UP Board Solutions Class 4 Environmental Studies Chapter 3 Ganga Yamuna ka maidan

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Chapter Solutions: Class 4 Environmental Studies (UP Board) - Chapter 3 गंगा यमुना का मैदान

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Class 4 Environmental Studies Chapter 3 गंगा यमुना का मैदान UP Board Solutions PDF

नक्शे में देखकर बताओ-

 

Question 1. उत्तर की ओर से कौन-सी नदियाँ बहकर इस मैदान में आती हैं?
Answer: उत्तर दिशा की ओर से गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती, शारदा और राप्ती जैसी नदियाँ इस मैदानी क्षेत्र में आती हैं। ये नदियाँ हिमालय से निकलकर मैदान को उपजाऊ बनाती हैं।
In simple words: गंगा, यमुना और घाघरा जैसी नदियाँ उत्तर दिशा से इस मैदान में आती हैं।

🎯 Exam Tip: नदियों के नाम याद रखने के लिए उन्हें मानचित्र पर देखकर दोहराना मददगार होता है।

 

Question. दक्षिण की ओर से कौन-सी नदियाँ बहकर इस मैदान में आती हैं?
Answer: दक्षिण दिशा की ओर से चंबल, बेतवा और केन जैसी नदियाँ बहकर इस मैदानी क्षेत्र में आती हैं। ये नदियाँ दक्षिण के पठारी इलाकों से आती हैं।
In simple words: चंबल, बेतवा और केन नदियाँ दक्षिण से इस मैदान में आती हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तर और दक्षिण से आने वाली नदियों के नामों में अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question. नीचे मैदानी भाग के कुछ पेड़ों के नाम दिए गए हैं। तुम इनमें कितने नाम और जोड़ सकते हो?
Answer: मैदानी भाग में बबूल, बेर, आम, जामुन, नीम, पीपल, बरगद, अमरूद, शीशम, महुआ, पलाश और साल जैसे पेड़ पाए जाते हैं। ये पेड़ इस क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल होते हैं।
In simple words: इस मैदान में बबूल, बेर, आम, जामुन, नीम, पीपल, बरगद और अमरूद जैसे कई पेड़ होते हैं।

🎯 Exam Tip: पेड़ों के नाम याद करते समय, अपने आसपास के सामान्य पेड़ों के नामों को भी जोड़ें।

गंगा-यमुना का मैदान अभ्यास

 

Question 1. मैदानी भाग की विशेषताएँ बताओ।
Answer: मैदानी भाग की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
(i) यह मैदान समतल और उपजाऊ है, क्योंकि यह नदियों द्वारा लाई गई मटियार, दोमट और रेतीली मिट्टी से बना है।
(ii) इसमें सभी नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं, जो इसके ढलान को दर्शाती हैं।
(iii) मैदानी भाग में बबूल, बेर, आम, जामुन, नीम, शीशम जैसे पेड़ पाए जाते हैं।
(iv) यहाँ पर्याप्त वर्षा होती है, लेकिन जाड़ों में अधिक ठंड और गर्मियों में अधिक गर्मी पड़ती है। यह क्षेत्र कृषि के लिए बहुत अच्छा है।
(v) यहाँ साल, साखू, शीशम और पलाश जैसे पतझड़ वन कम संख्या में मिलते हैं।
In simple words: मैदानी भाग समतल, उपजाऊ है और यहाँ बहुत से पेड़ पाए जाते हैं। यहाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ हैं और खूब वर्षा होती है।

🎯 Exam Tip: मैदानी भाग की विशेषताओं को याद रखने के लिए उन्हें मिट्टी, जलवायु, नदियाँ और पेड़-पौधों के आधार पर बाँट कर याद करें।

 

Question 2. मैदानी भाग के वृक्षों एवं पशुओं की सूची अलग-अलग बनाओ।
Answer:
मैदानी भाग के वृक्ष:
बबूल, बेर, आम, जामुन, शीशम, अमरूद, नीम, पीपल, बरगद। ये पेड़ इस क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल होते हैं।
मैदानी भाग के पशु:
गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा, खच्चर, ऊँट, हाथी, भेड़िया, तेंदुआ, सूअर, हिरन, नीलगाय, लोमड़ी। यहाँ पालतू और जंगली दोनों तरह के जानवर पाए जाते हैं।
In simple words: मैदानी भाग में आम, नीम जैसे पेड़ और गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे जानवर मिलते हैं।

🎯 Exam Tip: वृक्षों और पशुओं की सूची बनाते समय, पालतू और जंगली जानवरों को अलग-अलग श्रेणी में सोचें।

 

