UP Board Solutions Class 9 Hindi Chapter 3 Meerabai

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Detailed Chapter 3 मीराबाई UP Board Solutions for Class 9 Hindi

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Class 9 Hindi Chapter 3 मीराबाई UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

Question 1. निम्नलिखित पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए तथा काव्यगत सौन्दर्य भी स्पष्ट कीजिए :
1. बसो मेरे नैनन में ................................................ भक्त बछल गोपाल ।
शब्दार्थ- मकराकृत = मछली के आकार के । छुद्र = छोटी । रसाल = मधुर । भक्त-बछल = भक्त-वत्सल ।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्म हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी काव्य' में संकलित श्रीकृष्ण की अनन्य उपासिका मीराबाई के काव्य-ग्रन्थ 'मीरा-सुधा-सिन्धु' के अन्तर्गत 'पदावली' शीर्षक से अवतरित है।
प्रसंग- प्रेम-दीवानी मीरा भगवान् कृष्ण की मोहिनी मूर्ति को अपने नेत्रों में बसाना चाहती हैं। इस पद में कृष्ण की मोहिनी मूर्ति का सजीव चित्रण है।
व्याख्या- कृष्ण के प्रेम में दीवानी मीरा कहती हैं कि नन्दजी को आनन्दित करनेवाले हे श्रीकृष्ण! आप मेरे नेत्रों में निवास कीजिए। आपका सौन्दर्य अत्यन्त आकर्षक है। आपके सिर पर मोर के पंखों में निर्मित मुकुट एवं कानों में ऊली की आकृति के कुण्डल सुशोभित हो रहे हैं। मस्तक पर लगे हुए लाल तिलक और सुन्दर विशाल नेत्रों से आपका श्यामवर्ण का शरीर अतीव सुशोभित हो रहा है। अमृतरस से भरे आपके सुन्दर होंठों पर बाँसुरी शोभायमान हो रही है । आप हृदय पर वन के पत्र-पुष्पों से निर्मित माला धारण किये हुए हैं। आपकी कमर में बँधी करधनी में छोटी-छोटी घण्टियाँ सुशोभित हो रही हैं। आपके चरणों में बँधे हुँघरुओं की मधुर ध्वनि बहुत रसीली प्रतीत होती है । हे प्रभु! आप सज्जनों को सुख देनेवाले, भक्तों से प्यार करनेवाले और अनुपम सुन्दर हैं। आप मेरे नेत्रों में बस जाओ ।
काव्यगत सौन्दर्य
(1) यहाँ भगवान् कृष्ण की मनमोहक छवि का परम्परागत वर्णन किया गया है।
(2) मीराबाई की कृष्ण के प्रति अनन्य भक्तिभावना प्रकट हुई है।
(3) भाषा-सुमधुर ब्रज ।
(4) शैली-मुक्तक काव्य की पद शैली है।
(5) छन्द-संगीतात्मक गेय पद ।
(6) रस- भक्ति एवं शान्त ।
(7) अलंकार-मोर मुकुट मकराकृति कुण्डल' तथा 'मोहनि मूरति साँवरि सुरति' में अनुप्रास है।
(8) भाव-साम्य-कविवर बिहारी भी मीरा की तरह कृष्ण के इस रूप को अपने मन में बसाना चाहते हैं -
“सीस मुकुट, कटि काछनी, कर मुरली उर माल ।
इहिं बानक मो मन सदा, बसौ बिहारीलाल ॥"
In simple words: मीराबाई भगवान कृष्ण की मनमोहक छवि को अपने नेत्रों में बसाना चाहती हैं, जिसमें मोर मुकुट, कुण्डल, तिलक, बाँसुरी, वनमाला और मधुर घुंघरू की ध्वनि का सुन्दर चित्रण किया गया है। वे कृष्ण के इस रूप को अनुपम और सज्जनों को सुख देनेवाला मानती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में पद्यांश की ससन्दर्भ व्याख्या, प्रसंग, काव्यगत सौन्दर्य, शब्दार्थ और भाव-साम्य को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सभी तत्व पूर्ण अंक प्राप्त करने में सहायता करते हैं।

 

