UP Board Solutions Class 9 Hindi Chapter 2 Mantra

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Detailed Chapter 2 मंत्र UP Board Solutions for Class 9 Hindi

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Class 9 Hindi Chapter 2 मंत्र UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 9 Hindi Chapter 2 मंत्र (गद्य खंड)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. निम्नांकित गद्यांशों में रेखांकित अंशों की सन्दर्भ सहित व्याख्या और तथ्यपरक प्रश्नों के उत्तर दीजिये-
(1) मोटर चली गयी। बूढा कई मिनट तक मूर्ति की भाँति निश्चल खड़ा रहा। संसार में ऐसे मनुष्य भी होते हैं, जो अपने आमोद-प्रमोद के आगे किसी की जान की भी परवाह नहीं करते, शायद इसका उसे अब भी विश्वास न आता था। सभ्य संसार इतना निर्मम, इतना कठोर है, इसका ऐसा मर्मभेदी अनुभव अब तक न हुआ था। वह उन पुराने जमाने के जीवों में था, जो लगी हुई आग को बुझाने, मुर्दे को कन्धो देने, किसी के छप्पर को उठाने और किसी कलह को शान्त करने के लिए सदैव तैयार रहते थे। जब तक बूढे को मोटर दिखायी दी, वह खड़ा टकटकी लगाये उस ओर ताकता रहा ।
प्रश्न
(1) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) पुराने जमाने के जीवों का व्यवहार कैसा था?
(4) भगत को किस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था?
(5) भगत के अनुसार सभ्य संसार कैसा है?
[शब्दार्थ-आमोद-प्रमोद = मनोरंजन करना । जान = जीवन । परवाह = चिन्ता । निर्मम = निर्दय ।]
Answer:
1. सन्दर्भ - प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गदा' में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित 'मंत्र' नामक कहानी से अवतरित है। इसमें लेखक ने विरोधी घटनाओं और भावनाओं के चित्रण द्वारा कर्तव्य का बोध कराया है। यहाँ पर लेखक ने बूढे भगत तथा डॉ० चड्डा के व्यवहार का वर्णन किया है।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- बूढा भगत अपने बीमार बेटे को दिखाने डॉ० चड्डा के पास आया । परन्तु डॉ० चड्डा ने उसकी प्रार्थना पर कोई ध्यान नहीं दिया और मोटर में सवार होकर खेलने चले गये। मोटर चली जाने के बाद बूढा भगत सोचने लगा कि क्या संसार में ऐसे भी हृदयहीन व्यक्ति हैं, जो अपने मनोरंजन के सामने दूसरों के जीवन की कोई चिन्ता नहीं करते। वह ऐसे व्यवहार की लेशमात्र भी आशा नहीं करता था। उसे अपनी सरलता के कारण उनके इसे कठोर व्यवहार पर अब भी विश्वास नहीं हो रहा था। वह यह नहीं जानता था कि सभ्य संसार इतना हृदयहीन और कठोर होता है। इस बात का हँदयस्पर्शी अनुभव उसे अभी तक कभी नहीं हुआ था। वह प्राचीन मान्यताओं और परम्पराओं को माननेवाला व्यक्ति था। वह उन व्यक्तियों में से था, जो सदैव परोपकार में लीन रहते हैं, जो दूसरों की आग को बुझाने, मुर्दों को कन्धा देने, किसी के छप्पर को उठाकर रखने और किसी के घर की लड़ाई को शान्त करने को ही अपना कर्त्तव्य समझते हैं । इस प्रकार बूढा भगत निःस्वार्थ सेवा करनेवाला और दूसरों के दुःख में सहयोग तथा सहानुभूति रखनेवाला व्यक्ति था।
3. पुराने जमाने के जीवों का व्यवहार सरलता से परिपूर्ण होते हैं।
4. भगत को विश्वास नहीं हो रहा था कि संसार में ऐसे मनुष्य भी रहते हैं जो अपने आमोद-प्रमोद के आगे किसी की जान की परवाह नहीं करते हैं।
5. भगत के अनुसार सभ्य संसार बहुत निर्मम एवं कठोर है।
In simple words: बूढ़ा भगत डॉ. चड्डा के हृदयहीन व्यवहार से अचंभित था, क्योंकि उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि लोग अपने मनोरंजन के लिए किसी की जान की परवाह न करें। वह स्वयं पुराने ज़माने का व्यक्ति था जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहता था।

🎯 Exam Tip: गद्यांश-आधारित प्रश्नों में सन्दर्भ और व्याख्या सटीक होनी चाहिए, और प्रश्नों के उत्तर गद्यांश के मूल भाव से मेल खाने चाहिए।

 

