GSEB Class 10 Hindi Kshitij Solutions Chapter 6 यह दंतुरित मुसकान, फसल

NCERT Solutions for Class 10 Hindi: Chapter 06 यह दंतुरित मुसकान, फसल

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Practice Class 10 Hindi Solutions: Chapter 06 यह दंतुरित मुसकान, फसल

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प्रश्न-अभ्यास

 

Question 1. 'वह दंतुरित मुसकान' कविता के आधार पर शिशु की मुसकान के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
Answer: शिशु की दंतुरित मुसकान देखकर कवि का उदास, गंभीर चेहरा आनंदित हो जाता है। कवि को ऐसा लगता है कि यह मुसकान किसी मृत व्यक्ति को भी जीवित कर सकती है। शिशु के स्पर्श से पत्थर जैसा दिल रखने वाला व्यक्ति भी स्नेह से भर सकता है। शिशु का स्पर्श पाकर बाँस और बबूल जैसी सूखी और कांटेदार वनस्पति से भी शेफालिका जैसे सुंदर फूल गिरने लगते हैं।
In simple words: छोटे बच्चे की हँसती हुई सूरत देखकर कवि का मन खुश हो जाता है, जैसे एक पत्थर भी पिघलकर प्यार में बदल जाए और सूखे पेड़ भी फूलों से भर जाएँ।

Exam Tip: शिशु की मुसकान के प्रभाव का वर्णन करते समय कवि की भावनाओं और प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 2. शिशु और बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?
Answer: शिशु की मुसकान स्वाभाविक, सरल और पवित्र होती है, उसमें अपनापन और मिठास होती है। यह मुसकान प्रेम से भरी होती है। इसके विपरीत, बड़े व्यक्ति की मुसकान बनावटी होती है। उसमें स्वार्थ की भावना छिपी होती है और उसमें सरलता नहीं होती। अपनत्व का भी अभाव होता है। बड़ों की मुसकान उनकी इच्छाओं और समय पर निर्भर करती है।
In simple words: बच्चों की हँसी सच्ची होती है, जबकि बड़ों की हँसी अक्सर दिखावटी और किसी मतलब के लिए होती है, जो उनके मन और हालात पर निर्भर करती है।

Exam Tip: दोनों मुसकानों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उनकी विशेषताओं जैसे कि सहजता, स्वार्थ, और निर्भरता को बिंदुवार बताएँ।

 

Question 3. कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है ?
Answer: कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य का चित्रण करने के लिए चार मुख्य बिंबों का उपयोग किया है:
1. मुसकान देखकर उदासीन, मृत समान व्यक्ति का आनंदित होना
2. झोपड़ी में कमल का खिलना
3. पत्थर का पिघलकर जल बनना और
4. बाँस और बबूल के पेड़ से भी फूलों को झड़ते हुए देखना।
In simple words: कवि ने बच्चे की हँसी को अलग-अलग तरीकों से समझाया है: जैसे दुखी आदमी खुश हो जाए, कमल झोपड़ी में खिल जाए, पत्थर पानी बन जाए, और सूखे पेड़ से भी फूल गिरने लगें।

Exam Tip: बिंबों का उल्लेख करते समय, प्रत्येक बिंब के पीछे छिपी भावना और दृश्य को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 4. भाव स्पष्ट कीजिए :
(क) छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात ।
(ख) छू गया तुमसे कि झरने लगे शेफालिका के फूल बांस या कि बबूल
Answer:
(क) शिशु की दंतुरित मुसकान देखकर कवि बहुत भावुक हो उठता है। उसे ऐसा लगता है कि खिला हुआ कमल का फूल तालाब को छोड़कर उसकी झोपड़ी में आ गया है। यह शिशु की सुंदरता और पवित्रता को दर्शाता है।
(ख) कवि कहते हैं कि बालक की दंतुरित मुसकान का स्पर्श बाँस-बबूल जैसे कठोर हृदय वाले व्यक्ति को भी प्रसन्न कर देता है और उनके चेहरे पर भी मुसकान खिल उठती है। यह मुसकान की परिवर्तनकारी शक्ति को बताता है।
In simple words: (क) कवि कहते हैं कि बच्चे की हँसी देखकर लगता है, जैसे तालाब का कमल मेरी झोपड़ी में आ गया हो। (ख) बच्चे के छूने भर से कठोर दिल वाले लोग भी खुश हो जाते हैं, और उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

