UP Board Solutions Class 7 Hindi Chapter 34 Dr. Rajendra Prasad

Official UP Board Solutions for Class 7 Hindi: Chapter 34 डॉ. राजेंद्र प्रसाद

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Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 34 डॉ. राजेंद्र प्रसाद

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पाठ का सारांश

डॉ० राजेन्द्र प्रसाद बचपन से ही पढ़ाई में बहुत मेहनती थे। उन्होंने अपनी सभी स्कूल और कॉलेज की परीक्षाएँ सबसे अच्छे नंबरों से पास कीं। साल 1915 में कानून की परीक्षा में वे अपने प्रांत में पहले स्थान पर आए। होशियार छात्र होने के कारण उन्हें कई छात्रवृत्तियाँ मिलीं। अपने छात्र जीवन में भी वे समाज सेवा के कामों में हिस्सा लेते थे। साल 1906 में उन्होंने बिहार के युवा छात्रों को एक साथ लाया। पटना हाईकोर्ट में उनकी वकालत बहुत कामयाब थी। अपनी कमाई में से वे गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करते थे। उन्होंने देश की सेवा के लिए अपनी वकालत छोड़ दी और स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए। साल 1917 में चंपारण सत्याग्रह हुआ, जो भारत का पहला किसान आंदोलन था। इसमें राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी अच्छी नेतृत्व क्षमता दिखाई, जिससे अंग्रेजों को झुकना पड़ा। इस आंदोलन से राजेन्द्र प्रसाद और बिहार को पूरे देश में पहचान मिली।

साल 1934 में बिहार में भूकंप आया, तब उन्होंने अपनी मजबूत संगठन क्षमता का परिचय दिया। खुद बीमार होते हुए भी, वे लोगों का दुख नहीं देख सके और तुरंत लोगों के लिए खाना, कपड़े और दवाइयाँ जमा कीं।

साल 1934 में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। उनकी देश के प्रति भक्ति, सच्चाई और बड़े त्याग के लिए, जनता ने उन्हें 'देशरत्न' की उपाधि दी। साल 1952 के आम चुनावों में वे आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति चुने गए। वे साल 1962 तक लगातार दो बार भारत के राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति भवन में पहुँचने के बाद भी उनकी सादगी, सरलता और अपनी संस्कृति पर गहरी आस्था कम नहीं हुई।

डॉ० राजेन्द्र प्रसाद को आमतौर पर कभी गुस्सा नहीं आता था। उनकी याददाश्त बहुत तेज थी। हिन्दी को राजभाषा बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। उन्होंने खुद भी कई किताबें लिखीं। उनकी कुछ खास किताबें हैं- 'आत्मकथा', 'चम्पारन में सत्याग्रह', 'इण्डिया डिवाइडेड', 'महात्मा गांधी एवं 'बिहार रेमिनिसन्सेज', 'बापू के कदमों में'। उन्होंने 'साप्ताहिक देश' का संपादन किया और 'लॉन्वीकली' की स्थापना की। साल 1962 में राष्ट्र ने उन्हें 'भारत रत्न' की सबसे बड़ी उपाधि से सम्मानित किया। 28 फरवरी, साल 1963 को पटना के सदाकत आश्रम में उनका देहांत हो गया।

अभ्यास-प्रश्न

 

Question 1. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने वकालत क्यों छोड़ी?
Answer: डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने स्वदेशी आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी वकालत छोड़ दी थी। वे देश की सेवा करना चाहते थे।
In simple words: डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने देश को आजाद कराने के लिए चलाए जा रहे स्वदेशी आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए अपनी वकालत छोड़ दी।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, मुख्य कारण को स्पष्ट और सीधे तौर पर बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. 'चम्पारन सत्याग्रह' कब और क्यों किया गया?
Answer: चंपारण सत्याग्रह आंदोलन साल 1917 में किया गया था। यह नील की खेती करने वाले किसानों ने अंग्रेजों के गलत व्यवहार के विरोध में किया था। यह आंदोलन किसानों के हकों की लड़ाई था।
In simple words: चंपारण सत्याग्रह 1917 में हुआ था, क्योंकि नील की खेती करने वाले किसान अंग्रेजों के बुरे बर्ताव से परेशान थे।