(2) 'अरे मूर्ख, यह क्यों नहीं कहता कि जो कुछ न होना था, हो चुका । जो कुछ होना था वह कहाँ हुआ? माँ-बाप ने बेटे का सेहरा कहाँ देखा? मृणालिनी का कामना-तरु क्या पल्लव और पुष्प से रंजित हो उठा? मन के वह स्वर्ण-स्वप्न जिनसे जीवन आनन्द का स्रोत बना हुआ था, क्या पूरे हो गये? जीवन के नृत्यमय तारिका-मण्डित सागर में आमोद की बहार लूटते हुए क्या उसकी नौका जलमग्न नहीं हो गयी? जो न होना था, वह हो गया!'
प्रश्न
(1) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) माँ-बाप ने क्या नहीं देखा?
(4) 'नौका जलयान होना' का क्या अर्थ है?
(5) मृणालिनी का कामना तरु क्या था?
[शब्दार्थ-सेहरा = पगड़ी । कामना तरु = इच्छारूपी वृक्ष । पल्लव = पत्ते । रंजित = युक्त, लहलहानी । स्वर्ण-स्वप्न = सुनहरी इच्छाएँ । स्रोत = झरना । नृत्यमय तारिका-मंडित = नाचते हुए तारों से सुशोभित । आमोद = प्रसन्नता । जलमग्न = पानी में डूब जाना ।]
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गदा' में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित 'मंत्र' नामक पाठ से लिया गया है। प्रस्तुत गद्यांश में उस समय का विवरण है, जबकि कैलाश के प्राण सर्पदंश द्वारा हर लिये जाते हैं तथा झाड़-फेंक के साधन भी उत्तर दे जाते हैं तो एक सज्जन कहते हैं
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- अरे मूर्ख ! आज इस घर में जो हुआ है वह नहीं होना चाहिए था क्योंकि कैलाश अभी नवयुवक है, जीवन के समस्त आनन्दों का रसास्वादन अभी उसके लिए शेष है। उसके माता-पिता तो उसका विवाह भी न देख पाये और मृणालिनी, उसकी कामनाएँ जो कैलाश के जीवित होने पर पुष्पित, पल्लवित थीं, कैलाश के आकस्मिक निधन से नष्टप्राय हो गयी है। जब जीवन के आनन्द का एकमात्र स्रोत कैलाश ही उसके जीवन में न रहा, तो वह अब किस अनिर्वचनीय आनन्द की अनुभूति करे। उसके मन की अनेक इच्छाएँ एवं सुनहरे स्वप्न क्या कैलाश की मृत्यु के साथ अपूर्ण होकर नहीं रह गये । जिस प्रकार किसी सागर में आमोद-प्रमोद करती नाव सागर की उठती हुई तरंगों से सागर के गर्भ में समा जाती है उसी प्रकार कैलाशरूपी नौका के सवार भी जीवनरूपी सागर के जल में पूर्णतया डूब गये थे। भाव यह है कि कैलाश की मृत्यु उस समय हुई, जबकि उसे जीवन के प्रत्येक सुख को देखना था तथा उसकी मृत्यु से उसके माता-पिता, मृणालिनी आदि सभी पूर्णतया प्रभावित हुए हैं।
3. माँ-बाप ने बेटे के सिर पर सेहरा नहीं देखा।
4. नौका जलमग्न होने का तात्पर्य सहारा नष्ट हो जाना है जिससे मृणालिनी का विवाह होना था जब वही नहीं रहेगा तो इसे ही नौका का जलमग्न कहा जायेगा ।
5. मृणालिनी कल्पना तरु वैवाहिक जीवन का स्वर्ण-स्वप्न था जो जीवन-आनन्द का स्रोत बना हुआ था, जो समय पर पल्लव और पुष्प से रंजित होता ।
In simple words: यह गद्यांश कैलाश की असमय मृत्यु पर शोक व्यक्त करता है, जहाँ उसके माता-पिता और मंगेतर मृणालिनी के सारे सपने और इच्छाएँ अधूरी रह गईं, जैसे एक आनंदपूर्ण यात्रा करती नाव समुद्र में डूब जाए।

🎯 Exam Tip: व्याख्या करते समय, लेखक के मूल भाव को बनाए रखें और कठिन शब्दों के अर्थ स्पष्ट करें। मुहावरों और प्रतीकों का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है।

 

(3) वही हरा-भरा मैदान था, वही सुनहरी चाँदनी एक निःशब्द संगीत की भाँति प्रकृति पर छायी हुई थी, वही मित्र-समाज था। वही मनोरंजन के सामान थे। मगर जहाँ हास्य की ध्वनि थी, वहाँ अब करुण-क्रन्दन और अश्रु-प्रवाह था ।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यखण्ड का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) प्रकृति पर क्या छायी हुई थी?
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यांश मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी 'मंत्र' से उद्धृत है।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- कैलाश के जन्मदिन समारोह के समय जो हँसीपूर्ण वातावरण था, चारों ओर हास्यपरिहास छाया था वहीं कैलाश को साँप के काट लेने पर करुण पुकार होने लगी, थी। सभी के नेत्रों से आँसू बह रहे थे। हर्ष का वातावरण शोक में बदल गया था।
3. प्रकृति पर सुनहरी चाँदनी संगीत की भाँति छायी हुई थी ।
In simple words: यह गद्यांश कैलाश के जन्मदिन समारोह में खुशी से अचानक दुख में बदलने का वर्णन करता है, जहाँ आनंदमय माहौल साँप के काटने से करुण-क्रंदन में बदल गया।

🎯 Exam Tip: इस तरह के भावपूर्ण गद्यांशों की व्याख्या में, घटनाओं के भावनात्मक प्रभाव और उनके प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करना चाहिए।

 

(4) वह एक जड़ी कैलाश को सुंघा देता । इस तरह न जाने कितने घड़े पानी कैलाश के सिर पर डाले गये और न जाने कितनी बार भगत ने मन्त्र फेंका। आखिर जब ऊषा ने अपनी लाल-लाल आँखें खोलीं, तो कैलाश की भी लाल-लाल आँखें खुल गयीं। एक क्षण में उसने अँगड़ाई ली और पानी पीने को माँगा। डॉक्टर चड्डा ने दौड़कर नारायणी को गले लगा लिया। नारायणी दौड़कर भगत के पैरों पर गिर पड़ी और मृणालिनी कैलाश के सामने आँखों में आँसू भरे पूछने लगी-'अब कैसी तबीयत है?'
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) आँखें खुलते ही अँगड़ाई लेते हुए कैलाश ने क्या माँगा?
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गद्य' में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित 'मंत्र' नामक कहानी से अवतरित है। प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने विरोधी घटनाओं, परिस्थितियों और भावनाओं का चित्रण करके कर्तव्य-बोध का मार्ग समझाया है।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- बूढे भगत ने कैलाश को जड़ी सुंघाया और इसके बाद उसके सिर पर घड़े भर-भरकर पानी डाला गया। बूढे भगत ने इस बीच कई बार उस पर मंत्र फेंका। काफी समय बाद जब उषा ने कैलाश को देखने के लिए अपनी लाल-लाल आँखें खोलीं तो उसी समय अचानक कैलाश की भी लाल आँखें खुल गयीं। अँगड़ाई लेते हुए कैलाश ने पीने के लिए पानी माँगा तो इतना सुनते ही डॉ० चड्डा ने नारायणी को प्रसन्नता के आवेश में दौड़कर गले लगा लिया। नारायणी कृतज्ञ भाव से भरकर तुरंत ही भगत के पैरों पर गिर पड़ी। मृणालिनी आँखों में आँसू भरकर कैलाश से पूछने लगी, “अब तुम्हारी कैसी तबीयत है?"
3. आँखें खुलते ही कैलाश ने अँगड़ाई लेते हुए पानी माँगा ।
In simple words: बूढ़े भगत के उपचार से कैलाश को होश आ जाता है, जिससे सभी लोग अत्यंत प्रसन्न हो उठते हैं और डॉक्टर चड्डा तथा नारायणी भगत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: घटनाक्रम की स्पष्टता और पात्रों की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का वर्णन सटीकता से करें। यह घटना कहानी के मुख्य मोड़ को दर्शाती है।

