Step-by-Step Textbook Solutions for Class 8 Science Chapter 04 Khanij evam dhatu
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खनिज एवं धातु
अभ्यास प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प अँटकर अपनी अभ्यास-पुस्तिका में लिखिए (लिखकर) –
Answer:
(क) निम्नलिखित वस्तुओं में कौन-सी वस्तु संक्षारित हो सकती है –
(अ) लकड़ी की मेज ।
(ब) स्टील की कुर्सी
(स) खुली स्थानों पर रखी लोहे की छड़
(द) तेल लेपित लोहे की छड़
Answer: (स) खुली स्थानों पर रखी लोहे की छड़
(ख) बॉक्साइट किसका अयस्क है -
(अ) सोडियम
(ब) लोहा
(स) एल्युमिनियम
(द) कॉपर
Answer: (स) एल्युमिनियम
(ग) इनमें से कौन सी सान्द्रण की विधि नहीं है?
(अ) फेन प्लावन विधि,
(ब) चुम्बकीय पृथक्करण
(स) निस्तापन
(द) गुरुत्वीय पृथक्करण
Answer: (स) निस्तापन
In simple words: लोहे की छड़ें नमी और हवा के संपर्क में आने पर जंग खाकर खराब हो जाती हैं। बॉक्साइट एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क है और निस्तापन अयस्क सांद्रण की एक विधि नहीं है, बल्कि यह अयस्क को गर्म करके अशुद्धियाँ हटाने की प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: संक्षारण के कारणों, प्रमुख धातुओं और उनके अयस्कों के नाम, तथा अयस्क सांद्रण की विभिन्न विधियों के बीच का अंतर समझना परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके) –
Answer:
(क) सोडियम धातु को मिट्टी के तेल में रखते हैं।
(ख) जंग लगने के लिए ऑक्सीजन तथा नमी आवश्यक है।
(ग) धातु से तार बनाने का गुण तन्यता कहलाता है।
(घ) जिन खनिजों से धातु का निष्कर्षण किया जाता है, उन्हें अयस्क कहते हैं।
In simple words: सोडियम को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी के तेल में रखा जाता है। जंग लगने के लिए हवा और पानी जरूरी हैं। धातुओं का तार बनने का गुण तन्यता कहलाता है, और जिन खनिजों से धातु निकाली जाती है, उन्हें अयस्क कहते हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरने वाले प्रश्नों में मुख्य परिभाषाओं, गुणों और सुरक्षा उपायों पर आधारित तथ्यों को याद रखें, जैसे सोडियम का भंडारण और जंग लगने की आवश्यक शर्तें।
Question 3. निम्नलिखित कथनों में सही कथन पर (√) तथा गलत कथन पर (X) का चिह्न लगाइए (लगाकर)-
Answer:
(क) हीरा कार्बन का रूप है। (√)
(ख) हेमेटाइट एल्युमिनियम का अयस्क है। (X)
(ग) धातु ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाते हैं। (√)
(घ) क्वार्ट्ज धात्विक खनिज है। (X)
(ङ) संगमरमर चूने के पत्थर से बनता है। (√)
(च) निस्तापन की क्रिया में अयस्क को वायु की उपस्थिति में गरम किया जाता है। (X)
In simple words: हीरा कार्बन का एक रूप है और धातुएँ ऑक्सीजन से क्रिया कर ऑक्साइड बनाती हैं। हेमेटाइट लोहे का अयस्क है, क्वार्ट्ज एक अधात्विक खनिज है, संगमरमर चूने के पत्थर से बनता है, और निस्तापन वायु की अनुपस्थिति में होता है।
🎯 Exam Tip: खनिज, अयस्क, धातुओं के गुण और रासायनिक प्रक्रियाओं से संबंधित मूलभूत तथ्यों को ध्यान से पढ़ें और सही-गलत पहचानने का अभ्यास करें, विशेष रूप से अयस्कों के सही धातु युग्म और विभिन्न प्रक्रियाओं की शर्तों को याद रखें।
Question 4. कॉलम 'A' के शब्दों को कॉलम 'B' के शब्दों से सही मिलान कीजिए (मिलान करके) –
Answer:
| 'A' | 'B' | |
|---|---|---|
| (i) बॉक्साइट | → | एल्युमिनियम |
| (ii) गैलेना | → | लेड (सीसा) |
| (iii) हेमेटाइट | → | आयरन (लोहा) |
| (iv) पाइरोलुसाइट | → | मैंगनीज |
🎯 Exam Tip: अयस्कों और संबंधित धातुओं के सही युग्मों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे प्रश्न अक्सर सामान्य विज्ञान और रसायन विज्ञान की परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Question 5. निम्नलिखित प्रश्नों का संक्षिप्त उत्तर दीजिए
(क) खनिज तथा अयस्क में क्या अन्तर है?
