Official UP Board Solutions for Class 8 Agricultural Science: Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र
Review structured textbook solutions for Class 8 Agricultural Science Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र. Built according to UP Board guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.
Chapter-wise Solutions for Agricultural Science: Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र
Navigate directly to the solved Agricultural Science textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
इकाई-8 सामान्य फसलें एवं फसल चक्र अभ्यास
Question 1. सही विकल्प के सामने सही (✔) का चिह्न लगाइए (चिह्न लगाकर)
1. गन्ने की फसल के लिए उपयुक्त भूमि है
(क) दोमट
(ख) हल्की दोमट
(ग) बलुई दोमट
(घ) उपर्युक्त सभी
Answer: (क) दोमट
In simple words: गन्ने की अच्छी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे बढ़िया होती है। यह मिट्टी पानी को अच्छे से रोकती है और जड़ों को बढ़ने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: फसलों के लिए सही मिट्टी का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पैदावार को प्रभावित करता है।
2. गन्ने की अच्छी पैदावार हेतु कितनी नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है?
(क) 150 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(ख) 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(ग) 50 किग्रा प्रति हेक्टेयर
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (क) 150 किग्रा प्रति हेक्टेयर
In simple words: गन्ने की अच्छी फसल उगाने के लिए प्रति हेक्टेयर 150 किलोग्राम नाइट्रोजन की खाद देनी पड़ती है। यह पौधे को बढ़ने और अच्छी पैदावार देने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन पौधों के हरे रंग और तेज़ विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, सही मात्रा में देने से पत्तियां स्वस्थ रहती हैं।
3. निम्न में से कौन सी प्रजाति सूरजमुखी की उन्नत किस्म है?
(क) के 617
(ख) वरदान
(ग) सूर्या
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (ग) सूर्या
In simple words: सूरजमुखी की 'सूर्या' नाम की किस्म अच्छी मानी जाती है। यह किस्म बेहतर पैदावार और तेल की अच्छी गुणवत्ता देती है।
🎯 Exam Tip: उन्नत किस्मों का उपयोग करने से न केवल पैदावार बढ़ती है, बल्कि कीटों और बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है।
4. फसलों की पैदावार बढ़ाने का निम्नलिखित में से कौन-सा साधन है?
(क) लगातार एक फसल का बोना
(ख) फसल चक्र अपनाना
(ग) अधिक पानी की व्यवस्था करना
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (ख) फसल चक्र अपनाना
In simple words: खेतों में फसल चक्र अपनाने से पैदावार बढ़ती है। इसमें अलग-अलग फसलें बारी-बारी से बोई जाती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
🎯 Exam Tip: फसल चक्र मिट्टी के पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद करता है और कीटों व बीमारियों के फैलाव को कम करता है।
Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)
Answer:
(क) सूरजमुखी का तेल हृदय रोगियों के लिए **उत्तम** माना जाता है। सूरजमुखी का तेल दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है क्योंकि इसमें स्वस्थ वसा होती है।
(ख) गन्ने का बीज **50-60 कुन्तल** प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है। यह मात्रा गन्ने की मोटाई के हिसाब से थोड़ी बदल सकती है।
(ग) सूरजमुखी की बुवाई **जून-जुलाई** माह में होती है। सही समय पर बुवाई करने से फसल की उपज अच्छी होती है।
(घ) गन्ने की फसल के लिये प्रति हेक्टेयर **157 किग्रा** नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। यह नाइट्रोजन पौधों को तेज़ी से बढ़ने में मदद करता है।
