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Detailed Chapter 6 सामाजिक समूह प्राथमिक और माध्यमिक समूह UP Board Solutions for Class 12 Sociology
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Class 12 Sociology Chapter 6 सामाजिक समूह प्राथमिक और माध्यमिक समूह UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Sociology Chapter 6 Social Group Primary And Secondary Groups (सामाजिक समूह प्राथमिक एवं द्वितीयक समूह)
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)
Question 1. सामाजिक समूह का अर्थ व परिभाषा दीजिए तथा प्राथमिक एवं द्वितीयक समूह की विशेषताएँ बताइए। या सामाजिक समूह किसे कहते हैं ? प्राथमिक समूह के सामाजिक महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। या प्राथमिक समूह किसे कहते हैं ? प्राथमिक समूह की चार विशेषताएँ बताइए। या प्राथमिक समूह और द्वितीयक समूह के मध्य अन्तर बताइए। या प्राथमिक समूह को परिभाषित करते हुए इसकी विशेषताएँ लिखिए। या द्वितीयक समूह की चार विशेषताएँ बताइए। या सामाजिक समूह को परिभाषित करते हुए इसकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। या प्राथमिक समूह और द्वितीयक समूह के मध्य अन्तर बताइए। या प्राथमिक समूह और द्वितीयक समूह में दो अन्तरों की व्याख्या कीजिए।
Answer:
सामाजिक समूह का अर्थ
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समूह में रहकरे जीवन व्यतीत करना चाहता है। समूह के बिना मनुष्य के सामाजिक अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसी भावना ने सामाजिक समूह को जन्म दिया है। सामाजिक समूह का सामान्य अर्थ व्यक्तियों के संग्रह से लगाया जाता है। वास्तव में, व्यक्तियों का संग्रह ही समूह नहीं है, वरन् कुछ व्यक्तियों द्वारा संगठित होकर परस्पर सम्बन्ध स्थापित करना तथा एक-दूसरे के व्यवहारों को प्रभावित करने का नाम सामाजिक समूह है। सामाजिक समूह एक ऐसा संगठन है जिसके सदस्य परस्पर जान-पहचान रखते हुए एकरूपता स्थापित करते हैं। परिवार, क्रीड़ा-समूह, पड़ोस, मित्र-मण्डली और राज्य ऐसे ही सामाजिक समूह हैं।
सामाजिक समूह की परिभाषा
विभिन्न समाजशास्त्रियों द्वारा दी गयी सामाजिक समूह की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नवत् हैं। ऑगबर्न और निमकॉफ के अनुसार, “जब कभी दो या दो से अधिक व्यक्ति एकत्रित होकर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं तो वे एक सामाजिक समूह का निर्माण करते हैं।"
बोगार्ड्स के अनुसार, “एक सामाजिक समूह का अर्थ हम व्यक्तियों के ऐसे संग्रह से लगा सकते हैं, जिनके सामान्य स्वार्थ होते हैं, जो एक-दूसरे को प्रेरणा देते हैं, जिनमें सामान्य वफादारी पायी जाती है और जो सामान्य क्रियाओं में भाग लेते हैं।”
वास्तव में, सामाजिक समूह मनुष्यों का वह संग्रह या झुण्ड है जिसके मध्य पारस्परिक सम्बन्ध पाये जाते हैं। पारस्परिक सम्बन्धों के द्वारा ही समूह के सदस्य परस्पर एकरूपता प्रकट करते हैं। ओल्सेन (Olsen) के शब्दों में, “सामाजिक समूह एक प्रकार का संगठन है जिसके सदस्य एक दूसरे को जानते हैं अथवा एक-दूसरे से अपनी एकरूपता स्थापित करते हैं।” सदस्य-संख्या के आधार पर सामाजिक समूहों के निम्नलिखित दो भेद होते हैं
1. प्राथमिक समूह-इस प्रकार के समूह की सदस्य-संख्या अपेक्षाकृत कम होती है। इसके सदस्यों में घनिष्ठ एवं प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है तथा ये पारस्परिक क्रियाओं में सहभागी रहते हैं। परिवार, पड़ोस तथा खेल आदि प्राथमिक समूह के उदाहरण हैं।
2. द्वितीयक समूह-इसकी सदस्य-संख्या, अपेक्षाकृत अधिक होती है। इसके सदस्यों में आमने-सामने के सम्बन्ध न होकर अप्रत्यक्ष सम्बन्ध रहते हैं; जैसे-नगर, विद्यालय, राष्ट्र आदि।
प्राथमिक समूह की विशेषताएँ
प्राथमिक समूह को पूरी तरह से समझ लेने के लिए उनकी विशेषताओं से परिचित होना अनिवार्य है। प्राथमिक समूह में निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं
1. शारीरिक समीपता-सदस्यों के मध्य निकटता और शारीरिक समीपता होना प्राथमिक समूहों की प्रमुख विशेषता है। शारीरिक समीपता के कारण ही प्राथमिक समूह के सदस्यों के मध्य आमने-सामने के सम्बन्ध पाये जाते हैं। प्राथमिक समूह के सदस्यों में अपनापन पाया जाता है। अतः यह समूह अधिक स्थायित्व लिये होता है।
2. लघु आकार-प्राथमिक समूह के सदस्यों के बीच प्रत्यक्ष सम्बन्ध पाये जाते हैं। प्रत्यक्ष सम्बन्ध तभी स्थापित हो सकते हैं जब समूह का आकार बहुत छोटा हो। प्राथमिक समूह के सदस्य एक-दूसरे से परिचित होते हैं तथा समीप रहते हैं। डेविस ने लघु आकार को प्राथमिक समूह की प्रमुख विशेषता स्वीकार किया है।
3. सम्बन्धों की घनिष्ठता-प्राथमिक समूह के सदस्यों के मध्य पाये जाने वाले सम्बन्ध बड़े घनिष्ठ होते हैं। इसमें सम्बन्धों में निरन्तरता और स्थिरता होने के कारण घनिष्ठता पनप जाती है, जो प्राथमिक समूह की प्रमुख विशेषता है।
4. समान उद्देश्य-प्राथमिक समूह के सदस्य समान उद्देश्यों के कारण परस्पर जुड़े रहते हैं। एक निवास-स्थान और एक जैसी संस्कृति उनमें समरूपता भर देती है, जिससे उनके उद्देश्य एकसमान हो जाते हैं। प्राथमिक समूह के सदस्य सबके हित की सोचते हैं। त्याग और बलिदान की भावना उन्हें व्यक्तिगत स्वार्थ त्यागकर समूह के हित में कार्य करने को विवश कर देती
5. हम की भावना-प्राथमिक समूह एक लघु समूह है। उनके सदस्यों में निकटता के कारण घनिष्ठता पायी जाती है। परस्पर घनिष्ठता उनमें 'हम की भावना' का संचार कर देती हैं। इसमें व्यक्ति समष्टि के कल्याण की बात सोचता है।
6. स्वाभाविक सम्बन्ध-प्राथमिक समूह के सदस्यों के मध्य स्वैच्छिक सम्बन्ध पाये जाते हैं। ये सम्बन्ध स्वतः उत्पन्न होते हैं, उनके मध्य कोई शर्त नहीं रहती। ये सम्बन्ध स्वाभाविक और प्राकृतिक होते हैं।
7. स्वतः विकास-प्राथमिक समूह का निर्माण न होकर स्वतः विकास होता है। इनके निर्माण में कोई शक्ति या दबाव काम नहीं करता, वरन् ये स्वाभाविक रूप से स्वतः विकसित हो जाते हैं। परिवार इसका सुन्दर उदाहरण है।
8. प्राथमिक नियन्त्रण-प्राथमिक समूह के सदस्य एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप में जुड़े होते हैं। पारस्परिक जान-पहचान के कारण इनके व्यवहारों पर प्राथमिक नियन्त्रण बना रहता है। परिवार में वृद्ध पुरुषों का भय ही बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से रोके रखता है। प्रत्येक सदस्य अवचेतन ढंग से प्राथमिक समूह के आदर्शों एवं नियमों का पालन करता रहता है।
9. स्थायित्व प्राथमिक समूह शनै-शनैः स्वतः विकसित होने के कारण स्थायी प्रकृति वाले होते हैं। व्यक्तिगत और घनिष्ठ सम्बन्ध होने के कारण व्यक्ति इन समूहों की सदस्यता छोड़ना नहीं चाहता। स्थायी प्रकृति भी प्राथमिक समूहों की प्रमुख विशेषता मानी जाती है।
10. साध्य सम्बन्ध-प्राथमिक समूह के सदस्यों के सम्बन्ध स्वःसाध्य होते हैं, सम्बन्ध उन पर थोपे नहीं जाते। स्वार्थपरता न होने के कारण इनके सम्बन्ध, लक्ष्य और मूल्य समझे जाते हैं। प्राथमिक समूह के सम्बन्ध साधन न होकर साध्य होते हैं। सम्बन्ध साध्य होने के कारण प्रत्येक सदस्य उन्हें पूरा करना अपना परम कर्तव्य मानता है।
द्वितीयक समूह की विशेषताएँ
द्वितीयक समूह की परिभाषाओं का अध्ययन करने से हमें उसकी निम्नलिखित विशेषताओं का ज्ञान होता है
