GSEB Class 10 Hindi Kshitij Solutions Chapter 3 सवैया कवित्त

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Detailed Chapter 03 सवैया कवित्त GSEB Solutions for Class 10 Hindi

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Class 10 Hindi Chapter 03 सवैया कवित्त GSEB Solutions PDF

प्रश्न-अभ्यास

 

Question 1. कवि ने "श्रीब्रजदूलह" किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?
Answer: कवि ने "श्रीब्रजदूलह" शब्द कृष्ण के लिए उपयोग किया है। उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक इसलिए कहा गया है क्योंकि उन्हीं के कारण पूरे संसार में प्रकाश फैला है, जिससे सभी जगह खुशी और उत्सव का माहौल है।
In simple words: कवि ने 'ब्रज के दूल्हे' का प्रयोग कृष्ण के लिए किया है, उन्हें संसार का दीपक कहा गया है क्योंकि उनकी वजह से दुनिया में रोशनी, खुशी और उत्साह है।

Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में, पहले स्पष्ट रूप से बताएं कि किसके लिए शब्द का उपयोग किया गया है, फिर कारण बताएं कि उन्हें दीपक क्यों कहा गया है, जिसमें उनके प्रभाव का उल्लेख करें।

 

Question 2. पहले सवैये में से उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए, जिनमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है?
Answer: पहले सवैये में अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग इन पंक्तियों में हुआ है:
अनुप्रास अलंकार:

  • कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई । ('क' वर्ण की आवृत्ति)
  • साँवरे अंग लसै पट-पीत । ('प' वर्ण की आवृत्ति)
  • हिये हुलसे बनमाल सुहाई। ('ह' वर्ण की आवृत्ति)
रूपक अलंकार:
  • हँसी मुखचंद जुन्हाई । (मुख रूपी चंद्र)
  • जै जगमंदिर-दीपक सुंदर । (जग रूपी मंदिर के दीपक)

In simple words: पहले सवैये में कुछ पंक्तियों में एक ही अक्षर बार-बार आता है (अनुप्रास), और कुछ पंक्तियों में एक वस्तु को दूसरी वस्तु का रूप दिया गया है (रूपक)।

Exam Tip: अलंकार की पहचान के लिए, अनुप्रास में एक ही अक्षर की पुनरावृत्ति देखें और रूपक में उपमेय को उपमान का रूप देना पहचानें। उदाहरणों को सीधे कविता से उद्धृत करें।

 

Question 3. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए – पायनि नूपुर मंजु बज, कटि किंकिनि के धुनि की मधुराई । सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हूलसै बनमाल सुहाई ॥
Answer:
भाव-सौंदर्य – कवि देव ने कृष्ण के राजसी रूप का वर्णन किया है। कृष्ण के पैरों में घुंघरू मीठी ध्वनि कर रहे हैं। उनकी कमर में बंधी करधनी की भी मीठी ध्वनि बहुत अच्छी लग रही है। उनके साँवले शरीर पर पीले वस्त्र बहुत सुंदर लग रहे हैं। उनके हृदय पर वैजयंती की माला भी बहुत सुशोभित हो रही है।
शिल्प-सौंदर्य :
1. 'कटि किंकिनि' में अनुप्रास अलंकार है।
2. ब्रजभाषा का उपयोग हुआ है।
3. यह सवैया छंद है।
In simple words: इन पंक्तियों में कवि देव ने कृष्ण के शाही रूप का सुंदर वर्णन किया है, जिसमें उनके आभूषणों, वस्त्रों और फूलों की माला का उल्लेख है। इसमें ब्रजभाषा और अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।

Exam Tip: काव्य सौंदर्य स्पष्ट करते समय, पहले भाव (अर्थ) समझाएं, फिर शिल्प (भाषा, छंद, अलंकार) पर टिप्पणी करें। दोनों पक्षों को बराबर महत्व दें।

 

