UP Board Solutions Class 6 Hindi Chapter 4 Neeti Ke Dohe

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Detailed Chapter 4 नीति के दोहे UP Board Solutions for Class 6 Hindi

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Class 6 Hindi Chapter 4 नीति के दोहे UP Board Solutions PDF

समस्त पद्माशों की व्याख्या

(क) कबीरदास

 

Question 1. दुर्बल को न ......... स्वै-जाय ।।1।।
Answer: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से लिया गया है। इसे महान संत कबीरदास जी ने लिखा है। इस दोहे में कबीरदास जी ने कमज़ोर लोगों को परेशान न करने की सीख दी है। कबीरदास जी कहते हैं कि असहाय और निर्बल व्यक्ति को दुख नहीं देना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी आह (बद्दुआ) बहुत बुरी होती है। जैसे मरी हुई खाल की धौंकनी भी लोहे को पिघला सकती है, तो एक जीवित इंसान की आह का बुरा असर कितना अधिक हो सकता है। हमें हमेशा कमजोर लोगों के प्रति दयालु रहना चाहिए, क्योंकि उनकी पीड़ा का प्रभाव बहुत गहरा हो सकता है।
In simple words: यह दोहा कबीरदास जी का है और इसमें हमें सिखाया गया है कि कमज़ोर लोगों को कभी सताना नहीं चाहिए, क्योंकि उनकी बद्दुआ बहुत असरदार होती है।

🎯 Exam Tip: दोहों की व्याख्या करते समय, कवि का नाम और दोहे का मुख्य संदेश स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 2. मधुर वचन ......... सरीर ।।2।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे संत कबीरदास जी ने लिखा है। इस दोहे में कबीरदास जी बताते हैं कि मीठी वाणी सभी को अच्छी लगती है। कबीरदास जी कहते हैं कि मीठे और प्यारे वचन दवाई के जैसे होते हैं, जो प्राणों की रक्षा करते हैं। इसके उलट, तीखे या कड़वे वचन तीर की तरह होते हैं जो कानों से होकर पूरे शरीर को घायल कर देते हैं। इसलिए हमें हमेशा मीठी वाणी ही बोलनी चाहिए, क्योंकि इससे रिश्तों में मधुरता बनी रहती है।
In simple words: मीठी बातें दवा की तरह होती हैं जो अच्छा महसूस कराती हैं, जबकि कड़वी बातें तीर की तरह चोट पहुँचाती हैं। इसलिए हमें हमेशा प्यार से बात करनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: वाणी के महत्व से संबंधित दोहों में, मीठे और कड़वे शब्दों के प्रभाव की तुलना अवश्य करें।

 

Question 3. बुरा जो ......... न कोय ।।3।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे संत कबीरदास जी ने लिखा है। इस दोहे में कबीरदास जी कहते हैं कि इंसान को दूसरों की गलतियों को छोड़कर अपनी खुद की कमियों को देखना चाहिए। कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं दूसरे लोगों में बुराई खोजने चला, तो मुझे कोई बुरा आदमी नहीं मिला। लेकिन जब मैंने अपने दिल के अंदर झाँककर देखा, तो मुझे पता चला कि सबसे बुरा मैं ही हूँ, क्योंकि मुझमें बहुत सारी कमियाँ हैं। इसका मतलब यह है कि दूसरों की बुराइयाँ देखना ठीक नहीं है। हमें अपनी गलतियों को पहचानकर उन्हें सुधारना चाहिए, इससे हम बेहतर इंसान बन सकते हैं।
In simple words: कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैंने दूसरों में बुराई ढूँढी, तो मुझे कोई बुरा नहीं मिला। पर जब मैंने खुद को देखा, तो पाया कि मुझमें ही बहुत सारी कमियाँ हैं। इसलिए हमें दूसरों के बजाय अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए।

🎯 Exam Tip: आत्म-चिंतन (खुद को देखना) से जुड़े दोहों में, अपनी कमियों को स्वीकार करने और उन्हें सुधारने के महत्व पर जोर दें।

 