Exam Tip: किसी भी काव्यांश का भाव स्पष्ट करते समय, कवि की भावनाएँ, प्रतीक और उनका अर्थ सरल शब्दों में व्यक्त करें।

 

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

 

Question 1. मुसकान के लिए कवि ने दंतुरित' विशेषण का उपयोग क्यों किया होगा ?
Answer: शिशु की उम्र लगभग छह से आठ माह की ही होगी। उसके मुँह में दो-चार छोटे-छोटे दाँत (दंतुली) निकल आए होंगे और जब शिशु मुसकुराता होगा तब वे दाँत दिखाई दे जाते होंगे। संभवतः इसी वजह से कवि ने मुसकान को दंतुरित कहा है, क्योंकि यह विशेषण दाँतों के साथ वाली मुसकान को दर्शाता है।
In simple words: कवि ने 'दंतुरित' शब्द का उपयोग इसलिए किया होगा, क्योंकि शिशु के नए-नए छोटे दाँत दिखाई देने लगे थे और उसकी मुस्कान में वे दाँत स्पष्ट दिखते थे।

Exam Tip: विशेषण के प्रयोग का कारण स्पष्ट करते समय, उसकी शाब्दिक व्याख्या के साथ-साथ कवि के भाव को भी शामिल करें।

 

Question 2. शिशु की मुसकान देखकर कवि को क्या लगता है?
Answer: कवि के अनुसार शिशु की दंतुरित मुसकान मृत व्यक्ति के हृदय में भी जान डाल कर, उसे जीवन से भर सकती है। यह मुसकान इतनी शक्तिशाली है कि वह किसी भी उदासीन व्यक्ति के मन में आशा और प्रसन्नता का संचार कर सकती है।
In simple words: कवि को लगता है कि बच्चे की हँसी इतनी प्यारी है कि वह मरे हुए इंसान में भी जान डाल सकती है और उसे खुश कर सकती है।

Exam Tip: कवि के विचारों को व्यक्त करते समय, मुसकान की शक्ति और उसके सकारात्मक प्रभावों पर जोर दें।

 

Question 3. बच्चे का धूल-धूसरित शरीर कवि को कैसा लगता है ?
Answer: कवि को बच्चे का धूल-धूसरित शरीर ऐसा लगता है, मानो कमल का फूल सरोवर को छोड़कर झोपड़ी में खिल गया हो। यह धूल में सने हुए शरीर की स्वाभाविक सुंदरता और मासूमियत को दर्शाता है, जिसे कवि बहुत पसंद करता है।
In simple words: कवि को बच्चे का मिट्टी से सना शरीर ऐसा लगता है, जैसे कोई कमल का फूल तालाब से निकलकर झोपड़ी में खिल गया हो।

Exam Tip: उपमा का प्रयोग करते हुए कवि के भाव को स्पष्ट करें और यह बताएँ कि कवि ने धूल-धूसरित शरीर में भी सुंदरता कैसे देखी।

 

Question 4. शिशु के स्पर्श से प्राकृतिक वस्तुओं में क्या-क्या परिवर्तन महसूस होता है ?
Answer: कवि को ऐसा लगता है कि शिशु के कोमल शरीर का स्पर्श पाकर कठोर पत्थर भी पिघलकर जल बन गया होगा। बाँस जैसे सूखे तथा बबूल जैसे कांटेदार पेड़ों में भी शिशु के स्पर्श से शेफालिका के फूल झरने लगते हैं। यह शिशु के स्पर्श की अद्भुत और परिवर्तनकारी शक्ति को दिखाता है।
In simple words: कवि को लगता है कि बच्चे के छूने से कठोर पत्थर भी पिघल जाते हैं, और बाँस-बबूल जैसे सूखे पेड़ों से भी सुंदर फूल झरने लगते हैं।

Exam Tip: प्राकृतिक वस्तुओं में होने वाले परिवर्तनों को कवि की कल्पना के माध्यम से प्रस्तुत करें और उसके भावनात्मक पहलू पर ध्यान दें।

