UP Board Solutions Class 8 Agricultural Science Chapter 1 Mrida gathan ya mrida kanaakaar

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UP Board Textbook Solutions for Class 8 Agricultural Science Chapter 1 मृदा गथं य मृदा कनाकार

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कृषि-विज्ञान

समस्त पाठों के 'अभ्यासों' का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

इकाई-1 मृदा गठन या मृदा कणाकार

अभ्यास

 

प्रश्न 1. सही विकल्प के सामने (✔) का निशान लगाइए (निशान लगाकर)

 

Question 1. मोटी बालू का आकार होता है
(क) 4.0-3.0 मिमी
(ख) 3.0-2.0 मिमी
(ग) 2.0-0.2 मिमी
(ध) 0.2 से .02
Answer: (ग) 2.0-0.2 मिमी
In simple words: मोटी बालू के कणों का व्यास 2.0 से 0.2 मिलीमीटर के बीच होता है। यह आकार कणों की बनावट को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: मिट्टी के विभिन्न कणों के आकार के वर्गीकरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये मृदा के गुणों को सीधे प्रभावित करते हैं।

 

Question 2. बलुई मिट्टी में बालू, सिल्ट एवं मृत्तिका की % मात्रा होती है
(क) 30-50 30-500-20
(ख) 80-1000 -200-20
(ग) 20-50 20-50 20-30
(घ) 0-20 50-70 30-50
Answer: (ख) 80-1000 -200-20
In simple words: बलुई मिट्टी में सबसे अधिक मात्रा में बालू होती है, जबकि सिल्ट और क्ले की मात्रा बहुत कम होती है। इस कारण यह मिट्टी हल्की और ढीली होती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में बालू, सिल्ट और मृत्तिका के प्रतिशत अनुपात को समझना मिट्टी के प्रकार को पहचानने में मदद करता है।

 

Question 3. ऊसर भूमि बनने का कारण है
(क) अत्यधिक वर्षा
(ख) घने जंगल होना
(ग) जल निकास अच्छा होना
(घ) क्षारीय उर्वरकों का अधिक मात्रा में उपयोग
Answer: (घ) क्षारीय उर्वरकों का अधिक मात्रा में उपयोग
In simple words: खेत में ज्यादा क्षारीय उर्वरक डालने से मिट्टी खराब होकर ऊसर हो जाती है। ऐसे में मिट्टी में लवणों की मात्रा बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: ऊसर भूमि के कारणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, ताकि ऐसी मिट्टी को बनने से रोका जा सके और उसका सुधार किया जा सके।

 

Question 4. ऊसर भूमि को सुधारा जा सकता है।
(क) चूना प्रयोग करके
(ख) जिप्सम प्रयोग करके
(ग) क्षारीय उर्वरकों का प्रयोग करके
(घ) क्षारीय उर्वरकों को अधिक मात्रा में उपयोग करके
Answer: (ख) जिप्सम प्रयोग करके
In simple words: ऊसर भूमि को ठीक करने के लिए जिप्सम का उपयोग किया जाता है। जिप्सम मिट्टी की अतिरिक्त क्षारीयता को कम करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: ऊसर भूमि सुधार के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न विधियों और उनके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को जानें।

 

Question 5. निम्नलिखित प्रश्नों में खाली जगह भरिए (भरकर)
(क) मृत्तिका का आकार 0.002 मिमी गिर्ग होता है। (0.2/0.002)
(ख) दोमट मिट्टी में सिल्ट की मात्रा 30-50 % नी हैं। (3050,80-100)
(ग) मेंड़बन्दी करना ऊसर भूमि सुधार की भौतिक विधि है। (रासा पनेक/भौतिक)
(घ) पायराइट का प्रयोग क्षारीय सुधार में किया जाता है। (अम्लीय/क्षारीय)
(छ) अम्लीय भूमि सुधार में चूना का प्रयोग होता है। (जिप्सम/चूना)
Answer:
(क) मृत्तिका का आकार 0.002 मिमी होता है।
(ख) दोमट मिट्टी में सिल्ट की मात्रा 30-50 % होती है।
(ग) मेंड़बन्दी करना ऊसर भूमि सुधार की भौतिक विधि है।
(घ) पायराइट का प्रयोग क्षारीय सुधार में किया जाता है।
(छ) अम्लीय भूमि सुधार में चूना का प्रयोग होता है।
In simple words: मिट्टी के कणों के आकार, विभिन्न मिट्टी के प्रकारों में सिल्ट की मात्रा और भूमि सुधार के तरीकों को समझना बहुत जरूरी है। यह मिट्टी के स्वास्थ्य और खेती के लिए फायदेमंद होता है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान की पूर्ति करते समय, दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त शब्द का चयन करें और सुनिश्चित करें कि वाक्य का अर्थ वैज्ञानिक रूप से सही रहे।

