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Detailed Chapter 6 जनसंख्या UP Board Solutions for Class 9 Social Science
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Class 9 Social Science Chapter 6 जनसंख्या UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 9 Social Science Geography Chapter 6 जनसंख्या
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में सही विकल्प चुनिए-
(i) निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में प्रवास, आबादी की संख्या, वितरण एवं संरचना में परिवर्तन लाता है?
(क) प्रस्थान करने वाले क्षेत्र में
(ख) आगमन वाले क्षेत्र में
(ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में
(घ) इनमें से कोई नहीं
(ii) जनसंख्या में बच्चों का एक बहुत बड़ा अनुपात निम्नलिखित में से किसका परिणाम है?
(क) उच्च जन्मदर
(ख) उच्च मृत्युदर
(ग) उच्च जीवनदर
(घ) अधिक विवाहित जोड़े
(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक जनसंख्या वृद्धि का परिणाम दर्शाता है?
(क) एक क्षेत्र की कुल जनसंख्या
(ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि,
(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर
(घ) प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या
(iv) 2001 की जनगणना के अनुसार एक साक्षर' व्यक्ति वह है
(क) जो अपने नाम को पढ़ एवं लिख सकता है।
(ख) जो किसी भी भाषा में पढ़ एवं लिख सकता है।
(ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।
(घ) जो पढ़ना-लिखना एवं अंकगणित, तीनों जानता है।
Answer:
(i) (ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्र में
(ii) (क) उच्च जन्म दर
(iii) (ग) जनसंख्या वृद्धि की दर
(iv) (ग) जिसकी उम्र 7 साल, किसी भाषा को समझना, पढ़ना तथा लिखना।
In simple words: ये प्रश्न जनसंख्या संबंधी मूल अवधारणाओं जैसे प्रवास के प्रभाव, जनसंख्या में बच्चों के अनुपात का कारण, जनसंख्या वृद्धि का संकेतक और साक्षर व्यक्ति की परिभाषा पर आधारित हैं।
🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करते समय प्रत्येक विकल्प को ध्यान से पढ़ना और संबंधित अवधारणा को समझना महत्त्वपूर्ण है।
Question 2. निम्नलिखित के उत्तर संक्षेप में दें-
1. जनसंख्या वृद्धि के महत्त्वपूर्ण घटकों की व्याख्या करें।
2. 1981 से भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर क्यों घट रही है?
3. आयु संरचना, जन्मदर एवं मृत्युदर को परिभाषित करें।
4. प्रवास, जनसंख्या परिवर्तन का एक कारक।
Answer:
(1) जनसंख्या वृद्धि के महत्त्वपूर्ण घटक इस प्रकार हैं-
1. उच्च जन्म दर,
2. निम्न मृत्यु दर,
3. प्रवसन।
(2) 1981 के बाद भारत में जनसंख्या वृद्धि दर में कमी के कारण निम्नलिखित हैं-
1. परिवार कल्याण विधियों का अपनाया जाना,
2. स्वास्थ्य के प्रति महिलाओं की अधिक जागरूकता,
3. महिलाओं में शिक्षा का तेज गति से प्रसार,
4. सरकारी
(3) आयु संरचना-किसी देश में जनसंख्या की आयु संरचना वहाँ के विभिन्न आयु समूहों के लोगों की संख्या को बताता है। यह जनसंख्या की मूल आवश्यकताओं में से एक है। जन्मदर-एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या को जन्मदर कहते हैं। मृत्युदर-एक वर्ष की अवधि में 1000 लोगों पर मृत व्यक्तियों की संख्या को मृत्युदर कहते हैं।
(4) प्रवास, जनसंख्या परिवर्तन का एक कारक है लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। जनसंख्या वितरण एवं उसके घटकों को परिवर्तित करने में प्रवास की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि यह आगमन तथा प्रस्थान दोनों ही स्थानों के जनसांख्यिकीय आँकड़ों को प्रभावित करता है। प्रवास आंतरिक (देश के भीतर) या अंतर्राष्ट्रीय (देशों के बीच) हो सकता है। आंतरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में परिवर्तन नहीं करता लेकिन देश में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है।
1. प्रवास जनसंख्या के गठन एवं वितरण में बदलाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. भारत में अधिकतर प्रवास ग्रामीण क्षेत्रों से 'अपकर्षण' कारक प्रभावी होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी एवं बेरोजगारी की प्रतिकूल अवस्थाएँ हैं तथा नगर का 'कर्षण' प्रभाव रोजगार में वृद्धि एवं अच्छे जीवन स्तर को दर्शाता है। 1951 में शहरी जनसंख्या 17.29 प्रतिशत थी जो 2011 में बढ़कर 31.2 प्रतिशत हो गई।
3. 2001-2011 के बीच एक ही दशक के दौरान “दस लाख से अधिक की जनसंख्या वाले महानगर 35 से बढ़कर 53 हो गए हैं।
In simple words: जनसंख्या वृद्धि जन्म, मृत्यु और प्रवास जैसे कारकों से प्रभावित होती है। भारत में परिवार नियोजन, स्वास्थ्य जागरूकता और महिला शिक्षा के कारण 1981 के बाद जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है। आयु संरचना, जन्मदर और मृत्युदर जनसंख्या के महत्त्वपूर्ण निर्धारक हैं, जबकि प्रवास एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में लोगों के आवागमन को दर्शाता है, जिससे जनसंख्या वितरण और संरचना बदलती है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या परिवर्तन के घटकों और उनकी परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है, क्योंकि ये जनसांख्यिकीय विश्लेषण के मुख्य आधार हैं।
Question 3. जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन के बीच अंतर स्पष्ट करें?
Answer: जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन के बीच निम्नलिखित अंतर हैं-
| जनसंख्या वृद्धि | जनसंख्या परिवर्तन |
| 1. जनसंख्या वृद्धि से तात्पर्य किसी क्षेत्र में निश्चित अवधि के दौरान रहने वाले लोगों की संख्या में परिवर्तन है। | 1. जनसंख्या परिवर्तन से आशय किसी क्षेत्र में निश्चित अवधि के दौरान जनसंख्या वितरण, संरचना या आकार में परिवर्तन से है। |
| 2. इसमें पिछली जनसंख्या को बाद की जनसंख्या से घटाकर ज्ञात किया जाता है। | 2. जनसंख्या परिवर्तन तीन प्रक्रियाओं के आपसी संयोजन के कारण आता है- जन्मदर, मृत्युदर और प्रवास। |
| 3. वृद्धि को संख्या के रूप में प्रकट किया जाता है। | 3. जनसंख्या परिवर्तन सापेक्ष वृद्धि और प्रतिवर्ष होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के द्वारा देखा जाता है। |
In simple words: जनसंख्या वृद्धि का अर्थ एक निश्चित अवधि में लोगों की संख्या में कुल बदलाव है, जबकि जनसंख्या परिवर्तन में संख्या के साथ-साथ जनसंख्या के वितरण, संरचना और आकार में भी बदलाव शामिल होता है। वृद्धि केवल संख्यात्मक परिवर्तन है, जबकि परिवर्तन अधिक व्यापक अवधारणा है जिसमें जन्मदर, मृत्युदर और प्रवास जैसे कारक शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि और जनसंख्या परिवर्तन के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझना महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये दोनों अवधारणाएँ जनसंख्या अध्ययन में भिन्न पहलू दर्शाती हैं।
Question 4. व्यावसायिक संरचना एवं विकास के बीच क्या संबंध है?
