Get the most accurate GSEB Solutions for Class 10 Hindi Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest GSEB textbooks for Class 10 Hindi. Our expert-created answers for Class 10 Hindi are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी GSEB Solutions for Class 10 Hindi
For Class 10 students, solving GSEB textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी solutions will improve your exam performance.
Class 10 Hindi Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी GSEB Solutions PDF
स्वाध्याय
1. निमलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए :
Question 1. प्रभु चंदन है, तो भक्त क्या है?
Answer: प्रभु चंदन हैं, तो भक्त जल हैं।
In simple words: यदि भगवान चंदन हैं, तो भक्त पानी हैं। वे दोनों एक साथ मिलकर रहते हैं।
Exam Tip: For direct questions, ensure your answer clearly states the relationship or identity asked for in the question.
Question 2. भक्त बाती बनकर क्या चाहता है?
Answer: भक्त बाती की तरह जलकर अपने आप को भगवान को समर्पित करना चाहता है।
In simple words: भक्त दीपक की बाती बनना चाहता है, ताकि वह हमेशा जलता रहे और भगवान को अपनी भक्ति दिखा सके।
Exam Tip: When asked about a character's desire or intention, focus on the core action and its underlying purpose.
Question 3. सोने का महत्त्व कब बढ़ता है?
Answer: जब सोने के साथ सुहागा मिल जाता है, तब सोने का मूल्य और बढ़ जाता है।
In simple words: सोने का महत्त्व तब बढ़ जाता है जब उसमें सुहागा मिलाया जाता है, जिससे उसकी चमक और शुद्धता बढ़ती है।
Exam Tip: In questions involving analogies or metaphors, identify the two elements and how their combination affects the outcome.
2. निम्नलिखित प्रश्न के दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :
Question 1. भक्त किन-किन उदाहरणों द्वारा समझाता है कि मैं प्रभु के निकट हूँ – अपने शब्दों में लिखिए ।
Answer: भक्त अपनी निकटता को समझाने के लिए कई तरह के प्रतीकों का उपयोग करता है। इनमें चंदन और पानी, बादल और मोर, दीपक और बाती, मोती और धागा, और स्वामी और दास जैसे उदाहरण शामिल हैं।
In simple words: भक्त प्रभु के पास होने की बात को समझाने के लिए चंदन-पानी, बादल-मोर, दीपक-बाती और मोती-धागा जैसे उदाहरणों का प्रयोग करता है। वह खुद को सेवक और प्रभु को स्वामी बताता है।
Exam Tip: For questions asking for examples, list all relevant examples and briefly explain their significance in the context of the question.
3. उचित जोड़े बनाइए :
Question 1.
| 'अ' | 'ब' |
|---|---|
| चंदन | मोरा |
| घन बन | ज्योति |
| दीपक | पानी |
| सोना | रैदासा |
| भक्त | सुहगा |
Answer:
| 'अ' | 'ब' |
|---|---|
| चंदन | पानी |
| घन बन | मोरा |
| दीपक | ज्योति |
| सोना | सुहगा |
| भक्त | रैदासा |
Exam Tip: For matching questions, carefully read both columns and identify the most appropriate pair. Sometimes, context from the poem helps.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार-पांच वाक्यों में लिखिए :
Question 1. संत रैदासजी ने स्वयं को क्या-क्या कहकर संबोधित किया है?
Answer: जो भक्त पूरी श्रद्धा रखते हैं, वे अपनी भक्ति को अपने ईश्वर से जुड़े रहने में ही सफल मानते हैं। संत रैदास भी ऐसे ही भक्त हैं। वे खुद को पानी कहते हैं, जो प्रभु रूपी चंदन के साथ मिलकर खुशबूदार हो जाता है। वे स्वयं को मोर मानते हैं, जो बादलों को देखकर आनंद से नाचता है। वे उस चातक पक्षी जैसे हैं, जो हमेशा चंद्रमा को निहारता रहता है। वे दीपक की उस बाती की तरह हैं, जो हमेशा जलती रहती है। वे खुद को वह धागा समझते हैं, जिसमें मोती पिरोया जाता है। संत रैदास खुद को सोने जैसी कीमती धातु में मिलने वाला सुहागा भी मानते हैं। वे अपने आप को मालिक का दास यानी प्रभु का एक छोटा सेवक समझते हैं।
In simple words: संत रैदास खुद को पानी, मोर, चातक, बाती, धागा, सुहागा और प्रभु का सेवक बताते हैं। ये सब चीजें प्रभु से उनके गहरे रिश्ते को दिखाती हैं।
Exam Tip: When asked about self-identification, list each comparison Rapidas makes and briefly explain what each signifies about his devotion.
