UP Board Solutions Class 7 Hindi Chapter 17 Vardan Mangoonga Nahin

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महत्त्वपूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

यह हार एक .......................... नहीं।
संदर्भ: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'वरदान माँगूंगा नहीं' पाठ से लिया गया है। इस पाठ के रचयिता शिवमंगल सिंह 'सुमन' हैं।
प्रसंग: कवि ने जीवन को एक बड़ा युद्ध बताया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि जीवन एक बहुत बड़ी लड़ाई जैसा है। इस लड़ाई में आने वाली मुश्किलों से लड़ना ही असल में जीवन जीना है। जीवन हमेशा आगे बढ़ता रहता है। हार मानकर रुक जाना जीवन नहीं कहलाता। कवि का शरीर संघर्ष करते हुए भले ही धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाए, पर वह किसी से दया नहीं चाहता। उसे किसी से कोई मदद या वरदान माँगने की जरूरत नहीं है। संघर्ष ही जीवन को मूल्यवान बनाता है, और कवि इसी में संतोष पाता है।

🎯 Exam Tip: जब पद्यांश की व्याख्या करें, तो सबसे पहले उसका संदर्भ (स्रोत और कवि), फिर प्रसंग (पद्यांश का मुख्य विचार) और अंत में विस्तृत व्याख्या लिखें।

 

स्मृति सुखद .......................... नहीं।
संदर्भ: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'वरदान माँगूंगा नहीं' पाठ से लिया गया है। इस पाठ के रचयिता शिवमंगल सिंह 'सुमन' हैं।
प्रसंग: कवि अपने सुख के लिए या अपनी हालत सुधारने के लिए किसी की संपत्ति नहीं लेना चाहते।
व्याख्या: कवि का कहना है कि वह अपनी पुरानी, टूटी-फूटी हालत और छोटे से घर को सुधारने के लिए दुनिया की दौलत नहीं चाहेंगे। वह जीवन के सुखद पलों को याद करने के लिए भी किसी से कुछ नहीं मांगेंगे। वह अपनी मौजूदा स्थिति में ही खुश हैं। इसलिए उन्हें किसी वरदान की आवश्यकता नहीं है। अपने जीवन की कठिनाइयों से सीखकर ही व्यक्ति मजबूत बनता है।

🎯 Exam Tip: कवि के विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, खासकर जब वह अपनी इच्छाओं और अनिच्छाओं के बारे में बात कर रहा हो।

 

क्या हार में .......................... नहीं।
संदर्भ: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'वरदान माँगूंगा नहीं' पाठ से लिया गया है। इस पाठ के रचयिता शिवमंगल सिंह 'सुमन' हैं।
प्रसंग: कवि कहते हैं कि वह जीवन की लड़ाई में आने वाली हार से नहीं डरते।
व्याख्या: जीवन एक लड़ाई है जहाँ जीत और हार दोनों ही होती हैं। इस वजह से कवि को किसी बात का कोई डर नहीं है। जीवन के संघर्ष में चाहे जीत मिले या हार, दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं। इसलिए कवि को किसी भी तरह का वरदान माँगने की जरूरत नहीं है। हार और जीत दोनों ही अनुभव जीवन को पूर्णता देते हैं।

🎯 Exam Tip: यह दिखाएं कि कवि ने हार और जीत को कैसे समझा है – वे इसे जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मानते हैं।

 

लघुता .......................... नहीं।
संदर्भ: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'वरदान माँगूंगा नहीं' पाठ से लिया गया है। इस पाठ के रचयिता शिवमंगल सिंह 'सुमन' हैं।
प्रसंग: कवि कहते हैं कि उन्हें अपनी विनम्रता (लघुता) और दिल की पीड़ा से गहरा लगाव है। वह इन्हें छोड़ना नहीं चाहते।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि जो लोग जीवन की लड़ाई में जीतकर बड़े बन गए हैं, वे अपनी महानता बनाए रखें। लेकिन कवि अपनी छोटी सी स्थिति में ही आत्मसंतुष्ट रहना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी पीड़ा से प्यार है। वह इसे छोड़ना नहीं चाहते। वह कोई वरदान नहीं माँगेंगे, क्योंकि कवि को इसकी जरूरत नहीं है। उन्हें तो बस जीवन में संघर्ष करते रहना है। अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना भी एक शक्ति होती है।

🎯 Exam Tip: कवि के संतोष और अपनी स्थिति के प्रति लगाव को उजागर करें।

 

