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Detailed Chapter 8 जीवन में श्वास UP Board Solutions for Class 7 Science
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Class 7 Science Chapter 8 जीवन में श्वास UP Board Solutions PDF
अभ्यास-प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित में सही विकल्प छाँटकर अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए-
(a) कॉकरोच में श्वसन होता है-
(अ) फेफड़ों द्वारा
(ब) श्वासरन्ध्रों द्वारा
(स) गिल्स द्वारा
(द) त्वचा द्वारा
Answer: (ब) श्वासरन्ध्रों द्वारा
In simple words: कॉकरोच के शरीर पर छोटे-छोटे छेद होते हैं जिन्हें श्वासरंध्र कहते हैं। वह इन्हीं छेदों से साँस लेता है, फेफड़ों, गिल्स या त्वचा से नहीं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि विभिन्न जीव अलग-अलग अंगों से श्वसन करते हैं। कॉकरोच जैसे कीटों में श्वासरंध्र होते हैं, जबकि मछलियों में गिल्स और इंसानों में फेफड़े होते हैं।
(b) श्वासोच्छ्वास में किसकी भूमिका नहीं होती है-
(अ) पसलियाँ
(ब) फेफड़े
(स) डायाफ्राम
(द) नासाद्वार
Answer: (अ) पसलियाँ
In simple words: साँस लेने और छोड़ने की क्रिया में पसलियाँ सीधे तौर पर मदद नहीं करतीं। इस प्रक्रिया में फेफड़े, डायाफ्राम और नाक के रास्ते मुख्य भूमिका निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: श्वासोच्छ्वास (साँस लेना-छोड़ना) एक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसमें डायाफ्राम और फेफड़ों की मुख्य भूमिका होती है, जबकि पसलियाँ सीधे शामिल नहीं होती हैं।
(c) 'ㅠ' के आकार के छल्ले जैसी संरचना होती हैं-
(अ) श्वासनली में
(ब) मुख गुहा में
(स) ग्रसनी में
(द) फेफड़े में
Answer: (अ) श्वासनली में
In simple words: हमारी साँस की नली (श्वासनली) में 'π' जैसे आकार के छल्ले होते हैं। ये छल्ले श्वासनली को हमेशा खुला रखते हैं ताकि साँस लेने में आसानी हो।
🎯 Exam Tip: श्वासनली में मौजूद उपास्थि के छल्ले श्वासनली को पिचकने से बचाते हैं, जिससे हवा का रास्ता हमेशा खुला रहता है।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करिए-
(क) नासिका की गुहा को नासागुहा कहते हैं।
(ख) नासागुहा की दीवार पर श्लेष्म ग्रन्थियाँ होती हैं।
(ग) व्यायाम करते समय श्वसन दर बढ़ जाती है।
(घ) कॉकरोच श्वासरंध्र द्वारा श्वसन करता है।
(ङ) श्वसन क्रिया में ऊर्जा खर्च होती है।
Answer:
(क) नासिका की गुहा को नासागुहा कहते हैं।
(ख) नासागुहा की दीवार पर श्लेष्म ग्रन्थियाँ होती हैं।
(ग) व्यायाम करते समय श्वसन दर बढ़ जाती है।
(घ) कॉकरोच श्वासरंध्र द्वारा श्वसन करता है।
(ङ) श्वसन क्रिया में ऊर्जा खर्च होती है।
In simple words: नाक के अंदर की खाली जगह को नासागुहा कहते हैं। इसकी दीवारों पर श्लेष्म ग्रंथियाँ होती हैं जो हवा को साफ करती हैं। कसरत करते समय साँस लेने की गति तेज हो जाती है। कॉकरोच अपने शरीर के छोटे छेदों (श्वासरंध्र) से साँस लेता है, और साँस लेने की पूरी प्रक्रिया में शरीर की ऊर्जा लगती है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, सुनिश्चित करें कि आपका उत्तर वाक्य के व्याकरणिक अर्थ और वैज्ञानिक तथ्य दोनों के अनुरूप हो।
Question 3. निम्नलिखित कथनों में सही के सामने सही (√) तथा गलत के सामने (X) का चिह्न लगाइए-
(क) अत्यधिक व्यायाम करते समय व्यक्ति की श्वसन दर धीमी हो जाती है। (X)
(ख) अंतः श्वसन में ऑक्सीजन युक्त वायु ग्रहण की जाती है। (√)
(ग) मेंढ़क, त्वचा एवं फेफड़े दोनों के माध्यम से श्वसन करते हैं। (√)
(घ) उच्छ्वासन को निःश्वसन भी कहते हैं। (√)
(ङ) पेड़ - पौधे रन्ध्रों द्वारा श्वसन करते हैं। (√)
Answer:
(क) अत्यधिक व्यायाम करते समय व्यक्ति की श्वसन दर धीमी हो जाती है। (X)
(ख) अंतः श्वसन में ऑक्सीजन युक्त वायु ग्रहण की जाती है। (√)
(ग) मेंढ़क, त्वचा एवं फेफड़े दोनों के माध्यम से श्वसन करते हैं। (√)
(घ) उच्छ्वासन को निःश्वसन भी कहते हैं। (√)
(ङ) पेड़ - पौधे रन्ध्रों द्वारा श्वसन करते हैं। (√)
In simple words: जब हम ज़्यादा कसरत करते हैं तो हमारी साँस की गति बढ़ती है, धीमी नहीं होती (कथन गलत)। साँस अंदर लेते समय हम ऑक्सीजन वाली हवा अंदर लेते हैं (कथन सही)। मेंढक अपनी त्वचा और फेफड़ों दोनों से साँस लेते हैं (कथन सही)। साँस बाहर छोड़ने को निःश्वसन भी कहते हैं (कथन सही)। पेड़-पौधे अपनी पत्तियों के छोटे छेदों (रंध्रों) से साँस लेते हैं (कथन सही)।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सही या गलत पहचानें। याद रखें कि श्वसन दर व्यायाम के दौरान बढ़ती है।
Question 4. सही मिलान करिए-
स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(क) अंतः श्वसन में (अ) फेफड़े स्थित होते हैं।
(ख) श्वासोच्छवास (ब) ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है
(ग) निःश्वसन में- (स) अंतःश्वसन + उच्छ्वसन
(घ) वक्ष गुहा में (द) कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी जाती है।
