UP Board Solutions Class 9 Home Science Chapter 17 Samanya gharelu deshaj aushadhiyan tatha samanya vishon k

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Class 9 Home Science Chapter 17 सामान्‍य घरेलु देशज औषधियां तथा सामान्‍य विषों के UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सामान्य घरेलू देशज औषधियों से क्या आशय है? कुछ मुख्य घरेलू औषधियों का सामान्य परिचय दीजिए।
या
कुछ घरेलू देशज औषधियों के नाम एवं उपयोगिता बताइए ।

Answer: सामान्य देशज औषधियाँ रोग एवं दुर्घटनाएँ घरेलू अथवा पारिवारिक जीवन की सामान्य घटनाएँ हैं जो कि प्रायः पीड़ित व्यक्ति के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी अनेक प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक कठिनाइयों में डाल देती हैं। प्राथमिक चिकित्सा तथा घरेलू औषधियों के ज्ञान का धैर्यपूर्वक उपयोग कर इन कठिनाइयों की गम्भीरता को न केवल कम किया जा सकता है, वरन् कई बार इनका सहज ही निवारण भी किया जा सकता है। सामान्यतः घरों में प्रयुक्त होने वाले मसालों, तरकारियों एवं फलों तथा सहज ही उपलब्ध सामान्य औषधियों का देशज घरेलू औषधियों के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि घर पर उपलब्ध होने वाले सामान्य पदार्थों को घरेलू देशज औषधियाँ कहा जाता है। ये पदार्थ विभिन्न शारीरिक विकारों में कष्ट-निवारक के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। इन घरेलू देशज औषधियों की जानकारी मनुष्य ने अपने दीर्घकालिक अनुभवों द्वारा प्राप्त की है तथा यह जानकारी पीढ़ी दर-पीढ़ी इसी रूप में हस्तान्तरित होती रहती है; उदाहरण के लिए-प्रायः सभी परिवारों के पेट दर्द में अजवाइन का प्रयोग किया जाता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए अजवाइन को घरेलू देशज औषधि की श्रेणी में रखा जाता है। वैसे सामान्य रूप से अजवाइन एक मसाले के रूप में इस्तेमाल होती है। मुख्य सामान्य घरेलू देशज औषधियों तथा उनकी उपयोगिता का सामान्य परिचय निम्नर्णित है

(क) कुछ मसाले घरेलू औषधियों के रूप में मसालों के रूप में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न पदार्थ, कई छोटे-छोटे रोगों और कष्टों के लिए लाभप्रद गुण रखते हैं। उदाहरण के लिए निम्नलिखित सूची देखिए
1. अजवाइन: यह पेट के दर्द को कम करती है। अफारा और गैस में भी लाभदायक है।
2. सौंठ: यह वायु के रोगों के लिए अत्यन्त उपयोगी है।
3. हींग: यह पेट के रोगों के लिए अत्यधिक लाभप्रद है। गैस, अफारा आदि में इसे पानी में घोलकर पेट पर लगाने से भी आराम मिलता है। अन्य पदार्थ; जैसे-अजवाइन, सोंठ, नमक आदि के साथ मिलाकर देने से पेट का दर्द, गैस, अफारे की शिकायत दूर हो जाती है।
4. काली मिर्च: यह गले को साफ करती है और कफ को हटाती है।
5. जीरा: यह पाचन क्रिया के लिए बहुत अच्छा पदार्थ है। भूख को बढ़ाता है।
6. मेथी: यह भूख को बढ़ाती है। इसके बने लड्डू वायु के दर्द में लाभप्रद हैं।
7. हल्दी: यह रक्त को शुद्ध करती है। इसका प्रयोग त्वचा को साफ करने में किया जाता है। यह कीटाणुनाशक है। छोटे-मोटे पेट के कीड़े इससे नष्ट हो जाते हैं।
8. लोंग: यह दाँत के दर्द के लिए एक अच्छी औषधि है। इसे पीसकर लगाने से दर्द बन्द हो जाता है। गले की खराश में भी लोग चूसी जाती है।
9. राई: मिरगी के रोगी को बारीक पिसी हुई राई सुंघाने से मूच्छा दूर हो जाती है।
10. अदरक: यह पाचन-क्रिया में सहायक है तथा वायु के रोगों को ठीक करता है।
11. नमक: यह घाव को साफ करने के लिए एक अच्छा पदार्थ है। गरम पानी में मिलाकर सिकाई करने से सूजन ठीक हो जाती है। गरम पानी में घोलकर गरारे करने से गला साफ होता है, कफ हटता है और सूजन कम हो जाती है।
12. सौंफ: यह खुनी पेचिश के लिए अत्यधिक लाभप्रद दवा है। पानी में उबालकर अर्क देने से यह बीमारी ठीक हो जाती है। इसका पानी अधिक प्यास को कम करता है तथा गर्मी के कारण होने वाले सिर दर्द को ठीक करता है।।
13. दाल: चीनी-दस्त और मरोड़ों में कत्था के साथ प्रयोग की जाती है।
14. पोदीना: सूखा हुआ पोदीना तथा उसका अर्क उल्टियों को बन्द करता है। पोदीना पाचन क्रिया में भी सहायक है।

(ख) कुछ सामान्य घरेलू उपयोग के पदार्थ
1. आमाहल्दी: पिसी हुई अवस्था में चोट या मोच के रोगी को दी जाती है जो कि काफी आरामदायक है।
2. चूना: चोट, मोच इत्यादि पर आमाहल्दी चूने के साथ लगाने से दर्द में कमी होती है तथा मोच ठीक हो जाती है। बरौं के डंक मारने पर भी चूना लगाया जा सकता है।
3. फिटकरी: रक्त-स्राव को रोकती है। गुलाब जल में मिलाकर आँख में डालने से दुखती हुई आँखें ठीक हो जाती हैं।
4. कत्था: इसका चूरा मुँह के छालों को ठीक करता है।
5. तुलसी: तुलसी की पत्तियाँ जुकाम, बुखार आदि के लिए आराम देने वाली हैं। शहद के साथ प्रयोग करने से खाँसी ठीक हो जाती है।
6. गोले का तेल: जले हुए स्थान पर लगाने से जलन कम होती है। घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है।
7. गुलाब जल: अनेक नेत्र रोगों के लिए शान्तिदायक है।
8. मुलहटी: खाँसी को ठीक करती है। मुँह में डालने से खाँसी बन्द हो जाती है।
9. ईसबगोल: इसकी भूसी कब्जनाशक है। पानी या दूध के साथ लेने पर कब्ज-निवारक होती है तथा दही में अच्छी तरह से मिला कर लेने पर दस्त को रोकती है।
10. नीम की पत्तियाँ: कीटाणुनाशक हैं, चर्म रोगों के लिए अति गुणकारी हैं। इनके पानी से नहाने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। सर्पदंश में इसको खिलाने से विष का प्रभाव कम हो जाता है। पानी में उबाल कर बालों को धोने से जुएँ नष्ट हो जाती हैं।

