GSEB Class 11 Hindi Solutions Chapter 13 कदम मिलाकर चलना होगा

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Detailed Chapter 13 कदम मिलाकर चलना होगा GSEB Solutions for Class 11 Hindi

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Class 11 Hindi Chapter 13 कदम मिलाकर चलना होगा GSEB Solutions PDF

GSEB Std 11 Hindi Digest कदम मिलाकर चलना होगा Textbook Questions and Answers

स्वाध्याय

1. निम्नलिखित दिए गये विकल्पों में से सही चुनकर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

Question 1. कवि किसमें पलने की बात करता है?
(क) अरमानों
(ख) तूफानों
(ग) वीरानों
(घ) पीड़ाओ
Answer: (घ) पीड़ाओ
In simple words: कवि का तात्पर्य है कि जीवन में संघर्ष और कष्टों का सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्न कवि की भावनाओं और कविता के केंद्रीय विषय को समझने पर आधारित होते हैं, इसलिए कविता के भावार्थ को अच्छे से समझें।

 

Question 2. सब कुछ न्योछावर करके कुछ न मांगना कैसा गुण है?
(क) पावक
(ख) संत
(ग) पावन
(घ) पावस
Answer: (घ) पावस
In simple words: निस्वार्थ भाव से सब कुछ समर्पित कर देना, बदले में कुछ भी न चाहना, वर्षा ऋतु के समान उदार गुण है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न कवि द्वारा प्रयुक्त उपमा और उसके अर्थ को दर्शाता है, जिसमें 'पावस' (वर्षा ऋतु) की परोपकारी भावना को समझाया गया है।

 

Question 3. हमें दूसरों के लिए क्या अर्पण करना होगा?
(क) प्यार
(ख) यौवन
(ग) जीवन
(घ) तन-मन
Answer: (घ) तन-मन
In simple words: दूसरों के कल्याण हेतु हमें अपना शरीर और मन दोनों समर्पित करने होंगे।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर कविता के परोपकार और त्याग के संदेश को स्पष्ट करता है, जो मानवीय मूल्यों पर केंद्रित है।

 

Question 4. कवि ने मनोरथों को कैसा मानने के लिए कहा है?
(क) समान
(ख) असमान
(ग) उन्नत
(घ) निम्न
Answer: (क) समान
In simple words: कवि सभी की इच्छाओं और आकांक्षाओं को बराबर महत्व देने की बात करते हैं, ताकि कोई भेद न रहे।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न समानता और सामूहिक विकास की कवि की विचारधारा को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण है।

 

2. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

Question 1. प्रलय की घोर घटाओं का क्या अर्थ है ?
Answer: प्रलय की घोर घटाओं से तात्पर्य ऐसे भीषण और विकट वातावरण से है, जिसमें आगे बढ़ना अत्यंत दुष्कर प्रतीत होता हो।
In simple words: इसका अर्थ है बहुत गंभीर और मुश्किल परिस्थितियाँ।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे कविता के गहन भावों को व्यक्त करते हैं।

 

Question 2. हमे पीड़ाओं से मुक्ति पाने के लिए क्या करना होगा?
Answer: हमें कष्टों से छुटकारा पाने के लिए जीवन में साहस और शौर्य के साथ जीने के लिए तत्पर रहना होगा।
In simple words: दर्द और कष्ट से बचने के लिए हमें हिम्मत और बहादुरी से जीना होगा।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है, और इसका उत्तर दृढ़ संकल्प को उजागर करता है।

 

Question 3. क्षणिक जीत या दीर्घ हार से कवि का क्या तात्पर्य है?
Answer: क्षणिक विजय या लंबी पराजय से कवि का अभिप्राय यह है कि हमें न तो छोटी सी जीत पर अधिक हर्षित होना चाहिए और न ही लंबे समय तक हारने पर अपनी आशा और धैर्य का परित्याग करना चाहिए।
In simple words: कवि कहते हैं कि हमें न तो छोटी जीत पर घमंड करना चाहिए और न ही लंबी हार पर हिम्मत हारनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में कवि की समभाव की भावना निहित है, जो सफलता और असफलता दोनों को स्वीकार करने की सीख देती है।

