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Detailed Chapter 07 छाया मत छूना GSEB Solutions for Class 10 Hindi
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Class 10 Hindi Chapter 07 छाया मत छूना GSEB Solutions PDF
प्रश्न-अभ्यास
Question 1. कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?
Answer: अक्सर, व्यक्ति अपने अतीत की सुखद यादों में खोया रहता है और कल्पना की दुनिया में घूमता रहता है, जिससे वह वर्तमान की सच्चाई से दूर भागता है। इससे उसका जीवन और भी मुश्किल और डरावना हो जाता है। इसलिए, कवि हमें वर्तमान के कठोर सत्य का आदर करने के लिए कहता है ताकि हम मौजूदा हालात से जूझकर उन्हें अपने पक्ष में कर सकें।
In simple words: कवि कहता है कि व्यक्ति अतीत की सुखद यादों में खोकर वर्तमान की मुश्किलों से भागता है, जिससे जीवन और कठिन होता है। इसलिए, हमें वर्तमान की सच्चाई का सामना करना चाहिए।
Exam Tip: ऐसे प्रश्नों के उत्तर में कवि के मुख्य संदेश और उसके पीछे की भावना को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
Question 2. भाव स्पष्ट कीजिए-
प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
Answer: कवि का कहना है कि इंसान हमेशा नाम-यश, पैसा और सम्मान पाने की चाह में उसके पीछे दौड़ता रहता है, लेकिन यह चाहत कभी पूरी नहीं होती। फिर भी मन में भ्रम लिए वह भटकता रहता है। कवि आगे समझाता है कि जिस प्रकार चाँदनी रात के बाद काली रात का होना तय है, उसी तरह सुख के बाद दुःख भी आता है। इस सच्चाई को स्वीकार करके ही इंसान अपने जीवन को सुधार सकता है।
In simple words: कवि समझाते हैं कि बड़प्पन और प्रसिद्धि की चाहत सिर्फ एक भ्रम है, और हर खुशी के बाद दुःख भी आता है। हमें इस सच्चाई को स्वीकार कर जीवन जीना चाहिए।
Exam Tip: ऐसे भाव स्पष्टीकरण वाले प्रश्नों में कविता की पंक्तियों का गहरा अर्थ समझाना और उन्हें जीवन से जोड़कर देखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. 'छाया' शब्द यहां किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है ? कवि ने इसे छूने के लिए क्यों मना किया है ?
Answer: कवि ने 'छाया' शब्द का इस्तेमाल बीते हुए सुखद पलों के लिए किया है जो अब अतीत बन चुके हैं। वे सुखद यादें ही छाया हैं। कवि ने 'छाया' को छूने से इसलिए मना किया है क्योंकि हम जितना अधिक अतीत के सुखद पलों को याद करेंगे, उतना ही हमारा वर्तमान समय और मुश्किलों भरा होता जाएगा। इससे हमारा जीवन और भी जटिल बन जाएगा।
In simple words: 'छाया' का मतलब अतीत की सुखद यादें हैं। कवि इन्हें छूने से मना करता है क्योंकि इससे वर्तमान की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
Exam Tip: कविताओं में प्रयुक्त प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते समय, कवि के मुख्य संदेश को ध्यान में रखना चाहिए।
Question 4. कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे- कठिन यथार्थ । कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छांटकर लिखिए और यह भी बताइए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशेष पीड़ा हुई है ?
