Download UP Board Solutions for Class 7 Environmental Studies Chapter 08 परिस्थितिकी तंत्र
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पारिस्थितिकी तन्त्र
अभ्यास
Question 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) पारिस्थितिकी तंत्र किसे कहते हैं ? इसकी क्या उपयोगिता है?
Answer: एक जगह पर जितने भी जीव-जंतु, पेड़-पौधे और उनके आसपास की निर्जीव चीजें जैसे पानी, हवा, मिट्टी आदि होती हैं, वे सब मिलकर एक व्यवस्था बनाते हैं। इसे ही पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं। इस तंत्र का मुख्य काम पर्यावरण में सही संतुलन बनाए रखना है, ताकि सभी जीव अच्छे से रह सकें।
In simple words: एक खास जगह पर रहने वाले सभी जीव और उनके आसपास का माहौल मिलकर जो सिस्टम बनाते हैं, उसे पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं। यह पर्यावरण को संतुलित रखता है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा में सजीव (जीव-जंतु, पेड़-पौधे) और निर्जीव (जल, वायु, मिट्टी) दोनों घटकों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 1.
(ख) पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना किन-किन घटकों से मिलकर होती है ?
Answer: पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना मुख्य रूप से दो तरह के घटकों से मिलकर बनती है: सजीव घटक और निर्जीव घटक। सजीव घटकों में पेड़-पौधे और जीव-जंतु आते हैं, जबकि निर्जीव घटकों में मिट्टी, पानी, हवा और सूरज की रोशनी जैसी चीजें शामिल होती हैं। इन घटकों के बीच लगातार तालमेल बना रहता है।
In simple words: पारिस्थितिकी तंत्र में दो मुख्य चीजें होती हैं - सजीव चीजें (जैसे पेड़-पौधे, जानवर) और निर्जीव चीजें (जैसे पानी, हवा, मिट्टी)।
🎯 Exam Tip: जब पारिस्थितिकी तंत्र के घटकों के बारे में पूछा जाए, तो सजीव और निर्जीव दोनों तरह के घटकों का स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 1.
(ग) आहार जाल किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए ।
Answer: किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में कई आहार श्रृंखलाएँ (खाने-खिलाने की कड़ियाँ) होती हैं। जब ये सभी आहार श्रृंखलाएँ आपस में एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं और एक जटिल नेटवर्क बनाती हैं, तो उसे आहार-जाल कहते हैं। यह दिखाता है कि कैसे अलग-अलग जीव एक-दूसरे पर भोजन के लिए निर्भर करते हैं।
उदाहरण के लिए, घास को टिड्डा खाता है, टिड्डे को मेंढक खाता है, और मेंढक को सांप खाता है। यह एक आहार श्रृंखला है। लेकिन घास को खरगोश भी खा सकता है, और खरगोश को लोमड़ी खा सकती है। जब ऐसे कई रिश्ते एक साथ जुड़ते हैं, तो वह आहार-जाल बन जाता है।
In simple words: जब किसी जगह पर खाने-खिलाने की बहुत सारी कड़ियाँ (आहार श्रृंखलाएँ) आपस में मिल जाती हैं, तो उसे आहार-जाल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: आहार-जाल को समझाते समय, यह बताना जरूरी है कि यह सिर्फ एक आहार श्रृंखला नहीं, बल्कि कई आपस में जुड़ी हुई आहार श्रृंखलाओं का एक नेटवर्क है।
Question 1.
(घ) अनुकूलन से आप क्या समझते हैं ? मरुस्थलीय पौधे अपने वातावरण में किस प्रकार अनुकूलित रहते हैं ?