Answer: व्यावसायिक संरचना एवं विकास के बीच सम्बन्ध-मुख्य रूप से व्यवसायों को तीन वर्गों में रखा जाता है-प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक व्यवसाय। प्राथमिक व्यवसाय कृषि आदि से संबंधित हैं, द्वितीयक व्यवसाय निर्माण उद्योगों से संबंधित है तथा तृतीयक व्यवसाय सेवाओं से सम्बन्धित होते हैं। विकसित एवं विकासशील देशों में द्वितीयक एवं तृतीयक व्यवसायों में कार्य करने वाले लोगों का अनुपात अधिक होता है। विकासशील देशों में प्राथमिक क्रियाकलापों में कार्यरत लोगों का अनुपात अधिक होता है। भारत में कुल जनसंख्या का 64 प्रतिशत भाग केवल कृषि कार्य करता है। द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की संख्या का अनुपात क्रमशः 13 तथा 20 प्रतिशत है। वर्तमान समय में बढ़ते हुए औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में वृद्धि होने के कारण द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में व्यावसायिक परिवर्तन हुआ है। विकास के लिए जनसंख्या का स्वस्थ होना अत्यन्त आवश्यक है। इस प्रकार स्वस्थ जनसंख्या निम्नलिखित रूप से लाभकारी हो सकती है-
1. बीमारियों पर कम खर्च होता है। इसके अतिरिक्त धन को विकास कार्यों में लगाया जाता है।
2. विकास की गति तीव्र होती है।
3. सरकार को अधिक स्वास्थ्य सेवाएँ बढ़ाने की आवश्यकता नहीं रहती।
4. लोगों में स्वस्थ वातावरण का संचार होता है।
5. स्वस्थ जनसंख्या अधिक समय तक काम करती है तथा उत्पादन में वृद्धि होती है।
6. स्वस्थ जनसंख्या में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।
7. हृष्ट-पुष्ट नागरिक उत्पन्न होते हैं।
8. अधिक तेज तथा अधिक कार्यक्षम होते हैं।
In simple words: व्यावसायिक संरचना किसी देश के विकास के स्तर को दर्शाती है, जहाँ प्राथमिक (कृषि), द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवा) क्षेत्रों में लगे लोगों का अनुपात बताता है कि देश कितना विकसित है। एक स्वस्थ जनसंख्या आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य है, क्योंकि यह बीमारियों पर खर्च कम करती है, उत्पादकता बढ़ाती है और विकास को गति देती है।
🎯 Exam Tip: व्यावसायिक संरचना का विश्लेषण देश के आर्थिक विकास को समझने में मदद करता है, और स्वस्थ जनसंख्या का महत्त्व सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए एक बुनियादी शर्त है।
Question 5. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
Answer: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति वर्ष 2004 में घोषित की गयी। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. किशोर-किशोरियों को असुरक्षित यौन संबंधों के कुप्रभावों/कुपरिणामों के बारे में जागरूक करना।
2. गर्भनिरोधक सेवाओं को पहुँच और खरीद के दायरे के भीतर रखना।
3. खादा संपूरक को पोषणिक सेवाएँ उपलब्ध कराना।
4. बाल विवाह को रोकने के कानून को और अधिक कारगर बनाना।
5. शिक्षा और स्वास्थ्य की शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार करना।
6. किशोर-किशोरियों की पहचान जनसंख्या के उस भाग के रूप में करें जिस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
7. इनकी पोषणिक आवश्यकताओं की ओर ध्यान देना।
8. अवांछित गर्भधारण तथा यौन संबंधों से होने वाली बीमारियों से किशोर-किशोरियों की सुरक्षा करना।
9. किशोर-किशोरियों की अन्य आवश्यकताओं के प्रति विशेष ध्यान देना।
10. देर से विवाह और देर से संतानोत्पत्ति को प्रोत्साहित करना।
In simple words: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का उद्देश्य किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य, यौन शिक्षा और परिवार नियोजन पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए जनसंख्या को स्थिर करना है। इसमें बाल विवाह पर रोक, देर से विवाह और देर से संतानोत्पत्ति को प्रोत्साहन देना शामिल है ताकि समग्र स्वास्थ्य और जागरूकता को बढ़ाया जा सके।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के मुख्य उद्देश्यों और रणनीतियों को याद रखना महत्त्वपूर्ण है, विशेषकर किशोर स्वास्थ्य और परिवार नियोजन से संबंधित पहलुओं पर।
परियोजना कार्य
Question 1. एक प्रश्नावली बनाकर कक्षा की जनगणना कीजिए। प्रश्नावली में कम-से-कम पाँच प्रश्न होने चाहिए। ये प्रश्न विद्यार्थियों के परिवारजनों, कक्षा में उनकी उपलब्धि, उनके स्वास्थ्य आदि से संबंधित हों। प्रत्येक विद्यार्थी को वह प्रश्नावली भरनी चाहिए। बाद में सूचना को संख्याओं में (प्रतिशत में) संग्रहीत कीजिए। इस सूचना को वृत्त-रेखा, दंड-आरेख या अन्य किसी प्रकार से प्रदर्शित कीजिए।
Answer: स्वयं करें।
In simple words: इस परियोजना कार्य में छात्रों को एक प्रश्नावली बनाकर कक्षा के साथियों और उनके परिवारजनों से संबंधित जानकारी एकत्र करनी होगी। एकत्र किए गए डेटा को प्रतिशत में बदलकर वृत्त-रेखा या दंड-आरेख जैसे ग्राफिकल तरीकों से प्रदर्शित करना है।
🎯 Exam Tip: परियोजना कार्य में डेटा संग्रह की सटीकता और जानकारी को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने की क्षमता महत्त्वपूर्ण होती है, जिससे छात्रों में शोध कौशल विकसित होते हैं।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जनसंख्या का अध्ययन करना क्यों महत्त्वपूर्ण है?
Answer: किसी देश की जनसंख्या ही उस देश के संसाधनों का विकास करती है और उनका उपभोग करती है। ऐसे में किसी देश के लोगों की संख्या, उनका वितरण एवं विकास तथा गुणवत्ता पर्यावरण को समझने का मूलभूत आधार है। इसलिए जनसंख्या का अध्ययन करना महत्त्वपूर्ण है।
In simple words: जनसंख्या का अध्ययन इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह देश के संसाधनों के विकास, उपयोग और पर्यावरण को समझने का आधार प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या अध्ययन से सरकारी नीतियों और विकास योजनाओं को बनाने में मदद मिलती है, जिससे देश के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होता है।
Question 2. अरुणाचल प्रदेश का जनघनत्व कम क्यों है?
Answer: अरुणाचल प्रदेश एक पर्वतीय क्षेत्र है। यहाँ की जलवायु ठण्डी है। यहाँ कृषि तथा उद्योग भी विकसित नहीं है। इसीलिए यहाँ का जनघनत्व कम है।
In simple words: अरुणाचल प्रदेश का जनघनत्व कम होने का मुख्य कारण इसका पर्वतीय भूभाग, ठंडी जलवायु और कृषि तथा उद्योगों के विकास की कमी है, जो मानव बसावट के लिए अनुकूल नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: किसी क्षेत्र का जनघनत्व उसकी भौगोलिक, जलवायु और आर्थिक परिस्थितियों से सीधे प्रभावित होता है; इन कारकों को समझना महत्त्वपूर्ण है।
Question 3. भारत में किस राज्य की साक्षरता सबसे अधिक है?
Answer: भारत में केरल राज्य की साक्षरता सबसे अधिक है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार केरल राज्य की साक्षरता दर 94.0% है।
In simple words: केरल भारत में सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है, जिसकी साक्षरता दर 2011 की जनगणना के अनुसार 94.0% है।
🎯 Exam Tip: राज्यवार साक्षरता दरों से संबंधित आंकड़े अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं; केरल की उच्च साक्षरता दर एक महत्त्वपूर्ण तथ्य है।
Question 4. भारत के अति सघन आबादी वाले दो भागों के नाम बताइए। इनमें सघन जनसंख्या होने के दो कारण बताइए।
Answer: भारत में ऊपरी गंगाघाटी तथा मालाबार क्षेत्र में अति सघन जनसंख्या है।
सघन जनसंख्या के दो कारण इस प्रकार हैं-
1. इन प्रदेशों में उद्योगों का अत्यधिक विकास हुआ है।
2. इन प्रदेशों की भूमि उपजाऊ है।
In simple words: ऊपरी गंगाघाटी और मालाबार क्षेत्र भारत के अति सघन आबादी वाले भाग हैं, जिसका मुख्य कारण इन क्षेत्रों में उद्योगों का अत्यधिक विकास और उपजाऊ भूमि की उपलब्धता है।
🎯 Exam Tip: सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों के भौगोलिक और आर्थिक कारकों को समझना महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये जनसंख्या वितरण के पैटर्न को निर्धारित करते हैं।
Question 5. लिंगानुपात (स्त्री-पुरुष) से क्या आशय है?
Answer: स्त्री-पुरुष के बीच जनसंख्या के संख्यात्मक अनुपात को स्त्री-पुरुष अनुपात कहते हैं। इसे प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या के रूप में व्यक्त करते हैं।
In simple words: लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को दर्शाता है, जो जनसंख्या के स्त्री-पुरुष संतुलन का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है।
🎯 Exam Tip: लिंगानुपात एक महत्त्वपूर्ण जनसांख्यिकीय सूचकांक है जो सामाजिक समानता और विकास के स्तर को भी इंगित करता है।
Question 6. मृत्यु-दर के तेजी से घटने के दो कारण बताइए।
Answer:
1. मृत्यु-दर के तेजी से घटने का मुख्य कारण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रसार है।
2. शिक्षा के प्रसार से भी मृत्यु-दर में अत्यधिक कमी आयी है।
In simple words: मृत्यु-दर में तेजी से गिरावट के दो मुख्य कारण स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक प्रसार और शिक्षा के स्तर में वृद्धि हैं, जिससे लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ी है।
🎯 Exam Tip: स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा का प्रसार मृत्यु-दर को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जीवन प्रत्याशा में सुधार होता है।
Question 7. भारत में जनसंख्या वृद्धि के कोई दो कारण बताइए।
Answer: भारत में जनसंख्या वृद्धि के दो मुख्य कारण इस प्रकार हैं-
1. चिकित्सा सुविधाओं के प्रसार के कारण मृत्यु-दर में तो कमी आयी है, लेकिन जन्म-दर में आशा के अनुरूप कमी नहीं आ पाई है।
2. भारत में अधिकतर लोग निर्धन एवं अनपढ़ हैं। वे छोटे परिवारों के महत्त्व को नहीं समझते हैं। वे सन्तान को ईश्वर की कृपा समझकर गर्भ-निरोध का प्रयास नहीं करते हैं।
In simple words: भारत में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारण बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु-दर में कमी आना, जबकि जन्म-दर में अपेक्षित गिरावट न आना है। इसके अतिरिक्त, अशिक्षा और छोटे परिवार के महत्त्व के प्रति जागरूकता की कमी भी इसमें योगदान करती है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के कारणों को समझना जनसांख्यिकीय नियंत्रण उपायों को विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 8. जनसंख्या घनत्व का क्या अर्थ है?