Answer: खनिज वह पदार्थ है, जिसे जमीन के अन्दर खुदाई करके प्राप्त किया जाता है, परन्तु जिन खनिजों से धातुओं का निष्कर्षण सरलतापूर्वक किया जाता है, उन्हें अयस्क कहते हैं।
In simple words: खनिज पृथ्वी से मिलने वाले सभी पदार्थ हैं, जबकि अयस्क वे विशेष खनिज हैं जिनसे धातु आसानी और सस्ते में निकाली जा सकती है।
🎯 Exam Tip: खनिज और अयस्क की परिभाषा तथा उनके बीच के स्पष्ट अंतर को उदाहरणों सहित याद रखना महत्वपूर्ण है ताकि भ्रम से बचा जा सके।
(ख) धातुकर्म से क्या समझते हैं?
Answer: धातुकर्म - किसी अयस्क से धातु की प्राप्ति तथा उसके शुद्धिकरण की विधि को धातुकर्म कहते हैं।
In simple words: धातुकर्म वह प्रक्रिया है जिसमें अयस्क से धातु को निकालकर उसे शुद्ध किया जाता है ताकि उसका उपयोग किया जा सके।
🎯 Exam Tip: धातुकर्म की परिभाषा और इसमें शामिल प्रमुख चरणों को संक्षिप्त में समझने का प्रयास करें, क्योंकि यह धातु निष्कर्षण का आधार है।
(ग) धातुओं की अघातवर्धनीयता तथा तन्यता के गुण का क्या अर्थ है? ।
Answer: धातुओं को पीटकर चादरों के रूप में परिवर्तित करने के गुण को अघातवर्धनीयता कहते हैं। तथा धातुओं को खींचकर तार के रूप में परिवर्तित करने के गुण को तन्यता कहते हैं।
In simple words: अघातवर्धनीयता धातुओं का वह गुण है जिससे उन्हें पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है, और तन्यता वह गुण है जिससे उन्हें खींचकर महीन तार बनाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: धातुओं के विशिष्ट गुणों, जैसे अघातवर्धनीयता (चादर बनाना) और तन्यता (तार बनाना), की परिभाषा और उनके व्यावहारिक उपयोगों को याद रखें, क्योंकि ये भौतिक गुण अक्सर पूछे जाते हैं।
(घ) धातुओं का संक्षारण क्या है?
Answer: कुछ धातुओं को नम हवा में रखने अथवा वर्षा ऋतु में पानी में पड़े रहने पर उनकी सतह पर एक प्रकार की भूरे रंग की तह (जंग या लेप) जम जाती है। इस प्रकार धातु कमजोर होती जाती है। इस क्रिया को धातु का संक्षारण कहते हैं। लोहे के ऊपर भूरे रंग की जंग लगना तथा जस्ते के ऊपर सफेद रंग की जंग लगना इसके उदाहरण हैं।
In simple words: संक्षारण वह प्रक्रिया है जिसमें धातुएँ नमी और हवा के संपर्क में आकर धीरे-धीरे खराब होती हैं, जैसे लोहे में जंग लगना या जस्ते पर सफेद परत बनना, जिससे धातु कमजोर हो जाती है।
🎯 Exam Tip: संक्षारण की परिभाषा, उसके कारणों (नमी और ऑक्सीजन) और विभिन्न धातुओं पर होने वाले प्रभावों (जैसे लोहे पर भूरी जंग, जस्ते पर सफेद परत) को उदाहरणों सहित समझें।
(ङ) मुक्त अवस्था में पाए जाने वाले किन्हीं दो धातुओं के नाम लिखिए।
Answer: सोना तथा चाँदी।
In simple words: सोना और चाँदी जैसी धातुएँ प्रकृति में शुद्ध रूप में पाई जाती हैं क्योंकि वे रासायनिक रूप से कम क्रियाशील होती हैं और आसानी से किसी अन्य तत्व से अभिक्रिया नहीं करतीं।
🎯 Exam Tip: प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाने वाली धातुओं के नाम याद रखना अक्सर पूछा जाता है; ये आमतौर पर कम अभिक्रियाशील धातुएँ होती हैं।
(च) मिश्र धातु क्या होती हैं?