Question 2. संत रैदास भगवान को किन-किन नामों से संबोधित करते है?
Answer: संत रैदास भगवान को अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। वे भगवान को चंदन कहते हैं, जिसके साथ रहकर पानी भी खुशबूदार बन जाता है। वे ईश्वर को बादल मानते हैं, जिसे देखकर मोर खुशी से नाचने लगता है। वे भगवान को चंद्रमा कहते हैं, जिसे देखकर चातक पक्षी कभी तृप्त नहीं होता। वे ईश्वर को दीपक की तरह बताते हैं। वे भगवान को मोती, सोना और स्वामी जैसे नामों से भी पुकारते हैं।
In simple words: संत रैदास भगवान को चंदन, बादल, चंद्रमा, दीपक, मोती, सोना और स्वामी जैसे नामों से बुलाते हैं। ये सभी नाम भगवान की महानता और उनकी शक्ति को दिखाते हैं।
Exam Tip: Identify all the names or metaphors used by the devotee for God. Provide a brief explanation of why each comparison is made, if stated.
Question 3. संत रैदास ने भगवान के प्रति अपना भक्तिभाव किन-किन रूपों में व्यक्त किया है?
Answer: संत रैदास भगवान के प्रति बहुत समर्पित भक्त हैं। वे खुद को भगवान से कई तरह से जोड़ना चाहते हैं। वे बताते हैं कि यदि प्रभु चंदन हैं, तो वे पानी हैं, जिसे चंदन घिसने में काम में लिया जाता है। यदि भगवान बादल हैं, तो वे मोर हैं, जो बादलों को देखकर खुशी से नाचता है। यदि प्रभु चंद्रमा हैं, तो रैदास चातक हैं, जिसका मन चंद्रमा को देखकर कभी नहीं भरता। यदि प्रभु दीपक हैं, तो वे उसकी बाती हैं, जो खुद को जलाती रहती है। यदि भगवान मोती हैं, तो संत रैदास वह धागा हैं, जिसमें मोती को पिरोया जाता है। यदि प्रभु सोना हैं, तो रैदास सुहागा हैं। यदि भगवान स्वामी हैं, तो रैदास उनके सेवक बनकर खुद को भाग्यशाली मानते हैं।
In simple words: संत रैदास अपने भक्तिभाव को चंदन-पानी, बादल-मोर, चंद्रमा-चातक, दीपक-बाती, मोती-धागा, सोना-सुहागा और स्वामी-दास जैसे रिश्तों में दिखाते हैं। वह हमेशा भगवान से जुड़े रहना चाहते हैं।
Exam Tip: Summarize each pair of analogies used by the devotee (e.g., God is X, devotee is Y) and briefly state what each pair conveys about their spiritual connection.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
Question 1. चंदन और पानी के द्वारा भक्त और भगवान की निकटता कैसे बताई गई है?
Answer: जब चंदन की लकड़ी को पानी के साथ रगड़ा जाता है, तो वह एक पेस्ट बन जाती है। इससे चंदन और जल एक-दूसरे में मिल जाते हैं। उन्हें फिर अलग नहीं किया जा सकता है। इसी तरह, चंदन और पानी के माध्यम से भक्त और भगवान की निकटता को दर्शाया गया है।
In simple words: जैसे चंदन को पानी में घिसने पर वे एक हो जाते हैं और अलग नहीं किए जा सकते, वैसे ही भक्त और भगवान की निकटता भी ऐसी ही अभिन्न है।
Exam Tip: Explain the process of grinding चंदन (sandalwood) with water and how it symbolizes the inseparable bond between the devotee and God.
Question 3. मोती और धागे के द्वारा संत रैदास क्या कहना चाहते हैं?