 

Question 5. कवि ने शिशु और उसकी मां का धन्य क्यों कहा है ?
Answer: कवि शिशु को देखकर, उसकी दंतुरित मुसकान देखकर बहुत प्रसन्न है और अपनी इस खुशी का कारण शिशु को बताते हुए कहता है कि यदि तुम्हारी माँ न होती तो तुम्हारा अस्तित्व न होता। न तो तुम मेरी खुशी का कारण बनते। इसलिए कवि ने शिशु और माँ दोनों को भाग्यशाली कहा है।
In simple words: कवि ने बच्चे और उसकी माँ को धन्य इसलिए कहा है, क्योंकि माँ के कारण ही शिशु का अस्तित्व है और शिशु की हँसी से कवि को असीम खुशी मिलती है।

Exam Tip: माँ के योगदान और शिशु के अस्तित्व को कवि की खुशी के स्रोत के रूप में स्पष्ट करें।

 

Question 6. कवि ने शिशु से स्वयं को 'इतर' तथा 'अन्य' क्यों कहा है ?
Answer: कवि ने शिशु से खुद को 'इतर' तथा 'अन्य' इसलिए कहा है कि प्रवासी होने के कारण वह पिता के कर्तव्यों का पालन नहीं कर सका है। ऐसी स्थिति में शिशु पिता के प्यार से वंचित रहा। मानो कवि प्रायश्चित स्वरूप अपने आप को 'इतर' तथा 'अन्य' कह रहा है, क्योंकि वह अपने बच्चे के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पाया।
In simple words: कवि ने खुद को बच्चे से 'अलग' इसलिए कहा, क्योंकि वह यात्री था और पिता के रूप में बच्चे को पूरा प्यार नहीं दे पाया, जिससे वह खुद को पराया महसूस करता है।

Exam Tip: 'इतर' और 'अन्य' शब्दों के प्रयोग के पीछे कवि के आत्मग्लानि और प्रवासी जीवन के प्रभावों को स्पष्ट करें।

 

Question 7. कवि शिशु से आंख फेर लेने की अनुमति क्यों मांगता है?
Answer: शिशु कवि की ओर लगातार देख रहा था। कवि को लगता है कि शिशु देखते-देखते थक गया है। उसे पहचानने का प्रयास करके भी वह थक गया है। कवि को ऐसा लगता है कि यदि वह अपनी आँखें घुमा लेगा तो शिशु का देखना रुक जाएगा, जिससे उसकी आँखों की थकावट दूर हो जाएगी। अतः शिशु से खुद की आँखें फेर लेने की अनुमति माँगता हुआ लगता है।
In simple words: कवि बच्चे से आँखें फेरने की अनुमति इसलिए माँगता है, क्योंकि उसे लगता है कि बच्चा उसे देखते-देखते थक गया है और उसकी थकान दूर करने के लिए उसे अपनी दृष्टि हटानी चाहिए।

Exam Tip: शिशु की सहजता और कवि की संवेदनशीलता को उजागर करते हुए, अनुमति माँगने के पीछे के कारण को भावनात्मक रूप से समझाएँ।

 

Question 8. कवि ने अपने आपको चिर प्रवासी क्यों कहा है?
Answer: कवि स्वभाव से घुमक्कड़ है और लगातार यात्रा में रहता है, कभी-कभी ही घर आता है। घर में भी अधिक समय तक रुक नहीं पाता, इस कारण कवि ने खुद को चिर प्रवासी कहा है। उनका जीवन एक स्थान पर स्थिर नहीं रहता, वे निरंतर यात्रा करते रहते हैं, जिससे वे अपने परिवार से दूर रहते हैं।
In simple words: कवि ने खुद को हमेशा के लिए प्रवासी इसलिए कहा है, क्योंकि वह घुमक्कड़ स्वभाव का था और लगातार यात्रा करता रहता था, घर पर बहुत कम समय बिताता था।

Exam Tip: 'चिर प्रवासी' शब्द का अर्थ और उसके पीछे कवि के जीवन शैली और स्वभाव को स्पष्ट करें।

 