(ग) कुछ औषधियाँ तथा रासायनिक पदार्थ
1. पोटैशियम परमैंगनेट या लाल दवा: अनेक कीट पतंगों के काटने, बिच्छू के डंक मारने तथा सर्पदंश के घाव में भरने से विष को नष्ट कर देती है। संक्रामक रोगों के फैलने के समय इसे पानी में मिलाकर पीना चाहिए।
2. स्प्रिट: घाव साफ करने तथा अन्य कामों के लिए उपयोगी है।
3. बोरिक एसिड: घाव धोने के काम आता है। यह कीटाणुनाशक है। इसका हल्का घोल आँख । धोने के काम में लाया जाता है।
4. मरक्यूरोक्रोम: जल के साथ इसका घोल घाव पर लगाने से घाव शीघ्र भर जाता है तथा इस पर अन्य विषों का प्रभाव नहीं होता है।
5. अमोनिया: इसे सुंधाने से मूच्छा दूर हो जाती है। इसे विषैले कीट द्वारा काटने पर अथवा डंक मारने पर प्रयोग में लाया जाता है।
6. अमृत धारा: जी मिचलाना, दस्त, उल्टी (वमन) आदि में महत्त्वपूर्ण घरेलू औषधि है।
7. डिटॉल: यह कीटाणुनाशक है। घाव धोने के काम आता है।
8. बरनॉल: जले स्थान पर लगाने के लिए एक अच्छी क्रीम है।
9. आयोडेक्स: यह एक सूजन कम करने वाली औषधि है, जो मोच एवं दर्द में आराम देती है।
10. कुनैन: यह शुद्ध अथवा रासायनिक पदार्थों के साथ मिश्रित रूप में प्रायः गोलियों के आकार में सहज ही उपलब्ध हो जाती है। मलेरिया ज्वर के लिए यह एक उत्तम औषधि है।
In simple words: सामान्य घरेलू देशज औषधियाँ वे पदार्थ हैं जो घरों में आसानी से उपलब्ध होते हैं और सामान्य बीमारियों व चोटों के इलाज में उपयोग किए जाते हैं, जैसे मसाले, फल और कुछ रसायन। ये तत्काल राहत प्रदान करते हैं और अक्सर पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक ज्ञान पर आधारित होते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में विभिन्न प्रकार की घरेलू औषधियों और उनके उपयोगों की विस्तृत सूची देना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक औषधि के लाभों को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 2. विष कितने प्रकार के होते हैं? विषपान किए व्यक्ति का सामान्य उपचार आप किस प्रकार करेंगी?
या
यदि किसी बच्चे ने कोई विषैला पदार्थ खा लिया है, तो उसे किस प्रकार का प्रतिकारक पदार्थ दिया जाएगा? उदाहरण दीजिए। क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
या
टिप्पणी लिखिए-विष कितने प्रकार के होते हैं?

Answer: विष के प्रकार
सामान्यतः शरीर को हानि पहुँचाने वाले पदार्थ विष कहलाते हैं। ये पदार्थ प्रायः मुँह के द्वारा अथवा विषैले जीव-जन्तुओं के काटने पर शरीर में अन्दर प्रवेश करते हैं। विषपान करने पर शरीर में प्रवेश करने वाले विषैले पदार्थों को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

(1) जलन उत्पन्न करने वाले विष: ये विष शरीर के जिस भाग में प्रवेश करते हैं उसे या तो जला देते हैं अथवा उसमें जलन उत्पन्न करते हैं। कास्टिक सोडा, अमोनिया, कार्बोलिक एसिड तथा खनिज अम्ल आदि इस वर्ग के प्रमुख विष हैं। इस प्रकार के विष से प्रायः जीभ, गले तथा मुखगुहा में भयंकर जलन होती है तथा श्वास लेने में कठिनाई का अनुभव होता है।

(2) उदर अथवा आहारनाल को हानि पहुँचाने वाले विष: इस प्रकार के विष उदर में पहुंचकर भयंकर उथल-पुथल पैदा करते हैं। ये कण्ठ, ग्रासनली, आमाशय एवं आँतों में जलन एवं दर्द उत्पन्न करते हैं। इनके शिकार व्यक्ति उदरशूल अनुभव करते हैं तथा उन्हें मतली आने लगती है। इस वर्ग के अन्तर्गत आने वाले प्रमुख विष हैं संखिया, पारा, पिसा हुआ शीशा तथा विषैले एवं सड़े-गले खाद्य पदार्थ ।

(3) निद्रा उत्पन्न करने वाले विष: इस प्रकार के विष को खाने पर नींद आने लगती है जो कि विष की अधिकता होने पर प्रगाढ़ निद्रा अथवा संज्ञा-शून्यता में परिवर्तित हो जाती है। इस प्रकार के विष का अत्यधिक सेवन करने से कई बार रोगियों की मृत्यु भी हो जाती है। अफीम, मॉर्फिन तथा डाइजीपाम (कम्पोज, वैलियम आदि) इत्यादि इस वर्ग के प्रमुख विष हैं ।

(4) तन्त्रिका-तन्त्र को हानि पहुँचाने वाले विष: इनका प्रभाव प्रायः स्नायुमण्डल अथवा विभिन्न नाड़ियों पर होता है; जिसके फलस्वरूप नेत्रों की पुतलियाँ फैल जाती हैं, मस्तिष्क चेतना शून्य हो सकता है अथवा शरीर के विभिन्न अंगों में पक्षाघात हो सकता है। भाँग, धतूरा, क्लोरोफॉर्म तथा मदिरा इसी प्रकार के प्रमुख विष हैं।

विषपान करने पर उपचार
विषपाने एक गम्भीर दुर्घटना है, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिदिन अनेक व्यक्ति अनेक प्रकार के कष्ट भोगते हुए अकाल ही मृत्यु की गोद में चले जाते हैं। इस समस्या का समाधान करना सम्भव है, यदि पीड़ित व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो जाए तथा कुछ सुरक्षात्मक उपायों का कठोरतापूर्वक पालन किया जाए। चिकित्सा सहायता सदैव समय पर उपलब्ध होनी सम्भव नहीं है; अतः विषपान करने वाले व्यक्तियों के सामान्य उपचार के उपायों की जानकारी प्राप्त करना अति आवश्यक

