UP Board Solutions Class 6 Hindi Chapter Hindi Vyakaran

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Detailed हिंदी व्याकरण UP Board Solutions for Class 6 Hindi

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Class 6 Hindi हिंदी व्याकरण UP Board Solutions PDF

व्याकरण

व्याकरण उन नियमों का समूह है जो हमें किसी भाषा को सही बोलना, लिखना और पढ़ना सिखाता है।

भाषा

जिस साधन से हम अपने मन के भावों को बताते हैं, उसे भाषा कहते हैं।

लिपि

मुँह से निकली आवाजों को लिखने के तरीके को लिपि कहते हैं। जिस लिपि में हिंदी भाषा लिखी जाती है, उसे देवनागरी लिपि कहते हैं।

व्याकरण के तीन प्रमुख भाग हैं-

  1. वर्ण विभाग- इसमें वर्णों का उच्चारण, उनके आपस में मिलने (संधि) के नियम, उनकी बनावट और लिखने आदि पर विचार किया जाता है।
  2. शब्द विभाग- इसमें शब्दों के प्रकार, अवस्था, प्रयोग और बनावट आदि पर विचार किया जाता है।
  3. वाक्य विभाग- इसमें वाक्यों के प्रकार और उनके आपसी संबंधों पर विचार किया जाता है।

1. वर्ण विभाग

वर्ण

भाषा की सबसे छोटी ध्वनि जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते, उसे वर्ण या अक्षर कहते हैं। भाषा में अलग-अलग ध्वनियों के लिए अलग-अलग चिह्न होते हैं, जैसे – अ, इ, उ, लृ, ट् आदि।

भाषा के वर्णों से ही शब्द बनते हैं। हिंदी भाषा की वर्णमाला में कुल 44 मूल वर्ण हैं। वर्ण दो प्रकार के होते हैं – 1. स्वर, 2. व्यंजन।

उच्चारण के अनुसार स्वर के भेद

उच्चारण के आधार पर स्वर दो प्रकार के होते हैं-

  1. ह्रस्व स्वर- जिनके उच्चारण में दीर्घ स्वरों की तुलना में आधा समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं, जैसे- अ, इ, उ, ऋ।
  2. दीर्घ स्वर- जिन स्वरों के उच्चारण में अधिक समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं, जैसे- आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।

मात्रा

व्यंजन से मिलने पर स्वर का रूप बदल जाता है। इस बदले हुए रूप को ही मात्रा कहते हैं। कुछ मात्राओं के रूप इस प्रकार हैं:

आ = \( ा \), इ = \( ि \), ई = \( ी \), उ = \( ु \), ऊ = \( ू \), ऋ = \( ृ \), ए = \( े \), ऐ = \( ै \), ओ = \( ो \), औ = \( ौ \)

2. व्यंजन

जो वर्ण किसी अन्य वर्ण की सहायता से बोले जाते हैं, वे व्यंजन कहलाते हैं। व्यंजनों की संख्या 33 है-

क्, ख्, ग्, घ्, ङः च्, छ्, ज्, झ्, ञः ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्; त्, थ्, द्, ध्, न्; प्, फ्, ब्, भ्, म्; य्, र्, ल्, व्; श्, ष्, स्, ह्

इन व्यंजनों के अलावा चार और वर्ण भी होते हैं- जो क्ष, त्र, ज्ञ, श्र हैं। इन्हें संयुक्त अक्षर (वर्ण) कहते हैं क्योंकि ये दो व्यंजनों के मेल से बनते हैं।

\( क्ष = क् + ष् + अ \)
\( त्र = त् + र् + अ \)
\( ज्ञ = ज् + ञ + अ \)
\( श्र = श् + र् + अ \)

  1. अनुस्वार- इसका चिह्न \( (ं) \) है; जैसे 'चंचल' शब्द में 'च' वर्ण के ऊपर अनुस्वार \( (ं) \) लगा है।
  2. विसर्ग- इसका चिह्न \( (:) \) है; जैसे 'अतः' में 'त' वर्ण के आगे विसर्ग \( (:) \) लगा है।
  3. अनुनासिक- इसका चिह्न \( (ँ) \) है; जैसे 'पाँच' शब्द में 'पा' पर अनुनासिक चंद्रबिंदु \( (ँ) \) के रूप में लगा है।

नोट- जिस व्यंजन में कोई भी स्वर नहीं होता, उसे हल् कहते हैं, जैसे- क्, ट्, स् आदि।

संधि

संधि की परिभाषा

दो अक्षरों के मिलने से उनके रूप में जो बदलाव आता है, उसे संधि कहते हैं। जैसे- 'गिरींद्र' शब्द में 'गिरि' शब्द का 'इ' और 'इन्द्र' शब्द का 'इ' मिलकर 'ई' बना। इस प्रकार 'गिरि + इन्द्र' = 'गिरींद्र' शब्द बनता है।

संधियों के प्रकार

संधियाँ तीन प्रकार की हो सकती हैं-

1. स्वर संधि

दो स्वरों के मिलने से उनमें जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं। स्वर संधि पाँच प्रकार की होती है-

(1) दीर्घ संधि

जब ह्रस्व (छोटा) या दीर्घ (बड़ा) अ, इ, उ, ऋ के बाद उसी क्रम में ह्रस्व या दीर्घ स्वर आए, तो दोनों को मिलाकर दीर्घ हो जाता है। जैसे- धर्म + अर्थ = धर्मार्थ। यहाँ \( अ + अ = आ \) हुआ।

दीर्घ संधि का विस्तृत विवरण

(क) नियम- जब 'अ' या 'आ' के बाद 'अ' या 'आ' आए तो दोनों को मिलाकर 'आ' हो जाता है; जैसे-
परम + अर्थ = परमार्थ (\( अ + अ = आ \))
विद्या + आलय = विद्यालय (\( आ + आ = आ \))
परम + आत्मा = परमात्मा (\( अ + आ = आ \))
विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (\( आ + अ = आ \))

(ख) नियम- जब 'इ' या 'ई' के बाद 'इ' या 'ई' आए तो दोनों को मिलाकर 'ई' हो जाता है; जैसे-
रवि + इन्द्र = रवीन्द्र (\( इ + इ = ई \))
मही + इन्द्र = महींद्र (\( ई + इ = ई \))
कवि + ईश्वर = कवीश्वर (\( इ + ई = ई \))
नदी + ईश = नदीश (\( ई + ई = ई \))

(ग) नियम- जब 'उ' या 'ऊ' के बाद 'उ' या 'ऊ' आए तो दोनों को मिलाकर 'ऊ' हो जाता है; जैसे-
भानु + उदय = भानूदय (\( उ + उ = ऊ \))
लघु + ऊर्मि = लघूर्मि (\( उ + उ = ऊ \))
वधु + उत्सव = वधूत्सव (\( उ + उ = ऊ \))
भू + उर्ध्व = भूर्ध्व (\( ऊ + उ = ऊ \))

(घ) नियम- जब 'ऋ' के पश्चात् 'ऋ' आए तो दोनों को मिलाकर 'ऋ' हो जाता है। यह नियम संस्कृत के शब्दों में ही विशेष रूप से पाया जाता है, उदाहरणार्थ-
पितृ + ऋण = पितृण (\( ऋ + ऋ = ॠ \))

(2) गुण संधि

यदि 'अ' या 'आ' के पश्चात् ह्रस्व या दीर्घ इ, उ, ऋ, लृ आए तो दोनों के स्थान पर क्रम से ए, ओ, अर् और अल् हो जाते हैं। जैसे 'नर' और 'इन्द्र' शब्दों में \( अ + इ = ए \) बनेगा और इन शब्दों की संधि होगी- नर + इन्द्र = नरेंद्र। गुण संधि का विस्तृत विवरण इस प्रकार दिया जा सकता है-

(क) नियम- जब 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आए तो दोनों के स्थान पर 'ए' हो जाता है; जैसे-
सुर + इन्द्र = सुरेंद्र (\( अ + इ = ए \))
सुर + ईश = सुरेश (\( अ + ई = ए \))
महा + इन्द्र = महेंद्र (\( आ + इ = ए \))
महा + ईश्वर = महेश्वर (\( आ + ई = ए \))

(ख) नियम- जब 'अ' या 'आ' के बाद 'उ' या 'ऊ' आ जाए, तो दोनों के स्थान पर ओ हो जाता है; जैसे- सूर्य + उदय = सूर्योदय। कुछ अन्य उदाहरण देखिए-
हित + उपदेश = हितोपदेश (\( अ + उ = ओ \))
जल + ऊर्मि = जलोर्मि (\( अ + ऊ = ओ \))
महा + उत्सव = महोत्सव (\( आ + उ = ओ \))
गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि (\( आ + ऊ = ओ \))

(ग) नियम- यदि 'अ' या 'आ' के पश्चात् 'ऋ' आए तो दोनों के स्थान पर 'अर्' हो जाता है; जैसे-
देव + ऋषि = देवर्षि (\( अ + ऋ = अर् \))
महा + ऋषि = महर्षि (\( आ + ऋ = अर् \))

(घ) नियम- यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'लृ' आए तो दोनों के स्थान पर 'अल्' हो जाता है; जैसे-
तव + लुकार = तवल्कार (\( अ + लृ = अल् \))

(3) वृद्धि संधि

यदि 'अ' या 'आ' के बाद ह्रस्व या दीर्घ 'ए' या 'ओ' आए तो उनका क्रम से 'ऐ' और 'औ' हो जाता है। जैसे- 'सदा' और 'एव' शब्दों में \( आ + ए \) से 'ऐ' बनेगा और संधि इस प्रकार होगी- सदा + एव = सदैव। वृद्धि संधि का विस्तृत विवरण इस प्रकार दिया जा सकता है-