2. पायो जी म्हैं तो राम रतन ................................................ जस गायो ।
शब्दार्थ - अमोलक = अनमोल । खेवटिया = खेनेवाला । भव सागर = संसाररूपी सागर । म्है = मैंने ।
सन्दर्भ – यह पद मीराबाई की 'पदावली' से लिया गया है, जो हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी काव्य' में संकलित है।
प्रसंग- प्रस्तुत पद में मीराबाई भगवान् राम के नाम के महत्त्व की चर्चा करती हुई कहती हैं -
व्याख्या- मैंने भगवान् के नामरूपी रत्न सम्पदा को प्राप्त कर लिया। मेरे सच्चे गुरु ने यह अमूल्य वस्तु मुझ पर दया करके मुझे प्रदान की थी, मैंने उसे अंगीकार किया था। इस प्रकार मैंने गुरुदीक्षा के कारण कई जन्मों की संचित पूँजी (पुण्य फल) प्राप्त कर ली और संसार की सारी मोह-मायाओं का त्याग कर दिया। यह राम नाम की पूँजी ऐसी विचित्र है कि यह खर्च करने पर भी कम नहीं होती और न इसे चोर हो चुरा सकते हैं। यह प्रतिदिन अधिक होती जाती है। मैंने इसी सत्यनाम (ईश्वर का नाम) रूपी नौका पर सवार होकर, जिसके केवट मेरे सच्चे गुरु हैं, संसाररूपी सागर को पार कर लिया है। अंत में मीराबाई कहती हैं कि गिर धरनागर श्रीकृष्ण भगवान् ही एकमात्र मेरे स्वामी हैं। मैं प्रसन्न होकर उनका गुणगान कर रही हूँ।
काव्यगत सौन्दर्य
(1) इस पद में भक्तिकालीन कवियों की परम्परा के अनुसार भगवान् के नाम के महत्त्व को बतलाया गया है।
(2) मीरा कृष्ण की उपासिका हैं, किन्तु यहाँ 'राम' रतन धन की चर्चा करती हैं। यहाँ राम का तात्पर्य घट-घट व्यापी राम से है।
(3) अलंकारअनुप्रास और रूपक ।
(4) भाषा-राजस्थानी मिश्रित ब्रज ।
(5) शैली-मुक्तक ।
(6) छंद-गेयपद ।
(7) रस-शान्त और भक्ति ।
In simple words: मीराबाई ने राम नाम रूपी अमूल्य रत्न प्राप्त कर लिया है, जिसे उनके सच्चे गुरु ने उन्हें दिया था। यह नाम रूपी धन कभी घटता नहीं, चोर चुरा नहीं सकते और यह भवसागर पार करने की नौका है, जिसके खेवटिया स्वयं भगवान कृष्ण हैं।

🎯 Exam Tip: इस पद में भगवान के नाम की महिमा, मीरा की भक्ति भावना और काव्यगत विशेषताओं का उल्लेख करना चाहिए, विशेषकर 'राम' के व्यापक अर्थ को समझाना महत्वपूर्ण है।

 

3. माई री मैं ................................................ जनम कौ कौल ।
शब्दार्थ- छाने = छिपकर । बजन्ता ढोल = ढोल बजाकर, सबको जताकर, खुले आम । मुँहघो = महंगा । सुंहघो = सस्ता । कौल = वचन ।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद 'हिन्दी काव्य' में संकलित एवं मीरा द्वारा रचित 'पदावली' से संकलित है।
प्रसंग- प्रस्तुत पद में मीरा श्रीकृष्ण से अपने सच्चे प्रेम को निस्संकोच भाव से स्वीकार कर रही हैं।
व्याख्या- मीरा कहती हैं- मैंने तो अपने गोविन्द को मोल ले लिया है। लोग मेरे इस प्रेम-व्यापार पर नाना प्रकार के आक्षेप करते हैं। कोई कहता है कि मैंने श्रीकृष्ण को छिपकर अपनाया है और कोई कहता है कि मैंने उससे चुपचाप प्रेम-सम्बन्ध जोड़ा है, पर मैंने तो ढोल बजाकर-सभी को बताकर-उसे अपनाया है। कोई कहता है कि मेरा यह सौदा बड़ा महँगा (कष्टदायक) है और कोई कहता है कि मैंने श्रीकृष्ण को बड़े सस्ते में (सहज प्रयत्न से) पा लिया है, पर मैंने उसे सब प्रकार से परखकर, हृदयरूपी तराजू पर तौलकर मोल लिया है। चाहे उसे कोई काला कहे चाहे गोरा, मेरे लिए तो वह जैसा भी है, अमूल्य है, क्योंकि उसे हृदय जैसी मूल्यवान वस्तु के बदले खरीदा गया है। सभी जानते हैं कि मीरा ने कृष्ण को आँख बन्द करके-अंधविश्वास में लिप्त होकर स्वीकार नहीं किया है। उसने तो आँखें खोलकर, सब कुछ सोच समझकर उससे प्रीति सम्बन्ध जोड़ा है। मीरा कहती हैं-मेरे प्रभु पूर्वजन्म से मेरे साथ वचनबद्ध हैं, अतः उन्होंने मुझे दर्शन देकर कृतार्थ किया है।
काव्यगत सौन्दर्य
(1) मीरा और कृष्ण के पवित्र प्रेम-बन्धन की झाँकी इस पद में साकार हुई है।
(2) भाषा सरस, सरल और मिश्रित शब्दावली युक्त ब्रजी है।
(3) शैली-आत्मनिवेदनात्मक, भावात्मक तथा व्यंग्य का संस्पर्श लिये है।
(4) अनेक मुहावरों का सुन्दर प्रयोग हुआ है। रस-भक्ति । गुण-प्रसाद। छन्द-गेय पद ।
In simple words: मीरा ने अपने गोविन्द को खुलेआम मोल ले लिया है, चाहे लोग इसे महंगा या सस्ता कहें। उन्होंने कृष्ण को परख कर हृदय रूपी तराजू पर तौलकर स्वीकार किया है और वे मानती हैं कि कृष्ण उनके साथ पूर्वजन्म से वचनबद्ध हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में मीरा के निडर प्रेम, लोकलाज त्यागने और भगवान कृष्ण के प्रति अटूट विश्वास को उजागर करना महत्वपूर्ण है, साथ ही काव्यगत सौन्दर्य की विभिन्न विशेषताओं को भी स्पष्ट करें।

 

