Class 11 Geography Practice Assignments: CBSE Class 11 Geography Landforms and Their Evolution Hindi Assignment
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अतिलघु प्रश्न
प्रश्न 1. भू-आकृति क्या है?
Answer: पृथ्वी पर छोटे से मध्यम आकार के भूखंड भू-आकृति कहलाते हैं।
In simple words: पृथ्वी की सतह पर मिलने वाले प्राकृतिक रूप से बने छोटे और मध्यम आकार के भू-भाग भू-आकृति कहलाते हैं।
Exam Tip: भू-आकृति की परिभाषा में आकार (छोटे से मध्यम) और भूखंड शब्दों पर विशेष ध्यान दें।
प्रश्न 2. भू-आकृतिक कारक किन दो प्रकार की आकृतियाँ (स्थलरूपों) को बनाते हैं?
Answer: भू-आकृतिक कारक अपरदन व निक्षेपण में सक्षम हैं अतः ये दो प्रकार के स्थलरूपों का निर्माण करते हैं: अपरदित व निक्षेपित।
In simple words: अपरदन और निक्षेपण की प्रक्रियाओं के कारण भू-आकृतिक कारक मुख्य रूप से अपरदित (घिसाव से बने) और निक्षेपित (जमाव से बने) स्थलरूप बनाते हैं।
Exam Tip: दोनों प्रमुख प्रक्रियाओं (अपरदन और निक्षेपण) तथा उनके परिणामों को स्पष्ट रूप से याद रखें।
प्रश्न 3. प्रवाहित जल किन प्रदेशों में निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी है?
Answer: प्रवाहित जल आर्द्र प्रदेशों में जहाँ अत्यधिक वर्षा होती है, में सबसे महत्वपूर्ण कारक है जो धरातल के निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी है।
In simple words: जिन क्षेत्रों में बारिश बहुत ज्यादा होती है, वहाँ बहता हुआ पानी जमीन को काटने और नीचा करने का मुख्य काम करता है।
Exam Tip: 'आर्द्र प्रदेश' और 'अतिरिक्त वर्षा' इस प्रश्न के मुख्य कीवर्ड हैं।
प्रश्न 4. पेनीप्लेन या समप्राय मैदान क्या है?
Answer: नदी अपरदन के द्वारा बने मैदान समप्राय मैदान या पेनीप्लेन कहलाते हैं।
In simple words: जब नदियाँ लंबे समय तक ऊँचे इलाकों को काटकर बिल्कुल समतल या मंद ढाल वाला मैदान बना देती हैं, तो उसे समप्राय मैदान कहते हैं।
Exam Tip: अपरदन के अंतिम चरण में बनने वाले समतल मैदानों को पेनीप्लेन कहा जाता है।
प्रश्न 5. कास्र्ट स्थलाकृति का अभिप्राय स्पष्ट करो?
Answer: किसी भी चूना पत्थर या डोलोमाइट चट्टानों के क्षेत्र में भौमजल द्वारा घुलन प्रक्रिया व उसके निक्षेपण से बने स्थल रूपों को कास्र्ट स्थलाकृति के नाम से जाना जाता है।
In simple words: चूने की चट्टानों वाले क्षेत्रों में जमीन के पानी द्वारा चट्टानों के घुलने और फिर से जमने से बनी आकृतियों को कास्र्ट स्थलाकृति कहते हैं।
Exam Tip: चूना पत्थर (लाइमस्टोन) और भौमजल की घुलन क्रिया इस स्थлаकृति की मुख्य शर्त है।
प्रश्न 6. पवन किन प्रदेशों में अपरदन का महत्वपूर्ण कारक है?
Answer: पवन उष्ण मरुस्थलों व अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में अपरदन का महत्वपूर्ण कारक है।
In simple words: गर्म रेगिस्तानों और सूखे इलाकों में हवा चट्टानों को काटने और मिट्टी उड़ाने का सबसे मुख्य काम करती है।
Exam Tip: उष्ण मरुस्थल और अर्द्धशुष्क क्षेत्र पवन अपरदन के प्रमुख केंद्र होते हैं।
प्रश्न 7. जलप्रपात नदी की किस अवस्था में निर्मित होते हैं?