Answer:
(क) अंतः श्वसन में (ब) ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है
(ख) श्वासोच्छवास (स) अंतःश्वसन + उच्छ्वसन
(ग) निःश्वसन में (द) कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी जाती है।
(घ) वक्ष गुहा में (अ) फेफड़े स्थित होते हैं।
In simple words: अंतःश्वसन में हम ऑक्सीजन लेते हैं। श्वासोच्छवास में साँस अंदर लेना और बाहर छोड़ना दोनों शामिल हैं। निःश्वसन में कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है, और फेफड़े हमारी छाती के अंदर, वक्ष गुहा में होते हैं।
🎯 Exam Tip: मिलान करते समय, प्रत्येक शब्द या वाक्यांश के सही अर्थ को समझें और फिर उसे संबंधित विवरण से मिलाएँ। श्वसन से संबंधित प्रक्रियाओं और अंगों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) श्वसन किसे कहते हैं ?
Answer: श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें हम वातावरण से ऑक्सीजन वाली हवा अंदर लेते हैं और शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड वाली हवा बाहर निकालते हैं। यह पूरी प्रक्रिया नाक से शुरू होकर फेफड़ों तक और फिर वापस बाहर होती है। इस प्रक्रिया से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है, जो सभी कामों के लिए ज़रूरी है।
In simple words: साँस अंदर लेना और बाहर छोड़ना, इसी पूरी प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं। इसमें ऑक्सीजन अंदर लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ते हैं, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।
🎯 Exam Tip: श्वसन की परिभाषा में ऑक्सीजन लेना, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना, और ऊर्जा उत्पादन - इन तीनों मुख्य बातों को शामिल करना न भूलें।
(ख) श्वासोच्छवास से आप क्या समझते हैं ?
Answer: श्वासोच्छवास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम बाहर की हवा को नाक से फेफड़ों तक ले जाते हैं (जिसे अंतःश्वसन कहते हैं) और फिर फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड वाली हवा को नाक से बाहर निकालते हैं (जिसे उच्छवसन कहते हैं)। ये दोनों शारीरिक प्रक्रियाएँ मिलकर श्वासोच्छवास कहलाती हैं। यह गैसों के आदान-प्रदान के लिए एक यांत्रिक प्रक्रिया है।
In simple words: श्वासोच्छवास का मतलब है साँस अंदर लेना (ऑक्सीजन) और साँस बाहर छोड़ना (कार्बन डाइऑक्साइड)। यह एक साथ होने वाली प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: श्वासोच्छवास को 'साँस लेना-छोड़ना' भी कहते हैं। इसे श्वसन से अलग समझना ज़रूरी है, क्योंकि श्वसन में कोशिकाओं में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया भी शामिल होती है।
(ग) श्वासोच्छवास एवं श्वसन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: श्वासोच्छवास सिर्फ साँस अंदर लेने और बाहर छोड़ने का काम है, जिसमें हवा फेफड़ों तक आती और जाती है। यह श्वसन का सिर्फ एक यांत्रिक हिस्सा है। दूसरी ओर, श्वसन एक बहुत बड़ी और जटिल प्रक्रिया है। इसमें साँस से ली गई ऑक्सीजन खून के ज़रिए शरीर की हर कोशिका तक पहुँचती है। वहाँ यह भोजन को तोड़कर ऊर्जा बनाती है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है। यह पूरी रासायनिक क्रिया श्वसन कहलाती है और जीवन के लिए ज़रूरी है।
In simple words: श्वासोच्छवास का मतलब है हवा को अंदर-बाहर करना। श्वसन एक बड़ी प्रक्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन से भोजन को तोड़कर ऊर्जा बनती है और कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। श्वासोच्छवास श्वसन का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय, श्वासोच्छवास को एक यांत्रिक प्रक्रिया (गैसों का आदान-प्रदान) और श्वसन को एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया (ऊर्जा उत्पादन) के रूप में परिभाषित करें।
(घ) मानव के श्वसन अंगों का सचित्र वर्णन कीजिए ।
Answer: मानव श्वसन प्रणाली में नाक, श्वासनली, ब्रोंकाई और फेफड़े जैसे मुख्य अंग शामिल हैं। हवा नाक से प्रवेश करती है, नासागुहा से होकर गले में जाती है, फिर श्वासनली से होते हुए ब्रोंकाई और अंत में फेफड़ों तक पहुँचती है। फेफड़ों में छोटे-छोटे वायुकोष होते हैं जहाँ ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड गैसों का आदान-प्रदान होता है। इन अंगों के ठीक से काम करने से ही हम साँस ले पाते हैं। इन अंगों का चित्र बनाकर वर्णन करना चाहिए।
In simple words: इंसान के शरीर में साँस लेने के लिए नाक, साँस की नली (श्वासनली) और फेफड़े होते हैं। साँस इन्हीं रास्तों से अंदर और बाहर जाती है। फेफड़ों में ही हवा से ऑक्सीजन खून में जाती है।
🎯 Exam Tip: सचित्र वर्णन में, मानव श्वसन प्रणाली के सभी मुख्य अंगों (नाक, नासागुहा, ग्रसनी, श्वासनली, ब्रोंकाई, फेफड़े, डायाफ्राम) को स्पष्ट रूप से नामांकित करें और प्रत्येक के कार्य को संक्षेप में समझाएँ।
(ङ) पौधे किस प्रकार श्वसन करते हैं ?
