Get the most accurate UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 9 Sanskrit. Our expert-created answers for Class 9 Sanskrit are available for free download in PDF format.
UP Board Textbook Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा
Every Class 9 student should solve UP Board textbook questions to master core ideas. Our Class 9 Sanskrit solutions provide easy, step-by-step explanations to make logic clear for every problem. Reviewing these Chapter 12 यज्ञरक्षा solutions boosts your exam confidence and performance.
Get Chapter 12 यज्ञरक्षा UP Board Solution PDF for Class 9 Sanskrit
UP Board Solutions For Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा (कथा - नाटक कौमुदी)
परिचय -
महर्षि वाल्मीकि द्वारा विरचित 'रामायण' तथा महामुनि वेदव्यास द्वारा विरचित 'महाभारत' दोनों ही ग्रन्थ कवियों और नाटककारों के लिए, अति प्राचीन काल से ही, प्रेरणा-स्रोत रहे हैं। ये ग्रन्थ न केवल संस्कृत कवियों के लिए अपितु प्राकृत, अपभ्रंश आदि के कवियों के लिए भी आश्रय-ग्रन्थ रहे हैं। इनमें उल्लिखित चरित्रों को आधार बनाकर अगणित महाकाव्यों, खण्डकाव्यों, मुक्तककाव्यों, नाटकों आदि की रचना हुई है। 'अनर्घराघव' भगवान् राम के जीवन को आधार बनाकर विरचित नाटक है। इसकी कथा वाल्मीकि कृत 'रामायण' से ली गयी है। इसके रचयिता मुरारि हैं। इनके पिता का नाम वर्धमानक था। इनका जन्म-समय विद्वानों द्वारा सन् 800 ईसवी के लगभग स्वीकार किया गया है। यह सात अंकों वाला नाटक है, जो यत्र-तत्र कवि-कल्पना से समन्वित है। इससे नाटक की कथा अतिशय रोचक हो गयी है। भाषा पर कविवर मुरारि का असाधारण अधिकार है तथा नाटक में इन्होंने यत्र-तत्र अपने व्याकरण सम्बन्धी ज्ञान का सफल प्रदर्शन किया है। प्रस्तुत पाठ 'अनर्घराघव' के प्रथम अंक से संकलित है।
पाठ सारांश
प्रस्तुत अंश में महर्षि विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा हेतु राक्षसों का वध करने के लिए महाराज दशरथ से उनके दो पुत्रों, राम और लक्ष्मण, की याचना करते हैं। पुत्रों के वियोग का दुःख अनुभव करते हुए भी दशरथ अपने दोनों पुत्रों को मुनि के साथ भेज देते हैं। राम विश्वामित्र के आश्रम में यज्ञ के रक्षार्थ दुष्टों का वध करना आवश्यक धर्म मानते हुए राक्षसों का संहार करते हैं। पाठ का सारांश इस प्रकार है
विश्वामित्र द्वारा राम की याचना- प्रतिहारी महाराज दशरथ को सूचना देता है कि द्वार पर मुनिवर विश्वामित्र आये हैं। वामदेव; जो कि दशरथ के कुल-पुरोहित हैं; यथोचित सम्मानपूर्वक विश्वामित्र को प्रवेश कराते हैं। विश्वामित्र प्रवेश करते ही कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ से उनका कुशलक्षेम पूछते हैं। दशरथ अपने आसन से उठकर विश्वामित्र का स्वागत करके उन्हें प्रणाम करते हैं। आवश्यक वार्तालाप के पश्चात् दशरथ विश्वामित्र से उनके आने का कारण पूछते हैं। विश्वामित्र बताते हैं कि वे यज्ञ की रक्षा के लिए राम को कुछ दिन तक अपने आश्रम में ले जाना चाहते हैं। यह सुनकर राम का वियोग हो जाने की बात सोचकर दशरथ अत्यधिक उदास हो जाते हैं। विश्वामित्र दशरथ से कहते हैं। कि राम अब बालक नहीं रहे, वे सूर्य के समान तेजस्वी हैं। दशरथ वामदेव की सहमति से राम और लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजना स्वीकार कर लेते हैं। विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को अपने साथ लेकर आश्रम की ओर प्रस्थान करते हैं। आश्रम में पहुँचकर राम और लक्ष्मण वहाँ की रमणीयता और पावनता को देखकर अत्यधिक प्रसन्न होते हैं।