4. मैं तो साँवरे ................................................ भगति रसीली जाँची ॥
शब्दार्थ- साँची = सत्य । ब्याल = सर्प । खारो = नीरस, व्यर्थ । काँची = कच्ची, (क्षणभंगुर) । जाँची = प्रतीत हुई ।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्म हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी काव्य' में संकलित एवं मीराबाई द्वारा रचित 'पदावली' से उद्धृत है।
प्रसंग- इस पद में मीरा भगवान् कृष्ण के प्रेम में निमग्न होकर पूर्णरूप से उन्हीं के रंग में रंग गयी हैं, इसलिए संसार की अन्य किसी वस्तु में उनका मन नहीं लगता।
व्याख्या- मीरा कहती हैं कि मैं तो साँवले कृष्ण के श्याम रंग में रंग गयी हूँ अर्थात् उनके प्रेम में आत्मविभोर हो गयी हूँ। मैंने तो लोक-लाज को छोड़कर अपना पूरा श्रृंगार किया है और पैरों में सुँघरू बाँधकर नाच भी रही हैं। साधुओं की संगति से मेरे हृदय की सारी कालिमा मिट गयी है और मेरी दुर्बुद्धि भी सद्बुद्धि में बदल गयी है और मैं श्रीकृष्ण की सच्ची भक्त बन गयी हूँ। मैं प्रभु श्रीकृष्ण का नित्य गुणगान करके कालरूपी सर्प के चंगुल से बच गयी हूँ अर्थात् अब मैं जन्म-मरण के चक्र से छूट गयी हूँ। अब कृष्ण के बिना मुझे यह संसार निस्सार और सूना लगता है, अतः उनकी बातों के अलावा अन्य बातें व्यर्थ लगती हैं। मीराबाई को केवल श्रीकृष्ण की भक्ति में ही आनन्द मिलता है, संसार की किसी अन्य वस्तु में नहीं।
काव्यगत सौन्दर्य
(1) श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की एकनिष्ठ भक्ति का सुन्दर चित्रण हुआ है।
(2) कृष्ण की दीवानी मीरा को उनके बिना यह संसार निस्सार और सूना लगता है।
(3) भाषा-राजस्थानी मिश्रित ब्रज
(4) शैली-मुक्तक ।
(5) छन्द-गेय पद ।
(6) रस- भक्ति और शान्त ।
(7) गुण-माधुर्य ।
(8) अलंकार-अनुप्रास, रूपक ।।
In simple words: मीराबाई कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह रंग चुकी हैं और लोक-लाज छोड़कर कृष्ण भक्ति में लीन हैं। वे अब संसार को निस्सार मानती हैं और केवल कृष्ण भक्ति में ही आनंद पाती हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि यह उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाएगी।

🎯 Exam Tip: इस पद की व्याख्या करते समय मीरा की कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति, लोक-लाज त्यागने और संसार की नश्वरता के प्रति उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, साथ ही काव्यगत सौन्दर्य के तत्वों का भी उल्लेख करें।

 

5. मेरे तो गिरधर ................................................ तारो अब मोई ।
शब्दार्थ-कानि = मर्यादा, प्रतिष्ठा । ढिंग = समीप । आणंद = आनन्द । राजी = प्रसन्न।
सन्दर्भ- प्रस्तुत पद 'हिन्दी काव्य' में संकलित एवं श्रीकृष्ण की अनन्य उपासिका मीरा द्वारा रचित 'पदावली' से उद्धृत है।
प्रसंग- मीरा एकमात्र श्रीकृष्ण को ही अपना सर्वस्व घोषित कर रही हैं। संसार के सारे नाते तोड़कर, लोकलाज छोड़कर, केवल श्रीकृष्ण के प्रेम के आनन्द-पल का आस्वाद ले रही हैं।
व्याख्या- मीरा कहती हैं-अब तो मैं अपना नाता केवल एक श्रीकृष्ण से मानती हूँ और कोई भी मेरा इस संसार में अपना नहीं है। सिर पर मोरमुकुट धारण करनेवाले नटवर-नागर ही मेरे पति हैं। पिता, माता, भाई, बन्धु आदि से अब मेरा कोई नाता नहीं रहा। मैंने तो कृष्ण-प्रेम के लिए अपने कुल की प्रतिष्ठा को भी त्याग दिया है। अब मेरा कोई क्या कर लेगा? सभी कहते हैं कि मैंने सन्तों का सत्संग करके स्त्रियोचित लोक-लज्जा को भी तिलांजलि दे दी है। पर मुझे इसकी चिन्ता नहीं। मैंने अपनी कृष्ण-प्रेम की लता को अपने आँसुओं से सींचकर (महान् कष्ट सहन करके) बढ़ाया है। अब तो यह प्रेम-लता बहुत फैल चुकी है, अब तो इस पर आनन्दरूपी फल लगनेवाले हैं। मुझे तो अब केवल प्रियतम कृष्ण की भक्ति में ही सुख मिलता है। सांसारिक विषयों को देखकर मेरा मन दुःखी होता है। मीराबाई कह रही हैं कि हे गिरिधर गोपाल ! अब आप अपनी दासी मीरा का उद्धार कीजिए और उसे अपनाकर धन्य बना दीजिए।
काव्यगत सौन्दर्य
(1) श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम-भाव और भक्ति को मीरा ने हृदयस्पर्शी शब्दावली में साकार किया है।
(2) अलंकार-अनुप्रास, रूपक ('प्रेम-बेलि' और 'आनन्द-फल') तथा पुनरुक्ति अलंकार हैं।
(3) भाषी सरस, सरल, किन्तु भाव-वहन में पूर्ण समर्थ है।
(4) शैली-आत्मनिवेदनात्मक एवं भावात्मक है। गुण-प्रसाद, छन्द-गेय पद ।
In simple words: मीराबाई ने गिरिधर गोपाल को ही अपना सब कुछ मान लिया है और उन्होंने कृष्ण-प्रेम के लिए कुल की मर्यादा और लोकलाज का त्याग कर दिया है। उन्होंने अपने आँसुओं से सींचकर प्रेम की बेल को बढ़ाया है और अब वे गिरिधर गोपाल से अपने उद्धार की प्रार्थना कर रही हैं।