 

Question 6. निम्नलिखित कथनों में सी पर (✔) को तथा गलत पर (X) का निशान लगाइए (निशान लगाकर)
(क) मृदा में बालू सिल्ट और मृत्तिका कणों का विभिन्न मात्राओं में आपसी सम्बन्ध मृा गठन कहलाता है। (✔)
(ख) अच्छी गठन वाली मृदा में रन्ध्रों की संख्या बहुत कम होती है। (X)
(ग) भारत में ऊसर भूमि 170 लाख हेक्टेयर है। (X)
(घ) नहरों द्वारा अधिक सिंचाई करने से भूमि ऊसर नहीं होती है। (X)
(ङ) अम्लीय मृदा का PH 7.0 से बहुत कम होता है। (✔)
Answer:
(क) मृदा में बालू सिल्ट और मृत्तिका कणों का विभिन्न मात्राओं में आपसी सम्बन्ध मृदा गठन कहलाता है। (✔)
(ख) अच्छी गठन वाली मृदा में रन्ध्रों की संख्या बहुत कम होती है। (X)
(ग) भारत में ऊसर भूमि 170 लाख हेक्टेयर है। (X)
(घ) नहरों द्वारा अधिक सिंचाई करने से भूमि ऊसर नहीं होती है। (X)
(ङ) अम्लीय मृदा का PH 7.0 से बहुत कम होता है। (✔)
In simple words: यह अभ्यास मिट्टी की बनावट, अच्छी मिट्टी में हवा के स्थानों, भारत में ऊसर भूमि के क्षेत्रफल, सिंचाई के प्रभाव और अम्लीय मिट्टी के pH मान जैसे जरूरी तथ्यों को सही या गलत के रूप में पहचानना सिखाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और कृषि विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों के आधार पर उसकी सत्यता या असत्यता का मूल्यांकन करें।

 

Question 7. निम्नलिखित में स्तम्भ अ का स्तम्भ ब से सुमेल कीजिये (सुमेल करके)
Answer:
(क) बालू, सिल्ट व मृत्तिका कणों का आपसी सम्बन्ध – मृदा गठन
(ख) अधिक बालू की मात्रा – बलुई
(ग) लवण – रेह
(घ) निक्षालन – भौतिक विधि
(ङ) कार्बनिक खादों का प्रयोग – जैविक विधि
In simple words: सही जोड़ी बनाने के लिए, प्रत्येक शब्द या वाक्यांश को उसके सबसे उपयुक्त विवरण से मिलाएं। इससे मिट्टी और उससे संबंधित प्रक्रियाओं की समझ बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: कॉलम मिलान प्रश्नों में, पहले उन जोड़ियों को मिलाएं जिनके बारे में आप पूरी तरह से निश्चित हैं, और फिर शेष विकल्पों के लिए तर्क का उपयोग करें।

 

Question 8. मृदा गठन की परिभाषा लिखिए।
Answer: मृदा गठन का अर्थ है मिट्टी में बालू, सिल्ट और मृत्तिका (क्ले) जैसे विभिन्न आकार के कणों का आपस में जुड़ना या संबंधित होना। यह मिट्टी के अलग-अलग वर्गों में इन कणों के सापेक्षिक अनुपात को भी दर्शाता है, जिसे कणाकार भी कहते हैं। मृदा गठन मिट्टी की संरचना और उसके गुणों को प्रभावित करता है।
In simple words: मृदा गठन बताता है कि मिट्टी में बालू, सिल्ट और क्ले के कण कैसे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह तय करता है कि मिट्टी कैसी दिखेगी और महसूस होगी।

🎯 Exam Tip: परिभाषा लिखते समय, सभी प्रमुख घटकों (जैसे बालू, सिल्ट, मृत्तिका कण) और उनके आपसी संबंध का उल्लेख करना सुनिश्चित करें।