राम द्वारा राक्षसों का विनाश- नेपथ्य से राक्षसों द्वारा यज्ञ में विघ्न डालने की ध्वनि सुनाई पड़ती है। राम धनुष लेकर वायव्य अस्त्र का सन्धान कर राक्षसों का संहार करते हैं, लेकिन उनके साथ आयी हुई ताड़का (स्त्री जाति) का वध करने के कारण राम अत्यन्त लज्जित और दुःखी होते हैं। विश्वामित्र राम को गले लगाकर उनके इस वीरोचित कार्य को उचित बताते हुए उन्हें आशीर्वाद देते हैं। अन्त में मुनि विश्वामित्र को प्रणाम कर राम और लक्ष्मण समेत सभी अपने-अपने स्थान को चले जाते हैं।
चरित्र चित्रण
राम
परिचय- श्रीराम अयोध्या के महाराज दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र हैं। वे विनीत, धीर, साहसी, वीर, आज्ञाकारी, पितृभक्त और गुरुभक्त हैं। विश्वामित्र राम को यज्ञ के रक्षार्थ अपने साथ आश्रम में ले जाने के लिए दशरथ से माँगते हैं। वे वहाँ पहुँचकर विघ्नकर्ता राक्षसों का वध करते हैं। उनकी चारित्रिक विशेषताएँ अग्र प्रकार हैं
(1) विनीत - श्रीराम स्वभाव से विनीत और शिष्ट हैं। वे पिता और गुरुजन के आज्ञापालक हैं। दशरथ का आदेश पाते ही वे शीघ्र राजसभा में पहुँच जाते हैं। महाराज दशरथ के कहने से वे महामुनि विश्वामित्र को प्रणाम करते हैं। विश्वामित्र के साथ जाने के लिए कहने पर वे अपना कोई मत प्रकट नहीं करते, वरन् वामदेव और पिताजी उनके लिए जैसा कहें, वे वैसा करने को तैयार हैं। इससे राम की नम्रता और शिष्टता प्रकट होती है।
(2) अनुपम वीर- श्रीराम अतुलित वीर और पराक्रमशाली हैं। वे विश्वामित्र के साथ उनके आश्रम में जाकर वीरतापूर्वक दुष्टों का संहार करते हैं। मारीच और ताड़का जैसे अनेक राक्षसों को मात्र एक बाण (वायव्य शस्त्र) से धराशायी कर देते हैं। इससे उनकी अनुपम वीरता प्रकट होती है।
(3) अद्वितीय धनुर्धर- राम बाण-सन्धान में अद्वितीय हैं। जब दशरथ राम को किशोर मानते हुए विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा हेतु भेजने में संकोच करते हैं तब विश्वामित्र राम के अद्वितीय धनुर्धर रूप को उनके सामने प्रस्तुत करते हुए उन्हें सूर्य के समान तेजस्वी बताते हैं। एक बाण से कई राक्षसों का वध करना भी उनके अद्वितीय धनुर्धर होने की पुष्टि करता है।
(4) धर्मभीरु - श्रीराम मर्यादापालक हैं। वे ताड़का (स्त्री जाति) का वध करने के बाद दुःखी हो जाते हैं। यद्यपि ताड़का का वध उन्होने विश्वामित्र की आज्ञा से किया है, फिर भी वे स्त्री के वध से दुःखी हैं और उसको मारने से लज्जा और कष्ट का अनुभव करते हैं। विश्वामित्र के कहने पर; “तुमने अपने कर्तव्य का पालन किया है और तुम्हारा यह कार्य वीरोचित है, तुम्हें लज्जा नहीं करनी चाहिए।' धैर्य धारण करते हैं। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि राम का चरित्र एक आदर्श मानवीय चरित्र है। वे योग्य पुत्र, धर्मभीरु, अद्वितीय धनुर्धर और परम विनीत हैं।
वामदेव
परिचय- अयोध्या नरेश दशरथ के कुल-पुरोहित पद को विभूषित करने वाले वामदेव ऋषियों के आदर्श हैं। ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के आश्रम में उनका निवास है। उनकी चारित्रिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं
