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Detailed संधि द्वारा सब्द रचना (1st Language) GSEB Solutions for Class 10 Hindi
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Class 10 Hindi संधि द्वारा सब्द रचना (1st Language) GSEB Solutions PDF
GSEB Std 10 Hindi Vyakaran संधि द्वारा सब्द रचना (1st Language)
संधि यानी जोड़। भाषा में दो वर्णों के मेल से जो विकार होता है उसे संधि कहते हैं। हिन्दी में अधिकांश संधियाँ संस्कृत से आए तत्सम शब्दों में होती हैं। संधि में पहले पद का अंतिम वर्ण बादवाले पद के प्रथम वर्ण के मेल से संधि होती है।
जैसे -
- विद्यालय – विद्या + आलय (आ + आ)
- वेद + अंग (वेद् + अ + अंग) = वेदांग (अ + अ = आ)
संधियाँ तीन प्रकार की होती हैं – स्वर संधि, व्यंजन संधि तथा विसर्ग संधि।
स्वर संधि:
दो स्वरों के आपसी मेल के कारण जब स्वरों में परिवर्तन होता है, तो उसे स्वर संधि कहते हैं। संस्कृत में स्वर संधि के निम्नलिखित पांच भेद माने गए हैं :
- दीर्घ संधि,
- गुण संधि,
- वृद्धि संधि,
- यण संधि और
- अयादि संधि।
1. दीर्घ स्वर संधि:
जब अ, इ, उ या आ, ई, उ के साथ क्रमशः अ या आ, इ या ई, उ या ऊ आते हैं तो वे ध्वनियाँ मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ हो जाती हैं। ये ध्वनियाँ हस्व + हस्व, हस्व + दीर्घ, दीर्घ + हस्व या दीर्घ + दीर्घ हो सकती हैं। जैसे -
- समय + अनुकूल – (अ + अ = आ) = समयानुकूल
- परम + आनंद – (अ + आ = आ) = परमानंद
- रेखा + अंश – (आ + अ = आ) = रेखांश
- प्रभा + आकर – (आ + आ = आ) = प्रभाकर
- रवि + इन्द्र – (इ + इ = ई) = रवीन्द्र
- कपि + ईश – (इ + ई = ई) = कपीश
- योगी + इन्द्र – (ई + इ = ई) = योगीन्द्र
- नदी + ईश – (ई + ई = ई) = नदीश
- सु + उक्ति – (उ + उ = ऊ) = सूक्ति
2. गुण संधि:
जब अ या आ के बाद इ या ई हो तो दोनों मिलकर 'ए, उ या ऊ' हो तो 'ओ' तथा 'ऋ' हो तो 'अर्' हो जाता हैं। जैसे -
- सुर + इन्द्र – (अ + इ = ए) = सुरेन्द्र
- सुर + ईश – (अ + ई = ए) = सुरेश
- महा + इन्द्र – (आ + इ = ए) = महेन्द्र
- महा + ईश – (आ + ई = ए) = महेश
- पर + उपकार – (अ + उ = ओ) = परोपकार
- महा + उदय – (आ + उ = ओ) = महोदय
- गंगा + ऊर्मि – (आ + ऊ = ओ) = गंगोर्मि
- देव + ऋषि – (अ + ऋ = अर्) = देवर्षि
- महा + ऋषि – (आ + ऋ = अर्) = महर्षि
- राजा + ऋषि – (आ + ऋ = अर्) = राजर्षि
3. वृद्धि संधि:
यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' हो तो दोनों मिलकर 'ऐ' तथा 'ओ' या 'औ' हो तो दोनों मिलकर 'औ' हो जाते हैं। जैसे -
- एक + एक – (अ + ए = ऐ) = एकैक
- मत + ऐक्य – (अ + ऐ = ऐ) = मतैक्य