🎯 Exam Tip: इस पद्यांश की व्याख्या में मीरा के अटूट समर्पण, लोक-लाज त्यागने की भावना और उनकी भक्ति की गहनता को रेखांकित करना महत्वपूर्ण है, साथ ही काव्यगत सौन्दर्य के तत्वों का भी उल्लेख करें।

 

Question 2. मीराबाई का जीवन-परिचय बताते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
अथवा मीराबाई का जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक सेवाओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा मीरा की रचनाओं एवं भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए ।
Answer:

मीराबाई (स्मरणीय तथ्य)

जन्म-सन् 1498 ई० । मृत्यु- 1546 ई० के आसपास ।
पति- महाराणा भोजराज । पिता- रतन सिंह।
रचना - गेय पद ।
काव्यगत विशेषताएँ
वर्य-विषय -विनय, भक्ति, रूप-वर्णन, रहस्यवाद, संयोग वर्णन ।
रस- श्रृंगार (संयोग-वियोग), शान्त ।।
भाषा- ब्रजभाषा, जिसमें राजस्थानी, गुजराती, पूर्वी पंजाबी और फारसी के शब्द मिले हैं।
शैली- गीतकाव्य की भावपूर्ण शैली ।
छन्द- राग-रागनियों से पूर्ण गेय पद ।
अलंकार- उपमा, रूपक, दृष्टान्त आदि ।
• जीवन-परिचय- मीराबाई का जन्म राजस्थान में मेड़ता के पसि चौकड़ी ग्राम में सन् 1498 ई० के आसपास हुआ था। इनके पिता का नाम रतनसिंह था। उदयपुर के राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ इनका विवाह हुआ था, किन्तु विवाह के थोड़े । ही दिनों बाद इनके पति की मृत्यु हो गयी।
मीरा बचपन से ही भगवान् कृष्ण के प्रति अनुरक्त थीं । सारी लोक-लज्जा की चिन्ता छोड़कर साधुओं के साथ कीर्तन-भजन करती रहती थीं। उनकी इस प्रकार का व्यवहार उदयपुर यपुर के राज-मर्यादा के प्रतिकूल था। अतः उन्हें मारने के लिए जहर का प्याला भी भेजा। गया था, किन्तु ईश्वरीय कृपा से उनका बाल-बाँका तक नहीं हुआ । परिवार से विरक्त होकर वे वृन्दावन और वहाँ से द्वारिका चली गयीं। और सन् 1546 ई० में स्वर्गवासी हुईं ।
• रचनाएँ- मीराबाई ने भगवान् श्रीकृष्ण के प्रेम में अनेक भावपूर्ण गेय पदों की रचना की है जिसके संकलन विभिन्न नामों से प्रकाशित हुए हैं। नरसीजी को मायरा, राम गोविन्द, राग सोरठ के पद, गीत गोविन्द की टीका मीराबाई की रचनाएँ हैं।
काव्यगत विशेषताएँ
• (क) भाव-पक्ष- मीरा कृष्णभक्ति शाखा की सगुणोपासिका भक्त कवयित्री हैं। इनके काव्य का वर्ण्य-विषय एकमात्र नटवर नागर श्रीकृष्ण का मधुर प्रेम है।
(1) विनय तथा प्रार्थना सम्बन्धी पद- जिनमें प्रेम सम्बन्धी आतुरता और आत्मस्वरूप समर्पण की भावना निहित है।
(2) कृष्ण के सौन्दर्य वर्णन सम्बन्धी पद- जिनमें मनमोहन श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप की झाँकी प्रस्तुत की गयी है।
(3) प्रेम सम्बन्धी पद- जिनमें मीरा के श्रीकृष्ण प्रेम सम्बन्धी उत्कट प्रेम का चित्रांकन है। इनमें संयोग और वियोग दोनों पक्षों का मार्मिक वर्णन हुआ है।
(4) रहस्यवादी भावना के पद- जिनमें मीरा के निर्गुण भक्ति का चित्रण हुआ है।
(5) जीवन सम्बन्धी पद- जिनमें उनके जीवन सम्बन्धी घटनाओं का चित्रण हुआ है।
• (ख) कला-पक्ष-
(1) भाषा-शैली- मीरा के काव्य की भाषा ब्रजी है जिसमें राजस्थानी, गुजराती, भोजपुरी, पंजाबी भाषाओं के शब्द हैं। मीरा की भाषा भावों की अनुगामिनी है। उनमें एकरूपता नहीं है फिर भी स्वाभाविकता, सरसता और मधुरता कूट-कूटकर भरी हुई है।
(2) रस-छन्द-अलंकार- मीरा की रचनाओं में श्रृंगार रस के दोनों पक्ष, संयोग और वियोग का बड़ा ही मार्मिक वर्णन हुआ है। इसके अतिरिक्त शान्त रस का भी बड़ा ही सुन्दर समावेश हुआ है। मीरा का सम्पूर्ण काव्य गेय पदों में है जो विभिन्न रोगरागनियों में बँधे हुए हैं। अलंकारों का प्रयोग मीरा की रचनाओं में स्वाभाविक ढंग से हुआ है। विशेषकर वे उपमा, रूपक, दृष्टान्त आदि अलंकारों के प्रयोग से बड़े ही स्वाभाविक हुए हैं।
(3) साहित्य में स्थान- हिन्दी गीति काव्य की परम्परा में मीरा का अपना अप्रतिम स्थान है । प्रेम की पीड़ा का जैसा मर्मस्पर्शी वर्णन मीरा की रचनाओं में उपलब्ध होता है वैसा हिन्दी साहित्य में अन्यत्र सुलभ नहीं है।
In simple words: मीराबाई 1498 ई० में जन्मीं और 1546 ई० में स्वर्गवासी हुईं, उनके पति महाराणा भोजराज और पिता रतन सिंह थे। उन्होंने कृष्ण भक्ति में अपना जीवन समर्पित किया, लोक-लाज त्यागकर साधुओं के साथ भजन-कीर्तन करती थीं और उनकी प्रमुख रचनाएँ नरसी जी का मायरा, राम गोविन्द और गीत गोविन्द की टीका हैं। मीरा के कला-पक्ष में ब्रजभाषा, राजस्थानी, गुजराती, भोजपुरी और पंजाबी भाषाओं का संगम दिखता है, उनकी शैली गीतकाव्य और गेय पदों में है, जिसमें श्रृंगार और शांत रस का सुंदर समन्वय है, तथा अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग उनके काव्य को विशिष्ट बनाता है।