चाहे हृदय .......................... नहीं।
संदर्भ: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'वरदान माँगूंगा नहीं' पाठ से लिया गया है। इस पाठ के रचयिता शिवमंगल सिंह 'सुमन' हैं।
प्रसंग: कवि कहते हैं कि वह हर हाल में अपने कर्तव्य के रास्ते पर टिके रहेंगे, उससे भागेंगे नहीं।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि भले ही लोग उनके दिल को दुख दें, यानी उन्हें परेशानियाँ दें, या भले ही लोग उन्हें कोसते रहें, यानी उनकी भलाई के बजाय बुराई की कामना करें, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वह अपने कर्तव्य के रास्ते पर डटकर संघर्ष करेंगे और इस युद्ध के मैदान से भागेंगे नहीं। उन्हें किसी वरदान माँगने की जरूरत नहीं है। अपने मार्ग पर अटल रहना ही व्यक्ति की सच्ची शक्ति है।

🎯 Exam Tip: कवि के दृढ़ संकल्प और किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्य से न हटने के विचार को स्पष्ट करें।

प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को

 

प्रश्न 1: हम बहता जल पीने वाले, मर जायेंगे भूखे-प्यासे। कहीं भली है कटक निबौरी, कनक कटोरी की मैदा से। उपर्युक्त कविता भी शिवमंगल सिंह 'सुमन' जी की ही है। दोनों कविताओं में क्या समानता तथा क्या अन्तर है? लिखिए।
Answer:
समानता: दोनों कविताएँ कवि के आत्मविश्वास और स्वाभिमान से भरी हुई हैं। दोनों में ही कवि ने जीवन की चुनौतियों का सामना करने की बात कही है।
अन्तर: 'वरदान माँगूंगा नहीं' कविता में कवि अपने सिद्धांतों के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता। जबकि ऊपर दी गई कविता में कवि दुनिया के बंधनों में नहीं बँधना चाहता, बल्कि हमेशा आजाद रहना चाहता है। दोनों कविताएँ स्वतंत्रता और दृढ़ता के महत्व को बताती हैं।
In simple words: दोनों कविताओं में कवि को अपने आप पर भरोसा है और वह अपना सम्मान नहीं खोना चाहता। 'वरदान माँगूंगा नहीं' में कवि अपने नियमों पर अटल है, जबकि दूसरी कविता में कवि सिर्फ आजाद रहना चाहता है।

🎯 Exam Tip: जब दो कविताओं की तुलना करें, तो उनकी मुख्य भावनाओं और विचारों की समानताओं और भिन्नताओं को स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

प्रश्न 2: “जीवन महासंग्राम है' के समान भाव की कुछ सूक्तियाँ एकत्र करके लिखिए।
Answer:
(क) जिन्दगी एक संघर्ष है।
(ख) जीवन एक लड़ाई है।
(ग) जीवन एक युद्ध के समान है। जीवन हमेशा चुनौतियों से भरा होता है।
In simple words: जीवन को एक बड़ी लड़ाई या संघर्ष मान सकते हैं, जहाँ हर दिन नई चुनौतियाँ आती हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसी सूक्तियाँ चुनते समय, ध्यान दें कि वे दिए गए वाक्य के मुख्य अर्थ 'जीवन एक बड़ा संघर्ष है' को दर्शाती हों।

विचार और कल्पना

 

प्रश्न 1: कवि दया की भीख नहीं लेना चाहता, इस संबंध में आपके क्या विचार हैं, लिखिए?
Answer: कवि दया की भीख नहीं लेना चाहता, यह उसके स्वाभिमानी स्वभाव को दिखाता है। मेरे विचार से, यह बहुत सही है क्योंकि अपनी मेहनत से सफल होना और अपने दम पर जीना ही व्यक्ति को मजबूत बनाता है। दया पर निर्भर रहने से व्यक्ति कमजोर हो जाता है और अपनी क्षमताओं पर भरोसा खो देता है। इसलिए, स्वाभिमान से जीना और चुनौतियों का सामना खुद करना ही बेहतर है।
In simple words: कवि दया नहीं चाहता, यह उसका स्वाभिमान दिखाता है। मेरे विचार से, यह अच्छा है क्योंकि खुद पर भरोसा करके ही हम मजबूत बन सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अपने विचारों को व्यक्त करते समय, कवि के चरित्र के साथ जोड़ें और अपने तर्क को स्पष्ट रखें।

 