(क) नियम- यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' आए तो दोनों मिलकर 'ऐ' हो जाता है; जैसे-
एक + एक = एकैक (\( अ + ए = ऐ \))
मत + ऐक्य = मतैक्य (\( अ + ऐ = ऐ \))
तथा + एव = तथैव (\( आ + ए = ऐ \))
महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य (\( आ + ऐ = ऐ \))

(ख) नियम- यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'ओ' या 'औ' आए तो दोनों मिलकर 'औ' हो जाता है; जैसे-
सुन्दर + ओदन = सुन्दरौदन (\( अ + ओ = औ \))
परम + औषध = परमौषध (\( अ + औ = औ \))
महा + ओषधि = महौषधि (\( आ + ओ = औ \))
महा + औषध = महौषध (\( आ + औ = औ \))

(4) यण संधि

यदि ह्रस्व या दीर्घ इ, उ, ऋ या लृ से परे कोई अलग स्वर आए तो 'इ' का 'य', 'उ' का 'व', 'ऋ' का 'र' तथा 'लृ' का 'ल' होकर आगे के स्वर से मिल जाता है। जैसे- 'इति' और 'आदि' शब्दों में \( इ + अ = य \) बनेगा और इन शब्दों की संधि होगी- इति + आदि = इत्यादि। यण संधि का विस्तृत विवरण इस प्रकार दिया जा सकता है-

(क) नियम- यदि 'इ' या 'ई' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'इ' या 'ई' का 'य' हो जाता है; जैसे-
यदि + अपि = यद्यपि (\( इ + अ = य् \))
प्रति + एक = प्रत्येक (\( इ + ए = य् \))
गोपी + अर्थ = गोप्यर्थ (\( ई + अ = य् \))

(ख) नियम- यदि 'उ' या 'ऊ' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'उ' या 'ऊ' का 'व' हो जाता है; जैसे-
अनु + एषण = अन्वेषण (\( उ + ए = व् + ए = वे \))
वधू + आगमनम् = वध्वागमनम् (\( ऊ + आ = वा \))
सु + आगतम् = स्वागतम् (\( उ + आ = वा \))

(ग) नियम- यदि 'ऋ' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'ऋ' का 'र' हो जाता है; जैसे-
मातृ + आनन्दं = मात्रानन्द (\( ऋ + आ = रा \))
पितृ + अनुमति = पित्रनुमति (\( ऋ + आ = र \))

(घ) नियम- यदि 'लृ' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'लृ' का 'ल' हो जाता है; जैसे-
लृ + आकृति = लाकृति (\( लृ + आ = ला \))

(5) अयादि संधि

यदि ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई अलग स्वर आए तो इनके स्थान पर क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाता है। जैसे- 'ने' और 'अन' शब्दों में 'ए' के बाद 'अ' आने से 'ए' का 'अय्' बना और संधि इस प्रकार हुई: ने + अन = नयन। इसे अयादि संधि कहते हैं।

इसका विस्तृत विवरण

(क) नियम- यदि 'ए' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'ए' का 'अय' हो जाता है; जैसे-
ने + अन = नयन (\( ए + अ = अय् + अ = अय \))

(ख) नियम- यदि 'ऐ' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'ऐ' का 'आय्' हो जाता है; जैसे-
नै + अक = नायक (\( ऐ + अ = आय् + अ = आय \))
गै + अक = गायक (\( ऐ + अ = आय् + अ = आय \))

(ग) नियम- यदि 'ओ' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'ओ' का 'अव्' हो जाता है; जैसे-
पो + अन = पवन (\( ओ + अ = अव् + अ = अव \))
पो + इत्र = पवित्र (\( ओ + इ = अव् + इ = अवि \))

(घ) नियम- यदि 'औ' के बाद कोई अलग स्वर आए तो 'औ' का 'आव्' हो जाता है; जैसे-
भौ + उक = भावुक (\( औ + उ = आव् + उ = आवु \))
पौ + अक = पावक (\( औ + अ = आव् + अ = आव \))
पौ + अन = पावन (\( औ + अ = आव् + अ = आव \))

नोट - व्यंजन संधि व विसर्ग संधि का वर्णन अगली कक्षा में किया जाएगा।

2. शब्द विभाग

शब्द

एक या एक से अधिक वर्णों के सार्थक मेल से शब्द बनता है; जैसे- कमल, पानी, रोटी, मोहन, गणेश, मेरठ आदि।

शब्दों के प्रकार

हिंदी भाषा में आमतौर पर चार प्रकार के शब्द प्रयोग में आते हैं-

(क) तत्सम शब्द – संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिंदी भाषा में ज्यों के त्यों प्रयोग होते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं, जैसे- भ्राता, मित्र, सूर्य, पुत्र, अद्भुत, शैल, सरिता, शिखर आदि।

(ख) तद्भव शब्द – संस्कृत भाषा के वे शब्द जो बोलचाल में प्रयोग होने के कारण बदले हुए रूप में हिंदी में आते हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं; जैसे – भाई, मीत, सूरज, पूत आदि।

(ग) विदेशी शब्द – संस्कृत भाषा के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं के वे शब्द जिनका प्रयोग हिंदी में होता है, विदेशी शब्द कहलाते हैं; जैसे- बटन, कोट, लालटेन, स्कूल, स्टेशन, इम्तहान, नोटिस, कैंची, सीमेंट, कारीगर, फाइल, बुखार आदि।

(घ) देशज शब्द – ऐसे शब्द जिनको स्थानीय बोलचाल में विचारों को बताने के लिए बनाया जाता है, वे देशज शब्द कहलाते हैं, जैसे- खटपट, आटा, घोंसला, बिल्ली, खर्राटा, मिर्च, कड़क, कूटना आदि।

रूपान्तर के अनुसार शब्दों के भेद

रूपान्तर के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं-

1. विकारी शब्द – जिन शब्दों का रूप अर्थ के अनुसार बदलता रहता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं; जैसे – बालक से बालकों, पढ़ा से पढ़ी, आया से आएँगे आदि।

2. अविकारी शब्द – जिन शब्दों का रूप कभी नहीं बदलता वे अविकारी या अव्यय कहलाते हैं, जैसे- ने, अरे, पर आदि।

अर्थ के आधार पर शब्दों के भेद-

1. एकार्थी शब्द – जिस शब्द का प्रयोग केवल एक ही अर्थ के लिए होता है, वे एकार्थी शब्द कहलाते हैं, जैसे- घर, पीला, मनुष्य, ताँबा आदि।

2. अनेकार्थी शब्द – जिस शब्द के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उसे अनेकार्थी शब्द कहते हैं; जैसे- पत्र- पत्ता, चिट्ठी; द्विज- ब्राह्मण, पक्षी, वृक्ष; अंक- गिनती, भाग्य, गोद आदि।

रचना के आधार पर शब्दों के भेद

रचना के आधार पर शब्द दो प्रकार के होते हैं-

1. रूढ़ शब्द – जो शब्द स्वयं में पूरे होते हैं और अन्य शब्दों या शब्दांशों के मेल से नहीं बनते, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं, जैसे- पुस्तक, सेना, गाड़ी आदि।

2. यौगिक शब्द – जो शब्द अन्य शब्दों या शब्दांशों के मेल से बनते हैं, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं; जैसे- पुस्तकालय, सेनापति, गाड़ीवान आदि।

व्याकरण की दृष्टि से शब्दों के भेद

व्याकरण की दृष्टि से शब्द आठ प्रकार के होते हैं-

  1. संज्ञा
  2. सर्वनाम
  3. विशेषण
  4. क्रिया
  5. क्रियाविशेषण
  6. सम्बन्धबोधक
  7. समुच्चयबोधक
  8. विस्मयादिबोधक।

इनमें से पहले चार प्रकार के शब्द विकारी शब्द माने जाते हैं तथा बाकी चार प्रकार के शब्द अविकारी शब्द माने जाते हैं।

संज्ञा

संज्ञा की परिभाषा

किसी प्राणी, स्थान, वस्तु, अवस्था, भाव तथा गुण के नाम बताने वाले शब्दों को संज्ञा कहते हैं, जैसे- 'राम', 'कृष्ण', 'लखनऊ', 'पुस्तक' आदि। यहाँ 'राम' और 'कृष्ण' प्राणी के नाम हैं। 'लखनऊ' एक नगर का नाम है तथा 'पुस्तक' एक वस्तु का नाम है। अतः ये सभी शब्द संज्ञाएँ हैं।

संज्ञा के भेद

संज्ञा शब्द तीन प्रकार के होते हैं-

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा – वे संज्ञा शब्द जिनसे किसी खास व्यक्ति, स्थान या वस्तु का बोध होता है, व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाते हैं; जैसे- राम, गांधी, दिल्ली। 'राम' या 'गांधी' शब्द किसी विशेष व्यक्ति के ही नाम हैं। सभी व्यक्तियों को हम 'राम' या 'गांधी' नहीं कह सकते। इसी प्रकार 'दिल्ली' एक खास नगर का नाम है। हर नगर को हम 'दिल्ली' नहीं कह सकते। अतः ये शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा हैं।

2. जातिवाचक संज्ञा – वे संज्ञा जिनसे एक ही प्रकार या जाति की सभी वस्तुओं का बोध होता है, जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं, जैसे- हाथी, मनुष्य, कुत्ता, बालक, घोड़ा आदि।

