UP Board Solutions Class 6 Agricultural Science Chapter 7 Mukhya Faslon ki Kheti

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Detailed Chapter 7 मुख्य फसलोन की खेती UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science

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Class 6 Agricultural Science Chapter 7 मुख्य फसलोन की खेती UP Board Solutions PDF

अभ्यास

 

Question 1. (1) धान की खेती होती है -
(क) खरीफ
(ख) रबी
(ग) जायद
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) खरीफ
In simple words: धान की खेती मुख्यतः खरीफ के मौसम में की जाती है क्योंकि इसे उगने के लिए अधिक पानी और गर्मी की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: फसलों को उनके मौसम के आधार पर सही श्रेणी (खरीफ, रबी, जायद) में पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. (2) धान की नर्सरी लगायी जाती है -
(क) मई के अंतिम सप्ताह में
(ख) जून के अंतिम सप्ताह में
(ग) जुलाई के प्रथम सप्ताह में
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) मई के अंतिम सप्ताह में
In simple words: धान के छोटे पौधे तैयार करने के लिए नर्सरी मई के आखिरी हफ्ते में तैयार की जाती है ताकि वे बाद में खेत में लगाने के लिए तैयार रहें।

🎯 Exam Tip: नर्सरी लगाने का सही समय पौधों की अच्छी वृद्धि और फसल की बेहतर उपज के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. (3) खरीफ की प्रमुख फसल है -
(क) धान
(ख) गेहूँ
(ग) चना
(घ) मटर
Answer: (क) धान
In simple words: खरीफ का मौसम, जो गर्मी और बारिश का होता है, उसमें धान सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली और महत्वपूर्ण फसल है।

🎯 Exam Tip: खरीफ की फसलों को बारिश के मौसम में बोया जाता है और इन्हें अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

 

Question 1. (4) धान की सीधी बुवाई में प्रजाति का प्रयोग करते हैं -
(क) साकेत - 4
(ख) सरजू-52
(ग) आई आर - 8
(घ) उपर्युक्त सभी
Answer: (क) साकेत - 4
In simple words: सीधी बुवाई के लिए 'साकेत - 4' धान की एक खास किस्म है जिसका इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह सीधे बुवाई के लिए उपयुक्त होती है।

🎯 Exam Tip: अलग-अलग बुवाई विधियों के लिए उपयुक्त धान की किस्मों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. (5) सुगंधित धान की प्रजाति है -
(क) टा-3
(ख) बासमती-370
(ग) पूसा बासमती - 1
(घ) उपर्युक्त सभी
Answer: (घ) उपर्युक्त सभी
In simple words: टा-3, बासमती-370, और पूसा बासमती - 1 ये सभी धान की ऐसी किस्में हैं जिनसे खुशबूदार चावल बनता है।

🎯 Exam Tip: सुगंधित धान की किस्मों के नाम याद रखें, जो अपने खास स्वाद और खुशबू के लिए जानी जाती हैं।

 

Question 1. (6) मक्का की खेती की जाती है -
(क) खरीफ
(ख) रबी
(ग) जायद
(घ) उपर्युक्त सभी में
Answer: (घ) उपर्युक्त सभी में
In simple words: मक्के को पूरे साल उगाया जा सकता है, यानी इसे खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: मक्का एक बहुमुखी फसल है जो विभिन्न कृषि जलवायु परिस्थितियों में उगाई जा सकती है।

 

Question 1. (7) मक्का की खेती के लिए उपयुक्त भूमि होती है -
(क) दोमट
(ख) चिकनी मिट्टी
(ग) भावर मिट्टी
(घ) इसमें से कोई नहीं
Answer: (क) दोमट
In simple words: मक्के की अच्छी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, क्योंकि यह पानी और पोषक तत्वों को सही मात्रा में रोक कर रखती है।

🎯 Exam Tip: दोमट मिट्टी में रेत, गाद और चिकनी मिट्टी का संतुलित मिश्रण होता है, जो अधिकांश फसलों के लिए आदर्श है।

 

Question 1. (8) संकर मक्का की प्रजाति है -
(क) गंगा - 2
(ख) गंगा - 11
(ग) डेकन - 107
(घ) उपर्युक्त सभी
Answer: (घ) उपर्युक्त सभी
In simple words: 'गंगा - 2', 'गंगा - 11', और 'डेकन - 107' ये सभी संकर मक्के की किस्में हैं, जिन्हें ज्यादा उपज के लिए विकसित किया गया है।

🎯 Exam Tip: संकर किस्में आमतौर पर पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक पैदावार देती हैं और रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं।

 

Question 1. (9) संकुल मक्का की प्रजाति है -
(क) नवीन
(ख) कंचन
(ग) श्वेता
(घ) उपर्युक्त सभी
Answer: (घ) उपर्युक्त सभी
In simple words: 'नवीन', 'कंचन', और 'श्वेता' ये तीनों ही संकुल मक्के की प्रजातियाँ हैं, जिन्हें अक्सर किसानों द्वारा पसंद किया जाता है।

