Official UP Board Solutions for Class 7 Agricultural Science: Chapter 02 भू क्षरण
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Chapter-wise Solutions for Agricultural Science: Chapter 02 भू क्षरण
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भू-क्षरण
अभ्यास
Question 1. सही उत्तर पर सही (√) का चिह्न लगाइए ।
(i) भू-क्षरण निम्न शक्तियों (कारकों) द्वारा होता है
(क) वर्षा
(ख) हवा
(ग) बर्फ
(घ) उपरोक्त सभी (√)
Answer: (घ) उपरोक्त सभी
In simple words: मिट्टी का कटाव बारिश, हवा और बर्फ जैसी कई प्राकृतिक शक्तियों के कारण होता है.
🎯 Exam Tip: भू-क्षरण के विभिन्न कारकों को पहचानना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये प्रकृति में अलग-अलग तरीकों से काम करते हैं, लेकिन सभी मिट्टी को नुकसान पहुँचाते हैं।
Question 1.
(ii) भू-क्षरण से तात्पर्य है-
(क) भूमि के कणों का अपने स्थान से हटना एवं दूसरे स्थान पर इकट्ठा होना (√)
(ख) पानी का बहना
(ग) बर्फ का पिघलना
(घ) खेत की जुताई करना
Answer: (क) भूमि के कणों का अपने स्थान से हटना एवं दूसरे स्थान पर इकट्ठा होना
In simple words: भू-क्षरण का मतलब है जब मिट्टी के छोटे-छोटे टुकड़े एक जगह से टूटकर दूसरी जगह चले जाते हैं।
🎯 Exam Tip: भू-क्षरण की सही परिभाषा याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मूल अवधारणा है जिसके आसपास यह अध्याय घूमता है।
Question 1.
(iii) वायु भू-क्षरण निम्न कारक द्वारा होता है-
(क) जल द्वारा
(ख) बर्फ द्वारा
(ग) वायु द्वारा (√)
(घ) गुरुत्वाकर्षण द्वारा
Answer: (ग) वायु द्वारा
In simple words: हवा से होने वाले मिट्टी के कटाव को वायु भू-क्षरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वायु भू-क्षरण को पहचानना आसान है क्योंकि यह सीधा हवा के कारण होता है, खासकर सूखे इलाकों में।
Question 1.
(iv) बीहड़ (रेवाइन) निम्न स्थानों पर पाया जाता है
(क) नदी एवं नान्नों के किनारे व आप पास (√)
(ख) खेती योग्य भूमि पर
(ग) खेत के मैदान में
(घ) गाँव में
Answer: (क) नदी एवं नान्नों के किनारे व आप पास
In simple words: बीहड़ आमतौर पर नदियों और नालों के किनारों पर बनते हैं जहाँ पानी मिट्टी को काटता है।
🎯 Exam Tip: बीहड़ अक्सर उन जगहों पर पाए जाते हैं जहाँ पानी का बहाव तेज़ होता है और मिट्टी को आसानी से काट देता है, जैसे नदी के किनारे।
Question 1.
