GSEB Class 11 Hindi Aaroh Solutions Chapter 12 मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई, पग धुंघरू

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अभ्यास

कविता के साथ :

 

प्रश्न 1. मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती है ? वह रूप कैसा हैं ?
Answer: मीरा कृष्ण की उपासना अपने पति के रूप में करती हैं। उनके सगुण साकार रूप का वर्णन करते हुए मीरा बताती हैं कि वे गिरि को धारण करने वाले गिरिधर हैं। वे अपने सिर पर मोर-मुकुट धारण करते हैं। वह अपने आपको कृष्ण की दासी बताती हैं।
In simple words: मीरा कृष्ण को अपना पति मानती हैं। वह बताती हैं कि कृष्ण, जो पहाड़ों को उठाते हैं और सिर पर मोर पंख का मुकुट पहनते हैं, उनके स्वामी हैं। मीरा खुद को कृष्ण की सेविका कहती हैं।

Exam Tip: जब चरित्र के बारे में पूछा जाए, तो उनके साथ रिश्ते और उनके गुणों का वर्णन करें जैसा कि कविता में बताया गया है, साथ ही उनके रूप का भी उल्लेख करें।

 

प्रश्न 2. भाव और शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।
(क) अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी
अब त बेलि फैली गई, आणंद-फल होयी ।
Answer:
भाव : मीरा ने कृष्ण-प्रेम रूपी लता को सामान्य जल से नहीं, बल्कि आँसुओं के जल से सींचा है, जिसका अर्थ है कि उन्होंने कृष्ण के विरह में बहुत दुःख सहन किया है। उनके अटूट प्रेम की गहराई अद्भुत है। अब वह प्रेम बेल फूल-पत्ते वाली हो गई है और फैल गई है। उस पर आनंद रूपी फल लग रहे हैं, जिसका मतलब है कि वह श्याम के रंग में इस तरह डूब गई हैं कि वह पूरी तरह से श्याममय और आनंदमय हो गई हैं। इस पद में भक्ति की चरम सीमा दिखाई देती है। विरह के आँसुओं से मीरा ने कृष्ण-प्रेम की बेल बोई है। अब यह बेल बड़ी हो गई है और आनंद-रूपी फल प्राप्त होने का समय आ गया है। इस पद में मीरा का मधुर भाव व्यक्त हुआ है।
शिल्प सौंदर्य – 'सींचि-सींचि' में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।

  • सांगरूपक अलंकार है।
  • प्रेम-बेलि, आणंद-फल, असुवन जल ये सभी रूपक के उदाहरण हैं।
  • राजस्थानी मिश्रित ब्रज भाषा का प्रयोग किया गया है।
  • 'बेलि-बोयी' में अनुप्रास अलंकार है।
  • पद में संगीतात्मकता का गुण है।

(ख) दूध की मथनिया बड़े प्रेम से बिलोयी
दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी ।
भाव : मीरा कहती है कि उन्होंने कृष्ण के प्रेम रूपी दूध को भक्ति रूपी मथानी से बड़े प्यार से बिलोया है। मैंने दही से महत्वपूर्ण तत्व, यानी घी, निकाल लिया है और छाछ रूपी बेकार तत्वों को छोड़ दिया है। इसका अर्थ है कि कृष्ण के प्रेम में खुद को लीन करके उन्होंने यह सीख लिया है कि श्याम की शरण ही दुनिया का सार है। बाकी सब कुछ बेकार, अर्थहीन और अस्वीकार्य है। इन पंक्तियों में कवयित्री ने दूध के मथने से भक्ति रूपी घी निकाल लिया और सांसारिक सुखों की छाछ के समान छोड़ दिया। इस प्रकार उन्होंने भक्ति की महानता को व्यक्त किया है। श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अटूट भक्ति प्रकट हुई है।
शिल्प सौंदर्य : अन्योक्ति अलंकार है। राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा का प्रयोग किया गया है।
  • 'घी' भक्ति का और 'छाछ' सांसारिकता का प्रतीकात्मक रूप है।
  • दधि, घृत आदि तत्सम शब्द हैं।
  • पद में संगीतात्मकता और गेयता है।

In simple words: मीरा ने अपने प्रेम-लता को आँसुओं से सींचा है, जिसका मतलब है कि उन्होंने कृष्ण से प्रेम करने के लिए बहुत दुःख सहन किया है। अब यह प्रेम-लता खिल गई है और खुशी के फल दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कृष्ण के प्रेम को मक्खन की तरह मथकर उसका सार, यानी भक्ति, निकाल लिया है और बाकी सब कुछ छोड़ दिया है, जैसे बेकार छाछ छोड़ दी जाती है।

Exam Tip: भाव स्पष्ट करते समय, कविता की पंक्तियों का गहरा अर्थ समझाएं और शिल्प सौंदर्य में प्रयुक्त अलंकारों, भाषा और शैलीगत विशेषताओं का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 3. लोग मीरा को बावरी क्यों कहते हैं ?
Answer: लोगों ने मीरा को 'बावरी' यानी पागल इसलिए कहा क्योंकि वह कृष्ण के प्रेम में इतनी दीवानी हो गई थीं कि उन्हें किसी भी बात की सुध-बुध नहीं थी। वह पूरी तरह कृष्णमय हो चुकी थीं। इसी कारण उन्होंने राजघराना छोड़ दिया, साधु-संतों के साथ रहने लगीं और उन्हें कई तरह की लोक-निंदा का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपने कुल, परिवार और परंपरा की परवाह किए बिना पैरों में घुंघरू बांधकर नाचना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी जान की भी चिंता नहीं की। चाहे जहर का प्याला हो या सांप का पिटारा हो, उन्होंने कृष्ण प्रेम में सब कुछ खुशी से स्वीकार किया। यह उनके प्रेम की पराकाष्ठा है, इसीलिए लोग मीरा को बावरी कहते हैं।
In simple words: मीरा कृष्ण के प्रेम में इतनी पागल हो गई थीं कि उन्होंने समाज के सभी नियम तोड़ दिए और साधु-संतों के साथ नाचने लगीं। उन्होंने परिवार की प्रतिष्ठा की परवाह नहीं की और खुशी से जहर भी पी लिया, इसलिए लोगों ने उन्हें 'पागल' कहा।