Answer: दो या दो से अधिक धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं। ये धातुओं को उनकी पिघली हुई अवस्था में मिलाने पर बनती हैं।
In simple words: मिश्र धातुएँ दो या दो से अधिक धातुओं को पिघलाकर मिलाने से बनती हैं, जिससे एक नया, मजबूत और उपयोगी पदार्थ बनता है।
🎯 Exam Tip: मिश्र धातु की परिभाषा और वे कैसे बनती हैं, इसे समझें; यह धातुओं के गुणों को सुधारने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
(छ) खनिज तथा अयस्क में क्या अन्तर है?
Answer: खनिज- जो पदार्थ पृथ्वी के धरातल से खोदकर निकाले जाते हैं। उन्हें खनिज कहते हैं। उदाहरण- लोहा, अभ्रक, कोयला आदि।
अयस्क- ऐसे खनिज, जिनसे धातु का निष्कर्षण अधिक मात्रा में सरलता से एवं कम लागत में हो जाता है, अयसक (ore) कहलाते हैं। उदाहरण- बॉक्साइड, जिप्सम, कैलेमान।
In simple words: खनिज पृथ्वी से प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले पदार्थ हैं, जबकि अयस्क केवल वे खनिज होते हैं जिनसे हम आर्थिक रूप से लाभकारी तरीके से धातु निकाल सकते हैं। सभी अयस्क खनिज होते हैं, पर सभी खनिज अयस्क नहीं होते।
🎯 Exam Tip: खनिज और अयस्क के बीच के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट रूप से समझें; यह समझना महत्वपूर्ण है कि अयस्क खनिजों का एक विशेष उपसमूह है जिसका आर्थिक महत्व है।
(ज) किसी एक द्रव धातु का नाम लिखिए।
Answer: पारा
In simple words: पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो कमरे के तापमान पर तरल अवस्था में पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाने वाली धातु (पारा) और अधातु (ब्रोमीन) के नाम याद रखना अक्सर सामान्य ज्ञान और विज्ञान के प्रश्नों में पूछा जाता है।
Question 6. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए-
(क) धातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए ।
Answer: धातु ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाते हैं, उदाहरण –
(i) सोडियम कमरे के सामान्य ताप पर ऑक्सीजन से क्रिया करके सोडियम ऑक्साइड बनाता है।
\[4Na + O_2 \to 2Na_2O\]
(ii) मैग्नीशियम का तार ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड (सफेद पाउडर) बनाता है।
\[2Mg + O_2 \to 2MgO\]
In simple words: धातुएँ ऑक्सीजन से मिलकर धातु ऑक्साइड बनाती हैं, जैसे सोडियम ऑक्सीजन से मिलकर सोडियम ऑक्साइड बनाता है और मैग्नीशियम जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: धातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया के सामान्य सूत्र और कम से कम दो धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) के विशिष्ट रासायनिक समीकरणों को संतुलित रूप में याद रखें।
(ख) धातु तथा अधातु की जल से क्रिया लिखिये।
Answer: धातु-जल से सामान्य ताप पर क्रिया करके \(H_2\) गैस निकालती है।
अधातु-जल से सामान्य ताप पर क्रिया नहीं करती।
In simple words: धातुएँ जल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं, जबकि अधातुएँ सामान्यतः जल के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करतीं।
🎯 Exam Tip: धातुओं और अधातुओं के रासायनिक गुणों में अंतर को समझने के लिए उनकी जल के साथ अभिक्रिया का ज्ञान महत्वपूर्ण है। धातुओं की अभिक्रियाशीलता के आधार पर जल से उनकी क्रिया की तीव्रता भिन्न होती है।
