Get the most accurate UP Board Solutions for Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 12 Sociology. Our expert-created answers for Class 12 Sociology are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 5 परिवार UP Board Solutions for Class 12 Sociology
For Class 12 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Sociology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 5 परिवार solutions will improve your exam performance.
Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तीय प्रश्न (6 अंक)
Question 1. परिवार की परिभाषा दीजिए तथा परिवार के कार्यों की विवेचना कीजिए। या परिवार से क्या तात्पर्य है? इसके विभिन्न कार्यों को समझाइए ।
Answer:
परिवार का अर्थ एवं परिभाषा
'Family' शब्द का उद्गम लैटिन शब्द ‘Famulus' से हुआ है, जो एक ऐसे समूह के लिए प्रयुक्त हुआ है जिसमें माता-पिता, बच्चे, नौकर और दास हों । साधारण अर्थों में विवाहित जोड़े को परिवार की संज्ञा दी जाती है, किन्तु समाजशास्त्रीय दृष्टि से यह परिवार शब्द का सही उपयोग नहीं है। परिवार में पति-पत्नी एवं बच्चों का होना आवश्यक है। विभिन्न विद्वानों ने परिवार को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया है मैकाइवर एवं पेज के अनुसार, “परिवार पर्याप्त निश्चित यौन सम्बन्ध द्वारा परिभाषित एक ऐसा समूह है जो बच्चों के जनन एवं लालन-पालन की व्यवस्था करता है।” डॉ० दुबे के अनुसार, “परिवार में स्त्री और पुरुष दोनों को सदस्यता प्राप्त रहती है, उनमें कम-से-कम दो विपरीत लिंग के व्यक्तियों को यौन-सम्बन्धों की सामाजिक स्वीकृति रहती है और उनके संसर्ग से उत्पन्न सन्तान मिलकर परिवार का निर्माण करते हैं।" मरडॉक के अनुसार, “परिवार एक ऐसा सामाजिक समूह है जिसके लक्षण सामान्य निवास, आर्थिक सहयोग और जनन हैं। इसमें दो विषम लिंग के वयस्क शामिल होते हैं, जिनमें कम-से-कम दो व्यक्तियों में स्वीकृत यौन सम्बन्ध होता है और जिन वयस्क व्यक्तियों में यौन-सम्बन्ध होता है, उनके अपने या गोद लिये हुए एक या अधिक बच्चे होते हैं।” लूसी मेयर ने लिखा है, “परिवार एक गार्हस्थ्य समूह है, जिसमें माता-पिता और सन्तान साथ-साथ रहते हैं। इनके मूल रूप में दम्पती और उनकी सन्तान रहती हैं।” । संक्षेप में, हम परिवार को जैविकीय सम्बन्धों पर आधारित एक सामाजिक समूह के रूप में परिभाषित कर सकते हैं, जिसमें माता-पिता और बच्चे होते हैं तथा जिसका उद्देश्य अपने सदस्यों के लिए सामान्य निवास, आर्थिक सहयोग, यौन-सन्तुष्टि, प्रजनन, समाजीकरण, शिक्षण आदि की सुविधाएँ जुटाना है।परिवार के कार्य
परिवार समाज की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई है। परिवार में बच्चा जन्म लेता है और विकसित होकर एक आदर्श नागरिक बनता है। परिवार वह कार्यशाला है जिसमें आदर्श नागरिक गढ़े जाते हैं। रूसेक के शब्दों में, “परिवार व्यक्तित्व को पालना है।” परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है, जो मानव-जीवन के विकास में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह बालक को सीख देने वाली प्राथमिक पाठशाला है। परिवार एक ऐसा छोटा सामाजिक समूह है जो बालक में सामाजिक मूल्यों एवं रीति-रिवाजों के प्रति लगाव उत्पन्न करता है। समाज उच्छृंखल बालक को नियन्त्रित और सामाजिक बनाकर अपनी भूमिका निभाता है। परिवार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं 1. प्राणिशास्त्रीय कार्य-एक परिवार के द्वारा निम्नलिखित प्राणिशास्त्रीय कार्य सम्पादित किये जाते हैं
• यौन-इच्छाओं की पूर्ति-परिवार विवाह संस्था के माध्यम से युवक और युवतियों को दाम्पत्य सूत्र में बाँधकर यौन-इच्छाओं की सन्तुष्टि करने का अवसर जुटाता है। बिना वैवाहिक सूत्र में बंधे समाज यौन-सम्बन्धों को मान्यता नहीं देता। इस प्रकार यौन आवश्यकताओं की पूर्ति कराने के रूप में परिवार का कार्य बहुत महत्त्वपूर्ण होता है।
• सन्तानोत्पत्ति-सन्तान को जन्म देना परिवार का दूसरा महत्त्वपूर्ण प्राणिशास्त्रीय कार्य है। वैवाहिक जीवन में बँधकर दम्पती यौन-क्रियाओं के माध्यम से सन्तान को जन्म देते हैं। इस प्रकार उत्पन्न सन्तानों को समाज वैध मानता है।
• प्रजाति की निरन्तरता बनाये रखना-परिवार और समाज प्रजाति की निरन्तरता को बनाये रखता है। वैवाहिक दम्पती सन्तानों को जन्म देकर अपनी प्रजाति के प्रभाव को प्रवाहित रखते हैं। इस कृत्य से प्रजाति की निरन्तरता बनी रहती है।
2. शारीरिक कार्य-परिवार के द्वारा निम्नलिखित शारीरिक कार्य सम्पन्न किये जाते हैं
• शारीरिक सुरक्षा परिवार का एक महत्त्वपूर्ण कार्य सदस्यों को शारीरिक सुरक्षा प्रदान करना है। परिवार सदस्यों के चोटग्रस्त होने, दुर्घटना में अंग-भंग होने व गम्भीर रूप से बीमार होने पर उनकी सेवा-शुश्रूषा करता है।
• बच्चों का पालन-पोषण शारीरिक कार्य के निमित्त बच्चों के पालन-पोषण के रूप में परिवार का कार्य बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। परिवार उसका लालन पालन कर उसे समाज का आवश्यक और उपयोगी अंग बनाता है।
• आवास, भोजन एवं वस्त्रों की व्यवस्था-आवास, भोजन और वस्त्र मानवे की प्राथमिक आवश्यकताएँ हैं। परिवार अपने सदस्यों के लिए आवास, पुष्टिकारक भोजन तथा आरामदायक स्वच्छ वस्त्रों की व्यवस्था करता है। ये तीनों वस्तुएँ मानव के जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
3. आर्थिक कार्य-परिवार के द्वारा निम्नलिखित आर्थिक कार्य सम्पन्न किये जाते हैं
• उत्तरधिकारी का निर्धारण-परिवार की पुरानी पीढ़ी नयी पीढ़ी को सम्पत्ति और पदों का हस्तान्तरण करती है। प्रत्येक परिवार में वंशगत सम्पत्ति को आदान-प्रदान होता है। पितृसत्तात्मक परिवार में पिता की सम्पत्ति पर पुत्र का तथा मातृसत्तात्मक परिवार में सम्पत्ति पर अधिकार माता के सम्बन्ध से निर्धारित होता है।
• उत्पादक इकाई-उत्पादक इकाई के रूप में परिवार का कार्य महत्त्वपूर्ण माना जाता है। परिवार में कुटीर उद्योग चलाये जाते हैं। परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर वंशानुगत व्यवसाय कर परिवार के लिए आजीविका जुटाते हैं। इस प्रकार उत्पादक इकाई के रूप में परिवार का कार्य महत्त्वपूर्ण है।