Exam Tip: जब कोई विशेषण पूछा जाए, तो उसके पीछे के सभी कारणों को विस्तार से समझाएं, जिसमें चरित्र के कार्य और उनके प्रति समाज की प्रतिक्रिया शामिल हो।

 

प्रश्न 4. 'विस का प्याला राणा भेज्या, पीवत मीरा हँसी' इसमें क्या व्यंग्य छिपा है ?
Answer: राजघराने को छोड़कर साधु-संतों के साथ मंदिर-मंदिर पैरों में घुंघरू बांधकर नाचने वाली राजवधू को राणा कैसे सहन कर सकते थे? उन्होंने मीरा को मारने के लिए विष का प्याला भेजा। मगर मीरा ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना विष का प्याला गटगटा लिया। उन्हें अपने कृष्ण पर पूरा विश्वास था। उनकी इस हंसी में यह व्यंग्य छिपा है कि कृष्ण के प्रति निष्ठावान भक्ति करने वाले लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
In simple words: राणा को मीरा का साधुओं के साथ नाचना पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने मीरा को जहर भेजा। मीरा ने इसे हंसते हुए पी लिया, क्योंकि उन्हें कृष्ण पर विश्वास था। उनकी हंसी यह दिखाती है कि सच्चा भक्त कभी डरता नहीं, क्योंकि भगवान हमेशा उसकी रक्षा करते हैं।

Exam Tip: व्यंग्य वाले प्रश्नों में, केवल घटना का वर्णन न करें, बल्कि उसके पीछे के छिपे हुए अर्थ, सामाजिक संदर्भ और चरित्र के इरादों को भी स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 5. मीरा जगत को देखकर क्यों रोती है ?
Answer: मीरा ने दुनिया के सार - कृष्ण के मर्म को अच्छी तरह से समझ लिया था। इसीलिए उन्होंने राजपाट छोड़कर कृष्णमय जीवन अपना लिया था। उन्हें मालूम था कि भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणिक और व्यर्थ हैं। जब वह संसार के लोगों को इस झूठे मोह-माया में उलझा हुआ देखती हैं, तो उन्हें लगता है कि वे अपना अनमोल जीवन व्यर्थ ही गंवा रहे हैं। ये लोग जो झूठा है उसे ही सच मान बैठे हैं। यह देखकर मीरा बहुत दुखी होती हैं।
In simple words: मीरा ने समझ लिया था कि सिर्फ कृष्ण का प्रेम ही सच्चा है और बाकी सब कुछ अस्थायी है। जब वह देखती हैं कि लोग झूठी दुनियावी चीज़ों में फंसे हुए हैं और अपना कीमती जीवन बर्बाद कर रहे हैं, तो उन्हें बहुत दुःख होता है और वे रोती हैं।

Exam Tip: जब चरित्र की भावनाओं के बारे में पूछा जाए, तो उन भावनाओं के कारणों को स्पष्ट करें, जिसमें उनकी मान्यताएं और दूसरों की स्थिति के प्रति उनकी समझ शामिल हो।

पद के आस-पास

 

प्रश्न 1. कल्पना करें, प्रेम प्राप्ति के लिए मीरा को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा ।
Answer: प्रेम प्राप्त करने के लिए मीरा को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा, जैसे कि –

  • दांपत्य जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा।
  • परिवारवालों की ओर से अनेक प्रकार की पाबंदियों का सामना करना पड़ा होगा।
  • परिवारजनों की उपेक्षा और ताने सहने पड़े होंगे।
  • समाज में लोक-निंदा की शिकार हुई होंगी।
  • राजघराने को छोड़कर मंदिर-मठों में रहते हुए अनेक प्रकार की परेशानियां पड़ी होंगी।
  • राणा की ओर से उन्हें मारने के कई बार प्रयास किए गए होंगे।
  • भूख, प्यास तथा अन्य कई शारीरिक, मानसिक यातनाओं का सामना करना पड़ा होगा।

In simple words: मीरा को अपने प्रेम के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा होगा, जैसे परिवार से विरोध, समाज की आलोचना, शारीरिक और मानसिक कष्ट, और यहां तक कि जान का खतरा भी।

Exam Tip: जब 'कल्पना करें' जैसे प्रश्न आएं, तो कहानी के संदर्भ में संभावित चुनौतियों की एक विस्तृत सूची बनाएं और हर बिंदु को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 2. लोक-लाज खोने का अभिप्राय क्या है ?
Answer: लोक-लाज खोने का मतलब है समाज-विरोधी कार्य करना, समाज की मर्यादाओं को तोड़कर बेशर्म हो जाना। मीरा कृष्ण के प्रेम में बहुत पागल थीं। इस पागलपन में उन्होंने सभी प्रकार की सामाजिक मर्यादाओं को तोड़ दिया था। मीरा राजघराने से जुड़ी थीं, जहां महिलाओं को पर्दे में रहना होता था। ऐसे में पैरों में घुंघरू बांधकर साधु-संतों के साथ मंदिरों में नाचने वाली मीरा को कैसे अच्छी नजर से देखा जा सकता था? यही कारण है कि किसी ने मीरा को बावरी कहा तो किसी ने कुलनासी।
In simple words: लोक-लाज खोने का मतलब है समाज के नियमों को तोड़कर बिना किसी शर्म के काम करना। मीरा ने कृष्ण के लिए सभी सामाजिक मर्यादाएं छोड़ दीं, जैसे पर्दा प्रथा का पालन न करना और सार्वजनिक रूप से नाचना, जिससे लोगों ने उन्हें पागल और अपने परिवार का अपमान करने वाली कहा।

