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Detailed Chapter 17 कबीर और उनके गुरु रामानंद UP Board Solutions for Class 6 Hindi
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Class 6 Hindi Chapter 17 कबीर और उनके गुरु रामानंद UP Board Solutions PDF
पाठ का सारांश
कबीर - कबीर ने लोगों को सही रास्ता दिखाया। उन्होंने अपनी शिक्षाओं से समाज की बुराइयों का विरोध किया और एक अच्छा समाज बनाने पर जोर दिया। कबीर का जन्म 1398 ई. में काशी में हुआ था। नीरू और नीमा नाम के जुलाहा दंपति ने उनका पालन-पोषण किया। उनकी पत्नी का नाम लोई था, और उनके बेटे-बेटी के नाम कमाल और कमाली थे। कबीर कपड़े बुनने का काम करते थे और रामानंद के शिष्य थे। कबीर पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनका ज्ञान उनके अनुभव और साधना पर आधारित था।
कबीर बाहरी दिखावे को पसंद नहीं करते थे। वे पंडितों और मौलवियों के कर्मकांडों, जैसे नमाज पढ़ना, मंदिरों में माला जपना, मूर्ति-पूजा, रोजे और उपवास को दिखावा मानते थे। उनकी भाषा में कई बोलियों के शब्द मिले हुए थे, इसलिए उसे 'सधुक्कड़ी' कहा जाता है। कबीर की बातें साखी, सबद और रमैनी में लिखी गई हैं, जो 'बीजक' नाम से मशहूर हैं। कबीर अपने गुरु को भगवान से भी बड़ा मानते थे और जो उनकी निंदा करते थे, उन्हें अपना दोस्त समझते थे।
मगहर में मरने से नरक मिलता है, यह धारणा गलत थी, और कबीर ने इसे तोड़ते हुए सन् 1518 ई. में मगहर जाकर 120 साल की उम्र में शरीर त्यागा। कबीर की वाणी लोगों को एकता का रास्ता दिखा सकती है।
रामानंद - रामानंद एक क्रांतिकारी महापुरुष थे। उन्होंने रामानुजाचार्य की भक्ति परंपरा को उत्तर भारत में लोकप्रिय बनाया और 'रामावत' संप्रदाय बनाकर राम मंत्र का प्रचार किया।
रामानंद का जन्म प्रयाग में हुआ था। उनकी माता का नाम सुशीला और पिता का नाम पुण्यदमन था। धार्मिक संस्कारों के कारण रामानंद बचपन से ही पूजा-पाठ में रुचि लेने लगे थे। वे बहुत बुद्धिमान बालक थे। प्रयाग में अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने काशी जाकर धर्मशास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया। वैष्णव संप्रदाय में विश्वास रखने वाले गुरु राघवानंद से शिक्षा लेने के बाद, रामानंद देश भ्रमण पर निकल पड़े। उन्होंने समाज में फैली ऊँच-नीच, छुआछूत और जाति-पाँति की भावना को खत्म करने की कोशिश की।
रामानंद ने एक नया रास्ता और नया विचार (भक्ति मार्ग) शुरू किया। उन्होंने इसे और अधिक उदार और सबको साथ लेने वाला बनाया। भक्ति के द्वार सभी के लिए खोल दिए, चाहे वे अमीर हों, गरीब हों, स्त्री हों, पुरुष हों, अछूत हों या ब्राह्मण हों। रामानंद के बारह मुख्य शिष्य थे, जिनमें अनंतानंद, कबीर, रैदास, धन्ना, नरहरि, पीपा, भावानंद, पद्मावती और सुरसुर शामिल थे।
रामानंद के विचारों और शिक्षाओं ने दो धार्मिक मतों को जन्म दिया- रूढ़िवादी और प्रगतिवादी। प्रगतिवादी सिद्धांत हिंदू-मुसलमान दोनों को स्वीकार्य थे।
रामानंद सिद्ध संत थे। उन्होंने भगवान की भक्ति को सुखी जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका बताया। वे राम के परम भक्त थे और भक्ति आंदोलन के जनक भी थे।
अभ्यास
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -
Question 1. कबीर वाह्य आडम्बर किसे कहते थे?
Answer: कबीर उन सभी बाहरी दिखावों को आडंबर कहते थे जो धर्म के नाम पर किए जाते थे। वे मस्जिदों में नमाज पढ़ने, मंदिरों में माला जपने, मूर्ति पूजा करने, रोजे रखने और उपवास करने को बाहरी आडंबर मानते थे। कबीर का मानना था कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, बल्कि मन की शुद्धता में होती है।
In simple words: कबीर बाहरी दिखावे जैसे नमाज, माला जपना, मूर्ति पूजा, रोजे और उपवास को आडंबर कहते थे।
🎯 Exam Tip: जब भी कबीर के विचारों पर प्रश्न आएँ, तो उनके सिद्धांतों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
Question 2. कबीर ने अपने उपदेशों में किन बातों पर बल दिया?