1. द्वितीयक समूह में आमने-सामने के सम्बन्ध न होने के कारण सदस्यों के बीच घनिष्ठता नहीं पायी जाती।
2. द्वितीयक समूहों में समीपता का अभाव होने के कारण सदस्यों के मध्य दूरसंचार के माध्यम से सम्बन्ध स्थापित होते हैं।
3. द्वितीयक समूह का निर्माण विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जान-बूझकर किया जाता है।
4. द्वितीयक समूह जीवन के किसी एक पहलू से सम्बन्ध रखते हैं; अतः इनका प्रभाव व्यक्ति के किसी एक पक्ष पर ही विशेष पड़ता है।
5. द्वितीयक समूह में सम्बन्ध शर्ते या समझौते के आधार पर निश्चित किये जाते हैं।
6. द्वितीयक समूह में व्यक्ति के स्थान पर उसकी परिस्थिति का विशेष महत्त्व होता है। अतः यहाँ सम्बन्धों में औपचारिकता पायी जाती है।
7. द्वितीयक समूह के सदस्यों के मध्य “छुओ और जाओ” (Touch and go) का सम्बन्ध होने के कारण घनिष्ठता का नितान्त अभाव पाया जाता है।
8. द्वितीयक समूहों का निर्माण किया जाता है; इनमें स्वतः विकास का अभाव रहता है। आवश्यकताओं की प्रकृति परिवर्तित होने पर इन समूहों की प्रकृति में भी परिवर्तन आ जाता है।
9. द्वितीयक समूह का संचालन नियमानुसार होता है।
10. द्वितीयक समूह में सदस्यों का सम्बन्ध आमने-सामने का न होने के कारण इनके दायित्व भी सीमित हो जाते हैं।
11. द्वितीयक समूह में सदस्य स्वहित की सोचते हैं। अतः इनके सदस्यों में स्वार्थपरता पायी जाती है। ये दूसरे सदस्यों के साथ उतना ही सम्बन्ध रखते हैं जितना इनके हितों के लिए लाभप्रद और आवश्यक होता है।
12. इस समूह के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से सम्बन्ध स्थापित करना आवश्यक नहीं है। बहुत दूर रहने वाले व्यक्ति भी इसके सदस्य बन सकते हैं।
13. द्वितीयक समूह के सदस्यों में आत्मनिर्भरता की विशेषता पायी जाती है।
14. द्वितीयक समूह में नियन्त्रण बाह्य और औपचारिक होता है।
15. द्वितीयक समूह के सदस्यों के मध्ये प्रायः एकता का अभाव पाया जाता है।
16. द्वितीयक समूह सम्पूर्ण सामाजिक जीवन की व्यवस्थाओं से वंचित रहते हैं।
प्राथमिक समूह और द्वितीयक समूह में अन्तर
| क्र०सं० | प्राथमिक समूह | द्वितीयक समूह |
|---|---|---|
| 1. | प्राथमिक समूह का आकार लघु होता है। चार्ल्स कूले के अनुसार इसकी सदस्य-संख्या 2 से 25 तक हो सकती है। | द्वितीयक समूह का आकार विशाल होता है। इसके सदस्यों की संख्या अपरिमेय हो सकती है। |
| 2. | प्राथमिक समूह में आमने-सामने के घनिष्ठ सम्बन्ध पाये जाते हैं। सदस्यों के मध्य 'हम' की भावना होती है। अतः सहयोग, सद्भावना, सहानुभूति एवं प्रेम आदि गुण पाये जाते हैं। | द्वितीयक समूह के सदस्यों में दूर के सम्बन्ध पाये जाते हैं। इनमें आमने-सामने के सम्बन्धों का अभाव पाया जाता है। 'हम' की भावना न होने से सहयोग, सहानुभूति, सद्भावना, प्रेम और त्याग आदि गुण भी नहीं पाये जाते। |
| 3. | प्राथमिक समूह के सदस्यों के सम्बन्ध स्थायी होते हैं। समूह के सदस्यों के सम्बन्ध लम्बे समय तक चलने वाले होते हैं। | द्वितीयक समूह के सदस्यों के सम्बन्ध अस्थायी होते हैं। समूह के सम्बन्ध "छुओ और चले जाओ" के सिद्धान्त पर टिके होते हैं। |
| 4. | प्राथमिक समूह के सम्बन्ध औपचारिक, स्वतः निर्मित और सर्वांगीण होते हैं। समूह में प्राथमिक और अनौपचारिक नियन्त्रण पाया जाता है। | द्वितीयक समूह के सम्बन्ध अनौपचारिक, सोच-समझकर बनाये हुए और एकपक्षीय होते हैं। समूह में द्वितीयक और अनौपचारिक नियन्त्रण पाया जाता है। |
| 5. | प्राथमिक समूह किसी विशेष हित या स्वार्थपूर्ति के लिए नहीं होते हैं। | द्वितीयक समूह किसी विशेष हित या स्वार्थपूर्ति के लिए होते हैं; अतः इन्हें स्वार्थ समूह भी कहा जाता है। |
| 6. | प्राथमिक समूह सार्वभौमिक होते हैं। ये विश्व के सभी समाजों और संस्कृति के विकास के प्रत्येक स्तर में उपस्थित रहते हैं। | द्वितीयक समूह सार्वभौमिक नहीं होते। पूँजीवादी तथा समाजवादी संगठन का प्रत्येक में होना आवश्यक नहीं है। |
| 7. | प्राथमिक समूह व्यक्ति के स्वभाव, आदर्श और चरित्र निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। | द्वितीयक समूह व्यक्ति के व्यक्तित्व को विशेष स्वरूप प्रदान करता है। |
| 8. | प्राथमिक समूह सरल, ग्रामीण और आदिम समाज में अधिक पाये जाते हैं। | द्वितीयक समूह की उपस्थिति प्रायः जटिल और नगरीय समाज में पायी जाती है। |
| 9. | प्राथमिक समूह का आधार प्राचीन नियम, नैतिकता और आदर्श होते हैं। | द्वितीयक समूह का आधार नवीन नियम, विधि और संविधान होते हैं। |
| 10. | प्राथमिक समूह के साथ व्यक्ति सुगमतापूर्वक अनुकूलन कर लेता है। | द्वितीयक समूह के साथ अनुकूलन में व्यक्ति को कठिनाई उठानी पड़ती है। |
| 11. | प्राथमिक समूह का व्यक्ति के समाजीकरण में बहुत अधिक सहयोग होता है। | द्वितीयक समूह का व्यक्ति के समाजीकरण में बहुत कम सहयोग रहता है। |
| 12. | प्राथमिक समूह में व्यक्ति का पद उसकी उपयोगिता एवं जन्म पर निर्भर होता है। | द्वितीयक समूह में व्यक्ति का पद कार्यों के अनुरूप निर्धारित होता है। |
| 13. | प्राथमिक समूहों में सामाजिक नियमों का ही पालन किया जाता है। | द्वितीयक समूहों में समूह द्वारा निर्मित नियमों का पालन किया जाता है। |
प्राथमिक समूहों का सामाजिक महत्त्व
प्राथमिक समूहों का सामाजिक महत्त्व निम्नवत् है
1. व्यक्तित्व का विकास-प्राथमिक समूह व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में अभूतपूर्व योग देते हैं। नवजात शिशु एक मांस का लोथड़ा और निरीह जीव मात्र होता है। वह परिवार की सुरम्य पृष्ठभूमि में पलता और बड़ा होता है तथा परिवाररूपी पाठशाला उसमें गुणों का विकास करके उसके व्यक्तित्व के विकास में सहायक होती है। यही कारण है कि चार्ल्स कूले ने प्राथमिक समूहों को 'मानव समूह की नर्सरी' कहकर सम्बोधित किया है। प्राथमिक समूह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में अपनी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
2. समाजीकरण में सहायक-प्राथमिक समूह अपने सदस्यों को समाज के साथ अनुकूलन करने में सक्षम बनाते हैं। ये बालक में सहयोग, दया, त्याग, प्रेम, सहानुभूति एवं सहिष्णुता के गुणों का समावेश कराकर समाजीकरण की प्रक्रिया में सहायक होते हैं। ये व्यक्ति में सामाजिक आदर्शों एवं नियमों के पालन का भाव जाग्रत कर उसे सामाजिक दशाओं के साथ अनुकूलन का पाठ पढ़ाते हैं।
3. संस्कृति का हस्तान्तरण-प्राथमिक समूह संस्कृति के वाहक हैं। ये सदस्यों को सांस्कृतिक प्रतिमानों एवं मूल्यों से परिचित कराने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। प्राथमिक समूह व्यक्ति को धर्म, नैतिकता, रूढ़ियों और परम्पराओं का ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचाते रहते हैं। इस प्रकार सांस्कृतिक प्रतिमान के पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तान्तरित होने के कारण उनमें सांस्कृतिक निरन्तरता बनी रहती है।
4. आवश्यकताओं की सन्तुष्टि-प्राथमिक समूह व्यक्ति की मूल आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। परिवार, विद्यालय, राजनीतिक दल, क्रीड़ा-समूह, पड़ोस, चिकित्सालय और छविगृह मानव की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोगी बनकर उसे आन्तरिक सन्तोष प्रदान करते हैं।