(1) प्रतिष्ठाप्राप्त ऋषि- वामदेव एक प्रतिष्ठाप्राप्त ऋषि हैं। विश्वामित्र भी उन्हें 'सखा' कहकर सम्बोधित करते हैं। इससे उनकी विश्वामित्र से समकक्षता भी सिद्ध होती है। दशरथ के प्रतिनिधि रूप में वे ही विश्वामित्र का स्वागत करने और उन्हें राजमहल में ले जाने हेतु उपस्थित होते हैं। इससे उनकी विश्वसनीयता और राजकुल द्वारा बहुमानिता स्पष्ट होती है।
(2) महाज्ञानी - महर्षि वामदेव ज्ञानपुंज हैं। वे प्रत्येक बात को गम्भीरता से सोचकर उस पर अपना निर्णय देते हैं। विश्वामित्र द्वारा राम-लक्ष्मण को माँगे जाने पर दशरथ पुत्र-मोह के कारण उन्हें विश्वामित्र को देना नहीं चाहते, तब महर्षि वामदेव ही अपने उपदेश से उन्हें कर्तव्य का बोध कराते हैं। वामदेव के कहने पर दशरथ राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के हाथों सौंप देते हैं।
(3) सत्परामर्शदाता- दशरथ के कुल-पुरोहित होने के कारण उनका कर्तव्य है कि वे राजा को उचित-अनुचित का बोध कराकर उसे उचित मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करें। वे अपने इस कर्तव्य को बड़ी कुशलता से पूर्ण करते हैं। दशरथ जब-जब दुविधा में पड़ते हैं, तब-तब वे उनको अपने परामर्श से कर्तव्य-विमुख होने से रोकते हैं। राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजने के सन्दर्भ में वे कहते हैं कि “हे राजन्! महर्षि विश्वामित्र याचक हैं और आप दाता। महायज्ञ की रक्षा करनी है और राम उसकी रक्षा करेंगे। मैं राम को भेजने की अनुमति प्रदान करता हूँ।” ऐसा कहकर वे दशरथ को दुविधा के अथाह सागर से उबार लेते हैं।
(4) विवेकशील- वामदेव की विवेकशीलता अनुकरणीय है। महाराज दशरथ किसी भी कार्य में ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न होने पर वामदेव की शरण में जाते हैं और उनके विवेकनिमज्जित परामर्श को पाकर स्वयं को धन्य मानते हैं। अपने पुत्रों को राक्षसों के आंतक से आच्छादित अरण्य में भेजने जैसे महत्त्वपूर्ण ल्पर दशरथ वामदेव जैसे विवेकी की सहमति-असहमति जानकर ही उन्हें विश्वामित्र के साथ भेजते हैं। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि वामदेव राजकुल तथा ऋषियों में लब्धप्रतिष्ठ हैं। उनके ज्ञान, विवेक और परामर्श के सभी अभिलाषी हैं।
विश्वामित्र
परिचय - जन्म से क्षत्रिय तथा कर्म-योग से ब्राह्मण महर्षि विश्वामित्र त्रिकालदर्शी ऋषि हैं। वे जिस कार्य को करने की अपने मन में ठान लेते हैं, उसे पूर्ण करके ही चैन की साँस लेते हैं। अपने यज्ञ में राक्षसों द्वारा विघ्न डालने की आशंका पर वे यज्ञ की निर्विघ्न समाप्ति के लिए दशरथ के पास उनके पुत्र राम-लक्ष्मण को माँगने जाते हैं। राम को शाश्वत यश दिलाने की पृष्ठभूमि में निश्चित ही इनकी भूमिको प्रशंसनीय है। इनके चरित्र की विशेषताएँ इस प्रकार हैं।
(1) महर्षियोचित सौम्य - क्षत्रिय होते हुए भी विश्वामित्र सौम्य की मूर्ति हैं। वे प्रत्येक से बड़ी सौम्यता के साथ मिलते हैं। वे जहाँ महर्षि वामदेव के लिए 'सखे वामदेव!' का सम्बोधन प्रयुक्त करते हैं, वहीं दशरथ को भी वे 'सखे दशरथ!' कहकर सम्बोधित करते हैं; यह उनकी सौम्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। वामदेव से महर्षि वशिष्ठ की सपरिवार कुशलता को पूछा जाना उनके व्यवहार-ज्ञान का परिचायक है।