🎯 Exam Tip: मीराबाई के जीवन-परिचय में जन्म, मृत्यु, पारिवारिक संबंध, भक्ति मार्ग अपनाने का कारण और उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख करना आवश्यक है। कला-पक्ष में भाषा-शैली की विशेषताएं, रसों का प्रयोग, छंद और अलंकारों का विस्तृत वर्णन करना चाहिए, साथ ही हिंदी साहित्य में मीरा के अद्वितीय स्थान को भी स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. मीरा ने संसार की तुलना किस खेल से की है और क्यों?
Answer: मीरा ने संसार की तुलना चौपड़ के खेल से की है क्योंकि चौपड़ का खेल कुछ देर चलता है फिर समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार संसार की वस्तुएँ कुछ समय रहती हैं और फिर नष्ट हो जाती हैं।
In simple words: मीरा ने संसार की तुलना चौपड़ के खेल से की है क्योंकि दोनों ही क्षणभंगुर होते हैं; जैसे चौपड़ का खेल कुछ देर में समाप्त हो जाता है, वैसे ही संसार की वस्तुएँ भी अस्थायी और नश्वर होती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में संसार की क्षणभंगुरता और नश्वरता के संबंध में मीरा के दृष्टिकोण को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, साथ ही चौपड़ के खेल से तुलना का औचित्य भी समझाएं।

 

Question 2. मीरा गिरिधर के घर जाने की बात क्यों कहती हैं?
Answer: मीरा श्रीकृष्ण को अपना आराध्य ही नहीं, पति भी मानती हैं। वे स्वयं को श्रीकृष्ण के साथ दाम्पत्य-सूत्र में बँधा हुआ अनुभव करती हैं और अपने पति (श्रीकृष्ण) का सामीप्य पाने के लिए उनके घर जाना चाहती हैं।
In simple words: मीरा गिरिधर के घर जाना चाहती हैं क्योंकि वे श्रीकृष्ण को केवल आराध्य ही नहीं, बल्कि अपना पति भी मानती हैं और उनके साथ दाम्पत्य-संबंध का अनुभव करती हैं, इसलिए वे उनसे मिलने को आतुर हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तर में मीरा के कृष्ण के प्रति पति-पत्नी भाव और सामीप्य की इच्छा को रेखांकित करें, क्योंकि यह उनके अनन्य प्रेम का प्रतीक है।

 

Question 3. 'मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो ने कोई'-पद में मीरा के भक्ति-भाव पर प्रकाश डालिए।
अथवा 'मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई' -मीरा द्वारा रचित इस पद का सारांश लिखिए ।
Answer: कृष्ण की भक्ति में डूबी मीरा उन्हें ही अपना पति मानती हैं और कहती हैं कि उनके तो केवल गिरिधर गोपाल ही हैं, दूसरा कोई नहीं है। जिनके सिर पर मोर-मुकुट हैं वे ही उनके पति हैं। माता-पिता, भाई-बन्धु आदि इस संसार में कोई भी कृष्णु के सिवा उनका अपना नहीं है। उन्होंने कृष्ण-भक्ति में सबको त्याग दिया है। यहाँ तक कि अपने कुल को भी त्याग दिया है। लोग इसके लिए उन्हें क्या कहते हैं, इसकी चिन्ता भी उन्हें नहीं है। उन्होंने संत एवं साधुओं की संगति में बैठकर लोक-लज्जा का त्याग कर दिया है। उन्होंने आँसुओं से सींचकर जिस कृष्ण-भक्ति की बेल (लता) को बोया, वह अब फैलकर फल दे रही है। अब तो वे सांसारिकता को देखकर संसार के प्रति मनुष्य की अज्ञानता पर रोती हैं और जहाँ भक्ति देखती हैं वहाँ उनका मन प्रसन्न हो उठता है । मीरा कहती हैं-'हे गिरिधर गोपाल ! मैं तुम्हारी दासी हूँ, अब तुम ही मेरा उद्धार करो।'
In simple words: मीराबाई 'मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई' पद के माध्यम से अपने अटूट कृष्ण प्रेम को व्यक्त करती हैं, जहाँ वे कृष्ण को ही अपना एकमात्र पति मानती हैं और उनके लिए कुल की मर्यादा व लोक-लाज त्याग चुकी हैं। वे अपनी कृष्ण-भक्ति को आँसुओं से सींची हुई बेल मानती हैं, जिस पर अब आनंद रूपी फल लगने लगे हैं।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में मीरा के कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ प्रेम, लोक-लाज त्याग, भक्ति की गहराई और उनके उद्धार की प्रार्थना को विस्तार से समझाना चाहिए।