5. पशु-प्रवृत्तियों पर नियन्त्रण-प्राथमिक समूह व्यक्ति में मानवता का समावेश कर उसे दुर्गुणों से मुक्त रखते हैं। वे व्यक्तियों की दुष्प्रवृत्तियों पर अंकुश रखकर उसमें सद्गुणो का संचार करते हैं। परिवार मनुष्य को सत्य, अहिंसा, धर्म, नैतिकता, त्याग और सहानुभूति का पाठ पढ़ाकर उसे पशु-प्रवृत्तियों से बचाता है। कूले के शब्दों में, “पशु-प्रवृत्तियों का मानवीकरण ही सम्भवतः सबसे बड़ी सेवा है, जो प्राथमिक समूह करते हैं।'
6. मनोरंजन-जीवन के दो पहलू हैं - कार्य और मनोरंजन। प्राथमिक समूह हारे-थके व्यक्ति को मनोरंजन की सुविधाएँ प्रदान कर उसे स्वस्थ और प्रसन्न बनाते हैं। परिवार में रहकर व्यक्ति गपशप, हँसी-मजाक, नाचकूद और खेलकूद की सुविधाओं का लाभ उठाकर अपना दिल बहलाता है। मनोरंजन से उसके जीवन में सरसता उत्पन्न होती है।
7. कार्यक्षमता में वृद्धि-प्राथमिक समूह व्यक्ति को उसकी रुचि और क्षमता के अनुरूप कार्य देकर उन्हें कुशल बनाते हैं। व्यक्ति के विभिन्न कार्यों में उसका मार्गदर्शन करके उसकी कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। प्राथमिक समूह में व्यक्ति को अपने कौशल दिखाने का पूरा-पूरा अवसर दिया जाता है। अतः उसमें आत्मविश्वास जाग उठता है जो उसकी कार्यक्षमता को द्विगुणित कर देता है।
8. सुरक्षा-प्राथमिक समूह व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करते हैं। ये व्यक्ति में यह विश्वास कूट-कूट कर भर देते हैं कि विपत्ति के समय उसे पूरी-पूरी सहायता प्राप्त होगी। सुरक्षा की भावना व्यक्ति को आत्मसन्तोष और निश्चिन्तता के भाव से ओत-प्रोत कर देती है। प्राथमिक समूह का प्रत्येक सदस्य स्वयं को मानसिक दृष्टि से पूर्णतः सुरक्षित मानता है।
9. सामाजिक नियन्त्रण में सहायक-प्राथमिक समूह सामाजिक नियन्त्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सामाजिक नियन्त्रण के प्रमुख साधन हैं। प्राथमिक समूह सदस्यों में सद्गुणों का विकास कर समाज को नियन्त्रित करने में सहायक बनते हैं।
10. समाज का आधार-प्राथमिक समूह समाज के अभिन्न अंग होते हैं। व्यक्ति प्राथमिक समूह में उत्पन्न होकर समाज के अस्तित्व का आधार बनता है। प्राथमिक समूहों में समाज की निरन्तरता बनी रहती है। उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्राथमिक समूह का सामाजिक महत्त्व बहुत अधिक है।
In simple words: सामाजिक समूह व्यक्तियों का एक संगठित संग्रह है जो परस्पर सम्बन्धों और समान उद्देश्यों से जुड़े होते हैं। प्राथमिक समूह छोटे, घनिष्ठ होते हैं और व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि द्वितीयक समूह बड़े, औपचारिक होते हैं और विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में सामाजिक समूहों की परिभाषा, प्राथमिक और द्वितीयक समूहों की विशेषताओं तथा उनके बीच के अन्तर को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समाजशास्त्र के आधारभूत स्तम्भों में से एक है।
Question 2. अन्तःसमूह तथा बाह्य समूह से आप क्या समझते हैं ? इनके अन्तर को स्पष्ट कीजिए। या अन्तःसमूह एवं बाह्य समूह का वर्गीकरण किसने किया ? इसे स्पष्ट कीजिए।
Answer:
अन्तः समूह तथा बाह्य समूह
मनुष्य का सारा जीवन ही समूहों में व्यतीत होता है। वह स्वभावतः सामूहिक प्राणी है। किन्तु विभिन्न समूहों के प्रति उसके दृष्टिकोण और अन्य सदस्यों के साथ उसके सम्बन्धों की गुणवत्ता में भिन्नता पायी जाती है। इसी आधार पर समनर (Sumner) ने अपने ग्रन्थ 'जनरीतियाँ' (Folkways) में बताया कि मानव-समाज में दो प्रकार के समूह होते हैं-अन्तः समूह एवं बाह्य समूह।
अन्तः समूह In-Group
एक अन्तःसमूह वह समूह है जिससे हम सम्बन्धित होते हैं, अर्थात् उनके साथ अपनत्व की भावना महसूस करते हैं। हमारा परिवार, मित्र-मण्डली, खेल-समूह, प्रजाति, कबीला और आधुनिक सभ्य समाजों में राष्ट्र ऐसे ही समूह हैं। इसलिए उन समूहों को 'अपना समूह' (We-Group) भी कहा गया है।
अन्तःसमूहों में सम्बन्धों की गुणवत्ता इसमें व्याप्त अपेक्षाकृत शान्ति और व्यवस्था है। उसके सदस्य एक-दूसरे के प्रति सहयोग, शुभकामना, परस्पर-विश्वास और सहयोग प्रदर्शित करते हैं। अन्तःसमूह में सदस्य एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान ही नहीं करते, वरन् एक-दूसरे के लिए बलिदान करने की भावना व तत्परता भी रखते हैं। इसीलिए उनमें एकता की भावना तथा समूह के प्रति निष्ठा पायी जाती है। इस प्रकार अन्तःसमूह के बीच अभिन्न समरूपता, समानता और सहिष्णुता होती है।
बाह्य समूह Out-Group
अन्तःसमूह के सदस्य के लिए अन्य सभी समूह बाह्य समूह होते हैं। बाह्य समूह के प्रति व्यक्ति में अविश्वास और शंका रहती है। उसके सदस्य व्यक्ति के लिए 'पराये' या 'दूसरे लोग' हैं। इसीलिए इन्हें 'अन्य समूह' (Other Group) या 'उनका समूह' या 'वे-लोग' (They-Group) भी कहा जाता है। इसीलिए उनके प्रति व्यक्ति घृणा या शत्रु-भाव रखता है।
समाजशास्त्र की दृष्टि से, अन्तः समूह और बाह्य समूह का वर्गीकरण बड़ा महत्त्वपूर्ण है। वास्तव में, व्यक्ति अपने जीवन के दौरान इसी सन्दर्भ में लोगों को देखता है तथा व्यवहार करता है। कुछ व्यक्ति और समूह उसके अपने लोग होते हैं और कुछ व्यक्ति और समूह उसके अपनों के दायरे से बाहर होते हैं, उसके लिए वे ही बाह्य समूह हैं।
अन्तःसमूह और बाह्य समूह के सम्बन्ध में ध्यान देने योग्य बात यह है कि समनर द्वारा समूहों का यह वर्गीकरण व्यक्तिनिष्ठ (Subjective Classification) है, क्योंकि यह व्यक्ति को दृष्टि में रखकर किया गया है। तद्नुरूप जो समूह एक व्यक्ति के लिए अन्तःसमूह है; जैसे उसका अपना परिवार, वह किसी अन्य व्यक्ति के लिए बाह्य समूह होगा। इसी प्रकार उस अन्य व्यक्ति के लिए जो अन्तः समूह होगा वह उससे पहले व्यक्ति के लिए बाह्य समूह। उदाहरणार्थ-मेरा परिवार मेरे लिए अन्तःसमूह है, किन्तु मेरे पड़ोसी के लिए बाह्य समूह। इसी प्रकार मेरे पड़ोसी का परिवार उसके लिए अन्तः समूह है, किन्तु मेरे लिए बाह्य समूह है।
अन्तःसमूह और बाह्य समूह के बीच अन्तर
अन्तःसमूह और बाह्य समूह की व्याख्या से ही दोनों के बीच अन्तर स्पष्ट हो जाता है। संक्षेप में उनके बीच अन्तर के बिन्दु निम्नलिखित हैं
1. अपनत्व की भावना में अन्तर-अन्तःसमूह से व्यक्ति जुड़ा होता है, उसका सदस्य होता है। इसके सदस्य परस्पर 'हम-भावना' में बँधे होते हैं। दूसरी ओर, बाह्य समूह का न तो व्यक्ति सदस्य होता है और न ही उसके प्रति व्यक्ति के मन में अपनत्व की भावना होती है। वे उसके लिए 'वे-लोग' होते हैं।
2. एकता की आवश्यकता-अन्तःसमूह के लिए आवश्यक है कि उसके सदस्यों के बीच एकता के सूत्र मजबूत हों। आन्तरिक एकता, शान्ति और सहयोग के अभाव में अन्तः समूह का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा, जब कि बाह्य समूह के प्रति व्यक्ति कामचलाऊ दृष्टिकोण रख सकता है।
3. अन्तर का आधार कोई भी होना सम्भव-जॉर्ज सिमेल का कहना है व्यक्ति के लिए समूहों को अन्तः समूह या बाह्य समूह में श्रेणीबद्ध करने का कोई भी ऐसा गुण हो सकता है जो बाहरी व्यक्तियों के लिए बिल्कुल ही अर्थहीन हो। प्रायः देखा गया है कि धर्म, आयु, जाति, बिरादरी, प्रजाति अन्तः समूह और बाह्य समूह के बीच विभेदीकरण के आधार बन जाते हैं। यही कारण है कि लोग विभिन्न राजनीतिक दल के सदस्य होते हैं या एक ही राजनीतिक दल में विभिन्न गुट बन जाते हैं। इस भाँति, अन्तःसमूह और बाह्य समूह की अवधारणा समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसकी सहायता से सामाजिक जीवन के यथार्थ को समझना सुगम हो जाता है।
