GSEB Class 11 Hindi Aaroh Solutions Chapter 13 पथिक

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Detailed Chapter 13 पथिक GSEB Solutions for Class 11 Hindi

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Class 11 Hindi Chapter 13 पथिक GSEB Solutions PDF

कविता के साथ :

अभ्यास

 

प्रश्न 1. पथिक का मन कहाँ विचरना चाहता है ?
Answer: पथिक का मन बादल पर सवार होकर नीले समुद्र और नीले आकाश के बीच भरकर घूमना चाहता है।
In simple words: The traveler wants to ride on clouds and explore between the blue sea and the blue sky.

Exam Tip: When describing a character's desire, clearly state their wish and the places or things they want to experience.

 

प्रश्न 2. सूर्योदय वर्णन के लिए किस तरह के बिंबों का प्रयोग हुआ है ?
Answer: बिंब का अर्थ शब्दचित्र होता है, जिसे अंग्रेजी में Image कहते हैं। Image अर्थात शब्दों के द्वारा ऐसा चित्र बनाना, जिससे उस दृश्य का प्रतिबिंब दिखने लगे। ये बिंब पाँच प्रकार के होते हैं- दृश्यबिंब, स्वादबिंब, घ्राण बिंब, श्रव्य बिंब, स्पर्श बिंब। यहाँ कवि ने सूर्योदय का सुंदर दृश्य बिंब प्रस्तुत किया है, जैसे- समुद्र तल से उगता हुआ सूर्य जो कि आधा पानी में और आधा बाहर दिखाई देता है। सुबह के सूर्य की लालिमा मनमोहक दिखाई देती है। समुद्र जल में आधा बाहर दिखने वाला सूर्य लक्ष्मी जी के स्वर्ण मंदिर के शिखर-सा लगता है। समुद्र में उगते हुए सूर्य की स्वर्णिम किरणें सड़क जैसी लगती हैं, जिस सड़क से लक्ष्मी जी आने वाली हैं।
In simple words: The description of the sunrise uses visual imagery, where words paint a picture of the sun appearing halfway out of the sea, looking like a temple's golden dome, and its golden rays forming a road for Goddess Lakshmi.

Exam Tip: When analyzing imagery, identify the type of sensory experience (sight, sound, smell, taste, touch) the words evoke and how they contribute to the overall description.

 

प्रश्न 3. आशय स्पष्ट करें ।
क. सस्मित-वदन जगत का स्वामी मृदु गति से आता है । तट पर खड़ा गगन-गंगा के मधुर गीत गाता है ।
Answer:
सन्दर्भ : यह काव्यांश पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-1 में संकलित कवि रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित 'पथिक' नामक कविता से लिया गया है। इन पंक्तियों में कवि रात के सौंदर्य का वर्णन किया है।
व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रकृति का सुंदर मानवीकरण किया है। कवि समुद्र किनारे से आधी-रात के सुंदर नजारे का चित्र खींचते हुए कहते हैं कि आधी रात में जब गहरा अंधकार दुनिया को घेर लेता है, अर्थात चारों ओर रात का अँधेरा छा जाता है, आकाश की छत पर तारे चमकने लगते हैं, ऐसे समय में जगत का स्वामी अर्थात ईश्वर मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे आता है और समुद्र तट पर खड़ा होकर आकाश के मधुर गीत गाने लगता है।
विशेष :
1. प्रकृति का मनोहारी चित्रण है।
2. प्रकृति का मानवीकरण किया गया है।
3. कवि की कल्पना अद्भुत है।
4. संस्कृतनिष्ठ शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
In simple words: These lines describe nature's beautiful personification. The poet says that at midnight, when darkness covers the world and stars shine, God comes smilingly and sings sweet songs on the seashore.

Exam Tip: For explaining verses, first state the context (poet, poem, theme), then elaborate on the meaning of each line, and finally, point out any special literary features or effects.

 

ख. कैसी मधुर मनोहर उज्ज्वल है यह प्रेम-कहानी जी में हैं अक्षर बन इसके बनें विश्व की बानी ।
Answer:
सन्दर्भ : यह काव्यांश पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-1 में संकलित कवि रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित 'पथिक' नामक कविता से लिया गया है। कवि प्रकृति के रहस्य को वाणी देकर लोगों तक पहुँचाने की इच्छा करते हैं।
व्याख्या : प्रकृति सौंदर्य की यह प्रेम कहानी बहुत ही मधुर, मनोहर और पवित्र है। पथिक यह इच्छा करता है कि वह यह प्रेम कहानी का अक्षर बन जाए और विश्व की वाणी बन जाए। अर्थात प्रकृति के मोहक रूप और उसके क्रिया-कलापों के रहस्यों को लोगों तक पहुँचा दे।
विशेष :
1. 'मधुर-मनोहर' में अनुप्रास अलंकार है और 'प्रेम-कहानी' में रूपक अलंकार है।
2. कल्पना की ऊँची उड़ान है।
3. प्रकृति चित्रण सुंदर है।
In simple words: The poet wishes for nature's beautiful love story to become a lasting part of the world's narrative, spreading its charm and mysteries to everyone.