 

Question 9. मृदा कण एवं उनके आकार के विषय में लिखिए।
Answer: विभिन्न प्रकार के मिट्टी के कणों को उनके आकार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ये कण मिट्टी की बनावट और गुणों को प्रभावित करते हैं, जैसे उसकी जल धारण क्षमता। मुख्य मृदा कण और उनके आकार निम्न प्रकार हैं:

मृदा कणआकार (व्यास मिली मीटर में)
मोटी बालू2.0-0.2
बारीक बालू0.2-0.02
सिल्ट0.02-0.002
मृत्तिका (क्ले)0.002 मिमी से कम

In simple words: मिट्टी में अलग-अलग आकार के कण होते हैं, जैसे मोटी बालू, बारीक बालू, सिल्ट और क्ले। हर तरह के कण का एक खास आकार होता है जिसे मिलीमीटर में मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: मृदा के विभिन्न कणों (बालू, सिल्ट, मृत्तिका) और उनके सटीक आकार के मानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये मिट्टी के वर्गीकरण का आधार हैं।

 

Question 10. मुख्य कणाकार वर्ग लिखिए।
Answer: मुख्य कणाकार वर्ग मिट्टी में बालू, सिल्ट और मृत्तिका के प्रतिशत अनुपात के आधार पर वर्गीकृत किए जाते हैं। ये वर्ग मिट्टी के कृषि गुणों और जल धारण क्षमता को दर्शाते हैं। प्रमुख कणाकार वर्ग और उनमें कणों का प्रतिशत निम्न प्रकार से वर्गीकृत है:

मिट्टी का नाम (गठन वर्ग)बालू %सिल्ट %मृत्तिका %
बलुई80-1000-200-20
बलुई दोमट50-800-500-20
दोमट30-5030-500-20
सिल्टी0-2050-7030-50
चिकनी मिट्टी0-500-5030-100

In simple words: मुख्य मिट्टी के प्रकारों को याद रखना चाहिए, जैसे बलुई, दोमट और चिकनी मिट्टी। हर प्रकार में बालू, सिल्ट और क्ले की मात्रा अलग-अलग होती है, जो उसे खास बनाती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न कणाकार वर्गों के लिए बालू, सिल्ट और मृत्तिका के प्रतिशत की सीमाओं को सटीक रूप से जानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मिट्टी की पहचान में सहायक होता है।

 

Question 11. ऊसर भूमि की परिभाषा लिखिए |
Answer: ऊसर भूमि ऐसी जमीन को कहते हैं जहाँ पर सोडियम कार्बोनेट, सोडियम बाईकार्बोनेट और सोडियम क्लोराइड जैसे लवण बहुत ज्यादा मात्रा में होते हैं। इस कारण मिट्टी की ऊपरी सतह सफेद दिखाई देने लगती है और उसमें फसलें ठीक से नहीं उग पातीं। यह भूमि खेती के लिए अनुपयोगी हो जाती है।
In simple words: ऊसर भूमि वह जमीन है जिसमें बहुत ज्यादा नमक होता है, जिससे उसकी सतह सफेद दिखती है और फसलें ठीक से नहीं उग पातीं।

🎯 Exam Tip: ऊसर भूमि की परिभाषा में लवणों की अधिकता और इसके कारण फसलों का न उगना, इन दो मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 12. अम्लीय मृदा की परिभाषा लिखिए।
Answer: अम्लीय मृदा उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ बहुत अधिक वर्षा होती है। इन मिट्टियों में सड़े हुए जैविक पदार्थ बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। अम्लीयता के कारण इन मिट्टियों में हाइड्रोजन आयनों (H+) की सांद्रता ज्यादा होती है, जिससे उनका pH मान हमेशा 7 से कम होता है और उनमें उत्पादन कम या नहीं हो पाता। भारत में यह असम, केरल, त्रिपुरा, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, बिहार के तराई क्षेत्रों और हिमालय के कुछ स्थानों पर मिलती है।
In simple words: अम्लीय मिट्टी में pH मान 7 से कम होता है, इसमें हाइड्रोजन आयन ज्यादा होते हैं और यह ज्यादा बारिश वाले इलाकों में पाई जाती है।