(v) मृदा संरक्षण का अर्थ है
(क) मृदा को क्षरण से बचाना (√)
(ख) मृदा का पानी के साथ खेत से बहना
(ग) ढाल पर खेती करना
(घ) मिट्टी खोदना ।
Answer: (क) मृदा को क्षरण से बचाना
In simple words: मिट्टी को खराब होने या बह जाने से बचाना ही मृदा संरक्षण कहलाता है।
🎯 Exam Tip: मृदा संरक्षण का मुख्य लक्ष्य मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखना और उसके कटाव को रोकना है ताकि भविष्य में भी खेती की जा सके।
Question 2. निम्नलिखित कथनों में सही पर (√) और गलत पर (X) का निशान लगाइए-
(i) भू-क्षरण का अर्थ मिट्टी को खोदकर अन्यत्र ले जाना है। (√)
(ii) भू-क्षरण से खेत की उपजाऊ मिट्टी बह जाती है। (√)
(iii) वायु-क्षरण अधिकतर शुष्क एवं रेतीले क्षेत्रों में होता है। (√)
(iv) एक हेक्टेयर खेत से औसतन 50 टन मिट्टी प्रतिवर्ष बह जाती है। (X)
Answer:
(i) भू-क्षरण का अर्थ मिट्टी को खोदकर अन्यत्र ले जाना है।
\( \implies \) सही
(ii) भू-क्षरण से खेत की उपजाऊ मिट्टी बह जाती है।
\( \implies \) सही
(iii) वायु-क्षरण अधिकतर शुष्क एवं रेतीले क्षेत्रों में होता है।
\( \implies \) सही
(iv) एक हेक्टेयर खेत से औसतन 50 टन मिट्टी प्रतिवर्ष बह जाती है।
\( \implies \) गलत
In simple words: भू-क्षरण मिट्टी के बहाव से जुड़ा है, जिससे उपजाऊ मिट्टी कम हो जाती है, खासकर शुष्क जगहों पर वायु-क्षरण अधिक होता है।
🎯 Exam Tip: भू-क्षरण के प्रभावों और विभिन्न प्रकार के कारकों को समझने के लिए इन मूल कथनों को ध्यान में रखें।
Question 3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(i) ढालू-खेतों से भू-क्षरण अधिक होता है। (अधिक/कम)
(ii) सबसे अधिक भू-क्षरण जल से होता है। (जल/बर्फ)
(iii) त्वरित क्षरण मानव द्वारा होता है। (प्रकृति/मानव)
(iv) भूस्खलन (लैण्डस्लाइड) पहाड़ी क्षेत्रों में होता है। (पहाड़ी/मैदानी क्षेत्र)
(v) मृदा सतह की एक इंच ऊपरी परत बनाने में प्रकृति को 300 से 100 वर्ष लगते हैं। (300/100 वर्ष)
Answer:
(i) ढालू-खेतों से भू-क्षरण अधिक होता है।
(ii) सबसे अधिक भू-क्षरण जल से होता है।
(iii) त्वरित क्षरण मानव द्वारा होता है।
(iv) भूस्खलन (लैण्डस्लाइड) पहाड़ी क्षेत्रों में होता है।
(v) मृदा सतह की एक इंच ऊपरी परत बनाने में प्रकृति को 300 से 100 वर्ष लगते हैं।
In simple words: ढालू खेत, पानी और मानव गतिविधियाँ मिट्टी के कटाव को बढ़ाती हैं, खासकर पहाड़ी इलाकों में, और मिट्टी बनने में बहुत समय लगता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, दिए गए विकल्पों पर ध्यान दें और सबसे उपयुक्त शब्द चुनें जो वाक्य को सही अर्थ दे।
Question 4. निम्नलिखित में स्तम्भ 'क' को स्तम्भ 'ख' से सुमेल कीजिए (सुमेल करके)-
Answer:
| स्तम्भ 'क' | स्तम्भ 'ख' |
|---|---|
| जलीय क्षरण | जल द्वारा मिट्टी के कणों का बहना |
| वायु क्षरण | वायु द्वारा मिट्टी के कणों का उड़ना |
| त्वरित क्षरण | मनुष्य के हस्तक्षेप द्वारा क्षरण |
| प्राकृतिक क्षरण | प्रकृति द्वारा क्षरण |
In simple words: यह मिलान मिट्टी के कटाव के अलग-अलग प्रकारों को उनके कारणों से जोड़ता है, जैसे पानी, हवा, इंसान और कुदरत।
🎯 Exam Tip: मिलान करते समय, पहले उन जोड़ियों को मिलाएँ जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बाकी विकल्पों पर ध्यान दें।
Question 5.