Answer: मोती और धागा दोनों अलग-अलग चीजें हैं। पर जब मोतियों को धागे में पिरोया जाता है, तो वे एक रूप बन जाते हैं। संत रैदास मोती और धागे के इस उदाहरण से यह समझाना चाहते हैं कि उनकी भक्ति आत्मा और परमात्मा, यानी भक्त और भगवान के एक होने जैसी है।
In simple words: संत रैदास यह बताना चाहते हैं कि जैसे धागे में पिरोने पर मोती एक हो जाते हैं, वैसे ही भक्त और भगवान भी भक्ति के माध्यम से एक हो जाते हैं।
Exam Tip: Highlight how two distinct entities (pearl and thread) become one when combined, symbolizing the unification of the devotee's soul with the divine through devotion.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
Question 1. चातक पक्षी किसे देखता रहता है।
Answer: चातक पक्षी हमेशा चंद्रमा की ओर देखता रहता है।
In simple words: चातक पक्षी हमेशा चांद को देखता रहता है, क्योंकि वह उसी से अपनी प्यास बुझाता है।
Exam Tip: For factual recall questions, provide a concise and direct answer from the text.
Question 2. भक्त प्रभु के निकट होने की बात समझाने के लिए किसका सहारा लेते हैं?
Answer: भक्त प्रभु के पास होने की बात को समझाने के लिए कई प्रतीकों का उपयोग करते हैं।
In simple words: भक्त भगवान के साथ अपनी नजदीकी दिखाने के लिए अलग-अलग उदाहरणों और प्रतीकों का उपयोग करते हैं।
Exam Tip: Mention that the devotee uses various symbols or metaphors to express their closeness to God.
Question 3. चंदन और पानी के उदाहरण द्वारा भक्त और भगवान के बीच का कौन-सा भाव बताया गया है?
Answer: चंदन और पानी के उदाहरण से भक्त और भगवान के बीच की निकटता को दिखाया गया है।
In simple words: चंदन और पानी का उदाहरण भक्त और भगवान के बीच की गहरी नजदीकी और एकरूपता को दर्शाता है।
Exam Tip: State the emotional bond or relationship highlighted by the analogy (e.g., closeness, unity, devotion).
Question 4. मोती और धागा किस भाव का प्रतीक है?
Answer: मोती और धागा एकीकरण या एक होने के भाव को दर्शाते हैं।
In simple words: मोती और धागा यह दिखाता है कि दो अलग-अलग चीजें कैसे एक होकर एक हो सकती हैं।
Exam Tip: Identify the abstract concept or feeling that the given symbols represent.
सही वाक्यांश चुनकर निम्नलिखित विधान पूर्ण कीजिए :
Question 1. संत रैदास कहते हैं कि हे प्रभु, आपके प्रति मेरा समर्पणभाव ...
(अ) चंदन के साथ पानी जैसा है।
(ब) मोती और धागे जैसा है।
(क) सोने पर सुहागे जैसा है।
Answer: (अ) चंदन के साथ पानी जैसा है।
In simple words: संत रैदास का समर्पण भाव भगवान के प्रति चंदन और पानी के मेल जैसा है, यानी वे पूरी तरह से एक हो चुके हैं।
Exam Tip: When completing sentences with options, read the entire sentence carefully and choose the option that best fits the context and meaning from the poem.
Question 2. सोने के साथ सुहागे का ...
(अ) स्थायी संबंध होता है।
(ब) अपनापन होता है।
(क) अटूट बंधन होता है।
Answer: (अ) स्थायी संबंध होता है।
In simple words: सोने और सुहागे के बीच का संबंध कभी न खत्म होने वाला और हमेशा रहने वाला होता है, जैसे भक्त और भगवान का रिश्ता।
Exam Tip: Choose the option that accurately describes the nature of the relationship or characteristic being discussed.
सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
Question 1.
1. भक्त धागा है, तो प्रभु ...........है। (हीरा, मोती)
2. रैदास प्रभु को स्वामी मानकर खुद को ........... मानते है। (सिपाही, दास)
3. प्रभु चंदन है, तो भक्त ........... है। (पानी, अमृत)
4. जब ........ मिलता है तब सोने का महत्त्व बढ़ जाता है। (हीरा, सुहागा)
5. प्रभु बादल है, तो भक्त ........... है। (बीजली, मोर)
Answer:
1. मोती
2. दास
3. पानी
4. सुहागा
5. मोर
In simple words: इन खाली जगहों में सही शब्द भरकर वाक्यों को पूरा किया गया है, जो भक्त और भगवान के संबंधों को दिखाते हैं।
Exam Tip: For fill-in-the-blanks with choices, carefully select the word that best completes the sentence based on the context of the poem or lesson.