Exam Tip: Always identify the poetic devices like 'Anupras Alankar' (alliteration) and 'Rupak Alankar' (metaphor) when analyzing verses, as they enrich the meaning and beauty of the poem.

 

प्रश्न 4. कविता में कई स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में देखा गया है। ऐसे उदाहरणों का भाव स्पष्ट करते हुए लिखें ।
Answer: कविता में कई स्थानों पर प्रकृति का सुंदर मानवीकरण किया गया है, जैसे कि –
1. 'प्रतिक्षण नूतन वेश बनाकर रंग-बिरंग निराला रवि के सम्मुख थिरक रही है नभ में वारिद-माला'
यहाँ बादलों को मनुष्य की तरह नए-नए कपड़े बदलने वाला अनोखा व्यक्ति बताया है। दूसरी पंक्ति में वर्षा जल को सूर्य के सामने नाचने वाली नृतकी बताया है।
2. रत्नाकर गर्जन करता है।
समुद्र को मनुष्य की तरह वीरता के साथ गर्जन या दहाड़ भरता हुआ दिखाया है।
3. 'महिमामय रत्नाकर के घर के'
घर मनुष्य का होता है किंतु यहाँ घर समुद्र का दिखाया गया है।
4. 'लाने को निज पुण्य-भूमि पर लक्ष्मी की असवारी रत्नाकर ने निर्मित कर दी स्वर्ण-सड़क अति प्यारी'
किसी को लाने, ले जाने, भेजने या बुलाने का काम मनुष्य करता है। किंतु यहाँ लक्ष्मी जी की सवारी लाने के लिए समुद्र को प्रयास करते दिखाया गया है। साथ ही सड़क निर्माण का काम मनुष्य करता है। यहाँ समुद्र को सड़क निर्माण का कार्य करते दिखाया गया है।
5. 'निर्भय, दृढ़, गंभीर भाव से गरज रहा सागर है'
निर्भयता, दृढ़ता, गंभीरता आदि मनुष्य के हृदयगत भाव हैं। यहाँ इन भावों का आरोपण सागर पर किया गया है।
6. 'जब गंभीर तम अर्द्ध-निशा में जग को ढक लेता है अंतरिक्ष की छत पर तारों को छिटका देता है' ।
किसी वस्तु को ढकने या छिटकने की क्रिया मनुष्य करता है किंतु यहाँ तम (अंधकार) को यह क्रिया करते हुए दिखाया गया है। यहाँ अंधकार जगत को ढँकता और आकाश में तारों को बिखेरता (टिमटिमाता) हुआ दिखाया है।
7. 'सस्मित-वदन जगत का स्वामी मृदु गति से आता है तट पर खड़ा गगन-गंगा के मधुर गीत गाता है।'
यहाँ ईश्वर पर मानवीय भावों का आरोपण है। वह मुस्कुराते हुए आकाश गंगा के गीत गाता है।
8. 'उससे ही विमुग्ध हो नभ में चंद्र विहँस देता है। वृक्ष विविध पत्तों-पुष्पों से तन को सज लेता है। पक्षी हर्ष संभाल न सकते मुग्ध चहक उठते हैं। फूल सांस लेकर सुख की सानंद महक उठते हैं।'
यहाँ चाँद का हँसना, वृक्षों का सजना-धजना, पक्षियों का हर्ष संभाल न पाना, फूल का साँस लेना आदि में मानवी भावों का आरोपण है।
In simple words: The poem uses personification by portraying clouds as unique individuals changing clothes, rain as a dancing woman, the ocean as a roaring warrior, darkness as a person covering the world, and the moon and trees as human-like, showcasing human emotions and actions in nature.

Exam Tip: When asked to identify personification, look for instances where human qualities, emotions, or actions are attributed to inanimate objects, animals, or abstract ideas in the text.