(2) वात्सल्य-प्रेम से ओत-प्रोत- महर्षि विश्वामित्र वात्सल्य-प्रेम के मानो सतत प्रवाह हैं। राम-लक्ष्मण को वे पुत्रवत् मानते हैं। राम द्वारा ताड़का-वध पर पश्चात्ताप करने पर वे स्नेहसिक्त वचनों से उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि ताड़का-वध किसी भी दृष्टि से निन्दनीय नहीं है। इतना ही नहीं, वे राम के कार्य को उचित ठहराते हैं और पुत्रवत् वात्सल्य प्रदर्शित करते हुए भाव-विभोर होकर राम को गले से लगा लेते हैं।
(3) महान् गुणज्ञ - स्वयं गुणों की खान विश्वामित्र गुणों के महान् पारखी और उनका सम्मान करने वाले हैं। वे राम के गुणों से परिचित हैं तभी तो दशरथ के द्वारा अल्पवय राम को वन में भेजने की शंका का निवारण करते हुए वे दशरथ से राम के गुणों का बखान करते हैं। राम के लिए यह कहना कि 'वह तो सूर्य के समान अपने तेज से समस्त भूमण्डल को प्रकाशित करने वाले तेजस्वी हैं, उनके गुणज्ञ होने का ही साक्ष्य है।
(4) सम्यक् प्रयोक्ता - विश्वामित्र समयोचित तथा व्यक्ति से उसकी शक्ति एवं गुणोचित कार्य कराने के पक्षधर हैं। स्वयं महर्षि होने के कारण वे महान् यज्ञ प्रयोक्ती भी हैं। राम-लक्ष्मण को वे अपने क्षत्रियोचित गुणों के कारण ही राक्षसों का विनाश करने के लिए प्रेरित करते हैं। निष्कर्ष रूप से कहा जा सकता है कि विश्वामित्र ब्रह्म एवं क्षात्र तेज-सम्पन्न, व्यवहार- कुशल, गुणज्ञ, सम्यक् प्रयोक्ता एवं वात्सल्यमय स्वभाव के लब्धप्रतिष्ठित महर्षि हैं।
लघु-उतरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर
अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए
Question 1. वामदेवः कः आसीत्?
Answer: वामदेवः दशरथस्य कुलपुरोहितः आसीत्।In simple words: वामदेव राजा दशरथ के कुलगुरु थे।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में वामदेव के पद को सही संस्कृत शब्द 'कुलपुरोहितः' के साथ पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 2. रामलक्ष्मणौ कौशिकेन सह कुत्र अगच्छताम्?
Answer: रामलक्ष्मणौ कौशिकेन सह तस्य आश्रमम् अगच्छताम् ।In simple words: राम और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ उनके आश्रम गए।
🎯 Exam Tip: 'कौशिकेन सह' (विश्वामित्र के साथ) और 'तस्य आश्रमम्' (उनके आश्रम) का सही प्रयोग उत्तर के लिए आवश्यक है।
Question 3. विश्वामित्रः दशरथं किमकथयत्?
Answer: 'रामभद्रेण कतिपयरात्रम् अस्माकम् आश्रमपदं सनाथी करिष्यते' इति विश्वामित्रः दशरथम् अकथयत् ।In simple words: विश्वामित्र ने दशरथ से कहा कि राम कुछ रातों के लिए उनके आश्रम को पवित्र करेंगे।
🎯 Exam Tip: विश्वामित्र के कथन को उद्धृत करते समय 'इति' का प्रयोग और 'सनाथी करिष्यते' जैसे शब्दों की सटीकता पर ध्यान दें।
Question 4. आश्रमं दृष्ट्वा लक्ष्मणः रामं प्रति किमकथयत्?
Answer: आश्रमं दृष्ट्वा लक्ष्मणः रामं प्रति अकथयत् यत् आर्य! रमणीयमितो वर्तते, अहो पशूनामप्यपत्यवात्सल्यम्।In simple words: आश्रम देखकर लक्ष्मण ने राम से कहा कि यह स्थान रमणीय है और पशुओं का भी अपने बच्चों के प्रति वात्सल्य अद्भुत है।
🎯 Exam Tip: लक्ष्मण के संवाद में 'रमणीयमितो वर्तते' और 'पशूनामप्यपत्यवात्सल्यम्' जैसे विशेषणों का सही प्रयोग अंक दिलाएगा।
Question 5. रामः कामताडयत्?