 

(5) चड्रा - रात को मैंने नहीं पहचाना, पर जरा साफ हो जाने पर पहचान गया। एक बार यह एक मरीज को लेकर आया था। मुझे अब याद आता है कि मैं खेलने जा रहा था और मरीज को देखने से इनकार कर दिया था। आज उस दिन की बात याद करके मुझे जितनी ग्लानि हो रही है, उसे प्रकट नहीं कर सकता। मैं उसे खोज निकालूंगा और पैरों पर गिरकर अपना अपराध क्षमा कराऊँगा । वह कुछ लेगा नहीं, यह जानता हूँ, उसका जन्म यश की वर्षा करने ही के लिए हुआ है। उसकी सज्जनता ने मुझे ऐसा आदर्श दिखा दिया है, जो अबे से जीवन-पर्यन्त मेरे सामने रहेगा।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) ग्लानि किसको हो रही थी?
(4) डॉ० चड्डा किस आदर्श पर जीवन भर चलने का संकल्प लेते हैं?
(5) प्रस्तुत पंक्तियों में भगत की किस चारित्रिक विशेषता का पता चलता है?
[शब्दार्थ-ग्लानि = दुःख । जीवन-पर्यन्त = जीवन के अन्त तक ।]
Answer:
1. सन्दर्भ- यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गद्य' में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द जी द्वारा लिखित 'मन्त्र' नामक पाठ से लिया गया है। इसमें उन्होंने यह बताया है कि मनुष्य को अपनी गल्तियों का अनुभव तब होता है, जब उसके प्रायश्चित्त का समय निकल जाता है। अपने ऊपर उसी प्रकार की विपत्ति के आने से मनुष्य की आँखें खुल जाती हैं।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- बूढे के मन्त्र-तन्त्र के उपचार से कैलाश ठीक हो जाता है। डॉक्टर चड़ा उस बूढे को पहचानने का प्रयास करते हैं और अन्ततः उन्हें उस घटना का स्मरण हो आता है, जब वे गोल्फ खेलने के लिए जा रहे थे और वह बूढा अपने इकलौते पुत्र को मृतप्राय अवस्था में उनके पास लेकर आया था, लेकिन वह उसको देखे बिना गोल्फ खेलने के लिए चले गये थे। आज बूढे द्वारा अपने ऊपर किये गये उपकार के कारण उन्हें अपने उस दिन के व्यवहार पर अपार दुःख हो रहा है। वह आज अपने उस अमानवीय व्यवहार का प्रायश्चित्त करना चाहते हैं। अपनी पत्नी नारायणी से वे कह रहे हैं कि यद्यपि मैं जानता हूँ कि वह बूढा कुछ लेगा नहीं तथापि मैं उसे अवश्य खोजेंगा, वह अवश्य ही मेरे अपराध को क्षमा कर देगा। इस संसार में कुछ लोग दूसरों की भलाई के लिए ही जन्म लेते हैं, अपने लिये नहीं। वह बूढ़ा भी उन लोगों में से ही एक व्यक्ति था। लगता है कि भगवान् ने उसको यश की वर्षा करने के लिए ही जन्म दिया है। अपने निःस्वार्थ सेवा-भावना से उसने मुझे सज्जनता का ऐसा आदर्श दिखा दिया है, जिसे मैं जीवन के अन्तिम क्षण तक याद रखेंगा।।
3. ग्लानि डॉक्टर चड्डी को हो रही थी।
4. डॉ० चड्डा भगत द्वारा दिखाये सज्जनता के आदर्श पर जीवन भर चलने का संकल्प लेते हैं।
5. इन पंक्तियों में भगत की चारित्रिक विशेषता उसकी सज्जनता है। उसका जन्म यश की वर्षा करने ही के लिए हुआ था।
In simple words: डॉ. चड्डा को अपने पुराने, हृदयहीन व्यवहार पर बहुत पछतावा हो रहा है और वे भगत की निःस्वार्थ सेवा तथा सज्जनता से इतना प्रभावित हुए हैं कि उन्होंने उनके आदर्शों को अपने जीवन का मार्ग बनाने का संकल्प लिया है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र-चित्रण और उनके भावनात्मक विकास को उजागर करें, खासकर जब उनके विचारों या दृष्टिकोण में परिवर्तन आता हो।

 