 

Question 4. यात्री का ध्येय क्या है?
Answer: यात्री का मुख्य लक्ष्य अपनी हर चीज को त्यागने की भावना के साथ उन्नति के पथ पर निरंतर अग्रसर होना है।
In simple words: यात्री का लक्ष्य है सब कुछ न्योछावर करके लगातार प्रगति की ओर बढ़ना।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न जीवन में उद्देश्य और निस्वार्थ सेवा के महत्व को रेखांकित करता है।

 

Question 5. परोपकार के लिए हमे जीवन को कहाँ गलाना-जलाना होगा?
Answer: दूसरों की भलाई के लिए हमें अपने जीवन को उन स्थानों पर समर्पित करना होगा, जहाँ जीवन की असंख्य आहुतियाँ दी जा रही हों।
In simple words: हमें अपना जीवन वहां समर्पित करना होगा जहां बहुत से लोग दूसरों के लिए बलिदान दे रहे हों।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न परोपकार की चरम सीमा को दर्शाता है, जहाँ आत्म-बलिदान को भी स्वीकार किया जाता है।

 

3. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए :

Question 1. पाँवों के तले अंगारे का अर्थ बताइए?
Answer: किसी महत्वपूर्ण कार्य को संपन्न करने के लिए व्यक्ति को कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मार्ग में अनेक रुकावटें और बाधाएँ आती हैं। इन सब से जूझने के लिए मनुष्य को भाँति-भाँति के कष्ट उठाने पड़ते हैं। पाँवों के तले अंगारे का अर्थ इन्हीं अथक प्रयासों और दुखों से है, जो कार्य सिद्धि के लिए किए जाते हैं।
In simple words: इसका मतलब है कि कोई बड़ा काम करने के लिए बहुत मेहनत और मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।

🎯 Exam Tip: इस मुहावरे का प्रतीकात्मक अर्थ स्पष्ट करते समय, उसके पीछे के परिश्रम और कठिनाई के भाव को विस्तार से समझाना आवश्यक है।

 

Question 2. कवि अरमानों के बारे मे क्या कहता है?
Answer: मनुष्य के मन में अनेक प्रकार की इच्छाएँ होती हैं; वह जीवन में बहुत कुछ प्राप्त करना और हासिल करना चाहता है। परंतु यदि हम सभी एकसाथ मिलकर उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होते हैं, तो सामूहिक हित सर्वोपरि होगा। इस महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं को सार्वजनिक आकांक्षाओं में विलीन कर देना चाहिए। इसका अर्थ है कि हमें निजी अरमानों का त्याग करना होगा।
In simple words: कवि कहते हैं कि हमें अपने व्यक्तिगत सपनों को छोड़कर समाज के बड़े लक्ष्यों के लिए काम करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न व्यक्तिगत इच्छाओं पर सामूहिक हित की प्रधानता पर बल देता है, जो कवि की दूरदृष्टि को प्रकट करता है।

 

Question 3. प्रगति के बारे में क्या कहते हैं?
Answer: प्रगति के संबंध में कवि का कथन है कि इसके लिए हमें अनवरत प्रयास करते रहना चाहिए। हमें इस बात पर कभी ध्यान नहीं देना चाहिए कि उसकी शुरुआत कब हुई या वह कब समाप्त होगी। यह चिंता भी नहीं करनी चाहिए कि इसमें कितनी मेहनत लग सकती है।
In simple words: कवि के अनुसार, हमें प्रगति के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए और इसके आरंभ या अंत की चिंता नहीं करनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: प्रगति के प्रति निरंतरता और निस्वार्थ समर्पण की भावना को स्पष्ट करना इस उत्तर का मुख्य बिंदु है।