जातिवाचक तथा व्यक्तिवाचक संज्ञा में अन्तर

व्यक्तिवाचक संज्ञा के शब्द किसी एक ही खास व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयोग होते हैं, लेकिन जातिवाचक संज्ञा के शब्द उस प्रकार की सभी वस्तुओं के लिए प्रयोग होते हैं। जैसे- 'बालक' शब्द हर बालक के लिए आता है। अतः बालक शब्द जातिवाचक संज्ञा है, लेकिन 'राम' शब्द किसी खास बालक के लिए प्रयोग होता है। अतः 'राम' शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

3. भाववाचक संज्ञा – जिस संज्ञा शब्द से किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण-दोष, अवस्था, स्वभाव आदि का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे- साहस, बचपन, मिठास आदि।

भाववाचक संज्ञा निम्नलिखित प्रकार के शब्दों से बनती है-

(क) जातिवाचक संज्ञा से - जैसे - मनुष्य से मनुष्यता।

(ख) सर्वनाम से - जैसे - अपना से अपनापन।

(ग) विशेषण से - जैसे - चतुर से चतुराई।

(घ) क्रिया से - जैसे - चढ़ने से चढ़ाई।

(ङ) अव्यय से - जैसे - दूर से दूरी।

सर्वनाम

सर्वनाम की परिभाषा

जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, वे सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे- मैं, हम, तुम, आप, वे, वह आदि।

सर्वनाम के भेद

सर्वनाम के छह भेद होते हैं-

1. पुरुषवाचक सर्वनाम – जिससे किसी व्यक्ति का बोध होता है, वे शब्द 'पुरुषवाचक सर्वनाम' कहलाते हैं; जैसे- मैं, तुम, वह आदि। पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन भेद होते हैं-

(क) उत्तम पुरुष – जिससे बात कहने वाले का बोध होता है, उसे उत्तम पुरुष कहते हैं; जैसे- मैं, हम आदि।

(ख) मध्यम पुरुष – जिससे बात कही जाए, उसे मध्यम पुरुष कहते हैं; जैसे- तुम, आप आदि।

(ग) अन्य पुरुष – जिसके बारे में बातें की जाएँ, वह अन्य पुरुष कहलाता है; जैसे- वे, वह आदि।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम – वे शब्द जिनसे किसी वस्तु का निश्चित ज्ञान होता है, निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे- वह पुरुष था। इस वाक्य में 'वह' से पुरुष का निश्चित बोध होता है। अतः यहाँ 'वह' शब्द निश्चयवाचक सर्वनाम है।

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम – वे शब्द जिनसे किसी वस्तु का निश्चित ज्ञान नहीं होता, अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे- 'कोई पढ़ रहा है।' इस वाक्य में 'कोई' शब्द से पढ़ने वाले का निश्चित ज्ञान नहीं होता। अतः यहाँ 'कोई' शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।

4. सम्बन्धवाचक सर्वनाम – जो शब्द एक वाक्य या शब्द का सम्बन्ध दूसरे वाक्य या शब्द से प्रकट करते हैं, वे सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे – यह वही लड़का है, जो कल मिला था। इस वाक्य में 'जो' शब्द इस लड़के और कल वाले लड़के में सम्बन्ध दिखाता है। अतः यहाँ 'जो' शब्द सम्बन्धवाचक सर्वनाम है।

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम – जिस सर्वनाम से प्रश्न का बोध होता है, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे- कौन रो रहा है? इस वाक्य में 'कौन' शब्द से प्रश्न का बोध होता है। अतः यहाँ 'कौन' शब्द प्रश्नवाचक सर्वनाम है।

6. निजवाचक सर्वनाम – जो सर्वनाम अपने लिए प्रयोग में आते हैं, वे निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे- 'मैं स्वयं ही आ जाऊँगा।' इस वाक्य में 'स्वयं' शब्द अपने ही लिए आया है। अतः यहाँ 'स्वयं' शब्द निजवाचक सर्वनाम है।

संज्ञा तथा सर्वनाम के रूपान्तर

संज्ञा तथा सर्वनाम शब्दों में लिंग, वचन तथा कारकों के कारण उनके रूप में बदलाव आ जाता है। इसलिए उनका ज्ञान होना बहुत जरूरी है। छात्रों को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए-

लिंग की परिभाषा

लिंग के जिस रूप से किसी वस्तु की जाति (पुरुष या स्त्री) का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।

लिंग के भेद

लिंग के दो मुख्य भेद माने गए हैं-

1. पुल्लिंग – जिस शब्द से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं; जैसे- राम जाता है। सिंह दौड़ता है। यहाँ 'राम' और 'सिंह' शब्दों से पुरुष जाति का बोध होता है। अतः ये पुल्लिंग हैं।

2. स्त्रीलिंग - जिस शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं; जैसे- शीला जाती है। गाड़ी दौड़ती है। इन वाक्यों में 'शीला' और 'गाड़ी' शब्दों से स्त्री जाति का बोध होता है। अतः ये शब्द स्त्रीलिंग हैं।

वचन

वचन की परिभाषा

शब्द के जिस रूप से यह पता चलता है कि वह किसी एक के लिए प्रयोग हुआ है या एक से अधिक के लिए, उस रूप को वचन कहते हैं।

वचन के भेद

हिंदी में वचन दो प्रकार के माने गए हैं-

1. एकवचन – इससे केवल एक वस्तु, स्थान या प्राणी का बोध होता है; जैसे- राम जाता है। लड़की जाती है। इन वाक्यों में 'राम' और 'लड़की' एकवचन हैं क्योंकि ये एक के लिए आए हैं।

2. बहुवचन – इससे एक से अधिक वस्तुओं, स्थानों या प्राणियों का बोध होता है; जैसे- लड़के जाते हैं। नदियाँ बहती हैं। इन वाक्यों में 'लड़के' और 'नदियाँ' बहुवचन हैं क्योंकि ये एक से अधिक हैं।

नोट – सम्मान दिखाने के लिए एकवचन संज्ञा को बहुवचन में प्रयोग किया जाता है; जैसे- मेरे पिता जी बैठे हैं।

कारक

कारक की परिभाषा

किसी वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जिससे उसका सम्बन्ध उस वाक्य की क्रिया से जाना जाए, कारक कहलाता है; जैसे – मोहन गुरु से पाठ पढ़ता है इस वाक्य में 'मोहन' क्रिया का कर्ता है।

कारक के भेद

कारक आठ प्रकार के होते हैं। उनके भेद, चिह्न और उदाहरण नीचे दिए गए हैं। छात्रों को इन्हें ध्यान से पढ़ना चाहिए-

कारककारक चिह्नउदाहरण
1. कर्तानेराम ने
2. कर्मकोराम को
3. करणसे, के द्वाराराम से, राम के द्वारा
4. संप्रदानके लिए, कोराम के लिए, राम को
5. अपादानसे (अलग होने में)राम से
6. सम्बन्धका, के, कीराम का, राम के, राम की
7. अधिकरणमें, परराम में, राम पर
8. संबोधनहे, अरेहे राम, अरे राम

1. कर्ता कारक – काम करने वाले को 'कर्ता' कहते हैं; जैसे- राम ने पढ़ा। इस वाक्य में काम करने वाला 'राम' है। अतः इस वाक्य में 'राम' शब्द का कारक, कर्ता कारक है।

2. कर्म कारक – जिस पर क्रिया के व्यापार का फल पड़ता है, उसे 'कर्म' कहते हैं; जैसे- राम ने पाठ पढ़ा। इस वाक्य में 'पढ़ना' क्रिया है और उसका फल 'पाठ' पर पड़ रहा है। अतः इस वाक्य में 'पाठ' शब्द का कारक, कर्म कारक है।

3. करण कारक – जिसकी सहायता से काम किया जाए, उसे 'करण' कारक कहते हैं; जैसे- 'वह लेखनी से लिखता है। यहाँ लिखने का काम लेखनी की सहायता से हो रहा है। अतः इस वाक्य में 'लेखनी' शब्द का कारक, करण कारक है।

4. संप्रदान कारक – जिसके लिए कर्ता काम करता है, उसे संप्रदान कारक कहते हैं; जैसे- राम बच्चों के लिए मिठाई लाता है। इस वाक्य में 'बच्चों' शब्द का कारक संप्रदान कारक है।

5. अपादान कारक – जहाँ अलग होने का भाव पाया जाए, वहाँ 'अपादान' कारक होता है; जैसे- वृक्ष से फल गिरता है। इस वाक्य में फल का वृक्ष से अलग होना पाया गया है, इसलिए इस वाक्य में 'वृक्ष' शब्द का कारक अपादान कारक है।

6. सम्बन्ध कारक – जहाँ शब्द का सम्बन्ध किसी संज्ञा से दिखाया जाता है, वहाँ सम्बन्ध कारक होता है; जैसे- यह आम का पेड़ है। इस वाक्य में 'आम' शब्द का सम्बन्ध 'पेड़' से दिखाया गया है।

7. अधिकरण कारक – इससे किसी संज्ञा का आधार प्रकट होता है; जैसे- वृक्ष पर पक्षी हैं। इस वाक्य में पक्षी का आधार वृक्ष है। अतः इस वाक्य में 'वृक्ष' शब्द अधिकरण कारक में है।

8. संबोधन कारक – किसी को पुकारने के लिए संबोधन कारक का प्रयोग किया जाता है; जैसे- हे राम! यहाँ आओ। अतः इस वाक्य में 'हे राम' शब्द संबोधन कारक में है।

