आश्वासन दिया कि अगली बार उन्हें एक अच्छी सिकरम में यात्रियों के साथ बैठने को मिलेगा और वह गोरा मुखिया नहीं होगा।
🎯 Exam Tip: शिकायत का कारण और एजेंट से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया दोनों को उत्तर में शामिल करना चाहिए।
GSEB Solutions Class 12 Hindi चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग Important Questions and Answers
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सविस्तार (पाँच-छः वाक्यों में) लिखिए :
Question 1. गोरे मुखिया ने गांधीजी की पिटाई क्यों की?
Answer: गांधीजी पहले ही कोचवान की बगल में बैठकर एक बार अपमान सह चुके थे। लेकिन जब गोरे मुखिया ने उन्हें पैर रखने के पटिए पर रखे मैले-से बोरे पर बैठने के लिए कहा, तो वे यह अपमान सहन करने को तैयार नहीं हुए। उनके इनकार से गोरा मुखिया क्रोधित हो गया। उसने गांधीजी पर तमाचों की वर्षा करना शुरू कर दिया। गोरे मुखिया ने उनकी बांह पकड़कर उन्हें नीचे उतारने का प्रयास किया, लेकिन गांधीजी ने सिकरम के सींखचों को कसकर पकड़ लिया। इस कारण वह उन्हें नीचे नहीं उतार सका, पर उन्हें पीटता रहा और गालियाँ देता रहा। इस प्रकार, अपना आदेश न मानने पर गोरे मुखिया ने गांधीजी की पिटाई की।
In simple words: गोरे मुखिया ने गांधीजी की पिटाई इसलिए की क्योंकि गांधीजी ने उसके अपमानजनक आदेश को मानने से इनकार कर दिया था। मुखिया ने गांधीजी को गंदे बोरे पर बैठने को कहा था, और जब गांधीजी ने मना किया तो मुखिया गुस्सा हो गया और उन्हें पीटने लगा।
🎯 Exam Tip: पिटाई का तात्कालिक कारण (गांधीजी का इनकार) और उसके पीछे के अपमानजनक व्यवहार दोनों को विस्तार से बताना आवश्यक है।
Question 2. स्टैण्डरटन पहुंचने पर गांधीजी ने कैसा अनुभव किया?
Answer: चार्ल्सटाउन से स्टैण्डरटन तक की गांधीजी की यात्रा बहुत कठिन रही। गोरे मुखिया ने उन्हें अत्यधिक परेशान किया। उसने उनका अपमान किया, पिटाई की और स्टैण्डरटन पहुँचने पर उन्हें सबक सिखाने की धमकी दी। बेचारे गांधीजी को इससे बहुत डर लगा और उन्हें संदेह था कि वे सुरक्षित स्थान पर पहुँच पाएंगे या नहीं। जब रात हुई और सिकरम स्टैण्डरटन पहुँची, तो वहाँ गांधीजी ने कई भारतीयों को देखा, जिससे उन्हें तसल्ली हुई। उन्हें और भी सुकून मिला जब उन लोगों ने बताया कि वे उन्हें ईसा सेठ की दुकान पर ले जाएंगे। इस प्रकार, स्टैण्डरटन पहुँचने पर गांधीजी ने राहत की सांस ली।
In simple words: स्टैण्डरटन पहुँचने तक गांधीजी बहुत डरे हुए और परेशान थे क्योंकि गोरे मुखिया ने उन्हें बहुत तंग किया था। लेकिन वहाँ कई भारतीयों को देखकर और उनके द्वारा मदद की पेशकश सुनकर उन्हें बहुत शांति और राहत महसूस हुई।
🎯 Exam Tip: गांधीजी की मानसिक स्थिति (डर से राहत) और स्टैण्डरटन में मिली मानवीय सहायता को इस उत्तर में प्रमुखता से दर्शाना चाहिए।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए:
Question 1. गोरे अफसर ने गांधीजी के साथ दुर्व्यवहार क्यों किया?