(ग) लोहा, ताँबा तथा सोने के अयस्क देश में कहाँ पाये जाते हैं।
Answer: लोहा- बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, तमिलनाडू, कर्नाटक, छत्तीसगढ़।
ताँम्बा- आंध्र प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश।
सोने- (कोलार खान-कर्नाटक), आन्ध्र प्रदेश।
In simple words: भारत में लोहा मुख्य रूप से बिहार और ओडिशा में, ताँबा आंध्र प्रदेश और राजस्थान में, तथा सोना कर्नाटक (कोलार खान) और आंध्र प्रदेश में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: भारत में प्रमुख खनिजों और धातुओं के मुख्य उत्पादक राज्यों के नाम याद रखना भौगोलिक और सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है। यह भारत के खनिज संसाधनों को समझने में मदद करता है।
(घ) धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया को दो उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: धातु जल के साथ क्रिया करके धातु हाइड्रॉक्साइड/ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाते हैं। उदाहरण –
(i) सोडियम धातु जल के साथ तीव्र गति से अभिक्रिया करके सोडियम हाइड्रॉक्साइड तथा” हाइड्रोजन गैस बनाता है।
\[2Na + 2H_2O \to 2NaOH + H_2\]
(ii) मैग्नीशियम भाप या गर्म पानी के साथ क्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाता है।
\[Mg + H_2O \to MgO + H_2\]
In simple words: धातुएँ जल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस और धातु हाइड्रॉक्साइड या ऑक्साइड बनाती हैं। उदाहरण के लिए, सोडियम ठंडे जल से और मैग्नीशियम गर्म जल या भाप से क्रिया करता है।
🎯 Exam Tip: धातुओं की जल से अभिक्रिया के सामान्य सूत्र और कम से कम दो धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) के विशिष्ट रासायनिक समीकरणों को याद रखें, तथा यह भी जानें कि अभिक्रिया की दर धातु की प्रकृति (क्रियाशीलता) पर निर्भर करती है।
(ङ) सोडियम धातु का जल तथा ऑक्सीजन से क्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer: सोडियम धातु की जल के साथ क्रिया - सोडियम धातु जल के साथ तीव्र गति से अभिक्रिया करके सोडियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाता है।
\[2Na + 2H_2O \to 2NaOH + H_2\]
सोडियम धातु की ऑक्सीजन के साथ क्रिया - सोडियम कमरे के सामान्य ताप पर ऑक्सीजन से क्रिया करके सोडियम ऑक्साईड बनाता है।
\[4Na + O_2 \to 2Na_2O\]
In simple words: सोडियम धातु जल के साथ क्रिया कर सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती है, जबकि ऑक्सीजन के साथ क्रिया कर सोडियम ऑक्साइड बनाती है। ये दोनों अभिक्रियाएँ सोडियम की उच्च क्रियाशीलता को दर्शाती हैं।
🎯 Exam Tip: सोडियम जैसी अत्यधिक क्रियाशील धातुओं की जल और ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाओं के समीकरणों को संतुलित रूप में याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये मूलभूत रासायनिक अभिक्रियाएँ हैं।
(च) धातु तथा अधातु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: थातु तथा अधातु में निम्नलिखित अन्तर है-
| क्र०सं० | गुण | धातु | अधातु |
|---|---|---|---|
| 1. | भौतिक अवस्था | ठोस, कठोर, चमकदार | द्रव व गैस (ठोस- कार्बन, सल्फर, आयोडीन, फास्फोरस) |