🎯 Exam Tip: जब 'कब' और 'क्यों' पूछा जाए, तो दोनों बातों का जवाब दें - साल और कारण।

 

Question 3. उन घटनाओं का उल्लेख कीजिए जिनसे डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की देशभक्ति व देशसेवा का पता चलता है।
Answer: डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की देशभक्ति और देशसेवा से जुड़ी कुछ खास घटनाएँ नीचे दी गई हैं:
1. उन्होंने पटना हाईकोर्ट की सफल वकालत छोड़कर स्वदेशी आंदोलन में भाग लिया। यह दिखाता है कि वे देश के लिए अपना सुख छोड़ सकते थे।
2. साल 1917 में चंपारण सत्याग्रह में किसानों का नेतृत्व किया। यह उनका किसानों के प्रति समर्पण दिखाता है।
3. साल 1934 में बिहार में भूकंप आने पर उन्होंने अपनी मजबूत संगठन शक्ति से पीड़ित लोगों की मदद की। उन्होंने बीमार होते हुए भी लोगों के लिए भोजन और दवाइयाँ जुटाईं।
4. वे पटना से दरभंगा मार्ग पर रेलयात्रियों को दौड़-दौड़कर पानी पिलाते थे। यह उनकी सेवा भावना को दर्शाता है।
5. राष्ट्रपति होने के बावजूद उन्होंने अपने वेतन (दस हजार) का केवल कुछ हिस्सा ही लिया। इससे उनकी सादगी और त्याग की भावना पता चलती है।
In simple words: डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी वकालत छोड़कर देश की सेवा की, किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया, भूकंप पीड़ितों की मदद की, यात्रियों को पानी पिलाया और राष्ट्रपति होकर भी कम वेतन लिया।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, जितनी ज्यादा घटनाएँ आप याद करके लिख सकते हैं, उतने ही अच्छे अंक मिलते हैं। हर घटना से उनका कौन सा गुण पता चलता है, यह भी बताएँ।

 

Question 4. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के व्यक्तित्व के किन गुणों ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया। उनकी सूची बनाइए ।
Answer: डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के व्यक्तित्व के कुछ गुण जिन्होंने सबसे अधिक प्रभावित किया, वे इस प्रकार हैं:
1. सरलता: वे हमेशा साधारण जीवन जीते थे।
2. सादगी: दिखावे से दूर रहते थे।
3. अध्ययनशीलता: उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था।
4. मितव्ययिता: वे पैसे को समझदारी से खर्च करते थे।
5. परिश्रमशीलता: वे मेहनती थे।
6. नेतृत्व-क्षमता: उनमें लोगों का नेतृत्व करने की अच्छी शक्ति थी।
7. संगठन-शक्ति: वे लोगों को एक साथ लाकर काम करवा सकते थे।
8. सौम्य स्वभाव: वे शांत और नरम स्वभाव के थे।
9. क्षमाशीलता: वे दूसरों को माफ कर देते थे।
10. सत्यनिष्ठा: वे हमेशा सच बोलते थे।
11. ईमानदारी: वे अपने काम में ईमानदार थे।
12. देशभक्ति: उनमें अपने देश के प्रति गहरा प्रेम था।
13. सहिष्णुता: वे दूसरों की राय और विचारों का सम्मान करते थे।
In simple words: डॉ० राजेन्द्र प्रसाद बहुत सरल, सादगीपूर्ण, मेहनती, ईमानदार, देशभक्त और क्षमाशील व्यक्ति थे।

🎯 Exam Tip: गुणों की सूची बनाते समय, हर गुण के साथ एक छोटा स्पष्टीकरण देना अच्छा होता है कि वह गुण क्या बताता है।

 