Question 4. दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज बसंत के बाल-रूप वर्णन परंपरागत बसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है?
Answer: कवि ने बसंत की कल्पना कामदेव के शिशु के रूप में की है। पुत्र बसंत के लिए डालियों का पालना, नए-नए पत्तों का बिछौना, तोते और मोर का शिशु से बातें करना, कोयल द्वारा बालक को हिलाना और तालियाँ बजाना, नायिका द्वारा शिशु की नजर उतारना, गुलाब द्वारा चुटकी बजाकर जगाना आदि वर्णन परंपरागत बसंत वर्णन से बिलकुल अलग है।
In simple words: कवि ने बसंत को कामदेव के बच्चे के रूप में दिखाया है, जो पुराने बसंत वर्णनों से अलग है क्योंकि इसमें डालियों को पालना, पत्तों को बिस्तर, और पक्षियों को बच्चे से बातें करते हुए दिखाया गया है।

Exam Tip: जब तुलना करने को कहा जाए, तो दोनों शैलियों की मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट रूप से बताएं और दिखाएं कि नया वर्णन कैसे पुराने से हटकर है।

 

Question 5. "प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै”- इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: बसंत ऋतु में सूर्योदय होने पर गुलाब चटककर (खिलकर) खुल जाता है, जिसे देखकर कवि कल्पना करते हैं कि गुलाब चटक कर, यानी चुटकी बजाकर, छोटे बसंत बालक को जगा रहा है। यह प्रकृति के क्रियाकलाप को मानवीय रूप देता है।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि सुबह गुलाब के फूल खिलते समय ऐसी आवाज करते हैं, जैसे वह चुटकी बजाकर बसंत रूपी बच्चे को नींद से जगा रहे हों।

Exam Tip: भाव स्पष्ट करते समय, पंक्ति का शाब्दिक अर्थ बताएं, फिर उसका अलंकारिक या लाक्षणिक अर्थ बताएं, और अंत में कवि की कल्पना को स्पष्ट करें।

 

Question 6. चांदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है ?
Answer: कवि ने चाँदनी रात को कई रूपों में देखा है:
1. आसमान स्फटिक पत्थर से बने मंदिर के समान लग रहा है।
2. चाँदनी सफेद दही के समान उमड़ रही है।
3. चाँदनी को नायिका के रूप में देखा है।
4. आसमान रूपी दर्पण के रूप में चाँदनी को देखा है।
In simple words: कवि ने चाँदनी रात को एक क्रिस्टल मंदिर, सफेद दही के उफान, एक नायिका और आकाश के आईने जैसे सुंदर रूपों में देखा है।

Exam Tip: जब कवि द्वारा विभिन्न रूपों में किसी चीज का वर्णन पूछा जाए, तो प्रत्येक रूप को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से सूचीबद्ध करें।

 

Question 7. 'प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद' इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएं कि इसमें कौन-सा अलंकार है?
Answer: कवि देव ने चंद्रमा को राधा के प्रतिबिंब के रूप में देखा है। यहाँ चंद्रमा की सुंदरता राधा के सौंदर्य से कम लग रही है, इसलिए यहाँ व्यतिरेक अलंकार है। जहाँ उपमेय और उपमान की तुलना में उपमान को उपमेय से कम बताया जाए, वहाँ व्यतिरेक अलंकार होता है।
In simple words: इस पंक्ति में चाँद, प्यारी राधा के चेहरे का प्रतिबिंब जैसा लग रहा है। यहाँ व्यतिरेक अलंकार है क्योंकि चाँद (उपमान) को राधा के मुख (उपमेय) से कम सुंदर बताया गया है।

Exam Tip: अलंकार वाले प्रश्नों में, पहले पंक्ति का अर्थ समझाएं, फिर अलंकार का नाम बताएं, और अंत में उसके लक्षण सहित यह भी बताएं कि वह अलंकार क्यों है।

 

Question 8. तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?
Answer: कवि देव ने चाँदनी रात की चमक का वर्णन करने के लिए स्फटिक शिला, सुधा-मंदिर, दही के समुद्र, दूध के फेन, मोतियों की चमक और दर्पण की स्वच्छता आदि उपमानों का उपयोग किया है। इन सभी चीजों का प्रयोग चाँदनी की सफेद और चमकीली रोशनी को दर्शाने के लिए किया गया है।
In simple words: कवि ने चाँदनी रात की सफेदी और चमक को स्फटिक पत्थर, अमृत मंदिर, दही के सागर, दूध के झाग, मोतियों की चमक और स्वच्छ दर्पण जैसी चीजों से दर्शाया है।