विशेषण

विशेषण की परिभाषा – जो शब्द संज्ञा शब्दों की विशेषता बताते हैं, वे 'विशेषण' कहलाते हैं; जैसे- काली गाय ने सूखी घास नहीं खाई। इस वाक्य में 'काली' शब्द से गाय की विशेषता पता चलती है। अतः 'काली' शब्द विशेषण है। इसी प्रकार 'सूखी' शब्द भी विशेषण है। विशेषण के चार भेद होते हैं-

1. गुणवाचक विशेषण – इससे किसी संज्ञा के गुण, अवस्था आदि का बोध होता है; जैसे- अच्छा, बुरा, पुराना, नीचा आदि। उदाहरण- काली गाय ने दूध दिया। इस वाक्य में 'काली' शब्द गाय के रंग को बताता है। अतः 'काली' शब्द गुणवाचक विशेषण है। इसी प्रकार लाल कपड़ा, काला आदमी, छोटा बन्दर, स्वादिष्ट आम में क्रमशः 'लाल', 'काला', 'छोटा', 'स्वादिष्ट' गुणवाचक विशेषण हैं।

2. संख्यावाचक विशेषण – जो शब्द किसी शब्द की संख्या बताते हैं, वे संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं; जैसे- मेरा तीसरा पत्र आपको मिला होगा। इस वाक्य में 'तीसरा' शब्द पत्र की संख्या बता रहा है।

3. परिमाणवाचक विशेषण – जिससे किसी वस्तु का परिमाण (नाप-तोल आदि) जाना जाए, वह परिमाणवाचक विशेषण होता है; जैसे- थोड़ा दूध लाओ। यहाँ 'थोड़ा' शब्द से दूध की नाप का ज्ञान होता है। अतः 'थोड़ा' शब्द परिमाणवाचक विशेषण है।

4. संकेतवाचक विशेषण – जो सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द की तरफ संकेत करते हैं, वे संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं; जैसे- यह बालक सुन्दर है। इस वाक्य में यह शब्द बालक की ओर संकेत करता है। अतः 'यह' शब्द संकेतवाचक विशेषण है। इसी प्रकार ये, वे, वह आदि शब्द संकेतवाचक विशेषण हैं।

क्रिया

क्रिया की परिभाषा – जिन शब्दों से किसी काम का करना या होना पाया जाए, उसे क्रिया कहते हैं; जैसे राम पढ़ता है। इस वाक्य में 'पढ़ता है' शब्द से काम का होना पता चल रहा है। अतः 'पढ़ता है' शब्द क्रिया है।

क्रिया के भेद – क्रिया के दो भेद होते हैं-

1. सकर्मक क्रिया – जिस क्रिया के साथ उसका कर्म भी हो वह 'सकर्मक क्रिया' होती है; जैसे – श्याम पुस्तक पढ़ता है। इस वाक्य में 'पढ़ता है' क्रिया सकर्मक है क्योंकि इसका कर्म 'पुस्तक' इस वाक्य में दिया हुआ है।

2. अकर्मक क्रिया – जिस क्रिया के साथ उनका कर्म नहीं दिया होता, उसे 'अकर्मक क्रिया' कहते हैं; जैसे -श्याम पढ़ता है। इस वाक्य में 'पढ़ता है' क्रिया का कर्म नहीं दिया हुआ है। अतः 'पढ़ता है' क्रिया वाक्य में अकर्मक क्रिया है।

काल

काल की परिभाषा – जिससे क्रिया के होने के समय का ज्ञान हो, उसे 'काल' कहते हैं।

काल के भेद – काल तीन प्रकार के होते हैं-

1. भूतकाल – यह बीते हुए समय का बोध कराता है; जैसे- वह खाना खा चुका था। यहाँ खाना खाने की क्रिया खत्म हो चुकी है। अतः 'खो चुका' शब्द भूतकाल है।

2. वर्तमानकाल – यह वर्तमान समय का बोध कराता है; जैसे- वह खाना खा रहा है। इस वाक्य में खाना खाने की क्रिया वर्तमानकाल में हो रही है।

3. भविष्यत्काल – यह आगे आने वाले समय में होने वाली क्रिया का बोध कराती है; जैसे- वह खाना खाएगा। इस वाक्य में खाना खाने की क्रिया भविष्यकाल में है।

क्रियाविशेषण

क्रियाविशेषण की परिभाषा- वे शब्द जो क्रिया की विशेषता बताते हैं, 'क्रियाविशेषण' कहलाते हैं; जैसे – वह तेजी से दौड़ा। इस वाक्य में 'दौड़ा' क्रिया की विशेषता 'तेजी' शब्द से पता चल रही है। अतः 'तेजी' शब्द क्रियाविशेषण है।

समुच्चयबोधक

परिभाषा – समुच्चयबोधक शब्द वाक्यों या शब्दों को एक-दूसरे से जोड़ते या अलग करते हैं; जैसे – राम और श्याम गए। इस वाक्य में 'और' शब्द 'राम' और 'श्याम' शब्दों को जोड़ता है। अतः 'और' शब्द समुच्चयबोधक है।

सम्बन्धबोधक

परिभाषा – जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के साथ आकर उनका सम्बन्ध वाक्य के अन्य शब्दों के साथ बताते हैं, वे सम्बन्धबोधक कहलाते हैं; जैसे- दवात मेज पर है। इस वाक्य में 'पर' शब्द 'दवात' का 'मेज' से सम्बन्ध बता रहा है। अतः 'पर' शब्द सम्बन्धबोधक है।

विस्मयादिबोधक

परिभाषा - जो शब्द हर्ष, विस्मय आदि का भाव प्रकट करते हैं, वे 'विस्मयादिबोधक' कहलाते हैं; जैसे- हे! अरे! आह! छि! आदि।

3. वाक्य विभाग

वाक्य की परिभाषा – शब्दों के उस समूह को वाक्य कहते हैं, जिससे पूरी बात समझ में आती है; जैसे- महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था।

वाक्य के अवयव – किसी भी वाक्य के दो भाग किए जा सकते हैं-

1. उद्देश्य – जिसके विषय में कुछ कहा जाए, उसे उद्देश्य कहते हैं; जैसे – 'हरिश्चन्द्र सत्यवादी राजा थे।' इस वाक्य में 'हरिश्चन्द्र' उद्देश्य है क्योंकि उन्हीं के सम्बन्ध में यहाँ कुछ कहा गया है।

2. विधेय – उद्देश्य के बारे में जो कुछ कहा जाए, वह विधेय कहलाता है; जैसे – ऊपर के वाक्य में हरिश्चन्द्र के विषय में कहा गया है- सत्यवादी राजा थे। अतः ‘सत्यवादी राजा थे' विधेय है।

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं-

1. साधारण वाक्य – जिस वाक्य में एक उद्देश्य तथा एक विधेय होता है, उसे साधारण वाक्य कहते हैं; जैसे- राम विद्यालय जाता है।

2. संयुक्त वाक्य – जिस वाक्य में दो या दो से अधिक साधारण तथा स्वतंत्र वाक्य समुच्चयबोधक शब्द से जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं; जैसे उसने राम को मारा और वह भाग गया। इसमें दो साधारण उपवाक्यों को 'और' समुच्चयबोधक शब्द द्वारा जोड़ा गया है।

3. मिश्रित वाक्य – इसमें एक प्रधान वाक्य होता है तथा बाकी अधीन उपवाक्य होते हैं; जैसे- उसने राम से कहा कि आप ही मेरठ चले जाइए। इस वाक्य में 'उसने राम से कहा' प्रधान वाक्य है तथा 'कि आप ही मेरठ चले जाइए' अधीन उपवाक्य है।

अर्थ के आधार पर वाक्य – भेद – अर्थ के आधार पर वाक्य आठ प्रकार के होते हैं-

1. विधिवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में काम का होना या करना सामान्य रूप से प्रकट हो, उन्हें विधिवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे – रवि घर गया। घूमना लाभप्रद है। इन वाक्यों में कार्य सामान्य रूप से हुआ है। अतः ये विधिवाचक वाक्य हैं।

2. निषेधवाचक वाक्य – जिस वाक्य से कार्य का न होना प्रकट हो, उसे 'निषेधवाचक वाक्य' कहते हैं; जैसे- रवि घर नहीं गया।

3. आज्ञावाचक वाक्य – जिन वाक्यों से आज्ञा या परामर्श का बोध हो, वे आज्ञावाचक वाक्य होते हैं; जैसे- छात्रो! बैठ जाओ!

4. प्रश्नवाचक वाक्य – जिस वाक्य से प्रश्न पूछने का बोध हो, वह 'प्रश्नवाचक वाक्य' होता है; जैसे- आपकी घड़ी में क्या बजा है? प्रश्नवाचक वाक्य है।

5. विस्मयादिवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में हर्ष, शोक या विस्मय आदि का बोध हो, उन्हें विस्मयादिवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे हाय! बुरा हुआ!, अहा! आम मीठे हैं!