In simple words: समनर द्वारा प्रतिपादित अन्तःसमूह वह है जिससे हम जुड़े होते हैं और अपनत्व महसूस करते हैं, जबकि बाह्य समूह वह है जिससे हम संबंधित नहीं होते और जिसके प्रति उदासीनता या शत्रुता का भाव होता है।
🎯 Exam Tip: अन्तःसमूह और बाह्य समूह की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए उनके बीच के अन्तर को उदाहरण सहित समझाना महत्वपूर्ण है, साथ ही समनर का संदर्भ देना भी प्रभावी रहेगा।
Question 3. सामाजिक समूह के प्रकारों का उल्लेख कीजिए ।
Answer: समाजशास्त्रियों ने भिन्न-भिन्न आधारों पर सामाजिक समूह के विभिन्न रूपों को समझाने का प्रयत्न किया है। प्रस्तुत विवेचन में हम सभी विद्वानों के वर्गीकरण की व्याख्या न करके कुछ प्रमुख वर्गीकरण की रूपरेखा को ही स्पष्ट करेंगे।
मैकाइवर एवं पेज द्वारा समूहों का वर्गीकरण
मैकाइवर एवं पेज ने सभी सामाजिक समूहों को तीन प्रमुख भागों और अनेक उपविभागों में प्रस्तुत किया है। इस वर्गीकरण की जटिलता और विस्तृत प्रकृति को ध्यान में रखते हुए हम मैकाइवर के वर्गीकरण को संक्षेप में निम्नलिखित चार्ट द्वारा समझ सकते हैं
| समूह | प्रमुख आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. क्षेत्रीय समूह (Territorial unities) | (अ) सम्पूर्ण हितों से सम्बन्धित क्षेत्र (ब) एक ही क्षेत्र में व्यवसाय | समुदाय, वन्य जाति, राष्ट्र, नगर, गाँव, पड़ोस आदि। |
| 2. हितों के प्रति चेतन समूह जिनका निश्चित संगठन नहीं है। (Interest conscious unities-without definite organization)। | (अ) समूह के सदस्यों की समान मनोवृत्ति (ब) अनिश्चित सामाजिक संगठन - पद, प्रतिष्ठा और (स) अवसरों में अन्तर | सामाजिक वर्ग, जाति, प्रतिस्पर्धा वर्ग, प्रजातीय समूह, शरणार्थी समूह, राष्ट्रीय समूह आदि। भीड़-समान और असमान हितों की। |
| 3. हितों के प्रति चेतन समूह जिनका निश्चित संगठन होता है। (Interest conscious unities-with definite organization)! | (अ) हितों का सीमित क्षेत्र (ब) निश्चित सामाजिक संगठन | प्राथमिक समूह - परिवार, पड़ोस, खेल के साथी, क्लब आदि। महासमितियों - राज्य, चर्च, आर्थिक संघ तथा श्रमिक-संघ आदि। |
मिलर द्वारा वर्गीकरण
मिलर ने सभी सामाजिक समूहों को उदग्र तथा समतल दो भागों में विभाजित किया है
1. उदग्र समूह-ये वे समूह हैं जो एक-दूसरे से कुछ दूरी प्रदर्शित करते हैं। यद्यपि उदग्र समूह सामाजिक स्तरीकरण की व्यवस्था से सम्बन्धित हैं, लेकिन इनकी सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि ऐसे समूह अनेक खण्डों में विभाजित होते हैं और प्रत्येक खण्ड की स्थिति दूसरे की तुलना में उच्च अथवा निम्न है। उदाहरण के लिए, संयुक्त परिवार को एक उदग्र समूह कहा जा सकता है। इस समूह में सभी सदस्यों की सामाजिक स्थिति एक-दूसरे से भिन्न होती है और सभी व्यक्तियों को एक-दूसरे की स्थिति का ध्यान रखते हुए ही अपने कर्तव्यों को पूरा करना आवश्यक होता है।
2. समतल समूह-यह समूह इस अर्थ में समतल है कि इसके सभी सदस्यों की सामाजिक स्थिति लगभग समान होती है। सदस्यों के बीच न तो कोई ऊँच-नीच होती है और न ही उन्हें कम या अधिक अधिकार प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए, श्रमिक-वर्ग अथवा लेखक-वर्ग समतल समूह हैं जिनके सभी सदस्य इस भावना से प्रभावित रहते हैं कि उन सबका स्तर लगभग एक समान है।
अन्तःसमूह और बाह्य समूह
समनर (Sumner) ने अपनी पुस्तक 'Folkways' में समूह के सदस्यों में घनिष्ठता तथा सामाजिक दूरी के आधार पर सभी समूहों को अन्तःसमूह और बाह्य समूह जैसे दो प्रमुख भागों में विभाजित किया है। इन दोनों प्रकार के समूहों की प्रकृति को निम्नलिखित रूप में स्पष्ट किया जा सकता है।
अन्तःसमूह-इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम समनर ने सन् 1907 में किया और इसके बाद लगभग सभी समाजशास्त्रियों ने किसी-न-किसी रूप में ऐसे समूहों का उल्लेख अवश्य किया है। मनुष्य की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि आरम्भिक समय से ही वह कुछ वस्तुओं अथवा व्यक्तियों को अच्छा समझने लगता है और उनकी तुलना में दूसरी वस्तुओं अथवा व्यक्तियों की अवहेलना करता है। वास्तव में, अन्तः समूह की धारणा व्यक्ति की इसी मनोवृत्ति से सम्बन्धित है।
बाह्य समूह-बाह्य-समूह, अन्तःसमूह से पूर्णतया विपरीत भावनाएँ प्रदर्शित करता है। जिस समूह को हम बाह्य समूह कहते हैं, उसके प्रति हमारी मनोवृत्ति कम सौजन्यपूर्ण और भेदभाव से युक्त होती है। हम कह सकते हैं कि जब बिना किसी विशेष कारण के ही हम कुछ व्यक्तियों से सामाजिक दूरी का अनुभव करते हैं और इसलिए उन्हें अपने से हीन मानकर उनकी अवहेलना करते हैं, तब ऐसे व्यक्तियों के समूह को 'बाह्य समूह' के नाम से सम्बोधित किया जाता है।
प्राथमिक तथा द्वितीयक समूह
समूह के सभी वर्गीकरणों में चार्ल्स कूले द्वारा प्रस्तुत वर्गीकरण सबसे अधिक संक्षिप्त, वैज्ञानिक और मान्य है। अमेरिकन समाजशास्त्री चार्ल्स कूले (Charles Cooley) ने सन् 1909 में अपनी पुस्तक ‘Social Organisation' में सर्वप्रथम 'प्राथमिक समूह' शब्द का प्रयोग किया। बाद में ऐसे समूहों से भिन्न विशेषताएँ प्रदर्शित करने वाले समूहों को 'द्वितीयक समूह' कहा जाने लगा। यह वर्गीकरण समूह के आकार (size), महत्त्व और सदस्यों में पाये जाने वाले सम्बन्धों की प्रकृति के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
प्राथमिक समूह का अर्थ तथा उदाहरण-चार्ल्स कूले ने प्राथमिक समूहों को 'मानव स्वभाव की पोषिका' (nursery of human nature) कहा है। कूले ने कुछ समूहों को प्राथमिक इसलिए कहा है क्योंकि महत्त्व के दृष्टिकोण से इनका स्थान प्रथम और प्रभाव प्राथमिक है। जब कभी भी कुछ व्यक्ति घनिष्ठता अथवा 'हम की भावना' से बँधकर अन्तक्रिया करते हैं तथा समूह के हित के सामने निजी स्वार्थों का बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं, तब ऐसे समूह को हम एक प्राथमिक समूह कहते हैं।
कूले ने आरम्भ में परिवार, क्रीड़ा-समूह और पड़ोस के लिए 'प्राथमिक समूह' शब्द का प्रयोग किया था। जीवन के आरम्भिक काल में परिवार व्यक्ति के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई होती है, जिसे कूले ने प्राथमिक समूह का सबसे अच्छा उदाहरण माना है।
द्वितीयक समूह का अर्थ तथा उदाहरण-चार्ल्स कूले ने आरम्भ में 'द्वितीयक समूह' जैसे किसी शब्द का उल्लेख नहीं किया था, लेकिन प्राथमिक समूह से विपरीत विशेषताएँ प्रदर्शित करने वाले समूहों को जब द्वितीयक समूह (Secondary group) के रूप में स्पष्ट किया जाने लगा, तब कूले ने भी इसे स्वीकार करते हुए कहा, “ये वे समूह हैं जिनमें घनिष्ठता, प्राथमिक तथा अर्द्धप्राथमिक (quasi-primary) विशेषताओं का पूर्ण अभाव रहता है। लगभग इसी प्रकार ऑगबर्न तथा निमकॉफ (Ogburn and Nimkoff) के अनुसार, “द्वितीयक समूह वे समूह हैं जो घनिष्ठता की कमी का अनुभव करते हैं।' ऑगबर्न ने कहा है कि, “द्वितीयक समूहों का तात्पर्य व्यक्तियों के उन समूहों से है जो द्वितीयक सम्बन्धों द्वारा संगठित होते हैं। द्वितीयक सम्बन्धों का अर्थ ऐसे सामाजिक सम्बन्धों से है जो प्राथमिक नहीं हैं अथवा जो आकस्मिक और औपचारिक (formal) हैं।” द्वितीयक समूहों में घनिष्ठता का अभाव और औपचारिकता होने के कारण ही लैण्डिस (H. H. Landis) ने इन्हें 'शीत जगत' (cold world) के नाम से सम्बोधित किया है।