कविता के आस-पास

 

प्रश्न 1. समुद्र को देखकर आपके मन में क्या भाव उठते हैं ? लगभग 200 शब्दों में लिखें
Answer: समुद्र को साक्षात् देखने से पहले उसकी विशालता, गहराई और अनंतता के बारे में बहुत कुछ सुना था। उसमें उठने वाले ज्वार और भाटा के विषय में भी बहुत कुछ सुना था, पढ़ा था। मगर जब से समुद्र को देखा है, उसके विषय में जानने की इच्छा और भी बढ़ गई है। समुद्र को देखते ही उसकी अनंत जलराशि को कौन इकट्ठा करता होगा, इसके किनारे कौन बनाता होगा, कभी तालाब या बाँध की तरह यह टूट गया या फूट गया तो क्या होगा? ज्वार भाटा क्यों उठते होंगे? समुद्र दो देशों या दो महाद्वीपों को जोड़ता है। जलमार्ग के रूप में इसकी पहली कल्पना किसने की होगी? इसके भीतर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का संसार कैसा होगा? सागर के तल में गोताखोर कैसे गोता लगाते होंगे? इसकी विशाल जलराशि को पीने और सिंचाई करने योग्य बनाया जा सकता है क्या? पूर्णिमा और अमावस्या के दिन समुद्र का नजारा अद्भुत होता है। वैसे ही सूर्योदय और सूर्यास्त के समय भी समुद्र का नजारा अद्भुत होता है। शांत समुद्र का अपना आकर्षण है, वहीं गरजते और तूफानयुक्त समुद्र की भयावहता का रोमांच अलग ही है। समुद्र की विकरालता को देखकर मन डर जाता है और मन में होता है कि यदि कभी समुद्रयात्रा करते समय समुद्र की तूफानी लहरों के बीच पड़ गया तो? और हृदय काँप उठता है। तुरंत ही समुद्र का उपकारक रूप ध्यान में आ जाता है। समुद्र रत्नाकर है। मानव को नमक समुद्र से ही मिलता है। जलचक्र में समुद्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। समुद्र और सूर्य का जुड़ाव ही वर्षा का कारण है और वर्षा हमारे जीवन की धुरी है। जल के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। मन समुद्र के प्रति कृतज्ञता से भर उठता है। भोजन के लिए मछलियाँ, मोती जैसी कीमती वस्तु, अनेक प्रकार के रत्न, पेट्रोलियम पदार्थ समुद्र से मनुष्य प्राप्त करता है। समुद्र हमारे लिए रत्नाकर है।
In simple words: Seeing the ocean brings thoughts of its vastness, depth, and mysteries. Questions arise about its creation, tides, underwater life, and its role as a resource. The ocean's beauty, especially during sunrise and sunset, and its terrifying power during storms, evoke both wonder and fear. It is essential for human life, providing food, resources, and playing a vital role in the water cycle.

Exam Tip: When writing a descriptive answer, use vivid adjectives and sensory details to convey emotions and observations. Organize your thoughts into different aspects of the subject, such as its appearance, impact, and significance.

 

प्रश्न 2. प्रेम सत्य है, सुंदर है – प्रेम के विभिन्न रूपों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर परिचर्चा करें ।
Answer: प्रेम सत्य है, सुंदर है। सच कहें तो प्रेम ईश्वर का ही दूसरा नाम है। मध्यकालीन सूफी कवियों ने तो ईश्वर को प्राप्त करने का मार्ग ही प्रेम मार्ग बताया है। इसकी महिमा अनंत है। प्रेम के अनेक रूप हैं, जैसे –
• राष्ट्रप्रेम
• मातृप्रेम
• पशु-प्राणी प्रेम
• मानव प्रेम
• प्रकृति प्रेम
• पत्नी प्रेम
• प्रेयसी प्रेम
• परिवार प्रेम
• समाज प्रेम
• शिक्षा प्रेम
• संतान प्रेम आदि
In simple words: Love is true and beautiful, often seen as another name for God. It has endless forms, including love for nation, mother, animals, humanity, nature, spouse, family, society, education, and children.

Exam Tip: When discussing a broad concept like love, categorize its different forms or aspects to provide a comprehensive and structured answer.

 

उपर्युक्त पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थी स्वयं परिचर्चा आयोजित करें ।

 

