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Detailed Chapter 20 रोगी का काम एवं उसकी व्यवस्था UP Board Solutions for Class 9 Home Science
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Class 9 Home Science Chapter 20 रोगी का काम एवं उसकी व्यवस्था UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. रोगी के कमरे का चुनाव करते समय किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
या
रोगी के कमरे का चुनाव करते समय आप किन-किन बातों का ध्यान रखेंगी? रोगी के कमरे के आवश्यक सामानों की सूची बनाइए ।
Answer: रोगी के कमरे का चयन
रोगग्रस्त व्यक्ति को अधिकांश समय विश्राम करना अनिवार्य होता है; अतः उसके लिए अलग से कमरे की व्यवस्था की जानी चाहिए। रोगी का कमरे का वातावरण शान्त होना चाहिए तथा उसमें किसी प्रकार की गन्दगी नहीं होनी चाहिए। रोगी के कमरे में सूर्य के प्रकाश तथा वायु के पारगमन की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
रोगी के लिए कमरे का चुनाव करते समय मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए
1. रोगी का कमरा पर्याप्त बड़ा होना चाहिए। सामान्यतः रोगी का कमरा 450-500 घन मीटर स्थान वाला होना आवश्यक है। इस आकार के कमरे में रोगी को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सकती है।
2. रोगी का कमरा मुख्य द्वार तथा सड़क से दूर मकान के पीछे की ओर होना चाहिए। इस प्रकार को कमरा शान्त एवं आरामदायक रहता है तथा सड़क से उठने वाली धूल से सुरक्षित रहता है।
3. रोगी के कमरे में खिड़कियाँ, रोशनदान व दरवाजे आदि इस प्रकार होने चाहिए कि वायु का संवातन भली-भाँति बना रहे।
4. खिड़कियों तथा रोशनदान से सूर्य का प्रकाश आते रहना चाहिए जिससे कि रोगाणुओं के पनपने की आशंका न रहे। स्वच्छ वायु एवं सूर्य का प्रकाश रोगी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायता करते हैं। दार किवाड़ होना अति आवश्यक है। इनसे मक्खियाँ, मच्छर व वायु में उड़ने वाले अन्य कीड़े कमरे में प्रवेश नहीं कर पाते।
5. रोगी का कमरा रसोईघर व अन्य शयन-कक्षों से दूर होना चाहिए।
6. रोगी का कमरा स्नानगृह तथा शौचालय के पास होना चाहिए ताकि रोगी को स्नान करने व शौच जाने के लिए अधिक दूर न जाना पड़े।
7. रोगी के कमरे के बाहर बरामदा होने पर वह इसका उपयोग टहलने तथा खुली वायु में बैठने के लिए कर सकता है। वैसे भी बरामदा होने पर कमरे के अन्दर का वातावरण अधिक उपयुक्त रह संकता है तथा धूल इत्यादि भी कमरे में प्रवेश नहीं करेगी।
8. रोगी के कमरे में अन्धकार, दुर्गन्ध, सीलन तथा नमी आदि नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि इनकी उपस्थिति में रोगाणु आसानी से पनपते हैं।
9. रोगी के कमरे का फर्श पक्का व साफ-सुथरा होना चाहिए। पक्के फर्श को सहज ही कीटाणुनाशक घोल द्वारा धोया जा सकता है। कमरे में पानी के निकास के लिए नालियों का होना भी आवश्यक है।
10. रोगी के कमरे का चयन करते समय मौसम का ध्यान रखना भी आवश्यक है। ग्रीष्म ऋतु में रोगी का कमरा ऐसा होना चाहिए कि यह अधिक गर्म न होता हो, जबकि शरद् ऋतु में गर्म रहने वाला कमरा उपयुक्त रहता है।
11. रोगी के कमरे से संलग्न एक छोटे कमरे का होना अच्छा रहता है। इस कमरे को परिचारिका प्रयोग में ला सकती है तथा सहज ही रोगी की परिचर्या कर सकती है। इसके अतिरिक्त इस कमरे में रोगी के उपयोग में आने वाली वस्तुओं को रखा जा सकता है।