Exam Tip: 'अभिप्राय' वाले प्रश्नों में, वाक्यांश के शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ उसके गहरे, प्रासंगिक अर्थ को भी समझाएं, विशेषकर चरित्र के कार्यों के संदर्भ में।

 

प्रश्न 3. मीरा ने 'सहज मिले अविनासी' क्यों कहा है ?
Answer: 'अविनासी' का अर्थ है जिसका कभी विनाश न हो, जो हमेशा अमर रहे। कृष्ण अविनासी हैं। मीरा के आराध्य हैं। ऐसा अविनासी आसानी से नहीं मिलता। मीरा की तरह एकनिष्ठ, निष्काम और अनन्य समर्पण भाव से ही वह अविनासी अपने भक्त को आसानी से मिल जाते हैं।
In simple words: मीरा ने 'सहज मिले अविनासी' इसलिए कहा क्योंकि 'अविनासी' यानी अमर कृष्ण केवल सच्चे और पूरी तरह से समर्पित भक्तों को ही आसानी से मिलते हैं, जैसा कि मीरा का समर्पण था।

Exam Tip: किसी विशेष वाक्यांश के प्रयोग के कारण को समझाते समय, वाक्यांश के अर्थ और चरित्र की भक्ति या विचारधारा के बीच सीधा संबंध स्थापित करें।

 

प्रश्न 4. 'लोग कहै, मीरा भइ बावरी, न्यात कहै कुल-नासी' मीरा के बारे में लोग (समाज) और न्यात (कुटुंब) की ऐसी धारणा क्यों थी?
Answer: मीरा के बारे में लोग (समाज) और न्यात (बिरादरी) की धारणाएं अच्छी नहीं थीं। इसका कारण यह था कि समाज के लोग भौतिक सुख-सुविधा, सत्ता-संपन्नता आदि को ही सच्चा और सब कुछ मानते हैं। जबकि मीरा इन सबसे ऊपर उठकर राजघराने को छोड़कर गलियों में भटकती रहती थीं। इसलिए नासमझ लोग मीरा की एकनिष्ठ भक्ति को समझ नहीं पाए, अतः वे उसे बावली कहते थे। इधर बिरादरी के लोग उसे कुल-नासी कहते थे, क्योंकि मीरा ने अपने परिवार की सभी मर्यादाओं (जैसे पर्दा-प्रथा का पालन न करना आदि) को तोड़ दिया था।
In simple words: लोग मीरा को पागल और उनके परिवार के लोग उन्हें 'कुल का नाश करने वाली' कहते थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि मीरा ने समाज और परिवार की सभी परंपराओं को तोड़कर कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति को चुना, जबकि लोग केवल भौतिक चीज़ों को महत्व देते थे।

Exam Tip: सामाजिक प्रतिक्रिया वाले प्रश्नों में, समाज की सोच और चरित्र के कार्यों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, जिससे उनकी धारणाएं बनती हैं।

पद के साथ

 

प्रश्न 1. 'प्रेम-बेलि' का रूपक समझाइए ।
Answer: मीरा ने प्रेम को एक लता का रूपक दिया है। यह लता साधारण लता नहीं, प्रेम-लता है। इसलिए इसे साधारण जल से नहीं, बल्कि आँसुओं से सींचा जाता है। इसका अर्थ है कि प्रेम में अनेक कठिनाइयों को सहना पड़ता है। अनेक प्रकार का त्याग और बलिदान करना पड़ता है। विरह में तपना पड़ता है। तब जाकर वह लता पुष्पित और पल्लवित होती है।
In simple words: मीरा ने प्रेम को एक बेल से तुलना की है जिसे आँसुओं से सींचा जाता है, क्योंकि सच्चे प्रेम को पाने के लिए बहुत दुःख, त्याग और मेहनत करनी पड़ती है, तभी वह खिलता है और फल देता है।

Exam Tip: रूपक वाले प्रश्नों में, रूपक के दोनों हिस्सों (जैसे 'प्रेम' और 'बेलि') को स्पष्ट करें और बताएं कि वे कैसे एक-दूसरे से संबंधित हैं, साथ ही उनका गहरा अर्थ भी समझाएं।

 

प्रश्न 2. 'भगत देखि राजी हुई, जगत देखि रोयी' का आशय स्पष्ट कीजिए ।
Answer: मीरा कृष्ण को ही दुनिया का सब कुछ और सार मानती थीं। इसीलिए कृष्ण भक्ति में पूरी तरह लीन भक्तों को देखकर वह बहुत खुश होती थीं। जबकि सांसारिक मोह-माया में उलझे हुए जगत (लोगों) को देखकर उनकी मूर्खता पर रो पड़ती थीं।
In simple words: मीरा को सच्चे भक्तों को देखकर खुशी होती थी क्योंकि वे कृष्ण से जुड़े थे। लेकिन वह दुनिया के लोगों को देखकर रोती थीं जो झूठी मोह-माया में फंसे थे और जीवन का सही अर्थ नहीं समझते थे।

Exam Tip: आशय स्पष्ट करते समय, कथन के दो अलग-अलग हिस्सों के अर्थ और चरित्र की भावनाओं को उनके पीछे के कारणों के साथ बताएं।