प्रश्न 2: 'यह भी सही, वह भी सही' का प्रयोग किन परिस्थितियों के लिए किया गया है?
Answer: 'यह भी सही, वह भी सही' का प्रयोग उन परिस्थितियों के लिए किया गया है जहाँ जीवन संग्राम में संघर्ष करते रहना इंसान का कर्तव्य है। इस संघर्ष में कभी जीत मिलती है और कभी हार होती है। कवि ने बताया है कि जीत और हार दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जीवन में दोनों ही अनुभव महत्वपूर्ण होते हैं।
In simple words: इसका मतलब है कि जीवन की लड़ाई में जीत और हार दोनों होती हैं। दोनों ही जीवन का हिस्सा हैं।

🎯 Exam Tip: इस वाक्यांश का प्रयोग जीवन के द्वंद्वात्मक स्वरूप को दर्शाने के लिए किया गया है, जहाँ विपरीत स्थितियाँ साथ-साथ चलती हैं।

 

प्रश्न 3: कविता के मूल भाव को ध्यान में रखते हुए बताइए कि इसका शीर्षक ‘वरदान माँगूंगा नहीं’ क्यों रखा गया होगा तथा इस कविता के क्या-क्या शीर्षक हो सकते हैं?
Answer: कविता के मूल भाव को देखें तो यह कवि के स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी स्वभाव को बताता है। ऐसे व्यक्ति हर काम अपनी ताकत से करते हैं और किसी के आगे झुककर या माँगकर अपनी जरूरतें पूरी नहीं करते। इसलिए इस कविता का शीर्षक 'वरदान माँगूंगा नहीं' रखा गया होगा। इसके कुछ और शीर्षक हो सकते हैं: 'जीवन-संग्राम' और 'स्वाभिमान'। यह शीर्षक कवि की दृढ़ता को सही तरीके से दर्शाता है।
In simple words: कवि स्वाभिमानी है और किसी से मदद नहीं मांगता, इसलिए शीर्षक 'वरदान माँगूंगा नहीं' सही है। दूसरे शीर्षक 'जीवन-संग्राम' या 'स्वाभिमान' हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: शीर्षक का चुनाव हमेशा कविता के मुख्य संदेश और कवि की भावना को दर्शाता होना चाहिए।

कविता से

 

प्रश्न 1: निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) कवि तिल-तिल मिट जाने के बाद भी किस बात के लिए तैयार नही हैं?
Answer: कवि कहते हैं कि जीवन रूपी संघर्ष में हमारा शरीर भले ही धीरे-धीरे खत्म हो जाए, लेकिन वह फिर भी किसी से दया नहीं चाहता है। इसका मतलब है कि कवि अपनी मेहनत और संघर्ष पर विश्वास रखता है।
In simple words: कवि कहते हैं कि चाहे शरीर कमजोर हो जाए, वह किसी से दया नहीं लेंगे।

🎯 Exam Tip: पंक्तियों का भाव स्पष्ट करते समय, कवि के मुख्य संदेश को अपने सरल शब्दों में व्यक्त करें।

 

(ख) लघुता ने अब मेरी छुओ, तुम हो महान बने रहो।
Answer: संघर्ष के रास्ते पर चलते हुए कवि का संकल्प यह है कि उन्हें इस रास्ते पर जो भी मिले, चाहे दुख हो या सुख, हार हो या जीत, जीवन हो या मृत्यु, वे सब कुछ स्वीकार कर लेंगे। लेकिन ईश्वर से कोई वरदान नहीं माँगेंगे। कवि अपने छोटेपन में भी संतोष महसूस करते हैं।
In simple words: कवि कहते हैं कि उन्हें अपनी छोटी स्थिति और संघर्ष पसंद हैं, वे किसी से वरदान नहीं माँगेंगे, भले ही दूसरे कितने भी महान बन जाएँ।

🎯 Exam Tip: कवि की दृढ़ता और स्वावलंबन के भाव को स्पष्ट करें।

 

(ग) कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किन्तु भागूंगा नहीं।
Answer: कर्तव्य पथ के बारे में कवि का दृढ़ संकल्प यह है कि चाहे उनके दिल को कितनी भी पीड़ा क्यों न पहुँचे, चाहे उन्हें कितने ही श्राप क्यों न झेलने पड़ें, लेकिन वे अपने कर्तव्य के रास्ते से पीछे नहीं हटेंगे। इसका मतलब है कि उन्हें रोकने के लिए चाहे उनके साथ जो कुछ भी किया जाए, वे अपने कर्तव्य को हर हाल में पूरा करेंगे। कर्तव्य निभाना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
In simple words: कवि ने तय किया है कि चाहे कितनी भी मुश्किल हो, वह अपने कर्तव्य के रास्ते से कभी नहीं हटेंगे।