🎯 Exam Tip: संकुल किस्में संकर किस्मों की तुलना में अधिक आनुवंशिक विविधता बनाए रखती हैं और किसानों के लिए बीज बचाना संभव बनाती हैं।

 

Question 1. (10) उड़द फसल है -
(क) दलहनी
(ख) तिलहनी
(ग) दलहनी एवं तिलहनी दोनों
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (क) दलहनी
In simple words: उड़द एक दलहनी फसल है, जिसका मतलब है कि यह दालों के परिवार से आती है और मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती हैं क्योंकि वे हवा से नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती हैं।

 

Question 1. (11) कुफरी चन्द्रमुखी प्रजाति है -
(क) मक्का
(ख) आलू
(ग) मूंग
(घ) अरहर
Answer: (ख) आलू
In simple words: 'कुफरी चन्द्रमुखी' आलू की एक बहुत ही प्रसिद्ध किस्म है, जिसे अपनी अच्छी गुणवत्ता और पैदावार के लिए जाना जाता है।

🎯 Exam Tip: 'कुफरी' भारत में आलू की किस्मों के लिए एक सामान्य उपसर्ग है, जो हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) से संबंधित है।

 

Question 1. (12) सरसो में तेल पाया जाता है -
(क) 30 - 40%
(ख) 20 - 22%
(ग) 10 - 12%
(घ) इसमें से कोई नहीं
Answer: (क) 30 - 40%
In simple words: सरसों के दानों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक तेल होता है, जो इसे तेल निकालने के लिए एक महत्वपूर्ण फसल बनाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न तिलहनी फसलों में तेल की प्रतिशत मात्रा को याद रखना उनके आर्थिक महत्व को समझने में मदद करता है।

 

Question 1. (13) अरहर की उपज होती है -
(क) 20-25 कुन्तल प्रति हेक्टेयर
(ख) 34-66 कुन्तल प्रति हेक्टेयर
(ग) 35-40 कुन्तल प्रति हेक्टेयर
(घ) उपर्युक्त सभी ठीक है।
Answer: (क) 20-25 कुन्तल प्रति हेक्टेयर
In simple words: अरहर की फसल से प्रति हेक्टेयर लगभग 20 से 25 क्विंटल उपज मिल सकती है, जो इसकी खेती की लाभप्रदता को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: फसल की उपज मिट्टी की गुणवत्ता, सिंचाई और प्रबंधन तकनीकों पर निर्भर करती है।

 

Question 1. (14) आलू की फसल तैयार होती है -
(क) 120-125 दिन में
(ख) 230-235 दिन में
(ग) 215-220 दिन में
(घ) उपर्युक्त सभी ठीक है।
Answer: (क) 120-125 दिन में
In simple words: आलू की फसल को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 120 से 125 दिन लगते हैं, जिसके बाद उसे निकाला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न फसलों के पकने की अवधि को जानना फसल चक्र योजना बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. (15) गेहूं के अच्छे उत्पादन हेतु भूमि की आवश्यकता होती है -
(क) दोमट मिट्टी
(ख) बलुई दोमट मिट्टी
(ग) चिकनी मिट्टी
(घ) इसमें से कोई नहीं
Answer: (क) दोमट मिट्टी
In simple words: गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है, क्योंकि इसमें पानी की निकासी और पोषक तत्वों को रोकने की अच्छी क्षमता होती है।

🎯 Exam Tip: गेहूं को उगाने के लिए अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है।

 

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
Answer:
1. धान खरीफ की फसल है। यह गर्मी और बारिश के मौसम में उगाई जाने वाली एक मुख्य फसल है।
2. रोपाई के लिए धान की उपयुक्त प्रजाति नरेन्द्र-97 अच्छी है, जो उच्च उपज देती है।
3. सुगंधित धान की उपयुक्त प्रजाति टा-3 है, जो अपनी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है।
4. एक हेक्टेयर नर्सरी में जिंक सल्फेट 5 किग्रा प्रयोग किया जाता है, ताकि पौधों में जिंक की कमी न हो।
5. धान की रोपाई 3, 4 सेमी गहराई पर करते हैं, ताकि पौधे ठीक से जड़ पकड़ सकें।
6. देशी मक्का की बीज दर 18 से 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर है, जो बुवाई के लिए आवश्यक मात्रा है।
7. सोयाबीन में 40 से 42% प्रोटीन पाई जाती है, जो इसे एक पौष्टिक फसल बनाती है।
8. गेहूं की फसल में 5-6 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है, विशेषकर महत्वपूर्ण विकास चरणों में।
9. मटर की बुवाई 3-4 सेमी गहराई पर की जाती है, ताकि बीज सही से अंकुरित हो सकें।
10. अरहर की बुवाई 7.5 सेमी गहराई पर की जाती है, जो अच्छी जड़ विकास के लिए उपयुक्त है।
In simple words: ये वाक्य फसलों और खेती से जुड़ी जरूरी बातें बताते हैं, जैसे कि फसल का प्रकार, सही बीज, कितना खाद डालना है, और कितनी गहराई पर बीज बोना है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, आपको फसल के बारे में विशिष्ट तथ्यों और आंकड़ों को सटीक रूप से याद रखना होगा।

