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UP Board Textbook Solutions for Class 7 Civics Chapter 1 हमारा संविधान
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हमारा संविधान
अभ्यास
Question 1. निम्नलिखित प्रश्नों में दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर वाले विकल्प के सामने वाले गोले को काला कीजिए-(क) संविधान सभा के अध्यक्ष थे
(a) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(b) डॉ० भीमराव अम्बेडकर
(c) सरोजनी नायडू
(d) एच०बी० कामथ
Answer: (a) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद वह व्यक्ति थे जिन्होंने संविधान सभा की बैठकों की अध्यक्षता की थी. उन्होंने भारत के भविष्य के कानून बनाने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया.
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के अध्यक्ष और प्रारूप समिति के अध्यक्ष के बीच अंतर को हमेशा याद रखें क्योंकि यह एक सामान्य गलती है.
Question 1. (ख) मौलिक अधिकारों की संख्या है-
(a) 10
(b) 8
(c) 6
(d) 5
Answer: (c) 6
In simple words: भारतीय संविधान ने नागरिकों को छह मुख्य अधिकार दिए हैं. ये अधिकार लोगों को स्वतंत्रता और समानता से जीने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: सभी छह मौलिक अधिकारों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे नागरिकों के जीवन की नींव हैं.
Question 2. (क) संविधान सभा के बारे में लिखिए।
Answer: भारत को आजादी मिलने के बाद, देश को चलाने के लिए एक नियम-कानून की किताब (संविधान) की जरूरत महसूस हुई. इसलिए, भारत सरकार ने 1946 में एक संविधान सभा बनाई. इस सभा में 389 सदस्य थे जो भारत के अलग-अलग राज्यों से आए थे. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे. एक प्रारूप समिति भी बनी, जिसका काम संविधान लिखना था, और उसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे. इस सभा ने 26 नवंबर, 1949 को स्वतंत्र भारत के संविधान को अपनाया. यह सभा पूरे देश के लिए एक मजबूत और न्यायपूर्ण कानून की नींव रखने के लिए समर्पित थी.
In simple words: आजादी के बाद, भारत को संविधान की जरूरत थी. इसलिए, 1946 में संविधान सभा बनी. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इसके अध्यक्ष थे और डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान लिखा. इसे 26 नवंबर, 1949 को स्वीकार किया गया.
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के गठन की तारीख, सदस्यों की संख्या, अध्यक्ष और प्रारूप समिति के अध्यक्ष जैसे मुख्य तथ्यों को याद रखें.
Question 2. (ख) संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि भारत एक पंथ निरपेक्ष राज्य है, इसका क्या अभिप्राय है?
Answer: इसका मतलब है कि भारतीय संविधान किसी भी एक धर्म को देश का सरकारी धर्म नहीं मानता है. यह सभी धर्मों को एक समान आदर देता है और सरकार किसी भी धर्म के साथ भेदभाव नहीं करती. यह सभी नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने और उसका पालन करने की आजादी देता है.
In simple words: पंथ निरपेक्ष का मतलब है कि भारत का कोई सरकारी धर्म नहीं है. सभी धर्मों को बराबर सम्मान मिलता है.
🎯 Exam Tip: 'पंथ निरपेक्ष' शब्द का अर्थ बताते समय, 'सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान' और 'किसी भी धर्म को राज्य धर्म न मानना' जैसे प्रमुख बिंदुओं को अवश्य शामिल करें.
Question 2. (ग) भारत लोकतंत्रात्मक राज्य होने के साथ गणराज्य भी है ? स्पष्ट कीजिए ।
Answer: भारत एक लोकतंत्रात्मक राज्य है, जिसका मतलब है कि यहाँ शासन लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से चलता है, न कि किसी राजा या रानी के परिवार से. साथ ही, यह एक गणराज्य भी है, जिसका अर्थ है कि देश का मुखिया (राष्ट्रपति) भी वंशानुगत नहीं होता, बल्कि उसे भी लोगों द्वारा चुना जाता है. इस तरह, शासन की बागडोर हमेशा जनता के हाथ में रहती है और चुने हुए नेता जनता के प्रति जिम्मेदार होते हैं.
In simple words: भारत में शासन चुने हुए लोग करते हैं, राजा का बेटा राजा नहीं बनता. देश का मुखिया भी चुना जाता है, इसलिए यह एक गणराज्य है.
🎯 Exam Tip: लोकतंत्र और गणराज्य की परिभाषाओं में अंतर को स्पष्ट करें – लोकतंत्र लोगों द्वारा शासन है, जबकि गणराज्य में देश का प्रमुख चुना हुआ होता है, वंशानुगत नहीं.
Question 2. (घ) नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार क्यों जरूरी हैं ?
Answer: मौलिक अधिकार वे खास अधिकार होते हैं जो देश अपने नागरिकों को देता है. ये अधिकार हर व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी होते हैं क्योंकि ये उनके व्यक्तित्व को निखारने और उन्हें अपना जीवन पूरी आजादी के साथ जीने में मदद करते हैं. ये अधिकार एक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं जो सरकार या किसी और द्वारा उनकी स्वतंत्रता छीनने से रोकते हैं.