 

प्रश्न 3. आनंद फल की प्राप्ति के लिए मीरा ने क्या किया ?
Answer: आनंद फल प्राप्त करने के लिए उन्होंने कुल की मर्यादा को छोड़ दिया, परिवार के ताने सहे, साथ ही संतों की संगति की। उन्होंने आँसुओं से प्रेम-बेल को सींचा, अनेक प्रकार के कष्ट सहे, लोक-निंदा सही तब जाकर उन्हें आनंद-फल प्राप्त हुआ।
In simple words: खुशी का फल पाने के लिए मीरा ने परिवार और समाज की मर्यादाएं छोड़ दीं, संतों के साथ रहीं, बहुत कष्ट सहे, और अपने प्रेम-लता को अपने आँसुओं से सींचा।

Exam Tip: जब 'क्या किया' जैसे प्रश्न आएं, तो चरित्र द्वारा किए गए सभी कार्यों और त्यागों की एक सूची बनाएं जो उनके लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जरूरी थे।

योग्य विकल्प पसंद करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।

 

प्रश्न 1. मीराबाई का जन्म सन् ......... में हुआ था ।
(A) 1498
(B) 1499
(C) 1497
(D) 1496
Answer: (A) 1498
In simple words: मीराबाई का जन्म 1498 में हुआ था।

Exam Tip: जीवनी संबंधी प्रश्नों के लिए, महत्वपूर्ण तिथियों और घटनाओं को सटीक रूप से याद रखें।

 

प्रश्न 2. 'मीरा पदावली', 'नरसीजी-रो-मोहरो' रचना की कवयित्री....... हैं।
(A) मीराबाई
(B) सुभद्राकुमारी चौहान
(C) निर्मला पुतुल
(D) महादेवी वर्मा
Answer: (A) मीराबाई
In simple words: 'मीरा पदावली' और 'नरसीजी-रो-मोहरो' को मीराबाई ने लिखा है।

Exam Tip: रचनाकारों और उनकी कृतियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे प्रश्न अक्सर आते हैं।

 

प्रश्न 3. मीराबाई की मृत्यु सन्................ में हुई थी ।
(A) 1555
(B) 1546
(C) 1556
(D) 1545
Answer: (B) 1546
In simple words: मीराबाई का निधन वर्ष 1546 में हुआ था।

Exam Tip: कवियों और लेखकों की जन्म और मृत्यु तिथियां याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे प्रसिद्ध हों।

 

प्रश्न 4. मीराबाई के पिताजी का नाम ......... था ।
(A) रावदूदाजी
(B) वीरमदेव
(C) रत्नसिंह
(D) विक्रमजीत
Answer: (C) रत्नसिंह
In simple words: मीराबाई के पिता का नाम रत्नसिंह था।

Exam Tip: प्रमुख साहित्यिक हस्तियों के पारिवारिक संबंधों और महत्वपूर्ण नामों को याद रखें।

 

प्रश्न 5. मीराबाई का विवाह राणा सांगा के बड़े पुत्र कुंवर............. से हुआ था ।
(A) विक्रम
(B) रत्नसिंह
(C) वीमलदेव
(D) भोजराज
Answer: (D) भोजराज
In simple words: मीराबाई की शादी राणा सांगा के बड़े बेटे कुंवर भोजराज से हुई थी।

Exam Tip: ऐतिहासिक और साहित्यिक शख्सियतों के वैवाहिक संबंधों और प्रमुख व्यक्तियों के नामों को याद रखें।

 

प्रश्न 6. मीराबाई के गुरु संत कवि ............ माने जाते हैं ।
(A) कबीर
(B) रैदास
(C) मलूकदास
(D) दादू दयाल
Answer: (B) रैदास
In simple words: मीराबाई संत कवि रैदास को अपना गुरु मानती थीं।

Exam Tip: प्रमुख संतों और कवियों के गुरु-शिष्य संबंधों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 7. मीरा.............. को अपना सर्वस्व और पति मानती हैं ।
(A) भोजराज
(B) कृष्ण
(C) विष्णु
(D) शंकर
Answer: (B) कृष्ण
In simple words: मीरा कृष्ण को अपना सब कुछ और अपना पति मानती हैं।

Exam Tip: चरित्र के मुख्य विश्वासों और भक्ति के केंद्र बिंदु को हमेशा स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

प्रश्न 8. मीरा ने अपने..........से कृष्ण प्रेमरूपी बेल को सींचा है ।
(A) जल
(B) गंगाजल
(C) आँसुओं
(D) कोई नहीं
Answer: (C) आँसुओं
In simple words: मीरा ने अपनी कृष्ण प्रेम की बेल को अपने आँसुओं से सींचा है।

Exam Tip: प्रतीकात्मक भाषा वाले प्रश्नों में, प्रतीक के वास्तविक अर्थ को समझें, जैसे 'आँसू' यहां 'कष्ट' का प्रतीक है।

 

प्रश्न 9. मीरा..............को देखकर प्रसन्न होती है।
(A) भक्तों
(B) परिवारजनों
(C) पति
(D) पिता
Answer: (A) भक्तों
In simple words: मीरा कृष्ण के भक्तों को देखकर खुश होती हैं।

Exam Tip: चरित्र की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को उनके विश्वासों और मूल्यों के संदर्भ में याद रखें।

 

प्रश्न 10. मीरा ............ के अज्ञान व दुर्दशा को देखकर रोती है ।
(A) परिवार
(B) पति
(C) जगत
(D) तीनों
Answer: (C) जगत
In simple words: मीरा दुनिया के लोगों की अज्ञानता और खराब हालत देखकर रोती हैं।