Answer: अनुकूलन का मतलब है कि कोई जीव अपने आसपास के माहौल में खुद को ढाल लेता है ताकि वह आसानी से जिंदा रह सके और अपने बच्चे पैदा कर सके। यह बदलाव जीव के शरीर की बनावट या उसके काम करने के तरीके में होते हैं। रेगिस्तानी पौधे खुद को अपने गर्म और सूखे माहौल के हिसाब से ढाल लेते हैं। जैसे, वे पानी बचाने के लिए अपनी पत्तियों को काँटों में बदल लेते हैं, उनकी जड़ें पानी की तलाश में बहुत गहराई तक जाती हैं, और उनका तना मोटा व गूदेदार हो जाता है जिसमें पानी भरा रहता है। ये खास बदलाव उन्हें कम पानी में भी जीवित रहने में मदद करते हैं।
In simple words: अनुकूलन का मतलब है कि जीव अपने माहौल में जीने के लिए अपने शरीर में बदलाव करते हैं। रेगिस्तानी पौधे पानी बचाने के लिए पत्तियों को काँटों में बदल लेते हैं और तने में पानी जमा करते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुकूलन की परिभाषा में "वातावरण के अनुसार शारीरिक या क्रियात्मक परिवर्तन" और "जीवन और वंश वृद्धि के लिए" शब्दों का प्रयोग करें। मरुस्थलीय पौधों के अनुकूलन के कम से कम दो-तीन उदाहरण दें।
Question 1.
(ङ) प्रवासी पक्षी किसे कहते हैं?
Answer: प्रवासी पक्षी वे होते हैं जो मौसम बदलने पर या भोजन की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह, अक्सर हजारों किलोमीटर दूर, यात्रा करते हैं। ये पक्षी बहुत ठंडी जगहों से गर्म जगहों पर आते हैं ताकि वे ठंड से बच सकें और अंडे दे सकें। उदाहरण के लिए, साइबेरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे बर्फीले इलाकों से पक्षी हमारे देश में आते हैं।
In simple words: जो पक्षी मौसम बदलने पर या खाना ढूंढने के लिए एक जगह से दूसरी जगह उड़कर जाते हैं, उन्हें प्रवासी पक्षी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रवासी पक्षियों की परिभाषा में 'मौसम से अनुकूलन' या 'भोजन की तलाश' जैसे कारणों का उल्लेख करें, और यह भी बताएं कि वे लंबी दूरी की यात्रा करते हैं।
Question 2. सही कथन के सामने (√) तथा गलत कथन के सामने (X) का चिह्न लगाइए-
(क) सजीव और निर्जीव घटक एक दूसरे पर निर्भर नहीं होते हैं। (X)
(ख) सभी प्राणी, पेड़-पौधे, जलवायु और पर्यावरण मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं। (√)
(ग) प्रथम चरण उपभोक्ता शेर, चीता, भेडिया आदि हैं। (X)
(घ) मृत जीवधारियों से भोजन प्राप्त करने वाले जीव मृतोपजीवी कहलाते हैं। (✔)
(ङ) हमें पारिस्थितिकी सन्तुलन को बनाए रखना चाहिए। (✔)
(च) हमारी पृथ्वी के चारों ओर वायुमण्डल है। (✔)
(छ) मनुष्य पर्यावरण का अंग नहीं है। (X)
Answer:
(क) सजीव और निर्जीव घटक एक दूसरे पर निर्भर नहीं होते हैं।
(X) - यह कथन गलत है क्योंकि सजीव और निर्जीव घटक एक-दूसरे पर बहुत निर्भर करते हैं।
(ख) सभी प्राणी, पेड़-पौधे, जलवायु और पर्यावरण मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं।
(√) - यह कथन सही है क्योंकि पारिस्थितिकी तंत्र में सजीव और निर्जीव दोनों शामिल होते हैं।
(ग) प्रथम चरण उपभोक्ता शेर, चीता, भेडिया आदि हैं।
(X) - यह कथन गलत है क्योंकि शेर, चीता जैसे जानवर मांसाहारी होते हैं और अक्सर उच्च स्तर के उपभोक्ता होते हैं, जबकि प्रथम चरण उपभोक्ता शाकाहारी होते हैं।
(घ) मृत जीवधारियों से भोजन प्राप्त करने वाले जीव मृतोपजीवी कहलाते हैं।
(✔) - यह कथन सही है। मृतोपजीवी, जैसे कवक और जीवाणु, मृत जीवों से पोषण प्राप्त करते हैं।
(ङ) हमें पारिस्थितिकी सन्तुलन को बनाए रखना चाहिए।
(✔) - यह कथन सही है। पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है।
(च) हमारी पृथ्वी के चारों ओर वायुमण्डल है।
(✔) - यह कथन सही है। पृथ्वी गैसों की एक परत से घिरी हुई है जिसे वायुमंडल कहते हैं।
(छ) मनुष्य पर्यावरण का अंग नहीं है।
(X) - यह कथन गलत है क्योंकि मनुष्य भी पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और उस पर निर्भर करता है।