(क) सुरक्षात्मक उपाय: कई बार अनेक व्यक्ति (विशेष रूप से बच्चे) अज्ञानतावश अथवा नादानी में विषपान का शिकार हो जाते हैं। इस प्रकार की दुर्घटनाओं को निम्नलिखित उपायों का कठोरतापूर्वक पालन कर सहज ही टाला जा सकता है
1. घर में प्रयुक्त होने वाले सभी क्षारों एवं अम्लों को नामांकित कर यथास्थान रखें। ध्यान रहे कि ये स्थान बच्चों की पहुँच से सदैव दूर हों ।
2. पुरानी तथा प्रयोग में न आने वाली औषधियों को घर में न रखें ।
3. सभी औषधियों को उनकी मूल शीशी अथवा डिब्बी में रखें ।
4. कभी भी अन्धकार में कोई औषधि प्रयोग न करें ।
5. चिकित्सक के पूर्व परामर्श के बिना कोई जटिल औषधि न प्रयोग करे।
6. पेण्ट वाले पदार्थ प्रायः विषैले होते हैं; अतः इनका प्रयोग सावधानीपूर्वक करें।
7. कीटाणुनाशक (स्प्रिट व डिटॉल, फिनाइल) आदि तथा कीटनाशक (फ्लिट व बेगौन स्प्रे आदि) पदार्थ विषैले होते हैं। इन्हें सावधानीपूर्वक प्रयोग करें तथा प्रयोग करते समय कम-से-कम श्वालें ।
8. खाना पकाने से पूर्व दाल, शाक-सब्जियों एवं फलों को अच्छी प्रकार से धोएँ ताकि ये पूर्णरूपसे कीटनाशक रासायनिक पदार्थों के प्रभाव से मुक्त हो जायें ।
9. बच्चों को समय-समय पर प्रेमपूर्वक उपर्युक्त बातों की जानकारी दें।

(ख) प्राथमिक चिकित्सा सहायता: योग्य चिकित्सक अथवा अस्पताल से चिकित्सा सहायता प्रायः विलम्ब से प्राप्त होती है, जबकि विषपान किए व्यक्ति का उपचार तत्काल होना आवश्यक है। अतः विषपान सम्बन्धी प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान होना अति आवश्यक है। इसके लिए कुछ महत्त्वपूर्ण बातों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए
1. रोगी के आस-पास विष की शीशी अथवा पुड़िया की खोज करें जिससे कि विष का प्रकार ज्ञात हो सके तथा उसके अनुसार उपयुक्त उपचार प्रारम्भ किया जा सके।
2. विष का प्रभाव कम करने के लिए रोगी को वमन कराकर उसके उदर से विष दूर करने का प्रयास करें।
3. यदि रोगी क्षारक अथवा अम्लीय विष से पीड़ित है, तो वमन न कराएँ। इस प्रकार के रोगियों को विष-प्रतिरोधक देना ही उचित रहता है।
4. क्षारीय विष से पीड़ित व्यक्ति को नींबू का रस अथवा सिरका पिलाना लाभप्रद रहता है। अम्लीय विष से पीड़ित व्यक्तियों को चूने का पानी, खड़िया, मिट्टी अथवा मैग्नीशियम का घोल देना उत्तम रहता है।
5. आस्फोटक विष के उपचार के लिए रोगी को गरम पानी में नमक मिलाकर वमन कराना चाहिए। कई बार वमन कराने के बाद उसे अरण्डी का तेल पिलाना चाहिए ।
6. निद्रा उत्पन्न करने वाले विष के उपचार में रोगी को जगाए रखने का प्रयास करें। वमन कराने के उपरान्त उसे तेज चाय अथवा कॉफी पीने के लिए देना लाभप्रद रहता है।
7. रोगी के हाथ व पैर सेंकते रहना चाहिए। रोगी को गुदा द्वारा नमक का पानी चढ़ाना लाभप्रद रहता है।
8. आवश्यकता पड़ने पर रोगी को कृत्रिम उपायों से श्वास दिलाने का प्रयास करना चाहिए।
9. रोगी को अस्पताल भिजवाने का तुरन्त प्रबन्ध करें। रोगी के साथ उसके वमन अथवा लिए गए विष का नमूना अवश्य ले जाएँ। इससे विष के सम्बन्ध में शीघ्र जानकारी प्राप्त होने से उपयुक्त चिकित्सा तत्काल आरम्भ हो सकती है।

(ग) सामान्य विषों के प्रतिकारक पदार्थों का उपयोग: विषपान किए व्यक्ति द्वारा प्रयुक्त विष एवं उसके प्रतिरोधक पदार्थ की जानकारी होने से विषपान के रोगी का उपचार सहज ही सम्भव है। सामान्य विषों के प्रतिकारक पदार्थ प्रायः निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

(1) जलन पैदा करने वाले विषों के प्रतिकारक पदार्थ

(अ) क्षारीय विषः
क्षारीय विषों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए अम्लों का प्रयोग करना चाहिए। उदाहरण-नींबू का रस एवं सिरका ।
(ब) अम्लीय विषः इनके प्रतिकारक पदार्थ क्षारीय होते हैं। गन्धक, शोरे व नमक के अम्लों को प्रभावहीन करने के लिए
1. चूना या खड़िया मिट्टी पानी में मिलाकर दें।
2. जैतून का तेल पानी में मिलाकर दें।
3. पर्याप्त मात्रा में दूध दें।

(2) आहार नाल को हानि पहुँचाने वाले विषों के प्रतिकारक पदार्थ
1. संखिया: यह एक भयानक विष है। टैनिक अम्ल के प्रयोग द्वारा इस विष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
2. गन्धक: कार्बोनेट एवं मैग्नीशिया गन्धक के विष को प्रभावहीन करने के लिए उत्तम रासायनिक पदार्थ हैं।

(3) निद्रा उत्पन्न करने वाले विषों के प्रतिकारक पदार्थ
1. अफीम: इस विष से पीड़ित व्यक्ति को गरम पानी में नमक मिलाकर वमन कराना चाहिए।
2. निद्रा की गोलियाँ: इनसे प्रभावित व्यक्ति का उपचार अफीम के समान ही किया जाता है। रोगी को नमक के गरम पानी द्वारा वमन कराया जाता है तथा उसके उदर की सफाई की जाती है।

(4) तन्त्रिका-तन्त्र को हानि पहुँचाने वाले विषों के प्रतिकारक पदार्थ
1. तम्बाकू: इसमें निकोटीन नामक विष होता है। गरम पानी में नमक डालकर रोगी को वमन करायें तथा तेज चाय व कॉफी पीने के लिए दें।
2. मदिरा: मदिरा के प्रभाव को नष्ट करने के लिए रोगी को वमन कराएँ तथा उसके उदर की पानी द्वारा सफाई करें। नींबू व नमक मिला गरम पानी पिलाने से लाभ होता है।
3. भाँग एवं गाँजा: पीड़ित व्यक्ति को वमन कराकर खट्टी वस्तुएँ खिलानी चाहिए। यदि रोगी होश में है, तो उसे गरम दूध पिलाया जा सकता है।
4. क्लोरोफॉर्म: इस विष का प्रतिकारक है एमाइल नाइट्राइट जो कि इसके प्रभाव को कम करता है।
5. धतूरा: धतूरे के बीजों में घातक विष होता है। इस विष से पीड़ित व्यक्ति को होश में लाकर वमने कराना चाहिए। इसके बाद उसे गर्म दूध में एक चम्मच ब्राण्डी मिलाकर दी जा सकती है।
In simple words: विष वे पदार्थ होते हैं जो शरीर को हानि पहुँचाते हैं और इन्हें जलन उत्पन्न करने वाले, आहारनाल को हानि पहुँचाने वाले, निद्रा लाने वाले या तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाले विषों में वर्गीकृत किया जाता है। विषपान के उपचार में तत्काल प्राथमिक चिकित्सा, जैसे विष के प्रकार की पहचान करना, वमन कराना (कुछ मामलों में वर्जित), और विशिष्ट प्रतिकारक पदार्थों का उपयोग करना शामिल है, साथ ही सावधानीपूर्वक भंडारण और बच्चों की पहुँच से दूर रखना जैसे सुरक्षात्मक उपाय भी अपनाने चाहिए।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में, विष के विभिन्न प्रकारों का वर्गीकरण और प्रत्येक प्रकार के लिए उपयुक्त प्राथमिक उपचार व सावधानियों का विस्तृत वर्णन करें। प्रतिकारक पदार्थों के उदाहरण देना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. घरेलू औषधियों का महत्त्व बताइए।
या
गृहिणी के लिए घरेलू औषधियों का ज्ञान क्यों आवश्यक है?

