Download UP Board Solutions for Class 9 Social Science Chapter 04 चुनावी राजनीति
Access comprehensive textbook solutions for Chapter 04 चुनावी राजनीति using the official curriculum guides for Class 9 Social Science. Designed to align with the 2026 27 UP Board standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.
Access UP Board Solutions and Answers
Navigate directly to the solved Social Science textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. चुनाव क्यों होते हैं, इस बारे में इनमें से कौन-सा वाक्य ठीक नहीं है?
(क) चुनाव लोगों को सरकार के कामकाज का फैसला करने का अवसर देते हैं।
(ख) लोग चुनाव में अपनी पसंद के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं।
(ग) चुनाव लोगों को न्यायपालिका के कामकाज का मूल्यांकन करने का अवसर देते हैं।
(घ) लोग चुनाव से अपनी पसंद की नीतियाँ बना सकते हैं।
Answer: (ग) चुनाव लोगों को न्यायपालिका के कामकाज का मूल्यांकन करने का अवसर देते हैं।
In simple words: चुनाव लोगों को सरकार और प्रतिनिधियों को चुनने का अवसर देते हैं, न कि न्यायपालिका के कामकाज का मूल्यांकन करने का। न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से कार्य करती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, प्रत्येक विकल्प को ध्यान से पढ़कर यह पहचानें कि कौन सा कथन चुनाव के मूल उद्देश्य से मेल नहीं खाता है।
Question 2. भारत के चुनाव लोकतांत्रिक हैं, यह बताने के लिए इनमें कौन-सा वाक्य सही कारण नहीं देता?
(क) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता हैं।
(ख) भारत में चुनाव आयोग काफी शक्तिशाली है।
(ग) भारत में 18 वर्ष से अधिक उम्र का हर व्यक्ति मतदाता है।
(घ) भारत में चुनाव हारने वाली पार्टियाँ जनादेश स्वीकार कर लेती हैं।
Answer: (क) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता हैं।
In simple words: दुनिया में सबसे ज्यादा मतदाता होना भारत के चुनावों को लोकतांत्रिक साबित करने का सीधा कारण नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की शक्ति, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और चुनाव परिणामों की स्वीकृति जैसे तत्व इसे लोकतांत्रिक बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक चुनावों की विशेषताओं को समझें, जैसे स्वतंत्र चुनाव आयोग, मताधिकार की व्यापकता और परिणामों की स्वीकार्यता, ताकि सही कारणों की पहचान कर सकें।
Question 3. निम्नलिखित में मेल हूँढ़ें |
| (क) समय-समय पर मतदाता सूची का नवीनीकरण आवश्यक है ताकि | 1. समाज के हर तबके का समुचित प्रतिनिधित्व हो सके। |
| (ख) कुछ निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति और अनु. जनजाति के लिए आरक्षित हैं ताकि | 2. हर एक को अपना प्रतिनिधि चुनने का समान अवसर मिले। |
| (ग) प्रत्येक को सिर्फ एक वोट डालने का हक है ताकि | 3. हर उम्मीदवार को चुनावों में लड़ने का समान अवसर मिले। |
| (घ) सत्ताधारी दल को सरकारी वाहन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं क्योंकि | 4. संभव है कुछ लोग उस जगह से अलग चले गए हों जहाँ उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान किया था। |
Answer:(क) समय-समय पर मतदाता सूची का नवीनीकरण आवश्यक है ताकि - 4. संभव है कुछ लोग उस जगह से अलग चले गए हों जहाँ उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान किया था।
(ख) कुछ निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति और अनु. जनजाति के लिए आरक्षित हैं ताकि - 1. समाज के हर तबके का समुचित प्रतिनिधित्व हो सके।
(ग) प्रत्येक को सिर्फ एक वोट डालने का हक है ताकि - 2. हर एक को अपना प्रतिनिधि चुनने का समान अवसर मिले।
(घ) सत्ताधारी दल को सरकारी वाहन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं क्योंकि - 3. हर उम्मीदवार को चुनावों में लड़ने का समान अवसर मिले।
In simple words: यह मिलान चुनाव प्रणाली के विभिन्न पहलुओं और उनके पीछे के तर्कों को स्पष्ट करता है, जैसे मतदाता सूची का अद्यतनीकरण, आरक्षण, एक व्यक्ति एक वोट का सिद्धांत और सत्ताधारी दल के लिए आचार संहिता।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक कथन को उसके सही कारण या परिणाम से जोड़ना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक अवधारणा के पीछे के तर्क को समझें।
Question 4. इस अध्याय में वर्णित चुनाव सम्बन्धी सभी गतिविधियों की सूची बनाएँ और इन्हें चुनाव में सबसे पहले किए जाने वाले काम से लेकर आखिर तक के क्रम में सजाएँ। इनमें से कुछ मामले हैं- . चुनावी घोषणा-पत्र जारी करना, वोटों की गिनती, मतदाता सूची बनाना, चुनाव अभियान, चुनाव नतीजों की घोषणा, मतदान, पुनर्मतदान के आदेश, चुनाव प्रक्रिया की घोषणा, नामांकन दाखिल करना।
Answer: चुनाव संबंधी गतिविधियों का सही क्रम इस प्रकार है:
1. मतदाता सूची बनाना
2. चुनाव प्रक्रिया की घोषणा
3. नामांकन दाखिल करना
4. चुनाव घोषणा-पत्र जारी करना
5. चुनाव-अभियान
6. मतदान
7. पुनर्मतदान के आदेश
8. वोटों की गिनती
9. चुनाव नतीजों की घोषणा ।
In simple words: चुनाव एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जो मतदाता सूची तैयार करने से शुरू होती है और चुनाव परिणाम घोषित होने पर समाप्त होती है, जिसमें विभिन्न चरण शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: चुनाव प्रक्रिया के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं। प्रत्येक चरण के मुख्य कार्य को समझें।
Question 5. सुरेखा एक राज्य विधानसभा क्षेत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली अधिकारी है। चुनाव के इन चरणों में उसे किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
(क) चुनाव प्रचार
(ख) मतदान के दिन
(ग) मतगणना के दिन
Answer:
(क) चुनाव प्रचार : इसके लिए सुरेखा को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उम्मीदवार निम्नलिखित कार्य न करें
1. चुनाव प्रचार हेतु पूजा स्थलों का प्रयोग करना।
2. मंत्रीगणों द्वारा सरकारी वाहनों, हवाई जहाजों एवं कर्मचारियों का चुनाव हेतु प्रयोग ।
3. मतदाताओं को रिश्वत/घूस अथवा धमकी देना।
4. जाति अथवा धर्म के नाम पर वोट देने की अपील करना।
5. चुनाव अभियान के लिए सरकारी संसाधनों का प्रयोग करना ।
6. लोकसभा चुनाव हेतु चुनाव क्षेत्र में 25 लाख तथा विधानसभा चुनाव में 10 लाख से अधिक खर्च करना ।
(ख) मतदान के दिन : इस दिन सुरेखा को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनावी गड़बड़ी, मतदान केन्द्रों पर कब्जा न हो।
(ग)। वोटों की गिनती का दिन : इस दिन सुरेखा को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी उम्मीदवारों के एजेन्ट वोटों की सुचारु रूप से गणना सुनिश्चित करने के लिए वहाँ मौजूद हैं।
In simple words: एक चुनाव अधिकारी को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान नियमों का पालन, मतदान के दिन शांति व्यवस्था और मतगणना के दिन पारदर्शिता बनाए रखनी होती है।
🎯 Exam Tip: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारियों को जानें, विशेषकर चुनाव प्रचार के नियम, मतदान दिवस की सुरक्षा और मतगणना की पारदर्शिता।
Question 6. नीचे दी गई तालिका बताती है कि अमेरिकी कांग्रेस के चुनावों के विजयी उम्मीदवारों में अमेरिकी समाज के विभिन्न समुदाय के सदस्यों का क्या अनुपात था। ये किस अनुपात में जीते। इसकी तुलना अमेरिकी समाज में इन समुदायों की आबादी के अनुपात से कीजिए। इसके आधार पर क्या आप अमेरिकी संसद के चुनाव में भी आरक्षण का सुझाव देंगे? अगर हाँ, तो क्यों और किस समुदाय के लिए? अगर नहीं तो क्यों?