- सदा + एव – (आ + ए = ऐ) = सदैव
- महा + ऐश्वर्य – (आ + ऐ = ऐ) = महैश्वर्य
- वन + औषधि – (अ + ओ = औ) = वनौषधि
- परम + औदार्य – (अ + औ = औ) = परमोदार्य
- महा + ओषध – (आ + ओ = औ) = महौषध
4. यण संधि:
जब हस्व या दीर्घ इ, उ या ऋ के बाद कोई असवर्ण स्वर हो तो वह क्रमशः य, व और र हो जाता है। जैसे -
- यदि + अपि – (इ + अ = य्) = यद्यपि
- इति + आदि – (इ + आ = या) = इत्यादि
- अति + उत्तम – (इ + उ = यु) = अत्युत्तम
- नि + ऊन – (इ + ऊ = यू) = न्यून
- प्रति + एक – (इ + ए = ये) = प्रत्येक
- दधि + ओदन – (इ + ओ = यो) = दध्योदन
- सखी + ऐक्य – (ई + ऐ = यै) = सख्यैक्य
- वाणी + औचित्य – (ई + औ = यौ) = वाण्यौचित्य
- मनु + अंतर – (उ + अ = व) = मन्वंतर
- सु + आगत – (उ + आ = वा) = स्वागत
- अनु + ईक्षण – (उ + ई = वी) = अन्वीक्षण
- अनु + एषण – (उ + ए = वे) = अन्वेषण
- लघु + ओष्ठ – (उ + ओ = वो) = लघ्वोष्ठ
- गुरु + औदार्य – (उ + औ = वौ) = गुर्वोदार्य
- वधु + ऐषणा – (ऊ + ऐ = वै) = वध्वैषणा
- पितृ + अनुमति – (ऋ + अ = र्) = पित्रनुमति
- मातृ + आज्ञा – (ऋ + आ = रा) = मात्राज्ञा
- मातृ + इच्छा – (ऋ + इ = रि) = मात्रिक्षा
- मातृ + उपदेश – (ऋ + उ = रु) = मात्रुपदेश
विशेष : संस्कृत में स्वर संधि का एक भेद 'अयादि संधि' भी है। किंतु हिन्दी में इस संधि से बने शब्दों (ने + अन् = नयन, पो + अक = पावक तथा ने + अक = नायक) को मूल शब्द माना जाता है। फिर भी सुविधा के लिए कुछ उदाहरण यहाँ दिये जा रहे है।
यदि एक ही पद के अंदर यदि कोई दो भिन्न स्वर (ए, ऐ, ओ, औ के अलावा) हों तो ए का अय, ऐ का आय; ओ का अव्, औ का आव् हो जाता है। यह अयादि संधि होती है।
- ने + अन = नयन
- गै + अक् = गायक
- नै + इका = नायिका
- नै - अक = नायक
- गै + इका = गायिका
- भो + अन = भवन
- पो + अन = पवन
- भौ + उक = भावुक
- पौ + अक = पावक
- नौ + इक = नाविक
व्यंजन संधि:
किसी व्यंजन के बाद स्वर या व्यंजन के आने से होनेवाले परिवर्तन को व्यंजन संधि कहते हैं।
व्यंजन संधि के नियम:
1. यदि प्रथम शब्द के अंत में अघोष व्यंजन (वर्ग के प्रथम दो वर्ण) हो और दूसरे शब्द के आरंभ में सघोष व्यंजन (वर्ग के अंतिम तीन वर्ण) हो, तो पहले शब्द के अंत में आए अघोष व्यंजन के स्थान पर उसी वर्ग का सघोष व्यंजन हो जाता है; अर्थात् 'क्' का 'ग्', 'ट्' का 'ड्', 'त्' का 'द्' और 'प' का 'ब' हो जाता है।
उदाहरण:
- दिक् + गज = दिग्गज (क् + ग = ग् + ग = ग्ग)
- दिक् + अंबर = दिगंबर (क् + अ = ग)
- सत् + गति = सद्गति (त् + ग = द् + ग)
- षट् + आनन = षडानन (ट् + आ = डा)
- सत + आचार = सदाचार (त् + आ = दा)