In simple words: सामाजिक समूह व्यक्तियों का वह संग्रह है जो किसी न किसी आधार पर संगठित होते हैं। समाजशास्त्रियों ने इन समूहों को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया है, जिनमें मैकाइवर एवं पेज ने क्षेत्रीय, चेतन व अचेतन हितों के आधार पर; मिलर ने उदग्र व समतल समूह के रूप में; और समनर ने अन्तःसमूह व बाह्य समूह के रूप में प्रमुख वर्गीकरण प्रस्तुत किए हैं।
🎯 Exam Tip: सामाजिक समूहों के विभिन्न वर्गीकरणों को उनके मुख्य आधारों और उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है, खासकर मैकाइवर और पेज, मिलर तथा समनर के वर्गीकरणों पर ध्यान दें।
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. प्राथमिक समूहों को प्राथमिक क्यों कहा जाता है ? इनके तीन उदाहरण दीजिए। या प्राथमिक समूह के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: कूले ने प्राथमिक समूहों को समय एवं महत्त्व की दृष्टि से प्राथमिक माना है। समय की दृष्टि से सर्वप्रथम बच्चा प्राथमिक समूहों; जैसे-परिवार, पड़ोस एवं मित्र-मण्डली के सम्पर्क में आता है। अन्य समूहों का सदस्य तो वह बाद में बनता है। चूंकि प्राथमिक समूह का व्यक्तित्व के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है, इसलिए महत्त्व की दृष्टि से भी ये प्राथमिक हैं। कूले लिखते हैं, “वैसे तो वे अनेक अर्थों में प्राथमिक हैं, किन्तु मुख्यतः इस कारण से कि वे व्यक्तियों की सामाजिक प्रकृति एवं आदर्शों के निर्माण में मौलिक हैं।” समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा प्राथमिक समूह ही बच्चे को सर्वप्रथम संस्कृति, प्रथाओं, रीति-रिवाजों, आदर्शों, मूल्यों आदि का ज्ञान कराते हैं और उसे सामाजिक आदर्शों के अनुरूप ढालने एवं आचरण करने में योग देते हैं। प्राथमिक समूह ही बच्चे में विभिन्न परिस्थितियों से अनुकूलन करने की क्षमता पैदा करते हैं जिससे कि वह अपने जीवन में आने वाली विभिन्न कठिनाइयों एवं संकटों का मुकाबला कर सके। प्राथमिक समूह ही व्यक्ति में आत्म-नियन्त्रण की भावना पैदा करते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्राथमिक समूह महत्त्व, समाजीकरण, व्यक्तित्व-निर्माण, सामाजिक नियन्त्रण, मौलिकता एवं प्राचीनता आदि की दृष्टि से प्राथमिक हैं। चार्ल्स कूले परिवार, क्रीड़ा-समूह और पड़ोस को प्राथमिक समूह मानते
In simple words: प्राथमिक समूह इसलिए प्राथमिक कहलाते हैं क्योंकि वे व्यक्ति के जीवन में सबसे पहले आते हैं (जैसे परिवार) और उसके व्यक्तित्व, सामाजिक प्रकृति तथा नैतिक आदर्शों के निर्माण में मौलिक भूमिका निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूहों को 'प्राथमिक' कहे जाने के पीछे के तर्कों को स्पष्ट करें, जिसमें समय और महत्व दोनों दृष्टिकोण शामिल हों, और उदाहरण देना न भूलें।
Question 2. द्वितीयक समूह की उपयोगिता की विवेचना कीजिए।
Answer: व्यक्तित्व के विकास और सामाजिक अनुकूलन के क्षेत्र में द्वितीयक समूहों के महत्त्व को अग्रलिखित रूप से समझा जा सकता है
1. विशेषीकरण को प्रोत्साहन-वर्तमान युग श्रम-विभाजन और विशेषीकरण को सबसे अधिक महत्त्व देता है। विशेषीकरण की योजना व्यक्ति को द्वितीयक समूहों से ही प्राप्त होती है, क्योंकि द्वितीयक समूहों की प्रकृति अपने आप में विशेषीकृत होती है। उदाहरण के लिए, एक प्राथमिक समूह अपने किसी सदस्य को एक कुशल नेता, डॉक्टर, प्रोफेसर अथवा अभिनेता नहीं बना सकता। व्यक्ति को ये स्थितियाँ केवल द्वितीयक समूह ही प्रदान कर सकते हैं।
2. सामाजिक परिवर्तन द्वारा प्रगति-द्वितीयक समूह व्यक्ति को भविष्य के प्रति आशावान बनाकर परिवर्तन को प्रोत्साहन देते हैं। वास्तविकता यह है कि हमारे समाज में आज यदि प्रथाओं, परम्पराओं, रूढ़ियों और अन्धविश्वासों का प्रभाव कुछ कम हो सका है तो इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि द्वितीयक समूहों ने हमें नये व्यवहारों को ग्रहण करने की प्रेरणा दी है।
3. जागरूकता में वृद्धि-द्वितीयक समूह परम्परा पर आधारित न होकर विवेक और तर्क को अधिक महत्त्व देते हैं। इस कारण इन समूहों में रहकर व्यक्ति का दृष्टिकोण अधिक तार्किक बन जाता है। आज द्वितीयक समूहों के प्रभाव से ही अनेक उपनिवेशवादी समाजों को अपनी दमनकारी नीति को छोड़ना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, स्त्रियों की वर्तमान उन्नति और श्रमिक वर्ग को प्राप्त होने वाले अधिकार भी द्वितीयक समूहों के कारण ही सम्भव हो सके हैं।
4. आवश्यकताओं की पूर्ति-औद्योगीकरण के युग में व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति केवल द्वितीयक समूह में रहकर ही सम्भव है। वर्तमान युग में कार्य करना आवश्यक हो गया है। उदाहरण के लिए, शिक्षा प्राप्त करना, किसी कारखाने या कार्यालय में नौकरी करना, राजनीतिक संगठनों से सम्बन्ध बनाये रखना, अनेक कल्याण संगठनों में रहकर कार्य करना, स्थानीय अथवा राष्ट्रीय मामलों में रुचि लेना आदि व्यक्ति की प्रमुख आवश्यकताएँ हैं। इन सभी आवश्यकताओं को केवल द्वितीयक समूह ही पूरा करते हैं।
5. श्रम को प्रोत्साहन-द्वितीयक समूहों ने श्रम को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में स्वीकार करके सामाजिक प्रगति में विशेष योगदान दिया है। द्वितीयक समूह व्यक्ति को श्रम का वास्तविक पुरस्कार देकर उसे अधिक-से-अधिक काम करने की प्रेरणा देते हैं। इससे व्यक्ति का जीवन कर्मठ बनता है।
In simple words: द्वितीयक समूह व्यक्ति के विकास और सामाजिक अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेषीकरण को बढ़ावा देते हैं, सामाजिक परिवर्तन लाते हैं, जागरूकता बढ़ाते हैं, जटिल आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं, और श्रम को प्रोत्साहित करते हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समूहों की उपयोगिता बताते समय प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट उदाहरणों से समझाना चाहिए ताकि छात्रों को उनका व्यावहारिक महत्व समझ आ सके।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. निश्चित संगठन वाले समूह से क्या अर्थ है ?
Answer: निश्चित संगठन वाले समूह इस प्रकार के होते हैं जिनमें एक निश्चित संगठन पाया जाता है। तथा जिनके सदस्य अपने हितों के प्रति जागरूक होते हैं। मैकाइवर इन्हें भी दो भागों में बाँटते हैं
• वे समूह जिनकी सदस्यता की सीमा निश्चित होती है; जैसे-परिवार, क्लब, पड़ोस, क्रीड़ा समूह आदि।
• वे समूह जिनकी सदस्यता तुलनात्मक दृष्टि से असीमित होती है; जैसे- राज्य, चर्च, आर्थिक संगठन, श्रमिक संगठन आदि।
In simple words: निश्चित संगठन वाले समूह वे होते हैं जिनमें एक स्पष्ट संरचना और नियम होते हैं, तथा सदस्य अपने हितों के प्रति जागरूक रहते हैं, जैसे परिवार या राजनीतिक दल।
🎯 Exam Tip: निश्चित संगठन वाले समूहों की परिभाषा देते समय उनके संगठनात्मक स्वरूप और सदस्यों की जागरूकता पर बल देना चाहिए, साथ ही उपयुक्त उदाहरण भी दें।
Question 2. अनिश्चित संगठन वाले समूह से क्या तात्पर्य है ?