🎯 Exam Tip: अम्लीय मिट्टी की पहचान के लिए उसके pH मान (हमेशा 7 से कम) और हाइड्रोजन आयनों की अधिकता पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 13. मृदा गठन एवं मृदा विन्यास में अन्तर लिखिए।
Answer: मृदा गठन का मतलब है कि मिट्टी किस तरह के कणों से बनी है, जैसे बलुई, बलुई दोमट, दोमट, सिल्टी या चिकनी मिट्टी। यह मिट्टी के कणों के आकार और उनके प्रतिशत अनुपात को बताता है। जबकि मृदा विन्यास का अर्थ है मिट्टी में मौजूद विभिन्न घटकों, जैसे खनिज पदार्थ (50%), मृदा वायु (25%), मृदा जल (24%) और जैविक पदार्थ (1%) का अनुपात। यह मिट्टी के समग्र संगठन और उसके भौतिक गुणों को दर्शाता है।
In simple words: मृदा गठन बताता है कि मिट्टी किस प्रकार के कणों (जैसे बालू) से बनी है, जबकि मृदा विन्यास बताता है कि मिट्टी में पानी, हवा और खनिज जैसे तत्व कितनी मात्रा में हैं।

🎯 Exam Tip: मृदा गठन और मृदा विन्यास के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, कणों के आकार और समग्र घटकों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 14. मृदा गठन क्या है? मृदा गठन वर्गों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: मृदा गठन का अर्थ है मिट्टी में बालू, सिल्ट और मृत्तिका (क्ले) जैसे विभिन्न आकार के कणों का आपस में जुड़ना या संबंधित होना। यह मिट्टी के अलग-अलग वर्गों में इन कणों के सापेक्षिक अनुपात को भी दर्शाता है, जिसे कणाकार भी कहते हैं। मृदा गठन मिट्टी की संरचना और उसके गुणों को प्रभावित करता है।
मुख्य कणाकार वर्ग मिट्टी में बालू, सिल्ट और मृत्तिका के प्रतिशत अनुपात के आधार पर वर्गीकृत किए जाते हैं। ये वर्ग मिट्टी के कृषि गुणों और जल धारण क्षमता को दर्शाते हैं। प्रमुख कणाकार वर्ग और उनमें कणों का प्रतिशत निम्न प्रकार से वर्गीकृत है:

मिट्टी का नाम (गठन वर्ग)बालू %सिल्ट %मृत्तिका %
बलुई80-1000-200-20
बलुई दोमट50-800-500-20
दोमट30-5030-500-20
सिल्टी0-2050-7030-50
चिकनी मिट्टी0-500-5030-100

In simple words: मृदा गठन बताता है कि मिट्टी में बालू, सिल्ट और क्ले जैसे कणों का मिश्रण कैसा है। इसके मुख्य प्रकार हैं बलुई, दोमट और चिकनी मिट्टी, जिनमें हर कण का प्रतिशत अलग होता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में मृदा गठन की परिभाषा और उसके प्रमुख वर्गीकरण दोनों को तालिका सहित स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 15. ऊसर भूमि किसे कहते हैं? ऊसर भूमि के प्रभाव का वर्णन कीजिए ।
Answer: ऊसर भूमि ऐसी जमीन को कहते हैं जहाँ पर सोडियम कार्बोनेट, सोडियम बाईकार्बोनेट और सोडियम क्लोराइड जैसे लवण बहुत ज्यादा मात्रा में होते हैं। इस कारण मिट्टी की ऊपरी सतह सफेद दिखाई देने लगती है और उसमें फसलें ठीक से नहीं उग पातीं। यह भूमि खेती के लिए अनुपयोगी हो जाती है।

ऊसर भूमि का प्रभाव:
1. ऊसर क्षेत्र में मकानों का प्लास्टर जल्दी गिरने लगता है, और ईंटें भी गलने लगती हैं।
2. कच्ची और पक्की सड़कें टूट-फूट जाती हैं और ऊबड़-खाबड़ दिखती हैं।
3. वर्षा होने पर जमीन बहुत फिसलन भरी हो जाती है।
4. जमीन पानी नहीं सोख पाती, जिससे बाढ़ आती है और मिट्टी का कटाव होता है।
5. हानिकारक घास उगने लगती है जो दूसरी फसलों को नुकसान पहुँचाती है।
6. लाभदायक जीवाणु कम होते हैं, जिससे मिट्टी में पोषक तत्व घट जाते हैं।
7. नमकीन होने के कारण बीजों का उगना और उनकी वृद्धि अच्छी नहीं होती है।
8. ऊसर पर्यावरण को प्रदूषित करती है, जिससे आसपास की मिट्टी पर भी बुरा असर पड़ता है।
9. ऊसर भूमि बहकर अच्छे खेतों को भी खराब कर देती है।
In simple words: ऊसर भूमि में बहुत नमक होता है, जिससे फसलें नहीं उगतीं। इसके कारण घर खराब होते हैं, सड़कें टूटती हैं, जमीन पानी नहीं सोखती और पर्यावरण को भी नुकसान होता है।