 

4. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए :

Question 1. कवि कदम मिलाकर चलने के लिए क्यों कहते हैं ?
Answer: हमारे राष्ट्र में कई विविधताएँ हैं और विभिन्न राजनीतिक दल भी हैं, जिनके अपने-अपने विचार हैं। किंतु यदि देश की उन्नति करनी है, तो इन भिन्नताओं को भुलाकर एक होना होगा। सभी को एकजुट होकर देश के बारे में सोचना चाहिए। जब तक एकता की भावना नहीं होगी, तब तक हम एकसाथ किसी भी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाएँगे। इसी कारण कवि देशवासियों को एकसाथ मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान करते हैं।
In simple words: कवि चाहते हैं कि सभी देशवासी अपनी विभिन्नताओं को भूलकर, एकजुट होकर देश की प्रगति के लिए साथ मिलकर चलें, क्योंकि एकता के बिना हम कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय एकता और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर देना इस उत्तर का केंद्रीय विषय है, जिसे स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए।

 

Question 2. 'पावस बनकर ढलना होगा' का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'पावस' प्रकृति की परोपकारी प्रवृत्ति का प्रतीक है। बादल सभी का भला करने की भावना से बरसते हैं। पावस का उदाहरण देते हुए कवि का अभिप्राय यह है कि देश के युवाओं को बादलों की भाँति बनना चाहिए। कवि की कामना है कि हमारे युवक अपने स्वार्थ को त्यागकर देश के पीड़ित लोगों की पीड़ा दूर करने में संलग्न हों। उन्हें बिना किसी आकांक्षा के अपना जीवन देश के लिए बलिदान कर देना चाहिए।
In simple words: 'पावस बनकर ढलना' का अर्थ है वर्षा की तरह निस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देना, बिना किसी निजी लाभ की इच्छा के।

🎯 Exam Tip: इस प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति का अर्थ स्पष्ट करते समय, परोपकार, त्याग और निस्वार्थ सेवा के गुणों को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 3. काव्य में व्यक्त राष्ट्र-प्रेम का वर्णन कीजिए।
Answer: कवि को अपने राष्ट्र से अत्यंत गहरा प्रेम है। उनकी प्रबल इच्छा है कि उनका देश किसी भी प्रकार से उन्नति करे और देशवासी आगे बढ़ें, भले ही इसके लिए कितने भी बलिदान क्यों न देने पड़ें। वे कँटीली राहों पर चलने से भी नहीं घबराते। वे अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं को महत्व न देकर केवल राष्ट्र के विकास के बारे में सोचते हैं। इस प्रकार 'कदम मिलाकर चलना होगा' काव्य में राष्ट्र-प्रेम की सुंदर अभिव्यक्ति हुई है।
In simple words: कविता में कवि का गहरा राष्ट्र-प्रेम दिखता है; वह चाहते हैं कि देशवासी अपने व्यक्तिगत स्वार्थों को त्यागकर, किसी भी बलिदान के लिए तैयार रहकर, देश की उन्नति के लिए एकजुट होकर काम करें।

🎯 Exam Tip: राष्ट्र-प्रेम की अभिव्यक्ति को स्पष्ट करते समय कवि की त्याग भावना, सामूहिक हित पर बल और चुनौतियों का सामना करने की तत्परता को उजागर करें।

 

Question 4. कदम मिलाकर चलन में कौन सी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती है?
Answer: कदम से कदम मिलाकर चलने के मार्ग में प्रलय जैसी भयंकर घटाओं में आगे बढ़ना पड़ता है। पैरों के नीचे तेज धूप अंगारों के समान महसूस होती है। पहाड़ जैसी विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। अपने मान-सम्मान के भेद को भूलना पड़ता है। अत्यधिक घृणा और पवित्र प्रेम के अंतर को विस्मृत करना पड़ता है। अपने निजी अरमानों की कुर्बानी भी देनी पड़ती है। इस प्रकार, कदम मिलाकर चलने में विभिन्न प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं।
In simple words: एकसाथ चलने में भयंकर बाधाएँ, अपमान, त्याग और व्यक्तिगत इच्छाओं की कुर्बानी जैसी अनेक मुश्किलें आती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में उन सभी चुनौतियों को सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है, जिनका सामना सामूहिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