Answer: अनिश्चित संगठन वाले समूह ऐसे होते हैं, जिनमें संगठन का अभाव पाया जाता है। तथा वे अस्थिर प्रकृति के होते हैं। वे किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए यकायक बन जाते एवं संगठित हो जाते हैं तथा उद्देश्य की पूर्ति के बाद तुरन्त समाप्त हो जाते हैं। इनके अन्तर्गत श्रोता-समूह एवं भीड़ आते हैं, जो शीघ्र ही संगठित, एकत्रित एवं तितर-बितर हो जाते हैं।
In simple words: अनिश्चित संगठन वाले समूह अस्थायी होते हैं, जिनमें कोई निश्चित संरचना नहीं होती और ये किसी तात्कालिक उद्देश्य के लिए बनते हैं और फिर जल्दी ही बिखर जाते हैं, जैसे भीड़ या दर्शक समूह।
🎯 Exam Tip: अनिश्चित संगठन वाले समूहों की अस्थिर प्रकृति और तात्कालिक गठन व विघटन पर प्रकाश डालें, भीड़ और श्रोता-समूह जैसे उदाहरणों का उल्लेख करें।
Question 3. सामाजिक समूह की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। या सामाजिक समूह की चार विशेषताएँ लिखिए।
Answer: सामाजिक समूह की विशेषताएँ निम्नवत् हैं
1. समूह-निर्माण के लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना आवश्यक है।
2. समूह का निर्माण करने वाले लोगों के हित एवं रुचियाँ सामान्य होते हैं।
3. समूह के सदस्यों के बीच सामाजिक सम्बन्ध पाये जाते हैं।
4. प्रत्येक समूह के कुछ नियम होते हैं जिनके अनुसार सदस्यों के व्यवहारों को नियन्त्रित किया।
In simple words: सामाजिक समूह के लिए कम से कम दो व्यक्तियों का होना, सदस्यों के सामान्य हित, उनके बीच सामाजिक सम्बन्ध और व्यवहार को नियंत्रित करने वाले नियम अनिवार्य विशेषताएँ हैं।
🎯 Exam Tip: सामाजिक समूह की विशेषताओं को बिन्दुवार और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करें, क्योंकि यह एक सामान्य और महत्वपूर्ण प्रश्न है।
Question 4. बाह्य समूह की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: बाह्य समूह की दो विशेषताएँ निम्नवत् हैं
1. बाह्य समूह के हम सदस्य नहीं होते हैं और उनके प्रति हम की भावना नहीं पायी जाती।
2. बाह्य समूह के सदस्यों के प्रति विरोधी भावना पायी जाती है, उनके प्रति भय, सन्देह, घृणा आदि के भाव होते हैं।
In simple words: बाह्य समूह वह समूह है जिसके हम सदस्य नहीं होते और जिसके प्रति अपनत्व या 'हम' की भावना नहीं होती, बल्कि अक्सर भय, सन्देह या विरोधी भावनाएँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: बाह्य समूह की विशेषताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, विशेषकर 'हम' की भावना के अभाव और नकारात्मक भावनाओं पर जोर दें।
Question 5. प्राथमिक समूह की चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: प्राथमिक समूह की विशेषताएँ निम्नवत् हैं
1. प्राथमिक समूह का आकार बहुत छोटा होता है।
2. प्राथमिक समूह के सदस्यों के मध्य बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध होते हैं।
3. ये समूह किसी विशेष हित या स्वार्थपूर्ति के लिए नहीं होते हैं।
4. प्राथमिक समूहों में सामाजिक नियमों का ही पालन किया जाता है।
In simple words: प्राथमिक समूह छोटे आकार के होते हैं, सदस्यों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होते हैं, विशेष स्वार्थों से परे होते हैं और सामाजिक नियमों का पालन करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह की प्रमुख चार विशेषताओं को संक्षेप में और सटीक रूप से बताएं, जो उनके घनिष्ठ और अनौपचारिक प्रकृति को दर्शाती हों।
Question 6. बाह्य समूह की अवधारणा किसकी है? इसकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: बाह्य समूह की अवधारणा समनर नामक समाजशास्त्री ने दी है। समनर ने बाह्य समूह की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है
1. व्यक्ति, बाह्य समूह; जैसे-शत्रु सेना, अन्य गाँव आदि को पराया समूह मानता है अर्थात्इसके सदस्यों के प्रति अपनत्व की भावना का अभाव पाया जाता है।
2. बाह्य समूह के प्रति द्वेष, घृणा, प्रतिस्पर्धा एवं पक्षपात के भाव पाए जाते हैं।
3. बाह्य समूह के सदस्यों के प्रति घनिष्ठता नहीं पाई जाती है।
4. बाह्य समूह के प्रति उदासीन अथवा निषेधात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
In simple words: बाह्य समूह की अवधारणा समनर ने दी है, और इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं- अपनत्व का अभाव, द्वेष व घृणा की भावना, घनिष्ठता की कमी और उदासीन या निषेधात्मक दृष्टिकोण।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में समनर का नाम और बाह्य समूह की चार विशेषताओं को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से बताना आवश्यक है।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. समूह-निर्माण के लिए कम-से-कम कितने व्यक्तियों (सदस्यों) का होना आवश्यक उत्तरः समूह-निर्माण के लिए कम-से-कम दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना आवश्यक
Answer: समूह-निर्माण के लिए कम-से-कम दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना आवश्यक है।
In simple words: समूह बनाने के लिए न्यूनतम दो लोगों का होना जरूरी है।
🎯 Exam Tip: यह एक सीधा सवाल है; बस न्यूनतम संख्या का सटीक उल्लेख करें।
Question 2. “भीड़ को जिधर चाहें उधर भगाकर ले जाया जा सकता है।” यह कथन किसका है?
Answer: यह कथन रस्किन का है।
In simple words: यह प्रसिद्ध कथन रस्किन (Ruskin) द्वारा दिया गया था, जो भीड़ की दिशाहीन प्रकृति को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में विचारक के नाम को सही ढंग से याद रखना और उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. 'समूह मन के सिद्धान्त (Group-mind Theory) के प्रतिपादक कौन हैं ?
Answer: 'समूह मन के सिद्धान्त' (Group-mind Theory) के प्रतिपादक मैक्डूगल हैं।
In simple words: समूह मन के सिद्धान्त को मैक्डूगल ने प्रतिपादित किया था।
🎯 Exam Tip: सिद्धान्तों और उनके प्रतिपादकों के नाम सही-सही याद रखें।
Question 4. सन्दर्भ समूह की अवधारणा किस समाजशास्त्री से सम्बन्धित है ?
Answer: सन्दर्भ समूह की अवधारणा रॉबर्ट के० मर्टन से सम्बन्धित है।
In simple words: सन्दर्भ समूह की अवधारणा समाजशास्त्री रॉबर्ट के. मर्टन ने दी है।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रीय अवधारणाओं को उनके संबंधित विचारकों से जोड़कर याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. क्षेत्रीय समूह की अवधारणा किस समाजशास्त्री से सम्बन्धित है ?
Answer: क्षेत्रीय समूह की अवधारणा मैकाइवर से सम्बन्धित है।
In simple words: क्षेत्रीय समूह की अवधारणा मैकाइवर द्वारा प्रस्तुत की गई थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के समूहों और उनसे जुड़े समाजशास्त्रियों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. अन्तःसमूह किसे कहते हैं? इसके दो उदाहरण भी दीजिए।
Answer: जिस समूह के सदस्यों में 'हम' की भावना पायी जाती है, उसे अन्तः समूह कहते हैं 'परिवार' एवं 'कक्षा' अन्तः समूह के उदाहरण हैं।
In simple words: अन्तःसमूह वह समूह है जिसमें सदस्य 'हम' की भावना साझा करते हैं, जैसे परिवार और कक्षा।
🎯 Exam Tip: अन्तःसमूह की परिभाषा में 'हम' की भावना को प्रमुखता दें और सही उदाहरणों का उल्लेख करें।
Question 7. बाह्य समूह किसे कहते हैं? इसके दो उदाहरण भी दीजिए।
Answer: जिस समूह के हम सदस्य नहीं होते और जिसके प्रति 'हम' की भावना नहीं पायी जाती, वह हमारे लिए बाह्य समूह होता है। राजनीतिक एवं श्रमिक संगठन इसके उदाहरण हैं।
In simple words: बाह्य समूह वह होता है जिसके हम सदस्य नहीं होते और जिसके प्रति 'हम' की भावना नहीं होती, जैसे राजनीतिक दल या श्रमिक संगठन।
🎯 Exam Tip: बाह्य समूह की परिभाषा में 'हम' की भावना के अभाव पर जोर दें और उपयुक्त उदाहरणों से समझाएं।
Question 8. फोकवेज़ (Folkways) नामक पुस्तक के लेखक का नाम बताइए ।
Answer: 'फोकवेज़' नामक पुस्तक के लेखक अमेरिकी समाजशास्त्री समनर हैं।
In simple words: 'फोकवेज़' पुस्तक डब्ल्यू. जी. समनर ने लिखी है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रीय पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम याद रखना आवश्यक है।
Question 9. अन्तःसमूह तथा बाह्य समूह की अवधारणा किसने दी ?
Answer: अन्तः समूह तथा बाह्य समूह की अवधारणा समनर ने दी।
In simple words: अन्तःसमूह और बाह्य समूह की अवधारणा समनर ने प्रस्तुत की थी।
🎯 Exam Tip: इस मौलिक वर्गीकरण को समनर के नाम से जोड़कर याद रखें।
Question 10. प्राथमिक समूह की अवधारणा का उल्लेख करने वाले विद्वान का नाम बताइए । या प्राथमिक समूह की अवधारणा किसने की है?
Answer: प्राथमिक समूह की अवधारणा का उल्लेख करने वाले विद्वान् का नाम है-सी० एच० कूले।
In simple words: प्राथमिक समूह की अवधारणा चार्ल्स एच. कूले द्वारा दी गई थी।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह की अवधारणा के जनक चार्ल्स एच. कूले का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 11. किन्हीं चार प्राथमिक समूहों के नाम बताइए ।
Answer: चार प्राथमिक समूह हैं-परिवार, पड़ोस, मित्रमण्डली एवं क्रीडा समूह।
In simple words: परिवार, पड़ोस, मित्र-मण्डली और खेल समूह प्राथमिक समूह के कुछ उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूहों के सामान्य और स्पष्ट उदाहरणों को याद रखें।
Question 12. प्राथमिक समूह के दो उदाहरण तथा दो लक्षण बताइए । या प्राथमिक समूह के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: परिवार एवं बच्चों के खेल समूह प्राथमिक समूह के उत्तम उदाहरण हैं। प्राथमिक समूह के दो मुख्य लक्षण हैं-भावनात्मक लगाव तथा निकट सहयोगी सम्बन्ध।
In simple words: परिवार और बच्चों के खेल समूह प्राथमिक समूह के उदाहरण हैं, जिनके मुख्य लक्षण भावनात्मक लगाव और निकट सहयोग हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह के उदाहरणों के साथ उसके दो प्रमुख लक्षणों को संक्षिप्त में प्रस्तुत करें।
Question 13. द्वितीयक समूह के दो उदाहरण देते हुए उसके दो लक्षण भी बताइए । या द्वितीयक समूह के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: द्वितीयक समूह के दो उदाहरण हैं-सेना तथा विश्वविद्यालय। प्रतियोगी सम्बन्ध तथा अन्तःक्रिया में घनिष्ठता का अभाव इसके लक्षण हैं।
In simple words: सेना और विश्वविद्यालय द्वितीयक समूह के उदाहरण हैं, जिनकी विशेषताएँ प्रतियोगी सम्बन्ध और घनिष्ठता का अभाव हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समूह के उदाहरणों के साथ उसके दो प्रमुख लक्षणों को संक्षिप्त में प्रस्तुत करें, जो उनकी औपचारिक प्रकृति को दर्शाते हों।
Question 14. क्या छात्र-संघ द्वितीयक समूह है ? हाँ/नहीं में उत्तरः दीजिए।
Answer: हाँ।
In simple words: छात्र-संघ एक द्वितीयक समूह है क्योंकि इसका गठन विशिष्ट उद्देश्यों के लिए होता है और सम्बन्ध औपचारिक होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समूहों की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर दें।
Question 15. द्वितीयक समूह में किस प्रकार के सम्बन्धों की प्रधानता पायी जाती है ?