12. रोगी के कमरे की दीवारें स्वच्छ एवं चूने से पुती होनी चाहिए। दीवारों पर रोगी की रुचि के अनुसार चित्र व अन्य सज्जा-सामग्री की व्यवस्था होनी चाहिए।
In simple words: रोगी के कमरे का चुनाव करते समय कमरे का बड़ा आकार, शांत स्थान, उचित वायु संवातन और सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता जैसी बातों पर ध्यान देना चाहिए। कमरे में साफ-सफाई, सुविधाओं की निकटता और रोगी के मनोरंजन के साधनों की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है ताकि रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय रोगी के कमरे के चुनाव में स्वच्छता, आराम, सुविधाएँ और संक्रमण नियंत्रण के विभिन्न पहलुओं को सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है।
रोगी के कमरे के सामान की सूची
रोगी की आवश्यकताओं एवं सुविधाओं की पूर्ति के लिए निम्नलिखित सामग्री होनी आवश्यक है
1. कसी हुई चारपाई अथवा स्प्रिंगदार पलंग ।
2. दो छोटी मेज व दो कुर्सियाँ।
3. दो स्टूल ।
4. भोज्य पदार्थों व औषधियों आदि को रखने के लिए एक जालीदार छोटी अलमारी ।
5. वस्त्र, तौलिए आदि रखने के लिए एक अन्य अलमारी ।
6. विशेष उपयोग के पात्र; जैसे-मल-मूत्र विसर्जन पात्र, बाल्टी व कूड़ेदान आदि ।
7. मनोरंजन के लिए पत्रिकाए, ट्रांजिस्टर व टी० बी० आदि ।
8. थर्मामीटर व ताप तथा नाड़ी के लिए चार्ट ।
9. गिलास, प्याला, चम्मच, चाकू व प्लेट आदि ।
10. दीवारों के लिए सुन्दर व आकर्षक चित्र एवं मेज के लिए फूलदान ।
11. साबुन, पेस्ट, डिटॉल, फिनाइल व फिनिट आदि ।
12. थूकने, वमन करने, पेस्ट करने व हाथ धुलाने के लिए चिलमची ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. रोगी व्यक्ति के लिए अलग कमरे की व्यवस्था क्यों की जाती है?
Answer: स्वास्थ्य विज्ञान की सैद्धान्तिक मान्यता है कि रोगी व्यक्ति को सामान्य रूप से अलग कमरे में ही रखा जाना चाहिए। विभिन्न कारणों से रोगी के लिए अलग कमरे की व्यवस्था को आवश्यक माना। जाता है। वास्तव में इस व्यवस्था से जहाँ एक ओर रोगी को लाभ होता है, वहीं दूसरी ओर परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी इसे आवश्यक माना जाता है। रोगी व्यक्ति प्रायः काफी दुर्बल हो जाता है तथा उसे अतिरिक्त विश्राम की आवश्यकता होती है। उसके सोने-जागने का समय भी अनिश्चित हो जाता है। इस स्थिति में उसे शान्त एवं एकान्त वातावरण की आवश्यकता होती है। इस उद्देश्य से रोगी को अलग कमरे में रखना ही उचित माना जाता है। रोगी के लिए यदि अलग कमरे की व्यवस्था हो जाती है तो उसकी आवश्यकता की समस्त वस्तुओं को वहीं रखा जा सकता है। रोगी के लिए अलग कमरे की व्यवस्था होने की स्थिति में परिवार के अन्य सदस्य भी लाभान्वित होते हैं। इस स्थिति में परिवार के अन्य सदस्य रोग के संक्रमण से कुछ हद तक बच सकते हैं।
In simple words: रोगी को अतिरिक्त विश्राम, शांत और एकांत वातावरण की आवश्यकता होती है, इसलिए अलग कमरे की व्यवस्था की जाती है। यह रोगी को जल्दी ठीक होने में मदद करता है और परिवार के अन्य सदस्यों को संक्रमण से बचाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में रोगी की आवश्यकताओं (विश्राम, शांति) और संक्रमण नियंत्रण के महत्व को रेखांकित करना चाहिए।
Question 2. रोगी के कमरे में सफाई की व्यवस्था आप किस प्रकार करेंगी?
