UP Board Solutions Class 9 Hindi Chapter 3 Purushottamah Ramah

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Question 1. इक्ष्वाकुवंशप्रभवो
वशी ।।

शब्दार्थ: इक्ष्वाकुवंशप्रभवः = इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न ! नियतात्मा = आत्मसंयमी द्युतिमान = कान्तिमान महावीर्यः - महान् वीर । धृतिमान = धैर्यवान् । वशी : जितेन्द्रिय ।
सन्दर्भ - प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक के अन्तर्गत संस्कृत खण्ड के 'पुरुषोत्तमः रामः' नामक पाठ से लिया गया है। इसमें भगवान् राम के गुणों का वर्णन किया गया है।
Answer: लोगों द्वारा 'राम' नाम से सुने हुए, इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न, (राम) आत्मा को वश में रखनेवाले, महाबलशाली, कान्तिमान्, धैर्यवान् एवं जितेन्द्रिय हैं।
In simple words: राम इक्ष्वाकु वंश में जन्में, अपनी आत्मा पर नियंत्रण रखने वाले, बलवान, तेजस्वी, धैर्यवान और इन्द्रियों को जीतने वाले थे।

🎯 Exam Tip: श्लोक के संदर्भ और राम के विभिन्न गुणों का सही अनुवाद महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. बुद्धिमान्
महाहनुः ।।

शब्दार्थ: वाग्मी = बोलने में चतुर श्रीमाञ्छत्रुनिर्वहणः (श्रीमान् + शत्रु-निर्वहण:) = श्री (शोभा) सम्पन्न और शत्रु को नष्ट करनेवाले । विपुलांसः = पुष्ट कन्धों वाले । महाबाहुः = विशाल भुजाओं वाले । कम्बुग्रीवः = शंख जैसी गर्दन वाले ।
Answer: (राम) बुद्धिमान्, नीतिमान, बोलने में कुशल, शोभावाले, शत्रु-विनाशक, ऊँचे कंधे वाले, विशाल भुजाओं वाले, शंख के समान गर्दन वाले, बड़ी ठोड़ी वाले (हैं)।
In simple words: राम अत्यंत बुद्धिमान, कुशल वक्ता, शक्तिशाली और शत्रुओं का नाश करने वाले थे, जिनके कंधे और भुजाएँ विशाल तथा गर्दन शंख जैसी सुंदर थी।

🎯 Exam Tip: राम के शारीरिक और मानसिक गुणों का वर्णन करते समय सटीक विशेषणों का प्रयोग करें।

 

Question 3. महोरस्को
सुविक्रमः ।।

शब्दार्थ: गूढजत्रुः = जिनकी गले की हँसुली नहीं दिखायी देती। महोरस्को = बड़े वक्षस्थल वाले । महेष्वासः = बड़े धनुष वाले ।।
Answer: (राम) विशाल वक्षस्थल वाले, विशाल धनुष वाले (मांस में) दबी ग्रीवास्थि = हँसुली वाले, शत्रुओं का दमन करने वाले, घुटनों तक लम्बी भुजाओं वाले, सुन्दर सिर वाले, सुन्दर मस्तक वाले तथा महापराक्रमी (हैं)।
In simple words: राम विशाल छाती वाले, बड़े धनुष का प्रयोग करने वाले, दबी हुई हँसुली वाले और अत्यंत पराक्रमी थे।

🎯 Exam Tip: राम के अद्वितीय शारीरिक लक्षणों और पराक्रम को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।

 