 

Question 4. धर्म के अन्तर्गत केवल बाहरी कर्मकाण्ड करने से क्या होता है?
Answer: बाहरी कर्मकाण्डों से व्यक्ति उन्हीं में फँसा रहता है और भगवान् के सच्चे स्वरूप को नहीं जान पाता है। इस प्रकार उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। वह बाह्याडम्बरों में फँसा ही जन्म-मरण के चक्र से कभी नहीं छूट पाता है, अत; धर्म में केवल बाहरी कर्मकाण्ड उचित नहीं है।
In simple words: बाहरी कर्मकाण्डों में उलझने से व्यक्ति भगवान के सच्चे स्वरूप को समझ नहीं पाता और मोक्ष प्राप्त करने में विफल रहता है, जिससे वह जन्म-मरण के चक्र में फँसा रहता है।

🎯 Exam Tip: धर्म में केवल बाहरी कर्मकाण्डों के नकारात्मक प्रभावों - मोक्ष में बाधा, सच्चे स्वरूप से अनभिज्ञता - को स्पष्ट करें।

 

Question 5. मीरा के काव्य में व्यक्त भक्ति एवं रहस्यवाद का परिचय दीजिए ।
Answer: 1. भक्ति - मीरा की भक्ति प्रेम प्रधान है। उनका कृष्ण राममय और राम कृष्णमय हैं, अर्थात् दोनों ही एक हैं। राम भी कृष्ण ही हैं। भावों की तीव्रता में कोमलता और मधुरता इनकी भक्ति की विशेषता है। वे गोपियों के समान कृष्ण के प्रति माधुर्य भक्ति से प्रेरित हैं। वे कृष्ण के रंग में रंग कर कहती हैं
“मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई ॥'
2. रहस्यवाद - मीरा के काव्य में जिस रहस्यवाद के दर्शन होते हैं, उसमें दाम्पत्य प्रेम की प्रधानता है। वे कहती हैं
"जिनका पिया परदेश बसत है, लिख-लिख भेजत पाती ।
मेरा पिया हृदय बसत है, ना कहुं आती जाती।”
In simple words: मीरा के काव्य में भक्ति और रहस्यवाद दोनों ही प्रमुख हैं। उनकी भक्ति माधुर्य भाव की है, जहाँ वे कृष्ण को अपना पति मानती हैं और उनके रंग में रंग जाती हैं। रहस्यवाद में वे प्रियतम से आत्मिक संबंध दर्शाती हैं, भले ही प्रिय परदेश में हों, उनका हृदय में वास है।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में भक्ति (माधुर्य भाव) और रहस्यवाद (दाम्पत्य प्रेम की प्रधानता) को उनके उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, जिससे मीरा के आध्यात्मिक विचारों की गहराई पर प्रकाश पड़े।

 

Question 6. कृष्ण के क्रय के सम्बन्ध में संसार के लोगों की क्या धारणा है?
Answer: मीरा के कृष्ण को क्रय के सम्बन्ध में संसार के लोगों की धारणा है कि मीरा ने गोविन्द को छानबीन कर खरीद लिया है। कोई कहता है कि चुपके से खरीद लिया है, कोई कहता है कि वह काला है, कोई कहता है कि वह गोरा है।
In simple words: संसार के लोग मीरा द्वारा कृष्ण को खरीदने के संबंध में अलग-अलग धारणाएं रखते हैं, कोई कहता है कि उन्होंने चुपके से खरीदा, कोई काला कहता है तो कोई गोरा।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में संसार के लोगों की विभिन्न और विरोधाभासी धारणाओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करना चाहिए, जो मीरा के कृष्ण प्रेम की आलोचना को दर्शाती है।

 

Question 7. मीरा ने संसार की तुलना किससे की है और क्यों?
Answer: मीरा ने संसार की तुलना चौसर खेल से की है। जिस तरह चौसर खेल क्षण भर में समाप्त हो जाता है, उसी प्रकार यह संसार भी क्षणभंगुर है। क्षण भर में नष्ट होनेवाला है।
In simple words: मीरा ने संसार की तुलना चौसर खेल से की है क्योंकि चौसर खेल की तरह ही संसार भी क्षणभंगुर और नश्वर है, जो कुछ समय के लिए ही अस्तित्व में रहता है।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में संसार की नश्वरता और चौसर खेल के अस्थायी स्वरूप के बीच मीरा द्वारा की गई तुलना को स्पष्ट करें।

 

Question 8. मीरा को कौन-सा धन प्राप्त हो गया है? उस धन की क्या विशेषता है?
Answer: मीरा को रामरतन रूपी धन प्राप्त हो गया है । इस धन की विशेषता है कि इसको खर्च नहीं किया जा सकता है और न चुराया जा सकता है अपितु प्रयोग करने से दिन-प्रतिदिन बढ़ता रहता है ।
In simple words: मीरा को रामरतन (राम नाम) रूपी धन प्राप्त हुआ है, जिसकी विशेषता यह है कि यह खर्च करने या चुराने से कम नहीं होता, बल्कि उपयोग करने पर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता है।