 

व्याकरण

समानार्थी शब्द लिखिए :


• बाधा - रुकावट, विघ्न
• ज्वाला - लपट
• रुदन - रुलाई
• बलिदान - शहादत
• उन्नत - ऊँचा
• घृणा - नफरत
• अरमान - इच्छा
• मनोरथ - कामना
• पावस - वर्षा
• नीरवता - शांति

विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :


1. आग × पानी
2. हास्य × रुदन
3. अपमान × सम्मान
4. उन्नत × अवनत
5. उजाला × अंधेरा
6. घृणा × प्रेम
7. आकर्षक × अनाकर्षक
8. सम्मुख × विमुख
9. इति × अथ
10. समान × असमान
11. सफल × असफल
12. नीरवता × कोलाहल
13. हार × जीत
14. काँटा × फूल

शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :


• प्रलय - प्र
• असंख्यक - अ
• अपमान - अप
• सम्मान - सम्
• उन्नत - उत्
• सम्मुख - सम्
• प्रगति - प्र
• प्रखर - प्र
• सुस्मित - सु
• असफल - अ
• परहित - पर
• नीरव - नी

शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :


1. हास्य - य
2. क्षणिक - इक
3. आकर्षक - अक
4. हर्षित - इत
5. नीरवता - ता
6. उन्नति - इ
7. कठिनाई - आई
8. देशवासी - ई
9. अर्पित - इत
10. असफलता - ता
11. सम्मानित - इत
12. समाप्ति - इ

कदम मिलाकर चलना होगा Summary in Gujarati

ભાવાત્મક અનુવાદ :