Answer: घरेलू देशज औषधियों का महत्त्व
प्रत्येक घर-परिवार में रोगों एवं दुर्घटनाओं का होना सामान्य बातें हैं। परन्तु ये सामान्य बातें ही कई बार गम्भीर समस्याओं को जन्म दे सकती हैं। उदाहरण के लिए-रोग की प्रारम्भिक अवस्था में चिकित्सक के पास न जाने पर रोग गम्भीर रूप धारण कर लेता है। अथवा किसी रोग एवं दुर्घटना में तत्काल चिकित्सा सहायता न उपलब्ध हो पाने पर रोगी की हालत गम्भीर हो सकती है। उपर्युक्त दोनों ही प्रकार की समस्याओं के निदान के लिए घरेलू देशजे औषधियों का व्यावहारिक ज्ञान होना आवश्यक है। इससे प्रत्येक गृहिणी निम्नलिखित प्रकार से लाभान्वित हो सकती है—

(1) तत्काल उपचार: घरेलू देशज औषधियों का व्यावहारिक ज्ञान होने पर गृहिणी किसी भी सामान्य रोग का तत्काल उपचार कर सकती है, जिसके फलस्वरूप रोग एवं दुर्घटनाएँ गम्भीर रूप नहीं ले पाते।

(2) समय एवं धन की बचत: घरेलू देशज औषधियों से परिचित होने पर गृहिणी को घर-परिवार में होने वाले छोटे-छोटे रोगों के लिए चिकित्सक तक दौड़ने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उसके समय की पर्याप्त बचत होती है। घरेलू औषधियाँ प्रायः अपेक्षाकृत संस्ती एवं सहज ही उपलब्ध होती हैं। इनका समय-समय पर उपयोग करने से अपेक्षाकृत कम व्यय होता है अर्थात् धन की. पर्याप्त बचत होती है।

(3) साहस एवं आत्मविश्वास में वृद्ध: घरेलू औषधियों से भली प्रकार परिचित गृहिणी परिवार के किसी सदस्य के रोग अथवा दुर्घटनाग्रस्त होने पर अपना धैर्य नहीं खोती तथा उत्पन्न समस्या का साहसपूर्वक एवं आत्मविश्वास से सामना करती है।
In simple words: घरेलू औषधियों का ज्ञान गृहिणियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें सामान्य बीमारियों और चोटों का तुरंत इलाज करने, डॉक्टर के पास जाने का समय और पैसा बचाने और आपातकालीन स्थितियों में आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में, घरेलू औषधियों के महत्व को बिन्दुवार समझाएँ, विशेष रूप से तात्कालिक उपचार, समय व धन की बचत, और आत्मविश्वास में वृद्धि पर जोर दें।

 

Question 2. तीन घरेलू दवाइयों के नाम एवं उपयोग बताइए।
या
दो घरेलू दवाइयों के नाम एवं उपयोग बताइए ।

Answer: कुछ महत्त्वपूर्ण घरेलू दवाइयों के नाम एवं उपयोग अग्रलिखित हैं

(1) हींग: यह पेट के रोगों में बहुत लाभ पहुँचाती है। गैस व अफारा आदि में पानी में घोलकर पेट | पर लगाने से रोगी को पर्याप्त लाभ होता है। अजवाइन, सौंठ वे नमक के साथ मिलाकर देने से यह अधिक प्रभावी हो जाती है।

(2) नमक: सामान्य नमक (सोडियम क्लोराइड) घावों को साफ करने के लिए एक अच्छी औषधि का कार्य करता है। गरम पानी में मिलाकर सिकाई करने पर यह पर्याप्त आराम पहुँचाता है। जल-अल्पता या निर्जलीकरण होने पर इसे उबाल कर ठण्डा किए हुए पानी में चीनी के साथ मिलाकर बार-बार पिलाने पर रोगी को अत्यधिक लाभ होता है। गरम पानी में नमक डालकर गरारे करने से गले के रोगों में विशेष लाभ होता है।

(3) सौंफ: खुनी पेचिश के लिए सौंफ एक उत्तम औषधि है। इस रोग में सौंफ को पानी में उबालकर उसका अर्क दिया जाता है। यह प्यास को कम करती है तथा गर्मी के कारण होने वाले सिर दर्द में आराम पहुँचाती है।
In simple words: हींग पेट की गैस और अफारे में लाभकारी है, नमक घावों को साफ करने और निर्जलीकरण को रोकने में मदद करता है, जबकि सौंफ खूनी पेचिश को ठीक करती है और प्यास व सिरदर्द कम करती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में प्रत्येक औषधि का नाम, उसके मुख्य उपयोग और सामान्य लाभों को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।

 

Question 3. कृमि रोग का उपचार आप कैसे करेंगी?
Answer: इस रोग में पेट में विभिन्न प्रकार के बड़े-बड़े कीड़े हो जाते हैं, जिनके कारण रोगी के पेट में दर्द रहता है, उसके मुँह से लार टपकती है तथा वह सोते समय दाँत किटकिटाता है। इस प्रकार के रोगी को पपीते के बीज (ताजे अथवा सूखे) पीसकर खिलाने से उसके पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं। एक से दो माशे तक अजवाइन का चूर्ण गुड के साथ दिन में दो या तीन बार देने से कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
In simple words: कृमि रोग में पपीते के सूखे या ताजे बीज पीसकर खाने से पेट के कीड़े मल के साथ निकल जाते हैं, और अजवाइन का चूर्ण गुड़ के साथ दिन में दो-तीन बार लेने से भी कीड़े नष्ट होते हैं।

🎯 Exam Tip: कृमि रोग के उपचार में प्राकृतिक और घरेलू विधियों पर ध्यान केन्द्रित करें, विशेष रूप से पपीते के बीज और अजवाइन के उपयोग को स्पष्ट करें।

 