6. यदि विसर्ग के पहले 'इ' या 'उ' हो और बाद में क, प या फ हो, तो विसर्ग का ष् हो जाता है; जैसे -
- निः + कपट = निष्कपट
- धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
- दुः + प्रचार = दुष्प्रचार
- चतुः + कोण = चतुष्कोण
- निः + फल = निष्फल
7. यदि विसर्ग के बाद 'त्' अघोष ध्वनि हो तो विसर्ग का 'स्' हो जाता है; जैसे -
- निः + तेज = निस्तेज
- नमः + ते = नमस्ते
8. यदि 'अ' के बाद विसर्ग हो और बाद में कोई स्वर हो, तो विसर्ग का लोप हो जाता है; जैसे -
- अतः + एव = अतएव
9. यदि विसर्ग के बाद 'र' हो तो विसर्ग का 'र' हो कर उसका लोप हो जाता है और विसर्ग के पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है; जैसे -
- निः + रोग = नीरोग
- निः + रव = नीरव
विसर्ग संधि हिन्दी के लिए अप्रस्तुत है, किंतु अर्थबोध के लिए इसका महत्त्व है, अतः इसे जानना चाहिए।
विशेष : स्वर संधि, व्यंजन संधि तथा विसर्ग संधि के नियम हिन्दी तत्सम शब्दों (संस्कृत शब्दों) पर ही लागू होते हैं। हिन्दी में जब दो भिन्न शब्द एक ही शब्द के रूप में अथवा सामासिक पद के रूप में प्रयुक्त होते हैं; जैसे-
राम + अभिलाषा = राम-अभिलाषा ही रहता है, रामाभिलाषा नहीं बनता।
हिन्दी की संधियाँ:
मानक हिन्दी में अधिकांश संधियाँ संस्कृत में आए तत्सम शब्दों में हैं। इसका कारण यह है कि संस्कृत एक योग्यत्मक भाषा है। इसके विपरीत हिन्दी एक वियोगात्मक भाषा है, अतः उसमें संधियों का प्रायः अभाव-सा है। हिन्दी भाषा की संधियों में निम्नलिखित प्रवृत्तियाँ दिखलाई देती हैं :
- इस्वीकरण
- दीर्धीकरण
- महाप्राणीकरण
- अल्पप्राणीकरण
- सामीप्य के कारण लोप
- सादृश्य के कारण लोप
- आगम
- स्वर परिवर्तन।
1. इस्वीकरण:
इसमें पूर्वपद के दीर्घ या संयुक्त स्वर ह्रस्व बन जो हैं। यानी 'आ' 'अ' में 'ई' 'इ' में, 'ऊ', 'उ' में तथा 'ऐ', 'ए' और 'ओ' 'ऊ' में बदल गए हैं। जैसे -
- काठ + फोड़वा = कठफोड़वा
- आम + चूर = अमचुर
- बात + रस = बतरस
- हाथ + कड़ी = हथकड़ी
- कान + पट्टी = कनपट्टी
- लड़का + पन = लड़कपन
- कान + कटा = कनकटा
- बच्चा + पन = बचपन
- कान + कौआ = कनकौआ
- बहू + एँ = बहुएँ
- काठ + पुतली = कठपुतली
- चाकू + ओं = चाकुओं
- मूंछ + कटा = मुंछकटा
- हिन्दू + ओं = हिन्दुओं
- छोटा + भैया = छुटभैया
- डाकू + ओं = डाकुओं
- एक + तारा = इकतारा
- मीठा + बोला = मिठबोला
कभी-कभी पूर्वपद का स्वर लुप्त हो जाता है। जैसे -
- पानी + चक्की = पनचक्की
- घोड़ा + दौड़ = घुड़दौड़
- पानी + घाट = पनघट
- छोटा + पन = छुटपन
- लेना + देना = लेन-देन
2. दीर्घाकरण: इस तरह की संधि में पूर्वपद का आखिरी ह्रस्व स्वर दीर्घ हो जाता है। जैसे -
- उत्तर + खंड = उत्तराखंड
- दक्षिण + खंड = दक्षिणाखंड