• श्रम-विभाजन-परिवार श्रम-विभाजन का सरल रूप है। परिवार में स्त्री, पुरुष, बच्चों और वृद्धों के मध्य कार्यों का स्पष्ट विभाजन कर दिया जाता है। परिवार में बालकों के पालन-पोषण से लेकर बाह्य कार्य पुरुषों को सौंपे गये हैं। बच्चे पठन पाठन का कार्य करते हैं तथा घर के कार्यों में हाथ बंटाते हैं।
4. धार्मिक कार्य-परिवार अपने सदस्यों के लिए धार्मिक कार्य भी करता है। परिवार बच्चों को धर्म, आचरण, नैतिकता और परम्पराओं की शिक्षा देकर इस कार्य का निर्वाहन करता है। परिवार में रहकर ही बच्चा पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक, सदाचार और दुराचार में भेद करना सीखती है।
5. शिक्षण कार्य-परिवार को नागरिकता की प्रथम पाठशाला कहा जाता है। वह नवजात शिशु को विभिन्न सीखों द्वारा आदर्श नागरिक बनाता है। परिवार द्वारा प्रदत्त शिक्षाएँ व्यक्ति का जीवनभर मार्गदर्शन करती रहती हैं। परिवार बालक को प्रेम, त्याग, सहानुभूति, बलिदान और कर्तव्यपरायणता का पाठ पढ़ाकर उसे भावी जीवन के लिए प्रशिक्षित करता है। बच्चे के चरित्र-निर्माण में पारिवारिक शिक्षण की प्रमुख भूमिका रहती है।
6. मनोरंजनात्मक कार्य-परिवार अपने सदस्यों को स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करने का भी कार्य करता है। परिवार के सदस्य गप्पें लड़ाकर, बच्चों से खेलकर, चुटकुले सुनाकर व खेलकूद द्वारा मनोरंजन कर लेते हैं। समय-समय पर सम्पन्न होने वाले त्योहार और उत्सव भी परिवार में मनोरंजन प्रदान करते हैं। गीत, संगीत व लोकगीत आदि के द्वारा भी परिवार में भरपूर मनोरंजन किया जाता है।
7. मनोवैज्ञानिक कार्य-परिवार का एक महत्त्वपूर्ण कार्य अपने सदस्यों को मनोवैज्ञानिक सन्तुष्टि और सुरक्षा प्रदान करना है। परिवार में बच्चों को माँ की ममता, पिता का स्नेह और भाई-बहनों का प्यार मनोवैज्ञानिक सन्तोष प्रदान करता है। परिवार के मनोवैज्ञानिक कार्य बच्चे के मानसिक विकास और मस्तिष्क को विशाल बनाने में अभूतपूर्व सहयोग प्रदान करते हैं।
8. समाजीकरण का कार्य-परिवार समाजीकरण के अभिकरण के रूप में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवार बच्चे का समाजीकरण करके उसे समाज के अनुकूल बनाता है। बच्चा सांस्कृतिक परम्पराओं, रूढ़ियों, रीति-रिवाजों और समाज के अनुरूप व्यवहार करने का ज्ञान परिवार से ही ग्रहण करता है।
9. मानव अनुभवों का हस्तान्तरण-परिवार में नयी पीढ़ी के सदस्य अपने पूर्वजों द्वारा मापदण्ड और अनुभवों का लाभ उठाते हैं। परिवार की प्रत्येक पीढ़ी इन अनुभवों को अगली पीढ़ी को हस्तान्तरित करती है। नयी पीढ़ी परिस्थितियों के अनुकूल पुरानी मान्यताओं और मूल्यों में परिवर्तन लाती है व नये-नये आविष्कार द्वारा उन्हें सुधारकर नयी पीढ़ी तक पहुँचाती है। परिवार सामाजिक सभ्यता और संस्कृति के विकास में अभूतपूर्व योगदान देता है।
10. सामाजिक नियन्त्रण के कार्य-सामाजिक नियन्त्रण के क्षेत्र में परिवार के कार्य अद्वितीय हैं। परिवार व्यक्ति का समाजीकरण करके सामाजिक नियन्त्रण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सदस्यों का चरित्र-निर्माण कर उन्हें-आदर्श नागरिक के रूप में ढाल देता है। परिवार सदस्यों को शैक्षिक, मनोरंजनात्मक व विवाह सम्बन्धी सहयोग देकर सामाजिक नियन्त्रण के क्षेत्र में बहुत सहयोग देता है। यह एकता, भाईचारा, त्याग, सहानुभूति आदि गुणों का विकास कर व्यक्ति की दानवी शक्तियों का दमन कर नियन्त्रण को बढ़ावा देता है। इस प्रकार, परिवार के अभाव में सामाजिक नियन्त्रण करना दूभर कार्य होगा।
In simple words: परिवार एक बुनियादी सामाजिक इकाई है जो व्यक्तियों को जन्म देने, पालने, सुरक्षित रखने और सामाजिक बनाने का काम करती है। यह सदस्यों की शारीरिक, आर्थिक, धार्मिक और भावनात्मक जरूरतों को पूरा करता है, साथ ही सामाजिक नियंत्रण और सांस्कृतिक मूल्यों के हस्तांतरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: परिवार के कार्यों की विस्तृत विवेचना करते समय प्रत्येक कार्य को उदाहरण सहित स्पष्ट करना और समाज में उसके महत्व को रेखांकित करना उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।
Question 2. भारतीय समाज में संयुक्त परिवार का भविष्य क्या है? इसकी व्याख्या कीजिए ।
Answer:
भारतीय समाज में संयुक्त परिवार का भविष्य
संयुक्त परिवार में हो रहे परिवर्तनों के सन्दर्भ में यह प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि संयुक्त परिवार का क्या भविष्य है? क्या वास्तव में संयुक्त परिवार टूट रहा है? और, क्या संयुक्त परिवारों का स्थान पश्चिमी देशों में पाए जाने वाले एकाकी परिवार लेते जा रहे हैं? अधिकांश विद्वानों ने संयुक्त परिवार पर किए गए अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि यद्यपि समकालीन भारत में संयुक्त परिवार छिन्न-भिन्न होकर एकाकी परिवारों का रूप ले रहे हैं और हमारी सामाजिक संरचना में उनका कोई विशेष स्थान नहीं है, तथापि वास्तविकता यह है कि आज भी संयुक्त परिवार हमारे देश में विद्यमान हैं और इनके छिन्न-भिन्न होने के निकट भविष्य में कोई आसार नहीं हैं। कृषि व्यवसाय, हिन्दू आदर्श तथा मनोवृत्तियाँ और विचार अभी भी संयुक्त परिवारों के पक्ष में हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए संयुक्त परिवार के भविष्य के विषय में दो विचारधाराएँ सामने आती हैं- प्रथम, संयुक्त परिवार का भविष्य उज्ज्वल है तथा द्वितीय, संयुक्त परिवार का भविष्य अन्धकारमय है। प्रथम विचारधारा के समर्थक के०एम० कपाडिया हैं। उनके मतानुसार, संयुक्त परिवार ने अभी तक जिस कष्टमय समय को पार किया है, उसका भविष्य बुरा नहीं है।” उन्होंने आगे कहा है, “हिन्दू मनोवृत्तियाँ आज भी संयुक्त परिवार के पक्ष में हैं। इसी कारण विधियों द्वारा संयुक्त परिवार का विनाश अहिन्दू समझा जाता है, क्योंकि वह हिन्दू पारिवारिक मनोवृत्तियों की अवहेलना करता है। इनके द्वारा मुम्बई में किए गए सर्वेक्षण से भी हमें यह पता चलता है। कि बहुमत (57%) लोग आज भी संयुक्त परिवार के पक्ष में हैं। इस मत को अधिकांश विद्वान् स्वीकार करते हैं। वास्तव में, संयुक्त परिवार परिवर्तित परिस्थितियों के अनुकूल अपने स्वरूप को बदल रहा है और इसका विघटन नहीं हो रहा है। आई०पी० देसाई भी इस विचारधारा के समर्थक हैं। उनका कहना है, “आज भी अधिकतर लोग संयुक्त पारिवारिक व्यवस्था को अच्छा समझते हैं और