(च) बरसीम को बीज बुवाई के लिए **30 किग्रा** प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। सही मात्रा में बीज बोने से खेत में पौधों की उचित संख्या बनी रहती है।
In simple words: खाली जगहों को सही जानकारी से भरना है, जैसे कि सूरजमुखी का तेल दिल के लिए अच्छा होता है और गन्ने के बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर 50-60 क्विंटल होती है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, सुनिश्चित करें कि भरी गई जानकारी सटीक और प्रश्न के संदर्भ में सही हो।
Question 3. सही कथन पर (✔) का चिह्न तथा गलत कथन पर (X) का दिन लगाइए (निशान लगाकर)
Answer:
(क) बरसीम की फसल में 120 किग्रा नाइट्रोजन प्रयोग की जाती है। **(X)** यह कथन गलत है।
(ख) बरसीम का बीज 10-20 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है। **(X)** यह कथन भी गलत है।
(ग) जे0एच0बी0 146 बरसीम की उन्नत किस्म है। **(✔)** यह कथन सही है। यह बरसीम की एक अच्छी किस्म है।
(घ) गन्ने की खेती ऊसर भूमि में की जाती है। **(✔)** यह कथन सही है। गन्ना कुछ हद तक ऊसर भूमि में भी उगाया जा सकता है।
In simple words: हर वाक्य को ध्यान से पढ़कर बताना है कि वह सही है या गलत। सही के लिए 'सही' और गलत के लिए 'गलत' का निशान लगाना है।
🎯 Exam Tip: सत्य/असत्य प्रश्नों में, प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और उसकी जानकारी को अपनी पढ़ी हुई जानकारी से मिलाएं।
Question 4. गन्ने की अगेती उन्नतशील प्रजातियों के तीन नाम बताइए ।
Answer: गन्ने की उन्नतशील अगेती प्रजातियाँ विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन किस्मों को सही समय पर बोया जाए ताकि अच्छी पैदावार मिल सके।
**पूर्वी क्षेत्र:** बी0ओ 47, को 687, को 395
**मध्य क्षेत्र:** को 510, को 64, बी0ओ 47
**पश्चिमी क्षेत्र:** को 1336, को 1147, को 6613
**तराई क्षेत्र:** को 1148, को 1336, को शा 1157
In simple words: गन्ना उगाने वाले अलग-अलग इलाकों में कुछ खास तरह के गन्ने की किस्में जल्दी तैयार होती हैं। इनके नाम हर इलाके के लिए अलग-अलग दिए गए हैं।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी फसल की किस्मों के बारे में पूछा जाए, तो क्षेत्रीय विशिष्टताओं का उल्लेख करना बेहतर होता है, यदि उपलब्ध हो।
Question 5. सूरजमुखी से कितनी उपज प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है?
Answer: सूरजमुखी की खेती सही तरीके से करने पर अच्छी उपज मिलती है। संकुल प्रजातियों से प्रति हेक्टेयर 12-15 क्विंटल उपज मिल सकती है, जबकि संकर प्रजातियों से 20-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त की जा सकती है। संकर प्रजातियाँ आमतौर पर अधिक उपज देती हैं।
In simple words: अच्छी खेती करने पर सूरजमुखी की संकुल किस्मों से 12-15 क्विंटल और संकर किस्मों से 20-25 क्विंटल तक उपज प्रति हेक्टेयर मिल जाती है।
🎯 Exam Tip: उपज की मात्रा केवल खेती के तरीके पर ही नहीं, बल्कि चुनी गई किस्म (संकुल या संकर) पर भी निर्भर करती है।
Question 6. गन्ने की कितनी मात्रा एक हेक्टेयर बुवाई हेतु प्रयोग की जाती है?
Answer: गन्ने की बुवाई के लिए बीज की मात्रा गन्ने की मोटाई पर निर्भर करती है। यदि गन्ना औसत मोटाई का हो, तो एक हेक्टेयर में बुवाई के लिए 50-60 क्विंटल बीज पर्याप्त होता है। सही मात्रा में बीज डालने से खेत में पौधों की संख्या सही रहती है, जिससे उपज अच्छी होती है।
In simple words: एक हेक्टेयर ज़मीन में गन्ना बोने के लिए 50-60 क्विंटल गन्ने के बीज की ज़रूरत होती है। यह बीज गन्ने की मोटाई के हिसाब से थोड़ा कम या ज़्यादा हो सकता है।
🎯 Exam Tip: बीज की सही मात्रा का उपयोग करना फसल की प्रारंभिक वृद्धि और अंतिम पैदावार के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. बरसीम की खेती हेतु एक हेक्टेयर में कितना बीज प्रयोग किया जाता है?