- मूसल + धार = मूसलाधार
- मिलना + जुलना = मिलना-जुलना = मेल-जोल
3. महाप्राणीकरण: इस संधि में पूर्वपद के अल्पप्राण से उत्तर पद का महाप्राण मिलता है और उसे (अल्पप्राण को) उसी वर्ग के महाप्राण में बदल देता है। जैसे -
- सब + ही = सभी
- तब + ही = तभी
- अब + ही = अभी
- कब + ही = कभी
4. अल्प प्राणीकरण: हिन्दी में कभी-कभी पूर्वपद के अंतिम महाप्राण ध्वनि का अल्प प्राणीकरण हो जाता है। जैसे -
- ताख पर – ताक पर
- दूध वाला – दूदवाला
5. आगम: संधि के समय कभी-कभी दो स्वरों के बीच 'य' का आगम होता है। जैसे -
- रोटी + ओं = रोटियों
- कली + ओं = कलियों
- नदी + ओं = नदियों
- नाली + ओं = नालियों
6. सामीप्य के कारण लोप
- किस + ही = किसी
- विस + ही = विसी
- जिस + ही = जिसी
- उस + ही = उसी
- इस + ही = इसी
7. सादृश के कारण लोप
- यह + ही = यही
- वह + ही = वही
- तुम + ही = तुम्ही
8. स्वर परिवर्तन: यह परिवर्तन प्रायः सामासिक शब्दों में होता है; जैसे -
- घोड़ा + सवार = घुड़सवार
- घोड़ा + दौड़ = घुड़दौड़
- पानी + डुब्बी = पनडुब्बी
- पान + डब्बा = पनडब्बा
अभ्यासार्थ
Question 1. संधि कीजिए :
(i) विद्या + अर्थी
(ii) देव + आलय
(iii) नर + अधम
(iv) विद्या + आलय
(v) गिरि + इंद्र
(vi) गिरि + ईश
(vii) रजनी + ईश
(viii) वेद + अंत
(ix) सत्य + आग्रह
(x) दया + आनंद
(xi) रवि + इन्द्र
(xii) नदी + ईश
(xiii) मही + ईश
(xiv) लघु + उत्तर
(xv) भानु + उदय
(xvi) वधू + ऊर्जा
(xvii) वधू + उत्सव
(xviii) देव + ईश
(xix) सुर + इंद्र
(xx) देव + ऋषि
(xxi) महा + ऋषि
(xxii) पर + उपकार
(xxiii) महा + इंद्र
(xxiv) जल + ऊर्मि
(xxv) महा + उत्सव
(xxvi) उमा + ईश
(xxvii) एक + एक
(xxviii) परम + ईश्वर
(xxix) सदा + एव
(xxx) वन + ओषध
(xxxi) महा + ऐश्वर्य
(xxxii) यदि + अपि
(xxxiii) अति + आचार
(xxxiv) वि + आप्त
(xxxv) अति + अल्प
(xxxvi) पितृ + आज्ञा
(xxxvii) अनु + एषण
(xxxviii) सु + अच्छ
(xxxix) सु + आगत
(xl) देवी + आगमन
(xli) प्रति + एक
(xlii) अति + अधिक
(xliii) प्रति + उपकार
(xliv) इति + आदि
(xlv) मत + ऐक्य
(xlvi) वि + आप्त
(xlvii) नव + ऊढ़ा
(xlviii) वीर + उचित
(xlix) रमा + इंद्र
(l) वीर + अंगना
Answer:
(i) विद्यार्थी
(ii) देवालय
(iii) नराधम
(iv) विद्यालय
(v) गिरीन्द्र
(vi) गिरीश
(vii) रजनीश
(viii) वेदांत
(ix) सत्याग्रह
(x) दयानंद
(xi) रवीन्द्र
(xii) नदीश
(xiii) महीश
(xiv) लघूत्तर
(xv) भानूदय
(xvi) वधूर्जा
(xvii) वधूत्सव
(xviii) देवेश
(xix) सुरेन्द्र
(xx) देवर्षि
(xxi) महर्षि
(xxii) परोपकार
(xxiii) महेन्द्र
(xxiv) जलोर्मि
(xxv) महोत्सव
(xxvi) उमेश
(xxvii) एकैक
(xxviii) परमेश्वर