 

Question 3. 1. धान की खेती केवल रोपाई विधि द्वारा की जाती है।
Answer: (X)
In simple words: धान को सीधे खेत में बोया भी जा सकता है, न कि सिर्फ छोटे पौधों को रोपकर ही उगाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि खेती के लिए कई विधियां होती हैं और कभी-कभी एक से अधिक तरीके भी अपनाए जा सकते हैं।

 

Question 3. 2. धान की नर्सरी में खैरा रोग से बचाव हेतु जिंक का प्रयोग आवश्यक है।
Answer: (✓)
In simple words: धान के छोटे पौधों को खैरा रोग से बचाने के लिए जिंक का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह रोग जिंक की कमी से होता है।

🎯 Exam Tip: खैरा रोग धान में जिंक की कमी से होता है, इसलिए जिंक सल्फेट का प्रयोग इसे रोकने के लिए एक प्रभावी उपाय है।

 

Question 3. 3. एक हेक्टेयर धान की नर्सरी से 15 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई की जा सकती है।
Answer: (✓)
In simple words: एक हेक्टेयर में तैयार किए गए धान के छोटे पौधे 15 हेक्टेयर बड़े खेत में रोपने के लिए काफी होते हैं, जिससे बड़े क्षेत्र में खेती करना आसान होता है।

🎯 Exam Tip: नर्सरी क्षेत्र और रोपाई क्षेत्र का अनुपात खेती की योजना बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. 4. देशी मक्का का बीज दर संकुल मक्का से कम होता है।
Answer: (✓)
In simple words: देशी मक्के को बोने के लिए संकुल मक्के की तुलना में कम बीज की जरूरत होती है, क्योंकि उनकी रोपण घनत्व अलग-अलग होती है।

🎯 Exam Tip: बीज दर फसल के प्रकार, किस्म और बुवाई की विधि के आधार पर अलग-अलग होती है।

 

Question 3. 5. मक्का की खेती के लिए उपयुक्त भूमि दोमट होती है।
Answer: (✓)
In simple words: मक्के को उगाने के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, क्योंकि इसमें पानी और हवा का सही संतुलन होता है।

🎯 Exam Tip: दोमट मिट्टी में रेत, गाद और चिकनी मिट्टी का सही मिश्रण होता है, जो पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।

 

Question 3. 6. मक्का तीनों ऋतुओं में उगायी जाती है।
Answer: (✓)
In simple words: मक्के की फसल को खरीफ, रबी और जायद, इन तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है, जिससे यह पूरे साल उपलब्ध रहती है।

🎯 Exam Tip: मक्का एक बहुउपयोगी फसल है जो अपनी अनुकूलनशीलता के कारण विभिन्न मौसमों में उगाई जा सकती है।

 

Question 3. 7. संकर एवं संकुल मक्का के लिए 80 किग्रा नाइट्रोजन का प्रयोग किया जाता है।
Answer: (X)
In simple words: संकर और संकुल मक्के के लिए 80 किलोग्राम नाइट्रोजन का प्रयोग पर्याप्त नहीं होता; आम तौर पर अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: उर्वरकों की सही मात्रा का उपयोग फसल की अच्छी वृद्धि और अधिकतम उपज के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. 8. मक्का की फसल को गिरने से बचाने के लिए मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है।
Answer: (✓)
In simple words: तेज हवा और बारिश से मक्के के पौधों को गिरने से रोकने के लिए उनके तनों के पास मिट्टी चढ़ाना जरूरी होता है, जिससे उन्हें सहारा मिलता है।

🎯 Exam Tip: मिट्टी चढ़ाना पौधों की जड़ों को मजबूत बनाता है और उन्हें गिरने से बचाता है, खासकर ऊँची फसलों के लिए।

 

Question 3. 9. अलंकार उड़द की प्रजाति है।
Answer: (X)
In simple words: 'अलंकार' उड़द की किस्म नहीं है; यह किसी और फसल या वस्तु का नाम हो सकता है।

🎯 Exam Tip: फसलों की विभिन्न किस्मों और उनके सही नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. 10. सरसों से तेल निकाला जाता है।
Answer: (✓)
In simple words: सरसों के दानों को पीसकर तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग खाना बनाने और अन्य कामों में होता है।

🎯 Exam Tip: सरसों एक प्रमुख तिलहनी फसल है जो अपने तेल के लिए उगाई जाती है।

 

Question 3. 11. उड़द की फसल में राइजोबियम कल्चर का प्रयोग करना चाहिए।
Answer: (✓)
In simple words: उड़द जैसी दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर का उपयोग करने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे पौधों को फायदा होता है।

🎯 Exam Tip: राइजोबियम कल्चर एक जैविक उर्वरक है जो पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में मदद करता है।

 

Question 3. 12. गेहूं में प्रोटीन नहीं पाया जाता है।
Answer: (X)
In simple words: गेहूं में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो इसे एक पौष्टिक अनाज बनाता है, खासकर ग्लूटेन के रूप में।