Question 2. मुंशी प्रेमचन्द के जीवन-परिचय एवं भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
Answer:
**मुंशी प्रेमचन्द (स्मरणीय तथ्य)**
जन्म-सन् 1880 ई० । मृत्यु-सन् 1936 ई० जन्म-स्थान-लमही (वाराणसी) उ० प्र० । पिता-अजायब राय । अन्य बातें-निर्धन, संघर्षमय जीवन, बी० ए० तक शिक्षा, पहले अध्यापक फिर सब-डिप्टी इंसपेक्टर ।
साहित्यिक विशेषताएँ-उपन्यास सम्राट्, महान् कथाकार । यथार्थ और आदर्श का मिश्रण ।
भाषा- सरल, रोचक, प्रवाहमयी ।
शैली- निजी, वर्णनात्मक, विवेचनात्मक, भावात्मक, व्यंग्यात्मक आदि ।
• **जीवन-परिचय**- मुंशी प्रेमचन्द का जन्म वाराणसी जिले के लमही ग्राम में सन् 1880 ई० में हुआ था। इनके बचपन का नाम धनपतराय था : प्रेमचन्द जी पहले उर्दू में नवाबराय के नाम से कहानियाँ लिखते थे। बाद में जब हिन्दी में आये तो इन्होंने प्रेमचन्द नाम से कहानियाँ लिखनी शुरू कीं। इनका जन्म एक साधारण कायस्थ-परिवार में हुआ था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो गयी थी। इनके पिता का नाम अजायब राय था। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद भी इन्होंने बड़े ही परिश्रम से अपना अध्ययनक्रम जारी रखा। आरम्भ में कुछ वर्षों तक स्कूल की अध्यापकी करने के पश्चात् ये शिक्षा-विभाग में डिप्टी इंसपेक्टर हो गये । असहयोग आन्दोलन से प्रेरित होकर इन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और आजीवन साहित्य-सेवा करते रहे। इन्होंने कई पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। इनकी मृत्यु सन् 1936 ई० में हुई ।
• **भाषा-शैली**- मुंशी प्रेमचन्द प्रारम्भ में उर्दू में लिखा करते थे, अतः इनकी रचनाओं पर उर्दू की छाया स्पष्ट है। शैली अत्यन्त ही सरल, सुबोध तथा स्वाभाविक है, जिसमें मुहावरों और कविता के समावेश से और भी सजीवता आ गयी है। आवश्यकतानुसार भाषा में अंग्रेजी, अरबी, उर्दू, फारसी और पूर्वी के देशज शब्दों का प्रयोग हुआ है। भाषा की स्पष्टता एवं प्रभावशीलता के लिए कहीं-कहीं आलंकारिक एवं काव्यमय भाषा का प्रयोग किया गया है। प्रेमचन्द की शैली के रूप हैं- (1) व्यावहारिक और (2) संस्कृतनिष्ठ शैली । व्यावहारिक शैली पर उर्दू की स्पष्ट छाप है। भाषा सरल और मुहावरेदार है।
उदाहरण
1. व्यावहारिक शैली - “बूढे ने पगड़ी उतार कर चौखट पर रख दी और रोकर बोला- हुजूर, एक निगाह देख लें। बस एक निगाह । लड़का हाथ से चला जायेगा। हुजूर, सात लड़कों में यही एक बच रहा है हुजूर ।'
2. संस्कृतनिष्ठ शैली - “कितने ही सिद्धान्त जो एक जमाने में सत्य समझे जाते थे, आज असत्य सिद्ध हो गये हैं, क्योंकि उनका सम्बन्ध मनोभावों से है और मनोभावों में कभी परिवर्तन नहीं होता है।”
In simple words: मुंशी प्रेमचन्द एक महान कथाकार और उपन्यास सम्राट थे, जिनका जन्म 1880 में वाराणसी के पास हुआ। उनकी भाषा सरल, मुहावरेदार और प्रवाहमयी थी, जो यथार्थवादी चित्रण के लिए उपयुक्त थी, और उन्होंने यथार्थ और आदर्श का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत किया।

🎯 Exam Tip: जीवन-परिचय लिखते समय प्रमुख घटनाओं और साहित्यिक योगदानों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करें। भाषा-शैली के उदाहरणों से अपनी बात को पुष्ट करें।

 

Question 3. मुंशी प्रेमचन्द के जीवन एवं साहित्यिक परिचय का उल्लेख कीजिए।
अथवा मुंशी प्रेमचन्द की जीवनी एवं साहित्यिक सेवाएँ स्पष्ट कीजिए।
Answer:
**मुंशी प्रेमचन्द (स्मरणीय तथ्य)**
जन्म-सन् 1880 ई० । मृत्यु-सन् 1936 ई० जन्म-स्थान-लमही (वाराणसी) उ० प्र० । पिता-अजायब राय । अन्य बातें-निर्धन, संघर्षमय जीवन, बी० ए० तक शिक्षा, पहले अध्यापक फिर सब-डिप्टी इंसपेक्टर ।
साहित्यिक विशेषताएँ-उपन्यास सम्राट्, महान् कथाकार । यथार्थ और आदर्श का मिश्रण ।<
भाषा- सरल, रोचक, प्रवाहमयी ।
शैली- निजी, वर्णनात्मक, विवेचनात्मक, भावात्मक, व्यंग्यात्मक आदि ।
• **जीवन-परिचय**- मुंशी प्रेमचन्द का जन्म वाराणसी जिले के लमही ग्राम में सन् 1880 ई० में हुआ था। इनके बचपन का नाम धनपतराय था : प्रेमचन्द जी पहले उर्दू में नवाबराय के नाम से कहानियाँ लिखते थे। बाद में जब हिन्दी में आये तो इन्होंने प्रेमचन्द नाम से कहानियाँ लिखनी शुरू कीं। इनका जन्म एक साधारण कायस्थ-परिवार में हुआ था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो गयी थी। इनके पिता का नाम अजायब राय था। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद भी इन्होंने बड़े ही परिश्रम से अपना अध्ययनक्रम जारी रखा। आरम्भ में कुछ वर्षों तक स्कूल की अध्यापकी करने के पश्चात् ये शिक्षा-विभाग में डिप्टी इंसपेक्टर हो गये । असहयोग आन्दोलन से प्रेरित होकर इन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और आजीवन साहित्य-सेवा करते रहे। इन्होंने कई पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। इनकी मृत्यु सन् 1936 ई० में हुई ।
• **साहित्यिक परिचय** - मुंशी प्रेमचन्द हिन्दी के युगांतरकारी कथाकार हैं। इनकी कहानियाँ समसामयिक आर्थिक परिस्थितियों के किताबी दस्तावेज हैं जिनमें किसानों की दयनीय दशा, सामाजिक बन्धनों में तड़पती नारियों की वेदना, वर्णव्यवस्था का खोखलापन, हरिजनों की पीड़ा आदि का बड़ा ही मार्मिक चित्रण है। सामयिकता के साथ ही इनके साहित्य में स्थायित्व प्रदान करनेवाले तत्त्व विद्यमान हैं।
• **भाषा-शैली**- मुंशी प्रेमचन्द प्रारम्भ में उर्दू में लिखा करते थे, अतः इनकी रचनाओं पर उर्दू की छाया स्पष्ट है। शैली अत्यन्त ही सरल, सुबोध तथा स्वाभाविक है, जिसमें मुहावरों और कविता के समावेश से और भी सजीवता आ गयी है। आवश्यकतानुसार भाषा में अंग्रेजी, अरबी, उर्दू, फारसी और पूर्वी के देशज शब्दों का प्रयोग हुआ है। भाषा की स्पष्टता एवं प्रभावशीलता के लिए कहीं-कहीं आलंकारिक एवं काव्यमय भाषा का प्रयोग किया गया है। प्रेमचन्द की शैली के रूप हैं- (1) व्यावहारिक और (2) संस्कृतनिष्ठ शैली । व्यावहारिक शैली पर उर्दू की स्पष्ट छाप है। भाषा सरल और मुहावरेदार है।
उदाहरण
1. व्यावहारिक शैली - “बूढे ने पगड़ी उतार कर चौखट पर रख दी और रोकर बोला- हुजूर, एक निगाह देख लें। बस एक निगाह । लड़का हाथ से चला जायेगा। हुजूर, सात लड़कों में यही एक बच रहा है हुजूर ।'
2. संस्कृतनिष्ठ शैली - “कितने ही सिद्धान्त जो एक जमाने में सत्य समझे जाते थे, आज असत्य सिद्ध हो गये हैं, क्योंकि उनका सम्बन्ध मनोभावों से है और मनोभावों में कभी परिवर्तन नहीं होता है।”
In simple words: मुंशी प्रेमचन्द का जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी उन्होंने हिन्दी साहित्य में अतुलनीय योगदान दिया। उनकी कहानियाँ और उपन्यास सामाजिक यथार्थ और आदर्शों का सुंदर संगम हैं, और उनकी भाषा-शैली सरल व प्रवाहमयी है।