Answer: किसी देश-प्रदेश के प्रति एक वर्ग किलोमीटर में रहने वाले लोगों की औसत जनसंख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। इसे व्यक्ति प्रति वर्ग किमी में व्यक्त किया जाता है।
In simple words: जनसंख्या घनत्व एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की औसत संख्या है, जो किसी क्षेत्र की जनसंख्या की सघनता को मापता है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या घनत्व भूमि उपयोग और संसाधनों पर दबाव का आकलन करने में एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है।
Question 9. भारत की लगभग आधी आबादी कितने राज्यों में निवास करती है?
Answer: भारत की लगभग आधी जनसंख्या इन पाँच राज्यों में निवास करती है-उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं आंध्र प्रदेश।
In simple words: भारत की लगभग आधी जनसंख्या सिर्फ पाँच राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में केंद्रित है।
🎯 Exam Tip: देश के जनसंख्या वितरण में इन प्रमुख राज्यों का योगदान अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है और यह भौगोलिक एवं सामाजिक अध्ययन का एक हिस्सा है।
Question 10. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलापों के अंतर्गत कौन-कौन से व्यवसाय सम्मिलित हैं?
Answer: प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, वृक्षारोपण एवं मछली पालन तथा खनन आदि क्रियाएँ शामिल हैं। द्वितीयक क्रियाकलापों में उत्पादन करने वाले उद्योग, भवन एवं निर्माण कार्य आते हैं। तृतीयक क्रियाकलापों में परिवहन, संचार, वाणिज्य, प्रशासन तथा सेवाएँ शामिल हैं।
In simple words: प्राथमिक क्रियाकलाप सीधे प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित होते हैं (जैसे कृषि), द्वितीयक क्रियाकलाप कच्चे माल को उत्पादों में बदलते हैं (जैसे उद्योग), और तृतीयक क्रियाकलाप सेवाएँ प्रदान करते हैं (जैसे परिवहन, संचार)।
🎯 Exam Tip: विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों को समझना आर्थिक संरचना और विकास के स्तर का विश्लेषण करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 11. भारत सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के क्या उपाय अपनाए गए हैं?
Answer: भारत सरकार ने 1952 में एक व्यापक परिवार नियोजन कार्यक्रम को प्रारंभ किया। 1975 में इंदिरा कांग्रेस सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम तथा 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने इसे परिवार कल्याण कार्यक्रम नाम रख दिया। परिवार कल्याण कार्यक्रम जिम्मेदार तथा सुनियोजित पितृत्व को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 कई वर्षों के नियोजित प्रयासों का परिणाम है।
In simple words: भारत सरकार ने 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया, जिसका नाम बाद में परिवार कल्याण कार्यक्रम रखा गया, और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 के माध्यम से जनसंख्या नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
🎯 Exam Tip: परिवार नियोजन कार्यक्रम और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति जैसी सरकारी पहलों का ज्ञान जनसंख्या नियंत्रण में उनकी भूमिका को समझने के लिए आवश्यक है।
Question 12. भारत की जनसंख्या का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्षण बताइए।
Answer: भारत की जनसंख्या का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्षण इसकी किशोर जनसंख्या का आकार है। यह भारत की कुल जनसंख्या का पाँचवाँ भाग है। किशोर प्रायः 10 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। ये भविष्य के सबसे महत्वपूर्ण मानव संसाधन हैं।
In simple words: भारत की जनसंख्या का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्षण इसकी बड़ी किशोर जनसंख्या है, जो कुल आबादी का लगभग पाँचवाँ हिस्सा है और देश के भविष्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण मानव संसाधन का प्रतिनिधित्व करती है।
🎯 Exam Tip: किशोर जनसंख्या की बड़ी संख्या देश के जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का संकेत है, जो विकास के लिए महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
Question 13. जनसंख्या की सापेक्ष एवं निरपेक्ष वृद्धि किसे कहते हैं?
Answer: किसी विशेष समय के अंतराल में जैसे 10 वर्षों के भीतर, किसी देश/राज्य के निवासियों की संख्या में परिवर्तन सापेक्ष वृद्धि कहलाता है। पहले की जनसंख्या जैसे 2001 की जनसंख्या को बाद की जनसंख्या जैसे 2011 की जनसंख्या से घटाकर इसे प्राप्त किया जाता है। इसे निरपेक्ष वृद्धि कहा जाता है।
In simple words: सापेक्ष वृद्धि किसी निश्चित अवधि में जनसंख्या में हुए प्रतिशत परिवर्तन को दर्शाती है, जबकि निरपेक्ष वृद्धि जनसंख्या में कुल संख्यात्मक परिवर्तन को बताती है, जो बाद की जनसंख्या में से पहले की जनसंख्या घटाकर प्राप्त की जाती है।
🎯 Exam Tip: सापेक्ष और निरपेक्ष वृद्धि दोनों जनसंख्या परिवर्तन को मापने के तरीके हैं, लेकिन ये अलग-अलग दृष्टिकोण से जानकारी प्रदान करते हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।
Question 14. आश्रित जनसंख्या के अंतर्गत किन-किन आयु वर्ग के लोगों को सम्मिलित किया जाता है?