Exam Tip: जब उपमानों की सूची पूछी जाए, तो उन्हें स्पष्ट और क्रमानुसार प्रस्तुत करें। यह भी बताएं कि कवि इन उपमानों का उपयोग क्यों कर रहा है (जैसे चमक या सफेदी दिखाने के लिए)।

 

Question 9. पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएं बताइए।
Answer: कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ –
1. शुद्ध ब्रजभाषा का प्रयोग।
2. कवित्त और सवैया छंद का प्रयोग।
3. अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकारों का प्रयोग।
4. तत्सम शब्दों का सुंदर प्रयोग।
5. प्रकृति का सजीव चित्रण।
In simple words: कवि देव की कविताओं में शुद्ध ब्रजभाषा, कवित्त और सवैया छंद, अनुप्रास जैसे अलंकार, तत्सम शब्द और प्रकृति का जीवंत चित्रण देखने को मिलता है।

Exam Tip: काव्यगत विशेषताएं बताते समय, भाषा, छंद, अलंकार, शब्द चयन और विषय वस्तु जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल करें। प्रत्येक विशेषता को संक्षेप में स्पष्ट करें।

रचना और अभिव्यक्ति

 

Question 10. आप अपने घर की छत से पूर्णिमा की रात देखिए तथा उसके सौन्दर्य को अपनी कलम से शब्दबद्ध कीजिए।
Answer: पूर्णिमा की रात को छत से देखना एक अद्भुत अनुभव होता है। आकाश में चाँद अपनी पूरी गोल आकृति में चमकता है, उसकी दूधिया रोशनी से पूरा वातावरण नहा जाता है। तारे टिमटिमाते हुए मोतियों की तरह बिखरे होते हैं और ठंडी हवा मन को शांत कर देती है। पेड़ों की पत्तियों पर चाँदनी की हल्की चमक एक जादुई दृश्य बनाती है, जिससे प्रकृति शांत और मनोरम लगती है।
In simple words: पूर्णिमा की रात में चाँद पूरी रोशनी बिखेरता है, तारे चमकते हैं और ठंडी हवा चलती है। यह एक बहुत ही सुंदर और शांत रात होती है।

Exam Tip: ऐसे वर्णनात्मक प्रश्नों में, अपनी कल्पना का उपयोग करें और दृश्य, ध्वनि, स्पर्श जैसी इंद्रियों का वर्णन करें। शब्दों का चुनाव ऐसा हो जो चित्र को जीवंत कर सके।

अतिरिक्त प्रश्न

 

Question 1. श्रीकृण के मुख सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
Answer: श्रीकृष्ण का मुख चाँद जैसा सुंदर है, जिस पर चाँद की चाँदनी बिखर रही है। उनकी मुस्कान चाँद की बिखरी हुई किरणों जैसी लगती है, जो पूरे वातावरण को प्रकाशमान कर देती है।
In simple words: श्रीकृष्ण का चेहरा चाँद जैसा खूबसूरत है, उनकी मुस्कान चाँद की किरणों की तरह फैली हुई है, जो सब कुछ रोशन करती है।

Exam Tip: किसी भी सौंदर्य वर्णन में, उपमाओं और अलंकारों का प्रयोग करें जो वर्णन को अधिक प्रभावशाली बनाते हैं, जैसे 'चाँद जैसा मुख' या 'चाँदनी जैसी मुस्कान'।

 

Question 2. बाल-कृष्ण कवि देव को कैसे लग रहे हैं?
Answer: बाल-कृष्ण कवि देव को ब्रज के दूल्हे के समान प्रतीत हो रहे हैं, जो अपनी सुंदरता और शोभा से सबको मोहित कर रहे हैं।
In simple words: कवि देव को छोटे कृष्ण ब्रज के दूल्हे जैसे दिख रहे हैं।

Exam Tip: कवि की कल्पना को सीधे और संक्षेप में व्यक्त करें। यदि कवि ने कोई विशेष उपमा दी है, तो उसे उपयोग करें।

 

Question 3. बाल-बसंत का बिछौना कैसा है ?
Answer: बाल-बसंत का बिछौना वृक्षों के नए-नए पत्तों से बना है, जो अत्यंत कोमल और हरे-भरे हैं।
In simple words: बाल-बसंत का बिस्तर पेड़ों के नए, मुलायम पत्तों से बना है।