Answer: रामः ताडकाम् अताडयत्।In simple words: राम ने ताड़का को मारा।
🎯 Exam Tip: 'ताडकाम्' (ताड़का को) में द्वितीया विभक्ति और 'अताडयत्' (मारा) क्रिया का सही प्रयोग देखें।
Question 6. वशिष्ठस्य अन्यत् किन्नामासीत्?
Answer: वशिष्ठस्य अन्यत् नाम मैत्रावरुणिः आसीत् ।In simple words: वशिष्ठ का दूसरा नाम मैत्रावरुणि था।
🎯 Exam Tip: महर्षि वशिष्ठ के वैकल्पिक नाम को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. विश्वामित्रः कस्मात् कारणात् दशरथमुपागतः?
Answer: विश्वामित्रः यज्ञरक्षार्थं रामं याचितुं दशरथमुपागतः।In simple words: विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राम को मांगने दशरथ के पास गए थे।
🎯 Exam Tip: 'यज्ञरक्षार्थं' (यज्ञ की रक्षा के लिए) और 'रामं याचितुं' (राम को मांगने के लिए) जैसे शब्दों का सही प्रयोग महत्वपूर्ण है।
Question 8. ताडकामारणं कथम् अनुचितम् आसीत्?
Answer: ताडका एका नारी आसीत्। अतः ताडकामारणम् अनुचितम् आसीत् ।In simple words: ताड़का एक स्त्री थी, इसलिए उसका वध करना अनुचित माना गया।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में 'नारी' और 'अनुचितम्' शब्दों का उपयोग करते हुए स्त्री वध के संदर्भ को स्पष्ट करना आवश्यक है।
Question 9. सुबाहुमारीचौ की आस्ताम्?
Answer: सुबाहुमारीचौ हिंस्राः राक्षसाः आस्ताम् ।।In simple words: सुबाहु और मारीच हिंसक राक्षस थे।
🎯 Exam Tip: 'हिंस्राः राक्षसाः' (हिंसक राक्षस) जैसे विशेषणों का सटीक प्रयोग उत्तर को सही बनाता है।
Question 10. विश्वामित्र आश्रमे गत्वा रामेण किं कृतम्?
Answer: विश्वामित्रस्य आश्रमे गत्वा रामेण राक्षसबलम् उन्मूलयति स्म ।In simple words: विश्वामित्र के आश्रम जाकर राम ने राक्षसों की सेना को नष्ट कर दिया।
🎯 Exam Tip: 'राक्षसबलम् उन्मूलयति स्म' (राक्षस सेना को नष्ट किया) जैसे वाक्यांशों का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
अधोलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक प्रश्न के उतर रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। इनमें से एक विकल्प शुद्ध है। शुद्ध विकल्प का चयन कर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए
Question 1. 'यज्ञ-रक्षा' पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) आचार्य विष्णुभट्ट
(ख) मुरारि
(ग) महाकवि कालिदास
(घ) महर्षि वाल्मीकि
Answer: (ख) मुरारिIn simple words: 'यज्ञ-रक्षा' पाठ के रचयिता मुरारि हैं।
🎯 Exam Tip: लेखक और पाठ के नाम को सीधे याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
Question 2. 'यज्ञ-रक्षा' नामक नाटयांश किस ग्रन्थ से संकलित किया गया है?
(क) उत्तर रामचरितम्' से ।
(ख) अनर्घराघव' से ।
(ग) “रावणवधम्' से
(घ) “प्रतिमानाटकम्' से
Answer: (ख) अनर्घराघव' से ।In simple words: यह नाट्यांश 'अनर्घराघव' नामक ग्रन्थ से लिया गया है।
🎯 Exam Tip: दिए गए नाट्यांश के मूल ग्रन्थ को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 3. विद्वानों के द्वारा मुरारि का समय क्या निर्धारित किया गया है?
(क) 800 ई०
(ख) 400 ई०
(ग) 600 ई०
(घ) 750 ई०
Answer: (क) 800 ई०In simple words: विद्वानों ने मुरारि का समय लगभग 800 ईस्वी निर्धारित किया है।
🎯 Exam Tip: साहित्यकारों और उनके समयकाल को सटीक रूप से याद रखना चाहिए।
Question 4. 'यज्ञ-रक्षा' पाठ में किस ऋषि के यज्ञ की रक्षा की बात कही गयी है?