🎯 Exam Tip: गेहूं कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो दुनिया भर में मुख्य भोजन के रूप में उपयोग होता है।

 

Question 4. निम्नलिखित में स्तम्भ 'क' को स्तम्भ 'ख' से सुमेल कीजिए – (सुमेल करके)
Answer:
(1) नर्सरी में कीड़े से बचाव हेतु - कीटनाशी का प्रयोग
(2) नर्सरी में बीमारी से बचाव हेतु - कवकनाशी का प्रयोग
(3) खरपतवार नियन्त्रण हेतु - पेन्डा मेथिलीन
(4) खैरा रोग हेतु - जिंक सल्फेट
(5) टिड्डा - कीट
(6) झुलसा - बीमारी
(7) गंगा-11 - प्रजाति
(8) एट्राजिन - खरपतवार नाशक दवा
(9) गेहूँ - वैशाली
(10) गेहूँसा - खरपतवार
(11) किट्ट या रस्ट - बीमारी
In simple words: इस प्रश्न में, हमें खेती से जुड़े अलग-अलग शब्दों को उनके सही वर्णन या उपयोग से मिलाना था। जैसे, कीड़ों के लिए कीटनाशक और बीमारियों के लिए कवकनाशी का उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: सुमेलित करने वाले प्रश्नों में, प्रत्येक शब्द या वाक्यांश को उसके सबसे सटीक वर्णन या उदाहरण से मिलाना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 5. (1) सिंचित दशा में धान की फसल में नाइट्रोजन की मात्रा बताइए।
Answer: सिंचित जमीन में धान की खेती के लिए 120 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से डालना चाहिए। नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि और पत्तों के विकास के लिए बहुत जरूरी है।
In simple words: जब धान को पानी देकर उगाया जाता है, तो उसे 120 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है।

🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन की सही मात्रा का उपयोग पौधों की अच्छी वृद्धि और बेहतर उपज सुनिश्चित करता है।

 

Question 5. (2) सुगन्धित थान की दो प्रजातियों के नाम लिखिए।
Answer: सुगंधित धान की दो मुख्य प्रजातियाँ हैं: टा-3 और बासमती-370। ये किस्में अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए जानी जाती हैं, जिससे इन्हें खास पसंद किया जाता है।
In simple words: खुशबूदार धान की दो किस्में टा-3 और बासमती-370 हैं।

🎯 Exam Tip: सुगंधित धान की कुछ प्रमुख किस्मों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है।

 

Question 5. (3) धान की रोपाई के समय नाइट्रोजन की कितनी मात्रा प्रयोग करनी चाहिए।
Answer: धान की रोपाई करते समय, प्रति हेक्टेयर 60 किलोग्राम नाइट्रोजन का उपयोग करना चाहिए। यह मात्रा पौधों के शुरुआती विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है।
In simple words: धान लगाते समय हर हेक्टेयर में 60 किलोग्राम नाइट्रोजन डालना चाहिए।

🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन को कई बार में डालना चाहिए ताकि पौधों को लगातार पोषण मिलता रहे।

 

Question 5. (4) धान की उन्नतशील फसल के लिए फॉस्फोरस की मात्रा बताइए ।
Answer: अच्छी पैदावार वाले धान की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 60 किलोग्राम फॉस्फोरस की आवश्यकता होती है। फॉस्फोरस पौधों में जड़ों के विकास और ऊर्जा के सही उपयोग में मदद करता है।
In simple words: अच्छी धान की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 60 किलोग्राम फॉस्फोरस चाहिए।

🎯 Exam Tip: फॉस्फोरस जड़ों के विकास और फूलों और फलों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 5. (5) महीन थान की नर्सरी के लिए बीज की प्रति हेक्टेयर मात्रा बताइए।
Answer: महीन दाने वाले धान की नर्सरी तैयार करने के लिए प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। यह बीज की मात्रा नर्सरी में पर्याप्त पौधों के लिए जरूरी है।
In simple words: महीन धान की नर्सरी के लिए एक हेक्टेयर में 30 किलोग्राम बीज डालते हैं।

🎯 Exam Tip: बीज की मात्रा किस्म और मिट्टी के प्रकार के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है।

 

Question 5. (6) एक हेक्टेयर धान की नर्सरी से कितने हेक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई की जाती है?
Answer: एक हेक्टेयर धान की नर्सरी से तैयार किए गए पौधे 15 हेक्टेयर बड़े खेत में रोपने के लिए काफी होते हैं। इसका मतलब है कि नर्सरी का छोटा क्षेत्र बड़े क्षेत्र की रोपाई के लिए पर्याप्त पौधे उपलब्ध करा सकता है।
In simple words: एक हेक्टेयर नर्सरी से 15 हेक्टेयर जमीन में धान की रोपाई की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: नर्सरी तैयार करने से मुख्य खेत में रोपाई के लिए पर्याप्त और स्वस्थ पौधे सुनिश्चित होते हैं।

 