Answer: गोरे अफसर ने सिकरम में बैठे गांधीजी से पैर रखने के पटिये पर मैला-सा कपड़ा बिछाकर बैठने को कहा। गांधीजी ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया, इसलिए गोरे अफसर ने गांधीजी के साथ दुर्व्यवहार किया।
In simple words: गोरे अधिकारी ने गांधीजी के साथ बुरा व्यवहार किया क्योंकि गांधीजी ने गंदे कपड़े पर बैठने से मना कर दिया था, जिसे अधिकारी ने उनके लिए रखा था।
🎯 Exam Tip: दुर्व्यवहार का सीधा कारण- गांधीजी का अपमानजनक आदेश मानने से इनकार- स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द लिखिए :
• रद्द - अनुपयोगी, व्यर्थ
• अजनबी - अपरिचित
• नीयत - इरादा
• अन्याय - नाइंसाफी, अनीति
• अपमान - अनादर
• तकरार - झगड़ा
• असमर्थ - अशक्त
• नाहक - व्यर्थ
• शक - संदेह
• तसल्ली - दिलासा
🎯 Exam Tip: पर्यायवाची शब्दों को याद रखना शब्दावली बढ़ाने में मदद करता है और लेखन को समृद्ध बनाता है।
निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विरुद्धार्थी) शब्द लिखिए :
• उचित × अनुचित
• दायाँ × बायाँ
• अपमान × सम्मान
• समझदारी × नासमझी
• थोड़ी × बहुत
• मैला × साफ-सुथरा
• असमर्थ × समर्थ
• अंदर × बाहर
• इच्छा × अनिच्छा
• बलवान × बलहीन
• दया × निर्दयता
• शर्मिंदा × बेशर्म
• खुश × नाखुश
• कड़वा × मीठा
• आश्वस्त × अनाश्वस्त
• आगे × पीछे
🎯 Exam Tip: विलोम शब्द विपरीत अर्थ को समझने और सही जगह उपयोग करने में सहायक होते हैं।
निम्नलिखित तद्भव शब्द का तत्सम रूप लिखिए :
जिन्दा – जीवित
🎯 Exam Tip: तद्भव और तत्सम शब्दों के ज्ञान से भाषा की शुद्धता और समझ बढ़ती है।
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :
• अन्याय = अ (उपसर्ग) + न्याय
• प्रार्थना = प्र (उपसर्ग) + अर्थना
• बेफिकरी = बे (उपसर्ग) + फिकरी
🎯 Exam Tip: उपसर्ग शब्दों के अर्थ को बदलते हैं; उन्हें पहचानने से शब्द निर्माण की प्रक्रिया समझने में मदद मिलती है।
निम्नलिखित शब्दसमूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :
• जो उपयोग के लायक न हो – रही
• जिससे जान-पहचान न हो – अजनबी
• गाड़ी हाँकनेवाला – कोचवान
• जो उचित न हो – अनुचित
• समझना' क्रिया की संज्ञा – समझदारी
• जो समर्थ न हो – असमर्थ
• हथेली और पहुँचे के बीच का भाग – कलाई
• जिसके पास कोई चारा न हो – बेचारा
• अपने पर बीती हुई – आपबीती
• जिसे आश्वासन दिया गया है – आश्वस्त
• जिसे कोई फिक़ न हो – बेफिक्र
🎯 Exam Tip: वाक्यांशों के लिए एक शब्द का प्रयोग भाषा को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाता है।
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :
Question 1.