(xxix) सदैव
(xxx) वनौषध
(xxxi) महैश्वर्य
(xxxii) यद्यपि
(xxxiii) अत्याचार
(xxxiv) व्यापक
(xxxv) अत्यंत
(xxxvi) पित्राज्ञा
(xxxvii) अन्वेषण
(xxxviii) स्वच्छ
(xxxix) स्वागत
(xl) देव्यागमन
(xli) प्रत्येक
(xlii) अत्यधिक
(xliii) प्रत्युपकार
(xliv) इत्यादि
(xlv) मतैक्य
(xlvi) व्याप्त
(xlvii) नवोढ़ा
(xlviii) वीरोचित
(xlix) रमेन्द्र
(l) वीरांगना
In simple words: The answers show the combined word formed by joining the given parts according to the rules of Sandhi. Each result is a single new word.
Exam Tip: To score full marks, correctly identify the type of Sandhi (स्वर, व्यंजन, विसर्ग) and apply its specific rules to combine the words accurately. Pay close attention to vowel and consonant changes.
Question 2. संधि विच्छेद कीजिए :
(i) दिग्गज
(ii) दिगंबर
(iii) षडानन
(iv) सद्गुण
(v) भगवद्गीता
(vi) चिदानंद
(vii) सुबन्त
(viii) जगन्नाथ
(ix) उल्लेख
(x) सज्जन
(xi) उच्छास
(xii) सच्चरित्र
(xiii) मनोभाव
(xiv) निराशा
(xv) अंतर्मुखी
(xvi) निष्पक्ष
(xvii) दुष्कर्म
(xviii) दुश्शासन
(xix) निष्कपट
(xx) निश्चल
Answer:
(i) दिक् + गज
(ii) दिक् + अम्बर
(iii) षट् + आनन
(iv) सत् + गुण
(v) भगवत् + गीता
(vi) चित् + आनंद
(vii) सुप् + अंत
(viii) जगत् + नाथ
(ix) उत् + लेख
(x) सत् + जन
(xi) उत् + श्वास
(xii) सत् + चरित्र
(xiii) मनः + भाव
(xiv) निः + आशा
(xv) अंतः + मुखी
(xvi) निः + पक्ष
(xvii) दुः + कर्म
(xviii) दुः + शासन
(xix) निः + कपटी
(xx) निः + चल
In simple words: The answers show the original words separated into their base components, following the rules of Sandhi dissociation. This process identifies the root words before they were combined.
Exam Tip: When splitting words, look for the point where the sound change occurred and identify the original, meaningful parts. Remember to revert sound changes like 'ग्' to 'क्' or 'द्' to 'त्'.
Question 3. संधि कीजिए :
(i) निः + तेज
(ii) निः + छल
(iii) धनुः + टंकार
(iv) दुः + उपयोग
(v) निर् + रस
(vi) निर् + रोग
(vii) दुः + गति
(viii) निः + संदेह
(ix) निः + गुण
(x) मनः + हर
(xi) अधः + गति
(xii) अतः + एव
Answer:
(i) निस्तेज
(ii) निश्छल
(iii) धनुष्टंकार
(iv) दुरुपयोग
(v) नीरस
(vi) नीरोग
(vii) दुर्गति
(viii) निसंदेह
(ix) निर्गुण
(x) मनोहर
(xi) अधोगति
(xii) अतएव
In simple words: We combine the given parts into a single word following the correct rules of Sandhi, resulting in a new, unified term.