In simple words: सजीव और निर्जीव चीजें एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं। सभी जीव और आसपास का माहौल मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं। मांसाहारी जानवर पहले स्तर के उपभोक्ता नहीं होते। मरे हुए जीवों से खाने वाले मृतोपजीवी होते हैं। हमें पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना चाहिए। पृथ्वी के चारों ओर हवा का घेरा है। इंसान भी पर्यावरण का हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: सत्य/असत्य प्रश्नों में, हर कथन को ध्यान से पढ़ें और पारिस्थितिकी तंत्र की मूलभूत अवधारणाओं को याद रखें।
Question 3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) जल, वायु, पोषक तत्व, सौर-ऊर्जा आदि ______ घटक कहलाते हैं।
(ख) भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहने वाले जीव ______ कहलाते हैं।
(ग) उत्पादक व उपभोक्ता के बीच प्रत्येक भोजन स्तर को ______ तल कहते हैं।
(घ) आहार-श्रृंखला के एक सिरे पर ______ तथा दूसरे सिरे पर ______ उपभोक्ता होता
(ङ) प्रकृति में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत ______ है।
(च) प्रकृति ______, ______, ______, पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओं से मिलकर बनी है।
(छ) पृथ्वी के जल वाले भाग को ______ कहते हैं।
(ज) जैविक एवं अजैविक घटक एक दूसरे से परस्पर ______ हैं।
Answer:
(क) जल, वायु, पोषक तत्व, सौर-ऊर्जा आदि निर्जीव घटक कहलाते हैं।
(ख) भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहने वाले जीव परपोषी कहलाते हैं।
(ग) उत्पादक व उपभोक्ता के बीच प्रत्येक भोजन स्तर को पोषक तल कहते हैं।
(घ) आहार-श्रृंखला के एक सिरे पर उत्पादक तथा दूसरे सिरे पर सर्वोच्च उपभोक्ता होता
(ङ) प्रकृति में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत सूर्य है।
(च) प्रकृति जल, स्थल, वायु, पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओं से मिलकर बनी है।
(छ) पृथ्वी के जल वाले भाग को जल-मण्डल कहते हैं।
(ज) जैविक एवं अजैविक घटक एक दूसरे से परस्पर सम्बन्धित हैं।
In simple words: जल, वायु और सूरज की गर्मी जैसी चीजें निर्जीव घटक हैं। जो जीव दूसरों पर खाने के लिए निर्भर रहते हैं, वे परपोषी होते हैं। खाने की कड़ी में हर स्तर को पोषक तल कहते हैं। भोजन की कड़ी में शुरुआत में उत्पादक होते हैं और आखिर में सबसे बड़े उपभोक्ता। प्रकृति में सूरज ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। प्रकृति जल, जमीन, हवा, पेड़-पौधों और जानवरों से बनी है। पृथ्वी के पानी वाले हिस्से को जलमंडल कहते हैं। जीव और निर्जीव चीजें एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, सही तकनीकी शब्द का प्रयोग करें और सुनिश्चित करें कि वह वाक्य के अर्थ के साथ पूरी तरह से फिट बैठता हो।
Question 4. सही विकल्प चुनें-
(क) किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे आवश्यक है-
• निरन्तर ऊर्जा प्रवाह होना। ✓
• जल प्रवाह होना ।
• वायु प्रवाह होना ।
• पर्वत ।।
Answer: (क) निरन्तर ऊर्जा प्रवाह होना।
In simple words: किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे ज़रूरी है कि उसमें ऊर्जा का बहाव कभी न रुके।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि ऊर्जा का निरंतर प्रवाह किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के अस्तित्व और कार्यप्रणाली के लिए आधारभूत है।
Question 4.
(ख) सूर्य से प्राप्त होने वाली अधिकांश ऊर्जा पृथ्वी पर पहुँचने से पूर्व ही नष्ट हो रही है-
• मरुस्थलों के कारण।
• समुद्रों के कारण ।
• पर्वतों के कारण ।
• अत्यधिक प्रदूषण के कारण। ✓
Answer: (घ) अत्यधिक प्रदूषण के कारण।
In simple words: सूरज से आने वाली ज़्यादातर ऊर्जा धरती पर पहुँचने से पहले ही खराब हो जाती है क्योंकि प्रदूषण बहुत ज़्यादा है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि वायुमंडलीय प्रदूषण, विशेष रूप से ग्रीनहाउस गैसें, सौर विकिरण के अवशोषण और परावर्तन को प्रभावित करती हैं।
Question 4.