निम्नलिखित प्रश्नों के नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :
Question 1. प्रभुजी तुम चंदन हम ....।
(a) बाती
(b) सुवास
(c) पानी
(d) वंदन
Answer: (c) पानी
In simple words: इस पंक्ति में भक्त खुद को पानी कहते हैं, क्योंकि चंदन के साथ मिलने पर पानी भी सुगंधित हो जाता है।
Exam Tip: Recall the metaphors used in the poem to identify the correct pairing for 'चंदन' (sandalwood).
Question 2. जा कि जोति बरे ....।
(a) दिन-राती
(b) दीन-राती
(c) हमेशा
(d) मालिक
Answer: (a) दिन-राती
In simple words: यह पंक्ति दिखाती है कि दीपक की लौ दिन-रात जलती रहती है, जो भक्त की निरंतर भक्ति को दर्शाती है।
Exam Tip: Understand the context of 'जोति बरे' (light burns) in the poem to determine the frequency or duration indicated.
Question 3. प्रभुजी तुम स्वामी हम ....।
(a) मोर
(b) दासा
(c) भक्त
(d) राजा :
Answer: (b) दासा
In simple words: यदि भगवान स्वामी हैं, तो भक्त खुद को उनका दास यानी सेवक कहते हैं, जो पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।
Exam Tip: Identify the relationship established in the poem where 'स्वामी' (master) is paired with its counterpart.
Question 4. मोती और धागा .......... का प्रतीक है।
(a) सुविचार
(b) एकाकार
(c) निराकार
(d) अहंकार
Answer: (b) एकाकार
In simple words: मोती और धागा दो अलग-अलग चीजों के एक साथ जुड़कर एक होने का प्रतीक हैं, जैसे भक्त और भगवान।
Exam Tip: Recall what the merging of pearls and thread signifies in the poem's context.
Question 5. प्रभु दीपक है, तो भक्त......... है।
(a) तेल
(b) प्रकाश
(c) बाती
(d) अंधेरा
Answer: (c) बाती
In simple words: यदि भगवान दीपक हैं, तो भक्त खुद को उसकी बाती कहते हैं, जो दीपक के साथ मिलकर जलती रहती है।
Exam Tip: Remember the analogy where God is the lamp, and infer the component that represents the devotee.
Question 6. आत्मा-परमात्मा की अद्वैतता की बात ...... काव्य में की गई है।
(a) कुत्ते की सीख
(b) साधूपदेश
(c) तोता और इन्द्र
(d) प्रभुजी तुम चंदन हम पानी
Answer: (d) प्रभुजी तुम चंदन हम पानी
In simple words: 'प्रभुजी तुम चंदन हम पानी' कविता आत्मा और परमात्मा के एक होने की बात कहती है, जहाँ भक्त और भगवान अभिन्न हैं।
Exam Tip: Identify the poem that discusses the non-dualistic nature (अद्वैतता) of the soul and the supreme being.
व्याकरण
Question 1. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
1. पानी
2. चंदन
3. बास
4. चितवत्
5. स्वामी
Answer:
1. पानी – जल
2. चंदन – गंधराज, मलबज
3. बास – बू
4. चितवत् – देखना
5. स्वामी- राजा
In simple words: इन शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द दिए गए हैं, जो उनके पर्यायवाची हैं।
Exam Tip: For synonym questions, provide common and appropriate words that have the same meaning as the given term.
Question 2. निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :
Answer:
1. मित्र x शत्रु
2. स्वामी x दास
3. मालिक x सेवक
4. अंधेरा x उजाला
5. आकाश x पाताल
In simple words: यहाँ दिए गए शब्दों के उल्टे अर्थ वाले शब्द बताए गए हैं।
Exam Tip: When writing antonyms, ensure the words have opposite meanings and are appropriate for the given context.