In simple words: मौलिक अधिकार लोगों की तरक्की और आजादी के लिए बहुत जरूरी हैं. ये उनके जीवन को बेहतर बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: मौलिक अधिकारों की आवश्यकता को बताते समय, 'व्यक्तित्व विकास' और 'स्वतंत्रता सुनिश्चित करने' जैसे मुख्य कारणों पर जोर दें.
Question 2. (ङ) समानता के अधिकार से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer: समानता का अधिकार कहता है कि भारत के सभी नागरिकों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाएगा. इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति के साथ उसके जन्मस्थान, लिंग, जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. उदाहरण के लिए, उन्हें दुकानों, होटलों या सिनेमाघरों जैसी सार्वजनिक जगहों पर जाने से नहीं रोका जा सकता है. सरकारी नौकरियों में भी सबको बराबर मौका मिलता है. सेना या शिक्षा से जुड़ी उपाधियों को छोड़कर बाकी सभी तरह की उपाधियाँ खत्म कर दी गई हैं, ताकि समाज में कोई बड़ा या छोटा न लगे. यह अधिकार देश में हर नागरिक के लिए न्याय और सम्मान सुनिश्चित करता है.
In simple words: समानता का अधिकार यानी सबको बराबर समझना. जन्म, जाति, धर्म या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा.
🎯 Exam Tip: 'समानता का अधिकार' समझाते समय, भेदभाव के आधार (जन्म, जाति, धर्म, लिंग) और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंच जैसे उदाहरण देना महत्वपूर्ण है.
Question 2. (च) नीति निदेशक तत्व राज्य के लिए क्यों जरूरी हैं ?
Answer: नीति निदेशक तत्व वे महत्वपूर्ण निर्देश हैं जो संविधान राज्यों को देता है. ये निर्देश सरकारों को बताते हैं कि उन्हें नागरिकों की भलाई के लिए क्या-क्या करना चाहिए. इनका उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना है जहाँ सभी को अच्छी शिक्षा, बिना भेदभाव के रोजगार, बेहतर परिवहन और सुरक्षा जैसी सुविधाएँ मिलें. ये तत्व सरकार को सामाजिक और आर्थिक न्याय स्थापित करने में मदद करते हैं.
In simple words: नीति निदेशक तत्व सरकारों के लिए दिशा-निर्देश हैं. ये उन्हें नागरिकों की भलाई के लिए काम करने में मदद करते हैं, जैसे अच्छी शिक्षा और रोजगार देना.
🎯 Exam Tip: नीति निदेशक तत्वों को 'सरकार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत' के रूप में समझाएं और नागरिक कल्याण से जुड़े उदाहरण अवश्य दें.
Question 2. (छ) मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों में कोई एक अन्तर बताइए।
Answer: मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों में एक मुख्य अंतर यह है कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर नागरिक अदालत में जाकर अपने हक की लड़ाई लड़ सकते हैं और न्याय प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन, नीति निदेशक तत्वों के मामले में, राज्य सरकारें उन्हें लागू करने के लिए बाध्य नहीं होतीं; ये उनके लिए केवल मार्गदर्शक सिद्धांत होते हैं. मौलिक अधिकार नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच हैं, जबकि नीति निदेशक तत्व सरकारों के लिए आदर्श हैं.
In simple words: मौलिक अधिकारों के लिए आप कोर्ट जा सकते हैं, पर नीति निदेशक तत्वों को लागू करने के लिए सरकार पर दबाव नहीं डाल सकते.
🎯 Exam Tip: मुख्य अंतर के रूप में 'न्यायपालिका द्वारा लागू करने योग्य' (मौलिक अधिकार) और 'गैर-न्यायपालिका द्वारा लागू करने योग्य' (नीति निदेशक तत्व) को उजागर करें.
Question 2. (ज) संविधान में प्रदत्त 'स्वतंत्रता के अधिकार' के अंतर्गत नागरिकों को किस प्रकार की स्वतंत्रताएँ दी गई हैं?
Answer: संविधान में 'स्वतंत्रता के अधिकार' के तहत नागरिकों को कई महत्वपूर्ण आजादियाँ दी गई हैं:
1. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार: हर किसी को अपनी पसंद का धर्म मानने और उसका पालन करने की आजादी है.
2. सांस्कृतिक व शिक्षा का अधिकार: नागरिकों को अपनी संस्कृति को बनाए रखने और शिक्षा पाने का अधिकार है.
3. समानता का अधिकार: सभी नागरिक कानून के सामने बराबर हैं और उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा. ये स्वतंत्रताएँ हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जीने और समाज में पूरी तरह भाग लेने में मदद करती हैं.
In simple words: 'स्वतंत्रता के अधिकार' में धर्म, संस्कृति, शिक्षा और समानता की आजादी शामिल है.
🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आने वाली विभिन्न स्वतंत्रताओं को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक स्वतंत्रता का संक्षिप्त अर्थ भी स्पष्ट करें.
Question 2. (झ) संविधान में दिए गए किन्हीं दो मौलिक कर्तव्यों को लिखिए।
Answer: संविधान में भारतीय नागरिकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण कर्तव्य बताए गए हैं. यहाँ दो मौलिक कर्तव्य दिए गए हैं:
1. हर भारतीय को संविधान का पालन करना चाहिए और उसके बताए गए सिद्धांतों, संस्थानों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए.
2. हर भारतीय का यह भी कर्तव्य है कि वह भारत की आजादी, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे हमेशा मजबूत बनाए रखे. ये कर्तव्य हमें याद दिलाते हैं कि अधिकारों के साथ-साथ देश के प्रति हमारी जिम्मेदारियाँ भी हैं.
In simple words: हमें संविधान, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए. साथ ही, भारत की एकता और अखंडता की रक्षा भी करनी चाहिए.
🎯 Exam Tip: मौलिक कर्तव्यों को याद करते समय, 'संविधान का सम्मान' और 'देश की एकता व अखंडता की रक्षा' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें.
Question 2. (ञ) हमारे देश के लिए संविधान क्यों महत्वपूर्ण है?
Answer: हमारे देश के लिए संविधान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक लोकतांत्रिक देश है. जिस भी देश में जनता द्वारा चुनी गई सरकार होती है, वहाँ एक संविधान अवश्य होता है. संविधान एक नियम-कानून की किताब है जिसमें देश को चलाने के सभी नियम लिखे होते हैं. यह बताता है कि सरकार कैसे काम करेगी, नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य क्या हैं, और कैसे न्याय मिलेगा. हर नागरिक को इसके नियमों का पालन करना होता है, जिससे देश में शांति और व्यवस्था बनी रहती है. यह देश को सही दिशा में चलाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है.
In simple words: संविधान हमारे देश को चलाने के लिए नियमों की किताब है. यह सबको अधिकार और कर्तव्य बताता है और देश में शांति बनाए रखता है, इसलिए यह बहुत जरूरी है.
🎯 Exam Tip: संविधान के महत्व को बताते समय, 'लोकतांत्रिक शासन', 'नियमों का संग्रह', 'नागरिकों के अधिकार-कर्तव्य' और 'देश में व्यवस्था बनाए रखने' जैसे बिंदुओं पर जोर दें.
Question 3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (भरकर)-
Answer:
(क) संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे.
(ख) संविधान के द्वारा भारतीय नागरिकों को 11 (ग्यारह) मौलिक कर्तव्य दिए गए हैं.
(ग) मौलिक अधिकारों के हनन पर भारतीय नागरिक न्यायालय की शरण में जा सकता है.
In simple words: ये वाक्य संविधान से जुड़े कुछ खाली स्थानों को भरते हैं. जैसे, डॉ. अंबेडकर ने संविधान की प्रारूप समिति की अध्यक्षता की, नागरिकों को 11 मौलिक कर्तव्य मिले हैं, और अपने अधिकारों के लिए लोग कोर्ट जा सकते हैं.
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, सही तथ्य और संख्याएँ याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर संविधान से संबंधित प्रमुख व्यक्तियों और संख्याओं के लिए.
Question 4. अधिकार और कर्तव्य परस्पर जुड़े हैं। उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer: अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं. ये दोनों एक सिक्के के दो पहलू की तरह हैं. जब हमें कोई अधिकार मिलता है, तो उसके साथ हमारी कुछ जिम्मेदारियाँ (कर्तव्य) भी आती हैं. उदाहरण के लिए:
1. यदि आपको 'शोषण के विरुद्ध अधिकार' मिला है, तो आपका कर्तव्य है कि आप किसी और का शोषण न करें और दूसरों को भी इस अधिकार का सम्मान करने दें.
2. अगर आपके पास 'समानता का अधिकार' है, तो आपका कर्तव्य बनता है कि आप भी सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करें और किसी के साथ भेदभाव न करें.
3. 'धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार' यह कहता है कि आप अपना धर्म मान सकते हैं, लेकिन आपका कर्तव्य है कि आप दूसरों के धर्मों का भी सम्मान करें.
इसके अलावा, देश के प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम संविधान के आदर्शों का पालन करें, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करें, और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें. इस तरह, अधिकार हमें शक्ति देते हैं, और कर्तव्य हमें जिम्मेदार बनाते हैं, जिससे समाज में संतुलन बना रहता है.
In simple words: अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं. अगर हमें कोई अधिकार मिलता है, तो हमारा फर्ज बनता है कि हम दूसरों के अधिकारों का सम्मान करें और अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँ.
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संबंध को स्पष्ट करने के लिए हर अधिकार के साथ उसके संबंधित कर्तव्य का उदाहरण देना सबसे प्रभावी तरीका है.
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