Answer: आश्रित जनसंख्या के अंतर्गत बच्चों तथा वृद्ध जिनकी आयु क्रमशः 15 वर्ष से कम और 59 वर्ष से अधिक है, आयु वर्ग के लोग सम्मिलित होते हैं।
In simple words: आश्रित जनसंख्या में वे लोग शामिल होते हैं जो आर्थिक रूप से कार्यशील नहीं होते, जैसे 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 59 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध।
🎯 Exam Tip: आश्रित जनसंख्या का अनुपात देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालता है, क्योंकि कार्यशील जनसंख्या को उनका भरण-पोषण करना होता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. ग्रामीण जनसंख्या और नगरीय जनसंख्या में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: ग्रामीण जनसंख्या और नगरीय जनसंख्या में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
| नगरीय जनसंख्या | ग्रामीण जनसंख्या |
| 1. भारत की नगरीय जनसंख्या 37.7 करोड़ है, लेकिन 35 महानगरों में 27% से अधिक नगरीय जनसंख्या रहती है। | 1. ग्रामीण जनसंख्या 83.32 करोड़ है। इसका बहुत छोटा भाग गौण व तृतीयक व्यवसाय में लगा है। |
| 2. नगरीय जनसंख्या को सर्वाधिक सुविधाएँ सुलभ हैं। | 2. ग्रामीण जनसंख्या को सार्वजनिक सेवाएँ बहुत कम सुलभ हैं। |
| 3. नगरीय जनसंख्या का जीवन स्तर सामान्यतः उच्च पाया जाता है। | 3. ग्रामीण जनसंख्या का जीवन स्तर सामान्यतः निम्न पाया जाता है। |
| 4. देश की लगभग 31.2% जनसंख्या नगरों में रहती है। | 4. भारत गाँवों का देश है। देश की लगभग 68.8% जनसंख्या गाँवों में रहती है। |
| 5. नगरीय जनसंख्या का 65 प्रतिशत भाग प्रथम श्रेणी के नगरों में रहता है। प्रथम श्रेणी के नगरों की संख्या 2929 है। | 5. ग्रामीण जनसंख्या अधिकतर प्राथमिक व्यवसाय में लगी होती है। जैसे कृषि करना, लकड़ी काटना, मछली पकड़ना, पशु-पालन, खनन आदि। |
In simple words: नगरीय जनसंख्या शहरों में रहती है, अधिक सुविधाओं और उच्च जीवन स्तर का आनंद लेती है, जबकि ग्रामीण जनसंख्या गाँवों में रहती है, प्राथमिक व्यवसायों में संलग्न होती है और कम सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाती है।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या के बीच के अंतर को समझना भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास और शहरीकरण की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करने में सहायता करता है।
Question 2. जन्म-दर और वृद्धि-दर में अंतर कीजिए।
Answer: जन्म-दर और वृद्धि-दर में निम्नलिखित अन्तर हैं-
| वृद्धि-दर | जन्म-दर |
| 1. विकासशील देशों में वृद्धिदर सामान्य से अधिक है। विकसित देशों में वृद्धि-दर 1 प्रतिशत से कम है। | 1. विकसित देशों में जन्म-दर कम होती है और विकासशील देशों में जन्म-दर अधिक होती है। |
| 2. उच्च-वृद्धिदर से प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है। | 2. उच्च जन्मदर पिछड़ेपन का प्रतीक बन गई है। |
| 3. जन्म-दर और मृत्यु-दर के अंतर को वृद्धि दर कहते हैं। | 3. किसी देश या क्षेत्र में वर्ष के मध्य जीवित जन्मे बच्चों की संख्या को जन्म-दर कहते हैं। |
| 4. वृद्धिदर को प्रतिशत में व्यक्त करते हैं। | 4. जन्मदरे प्रति हजार में व्यक्त की जाती है। |
| 5. आजकल भारत की प्राकृतिक वार्षिक वृद्धि दर 21.3 प्रतिशत है। | 5. भारत में जन्म दर 26.1 व्यक्ति प्रति हजार है। |
In simple words: जन्म-दर प्रति 1000 व्यक्तियों पर जीवित जन्मों की संख्या को दर्शाती है, जबकि वृद्धि-दर जन्म-दर और मृत्यु-दर के बीच के अंतर को प्रतिशत में व्यक्त करती है, जो जनसंख्या के समग्र परिवर्तन को मापती है।
🎯 Exam Tip: जन्म-दर और वृद्धि-दर दोनों जनसंख्या गतिकी के महत्त्वपूर्ण संकेतक हैं; उनके बीच का अंतर जनसंख्या नियंत्रण और विकास रणनीतियों के लिए आवश्यक है।
Question 3. भारत के मैदानी भागों में सघन आबादी पाए जाने के कारण बताइए।
Answer: भारत के मैदानी भागों में सघन जनसंख्या पाए जाने के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-
1. समतल मैदान,
2. उपजाऊ मिट्टी,
3. पर्याप्त मात्रा में वर्षा,
4. सिंचाई के विकसित साधन,
5. परिवहन के विकसित साधन,
6. उद्योग एवं कृषि का विकास।
In simple words: भारत के मैदानी भागों में सघन आबादी के मुख्य कारण समतल और उपजाऊ भूमि, पर्याप्त वर्षा, विकसित सिंचाई और परिवहन सुविधाएँ, तथा कृषि और उद्योगों का विकास हैं, जो जीवन यापन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक और आर्थिक कारक जनसंख्या वितरण को अत्यधिक प्रभावित करते हैं; मैदानी क्षेत्रों के मामले में ये कारक एक साथ सघन आबादी को बढ़ावा देते हैं।
Question 4. भारत में राज्यवार जनसंख्या वितरण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 19.981 करोड़ है। यहाँ भारत की कुल जनसंख्या का 16.51 प्रतिशत निवास करते हैं। भारत की सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम है तथा लक्षद्वीप केन्द्रशासित प्रदेशों में सबसे कम जनसंख्या वाला क्षेत्र है। सिक्किम की जनसंख्या 6 लाख, 10 हजार है जबकि लक्षद्वीप में जनसंख्या 64,429 है। भारत की जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत भाग निम्नलिखित पाँच राज्यों में निवास करता है।
1. उत्तर प्रदेश 16.51%
2. महाराष्ट्र 9.28%
3. बिहार 8.60%
4. पश्चिम बंगाल 7.54%
5. आंध्र प्रदेश 6.99%.
In simple words: भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है, जिसमें उत्तर प्रदेश सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है और सिक्किम सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है। देश की लगभग आधी आबादी पाँच राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में केंद्रित है।
🎯 Exam Tip: भारत में राज्यवार जनसंख्या वितरण को समझना क्षेत्रीय असमानताओं और विकास संबंधी चुनौतियों को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 5. नगरों में बढ़ती हुई जनसंख्या ने न केवल नगरीय केन्द्रों में समस्याएँ पैदा की हैं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है। प्रत्येक के विषय में दो बिन्दु स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(क) बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण नगरीय केन्द्रों में उत्पन्न समस्यायें इस प्रकार हैं-
1. लोगों के नैतिक मूल्यों में परिवर्तन और गिरावट।
2. चोरबाजारी, कालाबाजारी, रिश्वत तथा लूट-पाट का बोलबाला।
3. नगरों के संसाधनों तथा जन सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ता है।
4. आवश्यक वस्तुओं की कमी तथा उनके मूल्यों में आशातीत वृद्धि।
5. वस्तुओं की गुणवत्ता में गिरावट आना।
(ख) नगरीय जनसंख्या में वृद्धि का ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रभाव इस प्रकार है-
1. रोजगार की खोज में लोगों को ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय क्षेत्रों की ओर पलायन करना।
2. भूमिहीन किसानों की निर्धनता में वृद्धि।
3. कृषि जोतों का अलाभकारी होना तथा छोटे किसानों के गाँव में बेकार हो जाने से उनका नगरों में जाकर मजदूरी करना।
In simple words: नगरों में बढ़ती जनसंख्या से शहरी केंद्रों में नैतिक मूल्यों में गिरावट, अपराध, संसाधनों पर दबाव और वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में इससे लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं, जिससे भूमिहीनता और ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: तीव्र शहरीकरण से उत्पन्न चुनौतियों और उनके ग्रामीण-शहरी संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना सामाजिक और आर्थिक नियोजन के लिए आवश्यक है।
Question 6. भारत में भूमि की उर्वरता जनसंख्या वितरण को किस प्रकार प्रभावित करती है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व का दूसरा बड़ा देश है। यहाँ की जनसंख्या वितरण बहुत असमान है। सामान्यतः जनसंख्या का वितरण भूमि की उर्वरता के अनुरूप पाया जाता है। जिन क्षेत्रों में मिट्टी अधिक उपजाऊ पाई जाती है, वहाँ जनसंख्या की सघनता अधिक मिलती है और जिन क्षेत्रों में मिट्टी कम उपजाऊ होती है, वहाँ जनसंख्या कम पाई जाती है। भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि और मिट्टी का सीधा संबंध है। हमारे भरण-पोषण की अधिकांश सामग्री प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी से ही मिलती है।
उदाहरण के लिए उत्तरी मैदान, पूर्व तटीय मैदान, पश्चिम तटीय मैदान, डेल्टाई मैदान एवं घाटी प्रदेश सघन आबादी वाले हैं। यदि इन प्रदेशों का भी अवलोकन करें तो स्पष्ट होता है कि प्रत्येक प्रदेश में जनसंख्या का वितरण संभव नहीं है। उत्तरी मैदान में जनसंख्या पश्चिम से पूर्व की ओर घटती जाती है। हरियाणा राज्य पश्चिमी बंगाल की तुलना में कम सघन है। पश्चिमी बंगाल की मृदा बहुत उर्वरक है। पर्वतीय प्रदेश में मिट्टी की परत पतली होती है। इन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मिट्टी की परत मोटी और उपजाऊ होती है। अतः घाटी प्रदेशों में पर्वतीय प्रदेशों से अधिक सघन जनसंख्या पाई जाती है।
In simple words: भूमि की उर्वरता जनसंख्या वितरण को सीधे प्रभावित करती है; अधिक उपजाऊ क्षेत्रों में सघन जनसंख्या पाई जाती है क्योंकि कृषि और जीवन यापन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ होती हैं, जबकि कम उपजाऊ या पर्वतीय क्षेत्रों में जनसंख्या विरल होती है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक कारक, विशेषकर मिट्टी की उर्वरता, जनसंख्या के बसावट और वितरण पैटर्न को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसे समझना आवश्यक है।
Question 7. भारत में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के उपाय बताइए।
Answer: भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को जन्मदर कम करके ही रोका जा सकता है। जन्मदर को निम्न उपायों के माध्यम से कम किया जा सकता है-
1. गर्भधारण से लेकर प्रजनन प्रक्रिया से जुड़ी अनेकानेक समस्याओं का ज्ञान होने के कारण शिक्षित महिलाओं की जीवन प्रत्याशा अधिक होती है। वह अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग होती है।
2. शिक्षित महिलाओं की दृष्टि व्यापक होती है, उनकी सोच राष्ट्रीय स्तर की होने के कारण बड़े परिवार को राष्ट्रीय संसाधनों पर बोझ मानती हैं।
3. भारत में दो बच्चों के परिवार को राष्ट्रीय आदर्श माना गया है, उसकी दृढ़ता से पालन कराया जाए।
4. भारतीय संविधान में निर्धारित शादी की न्यूनतम आयु लड़कियों की 18 तथा लड़कों की 21 वर्ष को व्यावहारिक रूप दिया जाए।
5. स्त्री शिक्षा पर अधिक बल दिया जाए।
6. दो या इससे कम बच्चों वाले माता-पिता को सरकारी नियुक्तियों एवं पदोन्नतियों में प्राथमिकता दी जाए। साथ ही विशेष वेतन-वृद्धि का प्रावधान हो।
7. परिवार कल्याण सुविधाओं का देशभर में विस्तार किया जाए।
In simple words: जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए जन्मदर को कम करना आवश्यक है, जिसके लिए महिला शिक्षा, विवाह की सही उम्र, दो बच्चों के आदर्श परिवार का पालन, सरकारी प्रोत्साहन और परिवार कल्याण सेवाओं के विस्तार जैसे उपाय महत्त्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या नियंत्रण के उपायों में सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और सरकारी प्रोत्साहन का संयोजन प्रभावी होता है, इन रणनीतियों को समझना महत्त्वपूर्ण है।
Question 8. भारत के आर्थिक विकास के लिए प्राकृतिक तथा मानवीय संसाधनों का विकास आवश्यक क्यों है?
