UP Board Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 13 Yaksha Yudhishthira Samvadah

Official UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit: Chapter 13 यक्ष युधिष्ठिर संवादः

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Chapter-wise Solutions for Sanskrit: Chapter 13 यक्ष युधिष्ठिर संवादः

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शब्दार्था:

किंस्वित् = कौन, खात् = आकाश से, बहुतरम् = अपेक्षाकृत अधिक, प्रवसतः = पर देश में रहने वाले का, आतुरस्य = रोगी का, दुर्जयः = कठिनाई से जीतने योग्य, पुंसाम् = मनुष्यों का, अनन्तकः = कभी अन्त न होने वाला, सर्वभूतहितः = सभी प्राणियों का हित करने वाला।

🎯 Exam Tip: संस्कृत के शब्दार्थों को याद करने से पाठ को समझना बहुत आसान हो जाता है, जिससे आप प्रश्नों के उत्तर बेहतर ढंग से दे पाते हैं।

 

Question 1. पृथ्वी पर गुरु से बड़ा कौन है? आसमान से ऊँचा कौन है? वायु से ज्यादा तेज कौन है? ईंधन से ज्यादा जलाने वाला कौन है?
Answer: धरती पर माँ सबसे भारी होती है। पिता आकाश से भी ऊँचे होते हैं। मन हवा से भी तेज चलता है। चिंता की आग ईंधन से भी ज्यादा जलाती है। ये सभी बातें जीवन के गहरे सत्यों को बताती हैं कि कौन किससे श्रेष्ठ है।
In simple words: माँ धरती से भारी है। पिता आसमान से ऊँचे हैं। मन हवा से तेज है। चिंता आग से ज्यादा जलाती है।

🎯 Exam Tip: इन प्रश्नों के उत्तर याद रखने के लिए, प्रत्येक तुलना को एक छोटी और सरल कहानी के रूप में सोचें, जैसे माँ की महानता या मन की गति।

 

Question 2. परदेश में मित्र कौन है? घर में मित्र कौन है? बीमार का मित्र कौन है? मरने वाले का मित्र कौन है?
Answer: जब कोई व्यक्ति विदेश में होता है, तो धन उसका सबसे अच्छा दोस्त होता है। घर में, पत्नी ही सबसे अच्छी मित्र होती है। बीमार व्यक्ति का मित्र डॉक्टर होता है। और जो व्यक्ति मरने वाला होता है, उसका सच्चा मित्र दान होता है, क्योंकि यह उसके पुण्य कर्मों को बढ़ाता है। ये उत्तर जीवन के अलग-अलग पड़ावों में सच्ची मित्रता के महत्व को दर्शाते हैं।
In simple words: विदेश में पैसा दोस्त है। घर में पत्नी दोस्त है। बीमार का डॉक्टर दोस्त है। मरने वाले का दान दोस्त है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक परिस्थिति के लिए सही मित्र को पहचानना महत्वपूर्ण है। अपने जीवन की स्थितियों के अनुसार इन मित्रों को याद रखें।

 

Question 3. मनुष्य का अजेय शत्रु कौन है? और कभी न अन्त होने वाली व्याधि क्या है? किसको साधु (सज्जन) कहा जाता है? असाधु (दुर्जन) कौन माना जाता है?
Answer: मनुष्य का सबसे मुश्किल शत्रु क्रोध है, जिसे जीतना बहुत कठिन है। कभी खत्म न होने वाला रोग लालच है। सभी जीवों का भला सोचने वाला व्यक्ति सज्जन (अच्छा आदमी) कहलाता है। और जो व्यक्ति निर्दयी (जिसमें दया न हो) होता है, उसे असाधु (बुरा आदमी) कहते हैं। क्रोध और लोभ दोनों ही हमारे मन को अशांत करते हैं। ये गुण और अवगुण हमें सिखाते हैं कि हमें कैसा जीवन जीना चाहिए।
In simple words: मनुष्य का दुश्मन क्रोध है। खत्म न होने वाली बीमारी लालच है। सब का भला करने वाला सज्जन है। निर्दयी व्यक्ति असाधु है।