🎯 Exam Tip: ऊसर भूमि की परिभाषा के साथ-साथ उसके पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों को बिंदुवार स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. ऊसर भूमि बनने के विभिन्न कारणों का वर्णन विस्तार से कीजिए।
Answer: ऊसर भूमि बनने के कई प्राकृतिक और अप्राकृतिक कारण होते हैं जो मिट्टी की उर्वरता को कम करते हैं।

प्राकृतिक कारण:
1. वर्षा की कमी और अत्यधिक तापमान के कारण मिट्टी की सतह पर लवण जमा हो जाते हैं।
2. मिट्टी का निर्माण यदि क्षारीय और लवणयुक्त चट्टानों से हुआ हो।
3. भूमिगत जलस्तर का बहुत ऊँचा होना, जिससे जमीन में मौजूद लवण सतह पर आ जाते हैं।
4. मिट्टी के नीचे एक कड़ी परत का होना, जो पानी को गहराई में जाने से रोकती है।
5. लगातार बाढ़ या सूखे की स्थिति का होना, जिससे पानी का जमाव या वाष्पीकरण बढ़ जाता है।

अप्राकृतिक या मानवीय कारण:
1. जल निकास की कमी से पानी खेतों में जमा हो जाता है और लवण ऊपर आ जाते हैं।
2. अत्यधिक सिंचाई, खासकर नहरों वाले क्षेत्रों में जल रिसाव के कारण।
3. भूमि को परती छोड़ देना, जिससे लवणों का जमाव बढ़ जाता है।
4. क्षारीय उर्वरकों का बहुत ज्यादा उपयोग करना, जिससे मिट्टी का संतुलन बिगड़ता है।
5. खारे पानी से सिंचाई करना, जो सीधे मिट्टी में लवणों की मात्रा बढ़ाता है।
In simple words: ऊसर भूमि प्राकृतिक कारणों जैसे कम बारिश और ऊंचे जलस्तर से बन सकती है। यह इंसानी गलतियों जैसे खराब पानी निकासी और ज्यादा खाद के इस्तेमाल से भी बनती है, जिससे मिट्टी में नमक बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: ऊसर भूमि बनने के कारणों को प्राकृतिक और मानवीय (अप्राकृतिक) श्रेणियों में बांटकर विस्तृत रूप से समझाएं।

 

Question 17. ऊसर भूमि का सुधार कैसे करेंगे? सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: ऊसर भूमि को सुधारने के लिए पहले कुछ खेत विकास कार्य करने होते हैं, जैसे मेंड़बन्दी करना, जमीन को समतल करना, पानी का सही इंतजाम करना और जल निकास की व्यवस्था करना। फिर 8-10 सेमी गहरी जुताई करके खेत तैयार किया जाता है। ऊसर भूमि के प्रकार के अनुसार भौतिक, रासायनिक और जैविक सुधार विधियों को अपनाना चाहिए।

(क) भौतिक विधि- निम्न प्रकार हैं:
1. भूमि की ऊपरी परत को खुरचकर बाहर निकालना।
2. भूमि में पानी भरकर बहाना, जिससे लवण घुल कर निकल जाएं।
3. जल निकास का सही प्रबंध करना, ताकि पानी जमा न हो।
4. निक्षालन और रिसाव (लीचिंग) क्रिया को अपनाना, जिससे लवण नीचे चले जाएं।
5. भूमि के नीचे की कड़ी परत को तोड़ना, ताकि पानी का बहाव बेहतर हो।
6. ऊसर खेत में बलुई या अच्छी मिट्टी का प्रयोग करना, जिससे बनावट सुधरे।