Exam Tip: प्रश्न के सीधे उत्तर दें और यदि संभव हो तो उसमें थोड़ी और जानकारी जोड़ें जो पाठ्यपुस्तक में दी गई हो।

 

Question 4. बाल-बसंत को चुटकी बजाकर कौन जगा रहा है?
Answer: बाल-बसंत को चुटकी बजाकर गुलाब जगा रहा है, जो सुबह खिलते समय चटकारी की ध्वनि करता है।
In simple words: सुबह जब गुलाब खिलता है, तो उसकी आवाज ऐसी लगती है जैसे वह चुटकी बजाकर बाल-बसंत को जगा रहा हो।

Exam Tip: मानवीकरण अलंकार वाले प्रश्नों में, निर्जीव वस्तु के मानवीय कार्य को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 5. बसंत को किस रूप में चित्रित किया गया है?
Answer: बसंत को राजा कामदेव के शिशु के रूप में चित्रित किया गया है, जिसे प्रकृति की सभी शक्तियाँ बड़े लाड़-प्यार से पाल रही हैं।
In simple words: बसंत को कामदेव के छोटे बच्चे के रूप में दिखाया गया है।

Exam Tip: यदि किसी अवधारणा को किसी विशेष रूप में चित्रित किया गया है, तो उस रूप को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 6. युवती कैसी सुंदर लग रही है ?
Answer: युवती मोतियों की चमक और मल्लिका के फूलों के पराग से सुशोभित सुंदर जैली (स्वच्छ) लग रही है।
In simple words: युवती मोतियों की चमक और मल्लिका के फूलों के पराग से चमकती हुई सुंदर दिख रही है।

Exam Tip: सौंदर्य वर्णन करते समय, जिन उपमाओं और विशेषणों का उपयोग किया गया है, उन्हें शामिल करें।

भावार्थ और अर्थबोधन संबंधी प्रश्न

1. पायनि नूपुर मंजु बज, कटि किंकिनि के धुनि की मधुराई । साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई । माथे किरीट बड़े दुग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई । जै जग-मंदिर-दीपक सुंदर, श्रीब्रजदूलह 'देव' सहाई ॥

भावार्थ: कवि देव ने कृष्ण के राजसी रूप सौंदर्य का वर्णन किया है और उन्हें ब्रज-दूल्हा के रूप में प्रस्तुत किया है। कृष्ण के पैरों में सुंदर नूपुर बज रहे हैं। कमर में करधनी है जिससे मीठी ध्वनि निकल रही है। उनके साँवले शरीर पर पीला वस्त्र सुशोभित हो रहा है। गले में वैजयंती माला सुशोभित हो रही है। उनके माथे पर मुकुट तथा बड़ी-बड़ी चंचल आँखें हैं। उनके मुख पर मंद-मंद मुस्कुराहट है, जो चाँदनी के समान सुंदर है। वे इस संसार रूपी मंदिर में दीपक के समान सुंदर लग रहे हैं और ब्रज के दूल्हा जैसे प्रतीत हो रहे हैं।

 

Question 1. श्रीकृष्ण क्या धारण किए हुए हैं ?
Answer: बालक कृष्ण पैरों में नूपुर, कमर में करधनी, साँवले शरीर पर पीला वस्त्र, हृदय पर वैजयंती की माला और मस्तक पर मुकुट धारण किए हुए हैं।
In simple words: श्रीकृष्ण ने पैरों में घुंघरू, कमर में करधनी, पीले कपड़े, वैजयंती माला और माथे पर मुकुट पहना है।

Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में, सभी आभूषणों और वस्त्रों को सूचीबद्ध करें जिनका उल्लेख किया गया है।

 

Question 2. श्रीकृष्ण के मुस्कान की तुलना किससे की गई है?
Answer: श्रीकृष्ण की मुस्कान की तुलना चंद्र की चाँदनी से की गई है, क्योंकि उनकी मंद हँसी उतनी ही उज्ज्वल और मनमोहक है जितनी चाँद की रोशनी।
In simple words: श्रीकृष्ण की मुस्कान की तुलना चाँद की चाँदनी से की गई है।

Exam Tip: तुलना वाले प्रश्नों में, यह स्पष्ट करें कि किस वस्तु से तुलना की गई है और क्यों।

 