🎯 Exam Tip: जीवन परिचय में जन्म, मृत्यु, शिक्षा और प्रमुख घटनाओं को शामिल करें। साहित्यिक परिचय में उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषताओं और हिंदी साहित्य में उनके योगदान पर जोर दें।

 

Question 4. मुंशी प्रेमचन्द के जीवन-परिचय एवं कृतियों का उल्लेख कीजिए। अथवा मुंशी प्रेमचन्द जी का साहित्यिक परिचय दीजिए तथा उनकी प्रमुख रचनाओं (कृतियों) का उल्लेख कीजिए।
Answer:
**मुंशी प्रेमचन्द (स्मरणीय तथ्य)**
जन्म-सन् 1880 ई० । मृत्यु-सन् 1936 ई० जन्म-स्थान-लमही (वाराणसी) उ० प्र० । पिता-अजायब राय । अन्य बातें-निर्धन, संघर्षमय जीवन, बी० ए० तक शिक्षा, पहले अध्यापक फिर सब-डिप्टी इंसपेक्टर ।
साहित्यिक विशेषताएँ-उपन्यास सम्राट्, महान् कथाकार । यथार्थ और आदर्श का मिश्रण ।
भाषा- सरल, रोचक, प्रवाहमयी ।
शैली- निजी, वर्णनात्मक, विवेचनात्मक, भावात्मक, व्यंग्यात्मक आदि ।
• **जीवन-परिचय**- मुंशी प्रेमचन्द का जन्म वाराणसी जिले के लमही ग्राम में सन् 1880 ई० में हुआ था। इनके बचपन का नाम धनपतराय था : प्रेमचन्द जी पहले उर्दू में नवाबराय के नाम से कहानियाँ लिखते थे। बाद में जब हिन्दी में आये तो इन्होंने प्रेमचन्द नाम से कहानियाँ लिखनी शुरू कीं। इनका जन्म एक साधारण कायस्थ-परिवार में हुआ था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो गयी थी। इनके पिता का नाम अजायब राय था। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद भी इन्होंने बड़े ही परिश्रम से अपना अध्ययनक्रम जारी रखा। आरम्भ में कुछ वर्षों तक स्कूल की अध्यापकी करने के पश्चात् ये शिक्षा-विभाग में डिप्टी इंसपेक्टर हो गये । असहयोग आन्दोलन से प्रेरित होकर इन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और आजीवन साहित्य-सेवा करते रहे। इन्होंने कई पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। इनकी मृत्यु सन् 1936 ई० में हुई ।
• **कृतियाँ**- मुंशी प्रेमचन्द मुख्य रूप से कहानी और उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध हैं, परन्तु उन्होंने नाटक, निबन्ध और सम्पादन-कला को भी अपनी समर्थ लेखनी का विषय बनाया। इनकी रचनाओं का विवेचन निम्न प्रकार है
• (क) उपन्यास-गोदान, सेवासदन, कर्मभूमि, रंगभूमि, गबन, प्रेमाश्रम, निर्मला, वरदान और कायाकल्प नामक श्रेष्ठ उपन्यास लिखे । इनके उपन्यासों में मानव-जीवन के विविध पक्षों और समस्याओं का यथार्थ चित्रण हुआ है।
• (ख) कहानी-संग्रह- मुंशी प्रेमचन्द ने लगभग 300 कहानियाँ लिखीं। उनके कहानी संग्रहों में सप्तसुमन, नवनिधि, प्रेमपचीसी, प्रेम सदन, मानसरोवर (आठ भाग) प्रमुख हैं। इनकी कहानियों में बाल-विवाह, दहेज-प्रथा, रिश्वत, भ्रष्टाचार आदि विविध समस्याओं को यथार्थ चित्रण कर उनका समाधान प्रस्तुत किया गया है।
• (ग) नाटक-संग्राम, प्रेम की वेदी, कर्बला- इन नाटकों में राष्ट्र-प्रेम और विश्व-बन्धुत्व का सन्देश दिया गया है।
• (घ) निबन्ध-'कुछ विचार' और 'साहित्य का उद्देश्य' में मुंशी प्रेमचन्द जी के निबन्धों का संग्रह है।
• (ङ) सम्पादन-माधुरी, मर्यादा, हंस, जागरण आदि । इनके अतिरिक्त इन्होंने 'तलवार और त्याग' जीवनी, बालोपयोगी साहित्य और कुछ अनूदित पुस्तकों द्वारा हिन्दी-साहित्य के भण्डार की अभिवृद्धि की है।
• **साहित्यिक परिचय** - मुंशी प्रेमचन्द हिन्दी के युगांतरकारी कथाकार हैं। इनकी कहानियाँ समसामयिक आर्थिक परिस्थितियों के किताबी दस्तावेज हैं जिनमें किसानों की दयनीय दशा, सामाजिक बन्धनों में तड़पती नारियों की वेदना, वर्णव्यवस्था का खोखलापन, हरिजनों की पीड़ा आदि का बड़ा ही मार्मिक चित्रण है। सामयिकता के साथ ही इनके साहित्य में स्थायित्व प्रदान करनेवाले तत्त्व विद्यमान हैं।
• **भाषा-शैली**- मुंशी प्रेमचन्द प्रारम्भ में उर्दू में लिखा करते थे, अतः इनकी रचनाओं पर उर्दू की छाया स्पष्ट है। शैली अत्यन्त ही सरल, सुबोध तथा स्वाभाविक है, जिसमें मुहावरों और कविता के समावेश से और भी सजीवता आ गयी है। आवश्यकतानुसार भाषा में अंग्रेजी, अरबी, उर्दू, फारसी और पूर्वी के देशज शब्दों का प्रयोग हुआ है। भाषा की स्पष्टता एवं प्रभावशीलता के लिए कहीं-कहीं आलंकारिक एवं काव्यमय भाषा का प्रयोग किया गया है। प्रेमचन्द की शैली के रूप हैं- (1) व्यावहारिक और (2) संस्कृतनिष्ठ शैली । व्यावहारिक शैली पर उर्दू की स्पष्ट छाप है। भाषा सरल और मुहावरेदार है।
उदाहरण
1. व्यावहारिक शैली - “बूढे ने पगड़ी उतार कर चौखट पर रख दी और रोकर बोला- हुजूर, एक निगाह देख लें। बस एक निगाह । लड़का हाथ से चला जायेगा। हुजूर, सात लड़कों में यही एक बच रहा है हुजूर ।'
2. संस्कृतनिष्ठ शैली - “कितने ही सिद्धान्त जो एक जमाने में सत्य समझे जाते थे, आज असत्य सिद्ध हो गये हैं, क्योंकि उनका सम्बन्ध मनोभावों से है और मनोभावों में कभी परिवर्तन नहीं होता है।”
In simple words: मुंशी प्रेमचन्द का जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी उन्होंने हिंदी साहित्य में उपन्यास और कहानियों के माध्यम से समाज की विभिन्न समस्याओं को उजागर किया। उनके प्रमुख उपन्यास 'गोदान' और कहानी संग्रह 'मानसरोवर' उनके साहित्यिक कौशल के प्रमाण हैं।