Answer: कविता में उपयोग किए गए विशेषण और उनके अर्थ से उत्पन्न विशिष्टताएँ इस प्रकार हैं:
- दुःख-दूना – यह 'दूना' विशेषण दुःख की मात्रा को दोगुना दिखाता है।
- सुरंग-सुधियां – यहां 'सुरंग' (सुंदर रंगोंवाली) विशेषण मधुर यादों की मिठास को और अधिक मीठा बनाने के लिए प्रयोग किया गया है।
- जीवित क्षण – 'जीवित' विशेषण जीवन के प्रत्येक पल में ताजगी भर देता है।
- रात-कृष्णा – 'कृष्णा' (काली) विशेषण का विशेष्य रात है। यह रात के अंधेरे को और गहरा बना देता है।
- दुविधा-हत साहस – 'दुविधा-हत' विशेषण, साहस की कमजोरी और उसे और अधिक परेशान करने की स्थिति को दर्शाता है।
- यथार्थ कठिन – 'कठिन' विशेषण, सत्य की कठोरता को और भी बढ़ा देता है।
In simple words: कविता में विशेषणों का प्रयोग शब्दों को खास बनाता है, जैसे 'दुःख-दूना' दुःख को बढ़ाता है, 'सुरंग-सुधियां' यादों को मीठा करती हैं, 'जीवित क्षण' जीवन को जीवंत बनाता है, 'रात-कृष्णा' रात को गहरा करती है, 'दुविधा-हत साहस' साहस को कमजोर दिखाता है, और 'यथार्थ कठिन' सच्चाई की कठोरता को बढ़ाता है।
Exam Tip: विशेषणों के प्रयोग पर आधारित प्रश्नों में, आपको विशेषण और उसके विशेष्य को पहचानना होगा तथा यह बताना होगा कि विशेषण किस प्रकार अर्थ में वृद्धि कर रहा है।
Question 5. 'बीती ताहि विसार दे आगे की सुधि ले'- यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?
Answer: कविता की नीचे दी गई पंक्ति में 'बीती ताहि विसार दे आगे की सुधि ले' का भाव झलकता है – “जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण।”
In simple words: यह विचार कि पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए, कविता की पंक्ति "जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण" में दिखता है।
Exam Tip: काव्य पंक्तियों से भाव पहचानने वाले प्रश्नों में, कविता के केंद्रीय संदेश और कवि की सलाह पर ध्यान दें।
Question 6. कविता में व्यक्त दुःख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: कविता में बताए गए दुःख के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. बीते हुए खुशहाल दिनों में डूबे रहने से वर्तमान का दुःख और बढ़ जाता है।
2. इंसान जितना अधिक धन, वैभव, मान-सम्मान और प्रसिद्धि के पीछे भागता है, उतना ही अधिक दुःखी होता है।
3. प्रभुता पाने की इच्छा एक छलावा है, जिसके पीछे इंसान हमेशा भटकता रहता है।
4. इंसान को समय पर सफलता न मिलने से वह दुःखी होता है।
5. वर्तमान की सच्चाई को नज़रअंदाज़ करने से इंसान दुःखी होता है।
In simple words: कविता में दुःख के कई कारण बताए गए हैं: पुरानी सुखद यादों में डूबे रहना, धन-दौलत के पीछे भागना, बड़प्पन की चाहत, समय पर सफलता न मिलना और वर्तमान की सच्चाई को अनदेखा करना।
Exam Tip: जब दुःख के कारणों जैसे बिंदुओं को स्पष्ट करना हो, तो प्रत्येक बिंदु को संक्षेप में और सटीक शब्दों में प्रस्तुत करें।
Question 7. 'क्या हुआ जो खिला फूल रस वसंत जाने पर ?' कवि के कथन से अपनी सहमति या असहमति को तर्कसहित लिखिए।
Answer: यह सच है कि सही समय पर मिली उपलब्धि का महत्व ज्यादा होता है और उससे खुशी भी अधिक मिलती है। उपलब्धियों का इंसान के मन पर समय के अनुसार बहुत प्रभाव दिखाई देता है। कभी-कभी देर से मिलने वाली उपलब्धि एकदम बेकार लगती है - जैसे 'का बरखा जब कृषि सुखाने' (बारिश तब जब खेत सूख गए हों)। अगर किसी बेगुनाह व्यक्ति को एक बार दोषी ठहरा दिया जाए और बाद में कोर्ट उसे निर्दोष घोषित करके छोड़ दे, तब तक उसे जो नुकसान हो चुका होता है, उसकी भरपाई कभी नहीं होती, पर थोड़ी संतुष्टि जरूर मिलती है।
