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Detailed अभ्यास 05 समास परिचयः GSEB Solutions for Class 10 Sanskrit
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Class 10 Sanskrit अभ्यास 05 समास परिचयः GSEB Solutions PDF
Gujarat Board Class 10 Sanskrit Grammar समास-परिचयः
अभ्यास 5
GSEB Class 10 Sanskrit समास-परिचयः Textbook Questions and Answers
Question 1. अधोलिखितानां पदानां समासप्रकारं लिखित् (Write the type of compound for the following words.)
1. शिलालिखितम्
2. नीतिनिपुणाः
3. प्रत्युत्पन्नमतिः
4. लब्धविजयाः
5. प्रकृतिनिर्मिताः
6. अधिगततत्त्वः
Answer:
1. शिलालिखितम् – सप्तमी तत्पुरुष समास
2. नीतिनिपुणाः – सप्तमी तत्पुरुष समास
3. प्रत्युत्पन्नमतिः – बहुव्रीहि समास
4. लब्धविजयाः – बहुव्रीहि समास
5. प्रकृतिनिर्मिताः – तृतीया तत्पुरुष समास
6. अधिगततत्त्वः – बहुव्रीहि समास
In simple words: आपको प्रत्येक शब्द के लिए सही समास प्रकार की पहचान करनी है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि कौन सा पद किस समास श्रेणी में आता है, जैसे तत्पुरुष या बहुव्रीहि।
Exam Tip: संस्कृत में समास के प्रकारों को याद करें जैसे तत्पुरुष, बहुव्रीहि, कर्मधारय, और द्वन्द्व। प्रत्येक प्रकार की परिभाषा और कुछ उदाहरणों को ध्यान में रखें ताकि आप आसानी से पहचान सकें।
Question 2. निम्नलिखितानि पदानि संयोज्य योग्यं समासं विरचयता (Combine the following words to form a suitable compound.)
1. तीक्ष्ण + तुण्ड
2. कृत + कार्य
3. न + प्राप्त
4. गभीर + जल
5. उग्र + स्वभाव
Answer:
1. तीक्ष्ण + तुण्ड = तीक्ष्णतुण्डः
2. कृत + कार्य = कृतकार्यः
3. न + प्राप्त = अप्राप्तम्
4. गभीर + जल = गभीरजलम्
5. उग्र + स्वभाव = वनस्वभावः (उग्रस्वभावा वा)
In simple words: आपको दिए गए दो शब्दों को जोड़कर एक नया समास पद बनाना है। उदाहरण के लिए, 'तीक्ष्ण' और 'तुण्ड' मिलकर 'तीक्ष्णतुण्डः' बन जाते हैं, जो एक नया यौगिक शब्द है।
Exam Tip: समास बनाते समय, शब्दों के अर्थ और व्याकरणिक नियमों का ध्यान रखें। सही विभक्ति और लिंग का प्रयोग करना आवश्यक है, और अंतिम रूप व्याकरण के अनुसार शुद्ध होना चाहिए।
Question 3. 'क' विभागं 'ख' विभागेन सह संयोजयत। (Match column 'A' with column 'B'.)
'क'
1. भग्नदन्ता
2. प्राप्तबुद्धि
3. परिवारजनः
4. भयक्रोधो
5. महावृक्षः
'ख'
(1) इतरेतर द्वन्द्व
(2) बहुव्रीहि (पुं.)
(3) षष्ठी तत्पुरुष
(4) बहुव्रीहि (स्त्री)
(5) कर्मधारय
(6) द्वितीया तत्पुरुष
Answer:
1. भग्नदन्ता – बहुव्रीहि (स्त्री)
2. प्राप्तबुद्धि – बहुव्रीहि (पुं.)
3. परिवारजनः – षष्ठी तत्पुरुष
4. भयक्रोधो – इतरेतर द्वन्द्व
5. महावृक्षः – कर्मधारय
In simple words: आपको 'क' कॉलम में दिए गए समास पदों को 'ख' कॉलम में दिए गए उनके सही समास प्रकारों से मिलाना है। हर पद का सही व्याकरणिक प्रकार चुनें और उसकी विशेषता के अनुसार मिलान करें।
Exam Tip: मिलान करते समय, प्रत्येक समास पद के अर्थ और उसके घटकों के बीच के संबंध को समझें। इससे आपको सही समास प्रकार की पहचान करने में मदद मिलेगी। बहुव्रीहि, तत्पुरुष, द्वन्द्व और कर्मधारय समास के मुख्य भेदों को ध्यान में रखें।
GSEB Class 10 Sanskrit समास-परिचयः Additional Important Questions and Answers
निम्नलिखित वाक्येषु रेखाकितानां पदानां समासविग्रहः समासो वा कृत्वा लिखत
Question 1. सत्यम् अहिंसा च भारतस्य विशिष्टगुणद्वयम् अस्ति।
Answer: विशिष्टं गुणद्वयम् (कर्मधारयः)
In simple words: इस वाक्य में 'विशिष्टगुणद्वयम्' पद कर्मधारय समास का एक उदाहरण है। यह भारत के दो विशेष गुणों को दर्शाता है।
Exam Tip: ऐसे वाक्यों में, समास वाले पद को पहचानें और फिर उसके प्रकार को इंगित करें। कर्मधारय समास में विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है, जो एक वस्तु की विशेषता बताता है।
Question 2. वयं भारतीयाः सर्वान् प्राणिनः आत्मवत् पश्यामः।
Answer: सर्वप्राणिनः (कर्मधारयः)
In simple words: यहाँ 'सर्वप्राणिनः' पद एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सभी प्राणी'। यह पद सभी जीवों को समान रूप से देखने के विचार को व्यक्त करता है।
Exam Tip: 'सर्व' उपसर्ग वाले पदों को अक्सर कर्मधारय समास के रूप में पहचाना जाता है, जहाँ 'सर्व' विशेषण के रूप में कार्य करता है। ऐसे पदों का विग्रह करते समय इस बात का ध्यान रखें।
Question 3. वयं अज्ञाननिद्रां परित्यज्य जीवन मूल्यानि जीवने धारयेम्।
Answer: अज्ञानम् एव निद्रा (कर्मधारयः)
In simple words: 'अज्ञाननिद्रा' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'अज्ञान रूपी नींद'। यह उस स्थिति को बताता है जहाँ व्यक्ति अज्ञानता में डूबा रहता है।
Exam Tip: जब दो पदों के बीच 'एव' (ही) का संबंध हो और एक पद दूसरे की उपमा या रूपक हो, तो वह कर्मधारय समास होता है। 'रूपक कर्मधारय' इसका एक विशिष्ट प्रकार है।
Question 4. देवयानः पन्थाः सत्येन विततः।
Answer: देवयान पन्थाः (कर्मधारयः)
In simple words: 'देवयानः पन्थाः' एक कर्मधारय समास है, जो 'देवताओं के मार्ग' को इंगित करता है। यह एक विशेष प्रकार का मार्ग है।
Exam Tip: कर्मधारय समास में विशेषण और विशेष्य का संबंध स्पष्ट होता है। जब एक संज्ञा दूसरे की विशेषता बता रही हो, तो वह कर्मधारय समास का उदाहरण होता है।
Question 5. तत् हि सत्यस्य परमम् निधानम् अस्ति।
Answer: परमनिधानम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'परमनिधानम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सर्वोच्च खजाना'। यह सत्य की महत्ता को बताता है।
Exam Tip: 'परम' जैसे उपसर्ग वाले शब्द अक्सर कर्मधारय समास में आते हैं, क्योंकि वे किसी वस्तु या गुण की सर्वोच्चता या श्रेष्ठता को बताते हैं।
Question 6. सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते।
Answer: सर्वेषु भूतेषु (कर्मधारयः)