🎯 Exam Tip: प्रेमचन्द की कृतियों का उल्लेख करते समय उनके प्रमुख उपन्यासों और कहानी संग्रहों के नाम अवश्य लिखें। यह उनके साहित्यिक महत्व को दर्शाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. क्या 'मंत्र' एक मर्मस्पर्शी कहानी है और क्यों?
Answer: 'मंत्र' एक मर्मस्पर्शी कहानी है। भगत अपने पुत्र के जीवनदान की याचना डॉ० चड्डा के समक्ष करता है, लेकिन चड्डा के ऊपर उसका कोई असर नहीं हुआ। अपनी बीमारी के कारण भगत का लड़का इस दुनिया से सिधार गया। डॉ० चड्डा के लड़के को सर्प ने जब डस लिया तो चड्डा ने बूढे भगत को इलाज के लिए बुलवाया था। पहले तो भगत ने ना कर दिया, लेकिन रात में चड्डा के लड़के के उपचार के लिए जाता है। उसके उपचार से चड्डा के लड़के की जान बच जाती है।
In simple words: 'मंत्र' एक हृदय को छूने वाली कहानी है क्योंकि यह प्रतिशोध के बजाय मानवता और निःस्वार्थ सेवा को दर्शाती है, जहाँ भगत अपने पुत्र की मृत्यु का बदला लेने के बजाय डॉ. चड्डा के पुत्र का जीवन बचाता है।

🎯 Exam Tip: कहानी की मर्मस्पर्शिता को स्पष्ट करने के लिए प्रमुख घटनाओं और पात्रों के नैतिक संघर्षों का उल्लेख करें।

 

Question 2. “भगवान् बड़ा कारसाज है।” इस वाक्य का भाव स्पष्ट कीजिए ।।
Answer: अच्छा और बुरा सब ईश्वर के हाथ में है। ईश्वर सब कुछ करने में समर्थ है। वह जिन्दा को मुर्दा कर सकता है और मुर्दा को जिन्दा ।
In simple words: इस वाक्य का अर्थ है कि भगवान अत्यंत शक्तिशाली और भाग्य का निर्माता है, जो जीवन और मृत्यु सहित सब कुछ नियंत्रित करता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे वाक्यों के भाव स्पष्ट करते समय, उसके गूढ़ अर्थ को सरल शब्दों में व्यक्त करें और कहानी के संदर्भ में उसका महत्व बताएं।

 

Question 3. अंततः भगत डॉ० चड्डा के पुत्र को बचाने क्यों चला गया?
Answer: डॉ० चड्डा के पुत्र की हालत जानकर भगत से नहीं रहा गया। उसके मन में बदले की भावना नहीं थी। जीवन में इस तरह का उसने कभी भी कोई कार्य नहीं किया था। भगत के मन में दया थी। इसलिए डॉ० चड्डा के पुत्र को बचाने चला गया।
In simple words: भगत डॉ. चड्डा के पुत्र को बचाने गया क्योंकि उसमें बदले की भावना नहीं थी, बल्कि दया और मानवता का भाव था, जो उसके स्वभाव का हिस्सा था।

🎯 Exam Tip: पात्र के चरित्र-चित्रण पर ध्यान केंद्रित करें और उसके कार्यों के पीछे के नैतिक मूल्यों को स्पष्ट करें।

 

Question 4. डॉ० चड्डा के सामने भगत ने अपनी पगड़ी उतार कर क्यों रख दी?
Answer: अपने पुत्र की जान बचाने के लिए भगत ने अपनी पगड़ी डॉ० चड्डा के सामने उतार कर रख दी।
In simple words: भगत ने डॉ. चड्डा के सामने अपनी पगड़ी उतार दी क्योंकि वह अपने बेटे के जीवन की भीख मांग रहा था, यह अत्यंत विनम्रता और असहायता का प्रतीक था।