In simple words: समय पर मिली सफलता ज्यादा मायने रखती है। देर से मिली उपलब्धि कभी-कभी व्यर्थ लगती है, जैसे देर से हुई बारिश। नुकसान की पूरी भरपाई न हो पाए फिर भी थोड़ी राहत मिल सकती है।
Exam Tip: ऐसे दार्शनिक प्रश्नों में अपनी राय को मजबूत तर्कों और प्रासंगिक उदाहरणों से प्रस्तुत करें।
Question 8. छाया मत छूना कविता कवि की अनुभूति की पीड़ा अभिव्यक्त हुई है, समझाइए।
Answer: हिंदी में नई कविता के दौर में 'स्वानुभूति की अभिव्यक्ति' का नारा दिया गया था। इस कविता में वर्णित दृश्यों से ऐसा लगता है कि कवि के जीवन में भी कुछ ऐसा घटित हुआ है, उसी असली अनुभूति का वर्णन इसमें है। उसी अनुभव के आधार पर कवि यह कह पाया है- 'छाया मत छूना मन, दुःख होगा दूना।' अतीत की यादों में खोए रहने से वर्तमान भयानक बन जाता है। इसलिए वर्तमान से जूझते हुए उसकी सच्चाई को स्वीकार कर उसे अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करना अधिक बेहतर है।
In simple words: 'छाया मत छूना' कविता में कवि की निजी पीड़ा दिखती है। कवि अपने जीवन के अनुभव से कहता है कि अतीत की यादें वर्तमान को दुखद बना देती हैं। इसलिए, वर्तमान की सच्चाई को स्वीकार कर उससे निपटना ही बेहतर है।
Exam Tip: कविता के भाव को स्पष्ट करते समय, कवि की व्यक्तिगत भावनाओं और उनके द्वारा दिए गए संदेश को जोड़ना प्रभावी होता है।
Question 9. 'जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण' – में कवि की वेदना के साथ ही उसकी चेतना भी व्यक्त हुई है, इस कथन को समझाइए।
Answer: कवि कहता है कि यदि व्यक्ति जिस लक्ष्य को पाना चाहता है, वह उसे न मिले, जिसके कारण उसका जीवन दुख भरा हो गया हो। समय बीतने पर उसे यह समझ आता है कि अतीत की सुखद यादों में खोए रहना और अधूरी इच्छाओं से दुःखी होना ठीक नहीं है। इसलिए, अधूरी इच्छाओं के बारे में न सोचकर, वर्तमान के कठिन सत्य को स्वीकार कर भविष्य को अच्छा बनाने के लिए जो कुछ किया जा सकता है, उसे करना ही उचित है। कवि की यह सलाह उसकी जागरूकता को दर्शाती है।
In simple words: कवि समझाता है कि जो लक्ष्य न मिल पाया, उसके लिए दुःखी होना गलत है। अतीत की अधूरी इच्छाओं को भूलकर वर्तमान के सत्य को स्वीकार करना चाहिए और भविष्य को उज्ज्वल बनाने का प्रयास करना चाहिए। यह कवि की समझदारी दर्शाता है।
Exam Tip: कवि के विचारों और संदेशों का विश्लेषण करते समय, उनकी सकारात्मक दृष्टिकोण और प्रेरणादायक बातों को उजागर करें।
Question 10. 'क्या हुआ जो खिला फूल रस वसंत आने पर' का क्या भाव है ?
Answer: 'क्या हुआ जो खिला फूल रस वसंत आने पर' का अर्थ यह है कि यदि कोई उपलब्धि देर से भी मिले, तो भी हमें उसका आनंद उठाना चाहिए। समय पर न मिलने की शिकायत करते हुए दुःखी नहीं होना चाहिए, और न ही उसे कम महत्व देकर दुःखी होना चाहिए।
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि अगर कोई खुशी या सफलता देर से मिलती है, तो भी हमें उसका पूरा आनंद लेना चाहिए, बजाय इसके कि हम दुःखी हों या उसे कम समझें।
Exam Tip: काव्य पंक्तियों के भावार्थ को स्पष्ट करते समय, कवि के दृष्टिकोण और जीवन दर्शन को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
Hindi Digest Std 10 GSEB छाया मत छूना Important Questions and Answers
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
Question 1. 'छाया' से कवि का क्या आशय है ? कवि इन्हें छने से क्यों मना कर रहा है ?