Question 5. पेन टूटने वाली घटना क्या थी? इससे डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के किस गुण का पता चलता है?
Answer: एक बार राष्ट्रपति भवन में डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के कमरे की सफाई करते समय उनके पुराने नौकर तुलसी से गलती हो गई। हाथी के दाँत से बना उनका एक पेन मेज से नीचे गिरकर टूट गया और उसकी स्याही कालीन पर फैल गई। डॉ० राजेन्द्र प्रसाद को बहुत गुस्सा आया, क्योंकि वह पेन उन्हें किसी ने भेंट में दिया था और उन्हें बहुत प्रिय था। उन्होंने उसी दिन तुलसी को अपनी सेवा से हटा दिया। उस दिन बहुत व्यस्त होने के बावजूद भी उनके दिल में यह बात खटकती रही कि उन्होंने तुलसी के साथ अन्याय किया है। शाम को उन्होंने तुलसी को अपने कमरे में बुलाया। तुलसी डरा हुआ कमरे में आया। उसने देखा कि राष्ट्रपति सिर झुकाए और हाथ जोड़े उसके सामने खड़े हैं। उन्होंने धीरे से कहा, "तुलसी मुझे माफ कर दो।" इस घटना से उनकी महानता और क्षमाशीलता का पता चलता है। यह दर्शाता है कि वे अपनी गलती स्वीकार करने और दूसरों को माफ करने में सक्षम थे।
In simple words: एक बार डॉ० राजेन्द्र प्रसाद का प्रिय पेन उनके नौकर तुलसी से टूट गया। पहले उन्हें गुस्सा आया, लेकिन बाद में उन्हें अपनी गलती महसूस हुई और उन्होंने तुलसी से माफी माँगी। इससे उनकी महानता और माफ करने का गुण पता चलता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के वर्णन वाले प्रश्नों में, घटना को क्रमवार बताना और फिर उससे निकलने वाले गुणों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. निम्नलिखित में सही वाक्यों के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने सही (X) का चिह्न लगाएँ (चिह्न लगाकर )
Answer:
(क) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने वकालत से मुँह मोड़ लिया; क्योंकि इसमें आमदनी कम थी। (X)
(ख) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद एक सफल किसान थे और अन्त में देश के प्रथम राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। (X)
(ग) अपने विद्यार्थी जीवन से ही डॉ० राजेन्द्र प्रसाद सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया करते थे। (✓)
In simple words: दिए गए वाक्यों में से जो सही हैं उनके आगे '✓' और जो गलत हैं उनके आगे 'X' का निशान लगाएँ।

🎯 Exam Tip: सही-गलत वाले प्रश्नों में, आपको हर वाक्य को ध्यान से पढ़ना चाहिए और पाठ में दी गई जानकारी से उसकी तुलना करके सही उत्तर देना चाहिए।

 

Question 7. निम्नलिखित घटनाओं को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए (सही क्रम में व्यवस्थित करके)
Answer: घटनाओं का सही क्रम इस प्रकार है:
1. वे अपने हिन्दू और मुसलमान दोस्तों के साथ 'चिक्का' और 'कबड्डी' खेलते थे।
2. उन्होंने बिहारी युवा छात्रों को संगठित किया।
3. चंपारण सत्याग्रह।
4. वे संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष बने।
5. वे भारत के प्रथम राष्ट्रपति चुने गए।
In simple words: दी गई घटनाओं को उनके घटने के समय के अनुसार सही வரிசை में लगाएँ।

🎯 Exam Tip: घटनाओं को क्रम में लगाते समय, पाठ में दी गई तारीखों और समय के संदर्भों पर ध्यान देना चाहिए।

 

Question 8. नोटः विद्यार्थी अपने शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से स्वयं करें।
Answer: इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं अपने शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से पूरा करेंगे। यह प्रश्न छात्रों के लिए एक गतिविधि है।
In simple words: इस सवाल का जवाब बच्चे खुद अपने टीचर की मदद से करेंगे।

🎯 Exam Tip: जब किसी प्रश्न में 'स्वयं करें' लिखा हो, तो यह एक गतिविधि होती है। इसमें आपको अपनी समझ और ज्ञान का उपयोग करना होता है, कई बार शिक्षक की मदद से।

योग्यता विस्तारः

नोट- विद्यार्थी 'भारत रत्न' से सम्मानित भारत के सभी राष्ट्रपतियों की सूची अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं बनाएँ।

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