Exam Tip: चरित्र की भावनाओं को उनके दृष्टिकोण और जिन लोगों को वे देखती हैं, उनके संदर्भ में स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 11. मीरा अपने पैरों में घुघरू बाँधकर ............ के सामने नाचने लगीं ।
(A) कृष्ण
(B) लोगों
(C) भक्तों
(D) परिवार
Answer: (A) कृष्ण
In simple words: मीरा अपने पैरों में घुंघरू बांधकर कृष्ण के सामने नाचने लगीं।

Exam Tip: कविता के मुख्य पात्र और उनके कार्यों के लक्ष्य को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 12. लोग मीरा को ............ कहते हैं ।
(A) भक्तिन
(B) पतिव्रता
(C) वीरांगना
(D) बावरी
Answer: (D) बावरी
In simple words: लोग मीरा को 'बावरी' यानी पागल कहते हैं।

Exam Tip: चरित्र के प्रति समाज की प्रतिक्रिया और उन्हें दिए गए नामों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर उनके कार्यों के महत्व को दर्शाता है।

 

प्रश्न 13. न्यात (बिरादरी) के लोग मीरा को ............ कहते हैं ।
(A) कुलनासी
(B) डायन
(C) सत्ती
(D) कोई नहीं
Answer: (A) कुलनासी
In simple words: मीरा के परिवार (बिरादरी) के लोग उन्हें 'कुलनासी' यानी परिवार का नाश करने वाली कहते हैं।

Exam Tip: परिवार और समाज की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं और उनके द्वारा दिए गए विशेषणों को स्पष्ट रूप से भेद करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 14. राणा ने मीरा को मारने के लिए ............ का प्याला भेजा ।
(A) अमृत
(B) विष
(C) मदिरा
(D) रस
Answer: (B) विष
In simple words: राणा ने मीरा को मारने के लिए जहर का प्याला भेजा था।

Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ और घटनाओं को याद रखें, खासकर वे जो मुख्य पात्र के जीवन को प्रभावित करते हैं।

अपठित पद्य

इस कविता को ध्यान से पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिनिए ।

वह तोड़ती पत्थर ।
देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर
वह तोड़ती पत्थर ।
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार,
श्याम तन, भर बँधा यौवन,
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन,
गुरु हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार :
सामने तरु मालिका अट्टालिका, प्राकार ।
चढ़ रही थी धूप;
गर्मियों के दिन दिवा
का तमतमाता रूप;
उठी झुलसाती हुई लू,
रूई ज्यों जलती हुई भू
गर्द चिनगीं छा गयीं,
प्रायः हुई दुपहर :
वह तोड़ती पत्थर ।

देखते देखा मुझे तो एक बार
उस भवन की ओर देखा, छिन्नतार;
देखकर कोई नहीं,
देखा मुझे उस दृष्टि से
जो मार खा रोयी नहीं,
सजा सहज सितार,
सुनी मैंने वह नहीं जो थी सुनी झंकार
एक क्षण के बाद वह काँपी सुधर,
दुलक माथे से गिरे सीकर,
लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा
- 'मैं तोड़ती पत्थर !' – सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

 

प्रश्न 1. पत्थर तोड़ती खी के लिए कवि ने किन विशेषणों का प्रयोग किया है ?
Answer: पत्थर तोड़ती स्त्री के शरीर के लिए कवि ने श्याम (तन), यौवन के लिए भरपूर बंधा, नयन के लिए नत (झुकी), कर्म के लिए प्रिय तथा मन के लिए रत (लगा हुआ) विशेषणों का प्रयोग किया है।
In simple words: कवि ने पत्थर तोड़ने वाली स्त्री के लिए 'सांवला शरीर', 'भरा-पूरा यौवन', 'झुकी हुई आंखें', 'पसंदीदा काम करने वाली' और 'काम में लगी हुई' जैसे विशेषणों का उपयोग किया है।

Exam Tip: विशेषणों वाले प्रश्नों में, कविता से सीधे विशेषणों को उद्धृत करें और बताएं कि वे किस चीज़ का वर्णन करते हैं।

 

प्रश्न 2. दोपहर की गर्मी का वर्णन कवि ने किस तरह किया है ?
Answer: कवि कहता है कि गर्मियों के दिन हैं। सूर्य बहुत क्रोधित होकर चमक रहा है। इसी बीच झुलसा देने वाली लू चल पड़ी है। पृथ्वी जलती हुई रुई जैसी गर्म हो गई है। चारों ओर धूल की चिंगारियां छा गई हैं। यानी प्रचंड गर्मी और लू से वातावरण से मानो आग झर रही है।
In simple words: कवि ने गर्मी का वर्णन करते हुए बताया है कि गर्मियों का दिन है, सूरज बहुत तेज़ चमक रहा है, गर्म हवा चल रही है, धरती रुई की तरह जल रही है, और धूल हर जगह उड़ रही है, जिससे ऐसा लगता है मानो पूरा वातावरण आग उगल रहा हो।

Exam Tip: जब वातावरण का वर्णन करने के लिए पूछा जाए, तो कवि द्वारा उपयोग किए गए सभी संवेदी विवरणों और उपमाओं को शामिल करें।

 

प्रश्न 3. पत्थर तोड़ती स्त्री ने कवि को और किस दृष्टि से देखा ?
Answer: पत्थर तोड़ती स्त्री ने कवि को कातर दृष्टि से देखा। जैसे कोई स्त्री मार खाने के बाद रो न पाई हो।
In simple words: पत्थर तोड़ने वाली स्त्री ने कवि को ऐसी दयनीय नज़र से देखा, जैसे कोई महिला मार खाने के बाद रो न पाई हो।