Answer:
1. प्राकृतिक संसाधनों को संपत्ति में तभी बदला जा सकता है, जब लोगों की गुणवत्ता या उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाए।
2. देश की प्राकृतिक संपदा के पूर्ण विकास के लिए पर्याप्त संख्या, आवश्यक तकनीकी ज्ञान, पूँजी तथा लोगों का कुशल, क्रियाशील, परिश्रमी व ईमानदार होना आवश्यक है।
3. अच्छे स्वास्थ्य एवं सुविधाओं की सुलभता भी प्राकृतिक संपदा के विकास पर निर्भर है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि देश के आर्थिक विकास के लिए प्राकृतिक तथा मानव दोनों ही संपदाओं का विकास साथ-साथ होना चाहिए।
4. किसी देश का आर्थिक विकास प्राकृतिक संसाधनों और मानवीय संसाधनों पर निर्भर करता है। किसी एक के अभाव में विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
5. प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों की विपुलता व संपन्नता, आर्थिक प्रगति की गति तेज करती है।
6. मानव संसाधनों द्वारा ही प्राकृतिक संपदा को अधिकाधिक मात्रा में उपयोगी वस्तुओं में बदलकर, बड़े पैमाने पर संपदा प्राप्त की जाती है।
In simple words: भारत के आर्थिक विकास के लिए प्राकृतिक और मानवीय दोनों संसाधनों का विकास अनिवार्य है क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग केवल कुशल, शिक्षित और स्वस्थ मानव शक्ति द्वारा ही संभव है। दोनों के संतुलित विकास के बिना कोई भी देश पूर्ण आर्थिक प्रगति प्राप्त नहीं कर सकता।
🎯 Exam Tip: आर्थिक विकास के लिए मानव और प्राकृतिक संसाधनों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध को समझना महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये एक-दूसरे के पूरक हैं।
Question 9. जनसंख्या का गाँवों से नगरों की ओर पलायन क्यों हो रहा है?
Answer: गाँवों से नगरों की ओर जनसंख्या का तेजी से पलायन निम्न कारणों से हो रहा है-
1. गाँवों में सार्वजनिक सुविधाओं का अभाव – शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन आदि का गाँवों में अभाव है। नगरों में इन सुविधाओं को बराबर आकर्षण है।
2. गाँवों में रोजगार के अवसरों का अभाव – गाँवों में शिक्षित और अशिक्षित युवकों के लिए रोजगार के साधनों की कमी है। शिक्षित और प्रशिक्षित युवकों के लिए गाँवों में रोजगार का और भी अभाव है। फलतः रोजगार की तलाश में गाँवों से नगरों की ओर पलायन की स्वाभाविक प्रक्रिया बन गई है। नगरों में रोजगार मिलने के बाद उनकी आश्रित संख्या भी नगरों में आकर बस जाती है।
3. अलाभकारी जोतों का बढ़ना – छोटे और सीमांत किसान की पैतृक जोतों के बँटवारे होते रहने से उनका छिटका होना तथा भूमि का छोटा टुकड़ा हिस्से में आना, जोत को अलाभकारी बना देता है। अंततः छोटा किसान अपनी भूमि को बेचने के लिए विवश हो जाता है और काम-धंधे की तलाश में वह शहर की ओर चल पड़ता है।
In simple words: गाँवों से शहरों की ओर पलायन का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की कमी है, साथ ही अलाभकारी कृषि जोत भी किसानों को शहर जाने पर मजबूर करती है।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण-शहरी प्रवास के कारणों को समझना क्षेत्रीय विकास और शहरी नियोजन नीतियों को बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 10. जन्म-दर की तुलना में मृत्यु-दर में अधिक कमी का कारण क्या है?
Answer: भारत में जन्म-दर एवं मृत्यु-दर दोनों ही निरंतर घट रही हैं। यह देश के विकास का प्रतीक है। लेकिन इन दोनों के घटने की दर में अंतर है। मृत्यु-दर तो तेजी से नीचे आयी है, लेकिन जन्म-दर में ह्रास मंद गति से हो रहा है। जन्म-दर की तुलना में मृत्यु-दर में अधिक कमी के निम्न कारण हैं-
1. देश में मलेरिया, हैजा, चेचक, प्लेग जैसी महामारियों को अब नियंत्रित कर लिया गया है। नई और प्रभावशाली ओषधियों का निर्माण व उपयोग किया जा रहा है।
2. देशभर में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के अधिक प्रसार के कारण वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जन्म पर प्रत्येक बच्चे की जीवन-प्रत्याशी बढ़कर 64 वर्ष हो गई है, जो इस शताब्दी के प्रारंभ में केवल 27 वर्ष थी।
3. मृत्यु-दर का तेजी से घटने का मुख्य कारण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रसार रहा है।
4. शिक्षा के प्रसार ने भी मृत्युदर को कम करने में सहायता की है क्योंकि शिक्षित व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरुक रहते हैं।
In simple words: भारत में मृत्यु-दर में तेजी से कमी का मुख्य कारण महामारियों पर नियंत्रण, नई दवाओं का विकास, स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक प्रसार और शिक्षा के स्तर में वृद्धि है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ी है।
🎯 Exam Tip: स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश जनसंख्या की जीवन प्रत्याशा में सुधार और मृत्यु-दर को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 11. जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं? इसे कैसे मापा जाता है?
Answer: जनसंख्या वृद्धि से तात्पर्य किसी क्षेत्र में निश्चित अवधि के दौरान स्हने वाले लोगों की संख्या में परिवर्तन से है। ऐसे परिवर्तन को दो तरीके से व्यक्त किया जा सकता है-
1. प्रतिवर्ष प्रतिशत वृद्धि के रूप में,
2. सापेक्ष वृद्धि के रूप में।
प्रत्येक वर्ष या एक दशक में बढ़ी जनसंख्या, केवल संख्या में वृद्धि का परिणाम है। इसकी गणना बाद की जनसंख्या में से पहले की जनसंख्या को साधारण रूप से घटाकर की जाती है। जनसंख्या वृद्धि की दर अथवा गति का अध्ययन प्रतिशत प्रतिवर्ष में किया जाता है। इसे वार्षिक वृद्धि दर कहा जाता है। जैसे-10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर का अर्थ है कि किसी वर्ष के दौरान प्रत्येक 100 लोगों की मूल जनसंख्या में 10 लोगों की वृद्धि हुई।
In simple words: जनसंख्या वृद्धि का अर्थ एक निश्चित अवधि में लोगों की संख्या में परिवर्तन है, जिसे निरपेक्ष संख्या या वार्षिक प्रतिशत वृद्धि दर के रूप में मापा जाता है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के विभिन्न मापन विधियों को समझना जनसांख्यिकीय विश्लेषण और नीति निर्माण के लिए आवश्यक है।
Question 12. किसी देश की जनसंख्या की तीन प्रमुख श्रेणियों का वर्णन कीजिए। इनमें से कौन-सा समूह पराश्रित है?