उसकी उपयोगिता से प्रभावित हैं।" एम०एन० श्रीनिवास का विचार है। कि आधुनिक युग में भी संयुक्त परिवार की महत्ता बढ़ती जा रही है और संयुक्त परिवार की भावना केवल अलग रहने से समाप्त नहीं हो जाती। दूसरी विचारधारा के समर्थकों का कहना है कि संयुक्त परिवारों का विघटन हो रहा है और उसका भविष्य अन्धकारमय है। उदाहरणार्थ कोलण्डा के अनुसार, अधिकांश भारत में संयुक्त परिवारों की संख्या कम होती जा रही है तथा उसमें विघटन हो रहा है। टी०बी० बॉटोमोर ने 1951 ई० की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर इस बात को उल्लेख किया है कि संयुक्त परिवार में काफी परिवर्तन आए हैं। संयुक्त परिवार से पृथक् घर बसाने की प्रवृत्ति निरन्तर बढ़ती जा रही है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि यद्यपि संयुक्त परिवार का तीव्रता के साथ विघटन हो रहा है तथापि भारत में इसका समूल विनाश हो जाना स्वाभाविक दिखाई नहीं देता। एकाकी परिवारों की बढ़ती संख्या के आधार पर हम यह नहीं कह सकते कि आने वाले समय में भारतीय समाज में संयुक्त परिवार पूर्णतः विघटित हो जाएँगे ।
In simple words: भारतीय समाज में संयुक्त परिवार का भविष्य मिश्रित है; यह पूरी तरह से खत्म नहीं हो रहा, बल्कि बदल रहा है। जहाँ कुछ लोग इसे कमजोर होते देख रहे हैं, वहीं कई विद्वानों का मानना है कि यह बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढल रहा है और इसकी उपयोगिता अभी भी बनी हुई है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त परिवार के भविष्य पर प्रश्न का उत्तर देते समय, दोनों परस्पर विरोधी विचारों को प्रस्तुत करना और फिर एक संतुलित निष्कर्ष देना आवश्यक है, जो आपकी गहरी समझ को दर्शाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
Question 1. परिवार की स्थायी व अस्थायी प्रकृति से आप क्या समझते हैं ? परिवार के महत्त्व को रूसेक ने क्या कहकर समझाया है ?
Answer: परिवार एक समिति भी है और एक संस्था भी। पति-पत्नी और बच्चे मिलकर परिवाररूपी समिति का निर्माण करते हैं। समिति के रूप में परिवार अस्थायी है, क्योंकि तलाक, मृत्यु, पृथक्करण आदि के कारण परिवार की सदस्यता त्यागी जा सकती है, लेकिन एक संस्था के रूप में परिवार अमर है। परिवार के नियम और कार्य-प्रणाली मिलकर परिवाररूपी संस्था का निर्माण करते हैं। परिवार के सदस्यों के मरने या पृथक् हो जाने पर भी परिवार के नियम (अर्थात् संस्था) तो बने ही रहते हैं। इस रूप में परिवार अमर है, स्थायी है। ' परिवार के महत्त्व को प्राचीन काल से ही स्वीकार किया गया है। रूसेक कहते हैं, “परिवार व्यक्तित्व का पालना है।”
In simple words: परिवार एक समिति के रूप में अस्थायी होता है क्योंकि सदस्य बदल सकते हैं (जैसे तलाक या मृत्यु), लेकिन एक संस्था के रूप में यह स्थायी है क्योंकि इसके नियम और कार्यप्रणाली बने रहते हैं। रूसेक के अनुसार, परिवार व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: परिवार की दोहरी प्रकृति (समिति और संस्था) को स्पष्ट रूप से समझाना और रूसेक के कथन को उद्धृत करना उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।
Question 2. परिवार के प्राणिशास्त्रीय कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: परिवार के प्राणिशास्त्रीय कार्य (Biological Functions) निम्नलिखित हैं- 1. यौन-इच्छाओं की पूर्ति-मानव की आधारभूत आवश्यकताओं में यौन-सन्तुष्टि भी महत्त्वपूर्ण है। परिवार ही वह समूह है जहाँ समाज द्वारा स्वीकृत विधि से व्यक्ति अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति करता है। समाज में ऐसे स्त्री-पुरुषों को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता जो परिवार के बाहर अपनी यौन-इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। 2. सन्तानोत्पत्ति-मानव-समाज की निरन्तरता बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि मृत्यु को प्राप्त होने वाले सदस्यों का स्थान नवीन सदस्यों द्वारा भरा जाए। परिवार ही समाज के इस महत्त्वपूर्ण कार्य को करता है। परिवार के बाहर भी सन्तानोत्पत्ति हो सकती है, किन्तु कोई भी समाज अवैध सन्तानों को स्वीकार नहीं करता। 3. प्रजाति की निरन्तरता-परिवार ने ही मानव-जाति को अमर बनाया है। यही मृत्यु और अमरत्व का संगम-स्थल है। नयी पीढ़ी को जन्म देकर परिवार ने मानव की स्थिरता एवं निरन्तरता को बनाये रखा है। गुडे लिखते हैं, “यदि परिवार मानव की प्राणिशास्त्रीय आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था न करे तो समाज समाप्त हो जाएगा।
In simple words: परिवार के मुख्य प्राणिशास्त्रीय कार्य यौन-इच्छाओं की पूर्ति, सन्तानोत्पत्ति और मानव प्रजाति की निरंतरता बनाए रखना है। यह सामाजिक रूप से स्वीकृत यौन संबंधों के माध्यम से नए जीवन को जन्म देकर समाज के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है।
🎯 Exam Tip: प्राणिशास्त्रीय कार्यों को परिभाषित करते समय, प्रत्येक कार्य के सामाजिक और जैविक महत्व को स्पष्ट करना और यदि संभव हो, तो संबंधित समाजशास्त्री के विचारों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. परिवार नियोजन के प्रसार के लिए दो उपायों का वर्णन कीजिए।
Answer: परिवार नियोजन का अर्थ है। परिवार को उपलब्ध साधनों के अनुसार नियोजित करना। परिवार नियोजन का अर्थ मात्र जनसंख्या नियन्त्रण ही नहीं है, अपितु भारत में लोगों की आर्थिक दशा तथा देश के संसाधनों के परिप्रेक्ष्य में परिवार नियोजन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या नियन्त्रण से ही लगाया जाना उचित होगा। देश में फैली निर्धनता, बेकारी, भुखमरी, मूल्यवृद्धि जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए परिवार नियोजन को सर्वोपरि महत्ता देना नितान्त आवश्यक है। इसके दो उपाय निम्नवत् हैं 1. अज्ञानता व अन्धविश्वासों को दूर करना-भारत की अधिकांश जनसंख्या अशिक्षित (निरक्षर) है, जिसके कारण लोग अनेक अन्धविश्वासों एवं कुसंस्कारों से घिरे हुए हैं। वे समझते हैं कि बच्चे ईश्वरीय देन हैं। इस अज्ञानता के कारण परिवार नियोजन कार्यक्रम वांछित सफलता प्राप्त नहीं कर पा रहा है। हमें लोगों को शिक्षित करना होगा जिससे कि वे इस कार्यक्रम की महत्ता एवं लाभों को समझ सकें । 2. परिवार नियोजन अपनाने के लिए प्रोत्साहन देना-भारत के अधिकांश लोग निर्धन हैं तथा परिवार नियोजन की उनको अधिक आवश्यकता है। हमें उन्हें यह कार्यक्रम अपनाने के लिए उनके बीच जाकर इस कार्यक्रम की महत्ता बतानी होगी तथा उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करना होगा। उनको प्रोत्साहित करने के लिए उनके कुछ लाभों की घोषणा भी करनी चाहिए। जैसे-नौकरी में प्राथमिकता, नकद पुरस्कार या उनका सार्वजनिक अभिनन्दन आदि ।