Answer: द्वितीयक समूह में औपचारिक सम्बन्धों की प्रधानता पायी जाती है।
In simple words: द्वितीयक समूहों में सम्बन्ध व्यक्तिगत न होकर औपचारिक और विशिष्ट नियमों पर आधारित होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समूह की औपचारिक प्रकृति पर जोर दें, क्योंकि यह प्राथमिक समूह से इसका मुख्य अंतर है।
Question 16. किसने द्वितीयक समूह को प्राथमिक समूह के विपरीतार्थक समूह के रूप में परिभाषित किया?
Answer: सी० एच० कूले ने।
In simple words: चार्ल्स एच. कूले ने द्वितीयक समूह को प्राथमिक समूह के विपरीत परिभाषित किया था।
🎯 Exam Tip: कूले के प्राथमिक समूह की अवधारणा को याद रखें और समझें कि द्वितीयक समूह को उसके विपरीत के रूप में उन्होंने ही देखा था।
Question 17. सामूहिक प्रतिनिधान की अवधारणा किसकी है?
Answer: दुर्चीम महोदय की।।
In simple words: सामूहिक प्रतिनिधान की अवधारणा दुर्खीम ने प्रस्तुत की थी।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र में अवधारणाओं को उनके संबंधित विचारकों से जोड़ना हमेशा महत्वपूर्ण होता है।
Question 18. सकारात्मक एवं नकारात्मक समूह की अवधारणा किसने प्रतिपादित की थी ?
Answer: सकारात्मक एवं नकारात्मक समूह की अवधारणा न्यू कॉम्ब ने प्रतिपादित की थी।
In simple words: सकारात्मक और नकारात्मक समूहों की अवधारणा न्यू कॉम्ब द्वारा विकसित की गई थी।
🎯 Exam Tip: इस विशिष्ट अवधारणा को न्यू कॉम्ब के नाम से जोड़कर याद रखें।
Question 19. किस विद्वान ने समूहों को 'औपचारिक' एवं 'अनौपचारिक' में वर्गीकृत किया है ?
Answer: बोगास नामक विद्वान् ने समूहों को औपचारिक एवं 'अनौपचारिक' में वर्गीकृत किया है।
In simple words: बोगास ने समूहों को औपचारिक और अनौपचारिक वर्गों में विभाजित किया था।
🎯 Exam Tip: औपचारिक और अनौपचारिक समूहों के वर्गीकरण को बोगास से संबंधित करें।
Question 20. द्वितीयक समूह की परिभाषा दो उपयुक्त उदाहरणों के साथ दीजिए। या द्वितीयक समूह के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: परिभाषा-वे समूह जो आकार में बड़े होते हैं, जिसके सदस्यों में घनिष्ठता का अभाव होता है, जिनमें अवैयक्तिक सम्बन्ध पाए जाते हैं तथा औपचारिक सम्बन्धों के कारण हम की भावना का प्रायः अभाव होता है, द्वितीयक समूह कहलाते हैं उदाहरण-महाविद्यालय, श्रमिक संघ, राष्ट्र, नगर व व्यावसायिक संघ आदि।
In simple words: द्वितीयक समूह वे बड़े समूह हैं जहाँ सदस्य घनिष्ठता के बजाय औपचारिक और अवैयक्तिक सम्बन्ध साझा करते हैं, जैसे महाविद्यालय या श्रमिक संघ।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समूह की परिभाषा में उसके बड़े आकार, अवैयक्तिक संबंधों और औपचारिक प्रकृति को उजागर करें, साथ ही सही उदाहरण दें।
Question 21. समूहों के दो प्रकार क्या हैं?
Answer:
• अन्तः समूह तथा
• बाह्य समूह।
In simple words: समनर के अनुसार, समूहों को मुख्यतः दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है: अन्तःसमूह और बाह्य समूह।
🎯 Exam Tip: समूहों के दो मुख्य प्रकारों, अन्तःसमूह और बाह्य समूह, को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 22. सोशल रिसर्च पुस्तक के लेखक का नाम लिखिए।
Answer: सोशल रिसर्च पुस्तक के लेखक का नाम जॉर्ज लुण्डबर्ग है।
In simple words: 'सोशल रिसर्च' पुस्तक जॉर्ज लुण्डबर्ग द्वारा लिखी गई है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण समाजशास्त्रीय कृतियों के लेखकों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
Question 23. “समाज वहीं होता है जहाँ जीवन होता है।” यह कथन किसने कहा है?
Answer: यह कथन मैकाइवर ने है।
In simple words: यह कथन मैकाइवर का है, जो समाज को गतिशील और जीवित अस्तित्व के रूप में दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध कथनों को उनके विचारकों से जोड़कर याद रखें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. समूह के लिए आवश्यक है
(क) दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना।
(ख) दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सामाजिक चेतना का होना
(ग) अधिक व्यक्तियों का एकत्र होना
(घ) व्यक्तियों के बीच संचारविहीनता का होना
Answer: (क) दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना।
In simple words: किसी भी समूह के निर्माण के लिए न्यूनतम दो या अधिक व्यक्तियों का भौतिक रूप से उपस्थित होना आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: समूह की मौलिक शर्त न्यूनतम सदस्यों की संख्या है, इसे याद रखें।
Question 2. निम्नलिखित में से कौन-सा एक अस्थायी समूह नहीं है ?
(क) भीड़
(ख) परिवार
(ग) श्रोतागण
(घ) जनता
Answer: (ख) परिवार
In simple words: परिवार एक स्थायी समूह है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है, जबकि भीड़, श्रोतागण और जनता अस्थायी होते हैं।
🎯 Exam Tip: अस्थायी और स्थायी समूहों के बीच के अंतर को समझें, परिवार एक सार्वभौमिक स्थायी सामाजिक इकाई है।
Question 3. अन्तःसमूह तथा बाह्य समूह की अवधारणाएँ किस समाजशास्त्री से सम्बन्धित हैं? या बाह्य समूह की अवधारणा को किसने दिया ?
(क) चार्ल्स कूले ने
(ख) समनर ने
(ग) रॉबर्ट मर्टन ने
(घ) लुण्डबर्ग ने
Answer: (ख) समनर ने
In simple words: अन्तःसमूह और बाह्य समूह की अवधारणा विलियम ग्राहम समनर ने अपनी पुस्तक 'फोकवेज़' में प्रस्तुत की थी।
🎯 Exam Tip: समनर का नाम अन्तःसमूह और बाह्य समूह की अवधारणाओं से जुड़ा है, इसे अवश्य याद रखें।
Question 4. निम्नलिखित पुस्तकों में से कूले की पुस्तक कौन-सी है?
(क) फोकवेज़ :
(ख) ए हैण्ड बुक ऑफ सोशियोलॉजी
(ग) सोशल ऑर्गेनाइजेशन
(घ) दे सोशल ऑर्डर
Answer: (ग) सोशल ऑर्गेनाइजेशन
In simple words: चार्ल्स एच. कूले की प्रसिद्ध पुस्तक 'सोशल ऑर्गेनाइजेशन' है, जिसमें उन्होंने प्राथमिक समूह की अवधारणा दी थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख समाजशास्त्रियों और उनकी मुख्य कृतियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. किस समूह का आकार अपेक्षाकृत छोटा है ?
(क) अन्तःसमूह
(ख) बाह्य समूह
(ग) भीड़
(घ) श्रोता समूह
Answer: (क) अन्तःसमूह
In simple words: अन्तःसमूह में सदस्यों की संख्या सीमित होती है, जिससे उनके बीच घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित हो पाते हैं, इसलिए इसका आकार अपेक्षाकृत छोटा होता है।
🎯 Exam Tip: अन्तःसमूह की विशेषताएँ याद रखें, जिनमें छोटा आकार और घनिष्ठ सम्बन्ध प्रमुख हैं।
Question 6. प्राथमिक समूह में सदस्यों के सम्बन्ध होते हैं ।
(क) भौतिक
(ख) नैतिक
(ग) वैयक्तिक
(घ) आर्थिक
Answer: (ग) वैयक्तिक
In simple words: प्राथमिक समूह में सदस्यों के सम्बन्ध अत्यधिक व्यक्तिगत और सीधे होते हैं, जहाँ वे एक-दूसरे को व्यक्तिगत स्तर पर जानते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह के संबंधों की प्रकृति वैयक्तिक और घनिष्ठ होती है, इसे ध्यान में रखें।
Question 7. निम्नलिखित में से कौन-सी प्राथमिक समूह की विशेषता नहीं है ?
(क) अनिवार्य सदस्यता
(ख) बड़ा आकार
(ग) शारीरिक समीपता
(घ) आर्थिक स्थिरता
Answer: (ख) बड़ा आकार
In simple words: प्राथमिक समूह की मुख्य विशेषता उसका छोटा आकार होता है, न कि बड़ा आकार।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह की विशेषताओं को अच्छी तरह से समझें ताकि उनकी अनुपस्थिति को पहचान सकें।
Question 8. प्राथमिक समूह की अवधारणा किसने दी है ?