प्रश्न 3. वर्तमान समय में हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, इस पर चर्चा करें और लिखें कि प्रकृति से जुड़े रहने के लिए क्या कर सकते हैं ?
Answer: आज मनुष्य प्रकृति से दूर होता जा रहा है। इसके अनेक कारण हैं। जनसंख्या के बढ़ने से गाँव में भी लोग खेती की जमीन पर घर बना रहे हैं। जंगलों को अपने-अपने स्वार्थ के कारण लोग मनमाने ढंग से उजाड़ रहे हैं। जंगलों में भी बड़ी-बड़ी इमारतें बनाई जा रही हैं। रोजी-रोटी की तलाश में लोग बड़ी संख्या में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। महानगरों में रहने वाला व्यक्ति कैसे प्रकृति के संपर्क में रह सकता है? शहर की रफ्तार और फ्लैट कल्चर में लोग या तो तेज भाग रहा है या अपनी-अपनी चार दीवारी में कैद है। वह बदलते मौसमों का सही आनंद नहीं उठा सकता। प्रकृति से खिलवाड़ और प्रकृति से अलगाव दोनों मानवजाति के लिए चिंता का विषय है। प्रकृति से जुड़े रहने के लिए हम निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं –
• शहरों में बड़ी-बड़ी आवासीय योजनाओं की अनुमति तभी दी जाए जब उसमें पर्याप्त पौधे और पार्क की व्यवस्था हो।
• बड़े-बड़े सार्वजनिक समारोह या कार्यक्रम नदी-तालाब या अन्य प्राकृतिक स्थलों पर आयोजित किए जाएँ।
• अपने-अपने घरों के आस-पास वृक्ष उगाए जाएँ।
• सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों एवं सरकारी कार्यालयों में जहाँ गुंजाइश हो अधिकाधिक पेड़ लगाए जाएँ।
• सड़कों के दोनों किनारे और बीच (डिवाइडर) में पर्याप्त पेड़-पौधे लगाए जाएँ।
• खेती की जमीन को आवासीय जमीन में बदलने के नियम सख्त हों।
• जंगल और उसमें रहने वाले जीव-जंतुओं का संरक्षण हो।
• शहरी लोगों को अवसर मिलने पर बीच-बीच में गाँव, जंगल, नदी, पहाड़, झरना आदि प्राकृतिक स्थलों की मुलाकात लेनी चाहिए।
In simple words: Humans are moving away from nature due to population growth, deforestation, and urbanization. To reconnect, we should promote green spaces in cities, plant trees around homes, increase greenery in public areas and along roads, strictly regulate converting agricultural land, protect forests and wildlife, and encourage city dwellers to visit natural places regularly.

Exam Tip: When discussing environmental issues and solutions, always provide reasons for the problem and then offer clear, actionable steps that can be taken to address it.

 

प्रश्न 4. सागर संबंधी दस कविताओं का संकलन करें और पोस्टर बनाएँ ।
Answer: विद्यार्थी स्वयं करें ।
In simple words: Students should complete this task on their own.

Exam Tip: For creative assignments like collecting poems and making a poster, ensure the selection is diverse and the presentation is visually appealing and informative.

कविता के साथ

 

प्रश्न 1. पथिक अपनी प्रिया को क्या कहकर संबोधित करता है तथा उसे क्या बताना चाहता है ?
Answer: पथिक ने अपनी प्रिया को 'अनुराग-भरी कल्याणी' कहकर संबोधित किया है। उससे प्रश्न करते हुए वह बताना चाहता है कि यहाँ से बढ़कर सुंदर दृश्य और कहीं देखने को मिलेगा? अर्थात यह नजारा अपने आप में सुंदर है, अनुपम है, अद्वितीय है।
In simple words: The traveler calls his beloved 'Anurag-Bhari Kalyani' and asks if there's any sight more beautiful than this, implying this view is uniquely stunning.

Exam Tip: When answering questions about addressing someone, state the exact term of address and then elaborate on the message being conveyed or the emotion expressed.

योग्य विकल्प पसंद करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।

 

प्रश्न 1. रामनरेश त्रिपाठी का जन्म सन् में हुआ था ।
(a) 1881
(b) 1882
(c) 1883
(d) 1884
Answer: (a) 1881
In simple words: Ramnaresh Tripathi was born in the year 1881.

Exam Tip: For biographical details like birth years, memorize them accurately to ensure correct answers in objective type questions.

 

प्रश्न 2. 'मिलन', 'पथिक', 'स्वप्न' काव्य के रचनाकार ............ हैं ।
(a) जयशंकर प्रसाद
(b) रामनरेश त्रिपाठी
(c) महादेवी वर्मा
(d) निर्मला पुतुल
Answer: (b) रामनरेश त्रिपाठी
In simple words: The author of the poems 'Milan', 'Pathik', and 'Swapna' is Ramnaresh Tripathi.

Exam Tip: Always associate key works with their respective authors. Knowing major literary figures and their creations is vital for literature exams.

 

प्रश्न 3. रामनरेश त्रिपाठी रचित ........... एक नाटक है।
(a) मानसी
(b) मोहनमाला
(c) प्रेमलोक
(d) तीनों
Answer: (c) प्रेमलोक
In simple words: 'Premalok' is a play written by Ramnaresh Tripathi.

Exam Tip: Differentiate between different genres (poetry, drama, story) when learning about an author's works to answer genre-specific questions correctly.

 

प्रश्न 4. रामनरेश त्रिपाठी रचित एक कहानी है।
(a) पेखन
(d) वानर संगीत
Answer: (d) वानर संगीत
In simple words: 'Vanar Sangeet' is a story written by Ramnaresh Tripathi.

Exam Tip: When remembering an author's works, it helps to categorize them by genre, such as 'story', 'poem', or 'play'.

 

प्रश्न 5. रामनरेश त्रिपाठी की मृत्यु सन् में हुई थी।
(a) 1962
(b) 1963
(c) 1964
(d) 1965
Answer: (a) 1962
In simple words: Ramnaresh Tripathi passed away in the year 1962.