Answer: जलप्रपात नदी की युवावस्था में बनते हैं जब नदी पहाड़ों पर बह रही होती है।
In simple words: नदी की शुरुआती या युवा अवस्था में जब पानी ऊँचे पहाड़ों से नीचे गिरता है, तब जलप्रपात बनते हैं।
Exam Tip: नदी की युवावस्था और पहाड़ी क्षेत्र जलप्रपात के निर्माण के लिए उत्तरदायी हैं।
प्रश्न 8. जल गर्तिका व अवनमित कुंड में क्या अंतर है?
Answer: नदी तल में फँसकर छोटे चट्टानी टुकड़े एक ही स्थान पर गोल-गोल घूमकर गर्त बना देते हैं इसे जलगर्तिका कहते हैं ये ही गर्त बड़े होकर अवनमित कुंड कहलाते हैं।
In simple words: नदी के तल में पत्थरों के घूमने से बने छोटे गड्ढे जलगर्तिका कहलाते हैं और जब यही गड्ढे बड़े हो जाते हैं तो उन्हें अवनमित कुंड कहते हैं।
Exam Tip: जलगर्तिका छोटे आकार के गड्ढे होते हैं जबकि अवनमित कुंड उनके बड़े रूप होते हैं।
प्रश्न 9. जलोढ़ पंखों का निर्माण कब होता है?
Answer: जब नदी पर्वतीय क्षेत्रों से नीचे आती है तो उनका प्रवाह धीमा पड़ता है और वे अपने साथ के कंकड़ पत्थर को तिकोने पंखे के आकार में जमा कर देती है यही जलोढ़ पंख कहलाता है।
In simple words: जब तेज बहती नदी पहाड़ से मैदानी भाग में उतरती है, तो उसकी गति धीमी हो जाती है और वह अपने साथ लाए कंकड़-पत्थर को पंखे के आकार में फैलाकर जमा कर देती है।
Exam Tip: पर्वतीय क्षेत्रों से मैदान में प्रवेश करते ही ढाल कम होने से जलोढ़ पंख का निर्माण होता है।
तीन अंकों वाले प्रश्न
प्रश्न 1. नदी विसर्प की निर्माण प्रक्रिया चित्र सहित बताओ?
Answer: नदी मार्ग में S आकार के घुमाव को नदी विसर्प कहा जाता है। जब नदी मंद गति से मैदानी भागों में चलती है तो अत्यधिक बोझ के कारण इस प्रकार के मोड़ बनाती है। नदी के बाहरी किनारे पर अपरदन तथा भीतरी किनारे पर निक्षेप से घुमाव का आकार बढ़ जाता है।
In simple words: मैदानों में बहते समय नदी जब बहुत अधिक तलछट और कम ढाल के कारण साँप की तरह लहराकर चलती है, तो उसे नदी विसर्प कहते हैं।
Exam Tip: बाहरी किनारे पर कटाव (अपरदन) और भीतरी किनारे पर जमाव (निक्षेपण) विसर्प निर्माण के प्रमुख कारण हैं।
प्रश्न 2. गुम्फित नदी की निर्माण प्रक्रिया चित्र द्वारा समझाओं?
Answer: नदी की निचली घाटी में बहाव की गति मंद पड़ जाती है और नदी अपने साथ लाए अवसादों को जमा करने लगती है। इससे नदी कई शाखाओं में बंट जाती हैं। ये शाखाएं बालू की बनी दीवार से एक दूसरे से अलग होती हैं। ऐसी शाखाओं में बंटी नदी को गुम्फित नदी कहते हैं।
In simple words: जब नदी में पानी कम और रेत-कचरा बहुत ज्यादा हो जाता है, तो नदी कई छोटी-छोटी धाराओं में बँटकर बहती है, जिसे गुम्फित नदी कहते हैं।
Exam Tip: अत्यधिक अवसाद और मंद गति गुम्फित नदी के निर्माण के मुख्य कारक हैं।
प्रश्न 3. जलप्रपात एवं क्षिप्रािकाओं की निर्माण प्रक्रिया कैसे होती है?