6. संदेहवाचक वाक्य – जिस वाक्य से कार्य के होने में संदेह प्रकट होता है, वह संदेहवाचक वाक्य कहलाता है; जैसे- शायद वह उत्तीर्ण हो जाए।

7. इच्छावाचक वाक्य – जिस वाक्य से शुभकामना या अन्य इच्छा प्रकट होती है, उसे इच्छावाचक वाक्य कहते हैं; जैसे- भगवान आपका भला करे।

8. संकेतवाचक वाक्य – जिस वाक्य में किसी कार्य का होना किसी अन्य कारण पर निर्भर हो, उसे 'संकेतवाचक वाक्य' कहते हैं; जैसे- यदि आप पढ़ें तो मैं चुप रहूँ।

विराम निर्धारण तथा अनुच्छेदीकरण

विराम की परिभाषा – वाक्य के अन्त में या बड़े-बड़े वाक्यों के बीच में हम थोड़ी देर के लिए रुकते हैं। इन रुकने के स्थानों पर जो चिह्न लगाए जाते हैं, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं।

विराम चिह्नों का महत्त्व – भाषा में विराम चिह्नों का बड़ा महत्व होता है। ये लेखक के भावों को पाठक तक सही रूप में पहुँचाते हैं। कभी-कभी तो विराम चिह्नों के अभाव में पूरी बात समझ में ही नहीं आती, जैसे- रोको मत जाने दो। इस वाक्य से कहने वाले की बात स्पष्ट नहीं होती।

इसके दो अर्थ लगाए जा सकते हैं-

  • रोको, मत जाने दो।
  • रोको मत, जाने दो।

इस प्रकार विराम चिह्नों के हेर-फेर से वाक्य का अर्थ बदल जाता है। अतः भाषा में इनका सही प्रयोग बहुत जरूरी है।

विराम चिह्नों के भेद – हिंदी भाषा में प्रयोग में आने वाले प्रमुख विराम चिह्न निम्नलिखित हैं-

1. पूर्ण विराम – इसका प्रयोग वाक्य के पूरी तरह खत्म होने पर होता है, इसका चिह्न खड़ी पाई (।) है।

2. अर्द्ध विराम – इसमें बोलने वाले को पूर्ण विराम से कुछ कम देर ठहरना पड़ता है। इसका चिह्न (;) है। अर्द्ध विराम का एक उदाहरण देखिए- मैं स्टेशन पर गया; मुझे ट्रेन दिखाई दी किंतु मैं सवार न हो सका। इस प्रकार अर्द्ध विराम के द्वारा एक वाक्य का दूसरे वाक्य से सम्बन्ध दिखाया जाता है।

3. अल्प विराम – इसे (,) इस प्रकार लिखा जाता है। इस स्थान पर अर्द्ध विराम से भी कम देर ठहरना पड़ता है। इसका प्रयोग एक ही शब्द-भेद के दो शब्दों के बीच में होता है; जैसे- मैं अँग्रेजी, हिन्दी, गणित, इतिहास तथा भूगोल पढ़ता हूँ। कभी-कभी वाक्य के खण्ड करने के लिए भी अल्प विराम का प्रयोग किया जाता है; जैसे- परिश्रम करने से मन प्रसन्न रहता है, शरीर पुष्ट होता है और जीवन में सफलता मिलती है।

4. प्रश्नबोधक चिह्न – इसका प्रयोग प्रश्नबोधक वाक्य के अन्त में किया जाता है। इसका चिह्न (?) है। एक उदाहरण देखिए- आज आपने क्या-क्या किया है?

5. विस्मयादिबोधक चिह्न – विस्मय, आश्चर्य, हर्ष, भय, करुणा तथा किसी को पुकारने आदि के लिए विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगाया जाता है; जैसे- हे राम! तुमने यह क्या कर डाला!

6. अवतरण चिह्न – इसका प्रयोग किसी अन्य व्यक्ति की कही हुई अथवा लिखी हुई बात को बताने के लिए किया जाता है। इसका चिह्न (” “) है। एक उदाहरण देखिए- मेरे गुरु जी ने कहा था, “पृथ्वी गोल है।”

7. विवरण चिह्न – जिस वाक्य के बाद कोई सूचना देनी हो या किसी बात का वर्णन करना हो तो उसके पहले विवरण चिह्न (:-) का प्रयोग होता है; जैसे- हमारे नगर के निम्नलिखित स्थल दर्शनीय हैं :- चौक बाजार, गांधी उद्यान, देवी मन्दिर आदि।

अनुच्छेदीकरण

अनुच्छेदीकरण की परिभाषा – जब लेखक को एक विषय पर बहुत कुछ कहना होता है तो वह अपने विषय को अनेक खण्डों में बाँट लेता है और हर बात को एक खंड या अनुच्छेद में लिखता है तथा दूसरा खण्ड नई पंक्ति से शुरू करता है। खण्डों में विभाजित करने की इस रीति को अनुच्छेदीकरण कहते हैं। अनुच्छेदीकरण करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

  1. एक अनुच्छेदीकरण (परिच्छेद) में एक ही बात कहनी चाहिए।
  2. नई बात के लिए दूसरी पंक्ति से नया अनुच्छेद प्रारम्भ करना चाहिए किंतु उनका आपस में सम्बन्ध बना रहना चाहिए।
  3. अनुच्छेद करने से विषय के तारतम्य में बाधा नहीं पड़नी चाहिए बल्कि विषय का स्पष्टीकरण होना चाहिए।
  4. एक ही बात के लिए अनेक अनुच्छेद नहीं बनाने चाहिए।

अलंकार

कक्षा 6 के लिए केवल अनुप्रास अलंकार का ज्ञान होना जरूरी है। अतः यहाँ उसी का वर्णन किया जा रहा है-

अलंकार क्या है? – काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों को अलंकार कहते हैं। जिस प्रकार आभूषणों से शरीर की शोभा बढ़ जाती है, उसी प्रकार अलंकारों के प्रयोग से काव्य का सौंदर्य बढ़ जाता है। इस प्रकार वे स्वर, व्यंजन अथवा शब्द जिनसे काव्य की शोभा बढ़ जाए, अलंकार कहलाते हैं। एक उदाहरण देखिए- तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाये। इस वाक्य में 'त' वर्ण अनेक बार आया है। इसलिए यह पंक्ति पढ़ने में अच्छी लग रही है। इसी को यदि इस प्रकार कर दें- यमुना के किनारे पर तमाल के बहुत वृक्ष छाये हुए हैं तो इस वाक्य में पहले जैसी सुन्दरता नहीं रही। इस प्रकार काव्य में सुन्दरता बढ़ाने वाले शब्द ही अलंकार कहलाते हैं।

'अलंकार के भेद - अलंकारों द्वारा काव्य की शोभा दो प्रकार से बढ़ाई जाती है-

  1. शब्दों में चमत्कार उत्पन्न करके।
  2. अर्थ में चमत्कार उत्पन्न करके।

इसी आधार पर अलंकारों के भी दो प्रमुख भेद माने गए हैं-

  • शब्दालंकार
  • अर्थालंकार

अनुप्रास अलंकार की परिभाषा – जहाँ वाक्य के शब्दों में व्यंजनों की समानता होती है, वहाँ, अनुप्रास अलंकार होता है; जैसे- तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाए। इस वाक्य में 'त' व्यंजन बार-बार आया है। इसलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार हुआ।

अनुप्रास अलंकार के कुछ अन्य उदाहरण देखिए-

(क) “काम कितना ही कठिन हो किंतु उकताते नहीं।”

(ख) “कूलन में, केलिन में, कछारन में, कुंजन में,
क्यारिन में, कलिन में, कलीन किलकंत हैं।”

इन पंक्तियों में 'क' वर्ण बार-बार आया है। इसीलिए यहाँ भी अनुप्रास अलंकार हुआ। इसी प्रकार नीचे के उदाहरण को देखिए-

(ग) “बीथिन में, ब्रज में, नवेलिन में, बेलिन में,
बनन में, बागन में, बगरो बसन्त है।”

इन पंक्तियों में 'ब' वर्ण अनेक बार आया है। इसीलिए यहाँ भी अनुप्रास अलंकार हुआ।

(घ) जियत जग में जस लीजै। इस वाक्य में 'ज' वर्ण अनेक बार आया है। इसीलिए यहाँ भी अनुप्रास अलंकार है।

(ङ) “गरज गगन के घोर गान गम्भीर स्वरों में।” इस वाक्य में 'ग' वर्ण बार-बार आया है, अतः यहाँ भी अनुप्रास अलंकार है।

विलोम शब्द

विलोम का अर्थ – किसी शब्द का विलोम उसके विपरीत भाव को बताता है। छात्रों के ज्ञान के लिए कुछ उपयोगी विलोम शब्द नीचे दिए गए हैं। छात्र इन्हें समझें और याद करें।

शब्दविलोमशब्दविलोम
अमृतविषआयव्यय
अनुकूलप्रतिकूलआयातनिर्यात
सम्मानअपमानअगमसुगम
आदरनिरादरअनिवार्यऐच्छिक
शीतउष्णअधिकन्यून
उन्नतिअवनतिउपस्थितअनुपस्थित
अतिवृष्टिअनावृष्टिउत्तमअधम
उच्चनिम्नअवगुणसद्गुण
उत्तीर्णअनुत्तीर्णआदिअन्त, अनादि
उदयअस्तउतारचढ़ाव
उचितअनुचितकटुमधुर
दयालुनिर्दयीकीर्तिअपकीर्ति
कायरसाहसीआशानिराशा
आरम्भअन्तनिर्गुणसगुण
गुरुशिष्यगुणदोष
घृणाप्रेमनिर्बलसबल
पापपुण्यजीवितमृत
शत्रुमित्रप्रातःसायं
स्वतंत्रपरतंत्रभूतभविष्य
धनीनिर्धनविश्वासअविश्वास
मूर्खविद्वानवरदानशाप
मंगलअमंगलयशअपयश
श्रमविश्रामयुवावृद्ध
श्वेतश्यामरोगीनिरोगी
शुद्धअशुद्धरक्षकभक्षक
शोकहर्षलोकपरलोक
लाभहानिसंपदाविपदा
सुन्दरकुरूपविधवासधवा
सज्जनदुर्जनसम्भवअसम्भव

पर्यायवाची शब्द

परिभाषा – समान अर्थ वाले शब्द पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहलाते हैं। कुछ उदाहरण देखिए-