Question 4. साधु ऐसा ......... उड़ान ।।4।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे संत कबीरदास जी ने लिखा है। इस दोहे में कबीरदास जी कहते हैं कि दुनिया में अच्छी और बुरी दोनों तरह की चीजें होती हैं, लेकिन हमें सिर्फ अच्छी चीजों को ही अपनाना चाहिए और बुरी चीजों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। कबीरदास जी कहते हैं कि संसार में अच्छी और बुरी दोनों तरह की चीजें मौजूद हैं। लेकिन इंसान को केवल अच्छी चीजों को ही स्वीकार करना चाहिए और बुरी चीजों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। जैसे सूप (एक अनाज साफ करने वाला उपकरण) से अनाज को साफ किया जाता है, तो सारी गंदगी बाहर निकल जाती है और सिर्फ अच्छा अनाज बच जाता है। इसी तरह हमें भी जीवन से अच्छी बातें सीखनी चाहिए और नकारात्मक चीजों को छोड़ देना चाहिए, ताकि हमारा जीवन शुद्ध और सकारात्मक रहे।
In simple words: कबीरदास जी कहते हैं कि हमें जीवन में सूप की तरह होना चाहिए। सूप जैसे अनाज से गंदगी हटाकर सिर्फ अच्छा अनाज रखता है, वैसे ही हमें भी बुरी चीजों को छोड़कर सिर्फ अच्छी बातों को अपनाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: जीवन में सकारात्मकता अपनाने वाले दोहों में, सूप जैसे प्रतीकों का उपयोग करके व्याख्या को अधिक प्रभावी बनाएँ।

 

Question 5. धीरे-धीरे ......... फल होय ।।5।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे संत कबीरदास जी ने लिखा है। इस दोहे में कबीरदास जी कहते हैं कि किसी भी काम के अच्छे नतीजे (फल) के लिए हमें धैर्य रखना बहुत ज़रूरी है। कबीरदास जी कहते हैं कि संसार में हर काम अपने सही समय पर ही होता है। उदाहरण के लिए, माली साल भर पेड़ों को पानी देता रहता है, लेकिन फल केवल फल लगने के मौसम में ही आते हैं। इसका मतलब है कि हमें किसी भी काम के परिणाम (फल) के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए। हर चीज़ का अपना सही समय होता है, इसलिए हमें जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।
In simple words: कबीरदास जी कहते हैं कि हर काम अपने समय पर ही होता है। जैसे माली पेड़ को पानी देता है, पर फल मौसम में ही आते हैं। इसलिए हमें हर काम के लिए धैर्य रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: धैर्य और समय के महत्व को बताने वाले दोहों में, माली और पेड़ के उदाहरण को अवश्य शामिल करें।

(ख) रहीम

 

Question 1. वे रहीम ......... को रंग ।।1।।
Answer: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' नामक पाठ से लिया गया है। इसे महान कवि रहीमदास जी ने लिखा है। यह रहीम जी का नीति-मूलक दोहा है, जिसमें जीवन के मूल्यों का सुंदर वर्णन किया गया है। रहीम जी कहते हैं कि वे लोग बहुत धन्य हैं जो दूसरों की भलाई करने वाले (परोपकारियों) के साथ रहते हैं। ऐसे लोगों को भी परोपकार का फल मिलता है। वे इसका उदाहरण देते हैं कि जैसे मेहंदी बाँटने वालों के हाथ भी लाल हो जाते हैं, वैसे ही परोपकारी के साथ रहने से हमें भी कुछ अच्छा मिलता है। हमेशा अच्छे लोगों की संगत में रहना चाहिए क्योंकि उसका प्रभाव हमारे जीवन पर भी पड़ता है।
In simple words: रहीम जी कहते हैं कि जो लोग दूसरों की मदद करते हैं, वे धन्य हैं। परोपकारी लोगों के साथ रहने वालों को भी उसका लाभ मिलता है, जैसे मेहंदी बाँटने वाले के हाथ लाल हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: परोपकार से संबंधित दोहों में, मेहंदी बाँटने वाले के उदाहरण का उपयोग करके यह स्पष्ट करें कि अच्छे कामों का फल सभी को मिलता है।

 

Question 2. रहिमन पानी ........... मानुस चून ।।2।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे रहीमदास जी ने लिखा है। इस दोहे में रहीम जी कहते हैं कि पानी को बचाकर रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि पानी के बिना सब कुछ अधूरा है। पानी के चले जाने पर मोती, मनुष्य और चूना- ये तीनों चीज़ें महत्वहीन हो जाती हैं। मोती के लिए पानी का अर्थ 'चमक' है, मनुष्य के लिए पानी का अर्थ 'प्रतिष्ठा' है और चूने के लिए पानी का अर्थ 'जल' है। पानी के बिना ये तीनों बेकार हैं। जल जीवन का आधार है और इसकी कमी से कई समस्याएँ पैदा हो सकती हैं, इसलिए इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है।
In simple words: रहीम जी कहते हैं कि पानी बहुत ज़रूरी है। पानी के बिना मोती में चमक नहीं होती, इंसान की इज़्ज़त नहीं होती और चूना काम का नहीं रहता।