🎯 Exam Tip: यह क्रिया भगत की दीनता और अपने पुत्र के प्रति उसके गहन प्रेम को दर्शाती है। ऐसे सांकेतिक कार्यों का महत्व बताएं।

 

Question 5. कैलाश को सर्प ने क्यों काट लिया था?
Answer: कैलाश ने सर्प की गर्दन को कसकर दाब दिया था जिससे सर्प क्रोधित हो उठा और गर्दन ढीली होते ही उसने कैलाश को काट लिया।
In simple words: कैलाश ने साँप को गलती से कसकर पकड़ लिया था, जिससे साँप को गुस्सा आया और उसने आत्मरक्षा में कैलाश को काट लिया।

🎯 Exam Tip: घटना के तात्कालिक कारण को स्पष्ट करें। यह घटना कहानी में मोड़ लाने वाली है।

 

Question 6. 'मंत्र' कहानी का सन्देश अपने शब्दों में लिखिए ।
Answer: 'मंत्र' कहानी को सन्देश यह है कि हमें अमीर-गरीब के साथ समान व्यवहार करना चाहिए तथा दूसरों के सुख-दुःख में समान रूप से भागीदार होना चाहिए ।
In simple words: 'मंत्र' कहानी यह सिखाती है कि सच्ची मानवता, निःस्वार्थ सेवा और सहानुभूति ही जीवन के सबसे बड़े मूल्य हैं, जो बदले की भावना से कहीं अधिक शक्तिशाली हैं।

🎯 Exam Tip: कहानी के केंद्रीय विषय (मानवता, सेवा, सहानुभूति) को संक्षेप में और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।

 

Question 7. नारायणी ने भगत के लिए क्या सोचा था? |
Answer: नारायणी ने सोचा था कि मैं उसे कोई बड़ी रकम देंगी ।
In simple words: कैलाश के ठीक होने के बाद, नारायणी ने सोचा था कि वह भगत को उसकी सेवाओं के बदले में एक बड़ी रकम देगी, यह उसकी कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के विचारों और उनकी मानसिकता को संक्षेप में बताएं, विशेषकर संकट टल जाने के बाद।

 

Question 8. कैलाश के जन्म-दिवस की तैयारियों को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: कैलाश के बीसवें सालगिरह पर हरी-हरी घास पर 'कुर्सियाँ बिछी हुई थीं। शहर के रईस और हुक्काम इकठे हुए थे। बिजली के प्रकाश से सारा मैदान जगमगा रहा था। आमोद-प्रमोद के साधन भी थे।
In simple words: कैलाश के बीसवें जन्मदिन पर एक भव्य पार्टी का आयोजन किया गया था, जिसमें शहर के प्रतिष्ठित लोग शामिल थे और पूरा मैदान रोशनी तथा मनोरंजन के साधनों से जगमगा रहा था।

🎯 Exam Tip: तैयारियों का वर्णन करते समय प्रमुख विशेषताओं और माहौल का चित्रण करें।

 

Question 9. डॉ० चड्डा और बूढे से सम्बन्धित दस वाक्य लिखिए ।।
Answer: डॉ० चड्डा ने खूब यश और धन कमाया, लेकिन इसके साथ ही अपने स्वास्थ्य की रक्षा भी की। पचास वर्ष की अवस्था में उनकी चुस्ती और फुर्ती युवकों को भी लज्जित करती थी। उनके प्रत्येक काम का समय निश्चित था। इस नियम से वह जौ-भर भी न टलते थे। डॉ० चड्ढा उपचार और संयम का रहस्य खूब समझते थे । बूढा भगत विनम्र और दयालु था। वह पुत्र के निधन के बाद भी धैर्य धारण किये हुए था। वह नियमित रूप से अपने जीवन निर्वाह के लिए कार्य करता था। भगत में बदले की भावना नहीं थी। वह जब चड्डा के बेटे को साँप काटने की खबर सुनता है तो उससे रहा नहीं जाता और रात में चड्डा के घर पहुँच जाता है-वहाँ वह झाड़-फेंक करता है। उसके झाड़-फेंक से डॉ० चड्डा का लड़का ठीक हो जाता है।
In simple words: डॉ. चड्डा एक सफल और अनुशासित व्यक्ति थे, जबकि बूढ़ा भगत विनम्र, दयालु और निःस्वार्थ सेवाभावी था। दोनों के बीच की प्रारंभिक कटुता भगत की मानवता के कारण समाप्त हो गई।

🎯 Exam Tip: दोनों पात्रों के गुणों और कहानी में उनकी भूमिका को स्पष्ट करते हुए तुलनात्मक वर्णन करें।

 

Question 10. इस पाठ से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
Answer: इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों के सुख-दुःख में समान रूप से भागीदार होना चाहिए।
In simple words: यह पाठ हमें सिखाता है कि हमें दूसरों के सुख-दुःख में सहभागिता करनी चाहिए और मानवता व करुणा को सर्वोपरि रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कहानी से प्राप्त मुख्य नैतिक शिक्षा को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. 'भगवान् बड़ा कारसाज है।' यह वाक्य कहानी में कितनी बार आया है?
Answer: 'भगवान् बड़ा कारसाज है' यह वाक्य कहानी में दो बार प्रयुक्त हुआ है।
In simple words: 'भगवान् बड़ा कारसाज है' वाक्य कहानी में दो बार दोहराया गया है।

🎯 Exam Tip: तथ्यात्मक प्रश्नों का उत्तर सीधे और सटीक दें।

 

Question 2. निम्नलिखित में से सही वाक्य के सम्मुख सही (√) का चिह्न लगाइए (अ) भगत कठोर हृदय का व्यक्ति नहीं था।
(√) (ब) कैलाश नारायणी का पुत्र था।
(√) (स) बुढ़िया ने भगत को दूसरी बार डॉ० चड्डा के यहाँ भेजा था। (x) (द) अंततः कैलाश की मृत्यु हो गयी थी।
(x)
Answer:
(अ) भगत कठोर हृदय का व्यक्ति नहीं था। (√)
(ब) कैलाश नारायणी का पुत्र था। (√)
(स) बुढ़िया ने भगत को दूसरी बार डॉ० चड्डा के यहाँ भेजा था। (x)
(द) अंततः कैलाश की मृत्यु हो गयी थी। (x)
In simple words: सही वाक्यों को पहचानें: भगत कठोर हृदय का नहीं था और कैलाश नारायणी का पुत्र था, जबकि बुढ़िया ने भगत को दोबारा नहीं भेजा और कैलाश की मृत्यु नहीं हुई थी।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन की सत्यता को कहानी के प्रसंग से सत्यापित करें और सटीक चिह्नों का प्रयोग करें।