Question 9. किसकी उंगलिया शिशु को मधुपर्क कराती रही हैं और क्यों ?
Answer: माँ की उँगलियाँ शिशु को मधुपर्क कराती रही हैं, क्योंकि पिता तो हमेशा यात्रा में ही रहता था। माँ ही बच्चे का पालन-पोषण करती है और उसे स्नेह देती है, इसलिए यह जिम्मेदारी माँ ने ही निभाई।
In simple words: माँ की उँगलियाँ बच्चे को मधुपर्क कराती थीं, क्योंकि पिता हमेशा बाहर रहता था और माँ ही बच्चे का ध्यान रखती थी।

Exam Tip: माँ की भूमिका और पिता की अनुपस्थिति के कारण को स्पष्ट करें, जिससे शिशु के पालन-पोषण में माँ की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया जा सके।

 

Question 10. कवि ने स्वयं को अतिथि क्यों कहा है?
Answer: निरंतर यात्रा में रहने के कारण कवि कभी-कभी कुछ दिनों के लिए घर आता है। शिशु से वह पहली बार मिल रहा होता है। उसके आने की कोई निश्चित तिथि तय नहीं है, इसलिए वह अपने आप को अतिथि कह रहा है। यह उसकी प्रवासी जीवनशैली और परिवार से दूरी को दर्शाता है।
In simple words: कवि ने खुद को मेहमान इसलिए कहा है, क्योंकि वह हमेशा यात्रा करता था और घर पर कम ही आता था, जिससे वह अपने बच्चे के लिए एक अपरिचित व्यक्ति जैसा था।

Exam Tip: कवि के प्रवासी स्वभाव और शिशु के साथ उसके सीमित संपर्क को अतिथि कहने का मुख्य कारण बताएँ।

 

Question 11. कवि को शिशु की मुसकान कब और अधिक सुंदर लगती है?
Answer: शिशु प्रवासी पिता (कवि) को कुछ पहचानने लगा है, इसलिए वह बीच-बीच में कवि को तिरछी दृष्टि से देख लेता है। जब कवि से उसकी आँख मिलती है तब शिशु अपने छोटे दाँतों से मुसकुरा देता है। तब वह दंतुरित मुस्कान कवि को और अधिक सुंदर लगती है, क्योंकि उसमें अपनत्व की भावना दिखती है।
In simple words: जब बच्चा कवि को पहचानकर तिरछी नज़र से देखता है और आँखें मिलने पर दाँत दिखाकर हँसता है, तब कवि को उसकी मुस्कान सबसे सुंदर लगती है।

Exam Tip: शिशु के पहचानने और प्रतिक्रिया देने के क्षण को उजागर करें, क्योंकि यही वह बिंदु है जहाँ कवि को मुसकान में विशेष सौंदर्य दिखाई देता है।

 

Question 12. कवि ने फसल को नदियों के जल का जादु क्यों कहा है?
Answer: नदियों के जल से सिंचित होकर ही फसल उगती है, बढ़ती है और तैयार होती है। जल के अभाव में फसल का अस्तित्व संभव नहीं है। जल पाकर फसल का तैयार होना किसी जादू से या चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि यह एक अदृश्य शक्ति की तरह जीवन प्रदान करता है।
In simple words: कवि ने फसल को नदियों के जल का जादू इसलिए कहा है, क्योंकि नदियों के पानी से ही फसल उगती और बढ़ती है, और इसके बिना फसल का अस्तित्व असंभव है, जो एक चमत्कार जैसा लगता है।

Exam Tip: नदियों के जल के महत्व और फसल के जीवन चक्र में उसके योगदान को 'जादू' के रूप में स्पष्ट करें।

 

Question 13. 'हाथों के स्पर्श' से कवि का क्या आशय है?
Answer: 'हाथों के स्पर्श' की गरिमा से कवि का मतलब उन लाखों-करोड़ों किसानों और मजदूरों के शारीरिक श्रम से है जो खेती में जमीन की जुताई-बुवाई से लेकर निराई-सिंचाई, कटाई आदि कार्यों में शामिल रहे हैं। यह श्रम ही फसल को जीवन देता है।
In simple words: 'हाथों के स्पर्श' का मतलब किसानों और मजदूरों की कड़ी मेहनत और उनका शारीरिक श्रम है, जो फसल उगाने के हर काम में लगता है।