(i) खेत से पानी बहने के बाद खेत में अंगुलियों जैसी संरचना कैसे बनती हैं?
Answer: बरसात के दिनों में, जब ढाल वाली ज़मीन पर तेज़ बारिश होती है, तो पानी मिट्टी को बहाकर छोटी-छोटी नालियाँ या अंगुलियों जैसी संरचनाएँ बना देता है। यह मिट्टी के ऊपरी परत के कटाव के कारण होता है।
In simple words: बारिश में ढाल वाली ज़मीन से पानी बहते हुए मिट्टी को काटता है और छोटी उंगली जैसी आकृतियाँ बना देता है।
🎯 Exam Tip: यह घटना 'रिल इरोजन' का एक प्रकार है, जहाँ पानी की धाराएँ मिट्टी में छोटे चैनल बनाती हैं। अपने जवाब में 'ढालू भूमि' और 'पानी का बहाव' जैसे मुख्य शब्दों का उपयोग करें।
Question 5.
(ii) वर्षा की बूंद का क्षरण कैसे होता है?
Answer: जब बारिश की बूँदें सीधे मिट्टी पर गिरती हैं, तो वे अपनी शक्ति से मिट्टी के कणों को एक मीटर तक ऊँचा उछाल देती हैं और एक मीटर दूर तक बिखेर देती हैं। इस प्रक्रिया को वर्षा-बूँद क्षरण कहते हैं, जो मिट्टी के कटाव की पहली अवस्था है।
In simple words: बारिश की बूँदें जब ज़मीन पर गिरती हैं, तो वे मिट्टी के छोटे कणों को ऊपर और दूर उछाल देती हैं, जिससे मिट्टी का कटाव शुरू होता है।
🎯 Exam Tip: वर्षा-बूँद क्षरण को 'स्प्लैश इरोजन' भी कहते हैं; याद रखें कि यह मिट्टी के कटाव का शुरुआती और सबसे पहला रूप है।
Question 5.
(iii) बालू के टीले (सैण्डडयून) कैसे बनते हैं?
Answer: बालू के टीले मुख्य रूप से तेज़ हवाओं के कारण बनते हैं, जो रेतीली ज़मीन से रेत के कणों को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं और उन्हें जमा कर देती हैं। हवा इन रेत के कणों को लगातार उड़ाती और इकट्ठा करती रहती है, जिससे बड़े-बड़े टीले बन जाते हैं।
In simple words: तेज़ हवा रेतीली ज़मीन से रेत को उड़ाकर एक जगह जमा करती है, जिससे धीरे-धीरे बालू के टीले बन जाते हैं।
🎯 Exam Tip: बालू के टीलों के निर्माण में 'तेज हवा' और 'रेतीली भूमि' ये दो मुख्य कारक हैं, इन्हें उत्तर में शामिल करना न भूलें।
Question 5.
(iv) पानी के साथ मिट्टी बहकर कहाँ चली जाती है? इसका प्रभाव क्या होता है?
Answer: पानी के साथ मिट्टी की ऊपरी और सबसे उपजाऊ परत बहकर नदियों, नालों और अंततः समुद्र में चली जाती है। इसका बुरा प्रभाव यह होता है कि खेत की ज़मीन के पोषक तत्व कम हो जाते हैं, जिससे उसकी उपजाऊ शक्ति घट जाती है और फसल उत्पादन भी प्रभावित होता है।
In simple words: पानी अपने साथ खेत की उपजाऊ मिट्टी बहाकर नदियों और समुद्र में ले जाता है, जिससे खेत की उर्वरता कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में मिट्टी के बहाव के गंतव्य (नदियाँ, नाले, समुद्र) और उसके नकारात्मक प्रभाव (पोषक तत्वों की कमी, उपजाऊ शक्ति में गिरावट) दोनों का उल्लेख करना आवश्यक है।
Question 5.
(v) ढालू खेतों में फसलों का उत्पादन कम क्यों होता है?