Answer: उत्तम स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्य लाभ के लिए स्वच्छ वातावरण का होना अति आवश्यक है। गन्दगी सदैव रोगाणुओं को पनपने का अवसर प्रदान करती है; अतः रोगी के कमरे की नियमित सफाई अति आवश्यक है। यह निम्नलिखित प्रकार से की जानी चाहिए
1. फर्श की सफाई प्रतिदिन फिनाइल के घोल से की जानी चाहिए। फिनाइल का घोल कीटाणुओं को नष्ट कर देता है।
2. कमरे की दीवारों से मकड़ी के जाले साफ करें तथा दिन में एक बार कीटनाशक (फ्लिट, बेगौन स्प्रे आदि) का प्रयोग करना चाहिए ताकि रोगी के कमरे में मक्खियाँ व मच्छर न रहें।
3. रोगी के कमरे के परदे, बैड कवर व अन्य सूती वस्त्रों को खौलते पानी से धोने से वे साफ व कीटाणुरहित हो जाते हैं। कृत्रिम धागों से बने वस्त्रों तथा ऊनी वस्त्रों की शुष्क धुलाई कराएँ।
4. रोगी के बर्तन, चिलमची वे पीकदान आदि की सफाई के लिए नि:संक्रामक घोल का प्रयोग करें।
5. फूलदान आदि में ताजे पुष्प लगाएँ और यदि सम्भव हो, तो दीवारों पर लगे चित्रों को भी बदल दें। स्वच्छ एवं सुसज्जित कमरा रोगी को मानसिक सुख एवं सन्तोष प्रदान करता है।
In simple words: रोगी के कमरे में सफाई के लिए फिनाइल से फर्श धोना, कीटनाशक का प्रयोग करना, वस्त्रों को गर्म पानी में धोना और बर्तनों को कीटाणुरहित करना आवश्यक है। ताजे फूल और साफ सजावट रोगी को मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: सफाई व्यवस्था के हर पहलू में कीटाणुनाशक उपायों और स्वच्छता के महत्व पर जोर देना चाहिए।
Question 3. रोगी के कमरे में सूर्य का प्रकाश आना क्यों आवश्यक है?
Answer: रोगी के कमरे में दिन में कुछ समय के लिए धूप का आना अत्यावश्यक है, क्योंकि
1. सूर्य का प्रकाश कमरे के अन्धकार वे नमी को दूर करता है; अतः रोगाणुओं के पनपने की आशंका कम हो जाती है।
2. सूर्य का प्रकाश कीटाणुनाशक की तरह कार्य करता है तथा अनेक प्रकार के रोगाणुओं को नष्ट । कर देता है।
3. सूर्य के प्रकाश से हमारे शरीर में विटामिन 'डी' का निर्माण होता है; अतः धूप की उपस्थिति रोगी के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से लाभदायक रहती है। यद्यपि सूर्य के प्रकाश में रोगी को उपर्युक्त लाभ होते हैं, परन्तु तीव्र व चकाचौंध करने वाला प्रकाश रोगी की बेचैनी बढ़ा सकता है तथा उसके आराम में व्यवधान उत्पन्न कर सकता है। अतः आवश्यक एवं व्यवस्थित प्रकाश के लिए रोगी के कमरे में परदों का प्रयोग किया जाना चाहिए। परदों द्वारा सूर्य के प्रकाश एवं धूप को अपनी इच्छा एवं आवश्यकता के अनुसार नियन्त्रित किया जा सकता है।
In simple words: सूर्य का प्रकाश कमरे से अंधकार और नमी को हटाता है, रोगाणुओं को नष्ट करता है, और विटामिन 'डी' के उत्पादन में सहायता कर रोगी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। हालांकि, तेज धूप से बचने के लिए परदों का उपयोग करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: सूर्य के प्रकाश के औषधीय गुणों (कीटाणुनाशक, विटामिन डी) और रोगी के आराम के लिए प्रकाश के उचित नियंत्रण को स्पष्ट करें।
Question 4. रोगी के कमरे में प्रकाश-व्यवस्था कैसी होनी चाहिए?