| समुदाय का प्रतिनिधित्व (प्रतिशत में) | अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में | अमेरिकी समाज में |
|---|---|---|
| अश्वेत | 8 | 13 |
| हिस्पैनिक | 5 | 13 |
| श्वेत | 86 | 70 |
Answer: उपर्युक्त तालिका के आधार पर हिस्पैनिक समुदाय के लिए आरक्षण एक अच्छा विचार है। हिस्पैनिक समुदाय की जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए ऐसा करना आवश्यक है।
In simple words: तालिका दर्शाती है कि हिस्पैनिक समुदाय का प्रतिनिधित्व उसकी जनसंख्या के अनुपात में कम है, इसलिए इस समुदाय को संसद में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए आरक्षण आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: डेटा-आधारित प्रश्नों में, दिए गए आंकड़ों का विश्लेषण करें और उसके आधार पर तार्किक निष्कर्ष और सुझाव प्रस्तुत करें। प्रतिनिधित्व में कमी को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 7. क्या हम इस दी गई सूचनाओं के आधार पर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाल सकते हैं? इनमें सभी पर अपनी राय के पक्ष में दो तथ्य प्रस्तुत कीजिए ।
(क) भारत के चुनाव आयोग को देश में स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव करा सकने लायक पर्याप्त अधिकार नहीं हैं।
(ख) हमारे देश के चुनाव में लोगों की जबर्दस्त भागीदारी होती है। (ग) सत्ताधारी पार्टी के लिए चुनाव जीतना बहुत आसान होता है।
(घ) अपने चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतन्त्र बनाने के लिए कई कदम उठाने जरूरी हैं।
Answer:
(क) ऐसा नहीं है। यथार्थ में निर्वाचन आयोग को देश में स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार प्राप्त है। यह चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू करता है तथा इसका उल्लंघन करने वाले राजनीतिक दलों या प्रत्याशियों को दण्डित करता है। चुनाव ड्यूटी के दौरान नियुक्त कर्मचारी चुनाव आयोग के अधीन कार्य करते हैं न कि सरकार के ।
(ख) यह सत्य है। चुनावों में लोगों की भागीदारी प्रायः मतदान करने वाले लोगों के आँकड़ों से मानी जाती है। मतदान प्रतिशत योग्य मतदाताओं में से वास्तव में मतदान करने वाले लोगों के प्रतिशत को प्रदर्शित करता है। मतदाता चुनावों द्वारा राजनीतिक दलों पर अपने अनुकूल नीति एवं कार्यक्रमों के लिए दबाव डाल सकते हैं। मतदाताओं को ऐसा लगता है कि देश के शासन-संचालन के तरी में उनके मन का विशेष महत्त्व है।
(ग) यह सत्य नहीं है। सत्ताधारी भी चुनाव में पराजित हुए हैं। कई बार ऐसे प्रत्याशी जो चुनावों में अधिक धन खर्च करते हैं, चुनाव हार जाते हैं।
(घ) यह सत्य है। चुनाव सुधार के द्वारा धन बल और अपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को राजनीति से दूर करने की आवश्यकता है। क्योंकि कई बार धन-बल और अपराधिक छवि वाले लोग राजनीतिक दलों से टिकट पाने और चुनाव जीतने में सफल हो जाते हैं। ऐसे लोग जनकल्याण नहीं कर सकते बल्कि ये अपनी स्वार्थ सिद्ध में ही लगे रहते हैं।
In simple words: भारत में चुनाव आयोग सशक्त है और चुनाव लोकतांत्रिक ढंग से होते हैं, लेकिन चुनाव सुधारों की आवश्यकता है ताकि धन बल और आपराधिक तत्वों का प्रभाव कम हो सके और चुनावी प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष हो।
🎯 Exam Tip: भारतीय चुनाव प्रणाली की वास्तविकताओं को समझें, जिसमें चुनाव आयोग की भूमिका, लोगों की भागीदारी और चुनाव सुधारों की आवश्यकता शामिल है, ताकि तार्किक विश्लेषण कर सकें।
Question 8. चिनप्पा को दहेज के लिए अपनी पत्नी को परेशान करने के जुर्म में सजा मिली थी। सतबीर को छुआछूत मानने को दोषी माना गया था। दोनों को अदालत ने चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी। क्या यह फैसला लोकतांत्रिक चुनावों के बुनियादी सिद्धान्तों के खिलाफ जाता है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
Answer: यह निर्णय लोकतांत्रिक चुनावों के आधारभूत सिद्धान्तों के विरुद्ध नहीं है क्योंकि चिनप्पा और सतबीर दोनों ही अपराधी हैं। दोनों को कानून का पालन न करने पर न्यायालय द्वारा दण्डित किया जा चुका है अर्थात् ये दोनों देश के लिए अच्छे व आदर्श नागरिक सिद्ध नहीं हुए हैं। इसलिए उन्हें केन्द्र अथवा राज्य सरकार में कोई पद धारण नहीं करने देना चाहिए क्योंकि उनमें परिवार और समाज के प्रति सम्मान का अभाव है और उनसे देश व समाज के प्रति सम्मान प्रदर्शन की आशा नहीं है।
In simple words: आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकना लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि चुने हुए प्रतिनिधि कानून का सम्मान करें और समाज के प्रति जिम्मेदार हों।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक सिद्धांतों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के संदर्भ में समझें। कानून के शासन और आदर्श नागरिक के गुणों को ध्यान में रखते हुए अपने तर्क प्रस्तुत करें।
Question 9. यहाँ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चुनावी गड़बड़ियों की कुछ रिपोर्टें दी गई हैं। क्या ये देश अपने यहाँ के चुनावों के सुधार के लिए भारत से कुछ बातें सीख सकते हैं? प्रत्येक मामले में आप क्या सुझाव देंगे?
(क) नाइजीरिया के एक चुनाव में मतगणना अधिकारी ने जान-बूझकर एक उम्मीदवार को मिले वोटों की संख्या बढ़ा दी और उसे विजयी घोषित कर दिया। बाद में अदालत ने पाया कि दूसरे उम्मीदवार को मिले पाँच लाख वोटों को उस उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज कर लिया गया था।
(ख) फिजी में चुनाव से ठीक पहले एक परचा बाँटा गया जिसमें धमकी दी गयी थी कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री महेंद्र चौधरी के पक्ष में वोट दिया गया तो खून-खराबा हो जाएगा। यह धमकी भारतीय मूल के मतदाताओं को दी गई थी।
(ग) अमेरिका के हर प्रान्त में मतदान, मतगणना और चुनाव संचालन की अपनी-अपनी प्रणालियाँ हैं। सन् 2000 ई. के चुनाव में फ्लोरिडा प्रान्त के अधिकारियों ने जॉर्ज बुश के पक्ष में अनेक विवादास्पद फैसले लिए पर उनके फैसले को कोई भी नहीं बदल सका।
Answer:
(क) यदि चुनाव अधिकारी द्वारा की गयी गड़बड़ी न्यायालय में प्रमाणित हो जाती है तो उस चुनाव को अवैध घोषित कर दिया जाना चाहिए और उस चुनाव को दोबारा कराया जाना चाहिए। भारत में मतगणना के दौरान धाँधली सम्भव नहीं है क्योंकि मतगणना के दौरान उम्मीदवार अथवा उनके प्रतिनिधि मतगणना केन्द्र पर उपस्थित रहते हैं और मतगणना उनके सामने होती है।
(ख) चुनाव से पूर्व किसी प्रत्याशी के विरोध हेतु धमकी भरा परचा निकालना और एक समुदाय को भयभीत करना निश्चित रूप से चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। इस परचे को जारी करने वाले व्यक्ति अथवा राजनीतिक दल का पता लगाकर उसे दण्डित किया जाना चाहिए। क्योंकि चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के लिए धमकी देना लोकतांत्रिक सिद्धान्तों के विरुद्ध है।
(ग) चूँकि, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रत्येक राज्य को अपने चुनाव-संबंधी कानून बनाने का अधिकार है, फ्लोरिडा राज्य द्वारा लिया गया निर्णय उस राज्य के चुनाव के कानूनों के अनुकूल होगा। यदि ऐसा है तो किसी को भी ऐसे निर्णय को चुनौती देने का अधिकार नहीं होता। भारत में चूंकि राज्यों को अपने अलग चुनाव-सम्बन्धी कानून बनाने का अधिकार नहीं है, यहाँ पर ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकती।
In simple words: भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता, आचार संहिता का पालन और केंद्रीयकृत चुनाव कानून धोखाधड़ी, धमकी और क्षेत्रीय कानूनी विसंगतियों को रोकने में सहायक होते हैं, जिनसे अन्य देश सीख सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न देशों में चुनावी गड़बड़ियों के उदाहरणों का विश्लेषण करते हुए, भारत की चुनाव प्रणाली की मजबूती और कमियों की तुलना करें। सुझाव देते समय व्यावहारिक और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर ध्यान दें।
Question 10. भारत में चुनावी गड़बड़ियों से सम्बन्धित कुछ रिपोर्टों यहाँ दी गयी हैं। प्रत्येक मामले में समस्या की पहचान कीजिए। इन्हें दूर करने के लिए क्या किया जा सकता है?
(क) चुनाव की घोषणा होते ही मंत्री महोदय ने बन्द पड़ी चीनी मिल को दोबारा खोलने के लिए वित्तीय सहायता देने की घोषणा की।
(ख) विपक्षी दलों का आरोप था कि दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनके बयानों और चुनाव अभियान को उचित जगह नहीं मिली।
(ग) चुनाव आयोग की जाँच से एक राज्य की मतदाता सूची में 20 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम मिले ।
(घ) एक राजनैतिक दल के गुण्डे बन्दूकों के साथ घूम रहे थे, दूसरी पार्टियों के लोगों को मतदान में भाग लेने से रोक रहे थे और दूसरी पार्टी की चुनावी सभाओं पर हमले कर रहे थे।
Answer:
(क) चुनावी की तिथि घोषित हो जाने के बाद सरकार द्वारा नीतिगत निर्णय लेना उचित नहीं है। मंत्री महोदय ने चीनी मिल को आर्थिक सहायता देने का वायदा करके एक नीतिगत निर्णय की घोषणा की है। जो कि अनुचित है। क्योंकि इससे चुनाव को प्रभावित करने की मंशा साफ झलकती है। अतः मंत्री महोदय को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मंत्री महोदय का कृत्य आदर्श चुनाव आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।
(ख) सभी राजनैतिक दलों को रेडियो तथा दूरदर्शन अपने विचार प्रस्तुत करने की स्वतन्त्रता एवं समय दिया जाना चाहिए। भारत में सभी राजनैतिक दलों को निर्वाचन आयोग द्वारा समय दिया जाता है। विपक्षी दल के बयानों एवं चुनाव अभियान को दूरदर्शन तथा आकाशवाणी पर उचित स्थान न देकर सरकार ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया है। इसके प्रत्युत्तर में विपक्ष को राष्ट्रीय मीडिया में पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
(ग) फर्जी मतदाताओं की मौजूदगी का अर्थ है कि मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों ने चुनावी गड़बड़ी की तैयारी की थी। चुनाव आयोग को मतदाता सूची की तैयारी की देखभाल करनी चाहिए।
(घ) गुण्डों एवं आपराधिक तत्त्वों का प्रयोग करके राजनैतिक दलों द्वारा अपने प्रतिद्वन्द्वियों द्वारा धमकाना और भयभीत करना राजनैतिक दुराचार है। बन्दूक तथा अन्य घातक हथियारों के साथ चुनाव के दौरान लोगों का घूमना फिरना बन्द किया जाना चाहिए। जिनके पास लाइसेंसी हथियार हैं उनके हथियार चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही जमा करा लिए जाने चाहिए तथा अवैध हथियार लेकर घूमने वालों को दण्डित किया जाना चाहिए। सभी उम्मीदवारों को सरकार की ओर से सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस बात के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए कि असामाजिक तत्त्व चुनाव के दौरान गड़बड़ी न कर सकें ।
In simple words: चुनावी गड़बड़ियों को रोकने के लिए चुनाव आयोग को सख्त नियम लागू करने चाहिए, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना चाहिए, मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन बनाना चाहिए, और आपराधिक तत्वों के प्रभाव को कम करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: चुनावी गड़बड़ियों के विभिन्न रूपों को पहचानें और प्रत्येक समस्या के लिए प्रभावी समाधान सुझाएं, जिसमें आचार संहिता का सख्ती से पालन और चुनाव आयोग की भूमिका पर जोर दिया गया हो।
Question 11. जब यह अध्याय पढ़ाया जा रहा था तो रमेश कक्षा में नहीं आ पाया था। अगले दिन कक्षा में आने के बाद उसने अपने पिताजी से सुनी बातों को दोहराया। क्या आप रमेश को बता सकते हैं कि उसके इन बयानों में क्या गड़बड़ी है?