Question 5. (7) नर्सरी में खैरा रोग से नियन्त्रण हेतु कितनी जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर प्रयोग की जाती है?
Answer: धान की नर्सरी में खैरा रोग को रोकने के लिए प्रति हेक्टेयर 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट का प्रयोग किया जाता है। जिंक सल्फेट जिंक की कमी को पूरा करता है, जो इस रोग का मुख्य कारण है।
In simple words: खैरा रोग को रोकने के लिए नर्सरी में 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर डाला जाता है।

🎯 Exam Tip: जिंक की कमी से पौधों की वृद्धि रुक जाती है और पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, इसलिए इसका उपयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. (8) धान की रोपाई के समय एक स्थान पर कितने पौधे लगाए जाते हैं?
Answer: धान की रोपाई करते समय, प्रत्येक जगह पर आमतौर पर 2 से 3 छोटे पौधे लगाए जाते हैं। यह पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने और अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने में मदद करता है।
In simple words: धान रोपते समय एक जगह पर 2 या 3 पौधे लगाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: सही संख्या में पौधे लगाने से पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और अधिक प्रतिस्पर्धा से बचा जा सकता है।

 

Question 5. (9) संकर मक्का की दो प्रजातियों का माम बताइए ।
Answer: संकर मक्का की दो प्रजातियाँ 'गंगा-2' और 'गंगा-11' हैं। ये किस्में अपनी उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती हैं, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है।
In simple words: गंगा-2 और गंगा-11 संकर मक्के की दो किस्में हैं।

🎯 Exam Tip: संकर किस्में अक्सर बेहतर उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं।

 

Question 5. (10) देशी मक्का की बुवाई के लिए बीज की प्रति हेक्टेयर मात्रा बताइए ।
Answer: देशी मक्का बोने के लिए प्रति हेक्टेयर 18 से 20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। यह मात्रा सही पौधे घनत्व बनाए रखने के लिए उपयुक्त है।
In simple words: देशी मक्का बोने के लिए हर हेक्टेयर में 18-20 किलोग्राम बीज लगता है।

🎯 Exam Tip: बीज की सही मात्रा का उपयोग करने से पौधे समान रूप से उगते हैं और अच्छी उपज मिलती है।

 

Question 5. (11) संकर एवं संकुल प्रजातियों के लिए बीज की प्रति हेक्टेयर कितनी मात्रा प्रयोग की जाती है।
Answer: संकर और संकुल दोनों प्रकार की मक्का प्रजातियों के लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम बीज का उपयोग किया जाता है। यह बीज दर इन किस्मों की अधिकतम उपज क्षमता को प्राप्त करने में मदद करती है।
In simple words: संकर और संकुल मक्के के लिए 20-25 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर चाहिए।

🎯 Exam Tip: विभिन्न किस्मों के लिए बीज दर में अंतर होता है, इसलिए सही मात्रा का चुनाव महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. (12) मक्के की बुवाई कितनी गहराई पर करते हैं?
Answer: मक्के के बीज की बुवाई लगभग 5 सेंटीमीटर की गहराई पर की जाती है। इस गहराई पर बीज को अंकुरण के लिए उचित नमी और मिट्टी का संपर्क मिलता है।
In simple words: मक्के को जमीन में 5 सेंटीमीटर गहरा बोया जाता है।

🎯 Exam Tip: बीज की सही गहराई पर बुवाई करने से अंकुरण दर अच्छी रहती है और पौधे स्वस्थ उगते हैं।

 

Question 5. (13) मक्के के खेत में दीमक के नियन्त्रण हेतु किस कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है?
Answer: मक्के के खेत में दीमक को नियंत्रित करने के लिए 20 से 25 किलोग्राम रेत के साथ 2% मिथाइल पैराथियान को मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। यह दीमक को पौधों को नुकसान पहुँचाने से रोकता है।
In simple words: दीमक को रोकने के लिए रेत में 2% मिथाइल पैराथियान मिलाकर मक्के के खेत में छिड़काव करते हैं।

🎯 Exam Tip: कीट नियंत्रण के लिए सही कीटनाशक और उसकी सही मात्रा का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. (14) गेहूं की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन की कितनी मात्रा प्रयोग करनी चाहिए?
Answer: गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन का उपयोग करना चाहिए। नाइट्रोजन पौधों को हरा-भरा रखने और उनकी वृद्धि में तेजी लाने में मदद करता है।
In simple words: अच्छी गेहूं की फसल के लिए हर हेक्टेयर में 120 किलोग्राम नाइट्रोजन डालना चाहिए।

🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन को फसल के महत्वपूर्ण विकास चरणों में विभाजित करके डालना सबसे प्रभावी होता है।

 

Question 5. (15) गेहूं की फसल के लिए नाइट्रोजन फॉस्फोरस एवं पोटाश की मात्रा प्रति हेक्टेयर बताइए ।
Answer: गेहूं की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता होती है। ये तीनों पोषक तत्व पौधों के संतुलित विकास और अच्छी उपज के लिए जरूरी हैं।
In simple words: गेहूं को 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर चाहिए।