Exam Tip: For Visarg Sandhi, correctly apply the rules for 'ष्', 'स्', 'र्', or its disappearance and subsequent lengthening of the preceding vowel. Practice helps identify these changes quickly.
Question 4. संधि कीजिए :
(i) षट् + दर्शन
(ii) जगत् + ईश
(iii) वाक् + दान
(iv) भगवत् + भक्ति
(v) सत् + चित
(vi) तत् + लीन
(vii) शरत् + चंद्र
(viii) सम् + जय
(ix) सम् + कल्प
Answer:
(i) षट्दर्शन
(ii) जगदीश
(iii) वाग्दान
(iv) भगवद् भक्ति
(v) सच्चित्
(vi) तल्लीन
(vii) शरच्चन्द्र
(viii) संजय
(ix) संकल्प
In simple words: The combined word for each pair is formed by applying the appropriate Sandhi rules, merging the two parts into one coherent term.
Exam Tip: Pay attention to व्यंजन संधि rules where the first letter of a word can change based on the next letter, often turning into a voiced consonant or a nasal sound.
Question 5. संधि-विच्छेद कीजिए :
(i) वयोवृद्ध
(ii) दुर्भावना
(iii) निराकार
(iv) निस्संदेह
(v) मनोयोग
(vi) निष्पाप
(vii) निश्चल
(viii) स्वच्छंद
(ix) संयोग
(x) संदेह
(xi) उच्छिष्ट
(xii) उन्मुक्त
(xiii) तन्मय
(xiv) उन्मुख
(xv) निष्ठुर
(xvi) दिग्दर्शन
(xvii) अन्वय
(xviii) ममेरा
(xix) कंठोष्ठ्य
Answer:
(i) वयः + वृद्ध
(ii) दुः + भावना
(iii) निः + आकार
(iv) निः + संदेह
(v) मनः + योग
(vi) निः + पाप
(vii) निः + चल
(viii) स्व + छंद
(ix) सम् + योग
(x) सम् + देह
(xi) उत् + शिष्ट
(xii) उत् + मुक्त
(xiii) तत् + मय
(xiv) उत् + मुख
(xv) निः + ठुर
(xvi) दिक् + दर्शन
(xvii) अनु + अय
(xviii) मामा + एरा
(xix) कंठ + ओष्ठ्य
In simple words: We separate the given compound words into their original, individual components, showing the parts that joined to form them through Sandhi.
Exam Tip: For complex words, try to mentally reverse the Sandhi rules. For example, if you see 'ष्', consider if it came from 'स्' or 'श्' in the original component, or if it indicates a Visarg Sandhi. Words like 'ममेरा' are not strict Sandhi but derived words, requiring knowledge of suffixes.
स्वयं हल कीजिए
Question 1. संधि-विच्छेद कीजिए :
Answer: यहाँ नीचे दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद किया गया है, जिससे उनके मूल रूप और अर्थ को समझने में सहायता मिलती है।
• सदाचार = सत् \( + \) आचार
• महेश = महा \( + \) ईश
• राजर्षि = राजा \( + \) ऋषि
• चंद्रोदय = चंद्र \( + \) उदय
• प्रत्यूष = प्रति \( + \) ऊष
• अधःपतन = अधः \( + \) पतन
• अनंत = अन् \( + \) अंत
• दिगंत = दिक् \( + \) अंत
• मतानुसार = मत \( + \) अनुसार
• मनोरोगी = मनः \( + \) रोगी
• यशोदा = यशः \( + \) दा
• संतुष्ट = सम् \( + \) तुष्ट
• समादर = सम् \( + \) आदर
• निर्जन = निः \( + \) जन
• निर्मल = निः \( + \) मल
• दुर्जन = दुः \( + \) जन
• उल्लेख = उत् \( + \) लेख
• सप्तर्षि = सप्त \( + \) ऋषि
• सुरेन्द्र = सुर \( + \) इंद्र
• दिवाकर = दिवा \( + \) कर
• निस्संदेह = निः \( + \) संदेह
In simple words: This shows how to break down each word into its basic parts. It helps you understand where the words come from.