In simple words: 'सर्वभूतेषु' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सभी प्राणियों में'। यह सभी जीवों में आत्मा को देखने के विचार को व्यक्त करता है।
Exam Tip: संस्कृत में 'सर्व' शब्द का प्रयोग अक्सर विशेषण के रूप में होता है, जो 'सभी' का अर्थ देता है। ऐसे संयोजन अक्सर कर्मधारय समास बनाते हैं।
Question 7. तत् दुर्गं पथः कवयो वदन्ति।
Answer: दुर्गपथः (कर्मधारयः)
In simple words: 'दुर्गपथः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'कठिन मार्ग' या 'पहुँचने में मुश्किल मार्ग'। कवि ऐसे मार्ग को दुर्गम बताते हैं।
Exam Tip: जब एक शब्द दूसरे की विशेषता बताता है और दोनों के बीच विशेषण-विशेष्य संबंध हो, तो वह कर्मधारय समास होता है। 'दुर्ग' यहाँ 'पथ' की विशेषता बताता है।
Question 8. अरुण एष प्रकाशः पूर्वस्यां भगवतो मरीचिमालिनः।
Answer: मरीचयः एव मालाः यस्य तस्य (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'मरीचिमालिनः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'वह जिसकी माला किरणें हों', यानी सूर्य। यह एक व्यक्ति या वस्तु को उसके गुणों से इंगित करता है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे पद का विशेषण होता है, अर्थात वह अपने घटक पदों के अर्थ से भिन्न किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति को बताता है। अक्सर 'यस्य सः' या 'यस्याः सा' जैसे पद विग्रह में आते हैं।
Question 9. ब्रह्माण्डभाण्डस्य दीपकः सूर्यः वर्तते।
Answer: ब्रह्माण्डम् एव भाण्डम्, तस्य (कर्मधारयः)
In simple words: 'ब्रह्माण्डभाण्डस्य' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'ब्रह्मांड रूपी पात्र'। यह ब्रह्मांड को एक विशाल पात्र के रूप में बताता है।
Exam Tip: जब उपमेय और उपमान में अभेद दिखाया जाए (यानी एक को दूसरे का रूप दिया जाए), तो वह रूपक कर्मधारय समास होता है। 'एव' का प्रयोग विग्रह में इस संबंध को स्पष्ट करता है।
Question 10. सूर्यः एव रोलम्बकदम्बस्य अवलम्बः वर्तते।
Answer: रोलम्बः कदम्बः, तस्य (कर्मधारयः)
In simple words: 'रोलम्बकदम्बस्य' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'भ्रमरों का समूह'। यह एक विशेष प्रकार के समूह को इंगित करता है।
Exam Tip: कर्मधारय समास में, एक शब्द दूसरे की विशेषता बताता है या दोनों के बीच उपमेय-उपमान का संबंध होता है। यहाँ 'रोलम्ब' (भ्रमर) और 'कदम्ब' (समूह) का संयोजन है।
Question 11. सर्वव्यवहारस्य सूत्रधारः अस्ति।
Answer: सर्वः व्यवहारः, तस्य (कर्मधारयः)
In simple words: 'सर्वव्यवहारस्य' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सभी व्यवहारों का'। यह सभी प्रकार के व्यवहारों को संदर्भित करता है।
Exam Tip: 'सर्व' शब्द अक्सर कर्मधारय समास में विशेषण के रूप में आता है, जो 'सभी' या 'समस्त' का अर्थ देता है। विग्रह करते समय 'सर्वः' का प्रयोग होता है।
Question 12. अयम् एव वत्सरं द्वादशसु भागेषु विभनक्ति।
Answer: द्वादशभागेषु (कर्मधारयः)
In simple words: 'द्वादशभागेषु' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'बारह भागों में'। यह साल को बारह हिस्सों में बांटने की क्रिया को बताता है।
Exam Tip: संख्यावाची शब्द जब किसी संज्ञा की विशेषता बताता है, तो वह अक्सर कर्मधारय समास का हिस्सा होता है, खासकर जब वह समूह या संख्या को निर्दिष्ट करता है।
Question 13. अयम् एव षण्णाम् ऋतूणाम् कारणम् अस्ति।
Answer: षड़तूणाम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'षड़तूणाम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'छह ऋतुओं का'। यह छह ऋतुओं के समूह को संदर्भित करता है।
Exam Tip: संख्यावाची विशेषण के साथ संज्ञा का प्रयोग होने पर प्रायः कर्मधारय समास होता है, जहाँ संख्या संज्ञा की विशेषता बताती है। 'षट्' (छह) यहाँ ऋतुओं की संख्या है।
Question 14. एष एव दक्षिणम् अयनम् अङ्गीकरोति।
Answer: दक्षिणायनम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'दक्षिणायनम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'दक्षिण दिशा की ओर गति' या 'दक्षिण की ओर अयन'। यह सूर्य की दक्षिण दिशा में गति को बताता है।
Exam Tip: दिशा सूचक शब्द जब 'अयन' (गति) जैसे शब्दों के साथ जुड़ते हैं और एक विशेष अवधि या घटना को इंगित करते हैं, तो वे कर्मधारय समास बनाते हैं।
Question 15. परमेष्ठिनः परार्द्धसङ्ख्या एनमेव अश्रित्य भवति।
Answer: परार्धा सङ्ख्या (कर्मधारयः)
In simple words: 'परार्द्धसङ्ख्या' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'परार्द्ध की संख्या' या 'बहुत बड़ी संख्या'। यह एक अत्यंत बड़ी संख्या को बताता है।
Exam Tip: जब कोई विशेषण (जैसे 'परार्द्ध' - अत्यंत बड़ा) किसी संख्या (सङ्ख्या) की विशेषता बताता है, तो वह कर्मधारय समास होता है। ऐसे पदों में विशेषण-विशेष्य संबंध प्रमुख होता है।
Question 16. अन्यथा निराधारा पृथिवी कथम् आकाशे तिष्ठेतू
Answer: निराधारपृथिवी (कर्मधारयः)
In simple words: 'निराधारपृथिवी' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'बिना आधार वाली पृथ्वी'। यह पृथ्वी के आधारहीन अस्तित्व को बताता है।
Exam Tip: 'निर्' उपसर्ग (नहीं/रहित) वाले शब्द जब किसी संज्ञा के साथ जुड़कर उसकी विशेषता बताते हैं, तो वे अक्सर कर्मधारय समास बनाते हैं, जैसे 'निराधार' यहाँ 'पृथिवी' की विशेषता बताता है।
Question 17. अतः सुगाङ्गप्रासादस्य उपरि स्थिताः प्रदेशाः संस्क्रियन्ताम्।
Answer: सुगाङ्गः प्रासादः, तस्य (कर्मधारयः), स्थितप्रदेशाः (कर्मधारयः)
In simple words: 'सुगाङ्गप्रासादस्य' (सुंदर गंगा महल का) और 'स्थितप्रदेशाः' (स्थित प्रदेश) दोनों ही कर्मधारय समास हैं। पहला महल की सुंदरता बताता है और दूसरा उसके स्थान को।
Exam Tip: एक ही वाक्य में कई समास पद हो सकते हैं। प्रत्येक पद को अलग-अलग पहचानना और उसके प्रकार को समझना महत्वपूर्ण है। विशेषण-विशेष्य संबंध को हमेशा ध्यान में रखें।
Question 18. किं ब्रूथ? कौमुदी-महोत्सवः प्रतिषिद्धः?