🎯 Exam Tip: पौधों के समुचित विकास के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का सही संतुलन महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. (16) उड़द को बुवाई से पूर्व किस रसायन से उपचारित करते हैं?
Answer: उड़द के बीजों को बोने से पहले 'राइजोबियम कल्चर' जैसे रसायन से उपचारित किया जाता है। यह उपचार अच्छी पैदावार और पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए किया जाता है, क्योंकि राइजोबियम मिट्टी में नाइट्रोजन को स्थिर करता है।
In simple words: उड़द बोने से पहले राइजोबियम कल्चर से बीजों का इलाज किया जाता है ताकि अच्छी फसल हो।

🎯 Exam Tip: राइजोबियम कल्चर एक जैव-उर्वरक है जो दलहनी फसलों की नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता को बढ़ाता है।

 

Question 5. (17) मूंग की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर कितने किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है?
Answer: मूंग की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 15 से 20 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। यह मात्रा सही पौधे घनत्व और अच्छी उपज के लिए उपयुक्त है।
In simple words: मूंग बोने के लिए हर हेक्टेयर में 15-20 किलोग्राम बीज डाला जाता है।

🎯 Exam Tip: बीज दर मिट्टी के प्रकार, बुवाई के समय और किस्म के आधार पर बदल सकती है।

 

Question 5. (18) सरसो की बुवाई का उपयुक्त समय बताइये ।
Answer: सरसों की बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय सितंबर से अक्टूबर का महीना होता है। यह रबी की फसल है और इसे ठंडे मौसम में उगाया जाता है।
In simple words: सरसों को सितंबर से अक्टूबर के बीच बोना सबसे अच्छा होता है।

🎯 Exam Tip: सही समय पर बुवाई करने से फसल को अनुकूल मौसम मिलता है और कीटों और बीमारियों का खतरा कम होता है।

 

Question 6. धान की नर्सरी तैयार करने की विधि बताइए ।
Answer: धान की नर्सरी तैयार करने के लिए, विभिन्न प्रकार के धान के लिए अलग-अलग बीज की मात्रा की आवश्यकता होती है: महीन धान के लिए 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, मध्यम धान के लिए 35 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, और मोटे धान के लिए 40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है। एक हेक्टेयर की नर्सरी से 15 हेक्टेयर बड़े खेत में रोपाई की जा सकती है। नर्सरी में पौधों के अच्छे विकास के लिए 100 किलोग्राम नाइट्रोजन और 50 किलोग्राम फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से डालना चाहिए। खैरा रोग को नियंत्रित करने के लिए 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 2% यूरिया का घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। साथ ही, नर्सरी में कीड़ों से बचाव के लिए 1.5 लीटर क्लोरोपाइरीफास 20 ईसी (इमल्शन कंसंट्रेट) को 800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। यह नर्सरी के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करता है।
In simple words: धान की नर्सरी बनाने के लिए, धान के प्रकार के हिसाब से बीज बोते हैं। पौधों को अच्छे से बढ़ने के लिए खाद और पोषक तत्व दिए जाते हैं। खैरा रोग से बचाने के लिए जिंक सल्फेट और यूरिया का छिड़काव किया जाता है, और कीड़ों से बचाने के लिए क्लोरोपाइरीफास का उपयोग करते हैं।

🎯 Exam Tip: नर्सरी में स्वस्थ पौधों का विकास मुख्य खेत में अच्छी फसल के लिए आधार तैयार करता है।

 

Question 7. धान की रोपित फसल में फसल सुरक्षा के क्या उपाय किए जाते हैं?
Answer: धान की फसल को रोपाई से लेकर कटाई तक कई तरह के कीट और बीमारियों से बचाना होता है। प्रमुख कीटों में दीमक, गंधी बग, सैनिक कीट, हरा फुदका, पत्ती लपेट कीट और तना छेदक शामिल हैं। इनसे बचाव के लिए: - 5% मैलाथियान धूल का 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर छिड़काव किया जाता है। - सैनिक कीटों को नियंत्रित करने के लिए इंडोसल्फान 35 ईसी का छिड़काव किया जाता है। - जिंक की कमी से होने वाले खैरा रोग के लिए 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 2.5 किलोग्राम बुझा हुआ चूना या 20 किलोग्राम यूरिया को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। - झुलसा रोग के इलाज के लिए 15 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और 500 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर 2 से 3 बार छिड़काव करना चाहिए। ये उपाय फसल को स्वस्थ रखने और अच्छी पैदावार प्राप्त करने में मदद करते हैं।
In simple words: धान की फसल को दीमक, कीड़े और बीमारियों से बचाने के लिए मैलाथियान, इंडोसल्फान जैसे कीटनाशक का छिड़काव करते हैं। खैरा रोग के लिए जिंक सल्फेट और झुलसा रोग के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का इस्तेमाल करते हैं।

🎯 Exam Tip: फसल सुरक्षा में कीटों, बीमारियों और पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए सही समय पर सही उपाय करना शामिल है।

 