🎯 Exam Tip: रामरतन की अनूठी विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करें - अक्षयता, चोरी न होना, और निरंतर वृद्धि - क्योंकि ये उसके आध्यात्मिक महत्व को दर्शाते हैं।

 

Question 9. मीरा ने संसार सागर को पार करने का क्या उपाय बताया है?
Answer: मीरा संसार सागर को पार करने के विषय में बताती हैं कि राम नाम का बेड़ा बाँधकर संसार सागर से पार हुआ जा सकता है। राम नाम का बेड़ा बाँधने से मीरा का अभिप्राय भगवान् की भक्ति करने से है।
In simple words: मीरा ने संसार सागर को पार करने का उपाय राम नाम के बेड़े को बताया है, जिसका अर्थ है भगवान की भक्ति करके भवसागर को पार करना।

🎯 Exam Tip: उत्तर में 'राम नाम का बेड़ा' के आध्यात्मिक अर्थ को स्पष्ट करें, जो भगवान की भक्ति को संसार सागर पार करने का एकमात्र साधन बताती है।

 

Question 10. मीरा भगवान् के किस प्रकार के रूप को अपने नयनों में बसाना चाहती हैं?
Answer: मीरा मोर मुकुट, मकराकृत कुण्डल और माथे पर अरुण तिलक लगे नन्दलाल के नटवर नागर रूप को अपनी आँखों में बसाना चाहती हैं।
In simple words: मीरा भगवान के उस रूप को अपने नयनों में बसाना चाहती हैं जिसमें वे मोर मुकुट धारण किए हों, कानों में मकराकृत कुण्डल और माथे पर अरुण तिलक लगाए नन्दलाल के नटवर नागर रूप में हों।

🎯 Exam Tip: भगवान कृष्ण के जिस रूप का वर्णन मीरा करती हैं, उसके विशिष्ट तत्वों जैसे मोर मुकुट, कुण्डल, तिलक और नटवर नागर छवि पर प्रकाश डालें।

 

Question 11. मीरा शरीर पर गर्व न करने का उपदेश क्यों देती हैं?
Answer: मीरा का मत है कि यह शरीर नाशवान है, मिट्टी से बना है और एक दिन मिट्टी में ही मिल जायेगा, इसलिए इस शरीर पर गर्व नहीं करना चाहिए।
In simple words: मीरा शरीर पर गर्व न करने का उपदेश देती हैं क्योंकि यह नश्वर है, मिट्टी से बना है और अंततः मिट्टी में ही मिल जाएगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में शरीर की नश्वरता और अनित्यता के मीरा के दर्शन को स्पष्ट करें, जो गर्व न करने के उनके उपदेश का मूल आधार है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. मीरा की किन्हीं दो रचनाओं के नाम बताइए ।
Answer: नरसी जी का मायरा और राग गोविन्द ।
In simple words: मीराबाई की दो प्रमुख रचनाएँ नरसी जी का मायरा और राग गोविन्द हैं।

🎯 Exam Tip: मीरा की रचनाओं के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके साहित्यिक योगदान को दर्शाता है।

 

Question 2. मीरा ने किस भाषा में रचना की है?
Answer: मीरा ने ब्रजभाषा में अपने गीतों की रचना की है।
In simple words: मीरा ने अपनी रचनाएँ मुख्य रूप से ब्रजभाषा में की हैं।

🎯 Exam Tip: मीरा की काव्य भाषा के रूप में ब्रजभाषा का उल्लेख करना उनके क्षेत्रीय और साहित्यिक संदर्भ को दर्शाता है।

 

Question 3. मीरा ने प्रेम की लता को किस प्रकार पल्लवित किया?
Answer: मीरा ने प्रेम की लता को आँसुओं के जल से सींच-सींचकर पल्लवित किया। उसे लता से उसे आनन्दरूपी फल प्राप्त हुआ ।
In simple words: मीरा ने अपनी कृष्ण-प्रेम की लता को अपने आँसुओं के जल से सींचकर पल्लवित किया, जिससे अंततः उन्हें आनन्दरूपी फल प्राप्त हुए।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में मीरा के प्रेम की लता को पल्लवित करने के लिए 'आँसुओं के जल' के प्रतीकात्मक महत्व को स्पष्ट करें, जो उनके त्याग और समर्पण को दर्शाता है।

 

Question 4. निम्नलिखित में से सही वाक्य के सम्मुख सही (√) का चिह्न लगाइए -
(अ) मीरा भगवान् के सगुण रूप की उपासिका थीं।
(ब) मीरा के अनुसार शरीर पर गर्व करना चाहिए।
(स) मीरा श्रीकृष्ण को पति रूप में मानती हुई उनके घर जाना चाहती हैं।
(द) मीराबाई रतन सिंह की पुत्री थीं।
Answer:
(अ) मीरा भगवान् के सगुण रूप की उपासिका थीं। (√)
(ब) मीरा के अनुसार शरीर पर गर्व करना चाहिए। (x)
(स) मीरा श्रीकृष्ण को पति रूप में मानती हुई उनके घर जाना चाहती हैं। (√)
(द) मीराबाई रतन सिंह की पुत्री थीं। (√)
In simple words: मीरा भगवान के सगुण रूप की उपासिका थीं, वे श्रीकृष्ण को अपना पति मानती थीं और उनके घर जाना चाहती थीं, तथा मीराबाई रतन सिंह की पुत्री थीं, जबकि शरीर पर गर्व करना उनका मत नहीं था।