Question 3. ब्रज-दूल्हा कौन है ?
Answer: ब्रज-दूल्हा के रूप में श्रीकृष्ण हैं, जिन्हें कवि ने इस कविता में अत्यंत सुंदर और शाही रूप में प्रस्तुत किया है।
In simple words: ब्रज के दूल्हे श्रीकृष्ण हैं।

Exam Tip: सीधे पहचान बताएं।

 

Question 4. कवि देव श्रीकृष्ण से क्या कामना करते हैं ?
Answer: कवि देव कामना करते हैं कि श्रीकृष्ण उनके सहायक हों, और उन्हें अपनी कृपा प्रदान करें।
In simple words: कवि देव चाहते हैं कि श्रीकृष्ण उनकी सहायता करें।

Exam Tip: कवि की इच्छा या कामना को स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में व्यक्त करें।

 

Question 5. बालकृष्ण ने कौन-कौन से आभूषण पहन रखे हैं ?
Answer: बालकृष्ण ने नूपुर, वनमाला, मुकुट, करधनी जैसे आभूषण पहन रखे हैं। ये आभूषण उनकी सुंदरता को और बढ़ा रहे हैं।
In simple words: बालकृष्ण ने पायल, फूलों की माला, मुकुट और करधनी जैसे गहने पहने हैं।

Exam Tip: सभी आभूषणों को सूचीबद्ध करें और यदि संभव हो, तो उनके स्थान का भी उल्लेख करें।

 

Question 6. 'जय जग-मंदिर-दीपक सुंदर' में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'जय जग-मंदिर-दीपक सुंदर' में रूपक अलंकार है, क्योंकि यहाँ संसार को मंदिर का और श्रीकृष्ण को दीपक का रूप दिया गया है।
In simple words: 'जय जग-मंदिर-दीपक सुंदर' में रूपक अलंकार है क्योंकि संसार को मंदिर और कृष्ण को दीपक के रूप में बताया गया है।

Exam Tip: रूपक अलंकार को पहचानते समय, देखें कि क्या दो भिन्न वस्तुओं को बिना किसी तुलनात्मक शब्द के एक-दूसरे का रूप दिया गया है।

2. कवित्त : डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के, सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै। पवन झूलावै, केकी-कीर बतरावै 'देव', कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै॥ पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन, कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै। मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि, प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।

भावार्थ: कवि ने बसंत ऋतु को कामदेव का शिशु मानकर बसंत के सौंदर्य का वर्णन किया है। शिशु राजकुमार को बड़े लाड़-प्यार से पाला जाता है। अनेक सेवक उसकी सेवा में लगे रहते हैं। यहाँ प्रकृति सेविका है, वह बाल-बसंत की सेवा में लगी है – प्रकृति में बाल-बसंत के आने से चारों ओर रौनक-सी छा गई है।

प्रकृति में चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों को देखकर ऐसा लगता है मानो प्रकृति राजकुमार बसंत के लिए रंग-बिरंगे वस्त्र तैयार कर रही हो, ठीक वैसे ही जैसे लोग बालक को रंग-बिरंगे वस्त्र पहनाते हैं। मंद हवा के झोंके से डालियाँ हिलती हैं जैसे कोई बालक को झूला झुला रहा हो। बागों में कोयल कूक रही है। उसकी आवाज सुनकर ऐसा लगता है मानो बालक बसंत के मन-बहलाव की कोशिश में घर के लोग विभिन्न प्रकार की बातें करके या आवाजें निकालकर बच्चे का मन बहलाने का प्रयास कर रहे हों ।

वातावरण में चारों ओर विभिन्न प्रकार के फूलों की खुशबू फैली है, जैसे घर की स्त्रियाँ राई-नोन जलाकर बच्चे को बुरी नजर से बचाने का टोटका कर रही हों । बसंत ऋतु में सुबह गुलाब की कली चटककर फूल बनती है तो ऐसा लगता है जैसे बाल-बसंत को बड़े प्यार से जगा रही हो जिस तरह घर में लोग बच्चे के कानों के पास चुटकी बजाकर उसे बड़े प्यार से जगाते हैं।

 

Question 1. बसंत को किस रूप में प्रस्तुत किया गया है?
Answer: बसंत को कामदेव के शिशु के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसे प्रकृति अपनी पूरी ममता और प्रेम से पाल रही है।
In simple words: बसंत को कामदेव के छोटे बच्चे के रूप में दिखाया गया है।