Question 4. हैजा रोग का उपचार आप किस प्रकार करेंगी?
Answer: हैजा रोग में दस्त एवं वमन के कारण पीड़ित व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी हो जाती है; अतः उसे एक लीटर उबले हुए पानी में आधा चम्मच नमक, आधा चम्मच खाने का सोडा तथा एक चम्मच चीनी अथवा गुड़ मिलाकर बार-बार पिलाना चाहिए। अब रोगी को अमृतधारा की 10-15 बूंदें पानी में डालकर देनी चाहिए जिससे कि रोगी की वमन रुक सकें। अब हरा धनिया, पुदीना और सौंफ को समान मात्रा में लेकर तथा इसमें सेंधा नमक मिलाकर चटनी की तरह पीस लें। इसके सेवन से रोगी को पर्याप्त आराम मिलता है। समय मिलते ही रोगी को किसी योग्य चिकित्सक को दिखाएँ।
In simple words: हैजा रोग में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस घोल (नमक, सोडा, चीनी/गुड़) बार-बार पिलाएँ, वमन रोकने के लिए अमृतधारा दें, और हरे धनिया, पुदीना व सौंफ की चटनी सेंधा नमक के साथ सेवन कराएँ, साथ ही चिकित्सक से परामर्श लें।

🎯 Exam Tip: हैजा के उपचार में निर्जलीकरण (dehydration) को रोकने पर जोर दें, जिसमें घरेलू ओआरएस घोल और अमृतधारा जैसी औषधियों का उल्लेख करें। डॉक्टर की सलाह को भी शामिल करें।

 

Question 5. निमोनिया रोग का उपयक्तु उपचार लिखिए।
Answer: इस रोग में सामान्यतः ज्वर के साथ रोगी शीत का अनुभव करता है। उसके सीने में कफ एकत्रित हो जाता है, खाँसी रहती है तथा पसलियों में दर्द रहता है। पीड़ित व्यक्ति को गर्म स्थान में रखकर उसकी पसलियों के दोनों ओर पिसी हुई अलसी लगी रुई के पैड लगाने चाहिए। फूला हुआ सुहागा, फूली हुई फिटकरी, तुलसी की पत्तियाँ, अदरक पीसकर पान के रस एवं शहद में मिलाकर रोगी को दिन में चार या पाँच बार देना चाहिए।
In simple words: निमोनिया में रोगी को गर्म रखें, सीने पर अलसी के पैड लगाएँ और सुहागा, फिटकरी, तुलसी, अदरक, पान का रस और शहद का मिश्रण दिन में कई बार दें ताकि कफ कम हो और आराम मिले।

🎯 Exam Tip: निमोनिया के उपचार में रोगी को गर्म रखने और कफ व दर्द कम करने वाली घरेलू औषधियों, जैसे अलसी के पैड और तुलसी-अदरक मिश्रण के उपयोग पर प्रकाश डालें।

 

Question 6. जुकाम अथवा नजले का घरेलू उपचार बताइए।
Answer: जुकाम एवं नजला सामान्य रोग हैं जो कि प्रायः ऋतु परिवर्तन के समय अथवा शीत ऋतु में अधिक होते हैं। छींक आना, आँखों एवं नाक से पानी जाना, कान बन्द हो जाना तथा खाँसी व कफ निकलना आदि रोग के सामान्य लक्षण हैं। शीत ऋतु में हुई खाँसी एवं श्वास रोग में सहजन की जड़ की छाल को घी या तेल में मिलाकर धूम्रपान करने से लाभ होता है। जुकाम के प्रारम्भ में दूध में हल्दी डालकर उबालकर पीने से लाभ होता हैं। अधिक सिर दर्द व नाक से पानी बहने पर लौंग का दो बूंद तेल शक्कर अथवा बताशे के साथ खाने से अत्यधिक लाभ होता है। नए जुकाम में पीपल का चूर्ण शहद में अथवा चाय में मिलाकर सेवन करने से शीघ्र आराम होता है। चाय में काली मिर्च का चूर्ण डालकर पीने से भी जुकाम में पर्याप्त लाभ होता है?
In simple words: जुकाम और नजले के उपचार में सहजन की छाल का धूम्रपान, हल्दी वाला दूध पीना, लौंग का तेल शक्कर के साथ लेना, और पीपल का चूर्ण शहद या चाय में मिलाकर सेवन करना लाभकारी होता है।

🎯 Exam Tip: जुकाम व नजले के घरेलू उपचारों की एक सूची प्रस्तुत करें, जिसमें विभिन्न प्राकृतिक सामग्री और उनके उपयोग के तरीके शामिल हों।

 

Question 7. बिच्छू एवं शहद की मक्खी के काटने पर आप क्या उपचार करेंगी?
Answer: बिच्छू के काटने पर उपचार-बिच्छू द्वारा काटने पर निम्नलिखित उपचार करने चाहिए
1. काटने के स्थान के थोड़ा ऊपर टूर्नीकेट बाँधना चाहिए।
2. काटे हुए स्थान पर बर्फ रखने पर तथा नोवोकेन का इन्जेक्शन लगाने पर पीड़ा में कमी आती है।
3. रोग नियन्त्रित न होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
शहद की मक्खी के काटने पर उपचार: पीड़ित व्यक्ति को काटने के स्थान पर सूजन आ जाती है। तथा भयंकर जलन होती है। इसके लिए निम्नलिखित उपचार करने चाहिए
1. काटे स्थान को दबाकर डंक निकालना चाहिए।
2. घाव पर अमोनिया अथवा नौसादर एवं चूने की सम मात्रा मिलाकर लगानी चाहिए ।
3. काटे हुए स्थान पर स्प्रिट लगानी चाहिए।
4. एण्टी-एलर्जी की गोलियाँ (एविल आदि) लेने से लाभ होता है।
In simple words: बिच्छू के काटने पर टूर्नीकेट बाँधें, बर्फ लगाएँ और डॉक्टर से संपर्क करें; शहद की मक्खी के काटने पर डंक निकालें, अमोनिया या चूना लगाएँ, स्प्रिट का प्रयोग करें और एंटी-एलर्जी दवा लें।

🎯 Exam Tip: बिच्छू और शहद की मक्खी के काटने पर प्राथमिक उपचार के चरणों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग वर्गों में समझाएँ, जिसमें तत्काल राहत और आगे की चिकित्सा सलाह शामिल हो।

 