Answer: नदी का जल किसी कठोर चट्टान से गुजरता है जिसे वह काट नही पाती और आगे मुलायम चट्टान आ जाती है जिसे वह आसानी से काट लेती है तो धीरे-धीरे नदी के तल में अन्तर आ जाता है और वह ऊपर से नीचे प्रपात के रूप में गिरने लगती है।
क्षिप्रािका: नदी तल पर जब कठोर एवं नरम चट्टानें क्रम से आ जाती है तो नदी उस पर सीढ़ी जैसी आकृति बनाते हुए बहने लगती है इस प्रक्रिया में छोटे-छोटे कई प्रपात बन जाते है इन्हें ही क्षिप्रािका कहते हैं।
In simple words: जब नदी के रास्ते में कठोर और मुलायम चट्टानें बारी-बारी से आती हैं, तो मुलायम चट्टान जल्दी कट जाती है जिससे पानी ऊँचाई से गिरने लगता है (जलप्रपात) या सीढ़ीनुमा आकृति बनती है (क्षिप्रािका)।
Exam Tip: चट्टानों की कठोरता और कोमलता में अंतर जलप्रपात और क्षिप्रािका दोनों के निर्माण का मूल आधार है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित का आरेख बनाये: (1) जलप्रपात (2) क्षिप्रािका (3) जलोढ़ पंख
Answer: (1) जलप्रपात: ऊर्ध्वाधर चट्टान से पानी का नीचे गिरना, जिसमें नीचे अवनमित कुंड बनता है।
(2) क्षिप्रािका: सीढ़ीनुमा कठोर और नरम चट्टानों पर पानी का तेजी से बहना।
(3) जलोढ़ पंख: पर्वतीय तलहटी पर शंकु या पंखे के आकार में मलबे और कंकड़-पत्थरों का निक्षेपण।
In simple words: इन तीनों स्थलरूपों को दर्शाने के लिए उनके पहाड़ी और मैदानी ढाल के रेखाचित्र बनाए जाते हैं।
Exam Tip: आरेख बनाते समय कठोर चट्टान, नरम चट्टान, और अवसाद के जमाव को स्पष्ट रूप से नामांकित करें।
प्रश्न 5. डेल्टा निर्माण को चित्र द्वारा समझायें?
Answer: नदियाँ समुद्र में गिरते समय अधिक अवसाद एवं मंदढाल के कारण बहुत मंद गति से बहती है एवं अवसाद को आकार में जमा कर देती है इसे ही डेल्टा कहते हैं।
In simple words: जब नदी समुद्र या झील में मिलने वाली होती है, तो उसकी गति धीमी हो जाती है और वह अपने साथ लाई मिट्टी को मुहाने पर त्रिकोण रूप में जमा कर देती है, जिसे डेल्टा कहते हैं।
Exam Tip: मंद ढाल, अत्यधिक अवसाद और समुद्र में प्रवेश डेल्टा निर्माण की मुख्य दशाएँ हैं।
प्रश्न 6. घोल रंध्र किस प्रकार की भू आकृति है?
Answer: घोल रंध्र भौमजल द्वारा निर्मित आकृति है यह कास्र्ट क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ की शैलो में चूना पत्थर या कैल्सियम कार्बोनेट प्रधान डोलो माइइट चट्टानों की प्रधानता होती है। इन क्षेत्रों में जल के संपर्क में आने से ये शैले घुल जाती है इस तरह कीप की आकृति के बने छिद्र घोल रंध्र कहलाते हैं। कास्र्ट क्षेत्रों में ये बहुत विस्तृत क्षेत्रों में फैले होते हैं।
In simple words: चूने की चट्टानों वाले क्षेत्रों में जमीन के पानी से घुलने के कारण जो कीप जैसी आकृति के गोल गड्ढे बन जाते हैं, उन्हें घोल रंध्र कहते हैं।
Exam Tip: कीप जैसी आकृति और चूना पत्थर की घुलनशीलता घोल रंध्र की मुख्य विशेषता है।
प्रश्न 7. भौमजल के निक्षेप से बनी भौम्यकृतियों की रचना प्रक्रिया बताये?