1. आपकी टिकट रद्द हो चुकी है।
2. मैंने यह अपमान को पी लिया।
3. मेरा जगह अंदर था।
4. मेरे ऊपर तमाचों की वर्षा होने लगी।
5. मैं उन लोग को अपने पर बीती सुनाई।
6. मैं बहोत खुश हुआ।
7. मेरा घर तुमसे बड़ा है।
8. मुंबई की सड़के नागपुर से अच्छी हैं।
Answer:
1. आपका टिकट रद्द हो चुका है। (लिंग सुधार)
2. मैंने इस अपमान को पी लिया। (कारक सुधार)
3. मेरी जगह अंदर थी। (लिंग और वचन सुधार)
4. मुझ पर तमाचों की वर्षा होने लगी। (कारक सुधार)
5. मैंने उन लोगों को आपबीती सुनाई। (कारक और वचन सुधार)
6. मैं बहुत खुश हुआ। (वर्तनी सुधार)
7. मेरा घर तुम्हारे घर से बड़ा है। (कारक सुधार)
8. मुंबई की सड़कें नागपुर की सड़कों से अच्छी हैं। (कारक और वचन सुधार)
In simple words: वाक्यों को सही लिंग, वचन, कारक और वर्तनी के अनुसार ठीक किया गया है ताकि वे व्याकरणिक रूप से सही हों।
🎯 Exam Tip: वाक्य शुद्धिकरण में लिंग, वचन, कारक और वर्तनी की गलतियों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए :
हवा खाना – शुद्ध वायु का सेवन करना
वाक्य : मेरे दादाजी सुबह-शाम बगीचे में हवा खाते है।
छाती धड़कना – भय से हृदय काँपने लगना
वाक्य : रास्ते में फण निकाले हुए नाग को देखकर यात्री की छाती धड़कने लगी।
🎯 Exam Tip: मुहावरे का अर्थ और उसका सही वाक्य प्रयोग दोनों को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए।
चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
गुलामी के दिनों में अंग्रेजों द्वारा भारतवासियों पर तरह-तरह के अत्याचार किए जाते थे। उन्हें 'कुली' से बढ़कर नहीं समझा जाता था। महात्मा गांधी को भी इस भेदभाव का शिकार होना पड़ा था। प्रस्तुत अंश में दक्षिण अफ्रीका में चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग की यात्रा के दौरान एक गोरे अंग्रेज द्वारा गांधीजी के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार का वर्णन स्वयं गांधीजी के शब्दों में है। यह अंश गांधीजी की आत्मकथा का एक हिस्सा है।
पाठ का सार :
चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग : गांधीजी चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग की यात्रा पर थे। इस मार्ग पर ट्रेन की सुविधा नहीं थी, इसलिए घोड़ों से चलने वाली सिकरम का उपयोग करना पड़ता था। इस यात्रा में एक रात स्टैण्डरटन में रुकना पड़ता था।
सिकरम से यात्रा : गांधीजी के पास सिकरम का टिकट था और अब्दुल्ला सेठ ने सिकरमवाले को तार भी भेजा था। परंतु सिकरमवाले ने गांधीजी को परेशान करने के इरादे से कहा कि उनका टिकट रद्द हो चुका है, जबकि ऐसा नहीं था। सिकरम में सभी यात्री अंदर बैठते थे, लेकिन सिकरम कंपनी का गोरा मुखिया गांधीजी की सीट पर अंदर बैठ गया और गांधीजी को कोचवान की बगल वाली सीट पर बिठा दिया, जहाँ मुखिया को खुद बैठना चाहिए था।
और अपमानित करने का प्रयास : जब सिकरम पारडीकोप पहुँची, तो गोरे मुखिया ने गांधीजी को और अधिक परेशान करने की सोची। उसने अपनी इच्छा से गांधीजी को बिठाए गए स्थान पर बैठना चाहा। इसलिए उसने पैर रखने के पटिए पर एक मैला बोरा बिछा दिया और गांधीजी से कहा कि वे अपनी सीट से उठकर उस बोरे पर बैठें।