Question 3. मैदानी भाग में पैदावार अधिक होने के क्या कारण हैं?
Answer: मैदानी भाग में पैदावार अधिक होने के कई कारण हैं:
(i) यहाँ की जमीन उपजाऊ दोमट मिट्टी से बनी है, जो फसलों के लिए बहुत अच्छी होती है।
(ii) इस क्षेत्र में सिंचाई की अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जैसे नलकूप और नहरों से पर्याप्त सिंचाई होती है।
(iii) कृषि में अच्छे खाद/उर्वरक, उन्नत बीज और आधुनिक तकनीकी ज्ञान का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्पादन बढ़ता है।
(iv) मैदानी भाग के लोग बहुत मेहनती हैं और उत्तर प्रदेश के लोगों ने अपने परिश्रम से कृषि उत्पादन को बढ़ाया है। इन सभी कारणों से यह क्षेत्र कृषि में बहुत आगे है।
In simple words: मैदानी भाग में अच्छी मिट्टी, सिंचाई, खाद और मेहनती लोग होने के कारण पैदावार अधिक होती है।

🎯 Exam Tip: अधिक पैदावार के कारणों को मिट्टी, पानी, बीज/खाद और मानवीय प्रयास जैसे मुख्य बिंदुओं में याद रखें।

 

Question 4. (क) समतल मैदान के प्रमुख सिंचाई के साधनों के नाम
Answer: समतल मैदान के प्रमुख सिंचाई के साधन नहरें और नलकूप हैं। ये दोनों साधन खेतों तक पानी पहुँचाने में बहुत मदद करते हैं।
In simple words: नहरें और नलकूप मैदानी इलाकों में पानी देने के मुख्य तरीके हैं।

🎯 Exam Tip: सिंचाई के साधनों में नहरें और नलकूप सबसे सामान्य हैं, क्योंकि वे बड़े क्षेत्रों को कवर करते हैं।

 

Question 4. (ख) मैदानी भाग की फसलों के नाम
Answer: मैदानी भाग की मुख्य फसलों में गेहूँ, धान (चावल), गन्ना, तिल, दालें, मक्का, ज्वार, बाजरा, खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरा और विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ शामिल हैं। इस उपजाऊ भूमि पर कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं।
In simple words: मैदानी भाग में गेहूँ, धान, गन्ना, दालें और कई तरह की सब्जियाँ उगती हैं।

🎯 Exam Tip: फसलों के नाम याद करते समय, रबी और खरीफ दोनों मौसमों की फसलों के बारे में सोचें।

 

Question 4. (ग) मैदानी भाग में बोली जाने वाली बोलियाँ।
Answer: मैदानी भाग में मुख्य रूप से खड़ी बोली, ब्रज भाषा, अवधी और भोजपुरी जैसी बोलियाँ बोली जाती हैं। ये बोलियाँ इस क्षेत्र की संस्कृति और लोकजीवन का हिस्सा हैं।
In simple words: मैदानी भाग में खड़ी बोली, ब्रज भाषा, अवधी और भोजपुरी बोली जाती है।

🎯 Exam Tip: बोलियों के नाम याद करते समय, यह भी ध्यान रखें कि कौन सी बोली किस क्षेत्र में अधिक प्रचलित है।

 

Question 5. खाली स्थानों को भरकर पूरा करो (पूरा करके)
Answer: यह मैदान पश्चिम की ओर ऊँचा तथा पूर्व की ओर नीचा है। इसका ढाल दक्षिण-पूर्व की ओर होने के कारण सभी नदियाँ प्रदेश की पूर्वी दिशा की ओर बहती हैं। इस क्षेत्र में मटियार, दोमट व रेतीली मिट्टी भी पाई जाती है। यह ढाल नदियों के बहाव की दिशा तय करता है।
In simple words: मैदान पश्चिम में ऊँचा और पूर्व में नीचा है। नदियाँ दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हैं, और यहाँ कई तरह की मिट्टी मिलती है।

🎯 Exam Tip: मैदान के ढाल और नदियों के बहाव की दिशा का संबंध याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. अपने गाँव-घर में बोली जाने वाली भाषा में चार वाक्य लिखो।
Answer: छात्रों को अपने गाँव या घर में बोली जाने वाली भाषा के बारे में चार वाक्य लिखने चाहिए। यह एक व्यक्तिगत गतिविधि है जो हर छात्र के लिए अलग होगी। अपनी भाषा के कुछ खास शब्द या वाक्य भी इसमें जोड़े जा सकते हैं।
In simple words: छात्र अपनी स्थानीय भाषा में चार वाक्य लिखें।

🎯 Exam Tip: अपनी स्थानीय भाषा के कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग करें ताकि वाक्य और भी प्रभावी लगें।

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FAQs

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