(क) औरतें उसी तरह वोट देती हैं जैसा पुरुष उनसे कहते हैं इसलिए उनके मताधिकार का कोई मतलब नहीं है।
(ख) पार्टी-पॉलिटिक्स से समाज में तनाव पैदा होता है। चुनाव में सबकी सहमति वाला फैसला होना चाहिए, प्रतिद्वंद्विता नहीं होनी चाहिए ।
(ग) सिर्फ स्नातकों को ही चुनाव लड़ने की इजाजत होनी चाहिए।
Answer:
(क) यह बात सही नहीं है। वर्तमान भारत में आज ऐसी महिलाएँ बहुत बड़ी संख्या में विद्यमान हैं जो स्वेच्छा से मतदान करती हैं। महिलाओं को मताधिकार से वंचित करना अथवा उन्हें जबरन किसी प्रत्याशी विशेष के लिए मतदान करने के लिए प्रेरित करना लोकतांत्रिक रूप से अनुचित है। इसीलिए विश्व के सभी लोकतांत्रिक देशों में महिलाओं को मतदान और चुनाव लड़ने का अधिकार दिया गया है।
(ख) यह सत्य है कि दलगत राजनीति समाज में तनाव उत्पन्न करती है किन्तु इसके लिए कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। वर्तमान में राज्यों की जनसंख्या करोड़ों में है और इतने लोगों से किसी सहमति पर पहुँचना बहुत कठिन होगा।
(ग) केवल स्नातकों को चुनाव लड़ने का अधिकार देना अलोकतांत्रिक होगा। इसका आशय यह होगा कि उन लोगों को चुनाव न लड़ने दिया जाए जो स्नातक नहीं हैं। प्रत्याशियों का शिक्षित होना अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए सरकार को दायित्व है कि वह लोगों को शिक्षित करने का प्रयास करे।
In simple words: लोकतंत्र में महिलाओं को स्वतंत्र रूप से मतदान का अधिकार है, दलगत राजनीति समाज के लिए आवश्यक है, और चुनाव लड़ने के लिए केवल स्नातक होने की शर्त लगाना अलोकतांत्रिक होगा।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों को समझें, जैसे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, राजनीतिक दलों की भूमिका और सभी नागरिकों के चुनाव लड़ने के अधिकार, ताकि ऐसे बयानों का खंडन कर सकें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. चुनाव का अर्थ बताइए।
Answer: लोकतन्त्र में शासन जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से चलाया जाता है। चुनाव वह प्रक्रिया है। जिसके माध्यम से नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।
In simple words: चुनाव वह प्रक्रिया है जिससे लोग अपने प्रतिनिधियों को चुनकर सरकार बनाने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: चुनाव की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से याद रखें।
Question 2. मतदाता किसे कहते हैं?
Answer: एक राज्य में निवास करने वाले ऐसे व्यक्ति जिन्हें प्रतिनिधियों के चुनाव में भाग लेने एवं मतदान करने का अधिकार होता है उन्हें मतदाता कहा जाता है।
In simple words: मतदाता वह व्यक्ति होता है जिसके पास चुनाव में वोट डालने का कानूनी अधिकार होता है।
🎯 Exam Tip: मतदाता की योग्यता और परिभाषा को ध्यान में रखें।
Question 3. चुनावी धाँधली से क्या आशय है?
Answer: चुनाव में अपने वोट बढ़ाने के लिए उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा की जाने वाली गड़बड़ी को चुनावी धाँधली कहते हैं। एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग लोगों के नाम पर वोट डालना और मतदान अधिकारी को डरा धमका कर या घूस देकर अपने उम्मीदवार के पक्ष में काम करवाने जैसी बातें चुनावी धाँधली में शामिल हैं।
In simple words: चुनावी धाँधली का मतलब है चुनाव जीतने के लिए गलत और गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करना, जैसे फर्जी वोट डालना या मतदाताओं को डराना।
🎯 Exam Tip: चुनावी धाँधली के विभिन्न रूपों को जानें ताकि उसे पहचान सकें और उसके दुष्परिणामों को समझ सकें।
Question 4. मतदान केन्द्र पर कब्जा से क्या आशय है?
Answer: मतदान के दौरान किसी उम्मीदवार अथवा दल के समर्थकों अथवा भाड़े के अपराधियों द्वारा मतदान केन्द्रों पर नियंत्रण करना, असली मतदाताओं को मतदान केन्द्रों पर आने से रोकना तथा स्वयं ज्यादातर वोट डाल देना, मतदान केन्द्रों पर कब्जा कहलाता है।
In simple words: मतदान केंद्र पर कब्जा का मतलब है कि कुछ लोग जबरन मतदान केंद्र पर नियंत्रण कर लेते हैं, असली मतदाताओं को वोट डालने से रोकते हैं और अपनी पसंद के उम्मीदवार के लिए फर्जी वोट डालते हैं।
🎯 Exam Tip: मतदान केंद्र पर कब्जा एक गंभीर चुनावी कदाचार है, इसकी परिभाषा और कारणों को समझें।
Question 5. चुनाव में उम्मीदवार बनने की योग्यता बताइए।
Answer: चुनाव में उम्मीदवार के लिए निम्न योग्यताएँ होनी चाहिए
1. वह देश का नागरिक हो।
2. उस पर किसी तरह का अपराध करने का आरोप सिद्ध नहीं हुआ हो ।
3. 25 वर्ष की न्यूनतम आयु वाला कोई भी मतदाता ।
4. वह पागल व दिवालिया न हो।
In simple words: चुनाव लड़ने के लिए व्यक्ति को भारतीय नागरिक होना चाहिए, कम से कम 25 साल का होना चाहिए, आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: चुनाव में उम्मीदवार बनने की न्यूनतम योग्यताओं को सटीक रूप से याद रखें, जिनमें नागरिकता, आयु और कानूनी स्थिति शामिल हैं।
Question 6. लोकतन्त्र में चुनाव का महत्त्व बताइए।
Answer: आधुनिक राज्यों में प्रायः अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र को स्थापित किया गया है। इस प्रणाली में मतदाता एक निश्चित काल के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं, जो सरकार को चलाते हैं। प्रतिनिधियों को चुनने के लिए चुनाव आवश्यक होते हैं। चुनाव प्रायः दलीय आधार पर लड़े जाते हैं, परन्तु कई उम्मीदवार स्वतन्त्र (Independent) उम्मीदवार भी चुनाव लड़ते हैं। चुनावों में जिस राजनैतिक दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाता है, वह सरकार का गठन करता है और शासन की बागडोर अपने हाथों में सँभालता है।
In simple words: लोकतंत्र में चुनाव महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने और सरकार बनाने का अधिकार देते हैं, जिससे शासन जनता के प्रति जवाबदेह बनता है।
🎯 Exam Tip: लोकतंत्र में चुनाव की भूमिका को समझें, विशेषकर प्रतिनिधियों के चयन, सरकार के गठन और शासन की जवाबदेही में।
Question 7. आधुनिक लोकतन्त्र को अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र क्यों कहते हैं?
Answer: आधुनिक राज्य जनसंख्या और क्षेत्रफल की दृष्टि से बहुत बड़े हैं। इसमें सभी मतदाताओं के लिए राज्य के कार्यों में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेना सम्भव नहीं है। इसमें नागरिक एक निश्चित अवधि के लिए अपने जनप्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं जो उसे निर्धारित अवधि तक शासन का संचालन करते हैं। प्रतिनिधियों के माध्यम से संचालित होने के कारण ही इसे अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र कहते हैं।
In simple words: बड़े राज्यों में सभी नागरिक सीधे शासन में भाग नहीं ले सकते, इसलिए वे अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो उनके बदले शासन चलाते हैं, जिससे यह अप्रत्यक्ष लोकतंत्र कहलाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लोकतंत्र के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और आधुनिक राज्यों में अप्रत्यक्ष प्रणाली के कारणों पर ध्यान दें।
Question 8. उप-चुनाव से आप क्या समझते हैं?
Answer: संसद या राज्य विधानमण्डल के किसी सदस्य की मृत्यु होने अथवा सदस्य द्वारा किसी कारण से त्यागपत्र देने या उसे पदच्युत किए जाने की स्थिति में रिक्त हुई लोकसभा या विधानसभा सीट के लिए कराए जाने वाले चुनाव को उपचुनाव कहते हैं। इस चुनाव में निर्वाचित सदस्य केवल उस सदन के शेष कार्यकाल के लिए ही चुने जाते हैं।
In simple words: उपचुनाव तब होता है जब किसी सीट पर मौजूदा प्रतिनिधि की मृत्यु, त्यागपत्र या अयोग्यता के कारण अचानक खाली हो जाती है, और नया चुना गया सदस्य केवल शेष कार्यकाल के लिए सेवा देता है।
🎯 Exam Tip: उपचुनाव की परिभाषा और उसके विशेष उद्देश्य को याद रखें, खासकर यह कि नया सदस्य शेष कार्यकाल के लिए होता है।
Question 9. मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और पदमुक्त करने की प्रक्रिया का उल्लेख कीजिए ।
Answer: भारत के राष्ट्रपति द्वारा देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति की जाती है। एक बार नियुक्त हो जाने के बाद चुनाव आयुक्त राष्ट्रपति या सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होता है। यदि शासक दल या सरकार को चुनाव आयुक्त पसन्द न हो तब भी मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से मुक्त कर पाना सम्भव नहीं होता है।
In simple words: मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है, और एक बार नियुक्त होने के बाद, वह सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होता, जिससे उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
🎯 Exam Tip: मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकाल की सुरक्षा को समझें, जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का आधार है।
Question 10. चुनाव में किस तरह की गड़बड़ियों की आशंका होती है?