(क) विश्वामित्र के
(ख) वशिष्ठ के
(ग) वामदेव के
(घ) श्रृंगी के
Answer: (क) विश्वामित्र केIn simple words: इस पाठ में ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का वर्णन है।
🎯 Exam Tip: पाठ के केंद्रीय विषय और उसमें शामिल मुख्य पात्र को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को अपने आश्रम में क्यों ले आना चाहते थे?
(क) क्योंकि उन्हें उनसे बहुत प्रेम था
(ख) क्योंकि वे उनकों शिक्षा देना चाहते थे
(ग) क्योंकि वे उनसे अपनी सेवा कराना चाहते थे।
(घ) क्योंकि वे उनसे यज्ञ की रक्षा कराना चाहते थे।
Answer: (घ) क्योंकि वे उनसे यज्ञ की रक्षा कराना चाहते थे।In simple words: विश्वामित्र अपने यज्ञ की राक्षसों से रक्षा कराने के लिए राम-लक्ष्मण को आश्रम में ले जाना चाहते थे।
🎯 Exam Tip: विश्वामित्र के आश्रम में राम-लक्ष्मण को बुलाने का मुख्य उद्देश्य 'यज्ञ रक्षा' था, यह याद रखें।
Question 6. 'देव भगवान्कौशिको द्वारमध्यास्ते' वाक्यांश में 'कौशिक' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ
(क) “वामदेव' के लिए।
(ख) वशिष्ठ' के लिए
(ग) “विश्वामित्र के लिए
(घ) “दशरथ' के लिए
Answer: (ग) “विश्वामित्र के लिएIn simple words: 'कौशिक' शब्द महर्षि विश्वामित्र के लिए प्रयोग किया गया है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत ग्रंथों में ऋषियों के विभिन्न नामों और विशेषणों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 7. 'श्रवणानामलङ्कारः कपोलस्य तु कुण्डलम् ।' वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति?
(क) वामदेवः
(ख) राम-लक्ष्मणः
(ग) दशरथः
(घ) विश्वामित्रः
Answer: (घ) विश्वामित्रःIn simple words: इस वाक्य को कहने वाले विश्वामित्र हैं।
🎯 Exam Tip: पाठ में विशिष्ट संवादों को उनके वक्ताओं से जोड़ना याद रखें।
Question 8. 'शिवाः सन्तु पन्थानो वत्सयो रामलक्ष्मणयोः ।' वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति?
(क) वामदेवः
(ख) दशरथः
(ग) विश्वामित्रः
(घ) वशिष्ठः
Answer: (ग) विश्वामित्रःIn simple words: यह वाक्य विश्वामित्र ने कहा था, जिसका अर्थ है 'पुत्र राम और लक्ष्मण का मार्ग शुभ हो।'
🎯 Exam Tip: आशीर्वादात्मक वाक्यों के वक्ता को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 9. 'मैत्रावरुण' किसको कहा गया है?
(क) विश्वामित्र को
(ख) दशरथ को
(ग) वशिष्ठ को
(घ) वामदेव को ,
Answer: (ग) वशिष्ठ कोIn simple words: 'मैत्रावरुण' नाम वशिष्ठ ऋषि के लिए प्रयोग किया गया है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत साहित्य में ऋषियों के उपनामों को याद रखना सहायक होता है।
Question 10. राम ने राक्षसों का वध किससे किया?
(क) वरुणास्त्र' से
(ख) ब्रह्मास्त्र' से
(ग) “पाशुपतास्त्र' से
(घ) “वायव्यास्त्र' से
Answer: (घ) “वायव्यास्त्र' सेIn simple words: राम ने राक्षसों का वध वायव्यास्त्र से किया।
🎯 Exam Tip: पौराणिक कथाओं में प्रयुक्त विशिष्ट अस्त्रों के नाम और उनके प्रयोगकर्ता को याद रखें।
Question 11. राम ने विश्वामित्र के आश्रम में किन राक्षसों पर बाण चलाये?
(क) मारीच पर
(ख) सुबाहु पर
(ग) ताड़का पर
(घ) उपर्युक्त तीनों पर
Answer: (घ) उपर्युक्त तीनों परIn simple words: राम ने विश्वामित्र के आश्रम में मारीच, सुबाहु और ताड़का-तीनों राक्षसों पर बाण चलाये।
🎯 Exam Tip: यज्ञ रक्षा प्रकरण में राम द्वारा मारे गए सभी प्रमुख राक्षसों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 12. 'सखे वामदेव! चिरेण दशरथो द्रष्टव्य इति सर्वमनोरथानामुपरि वर्तामहे ।' वाक्यस्य वक्ता | कः अस्ति ?