Exam Tip: 'हाथों के स्पर्श' के पीछे छिपे मानवीय श्रम और उसके महत्व को स्पष्ट करें, खासकर किसानों और मजदूरों के योगदान पर जोर दें।

 

Question 14. फसल को मिट्टी का गुणधर्म क्यों कहा गया है?
Answer: धूप और हवा, नदियों का जल और परिश्रम के बाद भी मिट्टी के बिना फसल की कल्पना तक नहीं की जा सकती। साथ ही हर फसल के लिए एक अलग तरह की मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसलिए फसल को मिट्टी का गुणधर्म कहा गया है, क्योंकि मिट्टी ही उसका मूल आधार है।
In simple words: फसल को मिट्टी का गुणधर्म इसलिए कहा गया है, क्योंकि बिना मिट्टी के फसल की कल्पना भी नहीं की जा सकती और हर फसल के लिए खास तरह की मिट्टी जरूरी होती है।

Exam Tip: मिट्टी की मूलभूत भूमिका और विभिन्न फसलों के लिए उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं को बताते हुए 'गुणधर्म' शब्द के अर्थ को समझाएँ।

 

Question 15. फसल को नदियों के जल का जादू क्यों कहा गया है?
Answer: फसल की सिंचाई के लिए नदियों का जल विभिन्न तरीकों से प्रयोग किया जाता है, जिससे फसल विकसित होकर समय पर तैयार होती है और पकती है। बिना जल के फसल का होना लगभग असंभव हो जाता है। इसलिए फसलों को नदी का जादू कहा गया है, क्योंकि यह जीवनदायिनी शक्ति है।
In simple words: फसल को नदियों के जल का जादू इसलिए कहा गया है, क्योंकि नदियों का पानी ही फसल को उगाता, बढ़ाता और तैयार करता है, और पानी के बिना फसल का होना असंभव है।

Exam Tip: नदियों के जल के महत्व को चमत्कारी प्रभाव के रूप में प्रस्तुत करें, जिससे फसल के विकास और अस्तित्व में उसकी केंद्रीय भूमिका स्पष्ट हो।

 

Question 16. फसल के लिए हवा तथा सूर्य-किरणों का महत्त्व समझाइए।
Answer: बीज के अंकुरण के लिए उचित ताप तथा हवा (श्वसन के लिए) भी आवश्यक है। फसल की वृद्धि में वनस्पति द्वारा बनाए गए कार्बोहाइड्रेट सहायक होते हैं। हवा के बिना यह संभव नहीं हो सकता। ताप उसे सूर्यकिरणों से ही मिलता है। इस प्रकार, फसल के पकने में भी हवा तथा सूर्यप्रकाश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
In simple words: फसल के लिए हवा और सूरज की किरणें बहुत जरूरी हैं। हवा सांस लेने और कार्बोहाइड्रेट बनाने में मदद करती है, जबकि सूरज की रोशनी फसल को पकने के लिए गर्मी देती है।

Exam Tip: हवा और सूर्य-किरणों के जैविक कार्यों (श्वसन, प्रकाश संश्लेषण, पकना) को स्पष्ट करते हुए उनके महत्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बताएँ।

 

Question 17. 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' का क्या तात्पर्य है ?
Answer: हालाँकि फसल के उत्पादन के लिए मिट्टी, जल, ताप, वायु और बीज आवश्यक हैं, फिर भी वह मनुष्य के हाथों के परिश्रम के बिना संभव नहीं है। तमाम यंत्रों और सुविधाओं का उपयोग श्रमिकों और किसानों द्वारा ही होता है। जिनके बिना फसल का होना असंभव है। उसके इसी श्रम को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' कहा है, जो फसल को जीवन देता है।
In simple words: 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' का अर्थ है किसानों और मजदूरों की कड़ी मेहनत। भले ही प्राकृतिक चीजें फसल के लिए जरूरी हैं, लेकिन इंसानों की मेहनत के बिना फसल उगना असंभव है।

Exam Tip: प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ मानवीय श्रम (किसानों और मजदूरों) के महत्व को स्पष्ट करें, जिससे फसल उत्पादन में 'गरिमा' का अर्थ समझ में आ सके।

 