Answer: ढालू खेतों में पानी के बहाव के कारण मिट्टी का कटाव ज़्यादा होता है। इस वजह से खेत की उपजाऊ ऊपरी परत बह जाती है और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे फसलों का उत्पादन भी कम हो जाता है।
In simple words: ढालू खेतों में पानी मिट्टी को जल्दी बहा ले जाता है, जिससे खेत की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और फसलें ठीक से नहीं उग पातीं।
🎯 Exam Tip: ढालू खेतों में भू-क्षरण के कारण फसल उत्पादन में कमी का सीधा संबंध मिट्टी के कटाव से होने वाले पोषक तत्वों के नुकसान से है।
Question 5.
(vi) बरसात के दिनों में मटमैले एवं गॅदले पानी के अन्दर क्या होता है?
Answer: बरसात के दिनों में जब पानी मटमैला और गंदा दिखता है, तो इसका मतलब है कि उसमें खेत की मिट्टी के छोटे कण और अन्य पोषक तत्व घुले हुए हैं। यह पानी अपने साथ बहकर जा रहा होता है।
In simple words: बारिश में जो पानी मटमैला दिखता है, उसमें खेत की मिट्टी के कण और फसल के लिए जरूरी पोषक तत्व मिले होते हैं।
🎯 Exam Tip: मटमैला पानी मिट्टी के कटाव का एक सीधा संकेत है, जो यह दर्शाता है कि मिट्टी के पोषक तत्व पानी के साथ बहकर जा रहे हैं।
Question 5.
(vii) पुराने पेड़ों की जड़ें मिट्टी के ऊपर दिखाई देती हैं इसका कारण बताइए।
Answer: पुराने पेड़ों की जड़ें इसलिए मिट्टी के ऊपर दिखाई देने लगती हैं क्योंकि लगातार जलीय भू-क्षरण के कारण पेड़ के आसपास की ऊपरी मिट्टी बह जाती है। जब पानी मिट्टी को बहा ले जाता है, तो जड़ों को ढँकने वाली मिट्टी हट जाती है, जिससे जड़ें सतह पर दिखने लगती हैं।
In simple words: पुराने पेड़ों की जड़ें इसलिए ऊपर दिखती हैं क्योंकि पानी मिट्टी को बहा ले जाता है, जिससे जड़ों के ऊपर की मिट्टी हट जाती है।
🎯 Exam Tip: यह जलीय भू-क्षरण का एक स्पष्ट संकेत है, जिससे पता चलता है कि मिट्टी का कटाव किस हद तक हुआ है।
Question 5.
(viii) खेत को समतल एवं मेंड़बन्दी करने से क्या लाभ है?
Answer: खेतों को समतल करने और उनके चारों ओर मेंड़ बनाने से कई फायदे होते हैं। इससे खेत में बारिश का पानी रुक जाता है और मिट्टी के साथ बहता नहीं है, जिससे भू-क्षरण रुकता है। साथ ही, मिट्टी की नमी बनी रहती है, जो फसलों के लिए फायदेमंद होती है।
In simple words: खेत को बराबर और मेड़बंदी करने से पानी खेत में रुकता है, मिट्टी बहती नहीं है और फसल को नमी मिलती है।
🎯 Exam Tip: खेत को समतल करना और मेड़बंदी करना भू-क्षरण को रोकने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए एक प्रभावी तरीका है।
Question 5.
(ix) ढालू भूमि में किस विधि से खेती करते हैं?
Answer: ढालू भूमि में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए ढाल के विपरीत दिशा में जुताई करके सीढ़ीदार खेती की जाती है। इस विधि में, ज़मीन को सीढ़ियों जैसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दिया जाता है ताकि पानी का बहाव धीमा हो जाए और मिट्टी बहकर न जाए।
In simple words: ढालू ज़मीन पर मिट्टी को बहने से रोकने के लिए ढलान के उल्टी दिशा में सीढ़ीदार खेती की जाती है।
🎯 Exam Tip: सीढ़ीदार खेती (कंटूर प्लोइंग) ढालू ज़मीन पर भू-क्षरण को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
Question 5.