Answer: रोगी के कमरे में रात के समय तीव्र या चकाचौंध करने वाला प्रकाश नहीं होना चाहिए। यदि घर में बिजली हो तो सामान्य रूप से हल्के दूधिया रंग का बल्ब ही इस्तेमाल करना चाहिए। यदि बिजली न हो तो तेल से जलने वाला दीपक या लालटेन जलाई जा सकती है। ध्यान रहे, इनकी लौ कम : रखनी चाहिए ताकि इनका कच्चा धुआँ न बनने पाए। दीपक या लालटेन को रोगी के पलंग से काफी दूर ही रखना चाहिए।
In simple words: रोगी के कमरे में प्रकाश मंद और आँखों को सुकून देने वाला होना चाहिए, खासकर रात में। बिजली होने पर हल्के दूधिया बल्ब का उपयोग करें, और यदि दीपक या लालटेन का उपयोग हो, तो लौ कम रखें और उन्हें रोगी से दूर रखें ताकि धुआँ न फैले।
🎯 Exam Tip: रोगी के आराम को प्राथमिकता देते हुए, प्रकाश की तीव्रता और उसके स्रोत की उचित स्थिति का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. आपके विचार से रोगी को कमरा कैसा होना चाहिए?
Answer: हमारे विचार से रोगी का कमरा साफ-सुथरा, हवादार तथा प्रकाशयुक्त होना चाहिए।
In simple words: रोगी का कमरा स्वच्छ, हवादार और पर्याप्त रोशनी वाला होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में स्वच्छता, वायु संवातन और प्रकाश की उपलब्धता को मुख्य बिंदु के रूप में शामिल करना चाहिए।
Question 2. रोगी के कमरे की सफाई को अधिक महत्त्व क्यों दिया जाता है?
Answer: नियमित सफाई से रोग के जीवाणुओं को बढ़ने से रोका जा सकता है, इससे रोगी के शीघ्र स्वस्थ होने में योगदान प्राप्त होता है। इसी कारण से रोगी के कमरे की सफाई को अधिक महत्त्व दिया जाता है।
In simple words: रोगी के कमरे की सफाई रोग के जीवाणुओं को बढ़ने से रोकने और रोगी के तेजी से ठीक होने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: सफाई का महत्व जीवाणु नियंत्रण और रोगी के स्वास्थ्य लाभ से सीधा जुड़ा है, इस पर जोर दें।
Question 3. रोगी के कमरे में पोछा लगाने के लिए पानी में क्या मिलाया जाता है?
Answer: रोगी के कमरे में पोछा लगाने के लिए पानी में फिनाइल आदि निसंक्रामक घोल मिलाया जाता है।
In simple words: रोगी के कमरे में पोछा लगाने के लिए फिनाइल या अन्य कीटाणुनाशक घोल का प्रयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: सही कीटाणुनाशक के नाम का उल्लेख करना इस उत्तर का मुख्य भाग है।
Question 4. रोगी के कमरे में धूप का उचित प्रबन्ध क्यों आवश्यक है?