Question 18. फसल कविता का प्रतिपाद्य संक्षेप में लिखिए।
Answer: कवि ने फसल के तैयार होने में हवा, पानी, ताप जैसे प्राकृतिक संसाधनों तथा किसान की मेहनत को मुख्य कारण माना है। यानी फसल किसान के श्रम तथा प्राकृतिक संसाधनों के संयोजन का परिणाम है। मिट्टी की अलग-अलग तासीर, जलवायु (हवा-ताप-पानी) की भिन्नता और श्रमिक के हाथों का श्रम ही फसल के रूप में हमें मिलता है। कविता में प्राकृतिक संसाधनों के साथ ही कृषक के श्रम के महत्व को भी बताया गया है।
In simple words: फसल कविता का मुख्य संदेश यह है कि फसल प्राकृतिक चीज़ों (जैसे पानी, हवा, धूप) और किसान की मेहनत का मिलाजुला नतीजा है। कवि ने बताया है कि फसल के लिए इन सभी का योगदान बहुत जरूरी है।

Exam Tip: कविता का प्रतिपाद्य लिखते समय, प्राकृतिक तत्वों और मानवीय श्रम के सह-अस्तित्व और उनके संयुक्त योगदान पर जोर दें।

 

Question 19. फसल कविता में कवि का क्या संदेश है ?
Answer: फसल कविता में कवि ने यह बताया है कि फसल प्राकृतिक संसाधनों तथा कृषक के श्रम के विचारशील संयुक्त प्रयासों की ही देन है। इनमें से किसी भी एक के अभाव में उत्पादन संभव नहीं है। सभी की अपनी-अपनी उपयोगिता है। हमें उनमें से किसी की भी अनदेखी न करके उनके संरक्षण का प्रयास करना चाहिए, ताकि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बना रहे।
In simple words: फसल कविता का संदेश है कि फसल प्रकृति और किसान दोनों की मेहनत से बनती है। हमें इन दोनों की अहमियत समझनी चाहिए और उनका ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि किसी एक के बिना भी फसल उगाना मुश्किल है।

Exam Tip: कवि के संदेश को स्पष्ट करते समय, प्रकृति और मानव श्रम के परस्पर संबंध और संरक्षण की आवश्यकता को मुख्य बिंदु के रूप में प्रस्तुत करें।

 

यह दंतुरित मुसकान, फसल Summary in Hindi

 

कवि-परिचय :

नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उनका जन्म बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में सन् 1911 में हुआ। उनकी आरंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में हुई, फिर अध्ययन के लिए काशी और कोलकाता गए। 1936 में वे श्रीलंका गए और वहीं पर बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए। दो वर्ष के प्रवास के बाद वे भारत लौटे। घुमक्कड़ और अक्खड़ स्वभाव के नागार्जुन ने अनेक बार संपूर्ण भारत की यात्रा की। उनका देहांत सन् 1998 में दिल्ली में हुआ।

राजनैतिक सक्रियता के कारण उन्होंने किसान आंदोलन, संपूर्ण क्रांति जैसे आंदोलनों में भाग लिया, अनेक बार जेल गए। हिंदी तथा मैथिली में समान रूप से लिखनेवाले नागार्जुन ने बांग्ला तथा संस्कृत में भी कविताएँ लिखीं। मैथिली में वे 'यात्री' नाम से प्रसिद्ध हैं।

लोकजीवन से नागार्जुन का गहरा संबंध था। वे अपने समय की समाज विरोधी शक्तियों, समाज की पतनशील स्थितियों, राजनीति स्वार्थ - भ्रष्टाचार तथा शोषितों-वंचितों के प्रति विशेष रूप से जागरूक थे। उनकी कविता की भाषा ठेठ बोलचाल से लेकर संस्कृत तत्सम पदावली युक्त है। उनकी भाषा विषय के अनुरूप है। समसामयिक बोध के साथ गहराई से जुड़े नागार्जुन लोक तथा भद्र समाज दोनों में समानरूप से लोकप्रिय रहे। उनकी कविताओं में व्यंग्य का स्वर मुखर है।