| 2. | घनत्व/गलनांक | अधिक (सोडियम अपवाद) | कम |
| 3. | ऊष्णीय एवं विद्युत चालकता | सुचालक | कुचालक |
| 4. | अघातवर्धनीयता/तन्यता | अघातवर्धनीय एवं तन्य | भंगुर एवं तन्यता विहीन |
| 5. | जल से क्रिया | सामान्य ताप पर क्रिया करके \(H_2\) गैस निकलती है। | सामान्य ताप पर क्रिया नहीं करती। |
🎯 Exam Tip: धातु और अधातु के भौतिक और रासायनिक गुणों में अंतर को सारणीबद्ध रूप में याद करना बहुत प्रभावी होता है, खासकर उनकी भौतिक अवस्था, गलनांक, चालकता और जल से अभिक्रिया के संदर्भ में।
(छ) धातु के संक्षारण की रोकथाम के लिए अपनाई जाने वाली विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए ।
Answer: धातु के संक्षारण की रोकथाम की विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित हैं –
1. पेंट का लेप चढ़ाकर - धातु की वस्तुओं की सतह पर पेंट लगाकर उसे क्षरण से बचाया जा सकता है। इसी कारण लोहे के फर्नीचर, लोहे के पुल, रेल के डिब्बे, बस, ट्रक आदि को पेंट किया जाता है।
2. ग्रीस या तेल लगाकर - नए औजारों जैसे - कैंची, चाकू, मशीन आदि पर ग्रीस या तेल लगाकर उन्हें क्षरण से बचाया जा सकता है।
3. गैल्वोनीकरण (धातु चढ़ाना) - लोहा को जंग से बचाने के लिए लोहे की चादर या अन्य पात्र को पिघले हुए जस्ते में डुबा देते हैं, जिसके कारण लोहे पर जस्ते की एक पतली परत जम जाती है। इस लोहे का उपयोग बाल्टी, टंकी आदि बनाने में किया जाता है।
4. इलेक्ट्रोप्लेटिंग (विद्युत लेपन) - कुछ धातु जैसे क्रोमियम, निकिल तथा टिन वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन एवं नमी से प्रभावित नहीं होते हैं। लोहे का क्षरण रोकने के लिए उसके चारों ओर क्रोमियम या टिन की इलेक्ट्रोप्लेटिंग की जाती है। एल्युमिनियम को क्षरण से बचाने के लिए उसके ऊपर एल्युमिनियम ऑक्साइड का विद्युत लेपन कर दिया जाता है।
5. मिश्र धातु बनाकर - कभी-कभी एक धातु में दूसरी धातु या अधातु मिलाने पर वह अधिक कठोर, स्थायी तथा संक्षारण से सुरक्षित हो जाता है। स्टील, लोहा तथा कार्बन का मिश्रण मिश्र धातु है, जिसमें आसानी से जंग नहीं लगता है।
In simple words: धातु संक्षारण को रोकने के लिए पेंट, ग्रीस या तेल लगाने, गैल्वनीकरण (जस्ते की परत चढ़ाना), इलेक्ट्रोप्लेटिंग (विद्युत लेपन) और मिश्र धातु बनाने जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: धातु संक्षारण को रोकने वाली विभिन्न विधियों के नाम और उनकी संक्षिप्त कार्यप्रणाली को याद रखें, क्योंकि यह व्यावहारिक अनुप्रयोगों से संबंधित महत्वपूर्ण विषय है और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(ज) तवे की हैंडल में लकड़ी लगी होती है, क्यों?
Answer: लकड़ी ताप का कुचालक है। इसके पकड़ने से हाथ नहीं जलता। इसलिए तवे की हैंडल में लकड़ी लगी होती है।
In simple words: तवे की हैंडल में लकड़ी लगाई जाती है क्योंकि लकड़ी गर्मी को रोकती है, जिससे गर्म तवे को पकड़ते समय हाथ नहीं जलता।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा चालकता के सिद्धांतों और उनके दैनिक जीवन में अनुप्रयोगों को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे कि कुचालक पदार्थों का उपयोग हमें गर्म वस्तुओं से बचाने के लिए कैसे किया जाता है।
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