  • अग्नि – पावक, अनल, आग, दहन, दव, हुताशन, जातवेदा
  • अमृत – सुधा, अमिय, सोम, मधु, अमी, पीयूष
  • असुर – राक्षस, दानव, दैत्य, दनुज, निशाचर, तमचर, रजनीचर
  • आकाश – नभ, अम्बर, व्योम, गगन, शून्य, अन्तरिक्ष
  • आँख – नेत्र, लोचन, नयन, दृग, चख, चक्षु, अक्षि
  • इन्द्र – देवराज, सुरेश, सुरपति, देवेंद्र, मधवा, देवेश, शक्र
  • कमल – सरोज, जलज, पंकज, राजीव, अरविंद, वारिज
  • कपड़ा – वस्त्र, वसन, चीर, पट, दुकूल, अंबर
  • गंगा – देवनदी, सुरसरी, भागीरथी, देवापगा, त्रिपथगा, विष्णुपदी
  • गणेश – गजानन, लम्बोदर, विनायक, गजबदन, गौरीसुत, गणपति
  • घर – गृह, गेह, निकेतन, आवास, सदन, धाम, भवन
  • चन्द्रमा – शशि, चन्द्र, राकेश, इंदु, राकापति, हिमांशु, विधु, मयंक
  • जल – पानी, नीर, जीवन, तोय, वारि, अंबु, सलिल, उदक
  • जग – जगत, संसार, विश्व, लोक, भव
  • तालाब – सरोवर, सर, तड़ाग, जलाशय, पुष्कर, ताल, सरसी
  • देवता – सुर, अमर, देव, आदित्य, विबुध
  • नदी – सरिता, तटनी, सरि, सलिला, अपगा, तरंगिणी
  • नारी - स्त्री, अबला, महिला, कामिनी, ललना, कांता
  • पवन – वायु, समीर, मारुत, वात, अनिल, बयार, पवमान
  • पक्षी – खंग, विहंगम, विहम, पतंग, नभचर, अंडज, द्विज
  • पिता – जनक, जन्य, तात, बाप
  • पुत्र – पूत, नन्द, बेटा, सुत, तनय, आत्मज, लड़का
  • पृथ्वी – भू, भूमि, धरा, मही, वसुधा, धरती, वसुंधरा, अवनी
  • पुष्प - फूल, कुसुम, सुमन, प्रसून, पुहुप
  • बिजली – विद्युत, चपला, तड़ित, दामिनी, चंचला, धनबल्ली
  • माता – माँ, मातु, माय, जननी, माई :
  • मित्र – साथी, स्वजन, सखा, व्यस्य, स्नेही, सुहृद
  • मेघ – बादल, घन, जलधर, नीरद, जलद, पयोद, वारिद, पयोधरे
  • राजा – नृप, रजनी, भूप, भूपाल, महीप, सम्राट, नरपति, भूपति
  • रात – रात्रि, रजनी, निशा, तमसा, तमी, यामिनी, विभावरी
  • वन – जंगल, कानन, विपिन, गहन
  • विष्णु – चतुर्भुज, जनार्दन, अच्युत, केशव, गोविंद, मुकुंद, चक्रपाणि
  • समुद्र – सागर, सिंधु, पयोधि, जलधि, उदधि, रत्नाकर, नदीश
  • सर्प – अहि, साँप, नाग, उरग, विषधर, भुजंग, व्याल, पन्नग
  • सिंह – शेर, केहरी, नाहर, मृगराज, केशरी, वनराज, शार्दूल
  • सूर्य – सूरज, रवि, अर्क, भानु, आदित्य, दिनकर, भास्कर, सविता
  • सोना – स्वर्ण, कंचन, हेम, हाटक, सुवर्ण, कनक

शब्दों के तत्सम रूप

परिभाषा- किसी शब्द के शुद्ध रूप को तत्सम रूप कहते हैं। कुछ शब्दों के शुद्ध रूप नीचे दिए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को इन्हें अच्छी तरह पढ़ना चाहिए-

मुहावरे और उनका प्रयोग

मुहावरे ऐसे वाक्यांश होते हैं जिनका सीधा अर्थ नहीं लिया जाता, बल्कि उनका एक खास मतलब होता है। जैसे, 'ऊँट-पटाँग' कहने का सीधा मतलब 'ऊँट पर टाँग रखना' नहीं है, बल्कि इसका मतलब है 'बेकार या व्यर्थ की बात करना' जो कि असंभव है। यहाँ कुछ मुहावरे उनके अर्थ और वाक्य प्रयोग के साथ दिए गए हैं। छात्रों को इन्हें ध्यान से पढ़ना और समझना चाहिए।

 

Question 1. आँखें गड़ाना
Answer: आँखें गड़ाना का मतलब होता है किसी चीज़ को लगातार एकटक देखना या बहुत ध्यान से देखना। जैसे, तुम इस हिरन को ऐसे देख रहे हो जैसे तुमने पहले कभी हिरन देखा ही न हो। यह तब इस्तेमाल होता है जब कोई किसी चीज़ को बहुत उत्सुकता से देखता है।
In simple words: किसी चीज़ को लगातार ध्यान से देखना।

🎯 Exam Tip: मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करें और फिर उसे एक सटीक वाक्य में प्रयोग करके अपनी समझ दिखाएँ।

 

Question 2. आँखों का तारा
Answer: आँखों का तारा होने का मतलब है किसी का बहुत प्रिय या प्यारा होना। जैसे, मोहन अपनी बूढ़ी माँ की आँखों का तारा है, यानी वह अपनी माँ का सबसे दुलारा बेटा है। यह मुहावरा अक्सर बच्चों के लिए प्रयोग किया जाता है।
In simple words: बहुत प्यारा या प्रिय होना।

🎯 Exam Tip: मुहावरे के प्रयोग से वाक्य को स्वाभाविक और प्रभावी बनाएँ।

 

Question 3. आँखों में धूल झोंकना
Answer: आँखों में धूल झोंकना का मतलब है किसी को चालाकी से धोखा देना या बेवकूफ बनाना। जैसे, धोखा देकर किसी का पैसा ले जाना सिर्फ़ ठगों का काम होता है। यह दिखाता है कि कैसे कोई गलत काम करता है।
In simple words: किसी को धोखा देना या मूर्ख बनाना।

🎯 Exam Tip: मुहावरे के अर्थ को स्पष्ट करने वाले उदाहरण दें।

 

Question 4. ईद का चाँद होना
Answer: ईद का चाँद होने का मतलब है बहुत लंबे समय बाद दिखाई देना या किसी का मिलना मुश्किल हो जाना। जैसे, मैं आपकी बहुत दिनों से प्रतीक्षा कर रहा था, लेकिन आप तो ईद का चाँद हो गए हैं। यह मुहावरा किसी व्यक्ति की कमी महसूस होने पर इस्तेमाल होता है।
In simple words: बहुत दिनों बाद दिखाई देना।

🎯 Exam Tip: मुहावरे के अर्थ और प्रयोग को अच्छी तरह याद रखें ताकि आप उसे सही जगह इस्तेमाल कर सकें।

 

Question 5. काया पलट होना
Answer: काया पलट होना का मतलब है पूरी तरह से बदल जाना या किसी के हालात में बड़ा बदलाव आना। जैसे, लॉटरी का पैसा मिलने के बाद रमेश की पूरी ज़िंदगी बदल गई। यह अक्सर किसी के भाग्य बदलने पर इस्तेमाल होता है।
In simple words: पूरी तरह से बदल जाना।

🎯 Exam Tip: किसी के जीवन में बड़े बदलाव को बताने के लिए इस मुहावरे का प्रयोग करें।

 

Question 6. कलेजा धक-धक करना
Answer: कलेजा धक-धक करना का मतलब है बहुत ज़्यादा डर जाना या घबरा जाना। जैसे, कमरे में साँप को देखकर मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा और मैं डर गया। यह डर या बेचैनी को दिखाने के लिए उपयोग होता है।
In simple words: बहुत ज़्यादा डरना या घबराना।

🎯 Exam Tip: अचानक डर या घबराहट की स्थिति को व्यक्त करने के लिए यह मुहावरा उचित है।

 

Question 7. घी के दिए जलाना
Answer: घी के दिए जलाना का मतलब है बहुत खुश होना या जश्न मनाना। जैसे, लॉटरी का पैसा मिलने पर राकेश बहुत खुशी मना रहा है। यह मुहावरा बड़ी खुशी या सफलता के मौके पर बोला जाता है।
In simple words: बहुत खुश होना और जश्न मनाना।

🎯 Exam Tip: किसी बड़ी उपलब्धि या खुशी के अवसर पर इस मुहावरे का प्रयोग करें।

 

Question 8. चक्कर में पड़ना
Answer: चक्कर में पड़ना का अर्थ है किसी धोखे में आना या किसी उलझन में फँस जाना। जैसे, भूल-भूलैया में पहुँचकर मैं पूरी तरह से भ्रमित हो गया और रास्ता भूल गया। यह अक्सर तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी समस्या को समझ नहीं पाता।
In simple words: किसी धोखे या उलझन में फँसना।

🎯 Exam Tip: यह मुहावरा किसी भ्रमित या उलझन भरी स्थिति को दर्शाने के लिए उपयोगी है।

 

Question 9. छक्के छुड़ाना
Answer: छक्के छुड़ाना का अर्थ है किसी को बुरी तरह हरा देना या पराजित करना। जैसे, युद्ध के मैदान में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों को बुरी तरह हरा दिया। यह मुहावरा किसी बड़ी जीत या विजय को दर्शाता है।
In simple words: किसी को बुरी तरह हराना।