Answer: 'छाया' शब्द का अर्थ अतीत की सुखद यादें हैं, जो इंसान के मन के किसी कोने में दबी-छिपी पड़ी हैं। कवि इन यादों को छूने से इसलिए मना कर रहा है, क्योंकि इन्हें याद करने से वर्तमान का दुःख कम होने के बजाय और बढ़ जाएगा।
In simple words: कवि 'छाया' से अतीत की सुखद यादों को समझते हैं और इन्हें छूने से इसलिए मना करते हैं क्योंकि यह वर्तमान के दुःख को बढ़ा देगा।
Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ बताते समय, कवि की मनोदशा और उसके पीछे के तर्क को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 2. 'छबियों की चित्रगंध फैल मनभावनी' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है ?
Answer: 'छबियों की चित्रगंध फैल मनभावनी' के माध्यम से कवि यह समझाना चाहता है कि जीवन में जो कई सुंदर, रंग-बिरंगी यादें हैं, उनके चारों ओर मन को भाने वाली खुशबू फैली हुई है। कवि कहना चाहता है कि प्रेयसी का रूप-रंग तो आकर्षक है ही, साथ ही उसके शरीर की मादक खुशबू भी अब तक मन को मोह लेती है।
In simple words: कवि बताते हैं कि जीवन की सुंदर यादों के साथ उनकी मनमोहक सुगंध भी जुड़ी है, और प्रेयसी का रूप-रंग और खुशबू अब भी मन को लुभाती है।
Exam Tip: काव्यांश की व्याख्या करते समय, उसमें निहित सौंदर्य और कवि के भावों को सरल एवं स्पष्ट शब्दों में व्यक्त करें।
Question 3. मृगतृष्णा से आप क्या समझते हैं ? यहाँ किसे मृगतृष्णा कहा गया है ?
Answer: गर्मियों की तेज धूप में रेगिस्तानी इलाकों में दूर पानी का भ्रम होता है। प्यासा हिरन उसे पानी समझकर भटकता रहता है। इसी को भौतिक विज्ञान में मृग मरीचिका या मृग तृष्णा कहते हैं। इंसान के मन में मान-सम्मान, यश-प्रसिद्धि और धन-संपत्ति पाने की जो इच्छा होती है, वह उसे पूरी जिंदगी भटकाती रहती है, यहां उसी को मृगतृष्णा कहा गया है।
In simple words: मृगतृष्णा एक भ्रम है जहाँ रेगिस्तान में पानी दिखता है। यहां इसे मान-सम्मान और धन की कभी न खत्म होने वाली चाहत को कहा गया है, जो इंसान को जीवनभर भटकाती रहती है।
Exam Tip: किसी भी अवधारणा को स्पष्ट करते समय, उसकी परिभाषा के साथ-साथ उदाहरण भी देना चाहिए।
Question 4. यामिनी बीत जाने के बाद क्या शेष रह जाता है?
Answer: जिस तरह यामिनी (तारों भरी चाँदनी रात) बीत जाने के बाद प्रेयसी के बालों में लगे फूलों की सुगंध और शरीर की सुगंध याद के रूप में बची रह जाती है।
In simple words: चाँदनी रात गुजरने के बाद, प्रेयसी के बालों की फूलों और तन की खुशबू सिर्फ यादों में ही बची रह जाती है।
Exam Tip: सीधे-सीधे पूछे गए प्रश्नों का उत्तर कविता के संदर्भ में संक्षेप में और सटीक शब्दों में दें।
Question 5. कौन-सी वस्तु हर पल को सजीव बना देता है?