Exam Tip: कवि द्वारा दिए गए मानवीकरण रूप को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. बालक बसंत का पालना कहां पड़ा है?
Answer: बालक बसंत का पालना पेड़ की डाल पर पड़ा है, जो नए पत्तों से ढका हुआ है और हवा के झोंकों से धीरे-धीरे हिलता है।
In simple words: छोटे बसंत का पालना पेड़ की शाखा पर रखा है।

Exam Tip: उत्तर को कविता के विवरण के अनुसार सटीक रखें।

 

Question 3. बालक बसंत को किसी की नजर न लगे, उसके लिए क्या उपाय किया जा रहा है?
Answer: बालक बसंत के आते ही वातावरण में चारों तरफ विभिन्न प्रकार के फूलों की सुगंध फैल जाती है। ऐसा लगता है जैसे घर की बड़ी-बूढ़ी स्त्रियाँ राई और नोन जलाकर बच्चे को बुरी नजर से बचाने का टोटका कर रही हैं।
In simple words: छोटे बसंत को बुरी नजर से बचाने के लिए, जैसे घर में बड़े लोग राई और नोन जलाते हैं, वैसे ही वातावरण में फूलों की सुगंध फैल जाती है।

Exam Tip: मानवीकरण के माध्यम से किए गए उपाय को वास्तविक मानवीय रीति-रिवाजों से जोड़कर समझाएं।

 

Question 4. 'कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै' में कौन-सा अलंकार है?
Answer: 'कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै' में अनुप्रास अलंकार है, क्योंकि यहाँ 'ह' वर्ण की आवृत्ति हुई है। इसके साथ ही, कोयल को बच्चे को हिलाने और ताली बजाने का कार्य करते हुए दिखाया गया है, इसलिए इसमें मानवीकरण अलंकार भी है।
In simple words: इस पंक्ति में 'ह' अक्षर बार-बार आया है, इसलिए यह अनुप्रास अलंकार है। कोयल बच्चे को हिलाकर ताली बजा रही है, यह मानवीकरण भी है।

Exam Tip: अलंकार की पहचान करते समय, सभी संभावित अलंकारों पर विचार करें। यदि एक से अधिक अलंकार हैं, तो दोनों का उल्लेख करें।

 

Question 5. काव्य पंक्तियों में किस ऋतु का वर्णन किया गया है?
Answer: काव्य पंक्तियों में वसंत ऋतु का वर्णन किया गया है, जिसे प्रकृति के हर रूप में जीवंत और बाल रूप में प्रस्तुत किया गया है।
In simple words: इन कविताओं में बसंत ऋतु का वर्णन किया गया है।

Exam Tip: सीधे और सटीक उत्तर दें।

 

Question 6. काव्य पंक्तियों में किस छंद का प्रयोग किया गया है?
Answer: काव्य पंक्तियों में कवित्त छंद का प्रयोग किया गया है, जो रीतिकालीन कविता की एक प्रमुख विशेषता है।
In simple words: इन कविताओं में कवित्त छंद का प्रयोग हुआ है।

Exam Tip: छंद से संबंधित प्रश्न का उत्तर सीधे छंद का नाम बताकर दें।

3. कवित्त : फटिक सिलानि सौं सुधार्यो सुधा मंदिर, उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद। बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए 'देव', दूध को सो फेन फैल्यो आँगन फरसबंद। तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति, मोतिन की जोति मिल्यो मल्लिका को मकरंद । आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै, प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद ॥

भावार्थ: कवित्त में कवि देव ने शरदकालीन पूर्णिमा की रात का बहुत ही सुंदर और मनमोहक वर्णन किया है। जिसमें धरती और आकाश के सौंदर्य को दिखाया गया है। पूर्णिमा की रात में धरती और आकाश में चाँदनी की आभा इस तरह फैली हुई है जैसे स्फटिक नामक शिला से निकलने वाली दूधिया रोशनी संसार रूपी मंदिर पर प्रकाशित हो रही है। इसे देखकर ऐसा लगता है कि दही का सागर उमंग से उमड़ता चला आ रहा है।