Answer: चुनाव में निम्न गड़बड़ियों की आशंका बनी रहती है
1. अमीर उम्मीदवारों और बड़ी पार्टियों द्वारा बड़े पैमाने पर धन खर्च करने की।
2. मतदान के दिन मतदाताओं को डराना और फर्जी मतदान करना।
3. मतदाता सूची में फर्जी नाम डालने और असली नामों को गायब करने की।
4. शासक दल द्वारा सरकारी सुविधाओं और अधिकारियों के दुरुपयोग की।
In simple words: चुनाव में धन के दुरुपयोग, फर्जी मतदान, मतदाता सूची में हेराफेरी और सरकारी संसाधनों के गलत इस्तेमाल जैसी गड़बड़ियाँ हो सकती हैं, जो चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित करती हैं।
🎯 Exam Tip: चुनावी गड़बड़ियों के सामान्य रूपों को पहचानें और समझें कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कैसे कमजोर करते हैं।
Question 11. भारत में किसे मताधिकार प्राप्त है? किसे मताधिकार से वंचित किया जा सकता है?
Answer: भारत में वयस्कता की आयु 18 वर्ष निर्धारित की गयी है। 18 वर्ष या इससे अधिक उम्र का कोई व्यक्ति चुनाव में मतदान कर सकता है। उसे जाति, धर्म, लिंग के आधार पर मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। लेकिन अपराधियों एवं मानसिक रूप से असंतुलित लोगों को मताधिकार का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।
In simple words: भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी नागरिक जाति, धर्म या लिंग के भेदभाव के बिना वोट दे सकता है, लेकिन अपराधी और मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्तियों को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की परिभाषा और उसके अपवादों को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 12. “मतदाता सूची' किसे कहते हैं?
Answer: लोकतांत्रिक निर्वाचन व्यवस्था में निर्वाचन से पहले मतदान की योग्यता रखने वालों की सूची तैयार की जाती है। इस सूची को अधिकारिक रूप से मतदाता सूची कहते हैं।
In simple words: मतदाता सूची वह आधिकारिक लिस्ट है जिसमें चुनाव में वोट डालने के योग्य सभी लोगों के नाम होते हैं।
🎯 Exam Tip: मतदाता सूची की परिभाषा और उसके महत्व को समझें, क्योंकि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का आधार है।
Question 13. 1987 ई. में हुए हरियाणा राज्य विधानसभा के बाद अस्तित्व में आयी सरकार ने क्या महत्त्वपूर्णघोषणा की?
Answer: हरियाणा में चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद चौधरी देवीलाल राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने । मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद चौधरी देवीलाल ने सर्वप्रथम छोटे किसान, खेतिहर मजदूर और छोटे व्यापारियों के बकाया ऋण को माफ करने का निर्णय किया।
In simple words: 1987 में हरियाणा में चौधरी देवीलाल की सरकार ने छोटे किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के ऋण माफ करने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी।
🎯 Exam Tip: चुनावी घोषणाओं के वास्तविक प्रभावों और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक निर्णयों को याद रखें।
Question 14. न्याय युद्ध आन्दोलन से आप क्या समझते हैं?
Answer: हरियाणा में 1982 ई. में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार अस्तित्व में थी। तत्कालीन नेता विपक्ष चौधरी देवीलाल ने कांग्रेस शासन के विरुद्ध न्याय युद्ध आन्दोलन का नेतृत्व किया और लोकदल नामक नए राजनीतिक दल का गठन किया। चौधरी देवीलाल ने कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव लड़ने के लिए अन्य विपक्षी दलों को मिलाकर एक मोर्चे का गठन किया।
In simple words: न्याय युद्ध आन्दोलन चौधरी देवीलाल के नेतृत्व में हरियाणा में 1982 में कांग्रेस सरकार के खिलाफ चलाया गया एक आंदोलन था, जिसमें विपक्षी दलों ने मिलकर एक मोर्चा बनाया था।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक आंदोलनों के नाम, उनके नेताओं और मुख्य उद्देश्यों को याद रखें।
Question 15. 1971 ई. में इन्दिरा गाँधी ने, 1977 ई. में जनता पार्टी ने और 1977 ई. में ही बंगाल में वामपंथियों ने चुनाव में क्या नारा दिया था?
Answer: 1971 ई. के लोकसभा के चुनावों में इन्दिरा गाँधी की नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था। 1977 ई. में हुए लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी ने लोकतन्त्र बचाओ का नारा दिया था। वामपंथी दलों ने 1977 ई. में हुए पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में जमीन जोतने वाले को जमीन का नारा दिया था।
In simple words: 1971 में इंदिरा गाँधी ने 'गरीबी हटाओ' का नारा दिया, जबकि 1977 में जनता पार्टी ने 'लोकतंत्र बचाओ' और वामपंथियों ने 'जमीन जोतने वाले को जमीन' का नारा दिया।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक चुनावों से जुड़े प्रमुख नारों और राजनीतिक दलों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सामान्य ज्ञान के प्रश्न होते हैं।
Question 16. मध्यावधि चुनाव किसे कहते हैं?
Answer: भारत में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव प्रायः पाँच वर्ष के लिए करवाया जाता है किन्तु यदि लोकसभा या विधानसभा को उसके निश्चित कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाता है तो उसके लिए नए चुनाव करवाए जाते हैं, तो ऐसे चुनाव को
In simple words: मध्यावधि चुनाव तब होते हैं जब लोकसभा या विधानसभा अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने से पहले ही भंग हो जाती है, जिसके कारण नए चुनाव कराए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: मध्यावधि चुनाव की परिभाषा और उसके कारणों को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 17. भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (2018) कौन हैं?
Answer: भारत के वर्तमान (2018) मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत हैं। इनकी नियुक्ति अचल कुमार ज्योति के स्थान पर 23 जनवरी, 2018 ई. को की गयी। वे भारत के 22वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की अवधि तक होता है।
In simple words: ओम प्रकाश रावत 2018 में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
🎯 Exam Tip: मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल और नियुक्ति से संबंधित जानकारी को अपडेटेड रखें।
Question 18. चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने के दो आधार बताइए ।
Answer:
(i) प्रत्येक मतदाता को समान रूप से चुनाव लड़ने का अधिकार हो और राजनैतिक दलों तथा उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की आजादी हो और वे मतदाताओं के सम्मुख विकल्प प्रस्तुत कर सकें।
(ii) देश के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी प्रकार के भेदभाव के मतदान का अधिकार प्राप्त हो और प्रत्येक मतदाता के मत का मूल्य समान हो।
In simple words: चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने के लिए सभी को समान रूप से चुनाव लड़ने और वोट देने का अधिकार होना चाहिए, साथ ही मतदाताओं को कई विकल्प उपलब्ध होने चाहिए।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक चुनावों के मूल सिद्धांतों को याद रखें, जैसे सार्वभौमिक मताधिकार, उम्मीदवारों की स्वतंत्रता और विकल्पों की उपलब्धता।
Question 19. राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता का महत्त्व बताइए ।
Answer: चुनाव का वास्तविक अर्थ राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता है। इसके कई रूप हो सकते हैं जिनमें से सबसे स्पष्ट रूप है। राजनैतिक दलों के बीच प्रतिद्वन्द्विता । निर्वाचन-क्षेत्र में इसका रूप उम्मीदवारों के बीच प्रतिद्वन्द्विता का हो जाता है। यदि प्रतिद्वन्द्विता न रहे तो चुनाव बेमानी हो जाएँगे।
In simple words: राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है क्योंकि यह दलों और उम्मीदवारों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है और मतदाताओं को चुनने के लिए वास्तविक विकल्प प्रदान करती है।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के महत्व को समझें, क्योंकि यह चुनाव को सार्थक बनाती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करती है।
Question 20. चुनाव आयोग के दो प्रमुख कार्य बताइए ।
Answer: चुनाव आयोग के दो प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं
1. यह चुनावों का प्रबन्ध, निर्देशन नथा नियंत्रण करता है तथा चुनावों से सम्बन्धित समस्याओं का समाधान करता है।
2. चुनाव आयोग चुनावों से पूर्व चुनाव-क्षेत्र के आधार पर मतदाताओं की सूचियाँ तैयार करवाता है।
In simple words: चुनाव आयोग का मुख्य कार्य चुनाव प्रक्रिया का प्रबंधन और निर्देशन करना, तथा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को तैयार करवाना है।
🎯 Exam Tip: चुनाव आयोग के मुख्य कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण संस्था है।
Question 21. भारत की चुनाव-व्यवस्था के कोई दो दोष (त्रुटियाँ) लिखें।
Answer:
(i) चुनावों में धन की बढ़ती हुई भूमिका ।
(ii) जाति तथा धर्म के आधार पर मतदान ।
In simple words: भारत की चुनाव प्रणाली के दो प्रमुख दोष धन का बढ़ता प्रभाव और जाति तथा धर्म के आधार पर मतदान हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय चुनाव प्रणाली की मुख्य कमियों को पहचानें और उन्हें संक्षेप में प्रस्तुत करना सीखें।
Question 22. गुप्त मतदान का क्या अर्थ है?
Answer: गुप्त मतदान का अर्थ है कि चुनाव अधिकारियों द्वारा चुनाव के लिए ऐसी प्रबन्ध किया जाता है कि स्वयं मतदाता के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को यह मालूम न हो कि मतदाता ने किस उम्मीदवार को अपना मत दिया है।
In simple words: गुप्त मतदान यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता का वोट गोपनीय रहे, जिससे किसी को यह पता न चले कि उसने किसे वोट दिया है, और वह बिना किसी दबाव के मतदान कर सके।
🎯 Exam Tip: गुप्त मतदान की परिभाषा और लोकतांत्रिक चुनावों में इसके महत्व को याद रखें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. भारत में राजनैतिक दलों को चुनाव में चुनाव चिह्न दिए जाने का कारण है?
Answer: चुनाव आयोग द्वारा भारत में विभिन्न राजनीतिक दलों को विभिन्न चुनाव चिह्न आबंटित किये गये। उदाहरण के लिए कांग्रेस (इ) का चुनाव चिह्न 'हाथ का पंजा' तथा भाजपा का चुनाव चिह्न 'कमल का फूल' है। राजनैतिक दलों को चुनाव चिह्न प्रदान करने का प्रमुख कारण यह है
1. यदि एक ही नाम के दो अथवा अधिक उम्मीदवार हों, तो चुनाव चिह्नों की सहायता से उनकी पहचान करना। आसीन हो जाता है।
2. चिह्न के द्वारा एक साधारण तथा अशिक्षित व्यक्ति भी चिह्न से सम्बन्धित राजनैतिक दल के उम्मीदवार की पहचान कर सकता है ।
3. चुनाव चिह्न की सहायता से सभी चुनाव क्षेत्रों में राजनैतिक दल बड़ी आसानी से अपना चुनाव-प्रचार कर सकते हैं। चुनाव चिह्नों से उन्हें जलूस तथा जलसे आदि संगठित करने में आसानी होती है।
In simple words: राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न इसलिए दिए जाते हैं ताकि वे उम्मीदवारों को आसानी से पहचान सकें, निरक्षर मतदाताओं के लिए मतदान आसान हो, और दल प्रभावी ढंग से प्रचार कर सकें।
🎯 Exam Tip: चुनाव चिह्नों के महत्व और उनके व्यावहारिक उपयोगों को समझें, विशेषकर भारतीय संदर्भ में।
Question 2. चुनाव घोषणा-पत्र किसे कहते हैं?