Exam Tip: Just like birth dates, remember the death dates of prominent literary figures as they are often asked in quizzes and tests.

 

प्रश्न 6. रामनरेश त्रिपाठी जी के पिता का नाम ................ था ।
(a) रामदत्त त्रिपाठी
(b) श्यामदत्त त्रिपाठी
(c) देवीदत्त
(d) देवव्रत
Answer: (a) रामदत्त त्रिपाठी
In simple words: Ramnaresh Tripathi's father's name was Ramdatt Tripathi.

Exam Tip: For questions about an author's personal life, such as family details, ensure accuracy by cross-referencing biographical information.

 

प्रश्न 7. हिंदी में बाल साहित्य के जनक माने जाते हैं ।
(a) त्रिलोचन
(b) रामनरेश त्रिपाठी
(c) दुष्यंत कुमार
(d) सुमित्रानंदन पंत
Answer: (b) रामनरेश त्रिपाठी
In simple words: Ramnaresh Tripathi is considered the pioneer of children's literature in Hindi.

Exam Tip: Identify key figures in specific literary movements or genres, like the "father of children's literature," as these titles help in recognizing their significance.

 

प्रश्न 8. 'पथिक' कविता के रचनाकार हैं ।
(a) भवानीप्रसाद मिश्र
(b) अक्क महादेवी
(c) रामनरेश त्रिपाठी
(d) त्रिलोचन
Answer: (c) रामनरेश त्रिपाठी
In simple words: The creator of the poem 'Pathik' is Ramnaresh Tripathi.

Exam Tip: Knowing the author of each poem or story you study is fundamental. Create flashcards or lists to help remember this information.

 

प्रश्न 9. 'कोने-कोने में.............. अलंकार है ।
(a) पुनरुक्ति प्रकाश
(b) यमक
(c) श्लेष
(d) संदेह
Answer: (a) पुनरुक्ति प्रकाश
In simple words: The phrase 'kone-kone mein' contains the 'punarukti prakash' figure of speech, meaning repetition for emphasis.

Exam Tip: When identifying figures of speech, look for repetition of words, phrases, or sounds, and understand their specific names and functions (e.g., Punarukti Prakash for simple repetition, Yamak for different meanings).

 

प्रश्न 10. पथिक ने अपनी प्रिया को कहकर संबोधित किया है।
(a) अनुरागभरी देवी
(b) अनुरागभरी कल्याणी
(c) अनुरागभरी प्रकृति
(d) अनुरागभरी भाषा
Answer: (b) अनुरागभरी कल्याणी
In simple words: The traveler called his beloved 'Anurag-Bhari Kalyani'.

Exam Tip: Pay attention to specific terms of endearment or address used in literary texts, as they often reveal character relationships or thematic elements.

 

प्रश्न 11. प्रस्तुत कविता में कवि ने आँसुओं के लिए ..... प्रयुक्त किया है ।
(a) अश्रु-कण
(b) नयन-जल
(c) नयन-नीर
(d) कोई नहीं
Answer: (c) नयन-नीर
In simple words: In this poem, the poet used 'Nayan-Neer' to refer to tears.

Exam Tip: Note specific vocabulary choices made by poets. Sometimes, poets use unique or less common words to convey particular emotions or imagery.

 

प्रश्न 12. कवि ने प्रकृति के असीम सौन्दर्य को.. का राज्य कहा है ।
(a) प्रेम
(d) प्रिय
Answer: (a) प्रेम
In simple words: The poet called nature's endless beauty the kingdom of love.

Exam Tip: Understand the central theme or message of the poem. Here, the poet equates the beauty of nature with love, indicating a deep connection.

 

प्रश्न 13. 'धन पर बैठ, बीच में बिचरूँ अलंकार है ।
(a) भ्रान्तिमान
(b) अप्रस्तुत प्रशंसा
(c) उदाहरण
(d) अनुप्रास
Answer: (d) अनुप्रास
In simple words: The phrase 'Dhan par baith, beech mein bichroon' features 'Anupras Alankar' due to the repetition of similar sounds.

Exam Tip: To identify 'Anupras Alankar' (alliteration), look for the repetition of a consonant sound at the beginning of words in close succession within a phrase or line.

 

प्रश्न 14. सागर किनारे खड़ा होकर पथिक.......... के सौंदर्य पर मुग्ध है ।
(a) चंद्रोदय
(b) सूर्योदय
(c) नायिका
(d) प्रिया
Answer: (b) सूर्योदय
In simple words: Standing by the sea, the traveler is charmed by the beauty of the sunrise.

Exam Tip: Context is key. Refer back to the poem's narrative to confirm what the character is admiring or observing in a particular scene.