Answer: पौधे अपनी पत्तियों में छोटे-छोटे छिद्रों से साँस लेते हैं, जिन्हें रंध्र (स्टोमेटा) कहते हैं। इन रंध्रों के ज़रिए वे वातावरण से ऑक्सीजन अंदर लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम साँस लेते हैं। इसके अलावा, पौधों के तने पर छोटे छिद्र और जड़ों की सतह से भी गैसों का आदान-प्रदान होता है। यह प्रक्रिया पौधों को जीवित रहने में और अपनी जैविक क्रियाओं के लिए ऊर्जा बनाने में मदद करती है।
In simple words: पौधों की पत्तियों पर छोटे छेद होते हैं, जिन्हें रंध्र कहते हैं। इन्हीं छेदों से पौधे ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों में श्वसन के लिए रंध्रों (स्टोमेटा) की भूमिका को उजागर करना महत्वपूर्ण है। यह भी उल्लेख कर सकते हैं कि तने पर लेंसिकल और जड़ों द्वारा भी श्वसन होता है।
Question 6. रात्रि में वृक्षों के नीचे क्यों नहीं सोना चाहिए?
Answer: पेड़ दिन के समय सूरज की रोशनी में अपना भोजन बनाते हैं, जिसे प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं। इस प्रक्रिया में वे ऑक्सीजन छोड़ते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं। लेकिन रात में, जब सूरज की रोशनी नहीं होती, तो वे प्रकाश-संश्लेषण नहीं करते। रात में पेड़ भी हमारी तरह साँस लेते हैं, जिसका मतलब है कि वे ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। ऐसे में, रात में पेड़ के नीचे हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड एक हानिकारक गैस है; इसकी अधिकता से साँस लेने में दिक्कत हो सकती है, घुटन महसूस हो सकती है और यह स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसी कारण रात्रि में पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए।
In simple words: पेड़ दिन में ऑक्सीजन देते हैं, लेकिन रात में वे भी ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। इसलिए रात में पेड़ के नीचे हवा में ऑक्सीजन कम और कार्बन डाइऑक्साइड ज़्यादा होती है, जो सेहत के लिए अच्छी नहीं है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, दिन और रात में पौधों की गैस विनिमय प्रक्रियाओं (प्रकाश-संश्लेषण और श्वसन) के बीच अंतर स्पष्ट करना सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।
Question 7. मछली किस प्रकार श्वसन करती है, सचित्र वर्णन कीजिए ।
Answer: मछली एक जलीय जीव है और पानी में घुली ऑक्सीजन से साँस लेती है। उसके शरीर में गलफड़े (क्लोम) नाम के खास अंग होते हैं जो सिर के दोनों तरफ होते हैं। मछली अपने मुँह से पानी अंदर लेती है, और यह पानी गलफड़ों से होकर गुज़रता है। गलफड़े पानी को फिल्टर करके उसमें से घुली हुई ऑक्सीजन को अपने रक्त में मिला लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को पानी में छोड़ देते हैं। इस तरह मछली पानी के अंदर भी आसानी से साँस ले पाती है। नीचे मछली के गलफड़ों का एक साधारण चित्र दिया गया है:
In simple words: मछलियाँ पानी में साँस लेती हैं। उनके पास गलफड़े (क्लोम) होते हैं जो पानी से ऑक्सीजन निकाल लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ देते हैं।
🎯 Exam Tip: मछली के श्वसन तंत्र का वर्णन करते समय, 'गलफड़े' या 'क्लोम' शब्द का उपयोग करना और पानी के प्रवाह और गैसों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को समझाना महत्वपूर्ण है।
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