Answer: महान् उत्सवः (कर्मधारयः)
In simple words: 'कौमुदी-महोत्सवः' में 'महान् उत्सवः' कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'बड़ा उत्सव'। यह उत्सव की भव्यता को बताता है।
Exam Tip: महोत्सव जैसे शब्दों में 'महान्' विशेषण छुपा होता है, जो 'उत्सव' की विशेषता बताता है। ऐसे पदों में विशेषण-विशेष्य संबंध को पहचानना आवश्यक है।
Question 19. अयमागतः एव देवः चन्द्रगुप्तः।
Answer: देवचन्द्रगुप्तः (कर्मधारयः)
In simple words: 'देवचन्द्रगुप्तः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'देव के समान चन्द्रगुप्त'। यह पद चन्द्रगुप्त को देवत्व के समान ऊँचा दर्जा देता है।
Exam Tip: जब दो संज्ञाएँ एक साथ आकर एक ही व्यक्ति की विशेषता बताती हैं (एक उपमान और दूसरा उपमेय), तो वह कर्मधारय समास होता है।
Question 20. देव! कः अन्यः जीवितुकामो देवस्य शासनम् अतिवर्तेत?
Answer: जीवितुम् कामयते येन सः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'जीवितुकामो' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'वह जो जीने की इच्छा रखता है'। यह किसी ऐसे व्यक्ति को बताता है जो जीवन से प्रेम करता है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद अपने घटक शब्दों के अर्थ से भिन्न किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताता है। 'कामयते येन सः' जैसे विग्रह अक्सर इस प्रकार के समास को इंगित करते हैं।
Question 21. ततः प्रविशति स्वभवनगतः आसनस्थः चाणक्यः।
Answer: स्वम् भवनम् गतम् येन सः (बहुव्रीहिः), आसने स्थः यः सः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'स्वभवनगतः' और 'आसनस्थः' दोनों ही बहुव्रीहि समास हैं। पहला बताता है 'जो अपने भवन में गया हुआ हो' और दूसरा 'जो आसन पर बैठा हुआ हो', दोनों ही किसी व्यक्ति (चाणक्य) की अवस्था बताते हैं।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में एक से अधिक पद मिलकर किसी तीसरे पद की विशेषता बताते हैं। विग्रह में 'यस्य सः' या 'यः सः' जैसे पद आते हैं, जो किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु को इंगित करते हैं।
Question 22. कथं स्पर्धते मयां सह दुरात्मा राक्षसः?
Answer: दुष्टः आत्मा यस्य सः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'दुरात्मा' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'दुष्ट आत्मा वाला' व्यक्ति। यह उस व्यक्ति (राक्षस) की नीच प्रकृति को बताता है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु के विशेषण के रूप में कार्य करता है। 'दुरात्मा' यहाँ एक ऐसे व्यक्ति को बताता है जिसकी आत्मा दुष्ट है।
Question 23. इतः शिष्यैः आनीतानां दर्भाणाम् स्तूपः।
Answer: शिष्यानीत दर्भाणाम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'शिष्यानीत दर्भाणाम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'शिष्यों द्वारा लाए गए दर्भों का'। यह उन दर्भों की विशेषता बताता है जिन्हें शिष्य लाए थे।
Exam Tip: जब कोई क्रियावाची शब्द (जैसे 'आनीत' - लाया गया) किसी संज्ञा (दर्भ) की विशेषता बताता है, तो यह अक्सर कर्मधारय समास होता है।
Question 24. अत्र जीर्णाः भित्तयः सन्ति।
Answer: जीर्णभित्तयः (कर्मधारयः)
In simple words: 'जीर्णभित्तयः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'पुरानी दीवारें'। यह दीवारों की जर्जर अवस्था को बताता है।
Exam Tip: विशेषण (जीर्ण - पुराना) और विशेष्य (भित्तयः - दीवारें) के मेल से कर्मधारय समास बनता है। यह पद दीवार की स्थिति का वर्णन करता है।
Question 25. अतएव निस्पृहत्यागिभिः एतादृशैः जनैः राजा तृणवद् गण्यते।
Answer: निस्पृहैः त्यागिभिः (कर्मधारयः), एतादृज्जनैः (कर्मधारयः)
In simple words: 'निस्पृहत्यागिभिः' (निस्पृह त्यागी) और 'एतादृज्जनैः' (ऐसे लोग) दोनों ही कर्मधारय समास हैं। ये उन लोगों की विशेषता बताते हैं जो निस्वार्थ भाव से त्याग करते हैं।
Exam Tip: ऐसे पदों में, एक शब्द दूसरे की विशेषता बताता है। 'निस्पृह' 'त्यागी' की और 'एतादृश' 'जन' की विशेषता बताता है, जो कर्मधारय समास का उदाहरण है।
Question 26. आर्य! देवः चन्द्रगुप्तः आर्य शिरसा प्रणम्य विज्ञापयति।
Answer: देवचन्द्रगुप्तः (कर्मधारयः)
In simple words: 'देवचन्द्रगुप्तः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'देव के समान चन्द्रगुप्त'। यह पद चन्द्रगुप्त को एक पूजनीय और उच्च स्थिति में दिखाता है।
Exam Tip: जब दो संज्ञाएँ एक ही व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयोग की जाती हैं और एक दूसरे की विशेषता बताती है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 27. सः सुगाङ्गप्रासाद् अस्ति।
Answer: सुगाङ्गे प्रासादे (कर्मधारयः)
In simple words: 'सुगाङ्गप्रासादे' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सुंदर गंगा महल में'। यह महल की सुंदरता को बताता है।
Exam Tip: 'सु' उपसर्ग अक्सर विशेषण के रूप में आता है, जो किसी वस्तु की श्रेष्ठता या सुंदरता को बताता है। ऐसे संयोजन कर्मधारय समास के उदाहरण होते हैं।
Question 28. अये सिंहासनम् अध्यास्ते वृषलः।
Answer: सिंह इव आसनम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'सिंहासनम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सिंह के समान आसन'। यह राजसिंहासन की भव्यता और शक्ति को बताता है।
Exam Tip: जब उपमेय और उपमान की समानता बताई जाए, तो वह उपमान कर्मधारय समास होता है। यहाँ 'सिंह' उपमान है और 'आसन' उपमेय।
Question 29. किन्तु न कदाचित् आर्यस्य निष्प्रयोजना प्रवृत्तिः।
Answer: निर्गतम् प्रयोजनम् यस्याः सा (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'निष्प्रयोजना' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसका कोई प्रयोजन न हो'। यह किसी ऐसी प्रवृत्ति को बताता है जो उद्देश्यहीन है।
Exam Tip: 'निर्' उपसर्ग के साथ बहुव्रीहि समास अक्सर किसी ऐसी वस्तु या व्यक्ति को बताता है जो किसी गुण या विशेषता से रहित हो।
Question 30. वृषल! किम् अस्थाने महान् प्रजाधनापव्ययः?