(x) पहाड़ी पर किस प्रकार की खेती करते हैं?
Answer: पहाड़ी इलाकों में, मिट्टी के कटाव को रोकने और पानी को ज़मीन में सोखने के लिए सीढ़ीदार खेती की जाती है। इसमें पहाड़ों की ढलानों को काटकर सीढ़ियों जैसे खेत बनाए जाते हैं, जिससे पानी की गति कम हो जाती है और मिट्टी अपनी जगह पर बनी रहती है।
In simple words: पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीदार खेती की जाती है ताकि मिट्टी का कटाव रुक जाए और पानी धीरे-धीरे बहे।
🎯 Exam Tip: सीढ़ीदार खेती न केवल भू-क्षरण को रोकती है बल्कि ढलान वाली भूमि पर खेती को भी संभव बनाती है।
Question 5.
(xi) वनस्पतियाँ (पेड़-पौधे) किस तरह से मृदा संरक्षण में सहायक होती हैं?
Answer: पेड़-पौधे और घास अपनी जड़ों से मिट्टी को मज़बूती से बाँधकर रखते हैं, जिससे मिट्टी का कटाव कम होता है। उनकी पत्तियाँ बारिश की बूँदों के सीधे प्रभाव को कम करती हैं और पत्तियाँ ज़मीन पर गिरकर मिट्टी की नमी बनाए रखती हैं। इससे पानी धीरे-धीरे बहता है और ज़मीन में ज़्यादा सोखता है।
In simple words: पेड़-पौधे और घास की जड़ें मिट्टी को पकड़े रखती हैं, जिससे वह बहती नहीं और बारिश का पानी भी धीरे बहता है, जिससे मिट्टी का कटाव कम होता है।
🎯 Exam Tip: वनस्पतियाँ मिट्टी के कटाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं; उनकी जड़ें मिट्टी को स्थिर करती हैं और पत्तियों का आवरण मिट्टी को बारिश के सीधे प्रभाव से बचाता है।
Question 5.
(xii) ढालू भूमि में ढाल के विपरीत खेती करने से क्या लाभ है?
Answer: ढालू भूमि में ढाल के विपरीत खेती करने से मिट्टी का कटाव कम होता है। इस तरीके से जुताई, गुड़ाई और बोआई करने पर पानी खेतों में रुक जाता है और धीरे-धीरे ज़मीन में सोखता है, जिससे मिट्टी बहती नहीं है और खेती करना आसान हो जाता है। यह विधि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करती है।
In simple words: ढाल के उल्टी दिशा में खेती करने से पानी खेत में रुक जाता है, जिससे मिट्टी बहती नहीं और खेती करना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: ढाल के विपरीत खेती करने से मिट्टी का कटाव कम होता है और पानी का बेहतर प्रबंधन होता है, जो ढालू भूमि पर खेती के लिए एक महत्वपूर्ण तरीका है।
Question 5.
(xiii) सीढ़ीदार खेती से क्या समझते हैं?
Answer: सीढ़ीदार खेती एक ऐसी विधि है जिसमें अधिक ढलान वाली और पहाड़ी ज़मीन पर ढाल के विपरीत सीढ़ी जैसी संरचनाएँ बनाकर खेती की जाती है। इन सीढ़ियों से पानी का बहाव धीमा हो जाता है और मिट्टी का कटाव भी रुकता है। यह विधि पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को संभव बनाती है।
In simple words: सीढ़ीदार खेती में पहाड़ों पर ढलान के उल्टी दिशा में सीढ़ियाँ बनाकर खेत बनाते हैं, जिससे मिट्टी का कटाव रुकता है।
🎯 Exam Tip: सीढ़ीदार खेती का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकना और पानी के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है।
Question 5.