जिसमें बाहर से भीतर कहीं दीवार नजर नहीं आ रही है। धरती पर फैली चाँदनी की खूबसूरती फर्श पर फैले दूध के झाग के समान उज्ज्वल है। ऐसे सफेद फर्श के बीच तारा के समान युवती खड़ी झिलमिला रही है, जिसमें मोतियों की चमक और मल्लिका के फूलों के रस से मिलकर प्रदीप्त हो उठी हो। इस तरह आसमान दर्पण की तरह निर्मल है, जिसमें राधा का मुखचंद्र प्रतिबिंबित हो रहा है। यहाँ कवि ने चंद्रमा की तुलना राधा के सुंदर मुखड़े से की है।

 

Question 1. सुधा-मंदिर किससे बना है? वह किसकी तरह लग रहा है?
Answer: सुधा मंदिर स्फटिक शिलाओं से बना हुआ है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि वह दही रूपी समुद्र की तरह फैला हुआ है। मंदिर में कहीं भी दीवार दिखाई नहीं दे रही है।
In simple words: सुधा मंदिर क्रिस्टल पत्थरों से बना है और यह दही के समुद्र जैसा दिखता है।

Exam Tip: प्रश्न के दोनों भागों का स्पष्ट उत्तर दें, सामग्री और तुलना दोनों को शामिल करें।

 

Question 2. मंदिर के आंगन में चंद्रिका किस प्रकार फैल रही है ?
Answer: मंदिर के आंगन में चंद्रिका दूध के झाग की तरह फैल रही है, जो अत्यंत सफेद और उज्ज्वल दिखती है।
In simple words: मंदिर के आंगन में चाँदनी दूध के झाग की तरह फैली हुई है।

Exam Tip: उपमा का उपयोग करके चांदनी के फैलाव का वर्णन करें।

 

Question 3. चाँद कैसा प्रतीत हो रहा है?
Answer: आकाश रूपी दर्पण में चाँद राधा के प्रतिबिंब जैसा प्रतीत हो रहा है, जो राधा के सौंदर्य की झलक दिखाता है।
In simple words: चाँद आकाश के आईने में राधा के प्रतिबिंब जैसा दिख रहा है।

Exam Tip: कवि की कल्पना और उपमा का उल्लेख करें।

 

Question 4. 'आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै' में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै' में अनुप्रास अलंकार है, क्योंकि यहाँ 'स' वर्ण की आवृत्ति हुई है। साथ ही, 'सी' शब्द तुलना का संकेत देता है, इसलिए उपमा अलंकार भी हो सकता है।
In simple words: इस पंक्ति में 'स' अक्षर बार-बार आया है, इसलिए यह अनुप्रास अलंकार है।

Exam Tip: अनुप्रास अलंकार की पहचान के लिए, एक ही वर्ण की आवृत्ति पर ध्यान दें।

 

Question 5. अन्य किस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है, कोई एक पंक्ति उदाहरण स्वरूप लिखिए।
Answer: अनुप्रास अलंकार का एक अन्य उदाहरण – 'तारा सी तरूनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति ।' इस पंक्ति में 'त' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
In simple words: 'तारा सी तरूनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति' पंक्ति में 'त' अक्षर बार-बार आता है, इसलिए यह अनुप्रास अलंकार का एक उदाहरण है।

Exam Tip: उदाहरण देते समय, पंक्ति को उद्धृत करें और स्पष्ट करें कि कौन सा वर्ण बार-बार आ रहा है।

कवि-परिचय:

कवि देव भाव-सौंदर्य एवं कला-कौशल की दृष्टि से रीतिकाल के सर्वाधिक प्रतिभाशाली कवि माने जाते हैं। इस महाकवि का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के कुसमरा गाँव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इस कवि को आजीविका की तलाश में दर-दर भटकना पड़ा।

औरंगजेब के बेटे आजमशा से लेकर कई छोटे-मोटे राजाओं-सामंतों के यहाँ घूमते-फिरे किंतु अपने स्वाभिमानी स्वभाव के कारण कहीं टिक कर नहीं रह पाए। यह उनके फकीराना अंदाज और स्वतंत्र प्रकृति का द्योतक है। देव को बिहारी के समान ही लोकप्रियता और सम्मान प्राप्त हुआ। देव बड़े या बिहारी, यह चर्चा साहित्य-जगत में बराबर चलती रही है।