🎯 Exam Tip: श्लेष अलंकार वाले दोहों में, एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थों को स्पष्ट करना न भूलें, जैसे 'पानी' के यहाँ तीन अर्थ हैं।

 

Question 3. रहिमन............. कोय ।।3।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे रहीमदास जी ने लिखा है। इस दोहे में रहीम जी कहते हैं कि इंसान को अपने दुखों को अपने मन में ही छिपाकर रखना चाहिए, किसी और को नहीं बताना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर हम अपने दुखों को किसी और को बताते हैं, तो वे हमारा दुख कम नहीं करेंगे, बल्कि हमारी हँसी ज़रूर उड़ाएँगे। अपने दुख दूसरों को बताने से अक्सर सहानुभूति के बजाय मज़ाक ही मिलता है, इसलिए अपनी मुश्किलों को निजी रखना ही बेहतर है।
In simple words: रहीम जी कहते हैं कि हमें अपने दुख दूसरों को नहीं बताने चाहिए। क्योंकि लोग हमारा दुख कम नहीं करेंगे, बल्कि हँसेंगे।

🎯 Exam Tip: निजी भावनाओं और उनके प्रबंधन से संबंधित दोहों में, दूसरों की प्रतिक्रियाओं के बजाय आत्म-निर्भरता के महत्व पर प्रकाश डालें।

 

Question 4. जो बड़ेन ......... नाहिं ।।4।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे रहीमदास जी ने लिखा है। इस दोहे में रहीम जी कहते हैं कि अगर कोई काबिल इंसान की बुराई करता है, तो वह बुराई करने वाले की ही नीचता दिखाती है। जो चीज़ असल में अच्छी होती है, वह किसी के कहने भर से बुरी नहीं हो जाती। इसलिए हमें किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे उस व्यक्ति को कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि हमारी अपनी सोच ही नीची दिखाई देती है। किसी की अनावश्यक आलोचना करने से बचें, क्योंकि यह आलोचना करने वाले के चरित्र को दर्शाती है।
In simple words: रहीम जी कहते हैं कि अगर कोई अच्छे व्यक्ति की बुराई करता है, तो इससे बुराई करने वाले की ही छोटी सोच दिखती है। जो चीज़ अच्छी है, वह दूसरों के कहने से बुरी नहीं हो जाती।

🎯 Exam Tip: दूसरों की आलोचना और आत्म-मूल्य से संबंधित दोहों में, सच्ची अच्छाई की स्थिरता और आलोचना करने वाले की नीचता को रेखांकित करें।

 

Question 5. समय ......... टूक ।।5।।
Answer: यह पद्यांश भी पूर्ववत् है, यानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'नीति के दोहे' पाठ से है, जिसे रहीमदास जी ने लिखा है। इस दोहे के माध्यम से रहीम जी ने समय के महत्व को समझाया है। रहीम जी कहते हैं कि हमें समय के महत्व को समझना चाहिए। जो इंसान समय के महत्व को नहीं समझ पाता, वह समय निकल जाने पर पछताता और दुखी होता है, तथा सोचता है कि काश उसने समय के महत्व को पहले ही पहचाना होता। समय बहुत बलवान होता है और उसे व्यर्थ गँवाना हमेशा नुकसानदेह होता है, इसलिए हर पल का सदुपयोग करना चाहिए।
In simple words: रहीम जी कहते हैं कि हमें समय की अहमियत समझनी चाहिए। जो समय को नहीं पहचानता, वह बाद में पछताता है और दुखी होता है।

🎯 Exam Tip: समय के महत्व वाले दोहों में, समय की पाबंदी और उसके सदुपयोग से होने वाले लाभों पर ध्यान दें।

प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को-

नोट- विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से स्वयं करें ।

पाठ से

 