🎯 Exam Tip: कवि के अटूट संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा के भाव को रेखांकित करें।

 

प्रश्न 2: निम्नलिखित पंक्तियों को उनके सही अर्थ से मिलाइये (मिलाकर)
Answer:
(क) क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं।
\( \implies \) हार हो या जीत, मैं जरा भी भयभीत नहीं।
(ख) मैं विश्व की संपत्ति चाहूँगा नहीं।
\( \implies \) मैं संसार की सम्पदा की कामना नहीं करूँगा।
(ग) यह हार एक विराम है, जीवन महासंग्राम है।
\( \implies \) जीवन स्वयं ही महा संघर्ष है इसमें हार को क्षणिक विश्राम के रूप में लेना चाहिए। ये पंक्तियाँ जीवन के प्रति कवि के गहरे दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
In simple words: कवि हार-जीत से नहीं डरते, दुनिया की दौलत नहीं चाहते और मानते हैं कि हार एक छोटा आराम है, जबकि जीवन एक बड़ी लड़ाई है।

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, हर पंक्ति के सही अर्थ को ध्यान से समझकर ही मिलान करें।

 

प्रश्न 3: कविता में जीवन को महासंग्राम क्यों कहा गया है?
Answer: कविता में जीवन को एक बड़ा युद्ध (महासंग्राम) कहा गया है क्योंकि इसमें बहुत सी कठिनाइयाँ आती हैं। इन कठिनाइयों से लड़कर ही व्यक्ति उन पर जीत हासिल करने का भाव रखता है। जीवन हर पल संघर्ष और चुनौतियों से भरा होता है, जैसे एक युद्ध।
In simple words: जीवन को महासंग्राम कहा गया है क्योंकि इसमें बहुत सी मुश्किलें आती हैं, और हमें उनसे लड़कर जीतना होता है।

🎯 Exam Tip: यह बताएं कि 'महासंग्राम' शब्द का प्रयोग जीवन की चुनौतियों और संघर्षों की तीव्रता को दर्शाने के लिए किया गया है।

भाषा की बात

 

प्रश्न 1: इस कविता में एक पंक्ति है “क्या हार में क्या जीत में” इसमें एक ही पंक्ति में 'हार' और 'जीत' दो परस्पर विलोम शब्द आए हैं। आप भी कुछ ऐसी पंक्तियाँ बनाइए जिनमें दो परस्पर विलोम शब्द एक साथ आए हों, जैसे- क्या सुख में क्या दुःख में ।।
Answer:
(1) क्या खुशी में क्या गम में।
(2) क्या ऊपर में क्या नीचे में।
(3) क्या आगे में क्या पीछे में।
(4) क्या लेने में क्या देने में।
(5) क्या रहने में क्या जाने में।
(6) क्या अन्दर में क्या बाहर में। इन पंक्तियों में विपरीत शब्द एक साथ आकर एक गहरा अर्थ देते हैं।
In simple words: ऐसी पंक्तियाँ जिनमें दो उल्टे अर्थ वाले शब्द एक साथ आते हैं, जैसे खुशी-गम, ऊपर-नीचे, आगे-पीछे।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्दों का प्रयोग भाषा को अधिक प्रभावशाली बनाता है। ऐसे उदाहरण देते समय, सुनिश्चित करें कि शब्द-युग्म सही अर्थ में विपरीत हों।

 

प्रश्न 2: पाठ में आए तुकान्त शब्द छाँटकर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए (प्रयोग करके
Answer:
(1) शुद्ध भाषा में विराम चिह्नों का ध्यान रखना चाहिए।
(2) जीवन एक महासंग्राम है।
(3) महाभारत युद्ध में पांडवों की जीत हुई।
(4) कायर रणक्षेत्र से भयभीत होकर भाग जाते हैं।
(5) भूमध्य रेखा पर सारे वर्ष ताप बहुत अधिक होता है।
(6) अशिक्षित रहना एक अभिशाप है। इन शब्दों के सही प्रयोग से वाक्य अधिक अर्थपूर्ण बनते हैं।
In simple words: पाठ से ऐसे शब्द चुनें जिनकी आवाज एक जैसी हो और फिर उन्हें अपने वाक्यों में प्रयोग करें।