Answer: सूर्य की किरणें अनेक रोगाणुओं को नष्ट करती हैं तथा रोगी को स्वास्थ्य लाभ करने में सहायता करती हैं।
In simple words: धूप रोगाणुओं को मारती है और रोगी को तेजी से ठीक होने में मदद करती है, इसलिए इसका उचित प्रबंध आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: धूप के रोगाणुनाशक गुणों और स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभाव पर ध्यान दें।
Question 5. रोगी के कमरे में वायु के संवातन का क्या महत्त्व है?
Answer: वायु की उपयुक्त संवातन व्यवस्था से रोगी को शुद्ध वायु प्राप्त होती है तथा कमरे की अशुद्ध वायु बाहर निकल जाती है। इस स्थिति में रोग के जीवाणु भी अधिक नहीं पनप पाते ।
In simple words: वायु संवातन से कमरे में ताजी हवा आती है और अशुद्ध हवा बाहर निकल जाती है, जिससे जीवाणुओं का फैलाव रुकता है।
🎯 Exam Tip: संवातन के महत्व को शुद्ध वायु की आपूर्ति और जीवाणु संक्रमण की रोकथाम से जोड़ना चाहिए।
Question 6. रोगी के कमरे का तापक्रम क्या रहना चाहिए?
Answer: रोगी के कमरे का तापक्रम सामान्यतः 98° फॉरेनहाइट (लगभग 37° सेन्टीग्रेड) रहना। चाहिए।
In simple words: रोगी के कमरे का तापमान सामान्य शरीर के तापमान, लगभग 98° फॉरेनहाइट (37° सेन्टीग्रेड) के आसपास बनाए रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: सामान्य शारीरिक तापमान के करीब एक स्थिर और आरामदायक तापमान बनाए रखने पर जोर दें।
Question 7. रोगी के कमरे का तापक्रम किस प्रकार नियन्त्रित किया जा सकता है?
Answer: रोगी के कमरे के तापक्रम को नियन्त्रित करने के लिए ग्रीष्म ऋतु में कूलर व वातानुकूलन यन्त्र तथा शरद् ऋतु में रूम-हीटर प्रयोग में लाए जाते हैं।
In simple words: गर्मी में कूलर या एयर कंडीशनर और सर्दी में रूम-हीटर का उपयोग करके रोगी के कमरे का तापमान नियंत्रित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: मौसम के अनुसार तापमान नियंत्रण के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों का स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 8. रोगी के कमरे से रात्रि में साज-सज्जा वाले पौधे अथवा फूलदान क्यों हटा देने चाहिए?
Answer: रात्रि में पौधों में श्वसन क्रिया अधिक होती है, जिसके फलस्वरूप हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड अधिक निष्कासित होती है; अतः रोगी के कमरे से रात्रि में फूलदान इत्यादि को हटाना उचित रहता है।
In simple words: रात में पौधों से कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, जो रोगी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है, इसलिए उन्हें हटा देना चाहिए।
🎯 Exam Tip: पौधों द्वारा रात्रि में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के जैविक कारण पर ध्यान दें।
Question 9. रोगी के कपड़े यथासम्भव सूती होने चाहिए, क्यों?
Answer: क्योंकि सूती वस्त्रों को खौलते पानी में धोकर सहज ही निःसंक्रमित किया जा सकता है।
In simple words: सूती कपड़े आसानी से खौलते पानी में धोकर कीटाणुरहित किए जा सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
🎯 Exam Tip: सूती कपड़ों की धुलाई और कीटाणुशोधन में आसानी को मुख्य कारण के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 10. रोगी के कमरे में मनोरंजन की व्यवस्था आप कैसे करेंगी?