🎯 Exam Tip: इस बहुविकल्पीय प्रश्न में मीराबाई के जीवन, भक्ति और दार्शनिक विचारों से संबंधित तथ्यों की सही पहचान करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. मीरा ने क्या मोल लिया है?
Answer: मीराबाई ने गोविन्द श्रीकृष्ण को मोल लिया है।
In simple words: मीराबाई ने अपने आराध्य गोविन्द श्रीकृष्ण को मोल लिया है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न मीरा के कृष्ण प्रेम और स्वयं को कृष्ण की दासी मानने के भाव को दर्शाता है, जिसका संक्षिप्त और सीधा उत्तर अपेक्षित है।

 

Question 6. मीरा भगवान् के किस रूप की उपासिका थीं?
Answer: मीरा भगवान् के साकार रूप की उपासिका थीं। कृष्ण को श्याम सुन्दर रूप, कान में कुण्डल, हाथ में मुरली और गले में वनमाला, श्रीकृष्ण के इस रूप पर मीरा मोहित थीं।
In simple words: मीरा भगवान के साकार रूप की उपासिका थीं, जहाँ वे कृष्ण के श्याम सुन्दर, मोर मुकुटधारी, कुण्डल और वनमाला से सुशोभित रूप पर मोहित थीं।

🎯 Exam Tip: उत्तर में मीरा की सगुण भक्ति और कृष्ण के विशिष्ट रूप-वर्णन को सटीक रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।

 

Question 7. मीरा किस भक्ति-शाखा की कवयित्री हैं?
Answer: मीरा सगुण भक्ति शाखा की कवयित्री हैं।
In simple words: मीरा सगुण भक्ति शाखा की प्रमुख कवयित्री थीं।

🎯 Exam Tip: भक्ति-शाखा का सही उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मीरा के साहित्यिक और आध्यात्मिक वर्गीकरण का मूल है।

 

Question 8. मीरा किसके रंग में रँगी हैं?
Answer: मीरा भगवान् श्रीकृष्ण के रंग में रँगी हैं।
In simple words: मीरा पूरी तरह से भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम रंग में रँगी हुई हैं।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न मीरा के अनन्य समर्पण को दर्शाता है, जिसका सीधा और स्पष्ट उत्तर देना चाहिए।

 

Question 9. मीरा के काव्य को मुख्य स्वर क्या है?
Answer: मीरा के काव्य का मुख्य स्वर कृष्ण-भक्ति है।
In simple words: मीरा के काव्य का मुख्य स्वर कृष्ण-भक्ति है, जिसमें उनके प्रेम और समर्पण का भाव निहित है।

🎯 Exam Tip: मीरा के काव्य के केंद्रीय विषय यानी कृष्ण-भक्ति को पहचानना और उसका उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

काव्य-सौन्दर्य एवं व्याकरण-बोध

 

Question 1. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार का नाम बताइए
(अ) बसो मेरे नैनन में नन्दलाल ।
(ब) काल ब्याल हूँ बाँची ।
(स) मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल ।
Answer:
(अ) इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।
(ब) काल ब्याल हूँ बाँची में रूपक अलंकार है।
(स) मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल में वृत्त्यनुप्रास अलंकार है।
In simple words: 'बसो मेरे नैनन में नन्दलाल' में अनुप्रास अलंकार है, 'काल ब्याल हूँ बाँची' में रूपक अलंकार है, और 'मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल' में वृत्त्यनुप्रास अलंकार है।

🎯 Exam Tip: अलंकार की पहचान करते समय शब्दों की आवृत्ति (अनुप्रास), उपमान-उपमेय में अभेद (रूपक) और वर्णों की आवृत्ति (वृत्त्यनुप्रास) जैसे लक्षणों पर ध्यान दें।

 

Question 2. निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए
गसी मीरा लाल गिरधर, तारो अब मोई ।
Answer:
काव्य सौन्दर्य :
(अ) इस पंक्ति में मीरा अपने को श्रीकृष्ण की दासी बताया है।
(ब) भाषा-ब्रज ।
(स) रस-भक्ति एवं शांत ।
(द) छंद-गेय ।
(य) शैली-मुक्तक ।
In simple words: इस पंक्ति में मीरा ने स्वयं को श्रीकृष्ण की दासी बताया है, जिसमें ब्रजभाषा का प्रयोग है, भक्ति एवं शांत रस की प्रधानता है, यह गेय छंद में मुक्तक शैली में रचित है।

🎯 Exam Tip: काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट करते समय पंक्ति के भाव, भाषा, रस, छंद और शैली जैसे तत्वों का विस्तृत विश्लेषण करें।

 

Question 3. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए-
भगति, सबद, नैनन, बिसाल, किरपा, आणंद, अँसुवन ।
Answer: भक्ति, शब्द, नयन, विशाल, कृपा, आनंद, आँसुओं ।
In simple words: दिए गए शब्दों 'भगति, सबद, नैनन, बिसाल, किरपा, आणंद, अँसुवन' के तत्सम रूप क्रमशः 'भक्ति, शब्द, नयन, विशाल, कृपा, आनंद, आँसुओं' हैं।

🎯 Exam Tip: तत्सम रूप लिखते समय मूल संस्कृत शब्द की शुद्ध वर्तनी और व्याकरण का ध्यान रखना चाहिए।

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