Answer: सुखद पलों की एक भूली हुई याद हर पल को जीवंत बना देती है।
In simple words: सुखद पलों की एक पुरानी याद हर पल को जीवंत बना देती है।
Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, कवि के भावों को समझकर उत्तर को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें।
Question 6. कवि मन को क्या करने से मना करता है और क्यों ?
Answer: कवि मन को अतीत के सुखद पलों को याद करने से मना करता है, क्योंकि ऐसा करने से कुछ भी प्राप्त नहीं होगा, इसके विपरीत वर्तमान के दुःख के बढ़ जाने की पूरी संभावना बनी रहेगी।
In simple words: कवि मन को पुरानी अच्छी यादों में खोने से मना करता है, क्योंकि ऐसा करने से वर्तमान की परेशानियां बढ़ सकती हैं और कोई फायदा नहीं होगा।
Exam Tip: प्रश्नों के उत्तर में 'क्या' और 'क्यों' दोनों पहलुओं को स्पष्ट करना आवश्यक है ताकि पूरा संदर्भ समझ में आ सके।
Question 7. 'हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' – इस पंक्ति द्वारा कवि क्या बताना चाहता है ?
Answer: 'हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' – इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह बताना चाहते हैं कि हर सुख के बाद दुःख की काली छाया हमेशा मौजूद रहती है, यानी हर खुशी के साथ दुःख का आना संभव है। इसलिए इंसान को जीवन में दोनों ही स्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
In simple words: कवि कहते हैं कि हर सुख में दुःख छिपा होता है, जैसे चाँदनी रात के बाद काली रात आती है। इसलिए, हमें जीवन की सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
Exam Tip: कविता की प्रतीकात्मक पंक्तियों का अर्थ समझाते समय, उनके गहरे दार्शनिक या जीवन के सत्य को उजागर करें।
Question 8. कवि मनुष्य को कठिन यथार्थ का पूजन करने को क्यों कह रहा है?
Answer: कवि मनुष्य को सच्चाई से दूर भागने के बजाय उसका सामना करने की सलाह दे रहा है। जो इंसान हकीकत की मुश्किलों का सामना नहीं करते, वे और अधिक परेशानियों में घिर जाते हैं और निराश हो जाते हैं।
In simple words: कवि चाहता है कि मनुष्य सच्चाई से भागे नहीं, बल्कि उसका सामना करे। जो लोग ऐसा नहीं करते, वे ज़्यादा परेशान और निराश होते हैं।
Exam Tip: कवि की सलाह और उसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए, उसके महत्व पर जोर दें।
Question 9. 'देह सुखी हो पर मन के दुःख का अंत नहीं' – ऐसा क्यों होता है?
Answer: कवि कहते हैं कि इंसान शारीरिक रूप से स्वस्थ होता है। उसके जीवन में भौतिक सुखों की कोई कमी नहीं होती, फिर भी उसके मन में तरह-तरह की चिंताएं हमेशा बनी रहती हैं, क्योंकि दुविधा में होने से वह हताश हो चुका होता है।
In simple words: कवि के अनुसार, इंसान भले ही शारीरिक रूप से खुश हो और सभी सुख-सुविधाएं हों, लेकिन मन का दुःख खत्म नहीं होता क्योंकि दुविधाएं और चिंताएं उसे निराश करती रहती हैं।
Exam Tip: मनुष्य की आंतरिक और बाहरी स्थिति के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए, मन के दुःख के कारणों पर प्रकाश डालें।
Question 10. 'दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं' – से क्या तात्पर्य है?