🎯 Exam Tip: प्रतिद्वंद्वी को पूरी तरह से पराजित करने की बात कहने के लिए इस मुहावरे का प्रयोग करें।

 

Question 10. जी-जान से जुट जाना
Answer: जी-जान से जुट जाना का मतलब है किसी काम को बहुत मन लगाकर और पूरी मेहनत से करना। जैसे, केवल परीक्षा के दिनों में ही पढ़ाई में पूरी तरह से लग जाने से आपको सच्चा ज्ञान नहीं मिल सकता। यह मुहावरा किसी काम में पूरी निष्ठा दिखाने के लिए उपयोग होता है।
In simple words: पूरी मेहनत और लगन से काम करना।

🎯 Exam Tip: किसी काम में पूर्ण समर्पण को बताने के लिए यह मुहावरा सटीक है।

 

Question 11. जम जाना
Answer: जम जाना का अर्थ है किसी काम में पूरे उत्साह और लगन से लग जाना। जैसे, पास होने के लिए पढ़ाई में पूरी तरह से जुट जाओ, नहीं तो आप फेल हो सकते हो। यह मुहावरा किसी काम में स्थिरता और एकाग्रता दर्शाता है।
In simple words: उत्साह से किसी काम में लग जाना।

🎯 Exam Tip: किसी लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्प को दर्शाने हेतु इस मुहावरे का प्रयोग करें।

 

Question 12. जहर उगलना
Answer: ज़हर उगलना का मतलब है किसी के खिलाफ़ झूठी या बुरी बातें फैलाना। जैसे, जो देश भारत के खिलाफ़ गलत प्रचार करते हैं, उन्हें एक दिन पछताना ही पड़ता है। यह मुहावरा दूसरों के प्रति दुर्भावनापूर्ण बातें कहने के लिए प्रयोग होता है।
In simple words: किसी के बारे में बुरी बातें फैलाना।

🎯 Exam Tip: जब कोई नकारात्मक या अपमानजनक बातें फैलाए, तो इस मुहावरे का उपयोग कर सकते हैं।

 

Question 13. टका-सा जवाब देना
Answer: टका-सा जवाब देना का अर्थ है किसी बात के लिए साफ़ और सीधा मना कर देना। जैसे, जब मैंने राम से दस रुपये उधार माँगे, तो उसने मुझे तुरंत मना कर दिया। यह मुहावरा बिना किसी झिझक के किसी बात से इनकार करने को दर्शाता है।
In simple words: साफ़ मना कर देना।

🎯 Exam Tip: किसी अनुरोध को सीधे तौर पर ठुकराने की स्थिति में यह मुहावरा बहुत प्रभावी होता है।

 

Question 14. धाक जमाना
Answer: धाक जमाना का मतलब है किसी पर अपना प्रभाव डालना या अपना दबदबा बनाना। जैसे, हाईस्कूल में पहले नंबर पर पास होकर राम ने पूरे स्कूल में अपना सम्मान बना लिया है। यह मुहावरा किसी की प्रतिष्ठा या शक्ति बढ़ने को बताता है।
In simple words: अपना प्रभाव या दबदबा बनाना।

🎯 Exam Tip: जब कोई अपनी योग्यता से लोगों के बीच अपना स्थान बना ले, तब इस मुहावरे का प्रयोग करें।

 

Question 15. पत्थर पिघलना
Answer: पत्थर पिघलना का अर्थ है एक कठोर दिल वाले व्यक्ति के मन में भी दया भाव पैदा होना। जैसे, उत्तरा के दिल तोड़ देने वाले रोने को सुनकर कठोर से कठोर लोग भी भावुक हो गए। यह मुहावरा किसी की करुणा को जगाने के लिए उपयोग होता है।
In simple words: कठोर दिल वाले व्यक्ति में दया आना।

🎯 Exam Tip: किसी की पीड़ा से कठोर हृदय वाले व्यक्ति के प्रभावित होने को दर्शाने के लिए यह मुहावरा उचित है।

 

Question 16. प्राणों की बाजी लगाना
Answer: प्राणों की बाज़ी लगाना का मतलब है जान का जोखिम उठाकर कोई काम करना। जैसे, अब्दुल हमीद ने अपनी जान की परवाह न करते हुए दुश्मनों को खत्म कर दिया। यह मुहावरा अत्यधिक साहस और बलिदान को दिखाता है।
In simple words: जान जोखिम में डालकर काम करना।

🎯 Exam Tip: देशभक्ति या किसी बड़े उद्देश्य के लिए निडरता दिखाने पर इस मुहावरे का प्रयोग करें।

 

Question 17. फूले न समाना
Answer: फूले न समाना का अर्थ है बहुत ज़्यादा खुश होना या इतनी खुशी होना कि उसे संभाला न जा सके। जैसे, अपने पास होने की खबर सुनकर मुकेश बहुत ज़्यादा खुश हो गया। यह मुहावरा अत्यधिक खुशी की स्थिति को व्यक्त करता है।
In simple words: बहुत ज़्यादा खुश होना।

🎯 Exam Tip: जब कोई व्यक्ति अत्यधिक खुशी से अभिभूत हो, तब इस मुहावरे का इस्तेमाल करें।

 

Question 18. मौत से लड़कर आना
Answer: मौत से लड़कर आना का मतलब है किसी जानलेवा खतरे से बचकर वापस आना या बहुत दिनों तक जीवित रहना। जैसे, सभी को एक न एक दिन भगवान के पास जाना होता है, कोई भी मौत से लड़कर हमेशा के लिए नहीं आता। यह मुहावरा जीवन के अनिश्चित स्वभाव को दर्शाता है।
In simple words: बड़े खतरे से बचकर निकलना।

🎯 Exam Tip: किसी गंभीर बीमारी या दुर्घटना से बचने की स्थिति में इस मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।

 

Question 19. लट्टू होना
Answer: लट्टू होना का अर्थ है किसी चीज़ पर बहुत ज़्यादा मोहित हो जाना या ललचा जाना। जैसे, सेठ जी की सुंदर कोठी देखकर नेता जी उस पर पूरी तरह से मुग्ध हो गए। यह मुहावरा किसी वस्तु के प्रति तीव्र आकर्षण को व्यक्त करता है।
In simple words: किसी चीज़ पर मोहित हो जाना।

🎯 Exam Tip: जब कोई किसी की सुंदरता या गुण पर पूरी तरह से मुग्ध हो जाए, तब इस मुहावरे का उपयोग करें।

 

Question 20. सिर नीचा होना
Answer: सिर नीचा होना का मतलब है शर्मिंदा होना या अपमानित महसूस करना। जैसे, चोरी की किताब पकड़े जाने पर मोहन को बहुत शर्मिंदगी हुई। यह मुहावरा गलती के बाद होने वाली लज्जा को दर्शाता है।
In simple words: शर्मिंदा होना।

🎯 Exam Tip: किसी गलती या अपमान के कारण होने वाली शर्मिंदगी को व्यक्त करने के लिए यह मुहावरा उपयुक्त है।

 

Question 21. हृदय में हलचल होना
Answer: हृदय में हलचल होना का अर्थ है मन में बहुत सारे विचार आना या बेचैनी महसूस होना। जैसे, कमरे में चोर को देखकर मेरे मन में कई तरह के ख्याल आने लगे और मैं घबरा गया। यह मुहावरा आंतरिक उथल-पुथल या चिंता को दर्शाता है।
In simple words: मन में कई विचार आना या बेचैन होना।

🎯 Exam Tip: जब कोई व्यक्ति किसी स्थिति से चिंतित या परेशान हो, तब इस मुहावरे का प्रयोग करें।

लोकोक्तियाँ (कहावतें)

लोकोक्ति का अर्थ है संसार में बहुत समय से चली आ रही बातें। ये लोगों के अनुभवों से भरी होती हैं और इनका इस्तेमाल किसी बात को और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए किया जाता है। इन्हें पूरे वाक्य के रूप में उपयोग करना चाहिए। यहाँ कुछ कहावतें उनके अर्थ और वाक्य प्रयोग के साथ दी गई हैं।

 

Question 1. अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग
Answer: अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग का मतलब है कि हर कोई अपनी बात कहना चाहता है और किसी एक बात पर सहमति नहीं बनती। जैसे, आज की सभा में सब अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, इसलिए कोई फ़ैसला नहीं हो सका। यह कहावत तब उपयोग होती है जब कोई एक राय न बन पाए।
In simple words: सबकी अलग-अलग बात कहना, किसी एक राय पर न पहुँचना।

🎯 Exam Tip: जब किसी समूह में सामंजस्य की कमी हो और सभी अपनी मर्ज़ी चलाएँ, तब इस लोकोक्ति का प्रयोग करें।

 

Question 2. ऊँट के मुँह में जीरा
Answer: ऊँट के मुँह में जीरा का मतलब है कि जब किसी को बहुत ज़्यादा किसी चीज़ की ज़रूरत हो, और उसे बहुत थोड़ी मात्रा में वह चीज़ मिले। जैसे, जो व्यक्ति बीस कचौड़ी खाता है, उसे सिर्फ़ चार कचौड़ी देना ऐसा ही है जैसे ऊँट के मुँह में जीरा। यह तब इस्तेमाल होता है जब किसी की बड़ी ज़रूरत पूरी न हो।
In simple words: बहुत ज़्यादा ज़रूरत में बहुत कम चीज़ मिलना।

🎯 Exam Tip: किसी बड़ी आवश्यकता के मुकाबले बहुत कम सहायता या वस्तु मिलने की स्थिति में इस लोकोक्ति का प्रयोग करें।