अपठित पद्य

नीचे दी गई कविता को पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए –

जो आदमी दुख में है
वह बहुत बोलता है
बिना बात के बोलता है
वह कभी चुप्प स्थिर बैठ नहीं सकता
ज़रा-सी हवा लगते फेंकता लपट
बकता है लगातार
ईंट के भट्ठ-सा धधकता
जो सुखी सम्पन्न है
सन्तुष्ट है वह कम बोलता है
है काम की बात बोलता है
जो जितना सुखी है उतना ही कम बोलता है
जो जितना ताकतवर है उतना ही कम
वह लगभग नहीं बोलता है
हाथ से इशारा करता है
ताकता है
और चुप्प रहता है
जिसके चलते चल रहा है युद्ध कट रहे हैं लोग
उसने कभी किसी बन्दूक की घोड़ी नहीं दाबी
– अरुणकमल

 

प्रश्न 1. कवि के अनुसार कैसा व्यक्ति कभी चुप – स्थिर बैठ नहीं सकता ?
Answer: दुःख में पड़ा व्यक्ति कभी चुप या स्थिर नहीं बैठ सकता ।
In simple words: According to the poet, a person suffering from sadness cannot remain quiet or still.

Exam Tip: When answering questions about a poem, directly quote or paraphrase the lines that support your answer, ensuring you capture the poet's exact sentiment.

 

प्रश्न 2. दुःखी व्यक्ति कब अधिक बोलने (बकने) लगता है ?
Answer: किसी के ज़रा-सा उकसाने या सहानुभूति दर्शाने पर दुःखी व्यक्ति बकने लग जाता है ।
In simple words: A sad person starts talking excessively when someone slightly provokes them or shows sympathy.

Exam Tip: Identify cause-and-effect relationships within the poem. Here, specific actions (provoking, sympathizing) lead to a particular response (talking excessively).

 

प्रश्न 3. 'ईट के भट्ठ-सा धधकता' में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'ईंट के भट्टे-सा धधकता' में उपमा अलंकार है ।
In simple words: The phrase 'eent ke bhatth-sa dhadhakta' contains the 'Upma Alankar' (simile).

Exam Tip: Recognize 'Upma Alankar' (simile) by the use of comparison words like 'sa' (सा), 'si' (सी), 'sam' (सम), or 'jaisa' (जैसा), which explicitly link two different things.

 

प्रश्न 4. कैसा व्यक्ति केवल काम की बात बोलता है ?
Answer: सुखी-सम्पन्न तथा संतुष्ट व्यक्ति केवल काम की बात बोलता है ।
In simple words: A happy, prosperous, and content person only speaks about important matters.

Exam Tip: Focus on the attributes described for different types of individuals in the poem. The poem clearly links contentment with concise, purposeful speech.

 

प्रश्न 5. 'उसने कभी किसी बंदूक की घोड़ी नहीं दाबी ।' का भाव बताइए ।
Answer: जिसके कारण युद्ध हो रहा, ऐसा व्यक्ति कभी शस्त्र नहीं उठाता, बोलता नहीं बल्कि इशाराभर करता है ।
In simple words: This means that the person responsible for the conflict never wields a weapon; instead, they simply gesture rather than speak.

Exam Tip: Interpret figurative language carefully. This line suggests a powerful, perhaps manipulative, individual who influences events without direct, visible involvement.

पथिक Summary in Hindi

कवि परिचय :

नाम – रामनरेश त्रिपाठी
जन्म – सन् 1881, कोइरीपुर, जिला जौनपुर (उ.प्र.)
प्रमुख रचनाएँ:
काव्य – मिलन, पथिक, स्वप्न (खण्डकाव्य), मानसी (कविता संग्रह)
नाटक – अजनबी जयन्त, पेखन, प्रेमलोक
आलोचना – तुलसीदास और उनकी कविता, ग्राम साहित्य, हिंदी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास
कहानी – बाल कथा कहानी, गुपचुप कहानी, मोहन माला, वानर संगीत, बुद्धि-विनोद आदि ।
मृत्यु – सन् 1962

हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि, सफल संपादक, सिद्धहस्त कहानीकार और कुशल नाटककार रामनरेश त्रिपाठी का जन्म जौनपुर जिले के कोइरीपुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता रामदत्त त्रिपाठी भगवद्भक्त और रामायण प्रेमी थे। प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय पाठशाला में तथा माध्यमिक शिक्षा जौनपुर में ग्रहण की। कोलकाता और राजस्थान में कुछ समय रहने के बाद इन्होंने प्रयाग को ही अपना स्थायी निवासस्थान बना लिया।

वहाँ एक 'हिन्दी-मंदिर' की भी स्थापना की थी। राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें जेलयात्रा भी करनी पड़ी थी। रामनरेश त्रिपाठी छायावाद पूर्व की खड़ीबोली हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आरंभिक शिक्षा पूरी होने के बाद स्वाध्याय – से हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला और उर्दू का ज्ञान प्राप्त किया।