(xiv) पशुओं द्वारा अनियमित चराई करने से मृदा संरक्षण पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: पशुओं द्वारा एक ही जगह पर लगातार और ज़्यादा चराई करने से ज़मीन पर उगी घास और वनस्पतियाँ कम हो जाती हैं। जब ज़मीन पर पर्याप्त घास नहीं होती, तो पशुओं के खुरों से मिट्टी कट जाती है और बारिश या हवा से आसानी से बह जाती है, जिससे मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है।
In simple words: जब पशु एक ही जगह पर ज़्यादा चरते हैं, तो घास कम हो जाती है और उनके खुरों से मिट्टी ढीली होकर बहने लगती है, जिससे मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: अत्यधिक चराई वनस्पतियों को नष्ट कर देती है, जिससे मिट्टी का आवरण हट जाता है और वह कटाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है।
Question 5.
(xv) खेत व नालों से बहते हुए पानी को रोकने हेतु कौन-सी संरचना बनाते हैं?
Answer: खेत और नालों से बहते हुए पानी को रोकने और मिट्टी के कटाव को कम करने के लिए रोक बाँध (चेक डैम) बनाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे बाँध पानी के बहाव को धीमा कर देते हैं और मिट्टी को जमा होने से रोकते हैं, जिससे भू-क्षरण पर नियंत्रण होता है।
In simple words: खेत और नालों से बहते पानी को रोकने के लिए छोटे बाँध (चेक डैम) बनाए जाते हैं ताकि मिट्टी का कटाव रुक सके।
🎯 Exam Tip: रोक बाँध (चेक डैम) भू-क्षरण को नियंत्रित करने और पानी के संरक्षण में सहायक होते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ पानी का बहाव तेज़ होता है।
Question 6. भू-क्षरण की परिभाषा दीजिए । जलीय भू-क्षरण के प्रकारों को वर्णन कीजिए।
Answer: भू-क्षरण की परिभाषा: भू-क्षरण का मतलब है जब मिट्टी के कण अपनी मूल जगह से हटकर दूसरी जगह पर जमा हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को मृदा अपरदन भी कहते हैं। बारिश के पानी द्वारा होने वाले भू-क्षरण को जलीय भू-क्षरण कहा जाता है।
जलीय भू-क्षरण के प्रकार:
1. वर्षा-बूँद क्षरण: जब बारिश की बूँदें सीधे मिट्टी पर गिरकर कणों को उछालती हैं।
2. परत भू-क्षरण: जब पानी की पतली परत मिट्टी की ऊपरी सतह को बहा ले जाती है।
3. अल्पसरिता भू-क्षरण: पानी की छोटी-छोटी धाराएँ मिट्टी में पतली नालियाँ बनाती हैं।
4. खड्डु या अवनालिका: पानी की तेज़ धाराएँ मिट्टी में गहरे और चौड़े नाले बना देती हैं।
5. बीहड़ भू-क्षरण: जब खड्डु और अवनालिकाएँ बड़ी होकर बीहड़ का रूप ले लेती हैं।
6. नदी तट भू-क्षरण: नदियों के किनारे की मिट्टी का कटाव।
7. समुद्रतट भू-क्षरण: समुद्र की लहरों से तट की मिट्टी का कटाव।
8. हिमनद भू-क्षरण: बर्फ़ के पिघलने और बहाव से होने वाला मिट्टी का कटाव।
9. भूस्खलन भू-क्षरण: पहाड़ों पर चट्टानों या मिट्टी का खिसकना, जिससे नीचे की ज़मीन दब जाती है।
In simple words: भू-क्षरण वह प्रक्रिया है जहाँ मिट्टी अपनी जगह से हटकर कहीं और चली जाती है, और जलीय भू-क्षरण बारिश के पानी से होता है, जिसके कई प्रकार होते हैं जैसे बूँद, परत, नाली और बीहड़।
🎯 Exam Tip: भू-क्षरण की परिभाषा और जलीय भू-क्षरण के विभिन्न प्रकारों को उनके मुख्य कारणों के साथ याद रखना ज़रूरी है।