કવિ દેશવાસીઓને ઉન્નતિના માર્ગ પર આગળ વધવાનું આહ્વાન કરે છે. તેઓ કહે છે કે ઉન્નતિના માર્ગમાં ભલે ગમે તેટલી મુશ્કેલીઓ આવે, ભલે પ્રલય કેમ ન આવે, આપણા માર્ગમાં અંગારા જ કેમ ન છવાયા હોય, મસ્તક પર આગની જ્વાળાઓ જ કેમ ન વરસતી હોય, આપણે એ બધાનો સામનો કરવાનો છે. આપણા હાથ પર રાજીખુશીથી આગ લગાડીને ઝઝૂમવાનું છે. આપણે એકસાથે કદમ મિલાવીને આગળ વધવાનું છે। આપણે પોતાની જાતને દરેક સ્થિતિમાં ઢાળવાની છે. કવિ કહે છે કે ભલે આનંદ-પ્રમોદનું વાતાવરણ ભોગવવાનું હોય, ભલે દુઃખ સહન કરવાનું હોય અથવા ભલે તોફાન આવે અથવા જાન કુરબાન કરવાની સ્થિતિ આવી પડે. ભલે ધાન્યથી લીલીછમ ધરતીનું સુખ ભોગવવા મળે અથવા ઉજ્જડ સ્થિતિમાં દુઃખ ભોગવવા પડે, અપમાન સહન કરવો પડે અથવા સમ્માનિત થવાનો અવસર પ્રાપ્ત થાય, ગમે તેવી સ્થિતિ હોય, આપણે દરેક હાલતમાં સાહસ અને બહાદુરીથી તેનો સામનો કરવો જોઈએ, આપણે હંમેશાં કષ્ટકલેશ સહન કરતાં જીવવા માટે તૈયાર રહેવાનું છે. આપણે એકસાથે મળીને આગળ વધવું પડશે। આપણો માર્ગ અજવાળાથી છવાયેલો હોય અથવા સામે અંધારું હોય; ભલે સામાન્ય સ્થિતિ હોય અથવા વિપત્તિઓનો પહાડ ખડકાઈ જાય, ધૃણાપાત્ર બનવું પડે કે પુત્રવત્ પ્રેમ પ્રાપ્ત થાય; પળ-બે પળ માટે જીતનું સુખ મળે અથવા લાંબા સમય સુધી હારનો સામનો કરવો પડે. આપણે તેની પરવા ન કરવી જોઈએ. આપણે આપણા અરમાનોનું બલિદાન કેમ ન આપવું પડે, પરંતુ આપણે એકસાથે મળીને પ્રગતિના માર્ગ પર આગળ વધવાનું છે। કવિ કહે છે કે જો ઉદેશ્ય આપણી આંખ સામે હોય છે તો આપણે નિરંતર પ્રગતિ કરતા રહેવું જોઈએ એની શરૂઆત અને અંતનો વિચાર આપણે ન કરવો જોઈએ. આપણા મુખ પર થાકનું નામોનિશાન ન જોઈએ. આપણે માટે સફળતા અને અસફળતા બને એકસમાન હોવી જોઈએ. આપણે આપણું સર્વસ્વ કુરબાન કરીને કોઈ પણ પ્રકારની કશી આકાંક્ષા ન રાખવી જોઈએ, આપણે વર્ષાઋતુની જેમ સૌ પર સર્વસ્વ કુરબાન કરતા રહેવું જોઈએ. આપણે સૌ લોકો સાથે કદમ મિલાવીને ચાલવું જોઈએ। કવિ કહે છે કે આપણે કાંટાઓથી છવાયેલું જીવન જીવવું પડશે. આપણે જીવનમાં આવતાં દુ:ખોની પરવા કરવાની નથી. આપણને પ્રેમ-સ્નેહ શૂન્ય જીવન ભલે જીવવું પડે, પરંતુ આપણે ફરિયાદ કર્યા વિના આગળ વધવાનું છે. આપણે પોતાનું તન-મન બીજાઓના ભલા માટે કુરબાન કરવાનું છે. આપણે એકસાથે કદમ મિલાવીને ચાલવાનું છે. ભલેને તેને માટે પોતાના જીવનનો ત્યાગ કરવો પડે।

कदम मिलाकर चलना होगा Summary in Hindi

विषय-प्रवेश :

प्रस्तुत कविता के रचयिता हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी हैं। उन्होंने इस कविता में देशवासियों का आहवान किया है कि वे उन्नति और प्रगति के मार्ग पर एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ें। इसके लिए उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, पर वे उसकी चिंता न करें। उन्हें अपना सब कुछ न्योछावर करना पड़े, तो भी वे प्रगति के मार्ग पर बढ़ने से न हिचकें।

मुहावरे-अर्थ और वाक्य-प्रयोग :

आग लगाकर, जलना-स्वयं नष्ट होना
वाक्य : अन्याय का विरोध करने के लिए हमें आग लगाकर जलने से भी नहीं चूकना चाहिए।
पीड़ाओं में पलना - दुःख सहकर बड़ा होना
वाक्य : हमारे देश में अनेक असहाय लोग पीड़ाओं में पले हैं।

कविता-का सरल अर्थ :