प्रभुजी तुम चंदन हम पानी Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
संत रैदास एक महान भक्त कवि थे। उनके पदों में ईश्वर के प्रति गहरी भक्ति का भाव दिखाई देता है। उन्होंने अपने पदों में भगवान के प्रति अपने अटूट संबंधों की पुष्टि की है। इन पदों में उनका दास्य-भाव स्पष्ट हुआ है। इन पदों में उन्होंने चंदन-पानी, बादल-मोर, चाँद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, सोना-सुहागा तथा स्वामी-दास जैसे प्रतीकों के माध्यम से अपनी सच्ची भक्ति-भावना व्यक्त की है।
कविता का सार :
- चंदन और पानी : संत रैदास की भक्ति समर्पित भाव वाली है। प्रभु चंदन हैं, तो वे स्वयं को पानी कहते हैं।
- बादल और मोर : प्रभु बादल हैं, तो संत रैदास बादल को देखकर मस्ती से नाचने वाले मोर पक्षी हैं।
- दीपक और बाती : यदि प्रभु दीपक हैं, तो संत रैदास अपने आपको उस दीपक में जलने वाली बाती कहते हैं।
- प्रभु मोती, तो रैदास धागा : मोती और धागे का अटूट संबंध होता है। प्रभु मोती हैं, तो रैदास अपने आपको मोती-माला का धागा कहते हैं।
- सोना और सुहागा : सोने और सुहागे का स्थायी संबंध होता है। संत रैदास का प्रभु से इसी प्रकार का आत्मीय संबंध है।
- स्वामी और गुलाम : स्वामी यानी प्रभु के सेवक बनकर रहने में रैदास अपना सौभाग्य मानते हैं।
कविता का सरल अर्थ :
प्रभुजी तुम ....... बास समानी।
संत रैदास कहते हैं कि हे प्रभु, आपके प्रति मेरा समर्पण भाव चंदन के साथ पानी जैसा है। चंदन के साथ घिसने पर पानी में भी चंदन की सुगंध पूरी तरह फैल जाती है। हे प्रभु, आप चंदन हैं, तो मैं पानी हूँ। आपकी सुगंध भक्तिभाव के माध्यम से मेरे पूरे शरीर के अंग-अंग में व्याप्त हो गई है।
प्रभुजी तुम ....... चंद चकोरा।
संत रैदास कहते हैं कि हे प्रभु, आप मेरे लिए बादल जैसे हैं और मैं अपने आपको जंगल का मोर मानता हूँ। जैसे वर्षाऋतु में काले-काले बादलों को देखकर मोर प्रसन्न होकर नाचने लगता है, उसी तरह मैं आपको निहारकर मदमस्त हो जाता हूँ। हे प्रभु, जैसे चातक पक्षी चंद्रमा को देखता रहता है, उसी प्रकार मैं भी सदा आपकी भक्ति में सदा डूबा रहता हूँ।
प्रभुजी तुम ....... दिन-राती।
संत रैदास कहते हैं कि हे प्रभु, मेरी भक्ति दीपक में जलने वाली बाती की तरह है। जिस प्रकार दीपक की बाती अपने आपको जलाकर दीपक के साथ बने रहने में सुख का अनुभव करती है, उसी प्रकार मैं भी अपना अस्तित्व खोकर केवल आपकी भक्ति का अभिलाषी हूँ।
प्रभुजी तुम ........ मिलत सुहागा।
संत रैदास कहते हैं कि हे प्रभु, आप मेरे लिए सुंदर और चमकदार मोती की भांति हैं और मैं अपने आपको वह धागा मानता हूँ, जिसमें मोती पिरोए जाते हैं। वे कहते हैं कि जिस प्रकार मोतियों की माला का धागा मोतियों से जुड़ा रहता है, उसी तरह वे भी अपनी भक्ति के द्वारा भगवान से घनिष्ठ रूप से जुड़े रहना चाहते हैं। वे ईश्वर से अपने जुड़ाव को सोने और सुहागे के मेल की संज्ञा देते हैं।
प्रभुजी ....... करै रैदासा।
संत रैदास कहते हैं कि हे प्रभु, आप हमारे मालिक हैं और मैं आपका समर्पित सेवक हूँ। वे कहते हैं कि हे प्रभु, मेरी भक्ति तो इसी प्रकार की है।
ગુજરાતી ભાવાર્થ
સંત રૈદાસ કહે છે કે હે પ્રભુ, આપના પ્રત્યે મારો સમર્પણ ભાવ ચંદનની સાથે પાણી સમાન છે. ચંદનની સાથે ઘસવાથી પાણીમાં પણ ચંદનની સુગંધ વ્યાપી જાય છે. હે પ્રભુ, આપ ચંદન છો, તો હું પાણી છું. આપની સુગંધ ભક્તિભાવના માધ્યમથી મારા આખા શરીરના અંગોઅંગમાં વ્યાપ્ત થઈ ગઈ છે.