Question 7. वायु-क्षरण से आप क्या समझते हैं? इसका वर्णन कीजिए ।
Answer: जब तेज़ हवा के कारण भूमि की मिट्टी का कटाव होता है, तो उसे वायु भू-क्षरण कहते हैं। यह आमतौर पर उन जगहों पर होता है जहाँ बारिश कम होती है और ज़मीन पर पेड़-पौधे नहीं होते हैं। ऐसे सूखे और रेतीले इलाकों में तेज़ हवा मिट्टी के छोटे कणों को अपनी जगह से हटाकर कई किलोमीटर दूर उड़ाकर जमा कर देती है। कई बार यह उड़ी हुई मिट्टी खेतों में जमा होकर फसलों को बर्बाद कर देती है, और रेत के टीले भी इसी हवा के कारण बनते हैं।
In simple words: वायु-क्षरण तब होता है जब हवा मिट्टी को उड़ाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है, खासकर सूखे और खुले इलाकों में, जिससे मिट्टी के टीले और फ़सलों का नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: वायु-क्षरण को पहचानने के लिए 'कम वर्षा', 'शुष्क जलवायु', 'तेज हवा' और 'वनस्पतियों का अभाव' जैसे मुख्य शब्दों को याद रखें।
Question 8. प्राकृतिक एवं त्वरित भू-क्षरण उदाहरण सहित समझाइए ।
Answer:
1. प्राकृतिक भू-क्षरण: यह वह भू-क्षरण है जो प्रकृति द्वारा अपने आप धीरे-धीरे होता है। इसकी गति बहुत धीमी होती है और यह ज़्यादा विनाशकारी नहीं होता। इसमें जितनी मिट्टी बनती है, उतना ही कटाव होता है, जिससे प्रकृति में संतुलन बना रहता है। इससे धरती पर पठार, मैदान, घाटियाँ और अलग-अलग तरह की मिट्टी बनती है। यह एक ज़रूरी प्राकृतिक प्रक्रिया है।
2. त्वरित भू-क्षरण: यह भू-क्षरण मानव की गतिविधियों के कारण तेज़ गति से होता है और ज़्यादा नुकसान पहुँचाता है। उदाहरण के लिए, जब लोग चरागाहों में जानवरों को ज़्यादा चराते हैं, वनों को अंधाधुंध काटते हैं, या गलत तरीके से खेती करते हैं, तो ज़मीन पर से पेड़-पौधे हट जाते हैं। इससे मिट्टी का कटाव बहुत तेज़ी से होता है और मनुष्य इसके लिए ज़िम्मेदार है।
In simple words: प्राकृतिक भू-क्षरण कुदरती रूप से धीरे-धीरे होता है और संतुलन बनाए रखता है, जबकि त्वरित भू-क्षरण इंसानों की गलत हरकतों से तेज़ी से होता है और ज़्यादा नुकसान पहुँचाता है।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक और त्वरित भू-क्षरण के बीच का मुख्य अंतर यह है कि प्राकृतिक क्षरण धीमी और संतुलित प्रक्रिया है, जबकि त्वरित क्षरण मानव गतिविधियों के कारण तेज़ और विनाशकारी होता है।
Question 9. भू-क्षरण किन-किन कारकों द्वारा होता है? वर्णन कीजिए ।
Answer: भू-क्षरण की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब मिट्टी का संपर्क वर्षा या वायु से होता है। जैसे-जैसे बारिश या हवा की गति बदलती है, वैसे-वैसे भू-क्षरण का रूप और प्रकार भी बदलता रहता है। भू-क्षरण मुख्य रूप से दो प्रमुख कारकों द्वारा होता है:
1. जल: पानी के कारण होने वाले भू-क्षरण को जलीय भू-क्षरण कहते हैं। इसमें वर्षा-बूँद क्षरण, परत क्षरण, रिल और गली क्षरण शामिल हैं। पानी की तेज़ धाराएँ मिट्टी के कणों को बहा ले जाती हैं, खासकर ढालू भूमि पर।
2. वायु: हवा के कारण होने वाले भू-क्षरण को वायु भू-क्षरण कहते हैं। यह अक्सर शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में होता है जहाँ तेज़ हवा मिट्टी के सूखे कणों को उड़ाकर दूर ले जाती है।