Answer: कभी-कभी ऐसी स्थिति आती है कि इंसान के मन में काम करने का हौसला तो होता है, लेकिन वह दुविधाओं से घिरा होने के कारण हमेशा आशंकित रहता है। इंसान को कोई भी रास्ता साफ नहीं दिखता, क्योंकि उसके मन में सफलता और असफलता की आशंकाएं हमेशा बनी रहती हैं।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि जब मन दुविधा में घिरा हो तो इंसान हिम्मत होते हुए भी कोई रास्ता नहीं देख पाता, क्योंकि उसे सफलता या असफलता दोनों की चिंता लगी रहती है।
Exam Tip: किसी भी कथन का तात्पर्य समझाते समय, उसके निहितार्थ और गहरी भावना को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
Question 11. 'छाया मत छूना' कविता में निहित संदेश को स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवि ने इस कविता के माध्यम से हमें यह स्पष्ट संदेश दिया है कि इंसान को अतीत के सुखों की याद नहीं करनी चाहिए। जो चीजें वह अपने जीवन में प्राप्त नहीं कर सका, उनके लिए दुःखी रहकर उसे अपने वर्तमान को दुःखमय नहीं बनाना चाहिए। उसे उन बातों को भूलकर वर्तमान की सच्चाई को स्वीकार करते हुए अपना भविष्य सुधारने का प्रयास करना चाहिए।
In simple words: कवि का संदेश है कि अतीत की सुखद यादों या अप्राप्त चीजों के लिए दुःखी न होकर, वर्तमान की सच्चाई को स्वीकारते हुए अपने भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
Exam Tip: कविता के मुख्य संदेश को संक्षेप में और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें, जिसमें कवि की सीख स्पष्ट हो।
छाया मत छूना Summary In Hindi
कवि-परिचय:
गिरिजाकुमार माथुर का जन्म सन् 1918 में गुना, मध्यप्रदेश में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा झाँसी (उत्तर प्रदेश) में प्राप्त करने के बाद उन्होंने एम.ए. (अंग्रेजी) तथा एल.एल.बी. की उपाधि लखनऊ (उ.प्र.) से अर्जित की। शुरू में कुछ समय तक वकालत की, बाद में आकाशवाणी और दूरदर्शन में कार्यरत हुए। उनका निधन सन् 1994 में हुआ।
नई कविता के कवि गिरिजाकुमार माथुर की कविता में रोमानियत का पुट मिलता है। माथुर की कविता में मौलिकता और यथार्थ का चित्रण है। वे शिल्प के नए असाधारण प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। बिम्बों को स्पष्टता देने के लिए वे वातावरण के रंगों का समावेश करते हैं। नई कविता की छंद मुक्ति या मुक्तछंद के वे समर्थक हैं। ध्वनि साम्य के प्रयोग से तुक के बिना भी वे कविता में संगीतात्मक लय स्थापित करना उनकी खासियत है।
कविता का सार (भाव):
यहां संकलित कविता 'छाया मत छूना' के माध्यम से कवि ने जीवन में सुख-दुःख की सह-उपस्थिति का चित्रण किया है। कवि मानते हैं कि बीते हुए अतीत के सुख को याद करके वर्तमान के दुःख को और अधिक गहरा करना उचित और तर्कसंगत नहीं है। कवि के अनुसार इससे दुःख दोगुना होता है। अतीत की सुखद कल्पना से बंधे रहकर वर्तमान की अनदेखी और उससे पलायन करने के बजाय जीवन के वर्तमान कठोर यथार्थ से लड़ने के लिए तैयार रहना ही हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
यह कविता हमें अतीत की यादों को भूलकर वर्तमान का सामना करने और भविष्य को चुनने का संदेश देती है, हमें जीवन के सत्य को छोड़कर उसकी छायाओं में भ्रमित नहीं होना चाहिए। ऐसा करना कठोर यथार्थ से दूर रहना है। जो नहीं मिला उसे भूलकर भविष्य को स्वीकार करने की सीख इस कविता से मिलती है।
1. छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।
जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहाहवनी
छबियों की चित्र-गंध फैली मनभावनौ;
तन सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,
कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।
भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण।