In simple words: परिवार नियोजन का उद्देश्य संसाधनों के अनुसार परिवार को नियोजित करना और जनसंख्या नियंत्रण करना है। इसे सफल बनाने के लिए अज्ञानता और अंधविश्वास दूर करना तथा लोगों को प्रोत्साहन देना आवश्यक है, जैसे शिक्षा और आर्थिक लाभ।
🎯 Exam Tip: परिवार नियोजन के उपायों का वर्णन करते समय सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को जोड़ना तथा व्यावहारिक समाधानों को प्रस्तुत करना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
Question 4. संयुक्त परिवार की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। या संयुक्त परिवार की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer:
'संयुक्त परिवार की मुख्य विशेषताएँ
संयुक्त परिवार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं 1. अधिक पीढ़ियों के लोग-संयुक्त परिवार में एकाकी परिवार की अपेक्षा सामान्यतः तीन-चार पीढ़ियों के लोग निवास करते हैं; जैसे-दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, ताऊ-ताई, भाई-बहनें भाइयों की पत्नियाँ तथा उनके बच्चे । 2. संयुक्त निवास-संयुक्त परिवार की दूसरी विशेषता यह है कि इसके सभी सदस्य एक ही मकान में निवास करते हैं। इरावती कर्वे ने “एक ही छत के नीचे रहना” संयुक्त परिवार का मुख्य लक्षण बताया है। आई०पी० देसाई इस विशेषता को महत्व नहीं देते। वे इस पर बल देते हैं कि अगर सदस्य किसी कारणवश एक ही छत के नीचे नहीं रहते, परन्तु पारस्परिक अधिकारों एवं कर्तव्यों का पालन करते हैं तो उसे संयुक्त परिवार ही कहा जाता है। अधिकांश विद्वान संयुक्त परिवार की मुख्य विशेषता ही संयुक्त निवासस्थान बताते हैं। जब संयुक्त परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक हो जाती है तो कभी-कभी व्यक्तिगत परिवारों के लिए अलग अलग घर ले लिये जाते हैं, परन्तु भोजन इत्यादि की व्यवस्था 'बड़े घर में ही होती है। 3. संयुक्त भोजन-संयुक्त परिवार का तीसरा लक्षण सदस्यों का सम्मिलित रूप से भोजन करना है, अर्थात् सभी सदस्य एक ही रसोई या चूल्हे का बना खाना खाते हैं। कर्ता की पत्नी की देखरेख में परिवार की सभी महिलाएँ (लड़कियाँ तथा बहुएँ) रसोई का कार्य करती हैं। परम्परागत रूप से संयुक्त परिवारों में पहले पुरुष भोजन करते हैं तथा बाद में महिलाएँ। 4. सामान्य सम्पत्ति-परम्परागत रूप से संयुक्त परिवार का लक्षण सामान्य सम्पत्ति रहा है। संयुक्त परिवार उत्पादन एवं उपभोग दोनों का ही केन्द्र है; अतः न केवल सम्पत्ति पर सबका समान अधिकार होता है, अपितु एक सामान्य कोष में सभी सदस्य अपनी आय जमा करते हैं और इसी कोष से परिवार का खर्च चलता है। सभी सदस्यों पर समान रूप से बिना किसी भेद-भाव के खर्च होता है।
In simple words: संयुक्त परिवार कई पीढ़ियों के सदस्यों, जैसे दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, और उनके बच्चों को एक साथ रखता है। इसकी मुख्य विशेषताओं में एक ही छत के नीचे रहना, एक साथ भोजन करना और संपत्ति का साझा स्वामित्व शामिल है, जहाँ सभी सदस्य मिलकर आय अर्जित करते और व्यय करते हैं।
🎯 Exam Tip: संयुक्त परिवार की विशेषताओं का वर्णन करते समय, प्रत्येक विशेषता को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना और उसके सामाजिक महत्व को बताना महत्वपूर्ण है ताकि उत्तर व्यापक और सटीक हो।
Question 5. पारिवारिक विघटन के कोई चार कारण बताइए। या संयुक्त परिवार में आधुनिक परिवर्तनों का विश्लेषण कीजिए। या भारत में पारिवारिक विघटन के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए। या परिवार की संरचना एवं प्रकार्य में होने वाले परिवर्तन के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: पारिवारिक विघटन के चार मुख्य कारण निम्नलिखित हैं- 1. औद्योगीकरण एवं नगरीकरण-औद्योगीकरण के कारण लोग रोजगार की तलाश में औद्योगिक नगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। साथ-साथ नगरीय जीवन की चमक-दमक तथा आरामदायक जिन्दगी भी मनुष्यों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। ये दोनों ही पारिवारिक विघटन के मुख्य कारक हैं। 2. आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रति झुकाव-आज का नवयुवक वर्ग संयुक्त परिवार की आर्थिक व्यवस्था सहन नहीं कर पाता है। उसके विचारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक स्वतन्त्रता ने प्रमुख स्थान धारण कर लिया है। इस कारण भी पारिवारिक विघटन को बल मिल रही है। 3. द्वेष एवं कलह से मुक्ति-आज संयुक्त परिवारों का वातावरण बड़ा बोझिल हो गया है। सदस्यों के सम्बन्ध औपचारिक होते जा रहे हैं तथा आत्मीयता कम होती जा रही है। इस कारण भी पारिवारिक विघटन बढ़ रहा है। 4. व्यक्तिगत स्वतन्त्रता के प्रति आकर्षण-अधिक सदस्य होने के कारण संयुक्त परिवार में नवविवाहित दम्पती को भी कई बार स्वतन्त्र रूप से मिलना कठिन होता है। फिर यहाँ कर्ता का स्थान इतना अधिक प्रमुख होता है कि प्रत्येक सदस्य अपने को पराधीन अनुभव करता है। तथा स्वतन्त्रता के लिए लालायित रहता है। इस कारण भी पारिवारिक विघटन हो रहा है।
In simple words: पारिवारिक विघटन के मुख्य कारण औद्योगीकरण और शहरीकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता की इच्छा, पारिवारिक सदस्यों के बीच द्वेष और कलह, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रति बढ़ता आकर्षण हैं। ये कारक संयुक्त परिवार की पारंपरिक संरचना को कमजोर कर रहे हैं।
🎯 Exam Tip: पारिवारिक विघटन के कारणों को स्पष्ट करते समय, प्रत्येक कारण का सामाजिक-आर्थिक संदर्भ में विश्लेषण करना और उसके प्रभावों को संक्षिप्त में समझाना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. 'परिवार के बदलते स्वरूप में स्त्रियों की स्वतन्त्रता में वृद्धि' से आप क्या समझते हैं?