Answer: रोगी के मनोरंजन के लिए उसके कमरे में पत्रिकाएँ, ट्रांजिस्टर व टी० बी० इत्यादि रखे जा सकते हैं।
In simple words: रोगी के मनोरंजन के लिए कमरे में पत्रिकाएं, ट्रांजिस्टर और टेलीविजन जैसी चीजें रखी जा सकती हैं।
🎯 Exam Tip: रोगी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए मनोरंजन के महत्व को ध्यान में रखते हुए, उपयुक्त साधनों का उल्लेख करें।
Question 11. रोगी के पलंग की विशेषता बताइए ।
Answer: रोगी का पलंग ऊँचा, स्प्रिंग वाला तथा लोहे का बना ठीक रहता है।
In simple words: रोगी के लिए एक ऊँचा, स्प्रिंग वाला और लोहे का बना पलंग आरामदायक और उपयुक्त होता है।
🎯 Exam Tip: पलंग की ऊँचाई, सामग्री और स्प्रिंग जैसी विशेषताओं का उल्लेख करें जो रोगी के आराम और देखभाल में सहायक हों।
Question 12. मेल-पात्र की आवश्यकता किस दशा में होती है?
Answer: मल-पात्र की आवश्यकता रोगी के उठने-बैठने में असमर्थ होने की दशा में होती है।
In simple words: मल-पात्र की आवश्यकता तब पड़ती है जब रोगी बिस्तर से उठने या बैठने में असमर्थ होता है।
🎯 Exam Tip: मल-पात्र की आवश्यकता को रोगी की शारीरिक अक्षमता या कमजोरी से सीधे जोड़ें।
वसतुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न-प्रत्येक प्रश्न के चार वैकल्पिक उत्तर दिए गए हैं। इनमें से सही विकल्प चुनकर लिखिए
Question (1). संक्रामक रोगग्रस्त व्यक्ति को आप किस प्रकार रखेंगी?
(क) अलग कमरे में,
(ख) बच्चों के कमरे में,
(ग) किसी के भी कमरे में,
(घ) बरामदे में।
Answer: (क) अलग कमरे में,
In simple words: संक्रामक रोगग्रस्त व्यक्ति को दूसरों से संक्रमण फैलने से बचाने और उसे शांत वातावरण देने के लिए अलग कमरे में रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: संक्रमण नियंत्रण और रोगी के एकांत के महत्व पर जोर देते हुए सही विकल्प चुनें।
Question (2). रोगी का कमरा होना चाहिए
(क) रसोईघर के पास,
(ख) पशुशाला के पास,
(ग) शौचालय एवं स्नान घर के पास,
(घ) बैठक में कमरे के पास ।
Answer: (ग) शौचालय एवं स्नान घर के पास,
In simple words: रोगी के लिए शौचालय और स्नानघर के पास कमरा होना चाहिए ताकि उसे सुविधा हो और बार-बार दूर न जाना पड़े।
🎯 Exam Tip: रोगी की सुविधा और आसान पहुँच के दृष्टिकोण से कमरे के स्थान का चुनाव महत्वपूर्ण है।
Question (3). रोगी के कमरे की दीवारें पुती होनी चाहिए
(क) पेन्ट्स से,
(ख) चूने से,
(ग) डिस्टेम्पर से,
(घ) किसी से भी।
Answer: (ख) चूने से,
In simple words: रोगी के कमरे की दीवारें चूने से पुती होनी चाहिए क्योंकि चूना सफाई और कीटाणुशोधन में सहायक होता है।
🎯 Exam Tip: स्वच्छ और स्वास्थ्यकर वातावरण के लिए दीवारों की पुताई में चूने के उपयोग को याद रखें।
Question (4). रोगी के मनोरंजन के लिए कमरे में होनी चाहिए
(क) पत्रिकाएँ,
(ख) ट्रांजिस्टर,
(ग) टी० बी०,
(घ) ये सभी ।
Answer: (घ) ये सभी,
In simple words: रोगी के मनोरंजन के लिए कमरे में पत्रिकाएं, ट्रांजिस्टर और टेलीविजन जैसी सभी चीजें होनी चाहिएं ताकि उसका मन लगा रहे।
🎯 Exam Tip: रोगी के मानसिक स्वास्थ्य और बोरियत दूर करने के लिए विभिन्न मनोरंजन साधनों की आवश्यकता पर जोर दें।