Answer: बरसीम की खेती के लिए एक हेक्टेयर में लगभग 30 किग्रा बीज पर्याप्त होता है। यह बीज की सही मात्रा खेत में समान रूप से वितरित होनी चाहिए ताकि पौधों का विकास अच्छा हो सके।
In simple words: बरसीम की खेती के लिए एक हेक्टेयर खेत में करीब 30 किलोग्राम बीज बोना चाहिए।
🎯 Exam Tip: बरसीम चारे की फसल है, और सही बीज दर स्वस्थ और घनी फसल सुनिश्चित करती है।
Question 8. बरसीम के बीज शोथन हेतु राइजोबियम कल्चर की मात्रा बताइए ।
Answer: बरसीम के बीज के शोधन के लिए राइजोबियम कल्चर का उपयोग किया जाता है। इसके लिए, 150 ग्राम गुड़ को 1 लीटर पानी में गर्म करके ठंडा कर लिया जाता है। फिर, इस घोल में 600 ग्राम कल्चर मिलाकर 15 किग्रा बीज को उपचारित किया जाता है। कल्चर पौधों को नाइट्रोजन स्थिरीकरण में मदद करता है।
In simple words: बरसीम के बीज को बोने से पहले साफ करने के लिए, 150 ग्राम गुड़ को पानी में घोलकर 600 ग्राम राइजोबियम कल्चर के साथ 15 किलोग्राम बीज में मिलाया जाता है।
🎯 Exam Tip: राइजोबियम कल्चर का उपयोग दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण को बढ़ाता है, जिससे रासायनिक खाद की आवश्यकता कम होती है।
Question 9. फसल चक्र किसे कहते हैं?
Answer: फसल चक्र का मतलब है कि किसी निश्चित ज़मीन पर एक तय समय के लिए अलग-अलग फसलें बदल-बदल कर बोना। इससे ज़मीन की उर्वरता बनी रहती है और ज़्यादा पैदावार मिलती है। फसल चक्र अपनाने से मिट्टी को पोषण मिलता है।
In simple words: फसल चक्र का मतलब है कि एक ही खेत में अलग-अलग समय पर अलग-अलग फसलें उगाना, ताकि ज़मीन की ताकत बनी रहे और फसल ज़्यादा उगे।
🎯 Exam Tip: फसल चक्र मिट्टी की सेहत और उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखने का एक प्रभावी तरीका है।
Question 10. एक वर्षीय फसल चक्र का उदाहरण दीजिए ।
Answer: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनाए जाने वाले कुछ प्रमुख एक वर्षीय फसल चक्र नीचे दिए गए हैं। ये फसल चक्र मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और कीटों व रोगों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
1. धान-गेहूं (1 वर्ष)
2. मक्का-आलू-प्याज (1 वर्ष)
3. ज्वार-बरसीम (1 वर्ष)
In simple words: एक साल के फसल चक्र में, खेत में एक साल के अंदर धान के बाद गेहूं, या मक्का के बाद आलू और फिर प्याज, या ज्वार के बाद बरसीम जैसी फसलें बदली जाती हैं।
🎯 Exam Tip: एक वर्षीय फसल चक्रों को स्थानीय जलवायु और मिट्टी की ज़रूरतों के हिसाब से चुना जाता है।
Question 11. फसल चक्र का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त बताइए।
Answer: फसल चक्र का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि यह मिट्टी की सेहत को बनाए रखता है और पैदावार बढ़ाता है। यहाँ कुछ मुख्य सिद्धांत दिए गए हैं:
1. अधिक पानी वाली फसल के बाद कम पानी वाली फसल बोनी चाहिए, जैसे धान के बाद मटर या चना।
2. दलहनी फसलों के बाद ऐसी फसलें बोनी चाहिए जो दलहनी नहीं हैं, जैसे अरहर के बाद गेहूं।
3. ज़्यादा जुताई वाली फसल के बाद कम जुताई वाली फसलें बोएं, जैसे गेहूं के बाद मूंग।
4. एक ही तरह के पौधे लगातार एक ही खेत में नहीं बोने चाहिए, जैसे मूंग या उड़द के बाद चना या मटर नहीं बोना चाहिए। यह मिट्टी के पोषक तत्वों को संतुलित रखता है।
In simple words: फसल चक्र का एक ज़रूरी नियम यह है कि आप खेत में पानी, जुताई और एक ही तरह की फसलों को बदल-बदल कर बोएं। इससे मिट्टी की ताकत बनी रहती है और हर बार अच्छी फसल मिलती है।
🎯 Exam Tip: फसल चक्र में विविधता मिट्टी को स्वस्थ रखती है और कीटों व बीमारियों के प्रकोप को कम करती है।