In simple words: भू-क्षरण मुख्य रूप से पानी और हवा के कारण होता है। पानी मिट्टी को बहा ले जाता है (जलीय भू-क्षरण), और हवा मिट्टी के कणों को उड़ा ले जाती है (वायु भू-क्षरण)।
🎯 Exam Tip: भू-क्षरण के मुख्य कारकों (जल और वायु) और उनके विभिन्न प्रकारों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग होते हैं।
Question 10. भू-क्षरण से होने वाली हानियों का वर्णन कीजिए।
Answer: भू-क्षरण से कई तरह की हानियाँ होती हैं:
1. नदी, नालों व समुद्रों में मिट्टी जमा होने से वे उथले हो रहे हैं। इससे उनकी गहराई कम हो जाती है।
2. इससे पृथ्वी के बड़े भू-भाग के डूबने का खतरा उत्पन्न हो गया है, क्योंकि पानी का निकास अवरुद्ध हो जाता है।
3. बाढ़ एवं पर्यावरण संबंधी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं क्योंकि जल भराव और मिट्टी के जमाव से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है।
4. धन, जन और स्वास्थ्य की हानि हो रही है, क्योंकि बाढ़ से संपत्ति और जान का नुकसान होता है, और जल जमाव से बीमारियाँ फैलती हैं।
5. भू-क्षरण के कारण पृथ्वी की उपजाऊ शक्ति और उत्पादन क्षमता घट रही है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था कमज़ोर होती है।
In simple words: भू-क्षरण से नदियाँ उथली हो जाती हैं, ज़मीन डूबने का खतरा बढ़ता है, बाढ़ और प्रदूषण जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं, लोगों और धन का नुकसान होता है, और ज़मीन की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति खराब होती है।
🎯 Exam Tip: भू-क्षरण के दीर्घकालिक प्रभावों पर ध्यान दें, जो न केवल कृषि को बल्कि पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं।
Question 11. मृदा संरक्षण की परिभाषा एवं महत्त्व का वर्णन कीजिए।
Answer: मृदा संरक्षण का मतलब है मिट्टी को कटाव और नुकसान से बचाना। यह हमारा सबसे ज़रूरी कर्तव्य है। हमें मिट्टी को सुरक्षित रखने के लिए सही तरीके अपनाने चाहिए। अगर ज़मीन पर घास और पेड़-पौधे नहीं होंगे, तो मिट्टी का कटाव ज़्यादा होता है। इससे नदी और नालों में मिट्टी जमा हो जाती है, जिससे उनकी पानी सोखने की क्षमता कम हो जाती है और बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, मिट्टी के कटाव को रोकने की इस प्रक्रिया को ही मृदा संरक्षण कहते हैं। मिट्टी संरक्षण खेती के लिए और पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: मृदा संरक्षण का मतलब है मिट्टी को कटने या खराब होने से बचाना, जो खेती और पर्यावरण के लिए बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: मृदा संरक्षण की परिभाषा और उसके महत्व को स्पष्ट रूप से समझें, यह न केवल मिट्टी को बचाने के लिए बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन और कृषि उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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Step-by-Step Explanations for Chapter 02 भू क्षरण
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Next Steps in Your Agricultural Science Revision
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FAQs
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