Answer: वर्तमान में परिवार की सम्पत्ति में स्त्रियों के साम्पत्तिक अधिकार बढ़े हैं। अब उन्हें नौकरी या व्यापार करने की भी स्वतन्त्रता है। इससे स्त्रियों की आर्थिक स्वतन्त्रता बढ़ी है। अब वे परिवार पर भार या पुरुषों की कृपा पर आश्रित नहीं हैं। इससे परिवार में स्त्रियों का महत्त्व बढ़ा है। स्त्री-शिक्षा के प्रसार ने सामाजिक चेतना लाने और स्त्रियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने में योगदान दिया है। अब वे सामाजिक जीवन से सम्बन्धित विभिन्न गतिविधियों में भाग लेती हैं। इससे पारिवारिक क्षेत्र में कहीं-कहीं भूमिका-संघर्ष की स्थिति भी पायी जाती है।
In simple words: परिवार के बदलते स्वरूप में स्त्रियों की स्वतंत्रता में वृद्धि हुई है क्योंकि उनके संपत्ति अधिकार बढ़े हैं, वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, और शिक्षा के कारण सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं, जिससे परिवार में उनका महत्व बढ़ा है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, स्त्री शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और संपत्ति अधिकारों को प्रमुख बिन्दुओं के रूप में उजागर करें और उनके सामाजिक प्रभाव को स्पष्ट करें।
Question 2. परिवार के बदलते स्वरूप में पिता के अधिकारों में क्या कमी आयी है तथा अन्य । सदस्यों का महत्त्व कैसे बढा है ?
Answer: पिता के अधिकारों में कमी तथा अन्य सदस्यों के महत्त्व का बढ़ना-अब परिवार अधिनायकवादी आदर्शों से प्रजातान्त्रिक आदर्शों की ओर बढ़ रहे हैं। अब पिता परिवार में निरंकुश शासक के रूप में नहीं रहा है। परिवार से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण निर्णय अब केवल पिता के द्वारा नहीं लिये जाते । अब ऐसे निर्णयों में पत्नी और बच्चों का महत्त्व भी बढ़ता जा रहा है। अब परिवार में स्त्री को भार-स्वरूप नहीं समझा जाता। अब बच्चों के प्रति भी माता-पिता के मनोभावों में परिवर्तन आया है। वे समझने लगे हैं कि बच्चों को मार-पीटकर या उनकी इच्छाओं का दमन करके उन्हें सही रास्ते पर नहीं लाया जा सकता। स्पष्ट है कि परिवार में स्त्री-सदस्यों एवं बच्चों का महत्त्व बढ़ा है।
In simple words: आधुनिक परिवार में पिता के पारंपरिक निरंकुश अधिकार कम हुए हैं, और निर्णय लेने में पत्नी व बच्चों का महत्व बढ़ा है। परिवार अब अधिक लोकतांत्रिक हो गया है, जहाँ स्त्रियों और बच्चों को अधिक सम्मान और स्वतंत्रता मिलती है।
🎯 Exam Tip: परिवार के लोकतांत्रिक स्वरूप की ओर बदलाव को रेखांकित करें और बताएं कि कैसे यह परिवर्तन निर्णय लेने की प्रक्रिया और सदस्यों के आपसी संबंधों को प्रभावित करता है।
Question 3. परिवार के शिक्षात्मक कार्य क्या हैं ?
Answer: परिवार ही बच्चे की प्रथम पाठशाला है, जहाँ उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है। परिवार के द्वारा दी गयी शिक्षाएँ जीवन-पर्यन्त उसका मार्गदर्शन करती रहती हैं। महापुरुषों की जीवनियाँ इस बात की साक्षी हैं कि उनके व्यक्तित्व-निर्माण में परिवार की भूमिका प्रमुख रही है। आदिम समय में जब आज की तरहे शिक्षण संस्थाएँ नहीं थीं तो परिवार ही शिक्षा की मुख्य संस्था थी। परिवार में ही बालक दया, स्नेह, प्रेम, सहानुभूति, त्याग, बलिदान, आज्ञापालन एवं कर्तव्यपरायणता का पाठ सीखता है।
In simple words: परिवार बच्चे की पहली पाठशाला है, जहाँ उन्हें दया, प्रेम, सहानुभूति, त्याग और आज्ञापालन जैसे नैतिक और सामाजिक मूल्य सिखाए जाते हैं। यह व्यक्ति के जीवन भर के मार्गदर्शन और व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: परिवार के शिक्षात्मक कार्यों का वर्णन करते समय नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व निर्माण पर उसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 4. परिवार के मनोवैज्ञानिक कार्य क्या हैं ?
Answer: मनोवैज्ञानिक कार्य-परिवार अपने सदस्यों को मानसिक सुरक्षा और सन्तोष प्रदान करता है। परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रेम, सहानुभूति और सद्भाव पाया जाता है। माता-पिता में से किसी की मृत्यु, तलाक, पृथक्करण, घर से अनुपस्थिति आदि के कारण बच्चों को स्नेह एवं मानसिक सुरक्षा नहीं मिल पाने पर उनके व्यक्तित्व का समुचित विकास नहीं हो पाता है।
In simple words: परिवार अपने सदस्यों को मानसिक सुरक्षा, संतोष और भावनात्मक सहारा प्रदान करता है। यह प्रेम, सहानुभूति और सद्भाव के माध्यम से बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक कार्यों को समझाते समय भावनात्मक समर्थन, सुरक्षा और मानसिक विकास पर परिवार के प्रभाव को मुख्य रूप से बताएं।
Question 5. परिवार के 'समाजीकरण का कार्य से क्या तात्पर्य है ? या व्यक्ति के समाजीकरण में परिवार की क्या भूमिका होती है ?