Answer: महाप्रजाधनापव्ययः (कर्मधारयः)
In simple words: 'महाप्रजाधनापव्ययः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'प्रजा के धन का बड़ा अपव्यय'। यह प्रजा के धन की बड़ी बर्बादी को बताता है।
Exam Tip: 'महा' उपसर्ग वाले शब्द अक्सर कर्मधारय समास में आते हैं, जहाँ वे किसी चीज़ की अधिकता या विशालता को बताते हैं, जैसे यहाँ 'अपव्यय' की विशालता।
Question 31. आर्येण एव सर्वत्र निरुद्धचेष्टस्य मे बन्धनम् इव राज्यम्।
Answer: निरुद्धा चेष्टा यस्य तस्य (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'निरुद्धचेष्टस्य' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसकी चेष्टाएँ रुक गई हों'। यह किसी ऐसे व्यक्ति को बताता है जिसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा हो।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'निरुद्धचेष्ट' शब्द उस व्यक्ति की स्थिति को बताता है जिसकी चेष्टाएँ रुक गई हैं।
Question 32. दूरदृष्टिः फलप्रदा।
Answer: फलम् प्रददाति या सा (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'फलप्रदा' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जो फल देती है'। यह दूरदृष्टि की विशेषता बताता है कि वह लाभकारी होती है।
Exam Tip: जब समस्त पद किसी स्त्री-लिंग संज्ञा का विशेषण हो और वह किसी क्रिया के फल को देने वाली हो, तो वह बहुव्रीहि समास होता है। विग्रह में 'या सा' का प्रयोग होता है।
Question 33. प्रत्युत्पन्नमतिः शीघ्रमेव निर्णयं कृत्वा आत्मरक्षां करोति।
Answer: प्रत्युत्पन्ना मतिः यस्मिन् सः (बहुव्रीहिः),
In simple words: 'प्रत्युत्पन्नमतिः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसकी बुद्धि तुरंत उत्पन्न होती है'। यह एक ऐसे व्यक्ति को बताता है जो तुरंत सोचने और निर्णय लेने में सक्षम है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'प्रत्युत्पन्नमति' उस व्यक्ति की विशेषता बताता है जिसकी बुद्धि तुरंत काम करती है।
Question 34. येषाम् अन्यत्र अपि विद्यमाना सुखावहा गतिः भवति।
Answer: सुखम् आवहति या सा (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'सुखावहा' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जो सुख लाती है'। यह किसी ऐसी गति या स्थिति को बताता है जो आनंददायक होती है।
Exam Tip: जब समस्त पद किसी स्त्री-लिंग संज्ञा का विशेषण हो और वह किसी विशेष परिणाम (सुख) को लाने वाली हो, तो वह बहुव्रीहि समास होता है। विग्रह में 'या सा' का प्रयोग होता है।
Question 35. कृतप्रयत्नः गृहे अपि न जीवति।
Answer: कृतम् प्रयत्नम् येन सः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'कृतप्रयत्नः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसने प्रयास किया हो'। यह एक ऐसे व्यक्ति को बताता है जिसने कोई कार्य करने का प्रयास किया हो।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'कृतप्रयत्न' उस व्यक्ति की विशेषता बताता है जिसने प्रयास किया है।
Question 36. अहो! विपुला हिमराशिना धवलाः एते लद्दाखप्रदेशीया गिरयः अतीव शोभन्ते।
Answer: लद्दाखप्रदेशीयगिरयः (कर्मधारयः)
In simple words: 'लद्दाखप्रदेशीयगिरयः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'लद्दाख प्रदेश के पर्वत'। यह पहाड़ों की भौगोलिक स्थिति को बताता है।
Exam Tip: जब एक शब्द दूसरे की विशेषता बताता है (जैसे 'लद्दाखप्रदेशीय' 'गिरयः' की), तो वह कर्मधारय समास होता है। यह स्थान और वस्तु के संबंध को बताता है।
Question 37. शृणुत, उत्तुङ्गपर्वतानाम् उपत्यकाभूमिम् लद्दाख इति वदन्ति।
Answer: उत्तुङ्गानाम् पर्वतानाम् (कर्मधारयः),
In simple words: 'उत्तुङ्गपर्वतानाम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'ऊँचे पर्वतों का'। यह पर्वतों की ऊँचाई की विशेषता बताता है।
Exam Tip: विशेषण (उत्तुङ्ग - ऊँचा) और विशेष्य (पर्वत) का संयोजन कर्मधारय समास बनाता है, जो पर्वतों की प्रकृति का वर्णन करता है।
Question 38. पश्यन्तु, कथं लद्दाखे आस्तृतः नीलाकाशः छत्रवत् प्रतीयते।
Answer: नीलः आकाशः (कर्मधारयः)
In simple words: 'नीलाकाशः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'नीला आकाश'। यह आकाश के रंग की विशेषता बताता है।
Exam Tip: रंग-सूचक विशेषण जब किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं, तो वे अक्सर कर्मधारय समास का उदाहरण होते हैं। 'नील' यहाँ 'आकाश' की विशेषता है।
Question 39. ग्रीष्मे नीलवर्णा भूमिः धूसरवर्णा जायते।
Answer: नीलः वर्णः यस्यः सा (बहुव्रीहिः), धूसरः वर्णः यस्याः सा (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'नीलवर्णा' (नीले रंग वाली) और 'धूसरवर्णा' (धूसर रंग वाली) दोनों ही बहुव्रीहि समास हैं। ये दोनों पद पृथ्वी के रंग की विशेषता बताते हैं।
Exam Tip: जब समस्त पद किसी तीसरे पद का विशेषण हो और वह किसी रंग या विशेषता को बताता हो, तो वह बहुव्रीहि समास होता है। विग्रह में 'यस्य सः' या 'यस्याः सा' का प्रयोग होता है।
Question 40. एषः बौद्धधर्मस्य प्रसिद्धः प्राचीनश्च श्वेतस्तूपः।
Answer: श्वेतः स्तूपः (कर्मधारयः)
In simple words: 'श्वेतस्तूपः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सफेद स्तूप'। यह स्तूप के रंग की विशेषता बताता है।
Exam Tip: रंग-सूचक विशेषण जब किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं, तो वे अक्सर कर्मधारय समास का उदाहरण होते हैं, जैसे 'श्वेत' यहाँ 'स्तूप' की विशेषता है।
Question 41. रात्रौ अयं दीपेषु प्रज्वलितेषु भव्यम् आलोकं वितरति।
Answer: भव्यालोकम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'भव्यालोकम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'भव्य प्रकाश'। यह प्रकाश की विशालता और सुंदरता को बताता है।
Exam Tip: विशेषण (भव्य) और विशेष्य (आलोक - प्रकाश) का संयोजन कर्मधारय समास बनाता है, जो प्रकाश की प्रकृति का वर्णन करता है।
Question 42. भगवतो बुद्धस्य विशालकाया मूर्तिः पर्यटकानाम् आकर्षणकेन्द्रम्।
Answer: विशालकाय मूर्तिः (कर्मधारयः)
In simple words: 'विशालकाया मूर्तिः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'विशाल शरीर वाली मूर्ति'। यह मूर्ति के आकार की विशेषता बताता है।
Exam Tip: जब विशेषण (विशालकाय - विशाल शरीर वाला) किसी संज्ञा (मूर्ति) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 43. बौद्धानां सामाजिक जीवनं कीदृशम् वर्तते?