Question 1. नीचे कुछ वाक्य लिखे गए हैं। इनसे सम्बन्धित दोहों को उसी क्रम में लिखिए –
(क) मधुर वाणी औषधि का काम करती है तथा कठोर वाणी तीर की तरह मन को बेध देती है।
(ख) कोई भी कार्य समय पर ही होता है।
(ग) अपने दुख को कहीं उजागर नहीं करना चाहिए।
(घ) परोपकार करने वाले लोग प्रशंसनीय होते हैं।
(ङ) दूसरे लोगों में बुराई देखना ठीक नहीं।
Answer:
(क) मधुर बचन है औषधि, कटुक बचन है तीर । सेवन द्वार हुवै संचरे, सालै सकल सरीर ।
(ख) धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय । माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।।
(ग) रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो जोय । सुनी अटिलैहें लोग सब, बॉटि न लैहें कोय।।
(घ) वें रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग। बाँटनवारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग।।
(ङ) बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय ।। जो दिल खोजा आपनो, मुझ-सा बुरा ना कोय ।।
In simple words: यहाँ दिए गए वाक्यों से संबंधित दोहे दिए गए हैं। ये दोहे जीवन की सच्ची बातें सिखाते हैं और हमें सही रास्ता दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: दोहों को याद रखने के लिए, उनके मुख्य संदेश को समझें और उन्हें अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।

 

Question 2. निम्नांकित पंक्तियों के अर्थ स्पष्ट कीजिए नोट – विद्यार्थी सभी पंक्तियों के अर्थों के लिए सम्बन्धित व्याख्या देखें ।
Answer: विद्यार्थी इन पंक्तियों के अर्थ समझने के लिए, पाठ में पहले दी गई संबंधित व्याख्याओं को ध्यान से पढ़ें। दोहों के गहरे अर्थ को समझने के लिए उनका संदर्भ और प्रसंग जानना बहुत ज़रूरी है।
In simple words: इन पंक्तियों के मतलब जानने के लिए, पहले पाठ में दी गई इनकी पूरी जानकारी और व्याख्या को पढ़ें।

🎯 Exam Tip: जब किसी प्रश्न का उत्तर पहले से दिए गए पाठ में हो, तो उसे सटीक रूप से संदर्भित करें और पुनरावृत्ति से बचें।

 

Question 3. माली के दुवारा लगातार पेड़ों को सींचने पर भी फल क्यों नहीं आते हैं?
Answer: माली के लगातार पेड़ों को सींचने पर भी फल इसलिए नहीं आते, क्योंकि हर काम अपने सही समय पर ही होता है। घबराने या जल्दबाज़ी करने से कुछ नहीं मिलता। पेड़ों को फल देने के लिए एक निश्चित मौसम और समय की ज़रूरत होती है, सिर्फ पानी देने से यह प्रक्रिया तेज़ नहीं होती।
In simple words: फल तभी आते हैं जब उनका समय होता है, चाहे माली कितना भी पानी दे। हर चीज़ अपने सही वक्त पर ही होती है।

🎯 Exam Tip: समय और धैर्य से संबंधित प्रश्नों में, प्राकृतिक प्रक्रियाओं (जैसे फल उगना) के उदाहरणों का उपयोग करके अपने उत्तर को मज़बूत करें।

 

Question 4. अपने मन की व्यथा को अपने मन में ही क्यों रखना चाहिए?
Answer: हमें अपने मन की व्यथा (दुख) को अपने मन में ही इसलिए रखना चाहिए, क्योंकि कोई भी हमारी मुश्किलों को कम नहीं करता, बल्कि अक्सर हमारी हँसी ही उड़ाता है। लोग हमारे दुख को सुनकर सहानुभूति दिखाने के बजाय उसका मज़ाक बना सकते हैं, या उसे और बढ़ा सकते हैं। अपनी परेशानियों को गोपनीय रखने से हम दूसरों के गलत व्यवहार से बच सकते हैं।
In simple words: हमें अपना दुख अपने मन में ही रखना चाहिए, क्योंकि दूसरे लोग उसे कम नहीं करेंगे बल्कि हमारा मज़ाक उड़ा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत भावनाओं से संबंधित प्रश्नों में, ईमानदारी और गोपनीयता के सामाजिक प्रभावों को समझाएँ।

भाषा की बात ।

 

Question 1. 'स्रवन द्वार है संचरे, सालै सकल सरीर' पंक्ति में 'स' वर्ण की आवृत्ति कई बार होने से कविता की सुन्दरता बढ़ गयी है। जहाँ एक वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। अनुप्रास अलंकार के कुछ अन्य उदाहरण पुस्तक से ढूँढकर लिखिए।
Answer: अनुप्रास अलंकार तब होता है जब एक ही वर्ण (अक्षर) किसी काव्य पंक्ति में बार-बार आता है, जिससे कविता में सुंदरता और लय आती है। इसके कुछ अन्य उदाहरण यहाँ दिए गए हैं:
1. धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।।
2. रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
इन उदाहरणों में 'ध' और 'प' वर्ण की आवृत्ति अनुप्रास अलंकार को दर्शाती है।
In simple words: जब किसी कविता में एक ही अक्षर बार-बार आता है, तो उसे अनुप्रास अलंकार कहते हैं। ऊपर दिए गए दोहे इसके अच्छे उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: अनुप्रास अलंकार को पहचानते समय, कविता की पंक्ति में दोहराए जा रहे वर्ण (अक्षर) को चिह्नित करें।