(ग) आहार-जाल में
• आहार-श्रृंखलाएँ एक सीध में चलती हैं।
• आहार-श्रृंखलाएँ नहीं होती हैं।
• कई आहार-श्रृंखलाएँ आपस में उलझ जाती हैं। ✓
• ऊर्जा का प्रवाह नहीं होता है।
Answer: (ग) कई आहार-श्रृंखलाएँ आपस में उलझ जाती हैं।
In simple words: आहार-जाल में, खाने-खिलाने की बहुत सी कड़ियाँ एक-दूसरे से जुड़कर एक जटिल नेटवर्क बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: आहार-जाल की खासियत ही यह है कि यह कई आहार श्रृंखलाओं का एक जटिल और आपस में जुड़ा हुआ नेटवर्क होता है।
Question 4.
(घ) पृथ्वी पर किसी निर्जीव घटक के संतुलित मात्रा से कम या ज्यादा होने पर
• पारिस्थितिकी तंत्र बनता है।
• पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता है। ✓
• मानव सुखी जीवन व्यतीत करता है।
• उपरोक्त में से कोई नहीं।
Answer: (ख) पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता है।
In simple words: जब पृथ्वी पर किसी भी निर्जीव चीज़ की मात्रा सही नहीं होती (कम या ज़्यादा), तो पूरा पारिस्थितिकी तंत्र खराब हो जाता है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने के लिए सभी सजीव और निर्जीव घटकों का सही अनुपात में होना आवश्यक है।
Question 5. आपने आस-पास देखे और लिखिए –
(अ) पौधों को उचित मात्रा में धूप न मिलने से क्या होगा?
Answer: अगर पौधों को पर्याप्त धूप नहीं मिलती है, तो वे ठीक से अपना भोजन नहीं बना पाते हैं। धूप पौधों को प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया से भोजन बनाने में मदद करती है, जो उनके विकास के लिए ज़रूरी है। धूप की कमी से पौधे कमजोर पड़ जाते हैं, उनकी पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं और वे अंततः सूख कर मर जाते हैं।
In simple words: अगर पौधों को सूरज की रोशनी सही मात्रा में नहीं मिलेगी, तो वे अपना खाना नहीं बना पाएंगे और सूख कर मर जाएंगे।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए सूर्य के प्रकाश की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करें और इसके अभाव में पौधों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करें।
Question 5.
(ब) अपने आस-पास के जीव-जन्तुओं एवं पेड़-पौधों को देखकर एक खाद्य श्रृंखला का रेखांकित चित्र बनाइए ।
Answer: विद्यार्थी स्वयं करें।
In simple words: अपने आसपास के जीवों और पौधों को देखकर खाने की कड़ी का एक चित्र बनाएं।
🎯 Exam Tip: खाद्य श्रृंखला बनाते समय यह सुनिश्चित करें कि ऊर्जा का प्रवाह हमेशा उत्पादक से उपभोक्ता की ओर एक ही दिशा में हो।
Question 5.
(स) पशुओं के मृत शरीर को कौन-कौन से जीव खाते हैं?
Answer: पशुओं के मृत शरीर को खाने वाले जीव मुख्य रूप से अपघटक और कुछ माँसभक्षी या सर्वाहारी जीव होते हैं। इनमें कुत्ता, बिल्ली, गिद्ध, बाज, कौआ, चील, लोमड़ी जैसे जानवर शामिल हैं। ये जीव मृत शरीरों को खाकर पर्यावरण को साफ करने में मदद करते हैं और पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में मिलाते हैं।
In simple words: मरे हुए जानवरों के शरीर को कुत्ता, बिल्ली, गिद्ध, बाज, कौआ, चील और लोमड़ी जैसे जीव खाते हैं।
🎯 Exam Tip: मृत जानवरों को खाने वाले जीवों को अक्सर "सफाईकर्मी" या "अपघटक" कहा जाता है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे पोषक तत्वों को रीसायकल करते हैं।
प्रोजेक्ट वर्क- विद्यार्थी स्वयं करें।
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UP Board Solutions for Class 7 Environmental Studies Chapter 08 परिस्थितिकी तंत्र
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