Answer: सामाजिक जीवनम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'सामाजिक जीवनम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सामाजिक जीवन'। यह जीवन के सामाजिक पहलू को बताता है।
Exam Tip: 'सामाजिक' विशेषण जब 'जीवन' संज्ञा के साथ जुड़कर उसकी विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 44. बौद्धानां 'गम्पा' नाम वार्षिकोत्सवः शीते आयाति।
Answer: वार्षिकः उत्सवः (कर्मधारयः)
In simple words: 'वार्षिकोत्सवः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'वार्षिक उत्सव'। यह उत्सव की आवृत्ति को बताता है कि यह हर साल होता है।
Exam Tip: जब कोई विशेषण (वार्षिक) किसी संज्ञा (उत्सव) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है, जैसे यहाँ उत्सव की आवृत्ति।
Question 45. 'ताहथोकदीनि ग्रीष्मपर्वाणि' भगवन्तं बुद्ध प्रति भक्तिभावं दर्शयन्ति।
Answer: भगवबुद्धं (कर्मधारयः)
In simple words: 'भगवबुद्धं' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'भगवान बुद्ध को'। यह पद भगवान बुद्ध को सम्मानपूर्वक संदर्भित करता है।
Exam Tip: जब दो संज्ञाएँ मिलकर एक ही व्यक्ति को संदर्भित करती हैं और एक दूसरे की विशेषता बताती है, तो यह कर्मधारय समास हो सकता है।
Question 46. मठेषु उत्कीर्णाः लेखाः भित्तिलेखाः च तिब्बतशैल्याः परिचायकाः।
Answer: उत्कीर्णलेखाः (कर्मधारयः),
In simple words: 'उत्कीर्णलेखाः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'उत्कीर्ण लेख' या 'खुदे हुए लेख'। यह लेखों की प्रकृति को बताता है कि वे तराशे गए हैं।
Exam Tip: जब विशेषण (उत्कीर्ण - खुदा हुआ) किसी संज्ञा (लेख) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 47. लद्दाखस्य प्राकृतिक स्थलानां विषये किमपि भवती ब्रवीतु।
Answer: प्राकृतिकानाम् स्थलानाम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'प्राकृतिक स्थलानाम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'प्राकृतिक स्थानों का'। यह स्थानों की प्राकृतिक विशेषता को बताता है।
Exam Tip: विशेषण (प्राकृतिक) और विशेष्य (स्थान) के संयोजन से कर्मधारय समास बनता है, जो स्थानों की प्रकृति का वर्णन करता है।
Question 48. कारगिले आक्रमण कारिणाम् अपसारणाय भारतीयैः वीरैः यत् शौर्यं प्रदर्शितम्।
Answer: भारतीयवीरैः (कर्मधारयः)
In simple words: 'भारतीयवीरैः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'भारतीय वीरों द्वारा'। यह उन वीरों की राष्ट्रीयता को बताता है।
Exam Tip: जब कोई विशेषण (भारतीय) किसी संज्ञा (वीर) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 49. उपत्यकाभूमिषु शीते ऋतौ महान् हिमराशिः निपतति।
Answer: शीतों (कर्मधारयः), महाहिमराशिः (कर्मधारयः)
In simple words: 'शीतों' (ठंड) और 'महाहिमराशिः' (बड़ी बर्फ की राशि) दोनों ही कर्मधारय समास हैं। पहला ठंड को और दूसरा बर्फ की विशाल मात्रा को बताता है।
Exam Tip: जब विशेषण (शीत, महा) किसी संज्ञा (ऋतु, हिमराशि) की विशेषता बताते हैं, तो वे कर्मधारय समास होते हैं।
Question 50. घनीभूतं हिमं गिरिराजस्य शोभां सततं प्रवर्धयति।
Answer: घनीभूतहिमं (कर्मधारयः)
In simple words: 'घनीभूतहिमं' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'घनीभूत बर्फ'। यह बर्फ की घनी अवस्था को बताता है।
Exam Tip: जब कोई विशेषण (घनीभूत - जमा हुआ) किसी संज्ञा (हिम - बर्फ) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 51. महाकवेः कालिदासस्य पद्यम् अस्य सौन्दर्यं सततं वर्णयति।
Answer: महतः कवे:/महान् कविः, तस्य (कर्मधारयः)
In simple words: 'महाकवेः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'महान कवि का'। यह कवि की महानता को बताता है।
Exam Tip: 'महा' उपसर्ग वाले शब्द अक्सर कर्मधारय समास में आते हैं, जहाँ वे किसी व्यक्ति या वस्तु की श्रेष्ठता को बताते हैं।
Question 52. अनन्तरत्नप्रभवस्य यस्य।
Answer: अनन्तानि रत्नानि प्रभवन्ति यस्मात् सः, तस्य (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'अनन्तरत्नप्रभवस्य' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिससे अनंत रत्न उत्पन्न होते हैं', यानी समुद्र या रत्नों का स्रोत। यह किसी ऐसी वस्तु को बताता है जो रत्नों का अक्षय भंडार है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'अनन्तरत्नप्रभव' उस स्रोत की विशेषता बताता है जिससे अनंत रत्न निकलते हैं।
Question 53. सुधामुचः वाचः।
Answer: सुधाम् मुञ्चन्ति याः ताः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'सुधामुचः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'अमृत बरसाने वाली'। यह वाणी की विशेषता बताता है कि वह मधुर और हितकारी है।
Exam Tip: जब समस्त पद किसी स्त्री-लिंग संज्ञा का विशेषण हो और वह किसी विशेष कार्य (अमृत बरसाने) को करने वाली हो, तो वह बहुव्रीहि समास होता है। विग्रह में 'याः ताः' का प्रयोग होता है।
Question 54. सन्मार्ग च सूक्तयः सुभाषितानि का प्रदर्शयन्ति।
Answer: सत् च तत् मार्गम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'सन्मार्ग' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'अच्छा मार्ग' या 'सत्य मार्ग'। यह मार्ग की श्रेष्ठता को बताता है।
Exam Tip: 'सत्' उपसर्ग (अच्छा/सत्य) वाले शब्द जब किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं, तो वे अक्सर कर्मधारय समास का उदाहरण होते हैं।
Question 55. संस्कृतवाङ्गयं सहस्रशः सुमधुरवचनैः अलङ्कृतम् वर्तते।
Answer: सुमधुरैः वचनैः (कर्मधारयः)
In simple words: 'सुमधुरवचनैः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'बहुत मधुर वचनों से'। यह वचनों की मधुरता की विशेषता बताता है।
Exam Tip: जब विशेषण (सुमधुर - बहुत मधुर) किसी संज्ञा (वचन) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 56. ते मूढधियः पराभवं व्रजन्ति।
Answer: मूढाः धियः येषां ते (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'मूढधियः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'वे जिनकी बुद्धि मूर्ख है'। यह ऐसे व्यक्तियों को बताता है जिनकी समझदारी कम होती है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'मूढधियः' उन व्यक्तियों की विशेषता बताता है जिनकी बुद्धि मूढ़ है।
Question 57. इषवः तथाविधान् असंवृत्ताङ्गान् प्रविश्य तं नन्ति।
Answer: असंवृत्तानि अङ्गानि येषां तान् (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'असंवृत्ताङ्गान्' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिनके अंग ढके हुए नहीं हैं'। यह ऐसे लोगों को बताता है जिनके शरीर के अंग खुले हुए हों।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'असंवृत्ताङ्ग' उन लोगों की विशेषता बताता है जिनके अंग ढके हुए नहीं हैं।
Question 58. यः अधिपं साधु न शास्ति स किंसखा।
Answer: किम् च सः सखा (कर्मधारयः)
In simple words: 'किंसखा' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'कैसा मित्र' या 'कौन सा मित्र'। यह मित्र की गुणवत्ता पर प्रश्न करता है।
Exam Tip: 'किम्' (क्या/कैसा) उपसर्ग जब किसी संज्ञा के साथ जुड़कर उसकी विशेषता पर प्रश्न करता है, तो वह कर्मधारय समास हो सकता है।
Question 59. यः हितान् न संशृणुते स किंप्रभुः।
Answer: किम् च सः प्रभुः (कर्मधारयः)
In simple words: 'किंप्रभुः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'कैसा स्वामी' या 'कौन सा स्वामी'। यह स्वामी की योग्यता पर प्रश्न करता है।
Exam Tip: 'किम्' (क्या/कैसा) उपसर्ग जब किसी संज्ञा के साथ जुड़कर उसकी विशेषता पर प्रश्न करता है, तो वह कर्मधारय समास हो सकता है।
Question 60. नृपेषु अमात्येषु च अनुकूलेषु हि सर्वसम्पदः सदा रतिं कुर्वते।
Answer: सर्वाः सम्पदः (कर्मधारयः)
In simple words: 'सर्वसम्पदः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सभी प्रकार की संपत्तियाँ'। यह सभी प्रकार की धन-संपदा को बताता है।
Exam Tip: 'सर्व' उपसर्ग वाले शब्द अक्सर कर्मधारय समास में आते हैं, जहाँ वे किसी चीज़ की समग्रता को बताते हैं।
Question 62. यदि सदविद्या तदा धनैः किम्?