 

Question 3. खोदा पहाड़ निकली चुहिया
Answer: खोदा पहाड़ निकली चुहिया का मतलब है बहुत मेहनत करने के बाद भी बहुत कम फ़ायदा मिलना। जैसे, एम.ए. की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी सिर्फ 2000 रुपये प्रति माह की नौकरी मिलना ऐसा ही है जैसे पहाड़ खोदकर चुहिया निकालना। यह कहावत तब प्रयोग होती है जब अपेक्षा के अनुरूप परिणाम न मिले।
In simple words: बहुत मेहनत के बाद भी कम लाभ मिलना।

🎯 Exam Tip: जब किसी कार्य में बहुत अधिक प्रयास के बावजूद परिणाम बहुत ही मामूली हो, तब इसका उपयोग करें।

 

Question 4. जो गरजते हैं बरसते नहीं
Answer: जो गरजते हैं बरसते नहीं का अर्थ है कि जो लोग सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे असल में कोई काम नहीं करते। जैसे, राजेश बहुत डींगें हाँकता है, पर जब काम करने का समय आता है तो वह छिप जाता है। यह कहावत बताती है कि सिर्फ़ कहने से कुछ नहीं होता, करने से होता है।
In simple words: जो सिर्फ़ बातें करते हैं, काम नहीं करते।

🎯 Exam Tip: उन लोगों के लिए सटीक है जो सिर्फ़ लंबी-चौड़ी बातें करते हैं लेकिन काम करने से बचते हैं।

 

Question 5. घर खीर तो बाहर भी खीर
Answer: घर खीर तो बाहर भी खीर का मतलब है कि जो व्यक्ति धनवान होता है, उसका हर जगह सम्मान होता है। जैसे, पिता जी ने सेठ जी के सम्मान में पाँच सौ रुपये खर्च किए, यह सच है कि जो घर में अमीर होता है, उसका बाहर भी मान होता है। यह कहावत धनवानों के सम्मान को दर्शाती है।
In simple words: धनी व्यक्ति का हर जगह सम्मान होना।

🎯 Exam Tip: यह लोकोक्ति समाज में धनवान व्यक्तियों को मिलने वाले आदर को दर्शाती है।

 

Question 6. अकेला चना क्या भाड़ फोड़ेगा
Answer: अकेला चना क्या भाड़ फोड़ेगा का अर्थ है कि एक अकेला व्यक्ति बिना दूसरों की मदद के कोई बड़ा काम नहीं कर सकता। कोई भी एक व्यक्ति बहुत बड़ा काम अकेले नहीं कर सकता। यह कहावत टीम वर्क या सामूहिक प्रयास के महत्व को बताती है।
In simple words: एक अकेला व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता।

🎯 Exam Tip: जब किसी बड़े काम के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता हो, तब इस लोकोक्ति का प्रयोग करें।

 

Question 7. अक्ल बड़ी या भैंस
Answer: अक्ल बड़ी या भैंस का मतलब है कि ताक़त या शरीर से ज़्यादा बुद्धि और समझ ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है। एक समझदार व्यक्ति बलवान व्यक्ति से बेहतर काम कर सकता है। यह कहावत ज्ञान और बुद्धिमत्ता की श्रेष्ठता को बताती है।
In simple words: बल से ज़्यादा बुद्धि महत्वपूर्ण होती है।

🎯 Exam Tip: यह लोकोक्ति शारीरिक बल से अधिक मानसिक क्षमता के महत्व पर बल देती है।

 

Question 8. आम के आम गुठलियों के दाम
Answer: आम के आम गुठलियों के दाम का अर्थ है कि एक काम करने से दोहरा फ़ायदा होना या एक साथ दो लाभ मिलना। यह तब होता है जब आपको एक चीज़ से दो तरह के फायदे होते हैं। यह कहावत एक ही प्रयास से दो लाभ प्राप्त करने को दर्शाती है।
In simple words: एक काम से दोहरा लाभ मिलना।

🎯 Exam Tip: जब कोई व्यक्ति एक ही लेन-देन या कार्य से दोहरी आय या लाभ प्राप्त करता है, तब इसका प्रयोग करें।

 

Question 9. एक पंथ दो काज
Answer: एक पंथ दो काज का मतलब है कि एक ही प्रयास या रास्ते से दो काम पूरे हो जाना या दोहरा लाभ मिलना। जैसे, आप एक ही यात्रा में दो काम कर लेते हैं। यह कहावत कुशल योजना या मल्टीटास्किंग के लाभ को बताती है।
In simple words: एक काम करते हुए दूसरा काम भी पूरा हो जाना।

🎯 Exam Tip: यह लोकोक्ति एक ही प्रयास से दो अलग-अलग उद्देश्यों को प्राप्त करने की क्षमता पर प्रकाश डालती है।

 

Question 10. ऊँची दुकान फीके पकवान
Answer: ऊँची दुकान फीके पकवान का मतलब है कि दिखावा ज़्यादा हो लेकिन असलियत में चीज़ें अच्छी न हों। कोई बड़ी दुकान है, पर वहाँ के पकवान का स्वाद अच्छा नहीं है। यह कहावत दिखावे और वास्तविकता के अंतर को उजागर करती है।
In simple words: दिखावा ज़्यादा, असलियत में गुणवत्ता कम।

🎯 Exam Tip: जब कोई जगह या व्यक्ति बड़ा नाम रखता हो, लेकिन उसकी गुणवत्ता या काम औसत हो, तब इसका उपयोग करें।

 

Question 11. एक अनार सौ बीमार
Answer: एक अनार सौ बीमार का अर्थ है कि जब कोई चीज़ बहुत कम मात्रा में उपलब्ध हो और उसकी ज़रूरत या चाहने वाले बहुत ज़्यादा हों। जैसे, एक ही चीज़ को पाने के लिए बहुत सारे लोग लाइन में लगे हैं। यह कहावत सीमित संसाधनों और अत्यधिक मांग की स्थिति को बताती है।
In simple words: कम चीज़ और चाहने वाले बहुत ज़्यादा।

🎯 Exam Tip: यह लोकोक्ति संसाधनों की कमी और मांग की अधिकता की स्थिति को दर्शाने के लिए उपयुक्त है।

 

Question 12. काला अक्षर भैंस बराबर
Answer: काला अक्षर भैंस बराबर का मतलब है पूरी तरह से अनपढ़ होना या किसी अक्षर को पहचान न पाना। जिस व्यक्ति को अक्षर नहीं आते, उसके लिए अक्षर काले रंग की भैंस जैसे ही होते हैं। यह कहावत निरक्षरता या अशिक्षा को दर्शाती है।
In simple words: पूरी तरह से अनपढ़ होना।

🎯 Exam Tip: जब कोई व्यक्ति बिल्कुल भी पढ़ना-लिखना न जानता हो, तो इस लोकोक्ति का प्रयोग करें।

 

Question 13. दूध का दूध, पानी का पानी
Answer: दूध का दूध, पानी का पानी का अर्थ है किसी मामले में पूरी तरह से सही और निष्पक्ष फ़ैसला करना या सच्चा न्याय करना। यानी, सब कुछ स्पष्ट कर देना और सच्चाई सामने लाना। यह कहावत निष्पक्षता और सच्चाई पर ज़ोर देती है।
In simple words: सही और निष्पक्ष न्याय करना।

🎯 Exam Tip: किसी विवाद में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से निर्णय लेने की स्थिति को व्यक्त करने के लिए यह लोकोक्ति सटीक है।

 

Question 14. घर की मुर्गी दाल बराबर
Answer: घर की मुर्गी दाल बराबर का मतलब है कि घर में आसानी से उपलब्ध चीज़ों या व्यक्तियों का महत्व न समझना। लोग अक्सर अपनी चीज़ों को कम मूल्यवान मानते हैं। यह कहावत उन चीज़ों के महत्व को नज़रअंदाज़ करने को बताती है जो हमारे पास पहले से हैं।
In simple words: अपनी चीज़ों या घर के लोगों का महत्व न समझना।

🎯 Exam Tip: यह लोकोक्ति इस बात पर बल देती है कि हमें अपने पास मौजूद चीज़ों या व्यक्तियों का सम्मान करना चाहिए।

 

Question 15. घर का भेदी लंका ढाए
Answer: घर का भेदी लंका ढाए का अर्थ है कि अगर घर का कोई सदस्य या अंदर का व्यक्ति भेद खोल दे या विश्वासघात करे, तो इससे बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। जैसे, विभीषण ने रावण के भेद बताकर लंका का पतन करवाया था। यह कहावत आंतरिक विश्वासघात के गंभीर परिणामों की चेतावनी देती है।
In simple words: घर का व्यक्ति ही नुकसान पहुँचा सकता है।

🎯 Exam Tip: यह लोकोक्ति बताती है कि किसी अपने के विश्वासघात से होने वाला नुकसान कितना बड़ा हो सकता है।

 

Question 16. जिसकी लाठी उसकी भैंस
Answer: जिसकी लाठी उसकी भैंस का मतलब है कि जिसके पास ताक़त होती है, चीज़ें उसी की हो जाती हैं या उसी की चलती है। इसका मतलब है कि शक्ति ही असली अधिकार होती है। यह कहावत बताती है कि ताक़तवर व्यक्ति अक्सर अपनी मर्ज़ी चलाता है।
In simple words: शक्तिशाली व्यक्ति का अधिकार होता है।

🎯 Exam Tip: यह लोकोक्ति यह दर्शाती है कि ताक़त और अधिकार अक्सर एक साथ चलते हैं।

UP Board Solutions Class 6 Hindi हिंदी व्याकरण

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