Question 8. विष कितने प्रकार से शरीर में पहुँचता है?
Answer: प्रायः निम्नलिखित चार प्रकार से विष हमारे शरीर में प्रवेश करता है
1. मुँह द्वारा-खाने-पीने की वस्तुओं में मिलाकर खाने अथवा खिलाने से विष शरीर में प्रवेश कर सकता है।
2. सँघने से कुछ विशेष प्रकार के विष पूँघने पर श्वास क्रिया के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। उदाहरण-पेन्ट्स, फिनिट आदि ।
3. विषैले जीव-जन्तुओं के काटने पर-अनेक जीव-जन्तु (बिच्छू, साँप, मधुमक्खी आदि) विषैले होते हैं। ये काटने अथवा डंक मारने पर अपने विष को हमारे शरीर में प्रवेश करा देते हैं।
4. सामान्य घाव या इन्जेक्शन के घाव द्वारा इस विधि द्वारा अनेक विषैले कीटाणु एवं विष – हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं।
In simple words: विष चार मुख्य तरीकों से शरीर में प्रवेश कर सकता है: मुँह से भोजन या पेय के माध्यम से, साँस लेने से (जैसे पेंट या फिनिट), विषैले जीवों के काटने या डंक मारने से, और खुले घावों या इंजेक्शन के माध्यम से।

🎯 Exam Tip: विष के शरीर में प्रवेश के विभिन्न मार्गों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें और प्रत्येक के लिए उदाहरण दें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. घरेलू देशज औषधियों से क्या आशय है?
Answer: जब किसी रोग या कष्ट के निवारण के लिए घर पर सामान्य इस्तेमाल की वस्तुओं को उपयोग में लाया जाता है तो उन सामान्य वस्तुओं को घरेलू देशज औषधि कहा जाता है। जैसे कि पेट-दर्द के निवारण के लिए अजवाइन एक घरेलू औषधि है।
In simple words: घरेलू देशज औषधियाँ वे सामान्य वस्तुएँ हैं जो घर पर उपलब्ध होती हैं और छोटी-मोटी बीमारियों या तकलीफों के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं, जैसे पेट दर्द के लिए अजवाइन।

🎯 Exam Tip: घरेलू देशज औषधियों की परिभाषा स्पष्ट करें और एक सामान्य उदाहरण दें।

 

Question 2. गुलाब जल का क्या प्रयोग है? .
Answer: यह नेत्रों की अत्यन्त उपयोगी औषधि है। यह नेत्र रोगों को ठीक करता है तथा नेत्रों को ठण्डक व शान्ति देने वाला होता है।
In simple words: गुलाब जल आँखों के लिए बहुत फायदेमंद है, यह आँखों की बीमारियों को ठीक करता है और उन्हें ठंडक व आराम देता है।

🎯 Exam Tip: गुलाब जल के मुख्य उपयोग को नेत्र स्वास्थ्य के संदर्भ में समझाएँ।

 

Question 3. जल जाने पर कोई दो घरेलु औषधियों के नाम बताए।
Answer: गोले का तेल या बरनॉल ।
In simple words: जलने पर गोले का तेल और बरनॉल जैसी घरेलू औषधियाँ लाभकारी होती हैं।

🎯 Exam Tip: जलने के घरेलू उपचार में उपयोग होने वाली दो सामान्य औषधियों के नाम बताएँ।

 

Question 4. साँप के काटने पर अंग में बन्ध क्यों लगाया जाता है?
Answer: अंग में बन्ध लगाने से उस स्थान से रुधिर का तेजी से इधर-उधर बहना बन्द हो जाता है। और विष पूरे शरीर में नहीं फैलता।
In simple words: साँप के काटने पर अंग में बन्ध इसलिए लगाया जाता है ताकि रक्त का संचार धीमा हो जाए और विष पूरे शरीर में फैलने से रुक जाए।

🎯 Exam Tip: साँप के काटने पर बन्ध लगाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण को स्पष्ट करें।

 

Question 5. तुलसी के पत्ते का औषधि उपयोग बताइए ।
Answer: तुलसी के पत्ते ज्वर तथा जुकाम को शान्त करते हैं। शहद के साथ खाँसी में लाभदायक हैं।
In simple words: तुलसी के पत्ते बुखार और जुकाम में राहत देते हैं, और शहद के साथ इनका सेवन खाँसी में फायदेमंद होता है।

🎯 Exam Tip: तुलसी के औषधीय गुणों को बुखार, जुकाम और खाँसी के संदर्भ में बताएँ।

 

Question 6. आमाहल्दी का उपयोग बताइए ।
Answer: पिसी हुई आमाहल्दी दूध के साथ देने से चोट तथा मोच में आराम मिलता है।
In simple words: पिसी हुई आमाहल्दी को दूध के साथ लेने से चोट और मोच में आराम मिलता है।

🎯 Exam Tip: आमाहल्दी के मुख्य औषधीय उपयोग को संक्षेप में समझाएँ।

 

Question 7. किन्हीं दो घरेलू औषधियों के नाम लिखिए ।
Answer: अजवाइन, हींग, काला नमक आदि ।
In simple words: अजवाइन, हींग और काला नमक कुछ सामान्य घरेलू औषधियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: किन्हीं भी दो या तीन सामान्य घरेलू औषधियों के नाम याद रखें।

 

Question 8. नकसीर छूटने पर आप कौन-सी घरेलू औषधिय प्रयोग करेंगी?
Answer: नाक में देशी घी डालने तथा गीली-पीली मिट्टी सुंघाने से नाक द्वारा होने वाले रक्तस्राव में कमी आती है।
In simple words: नकसीर छूटने पर नाक में देशी घी डालने और गीली मिट्टी सुंघाने से रक्तस्राव कम होता है।

🎯 Exam Tip: नकसीर के घरेलू उपचार के पारंपरिक तरीकों को याद रखें।

 

Question 9. विष की शीशियों को लेबल करने से क्या लाभ है?
Answer: विष की शीशियों को नामांकित (लेबल) कर रखने से भूलवश विषपान का भय नहीं रहता।
In simple words: विष की बोतलों पर लेबल लगाने से गलती से विष पी लेने का खतरा नहीं रहता है।

🎯 Exam Tip: विषैले पदार्थों के सुरक्षित भंडारण के महत्व पर जोर दें, जिसमें लेबलिंग एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

Question 10. औषधियों का सेवन सदैव पर्याप्त प्रकाश में करना चाहिए। क्यों?
Answer: क्योंकि अन्धकार में गलत औषधियाँ खा लेने की सम्भावना रहती है।
In simple words: दवाएँ हमेशा पर्याप्त रोशनी में लेनी चाहिए ताकि गलती से कोई गलत दवा न खा लें।

🎯 Exam Tip: दवाओं के सेवन में सावधानी बरतने के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करें।

 

Question 11. भाँग पिए व्यक्ति का आप क्या उपचार करेंगी?
Answer: ऐसे व्यक्ति को खटाई (जैसे कि इमली का पानी) पिलाने से भाँग के विषैले प्रभाव को कम किया जा सकता है।
In simple words: भाँग का नशा कम करने के लिए व्यक्ति को इमली का पानी जैसी खट्टी चीजें पिलाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: भाँग के प्रभाव को कम करने के लिए खट्टी चीजों के उपयोग पर ध्यान दें।

 