Answer: समाजीकरण का कार्य-परिवार में ही बच्चे का समाजीकरण प्रारम्भ होता है। समाजीकरण की प्रक्रिया से ही मानव जैविक प्राणी से सामाजिक प्राणी बनता है। कॉम्टे (Comte) नामक विख्यात विद्वान् का यह कथन है कि “परिवार सामाजिक जीवन की अमर पाठशाला है।” वास्तव में यह कथन सत्य है, क्योंकि वहीं रहकर उसे परिवार और समाज के रीति-रिवाजों, प्रथाओं, रूढ़ियों और संस्कृति का ज्ञान प्राप्त होता है। धीरे-धीरे बच्चा समाज की प्रकार्यात्मक इकाई बन जाता है। परिवार ही समाज की संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तान्तरित करता है। वास्तव में, परिवार एक ऐसी संस्था है जिसका समाज में अद्वितीय स्थान है। परिवार में ही ज्ञान का संचय, संरक्षण एवं वृद्धि होती है। परिवार ही शिशु की प्रथम पाठशाला है।
In simple words: परिवार समाजीकरण का प्राथमिक अभिकरण है, जहाँ बच्चा सामाजिक प्राणी बनता है और समाज के रीति-रिवाजों, प्रथाओं तथा संस्कृति को सीखता है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांस्कृतिक ज्ञान का हस्तांतरण कर व्यक्ति को समाज का एक अनुकूल सदस्य बनाता है।
🎯 Exam Tip: समाजीकरण को परिवार के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक के रूप में स्पष्ट करें और बताएं कि कैसे यह बच्चे को सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक मूल्यों को सिखाकर समाज का हिस्सा बनाता है।
Question 6. परिवार की दो विशेषताएँ लिखिए ।
Answer: परिवार अपनी जिन विशेषताओं के कारण सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व प्रभावशाली माना जाता है, वे निम्न हैं
1. छोटा व सीमित आकार-परिवार में जन्म लेने वाले व्यक्ति या विवाह सम्बन्धों में बँधे व्यक्ति या नातेदारी सम्बन्धों में आने वाले व्यक्ति ही परिवार के सदस्य माने जाते हैं। यही “कारण है कि परिवार की एक विशेषता उसका छोटा एवं सीमित आकार है।
2. स्थायी व अस्थायी प्रकृति-चूँकि परिवार का निर्माण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता है; अतः इसकी प्रकृति समिति की तरह अस्थायी होती है लेकिन परिवार का निर्माण करते हुए कुछ निश्चित नियमों व व्यवहार प्रणालियों का ध्यान रखा जाता है, 'जिनकी प्रकृति स्थायी होती है; अतः यह एक संस्था भी है।
In simple words: परिवार की दो मुख्य विशेषताएँ हैं: इसका आकार छोटा और सीमित होता है, जिसमें केवल निकट संबंधी ही होते हैं; और इसकी प्रकृति अस्थायी (समिति के रूप में सदस्यों के बदलने से) और स्थायी (संस्था के रूप में नियमों के बने रहने से) दोनों होती है।
🎯 Exam Tip: परिवार की विशेषताओं को संक्षेप में और स्पष्ट शब्दों में परिभाषित करें, विशेष रूप से उसकी दोहरी प्रकृति (स्थायी और अस्थायी) को समझाएं।
Question 7. परिवार के चार कार्य लिखिए।
Answer: परिवार के चार कार्य निम्नलिखित हैं
1. यौन इच्छाओं की पूर्ति-परिवार का पहला प्रमुख कार्य विवाह संख्या के माध्यम से युवक-युवतियों को दाम्पत्य सूत्र में बाँधकर यौन-इच्छाओं की सन्तुष्टि करने का अवसर जुटाना है।
2. सन्तानोत्पत्ति-सन्तान को जन्म देना परिवार का दूसरा प्रमुख कार्य है।
3. बच्चों का पालन-पोषण-परिवार बच्चों का पालनपोषण कर उन्हें समाज का आवश्यक और उपयोगी अंग बनाता है।
4. शिक्षण कार्य-परिवार को नागरिकता की प्रथम पाठशाला कहा जाता है। वह नवजात शिशु को विभिन्न सीखों द्वारा आदर्श नागरिक बनाता है।
In simple words: परिवार के चार मुख्य कार्य हैं: यौन इच्छाओं की संतुष्टि, बच्चों को जन्म देना, बच्चों का पालन-पोषण करना, और उन्हें सामाजिक व नैतिक शिक्षा देकर अच्छा नागरिक बनाना।
🎯 Exam Tip: परिवार के कार्यों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक कार्य के पीछे के सामाजिक महत्व को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 8. पारिवारिक विघटन से आप क्या समझते हैं? या पारिवारिक विघटन पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए ।
Answer: जब पति-पत्नी और परिवार के अन्य लोगों के सम्बन्धों में तनावे चरम सीमा पर पहुँच जाता है तो पारिवारिक विघटन आरम्भ हो जाता है। पारिवारिक विघटन में तलाक, अनुशासनहीनता, गृहकलह, पृथक्करण आदि समस्याओं का समावेश होता है। ये समस्याएँ परिवार के स्वरूप एवं गठन को ही बदल देती हैं। इसी स्थिति को पारिवारिक विघटन कहते हैं।
In simple words: पारिवारिक विघटन तब होता है जब परिवार के सदस्यों, विशेषकर पति-पत्नी के संबंधों में तनाव इतना बढ़ जाता है कि परिवार की एकता टूट जाती है। इसमें तलाक, गृहकलह और सदस्यों का अलग होना शामिल है, जिससे परिवार की संरचना में बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: पारिवारिक विघटन को परिभाषित करते समय, इसके मुख्य लक्षणों जैसे तलाक और गृहकलह को शामिल करें और बताएं कि यह परिवार की संरचना को कैसे प्रभावित करता है।
Question 9. परिवारों में वंशनाम की क्या व्यवस्था होती है ?
Answer: सभी परिवारों में बच्चों का नामकरण करने का कोई-न-कोई आधार होता है। इसे उपनाम या वंशनाम कहते हैं। पितृवंशीय परिवारों में यह नामकरण पिता के वंश के आधार पर तथा मातृवंशीय परिवारों में माता के वंश के आधार पर होता है।
In simple words: परिवारों में बच्चों को उपनाम या वंशनाम दिया जाता है, जो उनकी पहचान का आधार होता है। पितृवंशीय परिवारों में यह नाम पिता के वंश से और मातृवंशीय परिवारों में माता के वंश से निर्धारित होता है।
🎯 Exam Tip: वंशनाम की अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझाएं और पितृवंशीय व मातृवंशीय प्रणालियों में इसके अंतर को बताएं।
निश्चित उत्तररीय प्रश्न
Question 1. मैकाइवर एवं पेज ने परिवार की क्या परिभाषा दी है?
Answer: मैकाइवर एवं पेज के अनुसार, “परिवार पर्याप्त निश्चित यौन-सम्बन्धों द्वारा परिभाषित एक ऐसा समूह है जो बच्चों के जनन एवं लालन-पालन की व्यवस्था करता है।”
In simple words: मैकाइवर और पेज के अनुसार, परिवार एक ऐसा समूह है जो यौन संबंधों से परिभाषित होता है और बच्चों के जन्म तथा पालन-पोषण की व्यवस्था करता है।
🎯 Exam Tip: मैकाइवर एवं पेज की परिभाषा को सटीक रूप से उद्धृत करें, क्योंकि यह एक मानक परिभाषा है।
Question 2. परिवार को मानव स्वभाव की पोषिका किसने कहा है ?
Answer: चार्ल्स कूले ने परिवार को 'मानव स्वभाव की पोषिका' कहा है।
In simple words: चार्ल्स कूले ने परिवार को 'मानव स्वभाव की पोषिका' कहा, जिसका अर्थ है कि परिवार ही मनुष्य के मूलभूत स्वभाव और व्यक्तित्व को आकार देता है।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों के प्रमुख कथनों को याद रखना और उन्हें सही रूप से उद्धृत करना अंक दिलाने में सहायक होता है।
Question 3. परिवार व्यक्तित्व का पालना है।' यह कथन किसका है ?