Question 12. बरसीम में सिंचाई के प्रबन्ध का वर्णन कीजिए ।
Answer: बरसीम की फसल को 10-12 सिंचाइयों की ज़रूरत होती है। बीज बोने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। दिसम्बर और जनवरी में एक बार सिंचाई करनी होती है। इसके बाद, फरवरी और मार्च के महीनों में 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। सही समय पर सिंचाई से बरसीम की उपज अच्छी होती है।
In simple words: बरसीम की फसल को लगभग 10-12 बार पानी देना पड़ता है। बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई करें और फिर दिसंबर, जनवरी में एक बार, फरवरी-मार्च में हर 15 दिन में पानी दें।
🎯 Exam Tip: बरसीम जैसी चारे वाली फसलों को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, खासकर सूखे मौसम में, ताकि पत्तियां हरी और मुलायम रहें।
Question 13. फसल चक्र से होने वाले लाभों का वर्णन कीजिए ।
Answer: फसल चक्र अपनाने से किसानों और मिट्टी को कई तरह के फायदे होते हैं, जिससे खेती ज़्यादा टिकाऊ बनती है। फसल चक्र से होने वाले मुख्य लाभ निम्न हैं:
1. भूमि की उर्वराशक्ति में कमी नहीं होती।
2. जैव पदार्थों का अभाव नहीं होता।
3. फसलों का रोगों और कीटों से बचाव होता है।
4. खरपतवारों का नाश होता है।
5. भूमि की भौतिक दशा में सुधार होता है।
6. भूमि में विकार उत्पन्न नहीं होते।
7. फसल उत्पादन में खर्च कम होता है।
8. अधिक अन्न उत्पादन होता है।
9. किसान को ज़्यादा आर्थिक लाभ होता है और बाजार की मांग की पूर्ति भी की जा सकती है।
In simple words: फसल चक्र अपनाने से खेत की मिट्टी की ताकत बनी रहती है, बीमारी और खरपतवार कम होते हैं, ज़मीन की बनावट अच्छी रहती है और किसान को ज़्यादा फसल व ज़्यादा पैसा मिलता है।
🎯 Exam Tip: फसल चक्र का सबसे बड़ा लाभ मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है।
Question 14. सूरजमुखी की फसल में कीट एवं रोग नियंत्रण के बारे में वर्णन कीजिए।
Answer: सूरजमुखी की फसल को कीटों और रोगों से बचाना बहुत ज़रूरी है ताकि अच्छी पैदावार मिल सके।
**कीट नियंत्रण:** सूरजमुखी में कभी-कभी दीमक, हरे फुदके और चना के फली बेधक जैसे कीट लगते हैं। दीमक को रोकने के लिए क्लोरपायरीफॉस दवा बुवाई के समय खेत में मिला देनी चाहिए। हरे फुदके पत्तियों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं; इनके नियंत्रण के लिए एजाडिरेक्टिन 0.15 ई.सी. की 1 लीटर मात्रा को 600-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। चना के फली बेधक की सूंडियाँ फूलों और दानों को खा जाती हैं। इनकी रोकथाम के लिए क्विनालफॉस 25 ई.सी. की 2 लीटर मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
**रोग नियंत्रण:** खरीफ के मौसम में उगने वाली फसल में फफूंद से होने वाली अंगमारी बीमारी ज़्यादा होती है। इसे रोकने के लिए डाइथेन एम-45 की 2.5 किग्रा मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर 10-15 दिनों के अंतर पर दो या तीन बार छिड़काव करना चाहिए। यह उपाय फसल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
In simple words: सूरजमुखी की फसल को दीमक, हरे फुदके और फली बेधक जैसे कीटों से बचाना चाहिए। इसके लिए क्लोरपायरीफॉस, एजाडिरेक्टिन और क्विनालफॉस जैसी दवाएं सही मात्रा में इस्तेमाल करें। फफूंद से होने वाले रोगों के लिए डाइथेन एम-45 का छिड़काव करें।
🎯 Exam Tip: फसल को कीटों और रोगों से बचाने के लिए सही समय पर सही कीटनाशक और फफूंदनाशक का प्रयोग करना ज़रूरी है।
Question 15. गन्ने की उन्नतशील प्रजातियों एवं बुवाई की विधि का वर्णन कीजिए ।