Exam Tip: चरित्र के हावभाव और उनके पीछे की भावना को व्यक्त करने के लिए कविता की भाषा का उपयोग करें।

 

प्रश्न 4. 'दुलक माथे से गिरे सीकर' का क्या अर्थ है ?
Answer: गर्मी और परिश्रम के प्रभाव से पत्थर तोड़ती स्त्री के माथे से पसीना बह रहा था।
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि गर्मी और कड़ी मेहनत के कारण पत्थर तोड़ने वाली स्त्री के माथे से पसीने की बूंदें गिर रही थीं।

Exam Tip: वाक्यांशों के अर्थ को समझाते समय, उनके शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ उनके निहित अर्थ (जैसे यहां 'परिश्रम' और 'कष्ट') को भी स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 5. 'मैं तोड़ती पत्थर' का भाव स्पष्ट कीजिए ।
Answer: कविता के आरंभ में 'वह तोड़ती पत्थर' में कवि द्वारा स्त्री की वेदना का अवलोकन है, जबकि कविता के अंत में 'मैं तोड़ती पत्थर' में स्त्री मानो यह कह रही कि 'विषमता के पत्थरों को तोड़ रही हैं।'
In simple words: शुरू में 'वह तोड़ती पत्थर' से कवि स्त्री के दुःख को दिखाता है, लेकिन अंत में 'मैं तोड़ती पत्थर' से स्त्री खुद कह रही है कि वह जीवन की मुश्किलों और विषमताओं को तोड़ रही है।

Exam Tip: कविता के शीर्षक या किसी केंद्रीय वाक्यांश के भाव को समझाते समय, उसके विभिन्न संदर्भों और चरित्र के विकास को ध्यान में रखें।

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई, पग धुंघरू बांधि मीरां नाची Summary in Hindi

कवयित्री परिचय

नाम – मीराबाई

जन्म – सन् 1498, कुड़की गाँव (मारवाड़ रियासत)

प्रमुख रचनाएँ – मीरा पदावली (मीराबाई की पदावली), नरसीजी-रो-मोहरो

मृत्यु – सन् 1546

मीराबाई जोधपुर के प्रसिद्ध महाराज राव जोधाजी के सुपुत्र राव दूदाजी की पोती थीं। राव दूदाजी ने ही अजमेर के मुस्लिम सूबेदार से मेड़ता प्रांत छीनकर उसमें मेड़ता नगर बसाया था। इसी वजह से उनके वंशज मेड़तिया शाखा के राठौर प्रसिद्ध हुए और मीरा को भी ससुराल में 'मेड़ती' कहते थे। राव दूदाजी के पुत्र रत्नसिंह की अकेली संतान मीराबाई थीं।

बचपन से ही मीराबाई को श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम था। कहा जाता है कि राव रत्नसिंह के घर पधारे एक साधु के पास श्रीकृष्ण की सुंदर मूर्ति देखकर उसे लेने के लिए बालिका मीराबाई मचल उठी। साधु के चले जाने पर मीरा ने खाना-पीना छोड़ दिया। साधु को स्वप्न में आदेश-मिलने पर वह आकर मूर्ति मीरा को दे गया।

एक अन्य घटना में पड़ोस के एक विवाह-प्रसंग पर मां से बाल मीरा ने पूछा – 'मां मेरा वर कौन है?' माता के कृष्ण-मूर्ति की ओर संकेत करने पर मीरा 'गिरधर गोपाल' को अपना वर मानकर उन्हीं में लीन रहने लगी। लड़कपन में चार-पांच वर्ष की आयु में ही मीरा की मां की मृत्यु हुई और मीरा अपने बाबा (पितामह) राव दूदाजी के घर रहने लगी। उनकी संगति से मीरा में भी भगवद् भक्ति बढ़ती ही रही।

जब मीरा लगभग 14 वर्ष की हुईं, तब उनका विवाह मेवाड़ के विख्यात राणा सांगा के बड़े बेटे कुंवर भोजराज से हुआ। शादी के 7-8 वर्ष बाद ही इनके पति का निधन हो गया। युवावस्था में विधवा मीरा गहरे शोक में डूबकर धीरे-धीरे कृष्ण-भक्ति में लीन हो गईं। वैधव्य के पांच वर्ष बाद पिता और उसके बाद महाराणा सांगा के निधन से भी मीरा में संसार के प्रति विरक्ति एवं श्रीकृष्ण प्रभु के प्रति आसक्ति में वृद्धि हुई।

इसके बाद तो मीरा ने लोक-लाज त्यागकर केवल साधु-संगति एवं भगवद् भक्ति में ही रहना शुरू कर दिया। अब तो वे साधु-संतों के बीच मंदिरों में पैरों में घुंघरू बांधकर नाचने भी लगीं। उनके इस कार्य के फैलते ही उनके सत्संग में एवं दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ लगने लगी। इन सबसे महाराणा रत्नसिंह के भाई, शासक विक्रमाजीत सिंह चिढ़ने लगे और उन्होंने राजघराने की मर्यादा के नाम पर मीराबाई को अनेक कष्ट देना शुरू किया।

कहते हैं उन्होंने मीरा के लिए विष का प्याला, सांप एवं सूली भी भेजी थी। इन संकटों से सुरक्षित पार उतरीं तो उनके चाचा राव वीरमदेवजी के बुलावे पर पीहर मेड़ता में भगवद्-भक्ति में सुविधा से रहने लगीं। पर अव्यवस्था से मेड़ता के बुरे दिन आए और जोधपुर के राव मालदेव ने राव वीरमदेव जी से मेड़ता छीन लिया, तो मीरा मेड़ता से तीर्थयात्रा करते हुए वृंदावन पहुंच गईं।