Answer: यह कथन रूसेक नामक विद्वान् का है।
In simple words: 'परिवार व्यक्तित्व का पालना है' यह कथन रूसेक का है, जिसका अर्थ है कि परिवार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास और पोषण में आधारभूत भूमिका निभाता है।
🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र में महत्वपूर्ण परिभाषाओं और कथनों को उनके प्रणेताओं के साथ याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी होता है।
Question 4. संयुक्त परिवार से क्या तात्पर्य है ?
Answer: जिस परिवार में कई पीढ़ियों के सदस्य सामान्य भोजन, आवास और सामान्य कोष से सम्बन्धित रहते हैं, उसे संयुक्त परिवार कहते हैं।
In simple words: संयुक्त परिवार वह है जिसमें कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ रहते हैं, एक ही रसोई में भोजन करते हैं, एक ही घर में रहते हैं और अपनी आय को एक सामान्य कोष में रखते हैं।
🎯 Exam Tip: संयुक्त परिवार की परिभाषा में 'कई पीढ़ियों', 'सामान्य भोजन', 'आवास' और 'सामान्य कोष' जैसे मुख्य तत्वों को शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 5. “परिवार सामाजिक नियन्त्रण का साधन है।” क्या यह सत्य है ?
Answer: नहीं, क्योंकि परिवार सामाजिक नियन्त्रण का अभिकरण अथवा माध्यम है।
In simple words: यह सत्य नहीं है कि परिवार सामाजिक नियंत्रण का 'साधन' है; बल्कि यह सामाजिक नियंत्रण का एक 'अभिकरण' या 'माध्यम' है, जिसके द्वारा व्यक्ति समाज के मानदंडों को सीखता है।
🎯 Exam Tip: 'साधन' और 'अभिकरण/माध्यम' के बीच के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट करें, जो अवधारणा की सही समझ दर्शाता है।
Question 6. पितृसत्तात्मक परिवार किसे कहते हैं ?
Answer: ऐसा परिवार जिसमें सत्ता किसी पुरुष सदस्य में निहित होती है, जिसे परिवार का मुखिया या कर्ता कहा जाता है, उसे पितृसत्तात्मक परिवार कहते हैं।
In simple words: पितृसत्तात्मक परिवार वह होता है जिसमें परिवार की सत्ता और अधिकार किसी पुरुष सदस्य के पास होते हैं, जो परिवार का मुखिया या कर्ता कहलाता है।
🎯 Exam Tip: पितृसत्तात्मक परिवार की परिभाषा में 'सत्ता पुरुष सदस्य में निहित' और 'मुखिया या कर्ता' जैसे प्रमुख शब्दों को शामिल करें।
Question 7. मातृसत्तात्मक परिवार का कर्ता कौन होता है ?
Answer: मातृसत्तात्मक परिवार का कर्ता माता या बुजुर्ग महिला होती है।
In simple words: मातृसत्तात्मक परिवार में घर की मुखिया या कर्ता माता या परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला होती है, जिसके माध्यम से सत्ता का संचालन होता है।
🎯 Exam Tip: मातृसत्तात्मक परिवार में सत्ता किसके पास होती है, इसे स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 8. बहुपति-विवाही परिवार किसे कहते हैं ?
Answer: जिस परिवार में एक स्त्री अनेक पुरुषों की पत्नी होती है, उसे बहुपति-विवाही परिवार कहते हैं।
In simple words: बहुपति-विवाही परिवार एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ एक स्त्री एक ही समय में अनेक पुरुषों की पत्नी होती है।
🎯 Exam Tip: बहुपति-विवाही परिवार की परिभाषा में 'एक स्त्री' और 'अनेक पुरुषों की पत्नी' इन दो मुख्य तत्वों पर जोर दें।
Question 9. ऐसा परिवार जिसके सदस्य केवल पति, पत्नी तथा उसके अविवाहित बच्चे होते हैं, उसे ........... परिवार कहते हैं।
Answer: एकाकी ।
In simple words: ऐसा परिवार जिसमें केवल पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे होते हैं, उसे 'एकाकी परिवार' कहते हैं, यह सबसे छोटी परिवार इकाई है।
🎯 Exam Tip: एकाकी परिवार की संरचना को उसके मूलभूत सदस्यों-पति, पत्नी और अविवाहित बच्चों तक सीमित रखते हुए परिभाषित करें।
Question 10. परिवार के सहयोगी आधार में कमी आने का मुख्य कारण क्या है ?
Answer: परिवार में बढ़ती हुई व्यक्तिवादिता, परिवार के सहयोगी आधार में कमी आने का मुख्य कारण है।
In simple words: परिवार के सहयोगी आधार में कमी का मुख्य कारण सदस्यों में बढ़ती हुई व्यक्तिवादिता है, जहाँ लोग सामूहिक हितों के बजाय व्यक्तिगत इच्छाओं को प्राथमिकता देते हैं।
🎯 Exam Tip: व्यक्तिवादिता को सहयोगी आधार में कमी के प्रमुख कारण के रूप में स्पष्ट करें।
Question 11. जब विवाह के पश्चात पति, पत्नी के साथ उसके माता-पिता के निवासस्थान पर रहने लगता है, तो ऐसे परिवार को क्या कहते हैं ?
Answer: ऐसे परिवार को मातृस्थानीय परिवार कहते हैं।
In simple words: जब पति विवाह के बाद पत्नी के माता-पिता के घर रहने लगता है, तो इस प्रकार के परिवार को 'मातृस्थानीय परिवार' कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: मातृस्थानीय परिवार की अवधारणा को परिभाषित करते समय, निवास स्थान के नियम पर जोर दें।
Question 12. परिवार को शिशु की प्रथम पाठशाला क्यों कहते हैं ?
Answer: क्योंकि सर्वप्रथम बच्चे का शिक्षण परिवार में होता है, इसीलिए परिवार को शिशु की प्रथम पाठशाला कहते हैं।
In simple words: परिवार को शिशु की प्रथम पाठशाला इसलिए कहा जाता है क्योंकि बच्चे को सबसे पहले और बुनियादी शिक्षा, जैसे बोलना, व्यवहार करना और सामाजिक मूल्य, अपने परिवार से ही मिलती है।
🎯 Exam Tip: परिवार के प्राथमिक शिक्षा के महत्व को रेखांकित करें।
Question 13. नयी पीढी के आ जाने पर भी परिवार के सदस्यों की संख्या निश्चित सीमा तक ही क्यों बनी रहती है ?
Answer: पुरानी पीढ़ी वृद्ध होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाती है; अतः नयी पीढ़ी के आने पर भी सदस्यों की संख्या एक निश्चित सीमा तक बनी रहती है।
In simple words: परिवार में सदस्यों की संख्या एक निश्चित सीमा तक इसलिए बनी रहती है क्योंकि नई पीढ़ी के सदस्यों के जुड़ने के साथ-साथ पुरानी पीढ़ी के सदस्य (वृद्धावस्था या मृत्यु के कारण) घटते जाते हैं, जिससे संतुलन बना रहता है।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या संतुलन के प्राकृतिक चक्र को समझाएं जो परिवार के सदस्यों की संख्या को प्रभावित करता है।
Question 14. आधुनिक परिवार तथा संयुक्त परिवार कैसे भिन्न हैं?