Answer: राजनैतिक दलों द्वारा चुनाव के समय अपने कार्यक्रम, नीतियों तथा उद्देश्यों को बताने के लिए जो प्रपत्र जारी किया जाता है, उसी प्रपत्र को चुनाव घोषणा-पत्र कहते हैं। चुनाव के कुछ दिन पहले प्रत्येक राजनैतिक दल अपना घोषणापत्र जारीं करते हैं। इस प्रपत्र के माध्यम से राजनीतिक दल लोगों को यह बताते हैं कि देश की आन्तरिक तथा विदेश नीति के बारे में उनके क्या विचार हैं और उसे यदि सरकार बनाने का अवसर मिला, तो वह कौन-कौन से कार्य करेंगे। चुनाव घोषणा-पत्र के निम्नलिखित उपयोग (लाभ) हैं
1. इससे विभिन्न राजनैतिक दलों की आन्तरिक तथा बाहरी नीति के बारे में लोगों को जानकारी मिल सकती है।
2. विभिन्न राजनैतिक दलों के चुनाव घोषणा-पत्रों को देखने के पश्चात् मतदाताओं के लिए मत का निर्णय लेना आसान होता है।
3. चुनाव जीतने वाले दल के लिए घोषणा-पत्र पथ-प्रदर्शन का कार्य करता है, क्योंकि उन्हें अपना कार्य उसी के । अनुसार करना होता है।
4. चुनाव के पश्चात् घोषणा-पत्र के अनुसार कार्य करने के लिए जनता सरकार पर दबाव डाल सकती है।
5. यदि सरकार उन वायदों को पूरा नहीं करती जो घोषणा-पत्र में दिए गए थे, तो जनता सरकार की आलोचना कर सकती है।
In simple words: चुनाव घोषणा-पत्र राजनीतिक दलों द्वारा जारी किया गया एक दस्तावेज होता है जिसमें उनके कार्यक्रम और नीतियां बताई जाती हैं, जिससे मतदाता सूचित निर्णय ले सकें और सरकार को जवाबदेह ठहरा सकें।
🎯 Exam Tip: चुनाव घोषणा-पत्र की परिभाषा, उसके उद्देश्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उसकी भूमिका को याद रखें।
Question 3. लोकतन्त्र में चुनाव क्यों आवश्यक है?
Answer: भग्त जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव के समय लोग आपस में विचार-विमर्श करके मतदान का निर्णय करते हैं। किन्तु लोगों के लिए व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं है कि सभी मुद्दों पर सभी नागरिक बैठकर आपस में निर्णय लें क्योंकि इसके लिए सभी व्यक्तियों के पास इसके लिए आवश्यक समय तथा ज्ञान नहीं होता है। इसलिए अधिकतर लोकने देशों में लोग अपने प्रतिनिधियों द्वारा शासन करते हैं। लोकतंत्र चुनाव के माध्यम से लोगों को एक ऐसा तरीका उपलब्ध करा है जिसके द्वारा लोग नियमित अन्तरलों पर अपने प्रतिनिधियों को चुन सकते हैं तथा यदि वे चाहें तो उन्हें बदल भी सकते हैं। अतः किसी भी लोकतन्त्र के लिए चुनाव आवश्यक है।
In simple words: लोकतंत्र में चुनाव इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि वे नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने और उन्हें बदलने का अधिकार देते हैं, जिससे बड़े और जटिल समाजों में सुशासन संभव हो पाता है।
🎯 Exam Tip: लोकतंत्र में चुनावों की अपरिहार्यता को समझें, विशेषकर नागरिकों की भागीदारी, प्रतिनिधित्व और सरकार की जवाबदेही के संदर्भ में।
Question 4. भारत में चुनावी प्रतिद्वन्द्विता के दोषों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत में चुनाव प्रतिद्वन्द्विता के कुछ दोष इस प्रकार हैं
1. चुनाव जीतने का दबाव सही किस्म की दीर्घकालिक राजनीति को पनपने नहीं देता।
2. समाज तथा देश की सेवा करने की इच्छा रखने वाले अच्छे लोग भी इन्हीं कारणों से चुनावी मुकाबले में नहीं उतरते।
3. यह प्रत्येक समुदाय में 'अलगाव तथा 'भिन्नता' की भावना पैदा करता है।
4. विभिन्न राजनैतिक दल तथा नेतागण एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं।
5. दल तथा उम्मीदवार चुनाव जीतने के लिए तरह-तरह के हथकण्डे अपनाते हैं।
In simple words: चुनावी प्रतिद्वंद्विता के दोषों में अल्पकालिक सोच, अच्छे लोगों का चुनाव से दूर रहना, सामुदायिक विभाजन और अनैतिक चुनाव जीतने के तरीके शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: चुनावी प्रतिद्वंद्विता के नकारात्मक पहलुओं को समझें, विशेषकर दीर्घकालिक नीतियों, सामाजिक एकता और नैतिक आचरण पर इसके प्रभावों को।
Question 5. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अर्थ स्पष्ट कीजिए ।
Answer: लोकतन्त्र के प्रसार से पहले मताधिकार सम्पत्ति, शिक्षा, नस्ल, लिंग आदि पर आधारित होता था, परन्तु आधुनिक समय में इस समस्त पूर्ववर्ती मान्यताओं को अस्वीकार कर दिया गया है। अब वयस्कता को ही मतदान का एकमात्र आधार माना जाने लगा है। इसमें प्रत्येक नागरिक को, जो वयस्क हो गया है, मतदान का अधिकार दे दिया जाता है। केवल अल्पवयस्क, पागल, दिवालिया, अपराधी तथा विदेशी लोगों को ही मताधिकार से वंचित नहीं किया जाता है। किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म, जाति, वंश, लिंग तथा जन्म-स्थान के आधार पर मताधिकार से वंचित नहीं किया जाता। वयस्क होने की आयु भिन्नभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न रखी गयी है। स्विट्जरलैण्ड में यह आयु 20 वर्ष है । भारत में व्यक्ति के वयस्क होने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और जापान में 25 वर्ष निश्चित की गई है। वर्तमान युग में विश्व के लगभग सभी देशों में वयस्क मताधिकार को लागू किया गया है।
In simple words: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का मतलब है कि एक निश्चित आयु (जैसे भारत में 18 वर्ष) पूरी करने वाले सभी नागरिकों को, बिना किसी भेदभाव के, वोट देने का अधिकार होता है, कुछ विशेष अपवादों को छोड़कर।
🎯 Exam Tip: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की परिभाषा, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और विभिन्न देशों में आयु मानदंडों को समझें।
Question 6. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के विपक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिए।
Answer:
1. प्रशासन तथा देश की समस्याएँ जटिल- आधुनिक युग में शासन सम्बन्धी प्रश्न तथा समस्याएँ दिन-प्रतिदिन जटिल होती जा रही हैं, जिन्हें समझ पाना साधारण व्यक्ति के बस की बात नहीं है। प्रायः साधारण मतदाता अयोग्य व्यक्ति को चुन लेते हैं क्योंकि उनके पास देश की समस्याओं पर विचार करने तथा उन्हें समझने के लिए समय ही नहीं होता। इस कारण से भी मतदान का अधिकार केवल शिक्षित व्यक्तियों को ही देना चाहिए ।
2. साधारण जनता रूढ़िवादी होती है- साधारण जनता द्वारा आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्र में प्रगतिशील नीतियों का विरोध किया जाता है। अतः मताधिकार ऐसे व्यक्तियों को दिया जाना चाहिए जो इसका उचित प्रयोग करने की योग्यता रखता हो ।
3. अज्ञानी व्यक्तियों को मताधिकार देना अनुचित है- प्रत्येक देश में अधिकतर जनता अशिक्षित तथा अज्ञानी होती है। वे उम्मीदवार के गुणों को न देखकर जाति, धर्म तथा मित्रता आदि के आधार पर अपने मत का प्रयोग करते हैं। ऐसे व्यक्ति राजनीतिक नेताओं के जोशीले भाषणों से भी शीघ्र प्रभावित हो जाते हैं। अतः अशिक्षित व्यक्तियों को मताधिकार देना उचित नहीं है।
4. भ्रष्टाचार को बढ़ावा- वयस्क मताधिकार प्रणाली में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। धनी उम्मीदवारों द्वारा निर्धन व्यक्तियों के मतों को खरीद लिया जाता है। निर्धन व्यक्ति थोड़े-से लालच में पड़कर अपना मत स्वार्थी तथा भ्रष्टाचारी उम्मीदवारों के हाथों में बेच देते हैं।
In simple words: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के विपक्ष में तर्क यह हैं कि आम जनता जटिल मुद्दों को समझ नहीं पाती, रूढ़िवादी होती है, अज्ञानी होने के कारण भावनाओं में बह जाती है, और गरीबी के कारण वोट बेचने से भ्रष्टाचार बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के विपक्ष में दिए गए तर्कों को आलोचनात्मक ढंग से समझें, विशेषकर प्रशासन, समाज और भ्रष्टाचार पर उनके निहितार्थों को।
Question 7. चुनाव अभियान को संक्षेप में लिखिए।
Answer: भारत में चुनाव अभियान प्रत्याशियों की अन्तिम सूची की घोषणा से मतदान की तिथि (लगभग 2 सप्ताह तक चलता है। इस अवधि के दौरान प्रत्याशी अपने मतदाताओं से संपर्क करता है, राजनैतिक नेता चुनावी सभाओं ' को सम्बोधित करते हैं तथा राजनैतिक दल अपने समर्थकों को सक्रिय करते हैं। अखबारों, दूरदर्शन चैनलों, चुनाव सभाओं, पोस्टरों, होर्डिंग इत्यादि के द्वारा भी प्रचार किया जाता है। चुनाव अभियान के दौरान राजनैतिक दल बड़े मुद्दों की ओर जनसाधारण का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास करते हैं जिसके लिए सामान्यतः लुभावने नारे तैयार किए जाते हैं ताकि लोगों का ध्यान खींचा जा सके ।
In simple words: चुनाव अभियान वह अवधि है जब उम्मीदवार और राजनीतिक दल मतदाताओं से संपर्क करते हैं, सभाएँ, पोस्टर और मीडिया के माध्यम से अपने विचारों और नीतियों का प्रचार करते हैं ताकि उनका समर्थन प्राप्त कर सकें।
🎯 Exam Tip: चुनाव अभियान की परिभाषा, उसके प्रमुख तरीके और उद्देश्यों को संक्षेप में याद रखें।
Question 8. उन तत्त्वों का उल्लेख कीजिए जो चुनाव को लोकतांत्रिक बनाती हैं?