वृंदावन में उस समय प्रसिद्ध रूपगोस्वामी जी के भतीजे चैतन्य-संप्रदायी श्री जीवगोस्वामी जी के पास गईं, तो उन्होंने कहलवाया कि वे स्त्रियों से नहीं मिलते। परन्तु मीरा ने कहलवाया कि वृंदावन में तो भगवान कृष्ण ही एक मात्र पुरुष हैं और अन्य सभी लोग केवल गोपी का स्त्री रूप हैं। इससे अत्यधिक प्रभावित गोस्वामी जी ने मीरा का स्वागत किया।

मीरा सगुण धारा की महत्वपूर्ण भक्त कवयित्री हैं। कृष्ण की उपासिका होने के कारण उनकी कविता में सगुण भक्ति मुख्य रूप से मौजूद है। लेकिन निर्गुण भक्ति का प्रभाव भी मिलता है। संत कवि रैदास उनके गुरु माने जाते हैं। बचपन से ही उनके मन में कृष्ण भक्ति की भावना जन्म ले चुकी थी। इसलिए वे कृष्ण को ही अपना आराध्य और पति मानती रहीं।

उन्होंने लोक-लाज और कुल की मर्यादा के नाम पर लगाए गए सामाजिक और वैचारिक बंधनों का हमेशा विरोध किया। पर्दा प्रथा का भी पालन नहीं किया तथा मंदिर में सार्वजनिक रूप से नाचने-गाने में भी कभी हिचक महसूस नहीं की। मीरा मानती थीं कि महापुरुषों के साथ संवाद (जिसे सत्संग कहा जाता था) से ज्ञान प्राप्त होता है और ज्ञान से मुक्ति मिलती है।

अपनी इन मान्यताओं को लेकर वे दृढ़निश्चयी थीं। निंदा या बदनामी उनको अपने पथ से विचलित नहीं कर पाई। जिस पर विश्वास किया, उस पर अमल किया। इस अर्थ में उस युग में जहां रूढ़ियों से ग्रस्त समाज का दबदबा था, वहां मीरा स्त्री मुक्ति की आवाज बनकर उभरीं। मीरा की कविता में प्रेम की गंभीर अभिव्यक्ति है। उसमें विरह की वेदना है और मिलन का उल्लास भी। मीरा की कविता का मुख्य गुण सादगी और सरलता है। कला का अभाव ही उसकी सबसे बड़ी कला है।

उन्होंने मुक्तक गेय पदों की रचना की। लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत दोनों क्षेत्रों में उनके पद आज भी लोकप्रिय हैं। उनकी भाषा मूलतः राजस्थानी है तथा कहीं-कहीं ब्रजभाषा का प्रभाव है। कृष्ण के प्रेम की दीवानी मीरा पर सूफियों के प्रभाव को भी देखा जा सकता है। मीरा की कविता के मूल में दर्द है। वे बार-बार कहती हैं कि कोई मेरे दर्द को पहचानता नहीं, न शत्रु न मित्र। हिन्दी भक्ति साहित्य की सगुण शाखा में कृष्ण भक्ति की अनन्य उपासिका मीराबाई एक महत्वपूर्ण भक्त कवयित्री हैं।

काव्य का सार :

यहां मीरा के दो पद दिए गए हैं। प्रथम पद में कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ, प्रेम में डूबी मीरा की अनन्य भक्ति-भाव के दर्शन होते हैं। वह अपने बचपन से ही कृष्ण के प्रेम में डूबी हुई थीं। उन्होंने मन, कर्म और वचन से कृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया था। एक जगह पर वह यह भी कहती हैं – 'माई री मैं तो सपने में ही गोपाल से विवाहित हो गई।' यानी मैंने सपने में ही श्रीकृष्ण का वरण कर लिया है।

यहां भी वह कृष्ण के सगुण साकार रूप का उल्लेख करते हुए कहती हैं कि जिसके सिर पर मोर मुकुट है (कृष्ण) मेरा पति वही है। मेरा पति तो गिरि को धारण करने वाले गोपाल के सिवा दूसरा कोई नहीं। कृष्ण प्रेम में वह इतनी दीवानी हुई हैं कि अब उन्हें कुल की लाज-मर्यादा की परवाह छोड़ दी है। वे बड़े साहस के साथ कहती हैं – 'कहा करिहै कोई' यानी अब मेरा कोई क्या बिगाड़ सकता है।

मीरा ने संतों के साथ बैठकर लोक-लाज छोड़ दी है। उन्होंने कृष्ण-प्रेम रूपी लता को आँसू रूपी जल से सींच-सींचकर बोया है। अब वह बेल फूलने-फलने लगी है, आनंदरूपी फल देने लगी है। वे कहती हैं कि मैंने कृष्ण प्रेम रूपी दूध को भक्ति रूपी मथनी में बड़े प्रेम से बिलोया है। यानी कृष्ण के प्रति उनका यह प्रेम आकस्मिक और सतही नहीं है।

बल्कि उनके हृदय का उल्लास है। उन्होंने यह मार्ग जानबूझकर अपनाया है। इसलिए तो वह कहती हैं मैंने दही को मथकर उसमें से घी निकाल लिया है और छाछ को छोड़ दिया है। यानी जगत को सार रूप तत्व-कृष्ण-आनंद रूपी सार तत्व को ग्रहण कर लिया है और जगत के व्यर्थ कार्यों की व्यस्तता और सांसारिक मोह-माया को छोड़ दिया है।