Answer: सत् च सा विद्या (कर्मधारयः)
In simple words: 'सदविद्या' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सच्ची विद्या' या 'अच्छी विद्या'। यह विद्या की गुणवत्ता को बताता है।
Exam Tip: 'सत्' उपसर्ग जब किसी संज्ञा के साथ जुड़कर उसकी श्रेष्ठता या सच्चाई को बताता है, तो वह कर्मधारय समास का उदाहरण होता है।
Question 63. अयं पाठः 'चारुदत्तं' नाटकस्य प्रथमाङ्कात् सङ्कलितः।
Answer: प्रथमः अङ्कः, तस्मात् (कर्मधारयः)
In simple words: 'प्रथमाङ्कात्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'पहले अंक से'। यह नाटक के विशेष भाग को संदर्भित करता है।
Exam Tip: संख्यावाची विशेषण (प्रथम) जब किसी संज्ञा (अंक) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 64. मैत्रेयः विनोदप्रियः विपत्तौ अपि चारुदत्तस्य विश्वासपात्रम् अस्ति।
Answer: विनोदम् प्रियम् यस्मै सः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'विनोदप्रियः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसे विनोद प्रिय हो'। यह मैत्रेय की विशेषता बताता है कि उसे हँसी-मजाक पसंद है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'विनोदप्रिय' उस व्यक्ति की विशेषता बताता है जिसे विनोद प्रिय है।
Question 65. एवं शोभनानां भोजनानाम् दात्री भव।
Answer: सुभोजनानाम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'सुभोजनानाम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'अच्छे भोजनों का'। यह भोजन की गुणवत्ता को बताता है।
Exam Tip: 'सु' उपसर्ग (अच्छा) जब किसी संज्ञा (भोजन) की विशेषता बताता है, तो वह कर्मधारय समास का उदाहरण होता है।
Question 66. ततः प्रविशति चारुदत्तो, विदूषकः चङ्गेरिकाहस्ता चेटी च।
Answer: चङ्गेरिका हस्ते यस्याः सा (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'चङ्गेरिकाहस्ता' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसके हाथ में चङ्गेरिका (टोकरी) हो', यानी चेटी। यह चेटी की विशेषता बताता है कि वह टोकरी लिए हुए है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'चङ्गेरिकाहस्ता' उस स्त्री की विशेषता बताता है जिसके हाथ में टोकरी है।
Question 67. भोः दारिद्यं खलु नाम मनस्विनः पुरुषस्य सोच्छ्वासं मरणम्।
Answer: मनस्वीपुरुषस्य (कर्मधारयः)।
In simple words: 'मनस्वीपुरुषस्य' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'मनस्वी पुरुष का'। यह पुरुष की मनस्वी प्रकृति को बताता है।
Exam Tip: विशेषण (मनस्वी) जब किसी संज्ञा (पुरुष) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 68. दानेन विपन्नविभवस्य, बहुलपक्षचन्द्रस्य ज्योत्स्ना परिक्षय इव।
Answer: विपन्न विभवः यस्य तस्य (बहुव्रीहिः), बहुलपक्षस्य चन्द्रस्य (कर्मधारयः)
In simple words: 'विपन्नविभवस्य' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसकी संपत्ति नष्ट हो गई हो'। 'बहुलपक्षचन्द्रस्य' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'शुक्ल पक्ष के चंद्रमा का'।
Exam Tip: ऐसे वाक्यों में, समास वाले पद को पहचानें और फिर उसके प्रकार को इंगित करें। बहुव्रीहि समास में समस्त पद किसी तीसरे पद का विशेषण होता है, जबकि कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य संबंध होता है।
Question 69. भवतः रमणीयोऽयं दरिद्रभावः।
Answer: दरिद्रः भावः (कर्मधारयः)
In simple words: 'दरिद्रभावः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'दरिद्रता का भाव'। यह भाव की स्थिति को बताता है कि वह दरिद्र है।
Exam Tip: विशेषण (दरिद्र) और विशेष्य (भाव) के संयोजन से कर्मधारय समास बनता है, जो किसी स्थिति या भाव का वर्णन करता है।
Question 70. न खलु अहम् नष्टां श्रियम् अनुशोचामि।
Answer: नष्टश्रियम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'नष्टश्रियम्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'नष्ट हुई शोभा' या 'नष्ट हुई संपत्ति'। यह उस शोभा या संपत्ति की स्थिति को बताता है जो अब नहीं रही।
Exam Tip: जब कोई विशेषण (नष्ट) किसी संज्ञा (श्री) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 71. एतत्तु मेनष्टधनश्रियः मां दहति।
Answer: नष्टे धनम् च श्री: च यस्य सः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'नष्टधनश्रियः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जिसका धन और शोभा नष्ट हो गई हो'। यह उस व्यक्ति को बताता है जिसने अपनी संपत्ति और मान-सम्मान खो दिया है।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'नष्टधनश्रियः' उस व्यक्ति की विशेषता बताता है जिसका धन और शोभा नष्ट हो गई है।
Question 72. अस्माकं छात्रैः यद् विशिष्टाध्ययनं कृतं तस्य परिचयः अस्मभ्यम् लाभप्रदः भविष्यति।
Answer: विशिष्टम् अध्ययनम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'विशिष्टाध्ययनं' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'विशेष अध्ययन'। यह अध्ययन की विशेषता को बताता है कि वह साधारण नहीं बल्कि विशिष्ट है।
Exam Tip: जब विशेषण (विशिष्ट) किसी संज्ञा (अध्ययन) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 73. अस्माकं मध्ये ग्रीष्मावकाशपरियोजनाकार्ये सर्वोत्तमान् अङ्कान् लब्धवन्तः छात्राः सन्ति।
Answer: सर्वोत्तमाङ्कान् (कर्मधारयः)
In simple words: 'सर्वोत्तमाङ्कान्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सर्वोत्तम अंक'। यह प्राप्त अंकों की श्रेष्ठता को बताता है।
Exam Tip: 'सर्वोत्तम' (सबसे अच्छा) विशेषण जब किसी संज्ञा (अंक) की विशेषता बताता है, तो वह कर्मधारय समास होता है।
Question 74. एते स्वाध्ययनस्य विशिष्टांशान् अत्र प्रस्तोष्यन्ति।
Answer: विशिष्टः अंशः, तान् (कर्मधारयः)
In simple words: 'विशिष्टांशान्' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'विशेष अंशों को'। यह अध्ययन के विशिष्ट भागों को संदर्भित करता है।
Exam Tip: विशेषण (विशिष्ट) और विशेष्य (अंश) के मेल से कर्मधारय समास बनता है, जो किसी भाग की विशिष्टता बताता है।
Question 75. त्रिपुरविमानस्य प्रथमः भागः, पृथिव्याः तले सञ्चरति।
Answer: प्रथमभागः (कर्मधारयः)
In simple words: 'प्रथमभागः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'पहला भाग'। यह विमान के पहले हिस्से को संदर्भित करता है।
Exam Tip: संख्यावाची विशेषण (प्रथम) जब किसी संज्ञा (भाग) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 76. द्वितीयभागः जलस्य अन्तः बहिः च विहरति ।
Answer: द्वितीयः भागः (कर्मधारयः)
In simple words: 'द्वितीयभागः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'दूसरा भाग'। यह विमान के दूसरे हिस्से को संदर्भित करता है।
Exam Tip: संख्यावाची विशेषण (द्वितीय) जब किसी संज्ञा (भाग) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 77. सुश्रुतः प्रथमः त्वक्प्रत्यारोपकः आसीत्।
Answer: त्वचः प्रत्यारोपणं करोति यः सः (बहुव्रीहिः)