Answer: प्रायः सभी लोकतांत्रिक देशों में चुनाव प्रक्रिया अपनायी जाती है। निम्नलिखित तत्त्व चुनाव को लोकतांत्रिक बनाते हैं
1. कुछ वर्षों के अंतराल पर नियमित रूप से चुनाव होने चाहिए ।
2. चुनाव स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष होने चाहिए ताकि लोग अपनी इच्छानुसार उम्मीदवार चुन सकें ।
3. प्रत्येक व्यक्ति को वोट को अधिकार होना चाहिए तथा प्रत्येक वोट का समान मूल्य होना चाहिए।
4. दलों तथा उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता होनी चाहिए तथा उन्हें मतदाता को वास्तविक चुनाव हेतु विकल्प उपलब्ध कराना चाहिए।
In simple words: चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने वाले तत्व हैं नियमितता, स्वतंत्रता, निष्पक्षता, सार्वभौमिक मताधिकार, समान मूल्य के वोट और उम्मीदवारों तथा दलों को चुनाव लड़ने की आजादी।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक चुनावों के मूल सिद्धांतों और विशेषताओं को याद रखें, जो चुनावों को निष्पक्ष और न्यायपूर्ण बनाते हैं।
Question 9. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में बताइए ।
Answer: पहले मतदान के लिए बैलेट पेपर का प्रयोग किया जाता था जिस पर मतदाता अपनी पसन्द के उम्मीदवार के नाम के आगे अंकित चुनाव चिह्न पर मुहर लगाकर मतदान करते थे किन्तु अब मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग किया जाता है। मशीन प्रत्याशियों के नाम तथा दलों के चुनाव चिह्न दर्शाती है। आजाद उम्मीदवारों को भी चुनाव आयोग द्वारा चुनाव चिह्न प्रदान किए जाते हैं। मतदाता को केवल उस उम्मीदवार के सामने का बटन दबाना होता है जिसे वह वोट देना चाहता/चाहती है। एक बार मतदान समाप्त हो जाने के बाद सभी ई.वी.एम. सील की जाती हैं तथा किसी सुरक्षित । स्थान पर ले जाई जाती हैं। उसके बाद निर्धारित तिथि को प्रत्येक उम्मीदवार को मिले वोटों की गणना की जाती है तथा जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं उसे निर्वाचित घोषित किया जाता है।
In simple words: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) एक ऐसी डिवाइस है जो बैलेट पेपर की जगह डिजिटल रूप से वोट दर्ज करती है, जिससे मतदान प्रक्रिया सरल, तेज और अधिक सुरक्षित हो जाती है।
🎯 Exam Tip: EVM के कार्यप्रणाली, उसके लाभ और मतदान प्रक्रिया में उसकी भूमिका को समझें।
Question 10. प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष चुनाव में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Answer: वह चुनाव प्रणाली जिसमें साधारण मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों को स्वयं चुनते हैं, उसे प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली कहते हैं। इसमें प्रत्येक मतदाता विभिन्न उम्मीदवारों में से एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करता है और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में से जो उम्मीदवार शेष सभी उम्मीदवारों से अधिक मत प्राप्त कर लेता है, वह निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। भारत में लोकसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए वही चुनाव प्रणाली लागू की गई है। इसके विपरीत अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के अन्तर्गत मतदाता स्वयं अपने प्रतिनिधियों का चुनाव नहीं करते। मतदाता अपने मत डालकर कुछ निर्वाचकों अथवा प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और इस प्रकार एक निर्वाचक मण्डल का निर्माण होता है। इस निर्वाचक मण्डल के सदस्य विशेष अधिकारी का चुनाव करते हैं। भारत में राष्ट्रपति तथा उप-राष्ट्रपति के चुनाव के लिए इस चुनाव-प्रणाली को अपनाया गया है।
In simple words: प्रत्यक्ष चुनाव में लोग सीधे अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष चुनाव में लोग पहले निर्वाचक मंडल चुनते हैं, जो फिर प्रतिनिधियों का चुनाव करता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणालियों के बीच के मुख्य अंतरों को समझें, और भारत में इन प्रणालियों के उदाहरणों को याद रखें।
Question 11. चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार किस अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं?
Answer: लोकतन्त्र में चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार कई बार अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है..
1. मतदाताओं को भयभीत करना और मतदान के दिन चुनावी धाँधली करना।
2. कुछ प्रभावशाली उम्मीदवारों द्वारा चुनाव जीतने हेतु मतदान केन्द्रों पर कब्जा भी किया जाता है।
3. मतदाता सूची में झूठे नाम शामिल करना तथा वास्तविक नामों को हटाना ।
4. सत्ताधारी दल द्वारा सरकारी सुविधाओं व कर्मचारियों का दुरुपयोग ।
5. बड़े दल एवं धनी उम्मीदवारों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक धनराशि का प्रयोग ।
In simple words: चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार मतदाताओं को डराने, मतदान केंद्रों पर कब्जा करने, फर्जी नाम जोड़ने, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करने और अत्यधिक धन खर्च करने जैसे अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: चुनावों में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न अनुचित साधनों को पहचानें और समझें कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कैसे कमजोर करते हैं।
Question 12. भारतीय चुनावों की चुनौतियों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय चुनावों की प्रमुख चुनौतियाँ इस प्रकार हैं
1. अक्सर आम आदमी के लिए चुनाव में कोई ढंग का विकल्प होता ही नहीं क्योंकि दोनों प्रमुख पार्टियों की नीतियाँ 319 एवं व्यवहार लगभग एक जैसे ही होते हैं।
2. बड़ी पार्टियों की अपेक्षा छोटे दलों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों को कई प्रकार की परेशानियाँ उठानी पड़ती हैं।
3. आर्थिक रूप से सम्पन्न उम्मीदवार एवं दल चाहे चुनाव में अपनी विजय के प्रति आश्वस्त न हों लेकिन छोटे दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों पर बड़ा तथा अनुचित लाभ पाते हैं।
4. देश के कुछ भागों में आपराधिक छवि वाले लोग अन्य लोगों को चुनावी दौड़ में पछाड़ कर मुख्य दलों से चुनाव का टिकट पाने में सफल हो जाते हैं।
5. लग-अलग दलों पर कुछेक परिवारों का जोर है तथा उनके रिश्तेदार आसानी से टिकट पा जाते हैं।
In simple words: भारतीय चुनावों की चुनौतियों में सीमित विकल्प, छोटे दलों की कठिनाइयाँ, धन बल का प्रभाव, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या और वंशवादी राजनीति शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय चुनाव प्रणाली की चुनौतियों को पहचानें और उन कारकों को समझें जो चुनाव की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए भारत में क्या प्रयास किए गए हैं?