Question 12. जी मिचलाने अथवा उल्टी आने पर प्रयुक्त होने वाली किन्हीं दो घरेलू औषधियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: जी मिचलाने अथवा वमन रोकने के लिए
1. अमृतधारा की 5-6 बूंदें पानी में डालकर पिलायें तथा
2. पोदीना व प्याज पीसकर तथा उसमें नीबू का रस डालकर रोगी को पिलायें ।
In simple words: जी मिचलाने और उल्टी को रोकने के लिए अमृतधारा की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर दें या पुदीना, प्याज और नींबू के रस का मिश्रण दें।

🎯 Exam Tip: उल्टी और जी मिचलाने के लिए दो प्रभावी घरेलू उपचारों के नाम और उपयोग याद रखें।

 

Question 13. लू लगने पर रोगी को पीने के लिए क्या देना चाहिए?
Answer: लू लगने पर रोगी को पीने के लिए आम का पन्ना देना चाहिए।
In simple words: लू लगने पर रोगी को आम का पन्ना पिलाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: लू लगने के प्राथमिक उपचार में तरल पदार्थ के रूप में आम के पन्ने के महत्व को बताएँ।

 

Question 14. बेल का शर्बत क्यों उपयोगी माना जाता है ?
Answer: बेल का शर्बत पेट सम्बन्धी विकार दूर करता है तथा पेचिश में विशेष लाभदायक होता है।
In simple words: बेल का शर्बत पेट की समस्याओं को ठीक करता है और विशेष रूप से पेचिश में फायदेमंद होता है।

🎯 Exam Tip: बेल के शर्बत के मुख्य स्वास्थ्य लाभों को पेट से संबंधित विकारों के संदर्भ में समझाएँ।

 

Question 15. दाँतों में दर्द होने पर आप क्या औषधि प्रयोग करेंगी?
Answer: पिसी हुई लौंग अथवा लौंग का तेल प्रभावित दाँत के निचले भाग पर लगाने से दर्द में पर्याप्त लाभ होता है।
In simple words: दाँत दर्द में पिसी हुई लौंग या लौंग का तेल प्रभावित दाँत पर लगाने से आराम मिलता है।

🎯 Exam Tip: दाँत दर्द के लिए लौंग के उपयोग की विधि और उसके प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

Question 16. मुँह एवं जीभ पर छाले होने पर आप क्या उपचार करेंगी?
Answer: प्रभावित भाग पर ग्लिसरीन अथवा कत्थे का चूरा लगाने से पर्याप्त लाभ होता है।
In simple words: मुँह और जीभ के छालों पर ग्लिसरीन या कत्थे का चूरा लगाने से राहत मिलती है।

🎯 Exam Tip: मुँह के छालों के घरेलू उपचार के लिए ग्लिसरीन और कत्थे के उपयोग को बताएँ।

 

Question 17. मलेरिया ज्वर में रोगी को कौन-सी घरेलू औषधि देनी चाहिए?
Answer: तुलसी के पत्ते में काली मिर्च को सम मात्रा में पीसकर दिन में तीन या चार बार देने से मलेरिया के रोगी को लाभ होगा ।
In simple words: मलेरिया बुखार में तुलसी के पत्ते और काली मिर्च को समान मात्रा में पीसकर दिन में तीन-चार बार देने से रोगी को लाभ मिलता है।

🎯 Exam Tip: मलेरिया के घरेलू उपचार में तुलसी और काली मिर्च के मिश्रण के उपयोग को याद रखें।

 

Question 18. अफीम खा लेने पर चेहरे का रंग कैसा हो जाता है?
Answer: अफीम खा लेने पर चेहरा पीला पड़ जाता है तथा नेत्रों की पुतलियाँ सिकुड़कर छोटी हो जाती हैं।
In simple words: अफीम का सेवन करने पर चेहरा पीला पड़ जाता है और आँखों की पुतलियाँ सिकुड़ जाती हैं।

🎯 Exam Tip: अफीम के सेवन के शारीरिक लक्षणों में चेहरे का रंग और आँखों की पुतलियों पर प्रभाव को बताएँ।

 

Question 19. विभिन्न दवाएँ घर पर रखते समय आप क्या सावधानियाँ रखेंगी?
Answer:
1. घर में दवाएँ उनकी मूल शीशियों, डिब्बों अथवा रैपर में रखनी चाहिए।
2. दवाइयों को उनके निर्देशानुसार ठण्डे अथवा गरम तथा प्रकाश अथवा अन्धकार आदि निर्दिष्ट स्थान में रखना चाहिए ।
3. दवाइयाँ सदैव सुरक्षित स्थान पर बच्चों की पहुँच से दूर रखी जानी चाहिए।
In simple words: दवाएँ हमेशा उनकी मूल पैकिंग में, निर्देशानुसार सही तापमान और प्रकाश में रखें, और बच्चों की पहुँच से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें।

🎯 Exam Tip: घर पर दवाएँ सुरक्षित रखने के लिए तीन महत्वपूर्ण सावधानियों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न: प्रत्येक प्रश्न के चार वैकल्पिक उत्तर दिए गए हैं। इनमें से सही विकल्प चुनकर लिखिए

 

Question. (1) घरेलू देशज औषधियों के प्रयोग को उपयोगी माना जाता है
(क) आकस्मिक रोगों या दुर्घटनाओं के तुरन्त उपचार के लिए,
(ख) इनके प्रयोग से धन एवं समय की बचत होती है,
(ग) दुर्घटना घटित होने पर गृहिणी का मनोबल बना रहता है,
(घ) उपर्युक्त सभी उपयोग एवं लाभ ।
Answer: (घ) उपर्युक्त सभी उपयोग एवं लाभ
In simple words: घरेलू औषधियाँ आकस्मिक उपचार, समय व धन की बचत और आत्मविश्वास बढ़ाने में उपयोगी मानी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: घरेलू औषधियों के बहुमुखी लाभों को समझें, जिनमें तात्कालिक उपचार और दक्षता शामिल हैं।

 

Question. (2) सौंफ का प्रयोग किस रोग में किया जाता है?
(क) खूनी पेचिश,
(ख) निमोनिया,
(ग) कृमि रोग,
(घ) जुकाम ।
Answer: (क) खूनी पेचिश
In simple words: सौंफ का प्रयोग मुख्य रूप से खूनी पेचिश के उपचार में किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सौंफ के विशिष्ट औषधीय उपयोग को याद रखें।

 

Question. (3) कृमि रोग में दिए जाते हैं
(क) धतूरे के बीज,
(ख) पपीते के बीज,
(ग) टमाटर के बीज,
(घ) खरबूजे के बीज ।
Answer: (ख) पपीते के बीज
In simple words: कृमि रोग के उपचार में पपीते के बीज का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: कृमि रोग के लिए प्रभावी घरेलू उपचार में पपीते के बीज के महत्व को समझें।

 

Question. (4) अमृतधारा का प्रयोग किया जाता है
(क) मलेरिया में,
(ख) कृमि रोग में,
(ग) खुनी पेचिश में,
(घ) वमन रोकने में ।
Answer: (घ) वमन रोकने में
In simple words: अमृतधारा का उपयोग मुख्य रूप से वमन (उल्टी) को रोकने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: अमृतधारा के प्राथमिक उपयोग को याद रखें, जो कि वमन से राहत दिलाना है।