(ख) रासायनिक विधियाँ-
मिट्टी की जाँच कराकर जिप्सम, पाइराइट या गंधक का प्रयोग किया जाता है। ये रसायन मिट्टी की क्षारीयता को कम करते हैं।

(ग) जैविक विधियाँ-
चीनी मिल से निकलने वाले शीरे का प्रयोग, प्रेसमड, कार्बनिक खाद और हरी खाद के रूप में ढैंचा की खेती करना। साथ ही, ऊसर सहनशील फसलों और प्रजातियों की खेती करना, जो लवणों को सह सकें।
In simple words: ऊसर भूमि को ठीक करने के लिए पहले खेत को तैयार करते हैं। फिर अलग-अलग तरीकों जैसे मिट्टी की ऊपरी परत हटाना, पानी बहाना, जिप्सम डालना, या जैविक खाद का उपयोग करना, इन सब से इसे ठीक करते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊसर भूमि सुधार की प्रक्रिया में भूमि तैयारी के साथ-साथ भौतिक, रासायनिक और जैविक विधियों को उनके उदाहरणों सहित स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 18. अम्लीय मृदा बनने के कारण एवं उसके सुधार की विधियों को लिखिए।
Answer: अम्लीय मृदा बनने के कई कारण होते हैं और इसे सुधारने के लिए विभिन्न विधियाँ अपनाई जाती हैं।

अम्लीय मृदा बनने के कारण:
1. ज्यादा बारिश होने से निक्षालन क्रिया द्वारा क्षारीय तत्व मिट्टी की गहरी परतों में चले जाते हैं। इससे मिट्टी के कणों के साथ हाइड्रोजन आयन जुड़ जाते हैं और मिट्टी अम्लीय हो जाती है।
2. फसलों द्वारा क्षारीय तत्वों का ज्यादा उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी अम्लीय हो जाती है क्योंकि क्षारक तत्व कम हो जाते हैं।
3. कुछ मिट्टी ऐसी अम्लीय चट्टानों से बनी होती है जो स्वभाव से ही अम्लीय गुण दिखाती हैं।
4. रासायनिक उर्वरकों के प्रभाव से भी मिट्टी अम्लीय बन जाती है। उदाहरण के लिए, अमोनियम सल्फेट की अमोनिया मिट्टी के कणों से जुड़ जाती है, लेकिन सल्फेट घोल बच जाता है जो मिट्टी द्वारा छोड़े गए हाइड्रोजन आयनों (H+) से मिलकर सल्फ्यूरिक अम्ल बनाता है, जिससे मिट्टी अम्लीय हो जाती है।
5. बंजर भूमि पर कृषि कार्य करने पर मिट्टी से क्षारकों के बहकर नीचे जाने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। धीरे-धीरे मिट्टी के क्षार खत्म हो जाते हैं और उनकी जगह हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है।

अम्लीय मिट्टी का सुधार:
1. चूने का प्रयोग करके मिट्टी की अम्लीयता को कम किया जाता है, क्योंकि चूना क्षारकीय होता है।
2. जल निकास की उचित व्यवस्था करना, ताकि पानी जमा न हो और अम्लीयता न बढ़े।
3. अम्ल प्रतिरोधी फसलों को उगाना जो अम्लीय मिट्टी में भी पनप सकें।
4. क्षारक उर्वरकों का प्रयोग करना जो मिट्टी की अम्लीयता को संतुलित कर सकें।
5. पोटाशयुक्त उर्वरकों का प्रयोग करना, क्योंकि ये मिट्टी की उर्वरता सुधारते हैं।
ये सभी उपाय अम्लीय मिट्टी को सुधारने में मदद करते हैं और उसकी उत्पादकता बढ़ाते हैं।
In simple words: अम्लीय मिट्टी ज्यादा बारिश, ज्यादा फसल उपयोग और कुछ खादों के कारण बनती है। इसे चूना डालकर, पानी निकालकर और सही फसलें उगाकर ठीक किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरती है।

🎯 Exam Tip: अम्लीय मृदा बनने के कारणों को क्रमबद्ध तरीके से बताएं और सुधार विधियों को स्पष्ट और संक्षिप्त बिंदुओं में प्रस्तुत करें।

 

प्रोजेक्ट कार्य

नोट : विद्यार्थी स्वयं करें।

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