Question (5). रोगी के लिए उपयुक्त वस्त्र होते हैं
(क) नायलॉन के,
(ख) सूती,
(ग) टेरीकॉट,
(घ) जरीदार।
Answer: (ख) सूती,
In simple words: रोगी के लिए सूती वस्त्र सबसे उपयुक्त होते हैं क्योंकि वे आरामदायक होते हैं और उन्हें आसानी से कीटाणुरहित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: सूती वस्त्रों की धुलाई में आसानी और आराम को मुख्य चयन मानदंड के रूप में जानें।
Question (6). रोगी के कमरे के फर्श को प्रतिदिन धोना चाहिए
(क) डिटॉल से,
(ख) फिनिट से,
(ग) फिनाइल से,
(घ) लाल दवा से।
Answer: (ग) फिनाइल से,
In simple words: रोगी के कमरे के फर्श को प्रतिदिन फिनाइल से धोना चाहिए क्योंकि यह एक प्रभावी कीटाणुनाशक है।
🎯 Exam Tip: फर्श की सफाई में फिनाइल के महत्व को याद रखें, क्योंकि यह कीटाणुओं को नष्ट करता है।
Question (7). रोगी के कमरे का तापक्रम रहना चाहिए
(क) 90° फॉरेनहाइट,
(ख) 100° फॉरेनहाइट,
(ग) 40° सेन्टीग्रेड,
(घ) 37° सेन्टीग्रेड ।
Answer: (घ) 37° सेन्टीग्रेड,
In simple words: रोगी के कमरे का तापमान लगभग 37° सेन्टीग्रेड (98° फॉरेनहाइट) होना चाहिए, जो शरीर के सामान्य तापमान के करीब होता है।
🎯 Exam Tip: रोगी के कमरे का आदर्श तापमान, जो शारीरिक आराम के लिए सबसे उपयुक्त है, 37° सेन्टीग्रेड (98°F) है।
Question (8). रोगी के कमरे में प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए
(क) लाल या हरे रंग की,
(ख) तेज एवं चमकदार,
(ग) हल्की तथा दूधिया रंग की,
(घ) किसी भी प्रकार की ।
Answer: (ग) हल्की तथा दूधिया रंग की,
In simple words: रोगी के कमरे में हल्की और दूधिया रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आँखों पर जोर न पड़े और रोगी को आराम मिल सके।
🎯 Exam Tip: रोगी के आराम और मानसिक शांति के लिए, प्रकाश की तीव्रता और रंग पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
Question (9). रोगी के इस्तेमाल के लिए उपयोगी पलंग होना चाहिए
(क) तख्त के रूप में,
(ख) सामान्य फोल्डिग चारपाई,
(ग) सिंप्रग द्वारा कसा हुआ पलंग,
(घ) इनमें से कोई भी ।
Answer: (ग) सिंप्रग द्वारा कसा हुआ पलंग,
In simple words: रोगी के लिए स्प्रिंग वाला पलंग सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि यह आरामदेह होता है और रोगी को सहारा प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: रोगी के आराम और देखभाल की सुविधा के लिए स्प्रिंग वाले या एडजस्टेबल पलंग को प्राथमिकता दें।
Question (10). रोगी के बिस्तर पर बिछाई जाने वाली चादर होनी चाहिए
(क) काले या पीले रंग की,
(ख) हरे या नीले रंग की,
(ग) सफेद रंग की,
(घ) किसी भी गहरे रंग की ।
Answer: (ग) सफेद रंग की,
In simple words: रोगी के बिस्तर पर सफेद रंग की चादर बिछानी चाहिए क्योंकि यह साफ-सुथरी दिखती है और इसे आसानी से धोया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: सफेद चादरें स्वच्छता और दाग-धब्बों की आसान पहचान के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं।
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