 

Question 3. मुंशी प्रेमचन्द का जन्म एवं मृत्यु सन् बताइए ।
Answer: मुंशी प्रेमचन्द का जन्म सन् 1880 ई० तथा मृत्यु सन् 1936 ई० हुई ।
In simple words: मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 1880 में और निधन 1936 में हुआ।

🎯 Exam Tip: जन्म और मृत्यु की तिथियाँ याद रखना साहित्यिक परिचय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 4. मुंशी प्रेमचन्द किस युग के लेखक हैं?
Answer: मुंशी प्रेमचन्द शुक्ल युग के लेखक हैं।
In simple words: मुंशी प्रेमचन्द हिंदी साहित्य के शुक्ल युग के प्रमुख लेखक थे।

🎯 Exam Tip: लेखक के साहित्यिक युग को जानना उनके लेखन शैली और संदर्भ को समझने में मदद करता है।

 

Question 5. कैलाश और मृणालिनी कौन थे?
Answer: कैलाश और मृणालिनी सहपाठी थे ।
In simple words: कैलाश और मृणालिनी एक-दूसरे के सहपाठी थे।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों के संबंधों को स्पष्टता से बताएं।

 

Question 6. 'हंस' पत्रिका के संस्थापक कौन थे?
Answer: 'हंस' पत्रिका के संस्थापक मुंशी प्रेमचन्द थे।
In simple words: मुंशी प्रेमचन्द 'हंस' पत्रिका के संस्थापक थे।

🎯 Exam Tip: लेखक के साहित्यिक कार्यों और उनके द्वारा स्थापित पत्रिकाओं के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

व्याकरण-बोध

 

Question 1. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ बताकर वाक्य-प्रयोग कीजिए -
आँखें ठण्डी होना, चैन की नींद सोना, किस्मत ठोंकना, कलेजा ठण्डा होना, हाथ से चला जाना, सूरत आँखों में फिरना।
Answer:
• आँखें ठण्डी होना- (निष्प्राण होना) सर्प के काटने से कैलाश की आँखें ठण्डी हो गयी थीं।
• चैन की नींद सोना- (बेफिक्र होना) परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर मैं चैन की नींद सोया।
• किस्मत ठोंकना- (भाग्य को दोष देना) परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर मैंने किस्मत ठोंक ली।
• कलेजा ठण्डा होना- (चैन पड़ना) राम के फेल होने पर श्याम का कलेजा ठण्डा हो गया।
• हाथ से चला जाना- (प्रिय वस्तु का निकल जाना) दीनू की माँ का इकलौता बेटा बुरी संगति में पड़कर हाथ से चला गया।
• सूरत आँखों में फिरना- (भूली हुई चीज याद आना) राधा के मुम्बई चले जाने पर उसकी सूरत बार-बार मेरे आँखों में फिरती है।
In simple words: मुहावरों के अर्थ और उनके वाक्य प्रयोग के माध्यम से भाषा को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है, जैसे 'आँखें ठण्डी होना' का अर्थ निष्प्राण होना।

🎯 Exam Tip: मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करने के बाद, उनका वाक्य प्रयोग करें ताकि उनका सही उपयोग प्रदर्शित हो सके।

 

Question 2. निम्नलिखित शब्दों को सन्धि-विच्छेद करते हुए सन्धि का नाम लिखिएपल्लव, विद्यालय, सज्जन, औषधालय, निश्चल, निःस्वार्थ ।
Answer:
पल्लव - पत् + लव - व्यंजन सन्धि
विद्यालय – विद्या + आलय - दीर्घ सन्धि
सज्जन - सद् + जन - व्यंजन संधि
औषधालय - औषध + आलय – दीर्घ सन्धि
निश्चल - निः + चल - विसर्ग सन्धि
निःस्वार्थ - निः + स्वार्थ - विसर्ग सन्धि
In simple words: दिए गए शब्दों का सन्धि-विच्छेद करके उनकी सन्धि के प्रकार (जैसे व्यंजन, दीर्घ, विसर्ग) को पहचानना व्याकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद करते समय नियमों का ध्यान रखें और सन्धि के प्रकार को सही-सही पहचानें।

 

Question 3. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग बताइए -
उपदेशक, निर्दयी, निवारण, आमोद, प्रतिघात ।
Answer: उप, निर, नि, आ, प्रति ।
In simple words: उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं, जैसे 'उपदेशक' में 'उप' उपसर्ग है।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग को पहचानने के लिए शब्द के मूल रूप और उसमें जुड़े शब्दांश को अलग करें।

 

Question 4. निम्नलिखित समस्त पदों में समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए
महाशय, कामना-तरु, सावन-भादौ, जीवनदान, जलमग्न, आत्मरक्षा, मित्र-समाज ।
Answer:

समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
महाशयमहान् है आशय जिसकाबहुब्रीहि
कामना-तरुकामना रूपी तरुकर्मधारय समास
सावन-भादौसावन और भादौद्वन्द्व समास
जीवनदानजीवन के लिए दानसम्प्रदान तत्पुरुष
जलमग्नजल में मग्नअधिकरण तत्पुरुष
आत्मरक्षाआत्मा की रक्षासम्बन्ध तत्पुरुष
मित्र-समाजमित्रों का समाजसम्बन्ध तत्पुरुष

In simple words: समास विग्रह शब्दों को अलग करके उनके आपसी संबंध और समास के प्रकार (जैसे बहुब्रीहि, कर्मधारय, द्वन्द्व, तत्पुरुष) को स्पष्ट करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय पदों के बीच के संबंध को पहचानें और उसके अनुसार सही समास का नाम लिखें।

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