Answer: भारत में स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए किये गये प्रयासों का विवरण इस प्रकार है
1. चुनाव आयोग की स्थापना- भारत में स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए संविधान द्वारा एक चुनाव आयोग की स्थापना की गयी है। इसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दो अन्य आयुक्त होते हैं।
2. चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को ठीक करना- चुनावों के कुछ समय पहले राज्य विधानसभा तथा संसद के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूचियों को दोहराया जाता है और इस बात की तसल्ली की जाती है कि कोई मतदाता ऐसा न रह जाए जिसका नाम उस सूची में शामिल न हो ।
3. सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर नियंत्रण- चुनाव आयोग द्वारा इस बात का ध्यान रखा जाता है कि सत्तारूढ़ दल सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग न करें।
4. मतदाताओं के लिए पहचान-पत्र- फर्जी मतदान को रोकने के लिए मतदाताओं को फोटो सहित पहचान-पत्र जारी किए जाते हैं।
5. चुनाव याचिका को शीघ्र निपटारा- यदि चुनावों के पश्चात् कोई उम्मीदवार चुनाव याचिका पेश करता है तो,उसे जल्द से जल्द निपटा देना चाहिए।
6. चुनावों में धन का प्रयोग- चुनावों में धन की भूमिका को कम-से-कम करने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा किए गए खर्च की जाँच की जाए। यदि किसी उम्मीदवार ने निश्चित की गई सीमा से अधिक धन खर्च किया है। तो उसके चुनाव को अवैध घोषित किया जा सकता है।
In simple words: भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग की स्थापना, मतदाता सूची का नियमित अद्यतनीकरण, सरकारी मशीनरी पर नियंत्रण, पहचान-पत्र जारी करना, चुनाव याचिकाओं का त्वरित निपटारा और धन के दुरुपयोग पर लगाम जैसे कई प्रयास किए गए हैं।
🎯 Exam Tip: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए किए गए प्रयासों को विस्तार से समझें, विशेषकर चुनाव आयोग की भूमिका और विभिन्न सुधारों को।
Question 2. निर्वाचन को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिए ।
Answer: लोकतन्त्र में स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनावों के महत्त्व को देखते हुए इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान में एक निर्वाचन आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया है। चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त तथा कुछ अन्य सदस्य होते हैं। वर्तमान समय में चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के अतिरिक्त दो अन्य सदस्य नियुक्त किए गए हैं। उनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उनका कार्यकाल 6 वर्ष निश्चित किया गया है। चुनाव आयोग के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं
1. देश में सभी चुनाव सम्बन्धी मामलों पर निरीक्षण तथा नियंत्रण रखना।।
2. राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं व विधानपरिषदों के चुनाव करवाना तथा परिणाम घोषित करना ।
3. मतदाताओं की सूचियाँ तैयार करवाना।
4. राजनैतिक दलों को मान्यता प्रदान करना तथा उन्हें चुनाव चिह्न देना।
5. विभिन्न चुनाव करवाने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर तथा सहायक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त करना।
6. नाव के लिए नामांकन पत्रों को जमा कराने, नाम वापस लेने तथा मतदान की तिथियाँ निश्चित करना।
7. राजनैतिक दलों के लिए आचार-संहिता तैयार करना।
8. विभिन्न राजनैतिक दलों को रेडियो तथा टेलीविजन आदि पर चुनाव प्रचार करने की सुविधाएँ दिलाना ।
In simple words: निर्वाचन एक स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया है जिसका संचालन चुनाव आयोग करता है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य सदस्य होते हैं, और इसके प्रमुख कार्यों में चुनाव का प्रबंधन, मतदाता सूची तैयार करना और दलों को मान्यता देना शामिल है।
🎯 Exam Tip: निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कार्यों को विस्तार से समझें, क्योंकि यह भारतीय लोकतंत्र का एक केंद्रीय पहलू है।
Question 3. भारतीय चुनाव प्रणाली की विशेषताएँ बताइए।
Answer: भारत में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली अस्तित्व में है अतः एक निश्चित समयान्तराल पर चुनाव होते रहते हैं। भारत में अपनायी गयी निर्वाचन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं
1. प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष चुनाव- भारत में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के चुनाव कराए जाते हैं। लोकसभा, विधानसभाओं, नगरपालिकाओं तथा पंचायतों आदि के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से चुने जाते हैं। इसके विपरीत राष्ट्रपति तथा उप-राष्ट्रपति के चुनाव के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली का प्रयोग किया जाता है।
2. चुनाव याचिका- यदि कोई उम्मीदवार या मतदाता किसी चुनाव से संतुष्ट नहीं है, तो वह उच्च न्यायालय में उस चुनाव के विरुद्ध अपनी याचिका भेज सकता है।
3. अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के लिए स्थान सुरक्षित करना- भारतीय संविधान के अनुसार संसद, राज्यों के विधानमण्डलों तथा स्थानीय स्वशासन की इकाइयों में पिछड़ी जातियों तथा हरिजनों के लिए स्थान सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गयी है।
4. वयस्क मताधिकार- भारत में चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होते हैं। इनका अर्थ यह है कि प्रत्येक उस नागरिक को जिसकी आयु 18 वर्ष अथवा इससे अधिक है, बिना जाति, धर्म, लिंग तथा रंग आदि के भेदभाव के मतदान का अधिकार दिया गया है।
5. संयुक्त-निर्वाचन- ब्रिटिश सरकार ने भारत में रहने वाली विभिन्न जातियों के सदस्यों में फूट डालने के लिए साम्प्रदायिक चुनाव-प्रणाली को लागू किया था, परन्तु स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् इसे समाप्त कर दिया गया है। अब एक चुनाव-क्षेत्र में रहने वाले सभी मतदाता, चाहे वह किसी भी जाति अथवा धर्म से सम्बन्ध रखते हों, अपना एक ही प्रतिनिधि चुनते हैं।
6. एक सदस्य निर्वाचन क्षेत्र- इसका अर्थ यह है कि चुनाव के समय समस्त देश को या उस राज्य को जिसमें चुनाव होना है लगभग बराबर जनसंख्या वाले चुनाव-क्षेत्रों में बाँट दिया जाता है और प्रत्येक चुनाव-क्षेत्र में एक ही सदस्य निर्वाचित किया जाता है।
7. गुप्त मतदान- चुनाव गुप्त मतदान रीति से होता है। स्वयं मतदाता के अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति को इस बात का पता नहीं चल सकता कि मतदाता ने किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है।
In simple words: भारतीय चुनाव प्रणाली में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव, चुनाव याचिका का प्रावधान, आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र, एक सदस्य निर्वाचन क्षेत्र और गुप्त मतदान जैसी प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो इसे लोकतांत्रिक बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय चुनाव प्रणाली की विविध विशेषताओं को याद रखें, जिसमें प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष चुनाव, आरक्षण, मताधिकार और गुप्त मतदान जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।
Question 4. भारत में चुनाव के विभिन्न सोपानों का वर्णन कीजिए ।
Answer: भारत में चुनाव के प्रमुख सोपान इस प्रकार हैं
1. प्रत्याशी द्वारा नामांकन- कोई भी व्यक्ति जो मतदान कर सकता है वह चुनाव में प्रत्याशी भी बन सकता है। किन्तु मतदान हेतु न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष है जबकि प्रत्याशी बनने हेतु न्यूनतम आयु सीमा 25 वर्ष है। राजनैतिक दल अपने प्रत्याशी नामित करते हैं जिन्हें उस दल का चुनाव निशान तथा नामांकन उपलब्ध होता है। दल द्वारा नामांकन को दल को 'टिकट' भी कहा जाता है। चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को एक नामांकन पत्र भरना होता है तथा उसे जमानत के रूप में कुछ पैसा जमा करना होता है।
2. चुनाव अभियान- चुनाव अभियान की पूरी प्रक्रिया प्रत्याशियों की अन्तिम सूची की घोषणा से मतदान की तिथि (लगभग 2 सप्ताह की अवधि) तक क्रियाशील रहता है। चुनाव अभियान के दौरान प्रत्याशी अपने मतदाताओं से संपर्क करता है, चुनावी सभाओं को सम्बोधित करता है। इस प्रकार राजनैतिक दल अपने समर्थकों को जागरुक करते हैं। समाचार-पत्रों, दूरदर्शन चैनलों, चुनाव सभाओं, पोस्टरों, होर्डिंग इत्यादि के द्वारा प्रचार किया जाता है। चुनाव अभियान के दौरान राजनैतिक दल बड़े मुद्दों की ओर जनसाधारण का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास करते हैं जिसके लिए सामान्यतः लुभावने नारे तैयार किए जाते हैं ताकि लोगों का ध्यान खींचा जा सके ।
3. मतदान व मतगणना- मतदान के दिन मतदाता अपना वोट देते हैं। जिन लोगों को मतदान का अधिकार है वे निकटतम 'मतदान केन्द्र पर जाकर मतदान करते हैं। मतदान करने वाले व्यक्ति की अंगुली पर एक पहचान चिह्न लगाया जाता है जिससे कोई भी मतदाता एक बार से अधिक मतदान न कर सके। मतदान की अविध समाप्त हो जाने के बाद ई.वी.एम. मशीनों को सील कर दिया जाता है तथा इसे सुरक्षित स्थलों पर पहुँचा दिया जाता है। मतगणना के लिए पूर्व निर्धारित तिथि को मतों की गणना की जाती है तथा सर्वाधिक मत पाने वाले प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
In simple words: भारत में चुनाव प्रक्रिया में प्रमुख चरण हैं- नामांकन दाखिल करना, चुनाव अभियान चलाना (जिसमें प्रचार के कई माध्यम शामिल हैं), और अंत में मतदान करना जिसके बाद वोटों की गिनती कर विजेता घोषित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: चुनाव प्रक्रिया के चरणों को क्रमवार और उनके भीतर होने वाली प्रमुख गतिविधियों के साथ विस्तार से समझें।
Question 5. आरक्षित चुनाव क्षेत्र से आप क्या समझते हैं?
Answer: भारतीय संविधान में प्रदत्त अधिकार के माध्यम से प्रत्येक नागरिक अपना जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से चुन सकता है और स्वयं एक प्रतिनिधि के रूप में चुना जा सकता है। हमारे संविधान निर्माताओं ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित चुनाव क्षेत्रों की एक विशेष प्रणाली अपनायी है। ऐसा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए किया गया है ताकि वे लोकसभा तथा विधानसभा के लिए निर्वाचित हो सकें जो कि अन्य संसाधनों तथा शिक्षा आदि की कमी के कारण अन्यथा उनके लिए संभव नहीं हो पाता। कुछ चुनावी क्षेत्र
In simple words: आरक्षित चुनाव क्षेत्र ऐसे निर्वाचन क्षेत्र होते हैं जहाँ केवल अनुसूचित जाति या जनजाति के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं, ताकि समाज के कमजोर वर्गों को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
🎯 Exam Tip: आरक्षित चुनाव क्षेत्रों की अवधारणा, उनके उद्देश्य और भारतीय संविधान में उनके महत्व को समझें।
Question 6. चुनाव-अभियान के दौरान प्रयोग में लाए जाने वाले साधनों का उल्लेख कीजिए।