(क) एल०एफ० वार्ड ।
(ख) सी०एच० कूले
(ग) मैकाइवर व पेज
(घ) ऑगस्त कॉम्टे
Answer: (ख) सी०एच० कूले
In simple words: प्राथमिक समूह की अवधारणा चार्ल्स एच. कूले ने प्रस्तुत की थी।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समूह की अवधारणा के प्रतिपादक का नाम सही-सही याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. सामाजिक सम्बन्धों के जाल को कहा गया है
(क) समुदाय
(ख) समिति
(ग) समूह
(घ) समाज
Answer: (घ) समाज
In simple words: समाज को सामाजिक सम्बन्धों के एक जटिल जाल के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो व्यक्तियों और समूहों के बीच अंतःक्रिया से बनता है।
🎯 Exam Tip: समाज की परिभाषा को उसकी व्यापकता और सामाजिक सम्बन्धों के जटिल ताने-बाने के रूप में समझें।
Question 10. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राथमिक समूह है ?
(क) व्यापार संघ
(ख) विद्यालय
(ग) पड़ोस
(घ) भीड़
Answer: (ग) पड़ोस
In simple words: प्राथमिक समूह छोटे, व्यक्तिगत और घनिष्ठ संबंधों पर आधारित होते हैं। पड़ोस एक ऐसा ही समूह है जहाँ लोग एक-दूसरे को जानते हैं और उनके संबंध अनौपचारिक होते हैं।
🎯 Exam Tip: Identify primary groups by characteristics like small size, direct interaction, and personal relationships for quick scoring.
Question 11. प्राथमिक समूह की सही विशेषता बताइए
(क) बड़ा आकार
(ख) औपचारिक नियन्त्रण
(ग) सदस्यों की भिन्नता
(घ) समान उद्देश्य
Answer: (घ) समान उद्देश्य
In simple words: प्राथमिक समूह के सदस्य एक-दूसरे से समान उद्देश्यों और हितों के कारण जुड़े होते हैं, जिससे उनमें एकता और सहयोग की भावना बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: Focus on core features like shared goals and informal control when defining primary group attributes.
Question 12. आकार में कौन-सा समूह छोटा होता है ?
(क) प्राथमिक समूह
(ख) द्वितीयक समूह
(ग) क्षेत्रीय समूह
(घ) तृतीयक समूह
Answer: (क) प्राथमिक समूह
In simple words: प्राथमिक समूह की पहचान उसका छोटा आकार है, जो सदस्यों के बीच घनिष्ठ और प्रत्यक्ष संबंधों को बढ़ावा देता है।
🎯 Exam Tip: Remember that smaller group size is a defining characteristic of primary groups, enabling close interactions.
Question 13. निम्नलिखित में कौन-सा प्राथमिक समूह है ?
(क) राजनीतिक दल
(ख) श्रमिक संघ
(ग) राष्ट्र
(घ) परिवार
Answer: (घ) परिवार
In simple words: परिवार एक प्राथमिक समूह है क्योंकि इसके सदस्य भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं, उनके बीच सीधे और व्यक्तिगत संबंध होते हैं।
🎯 Exam Tip: The family unit is the most classic example of a primary group due to its intimacy and strong emotional bonds.
Question 14. निम्नलिखित में से कौन प्राथमिक समूह नहीं है ?
(क) परिवार
(ख) आमने-सामने के सम्बन्ध
(ग) राज्य
(घ) पड़ोस
Answer: (ग) राज्य
In simple words: राज्य एक बड़ा और औपचारिक संगठन है जिसके सदस्यों के बीच व्यक्तिगत संबंध नहीं होते, इसलिए यह प्राथमिक समूह नहीं है।
🎯 Exam Tip: Differentiate primary from secondary groups by evaluating the scale of interaction and the nature of relationships (personal vs. impersonal).
Question 15. निम्नलिखित में कौन-सी विशेषता प्राथमिक समूह की है ?
(क) शारीरिक समीपता
(ख) सदस्यों की अधिक संख्या
(ग) बाह्य नियन्त्रण की भावना
(घ) अल्प अवधि
Answer: (क) शारीरिक समीपता
In simple words: प्राथमिक समूहों में शारीरिक समीपता महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह सदस्यों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत और घनिष्ठ संबंधों को संभव बनाती है।
🎯 Exam Tip: Proximity facilitates the direct interaction crucial for primary group formation and sustenance.
Question 16. सन्दर्भ समूह की अवधारणा किसने दी?
(क) पीटर बर्जर
(ख) आर० के० मर्टन
(ग) बोटोमोर
(घ) टायनबी
Answer: (ख) आर० के० मर्टन
In simple words: सन्दर्भ समूह की अवधारणा समाजशास्त्र में रॉबर्ट के० मर्टन द्वारा प्रस्तुत की गई थी, जो यह बताती है कि व्यक्ति अपने व्यवहारों को किस समूह के आदर्शों से निर्देशित करते हैं।
🎯 Exam Tip: Associate the "Reference Group" concept directly with sociologist R.K. Merton for accuracy in exams.
Question 17. निम्नांकित में से प्राथमिक समूह कौन है?
(क) छात्र संघ
(ख) पड़ोस
(ग) सिनेमाघर
(घ) बाजार
Answer: (ख) पड़ोस
In simple words: पड़ोस एक प्राथमिक समूह है जहाँ लोग एक-दूसरे को जानते हैं और अनौपचारिक रूप से बातचीत करते हैं, जिससे व्यक्तिगत संबंध बनते हैं।
🎯 Exam Tip: Consider the nature of interaction; informal and personal connections define primary groups like a neighborhood.
Question 18. निम्नलिखित में से कौन-सा द्वितीयक समूह है ?
(क) पड़ोस
(ख) नगर
(ग) क्लब
(घ) पति-पत्नी का समूह
Answer: (ख) नगर
In simple words: नगर एक द्वितीयक समूह का उदाहरण है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में लोग होते हैं जिनके बीच संबंध औपचारिक और अवैयक्तिक होते हैं।
🎯 Exam Tip: Large, impersonal, and functionally specific environments often represent secondary groups.
Question 19. द्वितीयक समूह के सदस्यों के पारस्परिक उत्तर-दायित्व की प्रकृति होती है
(क) स्थिर
(ख) सरल
(ग) जटिल
(घ) सीमित
Answer: (घ) सीमित
In simple words: द्वितीयक समूहों में सदस्यों के उत्तर-दायित्व आमतौर पर विशिष्ट कार्यों या उद्देश्यों तक सीमित होते हैं, न कि पूरे व्यक्तित्व तक।
🎯 Exam Tip: Remember that secondary group responsibilities are usually task-oriented and not deeply personal.
Question 20. निम्नलिखित में से कौन-सा द्वितीयक समूह है ?
(क) परिवार
(ख) क्रीडा समूह
(ग) राजनीतिक दल
(घ) पड़ोस
Answer: (ग) राजनीतिक दल
In simple words: राजनीतिक दल एक द्वितीयक समूह है क्योंकि इसका गठन विशिष्ट उद्देश्यों के लिए होता है और इसके सदस्यों के बीच संबंध औपचारिक होते हैं।
🎯 Exam Tip: Groups formed for specific goals, often with formal structures, are typically secondary groups.
Question 21. द्वितीयक समूह किससे सम्बन्धित है ? या द्वितीयक समूह को किसने प्रतिपादित किया?
(क) समनर से”
(ख) कूले से
(ग) ऑगबर्न से
(घ) पारसन्स से
Answer: (ख) कूले से
In simple words: चार्ल्स एच. कूले ने प्राथमिक समूहों की अवधारणा दी थी, और बाद में उनके विपरीत विशेषताओं वाले समूहों को द्वितीयक समूह के रूप में स्वीकार किया गया।
🎯 Exam Tip: While Cooley primarily defined primary groups, the concept of secondary groups evolved in contrast to his work, often attributed to him or developed in relation to his ideas.
Question 22. द्वितीयक समूह की विशेषता है।
(क) सादृश्य हित
(ख) आमने-सामने का सम्बन्ध
(ग) सामान्य हित
(घ) भौतिक निकटता
Answer: (क) सादृश्य हित
In simple words: द्वितीयक समूहों में सदस्य अक्सर समान हितों या उद्देश्यों के लिए एक साथ आते हैं, भले ही उनके व्यक्तिगत संबंध गहरे न हों।
🎯 Exam Tip: The shared, often specific, interests of members are a key characteristic of secondary groups.
Question 23. निम्नलिखित में से कौन द्वितीयक समूह की विशेषता नहीं है ?
(क) अल्प अवधि
(ख) छोटा आकार
(ग) सदस्यों का सीमित ज्ञान
(घ) 'मैं' की भावना
Answer: (ख) छोटा आकार
In simple words: द्वितीयक समूह आमतौर पर बड़े होते हैं, जबकि छोटा आकार प्राथमिक समूह की विशेषता है जो घनिष्ठ संबंधों को बढ़ावा देता है।
🎯 Exam Tip: A large size is typical for secondary groups, contrasting with the small size of primary groups.
Question 24. निम्नलिखित में द्वितीयक समूह कौन-सा है ?
(क) परिवार
(ख) मित्रमण्डली
(ग) पड़ोस
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (घ) इनमें से कोई नहीं
In simple words: परिवार, मित्रमण्डली और पड़ोस तीनों प्राथमिक समूह के उदाहरण हैं, इसलिए दिए गए विकल्पों में से कोई भी द्वितीयक समूह नहीं है।
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between primary and secondary group examples; the given options are all primary groups.
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