Answer: आयु संरचना किसी भी देश की जनसंख्या की मूलभूत विशेषता होती है। जनसंख्या की आयु संरचना से आशय किसी देश में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों से है। किसी भी देश की जनसंख्या को सामान्यतः तीन विस्तृत श्रेणियों में बांटा जा सकता है-
1. बच्चे (सामान्यतः 15 वर्ष से कम आयु वाले)-ये आर्थिक रूप से उत्पादनशील नहीं होते हैं तथा इनको भोजन, वस्त्र एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की आवश्यकता होती है।
2. वयस्क (15 वर्ष से 59 वर्ष)-ये आर्थिक रूप से उत्पादनशील तथा जैविक रूप से प्रजननशील होते हैं। यह जनसंख्या का कार्यशील वर्ग है।
3. वृद्ध (59 वर्ष से अधिक)-ये आर्थिक रूप से उत्पादनशील या अवकाश प्राप्त हो सकते हैं। ये स्वैच्छिक रूप से कार्य कर सकते हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के द्वारा इनकी नियुक्ति नहीं होती है। भारत में जनसंख्या संरचना-युवा 58.7%, वृद्ध 6.9%, बच्चे 34.4%। बच्चों तथा वृद्धों का प्रतिशत निर्भरता अनुपात को प्रभावित करता है क्योंकि ये समूह उत्पादनशील नहीं होते।
In simple words: जनसंख्या को मुख्य रूप से बच्चे (0-14 वर्ष), वयस्क (15-59 वर्ष) और वृद्ध (59 वर्ष से अधिक) इन तीन आयु श्रेणियों में बांटा जाता है। इनमें बच्चे और वृद्ध समूह पराश्रित होते हैं, क्योंकि वे आर्थिक रूप से उत्पादनशील नहीं होते और वयस्कों पर निर्भर करते हैं।
🎯 Exam Tip: आयु संरचना का विश्लेषण देश के जनसांख्यिकीय लाभांश और निर्भरता अनुपात को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है, जो आर्थिक विकास पर प्रभाव डालते हैं।
Question 13. भारत के लिए स्वास्थ्य का स्तर आज भी चिंता का विषय है।' स्पष्ट कीजिए।
Answer: देश ने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की है। स्वास्थ्य स्तर में भी महत्त्वपूर्ण सुधार हुआ, फिर भी इस सम्बन्ध में अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
असन्तोषजनक स्वास्थ्य परिस्थितियों के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-
1. शुद्ध पीने का पानी तथा मूल स्वास्थ्य रक्षा सुविधाएँ ग्रामीण जनसंख्या के केवल एक-तिहाई लोगों को उपलब्ध हैं।
2. प्रति व्यक्ति कैलोरी की खपत अनुशंसित स्तर से काफी कम है तथा हमारी जनसंख्या का एक बड़ा भाग कुपोषण से प्रभावित है।
In simple words: भारत में स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी चिंता का विषय है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल और मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, और एक बड़ी आबादी कुपोषण का शिकार है।
🎯 Exam Tip: स्वास्थ्य संकेतक देश के मानव विकास सूचकांक का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं; स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण में सुधार पर ध्यान देना आवश्यक है।
Question 14. क्या स्त्रियों को अच्छी शिक्षा देकर जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है?
Answer: विश्व के विकसित देशों में अशिक्षा को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। शिक्षा का स्तर बढ़ने से स्त्री-पुरुष अनुपात एवं सन्तानोत्पत्ति को नियंत्रित करने में सहायता मिली है। विकसित देशों में जनसंख्या वृद्धि एक प्रतिशत से भी कम है बल्कि कुछ देशों में यह ऋणात्मक हो गयी है। यह स्थापित तथ्य है कि स्त्रियों को शिक्षित एवं जागरूक करके जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है।
इसके लिए निम्न प्रयास किए जा सकते है-
1. अच्छी शिक्षा पाने के लिए एक लंबी अवधि की आवश्यकता पड़ती है। अतः शिक्षित लड़कियों की अधिक उम्र में जाकर शादी होती है। तब तक परिवार-दायित्व का ज्ञान आसानी से हो जाता है।
2. शिक्षित स्त्रियों को रोजगार मिल जाता है। रोजगार प्राप्त महिलाएँ अधिक बच्चे की अच्छी देख-रेख करने में अपने को असमर्थ पाती हैं।
In simple words: अच्छी शिक्षा देकर स्त्रियों को सशक्त करने से जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है, क्योंकि शिक्षित महिलाएँ देर से विवाह करती हैं, परिवार नियोजन को बेहतर समझती हैं और करियर पर ध्यान देने के कारण कम बच्चों को प्राथमिकता देती हैं।
🎯 Exam Tip: महिला शिक्षा जनसंख्या नियंत्रण और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास का एक शक्तिशाली उपकरण है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. केरल में जनसंख्या की स्थिति देश के अन्य राज्यों से किस प्रकार भिन्न है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: जनसंख्या के विभिन्न पक्षों-घनत्व, स्त्री-पुरुष अनुपात, क्रियाशीलता, साक्षरता, जीवन-प्रत्याशी आदि पर विचार करने पर यह स्पष्ट है कि केरल की जनसंख्या की प्रवृत्ति देश के अन्य राज्यों से निम्न कारणों से भिन्न है-
(1) जीवन - प्रत्याशा सार्वजनिक चिकित्सा सुविधाओं एवं शिक्षा में विस्तार के कारण जीवन-प्रत्याशा में वृद्धि हुई है। भारत में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की जीवन-प्रत्याशा कम रही है। परंतु अब इस प्रवृत्ति में परिवर्तन आ गया है। अतः स्त्रियों की जीवन-प्रत्याशा पुरुषों की अपेक्षा कुछ अधिक है। जन्म के समय स्त्रियों की औसत जीवनप्रत्याशा 67.7 वर्ष तथा पुरुषों की औसत जीवन-प्रत्याशा 64.6 वर्ष थी। केरल में जीवन-प्रत्याशा अधिक है। यहाँ स्त्रियों की जीवन-प्रत्याशा 72% तथा पुरुषों की 71% है।
(2) क्रियाशीलता - भारत में बड़ी जनसंख्या आश्रितों की है। एक-तिहाई क्रियाशील जनसंख्या पर दो-तिहाई आश्रित जनसंख्या का दबाव है। सामान्यतः क्रियाशील जनसंख्या का अधिक अनुपात दुर्गम क्षेत्रों अथवा विकसित क्षेत्रों में पाया जाता है। इस दृष्टि से केरल विकसित क्षेत्रों में आता है। यहाँ अर्जक जनसंख्या का अनुपात देश के औसत अनुपात से लगभग डेढ़ गुना अधिक है।
(3) साक्षरता - मानवीय संसाधनों के विकास में शिक्षा का भारी महत्त्व है। सन् 2011 में साक्षरता का प्रतिशत 73 रहा है। मनुष्य का दीर्घ आयु होना साक्षरता का सबसे महत्त्वपूर्ण कारक है। साक्षरता से क्रियाशील जनसंख्या का अनुपात बढ़ता है। केरल राज्य साक्षरता में सबसे आगे है। यहाँ 2011 की जनगणना के अनुसार 94% साक्षरता पाई गई है।
(4) घनत्व - केरल में जनघनत्व (पश्चिम बंगाल को छोड़कर) सबसे अधिक है। यहाँ भारत के औसत जनघनत्व से लगभग तीन गुना जनघनत्व पाया जाता है। केरल में जनसंख्या का घनत्व 860 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। केरल में अधिक वर्षा तथा वर्षा की अवधि भी अधिक होने के कारण वर्ष में दो-तीन फसलें उगाई जाती हैं।
यहाँ के पाश्च जलों एवं तटवर्ती सागरों में भारी मात्रा में मछली पकड़ी जाती है, जिससे सघन जनसंख्या की खाद्य-आपूर्ति हो जाती है। स्त्री-पुरुष अनुपात-स्त्री-पुरुष गृहस्थ जीवन की गाड़ी के दो पहिए हैं। एक पहिए के कमजोर या उसके न होने पर गाड़ी का सही चलना संभव नहीं। संसार के प्रत्येक सभ्य समाज में स्त्री और पुरुषों की संख्या में समानता है। हमारे देश के अनेक क्षेत्रों में स्त्री-पुरुष अनुपात में बहुत अंतर मिलता है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति हजार पुरुषों पर 943 स्त्रियाँ थीं।
केरल ही एकमात्र ऐसा राज्य है जिसमें पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या अधिक है। यहाँ स्त्री-पुरुष अनुपात 1084 :1000 हैं। उपर्युक्त विवेचन के आधार पर स्पष्ट है कि केरल एक सघन आबाद क्षेत्र होते हुए भी मानवीय संपदा का अधिक विस्तार कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। यहाँ के लोग परिश्रमी एवं संघर्षशील हैं, ये लोग अपनी कर्तव्यनिष्ठा के आधार पर उपलब्ध प्राकृतिक संपदा का भरपूर उपयोग करते हैं।
In simple words: केरल में उच्च जीवन प्रत्याशा, अधिक क्रियाशील जनसंख्या, 94% की उच्च साक्षरता दर और 1084:1000 का अनुकूल लिंगानुपात है, जो इसे भारत के अन्य राज्यों से अलग बनाता है। यहाँ का उच्च जनघनत्व भी वर्षा और कृषि के अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद मानवीय संपदा के बेहतर उपयोग का परिणाम है।
🎯 Exam Tip: केरल के जनसांख्यिकीय मॉडल को समझना मानव विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य निवेश के महत्त्व को दर्शाता है, जो अन्य राज्यों के लिए एक महत्त्वपूर्ण सबक है।