🎯 Exam Tip: तुकान्त शब्दों का प्रयोग कविता को लयबद्ध बनाता है, जबकि वाक्यों में उनका सही प्रयोग अर्थ को स्पष्ट करता है।

 

प्रश्न 3: जन = लोग । (जन-जन की आवाज है – हम सब एक हैं ।) जान = प्राण । ( क्या बताऊँ, वह हमेशा मेरी जान के पीछे पड़ा रहता है।) ऊपर के शब्दों (जन-जान) में केवल एक मात्रा के हेर-फेर से उनके उच्चारण और अर्थ दोनों ही बदल गए हैं। नीचे कुछ शब्द-युग्म दिए जा रहे हैं, उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए तथा ऐसे पाँच शब्द-युग्म आप भी ढूंढिए । सुत-सूत, नीर-नी, मन-मान, कुल-कूल, क्रम-कर्म
Answer:
सुत (पुत्र) – लव-कुश राम के पुत्र थे।
सूत (धागा) – रेशम का सूत बहुत पतला होता है।
तन (शरीर) – हमें अपने तन को साफ रखना चाहिए।
तान (आने की लय) – तानसेन का तान बहुत अच्छा था।
मन (इच्छा, विचार, भाव) – प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन पर काबू रखना चाहिए।
मान (सम्मान) – हमें अपने से बड़ों का मान करना चाहिए।
कुल (वंश, खानदान) – सीता सूर्य-कुल की पुत्रवधू थीं।
कूल (किनारा) – नदी का कूल बहुत चौड़ा है।
नम (गिला) – बारिश से धरती नम हो जाती है।
नाम (यश) – रामायण में राम नाम का गुणगान है। इस तरह के शब्द-युग्म हिंदी भाषा की सुंदरता बढ़ाते हैं।
In simple words: कुछ शब्द एक जैसे दिखते या सुनाई देते हैं लेकिन उनका अर्थ और वर्तनी अलग होती है। जैसे 'सुत' मतलब बेटा और 'सूत' मतलब धागा।

🎯 Exam Tip: ऐसे समोच्चरित भिन्नार्थक शब्दों को याद करते समय, उनके अर्थ और वाक्यों में प्रयोग पर विशेष ध्यान दें ताकि भ्रम से बचा जा सके।

 

प्रश्न 4: तिल-तिल मिटूंगा पर दया की भीख नहीं लूंगा, क्योंकि
(1) जीवन एक विराम है।
(2) जीवन महासंग्राम है।
(3) जीवन बहुत अल्प है।
(4) जीवन में बहुत आराम है।
Answer: (2) जीवन महासंग्राम है।
In simple words: कवि दया नहीं माँगना चाहते क्योंकि वह जीवन को एक बड़ी लड़ाई मानते हैं, जहाँ हर पल संघर्ष करना होता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, कविता के मूल भाव को समझकर सही विकल्प चुनें जो कवि के संदेश को दर्शाता हो।

 

प्रश्न 5: स्मृति सुखद प्रहरों के लिए क्या नहीं चाहँगा ?
(1) विश्व की सम्पत्ति ।
(2) खण्डहर ।
(3) दीर्घायु ।
(4) कर्तव्य
Answer: (1) विश्व की सम्पत्ति ।
In simple words: कवि सुखद यादों के लिए भी दुनिया की दौलत नहीं चाहते, क्योंकि वे अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करना चाहते।

🎯 Exam Tip: कवि के त्याग और आत्म-निर्भरता के भाव को समझें। वह किसी भी सुख के लिए भौतिक धन की कामना नहीं करता।

 

प्रश्न 6: किन-किन परिस्थितियों में कवि अपने कर्तव्य-पथ से हटना नहीं चाहता है?
(1) हृदय को ताप एवं अभिशाप प्राप्त होने पर ।
(2) भयभीत होने पर ।
(3) धमकाने पर।
(4) प्रताडित होने पर।
Answer: (1) हृदय को ताप एवं अभिशाप प्राप्त होने पर ।
In simple words: कवि अपने कर्तव्य से तब भी नहीं हटते जब उनके दिल को दुख और श्राप मिलता है, क्योंकि वे अपने रास्ते पर अटल हैं।

🎯 Exam Tip: कवि की दृढ़ता और चुनौतियों का सामना करने की इच्छा को दर्शाने वाले विकल्पों पर ध्यान दें।

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 17 वर्धन मंगूंगा नहीं

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