उन्होंने उस समय के कवियों के प्रिय विषय समाज-सुधार के स्थान पर रोमांटिक प्रेम को कविता का विषय बनाया। उनकी कविताओं में देशप्रेम और वैयक्तिक प्रेम दोनों मौजूद है, लेकिन देशप्रेम को ही विशेष स्थान दिया गया है। कविता कौमुदी (आठ भाग) में उन्होंने हिन्दी, उर्दू, बांग्ला और संस्कृत की लोकप्रिय कविताओं का संकलन किया है।

इसी के एक खंड में ग्रामगीत संकलित हैं, जिसे उन्होंने गाँव-गाँव घूमकर एकत्र किया था। लोक-साहित्य के संरक्षण की दृष्टि से हिंदी में यह उनका पहला मौलिक कार्य था। हिंदी में वे बाल साहित्य के जनक माने जाते हैं। उन्होंने कई वर्षों तक वानर नामक बाल पत्रिका का संपादन किया, जिसमें मौलिक एवं शिक्षाप्रद कहानियाँ, प्रेरक प्रसंग आदि प्रकाशित होते थे।

कविता के अलावा उन्होंने नाटक, उपन्यास, आलोचना, संस्मरण आदि अन्य विधाओं में भी रचनाएँ की। त्रिपाठी जी गाँधीवादी सिद्धांतों से प्रभावित साहित्यकार हैं। स्वदेश भक्ति और राष्ट्रीय-प्रेम आपके साहित्य का प्रधान विषय रहा है। राष्ट्र के नवयुवकों को प्रेरणा देना ही उनके साहित्य का उद्देश्य रहा है। इन्होंने देशभक्ति में प्रेम तत्व का मिश्रण करके काव्य में माधुर्य का समावेश कर दिया है।

ये एक बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न साहित्यकार हैं, जिसके कारण आज भी लोग उन्हें श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। रामनरेश त्रिपाठी की काव्यभाषा शुद्ध खड़ीबोली है। भाषा परिमार्जित, सुव्यवस्थित तथा प्रसाद गुण सम्पन्न है। स्पष्टता एवं प्रवाह उनकी भाषा की विशेषता है। इनकी काव्य-शैली में गतिशीलता है। भावानुरूप भाषा-शैली के कारण हिन्दी काव्य-जगत में त्रिपाठी जी का स्थान महत्त्वपूर्ण है।

काव्य सारांश :

'पथिक' कविता दरअसल कवि रामनरेश त्रिपाठी के प्रसिद्ध खण्डकाव्य 'पथिक' के प्रथम सर्ग से लिया गया अंश है। इसमें काव्य-नायक पथिक संसार की आपाधापी से विरक्त होकर कहीं दूर प्रकृति के प्रांगण में बस जाना चाहता है। पथिक प्रकृति के सौंदर्य पर वारि-वारि जाता है – मुग्ध हो जाता है। यहाँ किसी सज्जन की सलाह से देश-सेवा का व्रत लेता है।

राजा उसे मृत्यु-दण्ड देता है, मगर उसकी कीर्ति समाज में बनी रहती हैं। सागर किनारे खड़ा पथिक सागर के मोहक रूप पर मुग्ध होकर बादलों पर बैठकर सवारी करके वह रत्नाकर (समुद्र) का कोना-कोना देखना चाहता है। सागर किनारे से सूर्योदय की सुंदर कल्पना करते हुए कवि कहता है सूर्य की किरणों ने लक्ष्मी को लाने के लिए मानो सोने की सड़क बना दी है।

सागर की निर्भय, गंभीर गर्जन और लहरों का उठना-गिरना मोहक दृश्य खड़ा कर रहा है, जिसे देखकर पथिक पुलकित हो रहा है। कवि ने सागर किनारे से दिखने वाले चंद्रोदय और आकाश में तारों भरी रात का नजारा मनमोहक है। कवि उसके मोहक रूप पर मुग्ध है। चाँद हँसता-सा नज़र आता है और उसका चाँदनी से पेड़-पत्ते-पुष्प और तने सब सज-धजे से लगने लगते हैं।

पेड़ सुंदर दिखने लगते हैं, पक्षी चहक उठते हैं, फूल महक उठते हैं। वन, उपवन, पर्वत और मैदानों में बादल बरस पड़ते हैं। पथिक प्रकृति सौंदर्य पर भावुक होकर नयन-नीर बहाने लगता है। कवि प्रकृति के इस मधुर, मनोहर, उज्ज्वल प्रेमकहानी को अक्षर का रूप देकर जन-जन तक पहुँचाना चाहता है। इतना ही नहीं, प्रकृति के निकट सांनिध्य को वह प्रेम का परम, सुंदर राज्य कहता है और वहीं सुख-चैन से जीना चाहता है।

काव्य का भावार्थ :