Question 4. समः समविभक्ताङ्ग
लक्ष्मीवाञ्छुभलक्षणः ।

शब्दार्थ: समविभक्ताङ्ग = समान रूप से विभक्त अंगों वाले, सुडौल पीनवक्षा = पुष्ट वक्षस्थल वाले। विशालाक्षः - विशाल नेत्रोंवाले लक्ष्मीवाञ्छुभलक्षणः (लक्ष्मीवान् + शुभलक्षणः) = शोभा सम्पन्न (सम्पत्तिशाली) और शुभ लक्षणों वाले ।।
Answer: वे (राम) समान रूप से विभक्त अंगों वाले (सुडौल), सुन्दर वर्ण, प्रतापी, पुष्ट वक्षस्थल वाले, विशाल नेत्रों वाले, शोभा-सम्पन्न और शुभ लक्षण से युक्त शरीरवाले हैं।
In simple words: राम का शरीर सुडौल और समान रूप से विभाजित अंगों वाला था, वे सुंदर, प्रभावशाली, मजबूत छाती और बड़े नेत्रों वाले थे, जो शुभ लक्षणों से युक्त थे।

🎯 Exam Tip: राम के सौंदर्य और शुभ लक्षणों का वर्णन करते समय संस्कृत विशेषणों का ध्यान रखें।

 

Question 5. धर्मज्ञः
शुचिर्वश्यः समाधिमान् ।।

शब्दार्थ: सत्यसन्धः = सत्य प्रतिज्ञा वाले । शुचिः = पवित्र वश्यः = इन्द्रियों को वश में रखने वाले । धर्मज्ञः = धर्म के ज्ञाता।
Answer: वे (राम) धर्म के ज्ञाता, सत्य प्रतिज्ञा वाले तथा प्रजा के हित में लगे रहने वाले हैं। वे यशस्वी, ज्ञानी, पवित्र, जितेन्द्रिय और एकाग्रचित्त हैं।
In simple words: राम धर्म के ज्ञान में निपुण थे, सत्य बोलने वाले, पवित्र, अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने वाले और एकाग्र मन वाले थे।

🎯 Exam Tip: राम के नैतिक गुणों और आत्म-नियंत्रण पर केंद्रित रहें।

 

Question 6. प्रजापति समः श्रीमान् ..
परिरक्षिता ।।
धर्मस्य

शब्दार्थ: धाता = पालन करनेवाले रिपुनिषूदनः = शत्रुओं का विनाश करने वाले । परिरक्षिता = रक्षा करनेवाले ।
Answer: श्रीराम प्रजापति (राजा) के समान सभी के पालक अर्थात् रक्षक हैं। वह शत्रुओं का नाश करनेवाले हैं। सम्पूर्ण जीवलोक के रक्षक तथा धर्म की रक्षा करनेवाले हैं।
In simple words: श्रीराम प्रजापति के समान सभी प्राणियों के पालक, शत्रुओं का नाश करने वाले और धर्म के महान रक्षक थे।

🎯 Exam Tip: राम के शासक और संरक्षक के रूप में गुणों को उजागर करें।

 

Question 7. रक्षिता स्वस्य
निष्ठितः ।।

शब्दार्थ: स्वस्य = अपने वेदवेदाङ्गत्तत्वज्ञः = वेद और वेदांगों के तत्त्व को जानने वाले । धनुर्वेदे = धनुर्विद्या में निष्ठितः = निपुण ।।
Answer: (राम) अपने धर्म के रक्षक, अपने परिजनों की रक्षा करनेवाले, वेद और वेदांग के तत्त्व को जाननेवाले और धनुर्विद्या में निपुण हैं।
In simple words: राम अपने धर्म और परिवार के रक्षक थे, वे वेदों और वेदांगों के ज्ञाता तथा धनुर्विद्या में निपुण थे।

🎯 Exam Tip: राम के ज्ञान और रक्षक के रूप में उनकी भूमिका को स्पष्ट करें।

 