(क) वशिष्ठः
(ख) मैत्रावरुणिः
(ग) कौशिकः
(घ) दशरथः
Answer: (ग) कौशिकःIn simple words: इस वाक्य के वक्ता 'कौशिक' हैं, जो विश्वामित्र का ही दूसरा नाम है।
🎯 Exam Tip: संवादों के वक्ताओं और उनके पर्यायवाची नामों को समझना इस प्रकार के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 13. 'न खलु प्रकाशमन्तरेणं तुहिन उज्जिहीते।' वाक्य में रिक्त पद की पूर्ति होगी
(क) चन्द्रः' से
(ख) 'नक्षत्र:' से
(ग) “भानुः' से
(घ) “उडुपतिः' से
Answer: (ग) “भानुः' सेIn simple words: इस श्लोक में 'भानुः' पद रिक्त स्थान की पूर्ति करता है, जिसका अर्थ सूर्य है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए वाक्य के संदर्भ और सही संस्कृत शब्दार्थ का ज्ञान आवश्यक है।
Question 14. 'कौशिकोऽर्थी भवान्दाता रक्षणीयो।' श्लोक की चरण-पूर्ति होगी .
(क) 'महाहनुः' से
(ख) “महाक्रतुः' से
(ग) “महाऋतुः' से
(घ) “महातपः' से ।
Answer: (ख) “महाक्रतुः' सेIn simple words: श्लोक के चरण को पूरा करने के लिए 'महाक्रतुः' शब्द सही है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत श्लोकों की सही पूर्ति के लिए उनके अर्थ और व्याकरणिक संरचना को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 15. भगवन्विश्वामित्र! सावित्रौ रामलक्ष्मणावभिवादयेते ।' वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति?
(क) वशिष्ठः
(ख) दशरथः
(ग) रामलक्ष्मणः
(घ) वामदेवः
Answer: (घ) वामदेवःIn simple words: इस वाक्य को वामदेव ने कहा था, जिसमें राम और लक्ष्मण द्वारा विश्वामित्र का अभिवादन करने का उल्लेख है।
🎯 Exam Tip: पाठ में कौन सा पात्र किससे क्या कहता है, यह याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए उपयोगी होता है।
Question 16. 'अहो विचित्रमिदमायतनं पदं नाम भगवतो गाधिनन्दनस्य ।' में रिक्त-स्थान की पूर्ति होगी
(क) 'सिद्धाश्रम' से
(ख) “कौशिकाश्रम' से
(ग) “सुराश्रम' से '
(घ) “वशिष्ठाश्रम' से।
Answer: (क) 'सिद्धाश्रम' सेIn simple words: रिक्त स्थान में 'सिद्धाश्रम' शब्द आएगा, जो गाधिनंदन (विश्वामित्र) के आश्रम का नाम है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध स्थानों के नाम और उनसे संबंधित व्यक्तियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Free study material for Sanskrit
Sanskrit Class 9 Curriculum Solutions: Chapter 12 यज्ञरक्षा
Accessing Official UP Board Solutions for Chapter 12 यज्ञरक्षा
Utilize our professionally drafted UP Board Solutions for Chapter 12 यज्ञरक्षा to support your daily learning. Covering all textbook exercises for Class 9 Sanskrit, these materials are routinely refreshed to stay completely aligned with the newest UP Board syllabus and curriculum directives.
Concept-Driven Answers for Better Clarity
Our faculty has formulated detailed, step-by-step explanations for challenging problems across the Class 9 Sanskrit chapter. Beyond giving direct outcomes, we break down the underlying theories to foster genuine topic comprehension. Ideal for Class 9 learners tackling both theoretical and numerical questions, reviewing these UP Board Questions and Answers significantly strengthens fundamental concepts.
Effective Self-Study and Homework Assistance
Integrating our Sanskrit solution guides into your routine enhances cognitive pacing and accuracy. These resources act as an effective roadmap for Class 9 homework tasks, which can be augmented further using our curated Revision Notes and Sample Papers for Chapter 12 यज्ञरक्षा to ensure comprehensive exam coverage.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Sanskrit are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 9 Sanskrit. You can access UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 12 यज्ञरक्षा in printable PDF format for offline study on any device.