प्रतिक्षण नूतन वेश बनाकर रंग-बिरंग निराला ।
रवि के सम्मुख थिरक रही है नभ में वारिद-माला ।
नीचे नील समुद्र मनोहर ऊपर नील गगन है।
घन पर बैठ, बीच में बिचरूँ यही चाहता मन है //

प्रस्तुत काव्य-पंक्तियों में कवि रामनरेश त्रिपाठी सांसारिक भाग-दौड़ से मुक्त होकर प्रकृति के अनुपम सौंदर्य पर मोहित होकर वहीं बस जाना चाहते हैं। कवि ने पथिक के माध्यम से सुंदर प्रकृति चित्रण किया है। प्रस्तुत काव्यांश में पथिक पल-पल परिवर्तित होते हुए बादलों की रूपाकृति का वर्णन करते हुए कहता है कि सूर्य की रोशनी में रंग-बिरंगे बादल प्रति-क्षण नया-नया रूप धारण करते हैं, जो बड़े ही निराले लगते हैं।

आकाश में वर्षा-बूंदों की झड़ी रवि के सम्मुख थिरकती-सी नज़र आती है। नीचे नीला समुद्र है और ऊपर नीलाकाश है। ऐसे मनोहर, मनभावन वातावरण में कविहृदय कल्पना लोक में पहुँच जाता है। उसका मन बादल पर सवार होकर नीले समुद्र और नीलगगन के बीच मन-भर उड़ना चाहता है, विचरण करना चाहता है।

रत्नाकर गर्जन करता है, मलयानिल बहता है ।
हरदम यह हौसला हृदय में प्रिये ! भरा रहता है ।
इस विशाल, विस्तृत, महिमामय रत्नाकर के घर के
कोने-कोने में लहरों पर बैठ फिरूँ जी भर के ।।

प्रस्तुत काव्य-पंक्तियों में पथिक लहराते, गर्जन करते समंदर और मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित हवाओं को देखकर उत्साहित हो जाता है। अपनी प्रिया को संबोधित करते हुए कहता है, कि हे प्रिये ! ऐसे रम्य वातावरण में मेरे हृदय में हरदम यह हौसला उमड़ता रहता है कि इस विशाल, विस्तृत, अनंत और महिमामय समंदर के घर का कोना-कोना (दूर-दूर तक) लहरों पर सवार होकर घूम आऊँ।

निकल रहा है जलनिधि-तल पर दिनकर-बिंब अधूरा ।
कमला के कंचन-मंदिर का मानो कांत कँगूरा ।
लाने को निज पुण्य-भूमि पर लक्ष्मी की असवारी ।
रत्नाकर ने निर्मित कर दी स्वर्ण-सड़क अति प्यारी ।।
निर्भय, दृढ़, गंभीर भाव से गरज रहा सागर है ।
लहरों पर लहरों का आना सुंदर, अति सुंदर है ।
कहो यहाँ से बढ़कर सुख क्या पा सकता है प्राणी ?
अनुभव करो हृदय से, हे अनुराग-भरी कल्याणी ।।

यहाँ कवि ने समुद्र के किनारे के सूर्योदय की सुंदर कल्पना की है। सूर्योदय हो रहा है, समुद्रतल पर उसका अधूरा प्रतिबिम्ब दिखाई दे रहा है। कारण यह है कि आधा सूर्य जल के भीतर और आधा बाहर दिखाई दे रहा है। यह दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो लक्ष्मी देवी के स्वर्णमंदिर का चमकता हुआ कंगूरा है।

पथिक ऐसी कल्पना कर रहा है कि समुद्र ने अपनी पुण्य-भूमि पर लक्ष्मी की सवारी लाने हेतु सुंदर सोने की सड़क निर्मित कर दी हो। (सुबह-सवेरे की सूर्यकिरणें स्वर्णिम दिखाई देती हैं। समुद्र किनारे, खड़े होकर जब हम दूर समुद्र में उगते हुए सूर्य को देखते हैं तब स्वर्णिम किरणें सड़क-सी ही प्रतीत होती है।)

कवि आगे समुद्र की गर्जन में निर्भयता, दृढ़ता एवं गंभीरता आदि भाव की प्रतीति करते हुए कहता है कि समुद्र निर्भीक होकर दृढ़ता व गंभीरता से गरज रहा है। ऐसे में समंदर की लहरें भी अपनी मस्ती में आकर लगातार उठती रहती हैं, जो अपने आप में बेहद सुंदर दृश्य उत्पन्न करता है। वह फिर अपनी प्रेममयी, कल्याणी प्रिया से प्रश्न करता है कि बताओ यहाँ से बढ़कर सुंदर दृश्य और कहीं देखने को मिलेगा? अर्थात यह नज़ारा अपने आप में सुंदर है, अनुपम है, अद्वितीय है।

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