विरोध के एवज में पिटाई : गांधीजी कोचवान की बगल में बैठकर एक बार अपमान सह चुके थे। अब वे पैर रखने की जगह पर बैठने का अपमान सहन करने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके परिणामस्वरूप गोरे मुखिया ने उन पर तमाचे बरसाना शुरू कर दिया। इसके बाद गोरे ने गांधीजी की बांह पकड़कर उन्हें नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन गांधीजी ने सिकरम के सींखचों को कसकर पकड़ रखा था। इस वजह से गोरा उन्हें उतार नहीं पाया, पर उन्हें पीटता रहा और गालियाँ देता रहा।
सहयात्रियों की दया भावना : सिकरम में बैठे कुछ यात्रियों को यह देखकर दया आ गई। उन्होंने गोरे मुखिया से कहा कि वह गांधीजी को न मारे। उन्होंने मुखिया से गांधीजी को अपनी सीट पर बैठने देने का आग्रह किया। इससे गोरे का मारना तो रुक गया, पर वह गांधीजी को गालियां देता रहा। अब सिकरम आगे बढ़ चली थी।
गोरे की धमकी : वह गोरा गांधीजी को बार-बार घूरता रहा और उन्हें धमकी देता रहा – “याद रखना। स्टैण्डरटन पहुँचने पर फिर तुझे मज़ा चखाऊँगा।” बेचारे गांधीजी को डर लग रहा था कि वे सुरक्षित स्थान पर पहुँच पाएंगे या नहीं।
जान में जान आई : रात हुई और सिकरम स्टैण्डरटन पहुँच गई। गांधीजी ने वहाँ कई हिंदुस्तानियों को देखा, जिससे उन्हें बहुत राहत मिली। उन्हें तब और तसल्ली हुई जब उन लोगों ने बताया कि वे उन्हें ही लेने आए हैं। उन्होंने कहा कि वे उन्हें ईसा सेठ की दुकान पर ले जाएंगे।
ईसा सेठ की दुकान पर : गांधीजी उन हिंदुस्तानियों के साथ ईसा सेठ की दुकान पर पहुँचे तो उन्हें लगा कि अब वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने उन्हें रास्ते में घटी अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने गांधीजी को आश्वस्त किया।
सिकरम कंपनी के एजेंट से शिकायत : गांधीजी ने सिकरम कंपनी के एजेंट के नाम एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने गोरे मुखिया के दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। कंपनी वालों से गांधीजी ने अगली सुबह की यात्रा के लिए सिकरम में अंदर की जगह देने का आग्रह किया।
एजेंट का आश्वासन : एजेंट ने गांधीजी को आश्वस्त किया कि अगली यात्रा में वह गोरा नहीं रहेगा। अगली सुबह स्टैण्डरटन से एक बड़ी सिकरम आएगी और उन्हें अन्य यात्रियों के साथ सिकरम में अंदर जगह मिलेगी। इसके बाद वापसी के समय गांधीजी बिना किसी परेशानी के जोहनिसबर्ग आ गए।
चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग शब्दार्थ :
• सिकरम – घोड़ों से खींची जानेवाली गाड़ी।
• बहाना – नाम मात्र का कारण।
• निरा – बिलकुल।
• अजनबी – अपरिचित।
• नीयत – मंशा।
• बैठकें – बैठने के स्थान।
• कोचवान – घोडागाड़ी होकनेवाला।
• जोर-जबरदस्ती – बलप्रयोग, अत्याचार।
• तकरार – विवाद।
• देव – ईश्वर।
• झुंझलाना – खीझना, बिगड़ना।
• मुखिया – प्रधान व्यक्ति।
• अपमान – अनादर, बेइज्जती।
• असमर्थ – अशक्त, कमजोर।
• सींखचे – लोहे का छोटा छड़।
• बलहीन – एकदम कमजोर।
• नाहक – अनायास।
• हरगिज़ – किसी भी हालत में नहीं।
• शर्मिंदा – लज्जित।
• घूरना – आँखें गड़ाकर देखना।
• बड़बड़ाना – बड़बड़ करना।
• तसल्ली – बाढ़स, दिलासा।
• बीती – घटित घटना।
• आश्वस्त – जिसे बाढ़स बंधाया गया हो।
• आश्वासन – दिलासा।
• बेफिकरी – निश्चिंतता।
• मुनासिब – उचित, ठीक।
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