🎯 Exam Tip: इन नैतिक गुणों और अवगुणों को याद रखना आपको पाठ के मुख्य संदेश को समझने में मदद करेगा। उत्तरों में क्रोध, लोभ, सज्जन और असाधु शब्दों को सही ढंग से प्रयोग करें।

 

Question 4. किस पुरुष को पंडित माना जाता है? नास्तिक किसको कहते हैं? मूर्ख कौन होता है, कामी किसको कहते हैं और कौन ईर्ष्यालु होता है?
Answer: वह व्यक्ति जो धर्म के नियमों को जानता है, उसे पंडित कहते हैं। जो ईश्वर को नहीं मानता, उसे नास्तिक और मूर्ख कहते हैं। जिसे संसार की वस्तुओं की बहुत इच्छा होती है, उसे कामी कहते हैं। और जिसके मन में दूसरों को देखकर जलन होती है, उसे ईर्ष्यालु कहते हैं। ये परिभाषाएँ हमें अलग-अलग मानवीय स्वभावों को समझने में मदद करती हैं।
In simple words: धर्म जानने वाला पंडित है। ईश्वर को न मानने वाला नास्तिक और मूर्ख है। संसार की इच्छा रखने वाला कामी है। जलन करने वाला ईर्ष्यालु है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक पद की सही परिभाषा को याद रखें। इन पदों का उपयोग अक्सर संस्कृत साहित्य में नैतिक शिक्षा देने के लिए किया जाता है।

अभ्यासः

 

Question 1. उच्चारणं कुरुत पुस्तिकायां च लिखत
Answer: छात्रों को सभी शब्दों का सही उच्चारण करके अपनी कॉपी में लिखना चाहिए।
In simple words: विद्यार्थी शब्दों का उच्चारण करें और कॉपी में लिखें।

🎯 Exam Tip: सही उच्चारण और लेखन अभ्यास से संस्कृत के शब्दों को याद करना और समझना आसान हो जाता है।

 

Question 2. अधोलिखितानि यक्षस्य प्रश्नान् युधिष्ठिरस्य च उत्तराणि पठित्वा मननं कुरुत
Answer: छात्रों को यक्ष और युधिष्ठिर के दिए गए प्रश्नों और उनके उत्तरों को ध्यान से पढ़कर उन पर विचार करना चाहिए।
In simple words: छात्र यक्ष और युधिष्ठिर के सवाल-जवाब पढ़ें और उन पर सोचें।

🎯 Exam Tip: प्रश्न-उत्तरों पर मनन करने से पाठ का गहरा अर्थ समझ में आता है और नैतिक शिक्षाएँ भी मिलती हैं।

 

Question 3. संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत (अनुवाद करके)
(क) देवदत्त प्रभाकर की अपेक्षा चतुर है।
(ख) यह मिठाई उस मिठाई से मधुर है।
(ग) विन्ध्याचल से हिमालय ऊँचा है।
(घ) ज्ञान से आचरण श्रेष्ठ है।
(ङ) नीम से नारियल बड़ा है।
Answer:
(क) देवदत्तः प्रभाकरस्य अपेक्षया चतुरः अस्ति । (देवदत्त, प्रभाकर से ज्यादा चतुर है।)
(ख) इदं मिष्टान्नं तत् मिष्टान्ने अपेक्षम मधुरम् अस्ति। (यह मिठाई उस दूसरी मिठाई से ज्यादा मीठी है।)
(ग) विन्ध्याचलात् हिमालयः उच्चः अस्ति । (विन्ध्याचल पर्वत से हिमालय पर्वत अधिक ऊँचा है।)
(घ) ज्ञानात् आचरणं श्रेष्ठम् । (केवल ज्ञान होने से भी अच्छा आपका व्यवहार (आचरण) है।)
(ङ) निम्बात् वृहत्तरः नारिकेलः अस्ति । (नारियल का पेड़ नीम के पेड़ से बड़ा होता है।)
In simple words: यहाँ दिए गए वाक्यों को संस्कृत में लिखा गया है और उनका हिंदी अर्थ भी बताया गया है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत अनुवाद करते समय व्याकरण के नियमों जैसे कारक और विभक्ति का ध्यान रखें। शब्दों का सही रूप प्रयोग करना बहुत जरूरी है।