Answer: चुनाव अभियान निर्वाचन की एक प्रमुख प्रक्रिया है। इसके माध्यम से उम्मीदवार मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान करने हेतु प्रेरित करने का प्रयास करता है। उम्मीदवारों द्वारा चुनाव अभियान के दौरान निम्न साधनों का प्रयोग किया जाता है
1. प्रेस व समाचार-पत्र- पढ़े-लिखे मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं का भी प्रयोग किया जाता है। विभिन्न नेता उनमें अपने विचार व्यक्त करते हैं तथा जनता को अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करते हैं।
2. रेडियो तथा टेलीविजन- रेडियो तथा टेलीविजन में भी प्रायः सभी दलों को कुछ निश्चित समय प्रदान किया जाता है जिससे वे अपनी नीतियों तथा कार्यक्रम का प्रचार करते हैं।
3. घर-घर जाकर मुलाकात करना- चुनाव के दिनों में प्रत्येक उम्मीदवार अपने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर घर घर जाकर मतदाताओं से वोट माँगता है। मतदाताओं को उम्मीदवार तथा उसके दल के बारे में जानकारी दी जाती है और उनकी शंकाएँ दूर की जाती हैं। लोगों में पोस्टर तथा घोषणा-पत्र भी बाँटे जाते हैं और उनका समर्थन प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाता है।
4. पोस्टर लगाना - पोस्टर के माध्यम से राजनीतिक दल तथा उम्मीदवार पढ़े-लिखे मतदाताओं को लुभाने का प्रयत्न करते हैं। पोस्टरों द्वारा आकर्षक नारे, प्रभावशाली आक्षेप, कार्टून तथा चुनाव सम्बन्धी विभिन्न सूचनाएँ दी जाती हैं।
5. सभाएँ करना वे भाषण देना – विभिन्न राजनैतिक दल तथा उम्मीदकर आम सभाएँ करके अपने विचार जन साधारण तक पहुँचाते हैं, वे अपनी अथवा अपने दल की अच्छाइयों तथा विरोधी दल की बुराइयों से जनता को अवगत कराते रहते हैं।
6. जलूस निकालना- मतदाताओं को प्रभावित करने तथा अपने पक्ष में करने के लिए विभिन्न दल जलूस निकालते हैं जिनमें लाउडस्पीकरों से जोर-जोर से नारे लगाए जाते हैं। मतदाताओं से यह अपील की जाती है कि वह उस दल अथवा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करें।
In simple words: चुनाव अभियान में उम्मीदवार मतदाताओं को प्रभावित करने और अपने पक्ष में मतदान करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाते हैं। इनमें समाचार-पत्र, रेडियो, टेलीविजन, घर-घर जाकर मिलना, पोस्टर लगाना, सभाएँ करना और जुलूस निकालना जैसे साधन शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में चुनाव अभियान के विभिन्न साधनों का विस्तृत वर्णन करना और प्रत्येक साधन का उद्देश्य स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. भारत में चुनाव-प्रणाली की चुनौतियों का उल्लेख कीजिए। इन चुनौतियों के समाधान हेतु सुझाव भी प्रस्तुत कीजिए ।
Answer: जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है। भारत में 62 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। भारत में अब तक लोकसभा के 16 चुनाव हो चुके हैं। किन्तु इस दौरान भारतीय चुनाव प्रणाली के कुछ दोष भी दिखलायी पड़े जिनका विवरण इस प्रकार है
(i) चुनाव में बाहुबल और हिंसा- भारतीय चुनाव में एक और गम्भीर त्रुटि और समस्या है चुनाव में बाहुबल का प्रयोग। चुनने में हिंसा बढ़ती जा रही है। चुनाव में बाहुबल और हिंसा का प्रयोग विशेषकर हरियाणा, पश्चिमी बंगाल, जम्मू-कश्मीर तथा बिहार आदि राज्यों में हो रहा है। विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में बम विस्फोट, छुरेबाजी औं गोली का प्रयोग होता है। मतदाताओं को डराया-धमकाया जाता है और उन्हें एक विशेष दल के पक्ष में वोट डालने के लिए कहा जाता है। मतदान केंद्रों पर कब्जा किया जाता है। चुनाव के दिनों में आम आदमी सुरक्षित महसूस नहीं करता। मतदान केन्द्रों पर कब्जा बड़े नियोजित ढंग से किया जाता है।
(ii) चुनाव याचिका के निपटारे में देरी– साधारणतः यह देखा गया है कि चुनाव याचिका के निपटारे में बहुत अधिक समय लग जाता है। कई बार तो उम्मीदवार का कार्यकाल समाप्त होने को आता है और चुनाव याचिका का निर्णय हो ही नहीं पाता।
(iii) सरकारी तंत्र का दुरुपयोग- भारतीय चुनाव व्यवस्था की एक और गम्भीर त्रुटि सामने आयी है। मंत्रियों द्वारा दलीय लाभ के लिए सरकारी तंत्र का प्रयोग किया जाता है। वोट बटोरने के लिए मंत्रियों द्वारा लोगों को तरह-तरह के आश्वासन दिए जाते हैं। विभिन्न वर्गों के लिए अनेकानेक रियायतों और सुविधाओं की घोषणा की जाती है। अनेक प्रकार की विकास योजनाओं की घोषणा की जाती है; जैसे-कारखानों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों व पुलों के शिलान्यास आदि की घोषणा करना। सरकारी कर्मचारी के वेतन-भत्ते आदि में वृद्धि की जाती है। कर्जे माफ किए जाते हैं।
(iv) मतदाताओं की अनुपस्थिति- चुनावों में बहुत से मतदाता भाग लेते ही नहीं। मतदाता चुनावों में रुचि लेते ही नहीं। उनके लिए वोट डालना एक समस्या बन गई है। वह मतपत्र का प्रयोग करते ही नहीं। मतपत्र का प्रयोग न करना एक प्रकार से लोकतंत्र को धोखा देना ही है। अक्सर देखने में आता है कि 60 प्रतिशत मतदाता ही वोट डालते हैं। मतदान का प्रतिशत कई चुनावों में तो 60% अथवा इससे भी कम रहता है।
(v) राजनीति का अपराधीकरण- पिछले कुछ वर्षों में भारतीय चुनाव-प्रणाली में एक और दोषपूर्ण मोड़ आया है। प्रायः सभी राजनीतिक दलों ने ऐसे बहुत-से उम्मीदवार चुनाव में खड़े किए, जिनका अपराधों की दुनिया में नाम था। ऐसे व्यक्तियों ने राजनीति में अपराधीकरण को बढ़ावा देने का काम किया और लोगों को भय दिखाकर वोट माँगे तथा गोली के बल पर विरोधियों को न चुनाव लड़ने दिया और न ही वोट डालने दिया। जब अपराधी, तस्कर और लुटेरे पहले किसी दल के सक्रिय सदस्य तथा बाद में विधायक बन जाएँ तो उस देश के भविष्य के उज्ज्वल होने की आशा नहीं की जा सकती।
(vi) चुनावों में धन की बढ़ती हुई भूमिका- भारतीय चुनाव-प्रणाली का सबसे बड़ा दोष चुनावों में धन की बढ़ती हुई भूमिका है। भारतीय चुनावों में धन का अंधाधुंध प्रयोग और दुरुपयोग ने भारत की राजनीति को काफी भ्रष्ट किया है। भारत में काले धन का बड़ा बोलबाला है और उसका चुनावों में दिल खोलकर प्रयोग किया जाता है। मतदाताओं के लिए शराब के दौर चलाए जाते हैं, मत खरीदे जाते हैं, उम्मीदवारों को धनी लोगों द्वारा खड़ा किया जाता है। और पैसे के बल पर बिठाया जाता है तथा मतदाताओं को लाने व ले जाने के लिए गाड़ियों का प्रयोग किया जाता है। आज का चुनाव पैसे के बल पर ही जीता जा सकता है और इस धन ने मतदाताओं, राजनीतिक दलों तथा प्रतिनिधियों सबको भ्रष्ट बना दिया है।
(vii) जाति और धर्म के नाम पर वोट- भारत में सांप्रदायिकता का बड़ा प्रभाव है और इसने हमारी प्रगति में सदैव बाधा उत्पन्न की है। जाति और धर्म के नाम पर खुले रूप से मत माँगे और डाले जाते हैं। राजनीतिक दल भी अपने उम्मीदवार खड़े करते समय इस बात को ध्यान में रखते हैं और उसी जाति और धर्म का उम्मीदवार खड़ा करने का प्रयत्न करते हैं, जिस जाति का उस निर्वाचन-क्षेत्र में बहुमत हो । भारत में अब तक जो चुनाव हुए हैं, उनके आँकड़े भी इस बात का समर्थन करते हैं।
(viii) मतदाता सूचियों के बनाने में लापरवाही- यह भी देखा गया है कि भारत में मतदाता सूचियों के बनाने में बड़ी लापरवाही से काम लिया जाता है और कई बार जान-बूझकर तथा कई बार अनजाने में पूरे-के-पूरे मोहल्ले सूचियों से गायब हो जाते हैं। मतदाता सूचियाँ अधिकतर राज्य सरकार के कर्मचारियों द्वारा बनायी जाती हैं और वे इसे फिजूल का काम समझते हैं। पटवारी तथा स्कूल के अध्यापकों से ये काम करवाया जाता है। एक मतदाता का नाम अनेकों बार तथा जाली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ दिए जाते हैं।
चुनाव प्रणाली के सम्मुख उपस्थित चुनौतियों के सुधार हेतु निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं
1. फर्जी मतदान तथा चुनाव-केन्द्रों पर कब्जा करने की घटनाओं को सख्ती के साथ निपटना चाहिए।
2. सभी उम्मीदवारों तथा राजनैतिक दलों को प्रचार करने के लिए रेडियो तथा मीडिया का प्रयोग करने दिया जाए।
3. मतदान अनिवार्य कर देना चाहिए।
4. चुनाव-याचिका थोड़े समय में ही निपटा देनी चाहिए।
5. चुनावों में धन की भूमिका को कम करने के लिए चुनाव खर्च राज्य द्वारा किया जाना चाहिए।
6. चुनावों में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर सख्त पाबंदी लगाई जाए।
7. उन उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए जो चुनाव में धर्म तथा जाति का प्रयोग करते हैं।
In simple words: भारतीय चुनाव प्रणाली में बाहुबल, हिंसा, चुनाव याचिकाओं में देरी, सरकारी तंत्र का दुरुपयोग, मतदाताओं की अनुपस्थिति, राजनीति का अपराधीकरण, धन का अत्यधिक उपयोग, जाति-धर्म आधारित मतदान और मतदाता सूचियों में लापरवाही जैसी चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए फर्जी मतदान पर रोक, सभी दलों को समान प्रचार अवसर, अनिवार्य मतदान, चुनाव याचिकाओं का शीघ्र निपटारा, चुनाव खर्च का नियमन, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर पाबंदी और धर्म-जाति के नाम पर लड़ने वालों पर रोक जैसे उपाय किए जाने चाहिए।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में भारतीय चुनाव प्रणाली की चुनौतियों को सूचीबद्ध करना और प्रत्येक चुनौती के लिए विशिष्ट समाधान सुझाना महत्वपूर्ण है। विस्तृत और संतुलित उत्तर के लिए दोनों पहलुओं पर ध्यान दें।
Free study material for Social Science
Step-by-Step Textbook Answers: Class 9 Social Science Chapter 04 चुनावी राजनीति
Textbook Solutions for Class 9 Social Science Chapter 04 चुनावी राजनीति
Review comprehensive exercise answers for Class 9 Social Science Chapter 04 चुनावी राजनीति. Fully updated to match current UP Board syllabus guidelines, these textbook solutions help students verify their work and maintain accurate study notes.
Mastering Theoretical and Practical Questions
Each solution includes detailed reasoning to foster genuine comprehension of Chapter 04 चुनावी राजनीति concepts. Reviewing these step-by-step breakdowns allows learners to master both analytical and descriptive questions expected in school evaluations.
Effective Self-Study and Homework Assistance
Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 9 Social Science.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 9 Social Science Chapter 4 चुनावी राजनीति is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Social Science are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 9 Social Science Chapter 4 चुनावी राजनीति as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Social Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 9 Social Science Chapter 4 चुनावी राजनीति will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 9 Social Science. You can access UP Board Solutions Class 9 Social Science Chapter 4 चुनावी राजनीति in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 9 Social Science Chapter 4 चुनावी राजनीति in printable PDF format for offline study on any device.