Question 8. सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः
विचक्षणः ।।

शब्दार्थ: प्रतिभावान् = प्रतिभाशाली । साधुरदीनात्मा \(>\) साधुः + अदीनात्मा; साधुः अदीनात्मा = सज्जन, उदाराशय अर्थात् स्वतन्त्र विचार वाले ।।
Answer: (राम) सम्पूर्ण शास्त्रों के अर्थ के तत्त्व को जानने वाले, अच्छी स्मरण शक्ति वाले, प्रतिभाशाली, सम्पूर्ण संसार के प्रिय, सज्जन, स्वतन्त्र विचार वाले तथा चतुर हैं।
In simple words: राम सभी शास्त्रों के गूढ़ अर्थ को जानने वाले, तीव्र स्मरण शक्ति वाले, प्रतिभाशाली, सज्जन और स्वतंत्र विचारों वाले थे।

🎯 Exam Tip: राम के व्यापक ज्ञान, बुद्धिमत्ता और स्वतंत्र सोच को रेखांकित करें।

 

Question 9. स च नित्यं
प्रतिपद्यते ।।

शब्दार्थ: प्रशान्तात्मा = प्रशान्त मन वाले । मृदु = मधुर भाषी भाषते = बोलते हैं। प्रतिपद्यते = कहते हैं।
Answer: और वह राम नित्य शान्त मन वाले, मृदुभाषी और स्वाभिमानी होने पर भी कठोर वचन नहीं कहते।
In simple words: राम हमेशा शांत स्वभाव के, मधुर बोलने वाले और स्वाभिमानी होते हुए भी कभी कठोर शब्द नहीं कहते थे।

🎯 Exam Tip: राम के शांत स्वभाव, मृदुभाषी होने और स्वाभिमान के साथ विनम्रता को दर्शाएं।

 

Question 10. कदाचिदुपकारेण
शक्तया ।।

शब्दार्थ: कदाचिदुपकारेण = (कदाचित + उपकारेण) कभी उपकार के द्वारा। कृतेनैकेन = (कृतेन + एकेन) एक के किये जाने पर । तुष्यते = सन्तुष्ट हो जाते हैं। स्मरत्यपकाराणां = (स्मरति अपकाराणाम्) अपकारों को याद नहीं करते हैं। शतमप्यात्म शक्तया = (शतम् + अपि + आत्म शक्तया) = अपनी आत्मशक्ति से सौ को भी ।
Answer: यदि कभी कोई एक ही उपकार कर देता है तो उसी से सन्तुष्ट हो जाते हैं। अपनी आत्मशक्ति के कारण किसी के द्वारा किये गये सौ अपकारों को भी याद नहीं करते हैं।
In simple words: राम किसी के एक भी उपकार से संतुष्ट हो जाते थे और अपनी महान शक्ति के बावजूद किसी के द्वारा किए गए सैकड़ों अपकारों को भी भूल जाते थे।

🎯 Exam Tip: राम के कृतज्ञता और क्षमाशीलता जैसे गुणों पर ध्यान दें।

 

Question 11. सर्वविद्याव्रत
कालवित् ॥

शब्दार्थ: विद्याव्रतस्नातो = सभी विद्याओं में पारंगत यथावत् = भली प्रकार से, उसी प्रकार साङ्गवेदवित् = वेदों के छह अङ्गों के जानकार। अमोघ = अत्यधिक, निष्फल न होनेवाला कालवित् = समय के जानकार।।
Answer: श्रीराम सभी विद्याओं में पारंगत हैं। उसी प्रकार वेदों के छह अङ्गों के जानकार हैं। उनका क्रोध और हर्ष निष्फल न होनेवाला है। वे त्याग और संयम के समय को जानने वाले हैं अर्थात् किस समय त्याग करना चाहिए और किस समय वस्तुओं का संग्रह करना चाहिए इसको (भली प्रकार) जानते हैं।
In simple words: श्रीराम सभी विद्याओं और वेदों के छह अंगों के ज्ञाता थे। उनका क्रोध या हर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता था, और वे भली-भांति जानते थे कि कब त्याग करना है और कब संग्रह करना है।

🎯 Exam Tip: राम के सर्वांगीण ज्ञान और समय-सारिणी के प्रति उनकी समझ को महत्व दें।

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