In simple words: 'त्वक्प्रत्यारोपकः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जो त्वचा का प्रत्यारोपण करता है'। यह सुश्रुत की विशेषता बताता है कि वे त्वचा प्रत्यारोपण करने वाले पहले चिकित्सक थे।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'त्वक्प्रत्यारोपक' उस व्यक्ति की विशेषता बताता है जो त्वचा प्रत्यारोपण करता है।
Question 78. तस्माद् दक्षिणपार्श्वे सलिलं पुरुषद्वये स्वादु।
Answer: दक्षिणे पार्वे (कर्मधारयः)
In simple words: 'दक्षिणपार्श्वे' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'दक्षिण भाग में'। यह स्थान की दिशा को बताता है।
Exam Tip: दिशा सूचक शब्द (दक्षिण) जब किसी संज्ञा (पार्श्व - भाग) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 79. मिहिरेण बहुमूल्या सामग्री सङ्कलिता।
Answer: बहुमूल्यसामग्री (कर्मधारयः)
In simple words: 'बहुमूल्यसामग्री' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'बहुमूल्य सामग्री'। यह सामग्री के मूल्य की विशेषता बताता है।
Exam Tip: जब विशेषण (बहुमूल्य) किसी संज्ञा (सामग्री) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 80. वयं वर्तमानकाले सङ्गणकस्य प्रयोगं कुर्मः।
Answer: वर्तमाने काले (कर्मधारयः),
In simple words: 'वर्तमानकाले' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'वर्तमान समय में'। यह समय की अवधि को बताता है।
Exam Tip: जब विशेषण (वर्तमान) किसी संज्ञा (काल - समय) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 81. सूर्य प्रति पूर्वाभिमुखा पृथिवी 365.25 वारं प्रतिवर्ष भ्रमति।
Answer: पूर्वाभिमुख पृथिवी (कर्मधारयः)
In simple words: 'पूर्वाभिमुख पृथिवी' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'पूर्व दिशा की ओर मुख वाली पृथ्वी'। यह पृथ्वी की स्थिति को बताता है।
Exam Tip: जब कोई विशेषण (पूर्वाभिमुख - पूर्व की ओर मुख वाला) किसी संज्ञा (पृथिवी - पृथ्वी) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 82. कौटिल्यस्य अर्थशास्त्रं तु अद्भुतः ग्रन्थः यत्र बहवः विषयाः वर्णिताः।
Answer: अद्भुतग्रन्थः (कर्मधारयः), बहुविषयाः (कर्मधारयः)
In simple words: 'अद्भुतग्रन्थः' (अद्भुत ग्रंथ) और 'बहुविषयाः' (कई विषय) दोनों ही कर्मधारय समास हैं। पहला ग्रंथ की अद्भुतता और दूसरा उसमें वर्णित विषयों की संख्या को बताता है।
Exam Tip: जब विशेषण (अद्भुत, बहु) किसी संज्ञा (ग्रंथ, विषय) की विशेषता बताता है, तो वह कर्मधारय समास होता है।
Question 83. धन्यवादः। प्रियबान्धवाः।
Answer: प्रियाः बान्धवाः (कर्मधारयः)
In simple words: 'प्रियबान्धवाः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'प्रिय बंधुगण'। यह बंधुओं की प्रियता को बताता है।
Exam Tip: विशेषण (प्रिय) और विशेष्य (बांधव - बंधु) के मेल से कर्मधारय समास बनता है, जो संबंध की प्रकृति का वर्णन करता है।
Question 84. इयं सर्वे दिल्लीस्थ-लौहस्तम्भेन परिचिताः एव।
Answer: दिल्लीस्थेन लौहस्तम्भेन (कर्मधारयः)
In simple words: 'दिल्लीस्थ-लौहस्तम्भेन' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'दिल्ली में स्थित लोहे के स्तंभ द्वारा'। यह स्तंभ के स्थान और उसकी धातु को बताता है।
Exam Tip: जब एक शब्द (दिल्लीस्थ - दिल्ली में स्थित) दूसरे शब्द (लौहस्तंभ - लोहे का स्तंभ) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 85. अन्ये विस्मयकराः स्तम्भाः सन्ति।
Answer: विस्मयम् कुर्वन्ति ये ते (बहुव्रीहिः)।
In simple words: 'विस्मयकराः' एक बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'जो विस्मय उत्पन्न करते हैं'। यह उन स्तंभों की विशेषता बताता है जो आश्चर्यजनक हैं।
Exam Tip: बहुव्रीहि समास में, समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का विशेषण होता है। यहाँ 'विस्मयकर' उन स्तंभों की विशेषता बताता है जो विस्मय उत्पन्न करते हैं।
Question 86. सुचिन्दरं देवालये स्थिताः सङ्गीतमयाः स्तम्भाः।
Answer: सङ्गीतमयस्तम्भाः (कर्मधारयः)
In simple words: 'सङ्गीतमयस्तम्भाः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'संगीत से भरे स्तंभ'। यह स्तंभों की विशेषता बताता है कि वे संगीतमय हैं।
Exam Tip: जब विशेषण (संगीतमय - संगीत से भरा) किसी संज्ञा (स्तंभ) की विशेषता बताता है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 88. ये छात्राः भारतीयविज्ञानक्षेत्रे विशिष्टाः उपलब्धीः आधृत्य अध्ययनं करिष्यन्ति।
Answer: विशिष्टोपलब्धीः (कर्मधारयः)
In simple words: 'विशिष्टोपलब्धीः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'विशेष उपलब्धियाँ'। यह उपलब्धियों की विशिष्टता को बताता है।
Exam Tip: विशेषण (विशिष्ट) और विशेष्य (उपलब्धि) के मेल से कर्मधारय समास बनता है, जो किसी उपलब्धि की विशिष्टता बताता है।
Question 89. अस्माकं प्राचार्यमहोदयः सम्मानपत्राणि प्रदास्यन्ति।
Answer: प्राचार्यः महोदयः (कर्मधारयः)
In simple words: 'प्राचार्यमहोदयः' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'आदरणीय प्राचार्य'। यह प्राचार्य को सम्मानपूर्वक संदर्भित करता है।
Exam Tip: जब 'महोदय' जैसे सम्मानसूचक शब्द किसी पद के साथ जुड़ते हैं, तो वे अक्सर कर्मधारय समास बनाते हैं।
Question 90. सः सम्राटः चन्द्रगुप्तस्य आदेशस्य उल्लङ्घनम् अपि कर्तुम् उत्सहते स्म।
Answer: सम्राट्चन्द्रगुप्तस्य (कर्मधारयः)
In simple words: 'सम्राट्चन्द्रगुप्तस्य' एक कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'सम्राट चन्द्रगुप्त का'। यह चन्द्रगुप्त की उपाधि को बताता है।
Exam Tip: जब एक उपाधि या पदवी (सम्राट) किसी व्यक्ति के नाम (चन्द्रगुप्त) के साथ जुड़कर उसे विशेष बनाती है, तो यह कर्मधारय समास होता है।
Question 91. राज्यं हि नाम धर्मवृत्तिपरकस्य नृपस्य कृते महत् कष्टदायकम्।
Answer: धर्मवृत्तिपरकनृपस्य (कर्मधारयः), महाकष्टदायकम् (कर्मधारयः)
In simple words: 'धर्मवृत्तिपरकनृपस्य' (धर्मनिष्ठ राजा का) और 'महाकष्टदायकम्' (बहुत कष्टदायक) दोनों ही कर्मधारय समास हैं। पहला राजा की धर्मपरायणता और दूसरा किसी कार्य की अत्यधिक कठिनाई बताता है।
Exam Tip: जब विशेषण (धर्मवृत्तिपरक, महाकष्टदायक) किसी संज्ञा (नृप, कार्य) की विशेषता बताता है, तो वह कर्मधारय समास होता है।
समास-परिचयः
Mainly there are four kinds of compounds (समास) in Sanskrit: 1. अव्ययभाव, 2. तथूपुरुषु, 3. बहुव्रीहि Egile, 4. द्न्द Out of these you have already studied in standard IX two kinds of compounds, namely तत्पुरुष and द्वन्द्व. Here you have to study कर्मधारय considered to be a kind of तत्पुरुष compound and बहुव्रीहि compounds. It is necessary to have some revision of some matters you have studied last year regarding compound before we start the study of कर्मधारय and बहुव्रीहि. Read the following sentences carefully.