સંત રૈદાસ કહે છે કે હે પ્રભુ, આપ મારા માટે વાદળ સમાન છો અને હું પોતાને જંગલનો મોર માનું છું. જેવી રીતે વર્ષાઋતુમાં કાળાં કાળાં વાદળ જોઈને મોર મગ્ન થઈ નૃત્ય કરવા લાગે છે, એવી રીતે હું પણ આપને જોઈને મદમસ્ત થઈ જાઉં છું. હે પ્રભુ, જેવી રીતે ચાતક પક્ષી ચંદ્રને જોતું રહે છે, એવી રીતે હું પણ સદા આપની ભક્તિમાં હંમેશાં તલ્લીન રહું છું.
સંત રૈદાસ કહે છે કે હે પ્રભુ, મારી ભક્તિ દીપકમાં બળતી વાટ સમાન છે. જેવી રીતે દીપકની વાટ પોતાને બાળીને દીપકની સાથે સતત રહેવામાં સુખનો અનુભવ કરે છે, એવી રીતે હું પણ મારું અસ્તિત્વ ખોઈને કેવળ આપની ભક્તિની અભિલાષા કરું છું.
સંત રૈદાસ કહે છે કે હે પ્રભુ, આપ મારે માટે સુંદર અને ચમકતા મોતી સમાન છો અને હું સ્વયંને તે ઘાંગો માનું છું, જેમાં મોતી પરોવવામાં આવે છે. તેઓ કહે છે કે જેવી રીતે મોતીઓની માળાનો દોરો મોતીઓ સાથે જોડાયેલો રહે છે, તેવી રીતે તેઓ પણ પોતાની ભક્તિ દ્વારા ભગવાનથી ઘનિષ્ઠ રૂપમાં જોડાયેલા રહેવા ઈચ્છે છે. તેઓ ઈશ્વર સાથેના પોતાના સંબંધને સોના અને ટંકણખારના મેળનું નામ આપે છે.
સંત રૈદાસ કહે છે કે હે પ્રભુ, આપ અમારા માલિક છો અને હું આપને સમર્પિત સેવક છું. તેઓ કહે છે કે હે પ્રભુ, મારી ભક્તિ તો આ પ્રકારની છે.
प्रभुजी तुम चंदन हम पानी शब्दार्थ :
- जाकी-जिसकी।
- अंग-अंग – शरीर के सभी अंग।
- बास – सुगंध ।
- समानी – भर गई है, व्याप्त हो गई है।
- घन – बादल।
- बन – जंगल।
- मोरा – मोर ।
- चित्तवत – देखता है, निहारता है।
- चंद – चांद ।
- चकोरा – चकोर पक्षी।
- बाती – बत्ती (दीपक की)।
- जोति – ज्योति।
- बर – जलती रहती है।
- सोनहिं – सोने में।
- सुहागा – क्षार द्रव्य, जो सोने को गलाने के काम आता है।
- स्वामी – मालिक।
- दासा – गुलाम, सेवक।
- कर – करता है।
Free study material for Hindi
GSEB Solutions Class 10 Hindi Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी
Students can now access the GSEB Solutions for Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest GSEB syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these GSEB Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Hindi Class 10 Solved Papers
Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 01 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated GSEB Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Hindi are as per latest GSEB curriculum.
Yes, our experts have revised the GSEB Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using GSEB language because GSEB marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our GSEB Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 10 Hindi. You can access GSEB Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire GSEB Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 प्रभुजी तुम चंदन हम पानी in printable PDF format for offline study on any device.