Question 8. धान की फसल में खाद एवं उर्वरक की मात्रा प्रति हेक्टेयर बताइए तथा देने की विधि भी लिखिए।
Answer: धान की फसल में खाद और उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की जांच के आधार पर करना चाहिए। **सिंचित धान की फसल के लिए:** - प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश डालना चाहिए। - नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के एक या दो दिन बाद खेत में डालनी चाहिए। - बची हुई नाइट्रोजन की मात्रा कल्ले निकलते समय और बालियाँ निकलने से पहले छिड़कनी चाहिए। **धान की सीधी बुवाई के लिए:** - प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फॉस्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश देना चाहिए। - नाइट्रोजन का एक चौथाई हिस्सा और फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बीज के नीचे कुंडों में डालनी चाहिए। - नाइट्रोजन का दो चौथाई हिस्सा कल्ले निकलते समय और बाकी बचा हुआ हिस्सा बाली बनने से पहले डालना चाहिए। उर्वरकों का सही और समय पर प्रयोग पौधों की अच्छी वृद्धि और अधिक उपज सुनिश्चित करता है।
In simple words: धान की फसल में खाद और उर्वरक मिट्टी की जरूरत के हिसाब से डालते हैं। सिंचित और सीधी बुवाई वाली फसल के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की अलग-अलग मात्रा बताई गई है, और इन्हें कब-कब डालना है, यह भी बताया गया है।

🎯 Exam Tip: उर्वरकों की मात्रा और देने की विधि फसल की किस्म, मिट्टी के प्रकार और जलवायु पर निर्भर करती है।

 

Question 9. मक्का में लगने वाले रोग एवं उनसे बचाव के उपाय लिखिए।
Answer: मक्के की फसल में मुख्य रूप से 'झुलसा रोग' लगता है। इस रोग के इलाज के लिए 2 से 2.5 किलोग्राम इंडोफिल एम-45 को 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर 2 से 3 बार छिड़काव करना चाहिए। यह उपाय झुलसा रोग के प्रभाव को कम करता है। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में बहुत अधिक बारिश होती है, वहाँ 'तना सड़न रोग' भी लग सकता है। इस रोग के उपचार के लिए 15 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन को 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। समय पर पहचान और उपचार से फसल को बचाया जा सकता है।
In simple words: मक्के में झुलसा रोग और तना सड़न रोग लगते हैं। झुलसा रोग के लिए इंडोफिल एम-45 का छिड़काव करते हैं, और तना सड़न रोग के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का छिड़काव करते हैं।

🎯 Exam Tip: रोगों की पहचान करना और उनका समय पर उपचार करना फसल के नुकसान को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. मक्का की फसल में खाद एवं उर्वरक की मात्रा प्रति हेक्टेयर एवं प्रयोग की विधि लिखिए ।
Answer: इस प्रश्न के उत्तर के लिए, विद्यार्थी प्रश्न 9. का उत्तर देखें। यह मार्गदर्शन छात्रों को संबंधित जानकारी के लिए निर्देश देता है।
In simple words: इस सवाल का जवाब जानने के लिए, प्रश्न 9 में दी गई जानकारी को देखें।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में, यदि किसी प्रश्न का उत्तर दूसरे प्रश्न में दिया गया हो, तो उस संबंधित प्रश्न का उत्तर ध्यान से पढ़ें।

 

Question 11. सोयाबीन से कौन-कौन से व्यंजन तैयार किए जाते हैं?
Answer: सोयाबीन का उपयोग करके कई पौष्टिक पेय और खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। इनमें दूध, दही, मगौड़ी और बड़ियाँ प्रमुख हैं। सोयाबीन प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत होने के कारण इसे भोजन में खूब इस्तेमाल किया जाता है।
In simple words: सोयाबीन से दूध, दही, मगौड़ी और बड़ियाँ जैसे खाने-पीने की चीजें बनती हैं।

🎯 Exam Tip: सोयाबीन एक बहुपयोगी फसल है जो प्रोटीन से भरपूर होती है और विभिन्न आहारों में शामिल की जा सकती है।

 

Question 12. सोयाबीन की फसल में खाद एवं उर्वरक की आवश्यकता एवं प्रयोग करने की विधि लिखिए ।
Answer: सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर 15-20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40-60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 30-40 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता होती है। उर्वरक की पूरी मात्रा अंतिम जुताई के समय हल के पीछे कुंडों में 6-7 सेंटीमीटर गहराई पर डालनी चाहिए। यह पौधों के स्वस्थ विकास और फलियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, और गहरे स्तर पर उर्वरक देने से जड़ें पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से अवशोषित कर पाती हैं।
In simple words: अच्छी सोयाबीन की फसल के लिए 15-20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40-60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 30-40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डाला जाता है। खाद को हल के पीछे 6-7 सेंटीमीटर गहरा बोते समय डालते हैं।

🎯 Exam Tip: सोयाबीन एक दलहनी फसल है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की आवश्यकता अन्य फसलों की तुलना में कम होती है, क्योंकि यह खुद नाइट्रोजन स्थिर करती है।

 