इसी कारण उनकी आंदोलन-धर्मी कविताएं पर्याप्त लोकप्रिय हुईं। छंदबद्ध तथा छंदमुक्त दोनों तरह की कविताएँ नागार्जुन ने लिखी हैं। हिन्दी साहित्य में कविता तथा उपन्यास के क्षेत्र में उनका विशिष्ट योगदान है। उनकी प्रमुख काव्य कृतियाँ हैं – भस्माकर (खंडकाव्य), युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आँखें, तुमने कहा था, हजार-हजार बाहोंवाली, पुरानी जूतियों का कोरस, आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने तथा मैं मिलटरी का बूढ़ा घोड़ा इत्यादि।

बलचनमा, रतौनाथ की चाची, वरुण के बेटे, बाबा बटेसरनाथ तथा दुःखमोचन इनके उपन्यास हैं। पत्रहीन नग्न गाछ (मैथिली) के लिए इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। हिंदी अकादमी, दिल्ली का 'शिखर सम्मान', उत्तर प्रदेश का भारत-भारती पुरस्कार तथा बिहार का राजेन्द्र पुरस्कार भी उल्लेखनीय हैं। इनका समग्र साहित्य नागार्जुन रचनावली (सात खंडों में) शीर्षक से प्रकाशित है।

 

कविता का सार (भाव)

 

यह दंतुरित मुसकान :

कवि ने शिशु की मुसकान के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा है कि वह मुसकान मृतक को भी जिंदा कर देगी। तुम्हारा धूलधूसरित शरीर ऐसा लगता है मानो कीचड़ से निकलकर कमल झोंपड़ी में खिल गया, कठोर पत्थर तुम्हारे स्पर्श से पिघलकर जल बन गया है। तुम्हारे स्पर्श से बांस या बबूल के पेड़ से भी शेफालिका के फूल झड़ने लगते हैं।

कवि शिशु के प्रति आभार व्यक्त करता है तथा माता को धन्य कहता है। स्वयं को प्रवासी होने के कारण अपरिचित, इतर तथा अन्य कहता है। शिशु की कनखियों से देखने का प्रयास तथा आँख मिलने पर मुस्कुरा उठना मोहक लगता है, जिससे कवि (पिता) के हृदय में वात्सल्य उमड़ पड़ता है।

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूल-धूसरित तुम्हारे ये गात....
छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी मे खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल
बांस थाकि बबूल ?

 

भावार्थ:

शिशु की दंतुरित मुस्कान से कवि इतना अधिक प्रभावित होता है कि उसे वह मृतक में भी जान डाल देनेवाली लगती है यानी सबको खुश कर देगी। शिशु का धूल-धूसरित शरीर कवि को ऐसा लगता है जैसे कोई कमल सरोवर से निकलकर झोपड़ी में खिला हो। अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कवि कहता है कि निश्चय ही तुम्हारे स्पर्श से पिघल कठोर पाषाण जल बना गया होगा। दयाहीन हृदय भी तुम्हारे स्पर्श से पिघल जाएगा। तुम्हारे स्पर्श में जो कुछ भी आएगा वह चाहे बबूल हो या बाँस उससे भी कोमल फूल झरने लगेंगे यानी कितना भी नीरस व्यक्ति भी तुम्हारी मुसकान देखेगा तो उसके मुंह से कोमल शब्दों के फूल झरने लगेंगे।

तुम मुझे पाए नहीं पहचान?
देखते ही रहोगे अनिमेष!
थक गए हो?
आँख लूँ मैं फेर?
क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?
यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज
मैं न सकता देख,
मैं न पाता जान
तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य !

 

भावार्थ :

शिशु की दंतुरित मुसकान पर मुग्ध होकर कवि उसकी जननी के प्रति भी आभार व्यक्त करता है। तुम जो अपलक दृष्टि से मुझे पहचानने का प्रयास कर रहे हो। इस प्रयास में तुम थक गए लगते हो, अतः मैं अपनी दृष्टि उधर से हटा लेता हूँ। कोई बात नहीं जो तुम पहली बार में पहचान न पाए। तुम्हारी माँ यदि माध्यम न बनी होती तो मैं न तो तुम्हारी मुसकान देख पाता न ही उसकी मधुरता का अनुभव कर पाता। तुम और तुम्हारी जननी दोनों धन्य हो, पर मैं तो तुम्हारे लिए पराया हूँ, अन्य हूँ, इतर हूँ।

चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य !
इस अतिथि से प्रिय तुम्हारा क्या रहा संपर्क
उँगलियाँ माँ की कराती रही हैं मधुपर्क
देखते तुम इधर कनखी मार
और होती जब कि आखें चार
तब तुम्हारी दंतुरित मुसकान
मुझे लगती बड़ी ही छविमान !