Answer: गन्ने की उन्नतशील किस्में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होती हैं, जो अधिक उपज और कीट-रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं। इन किस्मों का चयन स्थानीय जलवायु और मिट्टी के प्रकार के आधार पर किया जाता है।
| क्षेत्र | अगेती जातियाँ | पछेती जातियाँ |
|---|---|---|
| पूर्वी क्षेत्र | बी. ओ. 47 को 687 | बी. ओ. 91 सी. एल. ओ. के. 8102 |
| मध्य क्षेत्र | को 510 को 64 | को 1147 को 1158 |
| पश्चिमी क्षेत्र | को 1336 को 6613 | को 161 को 802 |
| तराई क्षेत्र | को 1148 को 1136 | को 617 पी. ओ. 70 |
बुवाई की विधि: गन्ने की बुवाई मुख्य रूप से दो तरीकों से की जाती है - समतल विधि और नाली विधि। समतल विधि में खेत को अच्छी तरह तैयार करके छोटे-छोटे टुकड़ों (सेट्स) को कतारों में बोया जाता है और फिर मिट्टी से ढका जाता है। नाली विधि में पहले खेत में नालियां बनाई जाती हैं, उनमें गन्ने के टुकड़े रखकर मिट्टी से ढका जाता है। गन्ने की बुवाई के लिए स्वस्थ और रोग रहित बीजों का चुनाव महत्वपूर्ण है।
In simple words: गन्ने की अच्छी किस्में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग होती हैं, जैसे पूर्वी क्षेत्र में बी. ओ. 47 और मध्य क्षेत्र में को 510। बुवाई के लिए खेत तैयार करके गन्ने के छोटे टुकड़े ज़मीन में बोए जाते हैं, या तो सीधे खेत में या नालियां बनाकर।
🎯 Exam Tip: गन्ने की बुवाई करते समय, उन्नत किस्मों का चयन करना और सही बुवाई विधि का पालन करना अच्छी पैदावार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
Free study material for Agricultural Science
UP Board Solutions for Class 8 Agricultural Science Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र
Accessing Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र Solutions
Explore reliable textbook solutions for Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र tailored for Class 8 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official UP Board standards for Agricultural Science.
Concept-Driven Answers for Class 8 Agricultural Science
Each solution includes detailed reasoning to foster genuine comprehension of Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र concepts. Reviewing these step-by-step breakdowns allows learners to master both analytical and descriptive questions expected in school evaluations.
Maximizing Study Efficiency
These resources act as an effective roadmap for daily homework tasks and independent study. Supplement your review of Chapter 08 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र with official sample papers and interactive practice tests available on our platform free of charge.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 8 Agricultural Science Chapter 8 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 8 Agricultural Science are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 8 Agricultural Science Chapter 8 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Agricultural Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 8 Agricultural Science Chapter 8 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 8 Agricultural Science. You can access UP Board Solutions Class 8 Agricultural Science Chapter 8 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 8 Agricultural Science Chapter 8 सामान्य फास्लेन एवं फासल चक्र in printable PDF format for offline study on any device.