Question 13. गेहूं की खेती के लिए खाद एवं उर्वरक की मात्रा तथा प्रयोग करने की विधि बताइए ।
Answer: गेहूं की अच्छी फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करना चाहिए। **खाद डालने की विधि:** - नाइट्रोजन की आधी मात्रा और बाकी फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बीज के साथ कुंडों में 5 सेंटीमीटर की गहराई पर देनी चाहिए। यह शुरुआती विकास के लिए महत्वपूर्ण है। - बची हुई नाइट्रोजन की मात्रा को दो हिस्सों में बांटकर देना चाहिए: पहला हिस्सा कल्ले निकलते समय और दूसरा हिस्सा बालियाँ बनते समय देना चाहिए। - नाइट्रोजन को शाम के समय खड़ी फसल में डालना बेहतर होता है। - सिंचाई के बाद, जब खेत में पैर का हल्का निशान बनने लगे, तब यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। यह पौधों को नाइट्रोजन को बेहतर ढंग से अवशोषित करने में मदद करता है।
In simple words: गेहूं के लिए 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालते हैं। आधी नाइट्रोजन और बाकी खाद बीज के साथ बोते समय, 5 सेमी गहरा डालते हैं। बची हुई नाइट्रोजन कल्ले निकलने और बालियाँ बनने पर डालते हैं। सिंचाई के बाद यूरिया भी डालते हैं।

🎯 Exam Tip: गेहूं में उर्वरकों का विभाजन करके उपयोग करने से पोषक तत्वों का कुशल उपयोग होता है और फसल की उपज बढ़ती है।

 

Question 14. मटर की सिंचित असिंचित क्षेत्र में खेती हेतु उर्वरक की मात्रा एवं प्रयोग विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: मटर की खेती में कम्पोस्ट खाद डालने के बाद, प्रति हेक्टेयर 25-30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50-60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40-50 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करना चाहिए। ये पोषक तत्व मटर के पौधों की वृद्धि और फलियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, चाहे फसल सिंचित क्षेत्र में हो या असिंचित क्षेत्र में। फॉस्फोरस विशेष रूप से मटर की जड़ों में गांठों के विकास में मदद करता है, जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए आवश्यक हैं।
In simple words: मटर की फसल में कम्पोस्ट खाद डालने के बाद, 25-30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50-60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40-50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए।

🎯 Exam Tip: मटर एक दलहनी फसल होने के कारण स्वयं नाइट्रोजन बनाती है, इसलिए इसे कम नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है।

 

Question 15. मटर की फसल में लगने वाले महत्त्वपूर्ण कीड़ों एवं बचाव के उपाय बताइए।
Answer: मटर की फसल में कई महत्वपूर्ण कीट लगते हैं। 'चूँड़ियों' (एफिड्स) को नियंत्रित करने के लिए 2 किलोग्राम मैलाथियान 50% घुलनशील चूर्ण को 800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। वैकल्पिक रूप से, मैलाथियान 50 ईसी की 1 लीटर दवा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव किया जा सकता है। 'फली छेदक' कीटों के अलावा, 'पत्ती में सुरंग बनाने वाले कीट' (लीफ माइनर्स) भी मटर को नुकसान पहुँचाते हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए मेटासिस्टक्स 25 ईसी की 1 लीटर दवा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। ये उपाय फसल को कीटों से बचाने में मदद करते हैं।
In simple words: मटर में चूँड़ियाँ (एफिड्स), फली छेदक और पत्ती में सुरंग बनाने वाले कीट लगते हैं। इन्हें रोकने के लिए मैलाथियान और मेटासिस्टक्स जैसी दवाएं पानी में घोलकर छिड़कते हैं।

🎯 Exam Tip: कीटों का सही पहचान और उनके जीवन चक्र को समझना प्रभावी कीट नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. गेहूं की फसल में सिंचाई प्रबन्धन का वर्णन कीजिए ।
Answer: गेहूं की फसल को आमतौर पर 5-6 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। - **पहली सिंचाई:** बुवाई के 20-25 दिन बाद की जाती है, जो पौधों के शुरुआती विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। - इसके बाद, आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए, जब मिट्टी सूखी महसूस हो। - **दूधिया अवस्था:** दाना बनने से पहले, जब अनाज दूधिया अवस्था में होता है, तब एक सिंचाई करनी चाहिए। - **दाना पकते समय:** अंत में, दाना पकते समय एक हल्की सिंचाई करनी चाहिए ताकि दाना ठीक से भर सके। सही समय पर और सही मात्रा में सिंचाई करने से गेहूं की फसल की पैदावार अच्छी होती है।
In simple words: गेहूं में 5-6 बार सिंचाई करनी पड़ती है। पहली सिंचाई 20-25 दिन बाद, फिर जरूरत पड़ने पर। दाना बनने से पहले और दाना पकते समय भी सिंचाई करते हैं।

🎯 Exam Tip: गेहूं में सिंचाई की महत्वपूर्ण अवस्थाएँ हैं: ताज जड़ बनने की अवस्था, कल्ले निकलने की अवस्था, फूल आने की अवस्था और दाना भरने की अवस्था।

प्रोजेक्ट कार्य

नोट – विद्यार्थी स्वयं करें ।

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