देव कवि भी हैं और आचार्य भी। इनकी कविताओं का मुख्य विषय श्रृंगार है। इनकी रचनाओं में प्रकृति-सौंदर्य का सुंदर वर्णन प्राप्त होता है। मार्मिक प्रसंगों की पहचान एवं अभिव्यक्ति का कौशल इनकी कविता की प्रमुख विशेषता है। देव की रचनाओं की संख्या पचास से भी अधिक बताई जाती है किंतु आज इनके लगभग बीस ग्रंथ प्राप्त हैं। इनमें अधिकांश लक्षण ग्रंथ के हैं।

भाव विलास, भवानी विलास, शब्द रसायन, रसविलास, प्रेमतरंग, प्रेमचंद्रिका आदि प्रसिद्ध ग्रंथ हैं। वस्तुतः देव सौंदर्य के मादक कवि हैं। श्रृंगार को रसराज के रूप में स्थापित करने में इनका बड़ा योगदान रहा है। कवित्त और सवैया इनके प्रिय छंद रहे हैं। इनकी रचनाओं की भाषा ब्रजभाषा है। ब्रजभाषा के माधुर्य के साथ-साथ इनकी कविता में लय और नादसौंदर्य का सुंदर समन्वय हुआ है।

कविता-परिचय:

यहाँ संकलित कवित्त-सवैया में एक ओर जहाँ रूप-सौंदर्य का अलंकारिक चित्रण देखने को मिलता है, वहीं दूसरी ओर प्रेम और प्रकृति के प्रति कवि के भावों की अंतरंग अभिव्यक्ति भी है। पहले सवैये में कृष्ण के राजसी रूप सौंदर्य का वर्णन है, जिसमें उनके सामंती वैभव का चित्रण है। दूसरे कवित्त में बसंत को बालक रूप में दिखाकर प्रकृति के साथ एक रागात्मक संबंध की आभा का वर्णन है। तीसरे कवित्त में पूर्णिमा की रात में चाँद-तारों से भरे आकाश की आभा का वर्णन है। चाँदनी रात की कांति को दिखाने के लिए देव दूध में फेन जैसे पारदर्शी बिंब काम में लेते हैं, जो उनकी काव्यकुशलता का प्रमाण है।

शब्दार्थ-टिप्पण:

  • नूपुर – पायल
  • मंजु - सुंदर
  • कटि – कमर
  • किंकिनि – करधनी, कमर में पहननेवाला आभूषण
  • मधुराई – सुंदरता
  • साँवरे – साँवले
  • लसै – सुशोभित
  • पट – वस्त्र
  • पीत – पीला
  • हिये – हृदय पर
  • हुलसै – आनंदित होना
  • बनमाल – बनफूलों से बनी माला
  • किरीट – मुकुट
  • मुखचंद्र – मुखरूपी चंद्रमा
  • जुन्हाई – चाँदनी
  • सहाई – सहायक
  • द्रुम – पेड़
  • बिछौना – बिस्तर
  • सुमन झिंगला – फूलों का झबला, ढीला-ढीला वस्त्र
  • केकी – मोर
  • कीर – तोता
  • कोकिल – कोयल
  • हलावै-हुलसावै – हिलाना, बातों में मिठास
  • तारी – ताली
  • उतारो करै राई नोन – जिस बच्चे को नजर लगी हो उसके सिर के चारों ओर राई नमक घुमाकर आग में जलाने का टोटका
  • कंजकली – कमल की कली
  • सारी – साड़ी
  • मदन – कामदेव
  • महीप – राजा
  • चटकारी – चुटकी बजाकर आवाज निकालना
  • फटिक – स्फटिक, प्राकृतिक क्रिस्टल
  • सिलानि – शिला पर
  • सुधा – अमृत
  • उदधि – समुद्र
  • दधि – दही
  • उमगे – उमड़ना
  • अमंद – जो कम न हो
  • लौ – तक
  • भीति – दीवार
  • दिखैए – दिखाई दे रही है
  • तरुनि – युवती
  • ठाढ़ी – खड़ी
  • मल्लिका – बेले की जाति का एक सफेद फूल
  • मकरंद – फूलों का रस
  • आरसी – आइना, दर्पण
  • आभा – चमक
  • उजारी – उज्ज्वल ।

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