 

भावार्थ :

कवि शिशु से कहता है कि मैं तो चिर प्रवासी हूँ अतः तुम्हारे लिए तो अतिथि ही हूँ। मेरा तुमसे कोई संपर्क नहीं है। तुम्हारी माँ ही अपनी उँगलियों से तुम्हें शहद आदि चटाती रही, अतः तुम उसे ही पहचानते हो। जब तुम मेरी तरफ कनखियों से देखते हो और मुझसे तुम्हारी आँखें मिलती हैं, तब तुम्हारी दंतुरित मुसकान मुझे बहुत भली लगती है, सुंदर लगती है।

 

'फसल' कविता का सार (भाव):

'फसल' कविता में कवि ने 'फसल क्या है ?' प्रश्न का उत्तर देते हुए फसल का परिचय दिया है। अनेकों नदियों के जल, करोड़ों हाथों की मेहनत, तरह-तरह की मिट्टी का गुणधर्म, सूर्य किरणों का रूपांतर तथा हवा की थिरकन का संकोच है। अर्थात् फसल जल, मिट्टी, हवा, ताप तथा श्रम के संयोजन का सुखद परिणाम है।

 

शब्दार्थ-टिप्पण

  • जादू - चमत्कारिक प्रभाव
  • गरिमा - गौरव, महत्त्व
  • संदली - चंदनी, चंदन के रंग - गंधवाली
  • रूपांतर - परिवर्तन
  • थिरकन - लहलहाना

एक के नहीं,
दो के नहीं,
ढेर सारी नदियों के पानी का जादू :
एक की नहीं,
दो की नहीं,
लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा :
एक की नहीं,
दो की नहीं,
हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुणधर्म :

फसल क्या है?

 

भावार्थ:

कवि कह रहा है कि फसल ढेर सारी नदियों के जल के चमत्कारिक प्रभाव, लाखों-करोड़ों लोगों के हाथों के श्रम की गरिमा तथा हजारों-हजार खेतों की मिट्टी का गुणधर्म है। अर्थात् फसल नदियों के जल, खेतों की मिट्टी तथा किसानों के हाथों की महेनत का नतीजा है। इनके सम्मिलित संयोजन का प्रतिफल है – फसल।

फसल क्या है?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह
हाथों के स्पर्श की महिमा है
भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण धर्म है,
रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

 

भावार्थ :

कवि कहता है कि फसल का तैयार होना खेतों की मिट्टी के गुणधर्म, नदियों के पानी, किसान-मजदूरों के श्रम, सूर्य किरणों के ताप तथा हवा की थिरकन का योग है। मिट्टी के कणों में विद्यमान काली, भूरी, संदली मिट्टी का गुणधर्म फसल में आता है। सूर्यप्रकाश की ऊर्जा तथा हवा का वनस्पति द्वारा एक विशिष्ट रूपांतरण है – फसल।

 

शब्दार्थ-टिप्पण :

  • दंतरित - शिशु के नए-नए निकले दूध के दाँत
  • मृतक मुरदा - मरा हुआ
  • जान - प्राण धूलि धूल (मिट्टी के रजकण)
  • धूसर - सना हुआ
  • जलजात - कमल
  • परस - स्पर्श, छूना
  • पाषाण - पत्थर
  • अनिमेष - अपलक, बिना पलक झपकाए
  • संपर्क - संबंध, साथ
  • मधुपर्क - पंचामृत-दूध-दही-घी-शहद और गंगाजल को मिलाकर बनाया गया पेय
  • कनखी मार - तिरछी नजर से देखना
  • आँखें चार - (आँखें चार होना) आँखें मिलना
  • छविमान - सुंदर
  • प्रवासी - यात्री
  • शेफालिका - नीलसिंधुवार, निर्गुडी (पौधा)

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