 

Question 4. उपयुक्तकथनानां समक्षम् ‘आम्’ अनुपयुक्तकथनानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत (लिखकर)
Answer:
(क) माता भूमेः गुरुतरा अस्ति। आम् (माँ धरती से भारी होती है। हाँ)
(ख) मनः वातात् शीघ्रतरं न (मन हवा से तेज है। नहीं)
(ग) आतुरस्य धनं मित्रम् । न (बीमार व्यक्ति का मित्र धन होता है। नहीं)
(घ) दुर्जयः शत्रुः क्रोधः आम् (क्रोध एक ऐसा शत्रु है जिसे जीतना कठिन है। हाँ)
(ङ) निर्दयः असाधुः स्मृतः । आम् (निर्दयी व्यक्ति को असाधु कहते हैं। हाँ)
In simple words: यहाँ हर वाक्य के सामने 'हाँ' (आम्) या 'नहीं' (न) लिखा है, यह बताने के लिए कि वह बात सही है या गलत।

🎯 Exam Tip: पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर 'आम्' या 'न' का चयन करें। प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और फिर निर्णय लें।

 

Question 5. अधोलिखितपदानि प्रयुज्य वाक्यरचनां कुरुत (करके)
Answer:
यथा- उवाच = यक्षः युधिष्ठिरम् उवाच ।
कीदृशः = पिता कीदृशः अस्ति?
माता = माता कीदृशी अस्ति?
क्रोध = क्रोधः दुर्गुणः अस्ति ।
In simple words: यहाँ कुछ शब्दों का उपयोग करके वाक्य बनाए गए हैं।

🎯 Exam Tip: शब्दों का प्रयोग करके वाक्य बनाते समय, उनके अर्थ और व्याकरणिक रूप का सही ढंग से मिलान करें ताकि वाक्य सही लगे।

 

Question 6. निम्नलिखितपदानां विलोमपदं लिखत
Answer:
यथा- गुरुतरम् = लघुतरम्
मूर्ख = विद्वान
नास्तिक = शत्रु
शत्रुः = मित्रम्
साधु = असाधु
In simple words: यहाँ कुछ शब्दों के उल्टे अर्थ (विलोम शब्द) दिए गए हैं।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्दों को याद करने से आपकी संस्कृत शब्दावली बढ़ती है। यह सुनिश्चित करें कि आप शब्दों के सही विपरीतार्थी जानते हैं।

 

Question 7. रेखांकितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
Answer:
यथा- भूमेः गुरुतरा माता । भूमेः गुरुतरा का?
(क) पिता खात् उच्चतरः । कः खात् उच्चतरः?
(ख) निर्दयः असाधुः स्मृतः । कीदृशः असाधुः स्मृतिः?
(ग) सर्वभूतहितः साधु स्मृतः । कीदृशः साधुः स्मृतः?
In simple words: यहाँ वाक्यों में रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न बनाए गए हैं।

🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, रेखांकित शब्द के लिए सही प्रश्नवाचक शब्द का प्रयोग करें और वाक्य के अर्थ को बनाए रखें।

नोट – विद्यार्थी शिक्षण-संकेत स्वयं करें।

Sanskrit Class 7 Curriculum Solutions: Chapter 13 यक्ष युधिष्ठिर संवादः

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