Answer: भूमि के अंदर बहते हुए जल से कन्दराओं का निर्माण होता है इन कन्दराओं के छत से कैल्सियम कार्बोनेट युक्त जल टपकता है इनमें मौजूद कैल्सियम नीचे जमा होता रहता है एवं नीचे लटकने लगता है इन्हें क्रमशः स्टेलेग्माइट एवं स्टेलेक्टाइट कहते हैं। कही-कही ये आपस में मिल जाते हैं उन्हें स्तंभ कहते हैं।
In simple words: गुफाओं की छतों से चूने का पानी टपकता है। ऊपर लटकने वाले हिस्से को स्टेलेक्टाइट और नीचे जमीन पर उठने वाले हिस्से को स्टेलेग्माइट कहते हैं, और दोनों के मिलने से स्तंभ बनता है।
Exam Tip: स्टेलेक्टाइट (छत से लटकने वाला) और स्टेलेग्माइट (फर्श पर उठने वाला) के अंतर को हमेशा स्पष्ट रखें।
विस्तार से जानिये: भौमकर जल / भौम जल द्वारा निर्मित अपरदित स्थलरूप
प्रश्न 8. घोल रंध्र, विलय रंध्र और लैपीज का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: घोल रंध्र - ये कीप के आकार के गर्त होते हैं जो ऊपर से वृत्ताकार होते हैं। इनकी गहराई आधा मीटर से 30 मीटर या उससे अधिक होती है।
विलय रंध्र - ये कुछ गहराई पर घोल रंध्र के निचले भाग से जुड़ी होती है। चूना पत्थर चट्टानों के तल पर घुलन क्रिया द्वारा इनका निर्माण होता है।
लैपीज - धीरे-धीरे चुनायुक्त चट्टानों के अधिकतर भाग गर्तों व खाइयों में बदल जाते हैं और पूरे क्षेत्र में अत्यधिक अनियमित पतले व नुकीले कटक रह जाते हैं, जिन्हें लैपीज कहते हैं। इनका निर्माण चट्टानों की संधियों में घुलन प्रक्रियाओं द्वारा होता है।
In simple words: कास्र्ट क्षेत्रों में पानी के घुलने से छोटे-बड़े गड्ढे (घोल रंध्र, विलय रंध्र) और नुकीली चट्टानी दीवारें (लैपीज) बनती हैं।
Exam Tip: कास्र्ट क्षेत्रों के इन अपरदनात्मक रूपों के नाम और उनके निर्माण की रासायनिक प्रक्रिया याद रखें।
प्रश्न 9. हिमदों और हिमनद द्वारा निर्मित अपरदित व निक्षेपित स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
Answer: हिमानी अपने साथ अवसाद लेकर धीरे-धीरे खिसकती है ये अवसाद तली एवं पार्श्वों में अपरदन करते हैं।
अपरदित स्थलरूप: सर्क (खड़े किनारे वाले गर्त), टार्न झील (सर्क में पानी भरने से), श्रृंग (नुकीली चोटी)।
निक्षेपित स्थलरूप: हिमोढ़ (पाश्र्व, अंतस्थ, तलस्थ), ड्रमलिन (रेत व बजरी का ढेर), भेड़ शिला।
In simple words: बर्फ की नदियों (हिमनद) के खिसकने से पहाड़ों में कटोरे जैसी आकृतियाँ (सर्क) बनती हैं और पिघलने पर मलबा जमा होकर हिमोढ़ व ड्रमलिन बनाता है।
Exam Tip: हिमनद अपरदन में 'U' आकार की घाटी और सर्क सबसे महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 10. पवन और समुद्री तरंगों द्वारा निर्मित प्रमुख स्थलरूपों का सारांश दीजिए।
Answer: पवन द्वारा निर्मित: पेडीमेंट, प्लाया, छतरक शैल, बालू टिब्बा व बरखान।
समुद्री तरंगों द्वारा निर्मित: भौं्रगु, वेदिकाएँ, कंदराएँ, पुलिन, टिब्बे, बालू रोधिका व लैगून।
In simple words: रेगिस्तान में हवा और समुद्र के किनारे लहरें अपनी ताकत से विभिन्न प्रकार की सुंदर और अनोखी आकृतियाँ बनाती हैं।
Exam Tip: कारक और उनके द्वारा बने अपरदित एवं निक्षेपित रूपों की तालिका परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सारांश तालिका: तल संतुलन के कारक और उनके स्थलरूप
| कारक | अपरदित स्थलरूप | निक्षेपित स्थलरूप |
|---|---|---|
| नदी या प्रवाहित जल | गार्ज, कैनियन, वी-आकार की घाटी, जलप्रपात | गोखुर झील, विसर्प, गुम्फित नदी, डेल्टा |
| भौम जल | घोल रंध्र, विलय रंध्र, लैपीज | स्टैलेक्टाइट, स्तंभ, स्टेलेग्माइट |
| हिमानी (हिमनद) | हिमगदर, सर्क, लटकती घाटी | हिमोढ़, एस्कर व ड्रमलिन |
| पवन | पेडीमेंट, प्लाया, छतरक शैल | बालू टिब्बे व बरखान |
| तरंगें व लहरें | भ्रगु, वेदिकाएँ, कंदराएँ व स्टैक | पुलिन, टिब्बे, बालू रोधिका व लैगून |
CBSE Class 11 Geography Assignments for Fundamental Of Physical Geography Chapter 06 Landforms And Their Evolution
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