Question 2. भारत के महानगरों में तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या चिंता का विषय क्यों बन गई है? इससे उत्पन्न परिणामों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वर्ष 2011 में भारत की नगरीय जनसंख्या बढ़कर 37.7 करोड़ हो गयी है, यह कुल जनसंख्या का 27.78 प्रतिशतॆ है। भारत की नगरीय जनसंख्या का 65% प्रथम श्रेणी के नगरों में निवास करता है। भारत की एक तिहाई से भी अधिक जनसंख्या केवल 35 महानगरों में निवास करती है। यह एक चिंता का विषय है। नगरीकरण विकास का प्रतीक है। परंतु महानगरों में तीव्रता से बढ़ती जनसंख्या न केवल महानगरों में समस्या खड़ी कर रही है, अपितु ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। नगरों में जनसंख्या के तेजी से बढ़ने के कारण, इनके वर्तमान संसाधनों तथा उपलब्ध जन सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। कभी-कभी तो यहाँ लोगों को आवश्यक सुविधाएँ भी नहीं मिल पातीं।
महानगरों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या के प्रमुख परिणाम इस प्रकार हैं-
(1) लिंग-अनुपात का असन्तुलित होना – रोजगार की तलाश में पहले पुरुष वर्ग नगरों की ओर जाता है। फलतः नगरों में लिंग अनुपात में बहुत अंतर पाया जाता है। इस विषम अनुपात से अनेक सामाजिक कुरीतियाँ एवं बुरी आदतें पड़ जाती हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ जाती है।
(2) आवास की समस्या – महानगरों की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ने के कारण आवास की बड़ी गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। अधिकतर लोग तंग, अँधेरे तथा दूषित वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आवास की समस्या मजदूर वर्ग में तो और भी गंभीर है। झुग्गी-झोपड़ियों में और खुले आकाश के नीचे लोग अपनी रातें बिता रहे हैं।
(3) रोजगार की समस्या – रोजगार पाने के लिए गाँवों से लोग नगरों में आ रहे हैं। जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में रोजगार के साधन नहीं बढ़ रहे हैं। अतः नगरों में रोजगार की समस्या बढ़ रही है। भिखारियों की संख्या बढ़ रही है। चोर-गिरहकटों की संख्या बढ़ रही है। लूट-पाट के मामले बढ़ रहे हैं। उपर्युक्त समस्याओं के अतिरिक्त अति नगरीकरण के कारण नगरों में पेयजल की समस्या, सफाई एवं स्वास्थ्य की समस्या, वायु प्रदूषण की समस्या, ध्वनि प्रदूषण की समस्या, शिक्षा की समस्या, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धि की समस्या तथा परिवहन की समस्या नगरों से जुड़ गयी है।
In simple words: भारत के महानगरों में तेजी से बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय है क्योंकि यह संसाधनों, सुविधाओं पर भारी दबाव डालती है और लिंग-अनुपात में असंतुलन, आवास की कमी, बेरोजगारी और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ पैदा करती है, जो सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बिगाड़ देती हैं।
🎯 Exam Tip: शहरीकरण से उत्पन्न चुनौतियों और उनके बहुआयामी प्रभावों को समझना शहरी नियोजन और स्थायी विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 3. भारत में जनसंख्या घनत्व के वितरण पर प्रकाश डालिए।
Answer: भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है। साथ ही भारत विश्व की घनी आबादी वाले देशों में से एक है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। जहाँ बिहार का जनसंख्या घनत्व 1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, वहीं अरुणाचल प्रदेश का जनसंख्या घनत्व 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।
पर्वतीय क्षेत्र तथा प्रतिकूल जलवायवी अवस्थाएँ इन क्षेत्रों की विरल जनसंख्या के लिए उत्तरदायी हैं। असोम एवं अधिकतर प्रायद्वीपीय राज्यों का जनसंख्या घनत्व मध्यम है। पहाड़ी, कटे-छैटे एवं पथरीले भूभाग, मध्यम से कम वर्षा, छिछली एवं कम उपजाऊ मिट्टी इन राज्यों के जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करती है। उत्तर मैदानी भाग एवं दक्षिण में केरल का जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यहाँ समतल मैदान एवं उपजाऊ मिट्टी पायी जाती है तथा पर्याप्त मात्रा में वर्षा होती है।
In simple words: भारत में जनसंख्या घनत्व का वितरण अत्यधिक असमान है, जहाँ मैदानी और उपजाऊ क्षेत्रों में उच्च घनत्व (जैसे बिहार और केरल) पाया जाता है, जबकि पर्वतीय और शुष्क क्षेत्रों में कम घनत्व (जैसे अरुणाचल प्रदेश) है, जो भौगोलिक और जलवायु कारकों से प्रभावित होता है।
🎯 Exam Tip: भारत में जनसंख्या घनत्व के क्षेत्रीय भिन्नता को समझना भौगोलिक, जलवायु और आर्थिक कारकों के प्रभावों का विश्लेषण करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 4. व्यावसायिक संरचना का अर्थ स्पष्ट कीजिए। विभिन्न व्यवसायों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: जनसंख्या के वितरण को विभिन्न व्यवसायों के आधार पर वर्गीकृत करना व्यावसायिक ढाँचा कहलाता है। भारत में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक विविधता विद्यमान है।
व्यवसायों को प्रायः प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक श्रेणियों में बाँटा गया है जिसका विवरण इस प्रकार है-
1. प्राथमिक क्रियाकलापों में कृषि, पशुपालन, वृक्षारोपण एवं मछली पालन तथा खनन आदि क्रियाएँ शामिल हैं।
2. द्वितीयक क्रियाकलापों में उत्पादन करने वाले उद्योग, भवन एवं निर्माण कार्य आते हैं।
3. तृतीयक क्रियाकलापों में परिवहन, संचार, वाणिज्य, प्रशासन तथा सेवाएँ शामिल हैं।
भारत में कुल जनसंख्या का 64 प्रतिशत भाग केवल कृषि कार्य करता है। द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की संख्या का अनुपात क्रमशः 13 तथा 20 प्रतिशत है। वर्तमान समय में बढ़ते हुए औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में वृद्धि होने के कारण द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में व्यावसायिक परिवर्तन हुआ है।
In simple words: व्यावसायिक संरचना जनसंख्या को प्राथमिक (कृषि, पशुपालन), द्वितीयक (उद्योग, निर्माण) और तृतीयक (सेवा, परिवहन) क्षेत्रों में उनकी गतिविधियों के आधार पर वर्गीकृत करती है, जो किसी देश की आर्थिक विकास स्थिति को दर्शाती है।
🎯 Exam Tip: व्यावसायिक संरचना को समझना देश के आर्थिक विकास के स्तर और रोजगार पैटर्न का विश्लेषण करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 5. बढ़ती हुई जनसंख्या के दुष्प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बढ़ती हुई जनसंख्या के दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं-
(i) बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण – देश की जनसंख्या बढ़ने से विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार का प्रदूषण बढ़ रहा है जो भयंकर खतरे का संकेत दे रहा है। जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है। वनस्पति व प्राणी जगत के ह्रास के कारण पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। प्रदूषण की रोक-थाम के साथ-साथ बढ़ती हुई जनसंख्या पर रोक लगाई जाए।
(ii) खनिज संपदा का ह्रास – खनिज संपदा की मात्रा निश्चित है, उसे बढ़ाया नहीं जा सकता। एक बार उसका उपभोग, उतनी ही मात्रा को कम कर देता है। जनसंख्या बढ़ने से खनन काम तेजी से बढ़ रहा है। अतः खनिजों के शीघ्र ही समाप्त होने की समस्या पैदा हो गई है। आवश्यकता इस बात की है कि खनिजों का उपभोग कम किया जाए, पूरक वस्तुओं का विकास किया जाए तथा उनके संरक्षण की विधियाँ अपनाई जाएँ।
(iii) मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी – भारत में प्राचीनकाल से खेती होते रहने से मृदा की उपजाऊपन की क्षमता कम हो गई है। इधर जनसंख्या के बढ़ने से वर्ष में 2-3 फसलें लेना भी आवश्यक है। यह सिंचाई के साधनों के विस्तार तथा रासायनिक उर्वरकों के भरपूर उपयोग से भी संभव है। ऐसा करने पर मृदा में क्षारीय तत्त्वों का बढ़ना तथा भूमि का जलाक्रान्त होना स्वाभाविक है। इससे मृदा का उपजाऊपन कम हो जाता है और कहीं-कहीं तो मृदा की समाप्ति भी देखी गई है। अतः इस समस्या के निदान के लिए रासायनिक खादों का वैज्ञानिक उपयोग तथा मृदा सर्वेक्षण की आवश्यकता है।