1. सेवितव्यः महान् वृक्षः।
2. सेवितव्यः महावृक्षः।
After reading these couple of sentences, it is understood that the two underlined words which are used in the first sentence are also used in the second sentence with the use of the compound (i.e. becoming one word, becoming short). Here it can be seen that two noun words महान् and वृक्ष: are there in the first sentence and they have been used is different words and with them are added different suffix of case. After that seeing in another sentence, these two noun words have been used as one like महावृक्षः। I with the use of the compound. At the end of two nouns in that sentence, only one suffix of case has been added. You have learned that the reason for this is compound. Now, let us go for further study of the compound.
कर्मधारय समास
कर्मधारय समास is a sub-kind (sub-division) of तत्पुरुष समास and so it is also recognized as कर्मधारय तथूपुरुषु This compound has two words of adjective and one/another noun (qualifier and qualified). (See अभ्यास 2 for understanding adjective and substantive.) For example, read the following two sentences:
1. सरोवरे नीलं कमलं वर्तते।
2. सरोवरे नीलकमलं वर्तते।
Here in the first sentence, two words like नीलम् and कमलंम् are there and both are in first case. These two words of first sentence are in the first case but by making them compound both have been used as one in the second sentence.
You Have To Remember That -
1. Here ich is an adjective word नीलम् and कमलंम् is a noun word.
2. When a compound is made of adjectives and nouns then in the earlier word and in the latter word similar case is used. Here both the words are in the first case.
3. Such adjective and noun words of तत्पुरुष compound are known as कर्मधारय compound. While making dissolution of such type of adjective and noun words (if both the words are masculine) in between both the words च असौ (चासौ) (If feminine) च असौ (चासौ) and (if neuter) words are placed. For example:
1. वामः च असौ बाहुः - वामबाहुः।
2. मुक्ता च असौ (चासौ) मणिः - मुक्तामणिः।
3. विक्रान्तं च तत् कार्यम् - विक्रान्तकार्यम्।
In the above sentences, the compound has been made with the masculine adjective, masculine noun: with a feminine adjective feminine noun and with a neuter adjective neuter noun.
Now, Read The Following One Sentence:
1. पाणिनेः कृतिः। अष्टाध्यायी वर्तते।
2. पाणिने कृति अष्टानाम् अध्यायानां समाहारः वर्तते।
In the first sentence, there is a compound in the word अष्टाध्यायी. In the second sentence its विग्रह वाक्य. अष्टानाम् अध्यायानां समाहारः has been used. Remember that in this विग्रह वाक्य, the word अष्टानाम् is an adjective and the word अष्टानाम् is a noun. There is a sixth case, i.e., similar cases in both these adjectives and noun words. Thus, here as the compound has been made of adjective and noun of a similar case, this is कर्मधारय तत्पुरुष compound. But there is also another specialty, and it is that this compound of adjective and noun is in the sense of assemblage (i.e., a group of something).
If a numerical word is there as the first word in this type of तत्पुरुष compound with the sense of assemblage, then it is called द्विगु compound. If the द्विगु compound is ending with आ (आकरत्न) then it is used permanently in the feminine gender (and because of this suffix of feminine expression - is added). As assemblage sense is attached with this compound, for showing this at the time of giving विग्रहवाक्य of the compound sentence, समाहार: the word is also placed at the end of both the words. As - अष्टानाम्: अध्यायानां समाहारः - अष्टाध्यायी This is the example of द्विगु (कर्मधारय) तत्पुरुष Being a kind of you compound, only in a Here the later word is given prime importance.
समास-परिचयः 2. बहुव्रीहि समास
Now Read The Following Sentences:
1. तीक्ष्णबद्धिः जनः सर्वान् अर्थान् धिया पश्यति।
2. बहुमत्स्य अयं हृदः।
3. अर्जुनः अपि जातहर्षः तैः सह संलग्नः अभवत्।
In all these above sentences the underlined words are compound words and here it is बहुव्रीहि compound. Whitle parting these compound words, i.e., making dissolution (विग्रह) (तीक्ष्णबुद्धिः) तीक्ष्णा बुद्धिः, सस्य सः, (बहुमत्स्यः) बहवः मत्स्याः यस्मिनृ सः, (जातहर्षः) जातः हर्षः यस्य सः these four words are used in each of the cases. See carefully all these words used in the dissolution (विग्रह) of बहुव्रीहि compound and you will understand that –
1. Out of these parted four words the compound has been made of only two words.
2. In the used two words of which compound has been made the first case has been used similarly.
3. Another two words which are seen in विग्रह वाक्य of बहुव्रीहि compound only, except that they are not seen in the विग्रह वाक्य of another compound. (Therefore, this has to be considered why these words are used only in बहुव्रीहि compound and not in any other compound.)
Now, noting three matter we have to learn the process of बहुव्रीहि compound. Remember.
1. बहुव्रीहि compound can be made of the words with multiple cases at one time together.
2. As many cases of words are to be added in the compound, all of them will be in first case.
3. All the words assumed to be in the compound give up their own meaning and tell the meaning of another word. (For showing only such meaning of another word addition of words like यस्य सः is used in the विग्रहवाक्य.
See Some Uses:
1. स्नेहपूर्णदृष्टि (कुमारः)। The विग्रहवाक्य of this is - स्नेहपूर्ण दृष्टिः यस्य सः।
2. लब्धपदः (नीचः)। The विग्रहवाक्य of this is - लब्धं पदं येन सः।
3. गतरोगः (नरः)। The विग्रहवाक्य of this is - गतः रोगः यस्य सः।
4. कृतबुद्धिः (ऋषिः)। The विग्रहवाक्य of this is - कृता बुद्धिः येन सः।
Here in the first use the compound has been made of two words like स्नेहपूर्ण and दृष्टि: in the sentence. These two words are in first case. These two words, after giving up their own meanings (which are स्नेहपूर्ण means full of affection and दृष्टि: means look) take the meaning of another word like कुमारः For showing the meaning of this another word (the proper form of pronoun here), the word यस्य has been used in the विग्रहवाक्य. in the same way in the use like लब्धपदः (नीचः) the compound has been made of two words लब्धम् and पदम्. These two words are in the first case and have taken the meaning of another word like नीचः Thus, its विग्रहवाक्य is लब्धं पदं योन सः In this way, बहुव्रीहि compound becomes an adjective, e.g., पीतमभारः विषुनुः।
In this way in all the uses of बहुव्रीहि the arrangement of the compound has to be considered. As we have seen above both the words, used in बहुव्रीहि compound give the meaning of another word, and so the word ending with बहुव्रीहि is used mostly as an adjective. Because of this the word of बहुव्रीहि compound has to be kept according to the gender of its noun. So it goes on changing. This means that if the noun is of masculine gender, the word ending with बहुव्रीहि compound has to be used in masculine gender if the noun is in the feminine gender, the word ending with बहुव्रीहि compound has to be used in feminine and if the noun is in neuter gender the word ending with बहुव्रीहि compound has also to be used in the neuter gender.
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