यही कारण है कि वे भगत (संतजन, साधुजन) को देखकर खुश होती हैं, प्रसन्न होती हैं और लोगों को मोह-माया में लिप्त देखकर रोती हैं। मीरा अपने आपको कृष्ण की दासी कहती हैं और गिरिधर से अपने उद्धार के लिए प्रार्थना करती हैं। दूसरे पद में मीरा कृष्णमय दिखाई देती हैं। वह अपने पैरों में घुंघरू बांधकर कृष्ण के समक्ष तन्मयता से नाचने लगीं।

ऐसा करके उन्होंने इस बात को सही प्रमाणित कर दिया है कि वे श्रीकृष्ण की हैं और कृष्ण उनके हैं। अब लोग चाहे उन्हें पागल कहें तो कहें, बिरादरी के लोग उन्हें कुलनासी कहें तो कहें, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। मीरा का विवाह चित्तौड़ के राजघराने में हुआ था। वह विवाहिता थीं।

राजपूत राजा यह कैसे स्वीकार करते कि मीरा यूं नाच-गान करें? इसीलिए राणा ने उसे मारने के लिए जहर का प्याला भेजा। प्रेम दीवानी मीरा ने उसे हंसते हुए पी लिया। मीरा कहती हैं कि उसका प्रभु गिरिधर बड़ा चतुर है। मुझे आसानी से उसके दर्शन हो गए।

पद व्याख्या :

पद 1

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई
छोड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई ?
संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी
अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी
अब त बेलि फैलि गयी, आणंद-फल होयी
दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी
दघि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी
भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी
दासि मीरा लाल गिरधर ! तारो अब मोही

मीरा के प्रस्तुत पद में माधुर्य भक्ति के दर्शन होते हैं। मीरा ने गिरिधर गोपाल को अपने पति के रूप में स्वीकार कर लिया है। वह स्पष्ट रूप से कहती हैं मेरे तो गिरिधर गोपाल ही पति हैं। उनके अलावा दूसरा और कोई नहीं। प्रेम दीवानी मीरा अपने पति (आराध्य) श्रीकृष्ण का परिचय देते हुए कहती हैं कि जिसके सिर पर मोर मुकुट है वही मेरा पति है।

यह बात वह बड़ी निर्भीकता से डंके की चोट पर करती हैं कि कुल की लाज-मर्यादा मैंने छोड़ दी है। 'कहा करिहै कोई?' यानी कोई मेरा क्या बिगाड़ लेगा। जिसे जो करना है कर ले। वह लोक-लाज की परवाह किए बिना संतों के साथ उठती-बैठती हैं। मीरा ने कृष्ण-प्रेमरूपी बेल को साधारण जल से नहीं, बल्कि आँसू रूपी जल से सींचा है, यानी कृष्ण के विरह में उन्होंने बहुत कष्ट सहे हैं।

उनके अटूट प्रेम की गहराई अद्भुत है। अब वह बेल पुष्पित-पल्लवित हो रही है, फैल रही है। उस पर आनंदरूपी फल लग रहे हैं। यानी वह श्याम के रंग में इस तरह रंग गई हैं कि वह श्याममय हो गई हैं; आनंदमय हो गई हैं। आगे वह कहती हैं कि मैंने कृष्ण के प्रेमरूप दूध को भक्तिरूपी मथनी में बड़े प्रेम से बिलोया है।

मैंने दही से सार तत्व यानी घी को निकाल लिया है और छाछरूपी सारहीन तत्वों को छोड़ दिया है। यानी कृष्ण के प्रेम में अपने-आपको पूरी तरह समर्पित करके यह जान लिया है कि श्याम की शरण ही जगत का सार है। शेष सब कुछ सारहीन है, निरर्थक है, त्याज्य है। इसीलिए वह कृष्णभक्तों को देखकर प्रसन्न होती हैं और संसार के लोगों को सांसारिक उलझनों में घिरा देखकर रोती हैं। वह अपने-आपको गिरधर की दासी बतलाती हैं और उन्हीं से विनय करती हैं कि इस भवसागर से मुझे पार लगा दें।

पद 2

पग धुंघरू बांधि मीरा नाची,
मैं तो मेरे नारायण सूं, आपहि हो गई साची
लोग कहै, मीरा भइ बावरी; न्यात कहै कुल-नासी
विस का प्याला राणा भेज्या, पीवत मीरा हाँसी

शब्दार्थ :

  • कानि - मर्यादा
  • बेलि - बेल, लता
  • छोयी - छाछ, सारहीन अंश
  • साची - सच्ची
  • गोपाल - गायें पालनेवाला, कृष्ण
  • सोई - वही
  • ढिग - साथ, पास
  • विलोयी - मथी
  • आपहि - अपने ही आप, बिना प्रयास, स्क्यं ही
  • गिरधर - पर्वत को धारण करनेवाला यानी कृष्ण
  • मोर मुकुट - मोर के पंखों का बना मुकुट
  • जाके - जिसके
  • छाँड़ि दयी - छोड़ दी
  • कहा - क्या
  • असुवन - आँसुओं
  • मथनियाँ - मथानी
  • दधि - दही
  • काढ़ि लियो- निकाल लिया
  • तारो - उद्धार
  • पग - पैर
  • भई - होना
  • न्यात - परिवार के लोग, बिरादरी
  • विस - जहर, विष
  • हाँसी - हँस दी
  • अविनासी - अमर
  • करिहै - करेगा
  • लोक-लाज - समाज की मर्यादा
  • सीचि - सींचकर
  • विलोयी - मथी
  • घृत - घी
  • डारि दयी - डाल दी, फेंक दिया
  • मोहि - मुझे
  • नारायण - ईश्वर
  • बावरी - पागल
  • कुलनासी - कुल का नाश करनेवाली
  • पीवती - पीती हुई
  • नागर - चतुर

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