(iv) वनों का तेजी से ह्रास – पेट की भूख मिटाने के लिए कृषि का विकास और विस्तार आवश्यक हो जाता है। खाद्यान्नों की माँग को पूरा करने के लिए वनों को साफ करके खेतों में बदला गया है। फलतः देश में 21 प्रतिशत से भी कम भू-भाग पर वनों का विस्तार रह गया। वनों की कमी से वर्षा से कभी बाढ़ों का आना, मृदा का अपरदन होना तथा बहुमूल्य वन संपदा के न मिलने से समस्याएँ उठ खड़ी हुई हैं। अतः वनों के विस्तार एवं वृक्षारोपण पर अधिक बल देने की आवश्यकता है।
(v) चरागाह भूमि की कमी – भारत में पशु संपदा संसार में सर्वाधिक है। चरागाह भूमि घटते-घटते केवल 4% रह गई। फलतः पशुओं से अपेक्षित उत्पाद नहीं मिल पाते हैं। वनीय भूमि का पशुचारण के लिए उपयोग किया जा रहा है। इससे समस्या का निदान नहीं, अपितु दूसरे प्रकार की समस्या और उठ खड़ी होती है। अतः योजनाबद्ध तरीकों से चरागाह भूमि का विस्तार कर पशुपालन को सुव्यवस्थित व सुदृढ़ किया जाए।
(vi) कृषि योग्य भूमि का घटना – जनसंख्या के बढ़ने से पैतृक कृषि भूमि का बँटवारा निरंतर होता चला आ रहा है। फलतः कृषि योग्य भूमि का प्रति व्यक्ति अनुपात घटकर 0.29 हेक्टेयर रह गया है। इस समस्या का एक ही हल है कि जनसंख्या की वृद्धि पर नियंत्रण किया जाए।
In simple words: बढ़ती जनसंख्या से पर्यावरण प्रदूषण, खनिज संपदा का ह्रास, मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी, वनों का तेजी से ह्रास, चरागाह भूमि की कमी और कृषि योग्य भूमि का घटना जैसे गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं, जो प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिक संतुलन पर भारी दबाव डालते हैं।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के पारिस्थितिक और आर्थिक प्रभावों को समझना स्थायी विकास नीतियों के निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Question 6. भारत के सबसे अधिक तथा सबसे कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों का जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों को ध्यान में रखते हुए विवरण दीजिए।
Answer: भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल जनसंख्या 121.08 करोड़ है और जनसंख्या का औसत घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। लेकिन दिल्ली में तो घनत्व 11320 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से भी अधिक है तो अरुणाचल प्रदेश में 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। उदाहरण के लिए पश्चिमी बंगाल, केरल, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु में घनत्व 401 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से 1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी तक है। कुछ संघ राज्यों जैसे दिल्ली, चंडीगढ़, लक्षद्वीप तथा पांडिचेरी में 2547 से 11320 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर तक है। कहीं दूसरे राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मेघालय, नगालैण्ड, सिक्किम, मणिपुर आदि में घनत्व 17 से लेकर 128 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी ही है।
इस असमान वितरण के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं-
(i) औद्योगिक विकास – देश के जिन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास अधिक हुआ है, वहाँ रोजगार के अवसर तथा अन्य सुविधाएँ बढ़ जाती हैं। अतः इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व बढ़ जाता है। इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास कम हुआ है, वहाँ जनसंख्या का घनत्व कम है।
(ii) प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता – संसाधनों से संपन्न क्षेत्र जनसंख्या को आकर्षित करते हैं। जल, मृदा, खनिज, वन आदि देश की बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा है। इसके लिए जनशक्ति चाहिए। दामोदर घाटी खनिज संपदा से संपन्न है।
(iii) यातायात की सुविधाओं का विकास – जिन क्षेत्रों में नदियों, नहरों, सड़कों व रेल मार्गों का जाल है, वहाँ आवश्यक वस्तुएँ आसानी से उपलब्ध होती हैं। लोग काम के केंद्रों पर आसानी से आ-जा सकते हैं। परिवहन के साधनों के विकास से मैदानी भागों में अधिक जनसंख्या पाई जाती है। पर्वतीय, मरुस्थलीय तथा वनीय क्षेत्रों में यातायात के साधनों की कमी के कारण विरल आबाद है।
(iv) स्थल का स्वरूप – भारत में पर्वत, पठार एवं मैदान तीनों ही स्थलाकृतियाँ विस्तृत क्षेत्र में फैली हैं। देश की अधिकांश जनसंख्या मैदानी भागों में रहती है, क्योंकि मैदानी भाग में कृषि करना आसान व लाभदायक है, जिससे अधिक लोगों का जीवन निर्वाह होता है। मैदानों में जनसंख्या के वितरण में भी असमानता है। अधिक उपजाऊ मैदानी भागों में अधिक सघन जनसंख्या पाई जाती है।
(v) जलवायु – अधिक गर्म व शुष्क भागों में जनसंख्या कम पाई जाती है। अधिक ठंडे प्रदेश भी विरल जनसंख्या वाले हैं। राजस्थान का पश्चिमी भाग तथा हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व बहुत कम है। देश के समजलवायु वाले क्षेत्रों तथा उष्ण आई भागों में सघन जनसंख्या पाई जाती है। पश्चिमी बंगाल और केरल क्रमशः सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य हैं।
In simple words: भारत में जनसंख्या का वितरण भौगोलिक, जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, औद्योगिक विकास और यातायात सुविधाओं से प्रभावित होता है। अत्यधिक घने क्षेत्रों में अनुकूल परिस्थितियाँ होती हैं (जैसे उपजाऊ मैदान), जबकि विरल क्षेत्रों में प्रतिकूल भूभाग या मौसम होता है (जैसे पर्वत और मरुस्थल)।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वितरण के कारकों को समझना क्षेत्रीय नियोजन और संसाधन प्रबंधन के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये कारक मानव बसावट के पैटर्न को निर्धारित करते हैं।
Question 7. भारतीय जनसंख्या से संबंधित पाँच समस्याएँ नीचे दी गई हैं। प्रत्येक समस्या का एक दुष्परिणाम और प्रत्येक समस्या का एक व्यवहारिक समाधान लिखो ।
Answer:
1. जनघनत्व
• दुष्परिणाम : जनघनत्व से प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक दबाव पड़ता है तथा पर्यावरण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो गयी है।
• समाधान : नए उद्योगों की स्थापना करके रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना होगा। अधिक जन-घनत्व वाले क्षेत्रों से कम जनघनत्व वाले क्षेत्रों की ओर उद्योगों तथा कार्यालयों को स्थानान्तरित करना होगा।
2. असंतुलित लिंग-अनुपात
• दुष्परिणाम : स्त्रियों के प्रति दुर्व्यवहार तथा समाज में स्त्रियों के प्रति प्रतिकूल दृष्टिकोण।
• समाधान : स्त्रियों में शिक्षा का प्रसार करके उनके हितों की रक्षा करना।
3. सभी को स्वास्थ्य-सुविधाओं का अभाव
• दुष्परिणाम : प्रति व्यक्ति समुचित स्वास्थ्य-सुविधाओं के न मिलने के कारण स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव ।
• समाधान : स्त्री-बच्चों सहित सबके लिए एकीकृत स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया कराना ।
4. बढ़ती जनसंख्या के कारण पर्यावरण संबंधी समस्या
• दुष्परिणाम : वायु जल तथा ध्वनि प्रदूषण की समस्या।
• समाधान : पर्यावरण के संरक्षण के लिए लोगों में जागृति उत्पन्न करना।
5. स्त्रियों की आर्थिक भागीदारी
• दुष्परिणाम : स्त्रियों में आर्थिक भागीदारी का बहुत कम होना।
• समाधान : शिक्षा के अवसर प्रदान करके स्त्रियों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना।
In simple words: भारतीय जनसंख्या की मुख्य समस्याओं में उच्च जनघनत्व, असंतुलित लिंग-अनुपात, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, पर्यावरण प्रदूषण और स्त्रियों की कम आर्थिक भागीदारी शामिल हैं। इन समस्याओं के दुष्परिणामों को कम करने के लिए रोजगार सृजन, शिक्षा को बढ़ावा देना, एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना और पर्यावरण संरक्षण जैसे व्यावहारिक समाधान आवश्यक हैं।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या समस्याओं और उनके समाधानों को स्पष्ट और संक्षिप्त बिंदुओं में प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक समस्या के लिए दुष्परिणाम और समाधान का सटीक उल्लेख उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।
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