 

Question. (5) ईसबगोल की भूसी दी जाती है
(क) श्वास सम्बन्धी रोगों में,
(ख) हृदय रोग में,
(ग) पेचिश में,
(घ) काली खाँसी में ।
Answer: (ग) पेचिश में
In simple words: ईसबगोल की भूसी कब्ज और पेचिश जैसे पाचन संबंधी समस्याओं के उपचार में दी जाती है।

🎯 Exam Tip: ईसबगोल की भूसी के मुख्य पाचन संबंधी लाभ को याद रखें, विशेषकर पेचिश में।

 

Question. (6) जले हुए स्थान पर जलन कम करने के लिए आप क्या लगाएँगी?
(क) लौंग का तेल,
(ख) गोले का तेल,
(ग) सरसों का तेल,
(घ) अमृतधारा।
Answer: (ख) गोले का तेल
In simple words: जले हुए स्थान पर जलन कम करने के लिए गोले का तेल लगाया जाता है।

🎯 Exam Tip: जलने के प्राथमिक उपचार में उपयोग होने वाले तेल का नाम याद रखें।

 

Question. (7) नींद लाने वाला विष कौन-सा है?
(क) अफीम,
(ख) कास्टिक सोडा,
(ग) धतूरा,
(घ) संखिया ।
Answer: (क) अफीम
In simple words: अफीम एक ऐसा विष है जो नींद को प्रेरित करता है।

🎯 Exam Tip: नींद लाने वाले विषों के उदाहरणों में अफीम को प्रमुख रूप से याद रखें।

 

Question. (8) सबसे अधिक खतरनाक एवं हानिकारक विष कौन-से होता है?
(क) आहारनाल में जल उत्पन्न करने वाले विष
(ख) नींद लाने वाले विष,
(ग) मस्तिष्क तथा तन्त्रिकाओं पर बुरा प्रभाव डालने वाले विष,
(घ) मांसपेशियों में ऐंठन लाने वाले विष ।
Answer: (ग) मस्तिष्क तथा तन्त्रिकाओं पर बुरा प्रभाव डालने वाले विष
In simple words: मस्तिष्क और तंत्रिकाओं पर बुरा प्रभाव डालने वाले विष सबसे अधिक खतरनाक और हानिकारक होते हैं।

🎯 Exam Tip: शरीर के किस तंत्र को प्रभावित करने वाले विष सबसे अधिक खतरनाक होते हैं, इस तथ्य पर ध्यान दें।

 

Question. (9) निमोनिया के रोगी को आप कौन-सा पेय पदार्थ देंगी?
(क) लस्सी,
(ख) शर्बत,
(ग) चाय,
(घ) कोका कोला।
Answer: (ग) चाय
In simple words: निमोनिया के रोगी को चाय जैसे गर्म पेय पदार्थ दिए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: निमोनिया के रोगी के लिए उपयुक्त गर्म पेय पदार्थ को याद रखें।

 

Question. (10) साँप के काटे घाव पर कौन-सी वस्तु लगानी चाहिए?
(क) सल्फर,
(ख) बरनॉल,
(ग) पोटैशियम परमैंगनेट,
(घ) नमक ।
Answer: (ग) पोटैशियम परमैंगनेट
In simple words: साँप के काटे घाव पर पोटैशियम परमैंगनेट (लाल दवा) लगानी चाहिए।

🎯 Exam Tip: साँप के काटने के प्राथमिक उपचार में उपयोग होने वाले विशिष्ट रसायन को याद रखें।

 

Question. (11) बिच्छू के काटने पर तुरन्त दिया जाता है
(क) गर्म चाय,
(ख) गर्म दूध,
(ग) कहवा,
(घ) ब्राण्डी ।
Answer: (क) गर्म चाय
In simple words: बिच्छू के काटने पर गर्म चाय जैसे गर्म पेय पदार्थ देना फायदेमंद हो सकता है।

🎯 Exam Tip: बिच्छू के काटने के बाद दिए जाने वाले घरेलू उपचार में गर्म तरल पदार्थों के महत्व को समझें।

 

Question. (12) कीटाणुनाशक पदार्थ है
(क) टाटरी,
(ख) अमृतधारा,
(ग) डिटॉल,
(घ) गोले का तेल ।
Answer: (ग) डिटॉल
In simple words: डिटॉल एक प्रसिद्ध कीटाणुनाशक पदार्थ है जिसका उपयोग घावों को साफ करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सामान्य कीटाणुनाशक पदार्थों के उदाहरणों में डिटॉल को पहचानें।

 

Question. (13) मुलहठी दी जाती है
(क) विष फैलने पर,
(ख) दस्तों के लिए,
(ग) खाँसी होने पर,
(घ) मलेरिया ज्वर में ।
Answer: (ग) खाँसी होने पर
In simple words: मुलहठी मुख्य रूप से खाँसी और गले की खराश के उपचार में दी जाती है।

🎯 Exam Tip: मुलहठी के प्राथमिक औषधीय उपयोग को याद रखें, विशेषकर खाँसी में।

 

Question. (14) पोटैशियम परमैंगनेट काम आता है
(क) चोट पर लगाने के लिए,
(ख) घाव को साफ करने के लिए,
(ग) घाव को भरने के लिए,
(घ) कीड़े-मकोड़ों को मारने के लिए।
Answer: (ख) घाव को साफ करने के लिए
In simple words: पोटैशियम परमैंगनेट (लाल दवा) का उपयोग मुख्य रूप से घावों को साफ करने और कीटाणुओं को मारने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पोटैशियम परमैंगनेट के मुख्य उपयोग को घाव की सफाई और एंटीसेप्टिक गुणों के संदर्भ में बताएँ।

 

Question. (15) मलेरिया ज्वर के लिए एकमात्र दवा है
(क) सौंठ, अजवाइन तथा हींग,
(ख) कुनैन की गोलियाँ,
(ग) लौंग का पान,
(घ) पोदीने का पानी ।
Answer: (ख) कुनैन की गोलियाँ
In simple words: मलेरिया बुखार के लिए कुनैन की गोलियाँ एक प्रमुख और प्रभावी दवा है।

🎯 Exam Tip: मलेरिया के विशिष्ट उपचार के लिए कुनैन को याद रखें।

 

Question. (16) अम्ल तथा क्षार मुख्य रूप से उत्पन्न करते हैं
(क) जलन,
(ख) पीड़ा,
(ग) बेचैनी,
(घ) नींद।
Answer: (क) जलन
In simple words: अम्ल और क्षार शरीर के संपर्क में आने पर मुख्य रूप से जलन उत्पन्न करते हैं।

🎯 Exam Tip: अम्ल और क्षार के संपर्क में आने पर होने वाले प्राथमिक शारीरिक प्रभाव को पहचानें।

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