Answer: कबीर ने अपने उपदेशों में समाज में फैली हुई बुराइयों का बहुत विरोध किया। उन्होंने एक ऐसे समाज को बनाने पर जोर दिया जो आदर्श हो और जिसमें सब लोग मिल-जुलकर रहें। कबीर ने हमेशा लोगों को प्रेम, समानता और सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी।
In simple words: कबीर ने समाज की बुराइयों का विरोध किया और एक अच्छा, आदर्श समाज बनाने पर जोर दिया।
🎯 Exam Tip: कबीर के उपदेशों के दो मुख्य बिंदु हमेशा याद रखें: बुराइयों का खंडन और आदर्श समाज की स्थापना।
Question 3. सही कथन के सामने सही (✓) तथा गलत कथन के सामने गलत (X) के निशान लगाइए (निशान लगाकर) -
Answer:
(क) कबीर की शिक्षा-दीक्षा काशी में हुई । (X)
(ख) निन्दा करने वाले लोगों को कबीर अपना हितैषी समझते थे । (✓)
(ग) कबीर की वाणी को साखी, सबद, रमैनी तीन रूपों में लिखा गया है। (✓)
(घ) रामानन्द ने संस्कृत में अनेक ग्रन्थों की रचना की। (✓)
In simple words: कबीर अनपढ़ थे, इसलिए उनकी शिक्षा काशी में नहीं हुई। वे निंदा करने वालों को दोस्त मानते थे। उनकी बातें साखी, सबद और रमैनी में लिखी हैं। रामानंद संस्कृत के विद्वान थे और उन्होंने कई किताबें लिखीं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, आपको दिए गए तथ्यों को पाठ में दी गई जानकारी से मिलाकर देखना चाहिए।
Question 4. सही विकल्प चुनकर लिखिए कबीर की दृष्टि में गुरु का स्थान -
(क) माता-पिता के समान है।
(ख) भगवान के समान है।
(ग) भगवान से बढ़कर है।
Answer: (ग) भगवान से बढ़कर है।
In simple words: कबीर मानते थे कि गुरु का स्थान भगवान से भी ऊँचा है। गुरु ही ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: कबीर के लिए गुरु का महत्व बहुत अधिक था, वे उन्हें ईश्वर से भी श्रेष्ठ मानते थे।
Question 5. रामानंद के व्यक्तित्व की विशेषताओं के बारे में लिखिए ।
Answer: रामानंद जी का जन्म प्रयाग में हुआ था। उन्हें बचपन से ही पूजा-पाठ में बहुत रुचि थी। वे बहुत तेज बुद्धि के बालक थे। उन्होंने काशी में धर्मशास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया और गुरु राघवानंद से दीक्षा ली। रामानंद जी ने समाज में फैली ऊँच-नीच, छुआछूत और जाति-पाँति के भेदभाव को खत्म करने की कोशिश की। उन्होंने भक्ति मार्ग की शुरुआत की, जिसे सभी के लिए खोल दिया। वे संस्कृत के विद्वान थे और उन्होंने कई संस्कृत ग्रंथों की रचना की। वे हिंदी भाषा के भी समर्थक थे और मानते थे कि यह पूरे भारत को जोड़ सकती है। रामानंद कबीर के गुरु थे और उनका निधन 1412 ई. में लगभग 112 वर्ष की आयु में हुआ।
In simple words: रामानंद प्रयाग में जन्मे एक विद्वान और समाज सुधारक थे। उन्होंने जाति-पाँति को मिटाने की कोशिश की और भक्ति मार्ग को सभी के लिए खोला। वे कबीर के गुरु थे।
🎯 Exam Tip: रामानंद के जीवन से जुड़ी मुख्य घटनाओं और उनके सामाजिक योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. रामानंद जी का दर्शन किस नाम से जाना जाता है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?
Answer: रामानंद जी का दर्शन 'भक्ति मार्ग' के नाम से जाना जाता है। इस मार्ग की खासियत यह थी कि इसके द्वार सभी के लिए खुले थे - चाहे वे अमीर हों या गरीब, पुरुष हों या नारी। धीरे-धीरे यह भक्ति मार्ग इतना फैल गया कि इसे बौद्ध धर्म के आंदोलन से भी बड़ा माना गया। रामानंद ने प्रेम और समानता का संदेश फैलाकर समाज में बड़ा बदलाव लाया।
In simple words: रामानंद के दर्शन को भक्ति मार्ग कहते हैं। इसकी खासियत यह है कि यह सभी लोगों के लिए था, चाहे वे कोई भी हों, और यह बहुत लोकप्रिय हुआ।
🎯 Exam Tip: भक्ति मार्ग की inclusivity (समावेशिता) और व्यापकता पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यह इसकी मुख्य विशेषता है।
योग्यता विस्तार -
गुरु की महिमा तथा वाह्य आडंबर के विषय में कहे गए कबीर के एक-एक दोहे को याद कर सुनाइए। नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।
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UP Board Solutions Class 6 Hindi Chapter 17 कबीर और उनके गुरु रामानंद
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