भावार्थ:
कवि अपने मन को समझाते हुए कह रहे हैं कि हे मन! तुम छाया मत छूना, यानी बीते हुए सुखद पलों को याद मत करना क्योंकि इससे दुःख और बढ़ेगा, दोगुना हो जाएगा। जीवन में बहुत-सी रंग-बिरंगी, सुहावनी यादें हैं। उन सुंदर चित्रों की स्मृति के साथ ही उनके आसपास मन को भाने वाली खुशबू फैली हुई है। चाँदनी रात बीत जाने के बाद अब तो सिर्फ उसके तन की सुगंध ही बची है।
उसकी प्रेयसी के बालों में लगे सुगंधित फूलों की मीठी यादें बची हैं। उन सुखद पलों की एक भूली हुई याद हर पल को जीवंत कर देती है। ऐसा लगता है मानो कल की ही बातें हों और चलचित्र की तरह हमारी आँखों के सामने घूमने लगती हों, इसलिए हे मन! उन सुखद पलों को याद करने से वर्तमान का दुःख बढ़ने के सिवा कुछ हासिल होने वाला नहीं है। हाँ, इससे मन का दुःख निश्चित ही पहले से दोगुना हो जाएगा, बढ़ जाएगा।
2. छाया मत छूना,
मन, होगा दुख दूना।
यश है या न वैभव है, मान है न सरमाया;
जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया,
प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजन –
छाया मत छूना, मन होगा दुख दूना ।
भावार्थ:
कवि का कथन है कि इस संसार में मनुष्य यश, मान-सम्मान, धन-दौलत पाने के लिए जितनी कामना करता है और प्रयास करता है, वह उतना ही भ्रमित होता है। बड़प्पन की अनुभूति मृग मरीचिका के समान छलावा है जो भटकने के लिए विवश करती है।
कवि कहता है कि शुक्ल पक्ष की चाँदनी के बाद कृष्णपक्ष की काली रात आती ही है, यानी सुख के बाद दुःख का आगमन निश्चित ही है, यह जीवन का क्रम है, अतः कल्पना की दुनिया में घूमने के बजाय यथार्थ का सामना करना चाहिए।
स्वयं को उसी के साथ अनुकूल बनाने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में वर्तमान स्थिति के अनुसार जीने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि कल्पना की दुनिया में घूमने से हम सच्चाई से दूर होंगे और हमारा दुःख अधिक प्रबल होगा, दोगुना होगा।
3. दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,
देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।
दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर ?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।
भावार्थ:
कवि कहते हैं कि साहस होने के बावजूद दुविधा में फंसा इंसान कोई भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे हतप्रभ इंसान को कोई भी रास्ता पूरी तरह से साफ नहीं दिखाई देता। शारीरिक तौर पर वह सुखी हो, स्वस्थ हो फिर भी मानसिक रूप से उसके दुःखों का कोई अंत नहीं होता, वह सदा परेशान रहता है। उसको तब और दुःख होता है जब सुख के अवसर मिलने पर भी वह सुख से वंचित रह गया हो।
जिस तरह वसंत बीत जाने के बाद पेड़ों में फूल आएं भी तो अधिक खुशी नहीं होती, उसी तरह सही समय पर सफलता न मिल पाने के कारण बाद में मिली सफलता उतनी खुशी नहीं दे पाती। ऐसी स्थिति में कवि की सलाह यह है कि जीवन में जो प्राप्त नहीं हुआ है, उसे भुलाकर हमें अपने भविष्य के निर्माण का प्रयास करना चाहिए, यही सबसे अच्छा है। क्योंकि अतीत की यादों को लेकर कल्पना की दुनिया में घूमने से दुःख और प्रबल होंगे।
शब्दार्थ-टिप्पण:
- छाया – भ्रम, दुविधा, आभास
- सुरंग – सुंदर रंगोंवाली, रंग-बिरंगी
- छबियों की चित्रगंध – चित्र की स्मृति या याद के साथ उसके आसपास की गंध का अनुभव
- यामिनी – तारों भरी चाँदनी रात
- कुंतल – लंबे केश (बाल)
- सरमाया – पूंजी
- प्रभुता का शरण-बिंब – बड़प्पन का अहसास
- दुविधाहत साहस – साहस होते हुए भी दुविधाग्रस्त रहना
- छअन – स्पर्श
- मुगतृष्णा – छलावा
- भरमाया – भूलापड़ा
- कृष्णा काली
- पंथ – मार्ग
- वरण करना – स्वीकार करना, चुनना, अपनाना
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