Answer: आधुनिक परिवार का आकार छोटा होता जा रहा है, जबकि संयुक्त परिवार का आकार, अर्थात् सदस्य-संख्या, बड़ा होता है।
In simple words: आधुनिक परिवार मुख्य रूप से एकाकी होता है और इसका आकार छोटा होता है, जबकि संयुक्त परिवार कई पीढ़ियों के सदस्यों को समाहित करता है, इसलिए इसका आकार बड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: आधुनिक और संयुक्त परिवार के बीच मुख्य अंतर को आकार और सदस्य संख्या के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 15. परिवार एक समिति है या समुदाय?
Answer: परिवार एक समिति है।
In simple words: परिवार को एक समिति माना जाता है क्योंकि इसका निर्माण विशेष उद्देश्यों की पूर्ति के लिए होता है और इसके सदस्य विशिष्ट नियमों से बंधे होते हैं, हालांकि यह एक संस्था के रूप में भी कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: समिति और समुदाय के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें ताकि परिवार की प्रकृति को सही ढंग से वर्गीकृत किया जा सके।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. परिवार की विशेषता है
(क) सार्वभौमिकता
(ख) अकेलापन
(ग) भावात्मक सम्बन्ध
(घ) संघर्ष
Answer: (ग) भावात्मक सम्बन्ध
In simple words: परिवार की एक प्रमुख विशेषता सदस्यों के बीच गहरे भावनात्मक संबंध हैं, जो उन्हें एक-दूसरे से जोड़ते हैं और सुरक्षा व अपनत्व का अहसास कराते हैं।
🎯 Exam Tip: परिवार की मूलभूत विशेषताओं को पहचानना और समझना महत्वपूर्ण है, खासकर वे जो उसके सामाजिक और भावनात्मक आधार को दर्शाती हैं।
Question 2. मातृसत्तात्मक परिवार होता है, जिसमें
(क) विवाह के बाद पत्नी पति के घर जाकर रहती है।
(ख) एक स्त्री कई पतियों की पत्नी हो सकती है।
(ग) पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की स्थिति ऊँची होती है।
(घ) माता की पूजा की जाती है।
Answer: (ग) पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की स्थिति ऊँची होती है।
In simple words: मातृसत्तात्मक परिवार में स्त्रियों को पुरुषों की तुलना में अधिक अधिकार और उच्च सामाजिक स्थिति प्राप्त होती है, जहाँ वंश परंपरा और संपत्ति का निर्धारण भी माँ के नाम से होता है।
🎯 Exam Tip: मातृसत्तात्मक परिवार की मुख्य पहचान सत्ता संरचना और लिंग भूमिकाओं के संदर्भ में स्त्रियों की उच्च स्थिति होती है, न कि केवल पूजा-पाठ से।
Question 3. जिस परिवार में पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चों के अतिरिक्त अन्य कोई व्यक्ति नहीं रहता, उसे कहते हैं
(क) संयुक्त परिवार
(ख) केन्द्रीय परिवार या नाभिक परिवार
(ग) मातृसत्तात्मक परिवार
(घ) बहुपति-विवाही परिवार
Answer: (ख) केन्द्रीय परिवार या नाभिक परिवार
In simple words: ऐसा परिवार जिसमें केवल पति, पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे होते हैं, उसे केन्द्रीय परिवार या नाभिक परिवार कहा जाता है, जो सबसे छोटी परिवार इकाई होती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के परिवारों की संरचना को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है, विशेषकर एकाकी या नाभिकीय परिवार की परिभाषा।
Question 4. शास्त्रीय सिद्धान्त के अनुसार, परिवार का प्रारम्भिक स्वरूप था
(क) मातृसत्तात्मक
(ख) संयुक्त
(ग) पितृसत्तात्मक
(घ) मातृवंशीय
Answer: (ग) पितृसत्तात्मक
In simple words: शास्त्रीय समाजशास्त्रीय सिद्धांतों के अनुसार, परिवार का प्रारंभिक स्वरूप पितृसत्तात्मक माना जाता है, जहाँ पिता या पुरुष मुखिया होता था और वंश परंपरा पिता की ओर से चलती थी।
🎯 Exam Tip: परिवार के विकास के शास्त्रीय सिद्धांतों को याद रखें और समझें कि किन आधारों पर प्रारंभिक स्वरूप को पितृसत्तात्मक माना गया।
Question 5. ऐसे परिवार जिनमें सत्ता किसी पुरुष सदस्य में निहित होती है, जिसे परिवार का मुखिया या कर्ता कहा जाता है, को कहते हैं
(क) पितृवंशीय परिवार
(ख) पितृसत्तात्मक परिवार
(ग) पितृस्थानीय परिवार
(घ) संयुक्त परिवार
Answer: (ख) पितृसत्तात्मक परिवार
In simple words: जिस परिवार में निर्णय लेने की शक्ति और अधिकार किसी पुरुष सदस्य के हाथ में होते हैं और वही परिवार का मुखिया होता है, उसे पितृसत्तात्मक परिवार कहते हैं।
🎯 Exam Tip: 'पितृसत्तात्मक' शब्द का सीधा संबंध पुरुष प्रधान सत्ता संरचना से होता है, यह परिवार के मुखिया की लिंग पहचान को दर्शाता है।
Question 6. किस नियमानुसार परिवार की सम्पत्ति में परिवार के प्रत्येक सदस्य का अधिकार जन्मजात होता है?
(क) दायभाग
(ख) सपिण्ड
(ग) मिताक्षरा
(घ) प्रवर
Answer: (ग) मिताक्षरा
In simple words: मिताक्षरा प्रणाली के अनुसार, परिवार में किसी भी सदस्य का संपत्ति पर अधिकार जन्म के साथ ही स्थापित हो जाता है, जिससे वह पैतृक संपत्ति में सहभागी बन जाता है।
🎯 Exam Tip: मिताक्षरा और दायभाग जैसी कानूनी प्रणालियों के संपत्ति अधिकारों से संबंधित नियमों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 7. दायभाग की प्रथा भारत के किस राज्य में प्रचलित है ?
(क) हरियाणा में
(ख) पंजाब में
(ग) पश्चिम बंगाल में
(घ) बिहार में
Answer: (ग) पश्चिम बंगाल में
In simple words: दायभाग एक कानूनी प्रथा है जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में प्रचलित है, जहाँ पुत्रों को पिता की मृत्यु के बाद ही पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलता है।
🎯 Exam Tip: दायभाग प्रणाली के प्रचलन क्षेत्र को याद रखें और इसे मिताक्षरा से अलग करने वाले मुख्य बिंदु को समझें।
Question 8. परिवार में परिवर्तन हैं
(क) संरचनात्मक
(ख) प्रकार्यात्मक
(ग) संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक
In simple words: परिवार में परिवर्तन उसकी आंतरिक संरचना (जैसे एकाकी परिवार का बढ़ना) और उसके कार्यों (जैसे शिक्षा या मनोरंजन के कार्य अन्य संस्थाओं को हस्तांतरित होना) दोनों में देखे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: परिवार में होने वाले परिवर्तनों को 'संरचनात्मक' (आकार, सदस्यों की संख्या) और 'प्रकार्यात्मक' (कार्यों में बदलाव) दोनों आयामों में समझना आवश्यक है।
Free study material for Sociology
UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 5 परिवार prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Sociology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 5 परिवार
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Sociology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Sociology Class 12 Solved Papers
Using our Sociology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 5 परिवार to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Sociology are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sociology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sociology. You can access UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 5 परिवार in printable PDF format for offline study on any device.