Exam Tip: For 'sandhi-viched,' always identify the type of sandhi (स्वर, व्यंजन, विसर्ग) first, as this helps correctly separate the word into its original components.
Question 2. संधि कीजिए :
Answer: यहाँ दिए गए पदों को जोड़कर उनकी संधि का निर्माण किया गया है, जिससे नए शब्द बनते हैं और उनके अर्थ स्पष्ट होते हैं।
• निः \( + \) उपाय = निरुपाय
• दुः \( + \) दशा = दुर्दशा
• नी \( + \) रोग = नीरोग
• निः \( + \) फल = निष्फल
• पुनः \( + \) चर्चा = पुनश्चर्चा
• नमः \( + \) शिवाय = नमःशिवाय
• सम् \( + \) कृति = संस्कृति
• उत् \( + \) थान = उत्थान
• नमः \( + \) कार = नमस्कार
• यशः \( + \) दा = यशोदा
• तपः \( + \) मय = तपोमय
• मनः \( + \) नय = मनोमय
• उत्तर \( + \) अयन = उत्तरायण
• सम् \( + \) तोष = संतोष
• उत् \( + \) चारण = उच्चारण
• स्व \( + \) ईर = स्वैर
• विः \( + \) सम = विषम
• मनः \( + \) रथ = मनोरथ
• उत्तम \( + \) अंश = उत्तमांश
• अभि \( + \) इष्ट = अभीष्ट
• पितृ \( + \) ऋण = पितृण
• कुश \( + \) आसन = कुशासन
• क्षिति \( + \) ईश = क्षितीश
• उप \( + \) इंद्र = उपेंद्र
• आज्ञा \( + \) अनुपालन = आज्ञानुपालन
• अधि \( + \) ईश्वर = अधीश्वर
• पूर्ण \( + \) इंदु = पूर्णेन्दु
• व्यवस्था \( + \) अनुसार = व्यवस्थानुसार
• देवी \( + \) इच्छा = देवीच्छा
• परम \( + \) ईश्वर = परमेश्वर
• दीक्षा \( + \) अंत = दीक्षांत
• मही \( + \) ईश = महीश
• यथा \( + \) इष्ट = यथेष्ट
• दिन \( + \) ईश = दिनेश
• नदी \( + \) ईश = नदीश
• राका \( + \) ईश = राकेश
• पद \( + \) आघात = पदाघात
• पृथ्वी \( + \) ईश्वर = पृथ्वीश्वर
• नील \( + \) उत्पल = नीलोत्पल
• वार्ता \( + \) आलाप = वार्त्तालाप
• धातु \( + \) ऊष्मा = धातूष्मा
• जल \( + \) ऊर्मि = जलोर्मि
• महा \( + \) औदार्य = महौदार्य
• महा \( + \) ऐश्वर्य = महैश्वर्य
• सदा \( + \) एव = सदैव
• यदि \( + \) अपि = यद्यपि
• प्रति \( + \) उपकार = प्रत्युपकार
• नि \( + \) ऊन = न्यून
In simple words: Here, different words are joined together according to sandhi rules to form new, combined words. This shows how parts come together.
Exam Tip: When combining words with 'sandhi,' remember to apply the correct rules for vowel, consonant, or visarga changes to achieve the proper unified form.
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