 

Question 2. रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून । पानी गए न ऊबरै, मोती मानस चून ।। उपर्युक्त दोहे में 'पानी' शब्द के तीन अर्थ हैं – मोती के अर्थ में – कांति (चमक) मनुष्य के अर्थ में – प्रतिष्ठा, सम्मान चूने के अर्थ में – जल एक ही शब्द के कई अर्थ होने से यहाँ श्लेष अलंकार है। श्लेष अलंकार का एक और उदाहरण दीजिए।
Answer: श्लेष अलंकार तब होता है जब एक ही शब्द के एक से ज़्यादा अर्थ होते हैं और वह प्रसंग के अनुसार अलग-अलग अर्थ देता है। रहीम के दोहे में 'पानी' शब्द के तीन अर्थ हैं - मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए सम्मान, और चूने के लिए जल। यहाँ 'पानी' शब्द के कई अर्थ एक साथ जुड़े हुए हैं। श्लेष अलंकार का एक और उदाहरण है: मंगन को देखि 'पट' देत बार-बार है। इस पंक्ति में 'पट' शब्द के दो अर्थ हैं: 'कपड़ा' और 'द्वार' (दरवाजा)। इसका अर्थ है कि भिखारी को देखकर कोई बार-बार कपड़े देता है, या बार-बार दरवाज़ा बंद कर लेता है।
In simple words: श्लेष अलंकार तब होता है जब एक ही शब्द के बहुत सारे मतलब होते हैं। जैसे 'पट' का मतलब कपड़ा भी है और दरवाज़ा भी।

🎯 Exam Tip: श्लेष अलंकार के उदाहरणों में, हमेशा उस शब्द को पहचानें जिसके एक से अधिक अर्थ हैं और सभी अर्थों को स्पष्ट करें।

 

Question 3. पाठ में आये निम्नलिखित तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए (रूप लिखकर) –
Answer:

तद्भवतत्समतद्भवतत्सम
भसमभस्ममानुसमनुष्य
औषधीऔषधिसबदशब्द
सतसत्यकिरपाकृपा
सरीरशरीरहरखहर्ष

In simple words: तद्भव वे शब्द होते हैं जो संस्कृत से बदलकर हिंदी में आए हैं, जबकि तत्सम वे शब्द हैं जो संस्कृत से सीधे हिंदी में लिए गए हैं।

🎯 Exam Tip: तद्भव और तत्सम शब्दों को याद रखने के लिए, उनके मूल संस्कृत रूप को समझने की कोशिश करें।

 

Question 4. कुछ ऐसे शब्द होते हैं, जिनके अलग-अलग अर्थ होते हैं, जैसे – 'तीर' का अर्थ है 'बाण' और 'नदी' का किनारा निम्नलिखित शब्दों के दो-दो अर्थ लिखिए (अर्थ लिखकर)
Answer: कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनके एक से ज़्यादा अर्थ होते हैं, और वे वाक्य के अनुसार अलग-अलग मतलब बताते हैं। यहाँ कुछ ऐसे शब्दों के दो-दो अर्थ दिए गए हैं:

  • पट – कपड़ा, द्वार (दरवाज़ा)
  • दर – दरवाज़ा (चौखट), दरबार
  • कर - हाथ, एक क्रिया (करना)
  • जड़ - किसी वनस्पति का वह भाग जो ज़मीन के अंदर रहे, मूर्ख
  • गोली – बंदूक या तमंचे से निकलने वाली घातक वस्तु, कंचा
  • सारंग - सिंह, हाथी
इन शब्दों का सही अर्थ वाक्य के संदर्भ से ही समझा जा सकता है।
In simple words: हिंदी में कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनके दो अलग-अलग मतलब होते हैं। उनका सही मतलब वाक्य को देखकर पता चलता है।

🎯 Exam Tip: अनेकार्थी शब्दों को सीखते समय, प्रत्येक अर्थ के लिए एक-एक उदाहरण वाक्य बनाने का अभ्यास करें ताकि अर्थ स्पष्ट हो सके।

इसे भी जानें

नोट – विद्यार्थी ध्यान से पढ़ें ।

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