बधाएं आती हैं ........ कदम मिलाकर चलना होगा। कवि देशवासियों से उन्नति के मार्ग पर बढ़ने का आह्वान करते हैं। वे कहते हैं कि उन्नति के मार्ग में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, चाहे प्रलय ही क्यों न आ जाए, हमारे मार्ग में अंगारे ही क्यों न बिछे हों, सिर पर आग की लपटें ही क्यों न बरस रही हों, हमें इनका सामना करना होगा और अपने हाथों में खुशी-खुशी आग लगाकर हमें जूझना होगा। हमें एकसाथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। हास्य-रुदन में ..... कदम मिलाकर चलना होगा। हमें अपने आप को हर स्थिति में ढालना होगा। कवि कहते हैं कि चाहे हंसी-खुशी का माहौल हो अथवा कष्ट झेलने यानी गम का, चाहे तूफान आएं या जान निछावर कर देने की स्थिति उत्पन्न हो, चाहे शस्य श्यामला धरती का सुख भोगने को मिले अथवा उजाड़ स्थिति में कष्ट सहना पड़े, अपमान सहन करना पड़े या सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हो, कैसी भी स्थिति हो हमें हर हाल में साहस और बहादुरी के साथ उसका सामना करना चाहिए। हमें हमेशा कष्ट-क्लेष सहते हए जीने के लिए तैयार रहना चाहिए। हमें एकसाथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। उजियारे में, अंधकार में, कदम मिलाकर चलना होगा। हमारा मार्ग उजालों से भरा हुआ हो अथवा सामने अंधेरा हो, चाहे सामान्य स्थिति हो अथवा विपत्तियों का पहाड़ फाट पड़े, घृणा का पात्र बनना पड़े, या फिर पुत्र जैसा प्यार प्राप्त हो, पल दो पल के लिए जीत का सुख मिले. अथवा दीर्घकाल तक हार का सामना करना पड़े। हमें इनकी परवाह नहीं करनी चाहिए। चाहे हमें अपने अरमानों की बलि ही क्यों न देनी पड़े पर हमें एकसाथ मिलकर प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। सम्मुख फैला अगर ..... कदम मिलाकर चलना होगा। कवि कहते हैं कि यदि उद्देश्य हमारे समक्ष हो, तो हमें निरंतर प्रगति करते रहना चाहिए। उसमें आरंभ और समाप्ति का ख्याल हमें नहीं करना चाहिए। हमें सदा प्रसन्न रहना चाहिए और अपने चेहरे पर श्रम से थकान का नामोनिशान नहीं लाना चाहिए। हमारे लिए सफलता और असफलता दोनों एक जैसी होनी चाहिए। हमें अपना सब कुछ निछावर करके किसी तरह की कोई आकांक्षा नहीं रखनी चाहिए। हमें वर्षाऋतु की तरह सब पर सब कुछ निछावर करते रहना होगा। हमें सब लोगों के साथ कदम मिलाकर चलना होगा। कुछ काँटों से ....... कदम मिलाकर चलना होगा। कवि कहते हैं कि हमें काँटों भरा जीवन जीना होगा। हमें जीवन में आनेवाले दुःखों की परवाह नहीं करना है। हमें प्यार-स्नेह से रहित जीवन भले ही जीना पड़े, पर हमें बिना शिकायत किए आगे बढ़ना है। हमें अपना तन-मन दूसरों की भलाई के लिए निछावर कर देना होगा। हमें एकसाथ कदम मिलाकर चलना होगा, भले ही इसके लिए हमें अपना जीवन क्यों न त्याग देना पड़े।

कदम मिलाकर चलना होगा शब्दार्थ :


• बाधाएं - विघ्न, रुकावटें।
• प्रलय - लय का प्राप्त होना, नाश।
• घोर - भयंकर विकराल।
• ज्वालाएँ - लपटें।
• तूफान - बहुत तेज आँधी।
• असंख्यक - अनगिनत।
• वीरानों - सुनसान स्थानों।
• उन्नत - ऊंचा।
• उजियारे - उजाले।
• कहार - किनारे।
• क्षणिक - क्षणभर की।
• दीर्घ - लंबी।
• अरमान - लालसा, चाह।
• ध्येय - उद्देश्य।
• चिरंतन - शाश्वत।
• हर्षित - प्रसन्न, खुश।
• श्रम श्लथ - मेहनत से थका हुआ।
• प्रखर - तेज।
• नीरवता - जिसमें कोई शब्द न हो, नि:शब्द।
• अर्पित - दिया हुआ।
• आहुति - यज्ञ का द्रव्य।

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